Hindi Mokhtasar — Rahman 55:1 – Cinn 72:28
Contents
- Rahman 55:1
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- Cinn 72:28
Rahman 55:1
अर-रहमान' व्यापक दया वाला।
Rahman 55:2
उसने लोगों को क़ुरआन सिखाया, उसका याद करना आसान करके और उसके अर्थ को समझना सुगम बनाकर।
Rahman 55:3
उसने इनसान को ठीक-ठाक बनाया और उसे अच्छी शक्ल-सूरत दी।
Rahman 55:4
उसे सिखाया कि अपने दिल की बात को मौखिक और लिखित रूप में कैसे व्यक्त करे।
Rahman 55:5
सूरज और चाँद दोनों की गति निर्धारित की। दोनों एक सटीक गणना के अनुसार चल रहे हैं; ताकि लोगों को वर्षों की गिनती और हिसाब का ज्ञान प्राप्त हो।
Rahman 55:6
और बिना तने वाले पौधे और पेड़ अल्लाह को, उसके आदेश के अधीन होकर और उसके प्रति समर्पित होकर सजदा करते हैं।
Rahman 55:7
तथा उसने आकाश को धरती के ऊपर उसके छत के रूप में ऊँचा किया। तथा धरती पर न्याय को स्थापित किया और अपने बंदों को उसका आदेश दिया।
Rahman 55:8
उसने न्याय को इसलिए स्थापित किया, ताकि (ऐ लोगो!) तुम अन्याय न करो और माप-तौल में धोखाधड़ी से काम न लो।
Rahman 55:9
और अपने बीच न्याय के साथ तौल को सीधा रखो और जब तुम दूसरों को नाप या तौलकर दो, तो नाप या तौल में कमी न करो।
Rahman 55:10
और उसने धरती को प्राणियों के लिए उसपर रहने योग्य बनाया।
Rahman 55:11
उसमें ऐसे पेड़ हैं जो फल देते हैं, तथा आवरणों वाले खजूर के वृक्ष हैं जिनमें से खजूर बनते हैं।
Rahman 55:12
और उसमें भूसे वाले अनाज जैसे गेहूँ और जौ हैं, तथा उसमें ऐसे पौधे हैं, जिनकी सुगंध तुम्हें अच्छी लगती है।
Rahman 55:13
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुम अपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किस का इनकार करोगे?
Rahman 55:14
उसने आदम अलैहिस्सलाम को पकी हुई मिट्टी की तरह, बजने वाली सूखी मिट्टी से पैदा किया।
Rahman 55:15
और जिन्नों के पिता को धुआँ रहित आग की ज्वाला से पैदा किया।
Rahman 55:16
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुम अपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किस का इनकार करोगे?
Rahman 55:17
वह सर्दी और गर्मी में सूर्य के उदय होने के दोनों स्थानों और उसके अस्त होने के दोनों स्थानों का रब है।
Rahman 55:18
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुम अपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किस का इनकार करोगे?
Rahman 55:19
अल्लाह ने खारे और मीठे दो सागरों को मिला दिया, जो आँखों को आपस में मिलते हुए दिखते हैं।
Rahman 55:20
(जबकि) उन दोनों के बीच एक अवरोध है, जो उन्हें एक-दूसरे पर हावी होने से रोकता है; ताकि मीठा पानी, मीठा और नमकीन पानी, नमकीन बना रहे।
Rahman 55:21
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुम अपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किस का इनकार करोगे?
Rahman 55:22
दोनों सागरों से छोटे और बड़े मोती निकलते हैं।
Rahman 55:23
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुम अपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किस का इनकार करोगे?
Rahman 55:24
और केवल उसी पवित्र और महान अल्लाह का अधिकार चलता है, पहाड़ों की तरह समुद्र में चलने वाले जहाज़ों पर।
Rahman 55:25
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुम अपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किस का इनकार करोगे?
Rahman 55:26
धरती के ऊपर मौजूद सभी प्राणी अनिवार्य रूप से नष्ट होने वाले हैं।
Rahman 55:27
और (ऐ रसूल!) आपके रब का चेहरा, जो महानता और अपने बंदों पर उपकार और कृतज्ञता वाला है, बाक़ी रहेगा। उसपर कभी भी विनाश नहीं आएगा।
Rahman 55:28
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुम अपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किस का इनकार करोगे?
Rahman 55:29
आकाशों में जो भी फ़रिश्ते हैं तथा धरती पर जो भी जिन्न और इनसान हैं, सब अपनी ज़रूरतें उसी से माँगते हैं। हर दिन वह अपने बंदों से संबंधित किसी कार्य में होता है; जैसे जीवन देना, मारना, रोज़ी देना, इत्यादि।
Rahman 55:30
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुम अपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किस का इनकार करोगे?
Rahman 55:31
हम जल्द ही (ऐ जिन्नो और इनसानो!) तुम्हारे हिसाब के लिए फ़ारिग़ होंगे और हर एक को वह सवाब या सज़ा देंगे, जिसका वह हक़दार है।
Rahman 55:32
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुम अपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किस का इनकार करोगे?
Rahman 55:33
जब अल्लाह क़ियामत के दिन जिन्नों और इनसानों को इकट्ठा करेगा, तो कहेगा : ऐ जिन्नों और इनसानों के समूह! अगर तुम अपने लिए आकाशों और धरती के किसी किनारे से भाग निकलने का कोई रास्ता खोज सको, तो ऐसा करो। लेकिन तुम बिना शक्ति और प्रमाण के ऐसा हरगिज़ नहीं कर पाओगे। और तुम्हारे पास वह कहाँ है?
Rahman 55:34
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुम अपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किस का इनकार करोगे?
Rahman 55:35
तुम दोनों पर (ऐ जिन्नो और इनसानो!) धुआँ रहित आग का ज्वाला और लौ से मुक्त धुआँ छोड़ा जाएगा, फिर तुम अपने आपको को उससे बचा नहीं पाओगे।
Rahman 55:36
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुम अपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किस का इनकार करोगे?
Rahman 55:37
फिर जब आसमान फट जाएगा, ताकि उससे फ़रिश्ते उतरें, तो वह अपने रंग की चमक में तेल की तरह लाल हो जाएगा।
Rahman 55:38
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुम अपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किस का इनकार करोगे?
Rahman 55:39
फिर उस महान दिन किसी इनसान या किसी जिन्न से उसके गुनाह के बारे में नहीं पूछा जाएगा। क्योंकि अल्लाह उनके कर्मों को जानता है।
Rahman 55:40
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुम अपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किस का इनकार करोगे?
Rahman 55:41
क़ियामत के दिन अपराधियों को उनके निशान से पहचाना जाएगा, जो उनके चेहरे का कालापन और उनकी आँखों का नीलापन है। फिर उनके माथे के बालों को उनके पैरों से मिलाकर पकड़ा जाएगा और उन्हें जहन्नम में डाल दिया जाएगा।
Rahman 55:42
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुम अपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किस का इनकार करोगे?
Rahman 55:43
और उन्हें फटकारते हुए कहा जाएगा : यह जहन्नम, जिसे अपराधी लोग दुनिया में झुठलाते थे, उनकी आँखों के सामने है और वे इसका इनकार नहीं कर सकते।
Rahman 55:44
वे उसके और अत्यंत गर्म पानी के बीच चक्कर लगा रहे होंगे।
Rahman 55:45
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुम अपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किस का इनकार करोगे?
Rahman 55:46
जो व्यक्ति आख़िरत में अपने रब के सामने खड़े होने से डरा, अतः वह ईमान लाया और नेक कार्य किया - उसके लिए दो बाग़ हैं।
Rahman 55:47
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुम अपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किस का इनकार करोगे?
Rahman 55:48
वे दोनों बाग़ बड़ी-बड़ी, ताज़ी और फलदार शाखाओं वाले हैं।
Rahman 55:49
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुम अपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किस का इनकार करोगे?
Rahman 55:50
उन दोनों बाग़ों में दो जल स्रोत हैं, जो उनके बीच पानी के साथ गुज़रते हैं।
Rahman 55:51
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुम अपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किस का इनकार करोगे?
Rahman 55:52
उन दोनों बाग़ों में हर तरह के स्वादिष्ट फलों के दो प्रकार हैं।
Rahman 55:53
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुम अपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किस का इनकार करोगे?
Rahman 55:54
वे ऐसे बिछौनों पर तकिया लगाए होंगे, जिनके अस्तर मोटे रेशम के होंगे। तथा दोनों बाग़ों से तोड़े जाने वाले फल एवं मेवे बहुत निकट होंगे, जिन्हें आदमी खड़े, बैठे और लेटे हुए तोड़ सकेगा।
Rahman 55:55
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुम अपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किस का इनकार करोगे?
Rahman 55:56
उनमें ऐसी स्त्रियाँ हैं, जिनकी निगाहें अपने पतियों तक ही सीमित हैं। उन्हें उनके पतियों से पहले किसी जिन्न या इनसान ने हाथ नहीं लगाया।
Rahman 55:57
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुम अपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किस का इनकार करोगे?
Rahman 55:58
वे इतनी सुंदर और निखरे हुए रंग की होंगी, मानो माणिक और मूँगा हैं।
Rahman 55:59
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुम अपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किस का इनकार करोगे?
Rahman 55:60
जिसने अपने रब का आज्ञापालन उत्तम ढंग से किया, उसका बदला इसके सिवा क्या है कि अल्लाह उसे उत्तम प्रतिफल प्रदान करे?!
Rahman 55:61
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुम अपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किस का इनकार करोगे?
Rahman 55:62
तथा इन दोनों पूर्वोक्त बाग़ों के अलावा दो अन्य बाग़ हैं।
Rahman 55:63
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुम अपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किस का इनकार करोगे?
Rahman 55:64
इन दोनों बाग़ों की हरियाली बहुत अधिक है।
Rahman 55:65
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुम अपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किस का इनकार करोगे?
Rahman 55:66
इन दोनों बाग़ों में दो जल स्रोत हैं, जिनसे बड़ी तेज़ी से पानी उबल रहा है, उनके पानी का उबलना बंद नहीं होता।
Rahman 55:67
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुम अपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किस का इनकार करोगे?
Rahman 55:68
इन दोनों बाग़ों में बहुत-से फल, बड़े-बड़े खजूर के पेड़ और अनार हैं।
Rahman 55:69
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुम अपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किस का इनकार करोगे?
Rahman 55:70
इन जन्नतों में अच्छी नैतिकता और सुंदर चेहरों वाली स्त्रियाँ हैं।
Rahman 55:71
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुम अपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किस का इनकार करोगे?
Rahman 55:72
हूरें, जो उनकी रक्षा के लिए खेमों में रखी गई होंगी।
Rahman 55:73
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुम अपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किस का इनकार करोगे?
Rahman 55:74
उनके पतियों से पहले कोई इनसान या जिन्न उनके पास नहीं आया।
Rahman 55:75
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुम अपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किस का इनकार करोगे?
Rahman 55:76
वे हरे गिलाफों वाले तकियों और सुंदर बिछौनों पर टेक लगाए हुए होंगे।
Rahman 55:77
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुम अपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किस का इनकार करोगे?
Rahman 55:78
तुम्हारे पालनहार के नाम की भलाई बहुत अधिक और बड़ी है, जो महानता और अपने बंदों पर उपकार और कृतज्ञता वाला है।
Vakıa 56:1
जब अनिवार्य रूप से क़ियामत घटित हो जाएगी।
Vakıa 56:2
कोई प्राणी ऐसा नहीं होगा, जो उसका इनकार करे, जैसे दुनिया में इनकार कर देता था।
Vakıa 56:3
वह पापी काफ़िरों को जहन्नम में दाखिल करके उन्हें नीचा करने वाली, और पुनीत ईमान वालों को जन्नत में दाखिल करके उन्हें ऊँचा करने वाली होगी।
Vakıa 56:4
जब धरती को बहुत ज़ोर से हिलाया जाएगा।
Vakıa 56:5
और पहाड़ बिलकुल महीन-महीन कर दिए जाएँगे।
Vakıa 56:6
सो वे चकना चूर होने के कारण बिखरी हुई धूल बन जाएँगे, जिसमें स्थिरता नहीं होगी।
Vakıa 56:7
और तुम उस दिन तीन प्रकार के लोग हो जाओगे।
Vakıa 56:8
तो दाहिने हाथ वाले, जो अपने कर्मपत्र दाहिने हाथ से लेंगे। उनका पद कितना ऊँचा और महान है!
Vakıa 56:9
और बाएँ हाथ वाले, जो अपने कर्मपत्र बाएँ हाथ से लेंगे। उनकी स्थिति कितनी हीन और बदतर है!
Vakıa 56:10
और जो लोग दुनिया में नेक काम करने में पहल करने वाले हैं, वही लोग आख़िरत में जन्नत में प्रवेश करने में दूसरों से आगे रहने वाले हैं।
Vakıa 56:11
यही लोग अल्लाह की (विशेष) निकटता प्राप्त किए हुए हैं।
Vakıa 56:12
वे नेमत के बाग़ों में विभिन्न प्रकार की नेमतों का आनंद लेते होंगे।
Vakıa 56:13
इस उम्मत (के अगले लोगों) में से और पिछली उम्मतों में से एक समूह होगा।
Vakıa 56:14
और आखिरी ज़माने के थोड़े लोग ही आगे रहने वाले समीपवर्ती लोगों में से होंगे।
Vakıa 56:15
सोने से बुने हुए पलंगों पर।
Vakıa 56:16
इन पलंगों पर तकिया लगाए आमने-सामने बैठे होंगे। उनमें से कोई दूसरे की पीठ को नहीं देखेगा।
Vakıa 56:17
उनके पास उनकी सेवा के लिए ऐसे बालक घूम रहे होंगे, जो न कभी बूढ़े होंगे और न मरेंगे।
Vakıa 56:18
वे उनके आस-पास ऐसे प्यालों के साथ जिनके दस्ते नहीं होते, ऐसी सुराहियों के साथ जिनके दस्ते होते हैं और छलकते जाम लेकर फिर रहे होंगे, जो जन्नत में बहने वाली शराब के होंगे, जिनके सोते कभी बंद नहीं होंगे।
Vakıa 56:19
वह मदिरा दुनिया की मदिरा की तरह नहीं होगी। क्योंकि उसके पीने वाले को न सिर दर्द होगा और न ही उसकी बुद्धि प्रभावित होगी।
Vakıa 56:20
और ये बालक उनके पास उनकी पसंद के फल लेकर फिर रहे होंगे।
Vakıa 56:21
तथा पक्षियों का मांस लेकर फिर रहे होंगे, जिसकी वे इच्छा रखते हैं।
Vakıa 56:22
और उनके लिए जन्नत में बड़ी आँखों वाली सुंदर स्त्रियाँ होंगी।
Vakıa 56:23
सीपियों में संरक्षित मोतियों की तरह।
Vakıa 56:24
उनके लिए उन अच्छे कर्मों के प्रतिफल के तौर पर जो वे दुनिया में किया करते थे।
Vakıa 56:25
वे जन्नत में अश्लील बातें नहीं सुनेंगे, और न ही कोई ऐसी बात जिसके कहने वाले को पाप लगे।
Vakıa 56:26
वे केवल अपने आपपर फ़रिश्तों का सलाम और उनका आपस में एक-दूसरे को सलाम करना सुनेंगे।
Vakıa 56:27
और दाहिने हाथ वाले - जो अपने कर्मपत्र अपने दाहिने हाथ में दिए जाएँगे - अल्लाह के निकट उनकी स्थिति और उनका पद कितना महान है!
Vakıa 56:28
(वे) ऐसी बेरियों में होंगे जिनके काँटे काटे हुए हैं, उनमें कोई कष्ट नहीं है।
Vakıa 56:29
और परत दर परत लगे हुए केलों में।
Vakıa 56:30
और ऐसी छाया में जो अच्छी तरह फैली हुई, निरंतर रहने वाली है, जो कभी समाप्त न होगी।
Vakıa 56:31
और सदा बहते पानी में।
Vakıa 56:32
तथा ढेर सारे फलों में जो सीमित नहीं हैं।
Vakıa 56:33
ये फल उनके पास से कभी समाप्त नहीं होंगे। क्योंकि उनका कोई मौसम नहीं होगा। तथा जब भी वे उन्हें लेना चाहेंगे, उसमें कोई बाधा नहीं होगी।
Vakıa 56:34
और पलंगों पर लगे ऊँचे बिस्तरों पर (होंगे)।
Vakıa 56:35
हमने उपर्युक्त हूरों को असामान्य तरीके से बनाया है।
Vakıa 56:36
चुनाँचे हमने उन्हें कुँवारियाँ बनाया, जिन्हें पहले छुआ नहीं गया।
Vakıa 56:37
जो अपने पतियों को प्रिय और समान उम्र वाली हैं।
Vakıa 56:38
हमने उन्हें दाहिने हाथ वालों के लिए बनाया है, जिन्हें उनके सौभाग्यशाली होने की निशानी के तौर पर दाईं ओर ले जाया जाएगा।
Vakıa 56:39
वे पिछले नबियों की उम्मतों में से एक समूह हैं।
Vakıa 56:40
तथा मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की उम्मत में से एक समूह हैं, जो किअंतिम उम्मत है।
Vakıa 56:41
और बाएँ हाथ वाले - जो अपने कर्मपत्र अपने बाएँ हाथ में दिए जाएँगे - उनकी स्थिति और उनका परिणाम कितना खराब है!
Vakıa 56:42
(वे) बहुत गर्म हवा में और बहुत गर्म पानी में (होंगे)।
Vakıa 56:43
और काले धुएँ की छाया में होंगे।
Vakıa 56:44
जो न चलते हुए सुहावनी होगी और न अच्छा दिखने वाली होगी।
Vakıa 56:45
वे इस यातना तक पहुँचने से पहले, दुनिया की सुख-सुविधाओं का आनंद ले रहे थे, उन्हें अपनी इच्छाओं की पूर्ति के सिवा किसी चीज़ की परवाह नहीं थी।
Vakıa 56:46
और वे अल्लाह का इनकार करने और उसे छोड़कर मूर्तियों की पूजा करने पर अड़े रहते थे।
Vakıa 56:47
और वे मरने के बाद पुनः जीवित किए जाने का इनकार करते थे। चुनाँचे उसका मज़ाक उड़ाते हुए और उसे असंभव समझते हुए कहते थे : क्या जब हम मर जाएँगे तथा मिट्टी और सड़ी हुई हड्डियाँ बन जाएँगे, तो क्या हम उसके बाद फिर से जीवित करके उठाए जाएँगे?!
Vakıa 56:48
और क्या हमारे पहले बाप-दादा भी उठाए जाएँगे, जो हमसे पहले मर गए?!
Vakıa 56:49
(ऐ रसूल!) आप इन पुनर्जीवन का इनकार करने वाले लोगों से कह दें : निःसंदेह अगले और पिछले (सभी) लोग।
Vakıa 56:50
क़ियामत के दिन हिसाब और बदले के लिए निश्चित रूप से एकत्र किए जाएँगे।
Vakıa 56:51
फिर निःसंदेह (ऐ मरणोपरांत पुनः जीवित किए जाने का इनकार करने वालो! सीधे मार्ग से भटके हुए लोगो!) तुम निश्चय क़ियामत के दिन ज़क़्क़ूम (थूहड़) के वृक्ष का फल खाने वाले हो, जो कि सबसे बुरा और सबसे गंदा फल है।
Vakıa 56:52
फिर निःसंदेह (ऐ मरणोपरांत पुनः जीवित किए जाने का इनकार करने वालो! सीधे मार्ग से भटके हुए लोगो!) तुम निश्चय क़ियामत के दिन ज़क़्क़ूम (थूहड़) के वृक्ष का फल खाने वाले हो, जो कि सबसे बुरा और सबसे गंदा फल है।
Vakıa 56:53
फिर उस कड़वे पेड़ (के फल) से अपने खाली पेट भरने वाले हो।
Vakıa 56:54
फिर उसपर अत्यधिक गर्म (खौलता हुआ) पानी पीने वाले हो।
Vakıa 56:55
फिर उसे बहुत ज़्यादा पीने वाले हो, जिस तरह न बुझने वाले प्यास के रोग से पीड़ित ऊँट पीता चला जाता है।
Vakıa 56:56
यह उल्लेख किया गया कड़वा भोजन और गर्म पानी उनका आतिथ्य है, जिसके साथ बदले के दिन उनका स्वागत किया जाएगा।
Vakıa 56:57
हम ही ने (ऐ झुठलाने वालो!) तुम्हें पैदा किया, जबकि तुम कुछ नहीं थे। फिर तुम क्यों सच नहीं मानते कि हम तुम्हारी मृत्यु के बाद तुम्हें दोबारा जीवित करके उठाएँगे?!
Vakıa 56:58
तो क्या (ऐ लोगो!) तुमने उस वीर्य पर विचार किया, जो तुम अपनी स्त्रियों के गर्भाशयों में टपकाते हो?!
Vakıa 56:59
क्या तुम उस वीर्य को पैदा करते हो या हम ही उसे पैदा करते हैं?!
Vakıa 56:60
हम ही ने तुम्हारे बीच मृत्यु का समय निश्चित किया है। चुनाँचे तुममें से प्रत्येक व्यक्ति का एक निर्धारित समय है, जिससे वह न आगे बढ़ सकता है और न ही देर कर सकता है। और हम असमर्थ नहीं हैं।
Vakıa 56:61
कि हम तुम्हारी वर्तमान रचना और रूप को, जिसे तुम जानते हो, बदल दें और तुम्हें ऐसी रचना और रूप में पैदा कर दें, जिसे तुम नहीं जानते।
Vakıa 56:62
निश्चय तुम तो यह जान चुके हो कि हमने तुम्हें पहली बार कैसे पैदा किया, फिर तुम विचार क्यों नहीं करते और जानते कि जिसने तुम्हें पहली बार पैदा किया है, वह तुम्हारी मृत्यु के बाद तुम्हें पुनर्जीवित करने में सक्षम है?!
Vakıa 56:63
फिर क्या तुमने उस बीज पर विचार किया जो तुम धरती में डालते हो?!
Vakıa 56:64
क्या तुम उस बीज को उगाते हो, या हम ही हैं जो उसे उगाते हैं?!
Vakıa 56:65
यदि हम उस खेती को चूर-चूर करना चाहें, तो उसके पकने और काटे जाने के निकट होने के बाद, अवश्य उसे चूर-चूर कर दें। फिर उसके बाद तुम उसे पहुँचने वाली आपदा पर आश्चर्य करते रह जाओ।
Vakıa 56:66
तुम कहने लगो : हमने जो कुछ खर्च किया था, उसकी हानि के द्वारा हमें दंडित किया गया है।
Vakıa 56:67
बल्कि हम रोज़ी से वंचित कर दिए गए हैं।
Vakıa 56:68
फिर क्या तुमने उस पानी पर विचार किया, जो तुम प्यास लगने पर पीते हो?!
Vakıa 56:69
क्या तुमने उसे आसमान में बादलों से उतारा है, या हम ही ने उसे उतारा है?!
Vakıa 56:70
अगर हम उस पानी को अत्यंत खारा बनाना चाहें कि वह पीने या पानी देने के काम न आए, तो हम उसे अत्यंत खारा बना दें। फिर तुम अल्लाह का शुक्र अदा क्यों नहीं करते कि उसने तुमपर दया करते हुए मीठा पानी उतारा है?!
Vakıa 56:71
फिर क्या तुमने उस आग पर विचार किया जिसे तुम अपने फायदे के लिए जलाते हो?!
Vakıa 56:72
क्या तुमने उस पेड़ को पैदा किया है, जिससे आग जलाई जाती है, या हम ही ने उसे तुमपर दया के स्वरूप पैदा किया है?!
Vakıa 56:73
हमने इस आग को तुम्हारे लिए आख़िरत की आग की याद दिलाने के लिए एक अनुस्मारक बना दिया है, तथा हमने इसे तुम्हारे यात्रियों के लिए एक लाभ बना दिया है।
Vakıa 56:74
अतः (ऐ रसूल) आप अपने महान पालनहार को उन चीज़ों से पवित्र ठहराएँ , जो उसके योग्य नहीं हैं।
Vakıa 56:75
अल्लाह ने सितारों के स्थानों और उनके गिरने की जगहों की क़सम खाई है।
Vakıa 56:76
और निःसंदेह इन स्थानों की क़सम खाना (यदि तुम उसकी महानता जानते हो) बहुत बड़ी बात है; क्योंकि इनके अंदर अनगिनत निशानियाँ और पाठ मौजूद हैं।
Vakıa 56:77
निश्चय (ऐ लोगो!) तुम्हारे सामने पढ़ा जाने वाला यह क़ुरआन, एक सम्मानित एवं प्रतिष्ठित क़ुरआन है। क्योंकि इसमें महान लाभ निहित हैं।
Vakıa 56:78
एक ऐसी किताब में अंकित है, जो लोगों की निगाहों से सुरक्षित है। और वह 'लौहे महफ़ूज़' है।
Vakıa 56:79
उसे केवल वे फरिशते छूते हैं, जो गुनाहों और दोषों से पवित्र किए गए हैं।
Vakıa 56:80
यह सारी सृष्टि के पालनहार की ओर से उसके नबी मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर उतारा गया है।
Vakıa 56:81
तो फिर क्या (ऐ मुश्रिको!) तुम इस वाणी को झुठलाने वाले हो, उसकी पुष्टि करने वाले नहीं हो?!
Vakıa 56:82
और तुम अल्लाह की दी हुई नेमतों पर उसका शुक्र इस तरह अदा करते हो कि उन्हें झुठला देते हो। इसलिए बारिश का श्रेय नक्षत्र को देते हो और कहते हो : हमपर अमुक और अमुक नक्षत्र के कारण बारिश हुई?!
Vakıa 56:83
फिर क्यों नहीं जब रूह (आत्मा) गले को पहुँचती है।
Vakıa 56:84
और उस समय तुम अपने सामने मरने वाले को देख रहे होते हो।
Vakıa 56:85
और हम अपने ज्ञान और सामर्थ्य से और अपने फ़रिश्तों के माध्यम से, तुम्हारे मरने वाले के तुमसे अधिक निकट होते हैं, लेकिन तुम इन फ़रिश्तों को नहीं देखते।
Vakıa 56:86
फिर क्यों नहीं (यदि तुम, अपने दावे के अनुसार, अपने कर्मों का बदला दिए जाने के लिए उठाए जाने वाले नहीं हो)
Vakıa 56:87
इस आत्मा को वापस ले आते, जो तुम्हारे मरने वाले के शरीर से निकली है, यदि तुम सच्चे हो?! हालाँकि तुम ऐसा नहीं कर सकते।
Vakıa 56:88
फिर अगर वह मरने वाला व्यक्ति अच्छे कामों में पहल करने वालों में से है।
Vakıa 56:89
तो उसके लिए ऐसा आराम जिसके बाद कोई थकान नहीं, उत्तम रोज़ी और दया है, तथा उसके लिए ऐसी जन्नत है, जिसमें वह अपनी मनचाही चीज़ों का आनंद लेगा।
Vakıa 56:90
और अगर वह मृतक दाहिने हाथ वालों में से है, तो उनकी चिंता न करें। क्योंकि उनके लिए सुरक्षा और शांति है।
Vakıa 56:91
और अगर वह मृतक दाहिने हाथ वालों में से है, तो उनकी चिंता न करें। क्योंकि उनके लिए सुरक्षा और शांति है।
Vakıa 56:92
और अगर वह मृतक अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के लाए हुए धर्म को झुठलाने वालों और सीधे मार्ग से भटके हुए लोगों में से है।
Vakıa 56:93
तो उसका आतिथ्य जिसके साथ उसका स्वागत किया जाएगा, अत्यंत गर्म पानी है।
Vakıa 56:94
और उसे जहन्नम की आग में जलना है।
Vakıa 56:95
निःसंदेह यह जो हमने (ऐ रसूल!) आपके सामने बयान किया है, यही निश्चित सत्य है, जो निर्विवाद एवं संदेह रहित है।
Vakıa 56:96
अतः आप अपने महान रब के नाम की पवित्रता का गुणगान कीजिए तथा उसे हर प्रकार के दोषों और त्रुटियों से पाक ठहराईये।
Hadid 57:1
आकाशों और धरती में अल्लाह की जो भी सृष्टि है, सब उसकी पाकी एवं पवित्रता का गान करती हैं। और वह सब पर प्रभुत्वशाली है जिसे कोई पराजित नहीं कर सकता, अपनी रचना और तक़दीर (नियति) में पूर्ण हिकमत वाला है।
Hadid 57:2
आकाशों और धरती का राज्य केवल उसी का है। वह जिसे जीवन देना चाहता है, उसे जीवन देता है और जिसे मारना चाहता है, उसे मारता है। और वह सब कुछ करने में सक्षम है, उसे कोई भी चीज़ अक्षम नहीं कर सकती।
Hadid 57:3
वही प्रथम है, जिससे पहले कोई चीज़ नहीं। और वही अंतिम है, जिसके बाद कोई चीज़ नहीं। वही ज़ाहिर है, जिससे ऊपर कोई चीज़ नहीं। और वही बातिन है, जिससे निकटतर कोई चीज़ नहीं। और वह हर चीज़ को जानता है, कोई चीज़ उसके ज्ञान के दायरे से बाहर नहीं है।
Hadid 57:4
वही है, जिसने आकाशों और धरती को छह दिनों में पैदा किया। रविवार से शुरू होकर शुक्रवार को समाप्त हुआ। हालाँकि वह उन्हें पलक झपकते ही पैदा करने में सक्षम है। फिर वह अर्श (सिंहासन) पर बुलंद हुआ, जैसा कि उसकी महिमा के योग्य है। वह जानता है जो कुछ धरती में बारिश और बीज आदि के रूप में प्रवेश करता है, और जो कुछ धरती से पौधों और खनिजों आदि के रूप में निकलता है, और जो कुछ आकाश से बारिश और वह़्य (प्रकाशना) आदि के रूप में उतरता है, और जो कुछ आकाश में फ़रिश्तों, बंदों के कर्मों और उनके प्राणों के रूप में चढ़ता है। और वह अपने ज्ञान के साथ तुम्हारे संग है (ऐ लोगो!) तुम जहाँ भी रहो, उससे तुम्हारी कोई चीज़ छिपी नहीं है। और जो कुछ तुम करते हो, अल्लाह उसे ख़ूब देखने वाला है, तुम्हारे कामों में से कुछ भी उससे छिपा नहीं है, और वह तुम्हें उसका प्रतिफल देगा।
Hadid 57:5
आकाशों और धरती का राज्य केवल उसी का है, और सारे मामले केवल उसी की ओर लौटाए जाते हैं। अतः वह क़ियामत के दिन प्राणियों का हिसाब लेगा और उन्हें उनके कर्मों का बदला देगा।
Hadid 57:6
वह रात को दिन में दाखिल करता है, तो अंधेरा छा जाता है और लोग नींद की आग़ोश में चले जाते हैं, तथा दिन को रात में दाख़िल करता है, तो प्रकाश आ जाता है और लोग अपने कामों में लग जाते हैं। और वह अपने बंदों के दिलों की सभी बातों को जानता है, उनमें से कुछ भी उससे छिपा नहीं है।
Hadid 57:7
अल्लाह पर ईमान लाओ और उसके रसूल पर ईमान लाओ, तथा उस माल में से खर्च करो, जिसका अल्लाह ने तुम्हें उत्तराधिकारी बनाया है, ताकि जो कुछ उसने तुम्हारे लिए निर्धारित किया है उसके अनुसार तुम उसका निपटान करो। फिर तुममें से जो लोग अल्लाह पर ईमान लाए और अल्लाह के रास्ते में अपना धन खर्च किए, उनके लिए उसके पास एक बड़ा प्रतिफल है और वह जन्नत है।
Hadid 57:8
और वह कौन-सी चीज़ है जो तुम्हें अल्लाह पर ईमान लाने से रोकती है?! जबकि रसूल तुम्हें अल्लाह की ओर इस आशा में बुला रहे हैं कि तुम अपने रब पर ईमान ले आओ। तथा अल्लाह तुमसे यह वचन ले चुका है कि तुम उसपर ईमान लाओगे, जब उसने तुम्हें तुम्हारे पिताओं की पीठ से बाहर निकाला, यदि तुम ईमान वाले हो।
Hadid 57:9
वही है, जो अपने बंदे मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर स्पष्ट निशानियाँ उतारता है; ताकि तुम्हें कुफ़्र और अज्ञान के अँधेरे से निकाल कर ईमान और ज्ञान के उजाले की ओर ले आए। और निश्चय अल्लाह तुम्हारे लिए अत्यंत करुणामय एवं दयावान् है कि उसने अपने नबी को तुम्हारे पास मार्गदर्शक और शुभ समाचार सुनाने वाला बनाकर भेजा।
Hadid 57:10
और वह कौन-सी चीज़ है जो तुम्हें अल्लाह के रास्ते में खर्च करने से रोकती है?! जबकि आकाशों और धरती की विरासत अल्लाह ही के लिए है। (ऐ मोमिनो!) तुममें से जिसने मक्का की विजय से पहले, अल्लाह की प्रसन्नता प्राप्त करने के लिए, उसके मार्ग में अपना धन खर्च किया और इस्लाम के समर्थन के लिए काफ़िरों से लड़ाई की, वह उस व्यक्ति के समान (बराबर) नहीं है, जिसने मक्का की विजय के बाद खर्च किया और काफ़िरों से युद्ध किया। जिन लोगों ने मक्का की विजय से पहले खर्च किया और अल्लाह के मार्ग में युद्ध किया, वे अल्लाह के निकट उन लोगों से ऊँचे पद एवं उच्च स्थान वाले हैं, जिन्होंने उसकी विजय के बाद उसके मार्ग में अपना धन खर्च किया और काफ़िरों से युद्ध किया। जबकि अल्लाह ने दोनों पक्षों से जन्नत का वादा किया है। और तुम जो कुछ कर रहे हो, अल्लाह उसे जानता है। तुम्हारे कर्मों में से कुछ भी उससे छिपा नहीं है और वह तुम्हें उसका बदला देगा।
Hadid 57:11
कौन है, जो दिल की ख़ुशी से अपना माल अल्लाह के लिए खर्च करे, तो अल्लाह उसे उसके ख़र्च किए हुए माल का बदला कई गुना बढ़ाकर दे और उसके लिए क़ियामत के दिन एक सम्मानजनक बदला अर्थात् जन्नत है?!
Hadid 57:12
जिस दिन आप मोमिन पुरुषों और मोमिन स्त्रियों को देखेंगे कि उनका प्रकाश उनके आगे-आगे और उनके दाहिनी ओर चल रहा होगा। और उस दिन उनसे कहा जाएगा : आज तुम्हारे लिए ऐसे बाग़ों की खुशख़बरी है, जिनके महलों और पेड़ों के नीचे से नहरें बहती हैं, जिनमें तुम हमेशा रहने वाले हो। यही बदला तो बहुत बड़ी सफलता है, जिसके बराबर कोई सफलता नहीं हो सकती।
Hadid 57:13
जिस दिन मुनाफ़िक़ पुरुष और मुनाफ़िक़ स्त्रियाँ, ईमान वालों से कहेंगे : हमारी प्रतीक्षा करो, ताकि हम तुम्हारे प्रकाश में से कुछ प्रकाश हासिल कर लें, जो 'सिरात' (पुल) पार करने में हमारे लिए सहायक हो। उस समय मुनाफ़िक़ों से उनका मज़ाक उड़ाते हुए कहा जाएगा : अपने पीछे लौट जाओ, फिर कोई प्रकाश तलाश करो, जिससे तुम रोशनी हासिल कर सको। फिर उनके बीच एक दीवार बना दी जाएगी, जिसमें एक द्वार होगा। उसका भीतरी भाग, जो ईमान वालों की ओर होगा, उसमें दया होगी और बाहरी भाग, जो मुनाफ़िक़ों की ओर होगा, उसमें यातना होगी।
Hadid 57:14
मुनाफ़िक़ लोग, ईमान वालों को पुकारकर कहेंगे : "क्या हम तुम्हारे साथ ईमान और आज्ञाकारिता पर नहीं थे? मोमिन उनसे कहेंगे : क्यों नहीं, तुम हमारे साथ थे। लेकिन तुमने अपने आपको निफ़ाक़ के फ़ितने में डालकर अपना नाश कर लिया, और इस प्रतीक्षा में रहे कि ईमान वाले पराजित हो जाएँ, तो तुम अपने कुफ़्र का ऐलान करो, तथा तुमने अल्लाह के ईमान वालों की मदद करने के बारे में और मौत के बाद दोबारा उठाए जाने के बारे संदेह किया, तथा तुम झूठी महत्वाकांक्षाओं के धोखे में पड़े रहे, यहाँ तक कि इसी अवस्था में तुम्हारी मौत आ गई, और इस शैतान ने तुम्हें अल्लाह के बारे में धोखा दिया।
Hadid 57:15
सो आज (ऐ मुनाफ़िक़ो!) तुमसे अल्लाह की यातना से कोई छुड़ौती नहीं ली जाएगी, और न ही उन लोगों से कोई छुड़ौती ली जाएगी, जिन्होंने खुले तौर पर अल्लाह के साथ कुफ़्र किया। तुम्हारा तथा काफ़िरों का ठिकाना जहन्नम है। यह तुम्हारे लिए अधिक उपयुक्त है और तुम इसके अधिक योग्य हो, तथा यह बहुत बुरा ठिकाना है।
Hadid 57:16
क्या अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान लाने वालों के लिए वह समय नहीं आया है कि उनके दिल अल्लाह के ज़िक्र के लिए और उसके लिए जो क़ुरआन में वादा या धमकी उतरी है, नरम नरम हो जाएँ और संतुष्ट हो जाएँ। तथा दिलों की कठोरता में उन यहूदियों की तरह न हो जाएँ, जिन्हें तौरात दिया गया और न उन ईसाइयों की तरह, जो इंजील दिए गए। फिर उनके और उनके नबियों के आने के बीच का समय लंबा हो गया, तो इसके कारण उनके दिल कठोर हो गए और उनमें से बहुत-से लोग अल्लाह की आज्ञाकारिता से निकलकर उसकी अवज्ञा करने वाले हैं?!
Hadid 57:17
जान लो कि अल्लाह धरती को उसके सूखने के बाद उसमें पौधे उगाकर पुनर्जीवित करता है।निःसंदेह हमने (ऐ लोगो!) तुम्हारे लिए अल्लाह की शक्ति और एकेश्वरवाद के प्रमाण और तर्क स्पष्ट कर दिए हैं, ताकि तुम उन्हें समझो और जान जाओ कि जिस (अल्लाह) ने धरती को उसकी मृत्यु के बाद पुनर्जीवित किया है, वह तुम्हारी मृत्यु के बाद तुम्हें पुनर्जीवित करने में सक्षम है, तथा तुम्हारे दिलों को उनकी कठोरता के बाद नरम करने में सक्षम है।
Hadid 57:18
निःसंदेह अपना कुछ धन दान करने वाले पुरुष और अपना कुछ धन दान करने वाली स्त्रियाँ, जो उसे बिना उपकार जताए और कष्ट पहुँचाए, अपने दिल की खुशी के साथ खर्च करते हैं, उनके लिए उनके कर्मों का प्रतिफल दस गुना से सात सौ गुना तक, बल्कि उससे भी अधिक गुना तक बढ़ा दिया जाएगा। और इसके अतिरिक्त उनके लिए अल्लाह के पास एक सम्मानित प्रतिफल अर्थात् जन्नत है।
Hadid 57:19
जो लोग अल्लाह पर ईमान लाए और बिना किसी भेदभाव के उसके (सभी) रसूलों पर ईमान लाए, वही अपने रब के निकट 'सिद्दीक़' और 'शहीद' हैं। उनके लिए उनका सम्मानित प्रतिफल है जो उन्हीं के लिए तैयार किया गया है, तथा उनके लिए उनका वह प्रकाश है, जो क़ियामत के दिन उनके आगे और उनके दाहिनी ओर चल रहा होगा। और जिन लोगों ने अल्लाह और उसके रसूलों का इनकार किया और हमारे रसूल पर उतारी गई हमारी आयतों को झुठलाया, वही लोग जहन्नम वाले हैं, जो क़ियामत के दिन उसमें दाख़िल होंगे और हमेशा उसी में रहेंगे, उससे कभी बाहर नहीं निकलेंगे।
Hadid 57:20
जान लो कि इस दुनिया का जीवन मात्र एक खेल है जिसके साथ शरीर खेलते हैं, और एक मनोरंजन है जिसके साथ दिल मनोरंजन करते हैं, एक अलंकरण (सजावट) है जिसके साथ तुम खुद को सुशोभित करते हो, उसमें जो धन और सामाग्री तथा सत्ता है उनके द्वारा तुम्हारा आपस में एक-दूसरे पर बड़ाई जताना है, तथा धन की बहुतायत और बच्चों की बहुतायत के बारे में शेखी बघारना है। इसका उदाहरण उस वर्षा की तरह है, जिससे पैदा होने वाली फसल किसान को खूब अच्छी लगती है, फिर कुछ ही समय में यह हरी-भरी फसल सूख जाती है, फिर (ऐ देखने वाले!) तुम उसे हरी होने के बाद पीली देखते हो, फिर अल्लाह उसे चूर्ण-विचूर्ण कर देता है। और आख़िरत में काफ़िरों और मुनाफ़िक़ों के लिए कड़ी यातना है और अल्लाह की ओर से उसके मोमिन बंदों के गुनाहों की माफ़ी और उसकी प्रसन्नता है। और इस संसार का जीवन एक नश्वर सामान के अलावा और कुछ नहीं है जिसमें कोई स्थिरता नहीं है। इसलिए जो कोई इसके नश्वर सामान को आख़िरत की नेमतों पर तरजीह देता है, तो वह घाटा उठाने वाला और धोखा ग्रस्त है।
Hadid 57:21
(ऐ लोगो!) उन नेक कार्यों की ओर एक-दूसरे से आगे बढ़ो, जिनसे तुम अपने पापों की क्षमा प्राप्त कर सको; जैसे तौबा और नेकी के अन्य कार्य, और ताकि उनके द्वारा ऐसी जन्नत प्राप्त कर सको, जिसकी चौड़ाई आसमान और ज़मीन की चौड़ाई के समान है। इस जन्नत को अल्लाह ने उन लोगों के लिए तैयार किया है, जो उसपर और उसके रसूलों पर ईमान लाए। यह प्रतिफल अल्लाह का अनुग्रह है, वह उसे अपने बंदों में से जिसे चाहता है, प्रदान करता है। और अल्लाह अपने ईमान वाले बंदों पर महान अनुग्रह वाला है।
Hadid 57:22
लोगों पर जो भी मुसीबत धरती में आती हैं, जैसे सूखा और अन्य चीजें, तथा उनपर जो भी विपत्ति खुद अपने ऊपर आती है, वह हमारे सृष्टि की रचना करने से पहले ही से 'लौह़े महफ़ूज़' (सुरक्षित पट्टिका) में लिखी हुई है। निश्चय यह अल्लाह के लिए बहुत आसान है।
Hadid 57:23
और यह इसलिए ताकि (ऐ लोगो!) तुम उस चीज़ पर शोक न करो, जो तुमसे छूट जाए, तथा उन नेमतों पर फूल न जाओ, जो अल्लाह ने तुम्हें प्रदान की हैं। निश्चय अल्लाह किसी अहंकार करने वाले, अल्लाह की दी हुई नेमतों पर लोगों के सामने गर्व करने वाले से प्रेम नहीं करता।
Hadid 57:24
जो लोग उस चीज़ को खर्च करने में कंजूसी करते हैं, जिसका खर्च करना उनपर अनिवार्य है, और दूसरे लोगों को (भी) कंजूसी करने के लिए कहते हैं, वे लोग घाटा उठाने वाले हैं। और जो अल्लाह की आज्ञाकारिता से मुँह फेरता है, वह अल्लाह को नुक़सान नहीं पहुँचाएगा, बल्कि खुद को नुक़सान पहुँचाएगा। निश्चय अल्लाह ही बड़ा बेपरवाह है, इसलिए उसे अपने बंदों की आज्ञाकारिता की ज़रूरत नहीं है, वह हर हाल में बहुत प्रशंसनीय है।
Hadid 57:25
निश्चय हमने अपने रसूलों को स्पष्ट प्रमाणों और खुले तर्कों के साथ भेजा और उनके साथ किताबें उतारीं, तथा उनके साथ तराज़ू उतारा; ताकि लोग न्याय पर क़ायम रहें। और हमने लोहा उतारा, जिसमें बड़ी शक्ति है, चुनाँचे उसी से हथियार बनाए जाते हैं। तथा उसमें लोगों के लिए उनके उद्योगों और व्यवसायों में अनेक लाभ हैं। और ताकि अल्लाह इस तरह जान ले कि बंदों के सामने स्पष्ट हो जाए कि उसके बंदों में से कौन उसकी और उसके रसूलों की बिना देखे मदद करता है। निश्चय अल्लाह शक्तिशाली, प्रभुत्वशाली है, उसे कोई चीज़ पराजित नहीं कर सकती, और वह कोई भी चीज़ करने में असमर्थ नहीं है।
Hadid 57:26
और निश्चय ही हमने नूह अलैहिस्सलाम और इबराहीम अलैहिस्सलाम को रसूल बनाकर भेजा और उन दोनों की संतान में पैग़ंबरी और उतरने वाली किताबें रखीं। फिर उन दोनों की संतान में से कुछ सीधे मार्ग पर चलने वाले हैं और उनमें से बहुत-से लोग अल्लाह की आज्ञाकारिता से निकल जाने वाले हैं।
Hadid 57:27
फिर हमने उनके बाद अपने रसूल भेजे। हमने उन्हें एक के बाद एक उनके समुदायों की ओर भेजे। और उनके बाद मरयम के पुत्र ईसा को भेजा और उन्हें इंजील प्रदान की। तथा उनपर ईमान लाने वाले और उनका अनुसरण करने वाले लोगों के दिलों में करुणा एवं दयालुता रख दी। अतः वे आपस में एक-दूसरे के प्रति स्नेह और सहानुभूति रखने वाले थे। उन्होंने अपने धर्म में अतिशयोक्ति का आविष्कार किया। इसलिए उन्होंने अल्लाह की हलाल की हुई कुछ चीज़ों, जैसे विवाह और सुख-आनंद की चीज़ों को छोड़ दिया। हालाँकि हमने उन्हें ऐसा करने के लिए नहीं कहा। बल्कि उन्होंने धर्म में नवाचार पैदा करते हुए, खुद को उसके लिए प्रतिबद्ध कर लिया। हमने तो केवल अल्लाह की प्रसन्नता का पालन करने के लिए कहा था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। तो हमने उनमें से ईमान लाने वालों को उनका बदला दे दिया। और उनमें से बहुत-से लोग अल्लाह के रसूल मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के लाए हुए धर्म को झुठलाकर अल्लाह की आज्ञाकारिता से बाहर हैं।
Hadid 57:28
ऐ अल्लाह पर ईमान रखने वालो और उसकी शरीयत पर अमल करने वालो! अल्लाह के आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर, उससे डरते रहो और उसके रसूल पर ईमान लाओ, अल्लाह तुम्हें मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर ईमान लाने तथा पिछले रसूलों पर ईमान लाने के लिए अज्र-व-सवाब का दोहरा हिस्सा देगा, और तुम्हें एक प्रकाश प्रदान करेगा, जिससे तुम अपने सांसारिक जीवन में मार्गदर्शित होगे और क़ियामत के दिन उसकी रोशनी में सिरात (पुल) पार करोगे। और वह तुम्हारे पापों को क्षमा कर देगा, चुनाँचे वह उन्हें ढँक देगा और उनपर तुम्हारी पकड़ नहीं करेगा। और अल्लाह अपने बंदों को बहुत क्षमा करने वाला, उनपर अत्यंत दया करने वाला है।
Hadid 57:29
हमने (ऐ मोमिनो!) तुम्हारे लिए जो दोहरा सवाब तैयार किया है, उस महान अनुग्रह को तुम्हारे लिए इसलिए स्पष्ट कर दिया है; ताकि पूर्व किताब वाले यहूदी और ईसाई जान लें कि वे अल्लाह के अनुग्रह में से किसी भी चीज़ पर अधिकार नहीं रखते कि उसे जिसे चाहें, दे दें और जिसे चाहें, वंचित कर दें। और ताकि वे यह भी जान लें कि अनुग्रह अल्लाह महिमावान के हाथ में है, वह उसे अपने बंदों में से जिसे चाहता है, देता है। और अल्लाह महान अनुग्रह वाला है, जिसे वह अपने बंदों में से उसे प्रदान करता है, जिसे चाहता है।
Mücadele 58:1
अल्लाह ने उस महिला (अर्थात् ख़ौला बिंत सा'लबा) की बात सुन ली, जो (ऐ रसूल!) आपसे अपने पति (अर्थात् औस बिन सामित) के बारे में, जब उसने उससे 'ज़िहार' कर लिया था, बहस कर रही थी और उसके पति ने उसके साथ जो कुछ किया था, उसकी अल्लाह से शिकायत कर रही थी। और अल्लाह तुम दोनों की बात-चीत सुन रहा था। उसमें से कुछ भी उससे छिपा नहीं है। निःसंदेह अल्लाह अपने बंदों की बातों को सुनने वाला, उनके कर्मों को देखने वाला है। उससे कोई भी चीज़ छिपी नहीं रहती।
Mücadele 58:2
जो लोग अपनी पत्नियों से 'ज़िहार' करते हैं; इस प्रकार कि उनमें से कोई अपनी पत्नी से कहता है : ''तुम मुझपर मेरी माँ की पीठ की तरह हो", वे अपनी इस बात में झूठे हैं। क्योंकि उनकी पत्नियाँ उनकी माँएँ नहीं हैं। बल्कि उनकी माँएँ केवल वे स्त्रियाँ हैं, जिन्होंने उन्हें जन्म दिया। वे इस तरह की बात कहकर निश्चित रूप से एक घृणित बात और झूठ कहते हैं। और अल्लाह बहुत माफ़ करने वाला, अत्यंत क्षमाशील है। इसलिए उसने उन्हें पाप से मुक्त करने हेतु उनके लिए 'कफ़्फ़ारा' (प्रायश्चित) का नियम बनाया है।
Mücadele 58:3
जो लोग यह घृणित बात कहते हैं, फिर उन स्त्रियों के साथ संभोग करना चाहते हैं, जिनसे उन्होंने ज़िहार किया था, तो उनके लिए अनिवार्य है कि उनके साथ संभोग करने से पहले 'कफ़्फ़ारा' के तौर पर एक दास मुक्त करें। यह उक्त आदेश तुम्हें 'ज़िहार' से बाज़ रखने के लिए दिया जा रहा है। और अल्लाह तुम्हारे कार्यों से पूरी तरह अवगत है। उससे तुम्हारे कार्यों में से कुछ भी छिपा नहीं है।
Mücadele 58:4
फिर तुममें से जो व्यक्ति मुक्त करने के लिए दास न पाए, तो उसे अपनी 'ज़िहार' की हुई पत्नी के साथ संभोग करने से पहले लगातार दो महीने तक रोज़े रखने हैं। फिर जो व्यक्ति लगातार दो महीनों तक रोज़ा रखने में असमर्थ है, उसे साठ ग़रीबों को खाना खिलाना है। यह आदेश जिसका हमने फैसला किया है, इसलिए है ताकि तुम यह विश्वास करो कि अल्लाह ने इसका आदेश दिया है, अतः तुम उसके आदेश का पालन करो और उसके रसूल का अनुसरण करो। ये नियम जो हमने तुम्हारे लिए बनाए हैं, अल्लाह की सीमाएँ हैं, जो उसने अपने बंदों के लिए निर्धारित की हैं। अतः उनका उल्लंघन न करो। और अल्लाह के नियमों तथा उसकी निर्धारित की हुई सीमाओं को नकारने वालों के लिए दर्दनाक यातना है।
Mücadele 58:5
निश्चय जो लोग अल्लाह और उसके रसूल का विरोध करते हैं, वे उसी तरह अपमानित और तिरस्कृत किए जाएँगे, जैसा कि पिछले समुदायों में से उसका विरोध करने वालों को अपमानित और तिरस्कृत किया गया। हमने स्पष्ट निशानियाँ उतार दी हैं। और अल्लाह का तथा उसके रसूलों और उसकी निशानियों का इनकार करने वालों के लिए अपमानजनक यातना है।
Mücadele 58:6
जिस दिन अल्लाह उन सभी लोगों को मरणोपरांत पुनर्जीवित करेगा, उनमें से किसी को नहीं छोड़ेगा। फिर उन्हें उनके दुनिया में किए हुए बुरे कर्मों से सूचित करेगा। अल्लाह ने उनके कर्मों को संरक्षित कर रखा है। इसलिए उनके कामों में से कुछ भी उससे नहीं छूटा है। जबकि वे खुद उसे भूल गए। चुनाँचे वे उसे अपने उन कर्मपत्रों में लिखा हुआ पाएँगे, जो हर छोटे-बड़े कर्म को सुरक्षित रखते हैं। और अल्लाह हर चीज़ से अवगत है, उनके कर्मों में से कुछ भी उससे छिपा नहीं है।
Mücadele 58:7
ऐ रसूल! क्या आपने नहीं देखा कि अल्लाह आकाशों तथा धरती की सभी चीज़ों को जानता है। उन दोनों में उपस्थित चीज़ों में से कोई चीज़ उससे छिपी हुई नहीं है। किसी तीन लोगों की गुप्त रूप से कोई बात-चीत नहीं होती, परंतु वह महामहिम (अल्लाह) अपने ज्ञान के साथ उनका चौथा होता है। तथा किसी पाँच लोगों की गुप्त रूप से कोई बात-चीत नहीं होती, परंतु वह महामहिम (अल्लाह) अपने ज्ञान के साथ उनका छठा होता है। तथा इस संख्या से कम या इससे अधिक लोगों की गुप्त रूप से कोई बात-चीत नहीं होती, परंतु वह अपने ज्ञान के साथ उनके साथ होता है, चाहे वे जहाँ कहीं भी रहें। उनकी बातों में से कुछ भी उससे छिपा नहीं है। फिर अल्लाह उन्हें क़ियामत के दिन उनके कर्मों के बारे में बताएगा। निश्चय अल्लाह हर वस्तु को जानने वाला है। उससे कोई वस्तु छिपी नहीं है। निश्चय अल्लाह हर वस्तु को जानने वाला है।
Mücadele 58:8
क्या (ऐ रसूल!) आपने उन यहूदियों को नहीं देखा, जो अगर किसी मोमिन को देखते, तो कानाफूसी करने लगते थे। अतः अल्लाह ने उन्हें कानाफूसी से मना कर दिया। लेकिन वे फिर वही काम करते हैं, जिससे अल्लाह ने उन्हें मना किया था और वे आपस में ऐसी कानाफूसियाँ करते हैं, जिनमें गुनाह होता है, जैसे मुसलमानों की ग़ीबत करना, तथा जिनमें मुसलमानों पर अत्याचार होता है, और जिनमें रसूल की अवज्ञा होती है। और जब वे (ऐ रसूल!) आपके पास आते हैं, तो ऐसे शब्दों से आपको सलाम करते हैं, जिनसे अल्लाह ने आपको सलाम नहीं किया है। चुनाँचे वे कहते हैं : "अस्सामु अलैका" इससे उनका मतलब यह होता है कि आपको मौत आए। तथा वे नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को झुठलाने के लिए कहते हैं : हम जो कुछ कहते हैं, उसपर अल्लाह हमें यातना क्यों नहीं देता। क्योंकि अगर वह अपने नबी होने के दावे में सच्चा होता, तो हम जो कुछ उसके बारे में कहते हैं, उसके कारण अल्लाह हमें अवश्य दंडित करता! उन्होंने जो कुछ कहा है उसपर सज़ा के तौर पर उन्हें जहन्नम ही काफी है। वे उसकी गर्मी को झेलेंगे। अतः उनका ठिकाना बहुत बुरा ठिकाना है।
Mücadele 58:9
ऐ अल्लाह पर ईमान रखने वालो और उसकी शरीयत पर अमल करने वालो! ऐसी कानाफूसी न करो, जिसमें गुनाह, या अत्याचार या रसूल की अवज्ञा हो, ताकि तुम यहूदियों की तरह न हो जाओ। बल्कि ऐसी कानाफूसी करो, जो अल्लाह के आज्ञापालन और उसकी अवज्ञा से रुकने पर आधारित हो। तथा अल्लाह से, उसके आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर, डरते रहो। क्योंकि अकेला वही है, जिसके पास तुम क़ियामत के दिन हिसाब और बदले के लिए एकत्रित किए जाओगे।
Mücadele 58:10
निश्चित रूप से - गुनाह, अत्याचार और रसूल की अवज्ञा पर आधारित - कानाफूसी शैतान की ओर से अपने दोस्तों के लिए उसे शोभित करके प्रस्तुत करने और फुसफुसाने के कारण है। ताकि वह ईमान वालों को इस बात से शोकाकुल कर दे कि उनके विरुद्ध चाल चली जा रही है। हालाँकि शैतान और उसका यह सुशोभीकरण, अल्लाह की मर्ज़ी और इच्छा के बिना ईमान वालों को कुछ भी नुक़सान नहीं पहुँचा सकता। और ईमान वालों को अपने सभी मामलों में अल्लाह ही पर भरोसा करना चाहिए।
Mücadele 58:11
ऐ अल्लाह पर ईमान रखने वालो और उसकी शरीयत पर अमल करने वालो! जब तुमसे कहा जाए कि मजलिसों (बैठकों) में जगह कुशादा कर दो, तो उनमें जगह बना दिया करो। अल्लाह तुम्हारे सांसारिक जीवन तथा आख़िरत में तुम्हारे लिए विस्तार पैदा करेगा। और जब तुमसे कहा जाए : कुछ मजलिसों से उठ जाओ, ताकि वहाँ प्रतिष्ठित लोग बैठ सकें, तो वहाँ से उठ जाया करो। अल्लाह तुममें से उन लोगों के दर्जों (पदों) को बहुत ऊँचा करेगा, जो ईमान लाए और जो ज्ञान दिए गए। और अल्लाह तुम्हारे कार्यों से पूरी तरह अवगत है। उससे तुम्हारे कार्यों में से कुछ भी छिपा नहीं है। और वह तुम्हें उनका बदला देगा।
Mücadele 58:12
जब सहाबा नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से बहुत ज़्यादा कानाफूसी करने लगे, तो अल्लाह ने फरमाया : ऐ ईमान वालो! जब तुम रसूल से गुप्त रूप से बात करना चाहो, तो गुप्त रूप से बात करने से पहले सदक़ा पेश करो। यह सदक़ा पेश करना तुम्हारे लिए उत्तम और अधिक पवित्र है। क्योंकि उसमें अल्लाह का आज्ञापालन है, जो दिलों को शुद्ध (पवित्र) करता है। अगर तुम्हें सदक़ा करने के लिए कुछ न मिले, तो उनसे गुप्त रूप से बात करने में तुमपर कोई गुनाह नहीं है। क्योंकि अल्लाह अपने बंदों के गुनाहों को माफ़ करने वाला और उनपर दया करने वाला है। यही कारण है कि उसने उन्हें केवल उसी चीज़ का बाध्य किया है,जो वे कर सकते हैं।
Mücadele 58:13
क्या तुम रसूल से सरगोशी करने से पहले सदक़ा देने के कारण गरीबी से डर गए? सो, यदि तुमने अल्लाह के इस आदेश का पालन नहीं किया, और अल्लाह ने तुम्हें क्षमा कर दिया कि इसे छोड़ने की छूट प्रदान कर दी, तो अब तुम उत्तम तरीक़े से नमाज़ क़ायम करो, अपने धन की ज़कात दो, तथा अल्लाह एवं उसके रसूल का अनुसरण करो। अल्लाह तुम्हारे कार्यों से पूरी तरह अवगत है। उससे तुम्हारा कोई काम छिपा नहीं है। और वह तुम्हें तुम्हारे कर्मों का बदला देगा।
Mücadele 58:14
क्या (ऐ रसूल) आपने उन मुनाफ़िक़ो (पाखंडियों) को नहीं देखा, जिन्होंने उन यहूदियों को मित्र बना लिया, जिनपर उनके कुफ़्र और पापों के कारण अल्लाह क्रोधित हुआ? ये मुनाफ़िक़ न तो मोमिनों में से हैं और न यहूदियों में से। बल्कि वे दुविधा में पड़े हुए हैं, न इधर के हैं, न उधर के। तथा वे क़समें खाते हैं कि वे मुसलमान हैं, और उन्होंने मुसलमानों की सूचनाएँ यहूदियों को नहीं पहुँचाई हैं। जबकि वे अपनी क़सम में झूठे हैं।
Mücadele 58:15
अल्लाह ने उनके लिए आख़िरत में बड़ी कठोर यातना तैयार कर रखी है। क्योंकि वह उन्हें जहन्नम के पाताल में दाखिल करेगा। निश्चय वे दुनिया में कुफ़्र के बहुत ही बुरे काम करते रहे हैं।
Mücadele 58:16
उन्होंने अपनी क़समों को, जो वे खाया करते थे, कुफ़्र के कारण क़त्ल होने से बचने के लिए ढाल बना ली, क्योंकि उन्होंने क़समों के माध्यम से अपनी जान और माल की रक्षा के लिए मुसलमान होने का दिखावा किया। इस तरह उन्होंने लोगों को सत्य से फेर दिया। क्योंकि वे मुसलमानों को कमज़ोर और हतोत्साहित करते थे। अतः उनके लिए अपमानजनक यातना है, जो उन्हें अपमानित और तिरस्कृत करेगी।
Mücadele 58:17
उनके धन और उनकी संतान अल्लाह के समक्ष उनके कुछ काम न आएँगे। ये लोग जहन्नम के वासी हैं, जो उसमें प्रवेश करेंगे और उसी में हमेशा के लिए रहेंगे, उनकी यातना कभी बंद नहीं होगी।
Mücadele 58:18
जिस दिन अल्लाह उन सबको बदले के लिए पुनर्जीवित करके उठाएगा, उनमें से किसी को भी नहीं छोड़ेगा, तो वे अल्लाह के सामने क़समें खाएँगे कि वे कुफ़्र और निफ़ाक़ पर नहीं थे। बल्कि, वे अल्लाह को प्रसन्न करने वाले काम करने वाले मोमिन थे। वे आख़िरत में अल्लाह के सामने क़समें खाएँगे, जैसे कि वे दुनिया में (ऐ मोमिनो) तुम्हारे सामने कसमें खाकर कहते थे कि वे मुसलमान हैं। वे समझेंगे कि इन क़समों की वजह से जो वे अल्लाह के सामने खा रहे हैं, किसी ऐसे आधार पर हैं, जो उन्हें कोई लाभ पहुँचाएगा, या उनसे कोई नुकसान दूर कर देगा। सुन लो, वे वही हैं जो वास्तव में दुनिया में भी अपनी क़समों में तथा आखिरत में भी अपनी क़समों में झूठे हैं।
Mücadele 58:19
शैतान उनपर हावी हो गया है और उन्हें अपने वसवसे के ज़रिए अल्लाह की याद भुला दी है। इसलिए उन्होंने अल्लाह को खुश करने वाले कार्य नहीं किए। बल्कि ऐसे कार्य किए जो उसे नाराज़ करने वाले हैं। इन विशेषताओं वाले लोग ही इबलीस के सैनिक और उसके अनुयायी हैं। सुन लो, निश्चय इबलीस के सैनिक और उसके अनुयायी ही दुनिया और आख़िरत में क्षति उठाने वाले हैं। क्योंकि उन्होंने मार्गदर्शन को गुमराही के बदले में और जन्नत को जहन्नम के बदले में बेच दिया है।
Mücadele 58:20
निःसंदेह जो लोग अल्लाह और उसके रसूल का विरोध करते हैं, वही लोग उन काफ़िर समुदायों में शामिल हैं, जिन्हें अल्लाह ने दुनिया एवं आख़िरत में अपमानित और तिरस्कृत किया है।
Mücadele 58:21
अल्लाह ने अपने पूर्व ज्ञान के आधार पर निर्णय कर दिया है कि निश्चित रूप से मैं और मेरे रसूल ही तर्क और शक्ति के साथ अपने दुश्मनों पर विजयी रहेंगे। निश्चय अल्लाह अपने रसूलों की सहायता करने पर सर्वशक्तिमान, प्रभुत्ववशाली है, जो उनके दुश्मनों से बदला लेता है।
Mücadele 58:22
आप (ऐ नबी) उन लोगों को जो अल्लाह एवं क़ियामत के दिन पर ईमान रखते हैं, ऐसा नहीं पाएँगे कि वे उन लोगों से प्रेम करते और मित्रता रखते हों, जो अल्लाह और उसके रसूल से दुश्मनी रखते हैं, यद्यपि ये अल्लाह और उसके रसूल के दुश्मन उनके पिता, या उनके पुत्र, या उनके भाई, या उनके क़बीले वाले ही क्यों न हों, जिनसे वे संबंधित होते हैं। क्योंकि ईमान अल्लाह और उसके रसूल के दुश्मनों से मित्रता रखने से रोकता है, और क्योंकि ईमान का बंधन सभी बंधनों से सर्वोपरि है। अतः, टकराव के समय ईमान के बंधन को प्राथमिकता दी जाएगी। जो लोग अल्लाह और उसके रसूल से दुश्मनी रखने वालों से मित्रता नहीं रखते - भले ही वे इनके रिश्तेदार हों - , यही वे लोग हैं, जिनके दिलों में अल्लाह ने ईमान को जमा दिया है, इसलिए वह परिवर्तित नहीं होता। तथा उन्हें अपने प्रमाण और प्रकाश के साथ मज़बूत कर दिया है। और उन्हें क़ियामत के दिन सदैव रहने वाली जन्नतों में दाखिल करेगा, जिनके महलों और पेड़ों के नीचे से नहरे बहती होंगी। वे हमेशा के लिए वहीं रहेंगे। उनकी नेमतें उनसे बाधित नहीं होंगी और न ही वे (स्वयं) उससे नाश होंगे। अल्लाह उनसे इस तरह प्रसन्न हो गया कि उसके बाद कभी भी नाराज़ नहीं होगा। तथा वे भी अल्लाह से प्रसन्न हो गए, क्योंकि उसने उन्हें ऐसी नेमतें प्रदान कीं, जो कभी ख़त्म नहीं होंगी, जिनमें अल्लाह महिमावान् को देखना भी शामिल है। उक्त विशेषताओं से विशिष्ट लोग ही अल्लाह की सेना हैं, जो अल्लाह के आदेशों का पालन करते हैं और उसके निषेधों से दूर रहते हैं। सुन लो, निश्चय अल्लाह के सैनिक ही दुनिया और आख़िरत में अपनी अपेक्षित चीज़ों को पाने में, तथा अपनी घृणित व भयावह चीज़ों से बचने में सफल होने वाले हैं।
Haşr 59:1
आकाशों में और धरती पर जो भी प्राणी हैं, सब अल्लाह की महानता का वर्णन करते हैं तथा हर उस चीज़ से उसे पवित्र ठहराते हैं, जो उसकी महिमा के योग्य नहीं है। तथा वह प्रभुत्वशाली है, जिसपर किसी का ज़ोर नहीं चलता, अपनी रचना, शरीयत और निर्णय (तक़दीर) में हिकमत वाला है।
Haşr 59:2
वही है, जिसने अल्लाह के साथ कुफ़्र करने और उसके रसूल मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को झुठलाने वाले बनी नज़ीर को, मदीना में स्थित उनके घरों से, मदीना से शाम (लेवांत) की ओर उनके पहले ही देश-निकाला के समय निष्कासित कर दिया। ये तौरात वाले यहूदियों में से थे। यह उनके अपनी प्रतिज्ञा को तोड़ देने और उसपर मुश्रिकों के साथ हो जाने के बाद हुआ। अल्लाह ने उन्हें शाम की ओर निकाल दिया। जबकि वे इस क़दर शक्तिशाली और ताक़तवर थे कि तुमने (ऐ मोमिनो!) सोचा भी नहीं था कि उन्हें कभी अपने घरों से निकलना पड़ेगा। और वे खुद भी समझ रहे थे कि उनके बनाए हुए क़िले उन्हें अल्लाह की पकड़ और यातना से बचा लेंगे। लेकिन अल्लाह की पकड़ उनके पास वहाँ से आई, जहाँ से आने का उन्हें अनुमान नहीं था। चुनाँचे अल्लाह ने अपने रसूल को उनसे युद्ध करने और उन्हें उनके घरों से निकाल बाहर करने का आदेश दे दिया। साथ ही अल्लाह ने उनके दिलों में अत्यधिक भय डाल दिया। वे अपने घरों को अंदर से अपने ही हाथों से विध्वंस कर रहे थे, ताकि मुसलमान उनसे लाभ न उठा सकें तथा मुसलमान उन्हें बाहर से विध्वंस कर रहे थे। अतः ऐ समझ-बूझ रखने वालो! इन लोगों को इनके कुफ़्र के कारण जिस चीज़ का सामना करना पड़ा, उससे सीख ग्रहण करो। इसलिए उनकी तरह मत बनो, अन्यथा उन्हीं के जैसे बदले और सज़ा का सामना करना पड़ेगा।
Haşr 59:3
और अगर अल्लाह ने उनपर उन्हें उनके घरों से बाहर निकाल दिया जाना न लिख दिया होता, तो निश्चय वह दुनिया में उन्हें क़त्ल और क़ैद की सज़ा देता, और उनके लिए आख़िरत में आग की यातना है, जो उनकी प्रतीक्षा कर रही है, जिसमें वे हमेशा के लिए रहेंगे।
Haşr 59:4
यह जो उनके साथ हुआ, वह इसलिए हुआ क्योंकि उन्होंने कुफ़्र करके और प्रतिज्ञाएँ तोड़कर अल्लाह का विरोध किया और उसके रसूल का विरोध किया। और जो अल्लाह का विरोध करे, तो अल्लाह बहुत कड़ी सज़ा देने वाला है। इसलिए उसे उसकी कड़ी सज़ा मिलकर रहेगी।
Haşr 59:5
तुमने (ऐ मोमिनो के समुदाय) बनी नज़ीर के युद्ध के दौरान, अल्लाह के दुश्मनों को भड़काने के लिए जो भी खजूर के पेड़ काटे या जो पेड़ उनके तनों पर खड़े छोड़ दिए ताकि उनसे लाभ उठाओ, वह अल्लाह के आदेश से था। वह धरती में बिगाड़ पैदा करना नहीं था, जैसा कि उन्होंने दावा किया है। यह सब इसलिए हुआ ताकि अल्लाह अपनी अवज्ञा से निकल जाने वाले उन यहूदियों को अपमानित करे, जिन्होंने वचन तोड़ा और वफादारी के रास्ते को त्यागकर विश्वासघात का रास्ता चुना।
Haşr 59:6
और अल्लाह ने बनी नज़ीर की संपत्ति में से अपने रसूल को जो कुछ दिया, तो उसे पाने के लिए तुमने घोड़े और ऊँट नहीं दौड़ाए और तुम्हें उसके लिए कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ा। लेकिन अल्लाह अपने रसूल को जिसपर चाहता है, प्रभुत्व प्रदान कर देता है। चुनाँचे उसने अपने रसूल को बनी नज़ीर पर प्रभुत्व प्रदान कर दिया। इसलिए आपने बिना युद्ध किए उनके नगर पर विजय प्राप्त कर ली। और अल्लाह हर चीज़ का सामर्थ्य रखता है। उसे कोई चीज़ विवश नहीं कर सकती।
Haşr 59:7
अल्लाह ने अपने रसूल को बस्तियों वालों की संपत्ति में से जो कुछ बिना युद्ध किए दिया है, वह अल्लाह के लिए है, वह जिसे चाहे प्रदान करे, तथा उसके रसूल के लिए है जो उनके स्वामित्व में है, तथा बनी हाशिम और बनी मुत्तलिब में से आपके रिश्तेदारों के लिए है; उनके लिए उसके मुआवज़े के रूप में है जो उन्हें दान से रोक दिया गया है, तथा अनाथों के लिए, ग़रीबों के लिए और उस पथिक के लिए है जिसका खर्च समाप्त हो गया हो। यह आदेश इसलिए दिया गया है, ताकि ऐसा न हो कि धन केवल अमीरों के बीच घूमता रहे और ग़रीब लोग उससे वंचित रह जाएँ। और रसूल तुम्हें बिना युद्ध के प्राप्त होने वाले धन में से जो कुछ दें, उसे (ऐ ईमान वालो!) ले लो और जिससे तुम्हें रोक दें, उससे रुक जाओ। और अल्लाह से, उसके आदेशों का पालन करते हुए और उसके निषेधों से बचते हुए, डरते रहो। निश्चय अल्लाह बहुत कठोर सज़ा देने वाला है। अतः उसकी सज़ा से बचो।
Haşr 59:8
इस धन का कुछ हिस्सा अल्लाह की ख़ातिर घर-बार छोड़ने वाले उन ग़रीबों पर खर्च किया जाएगा, जो अपने धनों और बाल-बच्चों को छोड़ने के लिए मजबूर किए गए। वे आशा करते हैं कि अल्लाह उन्हें इस दुनिया में जीविका और आख़िरत में अपनी प्रसन्नता प्रदान करेगा। वे अल्लाह के रास्ते में जिहाद करके अल्लाह की मदद तथा उसके रसूल की मदद करते हैं। जो इन गुणों से विशिष्ट हैं, वही लोग वास्तव में ईमान में दृढ़ हैं।
Haşr 59:9
और वे अंसार, जो मुहाजिरों से पहले से मदीना में निवास करते थे तथा उन्होंने अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान को चुन लिया था, वे उन लोगों से प्रेम करते हैं, जो मक्का से हिजरत करके उनके यहाँ आए हैं। तथा अपने दिलों में अल्लाह के रास्ते में हिजरत करने वाले लोगों के बारे में कोई क्रोध तथा ईर्ष्या नहीं पाते, जब मुहाजिरों को बिना युद्ध के प्राप्त होने वाले धन में से कुछ दिया जाता है और उन्हें नहीं दिया जाता। और वे सांसारिक फायदों के मामले में, मुहाजिरों को खुद से आगे रखते हैं, यद्यपि खुद ग़रीब और ज़रूरतमंद हों। और जिसके दिल को अल्लाह धन की लालच से बचा ले, और वह उसे अल्लाह की राह में खर्च करने लगे, तो ऐसे ही लोग हैं जो अपनी आकांक्षाओं की प्राप्ति और जिस चीज़ से डरते हैं उससे मुक्ति में सफल होने वाले हैं।
Haşr 59:10
और जो इन लोगों के बाद आए और क़ियामत के दिन तक भलाई के साथ उनका अनुसरण किया, वे कहते हैं : ऐ हमारे पालनहार! हमें क्षमा कर दे और हमारे उन इस्लामी भाइयों को भी क्षमा कर दे, जो हमसे पहले अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान लाए हैं। तथा हमारे दिलों में किसी मोमिन के प्रति घृणा तथा द्वेष न रख। ऐ हामारे पालनहार! निश्चय तू अपने बंदों के प्रति बहुत स्नेहक, उनपर अत्यंत दयालु है।
Haşr 59:11
क्या (ऐ रसूल) आपने उन लोगों को नहीं देखा, जिन्होंने कुफ़्र को छिपाया और ईमान का प्रदर्शन किया कि वे विकृत तौरात को मानने वाले यहूदियों में से अपने काफ़िर भाइयों से कहते हैं : अपने घरों के अंदर डटे रहो, हम तुम्हारी सहायता से पीछे नहीं हटेंगे और तुम्हें असहाय नहीं छोड़ेंगे। यदि मुसलमानों ने तुम्हें यहाँ से बाहर निकाल दिया, तो हम भी तुम्हारे साथ एकजुटता दिखाते हुए निकल खड़े होंगे। तथा हम किसी की भी बात नहीं मानेंगे, जो हमें तुम्हारे साथ बाहर जाने से रोकना चाहेगा। और अगर मुसलमानों ने तुमसे युद्ध किया, तो हम उनके विरुद्ध तुम्हारी मदद करेंगे। हालाँकि अल्लाह गवाही देता है कि निःसंदेह मुनाफ़िक़ अपने इस दावे में झूठे हैं कि यदि यहूदियों को निकाला गया तो वे उनके साथ निकल खड़े होंगे और यदि उनसे युद्ध किया गया तो वे उनकी ओर से युद्ध करेंगे।
Haşr 59:12
अगर मुसलमानों ने यहूदियों को निकाल दिया, तो वे उनके साथ नहीं निकलेंगे। और अगर मुसलमानों ने उनसे युद्ध किया, तो वे उनकी सहायता और मदद नहीं करेंगे। और अगर उनकी मदद और सहायता करने के लिए निकले भी, तो उनसे पीठ फेरकर भाग खड़े होंगे। फिर इसके बाद मुनाफ़िक़ों की मदद नहीं की जाएगी, बल्कि अल्लाह उन्हें अपमानित और तिरस्कृत करेगा।
Haşr 59:13
निश्चय मुनाफ़िकों और यहूदियों के दिलों में (ऐ मोमिनो) तुम्हारा भय अल्लाह (के भय) से अधिक है। और यह (अर्थात् उनका तुमसे अत्यधिक डरना और अल्लाह का डर कमज़ोर होना) इस कारण है कि वे ऐसे लोग हैं, जो कुछ नहीं समझते। क्योंकि यदि वे समझते होते, तो उन्हें पता होता कि अल्लाह डरने और भयभीत होने के अधिक योग्य है। क्योंकि उसी ने तुम्हें उनपर प्रभुत्व प्रदान किया है।
Haşr 59:14
यहूदी तुमसे (ऐ मोमिनो) इकट्ठे होकर युद्ध नहीं करेंगे, परंतु क़िलेबंद बस्तियों में या दीवारों के पीछे से। क्योंकि वे अपनी कायरता के कारण तुम्हारा सामना नहीं कर सकते। उनके बीच दुश्मनी के कारण उनकी आपस की लड़ाई बहुत सख़्त है। आप समझते हैं कि वे एकजुट हैं और उनके अंदर एकता है, जबकि सच्चाई यह है कि उनके दिल अलग-अलग हैं। यह विभेद और दुश्मनी इस कारण है कि वे बुद्धि नहीं रखते। क्योंकि यदि वे बुद्धि रखते, तो सत्य को जानते और उसका पालन करते और उसके बारे में विभेद न करते।
Haşr 59:15
इन यहूदियों का उदाहरण उनके कुफ़्र तथा यातना ग्रस्त होने में, ठीक उसी तरह है, जैसे हाल ही में उन लोगों का था जो इनसे पहले मक्का के बहुदेववादियों में से थे। चुनाँचे उन्होंने अपने कुफ़्र का बुरा परिणाम चख लिया और बद्र के दिन उनमें से कुछ लोग मारे गए और कुछ लोग पकड़ लिए गए। तथा आख़िरत में उनके लिए दर्दनाक यातना है।
Haşr 59:16
मुनाफ़िक़ों की बात सुनने के मामले में इन (यहूदियों) का उदाहरण शैतान की तरह है जब वह इनसान के लिए कुफ़्र करने को सुंदर बनाकर पेश करता है, फिर जब वह उसके लिए कुफ़्र को शोभित करने के कारण कुफ़्र कर बैठता है, तो कहता है : मैं तुम्हारे इस कुफ़्र करने से बरी हूँ। मैं प्राणियों के पालनहार अल्लाह से डरता हूँ।
Haşr 59:17
अतः शैतान और उसकी बात मानने वाले इनसान, दोनों का अंतिम परिणाम यह हुआ कि दोनों क़ियामत के दिन जहन्नम में जाएँगे, जिसमें हमेशा के लिए रहेंगे। और यह प्रतिफल जो उन दोनों की प्रतीक्षा कर रहा है, यही उन लोगों का बदला है, जो अल्लाह की मर्यादाओं को लांघ कर अपने आपपर अत्याचार करने वाले हैं।
Haşr 59:18
ऐ अल्लाह पर ईमान रखने और उसकी शरीयत पर अमल करने वालो! अल्लाह से, उसके आदेशों का पालन करते हुए और उसके निषेधों से बचते हुए, डरते रहो। और हर आदमी यह विचार करे कि उसने क़ियामत के दिन के लिए क्या नेक कार्य आगे भेजा है। तथा अल्लाह से डरो। निश्चय वह तुम्हारे कर्मों से अच्छी तरह अवगत है। उससे तुम्हारा कोई कार्य छिपा नहीं है। और वह तुम्हें तुम्हारे कर्मों का बदला देगा।
Haşr 59:19
और उन लोगों की तरह न हो जाओ, जिन्होंने अल्लाह को, उसके आदेशों का पालन करना और उसके निषेधों से बचना छोड़कर, भुला दिया। तो अल्लाह ने उन्हें ऐसा कर दिया कि वे अपने आप ही को भूल गए। चुनाँचे उन्होंने अपने आपको अल्लाह के क्रोध और उसके दंड से बचाने के लिए कार्य नहीं किया। यही लोग, जिन्होंने अल्लाह को भुला दिया - चुनाँचे उसके आदेश का पालन नहीं किया और उसके निषेध से नहीं बचे - अल्लाह की आज्ञाकारिता से बाहर निकलने वाले हैं।
Haşr 59:20
जहन्नम वाले और जन्नत वाले बराबर नहीं हो सकते। बल्कि जैसे दुनिया में उनके कर्म अलग-अलग थे, वैसे ही आख़िरत में उनके प्रतिफल अलग-अलग होंगे। जन्नत वाले लोग ही अपनी इच्छित चीज़ों को प्राप्त करने और अपने भय की चीज़ों से बचने में सफल लोग हैं।
Haşr 59:21
अगर हमने इस क़ुरआन को किसी पहाड़ पर उतारा होता, तो (ऐ रसूल!) आप देखते कि वह पहाड़ अपनी कठोरता के बावजूद, अल्लाह के भय की गंभीरता से दब कर टूट जाता; क्योंकि उसमें निरोधात्मक उपदेश और कड़ी चेतावनियाँ हैं। ये उदाहरण हम लोगों के लिए इसलिए बयान करते हैं, ताकि वे अपनी बुद्धियों से काम लें और इस क़ुरआन की आयतों में जो उपदेश और शिक्षाएँ हैं, उनसे सीख प्राप्त करें।
Haşr 59:22
वही अल्लाह है, जिसके सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं, वह परोक्ष तथा प्रत्यक्ष का जानने वाला है, उसमें से कुछ भी उससे छिपा नहीं है। वह दुनिया तथा आख़िरत में अत्यंत दयावान् और असीम दया करने वाला है, उसकी दया सभी लोकों पर विस्तारित है, वह बादशाह है, हर कमी से पाक और पवित्र है, हर दोष से रहित है। स्पष्ट निशानियों (चमत्कारों) के द्वारा अपने रसूलों की पुष्टि करने वाला है, अपने बंदों के कर्मों पर निरीक्षक है, सब पर प्रभुत्वशाली है, जिसपर कोई विजय प्राप्त नहीं कर सकता, शक्तिशाली है जिसने हर वस्तु को अपनी शक्ति से वशीभूत कर रखा है, बहुत बड़ाई वाला है। अल्लाह उन मूर्तियों आदि से पवित्र है, जिन्हें मुश्रिक लोग उसके साथ साझी बनाते हैं।
Haşr 59:23
वही अल्लाह है, जिसके सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं, वह परोक्ष तथा प्रत्यक्ष का जानने वाला है, उसमें से कुछ भी उससे छिपा नहीं है। वह दुनिया तथा आख़िरत में अत्यंत दयावान् और असीम दया करने वाला है, उसकी दया सभी लोकों पर विस्तारित है, वह बादशाह है, हर कमी से पाक और पवित्र है, हर दोष से रहित है। स्पष्ट निशानियों (चमत्कारों) के द्वारा अपने रसूलों की पुष्टि करने वाला है, अपने बंदों के कर्मों पर निरीक्षक है, सब पर प्रभुत्वशाली है, जिसपर कोई विजय प्राप्त नहीं कर सकता, शक्तिशाली है जिसने हर वस्तु को अपनी शक्ति से वशीभूत कर रखा है, बहुत बड़ाई वाला है। अल्लाह उन मूर्तियों आदि से पवित्र है, जिन्हें मुश्रिक लोग उसके साथ साझी बनाते हैं।
Haşr 59:24
वही अल्लाह रचयिता है, जिसने हर चीज़ की रचना की। वह चीज़ों को अस्तित्व प्रदान करनेवाला है, वह जैसा चाहता है, उसके अनुसार अपनी मखलूक़ात को रूप देने वाला है। उस महिमावान के सबसे सुंदर नाम हैं जो उसकी सर्वोच्च विशेषताओं पर आधारित हैं। हर वह चीज़ जो आकाशों और धरती में है उसके हर कमी से पवित्र और उत्कृष्ट होने का वर्णन करती है, वह प्रभुत्वशाली है, जिसपर कोई विजय प्राप्त नहीं कर सकता, वह अपनी रचना, विधान और निर्णय में ह़िकमत वाला है।
Mümtehıne 60:1
ऐ अल्लाह पर ईमान रखने और उसकी शरीयत पर अमल करने वालो! मेरे दुश्मनों और अपने दुश्मनों को दोस्त न बनाओ कि उनसे मित्रता रखो और उनके प्रति प्रेम दिखाओं, जबकि उन्होंने उस धर्म का इनकार किया है, जो तुम्हारे नबी के द्वारा तुम्हारे पास आया है। वे रसूल को उनके घर से निकालते हैं तथा तुम्हें भी मक्का में तुम्हारे घरों से निकालते हैं। वे तुम्हारे बारे में रिश्ते-नाते का तनिक भी ख़याल नहीं करते। ऐसा केवल इस कारण करते हैं कि तुम अपने पालनहार अल्लाह पर ईमान ले आए हो। यदि तुम मेरे रास्ते में जिहाद के लिए और मेरी प्रसन्नता तलाश करने के लिए निकले हो, तो ऐसा न करो। तुम उनके प्रति स्नेह के तौर पर उन्हें गुप्त रूप से मुसलमानों की सूचनाएँ प्रदान करते हो, जबकि मैं अच्छी तरह जानता हूँ कि तुमने उसमें से क्या छुपाया है और क्या प्रकट किया है। मुझसे उसमें से या किसी और चीज़ में से कुछ भी छिपा नहीं है। और जो कोई भी काफिरों के प्रति दोस्ती और स्नेह का व्यवहार करेगा, तो वह सीधे रास्ते से हट गया, सत्य मार्ग से भटक गया और यथार्थ से अलग हो गया।
Mümtehıne 60:2
यदि वे तुम्हें (कहीं) पा जाएँ, तो अपने दिलों में छिपाई हुई दुश्मनी का प्रदर्शन करेंगे, और कष्ट पहुँचाने तथा मार पीट करने के लिए तुम्हारी ओर अपने हाथ बढ़ाएँगे, और गाली-गलौज करने तथा बुरा-भला कहने के लिए अपनी ज़बानों को आज़ाद छोड़ देंगे, और इस बात की कामना करेंगे कि काश तुम भी अल्लाह और उसके रसूल का इनकार करके उनके जैसे हो जाओ।
Mümtehıne 60:3
तुम्हारे रिश्तेदार और तुम्हारे बच्चे तुम्हें कदापि कोई लाभ नहीं देंगे, अगर तुमने उनकी खातिर काफिरों से दोस्ती रखी। क़ियामत के दिन अल्लाह तुम्हारे बीच जुदाई डाल देगा। चुनाँचे जन्नती लोग जन्नत में प्रवेश करेंगे और जहन्नमी लोग जहन्नम में। अतः तुम एक-दूसरे को लाभ नहीं पहुँचा सकोगे और अल्लाह तुम्हारे कर्मों को देख रहा है। उससे तुम्हारा कोई काम छिपा नहीं है और वह तुम्हें उनका बदला देगा।
Mümtehıne 60:4
तुम्हारे लिए (ऐ मोमिनो!) इबराहीम अलैहिस्सलाम और उन मोमिनों में जो उनके साथ थे, एक अच्छा आदर्श है, जब उन्होंने अपनी काफ़िर जाति से कहा : हम तुमसे तथा उन मूर्तियों से बरी हैं, जिन्हें तुम अल्लाह को छोड़कर पूजते हो। हम उस धर्म को नहीं मानते, जिसपर तुम चल रहे हो, तथा हमारे और तुम्हारे बीच हमेशा के लिए शत्रुता और घृणा प्रकट हो चुकी है, यहाँ तक कि तुम अकेले अल्लाह पर ईमान ले आओ और किसी को उसका साझी न बनाओ। अतः तुम्हें भी चाहिए कि उनकी तरह अपनी काफ़िर जाति से बरी होने का ऐलान कर दो। परंतु इबराहीम अलैहिस्सलाम की इस बात को छोड़कर, जो उन्होंने अपने पिता से कही थी कि : मैं अवश्य अल्लाह से तुम्हारे लिए क्षमा याचना करूँगा। तो तुम इसमें उनका पालन न करो। क्योंकि यह बात उन्होंने अपने पिता से निराश होने से पहले कही थी। अतः किसी मोमिन के लिए जायज़ नहीं है कि वह किसी मुश्रिक के लिए क्षमा माँगे। और मैं तुम्हारा अल्लाह की यातना से कुछ भी बचाव नहीं कर सकता। ऐ हमारे पालनहार! हमने अपने सभी मामलों में केवल तुझी पर भरोसा किया है, और हम तेरी ही ओर तौबा करते हुए लौटे हैं, और तेरी ही ओर क़ियामत के दिन सबको लौटकर आना है।
Mümtehıne 60:5
ऐ हमारे पालनहार, तू हमें काफ़िरों के लिए परीक्षण न बना कि उन्हें हमारे ऊपर हावी कर दे और वे कहने लगें : अगर वे सत्य पर होते, तो हम उनपर हावी न किए जाते। तथा ऐ हमारे पालनहार, हमारे गुनाह माफ कर दे। निश्चय तू ही प्रभुत्वशाली है, जिसपर किसी का ज़ोर नहीं चलता, अपनी रचना, विधान और निर्णय में हिकमत वाला है।
Mümtehıne 60:6
इस उत्तम आदर्श का पालन वही करेगा, जो दुनिया और आख़िरत में अल्लाह से भलाई की आशा रखता है। और जो इस उत्तम आदर्श से मुँह फेरेगा, तो अल्लाह अपने बंदों से बेनियाज़ है, उसे उनके आज्ञापालन की आवश्यकता नहीं है। तथा वह हर हाल में प्रशंसनीय है।
Mümtehıne 60:7
आशा है कि अल्लाह (ऐ मोमिनो) तुम्हारे बीच और उन काफ़िरों के बीच, जिनसे तुम बैर रखते हो, प्रेम उत्पन्न कर दे, इस प्रकार वह उन्हें इस्लाम का मार्गदर्शन प्रदान कर दे। फिर वे तुम्हारे इस्लामी भाई बन जाएँ। और अल्लाह बड़ा सामर्थ्यवान् है। वह इस बात का सामर्थ्य रखता है कि उनके दिलों को ईमान की ओर फेर दे। तथा अल्लाह अपने तौबा करने वाले बंदों को क्षमा करने वाला, उनपर दया करने वाला है।
Mümtehıne 60:8
अल्लाह तुम्हें उन लोगों से नहीं रोकता, जिन्होंने तुमसे तुम्हारे मुसलमान होने के कारण युद्ध नहीं किया और तुम्हें तुम्हारे घरों से नहीं निकाला, कि तुम उनके साथ अच्छा व्यवहार करो और उनके बीच न्याय करते हुए उनका तुम्हारे ऊपर जो कुछ हक़ है उसे उन्हें दे दो। निश्चय अल्लाह उन न्याय करने वालों से प्रेम करता है, जो अपने आप में, अपने परिवारों में और जिनके वे ज़िम्मेदार होते हैं, उनके साथ न्याय करते हैं।
Mümtehıne 60:9
अल्लाह केवल तुम्हें उन लोगों से मना करता है, जिन्होंने तुमसे तुम्हारे ईमान के कारण युद्ध किया, तुम्हें तुम्हारे घरों से निकाल दिया और तुम्हें बाहर निकालने में सहयोग किया; वह तुम्हें उनसे दोस्ती रखने से रोकता है। और तुममें से जो व्यक्ति उनसे दोस्ती करेगा, तो वही लोग अल्लाह के आदेश के उल्लंघन के कारण स्वयं को विनाश में डालकर अपने आप पर अत्याचार करने वाले हैं।
Mümtehıne 60:10
ऐ अल्लाह पर ईमान रखने वालो और उसकी शरीयत पर अमल करने वालो! जब तुम्हारे पास मोमिन स्त्रियाँ कुफ़्र की धरती से इस्लाम की धरती की ओर हिजरत करके आ जाएँ, तो उन्हें जाँच लिया करो कि उनका ईमान सच्चा है या नहीं। अल्लाह उनके ईमान को अधिक जानता है। उनके दिलों में जो कुछ भी है उससे छिपा नहीं है। अगर परीक्षण के बाद उनकी सच्चाई ज़ाहिर हो जाए और तुम जान लो कि वे मोमिन हैं, तो उन्हें उनके काफ़िर पतियों की ओर न लौटाओ। मोमिन स्त्रियों के लिए वैध नहीं है कि काफ़िरों से निकाह करें तथा काफ़िरों के लिए वैध नहीं है कि मोमिन स्त्रियों से निकाह करें। तथा उनके (काफ़िर) पतियों को वह महर दे दो, जो उन्होंने अपनी स्त्रियों पर खर्च किया था। और (ऐ ईमान वालो!) तुमपर कोई गुनाह नहीं है कि उनकी इद्दत गुज़र जाने के बाद उनसे निकाह कर लो, जब तुम उन्हें उनका महर दे दो। और जिसकी पत्नी काफ़िर हो या इस्लाम से फिर गई हो, तो वह उसे अपने पास न रखे। क्योंकि उसके कुफ़्र के कारण उन दोनों का निकाह बाधित हो गया। और काफ़िरों से अपनी इस्लाम से फिर जाने वाली पत्नियों पर खर्च किया हुआ महर माँग लो, तथा वे भी अपनी इस्लाम ग्रहण करने वाली स्त्रियों पर खर्च किया हुआ महर माँग लें। यह (तुम्हारी तथा उनकी ओर से महर की वापसी) अल्लाह का निर्णय है। वह तुम्हारे बीच जो चाहता है, निर्णय करता है। और अल्लाह अपने बंदों की स्थितियों और उनके कार्यों से खूब अवगत है। उनमें से कोई भी चीज़ उससे छिपी नहीं है। वह अपने बंदों के लिए जो नियम बनाता है, उसमें हिकमत वाला है।
Mümtehıne 60:11
और अगर ऐसा हो कि तुम्हारी कुछ स्त्रियाँ इस्लाम को त्यागकर काफ़िरों की ओर चली जाएँ, और तुम काफ़िरों से उनका महर माँगो और वे उसे न दें। फिर तुम्हें काफ़िरों से ग़नीमत का धन प्राप्त हो, तो इस्लाम को त्यागकर जाने वाली स्त्रियों के पतियों को उनके खर्च किए हुए महर के बराबर धन दे दो। और अल्लाह से, उसके आदेशों का पालन करके और उसकी मना की हुई चीज़ों से बचकर, डरते रहो, जिसपर तुम ईमान रखते हो।
Mümtehıne 60:12
ऐ नबी! जब आपके पास मोमिन स्त्रियाँ इस बात पर बैअत (प्रण) करने के लिए आएँ (जैसे मक्का पर विजय के अवसर पर हुआ था) कि किसी को अल्लाह का साझी नहीं ठहराएँगी, बल्कि केवल उसी की इबादत करेंगी, चोरी नहीं करेंगी, व्यभिचार नहीं करेंगी, जाहिलिय्यत के लोगों की तरह अपनी औलाद की हत्या नहीं करेंगी, व्यभिचार के नतीजे में पैदा होने वाले बच्चे का संबंध अपने पतियों से नहीं जोड़ेंगी, तथा किसी अच्छे कार्य (जैसे मृतक पर रोने-पीटने, बाल मुँडाने और गरीबान फाड़ने से मनाही) में आपकी अवज्ञा नहीं करेंगी : तो आप उनसे बैअत ले लें और उनके आपसे बैअत करने के बाद उनके गुनाहों के लिए अल्लाह से क्षमा माँगें। निश्चय अल्लाह अपने तौबा (क्षमा याचना) करने वाले बंदों को क्षमा करने वाला, उनपर दया करने वाला है।
Mümtehıne 60:13
ऐ अल्लाह पर ईमान रखने वालो और उसकी शरीयत पर अमल करने वालो! ऐसे लोगों से मित्रता न रखो, जिनपर अल्लाह क्रोधित हुआ है, जो क़ियामत के दिन पर विश्वास नहीं रखते, बल्कि वे उससे उसी तरह निराश हैं, जैसे मरणोपरांत पुनर्जीवन के इनकार के कारण अपने मरे हुए लोगों के लौटने से निराश हैं।
Sâff 61:1
आकाशों और धरती में जो कुछ है, सबने अल्लाह के हर उस चीज़ से पाक एवं पवित्र होने का गान किया, जो उसकी महिमा के योग्य नहीं है। और वह प्रभुत्वशाली है, जिसे कोई परास्त नहीं कर सकता, वह अपनी रचना, तक़दीर एवं शरीयत में हिकमत वाला है।
Sâff 61:2
ऐ अल्लाह पर ईमान रखने वालो! तुम क्यों कहते हो : हमने ऐसा किया है, जबकि वास्तव में तुमने उसे नहीं किया है?! जैसे तुममें से कोई कहे कि मैं अपनी तलवार से लड़ा और मारा। जबकि वह अपनी तलवार से न लड़ा है और न मारा है।
Sâff 61:3
यह अल्लाह के निकट बहुत घृणित और अप्रिय बात है कि तुम वह कहो जो तुम करते नहीं। इसलिए मोमिन के लिए उचित यही है कि वह अल्लाह के साथ सच्चा हो। उसकी करनी उसकी कथनी की पुष्टि करे।
Sâff 61:4
निःसंदेह अल्लाह उन मोमिन बंदों से प्रेम करता है, जो उसके मार्ग में उसकी प्रसन्नता प्राप्त करने के लिए इस तरह पंक्तिबद्ध होकर युद्ध करते हैं, गोया वे एक सीसा पिलाई हुई इमारत हैं।
Sâff 61:5
और (ऐ रसूल) उस समय को याद करें, जब मूसा अलैहिस्लाम ने अपनी जाति के लोगों से कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! तुम मेरे आदेश का उल्लंघन करके मुझे कष्ट क्यों देते हो, जबकि तुम जानते हो कि मैं तुम्हारी ओर अल्लाह का रसूल हूँ?! फिर जब वे उस सत्य से विचलित हो गए और हट गए, जो मूसा अलैहिस्सलाम उनके पास लेकर आए थे, तो अल्लाह ने उनके दिलों को सत्य और सत्यनिष्ठा (धर्मपरायणता) से हटा दिया। और अल्लाह उन लोगों को सत्य की तौफ़ीक़ नहीं देता, जो उसकी अवज्ञा करने वाले हों।
Sâff 61:6
और (ऐ रसूल) उस समय को याद करें, जब ईसा बिन मर्यम अलैहिस्सलाम ने कहा : ऐ बनी इसराईल, मैं अल्लाह का रसूल हूँ, जिसने मुझे तुम्हारे पास भेजा है, अपने से पहले अवतरित किताब तौरात की पुष्टि करने वाला हूँ। अतः, मैं कोई नया रसूल नहीं हूँ, तथा एक रसूल की शुभ सूचना देने वाला हूँ, जो मेरे बाद आएगा, जिसका नाम अहमद होगा। फिर जब ईसा अलैहिस्सलाम उनके पास अपनी सच्चाई को दर्शाने वाले प्रमाण लेकर आए, तो उन्होंने कहा : यह खुला हुआ जादू है। अतः हम इसका पालन नहीं करेंगे।
Sâff 61:7
और उससे अधिक अत्याचारी कोई नहीं है, जो अल्लाह के विरुद्ध झूठ गढ़े और उसके समकक्ष ठहराकर उसे छोड़कर उनकी पूजा करे, जबकि उसे अल्लाह के लिए विशुद्ध एकेश्वरवाद के धर्म इस्लाम की ओर बुलाया जा रहा है। और अल्लाह उन लोगों को हिदायत और सत्य का रास्ता नहीं दिखाता, जो शिर्क और गुनाहों के द्वारा अपने आप पर अत्याचार करने वाले हैं।
Sâff 61:8
ये झुठलाने वाले अपने द्वारा जारी होने वाली भ्रष्ट बातों तथा सत्य को विकृत करने के माध्यम से अल्लाह के प्रकाश को बुझाना चाहते हैं, और अल्लाह उनके नापसंद करने के बावजूद अपने धर्म को धरती के चारों कोनों में फैलाकर तथा अपने शब्द को ऊँचा करके अपने प्रकाश को पूरा करने वाला है।
Sâff 61:9
अल्लाह वही है, जिसने अपने रसूल मुहम्मद सल्ल्लाहु अलैहि व सल्लम को इस्लाम धर्म के साथ भेजा, जो भलाई के लिए मार्गदर्शन का धर्म तथा लाभकारी ज्ञान और अच्छे कर्मों का धर्म है। ताकि उसे, मुश्रिकों के न चाहने के बावजूद, सभी धर्मों पर हावी (सर्वोच्च) कर दे, जो यह नहीं चाहते कि धरती में उसका बोल बाला हो।
Sâff 61:10
ऐ अल्लाह पर ईमान रखने वालो और उसकी शरीयत पर अमल करने वालो! क्या मैं तुम्हें एक लाभदायक व्यापार के लिए मार्गदर्शन करूँ, जो तुम्हें दर्दनाक यातना से बचा ले?
Sâff 61:11
यह लाभदायक व्यापार यह है कि तुम अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान ले आओ, और उसकी प्रसन्नता तलाश करते हुए, अपने धन को खर्च करके और अपनी जान न्योछावर करके, उसके मार्ग में जिहाद करो। यह उपर्युक्त कार्य तुम्हारे लिए बेहतर है। यदि तुम जानते हो, तो इसके लिए जल्दी करो।
Sâff 61:12
इस व्यापार का लाभ यह है कि अल्लाह तुम्हारे गुनाहों को क्षमा कर देगा और तुम्हें ऐसी जन्नतों में दाखिल करेगा, जिनके महलों और पेड़ों के नीचे से नहरें जारी होंगी, और तुम्हें स्थायी जन्नतों के अंदर अच्छे आवासों में दाखिल करेगा, जहाँ से कोई प्रस्थान नहीं होगा। यह उपर्युक्त बदला ही वह महान सफलता है जिसके बराबर कोई अन्य सफलता नहीं हो सकती।
Sâff 61:13
इस व्यापार से लाभ की एक और विशेषता है, जो तुम्हें प्रिय है और वह इसी दुनिया में प्राप्त होने वाली है। वह यह है कि अल्लाह तुम्हारे दुश्मन के विरुद्ध तुम्हारी मदद करेगा और तुम्हें एक निकट विजय प्रदान करेगा, जो मक्का वग़ैरह की विजय है। और (ऐ रसूल) मोमिनों को इस दुनिया में विजय और आखिरत में जन्नत की प्राप्ति की हर्षदायक सूचना दे दें।
Sâff 61:14
ऐ अल्लाह पर ईमान रखने वालो और उसकी शरीयत पर अमल करने वालो! तुम अपने रसूल के लाए हुए धर्म की मदद करके अल्लाह के मददगार बन जाओ, वैसे ही जैसे ह़वारियों ने मदद की थी, जब ईसा अलैहिस्सलाम ने उनसे कहा था : अल्लाह की ओर मेरे सहायक कौन हैं? तो उन्होंने अविलंब उत्तर दिया : हम अल्लाह के सहायक हैं! चुनाँचे बनी इसराईल का एक समूह ईसा अलैहिस्सलाम पर ईमान ले आया और दूसरे समूह ने उन्हें मानने से इनकार कर दिया। अतः हमने ईसा अलैहिस्सलाम को मानने वालों का उन लोगों के विरुद्ध समर्थन किया, जिन्होंने उनका इनकार किया था। तो वे उनपर विजयी रहे।
Cumua 62:1
आकाशों और धरती में मौजूद सभी प्राणी अल्लाह के उन सभी कमियों से पवित्र होने का वर्णन करते हैं, जो उसकी महिमा के योग्य नहीं हैं। वह राजा है, जो अपने राज्य में एकता है, हर कमी से मुक्त व पवित्र है, सब पर प्रभुत्वशाली है, जिसपर किसी का ज़ोर नहीं चलता, तथा अपनी रचना, शरीयत और तक़दीर (निर्णय) में हिकमत वाला है।
Cumua 62:2
वही है, जिसने उन अरबों के बीच, जो पढ़ना-लिखना नहीं जानते थे, उन्हीं की जाति में से एक रसूल भेजा, जो उन्हें अपने ऊपर अल्लाह की उतारी हुई आयतों को पढ़कर सुनाता है, उन्हें कुफ़्र और बुरी नैतिकताओं से शुद्ध करता है, उन्हें क़ुरआन सिखाता और सुन्नत की शिक्षा देता है। हालाँकि, वे उसके उनकी ओर रसूल बनाकर भेजे जाने से पहले स्पष्ट रूप से सत्य से भटके हुए थे, जहाँ वे मूर्तियों की पूजा करते, खून बहाते और रिश्ते-नाते काटते थे।
Cumua 62:3
और उसने इस रसूल को अरब के कुछ दूसरे लोगों और उनके अलावा अन्य लोगों की ओर भी भेजा, जो अभी तक नहीं आए हैं, और वे आएँगे। और वह प्रभुत्वशाली है, जिसे कोई पराजित नहीं कर सकता, वह अपनी रचना, शरीयत और तक़दीर (निर्णय) में हिकमत वाला है।
Cumua 62:4
यह उपर्युक्त (रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को अरबों और अन्य लोगों की ओर भेजना) अल्लाह का अनुग्रह है, वह जिसे चाहे यह अनुग्रह प्रदान करे। और अल्लाह महान उपकार वाला है। और उसके महान उपकार का एक उदाहरण इस उम्मत के रसूल को सभी लोगों की ओर भेजना है।
Cumua 62:5
उन यहूदियों का उदाहरण, जिन्हें तौरात की शिक्षाओं पर अमल करने की ज़िम्मेदारी सौंपी गई थी, परंतु वे उसे छोड़ बैठे, जिसकी उन्हें ज़िम्मेदारी सौंपी गई थी, उस गधे के समान है, जो बड़ी-बड़ी किताबें लादे हुए हो, वह नहीं जानता कि उसकी पीठ पर क्या लदा हुआ है : क्या वह किताबें हैं या कुछ और? बहुत बुरा उदाहरण है उन लोगों का, जिन्होंने अल्लाह की आयतों को झुठलाया। और अल्लाह अत्याचारी लोगों को सत्य तक पहुँचने का सामर्थ्य नहीं देता।
Cumua 62:6
(ऐ रसूल) आप कह दीजिए : ऐ वे लोगो, जो यहूदी धर्म के विकृत होने के बाद भी उसपर बने हुए हो, अगर तुम्हारा यह दावा है कि तुम अल्लाह के दोस्त हो, उसने दूसरे लोगों को छोड़कर तुम्हें दोस्ती के लिए विशिष्ट कर लिया है, तो फिर मृत्यु की कामना करो। ताकि अल्लाह तुम्हें वह सम्मान जल्दी प्रदान कर दे, जो उसने (तुम्हारे दावे के अनुसार) तुम्हारे लिए खास कर रखा है, यदि तुम अपने इस दावे में सच्चे हो कि तुम ही अल्लाह के दोस्त हो, कोई और नहीं।
Cumua 62:7
वे कभी भी मृत्यु की कामना नहीं करेंगे। बल्कि वे अपने कुफ़्र, पाप, अत्याचार तथा तौरात में विरूपण और परिवर्तन करने के कारण इस दुनिया में अनंत काल की कामना करते हैं। और अल्लाह अत्याचारियों को भली-भाँति जानता है। उनका कोई कार्य उससे छिपा नहीं है और वह उन्हें उनके कर्मों का बदला देगा।
Cumua 62:8
और (ऐ रसूल) इन यहूदियों से कह दें : निश्चय वह मौत जिससे तुम भागते हो, अनिवार्य रूप से किसी न किसी समय तुम्हें आने वाली है। फिर तुम क़ियामत के दिन अल्लाह की ओर लौटाए जाओगे, जो हर उस चीज़ को जानता है, जो अनुपस्थित है और जो मौजूद है। उन दोनों में से कुछ भी उससे छिपा नहीं है। चुनाँचे वह तुम्हें बताएगा कि तुम दुनिया में क्या किया करते थे और तुम्हें उसका बदला देगा।
Cumua 62:9
ऐ अल्लाह पर ईमान रखने और उसकी शरीयत पर अमल करने वालो! जब मुअज़्ज़िन जुमा के दिन खतीब के मिंबर पर चढ़ने के बाद, नमाज़ के लिए अज़ान दे, तो ख़ुतबा सुनने और नमाज़ पढ़ने के लिए मस्जिदों की ओर दौड़ चलो और क्रय-विक्रय छोड़ दो; ताकि यह तुम्हें आज्ञाकारिता से विचलित न कर दे। यह जुमे की अज़ान के बाद नमाज़ के लिए जल्दी जाना और क्रय-विक्रय छोड़ देना (ऐ मोमिनो) तुम्हारे लिए बेहतर है, अगर तुम इस बात से अवगत हो। अतः अल्लाह ने तुम्हें जो आदेश दिया है, उसका पालन करो।
Cumua 62:10
फिर जब तुम जुमे की नमाज़ पूरी कर लो, तो हलाल रोज़ी की तलाश में और अपनी ज़रूरतों की पूर्ति के लिए धरती में फैल जाओ, और हलाल कमाई तथा वैध मुनाफ़ा के माध्यम से अल्लाह का अनुग्रह तलाश करो, और आजीविका के लिए अपनी खोज के दौरान अल्लाह को बहुत याद करते रहो, और आजीविका के लिए तुम्हारी खोज तुम्हें अल्लाह के ज़िक्र से गाफ़िल न करे, ताकि तुम्हें वह चीज़ प्राप्त हो सके, जिसे तुम पसंद करते हो और उस चीज़ से बच सको, जिससे तुम डरते हो।
Cumua 62:11
और जब कुछ मुसलमानों ने व्यापार या खेल-तमाशा देखा, तो वे उसकी ओर निकल गए और उन्होंने (ऐ रसूल) आपको मिंबर पर खड़ा छोड़ दिया। (ऐ रसूल) आप कह दें : अल्लाह के पास अच्छे कर्म का जो बदला है, वह उस व्यापार एवं खेल-कूद से उत्तम है, जिसकी ओर तुम निकलकर गए थे। और अल्लाह सबसे उत्तम रोज़ी देने वाला है।
Münafikun 63:1
जब मुनाफ़िक़ लोग, जो इस्लाम का प्रदर्शन करते हैं और दिल में कुफ़्र छिपाए होते हैं, (ऐ रसूल!) आपकी सभा में आते हैं, तो कहते हैं : हम गवाही देते हैं कि निःसंदेह आप सचमुच अल्लाह के रसूल हैं। और अल्लाह जानता है कि निःसंदेह आप सचमुच उसके रसूल हैं। तथा अल्लाह गवाही देता है कि मुनाफ़िक़ लोग अपने इस दावे में निश्चित रूप से झूठे हैं कि वे अपने दिलों की गहराइयों से गवाही देते हैं कि आप उसके रसूल हैं।
Münafikun 63:2
उन्होंने अपनी क़समों को, जो वे अपने ईमान के दावे पर खाते हैं, क़त्ल तथा क़ैद से बचने के लिए ढाल बना लिया है तथा संदेहवाद और झूठी अफवाह फैलाकर लोगों को ईमान से रोका है। निःसंदेह बहुत बुरा है, जो वे पाखंड और झूठी क़समें खाना आदि बुरे काम कर रहे थे।
Münafikun 63:3
ऐसा इसलिए है क्योंकि वे दिखाने के लिए ईमान लाए थे और ईमान उनके दिलों तक नहीं पहुँचा था, फिर उन्होंने गुप्त रूप से अल्लाह के साथ कुफ़्र किया। इसलिए उनके कुफ़्र के कारण अल्लाह ने उनके दिलों पर मुहर लगा दी। अतः अब उनके अंदर ईमान प्रवेश नहीं कर सकता। तो उस मुहर के कारण उन्हें समझ नहीं आता कि उनकी भलाई और मार्गदर्शन किस में है।
Münafikun 63:4
और जब तुम (ऐ देखने वाले) उन्हें देखो, तो उनके परम सुख व आनंद और ताजगी के कारण उनकी आकृति और आकार तुम्हें बहुत अच्छा लगेगा, और अगर वे बात करें, तो तुम उनकी बात को उसकी वाक्पटुता के कारण कान लगाकर सुनोगे। वे आपकी सभा में (ऐ रसूल) ऐसे बैठे होते हैं, मानो कि वे दीवार के सहारे लगाई हुई लकड़ियाँ हैं। न कुछ समझते हैं और न याद रखते हैं, बल्कि उनकी कायरता का हाल यह है कि वे हर आवाज़ को अपने ही विरुद्ध समझते हैं। वही वास्तविक दुश्मन हैं। अतः, (ऐ रसूल) उनसे सावधान रहें कि कहीं वे आपके किसी रहस्य को उजागर न कर दें या आपके विरुद्ध कोई चाल न चलें। उन पर अल्लाह की लानत है। वे ईमान से कैसे फेरे जा रहे हैं, जबकि उसके प्रमाण स्पष्ट और उसके तर्क साफ़ नज़र आते हैं।
Münafikun 63:5
और जब इन मुनाफ़िकों से कहा जाए : जो कुछ तुमसे हुआ उसके लिए माफ़ी मांगते हुए अल्लाह के रसूल के पास आओ, वह अल्लाह से तुम्हारे पापों के लिए क्षमा याचना करेंगे, तो वे मज़ाक उड़ाते हुए अपने सिर घुमा लेते हैं, और आप उन्हें देखेंगे कि सत्य को स्वीकार करने और उसका पालन करने से घमंड करते हुए, उससे मुँह मोड़ लेते हैं, जिसका उन्हें आदेश दिया गया था।
Münafikun 63:6
(ऐ रसूल) आपका उनके गुनाहों के लिए क्षमा याचना करना और उनके लिए क्षमा याचना न करना दोनों बराबर है। अल्लाह उनके गुनाहों को हरगिज़ माफ़ नहीं करेगा। अल्लाह उन लोगों को सामर्थ्य प्रदान नहीं करता, जो उसकी आज्ञाकारिता से निकल जाने वाले और उसकी अवज्ञा पर अड़े रहने वाले हैं।
Münafikun 63:7
वही लोग हैं, जो कहते हैं : अपना धन उन गरीबों और मदीने के आस-पास के देहातियों पर खर्च न करो, जो अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास हैं, यहाँ तक कि वे उनसे अलग हो जाएँ। हालाँकि आकाशों के खज़ाने और पृथ्वी के खज़ाने केवल अल्लाह ही के हैं। वह अपने बंदों में से जिसे चाहता है, उसे प्रदान करता है। लेकिन मुनाफ़िक़ों को पता नहीं है कि रोज़ी के खज़ाने अल्लाह महिमावान ही के हाथ में हैं।
Münafikun 63:8
उनका सरदार अब्दुल्लाह बिन उबैय कहता है : अगर हम मदीना लौटकर गए तो सबसे सम्माननीय लोग (अर्थात मैं और मेरे लोग) वहाँ से सबसे तुच्छ लोगों; यानी मुहम्मद और उनके साथियों को निकाल बाहर करेंगे। हालाँकि सम्मान केवल अल्लाह के लिए, उसके रसूल के लिए और मोमिनों के लिए है, अब्दुल्लाह बिन उबैय और उसके साथियों के लिए नहीं है। लेकिन मुनाफ़िक़ लोग यह नहीं जानते कि सम्मान अल्लाह, उसके रसूल और मोमिनों के लिए है।
Münafikun 63:9
ऐ अल्लाह पर ईमान रखने वालो और उसकी शरीयत पर अमल करने वालो! तुम्हारे धन और तुम्हारी संतानें तुम्हें नमाज़ या इस्लाम के अन्य कर्तव्यों से गाफ़िल न करें। और जिसे उसके धन और उसकी संतान ने नमाज़ और उसके अलावा अल्लाह के अनिवार्य किए हुए अन्य कर्तव्यों से गाफ़िल कर दिया, तो वही लोग वास्तव में घाटा उठाने वाले हैं, जिन्होंने क़ियामत के दिन अपने आपको और अपने परिजनों को घाटे में डाल दिया।
Münafikun 63:10
और अल्लाह की राह में उन धनों में से खर्च करो, जो अल्लाह ने तुम्हें दिए हैं, इससे पहले कि तुममें से किसी की मौत आ जाए, फिर वह अपने पालनहार से कहे : ऐ मेरे पालनहार! तूने मुझे थोड़ी-सी मोहलत क्यों न दी कि मैं अल्लाह की राह में अपना धन दान करता और अल्लाह के उन नेक बंदों में से हो जाता, जिनके कर्म नेक होते हैं।
Münafikun 63:11
और अल्लाह किसी प्राणी को उस समय हरगिज़ मोहलत नहीं देगा, जब उसकी मृत्यु का समय आ गया और उसका जीवन बीत चुका। और अल्लाह उससे अवगत है, जो कुछ तुम करते हो। उससे तुम्हारा कोई भी काम ओझल नहीं रहता और वह तुम्हें तुम्हारे हर काम का बदला देगा। अगर भला काम है, तो भला बदला और अगर बुरा है, तो बुरा।
Teğabün 64:1
आकाशों और धरती में मौजूद सभी प्राणी अल्लाह के हर प्रकार की कमी और अपूर्णता के गुणों से पवित्र होने का वर्णन करते हैं, जो उसकी महिमा के योग्य नहीं हैं। केवल उसी की बादशाहत है, इसलिए उसके सिवा कोई दूसरा बादशाह नहीं है, और उसी के लिए अच्छी प्रशंसा है, तथा वह हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है, कोई चीज़ उसे विवश नहीं कर सकती।
Teğabün 64:2
वही है, जिसने (ऐ लोगो!) तुम्हें पैदा किया। फिर तुममें से कोई उसके साथ कुफ़्र करने वाला है और उसका ठिकाना जहन्नम है, तथा तुममें से कोई उसपर ईमान रखने वाला है और उसका ठिकाना जन्नत है। और तुम जो कुछ भी करते हो, अल्लाह उसे खूब जानने वाला है, उससे तुम्हारा कोई काम छिपा नहीं है और वह तुम्हें उसका बदला देगा।
Teğabün 64:3
उसने आकाशों और धरती को सत्य के साथ पैदा किया, उन्हें व्यर्थ नहीं बनाया। तथा उसने (ऐ लोगो!) तुम्हारे रूप बनाए, तो अपने उपकार और अनुग्रह से तुम्हारे रूप अच्छे बनाए। हालाँकि, यदि वह चाहता, तो उन्हें बदसूरत बना देता। और क़ियामत के दिन केवल उसी की ओर लौटकर जाना है। फिर वह तुम्हें तुम्हारे कर्मों का बदला देगा। यदि अच्छा काम है, तो अच्छा बदला और यदि बुरा है, तो बुरा।
Teğabün 64:4
वह जानता है जो कुछ आकाशों में है और वह जानता है जो कुछ धरती में है, तथा वह जानता है जो काम तुम छिपाकर करते और वह जानता है जो काम तुम खुल्लम-खुल्ला करते हो। और अल्लाह दिलों के अंदर छिपी भलाई या बुराई को भी जानता है, उससे कुछ भी छिपा नहीं है।
Teğabün 64:5
क्या तुम्हारे पास (ऐ मुश्रिको) पिछली झुठलाने वाली जातियों, जैसे नूह अलैहिस्सलाम की जाति तथा आद और समूद इत्यादि की खबर नहीं पहुँची है, जिन्होंने इस दुनिया में अपने कुफ़्र की सज़ा का स्वाद चखा और आख़िरत में उनके लिए एक दर्दनाक यातना है?! क्यों नहीं, तुम्हारे पास उनकी खबर आ चुकी है। अतः उनके परिणाम से नसीहत प्राप्त करो और अल्लाह के सामने तौबा कर लो, इससे पहले कि तुम्हारे साथ भी वही कुछ हो, जो उनके साथ हुआ था।
Teğabün 64:6
यह यातना उन्हें इस कारण पहुँची कि उनके रसूल उनके पास अल्लाह की ओर से स्पष्ट प्रमाणों और प्रत्यक्ष तर्कों के साथ आते थे, तो उन्होंने रसूल के मानव जाति से होने का खंडन करते हुए कहा : क्या मनुष्य हमें सत्य का मार्गदर्शन करेंगे?!इस तरह उन्होंने इनकार किया और उनपर ईमान लाने से उपेक्षा किया। लेकिन उन्होंने अल्लाह को कोई नुकसान नहीं पहुँचाया। और अल्लाह ने उनके ईमान और आज्ञाकारिता की परवाह न की, क्योंकि उनकी आज्ञाकारिता उसे किसी चीज़ में बढ़ाती नहीं है। और अल्लाह बेनियाज़ है, अपने बंदों का ज़रूरतमंद नहीं है, अपनी बातों और कार्यों में प्रशंसनीय है।
Teğabün 64:7
अल्लाह का इनकार करने वालों ने समझ रखा है कि अल्लाह उनकी मृत्यु के बाद उन्हें जीवित करके नहीं उठाएगा। (ऐ रसूल) आप इन पुनर्जीवन का इनकार करने वालों से कह दें : क्यों नहीं, मेरे पालनहार की क़सम, निश्चय तुम क़ियामत के दिन ज़रूर उठाए जाओगे। फिर निश्चय तुम दुनिया में किए हुए कर्मो से अवगत कराए जाओगे। और यह पुनर्जीवित करके उठाना अल्लाह के लिए आसान है। क्योंकि उसने तुम्हें पहली बार पैदा किया है, अतः वह मौत के बाद तुम्हें हिसाब और बदले के लिए पुनः जीवित करके उठाने की भी शक्ति रखता है।
Teğabün 64:8
तो तुम (ऐ लोगो) अल्लाह पर ईमान ले आओ और उसके रसूल पर ईमान ले आओ, और उस क़ुरआन पर ईमान ले आओ जिसे हमने अपने रसूल पर उतारा है। और अल्लाह तुम्हारे कार्यों से अवगत है। उससे तुम्हारा कोई काम छिपा नहीं है। और वह तुम्हें तुम्हारे कर्मों का बदला देगा।
Teğabün 64:9
और (ऐ रसूल!) उस दिन को याद करें, जिस दिन अल्लाह तुम्हें क़ियामत के दिन एकत्रित करेगा, ताकि तुम्हें तुम्हारे कर्मों का बदला दे। जिस दिन काफ़िरों की हानि और उनका घाटा सामने आ जाएगा। क्योंकि ईमान वाले जन्नत के अंदर जहन्नमियों के घरों के वारिस बनेंगे, और जहन्नमी जहन्नम के अंदर जन्नतियों के ठिकानों के वारिस होंगे। और जो अल्लाह पर ईमान लाएगा और अच्छे कार्य करेगा, अल्लाह उसकी बुराइयों को मिटा देगा और ऐसी जन्नतों में दाख़िल करेगा, जिनके महलों और पेड़ों के नीचे से नहरें बह रही होंगी। वे वहाँ हमेशा रहेंगे। न वे कभी वहाँ से निकलेंगे और न कभी उनसे उसकी नेमतें बाधित होंगी। यह जो उन्होंने प्राप्त किया, वही महान सफलता है, जिसकी बराबरी कोई अन्य सफलता नहीं कर सकती।
Teğabün 64:10
और जिन लोगों ने अल्लाह का इनकार किया और हमारी उन आयतों को झुठलाया, जिन्हें हमने अपने रसूल पर उतारा है, वही लोग जहन्नमी हैं, जो उसमें हमेशा रहने वाले हैं। और उनका ठिकाना बहुत बुरा ठिकाना है।
Teğabün 64:11
किसी को उसकी जान, या उसके धन, या उसकी संतान में जो भी विपत्ति पहुँचती है, वह अल्लाह के निर्णय और उसकी नियति के अनुसार होती है। और जो अल्लाह, उसके निर्णय और उसकी नियति पर ईमान लाएगा, अल्लाह उसके दिल को अपने आदेश के आगे समर्पण करने तथा अपने निर्णय से संतुष्ट होने की तौफ़ीक़ प्रदान करेगा। और अल्लाह हर वस्तु को भली-भाँति जानता है। उससे कुछ भी छिपा नहीं है।
Teğabün 64:12
तथा अल्लाह का आज्ञापालन करो और रसूल का आज्ञापालन करो। फिर यदि तुम उसके रसूल के लाए हुए संदेश से मुँह फेर लो, तो इस विमुखता का पाप तुम पर होगा। और हमारे रसूल का दायित्व केवल उस संदेश को पहुँचा देना है, जिसे पहुँचाने का हमने उन्हें आदेश दिया गया है। और उन्होंने वह संदेश तुम्हें पहुँचा भी दिया है, जिसे पहुँचाने का उन्हें आदेश दिया गया था।
Teğabün 64:13
अल्लाह ही सत्य पूज्य है। उसके सिवा कोई सत्य पूज्य (सच्चा माबूद) नहीं। और केवल अल्लाह ही पर, ईमान वालों को अपने सभी मामलों में भरोसा करना चाहिए।
Teğabün 64:14
ऐ अल्लाह पर ईमान रखने वालो और उसकी शरीयत पर अमल करने वालो! निश्चय तुम्हारी पत्नियों और तुम्हारी संतान में से कुछ तुम्हारे दुश्मन हैं; क्योंकि वे तुम्हें अल्लाह के ज़िक्र और उसके मार्ग में जिहाद से गाफ़िल कर देते हैं और तुम्हें हतोत्साहित करते हैं। अतः सावधान रहो कि कहीं वे तुम्हें प्रभावित न कर दें। और यदि तुम उनकी गलतियों को माफ़ कर दो, उन्हें नज़रअंदाज़ कर दो और उनपर पर्दा डाल दो, तो अल्लाह तुम्हारे पापों को क्षमा कर देगा और तुम पर दया करेगा। और जैसा काम होता है, वैसा ही फल मिलता है।
Teğabün 64:15
निश्चय तुम्हारे धन तथा तुम्हारी संतान तुम्हारे लिए परीक्षा और आज़माइश हैं। क्योंकि वे तुम्हें हराम कमाई करने और अल्लाह के आज्ञापालन को छोड़ने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। और अल्लाह के पास उसके लिए एक महान प्रतिफल है, जो संतान की आज्ञाकारिता पर तथा धन में व्यस्तता पर अल्लाह की आज्ञाकारिता को प्राथमिकता दे।और वह बड़ा प्रतिफल जन्नत है।
Teğabün 64:16
अतः अल्लाह से, उसके आदेशों का पालन करके और उसकी मना की हुई बातों से बचकर, डरते रहो, जितना तुम उसका आज्ञापालन करने में सक्षम हो। तथा अल्लाह एवं उसके रसूल की बात सुनो और उनका पालन करो और अल्लाह के दिए हुए धन को भलाई के रास्तों में खर्च करो। और जिसे अल्लाह उसके दिल की लालच (कंजूसी) से सुरक्षित रखे, दरअसल वही लोग अपनी मनोकांक्षा की पूर्ति में सफल होने वाले और उस चीज़ से मुक्ति पाने वाले हैं, जिससे वे डरते हैं।
Teğabün 64:17
अगर तुम अल्लाह को अच्छा ऋण दोगे, इस प्रकार कि उसके रास्ते में अपना धन खर्च करोगे, तो वह एक नेकी को दस से सात सौ गुना, बल्कि बहुत अधिक गुना करके तुम्हारे प्रतिफल को बढ़ा देगा और तुम्हारे पापों को क्षमा कर देगा। अल्लाह बहुत गुणग्राही है, वह थोड़े से काम के लिए बहुत अधिक प्रतिफल देता है। अत्यंत सहनशील है, सज़ा देने में जल्दी नहीं करता।
Teğabün 64:18
अलाह महिमावान गायब (अनुपस्थित) और हाज़िर (मौजूद) सभी चीज़ों को जानता है। उनमें से कोई चीज़ भी उससे छिपी नहीं है। वह प्रभुत्वशाली है, जिसे कोई पराजित नहीं कर सकता। वह अपनी रचना, विधान और तक़दीर (निर्णय) में हिकमत वाला है।
Talak 65:1
ऐ नबी! जब आप या आपकी उम्मत का कोई व्यक्ति अपनी पत्नी को तलाक़ देना चाहे, तो उसे उसकी इद्दत के आरंभ में तलाक़ दे; इस प्रकार कि वह तलाक़ ऐसी पवित्रता की अवधि में हो जिसके दौरान उसने उसके साथ संभोग नहीं किया है। और इद्दत की गणना करते रहो, ताकि यदि तुम अपनी पत्नियों को लौटाना चाहो, तो उसके अंदर उन्हें लौटा सको। और अपने पालनहार अल्लाह से, उसके आदेशों का पालन करके और उसकी मना की हुई बातों से बचकर, डरते रहो। इद्दत पूरी होने से पहले, अपनी तलाक़ दी हुई स्त्रियों को उन घरों से न निकालो, जिनमें वे रह रही हों, और न वे स्वंय निकलें। सिवाय इसके कि वे स्पष्ट अश्लीलता जैसे व्यभिचार में पड़ जाएँ। ये अहकाम (नियम) अल्लाह की सीमाएँ हैं, जो उसने अपने बंदों के लिए निर्धारित की हैं। और जो अल्लाह की सीमाओं का उल्लंघन करे, तो निश्चय उसने अपने आप पर अत्याचार किया। क्योंकि उसने अपने पालनहार की अवज्ञा करके खुद को विनाश में डाल दिया। और (ऐ तलाक़ देने वाले!) तुम नहीं जानते कि शायद अल्लाह उस तलाक़ के बाद कुछ ऐसा कर दे जिसकी तुम आशा नहीं करते हो, फिर तुम अपनी पत्नी को लौटा लो।
Talak 65:2
फिर जब उनकी इद्दत समाप्त होने लगे, तो उन्हें इच्छा और अच्छे सहवास के साथ लौटा लो, या उन्हें लौटाने से बाज़ रहो यहाँ तक कि उनकी इद्दत गुज़र जाए, फिर वे अपने मामले के मालिक हो जाएँगीं। तथा उनके जो अधिकार हैं, उन्हें दे दो। और जब तुम उन्हें लौटाना या अलग करना चाहो, तो विवाद को समाप्त करने के लिए अपने में से दो न्यायवान् व्यक्तियों को गवाह बना लो। और (ऐ गवाहो) तुम अल्लाह की प्रसन्नता प्राप्त करने के लिए ठीक-ठीक गवाही दो। इन अहकाम के द्वारा उस व्यक्ति को नसीहत की जाती है, जो अल्लाह और क़ियामत के दिन पर ईमान रखता है, क्योंकि वही याद दिलाने और उपदेश से लाभान्वित होता है। और जो कोई भी अल्लाह से, उसके आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर, डरता है, उसके लिए अल्लाह हर तंगी और परेशानी से निकलने का रास्ता बना देगा।
Talak 65:3
और उसे वहाँ से रोज़ी देगा, जहाँ से वह सोच भी नहीं सकता और वह उसके दिमाग में भी नहीं आया होगा। और जो अपने कामों में अल्लाह पर भरोसा करता है, अल्लाह उसके लिए काफ़ी है। निश्चय अल्लाह अपने आदेश को लागू करने वाला है। वह किसी चीज़ से विवश नहीं है और कोई चीज़ उससे नहीं छूटती। अल्लाह ने हर चीज़ का एक नियत समय निर्धारित कर रखा है, जहाँ तक उसे पहुँचना है। चुनाँचे कठिनाई का एक नियत समय निर्धारित है तथा समृद्धि का एक नियत समय निर्धारित है। अतः दोनों में से कोई भी इनसान पर हमेशा नहीं रहती।
Talak 65:4
और वे तलाकशुदा स्त्रियाँ जो अपने बुढ़ापे के कारण मासिक धर्म से निराश हो चुकी हैं, यदि तुम्हें संदेह है कि वे अपनी इद्दत की गणना कैसे करेंगी, तो उनकी इद्दत तीन मास है। तथा जो स्त्रियाँ अपनी अल्पायु के कारण मासिक धर्म की उम्र तक नहीं पहुँची हैं, तो उनकी इद्दत भी तीन मास है। और गर्भवती महिलाओं की तलाक़ या पति की मृत्यु की वजह से इद्दत उस समय समाप्त होगी : जब वे अपना गर्भ जन देंगी। और जो अल्लाह से, उसके आदेशों का पालन करके और उसकी मना की हुई चीज़ों से बचकर, डरेगा; अल्लाह उसके लिए उसके मामलों को आसान बना देगा और उसकी हर कठिनाई को सरल कर देगा।
Talak 65:5
यह तलाक़, लौटाने और इद्दत के अहकाम जिनका उल्लेख किया गया है, अल्लाह के आदेश हैं, जो उसने (ऐ मोमिनो) तुम्हारी ओर उतारे हैं, ताकि तुम उनपर अमल करो। और जो अल्लाह से, उसके आदेशों का पालन करके और उसकी मना की हुई बातों से बचकर डरेगा, अल्लाह उसके द्वारा किए गए पापों को मिटा देगा और आख़िरत में उसे बड़ा प्रतिफल प्रदान करेगा और वह जन्नत में प्रवेश और उस नेमत की प्राप्ति है, जो कभी ख़त्म न होगी।
Talak 65:6
तुम उन्हें (ऐ पतियो) अपनी क्षमता के अनुसार वहाँ आवास दो, जहाँ तुम रहते हो। अल्लाह तुम पर इससे अधिक बोझ नहीं डालता। तथा उन्हें तंग करने के लिए उनके खर्च और आवास में या किसी और चीज में उन्हें नुकसान न पहुँचाओ। और यदि तलाकशुदा स्त्रियाँ गर्भवती हैं, तो उनपर खर्च करो, यहाँ तक कि वे अपने गर्भ को जन दें। फिर यदि वे तुम्हारे बच्चों को दूध पिलाएँ, तो उन्हें दूध पिलाने का पारिश्रमिक दो। और पारिश्रमिक के मामले में रीति के अनुसार ठीक से विचार विमर्श कर लिया करो। फिर यदि पति उतना पारिश्रमिक देने में कंजूसी करे, जो पत्नी माँग रही है या पत्नी लालच में पड़ जाए और अपने अपेक्षित पारिश्रमिक से कम पर राज़ी न हो; तो बच्चे का बाप कोई अन्य दूध पिलाने वाली रखकर अपने बच्चे को दूध पिलवाए।
Talak 65:7
जिसे अल्लाह ने धन संपन्न बनाया है, उसे चाहिए अपनी संपन्नता के अनुसार अपनी तलाक़शुदा स्त्री और अपने बच्चे पर खर्च करे, और जिसकी रोज़ी तंग कर दी गई है, तो अल्लाह ने उसे जो कुछ भी दिया है, उसी में से खर्च करे। अल्लाह किसी प्राणी पर उतना ही भार डालता है, जितना उसे प्रदान किया है। उसपर उससे अधिक या उसकी शक्ति से बढ़कर भार नहीं डालता है। शीघ्र ही अल्लाह उसकी तंगहाली और कठिनाई के बाद संपन्नता और समृद्धि प्रदान करेगा।
Talak 65:8
कितनी ही बस्तियाँ ऐसी हैं कि जब उन्होंने अपने पालनहार के आदेश की तथा उसके रसूलों अलैहिमुस्सलाम के आदेश की अवहेलना की, तो हमने उनके बुरे कर्मों का बड़ा सख्त हिसाब लिया और उन्हें दुनिया एवं आख़िरत में भयानक सज़ा दी।
Talak 65:9
तो उन्होंने अपने बुरे कर्मों का परिणाम चख लिया। और उनका परिणाम, इस दुनिया में घाटा और आख़िरत में भी घाटा ही रहा।
Talak 65:10
अल्लाह ने उनके लिए कठोर यातना तैयार कर रखी है। अतः (ऐ समझ बूझ वालो, जो अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान लाए हो) अल्लाह से, उसके आदेशों का पालन करके और उसकी मना की हुई बातों से बचकर डरो, ताकि उनके साथ जो हुआ वह तुम्हारे साथ न हो। निश्चय अल्लाह ने तुम्हारी ओर महान उपदेश उतारा है, जो तुम्हें उसकी अवज्ञा के बुरे परिणामों और उसकी आज्ञाकारिता के अच्छे परिणामों की याद दिलाता है।
Talak 65:11
यह उपदेश अल्लाह का एक रसूल है, जो तुम्हारे सामने अल्लाह की आयतें पढ़कर सुनाता है, जो (तुम्हारे लिए सत्य को) स्पष्ट करने वाली हैं जिनमें कोई संदेह नहीं है। आशा है कि वह उन लोगों को, जो अल्लाह पर ईमान लाए, उसके रसूल को सच्चा माना और अच्छे कार्य किए, गुमराही के अंधेरों से निकाल कर मार्गदर्शन की रोशनी में लाए। और जो अल्लाह पर ईमान लाए और अच्छे कार्य करे, अल्लाह उसे ऐसी जन्नतों में दाख़िल करेगा, जिनके महलों और पेड़ों के नीचे से नहरें बहती हैं। वे उनमें हमेशा के लिए रहेंगे।निश्चय अल्लाह ने उसके लिए उत्तम आजीविका तैयार कर रखी है। क्योंकि वह उसे ऐसी जन्नत में दाखिल करेगा, जिसका आनंद कभी बाधित नहीं होगा।
Talak 65:12
अल्लाह वही है, जिसने सात आकाश बनाए और सात आकाशों की रचना की तरह सात धरतियाँ बनाईं। अल्लाह का सांसारिक एवं शरई आदेश उनके बीच उतरता है, ताकि तुम जान लो कि अल्लाह हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है। उसे कोई चीज़ विवश नहीं कर सकती। तथा यह कि उस महिमावान् अल्लाह ने हर वस्तु को अपने ज्ञान के साथ घेर लिया है। अतः आकाशों में या पृथ्वी पर उससे कुछ भी छिपा नहीं है।
Tahrim 66:1
ऐ रसूल! आप अपनी दासी मारिया से सहवास को क्यों हराम ठहराते हैं, जिसे अल्लाह ने आपके लिए हलाल किया है, आप इससे अपनी पत्नियों को खुश करना चाहते हैं, क्योंकि वे आपके मारिया के पास जाने को अप्रिय समझती हैं?! अल्लाह आपको माफ़ करने वाला, आप पर दया करने वाला है।
Tahrim 66:2
अल्लाह ने तुम्हारे लिए कफ़्फ़ारा के द्वारा अपनी क़समों को हलाल करना धर्म संगत बना दिया है, यदि तुम कोई चीज़ उनसे बेहतर पाओ या उस क़सम को तोड़ दो। अल्लाह तुम्हारा सहायक है। तथा वह तुम्हारी स्थितियों एवं हितों के बारे में सबसे अच्छा जानता है, अपनी शरीयत और तक़दीर (निर्णय) में हिकमत वाला है।
Tahrim 66:3
तथा उस समय को याद करें, जब नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने अपनी पत्नी हफ़सा रज़ियल्लाहु अन्हा को विशेष रूप से एक बात बताई, जिसमें यह बात शामिल थी कि आप अपनी दासी मारिया के निकट नहीं जाएँगे। फिर जब हफ़सा रज़ियल्लाहु अन्हा ने आयशा रज़ियल्लाहु अन्हा को यह बात बता दी और अल्लाह ने अपने नबी को उनके रहस्य के प्रकट हो जाने के बारे में बता दिया, तो आपने हफ़सा रज़ियल्लाहु अन्हा को डाँटा और उनसे उनकी बताई हुई कुछ बातों का उल्लेख किया और कुछ से खामोशी बरती। तो ह़फ़सा रज़ियल्लाहु अन्हा ने आपसे पूछा : आप को यह बात किसने बताई? तो आपने फरमाया : मुझे उसने बताया है, जो हर चीज़ को जानने वाला और हर गुप्त चीज़ की ख़बर रखने वाला है।
Tahrim 66:4
तुम दोनों को तौबा करना चाहिए। क्योंकि तुम दोनों के दिल उस चीज़ को पसंद करने की तरफ़ झुक गए हैं, जो अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को नापसंद है यानी अपनी दासी से दूर रहना और उसे अपने ऊपर हराम कर लेना। और अगर तुम दोनों आपके ख़िलाफ भड़काने पर अटल रहोगी, तो खुद अल्लाह आपका संरक्षक और सहायक है। और इसी तरह जिबरील और नेक ईमान वाले आपके संरक्षक और सहायक हैं। तथा अल्लाह की मदद के बाद फ़रिश्ते आपके सहायक तथा आपको कष्ट देने वालों के विरुद्ध आपके मददगार हैं।
Tahrim 66:5
यदि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम तुम्हें तलाक़ दे दें, तो बहुत संभावित है कि उनका पालनहार उन्हें तुमसे बेहतर पत्नियाँ प्रदान कर दे, जो उसके आदेश को मानने वाली हों, उसपर तथा उसके रसूल पर ईमान रखने वाली हों, अल्लाह का आज्ञापालन करने वाली हों, अपने गुनाहों से तौबा करने वाली हों, अपने पालनहार की इबादत करने वाली हों, रोज़ा रखने वाली हों, जिनमें से कुछ पहले से शादीशुदा तथा कुछ कुँवारियाँ हों। लेकिन नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने उन्हें तलाक नहीं दी।
Tahrim 66:6
ऐ अल्लाह पर ईमान रखने वालो और उसकी शरीयत पर अमल करने वालो! अपने लिए और अपने घर वालों के लिए उस भयानक आग से बचाव एवं सुरक्षा अपनाओ, जिसे मनुष्यों के द्वारा और पत्थर के ज़रिए जलाया जाएगा। इस आग पर ऐसे फ़रिश्ते नियुक्त हैं, जो उसमें प्रवेश करने वालों पर कठोर हैं और बलशाली हैं। यदि अल्लाह उन्हें कोई आदेश देता है, तो वे उसके आदेश की अवहेलना नहीं करते हैं तथा वे बिना सुस्ती और देरी के वही करते हैं जो वह उन्हें आदेश देता है।
Tahrim 66:7
क़ियामत के दिन काफ़िरों से कहा जाएगा : ऐ अल्लाह के साथ कुफ़्र करने वालो, आज तुम अपने कुफ़्र और पापों के लिए बहाने मत बनाओ। क्योंकि तुम्हारे बहाने को स्वीकार नहीं किया जाएगा। बल्कि, आज के दिन तुम्हें केवल अल्लाह के साथ कुफ़्र करने एवं उसके रसूलों को झुठलाने का बदला दिया जाएगा, जो तुम दुनिया में किया करते थे।
Tahrim 66:8
ऐ अल्लाह पर ईमान रखने वालो और उसकी शरीयत पर अमल करने वालो! तुम अल्लाह के सामने अपने गुनाहों से सच्ची तौबा करो। आशा है कि तुम्हारा पालनहार तुम्हारे गुनाहों को मिटा दे और तुम्हें क़ियामत के दिन ऐसी जन्नतों में दाख़िल करे, जिनके महलों के नीचे से नहरें बहती हैं। जिस दिन अल्लाह नबी को तथा उनके साथ ईमान लाने वालों को जहन्नम में दाखिल करके अपमानित नहीं करेगा। उनका प्रकाश सिरात पर उनके आगे तथा उनके दाएँ चल रहा होगा। वे कहेंगे : ऐ हमारे पालनहार, हमारे लिए हमारे प्रकाश को पूर्ण कर दे, ताकि हम जन्नत में दाखिल हो सकें। और मुनाफ़िकों के जैसे न हो जाएँ, जिनका प्रकाश सिरात पर बुझ जाएगा। तथा हमारे गुनाह माफ़ कर दे। निःसंदेह तू हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है। इसलिए हमारे प्रकाश को पूरा करने और हमारे पापों को नजरअंदाज करने से विवश नहीं है।
Tahrim 66:9
ऐ रसूल, काफ़िरों से तलवार के द्वारा तथा मुनाफ़िकों से ज़बान के द्वारा और हदें (शरई दंड) क़ायम करके जिहाद करें। और उनपर सख़्ती करें, ताकि वे आपका भय महसूस करें। और उनका ठिकाना, जहाँ वे क़ियामत के दिन शरण लेंगे, जहन्नम है, और उनका वह ठिकाना बहुत बुरा ठिकाना है, जहाँ वे लौटकर जाएँगे।
Tahrim 66:10
अल्लाह ने उन लोगों के लिए, जिन्होंने अल्लाह और उसके रसूलों का इनकार किया (यह स्पष्ट करने के लिए कि ईमान वालों के साथ उनका संबंध किसी भी तरह से फायदेमंद नहीं है) अल्लाह के दो नबियों : नूह और लूत अलैहिमस्सलाम की पत्नियों का उदाहरण दिया है। वे दोनों दो नेक बंदों की पत्नियाँ थीं। किन्तु दोनों ने अपने पतियों के साथ विश्वासघात किया। क्योंकि वे दोनों अल्लाह के मार्ग से रोकती तथा अपनी जाति के काफ़िरों का समर्थन करती थीं। इसलिए उन दोनों का इन दोनों नेक बंदों की पत्नियाँ होने का कोई लाभ न हुआ। और उनसे कहा गया : जहन्नम में प्रवेश करने वाले काफ़िरों और अवज्ञाकारियों के साथ तुम दोनों (भी) उसमें प्रवेश कर जाओ।
Tahrim 66:11
और अल्लाह ने उन लोगों के लिए, जो अल्लाह और उसके रसूलों पर ईमान लाए, यह बतलाने के लिए कि काफ़िरों के साथ उनका संबंध उन्हें कुछ नुक़सान नहीं पहुँचाएगा और उन्हें प्रभावित नहीं करेगा जब तक कि वे सत्य पर सुदृढ़ हैं, फ़िरऔन की पत्नी की स्थिति का उदाहरण प्रस्तुत किया है, जब उसने कहा : ऐ मेरे पालनहार! मेरे लिए अपने निकट जन्नत में एक घर बना और मुझे फ़िरऔन के अत्याचार और उसके बुरे कामों से बचा ले तथा मुझे उन लोगों से बचा ले, जो उसकी सरकशी एवं अत्याचार में उसका पालन करके अपने ऊपर अत्याचार करने वाले हैं।
Tahrim 66:12
तथा अल्लाह ने उन लोगों के लिए, जो अल्लाह और उसके रसूलों पर ईमान लाए, मरयम बिन्त इमरान का उदाहरण पेश किया है, जिसने खुद को व्यभिचार से सुरक्षित रखा, तो अल्लाह ने जिबरील को उसके अंदर फूँक मारने का आदेश दिया। चुनाँचे उसने अल्लाह की शक्ति के साथ बिना बाप के ईसा बिन मरयम अलैहिस्सलाम का गर्भ धारण कर लिया। तथा उसने अल्लाह के नियमों की और उसके रसूलों पर अवतरित उसकी किताबों की पुष्टि की। और वह अल्लाह के आदेशों का पालन करके और उसकी मना की हुई बातों से बचकर उसका आज्ञापालन करने वालों में से थी।
Mülk 67:1
उस अल्लाह की भलाई बहुत अधिक और महान है, जिस अकेले के हाथ में सारा राज्य है और वह सब कुछ करने में सक्षम है, कोई चीज़ उसकी शक्ति से बाहर नहीं है।
Mülk 67:2
जिसने मौत और जीवन को पैदा किया, ताकि वह तुम्हें (ऐ लोगो) परखे कि तुममें से कौन सर्वश्रेष्ठ कार्य करने वाला है? और वह ऐसा प्रभुत्वशाली है, जिस पर किसी का ज़ोर नहीं चलता। वह अपने तौबा करने वाले बंदों के गुनाहों को माफ़ करने वाला है।
Mülk 67:3
जिसने सात आकाश बनाए, प्रत्येक आकाश उसके पहले के ऊपर एक परत के रूप में इस तरह है कि एक आसमान और दूसरे आसमान के बीच कोई मिलन नहीं है। (ऐ देखने वाले) तुम अल्लाह की रचना में कोई असमानता या असंगति नहीं देखोगे। तुम फिर से नज़र दौड़ाओ क्या तुम्हें कोई दरार या फटन दिखाई देती है?! तुम्हें इस तरह की कोई चीज़ हरगिज़ नज़र नहीं आएगी, बल्कि तुम एक सुदृढ़ और मज़बूत रचना देखोगे।
Mülk 67:4
फिर तुम बार-बार नज़र डालो, तुम्हारी नज़र आकाश की रचना में कोई दोष या खराबी देखे बिना अपमानित होकर तुम्हारी ओर लौट आएगी और वह थकी हुई होगी, उसे कुछ दिखाई न देगा।
Mülk 67:5
निश्चय हमने धरती से सबसे निकट के आकाश को चमकीले तारों के साथ सुशोभित किया है तथा हमने उन तारों को उल्का बना दिया है, जिनके द्वारा उन शैतानों को मारा जाता है, जो चोरी-छिपे सुनने का प्रयास करते हैं। तो ये तारे उन्हें जला देते हैं, और हमने उनके लिए आख़िरत में भड़कती आग तैयार कर रखी है।
Mülk 67:6
और जिन लोगों ने अपने पालनहार का इनकार किया, उनके लिए क़ियामत के दिन भड़कती हुई आग की यातना है और वह लौटने का स्थान बहुत बुरा है, जहाँ उन्हें लौटना है।
Mülk 67:7
जब वे जहन्नम में फेंके जाएँगे, तो उसकी सख़्त भूंडी आवाज़ सुनेंगे और वह हाँडी के उबलने की तरह उबल रहा होगा।
Mülk 67:8
क़रीब होगा कि जहन्नम, उसमें प्रवेश करने वालों के ख़िलाफ़ अपने क्रोध की तीव्रता से, एक दूसरे से अलग हो जाए और फट पड़े। जब भी उसमें, उसके अंदर प्रवेश करने वाले काफ़िरों का कोई समूह डाला जाएगा, तो वहाँ नियुक्त फ़रिश्ते उनसे फटकार के रूप में पूछेंगे : क्या दुनिया में तुम्हारे पास कोई रसूल नहीं आया था, जो तुम्हें अल्लाह की यातना से सावधान करता?!
Mülk 67:9
काफ़िर कहेंगे : क्यों नहीं?! हमारे पास रसूल आया था, जो हमें अल्लाह की यातना से डराता था, लेकिन हमने उसे झुठला दिया और उससे कहा : अल्लाह ने कोई वह़्य नहीं उतारी है। तुम तो (ऐ रसूलो!) सत्य से बहुत भटके हुए हो।
Mülk 67:10
और काफ़िर कहेंगे : अगर हम उससे लाभान्वित होने के तौर पर सुनते होते, या ऐसे व्यक्ति के समझने की तरह समझते होते, जो सत्य एवं असत्य के बीच अंतर करता है, तो हम जहन्नम में दाख़िल होने वालों के बीच न होते। बल्कि, हम रसूलों पर ईमान रखते होते और उनके लाए हुए संदेश को सच मानते होते और जन्नत में प्रवेश करने वालों में से होते।
Mülk 67:11
इस तरह, वे अपने कुफ़्र और झुठलाने को स्वीकार करेंगे, इसलिए वे आग के पात्र हुए।तो दूरी है (जहन्नम की) आग वालों के लिए।
Mülk 67:12
निश्चय जो लोग अपने एकांत में अल्लाह से डरते हैं, उनके पापों के लिए क्षमा है और उनके लिए एक महान पुण्य है और वह जन्नत है।
Mülk 67:13
(ऐ लोगो) तुम अपनी बात छिपाओ या उसे प्रकट करो, अल्लाह उसे जानता है। निश्चय वह अपने बंदों के दिलों की बातों को भी जानता है, उसमें से कुछ भी उससे छिपा नहीं है।
Mülk 67:14
क्या वह जिसने सभी प्राणियों को पैदा किया, वह भेद और भेद से भी अधिक छिपी चीज़ को नहीं जानेगा?! जबकि वह अपने बंदों के रहस्यों से अवगत, उनके मामलों की पूरी ख़बर रखने वाला है। उनमें से कुछ भी उससे छिपा नहीं है।
Mülk 67:15
वही है जिसने तुम्हारे लिए धरती को उसपर रहने के लिए नरम बनाया, तो तुम उसके विभिन्न क्षेत्रों में चलो-फिरो, और उसकी उस रोज़ी से खाओ, जो उसने उसमें तुम्हारे लिए तैयार की है, और अकेले उसी की ओर तुम्हें हिसाब और बदला के लिए जीवित होकर जाना है।
Mülk 67:16
क्या तुम उस अल्लाह से निडर हो गए, जो आकाश में है कि वह इस धरती को तुम्हारे नीचे से फाड़ दे, जैसे कि क़ारून के नीचे से फाड़ दिया था, जबकि वह रहने के लिए नरम और अधीनस्थ थी, फिर वह अपनी स्थिरता के बाद अचानक तुम्हें लेकर काँपने लगे?!
Mülk 67:17
क्या तुम उस अल्लाह से, जो आकाश में है, निडर हो गए हो कि वह तुमपर आकाश से पत्थर बरसा दे, जैसे लूत अलैहिस्सलाम की जाति पर बरसाया था?! फिर जब तुम मेरी यातना को देखोगे, तो तुम्हें मेरी चेतावनी का पता चल जाएगा, लेकिन यातना देख लेने के बाद तुम्हें इससे कोई फायदा नहीं होगा।
Mülk 67:18
निःसंदेह इन मुश्रिकों से पहले के समुदायों ने भी झुठलाया है। जब उन्होंने अपने कुफ़्र और झुठलाने पर हठ किया, तो उनपर अल्लाह की यातना उतरी। तो उनके खिलाफ़ मेरा इनकार कैसा था?! निश्चय वह बहुत सख़्त इनकार था।
Mülk 67:19
क्या इन झुठलाने वालों ने अपने ऊपर पक्षियों को उड़ते नहीं देखा, जो कभी हवा में अपने पंख फैलाते हैं और कभी उन्हें समेट लेते हैं। उन्हें ज़मीन पर गिरने से अल्लाह के अलावा कोई नहीं रोकता है। निश्चय वह हर चीज़ को देखने वाला है, उससे कोई भी चीज़ छिपी नहीं है।
Mülk 67:20
यदि (ऐ काफ़िरो) अल्लाह तुम्हें यातना देना चाहे, तो तुम्हारे लिए कोई सेना नहीं है, जो तुम्हें उसकी यातना से बचा सके। काफ़िर लोग तो मात्र धोखे में पड़े हुए हैं। शैतान ने उन्हें धोखा दिया, तो वे उसके धोखे में पड़ गए।
Mülk 67:21
यदि अल्लाह अपनी जीविका को तुम्हारे पास तक पहुँचने से रोक ले, तो तुम्हें कोई भी जीविका प्रदान नहीं कर सकता। बल्कि, निष्कर्ष यह है कि काफ़िर लोग अपने हठ और अहंकार, तथा सच्चाई से उपेक्षा में बहुत दूर चले गए हैं।
Mülk 67:22
क्या वह व्यक्ति जो अपने चेहरे के बल औंधा होकर चलता है - और वह बहुदेववादी है -, अधिक सीधी राह पर है या वह मोमिन, जो सीधे रास्ते पर सीधा होकर चलता है?!
Mülk 67:23
आप (ऐ रसूल) इन झुठलाने वाले मुश्रिकों से कह दें : अल्लाह ही ने तुम्हें पैदा किया, और तुम्हारे लिए कान बनाए जिनसे तुम सुनते हो, और आँखें बनाईं जिनसे तुम देखते हो और दिल बनाए जिनसे तुम समझते हो। तुम अल्लाह का उसकी प्रदान की हुई नेमतों पर बहुत कम शुक्रिया अदा करते हो।
Mülk 67:24
आप (ऐ रसूल) इन झुठलाने वाले मुश्रिकों से कह दें : अल्लाह ही है, जिसने तुम्हें धरती में फैलाया, न कि तुम्हारी मूर्तियाँ, जो कुछ भी पैदा नहीं कर सकतीं। तथा क़ियामत के दिन तुम अकेले उसी के पास हिसाब और बदले के लिए एकत्र किए जाओगे, न कि अपनी मूर्तियों के पास। अतः उसी से डरो और अकेले उसी की इबादत करो।
Mülk 67:25
तथा मरने के बाद पुनर्जीवित कर उठाए जाने का इनकार करने वाले, पुनर्जीवन को असंभव समझते हुए कहते हैं : यह वादा कब पूरा होगा, जिसका (ऐ मुहम्मद) तुम और तुम्हारे साथी हमें वचन दे रहे हैं, यदि तुम अपने इस दावे में सच्चे हो कि वह आकर ही रहेगा?!
Mülk 67:26
(ऐ रसूल) आप कह दें : क़ियामत की जानकारी केवल अल्लाह के पास है। वह कब आएगी, उसके सिवा कोई नहीं जानता। और मैं तो केवल तुम्हें स्पष्ट तौर पर डराने वाला हूँ।
Mülk 67:27
फिर जब वह वादा उनके पास आ जाएगा और वे यातना को अपने निकट देखेंगे और यह क़ियामत के दिन होगा, तो अल्लाह का इनकार करने वालों के चेहरे बिगड़ जाएँगे और काले पड़ जाएँगे और उनसे कहा जाएगा : यह वही चीज़ है, जो तुम दुनिया में माँगा करते थे और उसकी जल्दी मचाया करते थे।
Mülk 67:28
(ऐ रसूल!) आप इन झुठलाने वाले मुश्रिकों से उनका खंडन करते हुए कह दें : मुझे बताओ कि अगर अल्लाह मुझे मौत दे दे और मेरे साथ जो मोमिन हैं उन्हें भी मृत्यु दे दे, या हम पर दया करे और हमारी मृत्यु को विलंब कर दे, तो काफ़िरों को दर्दनाक यातना से कौन बचाएगा?! निश्चय उन्हें इससे कोई नहीं बचाएगा।
Mülk 67:29
(ऐ रसूल!) आप इन मुश्रिकों से कह दें : वही 'रहमान' है, जो तुम्हें अकेले अपनी इबादत के लिए आमंत्रित करता है। हम उसपर ईमान लाए, तथा अकेले उसी पर हमने अपने मामलों भरोसा किया है। चुनाँचे शीघ्र ही तुम्हें - अनिवार्य रूप से - पता चल जाएगा कि कौन स्पष्ट गुमराही में है और कौन सीधे रास्ते पर है।
Mülk 67:30
(ऐ रसूल) आप इन मुश्रिकों से कहें : मुझे बताओ कि क्या तुम्हारा वह पानी, जिसमें से तुम पीते हो, यदि धरती में नीचे चला जाए और तुम्हारी पहुँच से बाहर हो जाए, तो कौन है जो तुम्हारे पास बहता हुआ पानी लाए?! निश्चित रूप से अल्लाह के सिवा कोई नहीं।
Kalem 68:1
{नून} सूरतुल-बक़रा के आरंभ में इस प्रकार के अक्षरों के बारे में बात गुज़र चुकी है। अल्लाह ने क़लम की क़सम खाई है तथा उस चीज़ की क़सम खाई है, जो लोग अपनी क़लमों से लिखते हैं।
Kalem 68:2
(ऐ रसूल) आप, अल्लाह के इस अनुग्रह से कि उसने आपको नबी बनाया, दीवाने हरगिज़ नहीं हैं। बल्कि, आप उस पागलपन से बरी हैं, जिससे मुश्रिकों ने आपको आरोपित किया है।
Kalem 68:3
निःसंदेह आप लोगों तक अल्लाह का संदेश पहुँचाने से जो कष्ट सहते हैं, उसपर आपके लिए निश्चय कभी बाधित न होने वाला बदला है, और इसमें किसी का आप पर कोई एहसान नहीं है।
Kalem 68:4
और निःसंदेह आप निश्चित रूप से क़ुरआन के लाए हुए महान चरित्र पर विराजमान हैं। अतः जो कुछ क़ुरआन में है वह पूर्णता आपका स्वभाव बन गया है।
Kalem 68:5
अतः बहुत जल्द आप देख लेंगे और ये झुठलाने वाले लोग भी देख लेंगे।
Kalem 68:6
जब सच्चाई सामने आ जाएगी, तो स्पष्ट हो जाएगा कि तुममें से कौन पागलपन से ग्रसित है।?!
Kalem 68:7
(ऐ रसूल) निश्चय आपका रब उसे बेहतर जानता है जो उसके रास्ते से भटक गया है और वही सीधे मार्ग पर चलने वालों को भी बेहतर जानने वाला है। चुनाँचे उसे पता है कि यही लोग हैं जो उससे भटके हुए हैं और आप ही हैं जो उसपर चल रहे हैं।
Kalem 68:8
अतः (ऐ रसूल) आप उन लोगों की बात न मानें, जो आपके लाए हुए संदेश को झुठलाने वाले हैं।
Kalem 68:9
वे चाहते हैं कि आप दीन की क़ीमत पर उनके साथ नरमी करें, तो वे भी आपके साथ नरमी करने लगें।
Kalem 68:10
और आप हर ऐसे व्यक्ति की बात न मानें, जो बहुत ज़्यादा झूठी क़समें खाने वाला और तुच्छ है।
Kalem 68:11
लोगों की बहुत ज़्यादा ग़ीबत करने वाला और उनके बीच चुग़ली के साथ बहुत चलने-फिरने वाला है, ताकि उनके बीच फूट डाले।
Kalem 68:12
भलाई से बहुत ज़्यादा रोकने वाला, लोगों की धन-संपत्ति, सतीत्व और जान पर अतिक्रमण करने वाला तथा अत्यधिक गुनाह और पाप करने वाला है।
Kalem 68:13
जो कठोर एवं दुष्ट स्वभाव, अपने पिता के अलावा किसी और की तरफ़ मनसूब (यानी नाजायज औलाद) है।
Kalem 68:14
क्योंकि वह पैसे और बच्चों वाला है, इसलिए अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान लाने से अहंकार करता है।
Kalem 68:15
जब उसके सामने हमारी आयतें पढ़ी जाती हैं, तो कहता है : यह तो पहले लोगों की दंतकथाओं से लिखी गई बातें हैं।
Kalem 68:16
हम शीघ्र ही उसकी नाक पर निशान लगा देंगे, जो उसके चेहरे को बिगाड़ देगी और कभी उससे अलग नहीं होगी।
Kalem 68:17
हमने इन मुश्रिकों का अकाल एवं भूख के साथ परीक्षण किया, जिस तरह हमने बाग़ वालों का परीक्षण किया, जब उन्होंने सुबह के समय उसके फलों को जल्दी से तोड़ लेने की क़सम खाई थी, ताकि किसी गरीब व्यक्ति को उनसे खाना न मिले।
Kalem 68:18
और उन्होंने 'इन शा अल्लाह' (अगर अल्लाह ने चाहा) कहकर अपनी क़्सम में कोई अपवाद नहीं किया।
Kalem 68:19
तो अल्लाह ने उस (बाग़) की ओर एक आग भेज दी, जो उसे खा गई, जबकि बाग़ के मालिक सो रहे थे, वे उससे आग को रोकने में सक्षम नहीं थे।
Kalem 68:20
तो वह बाग़ अंधेरी रात की तरह काला हो गया।
Kalem 68:21
फिर सुबह के समय उन्होंने एक-दूसरे को पुकारा।
Kalem 68:22
कहने लगे : गरीबों के आगमन से पहले सुबह-सवेरे ही अपने खेत की ओर निकल चलो, यदि तुम उसके फलों को तोड़ना चाहते हो।
Kalem 68:23
चुनाँचे वे आपस में चुपके-चुपके बातें करते हुए तेज़ क़दमों से अपने खेत की ओर चल पड़े।
Kalem 68:24
वे आपस में कह रहे थे : आज बाग़ में तुम्हारे पास कोई ग़रीब हरगिज़ न पहुँचने पाए।
Kalem 68:25
और वे सुबह-सवेरे इस हाल में चल पड़े कि वे अपने फलों को (गरीबों से) रोकने का पक्का इरादा किए हुए थे।
Kalem 68:26
जब उन्होंने उसे जला हुआ देखा, तो उन्होंने एक-दूसरे से कहा : निश्चय हम उस (बाग़) का रास्ता भूल गए हैं।
Kalem 68:27
बल्कि हम बाग़ के फलों को तोड़ने से रोक दिए गए हैं, क्योंकि हमने गरीबों को इससे रोकने का दृढ़ संकल्प कर लिया था।
Kalem 68:28
उनमें से सर्वश्रेष्ठ ने कहा : क्या मैंने तुमसे उस समय नहीं कहा था, जब तुमने ग़रीबों को इससे वंचित करने का संकल्प किया था : तुम अल्लाह की पवित्रता क्यों नहीं बयान करते और उसके सामने तौबा क्यों नहीं करते?!
Kalem 68:29
उन्होंने कहा : हमारा रब पवित्र है। निःसंदेह हम ही अपने ऊपर अत्याचार करने वाले थे जब हमने ग़रीबों को अपने बाग़ के फलों से रोकने का संकल्प किया था।
Kalem 68:30
फिर वे एक-दूसरे के सम्मुख होकर परस्पर एक-दूसरे को दोषी ठहराने लगे।
Kalem 68:31
उन्होंने पछतावे से कहा : हाय हमारी क्षति! निश्चय हम ही ग़रीबों के हक़ को रोकने की योजना बनाकर हद से बढ़ गए थे।
Kalem 68:32
आशा है कि हमारा पालनहार हमें बाग़ से बेहतर बदला प्रदान करेगा। निश्चय हम अकेले अल्लाह ही की ओर इच्छा रखने वाले हैं। उसी से क्षमा की आशा रखते हैं और उसी से भलाई माँगते हैं।
Kalem 68:33
आजीविका से वंचित करके इस यातना की तरह हम उन लोगों को यातना देते हैं जो हमारी अवज्ञा करते हैं, और आख़िरत की यातना तो इससे भी बड़ी है। काश वे उसकी गंभीरता और निरंतरता को जानते!
Kalem 68:34
निश्चय अल्लाह से, उसके आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर, डरने वाले लोगों के लिए उनके पालनहार के पास नेमतों वाले बाग़ हैं। जिनमें वे नेमतों का आनंद लेंगे। उनकी नेमत कभी बाधित नहीं होगी।
Kalem 68:35
क्या हम मुसलमानों को प्रतिफल में काफ़िरों की तरह बना देंगे, जैसा कि मक्का के मुश्रिक लोग दावा करते हैं?!
Kalem 68:36
तुम्हें (ऐ मुश्रिको) क्या हो गया है कि तुम यह अनुचित और कुटिल निर्णय देते हो?!
Kalem 68:37
क्या तुम्हारे पास कोई किताब है, जिसमें तुम पढ़ते हो कि आज्ञाकारी और अवज्ञाकारी के बीच समानता है?!
Kalem 68:38
जिस पुस्तक में है कि तुम्हारे लिए आख़िरत में वही होगा, जो तुम अपने लिए पसंद करोगे।
Kalem 68:39
क्या तुम्हारे लिए हमारे ज़िम्मे क़समों द्वारा पुष्टि की गई प्रतिज्ञाएं हैं, जिनकी अपेक्षा के अनुसार तुम्हें वही कुछ मिलेगा, जिसका तुम अपने लिए निर्णय करोगे?
Kalem 68:40
(ऐ रसूल) आप इस बात के कहने वालों से पूछें : उनमें से कौन इसकी ज़मानत लेता है?!
Kalem 68:41
क्या उनके अल्लाह के सिवा कोई साझी हैं, जो उन्हें प्रतिफल में मोमिनों के बराबर ठहराते हैं?! तो उन्हें चाहिए कि अपने उन साझियों को ले आएँ, यदि वे अपने इस दावे में सच्चे हैं कि उन्होंने इन लोगों को प्रतिफल में मोमिनों के बराबर ठहराया है।
Kalem 68:42
क़ियामत का दिन बहुत भयावह होगा और हमारा पालनहार अपनी पिंडली खोल देगा और लोगों को सजदा करने के लिए कहा जाएगा। तो ईमान वाले सजदे में चले जाएँगे और काफ़िर तथा मुनाफ़िक़ लोग सजदा करने में असमर्थ रहेंगे।
Kalem 68:43
उनकी निगाहें झुकी होंगी, उनपर अपमान और अफसोस छाया होगा। हालाँकि उन्हें दुनिया में अल्लाह के आगे सजदा करने के लिए कहा जाता था, जबकि वे, आज जिस स्थिति में हैं, उससे भले-चंगे थे।
Kalem 68:44
तो (ऐ रसूल) आप मुझे तथा उसे छोड़ दें, जो आपपर उतरने वाले इस क़ुरआन को झुठलाता है। हम उन्हें धीरे-धीरे इस तरह यातना की ओर लेजाएँगे कि उन्हें पता नहीं चलेगा कि यह उनके साथ चाल चली जा रही है और उन्हें ढील दी जा रही है।
Kalem 68:45
और मैं उन्हें कुछ सयम के लिए मोहलत दे दूँगा, ताकि वे अपने पाप में चरम पर पहुँच जाएँ। निश्चय इनकार करने और झुठलाने वालों के साथ मेरी चाल बहुत मज़बूत है। इसलिए वे मेरी पकड़ से छूट नहीं सकते और मेरी सज़ा से नहीं बच सकते।
Kalem 68:46
क्या (ऐ रसूल!) आप उनसे, उन्हें सत्य की ओर बुलाने का कोई मुआवज़ा माँग रहे हैं, जिसके कारण वे एक भारी बोझ सहन करते हैं, तो यही कारण है कि वे आपसे दूर हो गए हैं?! हालाँकि सच्चाई इसके विपरीत है। क्योंकि आप उनसे कोई मुआवज़ा नहीं माँगते हैं। फिर उन्हें आपका अनुसरण करने से क्या रोकता है?!
Kalem 68:47
या उनके पास ग़ैब (परोक्ष) का ज्ञान है कि वे जो भी तर्क पसंद करते हैं, लिख लेते हैं, जिनके द्वारा वे आपसे बहस करते हैं?!
Kalem 68:48
अतः (ऐ रसूल) आपके पालनहार ने उन्हें मोहलत देकर ढील देने का जो निर्णय किया है, उसके लिए धैर्य से काम लें और अपने समुदाय से ऊबने में मछली वाले नबी यूनुस अलैहिस्सलाम की तरह न हो जाएँ; जब उन्होंने अपने पालनहार को इस दशा में पुकार कि वह समुद्र के अंधेरे और मछली के पेट के अंधेरे में व्यथित थे।
Kalem 68:49
अगर अल्लाह की दया उनके साथ न होती, तो मछली उन्हें एक निर्जन भूमि पर इस दशा में फेंक देती कि वह निंदित होते।
Kalem 68:50
फिर उनके पालनहार ने उन्हें चुन लिया और अपने सदाचारी बंदों में शामिल कर दिया।
Kalem 68:51
और अल्लाह का इनकार करने वाले तथा उसके रसूल को झुठलाने वाले, जब आपपर उतरने वाले इस क़ुरआन को सुनते हैं, तो आपको ऐसे घूरते हैं कि लगता है कि वे आपको अपनी आँखों से अवश्य ही पछाड़ देंगे। तथा वे (अपनी इच्छाओं का पालन करते हुए और सत्य से उपेक्षा करते हुए) कहते हैं : निश्चय इस क़ुरआन को लाने वाला रसूल अवश्य ही दीवाना है।
Kalem 68:52
हालाँकि आप पर उतरने वाला क़ुरआन मनुष्य और जिन्न के लिए मात्र एक उपदेश और अनुस्मारक है।
Hakka 69:1
अल्लाह मरणोपरांत दोबारा जीवित होकर उठने की घड़ी का उल्लेख कर हा है, जो सभी लोगों पर घटित होगी।
Hakka 69:2
फिर अल्लाह इस सवाल के द्वारा उसकी महानता और गंभीरता का वर्णन कर रहा है कि : वह होकर रहने वाली क्या चीज़ है?
Hakka 69:3
और आपको किस चीज़ ने ज्ञात कराया कि यह होकर रहने वाली क्या है?
Hakka 69:4
सालेह अलैहिस्सलाम की जाति समूद और हूद अलैहिस्सलाम की जाति आद ने उस क़ियामत को झुठलाया, जो अपनी भयावहता की तीव्रता से लोगों (के दिलों) को खड़खड़ा (दहला) देगी।
Hakka 69:5
जहाँ तक समूद के लोगों की बात है, तो अल्लाह ने उन्हें ऐसी आवाज़ से नष्ट कर दिया, जो तीव्रता और भयावहता में अंत को पहुँच गई थी।
Hakka 69:6
और रही बात आद समुदाय की, तो अल्लाह ने उन्हें बड़ी ठंडी और प्रचंड आँधी से विनष्ट कर दिया।
Hakka 69:7
अल्लाह ने उसे उनपर सात रातों और आठ दिनों की अवधि के लिए भेज दिया, जो उन्हें जड़ से विनष्ट कर रही थी। चुनाँचे आप उन्हें उनके घरों में मृत ज़मीन पर पड़े हुए देखते, गोया कि वे विनष्ट किए जाने के बाद धरती पर गिरे हुए खजूरों के जर्जर तने हों।
Hakka 69:8
तो क्या उनके इस यातना से पीड़ित होने के बाद आपको उनमें से कोई भी प्राणी बाक़ी दिखाई देता है?!
Hakka 69:9
फ़िरऔन और उससे पहले के समुदायों और ऊपर-नीचे उलटकर यातना दी जाने वाली बस्तियों अर्थात लूत अलैहिस्सलाम की जाति के लोगों ने शिर्क एवं अवज्ञा जैसे गलत कार्य किए।
Hakka 69:10
चुनाँचे उनमें से प्रत्येक ने अपने रसूल की अवज्ञा की और उसे झुठलाया, तो अल्लाह ने उनकी उससे कहीं अधिक पकड़ की, जो उनके विनाश के लिए काफ़ी थी।
Hakka 69:11
जब पानी ऊंचाई में अपनी सीमा से ऊपर बढ़ गया, तो हमने उन लोगों को, जिनकी पुश्त में तुम थे, उस बहती नाव में सवार किया, जिसे नूह अलैहिस्सलाम ने हमारे आदेश से बनाया था। तो इस तरह यह तुम्हें सवार करना था।
Hakka 69:12
ताकि हम नाव और उसकी कहानी को एक उपदेश बना दें, जिससे काफ़िरों को नष्ट करने और ईमान वालों को मुक्ति प्रदान करने पर प्रमाण ग्रहण किया जाए और उसे ऐसे कान याद रखें जो सुनी हुई बातों को याद रखने वाले हैं।
Hakka 69:13
फिर जब सूर में फूँक मारने पर नियुक्त फ़रिश्ता एक फूँक मारेगा, और यह दूसरी बार फूँक मारना है।
Hakka 69:14
और धरती तथा पहाड़ों को उठाया जाएगा और दोनों को एक ही बार इस ज़ोर से टकराया जाएगा कि धरती के हिस्से तथा उसके पहाड़ों के हिस्से अलग-अलग हो जाएँगे।
Hakka 69:15
जिस दिन यह सब कुछ होगा, उस दिन क़ियामत आ जाएगी।
Hakka 69:16
और उस दिन आसमान फट जाएगा, ताकि उससे फ़रिश्ते उतर सकें। तो उस दिन वह कमज़ोर होगा, जबकि वह पहले मज़बूत और सुसंगत था।
Hakka 69:17
और फ़रिश्ते उसके किनारों पर होंगे, तथा उस महान दिन में आठ निकटवर्ती फ़रिश्ते आपके पालनहार के अर्श को उठाए हुए होंगे।
Hakka 69:18
उस दिन तुम (ऐ लोगो) अल्लाह के सामने पेश किए जाओगे। तुम्हारी कोई गुप्त बात अल्लाह से छिपी नहीं रहेगी। बल्कि अल्लाह उसके बारे में जानने वाला, उससे अवगत होगा।
Hakka 69:19
फिर रहा वह व्यक्ति, जिसे उसके कर्मों की किताब उसके दाएँ हाथ में दी गई, तो वह खुशी और प्रसन्नता से कहेगा : लो, मेरे कर्मों की किताब पढ़ो।
Hakka 69:20
मैं दुनिया में जानता था और मुझे यक़ीन था कि मैं मरने के बाद पुनर्जीवित कर उठाया जाने वाला हूँ और अपना प्रतिफल पाने वाला हूँ।
Hakka 69:21
अतः वह सुखमय और संतोषजनक जीवन में होगा, क्योंकि उसे स्थायी आनंद दिखाई देगा।
Hakka 69:22
उच्च स्थान एवं प्रतिष्ठा वाली जन्नत में होगा।
Hakka 69:23
जिसके फल, उन्हें खाने वाले से बिल्कुल क़रीब होंगे।
Hakka 69:24
उनके सम्मान में कहा जाएगा : तुमने दुनिया में बीते हुए दिनों में जो अच्छे कर्म करके आगे भेजे थे, उसके बदले में, बिना किसी नुक़सान के खाओ और पियो।
Hakka 69:25
और रहा वह व्यक्ति, जिसे उसका कर्म-पत्र उसके बाएँ हाथ में दिया गया, तो वह पछतावे की तीव्रता से कहेगा : ऐ काश! मुझे मेरा कर्म-पत्र न दिया जाता, क्योंकि उसमें ऐसे बुरे कार्य हैं, जो मुझे यातना का पात्र बनाते हैं।
Hakka 69:26
और काश मैं अपने हिसाब के बारे में कुछ न जानता।
Hakka 69:27
ऐ काश कि वह मौत जो मुझे आई थी, ऐसी मौत होती जिसके बाद मैं कभी उठाया न जाता।
Hakka 69:28
मेरा धन मुझसे अल्लाह की यातना को कुछ भी न टाल सका।
Hakka 69:29
मेरा तर्क और वह शक्ति एवं वैभव जिनपर मैं भरोसा किया करता था, सब कुछ मुझसे जाता रहा।
Hakka 69:30
और कहा जाएगा : (ऐ फ़रिश्तो) उसे पकड़ो और उसके हाथों को उसकी गरदन के साथ जकड़ दो।
Hakka 69:31
फिर उसे आग में डाल दो, ताकि उसकी गर्मी झेलता रहे।
Hakka 69:32
फिर उसे एक ऐसी ज़ंजीर में दाख़िल कर दो, जिसकी लंबाई सत्तर गज़ है।
Hakka 69:33
निश्चय वह सबसे महान अल्लाह पर ईमान नहीं रखता था।
Hakka 69:34
और दूसरों को ग़रीब को खाना खिलाने के लिए प्रोत्साहित नहीं करता था।
Hakka 69:35
अतः क़ियामत के दिन उसका कोई क़रीबी (रिश्तेदार) नहीं है, जो उससे यातना को टाल सके।
Hakka 69:36
और उसके खाने के लिए जहन्नमियों के शरीर से निकले हुए पीप के सिवा कोई भोजन नहीं है।
Hakka 69:37
यह भोजन केवल वही लोग खाते हैं, जो गुनहगार और पापी हैं।
Hakka 69:38
अल्लाह ने उन चीज़ों की क़सम खाई है, जिन्हें तुम देखते हो।
Hakka 69:39
और उन चीज़ों की भी क़सम खाई है, जिन्हें तुम नहीं देखते हो।
Hakka 69:40
निःसंदेह क़ुरआन अल्लाह की वाणी है, जिसे लोगों के सामने उसका सम्मानित रसूल पढ़कर सुनाता है।
Hakka 69:41
यह किसी कवि की वाणी नहीं है। क्योंकि यह कविता के रूप में नहीं है। तुम बहुत कम ईमान लाते हो।
Hakka 69:42
यह किसी काहिन की भी वाणी नहीं है। क्योंकि काहिनों की बात इस क़ुरआन से बिलकुल अलग होती है। तुम बहुत कम शिक्षा ग्रहण करते हो।
Hakka 69:43
बल्कि यह सभी प्राणियों के पालनहार की ओर से उतारा हुआ है।
Hakka 69:44
और यदि मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) हमपर कोई ऐसी बात गढ़कर लगा देते, जो हमने नहीं कही है।
Hakka 69:45
तो निश्चय हम उससे बदला लेते और उसे शक्ति और क्षमता के साथ पकड़ लेते।
Hakka 69:46
फिर निश्चय हम उसकी दिल से मिली हुई नस काट देते।
Hakka 69:47
फिर तुममें से कोई भी हमें उससे रोक नहीं सकता। इसलिए उसका तुम्हारी ख़ातिर हमपर कोई बात गढ़कर लगाना बहुत दूर की बात है।
Hakka 69:48
निःसंदेह क़ुरआन उन लोगों के लिए निश्चय एक उपदेश है, जो अपने पालनहार से, उसके आदेशों का पालन करके और उसकी मना की हुई चीज़ों से बचकर, डरने वाले हैं।
Hakka 69:49
और निःसंदेह हम भली-भाँति जानते हैं कि तुम्हारे अंदर कुछ लोग ऐसे हैं, जो इस क़ुरआन को झुठलाते हैं।
Hakka 69:50
और निःसंदेह क़ुरआन को झुठलाना निश्चित रूप से क़ियामत के दिन बड़े पछतावे का कारण होगा।
Hakka 69:51
और निःसंदेह क़ुरआन बिलकुल विश्वसनीय सत्य है, जिसके अल्लाह की ओर से होने में कोई शक एवं संदेह नहीं है।
Hakka 69:52
तो (ऐ रसूल) आप अपने पालनहार को उस चीज़ से पवित्र ठहराएँ, जो उसके योग्य नहीं है। और अपने महान पालनहार के नाम का जप करें।
Meâric 70:1
मुश्रिकों में से एक व्यक्ति ने खुद पर और अपनी जाति के लोगों पर यातना का आह्वान किया, यदि वह यातना आने वाली है। यह उसने उपहास के तौर पर किया, हालाँकि वह क़ियामत के दिन घटित होने वाली है।
Meâric 70:2
(वह यातना) अल्लाह का इनकार करने वालों पर आने वाली है। इस यातना को कोई टाल नहीं सकता।
Meâric 70:3
अल्लाह की ओर से, जो ऊँचाइयों वाला, दर्जों वाला, अनुग्रहों और नेमतों वाला है।
Meâric 70:4
फ़रिश्ते और जिबरील (अलैहिस्सलाम) क़ियामत के दिन उन सीढ़ियों के माध्यम से उसकी ओर चढ़ेंगे, और यह एक लंबा दिन है जिसकी मात्रा पचास हज़ार साल है।
Meâric 70:5
अतः (ऐ नबी) आप ऐसा धैर्य रखें, जिसमें न बेचैनी (घबराहट) हो और न शिकायत के शब्द मुँह से निकालें।
Meâric 70:6
वे लोग इस यातना को दूर तथा असंभव समझ रहे हैं।
Meâric 70:7
और हम उसे निश्चित रूप से निकट ही घटित होने वाली समझते हैं।
Meâric 70:8
जिस दिन आकाश पिघले हुए तांबे और सोने आदि के जैसा हो जाएगा।
Meâric 70:9
और पहाड़ ऊन की तरह हल्के हो जाएँगे।
Meâric 70:10
और कोई निकट संबंधी अपने निकट संबंधी का हाल नहीं पूछेगा, क्योंकि हर कोई अपने आप में व्यस्त होगा।
Meâric 70:11
प्रत्येक व्यक्ति अपने निकट के संबंधी को देख रहा होगा, वह उससे छिपा नहीं होगा। फिर भी, उस स्थिति की भयावहता के कारण, कोई किसी को नहीं पूछेगा। तथा वह व्यक्ति जो जहन्नम का हक़दार बन गया होगा, यह चाहेगा कि अपने बजाय अपने बच्चों को यातना के लिए पेश कर दे।
Meâric 70:12
और वह अपनी पत्नी तथा अपने भाई को छुड़ौती के रूप में प्रस्तुत कर दे।
Meâric 70:13
और अपने सबसे क़रीबी परिवार वालों को छुड़ौती के रूप में प्रस्तुत कर दे, जो कठिन परिस्थितियों में उसके साथ खड़े होते थे।
Meâric 70:14
और धरती पर मौजूद मनुष्य, जिन्न और अन्य सहित सभी को छुड़ौती के रूप में दे दे। फिर यह फ़िदया देना उसे जहन्नम की यातना से बचा ले।
Meâric 70:15
मामला वैसा नहीं है, जैसा कि इस अपराधी ने कामना की है। निश्चय वह आख़िरत की आग है, जो भड़क रही है और लपट मार रही है।
Meâric 70:16
जो अपनी गर्मी और प्रज्वलन की तीव्रता से गंभीर रूप से सिर की खाल उधेड़ देगी।
Meâric 70:17
वह उस व्यक्ति को पुकारेगी, जिसने सत्य से मुँह मोड़ा और उससे दूर भागा, न उसपर ईमान लाया और न उसपर अमल किया।
Meâric 70:18
और उसने धन जमा किया और उसे अल्लाह के रास्ते में खर्च करने में कंजूसी की।
Meâric 70:19
निश्चय इनसान सख़्त लालची पैदा किया गया है।
Meâric 70:20
जब वह बीमारी या गरीबी जैसी किसी तकलीफ से पीड़ित होता है, तो अधीर हो जाता है।
Meâric 70:21
और जब उसे उर्वरता और मालदारी जैसी कोई खुशी देने वाली चीज़ मिलती है, तो वह उसे अल्लाह के मार्ग में खर्च करने से बहुत ज़्यादा रोकने वाला होता है।
Meâric 70:22
सिवाय उन बंदों के जो नमाज़ अदा करने वाले हैं। चुनाँचे वे इन निंदनीय विशेषताओं से सुरक्षित हैं।
Meâric 70:23
जो हमेशा अपनी नमाज़ की पाबंदी करते हैं। वे कभी उससे ग़ाफ़िल नहीं होते तथा सदा उसे उसके निर्दिष्ट समय पर अदा करते हैं।
Meâric 70:24
और जिन लोगों के धनों में एक अनिवार्य निर्धारित हिस्सा है।
Meâric 70:25
वे उसे उस व्यक्ति को देते हैं, जो उनसे माँगता है तथा उस व्यक्ति को देते हैं, जो उनसे नहीं माँगता है, जो किसी कारण से अपनी आजीविका से वंचित है।
Meâric 70:26
और जो क़ियामत के दिन को सत्य मानते हैं, जिस दिन अल्लाह हर एक को वह बदला देगा, जिसका वह हक़दार है।
Meâric 70:27
और जो अपने पालनहार की यातना से डरने वाले हैं, जबकि वे नेकी के काम किए हुए होते हैं।
Meâric 70:28
निश्चय उनके पालनहार की यातना डरने की चीज़ है, जिससे कोई समझदार व्यक्ति निश्चिंत नहीं हो सकता।
Meâric 70:29
और जो अपने गुप्तांगों की, उन्हें ढंक कर और उन्हें अनैतिक आचरण से दूर रखकर, रक्षा करते हैं।
Meâric 70:30
सिवाय अपनी पत्नियों और अपने स्वामित्व में आई हुई दासियों के। क्योंकि उनसे संभोग आदि से लाभ उठाने में उनपर कोई दोष नहीं है।
Meâric 70:31
फिर जो उपर्युक्त पत्नियों और दासियों के अलावा से आनंद तलाश करे, तो वही लोग अल्लाह की सीमाओं का उल्लंघन करने वाले हैं।
Meâric 70:32
और जो लोग अपने पास अमानत रखे हुए धनों और भेदों आदि की तथा लोगों से की हुई अपनी प्रतिज्ञाओं की रक्षा करने वाले हैं। न तो उनकी अमानतों में ख़यानत करते हैं और न उनकी प्रतिज्ञाओं को तोड़ते हैं।
Meâric 70:33
और जो लोग अपेक्षित तरीक़े से अपनी गवाही देते हैं। न तो रिश्तेदारी और न ही दुश्मनी उनकी गवाही को प्रभावित करती है।
Meâric 70:34
और जो अपनी नमाज़ की रक्षा करते हैं; पवित्रता और हृदय शांति के साथ तथा उसके समय पर उसकी अदायगी करके। कोई चीज़ उन्हें नमाज़ से ग़ाफ़िल नहीं होने देती।
Meâric 70:35
जो लोग इन गुणों से विशिष्ट हैं, वे जन्नतों में सम्मानित हों। क्योंकि उन्हें स्थायी नेमतों का आनंद और अल्लाह के चेहरे के दीदार का सौभाग्य प्राप्त होगा।
Meâric 70:36
(ऐ रसूल!) आपकी जाति के इन मुश्रिकों को किस चीज़ ने आकर्षित किया कि वे आपके चारों ओर आपको झुठलाने के लिए दौड़े चले आ रहे हैं?!
Meâric 70:37
वे आपको समूहों में आपके दाहिने और बाएँ तरफ से घेरे हुए हैं।
Meâric 70:38
क्या उनमें से हर आदमी यह आशा रखता है कि अल्लाह उसे नेमतों वाली जन्नत में दाख़िल करेगा, जिसमें वह उसकी सदाबहार नेमतों का आनंद लेगा, जबकि वह अपने कुफ़्र पर क़ायम है?!
Meâric 70:39
मामला वैसा नहीं है, जैसा कि उन्होंने कल्पना की है। निश्चय हमने उन्हें उस चीज़ से पैदा किया है, जिसे वे जानते हैं। हमने उन्हें एक तुच्छ पानी से पैदा किया है। अतः वे कमज़ोर हैं, अपने लिए लाभ या हानि के मालिक नहीं हैं। फिर उन्हें अभिमान कैसे शोभा देता है?!
Meâric 70:40
अल्लाह सर्वशक्तिमान ने स्वयं अपनी क़सम खाई है, और वह सूर्य, चंद्रमा और शेष सभी ग्रहों के उदय एवं यास्त के स्थानों का स्वामी है, कि निःसंदेह हम निश्चय सामर्थ्यवान् हैं।
Meâric 70:41
कि उन्हें नष्ट करके उनके बदले में ऐसे लोगों को ले आएँ, जो अल्लाह का आज्ञापालन करने वाले हों। हम ऐसा करने में असमर्थ नहीं हैं, तथा जब भी हम उन्हें नष्ट करना चाहें और उन्हें दूसरों के साथ बदलना चाहें, तो हम ऐसा करने में विवश नहीं हैं।
Meâric 70:42
अतः (ऐ रसूल) आप उन्हें छोड़ दें कि वे अपने झूठ और गुमराही में पड़े रहें तथा अपने सांसारिक जीवन में खेलते रहें, यहाँ तक कि वे क़ियामत के दिन से जा मिलें, जिसका उनसे क़ुरआन में वादा किया जाता था।
Meâric 70:43
जिस दिन वे क़ब्रों से तेज़ दौड़ते हुए लिकलेंगे, जैसे वे किसी निशान की ओर दौड़े जा रहे हैं।
Meâric 70:44
उनकी निगाहें झुकी होंगी, उनपर अपमान छाया होगा। यह वही दिन है, जिसका उनसे दुनिया में वादा किया जाता था और वे उसकी परवाह नहीं करते थे।
Nuh 71:1
हमने नूह (अलैहिस्सलाम) को उनकी जाति के पास लोगों को अल्लाह की ओर आमंत्रित करने के लिए भेजा, ताकि वह अपने समुदाय के लोगों को डराएँ, इससे पहले कि उनके अल्लाह के साथ शिर्क करने के कारण, उनपर दर्दनाक यातना आ जाए।
Nuh 71:2
नूह (अलैहिस्सलाम) ने अपनी जाति के लोगों से कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! मैं तुम्हें स्पष्ट रूप से उस यातना से डराने वाला हूँ, जो तुम्हारी प्रतीक्षा कर रही है यदि तुमने अल्लाह से तौबा न की।
Nuh 71:3
और मेरे तुम्हें डराने की अपेक्षा यह है कि मैं तुमसे कहता हूँ : तुम केवल अल्लाह की इबादत करो और उसके साथ किसी को साझी न बनाओ, तथा उसके आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर उससे डरो और मैं तुम्हें जो कुछ आदेश देता हूँ, उसमें मेरा आज्ञापालन करो।
Nuh 71:4
अगर तुम ऐसा करोगे, तो अल्लाह तुम्हारे उन गुनाहों को क्षमा कर देगा, जो बंदों के अधिकारों से संबंधित नहीं हैं। और तुम्हारे समुदाय की जीवन-अवधि एक निर्धारित समय तक बढ़ा देगा, जो अल्लाह के ज्ञान में है। जब तक तुम इसपर क़ायम रहोगे, धरती को आबाद रखोगे। निश्चय जब मौत आ जाती है, तो टाली नहीं जाती। अगर तुम इस तथ्य को जानते होते, तो अल्लाह पर ईमान लाने और अपने शिर्क और गुमराही से तौबा करने में अवश्य जल्दी करते।
Nuh 71:5
नूह (अलैहिस्सलाम) ने कहा : ऐ मेरे रब! मैं अपनी जाति के लोगों को तेरी इबादत और एकेश्वरवाद की ओर रात और दिन लगातार बुलाता रहा।
Nuh 71:6
परंतु मेरे बुलाने से उनके उस चीज़ से भागने और दूर होने ही में वृद्धि हुई, जिसकी ओर मैं उन्हें बुलाता हूँ।।
Nuh 71:7
और जब भी मैंने उन्हें उस चीज़ की ओर आमंत्रित किया, जिसमें उनके पापों की क्षमा का कारण है; जैसे कि केवल तेरी इबादत करना तथा तेरा आज्ञापालन और तेरे रसूल का आज्ञापालन करना - तो उन्होंने अपनी उँगलियों से अपने कान बंद कर लिए; ताकि उन्हें मेरी बात सुनने से रोक दें, और अपने चेहरे को अपने कपड़ों से ढँक लिए, ताकि वे मुझे न देखें, तथा अपने शिर्क पर जमे रहे, और जिसकी ओर मैं उन्हें आमंत्रित करता हूँ, उसे स्वीकार करने और उसका पालन करने से अभिमान दिखाया।
Nuh 71:8
फिर मैंने (ऐ मेरे रब) उन्हें खुले तौर पर आमंत्रित किया।
Nuh 71:9
फिर मैंने उन्हें ऊँची आवाज़ में बुलाया, और गुप्त रूप से भी समझाया तथा उन्हें धीमे स्वर में भी आमंत्रित किया; मैंने उन्हें बुलाने की विविध शैली अपनाई।
Nuh 71:10
तो मैंने उनसे कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! अपने पालनहार से उसके समक्ष तौबा करके क्षमा माँगो। निश्चय वह अपने तौबा करने वाले बंदों के गुनाहों को बहुत क्षमा करने वाला है।
Nuh 71:11
अगर तुमने ऐसा किया, तो जब भी तुम्हें आवश्यकता होगी, अल्लाह तुम पर लगातार बारिश बरसाएगा। इसलिए तुम सूखे से पीड़ित नहीं होगे।
Nuh 71:12
और तुम्हें अधिक संख्या में धन एवं संतान प्रदान करेगा, और फल खाने को बाग़ देगा, और तुम्हारे लिए नहरें बहा देगा, जिनका पानी तुम खुद पियोगे तथा अपने जानवरों और अपने खेतों को सैराब करोगे।
Nuh 71:13
(ऐ मेरी जाति के लोगो) तुम्हें क्या हो गया है कि जब तुम धड़ल्ले से अल्लाह की अवज्ञा करते हो, तो तुम्हें उसकी महानता से डर नहीं लगता?!
Nuh 71:14
जबकि उसन तुम्हें चरण के बाद चरण नुत्फ़ा (वीर्य की बूँद), फिर जमे हुए रक्त, फिर मांस के टुकड़े से पैदा किया है।
Nuh 71:15
क्या तुमने नहीं देखा कि अल्लाह ने किस प्रकार ऊपर-तले सात आसमान बनाए?!
Nuh 71:16
और उसने चाँद को उनमें से निचले आकाश में धरती वालों के लिए प्रकाश और सूरज को प्रकाश करने वाला बनाया।
Nuh 71:17
और अल्लाह ने तुम्हें धरती से पैदा किया, क्योंकि तुम्हारे पिता आदम (अलैहिस्सलाम) को मिट्टी से बनाया। फिर वह (धरती) तुम्हारे लिए जो कुछ उगाती है, उससे तुम भोजन प्राप्त करते हो।
Nuh 71:18
फिर वह तुम्हें तुम्हारी मृत्यु के बाद उसी में वापस ले जाएगा, फिर वह तुम्हें पुनर्जीवित करके उठाने के लिए उससे बाहर निकालेगा।
Nuh 71:19
और अल्लाह ने तुम्हारे लिए धरती को समतल बनाया, जो निवास के लिए तैयार है।
Nuh 71:20
इस आशा में कि तुम हलाल कमाई की खोज में उसके विस्तृत रास्तों पर चलो।
Nuh 71:21
नूह (अलैहिस्सलाम) ने कहा : ऐ मेरे रब! मेरी जाति के लोगों ने उस चीज़ में मेरी अवज्ञा की, जो मैंने उन्हें तेरे एकेश्वरवाद (तौहीद) और अकेले तेरी इबादत करने का आदेश दिया। और उनमें से निचले स्तर के लोगों ने अपने सरदारों का अनुसरण किया, जिन्हें तू ने धन और संतान की नेमत प्रदान की है। परन्तु तू ने उन्हें जो कुछ प्रदान किया, उसने उन्हें गुमराही के अलावा किसी चीज़ में नहीं बढ़ाया।
Nuh 71:22
और उनके प्रमुख लोगों ने उनके निचले स्तर के लोगों को नूह़ अलैहिस्सलाम के विरुद्ध भड़काकर बहुत बड़ी चाल चली।
Nuh 71:23
और उन्होंने अपने अनुयायियों से कहा : अपने देवताओं की पूजा का त्याग मत करो। तथा अपनी मूर्तियों; वद्द, सुवाअ, यग़ूस, यऊक़ और नस्र की पूजा को मत छोड़ो।
Nuh 71:24
और उन्होंने अपनी इन मूर्तियों के द्वारा बहुत-से लोगों को गुमराह किया है। तथा (ऐ मेरे रब!) कुफ़्र और पापों पर अटल रहकर अपने ऊपर अत्याचार करने वालों की सत्य से पथभ्रष्टता ही में वृद्धि कर।
Nuh 71:25
अपने पापों के कारण जो उन्होंने किए थे, वे इस दुनिया में बाढ़ में डुबो दिए गए और अपनी मृत्यु के तुरंत बाद आग में डाल दिए गए। तो (उस समय) उन्हें डूबने और आग से बचाने के लिए, अल्लाह के सिवा कोई मदद करने वाले नहीं मिले।
Nuh 71:26
जब अल्लाह ने नूह अलैहिस्सलाम को बताया कि उनकी जाति के जो लोग ईमान ला चुके हैं, उनके सिवा अब कोई ईमान नहीं लाएगा, तो उन्होंने कहा : ऐ मेरे रब! धरती पर काफ़िरों में से किसी चलने-फिरने वाले को न छोड़।
Nuh 71:27
निश्चय (ऐ हमारे पालनहार) अगर तू उन्हें छोड़ देगा और मोहलत देगा, तो वे तेरे मोमिन बंदों को गुमराह करेंगे, और वे केवल ऐसे दुराचारी को जन्म देंगे, जो तेरी बात नहीं मानेगा, और सख़्त काफ़िर को (जन्म देंगे), जो तेरी नेमतों पर तेरा आभारी नहीं होगा।
Nuh 71:28
ऐ मेरे पालनहार! मेरे पापों को क्षमा कर दे, और मेरे माता-पिता को क्षमा कर दे, और मेरे घर में मोमिन बन कर दाख़िल होने वाले को क्षमा कर दे, और ईमान वाले पुरुषों और ईमान वाली स्त्रियों को भी क्षमा कर दे। तथा कुफ़्र और पापों के द्वारा अपने ऊपर अत्याचार करने वालों को विनाश और हानि ही में बढ़ा।
Cinn 72:1
(ऐ रसूल) आप अपनी उम्मत से कह दें : अल्लाह ने मेरी तरफ़ यह वह़्य (प्रकाशना) की है कि जिन्नों के एक समूह ने 'नख़ला' नामी स्थान में, मेरे क़ुरआन के पाठ को सुना। उसके बाद जब वे अपनी जाति की ओर लौटकर गए, तो उनसे कहा : निःसंदेह हमने एक सुपाठ्य वाणी सुनी है, जो अपने बयान और वाक्पटुता में बड़ा मनभावन व सराहनीय है।
Cinn 72:2
यह वाणी जो हमने सुनी है, आस्था (अक़ीदा), कथन और कर्म में शुद्धता (सत्य) को दिखाती है। अतः हम उसपर ईमान ले आए। तथा हम अपने उस पालनहार के साथ, जिसने यह वाणी उतारी है, कदापि किसी को साझा नहीं करेंगे।
Cinn 72:3
और हम इस बात पर भी ईमान लाए हैं कि हमारे पालनहार ने (उसकी महिमा एवं प्रताप बहुत उच्च है) न कोई पत्नी बनाई है और न कोई संतान, जैसा कि बहुदेववादियों का कहना है।
Cinn 72:4
और यह कि इबलीस अल्लाह के संबंध में सत्य से हटी हुई बात कहा करता था कि उसकी पत्नी और संतान है।
Cinn 72:5
और यह कि हम समझते थे कि ये शिर्क करने वाले जिन्न और इनसान झूठ नहीं बोल रहे हैं, जब वे यह दावा कर रहे थे कि अल्लाह की पत्नी और संतान है। इसलिए अनका अनुकरण करते हुए हमने उनकी बात को सत्य मान लिया।
Cinn 72:6
जाहिलीयत के ज़माने में इनसानों में से कुछ लोग, जब किसी भयानक स्थान पर उतरते, तो जिन्नों में से कुछ लोगों की शरण लिया करते थे, चुनाँचे उनमें से एक कहता था : मैं इस वादी के प्रमुख जिन्न की शरण में आता हूँ, उसकी जाति के नासमझ जिन्नों की बुराई से।इस तरह इनसानों का जिन्नों से भय और डर बढ़ा गया।
Cinn 72:7
और यह कि इनसानों ने भी तुम्हारी तरह यही सोचा था कि अल्लाह किसी को उसकी मृत्यु के बाद हिसाब और प्रतिफल के लिए कभी पुनर्जीवित नहीं करेगा।
Cinn 72:8
और यह कि हमने आकाश की सूचना प्राप्त करने का प्रयास किया, तो पाया कि आकाश में फ़रिश्तों का बड़ा सख़्त पहरा बिठा दिया गया है, जो इस बात की पहरेदारी कर रहे हैं कि कोई चोरी-छिपे कुछ सुन न सके, जो हम किया करते थे। तथा उसे उल्काओं (अंगारों) से भर दिया गया है, जिनसे आकाश के निकट जाने वाले को मार भगाया जाता है।
Cinn 72:9
हम पहले आकाश में कुछ स्थानों पर बैठा करते थे, जहाँ से हम फ़रिश्तों के बीच आदान-प्रदान होने वाली बातों को सुनते थे, फिर उन्हें धरती में मौजूद काहिनों को बता दिया करते थे। लेकिन (अब) मामला बदल गया है। अब, हम में से जो सुनने का प्रयास करता है, वह अपने लिए एक जलती हुई आग को तैयार पाता है। जब वह निकट जाता है, तो वह उसपर छोड़ दी जाती है, जो उसे जला देती है।
Cinn 72:10
हम नहीं जानते कि इस सख़्त पहरेदारी का कारण क्या है; क्या धरती के लोगों के लिए बुराई का इरादा किया गया है, या अल्लाह ने उनके लिए किसी भलाई का इरादा किया है।क्योंकि हमें आकाश की सूचना प्राप्त नहीं हो रही है।
Cinn 72:11
हम जिन्नों के बीच कुछ लोग अल्लाह से डरने वाले, सदाचारी हैं, तथा हमारे बीच कुछ लोग ऐसे हैं, जो काफ़िर और अवज्ञाकारी हैं। हम अलग-अलग वर्गों और विभिन्न विचारों वाले हैं।
Cinn 72:12
हमें विश्वास हो गया है कि अगर अल्लाह हमसे कुछ चाहता है, तो हम उसके क़ाबू से बाहर नहीं जा सकते और न ही हम उससे भागकर निकल सकते हैं, क्योंकि उसने हमें घेर रखा है।
Cinn 72:13
जब हमने वह क़ुरआन सुना, जो सबसे सही रास्ते का मार्गदर्शन करता है, तो हम उसपर ईमान ले आए। अतः जो कोई अपने पालनहार पर ईमान लाएगा, उसे न अपनी नेकियों में कमी किए जाने का भय होगा और न उसके पिछले पापों में वृद्धि का।
Cinn 72:14
और यह कि हममें से कुछ लोग अल्लाह की आज्ञा का पालन करने वाले मुसलमान हैं, तथा हममें से कुछ लोग सत्य और धार्मिकता के मार्ग से हटे हुए हैं। अतः जो आज्ञापालन और अच्छे कार्य के साथ अल्लाह का आज्ञाकारी हो गया, तो वही लोग हैं, जिन्होंने हिदायत और सत्य का मार्ग अपनाया।
Cinn 72:15
और जहाँ तक उन लोगों की बात है, जो सत्य और धार्मिकता के मार्ग से हटे हुए हैं, तो वे लोग जहन्नम का ईंधन होंगे, जिसके द्वारा उनके जैसे इनसानों के साथ जहन्नम को भड़काया जाएगा।
Cinn 72:16
जिस तरह उनकी ओर यह वह़्य की गई है कि जिन्नों के एक गिरोह ने क़ुरआन सुना, उसी तरह यह भी वह़्य की गई है कि अगर जिन्न एवं इनसान इस्लाम के रास्ते पर क़ायम रहते और उसके अनुसार कार्य करते, तो अल्लाह उन्हें भरपूर जल से सैराब करता और उन्हें विभिन्न नेमतें प्रदान करता।
Cinn 72:17
ताकि हम उसमें उनका परीक्षण करें कि वे अल्लाह की नेमत का शुक्रिया अदा करते हैं या उसकी नाशुक्री करते हैं? और जो क़ुरआन से तथा उसमें मौजूद उपदेशों से मुँह फेरेगा, उसका पालनहार उसे बड़ी कठोर यातना में दाख़िल करेगा, जिसे वह सहन नहीं कर सकेगा।
Cinn 72:18
और यह कि मस्जिदें केवल पवित्र अल्लाह के लिए हैं, किसी और की नहीं। अतः उनके अंदर अल्लाह के साथ किसी और को न पुकारो। अन्यथा तुम यहूदियों और ईसाइयों के समान हो जाओगे उनके चर्चों और मंदिरों में।
Cinn 72:19
जब अल्लाह के बंदे मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम 'नख़ला' नामी स्थान में अपने पालनहार की इबादत करने के लिए खड़े हुए, तो जिन्न आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के क़ुरआन के पाठ को सुनने के लिए इस तरह भीड़ लगाए हुए थे, जैसे एक-दूसरे पर चढ़े जा रहे हैं।
Cinn 72:20
(ऐ रसूल) आप इन मुश्रिकों से कह दें : मैं केवल अपने पालनहार ही को पुकारता हूँ और इबादत में उसके साथ उसके अलावा किसी को साझी नहीं बनाता, चाहे जो भी हो।
Cinn 72:21
आप उनसे कह दें : मैं तुम्हारे लिए किसी ऐसे नुक़सान को टालने का अधिकार नहीं रखता, जिसे अल्लाह ने तुम्हारे लिए नियत कर दिया हो, और न ही मैं तुम्हें कोई ऐसा लाभ पहुँचा सकता, जिसे अल्लाह ने तुमसे रोक दिया हो।
Cinn 72:22
आप उनसे कह दें : अगर मैं अल्लाह की अवज्ञा करूँ, तो उसकी पकड़ से मुझे कोई नहीं बचा सकेगा और न मुझे उसके अलावा कोई शरण लेने का स्थान मिल सकेगा।
Cinn 72:23
लेकिन जो कुछ मेरे अधिकार में है, वह यह है कि अल्लाह ने मुझे जो कुछ तुम्हें पहुँचाने का आदेश दिया है, वह तुम्हें पहुँचा दूँ, और उसका संदेश जिसके साथ उसने मुझे तुम्हारे पास भेजा है। और जो अल्लाह तथा उसके रसूल की अवज्ञा करेगा, उसका अंजाम जहन्नम में प्रवेश है, जहाँ वह हमेशा रहेगा, उससे वह कभी भी नहीं निकलेगा।
Cinn 72:24
काफ़िर लोग अपने कुफ़्र के मार्ग ही पर चलते रहेंगे, यहाँ तक कि जब क़ियामत के दिन अपनी आँखों से उस यातना को देख लेंगे, जिसका उनसे दुनिया में वादा किया जाता था, तो उस समय वे जान लेंगे कि सबसे कमज़ोर समर्थक वाला कौन है, और उन्हें पता चल जाएगा कि सबसे कम सहायक वाला कौन है।
Cinn 72:25
(ऐ रसूल) इन दोबारा जीवित होकर उठने का इनकार करने वाले मुश्रिकों से कह दें : मैं नहीं जानता कि वह यातना जिसका तुमसे वादा किया जा रहा है, निकट है या उसकी कोई अवधि निर्धारित है, जिसे अल्लाह के सिवा कोई नहीं जानता।
Cinn 72:26
वही पवित्र अल्लाह ग़ैब (परोक्ष) की सभी बातों को जानने वाला है। उससे ग़ैब की कोई बात छिपा नहीं है। चुनाँचे वह अपनी ग़ैब की बातों से किसी को सूचित नहीं करता। बल्कि वह उसके ज्ञान तक सीमित रहता है।
Cinn 72:27
सिवाय उस रसूल के, जिसे अल्लाह सर्वशक्तिमान पसंद कर ले। तो वह उसे जिस चीज़ से चाहता है, सूचित कर देता है, तथा वह उस रसूल के आगे और उसके पीछे फ़रिश्तों का पहरा लगा देता है, जो उसकी रक्षा करते हैं, ताकि उस रसूल के अलावा कोई और उससे अवगत न हो सके।
Cinn 72:28
आशा है कि रसूल जान ले कि उसके पहले के रसूलों ने अपने पालनहार के संदेशों को पहुँचा दिया था, जिनके पहुँचाने का अल्लाह ने उन्हें आदेश दिया था क्योंकि अल्लाह ने उन्हें (भी) अपने देखभाल से घेर रखा था। तथा अल्लाह ने, जो कुछ फ़रिश्तों और रसूलों के पास है, अपने ज्ञान से घेर रखा है। इसलिए उसमें से कुछ भी उससे छिपा नहीं है। और उसने हर चीज़ की संख्या गिन रखी है। अतः उससे कोई चीज़ छिपी नहीं है।