Hindi Mokhtasar — Meryem 19:1 – Mü'minûn 23:118
Contents
- Meryem 19:1
- Meryem 19:2
- Meryem 19:3
- Meryem 19:4
- Meryem 19:5
- Meryem 19:6
- Meryem 19:7
- Meryem 19:8
- Meryem 19:9
- Meryem 19:10
- Meryem 19:11
- Meryem 19:12
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- Meryem 19:14
- Meryem 19:15
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Meryem 19:1
(काफ़, हा, या, ऐन, साद) इस प्रकार के अक्षरों के बारे में सूरतुल-बक़रा के आरंभ में बात की जा चुकी है।
Meryem 19:2
यह आपके पालनहार की अपने बंदे ज़करिय्या अलैहिस्सलाम पर दया की चर्चा है। हम यह कहानी आपके सामने उससे नसीहत (शिक्षा) प्राप्त करने के लिए बयान कर रहे हैं।
Meryem 19:3
जब उसने अपने पवित्र रब से, गुप्त रूप से, दुआ की, ताकि क़बूल होने की उम्मीद ज़्यादा हो।
Meryem 19:4
उसने कहा : ऐ मेरे रब! मेरा हाल यह है कि मेरी हड्डियाँ कमज़ोर हो गई हैं और मेरे सिर के अधिकतर बाल सफ़ेद हो चुके हैं, लेकिन मैं तुझसे माँगकर कभी निराश नहीं हुआ। बल्कि, जब भी तुझसे माँगा, तूने मेरी दुआ क़बूल की।
Meryem 19:5
मुझे अपने रिश्तेदारों के बारे में भय है कि कहीं वे दुनिया में व्यस्त हो जाने के कारण मेरी मृत्यु के बाद धर्म के प्रति अपनी ज़िम्मेदारियों का निर्वहन न कर सकें। और मेरी पत्नी (भी) बाँझ है, उसे औलाद नहीं होती। अतः तू अपने पास से मुझे एक सहायक पुत्र प्रदान कर।
Meryem 19:6
जो मुझसे नुबुव्वत का उत्तराधिकारी तथा याक़ूब अलैहिस्सलाम के वंशज से उसका वारिस हो और (ऐ मेरे रब!) तू उसे धर्म, नैतिकता और ज्ञान में पसंदीदा बना।
Meryem 19:7
अल्लाह ने उनकी दुआ क़बूल कर ली और उन्हें पुकारा : ऐ ज़करिय्या! हम तुम्हें एक प्रसन्न करने वाला समाचार सुनाते हैं। हमने तुम्हारी दुआ क़बूल कर ली है और तुम्हें एक बालक प्रदान किया है, जिसका नाम यहया है। हमने उससे पहले यह नाम किसी को नहीं दिया है।
Meryem 19:8
ज़करिय्या ने अल्लाह की शक्ति पर आश्चर्य करते हुए कहा : मेरे यहाँ किसी बालक का जन्म कैसे होगा, जबकि मेरी पत्नी बाँझ है, उसके औलाद नहीं होती और मैं बुढ़ापे की अंतिम सीमा को पहुँच चुका हूँ और मेरी हड्डियाँ कमज़ोर हो चुकी हैंॽ!
Meryem 19:9
फ़रिश्ते ने कहा : मामला ऐसा ही है जैसा आपने कहा कि आपकी पत्नी बच्चा जनने के योग्य नहीं है और आप बुढ़ापे की चरम सीमा को पहुँच चुके हैं तथा आपकी हड्डियाँ भी कमज़ोर हो चुकी हैं। परंतु आपके रब ने कहा है : तेरे रब का बाँझ माता और बुढ़ापे की चरम सीमा को पहुँचे हुए पिता से यहया को पैदा करना आसान है। हालाँकि मैंने (ऐ ज़करिय्या) तुझे इससे पहले पैदा किया है, जबकि तू कुछ भी चर्चा योग्य नहीं था; क्योंकि तेरा अस्तित्व ही नहीं था।
Meryem 19:10
ज़करिय्या अलैहिस्सलाम ने कहा : ऐ मेरे रब! मेरे लिए कोई निशानी निर्धारित कर दे जिससे मैं आश्वस्त हो सकूँ, जो मुझे फ़रिश्तों द्वारा दी गई शुभ सूचना की प्राप्ति को इंगित करती हो। अल्लाह ने फरमाया : तुम्हें जो ख़ुशख़बरी दी गई है, उसके प्राप्त होने की निशानी यह है कि तुम तीन दिनों तक लोगों से बात नहीं कर सकोगे, जबकि तुम्हें कोई बीमारी नहीं होगी, बल्कि तुम सही और स्वस्थ होगे।
Meryem 19:11
फिर ज़करिय्या अलैहिस्सलाम अपने उपासनागृह से निकलकर अपनी जाति के पास आए और उनसे, बात किए बिना, इशारे से बताया कि दिन के आरंभ और अंत में अल्लाह की पवित्रता का वर्णन करो।
Meryem 19:12
चुनाँचे उनके यहाँ यहया का जन्म हुआ। फिर जब उसकी आयु इतनी हो गई कि उसे संबोधित कर कुछ कहा जा सके, तो हमने उससे कहा : ऐ यहया! तौरात को पूरी मज़बूती से थाम लो। और हमने उसे बचपन ही से समझ, ज्ञान, गंभीरता और दृढ़ संकल्प प्रदान किया था।
Meryem 19:13
और हमने उसपर अपनी ओर से ख़ास दया की थी और उसे पापों से पवित्र रखा था तथा वह एक परहेज़गार व्यक्ति था, जो अल्लाह के आदेशों का पालन करता था और उसकी मना की हुई चीज़ों से दूर रहता था।
Meryem 19:14
तथा अपने माता-पिता का आज्ञाकारी, उनके प्रति कोमल स्वभाव और उनके साथ अच्छा व्यवहार करने वाला था। वह अपने पालनहार की आज्ञाकारिता या अपने माता-पिता के आज्ञापालन से अभिमान करने वाला नहीं था, और न ही वह अपने पालनहार का अथवा अपने माता-पिता का अवज्ञाकारी था।
Meryem 19:15
उसपर अल्लाह की ओर से शांति तथा उसकी ओर से उसके लिए सुरक्षा है जिस दिन वह पैदा हुआ, जिस दिन वह मर जाएगा और इस जीवन से निकल जाएगा और जिस दिन वह क़ियामत के दिन दोबारा जीवित होकर उठाया जाएगा। ये तीन स्थान सबसे भयावह हैं जिनसे एक व्यक्ति गुजरता है। अतः यदि वह इनमें सुरक्षित रहा, तो उसके लिए इनके अलावा में कोई डर नहीं है।
Meryem 19:16
तथा (ऐ रसूल!) आप अपने ऊपर उतारे गए क़ुरआन में मरयम अलैहस्सलाम के क़िस्से की चर्चा करें, जब वह अपने घर वालों से अलग होकर उनसे पूरब की ओर एक स्थान में अकेले रहने लगी थी।
Meryem 19:17
फिर उसने अपनी जाति की ओर से अपने लिए एक ओट (परदा) बना लिया, ताकि जब वह अपने पालनहार की इबादत कर रही हो, तो वे लोग उसे न देख सकें। फिर हमने उसके पास जिबरील अलैहिस्सलाम को भेजा, जो उसके पास पूरे तौर पर मानव का रूप धारण करके आया। तो वह डर गई कि कहीं वह कोई बुरा इरादा न रखता हो।
Meryem 19:18
जब उसने जिबरील को एक पूर्ण मनुष्य के रूप में अपनी ओर बढ़ते हुए देखा, तो बोली : (ऐ मानव!) यदि तू संयमी है और अल्लाह से डरता है, तो मैं तुझसे अत्यंत दयावान अल्लाह की शरण में आती हूँ कि तेरी तरफ से मुझे कोई बुराई पहुँचे।
Meryem 19:19
जिबरील अलैहिस्सलाम ने कहा : मैं इनसान नहीं हूँ। मैं तो तेरे रब की ओर से भेजा हुआ दूत हूँ। उसने मुझे तेरी ओर भेजा है, ताकि मैं तुझे एक अच्छा और पवित्र पुत्र प्रदान करूँ।
Meryem 19:20
मरयम ने हैरानी से कहा : मेरे यहाँ बालक कैसे हो सकता है, जबकि न तो पति और न ही कोई और मेरे पास आया है, और न मैं व्यभिचारिणी हूँ कि मेरे कोई बच्चा हो?
Meryem 19:21
जिबरील ने उनसे कहा : मामला ऐसा ही है जैसा तुमने उल्लेख किया है कि तुम्हें पति या किसी और ने नहीं छुआ, और न तुम व्यभिचारिणी हो। लेकिन, तेरे पवित्र पालनहार ने कहा है : पिता के बिना बच्चा पैदा करना मेरे लिए आसान है। साथ ही यह कि तुम्हें प्रदान किया जाने वाला बालक लोगों के लिए अल्लाह की शक्ति की बहुत बड़ी निशानी, तथा हमारी ओर से तेरे लिए और उसपर ईमान लाने वाले के लिए महान दया हो। तथा तेरे इस बालक का पैदा करना अल्लाह का पहले से निर्धारित किया हुआ, लौह-ए-महफ़ूज़ में लिखा हुआ फ़ैसला है।
Meryem 19:22
फिर फ़रिश्ते के फूँकने के पश्चात वह उस (बच्चे) के साथ गर्भवती हो गई और उस गर्भ को लिए हुए लोगों से अलग एक दूर स्थान पर चली गई।
Meryem 19:23
फिर प्रसव पीड़ा बढ़ी, जो उसे खजूर के एक तने के पास ले आई। तब मरयम अलैहस्सलाम कहने लगी : ऐ काश! मैं इस दिन से पहले ही मर गई होती, और मैं एक भूली-बिसरी चीज़ होती, ताकि मेरे बारे में कोई बुराई नहीं सोची जाती।
Meryem 19:24
तो ईसा अलैहिस्सलाम ने उसके पैरों के नीचे से उसे पुकारा : उदास मत हो! तुम्हारे पालनहार ने तुम्हारे नीचे पानी की नहर बहा दी है, जिससे तुम पानी पी सकती हो।
Meryem 19:25
तथा खजूर के पेड़ के तने को पकड़कर हिलाओ, तुम्हारे ऊपर ऐसी ताज़ा पकी हुई खजूरें गिरेंगी, जो उसी समय तोड़ी गई हों।
Meryem 19:26
अतः ताज़ा खजूरें खाओ, पानी पियो, अपने नवजात शिशु से दिल बहलाओ और शोक मत करो। फिर यदि कोई आदमी दिखाई दे और वह तुमसे बच्चे के बारे में पूछे, तो उससे कह दो : मैंने अपने पालनहार के लिए अपने आपपर चुप रहने को अनिवार्य कर लिया है। इसलिए आज मैं किसी इनसान से हरगिज़ बात नहीं करूँगी।
Meryem 19:27
फिर मरयम अपने बेटे को उठाए हुए अपनी जाति के पास आई, तो उसकी जाति के लोगों ने निंदा करते हुए उससे कहा : ऐ मरयम! तूने बिना पिता के पुत्र लाकर एक बड़ा निंदनीय काम किया है।
Meryem 19:28
ऐ हारून (जो एक सदाचारी व्यक्ति थे) जैसी इबादत करने वाली महिला! तेरा पिता कोई व्यभिचारी नहीं था, और न ही तेरी माता कोई व्यभिचारिणी थी। तुम तो एक पवित्र घराने से हो, जो सदाचार में प्रसिद्ध है। फिर तुम बिना पिता के पुत्र कैसे ले आईॽ!
Meryem 19:29
तब उसने अपने पुत्र ईसा (अलैहिस्सलाम) की ओर इशारा किया, जो गोद में था। तो उसकी जाति के लोगों ने आश्चर्य करते हुए उससे कहा : हम एक बच्चे से कैसे बात करें जबकि वह गोद में है?!
Meryem 19:30
ईसा (अलैहिस्सलाम) ने कहा : निःसंदेह मैं अल्लाह का बंदा हूँ, उसने मुझे इनजील प्रदान किया है और अपने नबियों में से एक नबी बनाया है।
Meryem 19:31
मैं जहाँ कहीं भी रहूँ, उसने मुझे लोगों के लिए बहुत लाभदायक बनाया है और जीवन भर मुझे नमाज़ अदा करते रहने तथा ज़कात देते रहने का आदेश दिया है।
Meryem 19:32
और उसने मुझे अपनी माँ के साथ अच्छा व्यवहार करने वाला बनाया है तथा अपने रब के आज्ञापालन से अभिमान करने वाला और उसकी अवज्ञा करने वाला नहीं बनाया है।
Meryem 19:33
तथा मुझे शैतान और उसके सहयोगियों से सुरक्षित रखा गया है जिस दिन मैं पैदा हुआ, जिस दिन मैं मरूँगा और जब क़ियामत के दिन दोबारा जीवित करके उठाया जाऊँगा। अतः मैं इन तीनों वहशतनाक स्थितियों में शैतान के प्रभाव से सुरक्षित रहा।
Meryem 19:34
इन सभी गुणों से विशिष्ट व्यक्ति ईसा बिन मरयम है। यही उसके बारे में सत्य बात है, न कि उन गुमराह लोगों की बात, जो उसके बारे में संदेह करते हैं और मतभेद में पड़े हुए हैं।
Meryem 19:35
यह अल्लाह की महिमा के योग्य नहीं है कि वह संतान बनाए। वह इससे बहुत पवित्र और पाक है। जब वह किसी काम का इरादा करता है, तो उसके लिए उस काम को केवल इतना कहना पर्याप्त होता है कि 'हो जा' और वह अनिवार्य रूप से हो जाता है। अतः जिसकी यह महिमा हो, वह बेटा बनाने से सर्वोच्च है।
Meryem 19:36
तथा पवित्र अल्लाह ही मेरा और तुम सब का रब है। अतः पूरी निष्ठा से केवल उसी की इबादत करो। यह जो मैंने तुम्हें बताया, वह सीधा मार्ग है, जो अल्लाह की प्रसन्नता की ओर ले जाता है।
Meryem 19:37
फिर लोग ईसा (अलैहिस्सलाम) के बारे में मतभेद के शिकार हो गए और अलग-अलग गिरोहों में बँट गए। उनमें से कुछ लोग उसपर ईमान लाए और कहा : वह एक रसूल है। जबकि कुछ लोगों ने उसपर विश्वास नहीं किया, जैसा कि यहूदियों का हाल रहा। इसी तरह कुछ संप्रदायों ने उसके बारे में अतिशयोक्ति की। उनमें से कुछ ने कहा कि वह अल्लाह है और कुछ ने कहा कि वह अल्लाह का बेटा है। सच्चाई यह है कि अल्लाह इन सारी बातों से ऊँचा है। अतः उसके बारे में मतभेद करने वालों के लिए क़ियामत के दिन बड़ा विनाश है, जिस दिन भयावह परिस्थितियों का सामना होगा, हिसाब-किताब के दौर से गुज़रना होगा और सज़ा भुगतनी होगी।
Meryem 19:38
उस दिन वे कितना सुनने वाले और कितना देखने वाले होंगे। वे उस समय सुनेंगे जब उन्हें सुनने से कोई फायदा नहीं होगा और उस समय देखेंगे जब देखने से उन्हें कोई लाभ नहीं होगा। परंतु अत्याचारी लोग दुनिया के जीवन में सीधे मार्ग से हटकर स्पष्ट गुमराही में पड़े हुए हैं। अतः वे आख़िरत के लिए कोई तैयारी नहीं करते यहाँ तक कि वह अचानक उन पर आ जाएगी और वे अपने अत्याचार ही में पड़े होंगे।
Meryem 19:39
तथा (ऐ रसूल!) आप लोगों को पछतावे के दिन से डराएँ, जिस दिन जब सहीफ़े लपेट दिए जाएँगे, लोगों का हिसाब कर दिया जाएगा और हर व्यक्ति अपने कर्मों के हवाले हो जाएगा, तो बुराई करने वाला अपनी बुराई पर पछताएगा और नेकी करने वाला और अधिक नेकियाँ न करने पर पछताएगा। जबकि वे दुनिया के जीवन में उसके धोखे में पड़े हुए हैं, आख़िरत से बेपरवाह हैं और क़ियामत के दिन पर ईमान नहीं लाते हैं।
Meryem 19:40
निश्चय हम ही प्राणियों के विनाश के बाद बाक़ी रहेंगे और धरती के तथा उसपर मौजूद सारी चीज़ों के वारिस होंगे। क्योंकि उनका विनाश हो जाएगा और उनके बाद हम ही बाक़ी रहेंगे और हम उनके मालिक होंगे और हम जैसे चाहेंगे उन्हें प्रयोग करेंगे। तथा क़ियामत के दिन सारे लोग हिसाब-किताब और बदले के लिए हमारी ही ओर लौटाए जाएँगे।
Meryem 19:41
(ऐ रसूल!) आपके ऊपर जो क़ुरआन उतारा गया है, उसमें इबराहीम अलैहिस्सलाम के वृत्तांत की चर्चा कीजिए। वास्तव में, वह बड़े सत्यवादी, अल्लाह की आयतों को सच मानने वाले और अल्लाह की ओर से भेजे हुए नबी थे।
Meryem 19:42
जब उन्होंने अपने पिता आज़र से कहा : ऐ मेरे पिता! आप अल्लाह को छोड़कर ऐसे बुत की पूजा क्यों करते हैं, जिसे यदि आप पुकारें, तो वह आपकी पुकार नहीं सुनता है; यदि आप उसकी पूजा करें, तो वह आपकी पूजा को नहीं देखता है, तथा वह न आपकी हानि को दूर करता है और न आपको कोई लाभ देता पहुँचाता हैॽ!
Meryem 19:43
हे मेरे पिता! निश्चय मेरे पास वह़्य के माध्यम से वह ज्ञान आया है, जो आपके पास नहीं आया। इसलिए आप मेरा अनुसरण करें, मैं आपका सीधे रास्ते पर मार्गदर्शन करूँगा।
Meryem 19:44
ऐ मेरे पिता! शैतान का अनुसरण करके उसकी पूजा न करें। निःसंदेह शैतान अत्यंत दयावान् अल्लाह का अवज्ञाकारी है। क्योंकि अल्लाह ने उसे आदम अलैहिस्सलाम के सामने सजदा करने का आदेश दिया था, लेकिन उसने सजदा नहीं किया।
Meryem 19:45
ऐ मेरे पिता! यदि इसी अविश्वास की अवस्था में आपकी मृत्यु हो गई, तो मुझे भय है कि कहीं आपको रहमान की ओर से कोई यातना न पहुँचे, फिर आप शैतान की दोस्ती के कारण यातना में उसके साथी बन जाएँ।
Meryem 19:46
आज़र ने अपने पुत्र इबराहीम अलैहिस्सलाम से कहा : ऐ इबराहीम! जिन बुतों की मैं पूजा करता हूँ, क्या तू उनसे विमुख हो रहा है? यदि तू मेरे बुतों को बुरा-भला कहने से बाज़ न आया, तो मैं तुझपर पत्थर बरसाऊँगा। तू लंबे समय के लिए मुझसे अलग हो जा, सो मुझसे बात न करना और न मेरे सामने आना।
Meryem 19:47
इबराहीम अलैहिस्सलाम ने अपने पिता से कहा : मेरी ओर से आपको सलाम है। मेरी ओर से आपको कोई कष्ट नहीं पहुँचेगा। मैं आपके लिए अपने रब से क्षमा और मार्गदर्शन माँगूँगा। निःसंदेह वह हमेशा से मुझ पर बहुत दयालु है।
Meryem 19:48
तथा मैं आप लोगों से और आप लोगों के उन पूज्यों से किनारा करता हूँ, जिन्हें आप अल्लाह के सिवा पूजते हैं और मैं केवल अपने अकेले पालनहार को पुकारता हूँ तथा उसके साथ किसी भी चीज़ को साझी नहीं बनाता। आशा है कि जब मैं उससे दुआ करूँगा, तो वह मेरी दुआ को नहीं ठुकराएगा, कि मैं उससे दुआ करके बेनसीब रहूँ।
Meryem 19:49
जब इबराहीम (अलैहिस्सलाम) ने उन्हें और उनके उन पूज्यों को छोड़ दिया, जिनकी वे अल्लाह के अलावा पूजा करते थे, तो हमने उसे उसके परिवार से वंचित होने की भरपाई की। इसलिए हमने उसे उसका पुत्र इसहाक़ तथा उसका पोता याक़ूब दिया और उनमें से प्रत्येक को हमने नबी बनाया।
Meryem 19:50
और हमने उन्हें अपनी दया से नुबुव्वत के साथ बहुत सारी भलाइयाँ प्रदान कीं और उनके लिए लोगों की ज़बानों पर हमेशा के लिए अच्छी प्रशंसा रख दी।
Meryem 19:51
तथा (ऐ रसूल!) आप अपने ऊपर उतारे गए क़ुरआन में मूसा (अलैहिस्सलाम) के वृत्तांत की चर्चा करें। निश्चय वह एक चुने हुए, मनोनीत व्यक्ति तथा रसूल एवं नबी थे।
Meryem 19:52
और हमने मूसा (अलैहिस्सलाम) को, उसके स्थान के हिसाब से (तूर) पहाड़ की दाहिनी ओर से पुकारा और उसे रहस्य की बात करने के लिए निकट कर लिया। चुनाँचे मूसा अलैहिस्सलाम को अल्लाह की बात सुनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
Meryem 19:53
और हमने (उसपर अपनी दया और अनुग्रह के कारण) उसे उसके भाई हारून अलैहिस्सलाम को नबी बनाकर दिया; जो दरअसल उसकी उस दुआ को स्वीकार करने के रूप में था जो उन्होंने अपने रब से माँगी थी।
Meryem 19:54
और (ऐ रसूल!) आपपर जो क़ुरआन उतारा गया है, उसमें इसमाईल (अलैहिस्सलाम) के वृत्तांत की चर्चा करें। निश्चय ही वह वचन का पक्का था, जब भी कोई वादा करता उसे ज़रूर पूरा करता था तथा वह रसूल एवं नबी था।
Meryem 19:55
वह अपने परिवार को नमाज़ स्थापित करने और ज़कात देने का आदेश देता था, तथा वह अपने पालनहार के निकट पसंदीदा था।
Meryem 19:56
तथा (ऐ रसूल!) आपपर जो क़ुरआन उतारा गया है, उसमें इदरीस (अलैहिस्सलाम) के वृत्तांत की चर्चा करें। वह बड़ा सत्यवादी और अपने रब की आयतों को सच मानने वाला था और अल्लाह के नबियों में से एक नबी था।
Meryem 19:57
और हमने उसे नुबुव्वत प्रदान करके उसकी चर्चा को ऊँचा कर दिया। इस प्रकार वह उच्च स्थान पर था।
Meryem 19:58
इस सूरत में ज़करिय्या अलैहिस्सलाम से शुरू होकर इदरीस अलैहिस्सलाम तक वर्णित लोग, वे हैं जिन्हें अल्लाह ने नुबुव्वत से सम्मानित किया, आदम अलैहिस्सलाम की संतान में से, तथा उन लोगों की संतान में से जिन्हें हमने नूह़ अलैहिस्सलाम के साथ नाव पर सवार किया, तथा इबराहीम और याक़ूब अलैहिमस्सलाम के वंशज में से, तथा उन लोगों में से जिन्हें हमने इस्लाम के मार्ग पर चलने का सामर्थ्य प्रदान किया तथा हमने उन्हें चुन लिया और उन्हें नबी बना दिया। इन लोगों का हाल यह था कि जब अल्लाह की आयतों को पढ़ते हुए सुनते, तो अल्लाह के डर से रोते हुए सजदे में गिर जाते थे।
Meryem 19:59
फिर अल्लाह के इन चुने हुए नबियों के बाद ऐसे बुरे और गुमराह अनुयायी पैदा हुए, जिन्होंने नमाज़ को नष्ट कर दिया और उसे अपेक्षित तरीक़े से नहीं अदा किया, तथा उनके मन में जिन पापों की इच्छा पैदा हुई, उन्हें कर डाले, यहाँ तक कि व्यभिचार जैसे पाप से भी उपेक्षा नहीं की। तो ऐसे लोग शीघ्र ही जहन्नम में बुराई और नाकामी (निराशा) का सामना करेंगे।
Meryem 19:60
किंतु जिसने अपनी कमियों और लापरवाही से तौबा कर ली, अल्लाह पर ईमान लाया और अच्छे कर्म किए, तो इन गुणों से सुसज्जित लोग जन्नत में प्रवेश करेंगे और उनके कर्मों के सवाब में थोड़ी-सी भी कमी नहीं की जाएगी।
Meryem 19:61
सदा निवास और स्थिरता की जन्नतों में, जिनका अत्यंत दयावान् अल्लाह ने अपने सदाचारी बंदों से (उनके) बिन देखे वादा किया है कि वह उन्हें उनके अंदर दाखिल करेगा। हालाँकि वे उन्हें देखे बिना ही उनपर ईमान ले आए, इसलिए अल्लाह का जन्नत का वादा (भले ही वह अदृश्य हो) अनिवार्य रूप से पूरा होकर रहेगा।
Meryem 19:62
वे उनके अंदर कोई व्यर्थ बात और अश्लील शब्द नहीं सुनेंगे। बल्कि आपस में एक-दूसरे को किया जाने वाला सलाम और फ़रिश्तों की ओर से उन्हें प्रस्तुत किया जाने वाला सलाम सुनेंगे और उनके अंदर उन्हें जो खाना वे चाहेंगे, सुबह-शाम मिलता रहेगा।
Meryem 19:63
इने विशेषताओं के साथ वर्णित यह जन्नत, वह है जिसका उत्तराधिकारी हम अपने उन बंदों को बनाएँगे, जो (हमारे) आदेशों का पालन करने वाले होंगे और (हमारी) मना की हुई चीज़ों से बचने वाले होंगे।
Meryem 19:64
और (ऐ जिबरील!) मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से कह दें : फ़रिश्ते स्वयं नहीं उतरते हैं। बल्कि वे अल्लाह की आज्ञा से उतरते हैं। अल्लाह ही का है जो कुछ हम आख़िरत के मामले से सामना करने वाले हैं, तथा जो हमने इस दुनिया के मामलों से पीछे छोड़ दिया है और जो कुछ इस दुनिया और आख़िरत के बीच है। तथा (ऐ रसूल!) आपका पालनहार कुछ भूलने वाला नहीं है।
Meryem 19:65
वह आकाशों तथा धरती का रचयिता, उन दोनों का मालिक और उनके मामले का प्रबंधक, तथा उन दोनों के बीच की चीज़ों का रचयिता, उनका मालिक तथा उनके मामले का प्रबंधक है। अतः केवल उसी की इबादत करो। क्योंकि वही इबादत का हक़दार है। तथा उसकी इबादत पर दृढ़ रहो। क्योंकि उसका कोई सदृश या समकक्ष नहीं है, जो इबादत में उसका साझीदार हो।
Meryem 19:66
मरने के बाद पुनर्जीवित करके उठाए जाने का इनकार करने वाला उपहास करते हुए कहता है : क्या जब मैं मर जाऊँगा, तो फिर से अपनी क़ब्र से जीवित करके निकाला जाऊँगा?! यह तो बड़ी दूर की बात है।
Meryem 19:67
क्या पुनः जीवित किए जाने का इनकार करने वाला यह व्यक्ति इस बात को याद नहीं करता कि हमने ही उसे इससे पहले पैदा किया, जबकि वह कुछ भी नहीं था?! यदि ऐसा करता, तो उसे पहली बार पैदा किए जाने से दूसरी बार पैदा किए जाने का प्रमाण मिल जाता। हालाँकि दूसरी बार पैदा करना कहीं अधिक आसान है।
Meryem 19:68
अतः (हे रसूल!) आपके पालनहार की क़सम! हम अवश्य ही उन्हें उनकी क़ब्रों से निकालकर ह़श्र के मैदान में एकत्र करेंगे तथा उनके साथ वे शैत़ान भी होंगे, जिन्होंने उनको गुमराह किया था। फिर हम उन्हें उनके घुटनों के बल अपमानजनक अवस्था में जहन्नम के दरवाज़ों पर ले जाएँगे।
Meryem 19:69
फिर हम हर पथभ्रष्ट समुदाय में से उसके सबसे बड़े अवज्ञाकारी व्यक्ति अर्थात् उसके सरगने को बड़ी सख़्ती से अवश्य खींच निकालेंगे।
Meryem 19:70
फिर हम उन लोगों को भली-भाँति जानते हैं, जो जहन्नम में प्रवेश करने तथा उसकी गर्मी और पीड़ा को झेलने के अधिक हक़दार हैं।
Meryem 19:71
और (ऐ लोगो!) तुममें से हर किसी को उस 'सिरात' (पुल) से गुज़रना है, जो जहन्नम के ऊपर बनाया जाएगा। इस पुल से गुज़रना अल्लाह का अटल निर्णय है। अतः उसके निर्णय को कोई टाल नहीं सकता।
Meryem 19:72
फिर इस पुल से गुज़रने के बाद हम उन लोगों को बचा लेंगे, जो अपने पालनहार से डरते हुए उसके आदेशों का पालन करते तथा उसकी मना की हुई चीज़ों से बचते थे। और हम अत्याचारियों को उनके घुटनों के बल गिरा हुआ छोड़ देंगे, वे वहाँ से भाग नहीं सकते।
Meryem 19:73
तथा जब लोगों के समक्ष हमारे रसूल पर अवतरित स्पष्ट आयतें पढ़ी जाती हैं, तो काफिर लोग ईमान वालों से कहते हैं : हमारे दोनों गिरोहों में से कौन निवास और आवास में सबसे अच्छा है, तथा किसकी मजलिस व सभा अधिक भव्य है; हमारे गिरोह की अथवा तुम्हारे गिरोह कीॽ!
Meryem 19:74
अपनी भौतिक श्रेष्ठता पर गर्व करने वाले इन काफ़िरों से पहले हम बहुत-सी जातियों को विनष्ट कर चुके हैं, जो धन-संपत्ति में इनसे बेहतर और अच्छी वेशभूषा और शारीरिक सुंदरता के कारण इनसे अच्छे दिखते थे।
Meryem 19:75
(ऐ रसूल!) आप कह दें : जो गुमराही में भटक रहा है, 'रहमान' उसे ढील देगा, ताकि वह गुमराही में और बढ़ जाए। यहाँ तक कि जब वे उस चीज़ को देख लेंगे जिसका उनसे वादा किया जाता है; इस दुनिया में जल्दी मिलने वाली या क़ियामत के दिन स्थगित कर दी गई यातना, तो उस समय उन्हें पता चल जाएगा कि कौन बुरे स्थान वाला और सबसे कम सहायक वाला है, यह उनका समूह है या मोमिनों का समूह?
Meryem 19:76
उन लोगों को गुमराही में और बढ़ने के लिए ढील देने के विपरीत, अल्लाह सीधी राह पर चलने वालों को ईमान और आज्ञाकारिता में और बढ़ा देता है। तथा शाश्वत सौभाग्य की ओर ले जाने वाले अच्छे कर्म (ऐ रसूल!) आपके पालनहार के निकट प्रतिफल की दृष्टि से अधिक लाभदायक और उत्तम परिणाम वाले हैं।
Meryem 19:77
(ऐ रसूल!) क्या आपने उस व्यक्ति को देखा, जिसने हमारे प्रमाणों का इनकार किया और हमारी चेतावनी को नकार दिया तथा कहने लगा : यदि मैं मर गया और मुझे पुनः जीवित किया गया, तो मैं अवश्य ही बहुत सारा धन एवं संतान दिया जाऊँगा।
Meryem 19:78
क्या वह परोक्ष से अवगत हो गया है कि वह इस तरह की बात किसी प्रमाण के आधार पर कह रहा हैॽ! अथवा उसने अपने पालनहार से कोई वचन ले रखा है कि वह उसे जन्नत में अवश्य प्रवेश देगा और उसे अवश्य ही धन एवं संतान प्रदान करेगाॽ!
Meryem 19:79
मामला ऐसा नहीं है जैसा कि उसने दावा किया है। जो कुछ वह कहता है और जो कुछ वह करता है, हम उसे लिख लेंगे और उसके झूठे दावे के कारण उसे यातना पर यातना देते जाएँगे।
Meryem 19:80
हम उसे विनाश करने के बाद उसके छोड़े हुए धन एवं संतान को ले लेंगे और वह क़ियामत के दिन हमारे पास अकेला ही आएगा तथा जिस धन एवं प्रतिष्ठा से वह लाभान्वित हो रहा था, वह उससे छिन चुका होगा।
Meryem 19:81
तथा बहुदेववादियों ने अपने लिए अल्लाह के सिवा अन्य पूज्य बना लिए हैं, ताकि वे उनके लिए समर्थक और सहायक बन जाएँ, जिनकी वे सहायता ले सकें।
Meryem 19:82
मामला ऐसा नहीं है जैसा कि उन्होंने दावा किया है। क्योंकि ये पूज्य जिन्हें वे अल्लाह को छोड़कर पूजते हैं, क़ियामत के दिन इस बात से इनकार कर देंगे कि बहुदेववादियों ने उनकी पूजा की थी। यही नहीं, बल्कि उनसे किनारा कर लेंगे और उनके दुश्मन हो जाएँगे।
Meryem 19:83
क्या (ऐ रसूल!) आपने देखा नहीं कि हमने शैतानों को भेजा है और उन्हें काफ़िरों पर नियुक्त कर दिया है, जो उन्हें पाप करने और अल्लाह के धर्म से रोकने पर उत्तेजित करते रहते हैं।
Meryem 19:84
अतः (ऐ रसूल!) आप अल्लाह से उन्हें जल्द विनाश करने का अनुरोध करने में जल्दी न करें। हम उनके जीवन के एक-एक दिन को गिन रहे हैं। यहाँ तक कि जब उन्हें ढील देने का समय समाप्त हो जाएगा, तो हम उन्हें वह सज़ा देंगे जिसके वे हक़दार हैं।
Meryem 19:85
तथा (ऐ रसूल!) आप क़ियामत के दिन को याद करें, जिस दिन हम उन लोगों को, जो अपने पालनहार से, उसके आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर, डरने वाले हैं, एक सम्मानित और प्रतिष्ठित प्रतिनिधिमंडल के रूप में इकट्ठा करेंगे।
Meryem 19:86
तथा हम काफ़िरों को जहन्नम की ओर प्यासे हाँककर ले जाएँगे।
Meryem 19:87
इन काफ़िरों को एक-दूसरे के लिए सिफारिश करने का अधिकार प्राप्त न होगा। सिवाय उसके, जिसने दुनिया में अल्लाह से उसपर और उसके रसूलों पर ईमान लाकर वचन ले लिया हो।
Meryem 19:88
तथा यहूदियों, ईसाइयों और कुछ बहुदेववादियों ने कहा : रहमान (अत्यंत दयावान् अल्लाह) ने अपना पुत्र बना रखा है।
Meryem 19:89
निश्चय (ऐ ऐसी बात कहने वाले लोगो!) तुमने बहुत भारी बात कही है।
Meryem 19:90
निकट है कि इस घृणित बात के कारण आकाश टूट पड़ें, धरती फट जाए और पहाड़ ध्वस्त होकर गिर जाएँ।
Meryem 19:91
यह सब इस कारण है कि उन्होंने रहमान (परम दयालु अल्लाह) के लिए संतान होने का दावा किया है। अल्लाह इस बात से बहुत ऊँचा है।
Meryem 19:92
हालाँकि रहमान (परम दयालु अल्लाह) के योग्य नहीं है कि वह कोई संतान बनाए, क्योंकि वह इससे बहुत पवित्र है।
Meryem 19:93
आकाशों और धरती में रहने वाले फ़रिश्तों, मनुष्यों एवं जिन्नों में से हर कोई क़ियामत के दिन अपने पालनहार के पास विनम्रता से आएगा।
Meryem 19:94
निश्चय अल्लाह ने उन्हें ज्ञान के साथ घेर रखा है और अच्छी तरह से उनकी गणना कर रखी है। अतः उनकी कोई चीज़ उससे छिपी नहीं है।
Meryem 19:95
उनमें से प्रत्येक व्यक्ति क़ियामत के दिन बिना किसी सहायक या धन के उसके पास अकेले आएगा।
Meryem 19:96
निःसंदेह जो लोग अल्लाह पर ईमान लाए और अल्लाह के निकट पसंदीदा नेक कार्य किए, अल्लाह उनसे अपने प्रेम के द्वारा और उन्हें अपने बंदों के निकट प्रिय बनाकर, उनके लिए प्रेम उत्पन्न कर देगा।
Meryem 19:97
हमने इस क़ुरआन को (ऐ रसूल!) आपकी भाषा में अवतरित कर सरल बना दिया है, ताकि इसके द्वारा आप अल्लाह का भय रखने वालों को शुभ सूचना दें, जो मेरे आदेशों का पालन करते हैं और मेरे मना किए हुए कामों से बचते हैं, तथा इसके द्वारा आप उन लोगों को डराएँ, जो बहुत झगड़ालू और सत्य को स्वीकार करने में अहंकार से काम लेने वाले हैं।
Meryem 19:98
आपकी जाति के लोगों से पहले हम बहुत-से समुदायों को विनष्ट कर चुके हैं। तो क्या आप आज उन समुदायों में से किसी एक को महसूस करते हैं?! और क्या आप उनकी कोई भनक सुनते हैं?! अतः जो उनके साथ हुआ, वह दूसरों के साथ (भी) हो सकता है। बस अल्लाह की अनुमति की देर है।
Tâhâ 20:1
(ता, हा) इन जैसे अक्षरों के बारे में सूरतुल-बक़रा के आरंभ में बात की जा चुकी है।
Tâhâ 20:2
हमने (ऐ रसूल!) आपपर यह क़ुरआन इसलिए नहीं उतारा कि वह आपकी जाति के आपपर ईमान लाने से उपेक्षा करने पर खेद के परिणामस्वरूप आपके कष्ट तथा थकावट का कारण बन जाए।
Tâhâ 20:3
हमने इसे केवल उन लोगों की याददहानी के लिए उतारा है, जिन्हें अल्लाह ने अपने डर की तौफ़ीक़ प्रदान की है।
Tâhâ 20:4
इसे उस अल्लाह ने उतारा है, जिसने धरती की रचना की और ऊँचे आकाश बनाए। अतः यह एक महान क़ुरआन है; क्योंकि यह एक महान अस्तित्व (अल्लाह) की ओर से अवतरित हुआ है।
Tâhâ 20:5
रहमान (अत्यंत दयावान् अल्लाह) अपनी महिमा के अनुरूप अर्श (सिंहासन) के ऊपर बुलंद हुआ।
Tâhâ 20:6
जो भी प्राणी आकाशों और धरती में तथा मिट्टी के नीचे हैं, उन सबका स्रष्टा, स्वामी और प्रबंधन करने वाला केवल पवित्र अल्लाह है।
Tâhâ 20:7
और यदि (ऐ रसूल!) आप ऊँची आवाज़ में बात करें अथवा चुपके से करें, वह पवित्र अल्लाह तो सब कुछ जानता है। क्योंकि वह गुप्त रहस्य को तथा गुप्त रहस्य से भी अधिक गुप्त चीज़, जैसे हृदय में उत्पन्न होने वाले विचारों एवं भावनाओं को भी जानता है। उससे उसमें से कुछ भी छिपा नहीं है।
Tâhâ 20:8
अल्लाह वह है, जिसके सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं। केवल उसी के ऐसे नाम हैं, जो सुंदरता में पूर्णता को पहुँचे हुए हैं।
Tâhâ 20:9
निश्चय (ऐ रसूल!) आपके पास मूसा बिन इमरान अलैहिस्सलाम की ख़बर पहुँच चुकी है।
Tâhâ 20:10
जब उसने अपनी यात्रा के दौरान एक आग देखी, तो अपने परिवार से कहा : तुम यहीं ठहरो, मैंने एक आग देखी है। शायद मैं उस आग से तुम्हारे लिए कोई अंगारा ले आऊँ, या मुझे वहाँ कोई मार्ग दिखाने वाला मिल जाए।
Tâhâ 20:11
फिर जब वह उस आग के पास आया, तो पवित्र अल्लाह ने उसे यह कहकर पुकारा : ऐ मूसा!
Tâhâ 20:12
निःसंदेह मैं ही तेरा पालनहार हूँ। अतः मुझसे बात करने की तैयारी के तौर पर अपने जूते उतार दो। निःसंदेह तुम पवित्र वादी “तुवा” में हो।
Tâhâ 20:13
तथा मैंने (ऐ मूसा!) तुझे अपने संदेश के प्रचार के लिए चुन लिया है। इसलिए मैं तुम्हारी ओर जो वह़्य (प्रकाशना) कर रहा हूँ, उसे सुनो।
Tâhâ 20:14
निःसंदेह मैं ही अल्लाह हूँ। मेरे सिवा कोई वास्तविक पूज्य नहीं। इसलिए केवल मेरी ही इबादत करो और संपूर्ण रूप से नमाज़ अदा करो, ताकि तुम मुझे उसमें याद रख सको।
Tâhâ 20:15
निश्चय ही क़ियामत आने वाली और घटित होने वाली है। क़रीब है कि मैं उसे छिपाकर रखूँ। इसलिए कोई भी प्राणी उसका समय नहीं जानता। लेकिन नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के उन्हें बताने के कारण, वे उसकी निशानियों को जानते हैं; ताकि हर प्राणी को उसके अच्छे या बुरे किए गए कार्यों का बदला दिया जाए।
Tâhâ 20:16
अतः तुम्हें उसे सच मानने और अच्छे कर्म के द्वारा उसके लिए तैयारी करने से वह व्यक्ति हरगिज़ न रोक, जो उसपर विश्वास नहीं रखता और उन वर्जित चीज़ों का पालन करता है, जिनकी उसका मन इच्छा करता है। क्योंकि उसके कारण तुम्हारा विनाश हो जाएगा।
Tâhâ 20:17
तथा ऐ मूसा! यह तुम्हारे दाहिने हाथ में क्या हैॽ
Tâhâ 20:18
मूसा अलैहिस्सलाम ने कहा : यह मेरी लाठी है। मैं इसका सहारा लेकर चलता हूँ और इसे पेड़ पर मारकर अपनी बकरियों के लिए उसके पत्ते गिराता हूँ, तथा इसके अलावा मेरे लिए इसमें अन्य लाभ हैं।
Tâhâ 20:19
अल्लाह ने फरमाया : ऐ मूसा! तुम इसे डाल दो।
Tâhâ 20:20
अतः मूसा ने उसे डाल दिया, तो वह फुर्ती और हलके से चलने वाला साँप बन गया।
Tâhâ 20:21
अल्लाह ने मूसा अलैहिस्सलाम से कहा : लाठी को पकड़ लो और उसके साँप में बदल जाने से न डरो। जब तुम उसे पकड़ोगे, तो हम उसे उसकी पहली हालत पर लौटा देंगे।
Tâhâ 20:22
और अपने हाथ को अपनी बग़ल के नीचे ले जाओ, वह कुष्ठरोग के बिना सफ़ेद (चमकता हुआ) निकलेगा; यह तुम्हारे लिए दूसरी निशानी है।
Tâhâ 20:23
हमने तुम्हें ये दो निशानियाँ दिखाई हैं, ताकि हम (ऐ मूसा!) तुम्हें अपनी कुछ बड़ी निशानियाँ दिखाएँ, जो हमारी शक्ति तथा तुम्हारे अल्लाह के रसूल होने को इंगित करती हैं।
Tâhâ 20:24
(ऐ मूसा!) तुम फ़िरऔन के पास जाओ। क्योंकि वह कुफ़्र और अल्लाह के ख़िलाफ़ विद्रोह में सीमा पार कर चुका है।
Tâhâ 20:25
मूसा अलैहिस्सलाम ने कहा : ऐ मेरे पालनहार! मेरे लिए मेरा सीना विस्तृत कर दे ताकि मैं कष्ट को सहन कर सकूँ।
Tâhâ 20:26
और मेरे लिए मेरा काम सरल कर दे।
Tâhâ 20:27
और मुझे स्पष्ट रूप से बात करने की शक्ति प्रदान कर।
Tâhâ 20:28
ताकि जब मैं तेरा संदेश उन तक पहुँचाऊँ, तो वे मेरी बात समझ सकें।
Tâhâ 20:29
और मेरे परिवार में से मेरा एक सहायक बना दे, जो मेरे कामों में मेरी सहायता करे।
Tâhâ 20:30
मेरे भाई हारून बिन इमरान को।
Tâhâ 20:31
उसके साथ मेरी पीठ मज़बूत़ कर दे।
Tâhâ 20:32
तथा उसे ईश्वरीय संदेश पहुँचाने के कार्य में मेरा साझीदार बना दे।
Tâhâ 20:33
ताकि हम तेरी बहुत ज़्यादा पवित्रता बयान करें।
Tâhâ 20:34
और हम तुझे बहुत ज़्यादा याद करें।
Tâhâ 20:35
निश्चय तू हमें अच्छी तरह देख रहा है। हमारा कोई काम तुझसे छिपा नहीं है।
Tâhâ 20:36
अल्लाह ने कहा : ऐ मूसा! तूने जो माँगा, हमने तुझे दे दिया।
Tâhâ 20:37
और हम तुझ पर एक बार और (भी) उपकार कर चुके हैं।
Tâhâ 20:38
जब हमने तेरी माँ के हृदय में वह बात डाल दी, जिसके द्वारा अल्लाह ने तुझे फ़िरऔन के छल-कपट से संरक्षित किया।
Tâhâ 20:39
जब हमने उसे इल्हाम किया, तो आदेश दिया कि मूसा को उसके जन्म के बाद संदूक़ में डाल दे और संदूक़ को समुद्र में फेंक दे। फिर समुद्र हमारे आदेश से उसे तट पर डाल देगा, तो उसे मेरा शत्रु और उसका शत्रु यानी फ़िरऔन उठा लेगा। तथा मैंने तुझ पर अपनी ओर से प्रेम डाल दिया, तो लोग तुझसे प्रेम करने लगे, और ताकि मेरी आँख के सामने तथा मेरी सुरक्षा और देखभाल में तेरा पालन-पोषण हो।
Tâhâ 20:40
जब तेरी बहन चलने लगी, जहाँ-जहाँ ताबूत (संदूक़) जा रहा था वह उसका पीछा कर रही थी। फिर उसने ताबूत को उठाने वालों से कहा : क्या मैं उसकी तरफ तुम्हारी रहनुमाई करूँ जो इसकी रक्षा करे, इसे दूध पिलाए और इसका पालन-पोषण करेॽ इस प्रकार हमने तुम्हें तुम्हारी माँ के पास वापस पहुँचाकर तुमपर उपकार किया, ताकि वह तुम्हें अपने पास वापस पाकर खुश हो जाए और तुम्हारी वजह से शोक न करे। तथा तुमने उस “क़िब्ती” को क़त्ल कर दिया, जिसे तुमने घूँसा मारा था, तो हमने तुम्हें दंड से बचा लिया। इसी तरह हमने एक के बाद एक तुम्हें हर परीक्षा से बचाया, जिससे तुम ग्रस्त हुए। फिर तू वहाँ से निकलकर वर्षों तक मदयन के लोगों में ठहरा रहा। फिर तू उस समय आया, जब ऐ मूसा! तुझसे बात करने के लिए तेरा आना नियत था।
Tâhâ 20:41
और मैंने तुझे चुन लिया, ताकि तू मेरा संदेशवाहक हो जाए और जो कुछ मैं तेरी ओर वह़्य करूँ, उसे लोगों तक पहुँचाए।
Tâhâ 20:42
(ऐ मूसा!) तू और तेरा भाई हारून अल्लाह की शक्ति तथा उसके एकेश्वरवाद को दर्शाने वाली हमारी निशानियाँ लेकर जाओ और तुम दोनों मेरी तरफ आमंत्रित करने तथा मुझे याद करने में कमज़ोर मत पड़ना।
Tâhâ 20:43
तुम दोनों फ़िरऔन के पास जाओ, क्योंकि वह कुफ़्र और अल्लाह के ख़िलाफ़ विद्रोह में सीमा पार कर चुका है।
Tâhâ 20:44
तुम दोनों उससे कोमल बात करना, जिसमें कठोरता न हो। आशा है कि वह उपदेश ग्रहण करे, या अल्लाह से डर जाए और तौबा कर ले।
Tâhâ 20:45
मूसा और हारून अलैहिमस्सलाम ने कहा : हमें भय है कि उसको निमंत्रण देने से पहले ही वह हमें सज़ा दे दे, अथवा हत्या आदि के द्वारा हमपर अत्याचार करने में सीमा से आगे बढ़ जाए।
Tâhâ 20:46
अल्लाह ने उन दोनों से फरमाया : तुम दोनों डरो नहीं। निःसंदेह मैं मदद एवं समर्थन करने के लिए तुम्हारे साथ हूँ। मैं वह सब कुछ सुन और देख रहा हूँ, जो तुम दोनों और फ़िरऔन के बीच होने जा रहा है।
Tâhâ 20:47
अतः तुम दोनों उसके पास जाओ और उससे कहो : ऐ फ़िरऔन! हम तेरे पालनहार के रसूल हैं। इसलिए बनी इसराईल (इसराईल की संतान) को हमारे साथ भेज दे और उनके बच्चों की हत्या करके और उनकी स्त्रियों को जीवित छोड़कर उन्हें पीड़ा न दे। निश्चय हम तेरे पास तेरे पालनहार की तरफ़ से अपने सच्चे होने का प्रमाण, तथा जो ईमान लाए और अल्लाह के मार्गदर्शन का पालन करे, उसके लिए अल्लाह की यातना से सुरक्षा (की खुशख़बरी) लेकर आए हैं।
Tâhâ 20:48
निःसंदेह अल्लाह ने हमारी ओर वह़्य (प्रकाशना) की है कि दुनिया और आख़िरत में यातना उसी के लिए है, जो अल्लाह की निशानियों को झुठलाए और रसूलों की लाई हुई बातों से मुँह फेरे।
Tâhâ 20:49
फ़िरऔन ने उन दोनों की लाई हुई बातों का इनकार करते हुए कहा : तुम दोनों का रब कौन है, जिसके बारे में ऐ मूसा! तुम दोनों का दावा है कि उसने तुम दोनों को मेरे पास भेजा हैॽ
Tâhâ 20:50
मूसा ने कहा : हमारा रब वही है, जिसने प्रत्येक चीज़ को उसका उचित रूप और आकार प्रदान किया, फिर पैदा की हुई चीज़ों को उसके लिए निर्देशित किया जिसके लिए उसने उन्हें बनाया था।
Tâhâ 20:51
फ़िरऔन ने कहा : अच्छा, तो पिछले समुदायों का क्या हाल है, जो कुफ़्र पर थेॽ
Tâhâ 20:52
मूसा अलैहिस्सलाम ने फ़िरऔन से कहा : उन उम्मतों की स्थिति का ज्ञान मेरे रब के पास है, जो लौह़-ए-महफ़ूज़ (सुरक्षित-पट्टिका) में अंकित है। मेरा रब उसके जानने में ग़लती नहीं करता और उनकी स्थिति का उसे जो ज्ञान है, उसे नहीं भूलता।
Tâhâ 20:53
(उसका ज्ञान) मेरे उस रब के पास है, जिसने तुम्हारे लिए धरती को उसके ऊपर जीवन-यापन करने के लिए हमवार बनाया, उसमें तुम्हारे लिए चलने-योग्य मार्ग बनाए और आकाश से वर्षा का पानी उतारा, फिर हमने उस पानी से विभिन्न प्रकार के पौधे निकाले।
Tâhâ 20:54
(ऐ लोगो!) हमने तुम्हारे लिए जो पवित्र चीज़ें उगाई हैं, उनमें से खाओ और अपने पशुओं को चराओ। निःसंदेह इन उपर्युक्त नेमतों में बुद्धि वाले लोगों के लिए अल्लाह की शक्ति और उसके एकेश्वरवाद की बहुत-सी निशानियाँ हैं।
Tâhâ 20:55
धरती की मिट्टी से हमने तुम्हारे पिता आदम अलैहिस्सलाम को पैदा किया और जब तुम्हारी मृत्यु होगी, तो हम तुम्हें उसी में दोबारा दफ़न करवाएँगे, फिर क़ियामत के दिन पुनर्जीवन के लिए हम तुम्हें उसी से निकालेंगे।
Tâhâ 20:56
तथा निश्चय हमने फ़िरऔन को अपनी सभी नौ निशानियाँ दिखाईं, लेकिन उसने उन्हें देखकर भी झुठला दिया और अल्लाह पर ईमान लाने से इनकार कर दिया।
Tâhâ 20:57
फ़िरऔन ने कहा : (ऐ मूसा!) क्या तू हमारे पास इसलिए आया है कि तू अपने लाए हुए जादू के द्वारा हमें मिस्र से निकाल दे, ताकि तू उसपर राज कर सकेॽ
Tâhâ 20:58
अतः हम भी (ऐ मूसा!) तेरे पास तेरे जादू जैसा जादू अवश्य लाएँगे। अतः तू हमारे और अपने बीच एक निश्चित समय और एक विशिष्ट स्थान पर मिलने का एक समय निर्धारित कर ले, जिससे न हम पीछे हटें और न तुम पीछे हटो, तथा वह स्थान दोनों पक्षों के बीच में और बराबर हो।
Tâhâ 20:59
मूसा अलैहिस्सलाम ने फ़िरऔन से कहा : हमारे और तुम्हारे बीच मिलने का समय ईद (उत्सव) का दिन है, जब लोग ईद मनाने के लिए दिन चढ़े इकट्ठे होते हैं।
Tâhâ 20:60
फिर फ़िरऔन वापस लौटा, सो उसने अपने दाँव-पेंच और हथकंडे जुटाए। फिर मुक़ाबले के लिए नियत समय और स्थान पर आया।
Tâhâ 20:61
मूसा अलैहिस्सलाम ने फ़िरऔन के जादूगरों को उपदेश देते हुए कहा : सावधान रहो, तुम जादू के द्वारा लोगों को धोखा देकर अल्लाह पर झूठ न गढ़ो, अन्यथा वह तुम्हें अपनी ओर से यातना देकर उखाड़ फेंकेगा। निश्चय वह असफल हुआ, जिसने अल्लाह के विरुद्ध झूठ गढ़ा।
Tâhâ 20:62
मूसा अलैहिस्सलाम की बातें सुनकर जादूगर आपस में वाद-विवाद करने लगे और वे चुपके से आपस में बातें करने लगे।
Tâhâ 20:63
कुछ जादूगरों ने चुपके से एक-दूसरे से कहा : निश्चय मूसा और हारून जादूगर हैं, जो चाहते हैं कि अपने लाए हुए जादू के द्वारा तुम्हें मिस्र से निकाल दें तथा जीवन में तुम्हारे सबसे उत्तम तौर-तरीक़े और तुम्हारे सर्वोच्च सिद्धांत को नष्ट कर दें।
Tâhâ 20:64
अतः तुम अपने उपाय को मज़बूत कर लो और उसमें मतभेद न करो, फिर पंक्तिबद्ध होकर आगे बढ़ो और तुम्हारे पास जो कुछ है, उसे एक ही बार में डाल दो। निश्चय आज के दिन वही सफल होगा, जिसने अपने विरोधी को परास्त कर दिया।
Tâhâ 20:65
जादूगरों ने मूसा अलैहिस्सलाम से कहा : ऐ मूसा! आप दो बातों में से किसी एक का चयन कर लें : या तो आप अपने पास मौजूद जादू को फेंकने की पहले करें, या फिर हम ही इसकी शुरूआत करते हैं।
Tâhâ 20:66
मूसा अलैहिस्सलाम ने कहा : बल्कि जो कुछ तुम्हारे पास है, पहले तुम्हीं उसे फेंको। चुनाँचे उनके पास जो कुछ था, उन्होंने उसे फेंका, तो अचानक उनकी फेंकी हुई रस्सियाँ और लाठियाँ उनके जादू के प्रभाव से मूसा अलैहिस्सलाम के लिए ऐसा प्रतीत होने लगीं कि वे साँप बनकर दौड़ रही हैं।
Tâhâ 20:67
तो मूसा को उनके इस कार्य से अपने दिल में भय का अनुभव हुआ।
Tâhâ 20:68
तब अल्लाह ने मूसा अलैहिस्सलाम को आश्वासन देते हुए कहा : तुम्हें जो कुछ महसूस हो रहा है, उससे न डरो। निश्चय (ऐ मूसा!) तुम ही उनपर प्रभुत्व एवं विजय प्राप्त करोगे।
Tâhâ 20:69
तुम्हारे दाहिने हाथ में जो लाठी है, उसे डाल दो। वह साँप बनकर उनके बनाए हुए जादू को निगल जाएगा। क्योंकि उन्होंने जो कुछ बनाया है, वह एक जादुई चाल के अलावा कुछ भी नहीं है। तथा जादूगर जहाँ भी हो, वह किसी उद्देश्य में सफल नहीं होता।
Tâhâ 20:70
फिर मूसा ने अपनी लाठी फेंकी, तो वह एक साँप बनकर जादूगरों के बनाए हुए साँपों को निगल गया। जादूगरों को जब यह यक़ीन हो गया कि मूसा के पास जो कुछ है, वह जादू नहीं है, बल्कि वह अल्लाह की ओर से है, तो वे अल्लाह के लिए सजदे में गिर पड़े और बोल उठे : हम हारून और मूसा के पालनहार पर ईमान ले आए, जो सभी प्राणियों का पालनहार है।
Tâhâ 20:71
फ़िरऔन ने जादूगरों के ईमान लाने का खंडन करते हुए और उन्हें धमकी देते हुए कहा : क्या तुम लोग मूसा पर ईमान ले आए इससे पहले कि मैं तुम्हें ऐसा करने की अनुमति दूँ?! निश्चय मूसा ही (ऐ जादूगरो!) तुम्हारा वह सरदार है, जिसने तुम्हें जादू सिखाया है। इसलिए निश्चय मैं तुममें से प्रत्येक (जादूगर) का एक हाथ और एक पैर उनकी विपरीत दिशाओं से कटवा दूँगा और तुम्हारे शरीर को खजूर के तनों पर लटका दूँगा, यहाँ तक कि तुम्हारी मृत्यु हो जाए और तुम दूसरों के लिए सीख बन जाओ। उस समय तुम अवश्य ही जान लोगे कि हममें से कौन अधिक कठोर एवं स्थायी यातना देने वाला है : मैं या मूसा का रबॽ!
Tâhâ 20:72
जादूगरों ने फ़िरऔन से कहा : (ऐ फ़िरऔन!) हमारे पास जो स्पष्ट निशानियाँ आ चुकी हैं, उनका अनुसरण करने के बजाय हम कभी तेरा अनुसरण करना पसंद नहीं करेंगे, तथा जिस अल्लाह ने हमारी रचना की है, हम उसपर कदापि तुझे तरजीह नहीं देंगे। अतः तू हमारे साथ जो कुछ करने वाला है, कर ले। इस नश्वर जीवन को छोड़कर तेरा हम पर कोई अधिकार नहीं है, और शीध्र ही तेरा अधिकार मिट जाएगा।
Tâhâ 20:73
हम अपने रब पर इस आशा में ईमान लाए हैं कि वह हमसे कुफ़्र और अन्य चीजों के हमारे पिछले पापों को मिटा दे, तथा हमारे उस जादू के पाप को क्षमा कर दे, जिसे सीखने और अभ्यास करने तथा उसके द्वारा मूसा को परास्त करने के लिए तूने हमें मजबूर किया था। तथा अल्लाह उससे कहीं बेहतर प्रतिफल देने वाला है, जिसका तूने हमसे वादा किया है तथा उससे कहीं अधिक स्थायी यातना देने वाला है, जिसकी तूने हमें धमकी दी है।
Tâhâ 20:74
निःसंदेह तथ्य और निष्कर्ष यह है कि जो भी व्यक्ति क़ियामत के दिन अपने पालनहार के पास इस दशा में आएगा कि वह अल्लाह के साथ कुफ़्र करने वाला होगा, तो उसके लिए जहन्नम की आग है, जिसमें वह प्रवेश करेगा और हमेशा वहीं रहेगा। वह वहाँ न तो मरेगा कि उसकी यातना से आराम पा जाए और न ही वह एक अच्छा जीवन जीएगा।
Tâhâ 20:75
और जो क़ियामत के दिन अपने रब के पास मोमिन होकर आएगा और उसने अच्छे कर्म किए होंगे, तो ऐसे महान गुणों से सुसज्जित लोगों के लिए उच्च स्थान तथा ऊँचे पद हैं।
Tâhâ 20:76
वे पद स्थायी निवास के बाग़ हैं, जिनके महलों के नीचे से नहरें बहती हैं, वे वहाँ हमेशा के लिए रहेंगे। यह उपर्युक्त बदला हर उस व्यक्ति का प्रतिफल है, जो कुफ़्र और पापों से शुद्ध हो गया।
Tâhâ 20:77
और हमने मूसा की ओर वह़्य (प्रकाशना) की कि मेरे बंदों को लेकर रातों रात मिस्र से रवाना हो जाओ, ताकि किसी को उनकी भनक न लगे तथा लाठी को समुद्र पर मारकर उनके लिए समुद्र में एक सूखा मार्ग बना लो। तुम्हें इस बात का डर न हो कि फ़िरऔन और उसके सरदार तुम्हें पकड़ लेंगे या तुम समुद्र में डूब जाओगे।
Tâhâ 20:78
तब फ़िरऔन ने अपनी सेना के साथ उनका पीछा किया, तो उसे और उसकी सेना को समुद्र से उस चीज़ ने ढाँप लिया जिसकी वास्तविकता केवल अल्लाह ही जानता है। अंततः वे सब डूब गए और नाश हो गए, तथा मूसा और उनके संग के लोग बच गए।
Tâhâ 20:79
फ़िरऔन ने अपनी जाति के लोगों को, उनके आगे कुफ़्र (अविश्वास) को सुंदर रूप में प्रस्तुत कर और उन्हें असत्य के जाल में फाँसकर पथभ्रष्ट किया तथा उन्हें सत्य का मार्ग नहीं दिखाया।
Tâhâ 20:80
हमने बनी इसराईल से, उन्हें फ़िरऔन और उसकी सेना से बचाने के बाद कहा : ऐ इसराईल के पुत्रो! हमने तुम्हें तुम्हारे शत्रु से बचा लिया और “तूर” पर्वत के बगल में स्थित घाटी की दाहिनी ओर मूसा से बात करने का तुमसे वादा किया तथा तुमपर “तीह” के मैदान में अपनी नेमतों में से शहद-जैसा मीठा पेय और बटेर की तरह अच्छे मांस वाला छोटा-सा पक्षी उतारा।
Tâhâ 20:81
हमने तुम्हें जो हलाल खाद्य पदार्थ प्रदान किए हैं, उनमें से स्वादिष्ट चीज़ें खाओ तथा हमने तुम्हारे लिए जो कुछ वैध किया है, उसे छोड़कर उस चीज़ की ओर न बढ़ो, जो हमने तुम्हारे ऊपर हराम किया है। अन्यथा तुमपर मेरा प्रकोप उतरेगा और जिसपर मेरा प्रकोप उतरा, तो निश्चय उसका सर्वनाश हो गया और दुनिया एवं आख़िरत में वह अभागा है।
Tâhâ 20:82
निःसंदेह मैं उसे बहुत क्षमा करने वाला और माफ़ करने वाला हूँ, जिसने मुझसे तौबा की, ईमान लाया और अच्छा कर्म किया, फिर सत्य मार्ग पर सुदृढ़ रहा।
Tâhâ 20:83
और किस बात ने तुझे (ऐ मूसा!) अपनी जाति के लोगों से शीघ्र आने पर उकसाया, कि तू उन्हें अपने पीछे छोड़कर उनसे पहले आ गयाॽ
Tâhâ 20:84
मूसा अलैहिस्सलाम ने कहा : वे मेरे पीछे ही आ रहे हैं और जल्द ही मुझसे आ मिलेंगे। तथा मैं अपनी क़ौम से पहले तेरी ओर इसलिए आ गया, ताकि तू अपने पास मेरे जल्दी आने के कारण मुझसे प्रसन्न हो जाए।
Tâhâ 20:85
अल्लाह ने कहा : हमने तेरी क़ौम को, जिन्हें तूने अपने पीछे छोड़ दिया था, बछड़े की पूजा के द्वारा परीक्षा में डाला है। दरअसल, “सामिरी” ने उन्हें उसकी पूजा करने के लिए बुलाया और इसके द्वारा उन्हें पथभ्रष्ट कर दिया।
Tâhâ 20:86
तब मूसा अलैहिस्सलाम अपनी क़ौम की ओर वापस आए, इस हाल में कि उनके बछड़ा पूजने के कारण क्रोध से भरे हुए और उनपर खेद में डूबे हुए थे। मूसा अलैहिस्सलाम ने कहा : ऐ मेरी क़ौम के लोगो! क्या अल्लाह ने तुमसे अच्छा वादा नहीं किया था कि वह तुमपर तौरात उतारेगा और तुम्हें जन्नत में दाखिल करेगा? क्या लंबा समय गुज़र जाने के कारण तुम उसे भूल गए होॽ अथवा तुम ऐसा करके यह चाहते थे कि तुमपर तुम्हारे रब की ओर से क्रोध उतरे और तुमपर उसकी यातना आ पड़े, इसलिए मेरे वापस आने तक आज्ञाकारिता पर दृढ़ रहने का मेरा वादा तोड़ दिया?!
Tâhâ 20:87
मूसा की जाति के लोगों ने कहा : हमने (ऐ मूसा!) आपके वचन को अपनी इच्छा से नहीं, बल्कि मजबूरी में भंग किया है। दरअसल हमपर फ़िरऔन की जाति के गहनों के भारी बोझ लाद दिए गए थे, जिनसे छुटकारा पाने के लिए हमने उन्हें एक गड्ढे में फेंक दिया। जिस प्रकार हमने उन्हें गड्ढे में फेंक दिया, उसी प्रकार सामिरी ने भी अपने पास मौजूद जिबरील अलैहिस्सलाम के घोड़े के खुर की मिट्टी को फेंक दिया।
Tâhâ 20:88
फिर सामिरी ने उन गहनों से बनी इसराईल के लिए बछड़े का एक ढाँचा निकाला, जिसमें जान नहीं थी, परंतु उससे गाय की आवाज़ की तरह आवाज़ निकल रही थी। तो सामिरी के इस कृत्य से मोहित लोगों ने कहा : यही तुम्हारा और मूसा का पूज्य है। मूसा इसे भूलकर यहीं छोड़ गए हैं।
Tâhâ 20:89
क्या ये लोग जो बछड़े के फ़ितने में पड़कर उसकी पूजा करने लगे हैं, यह नहीं देखते कि बछड़ा न तो उनसे बात करता है और न ही उन्हें उत्तर देता है, और न उनकी या दूसरों की हानि को दूर कर सकता है, और न उन्हें और न दूसरों को लाभ पहुँचा सकता है?!
Tâhâ 20:90
तथा हारून अलैहिस्सलाम ने भी उनसे मूसा अलैहिस्सलाम के वापस आने से पहले कहा था : सोने से इस बछड़े का निर्माण और उसका राँभना तुम्हारे लिए एक परीक्षा के सिवा कुछ नहीं है ताकि ईमान वाला, काफिर से प्रकट हो जाए, और (ऐ मेरी क़ौम के लोगो!) निश्चय तुम्हारा पालनहार वह है, जो दया का मालिक है, न कि वह जो तुम्हें हानि या लाभ पहुँचाने का भी मालिक नहीं है, तुम पर दया करना तो बहुत दूर की बात है। अतः अकेले उसी की इबादत करने में मेरा अनुसरण करो तथा उसके अलावा दूसरों की उपासना को त्यागकर मेरी आज्ञा का पालन करो।
Tâhâ 20:91
बछड़े की इबादत के फ़ितने में पड़े लोगों ने उत्तर दिया था : हम उसकी पूजा पर डटे रहेंगे, यहाँ तक कि मूसा हमारे पास वापस आ जाएँ।
Tâhâ 20:92
मूसा ने (वापस आने के बाद) अपने भाई हारून से कहा : जब तूने देखा कि वे अल्लाह को छोड़कर बछड़े की पूजा करके पथभ्रष्ट हो गए हैं, तो तुझे किस बात ने रोका
Tâhâ 20:93
कि तू उन्हें छोड़कर मुझसे आ मिलता?! क्या तूने मेरे उस आदेश की अवहेलना की है, जो मैंने तुझे उनपर अपना उत्तराधिकारी बनाते समय दिया था?!
Tâhâ 20:94
जब मूसा अलैहिस्सलाम अपने भाई के काम की निंदा करते हुए उनकी दाढ़ी एवं सिर को पकड़कर अपनी तरफ़ खींचने लगे, तो हारून ने दया की याचना करते हुए उनसे कहा : आप मेरी दाढ़ी और मेरे सिर के बाल मत पकड़ें। क्योंकि मेरे पास उनके साथ रहने का कारण है। दरअसल मुझे यह भय हुआ कि यदि मैंने उन्हें अकेले छोड़ दिया, तो वे विभेद कर लेंगे। फिर आप कहेंगे कि मैंने उनके बीच फूट डाल दी और मैंने उनके बारे में आपकी वसीयत की परवाह नहीं की।
Tâhâ 20:95
मूसा अलैहिस्सलाम ने सामिरी से कहा : ऐ सामिरी! तेरा क्या मामला है? जो कुछ तूने किया है, उसपर तुझे किस बात ने उभारा?
Tâhâ 20:96
सामिरी ने मूसा अलैहिस्सलाम से कहा : मैंने वह चीज़ देखी, जो उन लोगों ने नहीं देखी। मैंने जिबरील को घोड़े पर सवार देखा, तो उनके घोड़े के पद-चिह्न से एक मुट्ठी मिट्टी ले ली और उसे बछड़े के ढाँचे पर डाल दिया, जो उन आभूषणों को पिघलाकर बनाया गया था। चुनाँचे उससे एक बछड़े का शरीर तैयार हो गया, जो राँभता था। इस प्रकार, मेरे मन ने मेरे लिए उस कार्य को सुंदर बना दिया, जो मैंने किया।
Tâhâ 20:97
मूसा अलैहिस्सलाम ने सामिरी से कहा: अच्छा, तू यहाँ से निकल जा! तेरी सज़ा यह है कि तू जब तक जीवित रहे, कहता रहे : मैं किसी को नहीं छूता और न मुझे कोई छुए। इस प्रकार तू अछूत बनकर जिएगा। तथा क़ियामत के दिन तेरे लिए एक और वादा है, जिसमें तेरा हिसाब होगा और तुझे दंडित किया जाएगा। अल्लाह इस वादे को तुझसे कदापि न टालेगा। तू अपने उस बछड़े को देख, जिसे तूने अपना पूज्य बना रखा था और अल्लाह को छोड़कर तू उसकी पूजा कर रहा था। हम अवश्य ही उसपर आग दहकाएँगे, यहाँ तक कि वह पिघल जाए, फिर उसे समुद्र में उड़ा देंगे, ताकि उसका कोई निशान न रह जाए।
Tâhâ 20:98
निःसंदेह (ऐ लोगो!) तुम्हारा वास्तविक पूज्य वही अल्लाह है, जिसके सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं। उसने प्रत्येक वस्तु को अपने ज्ञान से घेर रखा है। अतः उस पवित्र अल्लाह के ज्ञान से कोई वस्तु छूट नहीं सकती।
Tâhâ 20:99
जिस प्रकार हमने (ऐ रसूल!) आपके समक्ष मूसा और फ़िरऔन तथा उनकी क़ौमों के हालात रखे, उसी प्रकार हम आपको आपसे पहले गुज़र चुके पैगंबरों और समुदायों के वृत्तांत सुनाते हैं, ताकि आपको इससे सांत्वना मिले और निःसंदेह हमने आपको अपने पास से क़ुरआन प्रदान किया है, जिससे नसीह़त हासिल करने वाला नसीह़त ग्रहण करता है।
Tâhâ 20:100
जिसने आपपर उतरने वाले इस क़ुरआन से मुँह फेरा और उसपर ईमान नहीं लाया तथा उसकी शिक्षाओं पर अमल नहीं किया; वह क़ियामत के दिन बड़े पाप का बोझ उठाए हुए और दर्दनाक यातना का पात्र बनकर आएगा।
Tâhâ 20:101
वे उस यातना में हमेशा के लिए रहने वाले होंगे और वह बहुत बुरा बोझ होगा, जो वे क़ियामत के दिन उठाए हुए होंगे।
Tâhâ 20:102
जिस दिन मरने के बाद पुनर्जीवन के लिए फ़रिश्ता सूर (नरसिंघा) में दूसरी बार फूँक मारेगा और उस दिन हम काफिरों को इस दशा में इकट्ठा करेंगे कि आख़िरत की गंभीर भयावहता का सामना करने के कारण उनके शरीर तथा आँखों का रंग नीला पड़ चुका होगा।
Tâhâ 20:103
वे आपस में फुसफुसाते हुए कहेंगे : तुम मृत्यु के बाद बरज़ख़ में दस रातों से अधिक नहीं रहे।
Tâhâ 20:104
हम सबसे अधिक जानने वाले हैं कि वे आपस में चुपके-चुपके क्या बात कर रहे होंगे, उनकी कोई चीज़ हमसे छिपी नहीं है। जब उनमें सबसे समझदार व्यक्ति कहेगा : तुम बरज़ख़ में केवल एक दिन रहे हो, उससे अधिक नहीं।
Tâhâ 20:105
और वे (ऐ रसूल!) आपसे क़ियामत के दिन पहाड़ों की स्थिति के बारे में पूछते हैं। आप उनसे कह दीजिए : मेरा रब पहाड़ों को उनकी जड़ों से उखाड़कर उड़ा देगा और वे धूल बनकर रह जाएँगे।
Tâhâ 20:106
फिर वह उस धरती को, जो उन्हें उठाए हुए थी, समतल मैदान बनाकर छोड़ेगा, जिसपर न कोई निर्माण होगा और न कोई पौधा।
Tâhâ 20:107
(ऐ उस धरती की ओर देखने वाले!) वह धरती इतनी समतल और सपाट होगी कि तू उसमें कोई झुकाव और ऊँच-नीच नहीं देखेगा।
Tâhâ 20:108
उस दिन लोग महशर (क़ियामत के मैदान) की ओर बुलाने वाले की आवाज़ का अनुसरण करेंगे। उन्हें उसके पीछे चलने से कोई फेरने वाला नहीं होगा और सभी आवाज़ें रहमान के डर से खामोश हो जाएँगी। अतः उस दिन तुम्हें एक धीमी आवाज़ के अतिरिक्त कुछ सुनाई नहीं देगा।
Tâhâ 20:109
उस महान दिन किसी सिफ़ारिश करने वाले की सिफ़ारिश लाभ नहीं देगी, सिवाय उस सिफ़ारिश करने वाले के, जिसे अल्लाह सिफारिश करने की आज्ञा प्रदान करे तथा सिफ़ारिश से संबंधित उसकी बात को पसंद करे।
Tâhâ 20:110
पवित्र अल्लाह जानता है कि लोग क़ियामत से संबंधित किन बातों का सामना करेंगे तथा वह यह भी जानता है कि वे दुनिया में क्या कुछ छोड़ आए हैं। जबकि सभी बंदे अल्लाह के अस्तित्व और उसके गुणों को अपने ज्ञान की घेरे में नहीं ला सकते।
Tâhâ 20:111
तथा बंदों के चेहरे उस जीवित हस्ती के सामने झुक जाएँगे और उसके लिए विनम्र हो जाएँगे, जिसे मौत नहीं आएगी और जो अपने बंदों के सारे कामों का प्रबंधन और संचालन करने वाला है। तथा वह व्यक्ति विफल हो गया, जिसने स्वयं को विनाश के रास्तों पर डालकर गुनाह का बोझ उठा लिया।
Tâhâ 20:112
तथा जो व्यक्ति नेक काम करे और वह अल्लाह तथा उसके रसूलों पर ईमान रखने वाला हो, उसे उसका पूरा बदला मिलेगा। उसे न अत्याचार का भय होगा कि उसे किसी ऐसे पाप का दंड दिया जाए, जो उसने किया न हो और न उसे अपने किए हुए नेक कर्म के सवाब में कमी का डर होगा।
Tâhâ 20:113
और जिस प्रकार हमने पिछले लोगों की कहानियाँ उतारीं हैं, उसी तरह हमने इस क़ुरआन को स्पष्ट अरबी भाषा में उतारा है और उसमें विभिन्न प्रकार की चेतावनियों जैसे धमकियों और डराने वाली बातों का वर्णन किया है; इस आशा में कि वे अल्लाह से डरें या क़ुरआन उनके लिए उपदेश और नसीहत पैदा कर दे।
Tâhâ 20:114
अतः सर्वोच्च, बहुत पवित्र और गौरवशाली है अल्लाह, जो ऐसा बादशाह है, जिसके पास हर चीज़ का स्वामित्व है, जो सत्य है और उसकी बात सत्य है। वह उस चीज़ से सर्वोच्च है, जो अनेकेश्वरवादी उसके साथ जोड़ते हैं। तथा (ऐ रसूल!) जब तक जिबरील आपको क़ुरआन का कोई अंश पहुँचाने का काम पूरा न कर लें, आप उनके साथ क़ुरआन पढ़ने में जल्दी न करें तथा कहते रहें : ऐ मेरे पालनहार! तूने मुझे जो ज्ञान दिया है, उसके साथ और अधिक ज्ञान प्रदान कर।
Tâhâ 20:115
हमने इससे पहले आदम को वृक्ष से न खाने की ताकीद की थी तथा उसे उससे रोका था और उसके परिणाम से अवगत करा दिया था। लेकिन वह हमारे आदेश को भूल गया और उस पेड़ से खा लिया, उससे धैर्य नहीं रख सका, तथा हमने उसे जो आदेश दिया था, उसे निभाने के लिए उसके अंदर दृढ़ संकल्प की ताकत को हमने नहीं देखा।
Tâhâ 20:116
तथा (ऐ रसूल!) आप उस समय को याद करें, जब हमने फ़रिश्तों से कहा : आदम को सलाम के तौर पर सजदा करो, तो सभी फरिश्तों ने सजदा किया, सिवाय इबलीस के (जो फ़रिश्तों के साथ था, किंतु फ़रिश्तों में से नहीं था)। उसने अहंकार के कारण सजदा करने से इनकार कर दिया।
Tâhâ 20:117
इसपर हमने कहा : ऐ आदम! निःसंदेह इबलीस तुम्हारा और तुम्हारी पत्नी का शुत्र है। अतः ऐसा न हो कि उसके बहकावे में आकर उसकी बात मानने के कारण वह तुम्हें और तुम्हारी पत्नी को जन्नत से निकलवा दे और तुम कष्ट एवं कठिनाई में पड़ जाओ।
Tâhâ 20:118
निःसंदेह तुम्हारे लिए अल्लाह के ज़िम्मे यह है कि वह जन्नत में तुम्हें खिलाएगा, तो तुम भूखे नहीं होगे, तथा वह तुम्हें वस्त्र पहनाएगा, तो तुम नग्न नहीं होगे।
Tâhâ 20:119
तथा वह तुम्हें पिलाएगा, तो तुम प्यासे नहीं होगे और तुम्हें छाया देगा, तो तुम्हें सूर्य का ताप नहीं लगेगा।
Tâhâ 20:120
फिर शैतान ने आदम के दिल में विचार उत्पन्न किया और उससे कहा : क्या मैं तुझे ऐसे वृक्ष का पता बताऊँ, जो उसका फल खाए, वह कभी न मरेगा, बल्कि वह हमेशा जीवित (अमर) रहेगा, तथा वह ऐसे निरंतर राज्य का मालिक बन जाएगा, जो कभी समाप्त न होगा?!
Tâhâ 20:121
अन्ततः आदम और हव्वा ने उस वृक्ष से खा लिया, जिसमें से खाने से उन्हें मना किया गया था। अतः दोनों के सामने उनके गुप्तांग खुल गए, जबकि वे इससे पहले छुपे हुए थे और दोनों जन्नत के वृक्ष के पत्ते तोड़कर उनसे अपने गुप्तांग छुपाने लगे। आदम ने अपने रब की आज्ञा का उल्लंघन किया, क्योंकि उसने पेड़ से खाने से बचने की उसकी आज्ञा का पालन नहीं किया। इसलिए वह ऐसा काम कर बैठा, जो उसके लिए जायज़ नहीं था।
Tâhâ 20:122
फिर अल्लाह ने उसे चुन लिया और उसकी तौबा क़बूल कर ली और उसे सन्मार्ग पर निर्देशित किया।
Tâhâ 20:123
अल्लाह ने आदम और ह़व्वा से कहा : तुम दोनों और इबलीस जन्नत से उतर जाओ। इबलीस तुम दोनों का शत्रु है और तुम दोनों उसके शत्रु हो। फिर यदि तुम्हारे पास मेरी ओर से मेरा मार्गदर्शन आए, तो तुममें से जो मेरे मार्गदर्शन का अनुपालन करेगा और उसके अनुसार कर्म करेगा तथा उससे इधर-उधर नहीं जाएगा; वह न सच्चे मार्ग से भटकेगा और न आख़िरत में इस दुर्भाग्य का शिकार होगा कि यातना सहनी पड़े। बल्कि अल्लाह उसे जन्नत में दाख़िल करेगा।
Tâhâ 20:124
और जो मेरी नसीहत से मुँह फेरेगा और उसे ग्रहण नहीं करेगा, उसके लिए दुनिया और आख़िरत में तंग जीवन होगा तथा हम उसे क़ियामत के दिन महशर की ओर इस स्थिति में ले जाएँगे कि वह दृष्टिहीन और प्रमाण विहीन होगा।
Tâhâ 20:125
नसीहत से मुँह फेरने वाला यह व्यक्ति कहेगा : ऐ मेरे रब! आज तूने मुझे अंधा बनाकर क्यों उठाया, जबकि मैं दुनिया में दृष्टि वाला था।
Tâhâ 20:126
सर्वशक्तिमान अल्लाह उस व्यक्ति का उत्तर देते हुए कहेगा : तूने दुनिया में ऐसा ही किया था। तेरे पास हमारी आयतें आई थीं, तो तूने उनसे मुँह फेर लिया था और उन्हें छोड़ दिया था। बिलकुल उसी तरह, आज तुझे यातना में छोड़ दिया जाएगा।
Tâhâ 20:127
इसी तरह का बदला हम उस व्यक्ति को भी देते हैं, जो निषिद्ध इच्छाओं में संलिप्त रहे और अपने पालनहार के स्पष्ट प्रमाणों पर ईमान लाने से उपेक्षा करे। और निश्चय आख़िरत में अल्लाह का अज़ाब दुनिया और बरज़ख़ के तंग जीवन से कहीं अधिक भयानक एवं कठोर और अधिक समय तक रहने वाला है।
Tâhâ 20:128
क्या बहुदेववादियों के लिए उन समुदायों की बहुतायत स्पष्ट नहीं हुई, जिन्हें हमने उनसे पहले विनष्ट कर चुके हैं, ये लोग उन विनष्ट किए गए समुदायों के रहने के स्थानों में चलते-फिरते हैं और उन्हें पहुँचने वाले विनाश के प्रभावों को देखते हैं? उन बहुत सारे समुदायों को जिस विध्वंस और विनाश से पीड़ित होना पड़ा, उसमें बुद्धिमानों के लिए निश्चय बहुत-सी इबरतें (सीख एवं उपदेश) हैं।
Tâhâ 20:129
यदि (ऐ रसूल!) आपके पालनहार की ओर से पहले ही यह बात निश्चित न हो गई होती कि वह किसी को भी, उसपर तर्क स्थापित करने से पहले दंडित नहीं करेगा तथा यदि अल्लाह के यहाँ उनके लिए एक नियत समय न होता, तो शीध्र ही उन्हें यातना का शिकार बना देता, क्योंकि वे यातना के अधिकारी बन ही चुके हैं।
Tâhâ 20:130
(ऐ रसूल!) आपको झुठलाने वाले लोग आपके बारे में जो झूठी बातें कहते हैं, उनपर धैर्य से काम लें, तथा सूर्य उगने से पहले फज्र की नमाज़ में, और सूर्य ड़ूबने से पहले अस्र की नमाज़ में, और रात की घड़ियों में मग़रिब एवं इशा की नमाज़ में, और दिन के पहले किनारे (हिस्से) के अंत के पश्चात सूर्य के ढलने के समय ज़ुहर की नमाज़ में, और दिन के दूसरे हिस्से के अंत के बाद मग़रिब की नमाज़ में अपने पालनहार की प्रशंसा के साथ उसकी पवित्रता बयान करें; आशा है कि आपको अल्लाह के पास ऐसा सवाब (प्रतिफल) प्राप्त हो, जिससे आप प्रसन्न हो जाएँ।
Tâhâ 20:131
आप सांसारिक जीवन की उस शोभा की ओर न देखें, जिसे हमने इस तरह के झुठलाने वालों के लिए आनंद का उपकरण बना दिया है, जिसका वे आनंद ले रहे हैं ताकि हम उनका परीक्षण करें। क्योंकि हमने उन्हें इस प्रकार की जो चीज़ दी है, वह नश्वर है। जबकि आपके पालनहार का प्रतिफल, जिसका उसने आपसे वादा किया है, ताकि आप प्रसन्न हो जाएँ, उन नश्वर आनंद की ची़ज़ों से बेहतर और अधिक स्थायी है, जो अल्लाह ने उन्हें प्रदान की हैं। क्योंकि आपको मिलने वाला प्रतिफल कभी समाप्त न होगा।
Tâhâ 20:132
तथा (ऐ रसूल!) आप अपने परिवार को नमाज़ अदा करने का आदेश दें और आप स्वयं भी उसके अदा करने के पाबंद रहें। हम आपसे आपके लिए या किसी और के लिए आजीविका नहीं माँगते। आपकी आजीविका के उत्तरदायी भी हम ही हैं। तथा दुनिया और आख़िरत में प्रशंसनीय परिणाम तक़वा वालों के लिए है, जो अल्लाह से डरते हैं। इसलिए उसके आदेशों का पालन करते हैं और उसके निषेधों से बचते हैं।
Tâhâ 20:133
नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को झुठलाने वाले इन काफिरों ने कहा : मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) अपने रब की तरफ से हमारे पास कोई ऐसी निशानी क्यों नहीं लाता, जो उसकी सत्यता और उसके संदेष्टा होने का प्रमाण बन सके? क्या इन झुठलाने वालों के पास क़ुरआन नहीं आया, जो पहली आसमानी पुस्तकों की पुष्टि करता हैॽ!
Tâhâ 20:134
यदि नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को झुठलाने वाले इन काफ़िरों को हम उनके कुफ़्र एवं हठ के कारण, उनकी तरफ़ कोई संदेष्टा भेजने और उनपर कोई किताब उतारने से पहले ही, उनपर कोई यातना भेजकर विनष्ट कर देते, तो वे क़ियामत के दिन अपने कुफ़्र का बहाना पेश करते हुए कहते : (ऐ हमारे पालनहार!) तूने दुनिया में हमारी ओर कोई संदेष्टा क्यों नहीं भेजा कि हम उसपर ईमान लाते और उसकी लाई हुई आयतों का पालन करते, इससे पहले कि तेरे दंड के कारण हम अपमान एवं ज़िल्लत का सामना करतेॽ!
Tâhâ 20:135
(ऐ रसूल!) आप इन झुठलाने वालों से कह दीजिए : हम और तुम में से प्रत्येक इस बात की प्रतीक्षा कर रहा है कि अल्लाह क्या करने वाला है। सो तुम प्रतीक्षा करो। तुम्हें शीघ्र ही (अनिवार्य रूप से) पता चल जाएगा कि कौन सीधे मार्ग वाले हैं और किन लोगों को मार्गदर्शन प्राप्त है : हमें अथवा तुम लोगों कोॽ
Enbiya 21:1
क़ियामत के दिन लोगों के लिए उनके कार्यों का हिसाब बहुत निकट आ गया। इसके बावजूद वे लापरवाही में पड़े हुए हैं, आख़िरत से मुँह मोड़कर दुनिया में व्यस्त हैं।
Enbiya 21:2
उनके पास उनके पालनहार की ओर से क़ुरआन की जो भी नई अवतरित बात आती है, तो वे उसे लाभ उठाने के लिए (गंभीरता से) नहीं सुनते हैं। बल्कि, वे इस बात की परवाह किए बिना कि उसमें क्या है, हँसी-खेल करते हुए सुनते हैं।
Enbiya 21:3
उन्होंने इसे इस हाल में सुना कि उनके दिल इससे पूरी तरह ग़ाफ़िल थे। और कुफ़्र के द्वारा अत्याचार करने वालों ने उस बात को गुप्त रखा, जो वे आपस में यह कहते हुए कानाफूसी कर रहे थे : यह व्यक्ति जो रसूल होने का दावा करता है, तुम्हारे ही जैसे एक इनसान के सिवा क्या है, जिसे तुमसे हटकर कोई विशिष्टता प्राप्त नहीं है?! तथा वह जो कुछ लेकर आया है, केवल जादू है। तो क्या तुम यह जानते हुए भी कि वह तुम्हारे ही जैसा एक इनसान है और वह जो कुछ लेकर आया है, मात्र जादू है, तुम उसके पीछे चलने के लिए तैयार हो?!
Enbiya 21:4
रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने कहा : तुमने गुप्त रूप से जो बात कही है, मेरा पालनहार उसे खूब जानता है। क्योंकि वह आकाशों और धरती में बोलने वाले के मुँह से निकलने वाली हर बात को जानता है। वह अपने बंदों की बातों को सुनने वाला, उनके कार्यों को जानने वाला है और वह उन्हें उनका बदला देगा।
Enbiya 21:5
बल्कि सच्चाई यह है कि मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जो क़ुरआन लाए हैं, उसके बारे में वे असमंजस में पड़े हुए हैं। चुनाँचे कभी कहते हैं कि ये मिश्रित सपने हैं जिनकी कोई व्याख्या नहीं होती। कभी कहते हैं कि नहीं, बल्कि आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने इसे गढ़ लिया है, जिसका कोई आधार नहीं है। तथा कभी कहते हैं कि आप शायर हैं। और यदि आप अपने दावे में सच्चे हैं, तो पहले रसूलों की तरह हमारे पास कोई चमत्कार लेकर आएँ। क्योंकि वे चमत्कार लाए थे, जैसे कि मूसा अलैहिस्सलाम की लाठी और सालेह अलैहिस्सलाम की ऊँटनी।
Enbiya 21:6
इन चमत्कार की माँग करने वालों से पहले कोई बस्ती, जिसने चमत्कारों का प्रस्ताव रखा, फिर उसे उसके सुझाव के अनुसार दिया गया, ईमान नहीं लाई। बल्कि उन्होंने उसे झुठला दिया, तो हमने उन्हें नष्ट कर दिया। तो क्या ये लोग ईमान ले आएँगे।
Enbiya 21:7
और (ऐ रसूल!) हमने आपसे पहले मनुष्यों ही में से कुछ पुरुषों को रसूल बनाकर भेजे, जिनकी ओर हम वह़्य (प्रकाशना) करते थे। हमने रसूल बनाकर फ़रिश्तों को नहीं भेजा। इसलिए, यदि तुम नहीं जानते हो, तो अपने से पहले किताब वालों से पूछ लो।
Enbiya 21:8
हमने उन रसूलों को, जिन्हें हम भेजते थे, ऐसे शरीर वाले नहीं बनाए थे, जो खाना न खाते हों। बल्कि वे अन्य लोगों की तरह खाते-पीते थे। तथा वे इस दुनिया में हमेशा रहने वाले अमर नहीं थे।
Enbiya 21:9
फिर हमने अपने रसूलों से किए हुए अपने वचन को पूरा कर दिया। चुनाँचे हमने उन्हें और जिन मोमिनों को चाहा, विनाश से बचा लिया, और उन लोगों को नष्ट कर दिया, जो अल्लाह का इनकार करके और गुनाह के कार्यों में पड़कर हद से आगे बढ़ने वाले थे।
Enbiya 21:10
हमने तुम्हारी ओर क़ुरआन उतारा है, जिसमें तुम्हारा सम्मान और गौरव है अगर तुम उसे सत्य मानो और उसकी शिक्षाओं पर अमल करो। तो क्या तुम इस बात को नहीं समझते, कि तुम उसपर ईमान लाने में जल्दी करो और उसमें जो कुछ है, उसके अनुसार कार्य करो?!
Enbiya 21:11
और कितनी ही बस्तियाँ ऐसी हैं, जिन्हें हमने उनके कुफ़्र के द्वारा अत्याचार करने के कारण नष्ट कर दिया और उनके बाद दूसरे लोगों को पैदा कर दिया।
Enbiya 21:12
चुनाँजे जब विनष्ट लोगों ने हमारी उन्मूलनकारी यातना को देखा, तो विनाश से बचने के लिए अपनी बस्ती से बहुत तेज़ी के साथ भागने लगे।
Enbiya 21:13
तो उनसे उपहास के तौर पर कहा जाएगा : भागो नहीं, और अपने उन सुखों की ओर जिनका तुम आनंद ले रहे थे, और अपने घरों की ओर लौट चलो, ताकि तुमसे तुम्हारी दुनिया के बारे में कुछ पूछा जाए।
Enbiya 21:14
इन अत्याचारियों ने अपने पाप को स्वीकार करते हुए कहा : हाय हमारा विनाश और हमारा नुकसान! निश्चय हम अत्याचारी थे क्योंकि हम अल्लाह का इनकार करते थे।
Enbiya 21:15
तो उनका अपने पाप को स्वीकार करना और अपने हक़ में विनाश की बद्-दुआ करना ही उनकी निरंतर पुकार रही, जिसे वे दोहराते रहे, यहाँ तक कि हमने उन्हें कटी हुई खेती की तरह, मरे हुए बना दिया, उनमें कोई हरकत नहीं थी।
Enbiya 21:16
हमने आकाश और धरती तथा उन दोनों के बीच मौजूद चीज़ों को खेल-तमाशा के तौर पर और व्यर्थ नहीं बनाया, बल्कि हमने उन्हें अपनी शक्ति एवं सामर्थ्य के संकेत के रूप में बनाया है।
Enbiya 21:17
यदि हम पत्नी या पुत्र बनाना चाहते, तो निश्चय हम उसे उससे बना लेते जो हमारे पास है। हालाँकि हम ऐसा करने वाले नहीं हैं, क्योंकि हम इससे पवित्र हैं।
Enbiya 21:18
बल्कि हम उस सत्य को, जिसकी हम अपने रसूल की ओर वह़्य करते हैं, कुफ़्र वालों के असत्य पर फेंक मारते हैं, तो वह उसे खंडित कर देता है। फिर एकाएक उनका असत्य नष्ट-भ्रष्ट होने वाला होता है। और (ऐ अल्लाह के पत्नी और पुत्र बनाने का दावा करने वालो!) तुम्हारे लिए विनाश है, क्योंकि तुम अल्लाह को ऐसी चीज़ के साथ विशेषित करते हो, जो उसके लिए योग्य नहीं है।
Enbiya 21:19
तथा अकेले अल्लाह ही के लिए आकाशों और धरती का राज्य है। और उसके पास जो फ़रिश्ते हैं, उसकी इबादत से अभिमान नहीं करते और न ही वे उससे थकते हैं।
Enbiya 21:20
वे हमेशा अल्लाह की पवित्रता का गान करते हैं। उससे उकताते नहीं हैं।
Enbiya 21:21
बल्कि मुश्रिकों ने अल्लाह के अलावा ऐसे पूज्य बना लिए हैं, जो मरे हुए लोगों को ज़िंदा नहीं कर सकते। तो फिर वे इससे असमर्थ की पूजा कैसे करते हैं?!
Enbiya 21:22
यदि आकाशों और धरती में अल्लाह के अलावा कई पूज्य होते, तो राज्य (प्रभुत्व) को लेकर पूज्यों के बीच विवाद (संघर्ष) के कारण दोनों नष्ट-भ्रष्ट हो जाते। जबकि वस्तुस्थिति इसके विपरीत है। इसलिए, अर्श का मालिक अल्लाह उससे पवित्र है, जो मुश्रिक लोग झूठे तरीक़े से उसके बारे में वर्णन करते हैं कि उसके कोई साझेदार हैं।
Enbiya 21:23
अल्लाह अपने राज्य और निर्णय में अकेला है। उसके किसी फ़ैसले और निर्णय के बारे में कोई उससे पूछ नहीं सकता। जबकि वह अपने बंदों से उनके कार्यों के बारे में पूछेगा और उन्हें उनके कर्मों का बदला देगा।
Enbiya 21:24
बल्कि उन्होंने अल्लाह के अलावा कई पूज्य बना लिए हैं। (ऐ रसूल!) आप इन मुश्रिकों से कह दें : तुम इनके पूजा के योग्य होने पर अपना प्रमाण प्रस्तुत करो। क्योंकि मुझपर उतरने वाली इस किताब (क़ुरआन) और पिछले रसूलों पर उतरने वाली किताबों में तुम्हारे लिए कोई प्रमाण नहीं है। बल्कि असल बात यह है कि अधिकांश मुश्रिक केवल अज्ञानता और बाप-दादों के अनुकरण पर भरोसा करते हैं। अतः वे सत्य को स्वीकार करने से मुँह फेरने वाले हैं।
Enbiya 21:25
(ऐ रसूल!) हमने आपसे पहले जो भी रसूल भेजा, उसकी ओर यही वह़्य (प्रकाशना) करते रहे कि मेरे सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं है। इसलिए एकमात्र मेरी इबादत करो और मेरे साथ किसी भी चीज़ को साझी न बनाओ।
Enbiya 21:26
और मुश्रिकों (बहुदेववादियों) ने कहा : अल्लाह ने फ़रिश्तों को बेटियाँ बना लिया है। अल्लाह उनके इस झूठ से पाक एवं पवित्र है। बल्कि फ़रिश्ते अल्लाह के बंदे हैं। उसकी ओर से सम्मान दिए गए हैं और उसके निकटवर्ती हैं।
Enbiya 21:27
वे अपने पालनहार से आगे बढ़कर नहीं बोलते। चुनाँचे उसकी अनुमति के बिना कोई बात नहीं करते, तथा वे उसके आदेश के अनुसार ही काम करते हैं। अतः उसके किसी आदेश का विरोध नहीं करते।
Enbiya 21:28
वह उनके अगले और पिछले कर्मों को जानता है। वे (क़ियामत के दिन) उसकी अनुमति ही से केवल उसके हक़ में सिफ़ारिश करेंगे, जिसके लिए सिफ़ारिश को वह पसंद करेगा। तथा वे अल्लाह के भय से सहमे हुए रहते हैं। चुनाँचे किसी आदेश या निषेध में उसका विरोध नहीं करते।
Enbiya 21:29
मान लिया जाए कि यदि फ़रिश्तों में से कोई यह कहे कि मैं अल्लाह के सिवा पूज्य हूँ, तो हम उसे उसके इस कथन के कारण क़ियामत के दिन जहन्नम की सज़ा देंगे, जिसमें वह हमेशा रहेगा। तथा हम अल्लाह के साथ कुफ़्र और शिर्क के द्वारा अत्याचार करने वालों को इसी तरह दंडित करते हैं।
Enbiya 21:30
क्या अल्लाह का इनकार करने वाले नहीं जानते कि आकाश और धरती दोनों आपस में मिले हुए थे, दोनों के बीच कोई खाली स्थान नहीं था, जहाँ से बारिश उतरती, तो हमने दोनों को अलग-अलग कर दिया। तथा हमने आसमान से धरती पर उतरने वाली बारिश से हर तरह की जानदार चीज़ें और पौधे बनाए। तो क्या वे इन बातों से सीख नहीं लेते और एक अल्लाह पर ईमान नहीं लाते?!
Enbiya 21:31
और हमने धरती में स्थिर पहाड़ बनाए, ताकि वह अपने ऊपर मौजूद लोगों को लेकर हिलने-डुलने न लगे, और हमने उसमें चौड़े रास्ते बना दिए, ताकि लोग अपनी यात्राओं में अपने गंतव्यों तक मार्ग प्राप्त कर सकें।
Enbiya 21:32
और हमने आकाश को एक खंभे के बिना गिरने से संरक्षित, तथा शैतानों के चोरी-छिपे सुनने से सुरक्षित छत बनाया। जबकि मुश्रिकों का हाल यह है कि वे आकाश में मौजूद निशानियों (जैसे सूर्य और चाँद) से मुँह फेरने वाले हैं, उनसे सीख नहीं लेते।
Enbiya 21:33
अकेला अल्लाह ही है, जिसने आराम के लिए रात बनाई और रोज़ी-रोटी कमाने के लिए दिन बनाया, तथा सूर्य को दिन का संकेत और चाँद को रात का संकेत बनाया। प्रत्येक सूर्य और चंद्रमा अपनी कक्षा में चल रहे हैं, कोई उससे विचलित और इधर-उधर नहीं होता।
Enbiya 21:34
(ऐ रसूल!) हमने आपसे पहले किसी मनुष्य को इस जीवन में हमेशा रहने वाला नहीं बनाया। फिर क्या यदि इस जीवन में आपका नियत समय पूरा हो जाए और आपकी मृत्यु हो जाए, तो ये लोग आपके बाद हमेशा रहने वाले हैं?! हरगिज़ नहीं।
Enbiya 21:35
प्रत्येक प्राणी को, चाहे मोमिन हो या काफ़िर, इस दुनिया में मौत का स्वाद चखना है। और (ऐ लोगो!) हम दुनिया के जीवन में शरई कर्तव्यों का पाबंद बनाकर तथा नेमतों और विपत्तियों से ग्रस्त कर तुम्हारी आज़माइश करते हैं। फिर तुम अपनी मौत के बाद केवल हमारी ही ओर लौटाए जाओगे। फिर हम तुम्हें तुम्हारे कार्यों का बदला देंगे।
Enbiya 21:36
और (ऐ रसूल!) जब ये मुश्रिक लोग आपको देखते हैं, तो आपका मज़ाक़ उड़ाने लगते हैं और अपने अनुयायियों को यह कहकर आपसे नफ़रत दिलाते हैं कि : क्या यही वह व्यक्ति है, जो तुम्हारे देवताओं को, जिनकी तुम पूजा करते हो, बुरा-भला कहता है?! वे आपका मज़ाक उड़ाने के साथ-साथ उस क़ुरआन का भी इनकार करने वाले हैं, जो अल्लाह ने उनपर अवतरित किया है तथा उन नेमतों की नाशुक्री करते हैं, जो उसने उन्हें प्रदान की हैं। इसलिए वे खुद ही दोष के सबसे अधिक योग्य हैं क्योंकि उनके अंदर हर तरह की बुराई पाई जाती है।
Enbiya 21:37
जल्दबाज़ी मनुष्य की प्रकृित में शामिल है। इसलिए वह चीज़ों के होने से पहले ही उनके लिए जल्दी मचाने लगता है। इसी का एक उदाहरण मुश्रिकों का यातना के लिए जल्दी मचाना है। (ऐ मेरी यातना के लिए जल्दी मचाने वालो!) मैं निकट ही तुम्हें वह चीज़ दिखाऊँगा, जिसके लिए तुमने जल्दी मचाई है। इसलिए उसे जल्दी करने के लिए न कहो।
Enbiya 21:38
मरणोपरांत दोबारा जीवित होने का इनकार करने वाले जल्दी मचाते हुए कहते हैं : (ऐ मुसलमानो!) यदि तुम अपने इस दावे में सच्चे हो कि हमें मरने के बाद दोबारा जीवित होकर उठना है, तो यह वादा कब पूरा होगा?!
Enbiya 21:39
अगर मरणोपरांत दोबारा जीवित होने का इनकार करने वाले ये काफ़िर उस समय को जान लेते, जब वे अपने चेहरों और अपनी पीठों से आग को दूर नहीं कर सकेंगे, और यह कि उनका कोई मददगार नहीं होगा, जो उनसे अज़ाब को दूर कर सके। अगर इन्हें इस बात का यक़ीन होता, तो वे अज़ाब की जल्दी न मचाते।
Enbiya 21:40
यह आग, जिसके द्वारा उन्हें अज़ाब दिया जाएगा, इस तरह नहीं आएगी कि उन्हें उसका ज्ञान होगा। बल्कि, यह उनपर अचानक आएगी। इसलिए वे उसे अपने आपसे दूर नहीं कर पाएँगे, और न उन्हें इतनी मोहलत दी जाएगी कि तौबा कर लें और उन्हें अल्लाह की दया प्राप्त हो जाए।
Enbiya 21:41
यदि आपकी जाति ने आपका मज़ाक़ उड़ाया है, तो आप इस मामले में कोई अनूठे नहीं हैं। निश्चय (ऐ रसूल!) आपसे पहले भी कई रसूलों का मज़ाक़ उड़ाया गया। तो उन काफ़िरों को जो उनका मज़ाक़ उड़ाते थे, उसी यातना ने घेर लिया, जिसका वे दुनिया में मज़ाक़ उड़ाते थे, जब उनके रसूल उन्हें उससे डराते थे।
Enbiya 21:42
(ऐ रसूल!) इन यातना की जल्दी मचाने वालों से कह दें : वह कौन है जो रात और दिन में 'रहमान' (अत्यंत दयावान् अल्लाह) की ओर से तुमपर उतरने वाले अज़ाब और विनाश से तुम्हारी रक्षा करता है? बल्कि वे अपने पालनहार के उपदेशों और तर्कों को याद करने से मुँह फेरने वाले हैं, अपनी अज्ञानता और मूर्खता के कारण उनमें से किसी भी चीज़ पर विचार नहीं करते हैं।
Enbiya 21:43
या क्या उनके पास ऐसे पूज्य हैं, जो उन्हें हमारी यातना से बचाते हैं? वे तो अपने आपसे नुक़सान को दूर करके या अपने आपको लाभ पहुँचाकर खुद की भी मदद नहीं कर सकते। और जो खुद अपनी मदद नहीं कर सकता, वह किसी और की मदद कैसे करेगा?! और न ही कोई उन्हें हमारी यातना से बचाने वाला होगा।
Enbiya 21:44
बल्कि हमने इन काफ़िरों और इनके बाप-दादों के लिए, उन्हें ढील देते हुए, दुनिया की नेमतें विस्तारित कर दीं, यहाँ तक कि उनपर लंबा समय बीत गया, तो इससे वे धोखे में पड़ गए, और अपने कुफ़्र पर क़ायम रहे। तो क्या हमारी नेमतों से धोखा खाने वाले और हमारी यातना के लिए जल्दी मचाने वाले ये काफ़िर नहीं देखते कि हम धरती के लोगों को पराजित करके, उसे उसके किनारों से कम करते आ रहे हैं। इसलिए उन्हें इससे सीख ग्रहण करना चाहिए ताकि उनके साथ भी वही न हो, जो दूसरों के साथ हुआ?! चुनाँचे ये लोग विजयी (प्रभावी) रहने वाले नहीं हैं, बल्कि ये पराजित (हारे हुए) हैं।
Enbiya 21:45
(ऐ रसूल!) कह दें : (ऐ लोगो!) मैं तुम्हें अल्लाह की यातना से उस वह़्य के अनुसार डराता हूँ, जो मेरा रब मेरी ओर भेजता है। परंतु सत्य से बहरे, जब अल्लाह की यातना से डराए जाते हैं, तो उसे स्वीकार करने के उद्देश्य से नहीं सुनते।
Enbiya 21:46
और यदि इन यातना के लिए जल्दी मचाने वाले लोगों को (ऐ रसूल!) आपके पालनहार की यातना का तनिक हिस्सा भी छू जाए, तो वे उस समय अवश्य कहेंगे : हाय हमारा विनाश और हमारा नुक़सान! निश्चय हम अल्लाह का साझी बनाकर और मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की लाई हुई शरीयत का इनकार करके अत्याचार करने वाले थे।
Enbiya 21:47
और हम क़ियामत के दिन लोगों के कर्मों को तौलने के लिए न्याय के तराज़ू स्थापित करेंगे। तो उस दिन किसी व्यक्ति पर उसके अच्छे कर्मों में कमी या उसके बुरे कर्मों में वृद्धि द्वारा ज़ुल्म नहीं किया जाएगा। यदि राई के एक दाने के बराबर भी कोई चीज़ होगी, तो हम उसे ले आएँगे। और हम अपने बंदों के कामों को गिनने के लिए काफ़ी हैं।
Enbiya 21:48
हमने मूसा और हारून अलैहिमस्सलाम को तौरात दिया, जो सत्य तथा असत्य और हलाल तथा हराम के बीच अंतर करने वाला, उसपर ईमान लाने वालों को राह दिखाने वाला और अपने रब से डरने वालों के लिए उपदेश था।
Enbiya 21:49
जो अपने उस रब की यातना से डरते हैं, जिसपर वे ईमान रखते हैं, जबकि उन्होंने उसे नहीं देखा है और वे क़ियामत से डरने वाले हैं।
Enbiya 21:50
मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर उतरने वाला यह क़ुरआन, उन लोगों के लिए एक स्मरण और उपदेश है, जो इससे उपदेश ग्रहण करना चाहें, बहुत लाभ और भलाई वाला है। तो क्या इन सब के बावजूद तुम इसका इनकार कर रहे हो?! न इसकी शिक्षाओं को स्वीकार करने वाले हो और न उनपर अमल करने वालो हो?!
Enbiya 21:51
और हमने इबराहीम को बचपन में उनकी जाति के विरुद्ध तर्क प्रदान किया था और हम उन्हें अच्छी तरह जानते थे। इसलिए हमने उन्हें उनकी जाति के विरुद्ध वह तर्क प्रदान किया, जिसके वह हमारे ज्ञान के अनुसार योग्य थे।
Enbiya 21:52
जब उन्होंने अपने पिता आज़र और अपनी जाति से कहा : ये मूर्तियाँ क्या हैं, जिन्हें तुमने अपने हाथों से बनाया है और जिनकी तुम पूजा में लगे हुए हो?!
Enbiya 21:53
उनकी जाति के लोगों ने उनसे कहा : हमने अपने बाप-दादा को इनकी पूजा करते हुए पाया है, इसलिए उनका अनुकरण करते हुए हमने भी इनकी पूजा की।
Enbiya 21:54
इबराहीम अलैहिस्सलाम ने उनसे कहा : (ऐ अपने बाप-दादा के अनुयायियो!) निश्चय तुम और तुम्हारे बाप-दादा, जिनका तुमने अनुकरण किया है, सत्य के मार्ग से स्पष्ट रूप से भटके हुए थे।
Enbiya 21:55
उनकी जाति के लोगों ने उनसे कहा : आपने जो यह बात कही है, गंभीरता से कही है या आप मज़ाक़ कर रहे हैं?
Enbiya 21:56
इबराहीम अलैहिस्सलाम ने कहा : यह मज़ाक़ नहीं है, बल्कि मैंने गंभीरता से यह बात कही है। क्योंकि तुम्हारा रब वह है, जो आकाशों और धरती का रब है, जिसने उन्हें भूतपूर्व नमूने के बिना पैदा किया है। तथा मैं इस बात का गवाह हूँ कि वही तुम्हारा रब और आकाशों तथा धरती का रब है, और तुम्हारी मूर्तियों का इसमें कोई हिस्सा नहीं है।
Enbiya 21:57
इबराहीम अलैहिस्सलाम ने इस तरह से कहा कि उनकी जाति के लोग उसे न सुनें : अल्लाह की क़सम! मैं अवश्य ही तुम्हारी मूर्तियों के प्रति ऐसा उपाय करूँगा, जो तुम नापसंद करोगे, इसके बाद कि तुम उन्हें छोड़कर अपने उत्सव में चले जाओगे।
Enbiya 21:58
इबराहीम अलैहिस्सलाम ने उनकी मूर्तियों को तोड़कर उनके छोटे-छोटे टुकड़े कर दिए। और उनमें से सबसे बड़े को रहने दिया, ताकि वे उससे यह पूछने के लिए लौटें कि उन्हें किसने तोड़ा।
Enbiya 21:59
जब वे वापस आए और देखा कि उनकी मूर्तियों के टुकड़े-टुकड़े कर दिए गए हैं, तो उन्होंने एक-दूसरे से पूछा : हमारे पूज्यों को किसने तोड़ डाला? निःसंदेह जिसने उन्हें तोड़ा है, वह निश्चय ज़ालिमों में से है। क्योंकि उसने उसका तिरस्कार किया जो सम्मान और पवित्रीकरण के योग्य है।
Enbiya 21:60
उनमें से किसी ने कहा : हमने एक नवयुवक को सुना है, जो इनकी बुराई कर रहा था, उसे इबराहीम कहा जाता है। शायद उसी ने इनके टुकड़े-टुकड़े किए हैं।
Enbiya 21:61
उनके सरदारों ने कहा : इबराहीम को लोगों की दृष्टि के सामने लाओ, ताकि वे उसके अपने किए का इक़रार करने पर गवाह हो जाएँ। फिर उसका इक़रार तुम्हारे लिए उसके ख़िलाफ़ सबूत बन जाए।
Enbiya 21:62
अतः उन्होंने इबराहीम अलैहिस्सलाम को हाज़िर किया और उनसे पूछा : ऐ इबराहीम! क्या तूने ही हमारी मूर्तियों के साथ यह घिनौना काम किया है?!
Enbiya 21:63
इबराहीम अलैहिस्सलाम ने (उनका मज़ाक़ उड़ाते हुए, लोगों की दृष्टि के सामने उनकी मूर्तियों की विवशता उजागर करते हुए) कहा : मैंने ऐसा नहीं किया, बल्कि यह काम सबसे बड़ी मूर्ति का है। इसलिए अपनी मूर्तियों से पूछ लो, यदि वे बोलती हैं।
Enbiya 21:64
उन्होंने अपने मन में विचार और चिंतन किया, तो उनके लिए यह स्पष्ट हो गया कि उनकी मूर्तियाँ लाभ या हानि पहुँचाने की मालिक नहीं हैं। इसलिए वे अल्लाह को छोड़कर उनकी पूजा करने के कारण खुद ही ज़ालिम हैं।
Enbiya 21:65
फिर वे अपने हठ और इनकार पर लौट आए और बोले : (ऐ इबराहीम!) तुम अच्छी तरह जानते हो कि ये मूर्तियाँ बोलती नहीं हैं, तो तुम हमें उनसे पूछने का आदेश कैसे देते हो? यह बात उन्होंने अपने लिए एक तर्क के रूप में कही, लेकिन यह खुद उनके खिलाफ़ तर्क बन गई।
Enbiya 21:66
इबराहीम अलैहिस्सलाम ने (उनका खंडन करते हुए) कहा : क्या तुम अल्लाह को छोड़कर ऐसी मूर्तियों की पूजा करते हो, जो न तुम्हें कुछ लाभ पहुँचाती हैं, और न तुम्हें हानि पहुँचाती है। बल्कि वे खुद से हानि को टालने या अपने आपको लाभ पहुँचाने में असमर्थ हैं।
Enbiya 21:67
तुम्हारा बुरा हो, और उन मूर्तियों का भी बुरा हो, जिन्हें तुम अल्लाह को छोड़कर पूजने में लगे हो, जो न लाभ पहुँचाती हैं न हानि। क्या तुम यह बात नहीं समझते, कि उनकी पूजा छोड़ दो।
Enbiya 21:68
जब वे तर्क द्वारा उनका सामना करने में असमर्थ रहे, तो उन्होंने बल का सहारा लिया और बोले : अपनी उन मूर्तियों का समर्थन करते हुए, इबराहीम को आग से जला दो, जिन्हें इसने तोड़कर नष्ट कर दिया, यदि तुम इसे एक निवारक सज़ा देना चाहते हो।
Enbiya 21:69
उन्होंने एक आग जलाई और इबराहीम अलैहिस्सलाम को उसमें फेंक दिया, तो हमने कहा : ऐ आग! इबराहीम पर ठंडक और सुरक्षा बन जा। चुनाँचे वह ऐसी हो गई। इसलिए उन्हें कोई कष्ट नहीं पहुँचा।
Enbiya 21:70
इबराहीम अलैहिस्सलाम की जाति के लोगों ने उनके साथ यह चाल चलनी चाही कि उन्हें जला दें, तो हमने उनकी चाल को निरस्त कर दिया और उन्हीं को विनष्ट एवं पराजित होने वाले कर दिया।
Enbiya 21:71
और हमने उन्हें और लूत को बचा लिया और दोनों को निकालकर शाम (लेवंत) की भूमि पर ले गए, जिसमें हमने बरकत रखी। क्योंकि हमने उसमें नबियों को भेजे और लोगों के लिए उसमें भलाइयाँ रख दीं।
Enbiya 21:72
हमने उन्हें इसहाक़ प्रदान किया, जब उन्होंने अपने रब से एक पुत्र देने के लिए दुआ की, तथा हमने उन्हें एक अतिरिक्त याक़ूब भी प्रदान किया। इबराहीम और उनके बेटे इसहाक़ और (पोते) याक़ूब में से हर एक को हमने नेक और अल्लाह का आज्ञाकारी बनाया।
Enbiya 21:73
और हमने उन्हें पेशवा बनाया, जिनसे लोग भलाई में मार्गदर्शन प्राप्त करते थे। वे अल्लाह की अनुमति से लोगों को अकेले अल्लाह की इबादत की ओर बुलाते थे। तथा हमने उनकी ओर वह़्य भेजी कि अच्छे कार्य करो, संपूर्ण तरीक़े से नमाज़ अदा करो और ज़कात दो। और वे हमारे आज्ञाकारी थे।
Enbiya 21:74
और लूत को हमने विरोधियों के बीच निर्णय करने की क्षमता प्रदान की और उन्हें उनके धर्म का ज्ञान दिया, तथा उन्हें उस यातना से बचा लिया, जिसे हमने उनकी बस्ती (सदूम) पर उतारी थी, जिसके लोग अनैतिक कार्य करते थे। निश्चय वे भ्रष्ट लोग थे, जो अपने रब के आज्ञापालन से निकलने वाले थे।
Enbiya 21:75
और हमने उन्हें उनकी जाति पर उतरने वाली यातना से बचाकर, अपनी दया में दाखिल कर लिया। वह उन नेक लोगों में से थे, जो हमारे आदेश का पालन करते हैं और हमारे निषेधों से बचते हैं।
Enbiya 21:76
और (ऐ रसूल!) नूह़ अलैहिस्सलाम की कहानी को याद करो, जब उन्होंने इबराहीम और लूत अलैहिमस्सलाम से पहले अल्लाह को पुकारा, तो हमने उनकी पुकार का जवाब देते हुए उनकी माँग पूरी कर दी। फिर हमने उन्हें और उनके ईमान वाले परिजनों को बड़े दुःख से बचा लिया।
Enbiya 21:77
और हमने उन्हें उस जाति की चाल से बचाया, जिन्होंने रसूल की सच्चाई को दर्शाने वाली उन निशानियों को झुठलाया, जिनके द्वारा हमने उनका समर्थन किया था। निश्चय वे बिगाड़ और बुराई वाले लोग थे। तो हमने उन सभी को डुबो कर नष्ट कर दिया।
Enbiya 21:78
और (ऐ रसूल!) दाऊद और उनके बेटे सुलैमान अलैहिमस्सलाम की कहानी को याद करें, जब दोनों, दो झगड़ने वालों के मामले में फ़ैसला कर रहे थे, जो उनके पास आए थे। मामला यह था एक व्यक्ति की बकरियों ने रात को दूसरे व्यक्ति के खेत में घुसकर नुक़सान कर दिया था। और हम दाऊद और सुलैमान के फ़ैसले को देख रहे थे। उनके फैसले से कुछ भी हमारी निगाहों से ओझल नहीं था।
Enbiya 21:79
तो हमने दाऊद के बजाय, उनके बेटे सुलैमान को इस मामले का सही निर्णय सुझा दिया। जबकि दाऊद और सुलैमान में से हर एक को हमने नुबुव्वत और शरीयत के अहकाम का ज्ञान दिया था। ऐसा नहीं था कि ये चीज़ें केवल सुलैमान को प्रदान की गई हों। और हमने पहाड़ों को दाऊद के अधीन कर दिया था, जो उनके साथ अल्लाह की पवित्रता बयान करते थे। और पक्षियों को भी उनके अधीन कर दिया था। और ये मामले की समझ, हुक्म और ज्ञान प्रदान करने वाले तथा वस्तुओं को उनके अधीन करने वाले हम ही थे।
Enbiya 21:80
और हमने सुलैमान के बिना, दाऊद को कवच बनाने का हुनर सिखाया, ताकि वह हथियारों के तुम्हारे शरीर को आघात पहुँचाने से तुम्हारी रक्षा करें। तो क्या (ऐ लोगो!) तुम अपने ऊपर अल्लाह की इस नेमत का शुक्रिया अदा करने वाले हो?!
Enbiya 21:81
और हमने तेज़ बहने वाली हवा को सुलैमान के अधीन कर दिया, जो उनके आदेश पर शाम (लेवंत) की भूमि की ओर बहती थी, जिसमें हमने नबियों को भेजकर और भलाइयाँ फैलाकर बरकतें रखी थीं। और हम हमेशा से हर वस्तु को जानने वाले हैं। उसमें से कोई चीज़ हमसे छिपी नहीं है।
Enbiya 21:82
और हमने शैतानों में से भी कुछ उनके अधीन कर दिए थे, जो उनके लिए समुद्रों में डुबकी लगाकर मोतियाँ और दूसरी चीज़ें निकालते थे और इसके अलावा अन्य कार्य भी करते थे, जैसे घर बनाना। और हम उनकी संख्या और उनके कार्यों को संरक्षित करने वाले थे। उसमें से कोई चीज़ हमसे नहीं छूटती।
Enbiya 21:83
और (ऐ रसूल!) अय्यूब अलैहिस्सलाम की कहानी को याद करें, जब उन्होंने विपत्ति से ग्रस्त होने पर अपने रब को यह कहते हुए पुकारा : ऐ मेरे रब! मुझे बीमारी लग गई है और घर वाले बिछड़ गए। और तू सभी दया करने वालों में सबसे अधिक दया करने वाला है। अतः मुझसे उस विपत्ति को दूर कर दे, जो मुझे पहुँची है।
Enbiya 21:84
तो हमने उनकी दुआ स्वीकार कर ली और उन्हें जो भी कष्ट पहुँचा था, उनसे दूर कर दिया और उन्हें उनके बिछड़े हुए परिजन और बच्चे प्रदान कर दिए और उनके साथ उनके बराबर और भी दिए। यह सब कुछ हमने अपनी ओर से दया के रूप में और हर उस व्यक्ति की याद-दहानी के लिए किया, जो इबादत के साथ अल्लाह का आज्ञापालन करने वाला है, ताकि वह भी अय्यूब अलैहिस्सलाम की तरह सब्र करे।
Enbiya 21:85
और (ऐ रसूल!) इसमाईल, इदरीस और ज़ुल-किफ़्ल अलैहिमुस्सलाम को याद करें। इनमें से हर एक विपत्ति पर और अल्लाह की दी हुई ज़िम्मेवारी को अदा करने पर धैर्य से काम लेने वालों में से था।
Enbiya 21:86
हमने उन्हें अपनी दया में दाख़िल कर लिया। चुनाँचे हमने उन्हें नबी बनाए और उन्हें जन्नत में दाखिल किए। वे अल्लाह के उन सदाचारी बंदों में से थे, जिन्होंने अपने पालनहार की आज्ञा का पालन किया और उनके ज़ाहिर-ओ-बातिन (अंदर और बाहर) अच्छे थे।
Enbiya 21:87
और (ऐ रसूल!) मछली वाले नबी, यूनुस अलैहिस्सलाम की कहानी याद करें, जब वह अपनी जाति के लोगों की लगातार अवज्ञा के कारण उनसे नाराज़ होकर अपने रब की अनुमति के बिना चले गए। उन्होंने समझा कि हम उनके चले जाने की सज़ा के तौर पर उन्हें तंगी में नहीं डालेंगे। लेकिन जब मछली ने उन्हें निगल लिया, तो वह गंभीर तंगी और क़ैद से पीड़ित हुए। तो उन्होंने मछली के पेट, समुद्र और रात के अंधेरे में, अपने पाप को स्वीकार करते हुए, अल्लाह के सामने तौबा करते हुए दुआ की : तेरे सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं, तू पाक एवं पवित्र है। निश्चय मैं ही अत्याचारियों में से हो गया हूँ।
Enbiya 21:88
तो हमने उनकी दुआ स्वीकार कर ली और उन्हें अंधेरों से और मछली के पेट से निकालकर, उस संकट की तीव्रता से मुक्ति प्रदान की। और जिस तरह यूनुस अलैहिस्सलाम को संकट से मुक्ति दी, उसी तरह हम मोमिनों को मुक्ति देते हैं, यदि वे किसी संकट में पड़ जाएँ और अल्लाह से दुआ करें।
Enbiya 21:89
और (ऐ रसूल!) ज़करिया अलैहिस्सलाम की कहानी को याद करें, जब उन्होंने अपने पालनहार को यह कहते हुए पुकारा : ऐ मेरे रब! मुझे अकेला न छोड़ कि मेरी कोई औलाद न हो। और तू सबसे बेहतर बाक़ी रहने वाला है। इसलिए मुझे एक बेटा प्रदान कर, जो मेरे बाद बाक़ी रहे।
Enbiya 21:90
तो हमने उनकी दुआ स्वीकार कर ली और उन्हें यह़या के रूप में एक बेटा प्रदान किया और उनकी पत्नी को ठीक कर दिया। चुनाँचे वह बच्चा जनने वाली हो गई, जबकि वह पहले बच्चा जनने के योग्य नहीं थी। निश्चय ज़करिया, उनकी पत्नी और उनके बेटे, नेकियाँ करने में बहुत जल्दी करते थे तथा वे हमें हमारे सवाब के लोभ में और हमारी सज़ा से डरते हुए पुकारते थे और हमारे सामने गिड़गिड़ाने वाले थे।
Enbiya 21:91
तथा (ऐ रसूल!) मरयम अलैहस्सलाम की कहानी को याद करें, जिसने अपने गुप्तांग को व्यभिचार से सुरक्षित रखा, तो अल्लाह ने उनकी ओर जिबरील अलैहिस्सलाम को भेजा, जिन्होंने उनके भीतर फूँक मारी, तो उन्होंने ईसा अलैहिस्सलाम का गर्भ धारण कर लिया। वह और उनके बेटे ईसा अलैहिस्सलाम, लोगों के लिए अल्लाह के सामर्थ्य की निशानी थे, और यह कि उसे कोई भी चीज़ विवश नही कर सकती, क्योंकि उसने उन्हें बिना पिता के पैदा किया था।
Enbiya 21:92
(ऐ लोगो!) यह तुम्हारा धर्म एक ही धर्म है। और वह एकेश्वरवाद (तौहीद) है, जो इस्लाम का धर्म है। और मैं तुम्हारा रब हूँ, इसलिए एकमात्र मेरी ही इबादत करो।
Enbiya 21:93
और लोग विभिन्न गुटों में बट गए। चुनाँचे उनमें कोई एकेश्वरवादी तो कोई बहुदेववादी, कोई काफ़िर तो कोई मोमिन हो गया। तथा ये सभी अलग-अलग हो जाने वाले लोग क़ियामत के दिन केवल हमारी ही ओर लौटकर आने वाले हैं। फिर हम उन्हें उनके कर्मों का बदला देंगे।
Enbiya 21:94
उनमें से जो व्यक्ति भी नेक अमल करेगा और वह अल्लाह, उसके रसूल और आख़िरत के दिन पर ईमान रखने वाला होगा, तो उसके अच्छे कार्य को नकारा नहीं जाएगा, बल्कि अल्लाह उसका आदर करते हुए उसके प्रतिफल को कई गुना कर देगा, और वह उसे उस दिन अपने कर्म पत्र में लिखा हुआ पाएगा, जिस दिन मरणोपरांत दोबारा जीवित होगा, तो वह उसे देखकर प्रसन्न हो जाएगा।
Enbiya 21:95
जिस बस्ती के लोगों को हम उनके कुफ़्र के कारण नष्ट कर दें, उनके लिए यह असंभव कि वे इस दुनिया में लौटें; ताकि वे तौबा कर लें और उनकी तौबा स्वीकार कर ली जाए।
Enbiya 21:96
वे दोबारा कभी नहीं लौटेंगे, यहाँ तक कि जब याजूज और माजूज का बाँध खोल दिया जाएगा और वे उस दिन धरती के हर ऊँचे स्थान से तेज़ी से दौड़ते हुए आएँगे।
Enbiya 21:97
उनके निकलने से क़ियामत क़रीब आ जाएगी और उसकी भयावहता और कठिनाइयाँ दिखाई देनी लगेंगी, जिनकी सख़्त भयंकरता से काफ़िरों की आँखें खुली रह जाएँगी और वे कहेंगे : हाय हमारा विनाश, हम दुनिया में इस महान दिन की तैयारी से मस्ती और ग़फ़लत में थे। बल्कि हम कुफ़्र एवं अवज्ञा करके स्वयं पर अत्याचार करने वाले थे।
Enbiya 21:98
(ऐ मुश्रिको!) निश्चय तुम और वे मूर्तियाँ, जिन्हें तुम अल्लाह के सिवा पूजते हो और ऐसे जिन्न तथा इनसान जिनकी तुम पूजा करते हो और वे तुम्हारी इस पूजा से खुश हैं, ये सभी जहन्नम का ईंधन बनेंगे, तुम अपने पूज्यों के साथ उसमें प्रवेश करोगे।
Enbiya 21:99
यदि उनके ये पूज्य (देवता), वास्तव में पूजे जाने के योग्य होते, तो वे उन लोगों के साथ नरक में प्रवेश नहीं करते, जो उनकी पूजा करते थे। तथा पूजा करने वालों और पूज्यों में से प्रत्येक जहन्नम में जाएँगे, जिनमें वे हमेशा के लिए रहेंगे, कभी भी उससे बाहर नहीं निकलेंगे।
Enbiya 21:100
उसमें (दर्द की तीव्रता से) उनकी साँसे ज़ोर-ज़ोर से निकल रही होंगी, तथा जहन्नम में उन्हें पहुँचने वाली भयानक भयावहता की तीव्रता से वे कोई आवाज़ नहीं सुनेंगे।
Enbiya 21:101
जब मुश्रिकों ने कहा : (निश्चय ईसा और वे फ़रिश्ते जिनकी पूजा की गई है, जहन्नम में जाएँगे) तो अल्लाह ने फ़रमाया : निश्चय जिनके बारे में पहले से अल्लाह के ज्ञान में है कि वे सौभाग्यशाली हैं, जैसे ईसा अलैहिस्सलाम, वे जहन्नम से दूर रखे जाएँगे।
Enbiya 21:102
उनके कानों तक जहन्नम की आवाज़ नहीं पहुँचेगी और वे अपनी मनपसंद नेमतों और सुख-सुविधाओं में हमेशा रहने वाले होंगे। उनकी नेमतें कभी खत्म नहीं होंगी।
Enbiya 21:103
उस दिन बड़ी घबराहट उनको भयभीत नहीं करेगी, जब जहन्नम को जहन्नम वासियों समेत बंद कर दिया जाएगा और फ़रिश्ते उनका यह कहकर स्वागत करेंगे : यह है तुम्हारा वह दिन जिसका तुम दुनिया में वादा दिए जाते थे और उसमें मिलने वाली नेमतों की तुम्हें खुशख़बरी दी जाती थी।
Enbiya 21:104
जिस दिन हम आकाश को उसी तरह लपेट देंगे जिस तरह पंजिका के पन्ने पर लिखकर उसे लपेट दिया जाता है, तथा हम लोगों को उसी हाल में जमा करेंगे, जिस हाल में वे पहली बार पैदा किए गए थे। यह हमारा सच्चा वादा है जिसका उल्लंघन नहीं हो सकता। हम जो वादा करते हैं, उसे पूरा करने वाले हैं।
Enbiya 21:105
हमने 'लौह़े मह़फ़ूज़' में लिखने के बाद, उन किताबों में लिख दिया, जिन्हें हमने अपने रसूलों पर उतारा कि धरती के उत्तराधिकारी अल्लाह के सदाचारी और उसका आज्ञापालन करने वाले बंदे ही होंगे। और वे मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की उम्मत के लोग हैं।
Enbiya 21:106
निःसंदेह हमारी उतारी हुई इस नसीहत में, उन लोगों के लिए लाभ और पर्याप्तता है, जो अपने रब के बताए हुए तरीक़े के अनुसार उसकी इबादत करने वाले हैं। क्योंकि वही लोग हैं जो इससे लाभान्वित होते हैं।
Enbiya 21:107
और (ऐ मुह़म्मद!) हमने आपको समस्त मख़लूक़ के लिए दया बनाकर भेजा है, क्योंकि आप लोगों को सीधा रास्ता दिखाने और उन्हें अल्लाह की यातना से बचाने के लिए बड़े उत्सुक हैं।
Enbiya 21:108
(ऐ रसूल!) मेरी ओर, मेरे पालनहार की तरफ़ से, केवल यही वह़्य की जाती है कि तुम्हारा सच्चा पूज्य केवल एक पूज्य है, जिसका कोई साझी नहीं और वह अल्लाह है। इसलिए उसपर ईमान लाओ और उसकी आज्ञा का पालन करो।
Enbiya 21:109
फिर अगर ये लोग उस संदेश से मुँह फेरें जो आप उनके पास लाए हैं, तो (ऐ रसूल!) आप उनसे कह दें : मैंने तुम्हें बता दिया है कि मैं और तुम अलगाव के एक समान मामले पर हैं। और मुझे नहीं पता कि अल्लाह ने अपनी जिस यातना का वादा किया है, वह तुम पर कब आएगी।
Enbiya 21:110
निःसंदेह अल्लाह वह बात जानता है जो तुम खुल्लम-खुल्ला कहते हो और उसे भी जानता है जो तुम छिपाते हो। उसमें से कुछ भी उससे छिपा नहीं है और वह तुम्हें उसका बदला देगा।
Enbiya 21:111
मुझे नहीं पता शायद तुम्हें यातना देने में देरी करना, तुम्हारे लिए एक परीक्षा, ढील (प्रलोभन) और अल्लाह के ज्ञान में एक निर्धारित अवधि के लिए आपको लाभ उठाने का अवसर देना हो; ताकि तुम अपने कुफ़्र और गुमराही में अत्यधिक हो जाओ।
Enbiya 21:112
अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने अपने रब से दुआ करते हुए कहा : ऐ मेरे रब! हमारे बीच और हमारे इस कुफ़्र पर क़ायम रहने वाले समुदाय के बीच सच्चे फैसले के साथ निर्णय कर दे। और हम तुम्हारे इनकार और झुठलाने पर अपने अत्यंत दयावान् पालनहार ही की सहायता माँगते हैं।
Hacc 22:1
ऐ लोगो! अल्लाह से डरो, उसके आदेशों का पालन करके और उसकी मना की हुई बातों से बचकर। निश्चय क़ियामत के साथ जो भूकंप आदि भयानक वस्तुएँ आएँगी, उनका मामला बड़ा सख़्त है। जिसके लिए, अल्लाह को खुश करने वाले कार्य करके, तैयारी करनी चाहिए।
Hacc 22:2
जिस दिन तुम उसे देखोगे (उस दिन यह हाल होगा कि) हर दूध पिलाने वाली अपने दूध पीते बच्चे से गाफ़िल हो जाएगी और हर गर्भवती भय की गंभीरता से अपना गर्भ गिरा देगी और तू लोगों को उस दिन की भयावहता की तीव्रता से नशे में धुत व्यक्ति की तरह देखेगा, हालाँकि वे शराब के नशे में धुत नहीं होंगे, बल्कि अल्लाह की यातना बड़ी सख़्त है। वह उनके होश उड़ा देगी।
Hacc 22:3
और लोगों में से कोई ऐसा भी है, जो बिना ज्ञान के आधार के मृतकों को जीवित करने की अल्लाह की शक्ति के बारे में बहस करता है, और वह अपने विश्वास और कथन में शैतानों में से और गुमराही के इमामों में से, अपने पालनहार से सरकशी करने वाले के पीछे चलता है।
Hacc 22:4
इनसान और जिन्न के शैतानों में से उस सरकश के बारे में लिख दिया गया है कि जो उसके पीछे चलेगा और उसे सच्चा जानेगा, तो वह उसे सत्य मार्ग से भटका देगा और कुफ़्र तथा गुनाह के रास्ते पर डालकर उसे जहन्नम की यातना की ओर ले जाएगा।
Hacc 22:5
ऐ लोगो! अगर तुम्हें, मौत के बाद दोबारा ज़िंदा करने की हमारी शक्ति में संदेह है, तो अपनी रचना पर ग़ौर करो, हमने तुम्हारे पिता आदम को मिट्टी से पैदा किया, फिर उनकी संतान को वीर्य से पैदा किया, जिसे पुरुष स्त्री के गर्भाशय में डालता है, फिर वह वीर्य खून का थक्का बन जाता है, फिर वह खून का थक्का माँस के एक छोटे-से टुकड़े में बदल जाता है, जो एक बार मुँह में डालकर चबाया जा सके, फिर वह माँस का टुकड़ा या तो पूर्ण रचना में परिवर्तित होकर गर्भाशय में मौजूद रहता है, यहाँ तक कि ज़िंदा शिशु के रूप में निकलता है, या अपूर्ण रचना में बदल जाता है जिसे गर्भाशय गिरा देता है, ताकि हम तुम्हें विभिन्न चरणों में पैदा करके अपनी शक्ति के दृश्य दिखाएँ, और हम जिस भ्रूण को चाहते हैं, गर्भाशय में ठहराए रखते हैं, यहाँ तक कि एक निर्धारित समय अर्थात नौ महीने में वह जन्म लेता है, फिर हम तुम्हें तुम्हारी माताओं के पेट से शिशुओं के रूप में निकालते हैं, फिर तुम्हें भरपूर शक्ति और बुद्धि प्रदान करते हैं, तथा तुममें से कुछ लोग इससे पहले मर जाते हैं, और तुममें से कुछ लोग तब तक जीवित रहते हैं जब तक वे जीर्ण आयु तक नहीं पहुँच जाते, जहाँ ताक़त कमज़ोर हो जाती है और दिमाग़ कमज़ोर हो जाता है, यहाँ तक कि बच्चे से भी बदतर हो जाते हैं, उसमें से कुछ भी नहीं जानते जो वे जानते थे। और (इसी तरह) तुम धरती को सूखी देखते हो, उसमें पेड़-पौधे नहीं होते, फिर हम उसमें बारिश का पानी उतारते हैं, तो उसमें पौधे उग आते हैं, वह अपने पौधे की वृद्धि के कारण ऊँची हो जाती है और हर तरह के सुंदर पौधे उगाती है।
Hacc 22:6
यह सब जो हमने तुम्हारे लिए उल्लेख किया है (जैसे तुम्हारी रचना की शुरुआत और उसके चरण और उन लोगों की स्थितियाँ जो तुममें से पैदा होते हैं) इस उद्देश्य के लिए है कि तुम इस बात पर ईमान लाओ कि वह अल्लाह जिसने तुम्हें पैदा किया, वही सत्य है, जिसमें कोई संदेह नहीं है, जबकि तुम्हारी उन मूर्तियों का मामला इसके विपरीत है जिनकी तुम पूजा करते हो। और एक उद्देश्य यह भी है कि तुम यह विश्वास रखो कि अल्लाह ही मरे हुए लोगों को जीवित करेगा और यह कि वह हर चीज़ का सामर्थ्य रखता है, उसे कोई चीज़ विवश नहीं कर सकती।
Hacc 22:7
और ताकि तुम इस बात का भी विश्वास रखो कि क़ियामत आने वाली है, उसके आने में कोई शक नहीं है, और यह कि अल्लाह मरे हुए लोगों को उनकी क़ब्रों से जीवित करके उठाएगा, ताकि उन्हें उनके कार्यों का बदला दे।
Hacc 22:8
काफ़िरों में से कुछ लोग ऐसे हैं, जो अल्लाह की तौहीद के बारे में झगड़ते हैं, जबकि उनके पास सत्य तक पहुँचाने वाला कोई ज्ञान नहीं है, न वे किसी मार्गदर्शक का पालन करते हैं जो उन्हें सत्य का मार्गदर्शन करे, और न ही उनके पास अल्लाह की ओर से उतरी हुई कोई दीप्तिमान पुस्तक है, जो उन्हें मार्ग दिखाए।
Hacc 22:9
वह घमंड से अपनी गरदन मोड़ने वाला है, ताकि लोगों को ईमान और इस्लाम ग्रहण करने से रोक दे। जिसकी विशेषता यह हो, उसके लिए दुनिया में अपमान है उसे मिलने वाले दंड के कारण, तथा आख़िरत में हम उसे जलाने वाली आग की यातना चखाएँगे।
Hacc 22:10
और उससे कहा जाएगा : यह यातना जो तूने चखी है, तेरे कुफ्र एवं गुनाहों के कारण है, जो तूने कमाए हैं। और अल्लाह अपनी किसी मख़लूक़ को नाहक़ अज़ाब नहीं देता।
Hacc 22:11
लोगों में से कोई व्यक्ति ढुलमुल-यक़ीन होता है, जो अल्लाह की इबादत संदेह के साथ करता है। अगर उसे स्वास्थ्य और धन जैसी कोई भलाई प्राप्त होती है, तो वह अपने ईमान और अल्लाह की इबादत पर बना रहता है। और अगर उसे बीमारी और ग़रीबी के रूप में कोई आज़माइश आती है, तो अपने धर्म के प्रति निराशावादी होकर उससे फिर जाता है। इस तरह वह अपनी दुनिया का घाटा करता है, क्योंकि उसके कुफ़्र के कारण उसे दुनिया की कोई ऐसी चीज़ हरगिज़ नहीं मिलेगी, जो उसके भाग्य में नहीं लिखी थी। तथा वह अपनी आख़िरत का भी घाटा करता है, क्योंकि वह अल्लाह की यातना का सामना करेगा। यही तो स्पष्ट घाटा है।
Hacc 22:12
वह अल्लाह को छोड़कर ऐसे बुतों की पूजा करता है, जो न अवज्ञा के कारण नुक़सान पहुँचाते हैं और न आज्ञापालन के नतीजे में लाभ पहुँचाते हैं। यह ऐसे बुतों को पुकारना, जो हानि या लाभ नहीं पहुँचाते, ऐसी गुमराही है, जो सत्य से बहुत दूर है।
Hacc 22:13
बुतों की पूजा करने वाला यह काफ़िर ऐसी चीज़ को पुकारता है, जिसका निश्चित नुक़सान, उसके लुप्त लाभ से अधिक निकट है। वह पूज्य बहुत बुरा है, जिसका नुक़सान उसके लाभ से अधिक निकट है। वह बुरा मददगार है उसके लिए जो उससे मदद माँगता है और बुरा साथी है उसके लिए जो उसका साथ पकड़ता है।
Hacc 22:14
निःसंदेह अल्लाह उन लोगों को जो ईमान लाए और अच्छे कार्य किए, ऐसे बाग़ों में दाख़िल करेगा, जिनके महलों के नीचे से नहरें बहती हैं। निःसंदेह अल्लाह जो चाहता है, करता है। जिसपर चाहता है, दया करता है, और जिसे चाहता है सज़ा देता है, उसे कोई मजबूर करने वाला नहीं है।
Hacc 22:15
जो व्यक्ति यह सोचता है कि अल्लाह दुनिया और आख़िरत में अपने नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की मदद नहीं करेगा, वह अपने घर की छत से एक रस्सी बाँध ले, फिर अपने शरीर को धरती से अलग करके उसके साथ अपना गला घोंट ले (और मर जाए), फिर देखे कि क्या इससे उसके दिल में पाया जाने वाला क्रोध समाप्त हो जाता है? अल्लाह हर हाल में अपने रसूल की मदद करने वाला है, आपका शत्रु चाहे या न चाहे।
Hacc 22:16
जिस तरह हमने तुम्हारे सामने मरने के बाद पुनर्जीवित करके उठाने के स्पष्ट प्रमाण प्रस्तुत किए हैं, उसी तरह हमने मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर क़ुरआन को खुली आयतों के रूप में उतारा है, और यह कि अल्लाह जिसे चाहता हे, अपने अनुग्रह से सीधे रास्ते पर लगा देता है।
Hacc 22:17
इस उम्मत के जो लोग अल्लाह पर ईमान लाए, तथा यहूदी, साबी (किसी नबी के अनुयायियों का एक समूह), ईसाई, अग्नि पूजक और मूर्तिपूजा करने वाले - अल्लाह क़ियामत के दिन इनके बीच फैसला कर देगा। चुनाँचे मोमिनों को जन्नत में दाखिल करेगा और उनके सिवा अन्य लोगों को जहन्नम में दाखिल करेगा। अल्लाह अपने बंदों के कथनों और कर्मों में से हर चीज़ से अवगत है। इनमें से कोई चीज़ उससे छिपी नहीं है और वह उन्हें इनका बदला देगा।
Hacc 22:18
(ऐ रसूल!) क्या आप नहीं जानते कि आसमान के सारे फ़रिश्ते, ज़मीन के सारे ईमान वाले जिन्न और इनसान अल्लाह को, उसकी आज्ञाकारिता के तौर पर सजदा करते हैं, तथा सूरज उसी को सजदा करता है, चाँद उसी को सजदा करता है, तथा आसमान के सितारे और धरती के पर्वत, पेड़ और सारे जानवर अधीनता के तौर पर उसी को सजदा करते हैं। तथा बहुत-से लोग भी आज्ञाकारिता के तौर पर उसी को सजदा करते हैं, जबकि बहुत-से लोग आज्ञाकारिता के तौर पर उसके सामने सजदा करने से उपेक्षा करते हैं। तो ऐसे लोगों पर उनके कुफ़्र के कारण अल्लाह की यातना साबित हो गई। और अल्लाह जिस व्यक्ति पर उसके कुफ़्र के कारण अपमान एवं तिरस्कार का फैसला कर दे, तो उसका सम्मान करने वाला कोई नहीं है। निःसंदेह अल्लाह जो चाहता है, करता है। उसे कोई मजबूर करने वाला नहीं है।
Hacc 22:19
ये दो समूह हैं, जो अपने पालनहार के बारे में इस बात पर झगड़ने वाले हैं कि उनमें से कौन सत्य पर है : एक समूह ईमान वालों का और एक समूह काफ़िरों का है। काफ़िरों के समूह को आग उसी तरह घेर लेगी, जिस तरह वस्त्र, उसके पहनने वाले को घेर लेता है, और उनके सिरों पर अत्यंत गर्म पानी उंडेला जाएगा।
Hacc 22:20
उसकी गर्मी की तीव्रता के कारण उसके साथ उनके पेट के अंदर की अंतड़ियाँ पिघला दी जाएँगी और वह उनकी त्वचा तक पहुँचकर उन्हें भी पिघला देगा।
Hacc 22:21
और उनके लिए जहन्नम में लोहे के हथौड़े हैं, जिनसे फ़रिश्ते उनके सिरों पर मारेंगे।
Hacc 22:22
जब भी वे उसकी कठोर यातना से तंग आकर जहन्नम से बाहर निकलने की कोशिश करेंगे, उन्हें उसी में लौटा दिया जाएगा और उनसे कहा जाएगा : जलाने वाली आग का स्वाद चखो।
Hacc 22:23
और ईमान वालों का समूह, अर्थात् वे लोग, जो अल्लाह पर ईमान लाए और अच्छे कार्य किए, अल्लाह उन्हें ऐसे बाग़ों में दाख़िल करेगा, जिनके महलों और पेड़ों के नीचे से नहरें बहती हैं। अल्लाह उन्हें सोने के कंगन के साथ सुशोभित करेगा और उन्हें मोतियों से अलंकृत करेगा, तथा वहाँ उनके कपड़े रेशम के होंगे।
Hacc 22:24
तथा अल्लाह ने उन्हें इस सांसारिक जीवन में पवित्र बातों का मार्ग दिखाया, जैसे इस बात की गवाही देना कि अल्लाह के सिवा कोई पूज्य नहीं है, अल्लाह की बड़ाई बयान करना और उसकी प्रशंसा करना। तथा उन्हें इस्लाम के प्रशंसित मार्ग का मार्गदर्शन किया।
Hacc 22:25
निश्चय जिन लोगों ने अल्लाह के साथ कुफ़्र किया और दूसरे लोगों को इस्लाम ग्रहण करने से रोकते हैं, और लोगों को मस्जिदे हराम से रोकते हैं, जैसा कि मुश्रिकों ने हुदैबिया के वर्ष किया, तो हम उन्हें दर्दनाक यातना चखाएँगे। वह मस्जिद जिसे हमने लोगों के लिए उनकी नमाज़ में क़िबला, तथा हज्ज और उम्रा के अनुष्ठानों में से एक अनुष्ठान बनाया है, उसमें मक्के में रहने वाले उसके निवासी और मक्के के अलावा दूसरे स्थानों से आने वाले (ग़ैर मक्कावासी) सब बराबर हैं। और जो भी वहाँ जानबूझकर किसी गुनाह का कार्य करके सत्य से हटने का इरादा करेगा, हम उसे दर्दनाक यातना चखाएँगे।
Hacc 22:26
और (ऐ रसूल) उस समय को याद करें, जब हमने इबराहीम अलैहिस्सलाम को काबा का स्थान और उसकी सीमाएँ बता दीं, जबकि वह अज्ञात था। और हमने उनकी ओर वह़्य भेजी कि मेरी इबादत में किसी को साझी न बनाना, बल्कि केवल मेरी ही इबादत करना और मेरे घर को उसका तवाफ़ करने वालों और उसमें नमाज़ पढ़ने वालों के लिए नज़र आने वाली और नज़र न आने वाली (ज़ाहिरी व बातिनी) अशुद्धियों से पवित्र रखना।
Hacc 22:27
और लोगों को इस घर के हज्ज की ओर बुलाते हुए घोषणा कर दें, जिसे हमने आपको बनाने का आदेश दिया है; वे आपके पास पैदल या ऐसे ऊँटों पर सवार होकर चले आएँगे, जो लंबी दूरी तय करने के कारण कमज़ोर हो चुके होंगे, ऊँट उन्हें अपने ऊपर सवार करके हर दूर-दराज़ रास्ते से ले आएँगे।
Hacc 22:28
ताकि वे उन लाभों को प्राप्त करने के लिए हाज़िर हों, जो उन्हें मिलने वाले हैं, जैसे गुनाहों की माफ़ी, सवाब की प्राप्ति और मुसलमानों के अंदर एकता पैदा करना आदि, और ताकि वे ज्ञात दिनों अर्थात : ज़ुल-हिज्जा की दसवीं तारीख़ और उसके बाद के तीन दिनों में जो 'हदी' (क़ुर्बानी के जानवर) ज़बह करते हैं, उनपर अल्लाह का नाम लें, उसपर अल्लाह का शुक्रिया अदा करते हुए जो उसने उन्हें ऊँट, गाय और भेड़-बकरी जैसे चौपाए प्रदान किए। तो तुम इन 'हदी' के जानवरों का मांस खुद खाओ और सख्त निर्धनों को खिलाओ।
Hacc 22:29
फिर वे अपने हज्ज के शेष अनुष्ठानों को पूरा करें, तथा अपने सिर मुंडवाकर और अपने नाखूनों को काटकर और एहराम के कारण अपने शरीर पर जमी गंदगी को हटाकर हलाल हो जाएँ। फिर वे हज्ज या उम्रा या क़ुर्बानी की अपनी मानी हुई मन्नत पूरी करें, और उस घर का तवाफ़े-इफ़ाज़ा करें, जिसे अल्लाह ने दमन करने वाले शासकों के प्रभुत्व से मुक्त रखा है।
Hacc 22:30
ये जो तुम्हें आदेश दिए गए हैं (जैसे सिर मुंडवाना, नाखून काटना और मैल-कुचैल दूर करना, मन्नत पूरी करना और का'बा का तवाफ़ करना), इन्हें अल्लाह ने तुमपर अनिवार्य किया है। अतः अल्लाह की अनिवार्य की हुई चीज़ों का सम्मान करो। और जो व्यक्ति अपने एहराम की स्थिति में उन चीज़ों से बचता है जिनसे बचने का अल्लाह ने उसे आदेश दिया है; अल्लाह की सीमाओं का सम्मान करते हुए उनका उल्लंघन करने और उसके निषेधों को हलाल ठहराने से बचता है, तो यह उसके लिए उसके रब के पास दुनिया एवं आख़िरत में बेहतर है। और (ऐ लोगो!) तुम्हारे लिए चौपायों अर्थात ऊँट, गाय और भेड़-बकरी को हलाल किया गया है। चुनाँचे उनमें से तुम्हारे लिए 'हामी', 'बहीरा' और 'वसीला' आदि जानवरों को हराम नहीं किया है। उनमें से केवल वही हराम किया है, जिनका वर्णन तुम क़ुरआन में पाते हो, जैसे मरे हुए जानवर और बहते रक्त आदि का हराम होना। इसलिए गंदगी अर्थात् मूर्तियों से बचो, और हर असत्य बात से बचो, जिसे अल्लाह या उसकी मख़लूक की ओर झूठे तौर पर मनसूब कर दिया गया हो।
Hacc 22:31
इन सभी चीज़ों से बचो, इस हाल में कि अल्लाह के निकट पसंदीदा धर्म के अलावा हर धर्म से अलग होने वाले हो, उसके साथ इबादत में किसी को शरीक ठहराने वाले न हो। और जिसने अल्लाह के साथ किसी को साझी ठहराया, वह ऐसा है जैसे वह आसमान से गिर गया, अब या तो पक्षी उसके मांस और हड्डियों को उचक लेंगे, या हवा उसे कहीं दूर फेंक देगी।
Hacc 22:32
यह वे काम हैं, जिनका अल्लाह ने आदेश दिया है, जैसे अल्लाह को एकमात्र पूज्य मानना, खालिस उसी की पूजा करना और बुतों तथा झूठी बात से बचना। और जो अल्लाह के धर्म के प्रतीकों (जैसे क़ुर्बानी के जानवर और हज्ज के अनुष्ठानों आदि) का सम्मान करता है, तो उनका सम्मान इस बात का प्रमाण है कि दिलों में अल्लाह का तक़वा (भय) है।
Hacc 22:33
तुम्हारे लिए उन क़ुर्बानी के जानवरों में, जिन्हें तुम काबा के पास ज़बह करते हो, कई लाभ हैं, जैसे कि सवारी, ऊन, नस्ल की बढ़ोतरी और दूध आदि। एक विशिष्ट अवधि के लिए है, जो अल्लाह के उस घर के पास ज़बह करने के समय के साथ निर्धारित है, जिसे अल्लाह ने दमन करने वाले शासकों के प्रभुत्व से मुक्त रखा रखा है।
Hacc 22:34
और हमने गुज़रे हुए हर समुदाय के लिए अल्लाह को अर्पण के रूप में खून बहाने के लिए एक अनुष्ठान निर्धारित किया है, इस आशा में कि वे उन बलिदानों को ज़बह करते समय इस बात पर अल्लाह का शुक्रिया अदा करते हुए उसका नाम लें कि उसने उन्हें ऊँट, गाय और भेड़-बकरी आदि चौपाए प्रदान किए। तो (ऐ लोगो!) तुम्हारा पूज्य एक ही पूज्य है, जिसका कोई साझी नहीं। इसलिए अकेले उसी के अधीन रहो और उसके आदेशानुसार चलो। और (ऐ रसूल!) अपने रब के आगे झुकने वालों और केवल उसी की पूजा करने वालों को उस चीज़ की सूचना दे दें, जो उन्हें खुश करने वाली है।
Hacc 22:35
जिनका हाल यह है कि जब अल्लाह का नाम लिया जाता है, तो उसकी सज़ा से भयभीत होकर उसके आदेश का उल्लंघन करने से बचते हैं, और यदि उनपर कोई विपत्ति आती है तो वे धैर्य रखते हैं, तथा पूर्ण रूप से नमाज़ पढ़ते हैं, और अल्लाह के दिए धन से नेकी के कार्यों पर खर्च करते हैं।
Hacc 22:36
हमने उन क़ुर्बानी के ऊँटों और गायों को, जिन्हें अल्लाह के घर की तरफ़ ले जाया जाता है, तुम्हारे लिए धर्म के अनुष्ठानों और प्रतीकों में से बनाया है। उनके अंदर तुम्हारे लिए धार्मिक और सांसारिक लाभ हैं। अतः उन्हें ज़बह करते समय (बिस्मिल्लाह) कहो, जबकि तीन टाँगों के बल खड़ा करके एक अगली टाँग बाँधी हुई हो, ताकि भाग न सकें। फिर जब ज़बह करने के बाद अपने पहलू के बल लेट जाएँ, तो (ऐ क़ुर्बानी करने वालो !) उनका मांस खुद खाओ और उस निर्धन को दो, जो माँगने से बचता है और उस निर्धन को भी दो, जो माँगता है। जिस तरह हमने उन्हें तुम्हारे वश में कर दिया है, ताकि तुम उनके ऊपर सामान लादो और उनकी सवारी करो, उसी तरह हमने उन्हें तुम्हारे वश में कर दिया है कि वहाँ तक चले जाते हैं, जहाँ तुम उन्हें अल्लाह की निकटता प्राप्त करने के लिए ज़बह करते हो। ताकि तुम उन्हें तुम्हारे वश में करने की इस नेमत पर अल्लाह का शुक्रिया अदा करो।
Hacc 22:37
तुम्हारे क़ुर्बानी किए हुए जानवरों का मांस या रक्त अल्लाह के पास हरगिज़ नहीं पहुँचेगा। और न हीं उन्हें उस तक पहुँचाया जाएगा। लेकिन उसके पास तुम्हारा उनके बारे में अल्लाह से डरना पहुँचाया जाएगा; इस प्रकार कि तुम उन्हें केवल अल्लाह की निकटता प्राप्त करने के लिए ज़बह करो। इसी तरह, अल्लाह ने उन्हें तुम्हारे वश में कर दिया है, ताकि तुम सत्य मार्ग दिखाने पर अल्लाह का शुक्रिया अदा करते हुए उसकी महिमा का गान करो। और (ऐ रसूल!) उन लोगों को खुशख़बरी दे दें, जो अच्छी तरह अल्लाह की इबादत करते हैं और उसकी मख़लूक़ के साथ अच्छा व्यवहार करते हैं।
Hacc 22:38
निःसंदेह अल्लाह ईमान वालों को उनके दुश्मनों की बुराई से बचाता है। निश्चय अल्लाह हर उस व्यक्ति से प्रेम नहीं करता, जो अमानत में ख़ियानत करने वाला और अल्लाह की नेमतों की नाशुक्री करने वाला हो। चुनाँचे वह उसका शुक्रिया अदा न करता हो, बल्कि उससे घृणा करता हो।
Hacc 22:39
अल्लाह ने उन ईमान वालों को युद्ध की अनुमति दे दी है, जिनसे मुश्रिक लोग युद्ध करते हैं, क्योंकि उनके दुश्मनों की ओर से उनपर बड़ा अत्याचार हुआ है, और निश्चय अल्लाह युद्ध के बिना ही ईमान वालों को उनके शत्रुओं पर विजय प्रदान करने की शक्ति रखता है, लेकिन उसकी हिकमत की अपेक्षा यह है कि वह मोमिनों को काफ़िरों से युद्ध के माध्यम से आज़माए।
Hacc 22:40
वे लोग जिन्हें काफ़िरों ने उनके घरों से अन्यायपूर्ण तरीक़े से निकाल दिया, न कि उनके द्वारा किए गए किसी अपराध के कारण, उन्होंने केवल इतना कहा था : हमारा पालनहार अल्लाह है, उसके सिवा हमारा कोई पालनहार नहीं है। और अगर अल्लाह नबियों और ईमान वालों के लिए दुश्मनों से युद्ध करना धर्मसंगत न बनाया होता, तो वे इबादत के स्थानों पर हमला करते और संतों के आश्रम, ईसाइयों के गिरजे, यहूदियों के पूजा स्थल और मुसलमानों की मस्जिदों को ध्वस्त कर देते, जिनमें मुसलमान अल्लाह को बहुत ज़्यादा याद करते हैं। निश्चय अल्लाह ज़रूर उसकी मदद करेगा, जो उसके धर्म और नबी की मदद करने वाला है। निःसंदेह अल्लाह उसकी मदद करने में सक्षम है, जो उसके धर्म की मदद करता है। वह प्रभुत्वशाली है, उसपर किसी का ज़ोर नहीं चलता।
Hacc 22:41
ये लोग जिनसे विजय का वादा किया गया है, वे हैं कि यदि हम उन्हें उनके दुश्मनों पर विजय देकर धर्ती में उन्हें आधिपत्य प्रदान करें, तो वे पूर्ण रूप से नमाज़ पढ़ेंगे, अपने धन की ज़कात देंगे, शरीयत ने जिन कामों का आदेश दिया है उनका हुक्म देंगे और जिन कामों से रोका है उनसे रोकेंगे। और सवाब तथा सज़ा देने के संबंध में सभी मामले केवल अल्लाह ही की ओर लौटते हैं।
Hacc 22:42
और (ऐ रसूल!) यदि आपकी जाति के लोग आपको झुठलाते हैं, तो आप सब्र से काम लें। क्योंकि आप पहले व्यक्ति नहीं हैं, जिसे उसकी जाति के लोगों ने झुठलाया हो। आपकी जाति से पहले नूह अलैहिस्सलाम की जाति के लोगों ने नूह अलैहिस्सलाम को, आद जाति के लोगों ने हूद अलैहिस्सलाम को और समूद जाति के लोगों ने सालेह अलैहिस्सलाम को झुठलाया।
Hacc 22:43
तथा इबराहीम अलैहिस्सलाम की जाति के लोगों ने इबराहीम अलैहिस्सलाम को और लूत अलैहिस्सलाम की जाति ने लूत अलैहिस्सलाम को झुठलाया।
Hacc 22:44
तथा मदयन वालों ने शुऐब अलैहिस्सलाम को झुठलाया, और फ़िरऔन और उसकी जाति के लोगों ने मूसा अलैहिस्सलाम को झुठलाया, तो मैंने उन्हें ढील देते हुए उनको यातना देने में देरी की, फिर उन्हें यातना से ग्रस्त कर दिया। तो विचार करो कि उनके प्रति मेरा इनकार कैसा था? मैंने उनके कुफ़्र के कारण उन्हें नष्ट कर दिया।
Hacc 22:45
कितनी ही ऐसी बस्तियाँ हैं, जिन्हें हमने एक उन्मूलन करने वाली यातना के द्वारा नष्ट कर दिया (जबकि वे अपने कुफ़्र के कारण अत्याचारी थीं)। तो उनके घर ध्वस्त होकर निवासियों से खाली पड़े हैं। तथा कितने ऐसे कुएँ हैं, जो उनपर पानी लेने के लिए आने वालों से उनके विनाश के कारण खाली पड़े हैं, और कितने ऐसे ऊँचे-ऊँचे अलंकृत महल हैं, जो अपने निवासियों को यातना से नहीं बचा सके।
Hacc 22:46
क्या रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की लाई हुई शिक्षाओं का इनकार करने वाले ये लोग धरती में नहीं चले-फिरे, ताकि उन विनष्ट बस्तियों के निशान (खंडहर) देखें, और अपने मन से विचार करके शिक्षा ग्रहण करें, तथा उनकी कहानियों को मानने के उद्देश्य से सुनकर सीख लें, क्योंकि असल अंधापन आँख का अंधापन नहीं है, बल्कि विनाशकारी अंधापन अंतर्दृष्टि का अंधापन है, जिसके बाद इनसान न शिक्षा ग्रहण करता है और न सीख प्राप्त करता है।
Hacc 22:47
और (ऐ रसूल!) आपकी जाति के काफ़िरों को जब दुनिया एवं आख़िरत की यातना से डराया जाता है, तो उसे जल्दी लाने की माँग करने लगते हैं, हालाँकि अल्लाह ने उनसे जो वादा किया है, वह उसके विरुद्ध हरगिज़ नहीं करेगा। दुनिया की यातना का एक अंश वह पराजय भी है, जिसका सामना उन्हें बद्र के दिन करना पड़ा, और आख़िरत की यातना का एक दिन, कष्टदायक होने के कारण, तुम्हारी दुनिया की गिनती के अनुसार एक हज़ार साल के बराबर है।
Hacc 22:48
और कितनी ही बस्तियाँ ऐसी हैं, जिन्हें मैंने यातना में मोहलत दी, जबकि वे अपने कुफ़्र के कारण अत्याचारी थीं, और उन्हें ढील देने के उद्देश्य से उन्हें दंडित करने में जल्दी नहीं की। फिर मैंने उन्हें विनाशकारी यातना से ग्रस्त कर दिया। और केवल मेरी ही ओर क़ियामत के दिन उन सब को लौटना है, फिर मैं उन्हें उनके कुफ़्र के कारण स्थायी यातना से ग्रस्त करूँगा।
Hacc 22:49
(ऐ नबी!) आप कह दें : ऐ लोगो! मैं तो केवल तुम्हें डराने वाला हूँ। मैं तुम्हें वह संदेश पहुँचाता हूँ, जिसे देकर मैं भेजा गया हूँ, अपने डराने में स्पष्ट हूँ।
Hacc 22:50
तो जो लोग अल्लाह पर ईमान लाए और अच्छे कार्य किए, उनके लिए उनके रब की ओर से उनके गुनाहों की क्षमा है और जन्नत में सम्मान की रोज़ी है, जो कभी ख़त्म नहीं होगी।
Hacc 22:51
और जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाने के लिए दौड़-भाग की, यह अनुमान करते हुए कि वे अल्लाह को विवश कर देंगे और उससे बच निकलेंगे, इसलिए वह उन्हें अज़ाब नहीं दे सकेगा। यही लोग नरकवासी हैं, जो उसके साथ वैसे ही रहेंगे जैसे एक मित्र अपने मित्र के साथ रहता है।
Hacc 22:52
हमने (ऐ रसूल!) आपसे पहले जिस रसूल या नबी को भेजा, (उसके साथ यह हुआ कि) जब वह अल्लाह की किताब पढ़ता, तो शैतान उसके पाठ में ऐसी चीज़ मिला देता, जिसके द्वारा वह लोगों को इस भ्रम में डाल देता कि वह अल्लाह की वह़्य में से है, तो अल्लाह शैतान की मिलाई हुई बात को मिटा देता और अपनी आयतों को सुदृढ़ कर देता। अल्लाह हर चीज़ को जानने वाला है, उससे कोई चीज़ छिपी नहीं रहती, अपनी रचना, नियति तथा प्रबंधन में हिकमत वाला है।
Hacc 22:53
शैतान नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पढ़ने के समय कुछ बातें डालकर संदेह पैदा करता है, ताकि अल्लाह शैतान जो कुछ संशय डालता है उसे मुनाफ़िक़ों के लिए और उन मुश्रिकों के लिए जिनके दिल सख़्त हैं, एक परीक्षण बना दे। तथा मुनाफ़िक़ों और मुश्रिकों में से अत्याचारी लोग, अल्लाह और उसके रसूल की दुश्मनी में पड़े हुए हैं तथा सत्य एवं हिदायत से दूर हैं।
Hacc 22:54
और ताकि जिन लोगों को अल्लाह ने ज्ञान दिया है, वे निश्चित हो जाएँ कि मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर उतरने वाला क़ुरआन ही वह सत्य है, जिसकी अल्लाह ने (ऐ रसूल!) आपकी ओर वह़्य (प्रकाशना) की है। इस प्रकार उनका उसपर ईमान बढ़ जाए और उनके हृदय उसके अधीन हो जाएँ और उसके सामने झुक जाएँ। निःसंदेह अल्लाह अपने ऊपर ईमान रखने वालों को, उनके उसके आगे झुकने के प्रतिफल के तौर पर, सत्य का सीधा मार्ग दिखाने वाला है, जिसमें कोई टेढ़ापन नहीं है।
Hacc 22:55
अल्लाह का इनकार करने वाले और उसके रसूल को झुठलाने वाले, आप पर अल्लाह की ओर से उतरने वाले क़ुरआन के बारे में निरंतर संदेह ही में पड़े रहेंगे, यहाँ तक कि उनके इसी हाल में रहते हुए अचानक उनके पास क़ियामत आ जाए, या उनपर ऐसे दिन की यातना आ जाए, जिसमें उन पर कोई दया या भलाई न होगी, और वह उनके लिए क़ियामत का दिन है।
Hacc 22:56
क़ियामत के दिन (जिस दिन इन लोगों के पास वह यातना आ जाएगी, जिसका उनसे वादा किया जाता था) संपूर्ण बादशाहत केवल अल्लाह की होगी, इसमें उसका कोई विरोधी नहीं होगा। वह महिमावान मोमिनों और काफ़िरों के बीच फ़ैसला करेगा। वह उनमें से प्रत्येक लिए उसी का निर्णय करेगा जिसका वह हक़दार होगा। चुनाँचे जो लोग अल्लाह पर ईमान लाए और अच्छे कार्य किए, उनके लिए एक महान बदला है और वह कभी खत्म न होने वाली अनंत आनंद की जन्नतें हैं।
Hacc 22:57
जिन लोगों ने अल्लाह का इनकार किया और हमारे रसूलों पर उतरने वाली हमारी आयतों को झुठलाया, उन्हीं के लिए अपमानजनक यातना है, जिसके द्वारा अल्लाह उन्हें जहन्नम में अपमानित करेगा।
Hacc 22:58
जिन लोगों ने अल्लाह की प्रसन्नता प्राप्त करने और उसके धर्म को सर-बुलंद करने के लिए अपना घरबार और वतन छोड़ा, फिर उसके रास्ते में जिहाद करते हुए मारे गए या मर गए, निश्चय अल्लाह उन्हें जन्नत में बेहतरीन स्थायी रोज़ी देगा, जो कभी खत्म न होगी। और पवित्र अल्लाह ही सबसे उत्तम रोज़ी देने वाला है।
Hacc 22:59
निश्चित रूप से अल्लाह उन्हें ऐसे स्थान में अवश्य दाखिल करेगा, जिससे वे प्रसन्न हो जाएँगे और वह जन्नत है। निःसंदेह अल्लाह उनके कार्यों और इरादों को जानता है, और वह अत्यंत सहनशील है क्योंकि उसने उन्हें उनकी कोताहियों पर दंडित करने में जल्दी नहीं की।
Hacc 22:60
यह जिसका उल्लेख किया गया है; अल्लाह के रास्ते में अपना घरबार छोड़ने वालों को जन्नत में दाखिल करना और अत्याचार करने वाले से उसके अत्याचार का उसी के समान बदला लेने की अनुमति ताकि उसके लिए उस पर कोई पाप न हो। फिर यदि अत्याचारी दोबारा अत्याचार करे, तो अल्लाह उसकी अवश्य मदद करेगा जिसपर अत्याचार किया गया है। निःसंदेह अल्लाह ईमान वालों के गुनाहों को माफ़ करने वाला, उन्हें क्षमा करने वाला है।
Hacc 22:61
अत्याचार के शिकार व्यक्ति की यह मदद इसलिए है, क्योंकि अल्लाह जो चाहे उसे करने में सक्षम है। और उसकी क्षमता में से रात को दिन में दाखिल करना और दिन को रात में दाखिल करना है; इस प्रकार कि वह उन दोनों में से एक में वृद्धि करता और दूसरे में कमी करता है। और यह कि अल्लाह अपने बंदों की बातों को सुनने वाला, उनके कार्यों को जानने वाला है। इनमें से कोई चीज़ उससे छिपी नहीं है और वह उन्हें उनका बदला देगा।
Hacc 22:62
रात को दिन में दाखिल करने और दिन को रात में दाखिल करने का यह क्रम इसलिए है, क्योंकि अल्लाह ही सत्य है, उसका धर्म सत्य है, उसका वादा सत्य है और उसका ईमान वालों की मदद करना सत्य है, और यह कि मुश्रिक लोग जिन मूर्तियों की अल्लाह को छोड़कर पूजा करते हैं, वे झूठी और निराधार हैं, और यह कि अल्लाह ही अपनी मख़्लूक़ से व्यक्तित्व, सम्मान और शक्ति की दृष्टि से बहुत ऊँचा है, जो बहुत महान है, जिसके लिए बड़ाई, महानता और प्रताप है।
Hacc 22:63
(ऐ रसूल!) क्या आपने नहीं देखा कि अल्लाह ने आकाश से कुछ बारिश बरसाया, फिर धरती उसपर बारिश उतरने के बाद अपने उगाए हुए पौधों के साथ हरी-भरी हो जाती है। निश्चय अल्लाह अपने बंदों पर बहुत दया करने वाला है कि उनके लिए बारिश उतारा और उनके लिए धरती पर पौधे उगाए, उनके हितों से पूरी तरह अवगत है, उनमें से कुछ भी उससे छिपा नहीं है।
Hacc 22:64
जो कुछ आकाशों में और जो कुछ धरती में है, उन सब का मालिक अकेला अल्लाह है, और अल्लाह ही वह बेनियाज़ है, जिसे अपनी किसी मख़लूक़ की आवश्यकता नहीं है, हर हाल में प्रशंसनीय है।
Hacc 22:65
(ऐ रसूल!) क्या आपने नहीं देखा कि अल्लाह ने तुम्हारे लाभों तथा तुम्हारी आवश्यकताओं के लिए धरती के ऊपर मौजूद जानदारों और निर्जीव वस्तुओं को आपके तथा लोगों के वश में कर दिया है, और नावों को तुम्हारे वश में कर दिया है कि वे उसके आदेश और उसके वशीकरण से समुद्र में एक शहर (देश) से दूसरे शहर (देश) की ओर जाती हैं, और उसी ने आसमान को थाम रखा है ताकि उसकी अनुमति के बिना ज़मीन पर न गिरे। अगर वह उसे ज़मीन के ऊपर गिरने की अनुमति दे दे, तो वह गिर जाए। निःसंदेह अल्लाह लोगों के लिए अति करुणामय, अत्यंत दयावान् है, क्योंकि उसने उनके अत्याचार के बावजूद इन वस्तुओं को उनके वश में कर रखा है।
Hacc 22:66
अल्लाह वही है, जिसने तुम्हें अनस्तित्व से अस्तित्व में लाकर जीवन प्रदान किया, फिर जब तुम्हारी आयु समाप्त हो जाएगी, तो तुम्हें मौत देगा, फिर तुम्हारी मृत्यु के बाद तुम्हारे कर्मों का हिसाब लेने और तुम्हें उनका बदला देने के लिए तुम्हें फिर से जीवित करेगा। निश्चय इनसान, अल्लाह के साथ दूसरों की इबादत करके, उसकी नेमतों का (जबकि वे स्पष्ट हैं) बहुत ज़्यादा इनकार करने वाला है।
Hacc 22:67
हर समुदाय के लोगों के लिए हमने एक शरीयत बनाई है, और वे अपनी शरीयत के अुनसार कार्य करते हैं। इसलिए (ऐ रसूल!) मुश्रिकों और अन्य धर्मों के लोगों को आपकी शरीयत के बारे में हरगिज़ झगड़ना नहीं चाहिए, क्योंकि आप उनकी तुलना में सत्य के अधिक योग्य हैं। जबकि वे असत्य पर चलने वाले हैं। तथा आप लोगों को अल्लाह के लिए तौहीद को ख़ालिस करने की ओर बुलाएँ। निःसंदेह आप तो निश्चय एक सीधे रास्ते पर हैं, जिसमें कोई टेढ़ापन नहीं है।
Hacc 22:68
और यदि वे तर्क स्पष्ट हो जाने के बाद भी आपके साथ बहस करने से बाज़ न आएँ, तो धमकी के तौर पर यह कहते हुए उनके मामले को अल्लाह के हवाले कर दें कि : तुम जो कुछ कर रहे हो, उससे अल्लाह अच्छी तरह अवगत है। तुम्हारे कामों में से कुछ भी उससे छिपा नहीं है और वह तुम्हें उनका बदला देगा।
Hacc 22:69
अल्लाह अपने मोमिन और काफ़िर बंदों के बीच क़ियामत के दिन धर्म के उस मामले में फ़ैसला कर देगा, जिसके बारे में वे दुनिया में मतभेद किया करते थे।
Hacc 22:70
(ऐ रसूल!) क्या आप नहीं जानते कि अल्लाह आसमान की सारी चीज़ों को जानता है और धरती की सारी चीज़ों को जानता है। इन दोनों की कोई चीज़ उससे छिपी नहीं है। इन सारी बातों का ज्ञान लौहे महफ़ूज़ (संरक्षित पट्टिका) में अंकित है और इन चीज़ों का ज्ञान अल्लाह पर आसान है।
Hacc 22:71
और मुश्रिक लोग अल्लाह को छोड़कर ऐसी मूर्तियों की पूजा करते हैं, जिनकी पूजा करने का अल्लाह ने अपनी पुस्तकों में कोई प्रमाण नहीं उतारा है, तथा इसके लिए उनके पास ज्ञान का भी कोई सबूत नहीं है। उनका प्रमाण केवल अपने बाप-दादा का अंधा अनुकरण है। और ज़ालिमों का कोई मददगार नहीं, जो उन्हें अल्लाह की यातना से बचा सके।
Hacc 22:72
और जब उनके सामने हमारे क़ुरआन की स्पष्ट आयतें पढ़ी जाती हैं, तो आप अल्लाह के साथ कुफ़्र करने वालों के चेहरों में, क़ुरआन सुनने के समय उनकी त्योरी से उसकी अस्वीकृति को पहचान लेंगे। क़रीब होंगे कि वे क्रोध की तीव्रता से उन लोगों पर धावा बोल दें, जो उनके सामने हमारी आयतें पढ़ते हैं। (ऐ रसूल!) उनसे कह दें : क्या मैं तुम्हें वह चीज़ बताऊँ, जो तुम्हारे क्रोध और तुम्हारे मुँह बनाने से अधिक बुरी है? वह आग है, जिसमें अल्लाह ने काफ़िरों को दाखिल करने का वादा किया है। और वह बहुत बुरा ठिकाना है, जहाँ उन्हें जाना है।
Hacc 22:73
ऐ लोगो! एक उदाहरण दिया जा रहा है, इसे ध्यान से सुनो और सीख ग्रहण करो। तुम अल्लाह के सिवा जिन मूर्तियों तथा अन्य वस्तुओं को पूजते हो, वे अपनी विवशता के कारण कभी एक मक्खी जैसी छोटी-सी चीज़ भी पैदा नहीं करेंगे। बल्कि अगर वे उसे पैदा करने के लिए सबके सब इकट्ठे हो जाएँ, तब भी उसे पैदा नहीं कर पाएँगे। और यदि मक्खी उनके पास मौजूद खुशबू या कोई और चीज़ ले उड़े, तो वे मक्खी से उसे छुड़ा नहीं सकते। इनके मक्खी को पैदा करने और उससे अपनी चीज़ों को छुड़ाने में असमर्थता से; यह स्पष्ट हो गया कि वे इससे बड़ा कुछ करने में असमर्थ हैं, फिर तुम - इनकी लाचारी के बावजूद - अल्लाह के सिवा इनकी पूजा कैसे करते हो?! कमज़ोर है यह तालिब, अर्थात् वह पूजी जाने वाली मूर्ति जो मक्खी से अपनी छीनी हुई चीज़ भी छुड़ा नहीं सकती, और कमज़ोर है यह मतलूब अर्थात् मक्खी।
Hacc 22:74
उन्होंने अल्लाह का आदर-सम्मान नहीं किया, जैसा कि उसका आदर-सम्मान करना चाहिए, जब उन्होंने उसके साथ उसके कुछ प्राणियों की पूजा की। निःसंदेह अल्लाह अत्यंत शक्तिशाली है। उसकी शक्ति और क्षमता का एक नमूना यह है कि उसने आकाशों और धरती तथा उनके अंदर मौजूद सारी चीज़ों को पैदा किया, वह सब पर प्रभुत्वशाली है, उसपर किसी का ज़ोर नहीं चलता, इसके विपरीत मुश्रिकों की मूर्तियाँ कमज़ोर और हीन हैं, कुछ भी पैदा नहीं कर सकतीं।
Hacc 22:75
अल्लाह तआला फ़रिश्तों में से कुछ संदेशवाहकों को चुनता है और इसी तरह इनसानों में से कुछ संदेशवाहकों को चुनता है। चुनाँचे वह कुछ फ़रिश्तों को नबियों के पास भेजता है, जैसे जिबरील अलैहिस्सलाम को इनसानों में से रसूलों के पास भेजा, तथा इनसानों में से रसूलों को लोगों के पास भेजता है। निःसंदेह अल्लाह उन बातों को सुनने वाला है, जो मुश्रिक लोग उसके रसूलों के बारे में कहते हैं, उसे देखने वाला है, जिसे वह अपने संदेश के लिए चुनता है।
Hacc 22:76
वह सर्वशक्तिमान फ़रिश्तों और इनसानों में से अपने संदेशवाहकों के उनके पैदा होने के पहले और उनके मरने के बाद के हालात से अवगत है। और उसी की ओर क़ियामत के दिन सारे मामले लौटाए जाएँगे, जब वह अपने बंदों को दोबारा जीवित करेगा और उन्हें उनके कर्मों का बदला देगा।
Hacc 22:77
ऐ अल्लाह पर ईमान रखने और उसकी शरीयत पर अमल करने वालो! अपनी नमाज़ में केवल अल्लाह के लिए रुकू' और सजदा करो, और अच्छे कार्य करो, जैसे सदक़ा (दान), रिश्तेदारों के साथ अच्छा व्यवहार और अन्य चीजें। इस आशा में कि तुम अपने उद्देश्य की प्राप्ति में सफल हो जाओ और भय से मुक्ति पा जाओ।
Hacc 22:78
और अल्लाह के रास्ते में उसकी प्रसन्नता प्राप्त करने के लिए जिहाद करो, उसने तुम्हें चुन लिया है और तुम्हारे धर्म को उदार एवं आसान बनाया है, जिसमें कोई तंगी और सख़्ती नहीं रखी है। यही उदार धर्म तुम्हारे पिता इबराहीम अलैहिस्सलाम का धर्म है। और अल्लाह ने तुम्हारा नाम पिछली किताबों में और क़ुरआन में मुसलमान रखा है। ताकि रसूल तुमपर इस बात की गवाही दे कि उसने तुम्हें वह संदेश पहुँचा दिया जिसका उसे पहुँचाने का आदेश दिया गया था, और तुम पिछली उम्मतों पर इस बात की गवाही दो कि उनके रसूलों ने उन्हें संदेश पहुँचा दिया था। इसलिए इसपर अल्लाह का शुक्रिया अदा करते हुए पूर्ण रूप से नमाज़ अदा करो, अपने धन की ज़कात दो, अल्लाह का सहारा लो और अपने सभी कामों में अल्लाह पर भरोसा करो। अल्लाह सर्वशक्तिमान अपने संरक्षण में आने वाले ईमान वालों का बेहतरीन संरक्षक है और मदद माँगने वालों का बेहतरीन मददगार है। इसलिए उसके संरक्षण में आओ, वह तुम्हें संरक्षण प्रदान करेगा और उससे मदद माँगो, वह तुम्हारी मदद करेगा।
Mü'minûn 23:1
अल्लाह पर ईमान लाने वाले और उसकी शरीयत के अनुसार काम करने वाले लोग अपनी अपेक्षित चीज़ को प्राप्त करके और भय वाली चीज़ों से मुक्ति पाकर सफल हो गए।
Mü'minûn 23:2
जो अपनी नमाज़ में इस तरह विनम्रता अपनाने वाले होते हैं कि उसमें उनके शारीरिक अंग शांत होते हैं और उनके दिल व्यस्त करने वाली चीज़ों से खाली होते हैं।
Mü'minûn 23:3
जो व्यर्थ, निरर्थक और अवज्ञा की बातों और कामों से उपेक्षा करने वाले हैं।
Mü'minûn 23:4
जो लोग अपने आपको दोषों और मलिनताओं से शुद्ध करने वाले और ज़कात अदा करके अपने धन को पाक करने वाले हैं।
Mü'minûn 23:5
जो अपने गुप्तांगों को व्यभिचार,समलैंगिकता और अश्लीलता से दूर रखकर उनकी रक्षा करने वाले हैं। चुनाँचे वे पवित्र और पाक-बाज़ हैं।
Mü'minûn 23:6
परंतु अपनी पत्नियों या अपने स्वामित्व में आई हुई दासियों को छोड़कर। क्योंकि उनसे संभोग और अन्य चीजों के साथ लाभ उठाने में उनकी निंदा नहीं की जा सकती।
Mü'minûn 23:7
जो व्यक्ति पत्नियों या अपने स्वामित्व में आई दासियों के अलावा के साथ आनंद (भोग) की तलाश करे, तो वह अल्लाह की सीमाओं को उल्लंघन करने वाला है। क्योंकि वह अल्लाह के हलाल ठहराए हुए आनंद (भोग) से परे जाकर हराम (भोग) की तलाश करने वाला है।
Mü'minûn 23:8
और जो उस अमानत की, जो अल्लाह ने उन्हें सौंपी है या उसके बंदों ने उनके हवाले की है, तथा अपनी प्रतिज्ञाओं की रक्षा करने वाले हैं। उन्हें नष्ट नहीं करते हैं, बल्कि उन्हें पूरा करते हैं।
Mü'minûn 23:9
जो लोग अपनी नामज़ों को उनके अरकान (स्तंभों) वाजिबात (अनिवार्य कार्यों) और मुस्तहब्बात (वांछित कार्यों) के साथ, उनके समय पर नियमित रूप से अदा करके, उनकी रक्षा करते हैं।
Mü'minûn 23:10
इन गुणों से सुसज्जित लोग ही हैं, जो वारिस होंगे।
Mü'minûn 23:11
जो सबसे ऊँची जन्नत के वारिस होंगे, वे उसमें हमेशा के लिए रहेंगे। उसमें उन्हें जो नेमतें प्राप्त होंगी, उनका सिलसिला कभी नहीं रुकेगा।
Mü'minûn 23:12
निश्चय हमने मानव जाति के पिता आदम को मिट्टी से पैदा किया। उनकी मिट्टी पृथ्वी की मिट्टी के साथ मिश्रित पानी से निकाले गए सार से ली गई थी।
Mü'minûn 23:13
फिर हमने उनकी संतान को वीर्य से पैदा किया, जो जन्म के समय तक माँ के गर्भाशय में सुरक्षित रहता है।
Mü'minûn 23:14
फिर हमने उसके बाद माँ के गर्भाशय में सुरक्षित उस वीर्य को जमे हुए लाल रक्त का रूप दिया, फिर उस जमे हुए लाल रक्त को मांस के एक चबाए हुए टुकड़े के रूप में बनाया, फिर माँस के उस टुकड़े को कठोर हड्डियों का रूप दे दिया, फिर उन हड्डियों को माँस पहना दिया, फिर हमने उसमें प्राण डालकर और जीवन में लाकर एक और रचना बना दिया। तो बहुत बरकत वाला है अल्लाह, जो बनाने वालों में सबसे अच्छा है।
Mü'minûn 23:15
फिर तुम (ऐ लोगो!) उन चरणों से गुज़रने के बाद, अपना निर्धारित समय समाप्त होने पर मर जाओगे।
Mü'minûn 23:16
फिर तुम अपनी मृत्यु के बाद क़ियामत के दिन अपनी क़ब्रों से उठाए जाओगे, ताकि तुमसे तुम्हारे किए हुए काम का हिसाब लिया जाए।
Mü'minûn 23:17
और हमने (ऐ लोगो!) तुम्हारे ऊपर, ऊपर-तले, सात आकाश बनाए, और हम कभी अपनी सृष्टि से अनजान नहीं, और न ही उसे भूले हैं।
Mü'minûn 23:18
हमने आकाश से आवश्यकता अनुसार बारिश का पानी उतारा, न अधिक कि आपदा का रूप धारण कर ले, न कम कि ज़रूरत के लिए भी पर्याप्त न हो। फिर हमने उस पानी को धरती में ठहरा दिया, जिससे मनुष्य और पशु लाभ उठाते हैं। और निश्चय हम उसे ले जाने में भी सक्षम हैं। फिर तुम उससे लाभ न उठा सकोगे।
Mü'minûn 23:19
फिर हमने उस पानी से तुम्हारे लिए खजूरों और अंगूरों के बाग़ पैदा किए। तुम्हारे लिए उनके अंदर विभिन्न आकार और रंगों के फल हैं, जैसे कि अंजीर, अनार और सेब। और तुम उन्हीं फलों में से खाते हो।
Mü'minûn 23:20
और हमने उसी पानी से तुम्हारे लिए ज़ैतून का वृक्ष उगाया, जो सैना पर्वत के क्षेत्र में निकलता है। वह उस तेल को उगाता है, जो उसके फल से निकाला जाता है, जिसे शरीर पर लगाने और सालन के रूप में प्रयोग किया जाता है।
Mü'minûn 23:21
निःसंदेह (ऐ लोगो!) तुम्हारे लिए पशुओं (ऊँट, गाय और बकरी) में एक बड़ी शिक्षा एवं संकेत है, जिससे तुम अल्लाह की शक्ति और अपने ऊपर उसकी दयालुता का पता लगा सकते हो। हम तुम्हें इन पशुओं के पेटों में जो कुछ है, उससे शुद्ध दूध पिलाते हैं, जो पीने वालों के लिए सुस्वाद है। तथा तुम्हारे लिए इनमें और भी बहुत-से लाभ हैं जिनसे तुम लाभ उठाते हो, जैसे- सवारी, ऊन, रोवां और बाल। तथा तुम इनका माँस भी खाते हो।
Mü'minûn 23:22
ज़मीन पर पशुओं में से ऊँट की और समुद्र में नावों (जहाज़ों) की तुम सवारी करते हो।
Mü'minûn 23:23
हमने नूह अलैहिस्सलाम को उनकी जाति के पास, उनको अल्लाह की ओर बुलाने के लिए भेजा। तो नूह (अलैहिस्सलाम) ने उनसे कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! अकेले अल्लाह की इबादत (पूजा) करो। उस पवित्र हस्ती के सिवा तुम्हारा कोई सत्य पूज्य नहीं। क्या तुम अल्लाह से, उसके आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर, डरते नहीं?!
Mü'minûn 23:24
तो उनकी जाति के अशराफिया एवं प्रमुख लोगों ने, जिन्होंने अल्लाह का इनकार किया था, अपने अनुयायियों और आम लोगों से कहा : यह आदमी, जो रसूल होने का दावा करता है, तुम्हारे ही जैसा एक इनसान है, जो तुमपर सरदारी और संप्रभुता चाहता है। अगर अल्लाह हमारे पास कोई रसूल भेजना चाहता, तो अवश्य उसे फ़रिश्तों में से भेजता, उसे मनुष्यों में से नहीं भेजता। हमने अपने पहले के पूर्वजों में इस प्रकार की दावेदारी नहीं सुनी।
Mü'minûn 23:25
यह एक ऐसा व्यक्ति है, जो पागलपन का शिकार है। यह क्या कह रहा है, उसके बारे में इसे खुद पता नहीं है। इसलिए जब तक इसका मामला लोगों के लिए स्पष्ट नहीं हो जाता है, तब तक इसके बारे में प्रतीक्षा करो।
Mü'minûn 23:26
नूह अलैहिस्सलाम ने कहा : ऐ मेरे पालनहार! तू इन लोगों के विरुद्ध मेरी मदद कर, इस प्रकार कि तू इनके मुझे झुठलाने के कारण इनसे मेरा बदला ले।
Mü'minûn 23:27
हमने नूह़ (अलैहिस्सलाम) को सूचना दी कि हमारी आँखों के सामने और हमारे बताए हुए तरीक़े के अनुसार नौका बना। फिर जब उन्हें नष्ट करने का हमारा आदेश आ जाए और पानी उस स्थान से ज़ोर से उबलने लगे, जिसमें रोटी पकाई जाती है, तो हर जीव में से एक नर और एक मादा उस (नौका) में प्रवेश कर ले, ताकि नस्ल चलती रहे, और अपने परिवार वालों को भी उसमें सवार कर ले, उसको छोड़कर जिसके विनाश की बात अल्लाह की ओर से पहले ही तय हो चुकी, जैसे कि तेरी पत्नी और तेरा पुत्र। और मुझसे उन लोगों की मुक्ति और उन्हें विनाश से बचाने के बारे में बात न करना, जिन्होंने कुफ़्र करके अत्याचार किया है। वे - अनिवार्य रूप से - बाढ़ के पानी में डूबने के द्वारा विनष्ट किए जाने वाले हैं।
Mü'minûn 23:28
फिर जब तुम और तुम्हारे मुक्ति पाने वाले मोमिन साथी नाव पर सवार हो जाएँ, तो कहो : सब प्रशंसा अल्लाह के लिए है, जिसने हमें काफ़िर लोगों से बचाया और उन्हें नष्ट कर दिया।
Mü'minûn 23:29
और यह दुआ करो कि ऐ मेरे पालनहार! तू मुझे भूमि पर बरकत वाला उतारना उतार और तू सब उतारने वालों से उत्तम है।
Mü'minûn 23:30
नूह़ (अलैहिस्सलाम) और उनके मोमिन साथियों को बचाने और काफ़िरों को विनष्ट करने में इस बात के स्पष्ट प्रमाण हैं कि हम अपने रसूलों की मदद करने और उन्हें झुठलाने वालों को नष्ट करने की शक्ति रखते हैं। निश्चय हम नूह अलैहिस्सलाम की जाति की ओर नूह़ अलैहिल्लाम को भेजकर उनका परीक्षण करने वाले थे, ताकि काफ़िर से मोमिन और अवज्ञाकारी से आज्ञाकारी स्पष्ट हो जाए।
Mü'minûn 23:31
फिर नूह अलैहिस्सलाम की जाति को विनष्ट करने के बाद हमने एक और समुदाय को पैदा किया।
Mü'minûn 23:32
तो हमने उनके अंदर उन्हीं में से एक रसूल भेजा, ताकि उन्हें अल्लाह की ओर बुलाए। चुनाँचे उसने उनसे कहा : अकेले अल्लाह की इबादत करो। उस महिमावान के अलावा तुम्हारा कोई सत्य पूज्य नहीं। तो क्या तुम अल्लाह के निषेधों से बचकर और उसके आदेशों का पालन करके उससे नहीं डरते?
Mü'minûn 23:33
उसकी जाति के अशराफिया एवं प्रमुख लोग, जिन्होंने अल्लाह का इनकार किया, आख़िरत तथा उसके इनाम और सज़ा को झुठलाया, और सांसारिक जीवन में हमारी दी हुई विस्तृत नेमतों ने उन्हें सरकश बना दिया था, उन्होंने अपने अनुयायियों और आम लोगों से कहा : यह तो तुम्हारे ही जैसा एक इनसान है। जो वही कुछ खाता और पीता है, जो कुछ तुम खाते और पीते हो। इसलिए इसे तुम्हारे ऊपर कोई विशिष्टता प्राप्त नहीं है कि वह तुम्हारी ओर रसूल बनाकर भेजा जाए।
Mü'minûn 23:34
अगर तुमने अपने ही जैसे एक इनसान की बात मान ली, तो निश्चय तुम उस समय अवश्य घाटा उठाने वाले होगे, क्योंकि तुम्हें उसकी आज्ञाकारिता से कोई लाभ नहीं होगा। इसलिए कि तुमने अपने देवताओं को छोड़कर, ऐसे व्यक्ति का अनुसरण किया, जिसको तुमपर कोई विशेषता प्राप्त नहीं है।
Mü'minûn 23:35
क्या यह आदमी, जो रसूल होने का दावा करता है, तुमसे यह वादा करता है कि जब तुम मर गए और धूल तथा सड़ी-गली हड्डियाँ हो गए, तो तुम अपनी क़ब्रों से जीवित निकाले जाओगे? क्या यह समझ में आता है?!
Mü'minûn 23:36
तुमसे अपनी मृत्यु तथा धूल और सड़ी-गली हड्डियाँ हो जाने के बाद, अपनी क़ब्रों से जीवित बाहर निकाले जाने का जो वादा किया जाता है, वह बहुत दूर कि बात है।
Mü'minûn 23:37
जीवन तो केवल इस संसार का जीवन है। आख़िरत का जीवन कुछ भी नहीं है। हम में से जीवित लोग मरते हैं और वे फिर से जीवित नहीं होते। तथा अन्य लोग जन्म लेते हैं और वे जीवित रहते हैं। और हम अपनी मौत के बाद क़ियामत के दिन हिसाब के लिए निकाले जाने वाले नहीं हैं।
Mü'minûn 23:38
यह जो तुम्हारे पास रसूल बनकर आने का दावा करता है, एक ऐसा व्यक्ति है जिसने अपना यह दावा करके अल्लाह पर एक झूठ गढ़ा है। और हम इसकी बातों पर विश्वास करने वाले नहीं हैं।
Mü'minûn 23:39
रसूल ने कहा : ऐ मेरे पालनहार! तू इन लोगों के विरुद्ध मेरी मदद कर, इस प्रकार कि तू इनके मुझे झुठलाने के कारण इनसे मेरा बदला ले।
Mü'minûn 23:40
तो अल्लाह ने उनका उत्तर यह कहकर दिया : थोड़े समय के बाद, आपके लाए हुए संदेश को झुठलाने वाले ये लोग, अपने झुठलाने के रवैये पर पछताएँगे।
Mü'minûn 23:41
चुनाँचे उन्हें एक भयंकर, घातक आवाज़ ने पकड़ लिया, क्योंकि वे अपने दुराग्रह के कारण यातना के हक़दार बन गए थे, तो उन्हें सैलाब की झाग की तरह विनष्ट कर दिया। तो विनाश है अत्याचारी लोगों के लिए।
Mü'minûn 23:42
फिर हमने उनका विनाश करने के बाद, अन्य समुदायों और दूसरी जातियों को पैदा किया, जैसे- लूत अलैहिस्सलाम की जाति, शुऐब अलैहिस्सलाम की जाति और यूनुस अलैहिस्सलाम की जाति।
Mü'minûn 23:43
इन झुठलाने वाले समुदायों में से कोई भी समुदाय अपने विनाश के आने के नियत समय से न आगे बढ़ता है, न उससे पीछे रहता है। चाहे उसके पास कितने भी संसाधन हों।
Mü'minûn 23:44
फिर हम लगातार एक के बाद एक रसूल भेजते रहे। जब भी उनमें से किसी समुदाय के पास अल्लाह का भेजा हुआ रसूल आया, तो उसके लोगों ने उसे झुठला दिया। तो हम उन्हें एक-दूसरे के पीछे विनष्ट करते गए। फिर उनके बारे में लोगों की बातचीत के अलावा उनका कोई वजूद बाक़ी न रहा। तो विनाश हो, ऐसे लोगों का जो रसूलों की अपने पालनहार की ओर से लाई हुई बातों पर ईमान नहीं लाते।
Mü'minûn 23:45
फिर हमने मूसा और उसके भाई हारून को अपनी नौ निशानियाँ (लाठी, चमकता हाथ, टिड्डी, जूँ, मेंढक, रक्त, बाढ़, अकाल और फलों की कमी) और एक स्पष्ट तर्क देकर भेजा।
Mü'minûn 23:46
हमने उन दोनों को फ़िरऔन और उसकी जाति के अशराफिया के पास भेजा। तो उन्होंने अहंकार दिखाया और उन दोनों को मानने को तैयार नहीं हुए। और वे उत्पीड़न और अत्याचार के द्वारा लोगों को दबाए हुए थे।
Mü'minûn 23:47
तो उन्होंने कहा : क्या हम अपने जैसे दो व्यक्तियों पर ईमान ले आएँ, जिनकी हमारे ऊपर कोई उत्कृष्टता नहीं है और उनके लोग (बनी इसराईल) हमारे आज्ञाकारी और अधीन हैं?!
Mü'minûn 23:48
तो उन्होंने उन दोनों को उस चीज़ में झुठला दिया, जो वे दोनों अल्लाह के पास से लेकर आए थे। चुनाँचे वे उन्हें झुठलाने के कारण डुबोकर विनष्ट किए जाने वालो में से हो गए।
Mü'minûn 23:49
और हमने मूसा को तौरात प्रदान की, इस उम्मीद पर कि उनकी जाति के लोग इससे सत्य का रास्ता पा जाएँ और उसके अनुसार कार्य करें।
Mü'minûn 23:50
हमने ईसा बिन मरयम और उनकी माँ मरयम को अपनी शक्ति को दर्शाने वाली एक निशानी बनाया। क्योंकि मरयम के पेट में ईसा का गर्भ बिना बाप के ठहर गया। और हमने उन दोनों को एक ऊँचे स्थान पर शरण दी, जो समतल, रहने के योग्य था तथा उसमें ताजा बहता पानी था।
Mü'minûn 23:51
ऐ रसूलो! जो खाने योग्य वस्तुएँ हमने तुम्हारे लिए हलाल की हैं, उनमें से खाओ और शरीयत के अनुसार अच्छे कार्य करो। तुम जो भी कार्य करते हो, मैं उससे अवगत हूँ। तुम्हारा कोई भी कार्य मुझसे छिपा नहीं है।
Mü'minûn 23:52
(ऐ रसूलो!) निश्चय तुम्हारा यह धर्म एक ही धर्म है, जो इस्लाम है। और मैं ही तुम्हारा पालनहार हूँ, मेरे अलावा तुम्हारा कोई पालनहार नहीं। अतः मेरे आदेशों का पालन करके और मेरे निषेधों से बचकर, मुझसे डरो।
Mü'minûn 23:53
फिर उनके बाद, उनके अनुयायी धर्म में बिखराव का शिकार होकर, कई समूहों और दलों में विभाजित हो गए। हर दल उसी पर खुश है, जिसे वह यह मानता है कि वही अल्लाह के निकट पसंदीदा धर्म है, तथा जो कुछ उसके अलावा के पास है, उसपर ध्यान नहीं देता है।
Mü'minûn 23:54
अतः, (ऐ रसूल!) आप उन्हें, उनपर यातना के उतरने के समय तक, उसी अज्ञानता और भ्रांति की स्थिति में रहने दें, जिसमें वे पड़े हुए हैं।
Mü'minûn 23:55
क्या अपनी स्थिति पर खुश रहने वाले इन दलों के लोग यह सोचते हैं कि हम उन्हें दुनिया के जीवन में जो धन और संतान दे रहे हैं, वह उन्हें जल्दी से प्रदान की जाने वाली भलाई है, जिसके वे हक़दार हैं?! मामला ऐसा नहीं है जो उन्होंने सोचा है।बल्कि वास्तविकता यह है कि हम उन्हें यह सब उन्हें ढील और मोहलत देने की नीति के तहत प्रदान कर रहे हैं। लेकिन उन्हें इसका एहसास नहीं हैं।
Mü'minûn 23:56
क्या अपनी स्थिति पर खुश रहने वाले इन दलों के लोग यह सोचते हैं कि हम उन्हें दुनिया के जीवन में जो धन और संतान दे रहे हैं, वह उन्हें जल्दी से प्रदान की जाने वाली भलाई है, जिसके वे हक़दार हैं?! मामला ऐसा नहीं है जो उन्होंने सोचा है।बल्कि वास्तविकता यह है कि हम उन्हें यह सब उन्हें ढील और मोहलत देने की नीति के तहत प्रदान कर रहे हैं। लेकिन उन्हें इसका एहसास नहीं हैं।
Mü'minûn 23:57
निःसंदेह जो लोग अपने ईमान और अच्छे कार्य करने के बावजूद अपने पालनहार से डरते रहते हैं।
Mü'minûn 23:58
तथा जो अपने पालनहार की किताब की आयतों पर ईमान रखते हैं।
Mü'minûn 23:59
और जो लोग अपने पालनहार को एकमात्र पूज्य मानते हैं, उसके साथ किसी चीज़ को साझी नहीं बनाते।
Mü'minûn 23:60
और वे लोग जो नेकी के कामों में भरपूर प्रयास करते हैं और अच्छे कार्यों के द्वारा अल्लाह की निकटता प्राप्त करते हैं, इसके बावजूद उन्हें यह भय लगा रहता है कि अल्लाह उनके दान और नेक कार्यों को उस समय अस्वीकार न कर दे, जब वे क़ियामत के दिन उसके पास लौटेंगे।
Mü'minûn 23:61
इन महान गुणों के साथ विशेषित लोग ही अच्छे कर्मों की ओर जल्दी करते हैं और यही लोग उनकी तरफ़ आगे बढ़ने वाले हैं और उन्हें प्राप्त करने में अन्य लोगों से आगे बढ़ गए हैं।
Mü'minûn 23:62
हम किसी प्राणी पर केवल उतने ही कार्य का भार डालते हैं, जितना वह कर सकता है। और हमारे पास एक किताब है, जिसमें हमने हर कार्यकर्ता के काम को अंकित कर रखा है। वह सत्य के साथ बोलती है, जो संदेह से परे है। और उनपर, उनकी नेकियों को घटाकर अथवा उनके गुनाहों को बढ़ाकर कोई अत्याचार नहीं किया जाएगा।
Mü'minûn 23:63
बल्कि काफ़िरों के दिल इस सत्य के साथ बोलने वाली किताब और उस किताब से जो उनपर उतरी है, ग़फ़लत में पड़े हुए हैं। तथा जिस कुफ़्र पर वे क़ायम हैं, उसके सिवा भी उनके अन्य कार्य हैं, जिन्हें वे करने वाले हैं।
Mü'minûn 23:64
यहाँ तक कि जब हम उनके उन लोगों को, जो दुनिया में समृद्ध थे, क़ियामत के दिन सज़ा देंगे, तो वे चीख-चीख कर मदद माँगेगे।
Mü'minûn 23:65
तो उन्हें अल्लाह की दया से निराश करते हुए कहा जाएगा : आज मत चिल्लाओ और न मदद माँगो। क्योंकि आज तुम्हारा कोई मददगार नहीं है, जो तुम्हें अल्लाह की यातना से बचा सके।
Mü'minûn 23:66
दुनिया में अल्लाह की किताब की आयतें तुम्हें सुनाई जाती थीं, तो तुम उन्हें सुनकर उनसे घृणा के कारण मुँह फेरते हुए पलट जाते थे।
Mü'minûn 23:67
तुम यह कार्य लोगों पर बड़ा बनते हुए कर रहे थे, क्योंकि तुम्हारा यह भ्रम था कि तुम हरम वाले हो। हालाँकि वास्तव में तुम हरम वाले नहीं हो। क्योंकि हरम वाले तो वे लोग हैं, जो अल्लाह से डरने वाले हैं। तथा तुम हरम के आस पास रात में बुरी बातें करते हो। अतः तुम उसकी पवित्रता का सम्मान नहीं करते।
Mü'minûn 23:68
क्या इन अनेकेश्वरवादियों ने अल्लाह के उतारे हुए क़ुरआन पर विचार नहीं किया कि उसप ईमान लाते और उसके अनुसार कार्य करते, या क्या उनके पास कोई ऐसी चीज़ आई है, जो उनसे पहले उनके पूर्वजों के पास नहीं आई, इसलिए वे इससे दूर हो गए और इसका इनकार कर दिया?!
Mü'minûn 23:69
या उन्होंने मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को नहीं पहचाना, जिन्हें अल्लाह ने उनके पास रसूल बनाकर भेजा। इस कारण वे उनका इनकार कर रहे हैं?! निश्चित रूप से वे उन्हें जानते थे तथा उनकी सच्चाई और अमानतदारी को भी जानते थे।
Mü'minûn 23:70
बल्कि वे कहते हैं : वह पागल है। निश्चय उन्होंने झूठ बोला। बल्कि वह उनके पास अल्लाह की ओर से सत्य लेकर आए हैं, जिसके अल्लाह की ओर से होने में कोई संदेह नहीं है। जबकि उनमें से अधिकांश लोग अपनी ईर्ष्या और अपने झूठ के लिए कट्टरता (हठ) के कारण, सत्य को नापसंद करने वाले, उससे नफ़रत करने वाले हैं।
Mü'minûn 23:71
यदि अल्लाह चीज़ों का संचालन और उनका प्रबंध उनके मन की इच्छाओं के अनुसार करने लगे, तो आकाशों और धरती की व्यवस्था बिगड़ जाए और उनमें जो भी मौजूद हैं सब बिगाड़ के शिकार हो जाएँ। क्योंकि वे चीजों के परिणामों, तथा सही और भ्रष्ट उपाय (प्रबंधन) से अनजान हैं। बल्कि, हम उनके पास वह क़ुरआन लेकर आए हैं, जिसमें उनकी प्रतिष्ठा और सम्मान है, तो वे इससे मुँह मोड़ने वाले हैं।
Mü'minûn 23:72
(ऐ रसूल!) क्या आपने उस (धर्म) पर जो आप इन लोगों के पास लेकर आए हैं, इनसे कोई पारिश्रमिक माँगा है, जिसके कारण वे निमंत्रण को अस्वीकार कर रहे हैं? यह तो आपके द्वारा नहीं हुआ है। क्योंकि आपके रब का सवाब और उसका बदला, इनके और इनके अलावा लोगों के बदले (पारिश्रमिक) से बेहतर है। और वह - महिमावान् - सब रोज़ी देने वालों से बेहतर है।
Mü'minûn 23:73
तथा निश्चय (ऐ रसूल!) आप इनको और इनके अलावा लोगों को एक सीधे रास्ते की ओर बुलाते हैं, जिसमें कोई टेढ़ापन नहीं है, और वह इस्लाम का रास्ता है।
Mü'minûn 23:74
जो लोग आख़िरत और उसमें घटित होने वाले हिसाब, दंड और प्रतिफल पर ईमान नहीं रखते, वे इस्लाम के मार्ग से हटकर दूसरे टेढ़े रास्तों पर चलने वाले हैं, जो जहन्नम की ओर ले जाते हैं।
Mü'minûn 23:75
अगर हम उनपर दया करें और जिस अकाल और भुखमरी से वे पीड़ित हैं, उसे उनसे दूर कर दें, तो भी वे सत्य से अपनी गुमराही में बने रहेंगे इस हाल में कि संकोचवश भटक रहे होंगे।
Mü'minûn 23:76
हमने विभिन्न प्रकार की आपदाओं द्वारा उनका परीक्षण किया। परन्तु वे न अपने पालनहार के सामने झुके और न ही उससे विनम्रतापूर्वक दुआ की कि उनसे आपदाओं को दूर कर दे।
Mü'minûn 23:77
यहाँ तक कि जब हमने उनपर सख़्त यातना का कोई द्वार खोल दिया, तो तुरंत वे उसमें हर राहत और भलाई से निराश हो गए।
Mü'minûn 23:78
(ऐ पुनर्जीवन को झुठलाने वालो!) अल्लाह पाक ही ने तुम्हारे लिए कान बनाए; ताकि उनसे सुनो, आँखें बनाईं; ताकि उनसे देखो और दिल बनाए; ताकि उनसे समझो। फिर भी तुम इन नेमतों पर उसका बहुत कम ही शुक्रिया अदा करते हो।
Mü'minûn 23:79
वही है जिसने (ऐ लोगो!) तुम्हें धरती में पैदा किया और तुम क़ियामत के दिन अकेले उसी के पास हिसाब और बदले के लिए एकत्र किए जाओगे।
Mü'minûn 23:80
वही अकेला सर्वशक्तिमान है, जो जीवन देता है, उसके सिवा कोई दूसरा जीवन देने वाला नहीं। वही अकेला मौत देता है, उसके सिवा कोई दूसरा मौत देने वाला नहीं। तथा उसी अकेले के अधिकार में अंधेरे और रोशनी, लंबाई और लघुता के एतिबार से रात और दिन के बदलने का आकलन करना है। तो क्या तुम उसकी शक्ति तथा पैदा करने और प्रबंध करने में उसकी एकता को नहीं समझते?
Mü'minûn 23:81
बल्कि उन्होंने भी वैसी ही बात कही, जो उनके बाप-दादा तथा कुफ़्र में उनके पूर्वजों ने कही थी।
Mü'minûn 23:82
उन्होंने पुनर्जीवन का इनकार करते हुए और उसे असंभव जताते हुए कहा : क्या जब हम मर जाएँगे और मिट्टी तथा सड़ी-गली हड्डियाँ बन जाएँगे, तो क्या सचमुच हमें हिसाब के लिए जीवित करके उठाया जाएगा?!
Mü'minûn 23:83
हमसे यह वादा किया गया है - कि मरने के बाद पुनर्जीवित होना है - तथा इससे पहले हमारे पूर्वजों से भी यही वादा किया गया था। लेकिन हमने उस वादे को पूरा होते नहीं देखा। यह कुछ और नहीं बल्कि पहले लोगों की किंवदंतियां और झूठी कहानियाँ हैं।
Mü'minûn 23:84
(ऐ रसूल!) पुनर्जीवन का इनकार करने वाले इन काफ़िरों से कह दें : यह धरती और जो कोई भी इस पर है, किसका है? अगर तुम्हारे पास ज्ञान हो तो बताओ?
Mü'minûn 23:85
वे कहेंगे : यह धरती और जो कोई भी इसपर है, सब अल्लाह का है। अतः आप उनसे कह दें : क्या तुम्हें यह बात समझ में नहीं आती कि जो धरती और उसपर मौजूद सारी चीज़ों का मालिक है, वह तुम्हारी मृत्यु के बाद तुम्हें पुनर्जीवित करने में सक्षम है?
Mü'minûn 23:86
आप उनसे पूछिए : सातों आकाशों का स्वामी कौन है? तथा महान सिंहासन का स्वामी कौन है, जिससे बड़ा कोई सृजन नहीं है?
Mü'minûn 23:87
वे कहेंगे : सातों आकाश और महान सिंहासन अल्लाह के हैं। तो आप उनसे कह दें : फिर अल्लाह के आदेशों का पालन करके और उसकी मना की हुई चीज़ों से बचकर, तुम उससे डरते क्यों नहीं, ताकि उसकी यातना से सुरक्षित रहो?
Mü'minûn 23:88
आप उनसे पूछिए : कौन है वह, जिसके स्वामित्व में प्रत्येक वस्तु है, कोई चीज़ उसके स्वामित्व से निकल नहीं सकती, वह अपने बंदों में से जिसकी चाहे मदद करता है तथा जिसके साथ वह बुराई का इरादा करे उसे कोई उससे छुड़ा नहीं सकता कि उससे यातना को टाल दे। यदि तुम ज्ञान रखते हो, तो बताओ।
Mü'minûn 23:89
वे कहेंगे : प्रत्येक वस्तु का स्वामित्व अल्लाह पाक के हाथ में है। अतः आप उनसे कह दें : जब तुम यह स्वीकार करते हो, तो फिर तुम्हारी बुद्धि कहाँ चली जाती है कि उसके अलावा किसी और की पूजा करते हो?!
Mü'minûn 23:90
मामला वैसा नहीं है, जैसा वे दावा करते हैं। बल्कि हम उनके पास ऐसा सत्य लाए हैं, जिसमें कोई संदेह नहीं। और वे अल्लाह के साझी और संतान होने का दावा करने में निश्चय झूठे हैं। अल्लाह उनकी इस बात से बहुत ऊँचा है।
Mü'minûn 23:91
अल्लाह ने कोई संतान नहीं बनाई, जैसा कि काफिरों का दावा है, और उसके साथ वास्तव में कभी कोई पूज्य नहीं था। यदि मान लिया जाए कि उसके साथ वास्तव में कोई पूज्य है, तो प्रत्यक पूज्य उस सृष्टि के अपने हिस्से के साथ चला जाता, जो उसने बनाया था, और वे अवश्य एक-दूसरे पर चढ़ दौड़ते। इस प्रकार ब्रह्मांड की व्यवस्था बिगड़ जाती। जबकि वास्तव में ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। अतः यह इंगित करता है कि सत्य पूज्य एक ही है और वह अकेला अल्लाह है। वह बहुत पवित्र एवं महान है उन अयोग्य बातों से, जो अनेकेश्वरवादी उसके साझी और संतान होने की बयान करते हैं।
Mü'minûn 23:92
वह हर उस चीज़ को जानने वाला है, जो उसकी मख़लूक़ से अदृश्य है तथा हर उस चीज़ को जानने वाला है, जिसे इंद्रियों द्वारा देखा और जाना जाता है। इनमें से कोई चीज़ उससे छिपी नहीं है। अतः वह महिमावान् इस बात से सर्वोच्च है कि उसका कोई साझी हो।
Mü'minûn 23:93
(ऐ रसूल!) आप दुआ करें : ऐ मेरे पालनहार! अगर तू कभी मुझे इन बहुदेववादियों के बारे में वह यातना दिखाए, जिसका तूने इनसे वादा किया है।
Mü'minûn 23:94
ऐ मेरे पालनहार! यदि तू उनको दंडित करे और मैं उस समय उपस्थित रहूँ, तो मुझे उनमें शामिल न करना कि मुझे भी उनके साथ यातना का सामना करना पड़ जाए।
Mü'minûn 23:95
निश्चय हम आपको वह अज़ाब दिखाने में सक्षम हैं, जिसका हम उनसे वादा कर रहे हैं। हम ऐसा करने या इसके अलावा करने में असमर्थ नहीं हैं।
Mü'minûn 23:96
(ऐ रसूल) जो आपके साथ बुरा व्यवहार करे, आप उसका जवाब ऐसे व्यवहार से दें, जो सबसे अच्छा हो; इस प्रकार कि आप उसे माफ़ कर दें और उसकी ओर से पहुँचने वाले कष्ट पर धैर्य रखें। हम उस शिर्क और झुठलाने की बातों से भली-भाँति अवगत हैं, जो वे बयान करते हैं और जो वे आपके बारे में ऐसी बातें वर्णन करते हैं, जो आपके योग्य नहीं हैं, जैसे कि जादू और पागलपन।
Mü'minûn 23:97
और आप दुआ करें : ऐ मेरे पालनहार! मै शैतानों की उकसाहटों और उनके वसवसों से तेरी शरण में आता हूँ।
Mü'minûn 23:98
तथा ऐ मेरे पालनहार! मैं इस बात से तेरी शरण माँगता हूँ कि वे मेरे किसी भी मामले में मेरे पास उपस्थित हों।
Mü'minûn 23:99
यहाँ तक कि जब इन बहुदेववादियों में से किसी के पास मौत आती है और जो कुछ उसके साथ होने वाला है, वह उसे अपनी आँखों से देख लेता है, तो अपनी बीती हुई आयु और अल्लाह के आदेश के पालन में होने वाली कोताही पर पछतावा करते हुए कहता है : ऐ मेरे पालनहार! मुझे दुनिया के जीवन की ओर लौटा दे।
Mü'minûn 23:100
ताकि मैं संसार में लौटकर कोई नेक काम कर लूँ। कदापि नहीं, मामला वैसा नहीं है, जैसा कि उसने अनुरोध किया है। यह केवल एक शब्द है जो वह कहने वाला है। अगर उसे सांसारिक जीवन में वापस भेज दिया जाए, तो वह अपना किया हुआ वादा पूरा नहीं करेगा। ये मरने वाले लोग, क़ियामत के दिन तक दुनिया और आख़िरत के बीच एक ओट में रहेंगे। इसलिए वे वहाँ से दुनिया में वापस नहीं आएँगे कि जो कुछ उनसे छूट गया है, उसकी छतिपूर्ति कर लें और जो कुछ उन्होंने बिगाड़ा है, उसे ठीक कर लें।
Mü'minûn 23:101
फिर जब सूर (नरसिंघा) में फूँक मारने के कार्य पर नियुक्त फरिश्ता, उसमें दूसरी बार फूँक मारेगा, जो क़ियामत का ऐलान होगा, तो उनके बीच कोई रिश्ते-नाते नहीं होंगे जिनपर वे गर्व करते हैं, क्योंकि वे क़ियामत की भयावहता में व्यस्त होंगे। तथा वे अपनी-अपनी चिंताओं में व्यस्त होने के कारण एक-दूसरे को नहीं पूछेंगे।
Mü'minûn 23:102
फिर जिसके पलड़े, उसकी नेकियों के उसके गुनाहों से अधिक होने के कारण, भारी हो गए, तो वही लोग अपनी अपेक्षित चीज़ों को प्राप्त करके और अपनी अप्रिय चीज़ों से मुक्ति पाकर, सफल हैं।
Mü'minûn 23:103
और जिसके पलड़े, उसके गुनाहों के उसकी नेकियों से अधिक होने के कारण, भारी हो गए, तो वही लोग हैं, जिन्होंने खुद को बर्बाद कर दिया। क्योंकि उन्होंने ऐसे कार्य किए, जो उनके लिए हानिकारक हैं और ईमान तथा सत्कर्म को छोड़ दिया, जो उनके लिए लाभदायक हैं। अतः वे हमेशा जहन्नम की आग में रहने वाले हैं, उससे कभी बाहर नहीं निकलेंगे।
Mü'minûn 23:104
उनके चेहरों को जहन्नम की आग जला देगी। और उसमें उनकी स्थिति यह होगी कि गंभीर रूप से त्योरी चढ़ा हुआ होने से उनके ऊपरी और निचले होंठ सिकुड़ गए होंगे और उनके दाँत बाहर निकले आए होंगे।
Mü'minûn 23:105
और उन्हें झिड़कते हुए कहा जाएगा : क्या दुनिया में क़ुरआन की आयतें तुम्हारे सामने पढ़ी न जाती थीं, तो तुम उन्हें झुठलाया करते थे?
Mü'minûn 23:106
वे कहेंगे : ऐ हमारे पालनहार! हमारा दुर्भाग्य हमपर प्रभावी हो गया, जो पहले ही तेरे ज्ञान में था और हम सत्य से भटके हुए लोग थे।
Mü'minûn 23:107
ऐ हमारे पालनहार! हमें नरक से निकाल ले। अगर हम दोबारा अपने कुफ़्र और गुमराही की पूर्व स्थिति की ओर लौट गए, तो निश्चय हम अपने आपपर अत्याचार करने वाले होंगे। हमारा बहाना खत्म हो गया।
Mü'minûn 23:108
अल्लाह कहेगा : तुम सब जहन्नम में तिरस्कृत व अपमानित होकर पड़े रहो और मुझ से बात न करो।
Mü'minûn 23:109
मेरे बंदों में से कुछ लोग, जो मुझपर ईमान लाए थे, कहा करते थे : ऐ हमारे रब! हम तुझपर ईमान लाए। अतः हमारे गुनाह माफ़ कर दे और हमपर दया कर। और तू सब दया करने वालों से बेहतर है।
Mü'minûn 23:110
तो तुमने अपने पालनहार को पुकारने वाले इन मोमिनों को उपहास का पात्र बना लिया, जिनका तुम मखौल और हँसी उड़ाते थे यहाँ तक कि उनका उपहास उड़ाने में व्यस्त होने के कारण तुम अल्लाह की याद को भुला बैठे। तथा तुम्हारा उनसे हँसी करना, मज़ाक़ और ठट्ठा के तौर पर था।
Mü'minûn 23:111
मैंने इन ईमान वालों को, अल्लाह की आज्ञाकारिता पर तथा तुम्हारी ओर से पहुँचने वाले कष्ट पर धैर्य से काम लेने के कारण, क़ियामत के दिन बदले में जन्नत की प्राप्ति में सफलता प्रदान की है।
Mü'minûn 23:112
वह (अल्लाह उनसे) कहेगा : तुम धरती पर कितने वर्षों तक रहे? और तुमने उसमें कितना समय नष्ट किया?
Mü'minûn 23:113
वे उत्तर देंगे : हम (वहाँ) एक दिन या दिन का कुछ भाग ही रहे हैं। अतः आप उनसे पूछ लें जो दिनों और महीनों की गणना करते हैं।
Mü'minûn 23:114
वह (अल्लाह) कहेगा : सचमुच तुम दुनिया में बहुत थोड़ा ठहरे हो, जिसके दौरान अल्लाह के आज्ञापालन पर सब्र करना आसान था। काश तुम (उस समय) अपने ठहरने की अवधि जानते होते।
Mü'minûn 23:115
(ऐ लोगों!) क्या तुमने समझ रखा था कि हमने तुम्हें बिना किसी हिकमत के खेल-तमाशे के तौर पर पैदा किया है, और जानवरों की तरह कोई इनाम या सज़ा नहीं है, और यह कि तुम क़ियामत के दिन हिसाब और बदले के लिए हमारी ओर नहीं लौटाए जाओगे?
Mü'minûn 23:116
अतः पवित्र है अल्लाह, जो बादशाह, अपनी मख़लूक में अपनी इच्छा के अनुसार व्यवहार करने वाला है। जो सत्य है, उसका वचन सत्य है और उसकी बात सत्य है। उसके सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं। वह सम्मान वाले सिंहासन का रब है, जो कि सबसे महान सृष्टि है। और जो सबसे महान सृष्टि का रब है, वह समस्त सृष्टि का रब है।
Mü'minûn 23:117
और जो व्यक्ति अल्लाह के साथ किसी अन्य पूज्य को पुकारे, जिसके पूजा के योग्य होने का उसके पास कोई प्रमाण नहीं है (और अल्लाह के अलावा हर पूज्य का यही मामला है), तो उसके बुरे कर्म का बदला उसके पालनहार के पास है। चुनाँचे वही उसे इसपर यातना से दो चार करेगा। निश्चय काफ़िर लोग अपनी अपेक्षित चीज़ों को प्राप्त करने और अप्रिय चीज़ों से मुक्ति पाने में सफल नहीं होंगे।
Mü'minûn 23:118
(ऐ रसूल!) आप दुआ करें : ऐ मेरे पालनहार! मेरे पापों को क्षमा कर दे और अपनी दया से मुझपर दया कर। और तू सबसे बेहतर है, जिसने किसी पापी पर दया की और उसकी तौबा क़बूल कर ली।