Lafzullah

Hindi Mokhtasar — Nisa' 4:1 – Enam 6:165

Author / source: Hindi Mokhtasar

Contents
  1. Nisa' 4:1
  2. Nisa' 4:2
  3. Nisa' 4:3
  4. Nisa' 4:4
  5. Nisa' 4:5
  6. Nisa' 4:6
  7. Nisa' 4:7
  8. Nisa' 4:8
  9. Nisa' 4:9
  10. Nisa' 4:10
  11. Nisa' 4:11
  12. Nisa' 4:12
  13. Nisa' 4:13
  14. Nisa' 4:14
  15. Nisa' 4:15
  16. Nisa' 4:16
  17. Nisa' 4:17
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  20. Nisa' 4:20
  21. Nisa' 4:21
  22. Nisa' 4:22
  23. Nisa' 4:23
  24. Nisa' 4:24
  25. Nisa' 4:25
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  29. Nisa' 4:29
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  32. Nisa' 4:32
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  40. Nisa' 4:40
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  457. Enam 6:161
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  459. Enam 6:163
  460. Enam 6:164
  461. Enam 6:165

Nisa' 4:1

ऐ लोगो! अपने पालनहार से डरो। क्योंकि वही है जिसने तुम्हें एक जान से पैदा किया जो तुम्हारे पिता आदम हैं। और आदम से उनकी पत्नी तुम्हारी माँ हव्वा को पैदा किया। और उन दोनों से पृथ्वी के कोनों में बहुत-से पुरुषों और महिलाओं को फैला दिए। और उस अल्लाह से डरो जिसके नाम पर तुम एक-दूसरे से यह कहते हुए माँगते हो : मैं अल्लाह के नाम पर तुझसे ऐसा करने के लिए कहता हूँ। तथा रिश्ते-नाते को तोड़ने से बचो, जो तुम्हें आपस में जोड़ता है। निःसंदेह अल्लाह तुम्हारा निरीक्षण कर रहा है। अतः तुम्हारा कोई काम उससे ओझल नहीं होता, बल्कि वह उन्हें गिनकर रखता है और तुम्हें उनका बदला देगा।

Nisa' 4:2

तथा (ऐ अभिभावकों) तुम अनाथों (जिनके पिता उनके बालिग होने से पहले मर गए) को उनका धन उस समय पूरा का पूरा दे दो, जब वे बालिग़ और समझदार हो जाएँ। और तुम हलाल के बदले हराम माल मत लो; इस प्रकार कि तुम अनाथों के अच्छे-अच्छे धन स्वयं ले लो और उसके बदले अपने घटिया और ख़राब धन उन्हें दे दो। और अनाथों का धन अपने धन के साथ मिलाकर हड़प न लो। ऐसा करना अल्लाह के निकट बहुत बड़ा पाप है।

Nisa' 4:3

यदि तुम्हें डर हो कि अपने अधीन रहने वाली अनाथ लड़कियों से विवाह करके तुम न्याय नहीं कर पाओगे; या तो इस डर से कि तुम उनके आवश्यक मह्र को कम कर दोगे, या उनके साथ दुर्व्यवहार करोगे, तो ऐसी स्थिति में तुम उन्हें छोड़कर उनके अलावा दूसरी अच्छी महिलाओं से विवाह कर लो। यदि तुम चाहो तो दो, या तीन, या चार से विवाह कर सकते हो। परन्तु यदि तुम्हें डर हो कि तुम उनके बीच न्याय नहीं कर सकोगे, तो एक ही तक सीमित रहो, या फिर उन दासियों से लाभान्वित हो जिनके तुम मालिक हो; क्योंकि उनके लिए उस तरह के अधिकार अनिवार्य नहीं हैं जो पत्नियों के लिए आवश्यक हैं। आयत में अनाथ लड़कियों के संबंध में, तथा एक ही महिला से विवाह करने अथवा दासियों से लाभ उठाने के संबंध में जो कुछ वर्णित है, वह इस बात के अधिक निकट है कि तुम अत्याचार न करो और किसी एक की तरफ झुकाव न रखो।

Nisa' 4:4

स्त्रियों को उनके मह्र एक अनिवार्य उपहार के तौर पर अदा करो। यदि वे बिना किसी मजबूरी के अपनी इच्छा से तुम्हारे लिए मह्र में से कुछ छोड़ दें, तो उसे हलाल व पाक समझकर (रूचिकर) खाओ।

Nisa' 4:5

और (ऐ अभिभावको!) उन लोगों को धन न दो, जो अच्छी तरह से उसका प्रबंधन नहीं कर सकते हैं। क्योंकि अल्लाह ने इस धन को बंदो के हितों की रक्षा और उनकी आजीविका का साधन बनाया है और ये लोग धन का प्रभार लेने और उसे संरक्षित करने के योग्य नहीं हैं। उस धन से उन पर खर्च करो और उन्हें कपड़े पहनाओ, तथा उनसे अच्छी बात कहो और उनसे अच्छा वादा करो कि उनके परिपक्व हो जाने और धन प्रबंधन में कुशल हो जाने पर तुम उन्हें उनका धन दे दोगे।

Nisa' 4:6

(ऐ अभिभावको) जब अनाथ बच्चे वयस्कता की आयु को पहुँच जाएँ, तो उनकी इस प्रकार जाँच करो कि उन्हें उनके माल का कुछ हिस्सा दे दो कि वे उसे अपनी मर्ज़ी से काम में लाएं। यदि वे उसका सदुपयोग करें और तुम्हारे लिए उनकी समझदारी (योग्यता) स्पष्ट हो जाए, तो तुम उनका पूरा धन बिना किसी कमी के उनके हवाले कर दो। तथा उनके धन को उस सीमा से बढ़कर न खाओ जो अल्लाह ने तुम्हारे लिए ज़रूरत के समय उनके धन से वैध ठहराया है, और उसे इस डर से जल्दी-जल्दी न खाओ कि वे बालिग होने के बाद उसे ले लेंगे। और तुममें से जिसके पास इतना धन हो कि वह उसे बेनियाज़ कर दे, तो उसे अनाथ का धन लेने से बचना चाहिए। और तुममें से जो गरीब हो उसके पास कोई धन न हो, तो वह अपनी आवश्यकता के अनुसार खा सकता है। और जब तुम उनके वयस्क और परिपक्व होने के बाद उनका धन उनके हवाले करो, तो अधिकारों को संरक्षित करने और विवाद के कारणों को रोकने के लिए उस सुपुर्दगी पर गवाह बना लो। और अल्लाह उसपर साक्षी और अपने बंदों के कार्यों का हिसाब लेने के लिए काफी है।

Nisa' 4:7

पुरुषों का उस माल में हिस्सा है, जिसे माता-पिता और रिश्तेदारों जैसे भाइयों और चाचाओं ने मरने के बाद छोड़ा है, यह धन कम हो या अधिक। इसी प्रकार इन लोगों के छोड़े हुए धन में स्त्रियों का भी हिस्सा है। यह अज्ञानता के समय की उस रीति के विपरीत है जिसमें महिलाओं और बच्चों को विरासत से वंचित रखा जाता था। यह हिस्सा एक ऐसा अधिकार है जिसकी राशि सर्वशक्तिमान अल्लाह की ओर से निश्चित व निर्धारित है।

Nisa' 4:8

जब पैतृक संपत्ति के बंटवारे के समय गैर-वारिस रिश्तेदार, अनाथ और निर्धन उपस्थित हों; तो इस धन में से उसके बंटवारे से पहले - ऐच्छिक रूप से - जितनी तुम्हारी इच्छा हो उन्हें भी दो। क्योंकि वे उसकी आस लगाते हैं, और यह धन तुम्हारे पास बिना किसी कष्ट के आया है। तथा उनसे अच्छी बात कहो जिसमें कोई अभद्रता न हो।

Nisa' 4:9

और उन लोगों को डरना चाहिए जो अगर मर जाते और अपने पीछे कमज़ोर छोटे बच्चे छोड़ जाते, तो उन्हें उनके नष्ट होने का कैसा डर होता। अतः उन्हें अल्लाह से डरते हुए उन अनाथों पर अत्याचार नहीं करना चाहिए जो उनके संरक्षण में हैं। ताकि अल्लाह उनकी मौत के पश्चात उनके लिए ऐसे लोगों का प्रबंध करे, जो उनकी औलाद के साथ अच्छा व्यवहार करें, जैसा कि उन्होंने उन अनाथों के साथ सद्व्यवहार किया था। तथा उन्हें उस व्यक्ति की औलाद के हक़ में अच्छा व्यवहार करना चाहिए जिसकी वसीयत के समय वे उपस्थित होते हैं, इस प्रकार कि उनसे सही व सच्ची बात कहें कि वह अपनी वसीयत में अपने वारिसों के हक़ पर अत्याचार न करे, तथा वसीयत को छोड़कर खुद को भलाई से वंचित न करे।

Nisa' 4:10

जो लोग अनाथों का धन ले लेते हैं और उसमें अन्यायपूर्ण और आक्रामक तरीक़े से अपना अधिकार चलाते हैं, वे वास्तव में अपने पेट में दहकती हुई आग डाल रहे हैं। और यह आग उन्हें क़यामत (पुनरुत्थान) के दिन जलाएगी।

Nisa' 4:11

अल्लाह तुम्हें तुम्हारी संतान की पैतृक संपत्ति के संबंध में आदेश देता है कि पैतृक संपत्ति का बंटवरा उनके बीच इस तरह होगा कि एक बेटे को दो बेटियों के समान हिस्सा मिलेगा। यदि मृतक ने केवल बेटियाँ छोड़ी हों, कोई बेटा न हो, तो दो या उनसे अधिक बेटियों को विरासत का दो तिहाई हिस्सा मिलेगा। और यदि उसकी केवल एक ही बेटी हो, तो उसे विरासत का आधा हिस्सा मिलेगा। तथा मृतक के माता-पिता में से प्रत्येक को छोड़े हुए धन का छठवाँ हिस्सा मिलेगा, यदि उसकी कोई संतान हो, चाहे वह नर हो या नारी। और यदि उसकी कोई औलाद न हो और उसके माता-पिता के अतिरिक्त उसका कोई वारिस न हो, तो ऐसी स्थिति में उसकी माँ को एक तिहाई हिस्सा मिलेगा और विरासत का शेष भाग बाप का होगा। और यदि मृतक के दो या दो से अधिक भाई-बहन हों, सगे हों या सौतेले, तो फर्ज़ के रूप में माँ को छठवाँ हिस्सा मिलेगा, और बाकी असबह होने के कारण बाप के लिए होगा और भाइयों (और बहनों) को कुछ नहीं मिलेगा। विरासत का यह बंटवारा उस वसीयत के कार्यान्वयन के बाद होगा जो मृतक ने की थी, बशर्ते कि उसकी वसीयत की राशि उसके एक तिहाई धन से अधिक न हो, तथा इस शर्त के साथ कि उसपर अनिवार्य कर्ज़ का भुगतान कर दिया जाए। अल्लाह ने विरासत का बंटवारा इस प्रकार निर्धारित किया है; क्योंकि तुम नहीं जानते कि तुम्हारे बाप और बेटों में से इस दुनिया और आखिरत में तुम्हारे लिए कौन सबसे अधिक लाभदायक है। क्योंकि ऐसा हो सकता है कि मृतक अपने किसी वारिस के बारे में अच्छा गुमान रखे और उसे अपना पूरा धन दे दे, या वह उसके बारे में बुरा गुमान रखे और उसे विरासत से वंचित कर दे, जबकि हो सकता है कि मामला उसके विपरीत हो। हालांकि जो यह सब कुछ जानता है वह अल्लाह है, जिससे कोई वस्तु छिप नहीं सकती। इसीलिए उसने विरासत का बंटवारा उक्त तरीक़े पर किया है और उसे अपने बंदों पर अनिवार्य कर्तव्य ठहराया है। नि:संदेह अल्लाह जानने वाला है, जिसपर उसके बंदों के हितों में से कोई भी चीज़ गुप्त नहीं है, तथा वह अपने विधान और प्रबंधन में हिकमत वाला है।

Nisa' 4:12

तुम्हें (ऐ पतियो!) तुम्हारी पत्नियों के छोड़े हुए धन का आधा हिस्सा मिलेगा; यदि उनकी कोई संतान (चाहे नर हो या नारी) तुमसे या किसी अन्य व्यक्ति से न हो। यदि उनकी कोई संतान है (चाहे नर हो या नारी), तो तुम्हें उनके छोड़े हुए धन का चौथा हिस्सा मिलेगा। तुम्हारे लिए इसका वितरण उनकी वसीयत लागू करने तथा उनके ज़िम्मे अनिवार्य क़र्ज़ को चुकाने के बाद किया जाएगा। और (ऐ पतियो!) तुम्हारी स्त्रियों को तुम्हारे छोड़े हुए धन का चौथा हिस्सा मिलेगा, यदि तुम्हारी कोई संतान (चाहे नर हो या नारी) उनसे या उनके अलावा किसी अन्य (पत्नी) से न हो। यदि तुम्हारी कोई संतान है (चाहे नर हो या नारी), तो ऐसी स्थिति में उन्हें तुम्हारे छोड़े हुए धन का आठवाँ हिस्सा मिलेगा। उनके लिए इसका वितरण तुम्हारी वसीयत को लागू करने और तुम्हारे ज़िम्मे अनिवार्य क़र्ज़ का भुगतान करने के बाद किया जाएगा। यदि कोई ऐसा आदमी मर जाए जिसका न बाप हो और न संतान, या ऐसी स्त्री का निधन हो जाए जिसका न बाप हो और न संतान, और उन दोनों में से मृतक का अख़्याफ़ी भाई या अख़्याफ़ी बहन हो (अर्थात वह भाई बहन, जिनके बाप अलग-अलग और माँ एक हो); तो उस अख़्याफ़ी भाई या अख़्याफ़ी बहन में से प्रत्येक को फ़र्ज़ के रूप में छठवाँ हिस्सा मिलेगा। और यदि अख़्याफ़ी भाई या अख़्याफ़ी बहन एक से अधिक हों, तो उन सभी के लिए फ़र्ज़ के रूप में एक तिहाई हिस्सा है जिसमें वे सब साझीदार होंगे। इस मामले में महिला एवं पुरुष सब समान होंगे। वे लोग अपने इस हिस्से को मृतक की वसीयत लागू करने और उसके ज़िम्मे अनिवार्य क़र्ज़ को चुकाने के बाद ही प्राप्त करेंगे, बशर्ते कि उसकी वसीयत से वारिसों को कोई नुकसान न पहुँचता हो; जैसे कि वह उसके धन के एक तिहाई से अधिक की वसीयत हो। यह प्रावधान जिस पर यह आयत आधारित है वह तुम्हारे लिए अल्लाह की ओर से एक वचन है जिसे उसने तुमपर अनिवार्य किया है। और अल्लाह खूब जानता है कि दुनिया एवं आख़िरत में बंदों की भलाई व अच्छाई किस चीज़ में है। वह सहनशील है, अवज्ञाकारी को सज़ा देने में जल्दी नहीं करता।

Nisa' 4:13

ये अनाथों और उनके अलावा अन्य लोगों के संबंध में उल्लिखित प्रावधान, अल्लाह के कानून हैं जो उसने अपने बंदों के लिए निर्धारित किए हैं, ताकि वे उनपर अमल करें। और जो भी अल्लाह और उसके रसूल का आज्ञापालन करेगा, उसके आदेशों का पालन करके और उसकी मना की हुई बातों से बचकर; अल्लाह उसे ऐसे बाग़ों में दाख़िल करेगा, जिनके महलों के नीचे नहरें बह रही होंगी। वे उसी में रहेंगे, उन्हें मौत नहीं आएगी। यह ईश्वरीय बदला ही वह महान सफलता है, जिसकी तुलना किसी भी सफलता से नहीं की जा सकती।

Nisa' 4:14

और जो अल्लाह और उसके रसूल की अवज्ञा करेगा उसके आदेशों को निरस्त करके और उनपर अमल करना त्याग करके, या उनके सत्य होने में संदेह करके, और जो उसके बनाए हुए कानून की सीमाओं का उल्लंघन करेगा, अल्लाह उसे जहन्नम की आग में दाखिल करेगा जिसमें वह हमेशा रहेगा और उसमें उसके लिए अपमानजनक यातना होगी।

Nisa' 4:15

और तुम्हारी महिलाएँ में से जो व्यभिचार कर बैठें, चाहे वे विवाहिता हों अथवा अविवाहित, उनके विरुद्ध चार विश्वसनीय मुसलमानों को गवाह लाओ। यदि वे उनके विरुद्ध व्यभिचार की गवाही दे दें, तो उन्हें सज़ा के तौर पर घरों में बंद रखो, यहाँ तक कि मौत से उनके जीवन का अंत हो जाए अथवा अल्लाह उनके लिए क़ैद के अतिरिक्त कोई दूसरा रास्ता निकाल दे। फिर अल्लाह ने इसके बाद उनके लिए रास्ता निकाल दिया। चुनांचे अविवाहित व्यभिचारिणी को सौ कोड़े मारने और एक साल के लिए देशनिकाला देने, जबकि विवाहिता को पत्थर मार-मार कर हलाक करने की सज़ा निर्धारित की गई।

Nisa' 4:16

तथा पुरुषों में से जो दो व्यक्ति व्यभिचार का पाप कर बैठें - चाहे वे विवाहित हों या अविवाहित - तो उन्हें ज़बान और हाथ से ऐसी सज़ा दो जिससे उन्हें अपमान और फटकार प्राप्त हो। फिर यदि वे दोनों उस चीज़ को छोड़ दें जो कुछ उन्होंने किया था और उनके कार्य सुधर जाएँ; तो उन्हें कष्ट पहुँचाने से उपेक्षा करो। क्योंकि पाप से तौबा करने वाला निर्दोष व्यक्ति के समान हो जाता है। निःसंदेह अल्लाह अपने तौबा करने वाले बंदों की तौबा कबूल करने वाला और उनपर दया करने वाला है। ज्ञात होना चाहिए कि इस तरह की सज़ा का प्रावधान शुरू-शुरू इस्लाम में था, लेकिन बाद में इसे निरस्त करके अविवाहित को सौ कोड़े मारने और एक साल के लिए देशनिकाला देने, तथा विवाहित को पत्थरों से मार-मार कर मार डालने का आदेश दिया गया।

Nisa' 4:17

अल्लाह केवल उन लोगों की तौबा कबूल करता है, जो पाप और अवज्ञा को उसके परिणाम और दुर्भाग्य से अनभिज्ञ होने के कारण करते हैं, (और हर गुनाह करने वाले का यही मामला होता है, चाहे वह जानबूझकर करे या अनजाने में) फिर वे मृत्यु को देखने से पहले पश्चाताप करते हुए अपने पालनहार की ओर लौट आते हैं, तो अल्लाह ऐसे ही लोगों की तौबा स्वीकार करता है और उनके पापों को क्षमा कर देता है। अल्लाह अपनी मख़लूक की स्थितियों से अवगत, अपने फ़ैसले और विधान में हिकमत वाला है।

Nisa' 4:18

अल्लाह उन लोगों की तौबा कबूल नहीं करता जो अवज्ञा के कामों पर अडिग रहते हैं, और उनसे तौबा नहीं करते हैं यहाँ तक कि वे मृत्यु की व्यथा का अवलोकन कर लेते हैं। तो उस समय उनमें से एक कहता है : मैंने जो कुछ पाप किया है, अब मैं उससे तौबा करता हूँ। इसी तरह अल्लाह उन लोगों की तौबा - भी - कबूल नहीं करता, जो कुफ़्र पर अडिग रहते हुए मर जाते हैं। ये गुनाहों पर अडिग रहने वाले अवज्ञाकारी, तथा वे लोग जो अपने कुफ़्र (अविश्वास) पर स्थिर रहते हुए मर जाते हैं; हमने उनके लिए दर्दनाक सज़ा तैयार कर रखी है।

Nisa' 4:19

ऐ अल्लाह पर ईमान रखने और उसके रसूल का अनुसरण करने वालो! तुम्हारे लिए वैध नहीं है कि अपने पिता और रिश्तेदारों की पत्नियों के वारिस बन जाओ जिस तरह कि धन का वारिस होते हैं और उनके बारे में यह रवैया अपनाओ कि उनसे खुद विवाह कर लो, या उनका विवाह उनसे कर दो जिन्हें तुम चाहते हो, या उन्हें विवाह करने से (ही) रोक दो। तुम्हारे लिए यह भी जायज़ नहीं है कि अपनी उन पत्नियों को जिन्हें तुम नापसंद करते हो नुकसान पहुँचाने के लिए रोके रखो, ताकि वे तुम्हारी दी हुई महर आदि का कुछ हिस्सा तुम्हारे लिए परित्याग कर दें। सिवाय इसके कि वे कोई स्पष्ट (घोर) अश्लील काम जैसे व्यभिचार आदि कर बैठें। यदि वे ऐसा करती हैं तो तुम्हारे लिए उन्हें रोकना और उन्हें तंग करना जायज़ है यहाँ तक कि वे तुम्हारी दी हुई चीज़ें वापस करके तुमसे आज़ाद हो जाएँ। तथा तुम अपनी स्त्रियों के साथ अच्छी संगति रखो, उनसे कष्ट को दूर करके और अच्छा व्यवहार करके। यदि तुम उन्हें किसी सांसारिक मामले की वजह से नापसंद करो तो उनपर धैर्य से काम लो; क्योंकि संभव है कि अल्लाह उस चीज़ में जो तुम नापसंद करते हो, दुनिया एवं आख़िरत की बहुत-सी भलाइयाँ रख दे।

Nisa' 4:20

और (ऐ पतियो!) यदि तुम किसी पत्नी को तलाक़ देना चाहो और उसकी जगह पर दूसरी पत्नी लाना चाहो, तो इसमें तुम्हारे लिए कोई बुराई नहीं है। और यदि तुमने उस पत्नी को, जिसे तुमने तलाक़ देने का इरादा किया है, महर के तौर पर बहुत सारा धन दिया था; तो तुम्हारे लिए उसमें से कुछ भी लेना जायज़ नहीं है। क्योंकि तुमने उन्हें जो कुछ दिया है उसे लेना खुला मिथ्यारोप और स्पष्ट पाप समझा जाएगा।

Nisa' 4:21

भला तुम उन्हें दिया हुआ महर कैसे वापस लोगे, जबकि तुम्हारे बीच एक रिश्ता और स्नेह स्थापित हो चुका, तथा तुम एक-दूसरे से लाभान्वित और एक-दूसरे के रहस्यों से अवगत हो चुके हो। इसके बाद उनके हाथों में मौजूद धन की लालच करना बहुत बुरी और घृणित बात है, जबकि वे तुमसे दृढ़ और पक्का वचन (भी) ले चुकी हैं। और वह वचन अल्लाह के शब्द और उसकी शरीयत के द्वारा उन्हें हलाल ठहराना है।

Nisa' 4:22

और तुम उन स्त्रियों से निकाह न करो, जिनसे तुम्हारे पिताओं ने निकाह किया है, क्योंकि यह हराम (निषिद्ध) है। परंतु जो इस्लाम से पहले ऐसा हो चुका है, उसपर कोई पकड़ नहीं है। इसके हराम होने का कारण यह है कि बेटों का अपने पिताओं की पत्नियों से विवाह करना अत्यन्त घृणित बात है तथा ऐसा करने वाले पर अल्लाह के क्रोध का कारण है और यह चलने का एक बुरा रास्ता है।

Nisa' 4:23

अल्लाह ने तुम्हारे लिए विवाह हराम किया है, तुम्हारी माताओं से, चाहे वे कितनी ही दूर तक ऊपर चली जाएँ; अर्थात् : माँ की माँ और उसकी दादी, चाहे पिता की तरफ से हो या माता। और तुम्हारी बेटियों से, चाहे वे कितनी ही दूर तक नीचे चली जाएँ; अर्थात् : उसकी बेटी और उसकी बेटी की बेटी, इसी तरह बेटे की बेटियाँ और बेटी की बेटियाँ चाहे वे कितनी ही दूर तक नीचे चली जाएँ। और तुम्हारी सगी बहनों, या बाप शरीक (अल्लाती) या माँ शरीक (अख़्याफ़ी) बहनों से। और तुम्हारी फूफियों से, इसी तरह तुम्हारे पिताओं और माताओं की फूफियों से, चाहे वे कितनी दूर तक ऊपर चली जाएँ। और तुम्हारी खालाओं से, और इसी तरह तुम्हारी माताओं और पिताओं की खालाओं से, चाहे वे कितनी दूर तक ऊपर चली जाएँ। और भाई की बेटियों तथा बहन की बेटियों और उनकी बेटियों से, चाहे वे कितनी दूर तक नीचे चली जाएँ। और तुम्हारी उन माताओं से जिन्होंने तुम्हें दूध पिलाया है, और तुम्हारी दूध में साझीदार बहनों से, और तुम्हारी पत्नियों की माताओं से, चाहे तुम्हारा उनसे मिलन हुआ हो या न हुआ हो। और तुम्हारी पत्नियों की उन बेटियों से, जो तुम्हारे सिवा किसी अन्य पति से हों और जो अधिकतर तुम्हारे घरों में ही पलती बढ़ती हैं, इसी तरह यदि वे तुम्हारे घरों में न पली हों, अगर तुमने उनकी माताओं से मिलन कर लिया हो। लेकिन यदि तुमने उनकी माताओं से मिलन न किया हो, तो उनकी बेटियों से निकाह करने में कोई आपत्ति नहीं है। तथा तुम्हारे लिए तुम्हारे सगे बेटों की पत्नियों से विवाह करना भी हराम है, यद्यपि उनका उनसे मिलन न हुआ हो। और इस हुक्म में तुम्हारे दूध में साझीदार बेटों की पत्नियाँ भी शामिल हैं। तथा तुम्हारे लिए दो नसबी या दूध शरीक बहनों को एक साथ निकाह में रखना भी हराम है। हाँ, अज्ञानता के समयकाल में जो हो चुका, सो हो चुका। अल्लाह ने उसे क्षमा कर दिया। निःसंदेह अल्लाह अपने तौबा करने वाले बंदों को माफ़ करने वाला, उनपर दया करने वाला है। इसी तरह सुन्नत (हदीस) से साबित है कि किसी महिला और उसकी फूफी या उसकी खाला को एक साथ (निकाह) में रखना निषिद्ध है।

Nisa' 4:24

शादी-शुदा स्त्रियों से निकाह करना तुम्हारे लिए हराम कर दिया गया है। परंतु जो स्त्रियाँ अल्लाह की राह में जिहाद करते समय, बंदी बनकर तुम्हारे पास आएं, उनसे एक मासिक धर्म के पश्चात जब यह स्पष्ट हो जाए कि वे गर्भवती नहीं हैं, तुम्हारे लिए संभोग करना जायज़ है। यह (हुक्म) अल्लाह ने तुम पर फ़र्ज़ कर दिया है। तथा अल्लाह ने इनके अलावा दूसरी स्त्रियों को तुम्हारे लिए हलाल किया है कि तुम अपना माल खर्च करके, हलाल तरीक़े से, अपने सतीत्व की रक्षा करो, तुम्हारा उद्देश्य व्यभिचार का न हो। फिर जिन स्त्रियों से तुम निकाह करके लाभ उठाओ, उन्हें उनका महर चुका दो, जो अल्लाह ने तुम्हारे ऊपर फ़र्ज़ किया है। किन्तु वाजिब महर के निर्धारण के बाद, उसमें कुछ वृद्धि करने या कुछ माफ करने पर तुम्हारी आपस में सहमति हो जाती है, तो इसमें तुम पर कोई पाप नहीं है। अल्लाह अपनी सृष्टि से अवगत है, उनकी कोई चीज़ उससे छिपी नहीं है। वह अपने प्रबंधन और विधान में हिकमत वाला है।

Nisa' 4:25

तथा - ऐ पुरुषो - तुममें से जो व्यक्ति पैसे की कमी के कारण आज़ाद स्त्रियों से विवाह करने में सक्षम न हो, उसके लिए किसी अन्य व्यक्ति के स्वामित्व में मौजूद दासियों से निकाह करना जायज़ है, यदि वे तुम्हें ईमान वाली दिखाई दें, जबकि तुम्हारे ईमान की सच्चाई और भीतरी स्थिति को अल्लाह ही बेहतर जानता है। तुम और वे (दासियाँ) धर्म एवं मानवता में बराबर हैं, इसलिए उनसे शादी करने में शर्म महसूस न करो। सो, तुम उनसे उनके मालिकों की अनुमति से विवाह कर लो और उनका महर बिना किसी कमी या टाल-मटोल के उन्हें अदा कर दो। परंतु यह उस स्थिति में है जब वे पाकदामन (निष्कलंक चरित्र) हों, खुल्लम खुल्ला व्यभिचार करने वाली न हों, तथा गुप्त रूप से व्यभिचार के लिए मित्र रखने वाली न हों। जब वे शादी कर लें, फिर उसके बाद व्यभिचार में लिप्त हो जाएं, तो उन्हें आज़ाद स्त्रियों का आधा दंड दिया जाएगा। अर्थात् पचास कोड़े लगाए जाएंगे, लेकिन आज़ाद शादीशुदा स्त्रियों की तरह उन्हें संगसार नहीं किया जाएगा। सच्चरित्र ईमान वाली दासियों से निकाह करने की यह अनुमति, उसके लिए है, जिसे व्यभिचार में पड़ने का डर हो और वह आज़ाद स्त्रियों से निकाह करने की शक्ति न रखता हो। जबकि दासियों के निकाह से धैर्य करना (अर्थात् रुक जाना) बेहतर है; ताकि संतान दासता से सुरक्षित रहे।अल्लाह अपने तौबा करने वाले बंदों को क्षमा करने वाला और उनपर दया करने वाला है। और यह उसकी दया में से है कि उसने उनके लिए, आज़ाद स्त्रियों से निकाह करने में असमर्थ होने की स्थिति में, व्यभिचार में पड़ने के डर के समय दासियों से निकाह करना धर्मसंगत कर दिया है।

Nisa' 4:26

अल्लाह तआला तुम्हारे लिए इन प्रावधानों को निर्मित करके तुम्हारे लिए अपनी शरीयत और धर्म की निशानियों एवं दुनिया व आख़िरत में तुम्हारे हितों की चीज़ों को बयान करना चाहता है। तथा वह तुम्हारा, हलाल व हराम ठहराने में तुमसे पूर्व नबियों के तरीक़ों, उनके अच्छे गुणों और उनके सराहनीय आचरण की ओर, मार्गदर्शन करना चाहता है, ताकि तुम उनका अनुसरण करो। अल्लाह यह भी चाहता है कि तुम्हें अपनी अवज्ञा से हटाकर अपने आज्ञापालन की ओर फेर दे। अल्लाह उस चीज़ से अवगत है जिसमें उसके बंदों का हित है, चुनाँचे वह उसे उनके लिए धर्मसंगत बना देता है। वह अपने विधान और उनके मामलों के प्रबंधन में हिकमात वाला है।

Nisa' 4:27

अल्लाह चाहता है कि तुम्हारी तौबा क़बूल करे और तुम्हारे पापों को क्षमा कर दे, जबकि अपनी इच्छाओं के पीछे चलने वाले चाहते हैं कि तुम हिदायत के मार्ग से बहुत दूर हो जाओ।

Nisa' 4:28

अल्लाह तुम्हारे लिए अपनी शरीयत में आसानी पैदा करना चाहता है। इसी कारण वह तुम्हें ऐसी चीज़ का आदेश नहीं देता, जो तुम्हारी शक्ति से बाहर हो। क्योंकि वह मनुष्य की अपनी रचना एवं व्यवहार में कमज़ोरी से अवगत है।

Nisa' 4:29

ऐ अल्लाह पर ईमान रखने और उसके रसूल का अनुसरण करने वालो! तुम एक दूसरे का माल अवैध रूप से न लो, जैसे- जबरन क़ब्ज़ा, चोरी और रिश्वत आदि। परंतु यदि वह धन दोनों पक्षों की आपसी सहमति से होने वाले व्यवसाय का धन हो, तो तुम्हारे लिए उसको खाना और उसमें अपना अधिकार चलाना जायज़ है। तथा तुम एक-दूसरे की हत्या न करो और न तुममें से कोई अपने आपकी हत्या करे और न खुद को हलाकत में डाले। निःसंदेह अल्लाह तुमपर बड़ा दयावान् है और यह उसकी दया ही है कि उसने तुम्हारी जानों, तुम्हारे धनों और तुम्हारी इज्जत को हराम क़रार दिया है।

Nisa' 4:30

जो व्यक्ति वह काम करेगा जिससे वह मना किया गया है; चुनाँचे वह किसी का धन खाएगा या किसी की हत्या करेगा, वह भी अनजाने या भूलवश नहीं, बल्कि जान-बूझकर और ज़्यादती करते हुए; तो क़ियामत के दिन अल्लाह उसे एक बड़ी आग में झोंक देगा। वह उसकी गर्मी सहेगा और उसकी यातना झेलेगा। यह कार्य अल्लाह के लिए बड़ा आसान है, क्योंकि वह हर कार्य की ताक़त रखता है, उसे कोई वस्तु विवश नहीं कर सकती।

Nisa' 4:31

- ऐ मोमिनो! - यदि तुम बड़े गुनाहों से बचते रहोगे, जैसे अल्लाह का साझी बनाना, माता-पिता की अवज्ञा करना, किसी की हत्या करना और ब्याज लेना, तो हम तुम्हारे छोटे गुनाहों को क्षमा कर देंगे और तुम्हें अल्लाह के पास एक सम्मानित स्थान अर्थात जन्नत में प्रवेश का सौभाग्य प्रदान करेंगे।

Nisa' 4:32

(ऐ मोमिनो!) अल्लाह ने जिस चीज़ के द्वारा तुममें से कुछ को दूसरों पर श्रेष्ठता प्रदान की है, उसकी कामना न करो; ताकि ऐसा न हो कि यह असंतोष और ईर्ष्या पैदा कर दे। अतः स्त्रियों के लिए उचित नहीं है कि अल्लाह ने पुरुषों को जो विशिष्टताएँ प्रदान की हैं, उनकी आकांक्षा करें। क्योंकि प्रत्येक वर्ग के लिए उसके अनुरूप प्रतिफल का एक हिस्सा है।तथा अल्लाह से प्रार्थना करो कि वह तुम्हें अपने अनुदान से अधिक प्रदान करे। इसमें कोई शक नहीं कि अल्लाह हर वस्तु का ज्ञान रखता है; इसलिए उसने हर वर्ग को वही दिया है जो उसके अनुकूल है।

Nisa' 4:33

हमने तुममें से हर एक के हक़दार बना दिए हैं, जो माता-पिता और निकटवर्ती रिश्तेदारों की छोड़ी हुई संपत्ति के वारिस होंगे। रही बात उनकी जिनसे तुमने क़समें खाकर आपसी एकता एवं सहोग का मुआहदा कर रखा है, तो उन्हें मीरास से उनका हिस्सा दो। बेशक अल्लाह हर वस्तु से सूचित है, और इसी में उसका तुम्हारी इन क़समों और वचनों से अवगत होना भी शामिल है। आपसी एकता एवं सहोग के मुआहदा के द्वारा विरासत का नियम शुरू इस्लाम में थे, फिर उसे निरस्त कर दिया गया।

Nisa' 4:34

पुरुष गण स्त्रियों की देखभाल करते हैं और उनके मामलों का प्रबंधन करते हैं, क्योंकि अल्लाह ने उन्हें स्त्रियों पर विशेष प्रधानता दी है तथा इस कारण कि उनपर खर्च करना और उनकी देख-रेख करना पुरुषों पर अनिवार्य है। सदाचारी स्त्रियाँ अपने पालनहार की आज्ञाकारी, अपने पतियों की बात मानने वाली और अल्लाह की तौफ़ीक़ से अपने पतियों की अनुपस्थिति में उनके अधिकारों की रक्षा करने वाली होती हैं। तथा - ऐ पतियो! - जिन स्त्रियों के विषय में किसी बात या कार्य में अपने पतियों के आज्ञापालन से उपेक्षा करने का डर हो, तो पहले उन्हें समझाओ-बुझाओ और अल्लाह का भय दिलाओ। यदि वे न मानें, तो उन्हें बिस्तर में अलग रखो, जैसे सोते समय उनकी ओर पीठ कर लो और उनसे संभोग न करो। यदि वे इसपर भी न मानें तो हल्की मार मारो। यदि वे आज्ञापालन की ओर लौट आएँ, तो उनपर किसी प्रकार का अत्याचार न करो या उन्हें बुरा भला न कहो। अल्लाह हर चीज़ से सर्वोच्च और अपने व्यक्तित्व और गुणों में महान है, इसलिए उससे डरो।

Nisa' 4:35

यदि तुम्हें - ऐ पति-पत्नी के अभिभावको! - इस बात का भय हो कि दोनों के बीच का विवाद दुश्मनी और परस्पर संबंध-विच्छेद की सीमा तक पहुँच जाएगा, तो पति के परिवार से एक न्यायी पुरुष और पत्नी के परिवार से एक न्यायी पुरुष को भेजो; ताकि वे दोनों के हितों को ध्यान में रखते हुए उनके बीच जुदाई अथवा मिलाप का निर्णय करें।जबकि मेलमिलाप ही ज़्यादा प्रिय और बेहतर है। यदि दोनों मध्यस्थों ने मेलमिलाप चाहा और उसके लिए बेहतरीन प्रयास किए, तो अल्लाह पति-पत्नी के बीच मिलाप पैदा कर देगा और उनके बीच का विवाद समाप्त हो जाएगा। अल्लाह पर उसके बंदों की कोई बात छिपी नहीं है और वह उनके दिलों के निहित भेदों से भी अवगत है।

Nisa' 4:36

अल्लाह के प्रति अधीनता के साथ अकेले उसी की इबादत करो और उसके साथ किसी की इबादत न करो। तथा माता-पिता का सम्मान और उनके साथ अच्छा व्यवहार करो। और रिश्तेदारों, अनाथों और ज़रूरतमंदों के साथ अच्छा व्यवहार करो। तथा रिश्तेदार पड़ोसी एवं गैर-रिश्तेदार पड़ोसी के साथ भलाई करो। तथा साथ रहने वाले साथी के साथ अच्छा व्यवहार करो। तथा उस अनजान यात्री के साथ भलाई करो जिसका रास्ता कट गया है। तथा अपने दास-दासियों के साथ अच्छा व्यवहार करो। निःसंदेह अल्लाह ऐसे व्यक्ति से प्रेम नहीं करता, जो आत्ममुग्ध हो, उसके बंदों के समक्ष अपनी बड़ाई दिखाता हो और लोगों पर गर्व करने के लिए स्वयं की प्रशंसा करता हो।

Nisa' 4:37

अल्लाह उन लोगों से प्रेम नहीं करता, जो अल्लाह के दिए हुए धन को खर्च नहीं करते, जो अल्लाह ने उन पर ज़रूरी कर दिया है तथा वे अपने कथन एवं कर्म से दूसरों को भी ऐसा करने का आदेश देते हैं। वे अल्लाह की दी हुई जीविका तथा ज्ञान आदि को छिपाते हैं। अतः वे लोगों के सामने सत्य को बयान नहीं करते हैं, बल्जाकि उसे छिपाकर रखते हैं और असत्य को ज़ाहिर करते हैं। ये दरअसल काफ़िरों की विशेषताएँ हैं और हमने काफ़िरों के लिए अपमानकारी यातना तैयार कर रखी है।

Nisa' 4:38

तथा हमने उन लोगों के लिए भी अज़ाब तैयार कर रखा है, जो अपना धन इसलिए ख़र्च करते हैं कि लोग उन्हें देखें और उनकी प्रशंसा करें। उनका अल्लाह एवं क़यामत के दिन पर ईमान नहीं होता है। हमने उनके लिए वह अपमानकारी यातना तैयार किया है। उन्हें दरअसल शैतान के अनुसरण ही ने गुमराह किया है। और शैतान जिसका साथी बन गया, वह जान जाए कि शैतान बहुत बुरा साथी है।

Nisa' 4:39

इन लोगों का क्या नुक़सान होता, यदि वे वास्तव में अल्लाह पर और क़ियामत के दिन पर ईमान ले आते और जो कुछ अल्लाह ने उन्हें प्रदान किया है उसमें से उन रास्तों में खर्च करते जिनसे वह प्यार करता है और प्रसन्न होता है?! बल्कि उसमें भलाई ही भलाई है। और अल्लाह अन्हें भली-भाँति जानने वाला है, उनकी स्थिति उससे छिपी नहीं है और वह हर एक को उसके कार्य का बदला देगा।

Nisa' 4:40

निश्चय अल्लाह, न्यायवान् है, अपने बंदों पर ज़रा भी अत्याचार नहीं करता। अतः वह उनकी नेकियों में एक छोटी चींटी के बराबर कमी नहीं करता और न उनके गुनाहों में कुछ वृद्धि करता है। बल्कि यदि ज़र्रा बराबर भी नेकी हो, तो उसका सवाब अपनी कृपा से कई गुना बढ़ा देता है और उसके अतिरिक्त अपनी ओर से बड़ा बदला प्रदान करता है।

Nisa' 4:41

तो क़यामत के दिन क्या हाल होगा, जब हम हर समुदाय के नबी को इस बात की गवाही देने के लिए लाएँगे जो कुछ उन्होंने किया है, और - ऐ नबी! - हम आपको आपकी उम्मत पर गवाह की हैसियत से पेश करेंगे?

Nisa' 4:42

उस महान दिन में, अल्लाह का इनकार करने वाले और उसके रसूल की बात पर न चलने वाले इच्छा करेंगे कि काश वे मिट्टी हो गए होते, तो वे और धरती एक जैसे हो जाते। उस दिन वे अल्लाह से अपना कोई कर्म छिपा नहीं सकेंगे। क्योंकि अल्लाह उनकी ज़बानों पर मुहर लगा देगा, इसलिए वे बोल नहीं सकेंगी और उनके शरीर के अंगों को को अनुमति देगा तो वे उनके बुरे कामों की गवाही देंगे।

Nisa' 4:43

ऐ अल्लाह पर ईमान रखने और उसके रसूल का अनुसरण करने वालो! जब तुम नशे की हालत में हो तो नमाज़ न पढ़ो, यहाँ तक कि नशा उतर जाए और जो कुछ तुम कहते हो उसमें भेद कर सको। (यह आदेश पूर्णतया शराब के हराम होने से पहले था)। इसी तरह जनाबत की हालत में, जब तक स्नान न कर लो, नमाज़ न पढ़ो और मस्जिदों में प्रवेश न करो, परंतु यदि मस्जिद में रुके बिना गुज़रते हुए चले जाओ, तो कोई बात नहीं है। तथा यदि तुम्हें ऐसी बीमारी हो जाए जिसके साथ पानी इस्तेमाल करना संभव न हो, या तुम यात्रा में हो, या तुममें से कोई अशुद्ध (बे-वुज़ू) हो जाए, या तुमने स्त्रियों से सहवास किया हो; फिर तुम्हें पानी न मिल सके, तो पाक मिट्टी से काम लो और उससे अपने चेहरे और हाथों का मसह कर लो। निश्चय अल्लाह तुम्हारी कोताहियों को माफ़ करने वाला और तुम्हें क्षमा करने वाला है।

Nisa' 4:44

क्या - ऐ रसूल! - आप उन यहूदियों के हाल से अवगत नहीं हैं, जिन्हें अल्लाह ने तौरात के ज्ञान का कुछ भाग दिया, वे हिदायत के बदले गुमराही ख़रीद रहे हैं, तथा वे तुम्हें - ऐ मोमिनो! - रसूल के लाए हुए सीधे मार्ग से भटकाने के बड़े इच्छुक हैं; ताकि तुम उनके टेढ़े मार्ग पर चलने लगो!?

Nisa' 4:45

अल्लाह तुम्हारे दुश्मनों को - ऐ मोमिनो! - तुमसे अधिक जानता है। अतः उसने तुम्हें उनका हाल बता दिया है और तुम्हारे लिए उनकी दुश्मनी को स्पष्ट कर दिया है। तथा अल्लाह एक संरक्षक के रूप में काफ़ी है जो उनकी शक्ति के विरुद्ध तुम्हारी रक्षा करता है, तथा अल्लाह एक सहायक के रूप में काफ़ी है जो तुम्हें उनकी चाल और उनके नुकसान पहुँचाने से बचाता है और उनके विरुद्ध तुम्हारी मदद करता है।

Nisa' 4:46

यहूदियों में कुछ लोग बहुत बुरे हैं, जो अल्लाह की उतारी हुई बात को बदल देते हैं। अतः उसे वह अर्थ पहना देते हैं, जो अल्लाह ने अवतरित नहीं किया है। जब रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम उन्हें कोई आदेश देते हैं, तो वे आपसे कहते हैं : "हमने आपकी बात सुनी और हमने आपके आदेश की अवहेलना की।" और वे व्यंग्य करते हुए कहते हैं :"हम जो कहते हैं, उसे सुनें, आप सुन न पाएँ!" तथा वे "राइना" कहकर यह भ्रम फैलाते हैं कि उनका मतलब यह है कि :"आप हमारी बात पर ध्यान दीजिए", जबकि उनका मक़सद "रऊनत" अर्थात् बेवकूफी आदि की ओर इशारा करना होता है। वे इसके उच्चारण के समय अपनी ज़बान को मोड़ देते थे। वे अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर शाप करना चाहते थे तथा उनका उद्देश्य (इस्लाम) धर्म पर लांक्षन करना होता था। यदि वे "हमने आपकी बात सुनी और हमने आपके आदेश की अवहेलना की" की जगह "हमने आपकी बात सुनी और आपके आदेश का पालन किया" कहते, तथा "आप हमारी बात सुनिए, आप सुन न पाएँ!" की जगह "हमारी बात सुनिए", तथा "राइना" कहने की जगह "ज़रा प्रतीक्षा करें कि हम आपकी बात समझ जाएँ" कहते; तो यह उनके लिए पहले कहे हुए शब्द से बेहतर और उससे अधिक न्यायसंगत होता। क्योंकि इसमें नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के व्यक्तित्व के योग्य शिष्टाचार पाया जाता है। लेकिन अल्लाह ने उन्हें शापित किया है। अतः उनके कुफ़्र के कारण उन्हें अपनी दया से दूर कर दिया है। इसलिए वे ऐसा ईमान नहीं लाएँगे, जो उनके लिए लाभदायक हो।

Nisa' 4:47

ऐ यहूदियो और ईसाइयो, जिन्हें किताब दी गई है, उस पुस्तक पर ईमान लाओ, जो हमने मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर उतारी है, जो तुम्हारे पास मौजूद तौरात एवं इंजील की पुष्टि करने हेतु आए हैं, इससे पहले कि हम चेहरों में मौजूद इंद्रियों को मिटा दें, और उन्हें उनके पीछे की दिशा में बना दें, या हम उन्हें अल्लाह की दया से वैसे ही निष्कासित कर दें, जैसे हमने शनिवार वालों को उससे निष्कासित किया था, जिन्होंने शनिवार के दिन शिकार से मनाही के बावजूद उसमें शिकार किया था। जिसके कारण अल्लाह ने उन्हें बंदर बना दिया। और अल्लाह का आदेश और उसका फ़ैसला अनिवार्य रूप से पूरा होकर रहता है।

Nisa' 4:48

अल्लाह इस बात को क्षमा नहीं करेगा कि उसके प्राणियों में से किसी को उसका साझी बनाया जाए, परंतु शिर्क और कुफ़्र से कमतर गुनाहों को, जिसके लिए चाहेगा, अपनी कृपा से क्षमा कर देगा, अथवा उनमें से जिसे चाहेगा, उसके गुनाहों के अनुसार, अपने न्याय के आधार पर, दंड देगा। तथा जिसने किसी को अल्लाह का साझी बनाया, उसने इतना बड़ा पाप किया कि उस पर मरने वाले को क्षमा नहीं किया जाएगा।

Nisa' 4:49

क्या आप - ऐ रसूल! - उन लोगों के मामले से अवगत नहीं हैं, जो खुद अपनी और अपने कार्यों की प्रशंसा करते हैं? बल्कि केवल अल्लाह ही है जो अपने बंदों में से जिसकी चाहे प्रशंसा करे और पवित्र बनाए, क्योंकि वह दिलों की गुप्त बातों को जानने वाला है। तथा उनके सत्कर्मों के सवाब में कुछ भी कमी नहीं की जाएगी, चाहे वह खजूर की गुठली के धागे के बराबर ही क्यों न हो।

Nisa' 4:50

(ऐ रसूल!) देखिए तो सही कि वे लोग स्वयं की प्रशंसा करके कैसे अल्लाह पर मिथ्या आरोप लगा रहे हैं! और उनकी गुमराही को स्पष्ट करने के लिए यही गुनाह काफ़ी है।

Nisa' 4:51

(ऐ रसूल!) क्या आप नहीं जानते और आपको उन यहूदियों की दशा पर आश्चर्य नहीं होता, जिन्हें अल्लाह ने ज्ञान का कुछ हिस्सा दिया है, कि वे अल्लाह को छोड़कर अपने बनाए हुए माबूदों (देवताओं) पर ईमान रखते हैं और - मुश्रिकों के साथ बनाए रखने और उनकी चाटुकारिता के तौर पर - कहते हैं : ये (मुश्रिक लोग) मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के साथियों से अधिक हिदायत के मार्ग पर हैं?

Nisa' 4:52

जो लोग इस भ्रष्ट विश्वास को मानते हैं, वही हैं जिन्हें अल्लाह ने अपनी दया से निष्कासित कर दिया है और जिसे अल्लाह (अपनी दया से) निष्कासित कर दे, तो आप कदापि उसका कोई सहायक नहीं पाएँगे,जो उसकी मदद कर सके।

Nisa' 4:53

उनके पास राज्य का कोई हिस्सा नहीं है। यदि ऐसा होता, तो लोगों को उसमें से कुछ भी नहीं देते, यद्यपि खजूर की गुठली के ऊपर के गड्ढे के बराबर ही क्यों न हो।

Nisa' 4:54

बल्कि वे मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम और आपके साथियों से इस बिना पर ईर्ष्या करते हैं कि अल्लाह ने उन्हें, नुबुव्वत (ईश्दूतत्व), ईमान और धरती में सत्ता प्रदान किया है। तो ये लोग उनसे ईर्ष्या क्यों करते हैं, जबकि हमने इससे पहले भी इबराहीम अलैहिस्सलाम के वंशज को आसमानी किताब प्रदान किया और किताब के अलावा भी उनकी ओर वह्य की, तथा उन्हें लोगों पर विशाल राज्य प्रदान किया!?

Nisa' 4:55

अह्ले किताब में से कुछ लोग उस चीज़ पर ईमान लाए, जो अल्लाह ने इबराहीम अलैहिस्सलाम पर और उनके वंश के नबियों पर अवतरित किया और कुछ लोगों ने उस पर ईमान लाने से उपेक्षा किया। उनका यही रवैया उसके प्रति भी है जो मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर अवतिरत किया गया है। तथा उनमें से कुफ़्र करने वालों के लिए आग ही बराबर की सज़ा है।

Nisa' 4:56

निःसंदेह जिन लोगों ने हमारी आयतों के साथ कुफ़्र किया, हम उन्हें क़यामत के दिन आग में दाख़िल करेंगे, जो उन्हें चारों ओर से घेरे हुई होगी। जब भी उनकी खालें जल जाएँगी, हम उन्हें दूसरी खाल पहना देंगे, ताकि उन पर यातना जारी रहे। निःसंदेह अल्लाह प्रभुत्वशाली है, उसपर कोई चीज़ हावी नहीं हो सकती, वह जो कुछ उपाय करता और निर्णय लेता है, उसमें हिकमत वाला है।

Nisa' 4:57

जो लोग अल्लाह पर ईमान लाए और उसके रसूल का पालन किया, तथा अच्छे कर्म किए, हम उन्हें क़यामत के दिन ऐसी जन्नतों में दाख़िल करेंगे, जिनके महलों के नीचे से नहरें प्रवाहित होंगी, जिनमें वे हमेशा रहेंगे। उनके लिए उन जन्नतों में हर गंदगी से पवित्र पत्नियाँ होंगी। तथा हम उन्हें एक घनी, विस्तारित छाया में रखेंगे, जिसमें गर्मी होगी न सर्दी।

Nisa' 4:58

अल्लाह तुम्हें आदेश देता है कि अपने पास अमानत के रूप में रखी हुई हर चीज़ को उसके मालिक तक पहुँचा दो। तथा तुम्हें यह आदेश देता है कि जब तुम लोगों के बीच फैसला करो, तो न्याय के साथ फैसला करो। तथा फैसला करते समय पक्षपात अथवा अत्याचार से काम न लो। अल्लाह तुम्हें कितनी अच्छी नसीहत करता है और तुम्हारी सभी परिस्थितियों में उसकी ओर मार्गदर्शन करता है। निःसंदेह अल्लाह तुम्हारी बातों को सुनने वाला और तुम्हारे कार्यों को जानने वाला है।

Nisa' 4:59

ऐ अल्लाह पर ईमान रखने और उसके रसूल का अनुसरण करने वालो! आदेशों का पालन करके और निषेधों से बचकर अल्लाह का और उसके रसूल का आज्ञापालन करो। तथा अपने शासकों का पालन करो जब तक कि वे अवज्ञा का आदेश न दें। फिर यदि किसी बात में तुम्हारा मतभेद हो जाए, तो उसके संबंध में अल्लाह की किताब और उसके रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की सुन्नत की तरफ लौटो, यदि तुम अल्लाह और अंतिम दिन पर ईमान रखते हो। (तुम्हारा) यह क़ुरआन और सुन्नत की तरफ लौटना, मतभेद में पड़े रहने और राय के आधार पर कोई बात कहने से बेहतर है और तुम्हारे लिए सबसे अच्छे परिणाम वाला है।

Nisa' 4:60

(ऐ रसूल!) क्या आपने उन मुनाफ़िक़ यहूदियों का विरोधाभास नहीं देखा, जो झूठा दावा करते हैं कि वे उसपर ईमान रखते हैं जो कुछ आप पर अवतरित किया गया है और जो कुछ आपसे पूर्व रसूलों पर अवतिरत किया गया था। परंतु वे अपने विवादों में फैसले के लिए अल्लाह की शरीयत को छोड़कर मानव निर्मित क़ानून के पास जाना पसंद करते हैं। जबकि उन्हें आदेश दिया गया था कि वे उसका इनकार करें। और शैतान तो यह चाहता है कि उन्हें सत्य से इतना दूर कर दे कि वे उसके चलते मार्गदर्शन न पा सकें।

Nisa' 4:61

जब इन मुनाफ़िक़ों (पाखंडियों) से कहा जाता है कि अल्लाह ने अपनी किताब में जो फैसला उतारा है, उसकी तरफ़ आओ और रसूल के पास आओ, ताकि वह तुम्हारे झगड़ों में तुम्हारे बीच फ़ैसला कर दें, तो - ऐ रसूल - आप उन्हें देखेंगे कि वे पूर्णतया आपसे विमुख होकर फैसला के लिए आपके अलावा की ओर जाते हैं।

Nisa' 4:62

उस समय मुनाफिक़ों का क्य हाल होता है जब उनके किए हुए गुनाहों के कारण उनपर कोई आपदा आ पड़ती है, फिर - ऐ रसूल - वे आपके पास माफ़ी माँगने के उद्देश्य से आते हैं और अल्लाह की क़समें खाकर कहते हैं कि आपको छोड़कर अन्य के पास फैसला के लिए जाने के पीछे हमारा उद्देश्य केवल भलाई और परस्पर विरोधी पक्षों के बीच मेल कराना था। हालाँकि वे अपने इस दावे में झूठे हैं; क्योंकि भलाई तो लोगों के बीच अल्लाह की शरीयत से फैसला कराने में है।

Nisa' 4:63

ये वो लोग हैं जिनके दिलों में छिपे निफ़ाक़ (पाखंड) और बुरे आशय को अल्लाह भली-भाँति जानता है। अतः - ऐ पैग़ंबर - उन्हें उनके हाल पर छोड़ दें और उनकी उपेक्षा करें, तथा उन्हें प्रोत्साहित करते हुए और डराते हुए उनके सामने अल्लाह का हुक्म (फैसला) स्पष्ट कर दें और उनसे ऐसी बात कहें जो उनके दिल की गहराइयों में उतर जाए।

Nisa' 4:64

हमने जो भी रसूल भेजा, उसका उद्देश्य यह था कि वह अल्लाह की इच्छा और तक़दीर से जिस चीज़ का आदेश दें उसमें उनका पालन किया जाए। और यदि वे लोग, जब उन्होंने पाप करके स्वयं पर अत्याचार किया था, अपने गुनाहों को स्वीकारते और पछतावा व पश्चाताप प्रकट करते हुए आपके जीवन में (ऐ रसूल) आपके पास आ जाते, और अल्लाह से माफी माँगते, और आप भी उनके लिए माफ़ी माँगते, तो वे अवश्य अल्लाह को बहुत तौबा क़बूल करने वाला और अपने ऊपर दयालु पाते।

Nisa' 4:65

अतः मामला ऐसा नहीं है जैसा कि ये पाखंडी लोग दावा करते हैं। फिर अल्लाह ने अपने अस्तित्व की क़सम खाकर फरमाया कि वे सच्चे मोमिन नहीं हो सकते, जब तक कि वे अपने बीच उत्पन्न होने वाले समस्त मतभेदों में रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के जीवन काल में रसूल के पास और आपकी मृत्यु के बाद आपकी शरीयत की ओर निर्णय के लिए न जाएँ। फिर वे रसूल के फैसले से संतुष्ट हो जाएँ और उनके दिलों में आपके निर्णय के संबंध में कोई तंगी और संदेह न हो और परोक्ष एवं प्रत्यक्ष रूप से उसे पूरी तरह से स्वीकार कर लें।

Nisa' 4:66

यदि हमने उनपर एक-दूसरे को क़त्ल करना या अपने घरों से निकल जाना अनिवार्य किया होता, तो उनमें से थोड़े लोगों के सिवा कोई हमारे आदेश को नहीं मानता। अतः उन्हें अल्लाह का धन्यवाद करना चाहिए कि उसने उन्हें ऐसे कार्य के लिए बाध्य नहीं किया, जो उनके लिए कठिन हो। और यदि उन्होंने अल्लाह की आज्ञाकारिता की होती जिसकी उन्हें नसीहत की जाती है, तो यह अवहेलना करने से बेहतर होता और उनके ईमान के लिए अधिक दृढ़ता का कारण होता। तथा हम उन्हें अपनी ओर से बड़ा बदला देते और उन्हें अल्लाह एवं उसकी जन्नत तक ले जाने वाले रास्ते पर चलने का सामर्थ्य प्रदान करते।

Nisa' 4:67

यदि हमने उनपर एक-दूसरे को क़त्ल करना या अपने घरों से निकल जाना अनिवार्य किया होता, तो उनमें से थोड़े लोगों के सिवा कोई हमारे आदेश को नहीं मानता। अतः उन्हें अल्लाह का धन्यवाद करना चाहिए कि उसने उन्हें ऐसे कार्य के लिए बाध्य नहीं किया, जो उनके लिए कठिन हो। और यदि उन्होंने अल्लाह की आज्ञाकारिता की होती जिसकी उन्हें नसीहत की जाती है, तो यह अवहेलना करने से बेहतर होता और उनके ईमान के लिए अधिक दृढ़ता का कारण होता। तथा हम उन्हें अपनी ओर से बड़ा बदला देते और उन्हें अल्लाह एवं उसकी जन्नत तक ले जाने वाले रास्ते पर चलने का सामर्थ्य प्रदान करते।

Nisa' 4:68

यदि हमने उनपर एक-दूसरे को क़त्ल करना या अपने घरों से निकल जाना अनिवार्य किया होता, तो उनमें से थोड़े लोगों के सिवा कोई हमारे आदेश को नहीं मानता। अतः उन्हें अल्लाह का धन्यवाद करना चाहिए कि उसने उन्हें ऐसे कार्य के लिए बाध्य नहीं किया, जो उनके लिए कठिन हो। और यदि उन्होंने अल्लाह की आज्ञाकारिता की होती जिसकी उन्हें नसीहत की जाती है, तो यह अवहेलना करने से बेहतर होता और उनके ईमान के लिए अधिक दृढ़ता का कारण होता। तथा हम उन्हें अपनी ओर से बड़ा बदला देते और उन्हें अल्लाह एवं उसकी जन्नत तक ले जाने वाले रास्ते पर चलने का सामर्थ्य प्रदान करते।

Nisa' 4:69

जो व्यक्ति अल्लाह और उसके रसूल का आज्ञापालन करेगा, वह उन लोगों के साथ होगा, जिन्हें अल्लाह ने जन्नत में प्रवेश के पुरस्कार से सम्मानित किया है, अर्थात नबी, और सिद्दीक़ (सत्यवादी) लोग जिन्होंने रसूलों के लाए हुए धर्म को पूरी तरह से सत्य जाना और उसके अनुसार कार्य किया, और शहीद लोग जो अल्लाह के रास्ते में क़त्ल किए गए, और सदाचारी लोग जिनके परोक्ष एवं प्रत्यक्ष विशुद्ध हैं, तो परिणाम स्वरूप उनके कार्य भी विशुद्ध हैं। ये लोग जन्नत के क्या ही अच्छे साथी हैं!

Nisa' 4:70

यह उक्त सवाब अल्लाह की ओर से उसके बंदों पर अनुग्रह एवं कृपा है और अल्लाह काफ़ी है उनकी स्थितियों को जानने वाला, और वह हर एक को उसके कार्य का बदला देगा।

Nisa' 4:71

ऐ अल्लाह पर ईमान रखने और उसके रसूल का अनुसरण करने वालो! अपने दुश्मनों से, उनसे जंग करने पर सहायक कारणों को अपनाकर, सावधान रहो। अतः उनकी ओर एक के बाद एक गुट बनाकर निकलो, या सब के सब इकट्ठे होकर निकल पड़ो। यह सब इस तथ्य के अधीन है कि किस चीज़ में तुम्हारा हित और किसी चीज़ में तुम्हारे दुश्मनों का पराजय है।

Nisa' 4:72

(ऐ मुसलमानो!) तुम्हारे अंदर कुछ ऐसे लोग भी हैं, जो अपनी कायरता के कारण तुम्हारे दुश्मनों से लड़ाई के लिए निकलने से पीछे रहते हैं और दूसरों को भी पीछे रखते (रोकते) हैं। ये मुनाफ़िक़ और कमज़ोर ईमान वाले लोग हैं। फिर यदि तुम शहीद हो जाओ या तुम्हें पराजय का सामना करना पड़े, तो उनमें से एक अपनी सुरक्षा पर हर्षित होकर कहता है : अल्लाह ने मुझपर कृपा की है, इसलिए मैं उनके साथ लड़ाई में शामिल नहीं हुआ, नहीं तो मेरी भी वही हालत होती, जो इनकी हुई।

Nisa' 4:73

और यदि तुम्हें - ऐ मुसलमानो! - विजय अथवा माले ग़नीमत के रूप में अल्लाह का अनुग्रह प्राप्त हो जाए, तो जिहाद से पीछे रहने वाला यही व्यक्ति अवश्य इस तरह कहेगा मानो वह तुममें से है ही नहीं और तुम्हारे और उसके बीच कोई प्यार और साहचर्य नहीं था कि काश! मैं भी उनके साथ इस युद्ध में शामिल होता, तो उनकी तरह मैं भी बड़ी सफलता प्राप्त कर लेता!

Nisa' 4:74

अतः सच्चे ईमान वाले, जो सांसारिक जीवन को उसके प्रति अरुचि प्रकट करते हुए, आख़िरत के बदले उसकी इच्छा रखते हुए बेच देते हैं, उन्हें चाहिए कि अल्लाह के रास्ते में युद्ध करें ताकि अल्लाह का धर्म सर्वोच्च हो। और जो अल्लाह के धर्म को सर्वोच्च करने के लिए अल्लाह के रास्ते में युद्ध करे, फिर वह शहीद हो जाए या दुश्मन पर विजय प्राप्त कर ले, तो अल्लाह उसे महान प्रतिफल प्रदान करेगा और वह जन्नत और अल्लाह की प्रसन्नता है।

Nisa' 4:75

- ऐ मोमिनो! - तुम्हें अल्लाह के रास्ते में, उसके धर्म को ऊँचा करने और बेसहारा पुरुषों, स्त्रियों तथा बच्चों को मुक्ति दिलाने के लिए जिहाद करने से कौन-सी चीज़ रोकती है, जो बेबसी के आलम में अल्लाह से दुआ कर रहें हैं कि ऐ हमारे पालनहार! हमें मक्का से निकाल दे, क्योंकि उसके वासी अल्लाह का साझी बनाकर और उसके बंदों को उत्पीड़ित करके अत्याचार करते हैं। तथा हमारे लिए अपनी ओर से कोई संरक्षक बना दे, जो हमारी देखभाल और संरक्षण करे और ऐसा सहायक बना दे, जो हमसे हर प्रकार की हानि को दूर कर दे।

Nisa' 4:76

सच्चे मोमिन, अल्लाह के रास्ते में उसके धर्म को सर्वोच्च करने के लिए लड़ते हैं, जबकि काफिर अपने असत्य पूज्यों (देवताओं) की खातिर लड़ते हैं। अतः तुम शैतान के सहायकों से युद्ध करो, क्योंकि यदि तुम उनसे युद्ध करोगे, तो उनपर विजय प्राप्त कर लोगे। क्योंकि शैतान की चाल कमज़ोर होती है। वह सर्वशक्तिमान अल्लाह पर भरोसा रखने वालों को नुक़सान नहीं पहुँचा सकता।

Nisa' 4:77

क्या (ऐ रसलू!) आप अपने उन साथियों के हाल से अवगत नहीं हैं, जिन्होंने माँग की कि उनपर जिहाद फ़र्ज़ (अनिवार्य) कर दिया जाए, तो उनसे कहा गया : अपने हाथों को लड़ाई से रोके रखो, नमाज़ क़ायम करो और ज़कात देते रहो। (और यह जिहाद के अनिवार्य होने से पहले की बात है) फिर जब वे मदीना हिजरत कर गए, और इस्लाम को मज़बूती प्राप्त हो गई और जिहाद फ़र्ज़ कर दिया गया; तो उनमें से कुछ लोगों को यह आदेश बड़ा कठिन मालूम हुआ और वे लोगों से ऐसे डरने लगे, जैसे अल्लाह से डरते हैं अथवा उससे भी अधिक। और कहने लगे : ऐ हमारे पालनहार! हमपर जिहाद क्यों अनिवार्य कर दिया? इसे कुछ दिनों के लिए विलंब क्यों नहीं कर दिया कि हम दुनिया का कुछ फ़ायदा उठा लेते। (ऐ रसूल!) आप उनसे कह दें : दुनिया का सामान (आनंद) चाहे जितना प्राप्त हो जाए, थोड़ा और नश्वर है, जबकि आख़िरत अल्लाह से डरने वालों के लिए बेहतर है, क्योंकि उसकी नेमतें सदा बाक़ी रहेंगी। और तुम्हारे अच्छे कामों में किसी भी तरह की कमी नहीं की जाएगी, चाहे वह उस धागे के बराबर ही क्यों न हो जो खजूर की गुठली में होता है।

Nisa' 4:78

तुम जहाँ कहीं भी हो, तुम्हारा समय आने पर मृत्यु तुमको पा लेगी, भले ही तुम युद्ध के मैदान से दूर अभेद्य महलों में हो। इन मुनाफ़िक़ों (पाखंडियों) का हाल यह है कि यदि इन्हें संतान और ढेर सारी आजीविका जैसी कोई खुशी की चीज़ मिलती है, तो कहते हैं कि यह अल्लाह की ओर से है। लेकिन यदि इन्हें संतान या आजीविका में कठोर स्थिति का सामना होता है, तो नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से अपशकुन लेते हैं और कहते हैं कि यह बुराई आपके कारण है। (ऐ रसूल!) इनका खंडन करते हुए कह दें : भलाइयाँ और बुराइयाँ, सब अल्लाह के फ़ैसले और उसकी तक़दीर के अधीन हैं। तो इस तरह की बात कहने वालों को क्या हो गया है कि वे समझ ही नहीं पा रहे हैं कि आप उनसे क्या कह रहे हैं?!

Nisa' 4:79

(ऐ आदम के बेटो!) तुझे जो भी खुशी की चीज़ें जैसे आजीविका और संतान आदि प्राप्त होती हैं, वे सब अल्लाह की ओर से हैं, जिनके द्वारा अल्लाह ने तुझ पर अनुग्रह किया है। तथा तेरी रोज़ी और संतान के बारे में तुझे जो परेशानी आती है, वह सब तेरी तरफ से तेरे द्वारा किए गए पापों के कारण है। और - ऐ नबी! - हमने आपको समस्त लोगो के लिए अल्लाह का रसूल बनाकर भेजा है, ताकि आप उन्हें अपने पालनहार का संदेश पहुँचाएँ। तथा आप अल्लाह की तरफ से लोगों को जो कुछ पहुँचा रहे हैं, उसकी सत्यता पर अल्लाह साक्षी के तौर पर काफ़ी है उन सबूतों और प्रमाणों के साथ जो उसने आपको प्रदान किए हैं।

Nisa' 4:80

जिसने रसूल का, उनके आदेशों का अनुपालन कर और उनकी मना की हुई चीज़ों से बचकर, आज्ञापालन किया, तो उसने अल्लाह के आदेश का पालन किया और जिसने - ऐ रसूल! - आपके आज्ञापालन से मुँह फेरा, तो आप उसके लिए दुखी न होंं। क्योंकि हमने आपको उसके ऊपर संरक्षक बनाकर नहीं भेजा है कि आप उसके कार्यों को संरक्षित करें। बल्कि उसके कार्यों को गिनकर रखने और उसका हिसाब लेने का काम हमारा है।

Nisa' 4:81

मुनाफ़िक़ लोग आपसे अपने मुँह से कहते हैं कि हम आपके आदेश को मानते हैं और उसका पालन करते हैं। परन्तु, जब वे आपके पास से निकलकर जाते हैं, तो उनका एक समूह गुप्त रूप से उसके विपरीत षड्यंत्र करता है जो उन्होंने आपके सामने ज़ाहिर किया है। हालाँकि अल्लाह उनके षड्यंत्र से अवगत है और उनकी इस चाल का उन्हें बदला देगा। अतः आप उनपर कोई ध्यान न दें; वे आपको कुछ भी नुक़सान नहीं पहुँचा सकेंगे। आप अपना मामला अल्लाह के हवाले कर दें और उस पर भरोसा करें और अल्लाह कार्यसाधक के तैर पर काफी है जिस पर आप भरोसा कर सकते हैं।

Nisa' 4:82

ये लोग क़ुरआन पर मनन चिंतन और उसका गहन अध्ययन क्यों नहीं करते, ताकि उनके लिए यह साबित हो जाए उसमें कोई अंतर (असंगति) या गड़बड़ी नहीं है?! और ताकि उन्हें आपके लाए हुए धर्म की सच्चाई पर विश्वास हो जाए। यदि यह (क़ुरआन) अल्लाह सर्वशक्तिमान के अलावा किसी अन्य की ओर से होता, तो वे उसके प्रावधानों में गड़बड़ी और उसके अर्थों में बहुत अंतर (असंगित) पाते।

Nisa' 4:83

जब इन मुनाफ़िक़ों के पास मुसलमानों की सुरक्षा और ख़ुशी, या उनके डर और दुःख की कोई सूचना आती है, तो उसे फैला देते और प्रकाशित कर देते हैं। यदि वे धीरज धरते और उस मामले को रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की ओर तथा सोच-विचार, ज्ञान एवं शुभचिंतन वाले लोगों की तरफ़ लौटा देते, तो सोच-विचार करने और निष्कर्ष निकालने वाले लोग इस बात को अवश्य जान लेते कि उसे प्रकाशित करना चाहिए या गोपनीय रखना चाहिए। और - ऐ मोमिनो! - अगर इस्लाम के साथ तुमपर अल्लाह की अनुकंपा और क़ुरआन के साथ तुमपर उसकी दया न होती कि उसने तुम्हें उस दुर्दशा से सुरक्षित रखा जिससे इन मुनाफ़िक़ों को पीड़ित किया है; तो तुममें से कुछ को छोड़कर, सब शैतान के बहकावे में आ जाते।

Nisa' 4:84

अतः - ऐ रसूल! - आप अल्लाह के रास्ते में, उसके धर्म को सर्वोच्च करने के लिए युद्ध करें। आपसे आपके अलावा किसी अन्य के बारे में नहीं पूछा जाएगा और न आप उसके लिए बाध्य हैं। क्योंकि आप पर केवल अपने आपको युद्ध पर तत्पर करने की ज़िम्मेदारी है। तथा मोमिनों को भी युद्ध के लिए प्रोत्साहित करें और उस पर उभारें। संभव है कि अल्लाह तुम्हारे युद्ध के द्वारा काफ़िरों का ज़ोर तोड़ दे। अल्लाह अधिक शक्तिशाली और अधिक कठोर दंड देने वाला है।

Nisa' 4:85

जो दूसरों को भलाई पहुँचाने के लिए प्रयास करेगा, उसे उसके सवाब का कुछ हिस्सा प्राप्त होगा तथा जो दूसरों को बुराई पहुँचाने के लिए प्रयास करेगा, उसे उसके पाप का कुछ हिस्सा मिलेगा। अल्लाह मनुष्य के हर कार्य को देख रहा है और उसे उसका बदला देगा। अतः तुममें से जो व्यक्ति किसी भलाई की प्राप्ति का कारण बनेगा, उसे उसका हिस्सा मिलेगा और जो किसी बुराई की प्राप्ति का कारण बनेगा, उसे उसमें से कुछ प्राप्त होगी।

Nisa' 4:86

जब कोई तुम्हें सलाम करे, तो उसे सलाम का उससे अच्छा उत्तर दो अथवा उसके कहे हुए शब्दों ही को दोहरा दो। अलबत्ता, उससे अच्छा उत्तर देना बेहतर है। निःसंदेह अल्लाह तुम्हारे कार्यों का संरक्षक है और वह हर एक को उसके कार्य का बदला देगा।

Nisa' 4:87

अल्लाह के सिवा कोई सच्चा माबूद (पूज्य) नहीं। वह तुम्हारे पहले और बाद के लोगों को क़यामत के दिन अवश्य इकट्ठा करेगा, जिसमें कोई शक नहीं; ताकि तुम्हें तुम्हारे कर्मों का बदला दिया जाए। और अल्लाह से अधिक सच्ची बात वाला कोई नहीं है।

Nisa' 4:88

(मोमिनो!) तुम्हें क्या हो गया है कि तुम, मुनाफ़िक़ों के साथ व्यवहार के बारे में दो अलग-अलग पक्ष बन गए हो : एक पक्ष कहता है कि उनके कुफ़्र के कारण उनसे युद्ध करना चाहिए, तथा दूसरा पक्ष कहता है कि उनके ईमान लाने के कारण उनसे युद्ध नहीं करना चाहिए?! तुम्हें उनके बारे में मतभेद में नहीं पड़ना चाहिए, जबकि अल्लाह ने उनके बुरे कर्मों के कारण उन्हें कुफ़्र और गुमराही की ओर लौटा दिया है। क्या तुम उसे सीधी राह पर लगाना चाहते हो, जिसे अल्लाह ने सत्य को स्वीकार करने का सामर्थ्य नहीं दिया है? और जिसे अल्लाह पथभ्रष्ट कर दे, तुम्हें उसे मार्गदर्शन करने का कोई रास्ता नहीं मिलेगा।

Nisa' 4:89

मुनाफ़िक़ों (पाखंडियों) की कामना है कि उनके कुफ़्र करने की तरह तुम भी उसका इनकार कर दो, जो तुमपर उतारा गया है, ताकि कुफ़्र करने में, तुम उनके बराबर हो जाओ। अतः उनकी इसी दुश्मनी के कारण, तुम उन्हें अपना मित्र न बनाओ, यहाँ तक कि वे, अपने ईमान के संकेत के रूप में, शिर्क के घर से इस्लाम के देश की ओर हिजरत कर जाएं। यदि वे इससे मुँह फेरें और अपनी स्थिति पर बने रहें, तो जहाँ भी पाओ, उन्हें पकड़ो और क़त्ल करो। तथा उनमें से किसी को न अपना मित्र बनाओ, जो तुम्हारे मामलों में तुम्हारा साथ दे और न सहायक बनाओ, जो तुम्हारे दुश्मनों के विरुद्ध तुम्हारी सहायता करे।

Nisa' 4:90

परन्तु उनमें से जो लोग ऐसी क़ौम के पास पहुँच जाएँ कि तुम्हारे और उनके बीच युद्ध विराम का निश्चित अनुबंध है, अथवा वे लोग जो तुम्हारे पास इस स्थिति में आएँ कि उनके दिल संकुचित हों, वे न तुमसे लड़ना चाहते हों न अपनी क़ौम से लड़ना चाहते हों। हालाँकि यदि अल्लाह चाहता, तो उन्हें तुम्हारे ऊपर सक्षम कर देता और वे तुमसे लड़ाई करते।इसलिए अल्लाह की ओर से उसकी आफियत (विपत्ति रहित अवस्था) को स्वीकार करो और उन्हें क़त्ल करने अथवा बंदी बनाने से परहेज़ करो। यदि वे तुमसे अलग रहें और तुमसे युद्ध न करें, तथा तुमसे लड़ाई छोड़कर तुम्हारे साथ संधि के लिए हाथ बढ़ाएँ, तो अल्लाह ने तुम्हारे लिए उन्हें क़त्ल करने अथवा बंदी बनाने का कोई रास्ता नहीं बनाया है।

Nisa' 4:91

- ऐ मोमिनो! - तुम मुनाफ़िक़ों का एक अन्य समूह ऐसा पाओगे, जो तुम्हारे सामने ईमान को प्रदर्शित करते हैं ताकि वे खुद के लिए प्रतिरक्षा प्राप्त कर सकें। परन्तु जब वे अपनी काफ़िर क़ौम के पास जाते हैं, तो उनके सामने कुफ़्र को प्रदर्शित करते हैं, ताकि उनसे भी निश्चिंत और सुरक्षित रहें। जब भी उन्हें अल्लाह का इनकार करने और उसके साथ शिर्क करने के लिए बुलाया जाता है, तो वे उसमें भयानक रूप से गिर जाते हैं। ये लोग यदि तुमसे लड़ना न छोड़ें, सुलह करने के लिए आगे न आएं और अपने हाथ तुमसे न रोकें, तो उन्हें जहाँ पाओ, पकड़ो और क़त्ल करो। और वे लोग जिनकी यह विशेषता है, हमने तुम्हारे लिए उन्हें पकड़ने और क़त्ल करने का स्पष्ट तर्क बना दिया है; और ऐसा उनके विश्वासघात और चालबाज़ी के कारण किया है।

Nisa' 4:92

किसी मोमिन के लिए यह उचित नहीं है कि किसी मोमिन की हत्या करे, परन्तु यह कि चूक से ऐसा हो जाए। जो व्यक्ति गलती से किसी मोमिन की हत्या कर दे, वह अपने कृत्य के कफ़्फ़ारा के तौर पर एक मोमिन गुलाम आज़ाद करे और हत्यारे के वारिस रिश्तेदार हत व्यक्ति के वारिसों को दियत (खून की क़ीमत) दें। लेकिन अगर हत व्यकित के वारिस खून के पैसे माफ कर दें, तो दियत समाप्त हो जाएगी। यदि हत व्यक्ति तुमसे युद्ध कने वाली क़ौम से हो, और वह स्वयं मोमिन हो, तो हत्यारे पर (केवल) एक मोमिन ग़ुलाम आज़ाद करना अनिवार्य है, उसपर दियत अनिवार्य नहीं है। तथा यदि हत व्यक्ति ईमान वाला न हो, लेकिन वह ऐसी क़ौम से हो कि तुम्हारे और उनके बीच ज़िम्मियों की तरह कोई प्रतिज्ञा और समझौता हो, तो हत्यारे के वारिस रिश्तेदारों पर हत व्यक्ति के वारिसों को ख़ून की क़ीमत देना अनिवार्य है और हत्यारे को अपने कृत्य के कफ़्फ़ारा के तौर पर एक मोमिन ग़ुलाम आज़ाद करना होगा। यदि उसे आज़ाद करने के लिए ग़ुलाम न मिले अथवा वह ग़ुलाम की क़ीमत भुगतान करने में सक्षम न हो, तो वह लगातार दो महीने बिना किसी बाधा के इस तरह रोज़े रखे कि उनके बीच (बिना किसी कारण के) रोज़ा न तोड़े। ये प्रावधान इसलिए हैं, ताकि अल्लाह उसके किए को क्षमा कर दे। अल्लाह अपने बंदों के कृत्यों और उनके इरादों से अवगत, अपने विधान और प्रबंधन में हिकमत वाला है।

Nisa' 4:93

जो व्यक्ति किसी मोमिन को बिना किसी हक़ के जान-बूझकर क़त्ल कर दे; तो उसका बदला जहन्नम में प्रवेश है, जिसमें वह हमेशा के लिए रहेगा, यदि उसने उसे हलाल समझा या उससे तौबा नहीं किया। तथा अल्लाह उसपर क्रोधित है और उसे अपनी दया से निष्कासित कर दिया। तथा उसके इस महान पाप को करने के कारण, उसके लिए बड़ा अज़ाब तैयार कर रखा है।

Nisa' 4:94

ऐ अल्लाह पर ईमान रखने वालो और उसके रसूल का अनुसरण करने वालो! जब तुम अल्लाह के मार्ग में जिहाद के लिए निकलो, तो छानबीन कर लिया करो कि किससे युद्ध कर रहे हो और जो तुम्हें अपने मुसलमान होने का सबूत दिखाए, उसे यह न कहो कि तुम मोमिन नहीं हो, बल्कि तुम केवल अपनी जान एवं माल की रक्षा के लिए मुसलमान होने का प्रदर्शन कर रहे हो। फिर तुम ग़नीमत के धन जैसे दुनिया के तुच्छ सामानों के लोभ में उसकी हत्या कर दो! सुनो, अल्लाह के पास बहुत-सी ग़नीमतें हैं, जो इससे बेहतर और बड़ी हैं। इससे पहले तुम भी इसी व्यक्ति की तरह थे, जो अपनी क़ौम से अपना ईमान छिपा रहा है। फिर अल्लाह ने इस्लाम की दौलत प्रदानकर तुमपर उपकार किया और तुम्हारे रक्त की रक्षा की। इसलिए छानबीन कर लिया करो। यक़ीनन अल्लाह से तुम्हारा कोई छोटे से छोटा कार्य भी छिपा नहीं है और वह तुम्हें उसका बदला देगा।

Nisa' 4:95

उज़्र वालों जैसे कि बीमार और अंधे लोगों के अलावा अल्लाह के रास्ते में जिहाद छोड़कर घर बैठ रहने वाले मोमिन तथा अल्लाह के मार्ग में अपनी जानों और मालों के साथ जिहाद करने वाले बराबर नहीं हो सकते। अल्लाह ने जान एवं माल के साथ जिहाद करने वालों को पद के एतिबार से, जिहाद से बैठे रहने वालों पर प्रधानता प्रदान किया है। जबकि जिहाद करने वालों और उचित कारण की बिना पर जिहाद से बैठे रहने वालों में से प्रत्येक को उसका वह प्रतिफल मिलेगा जिसका वह वह हक़दार है।परंतु अल्लाह ने जिहाद करने वालों को अपनी ओर से महान प्रतिफल देकर उन्हें जिहाद से बैठ रहने वालों पर श्रेष्ठता प्रदान किया है।

Nisa' 4:96

यह सवाब (स्वर्ग में) एक के ऊपर एक घरों, साथ ही साथ उनके पापों के क्षमादान और उनपर अल्लाह की दया के रूप में होगा। तथा अल्लाह अपने बंदों को बड़ा क्षमा करने वाला और उन पर दया करने वाला है।

Nisa' 4:97

फ़रिश्ते जिन लोगाों के प्राण इस हाल में निकालते हैं कि वे कुफ़्र की नगरी से इस्लाम की नगरी की तरफ़ हिजरत न करके अपने ऊपर अत्याचार करने वाले होते हैं, तो फरिश्ते उनका प्राण निकालते समय उन्हें फटकार लगाते हुए कहते हैं : तुम किस हाल में थे? और तुम किस चीज़ के द्वारा मुश्रिकों से भिन्न थे? तो वे कारण बताते हुए जवाब देते हैं : हम कमज़ोर व असहाय थे, हमारे पास इतनी शक्ति और ताक़त नहीं थी जिससे हम अपना बचाव कर सकते। तो फ़रिश्ते उन्हें फटकारते हुए कहेंगे : क्या अल्लाह की धरती विस्तृत नहीं थी कि तुम उसमें हिजरत कर जाते ताकि तुम अपने धर्म और अपने आपको अपमान और उत्पीड़न से बचा सकते?! अतः वे लोग जिन्होंने हिजरत नहीं किया, उनका ठिकाना जहाँ वे रहेंगे, नरक है और वह उनके लिए बहुत ही बुरा ठिकाना है।

Nisa' 4:98

परंतु सज़ा की इस धमकी से उज़्र वाले कमज़ोर व लाचार पुरुष, स्त्री और बच्चे अलग हैं, जिनके पास अपने आपसे अत्याचार और उत्पीड़न को हटाने की शक्ति नहीं है तथा वे अपने उत्पीड़न से छुटकारा पाने का कोई रास्ता नहीं पाते हैं। तो अल्लाह ऐसे लोगों को अपनी दया व कृपा से निश्चय ही माफ़ कर देगा। अल्लाह अपने बंदों को माफ़ करने वाला और उनमें से तौबा करने वालों को क्षमा करने वाला है।

Nisa' 4:99

परंतु सज़ा की इस धमकी से उज़्र वाले कमज़ोर व लाचार पुरुष, स्त्री और बच्चे अलग हैं, जिनके पास अपने आपसे अत्याचार और उत्पीड़न को हटाने की शक्ति नहीं है तथा वे अपने उत्पीड़न से छुटकारा पाने का कोई रास्ता नहीं पाते हैं। तो अल्लाह ऐसे लोगों को अपनी दया व कृपा से निश्चय ही माफ़ कर देगा। अल्लाह अपने बंदों को माफ़ करने वाला और उनमें से तौबा करने वालों को क्षमा करने वाला है।

Nisa' 4:100

जो व्यक्ति अल्लाह की प्रसन्नता प्राप्त करने के लिए कुफ़्र के देश से इस्लाम के देश की ओर हिजरत करेगा, वह उस भूमि में जिसमें उसने पलायन किया है एक नया स्थान और ज़मीन पाएगा, जहाँ उसे गौरव और व्यापक आजीविका प्राप्त होगी। तथा जो व्यक्ति अपने घर से अल्लाह और उसके रसूल की ओर हिजरत के उद्देश्य से निकलता है, फिर उसके अपने प्रवास स्थल पर पहुँचने से पहले उसकी मृत्यु हो जाती है, तो अल्लाह के यहाँ उसका सवाब निश्चित हो गया। इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता कि वह अपने प्रवास स्थल तक नहीं पहुँच सका। तथा अल्लाह अपने तौबा करने वाले बंदों को क्षमा करने वाला और उनपर दया करने वाला है।

Nisa' 4:101

जब तुम धरती में यात्रा करो और काफ़िरों की ओर से कोई कष्ट पहुँचने का डर हो, तो चार रक्अत वाली नमाज़ों को क़स्र (कम) करके दो रक्अत पढ़ने में तुमपर कोई गुनाह नहीं है। निःसंदेह काफ़िरों की तुमसे दुश्मनी बिल्कुल खुली हुई स्पष्ट है। तथा सहीह सुन्नत (हदीस) से साबित है कि सुरक्षा की स्थिति में भी यात्रा करने में नमाज़ को क़स्र करना जायज़ है।

Nisa' 4:102

जब - ऐ रसूल! - आप दुश्मन से युद्ध के समय सेना के साथ रहें और लोगों को नमाज़ पढ़ाना चाहें, तो सेना को दो समूहों में विभाजित कर दें : एक समूह आपके साथ नमाज़ पढ़े और नमाज़ के समय हथियार अपने साथ रखे। दूसरा समूह तुम्हारी पहरेदारी करे। जब पहला समूह इमाम के साथ एक रक्अत पढ़ ले, तो अकेले नमाज़ पूरी कर ले। जब वह नमाज़ पढ़ चुके तो तुम्हारे पीछे दुश्मन की ओर खड़ा हो जाए और वह समूह आए जो पहरेदारी में लगे होने के कारण नमाज़ नहीं पढ़ सका था और इमाम के साथ एक रक्अत नमाज़ पढ़े। जब इमाम सलाम फेर दे, तो वह अपनी बाक़ी नमाज़ पूरी करे और दुश्मन से बचाव के लिए अपने हथियार उठाए रखे। क्योंकि काफ़िर चाहते हैं कि नमाज़ के समय तुम अपने हथियारों और सामानों से बेख़बर हो जाओ और वे तुमपर यकायक धावा बोल दें और तुम्हारी असावधानी की हालत में तुम्हें पकड़ लें। यदि वर्षा के कारण तुम्हें कष्ट हो अथवा तुम बीमार आदि हो, तो तुमपर कोई गुनाह नहीं है कि तुम अपने हथियार रख दो और उसे उठाए न रहो, परंतु जहाँ तक हो सके अपने दुश्मन से सावधान रहो। निःसंदेह अल्लाह ने काफ़िरों के लिए अपमानकारी यातना तैयार कर रखी है।

Nisa' 4:103

जब - ऐ मोमिनो - तुम नमाज़ अदा कर चुको, तो खड़े, बैठे और लेटे अपनी सभी परिस्थितियों में तस्बीह, तहमीद और तहलील के साथ अल्लाह को याद करो। फिर जब तुम्हारा भय दूर हो जाए और तुम निश्चिंत हो जाओ तो नमाज़ को उसके अर्कान, वाजिबात और मुस्तह़ब्बात के साथ पूर्ण रूप से अदा करो, जैसा कि तुम्हें आदेश दिया गया है। निःसंदेह नमाज़ मोमिनों पर एक नियत समय के साथ फ़र्ज की गई है। उसे बिना किसी कारण के उसके निर्धारित समय से विलंब करना जायज़ नहीं है। यह किसी स्थान पर निवास करने की स्थिति में है, लेकिन यात्रा की हालत में तुम्हारे लिए दो नमाजों को एक साथ पढ़ना तथा चार रक्अत वाली नमाज़ को क़स्र करके दो रक्अत पढ़ना जायज़ है।

Nisa' 4:104

- ऐ मोमिनो - अपने काफ़िर दुश्मनों का पीछा करने में कमज़ोर और आलसी न बनो। यदि तुम्हें अपने आपको पहुँचने वाले क़त्ल और आघात से तकलीफ़ महसूस होती है, तो इसी तरह वे भी तकलीफ़ महसूस करते हैं जिस तरह तुम तकलीफ़ महसूस करते हो, तथा उन्हें भी कष्ट पहुँचता है जिस तरह तुमहें कष्ट पहुँचता है। अतः उनका धैर्य तुम्हारे धैर्य से बढ़कर नहीं होना चाहिए। क्योंकि तुम्हें अल्लाह से जिस सवाब, सहायता और समर्थन की आशा है, उसकी आशा उन्हें नहीं है। और अल्लाह अपने बंदों की स्थितियों से अवगत, तथा अपने प्रबंधन और विधान-रचना में हिकमत वाला है।

Nisa' 4:105

हमने - ऐ रसूल - आपकी ओर सत्य पर आधारित क़ुरआन उतारा है; ताकि आप लोगों के बीच उनके सभी मामलों में उसके अनुसार फ़ैसला करें, जो अल्लाह ने आपको सिखाया और आपके दिल में डाला है, न कि अपने मन की आकांक्षा और राय के अनुसार। तथा आप स्वयं के साथ विश्वासघात करने वालों और अमानतों में ख़यानत करने वालों के तरफ़दार न बनें कि उनसे अधिकार माँगने वालों से उनका बचाव करें।

Nisa' 4:106

अल्लाह से क्षमा और माफ़ी की याचना करें। निःसंदेह अल्लाह अपने तौबा करने वाले बंदे को क्षमा करने वाला और उसपर दया करने वाला है।

Nisa' 4:107

आप किसी ऐसे व्यक्ति का पक्ष न लें, जो विश्वासघात करता है और अपने विश्वासघात को छिपाने में अतिशयोक्ति करता है। और अल्लाह ऐसे व्यक्ति को पसंद नहीं करता जो बहुत विश्वासघात और पाप करने वाला है।

Nisa' 4:108

वे गुनाह करते समय भय और शर्म के कारण लोगों से छिपते हैं, परंतु अल्लाह से नहीं छिपते। हालाँकि अल्लाह अपने ज्ञान के द्वारा उनके साथ होता है। उससे उस समय उनकी कोई बात छिपी नहीं होती है, जब वे गुप्त रूप से ऐसी बात की योजना बनाते हैं, जो अल्लाह को पसंद नहीं है। जैसे कि दोषी का बचाव करना और निर्दोष पर आरोप लगाना। तथा वे जो कुछ गुप्त रूप से और सार्वजनिक रूप से करते हैं, अल्लाह उससे अच्छी तरह अवगत है। उससे कुछ भी छिपा नहीं है और वह उन्हें उनके कार्यों का बदला देगा।

Nisa' 4:109

सुनो, - ऐ इन अपराध करने वालों की परवाह करने वालो!- तुमने दुनिया के जीवन में इनकी ओर से झगड़ लिया ताकि तुम इनकी बेगुनाही साबित कर सको और उन्हें सज़ा से बचा सको। परंतु क़यामत के दिन इनकी ओर से अल्लाह के साथ कौन बहस करेगा, जबकि वह इनकी स्थिति की सच्चाई को जानता है?! तथा उस दिन इनका वकील कौन होगा?! इसमें कोई शक नहीं कि कोई भी ऐसा नहीं कर सकता।

Nisa' 4:110

जो व्यक्ति कोई बुरा काम करे अथवा पाप करके अपने ऊपर अत्याचार करे, फिर वह अपने गुनाह को स्वीकारते हुए, उसपर पछतावा करते हुए और उसे छोड़ते हुए अल्लाह से क्षमा याचना करे, तो वह अल्लाह को हमेशा उसके गुनाहों को क्षमा करने वाला, उसपर दयावान पाएगा।

Nisa' 4:111

जो व्यक्ति कोई छोटा या बड़ा पाप करता है, तो उसकी सज़ा अकेले उसी पर है, उसके अलावा किसी और पर नहीं। तथा अल्लाह बंदों के कृत्यों को जानने वाला, अपने प्रबंधन और विधान-रचना में हिकमत वाला है।

Nisa' 4:112

जो व्यक्ति बिना सोचे समझे कोई ग़लती कर बैठे अथवा जानबूझकर कोई पाप कर ले, फिर उसका आरोप किसी ऐसे आदमी पर मढ़ दे जो उस पाप से निर्दोष है, तो उसने ऐसा करके गंभीर झूठ और खुले गुनाह का बोझ लाद लिया।

Nisa' 4:113

और (ऐ रसूल!) यदि अल्लाह ने अपने अनुग्रह से आपको बचाया न होता, तो अपने साथ विश्वासघात करने वाले इन लोगों के एक समूह ने आपको सत्य से गुमराह करने का निर्णय कर लिया था, ताकि आप न्याय के बिना फ़ैसला करें। हालाँकि वास्तव में वे केवल अपने आपको गुमराह कर रहे हैं। क्योंकि उनके गुमराह करने के प्रयास का परिणाम उन्हीं को भुगतना पड़ेगा। और अल्लाह के आपको संरक्षण प्रदान करने के कारण वे आपको नुकसान नहीं पहुँचा सकते हैं। अल्लाह ने आप पर क़ुरआन एवं सुन्नत उतारी है और आपको हिदायत एवं प्रकाश का वह ज्ञान प्रदान किया है, जो आप उससे पहले नहीं जानते थे। तथा नुबुव्वत (ईश्दूतत्व) और संरक्षण द्वारा आपपर अल्लाह का अनुग्रह बहुत बड़ा था।

Nisa' 4:114

बहुत-सी ऐसी बातें जो लोग छिपाकर करते हैं,उनमें कोई भलाई नहीं है और न उनसे कोई लाभ मिलता है। हाँ, अगर उनकी बात में दान का या किसी ऐसी बात (नेकी) का आदेश हो जो शरीयत द्वारा आई हो और बुद्धि ने उसकी पुष्टि की हो, या दो झगड़ने वालों के बीच सुलह-सफाई का आह्वान हो (तो यह भली बात है)। तथा जो व्यक्ति अल्लाह की प्रसन्नता प्राप्त करने के लिए ऐसा करेगा, हम जल्द ही उसे बहुत बड़ा सवाब प्रदान करेंगे।

Nisa' 4:115

जो अपने सामने सत्य स्पष्ट हो जाने के बावजूद रसूल से दुश्मनी करेगा, उनके लाए हुए धर्म का विरोध करेगा और मोमिनों के मार्ग को छोड़कर दूसरे मार्ग पर चलेगा, हम उसे उसके चुने हुए मार्ग पर छोड़ देंगे। उसके जानबूझकर सत्य से मुँह फेरने के कारण हम उसे सत्य मार्ग की तौफ़ीक़ नहीं देंगे और उसे जहन्नम की आग में दाख़िल करेंगे, जहाँ वह उसके ताप को झेलेगा। यह उसमें रहने वालों का बुरा ठिकाना है।

Nisa' 4:116

निःसंदेह अल्लाह इस बात को क्षमा नहीं करेगा कि किसी को उसका साझी बनाया जाए, बल्कि साझी बनाने वाले को हमेशा के लिए जहन्नम में डाल देगा। लेकिन शिर्क से कमतर गुनाहों को जिसके लिए चाहेगा अपनी दया एवं कृपा से माफ़ कर देगा। जो किसी को अल्लाह का साझी बनाता है, वह निश्चय ही सत्य मार्ग से भटक गया और उससे बहुत दूर हो गया; क्योंकि उसने सृष्टि और सृष्टिकर्ता को बराबर बना दिया।

Nisa' 4:117

ये मुश्रिक (बहुदेववादी) अल्लाह के साथ जिनकी पूजा करते और पुकारते हैं, वे केवल महिलाओं के नाम की मूर्तियाँ हैं, जैसे कि लात और उज़्ज़ा,जो न लाभ पहुँचा सकती हैं, न हानि। वास्तव में, वे केवल एक ऐसे शैतान की पूजा करते हैं जो अल्लाह की आज्ञाकारिता से निकला हुआ है और उसमें कोई अच्छाई नहीं है; क्योंकि उसी ने उन्हें मूर्तियों की पूजा करने का आदेश दिया है।

Nisa' 4:118

इसलिए, अल्लाह ने उसे अपनी दया से निष्कासित कर दिया। इस शैतान ने क़सम खाकर अपने पालनहार से कहा था : मैं अवश्य तेरे बंदों में से एक ज्ञात हिस्सा अपने साथ कर लूँगा, जिन्हें सत्य से बहकाऊँगा।

Nisa' 4:119

मैं उन्हें ज़रूर तेरे सीधे मार्ग से रोकूँगा, उन्हें अवश्य उनकी गुमराही को सजाने वाले झूठे वादों के साथ उम्मीदें दिलाऊँगा। अल्लाह के हलाल किए हुए जानवरों को हराम करने के लिए, उन्हें जानवरों के कान काटने का आदेश दूँगा। तथा उन्हें अल्लाह की रचना और उसकी प्रकृति को बदलने के लिए भी ज़रूर आदेश दूँगा। तथा जो शैतान को अपना सहायक व दोस्त बनाकर, उससे दोस्ती निभाता और उसकी आज्ञा का पालन करता है, तो वह धिक्कारित शैतान से वफादारी करके एक स्पष्ट नुक़सान में पड़ गया।

Nisa' 4:120

शैतान उनसे झूठे वादे करता है और उन्हें झूठी उम्मीदें दिलाता है। हालाँकि, वास्तव में, वह उनसे झूठा वादा करता है, जिसकी कोई सच्चाई नहीं होती है।

Nisa' 4:121

शैतान के नक्शेकदम और उसकी सिखाई हुई बातों का पालन करने वाले लोगों का ठिकाना जहन्नम की आग है, जिससे भाग निकलने का कोई स्थान नहीं पाएँगे जहाँ वे पनाह ले सकें।

Nisa' 4:122

जो लोग अल्लाह पर ईमान लाए और उससे क़रीब करने वाले अच्छे कार्य किए, हम उन्हें ऐसी जन्नतों में दाख़िल करेंगे, जिनके महलों के नीचे से नहरें बहती है। वे उनमें हमेशा के लिए रहेंगे। यह अल्लाह का वचन है और उसका वचन सच्चा है। क्योंकि वह वचन को नहीं तोड़ता है और अल्लाह से बढ़कर वचन में सच्चा कोई नहीं।

Nisa' 4:123

मोक्ष और सफलता का मामला - ऐ मुसलमानो! - तुम्हारी कामनाओं पर या अह्ले किताब की कामनाओं पर निर्भर नहीं है। बल्कि, यह मामला काम से जुड़ा है। इसलिए तुममें से जो भी बुरा काम करेगा, क़यामत के दिन उसका बदला पाएगा। उसे अल्लाह के सिवा कोई संरक्षक नहीं मिलेगा, जो उसे लाभ पहुँचा सके और न उसे कोई सहायक मिलेगा, जो उससे नुक़सान को टाल सके।

Nisa' 4:124

जो भी अच्छे कार्य करता है, चाहे नर हो या नारी और वह अल्लाह पर सच्चा ईमान भी रखने वाला है, तो ऐसे लोग जिन्होंने ईमान के साथ सत्कर्म भी किया, जन्नत में प्रवेश करेंगे। उनके कार्यों के प्रतिफल में कुछ भी कमी नहीं की जाएगी, भले ही वह खजूर की गुठली के ऊपरी भाग के गड्ढे जितना कम क्यों न हो।

Nisa' 4:125

उस व्यक्ति से बेहतर धर्म किसी का नहीं है, जो बाहरी और आंतरिक रूप से अल्लाह के प्रति समर्पित हो जाए, अपनी नीयत को उसके लिए विशुद्ध कर ले, उसकी शरीयत का पालनकर अपने कार्य को अच्छा कर ले और शिर्क एवं कुफ़्र से कटकर तौहीद और ईमान की ओर एकाग्र होकर, इबराहीम अलैहिसस्सलाम के धर्म का अनुसरण करे, जो मुह़म्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के धर्म का मूल है। अल्लाह ने अपने नबी इबराहीम अलैहिस्सलाम को सारे लोगों के बीच पूर्ण प्रेम के लिए चुन लिया है।

Nisa' 4:126

आसमानों और ज़मीन की सारी चीज़ों का राज्य अकेले अल्लाह का है और अल्लाह अपनी सृष्टि की हर चीज़ को अपने ज्ञान, शक्ति और प्रबंधन के साथ घेरे हुए है।

Nisa' 4:127

- ऐ रसूल - लोग आपसे स्त्रियों के मामले में तथा उनके अधिकारों और कर्तव्यों के बारे में पूछते हैं। आप उनसे कह दें : अल्लाह तुम्हारे इस प्रश्न का उत्तर देता है और तुम्हारे लिए कुरआन की वह आयतें भी बयान करता हैं, जो उन अनाथ स्त्रियों के विषय में तुम्हें पढ़कर सुनाई जाती हैं जो तुम्हारी अभिभावकता के अंतर्गत होती हैं और तुम उन्हें अल्लाह की ओर से उनके लिए निर्धारित किए गए महर या विरासत से वंचित रखते हो। तुम स्वयं उनसे शादी नहीं करना चाहते और उनके धन के लालच में उन्हें शादी करने से भी रोकते हो। वह तुम्हारे लिए कमज़ोर बच्चों के अधिकारों को भी स्पष्ट करता है कि उन्हें विरासत में उनका अधिकार दो और उनके धन पर क़ब्ज़ा जमाकर उन पर अत्याचार न करो। तथा तुम्हारे लिए यह दायित्व भी बयान करता है कि अनाथों के मामलों का न्याय के साथ इस तरह प्रबंधन करो, जिससे दुनिया एवं आख़िरत में उनका भला हो। तुम अनाथों और अन्य लोगों के लिए जो भी अच्छा करोगे, अल्लाह उससे अवगत है और तुम्हें उसका बदला देगा।

Nisa' 4:128

यदि किसी स्त्री को अपने पति से इस बात का भय हो कि वह उसकी उपेक्षा कर रहा है और उसमें रुचि नहीं ले रहा है, तो उन दोनों पर आपस में समझौता कर लेने में कोई गुनाह नहीं है, इस प्रकार कि वह पति पर अपने कुछ अनिवार्य अधिकारों जैसे- भरण-पोषण एवं रात गुज़ारने की बारी के अधिकार, को छोड़ दे। यहाँ सुलह करना उन दोनों के लिए तलाक़ से बेहतर है। हालाँकि लोभ और कंजूसी मानव स्वभाव में शामिल हैं। इसलिए वह अपने अधिकारों को छोड़ना नहीं चाहती है। ऐसे में पति-पत्नी को इस स्वभाव का उपचार, स्वयं का उदारहृदयता और परोपकार पर प्रशिक्षण करके करना चाहिए। यदि तुम अपने सभी मामलों में उपकार का रास्ता अपनाओ और अल्लाह से, उसके आदेशों का पालन करके और उसकी मना की हुई चीज़ों का परित्याग करके, डरते रहो, तो अल्लाह तुम्हारे कर्मों से अवगत है, उससे कुछ भी छिपा नहीं है और वह तुम्हें उसका बदला देगा।

Nisa' 4:129

- ऐ पतियो - तुम चाहते हुए भी, दिली लगाव के मामले में पत्नियों के साथ पूरी तरह से न्याय नहीं कर सकते। इसके कुछ कारण हैं, जो तुम्हारे नियंत्रण से बाहर हो सकते हैं। इसलिए उस पत्नी से पूरी तरह विमुख न हो जाओ, जो तुम्हें पसंद नहीं है। फिर तुम उसे अधर में लटकी हुई की तरह छोड़ दो; न तो उसका कोई पति है, जो उसका हक़ अदा करे, और न वह बिना पति वाली है कि शादी की अपेक्षा करे। यदि तुम अपने बीच के मामलों को सुधार लो इस प्रकार कि दिल के न चाहते हुए भी अपने आपको पत्नी के अधिकारों का निर्वाहन करने के लिए बाध्य कर लो और पत्नी के मामले में अल्लाह से डरते रहो, तो अल्लाह बड़ा क्षमा करने वाला और तुम पर दयावान है।

Nisa' 4:130

यदि तलाक़ या ख़ुलअ के द्वारा पति-पत्नी एक दूसरे से अलग हो जाएँ, तो अल्लाह उनमें से प्रत्येक को अपने व्यापक अनुग्रह से समृद्ध कर देगा। अल्लाह व्यापक अनुग्रह एवं दया वाला, तथा अपने प्रबंधन और तक़दीर (नियति) में हिकमत वाला है।

Nisa' 4:131

जो कुछ आकाशों और धरती में तथा जो कुछ उन दोनों के बीच है, उन सब का मालिक केवल अल्लाह है। हमने किताब वाले यहूदियों और ईसाइयों को आदेश दिया था और तुम्हें भी आदेश दिया है कि अल्लाह के आदेशों का पालन करो और उसकी मना की हुई चीज़ों से बचो। यदि तुम इस आदेश का इनकार करोगे, तो केवल अपने आप को नुक़सान पहुँचाओग।क्योंकि अल्लाह तुम्हारी आज्ञाकारिता से बेपरवाह है। वह तो आसमानों और ज़मीन की सारी चीज़ों का मालिक है, और वह अपनी सारी रचनाओं से बेनियाज़ और अपने सभी गुणों और कार्यों पर स्तुति के योग्य है।

Nisa' 4:132

आसमानों और ज़मीन की सारी चीज़ें केवल अल्लाह की हैं, जो आज्ञापालन के योग्य है और अल्लाह अपनी रचना के सभी मामलों का प्रभार लेने के लिए पर्याप्त है।

Nisa' 4:133

यदि वह चाहे, तो - ऐ लोगो - वह तुम्हें विनष्ट कर दे और तुम्हारे स्थान पर दूसरे लोगों को ले आए, जो अल्लाह की आज्ञा मानें और उसकी अवज्ञा न करें। तथा अल्लाह ऐसा करने में सक्षम है।

Nisa' 4:134

- ऐ लोगो! - तुममें से जो व्यक्ति अपने कार्य से केवल दुनिया का बदला चाहता है, वह जान ले कि अल्लाह के पास दुनिया और आखिरत दोनों का बदला है। इसलिए वह अल्लाह से दोनों का बदला माँगे। अल्लाह तुम्हारी बातों को सुनने वाला, तुम्हारे कार्यों को देखने वाला है और वह तुम्हें उनका बदला देगा।

Nisa' 4:135

ऐ अल्लाह पर ईमान रखने और उसके रसूल का अनुसरण करने वालो! अपनी सभी परिस्थितियों में न्याय पर जमे रहने वाले, हर एक के साथ सच्ची गवाही देने वाले बन जाओ। भले ही इसके लिए तुम्हें अपने आपके, या अपने माता-पिता या अपने रिश्तेदारों के विरुद्ध सच्च का इक़रार करना पड़े। किसी की ग़रीबी या अमीरी तुम्हें गवाही देने या न देने के लिए बाध्य न करे। क्योंकि अल्लाह उस ग़रीब और अमीर का तुमसे अधिक हक़दार है और उनके हितों को तुमसे अधिक जानता है। इसलिए अपनी गवाही में इच्छाओं का पालन न करें ताकि ऐसा न हो कि आप उसमें सत्य से हट जाएँ। यदि तुम गवाही को गलत तरीक़े से पेश करके उसमें हेर-फेर करोगे या गवाही देने से उपेक्षा करोगे, तो जान लो कि अल्लाह तुम्हारे सभी कार्यों से अवगत है।

Nisa' 4:136

ऐ ईमान वालो! अल्लाह और उसके रसूल पर अपने ईमान, उस कुरआन पर ईमान जिसे अल्लाह ने अपने रसूल (मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर अवतरित किया तथा उन किताबों पर अपने ईमान पर सुदृढ़ रहो जिन्हें उसने आपसे पहले रूसलूों पर अवतरित किया। जो अल्लाह, उसके फ़रिश्तों, उसकी किताबों, उसके रसूलों और क़यामत के दिन का इनकार करे, तो वह सीधे रास्ते से बहुत दूर हो गया।

Nisa' 4:137

जो लोग ईमान लाने के बाद बार-बार कुफ़्र करते रहे, इस प्रकार कि वे ईमान लाए, फिर उससे पलट गए, इसके बाद उन्होंने फिर से ईमान में प्रवेश किया, फिर उससे पलट गए और कुफ़्र पर जमे रहे और उसी हाल में मर गए; तो अल्लाह उनके पापों को क्षमा नहीं करेगा और न ही उन्हें उस सीधे रास्ते का मार्गदर्शन करेगा जो उस सर्वशक्तिमान तक पहुँचाने वाला है।

Nisa' 4:138

- ऐ रसूल! - मुनाफ़िकों को, जो ईमान का प्रदर्शन करते हैं और अपने दिलों में कुफ़्र छिपाए होते हैं, शुभ-सूचना सुना दें कि उनके लिए क़यामत के दिन अल्लाह के पास दर्दनाक यातना है।

Nisa' 4:139

इस यातना कारण यह है कि उन्होंने मोमिनों को छोड़कर काफ़िरों को अपना समर्थक और सहायक बना लिया। यह बात आश्चर्यजनक है जिसने उन्हें उनका वफादार बना दिया। क्या वे उनसे शक्ति एवं बल-प्रतिष्ठा प्राप्त करके अपना वैभव बढ़ाना चाहते हैं?! तो उन्हें याद रखना चाहिए कि सारी शक्ति एवं बल-प्रतिष्ठा का मालिक केवल अल्लाह है।

Nisa' 4:140

- ऐ मोमिनो! - अल्लाह ने तुम्हारे लिए पवित्र क़ुरआन में अवतरित किया है कि जब तुम किसी सभी में बैठो और वहाँ किसी को अल्लाह की आयतों का इनकार करते हुए और उनका मज़ाक़ उड़ाते हुए सुनो; तो उनके साथ न बैठो और वहाँ से उठकर चल दो, यहाँ तक कि वे अल्लाह की आयतों का इनकार और उनका मज़ाक़ छोड़कर कोई दूसरी बात शुरू कर दें। यदि तुमने ऐसा नहीं किया और सब कुछ सुनने के बावजूद बैठे रहे, तो उन्हीं की तरह अल्लाह के आदेश का उल्लंघन करने वाले बन जाओगे। क्योंकि तुमने वहाँ बैठकर अल्लाह की अवज्ञा की है, जिस तरह कि उन्होंने कुफ़्र करके अल्लाह की अवज्ञा की है। निःसंदेह, अल्लाह मुनाफ़िक़ों को जो ईमान को प्रदर्शित करते और कुफ़्र को गुप्त रखते हैं, क़यामत के दिन काफ़िरों के साथ जहन्नम में एकत्रित करेगा।

Nisa' 4:141

जो तुम्हें पहुँचने वाली अच्छाई या बुराई की प्रतीक्षा में रहते हैं। यदि अल्लाह की ओर से तुम्हें विजय प्राप्त होता है और तुम्हें ग़नीमत का धन मिलता है, तो वे तुमसे कहते हैं : क्या हम तुम्हारे साथ नहीं थे, जिस युद्ध में तुम उपस्थित हुए हम भी उपस्थित हुए?! ताकि वे ग़नीमत से हिस्सा पा सकें। और यदि काफ़िरों को कुछ हिस्सा मिल जाए, तो उनसे कहते हैं : क्या हमने तुम्हारे मामलों का ध्यान नहीं रखा, तुम्हारी देखभाल और समर्थन नहीं किया, तथा तुम्हारी मदद करके और उनका अत्साह भंग करके, मोमिनों से तुम्हारा बचाव नहीं किया?! अतः अल्लाह तुम सब के बीच क़ियामत के दिन निर्णय कर देगा। चुनाँचे मोमिनों को जन्नत में दाख़िल करेगा और मुनाफिक़ों को जहन्नम के सबसे निचले क्षेत्र में दाख़िल करेगा। तथा अल्लाह, अपनी कृपा से, क़ियामत के दिन काफ़िरों को मोमिनों के ख़िलाफ तर्क (हुज्जत) प्रदान नहीं करेगा, बल्कि वह अंतिम परिणाम ईमान वालों ही का बनाएगा जब तक वे सच्चे ईमान वाले, शरीयत के अनुसार कार्य करने वाले होंगे।

Nisa' 4:142

मुनाफ़िक़ लोग इस्लाम का प्रदर्शन करके और अविश्वास को गुप्त रखकर अल्लाह को धोखा देते हैं, हालाँकि अल्लाह ही उन्हें धोखे में डाल रहा है। क्योंकि उसने उनके अविश्वास से अवगत होने के बावजूद उनके खून को सुरक्षित कर दिया है और आख़िरत में उनके लिए सबसे कठोर दंड तैयार किया है। और जब वे नमाज़ के लिए खड़े होते हैं, तो आलसी होकर उसे नापसंद करते हुए खड़े होते हैं। उनका उद्देश्य लोगों को दिखाना और उनका सम्मान होता है, और वे अल्लाह के लिए निष्ठावान नहीं होते हैं तथा अल्लाह को केवल थोड़ा ही याद करते हैं जब वे मोमिनों को देखते हैं।

Nisa' 4:143

ये मुनाफ़िक़ लोग हैरानी और असमंजस में पड़े हुए हैं। चुनाँचे वे प्रत्यक्ष एवं प्रोक्ष रूप से न मुसलमानों के साथ हैं और न काफ़िरों के साथ। बल्कि वे प्रत्यक्ष रूप से मुसलमानों के साथ हैं, और प्रोक्ष रूप से काफ़िरों के साथ हैं। और जिसे अल्लाह गुमराह कर दे, तो - ऐ रसूल! - आप उसके लिए पथभ्रष्टता से मार्गदर्शन पर लाने का हरगिज़ कोई रास्ता नहीं पाएँगे।

Nisa' 4:144

ऐ अल्लाह पर ईमान रखने और उसके रसूल का अनुसरण करने वालो! अल्लाह के साथ कुफ़्र करनेवालों को घनिष्ठ मित्र न बनाओ कि मोमिनों को छोड़कर उनसे दोस्ती गाँठो। क्या तुम अपने इस कार्य से अल्लाह को, अपने यातना के हक़दार होने का स्पष्ट प्रमाण देना चाहते हो?

Nisa' 4:145

अल्लाह तआला क़यामत के दिन मुनाफ़िक़ों को नरक के सबसे निचले स्थान में जगह देगा और तुम उनका हरगिज़ कोई सहायक नहीं पाओगे,जो उनसे यातना को हटा सके।

Nisa' 4:146

परंतु जो लोग अपने निफ़ाक़ (पाखंड) से पश्चाताप करके अल्लाह की ओर लौट आए, अपने अंतरमन को सुधार लिया, अल्लाह की प्रतिज्ञा का पालन किया और अपने कार्य को दिखावा किए बिना अल्लाह के लिए विशुद्ध कर दिया, तो इन गुणों वाले लोग दुनिया एवं आख़िरत में मोमिनों के साथ होंगे, और अल्लाह मोमिनों को बड़ा प्रतिफल प्रदान करेगा।

Nisa' 4:147

यदि तुम अल्लाह के आभारी बनो और उसपर ईमान रखो, तो उसे तुम्हें यातना देने की कोई ज़रूरत नहीं है। क्योंकि वह सर्वशक्तिमान बड़ा उपकारी अत्यंत दयावान है। वह तुम्हें केवल तुम्हारे गुनाहों के कारण यातना देता है। यदि तुमने अपने कार्य सुधार लिए, अल्लाह के प्रति उसकी नेमतों पर आभार प्रकट करते रहे और प्रत्यक्ष एवं प्रोक्ष रूप से उसपर ईमान लाए, तो वह तुम्हें हरगिज़ यातना नहीं देगा। अल्लाह उन लोगों का क़द्रदान (गुणग्राहक) है जिन्होंने उसकी नेमतों को स्वीकार किया, चुनाँचे वह उन्हें उसपर भरपूर बदला प्रदान करेगा। वह अपने बंदों के ईमान से अवगत है और हर एक को उसके कर्मों का बदला देगा।

Nisa' 4:148

अल्लाह बुरी बात के साथ आवाज़ ऊँची करना पसंद नहीं करता, बल्कि उसे नापसंद करता और उस पर सज़ा की धमकी देता है। परंतु जिसपर अत्याचार हुआ हो, उसे अपने उत्पीड़क के बारे में शिकायत करने, उसपर बद्-दुआ करने और उससे उसी के समान शब्दों के साथ बदला लेने के लिए, बुरी बात के साथ आवाज़ ऊँची करने की अनुमति है। लेकिन उत्पीड़ित का धैर्य से काम लेना, बुरी बात के साथ आवाज़ बुलंद करने से बेहतर है। अल्लाह तुम्हारी बातों को सुनने वाला, तुम्हारे इरादों को जानने वाला है। इसलिए बुरे शब्दों या इरादों से सावधान रहो।

Nisa' 4:149

यदि तुम कोई भली बात या भला कार्य प्रकट करो, या उसे छिपाओ, या उस व्यक्ति को क्षमा कर दो, जिसने तुमसे बुरा व्यवहार किया है; तो निःसंदेह अल्लाह बहुत माफ़ करने वाला, सर्वशक्तिमान है। इसलिए क्षमा करना तुम्हारे आचरण का हिस्सा होना चाहिए, शायद अल्लाह तुम्हें क्षमा कर दे।

Nisa' 4:150

जो लोग अल्लाह के साथ कुफ़्र करते और उसके रसूलों के साथ कुफ़्र करते हैं, तथा अल्लाह और उसके रसूलों के बीच अंतर करना चाहते हैं; कि वे अल्लाह पर ईमान लाएँ, परंतु उसके रसूलों का इनकार कर दें। तथा वे कहते हैं : हम कुछ रसूलों पर विश्वास करते हैं और उनमें से कुछ पर विश्वास नहीं करते। इस प्रकार वे कुफ़्र और ईमान के बीच का रास्ता अपनाना चाहते हैं, यह भ्रम रखते हुए कि यह उन्हें बचा लेगा।

Nisa' 4:151

जो लोग यह रास्ता अपनाते हैं, वही सचमुच काफ़िर हैं; क्योंकि जिसने समस्त रसूलों या उनमें से कुछ का इनकार किया, उसने दरअसल अल्लाह और उसके रसूलों के साथ कुफ़्र किया। और हमने काफ़िरों के लिए क़ियामत के दिन उन्हें अपमानित करने वाली यातना तैयार कर रखी है, जो उनके अल्लाह और उसके रसूलों पर ईमान लाने से अहंकार करने की सज़ा के रूप में है।

Nisa' 4:152

जो लोग अल्लाह पर ईमान लाए और उसे एक माना, और उसके साथ किसी को साझी नहीं ठहराया, तथा उसके सभी रसूलों पर ईमान लाए और काफ़िरों की तरह उनमें से किसी के बीच अंतर नहीं किया, बल्कि उन सभी पर ईमान लाए; यही लोग हैं जिन्हें अल्लाह उनके ईमान तथा अच्छे कर्मों का बड़ा बदला प्रदान करेगा, और अल्लाह अपने तौबा करने वाले बंदों को बहुत क्षमा करने वाला, उनपर अति दयालु है।

Nisa' 4:153

(ऐ रसूल!) यहूदी आपसे माँग करते हैं कि जैसे मूसा के साथ हुआ, वैसे ही आप उनके लिए आकाश से एक ही बार में कोई पुस्तक उतार लाएँ, जो आपकी सच्चाई की निशानी हो। तो आप इसे उनकी ओर से कोई बड़ा माँग न समझें। क्योंकि उनके पूर्वजों ने मूसा अलैहिस्सलाम से इससे कहीं बड़ी माँग की थी जो इन लोगों ने आपसे की है। उन्होंने कहा था कि "हमें अल्लाह को आमने-सामने दिखा दो", चुनाँचे उन्हें सज़ा के तौर पर बेहोश कर दिया गया। फिर अल्लाह ने उन्हें पुनर्जीवित किया, तो उन्होंने अल्लाह को छोड़कर बछड़े की पूजा की, हालाँकि उनके पास अल्लाह के एकत्व और उसके एकमात्र रब (पालनहार) और पूज्य होने को दर्शाने वाली स्पष्ट निशानियाँ आ चुकी थीं। फिर हमने उन्हें क्षमा कर दिया, तथा मूसा - अलैहिस्सलाम - को उनकी जाति के विरुद्ध स्पष्ट तर्क प्रदान किया।

Nisa' 4:154

तथा हमने उनसे दृढ़ वचन लेने के कारण, उसके अनुसार काम करने के लिए उन्हें डराने के लिए पहाड़ को उनके ऊपर उठा लिया, और उसे उठाने के बाद हमने उनसे कहा : बैतुल मक़दिस के द्वार में सजदा करते हुए सिर झुकाकर प्रवेश करो। परंतु वे अपनी पीठ के बल घिसटते हुए भीतर गए। तथा हमने उनसे कहा : शनिवार को शिकार करके अति न करो। लेकिन उन्होंने अति किया, सो उन्होंने शिकार किया। तथा हमने उनसे इस बात का कड़ा वचन लिया, पर उन्होंने उस वचन को तोड़ दिया जो उनसे लिया गया था।

Nisa' 4:155

अतः हमने उन्हें अपनी दया से दूर कर दिया, क्योंकि उन्होंने उस दृढ़ वचन को तोड़ दिया, जो उनसे लिया गया था, तथा इस कारण कि उन्होंने अल्लाह की निशानियों का इनकार किया और नबियों की हत्या करने का दुस्साहस किया एवं मुहम्मद - सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम - से कहा कि : "हमारे दिल एक आवरण में हैं, इसलिए आप जो कहते हैं उसे नहीं समझते।" जबकि मामला ऐसा नहीं है। बल्कि अल्लाह ने उनके कुफ़्र के कारण उनके दिलों पर मुहर लगा दी है, इसलिए कोई अच्छाई उन तक नहीं पहुँचती। अतः वे बहुत कम ईमान लाते हैं, जिससे उन्हें कोई फायदा नहीं होता है।

Nisa' 4:156

और हमने उन्हें उनके कुफ़्र के कारण, तथा इस कारण दया से निकाल दिया कि उन्होंने मरयम - अलैहस्सलाम - पर व्यभिचार का झूठा और निराधार आरोप लगाया।

Nisa' 4:157

तथा हमने उनपर उनके गर्व करते हुए झूठमूठ यह कहने के कारण लानत भेजी : निःसंदेह हमने ही अल्लाह के रसूल मरयम के पुत्र ईसा मसीह को क़त्ल किया। हालाँकि न तो उन्होंने उन्हें क़त्ल किया, जैसा कि उनका दावा है, और न ही उन्हें सूली पर चढ़ाया। बल्कि उन्होंने एक ऐसे व्यक्ति को क़त्ल किया, जिसे अल्लाह ने ईसा - अलैहिस्सलाम - का सदृश बना दिया था और उसे सूली पर चढ़ाया। इसलिए उन्होंने सोचा कि क़त्ल होने वाला ईसा अलैहिस्सलाम ही थे। जिन यहूदियों ने ईसा अलैहिस्सलाम की हत्या का दावा किया और जिन ईसाइयों ने उन्हें यहूदियों के हवाले किया, दोनों ही उनके मामले में भ्रम और संदेह में हैं। क्योंकि उन्हें इसका कोई ज्ञान नहीं है। वे केवल अनुमान का पालन करते हैं और अनुमान से सच्चाई का कुछ भी लाभ नहीं होता है। उन्होंने निश्चित रूप से ईसा अलैहिस्सलाम को न तो क़त्ल किया और न उन्हें सूली पर चढ़ाया।

Nisa' 4:158

बल्कि अल्लाह ने ईसा अलैहिस्सलाम को उनकी साज़िश से बचा लिया और उन्हें उनके शरीर एवं आत्मा के साथ अपनी ओर उठा लिया। अल्लाह सदा से अपने राज्य में प्रभुत्वशाली है, कोई उसे पराजित नहीं कर सकता, अपने प्रबंधन, फ़ैसले और विधान में पूर्ण हिकमत वाला है।

Nisa' 4:159

अह्ले किताब (यहूदियों एवं ईसाइयों) में से हर व्यक्ति, ईसा अलैहिस्सलाम पर उनके अंतिम युग में उतरने के पश्चात और उनकी मृत्यु से पहले अवश्य ईमान लाएगा, तथा क़ियामत के दिन ईसा अलैहिस्सलाम उनके कर्मों के साक्षी होंगे; कि उनमें से क्या शरीयत के अनुसार है और क्या उसके ख़िलाफ़।

Nisa' 4:160

यहूदियों के अत्याचार के कारण, हमने उनपर कई पाकीज़ा खाने की चीज़ों को हराम कर दिया, जो उनके लिए हलाल थीं। चुनाँचे हमने उनपर हर नाख़ून (पंजे) से शिकार करने वाला पक्षी हराम कर दिया, तथा गायों और बकरियों में से हमने उनकी चर्बी को उनपर हराम कर दिया, सिवाय उस (चर्बी) के जो उन दोनों की पीठों से लगी हुई हो। इसका एक कारण यह भी था कि वे खुद को और दूसरों को अल्लाह के मार्ग से रोकते थे, यहाँ तक कि भलाई से रोकना उनका स्वभाव बन गया था।

Nisa' 4:161

तथा उनके ब्याज का लेन-देन करने के कारण, जबकि अल्लाह ने उन्हें उसे लेने से मना किया था, तथा लोगों के धन को बिना किसी उचित अधिकार के लेने के कारण। और हमने उनमें से काफ़िरों के लिए एक दर्दनाक अज़ाब तैयार किया है।

Nisa' 4:162

परंतु यहूदियों में से ठोस ज्ञान रखने वाले तथा ईमान लाने वाले लोग, उस क़ुरआन को सच्चा मानते हैं, जो अल्लाह ने (ऐ रसूल!) आपपर उतारा है, तथा वे उन किताबों को भी सत्य मानते हैं, जो आपसे पहले के रसूलों पर उतारी गई थीं, जैसे तौरात और इंजील, और वे नमाज़ क़ायम करते और अपने धन की ज़कात देते हैं, तथा इस बात पर विश्वास रखते हैं कि अल्लाह ही अकेला पूज्य है, जिसका कोई साझी नहीं, और क़ियामत के दिन को सत्य मानते हैं; ये लोग जिनके पास ये गुण हैं हम उन्हें बहुत बड़ा बदला प्रदान करेंगे।

Nisa' 4:163

हमने (ऐ रसूल!) आपकी ओर वैसे ही वह़्य (प्रकाशना) भेजी है, जैसे कि हमने आपसे पहले के नबियों की ओर वह़्य भेजी थी। इसलिए आप कोई अनोखे रसूल नहीं हैं। चुनाँचे हमने नूह की ओर वह़्य भेजी तथा उनके बाद आने वाले नबियों की ओर वह़्य भेजी, और हमने इबराहीम की ओर, उनके दोनों सुपुत्रों इसमाईल एवं इसहाक़ की ओर, तथा याक़ूब बिन इसहाक़ की ओर और असबात (यानी याक़ूब अलैहिस्सलाम के बेटों से निकलने वाले बनी इसराईल के बारह वंशों में होने वाले नबियों) की ओर वह़्य भेजी। तथा हमने ईसा, अय्यूब, यूनुस, हारून और सुलैमान की ओर वह़्य भेजी, और हमने दाऊद अलैहिस्सलाम को ज़बूर नामी पुस्तक दी।

Nisa' 4:164

हमने कुछ रसूल ऐसे भेजे, जिनके वृत्तांत हमने आपसे क़ुरआन में बयान कर दिए हैं, तथा कुछ रसूल ऐसे भेजे जिनके बारे में हमने आपसे उसमें कुछ बयान नहीं किया और किसी हिकमत के तहत उसमें उनका उल्लेख करना छोड़ दिया। तथा अल्लाह ने मूसा अलैहिस्सलाम से उनके सम्मान में उन्हें नबी बनाने के संबंध में - बिना मध्यस्थता के - वास्तविक रूप से बात की, जैसा उसकी महिमा के योग्य है।

Nisa' 4:165

हमने उन्हें अल्लाह पर ईमान लाने वालों को अच्छे प्रतिफल की शुभ सूचना देने वाला तथा उसके साथ कुफ़्र करने वालों को दर्दनाक यातना से डराने वाला बनाकर भेजा, ताकि रसूलों को भेजने के बाद लोगों के लिए अल्लाह के ख़िलाफ़ कोई तर्क न रह जाए, जिसे वे बहाना बना सकें। तथा अल्लाह अपने राज्य में प्रभुत्वशाली, अपने फ़ैसले में हिकमत वाला है।

Nisa' 4:166

यदि यहूद आपका इनकार करते हैं, तो अल्लाह उस क़ुरआन की प्रामाणिकता के संबंध में आपकी पुष्टि करता है, जो उसने (ऐ रसूल!) आपकी ओर उतारा है। अल्लाह ने उसमें अपना वह ज्ञान उतारा है, जिससे वह अपने बंदों को अवगत कराना चाहता है, कि वह किन चीज़ों को पसंद करता और उनसे प्रसन्न होता है या किन चीज़ों को नापसंद करता और उनसे नफरता करता है। अल्लाह की गवाही के साथ फ़रिश्ते भी उसकी सच्चाई की गवाही देते हैं जो आप लेकर आए हैं। तथा अल्लाह गवाह के रूप में पर्याप्त है। क्योंकि उसकी गवाही के बाद किसी दूसरे की गवाही की ज़रूरत नहीं।

Nisa' 4:167

निःसंदेह जिन लोगों ने आपके नबी होने का इनकार किया और लोगों को इस्लाम के मार्ग से रोका, निश्चय वे सत्य से बहुत दूर जा पड़े।

Nisa' 4:168

जिन लोगों ने अल्लाह और उसके रसूलों के साथ कुफ़्र किया और कुफ़्र पर बने रहकर ख़ुद पर ज़ुल्म किया, अल्लाह उनके कुफ़्र पर अटल रहने को कभी क्षमा नहीं करेगा, और न ही उन्हें अल्लाह की यातना से बचाने वाला मार्ग दर्शाएगा।

Nisa' 4:169

सिवाय उस रास्ते के जो जहन्नम में प्रवेश की ओर ले जाता है, जिसमें वे सदा-सर्वदा रहने वाले हैं। और यह काम अल्लाह के लिए बहुत ही आसान है, क्योंकि कोई भी चीज़ उसे विवश नहीं कर सकती।

Nisa' 4:170

ऐ लोगो! रसूल मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम तुम्हारे पास मार्गदर्शन और सत्य धर्म के साथ अल्लाह की ओर से आए हैं। अतः वह तुम्हारे पास जो कुछ लाए हैं उसपर ईमान ले आओ, यह दुनिया तथा आख़िरत में तुम्हारे लिए बेहतर होगा। यदि तुम अल्लाह के साथ कुफ़्र करते हो, तो अल्लाह तुम्हारे ईमान से बेनियाज़ है, तुम्हारा कुफ़्र करना उसे नुक़सान नहीं पहुँचाएगा। क्योंकि जो कुछ आकाशों में है और जो कुछ धरती में तथा इन दोनों के बीच है, सब उसके अधिकार में है। तथा अल्लाह उसके बारे में जानने वाला है जो मार्गदर्शन का पात्र है, इसलिए उसके लिए मार्गदर्शन को आसान बना देता है, और जो उसका हक़दार नहीं है, इसलिए उसे उससे अंधा कर देता है। वह अपनी बातों, कार्यों, विधान और नियति में पूर्ण हिकमत वाला है।

Nisa' 4:171

(ऐ रसूल!) आप इंजील वाले ईसाइयों से कह दें : तुम अपने धर्म में सीमा से परे मत जाओ तथा ईसा अलैहिस्सलाम के बारे में अल्लाह पर सत्य के अलावा कुछ भी न कहो। मरयम के बेटे ईसा मसीह अलैहिस्सलाम केवल अल्लाह के रसूल हैं, जिन्हें उसने सच्चाई के साथ भेजा। अल्लाह ने उन्हें अपने उस शब्द से पैदा किया, जिसे उसने जिबरील के साथ मरयम के पास भेजा। वह शब्द उसका 'कुन' (अर्थात् हो जा) कहना था, तो वह हो गए। यह दरअसल अल्लाह की ओर से एक फूँक थी, जो जिबरील ने अल्लाह की आज्ञा से (फूँक) मारी थी। अतः अल्लाह और उसके सभी रसूलों पर बिना किसी भेद (अंतर) के ईमान लाओ और यह मत कहो कि पूज्य तीन हैं। इस झूठी और भ्रष्ट बात से बाज़ आ जाओ! तुम्हारा इसे त्यागना तुम्हारे लिए दुनिया और आख़िरत में बेहतर होगा। अल्लाह केवल एक ही पूज्य है। वह साझी तथा संतान से सर्वोच्च है। क्योंकि वह हर चीज़ से बेनियाज़ है, जो कुछ आकाशों एवं धरती तथा उन दोनों के बीच में है, उन सबका मालिक वही है। तथा आकाशों और धरती की सारी चीज़ों के संरक्षक और उनके प्रबंधक के रूप में अल्लाह काफ़ी है।

Nisa' 4:172

ईसा बिन मरयम अलैहिस्सलाम अल्लाह का बंदा होने से कदापि उपेक्षा और संकोच नहीं करेंगे, और न ही वे फ़रिश्ते जिन्हें अल्लाह ने अपना निकटवर्ती बनाया और उनके पद को ऊँचा किया है, अल्लाह के बंदे होने से उपेक्षा करते हैं। तो फिर तुम ईसा को एक पूज्य कैसे बनाते हो?! तथा शिर्क करने वाले लोग फ़रिश्तों को पूज्य कैसे बनाते हैं?! जो कोई भी अल्लाह की इबादत से उपेक्षा करे और अपने को उससे ऊँचा समझे, तो (ज्ञात रहना चाहिए कि) अल्लाह क़ियामत के दिन सबको अपने पास इकट्ठा करेगा और वह हर एक को वह प्रतिफल देगा, जिसके वह योग्य है।

Nisa' 4:173

जो लोग अल्लाह पर ईमान लाए और उसके रसूलों को सच्चा माना तथा विशुद्ध रूप से अल्लाह के लिए, उसके बताए हुए तरीक़े के अनुसार अच्छे कार्य किए, तो अल्लाह उन्हें उनके कर्मों का प्रतिफल बिना कम किए देगा, तथा अपने अनुग्रह और उपकार से उन्हें उससे अधिक भी देगा। परंतु जिन लोगों ने अल्लाह की इबादत और उसकी आज्ञाकारिता से उपेक्षा किया तथा अहंकार करते हुए अपने आपको उससे ऊँचा समझा, तो वह उन्हें दर्दनाक यातना देगा। तथा वे अल्लाह के सिवा किसी को नहीं पाएँगे, जो उनका संरक्षक बनकर उन्हें लाभ पहुँचाए और मददगार बनकर उन्हें नुक़सान से बचा सके।

Nisa' 4:174

ऐ लोगो! तुम्हारे पास तुम्हारे रब की ओर से एक स्पष्ट तर्क आया है, जो बहाने को काट देता है और शक को दूर कर देता है - और वह मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम हैं - तथा हमने तुम्हारी ओर एक स्पष्ट प्रकाश उतारा है, जो कि यह क़ुरआन है।

Nisa' 4:175

जो लोग अल्लाह पर ईमान लाए और उस क़ुरआन को मज़बूती से पकड़ लिया, जो उनके नबी पर उतारा गया है, तो अल्लाह उनपर दया करते हुए उन्हें जन्नत में दाखिल करेगा। तथा उनके प्रतिफल को बढ़ा देगा और उनके दर्जों को ऊँचा करेगा, तथा उन्हें सीधे मार्ग पर चलने का सामर्थ्य प्रदान करेगा, जिसमें कोई टेढ़ नहीं, जो कि वह रास्ता है जो सदा निवास के बाग़ों की ओर ले जाने वाला है।

Nisa' 4:176

(ऐ रसूल!) लोग आपसे पूछते हैं कि आप उन्हें 'कलाला' की विरासत के विषय में शरई हुक्म से सूचित करें। 'कलाला' उस व्यक्ति को कहा जाता है, जिसकी मृत्यु हो जाए और उसने पिता या कोई संतान न छोड़ी हो। आप कह दीजिए : अल्लाह उसका हुक्म बयान करता है : यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाए और उसका न पिता जीवित हो न कोई संतान हो, जबकि उसकी कोई सगी अथवा बाप शरीक बहन हो, तो बहन को फ़र्ज़ (क़ुरआन में निर्दिष्ट हिस्से) के रूप में छोड़े हुए धन का आधा हिस्सा मिलेगा। तथा उसका सगा या अल्लाती (बाप शरीक) भाई 'असबा' (जिस का हिस्सा निर्दिष्ट न हो) के तौर पर उसके छोड़े हुए धन का वारिस होगा, यदि उसके साथ कोई फ़र्ज़ (निर्दिष्ट हिस्से) वाला न हो। किंतु यदि उसके साथ कोई फ़र्ज़ (निर्दिष्ट हिस्से) वाला मौजूद हो, तो वह उसका हिस्सा निकालने के बाद शेष धन का वारिस होगा। यदि सगी या बाप शरीक बहनें एक से अधिक हों, तो फ़र्ज़ (निर्दिष्ट हिस्से) के रूप में उन्हें दो-तिहाई मिलेगा। तथा यदि सगे या बाप शरीक भाई और बहन दोनों हों, तो वे 'असबा' के रूप में "पुरुष के लिए दो महिलाओं के बराबर हिस्सा है।" के नियम के अनुसार वारिस होंगे इस प्रकार कि उनमें से पुरुष का हिस्सा महिला के हिस्से का दोगुना होगा। अल्लाह तुम्हारे लिए 'कलाला' का नियम तथा विरासत के अन्य प्रावधान स्पष्ट रूप से बयान करता है, ताकि तुम उसके मामले में पथभ्रष्ट न हो जाओ, और अल्लाह हर चीज़ को जानने वाला है, उससे कुछ भी छिपा नहीं है।

Maide 5:1

ऐ ईमान वालो! तुम उन सभी वचनों एवं प्रतिज्ञाओं को पूरा करो, जो तुमने अपने और अपने स्रष्टा के बीच तथा अपने और उसकी रचना के बीच किए हैं। अल्लाह ने तुमपर दया करते हुए तुम्हारे लिए पशुधन : (ऊँट, गाय तथा बकरी) को हलाल किया है, सिवाय उन जानवरों के जिनका हराम होना तुम्हें पढ़कर सुनाया जाएगा। इसके अतिरिक्त हज्ज या उम्रा का एहराम बाँधे होने की स्थिति में तुमपर जंगली जानवरों का शिकार करना भी हराम है। अल्लाह अपनी हिकमत के अनुसार जो चाहता है हलाल या हराम होने का फैसला करता है। क्योंकि उसे कोई बाध्य करने वाला नहीं और न ही कोई उसके हुक्म पर आपत्ति कर सकता है।

Maide 5:2

ऐ ईमान वालो! अल्लाह की उन हुर्मत वाली (सम्मानित) चीज़ों का अनादर न करो, जिनके सम्मान का उसने तुम्हें आदेश दिया है, तथा एहराम की अवस्था में निषिद्ध चीज़ों : जैसे सिले हुए कपड़े पहनने, तथा 'हरम' (की सीमा) के अंदर निषिद्ध चीज़ों, जैसे कि शिकार करने से दूर रहो। तथा सम्मानित महीनों अर्थात् ज़ुल-क़ादा, ज़ुल-ह़िज्जा, मुहर्रम और रजब में युद्ध को वैध न ठहराओ। जिन जानवरों को अल्लाह के नाम पर ज़बह करने के लिए हरम भेजा जाता है, उन्हें हथियाकर या उन्हें काबा जाने से रोककर उनका अनादर न करो। उन जानवरों का भी अपमान न करो, जिनके गले पर ऊन आदि के पट्टे डाले गए हों, ताकि पता चल जाए कि वे (हज्ज की) क़ुर्बानी के जानवर हैं। तथा उन लोगों का भी अनादर न करो, जो व्यापार के लाभ और अल्लाह की प्रसन्नता की तलाश में अल्लाह के सम्मानित घर की ओर जाते हैं। और जब तुम ह़ज्ज या उम्रा के एहराम से हलाल हो जाओ और हरम की सीमा से बाहर निकल जाओ, तो यदि चाहो तो शिकार करो। तथा जिन लोगों ने तुम्हें मस्जिदे-ह़राम से रोका है, उनसे दुश्मनी तुम्हें अत्याचार करने और उनके साथ न्याय करना छोड़ देने पर न उभारे। तथा (ऐ मोमिनो!) अल्लाह के आदेशों का पालन करने और उसके निषेधों से बचने में एक-दूसरे का सहयोग करो। और उन पापों में जिनका करने वाला गुनहगार होता है, तथा लोगों पर उनके खून, धन और सतीत्व के संबंध में ज़्यादती (आक्रमण) करने में सहयोग न करो। तथा अल्लाह की आज्ञाकारिता पर अडिग रहकर और उसकी अवज्ञा से दूर रहकर, उससे डरो। निःसंदेह अल्लाह उसे कठोर दंड देने वाला है जो उसकी अवज्ञा करने वाला है। इसलिए उसकी सज़ा से सावधान रहो।

Maide 5:3

अल्लाह ने तुमपर वह जानवर हराम किया है, जो शरई तरीक़े से ज़बह किए बिना मर गया हो। तथा उसने तुमपर हराम किया है बहता हुआ रक्त, सूअर का माँस, वह जानवर जिसपर ज़बह करते समय अल्लाह के नाम के अलावा किसी और का नाम पुकारा जाए, तथा गला घुटने से मरा हुआ, चोट लगने से मरा हुआ, ऊँचे स्थान से गिरकर मरा हुआ, या दूसरे जानवर के सींग मारने के कारण मरा हुआ, तथा वह जानवर जिसे शेर, चीते और भेड़िये जैसे किसी हिंसक पशु (दरिंदे) ने फाड़ खाया हो। परंतु उक्त जानवरों में से जो तुम्हें जीवित मिले और तुम उसे ज़बह कर लो, तो वह तुम्हारे लिए हलाल है। तथा उसने तुमपर वह जानवर भी हराम किया है जो मूर्तियों के लिए ज़बह किया गया हो। तथा उसने तुमपर तीरों के द्वारा अपना भाग्य मालूम करना भी हराम किया है। ये दरअसल पत्थर या तीर होते थे, जिनमें (करो) या (मत करो) लिखा होता था, चुनाँचे भाग्य मालूम करने वाला उसी के अनुसार कार्य करता था, जो उसके लिए उससे निकलता था। उल्लिखित वर्जनाओं को करना अल्लाह की आज्ञाकारिता से बाहर निकलना है। आज काफ़िर लोग इस्लाम धर्म की शक्ति को देखकर, तुम्हारे इस्लाम धर्म को त्याग देने से निराश हो गए। इसलिए उनसे मत डरो, अकेले मुझसे डरो। आज मैंने तुम्हारे लिए तुम्हारे धर्म इस्लाम को परिपूर्ण कर दिया, तथा तुमपर अपनी खुली तथा छिपी नेमत पूरी कर दी और तुम्हारे लिए इस्लाम को धर्म के रूप में चुन लिया। इसलिए मैं उसके सिवा कोई और धर्म स्वीकार नहीं करुँगा। अतः जो व्यक्ति सख़्त भूख के कारण मरे हुए जानवर का माँस खाने पर मजबूर कर दिया जाए जबकि उसका झुकाव पाप की ओर न हो, तो उसपर इसमें कोई पाप नहीं। निःसंदेह अल्लाह अति क्षमाशील, अत्यंत दयावान् है।

Maide 5:4

ऐ रसूल! आपके सहाबा आपसे पूछते हैं कि अल्लाह ने उनके लिए किन-किन चीज़ों का खाना हलाल किया है? (ऐ रसूल!) आप कह दें : अल्लाह ने तुम्हारे लिए अच्छी खाने की चीज़ें और उस शिकार को हलाल किया है, जिसे कुचली वाले जानवरों जैसे कुत्तों और तेंदुओं, तथा पंजे से शिकार करने वाले पक्षियों जैसे बाज़ों, में से प्रशिक्षित जानवरों ने पकड़ा है। तुम उन्हें उसमें से शिकार का ढंग सिखाते हो, जो अल्लाह ने तुम्हें उसके शिष्टाचार का ज्ञान प्रदान किया है। यहाँ तक कि वे इस तरह प्रशिक्षित हो जाएँ कि जब उन्हें आदेश दिया जाए, तो वे आदेश का पालन करें, तथा जब उन्हें रोका जाए, तो वे रुक जाएँ। फिर वे जो शिकार पकड़कर रोक रखें, भले ही वे उसे मार डालें, तो तुम उसे खाओ। तथा इन शिकारी जानवरों को छोड़ते समय अल्लाह का नाम लिया करो। तथा अल्लाह से, उसके आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से दूर रहकर, डरते रहो। निःसंदेह अल्लाह कर्मों का बहुत शीघ्र हिसाब लेने वाला है।

Maide 5:5

आज अल्लाह ने तुम्हारे लिए अच्छी चीज़ों को खाना तथा अह्ले किताब यानी यहूदियों एवं ईसाइयों द्वारा ज़बह किए गए जानवरों को खाना हलाल कर दिया है। और तुम्हारे ज़बह किए हुए जानवर उनके लिए हलाल कर दिए गए हैं। तुम्हारे लिए ईमान वाली स्त्रियों में से पाक-दामन आज़ाद स्त्रियों तथा तुमसे पहले किताब दिए गए यहूदियों एवं ईसाइयों में से पाक-दामन आज़ाद स्त्रियों से शादी करना हलाल कर दिया गया है, जब तुम उन्हें उनके महर दे दो और तुम अनैतिक काम करने से परहेज़ करने वाले हो, उन्हें प्रेमिकाएँ बनाने वाले न हो कि तुम उनके साथ व्यभिचार करना चाहते हो। जो व्यक्ति उन विधानों का इनकार करे, जिन्हें अल्लाह ने अपने बंदों के लिए निर्धारित किया है, तो निश्चय उसका कर्म, उसके क़बूल होने की शर्त अर्थात् ईमान न होने के कारण अमान्य (नष्ट) हो गया, तथा वह क़ियामत के दिन नुक़सान उठाने वाले लोगों में शामिल होगा, क्योंकि वह सदा-सर्वदा के लिए आग में प्रवेश करेगा।

Maide 5:6

ऐ ईमान वालो! जब तुम नमाज़ अदा करने के लिए उठना चाहो, और तुम 'हदस-ए-असग़र' (छोटी नापाकी, बे-वुज़ू होने) की हालत में हो, तो वुज़ू कर लो, इस प्रकार कि अपने मुँह धो लो तथा अपने हाथों को कुहनियों समेत धो लो और अपने सिरों का मसह़ करो, तथा अपने पाँवों को टखनों समेत धो लो, जो पिंडली के जोड़ पर उभरे हुए होते हैं। यदि तुम 'हदस-ए-अकबर' (बड़ी नापाकी, जिसके लिए ग़ुस्ल की आवश्यता होती है) की हालत में हो, तो स्नान कर लो। तथा यदि तुम बीमार हो, तुम्हें बीमारी के बढ़ने या ठीक होने में देरी होने का डर है, या तुम स्वस्थ होने की स्थिति में यात्रा कर रहे हो, या तुम उदाहरण के तौर पर शौचकर्म के कारण 'हदस-ए-असग़र' (छोटी अशुद्धता) की हालत में हो, या महिलाओं के साथ संभोग करके 'हदस-ए-अकबर' (बड़ी अशुद्धता) की हालत में हो, और खोजने के बाद भी तुम्हें पानी न मिले - जिससे अपने आपको शुद्ध (पाक) कर सको -, तो ज़मीन की सतह (मिट्टी) का क़सद करो और उसपर अपने हाथों को मारो और (उन्हें) अपने चेहरों पर फेरो तथा अपने हाथों पर फेरो (यानी मसह़ करो)। अल्लाह तुम्हें पानी का उपयोग करने के लिए बाध्य करके, जो तुम्हें नुक़सान पहुँचाता है, अपने प्रावधानों में तुमपर तंगी नहीं करना चाहता है। इसलिए किसी बीमारी या पानी न मिलने के कारण उसका उपयोग दुर्लभ होने के समय उसने तुम्हारे लिए उसका एक विकल्प निर्धारित किया है, ताकि वह तुमपर अपना अनुग्रह पूरा कर दे, तथा तुम अपने ऊपर अल्लाह की नेमत का शुक्र अदा करो और उसकी नाशुक्री न करो।

Maide 5:7

तथा अपने ऊपर अल्लाह के इस अनुग्रह को याद करो कि उसने तुम्हें इस्लाम का मार्गदर्शन प्रदान किया, और उसकी उस प्रतिज्ञा को याद करो, जो उसने तुमसे उस समय ली थी, जब तुमने नबी सल्लल्लाहू अलैहि व सल्लम से सुखद और अप्रिय चीज़ों में बात सुनने और मानने की बैअत करते हुए कहा था : 'हमने आपकी बात सुनी और हमने आपका आदेश मान लिया'। तथा अल्लाह के आदेशों (जिनमें उसके वचन भी हैं) का पालन करके तथा उसकी मना की हुई बातों से बचकर, उससे डरो। निश्चय अल्लाह जो कुछ दिलों में है उसे ख़ूब जानने वाला है, अतः उससे कोई भी चीज़ छिपी नहीं है।

Maide 5:8

ऐ लोगो जो अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान लाए हो! अपने ऊपर अनिवार्य अल्लाह के अधिकारों का निष्पादन करो उसके द्वारा उसकी प्रसन्नता तलाश करते हुए, तथा न्याय के गवाह बनो, अन्याय के नहीं। किसी जाति की शत्रुता तुम्हें न्याय को त्यागने के लिए प्रेरित न करे। क्योंकि न्याय करना मित्र और शत्रु दोनों के साथ आवश्यक है। इसलिए उन दोनों के साथ न्याय करो। क्योंकि न्याय अल्लाह से डरने के अधिक निकट है, और अन्याय अल्लाह के विरुद्ध दुस्साहस के अधिक निकट है। तथा अल्लाह के आदेशों का पालन करके और उसकी मना की हुई बातों से बचकर, उससे डरो। तुम जो कुछ भी करते हो, अल्लाह को उसकी पूरी ख़बर है। तुम्हारे कर्मों में से कुछ भी उससे छिपा नहीं है, और वह तुम्हें उसका प्रतिफल देगा।

Maide 5:9

अल्लाह (जो अपना वादा नहीं तोड़ता) ने उन लोगों से वादा किया है, जो अल्लाह तथा उसके रसूलों पर ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए कि उनके पापों को क्षमा कर देगा और उन्हें बड़ा सवाब (प्रतिफल) प्रदान करेगा और वह जन्नत में प्रवेश है।

Maide 5:10

जिन लोगों ने अल्लाह के साथ कुफ़्र किया तथा उसकी आयतों को झुठलाया, वही लोग आग वाले हैं जो अपने कुफ़्र और झुठलाने की सज़ा के रूप में उसमें प्रवेश करेंगे, जिसमें वे सदैव रहेंगे जैसे साथी अपने साथी के साथ हमेशा लगा रहता है।

Maide 5:11

ऐ ईमान वालो! अपने दिलों से तथा अपनी ज़बानों से अल्लाह के इस उपकार को याद करो कि उसने तुम्हें सुरक्षा प्रदान की और तुम्हारे दुश्मनों के दिलों में भय डाल दिया, जब उन्होंने तुम्हें पकड़ने और तुम्हारा उन्मूलन करने के लिए तुम्हारी ओर हाथ बढ़ाना चाहा। चुनाँचे अल्लाह ने उन्हें तुमसे फेर दिया और तुम्हें उनसे बचा लिया। तथा अल्लाह के आदेशों का पालन करके तथा उसके निषेधों से बचकर उससे डरो। तथा मोमिनों को चाहिए कि वे अपने धार्मिक और सांसारिक हितों की प्राप्ति में केवल अल्लाह पर भरोसा करें।

Maide 5:12

निश्चय अल्लाह ने बनी इसराईल से उस बात का दृढ़ वचन लिया, जिसका शीघ्र ही उल्लेख किया जाएगा, तथा उसने उनपर बारह प्रमुख नियुक्त किए, जिनमें से प्रत्येक अपने अधीन रहने वालों की देखरेख करते थे। तथा अल्लाह ने बनी इसराईल से कहा : मैं सहायता और समर्थन के द्वारा तुम्हारे साथ हूँ, यदि तुम सबसे पूर्ण तरीक़े से नमाज़ अदा करते रहे, अपने धनों की ज़कात देते रहे, मेरे सभी रसूलों को उनके बीच भेदभाव (अंतर) किए बिना सत्य माना, उनका सम्मान किया, उनकी सहायता की और भले कामों पर खर्च किया। यदि तुमने यह सब किया, तो निश्चय मैं उन बुराइयों को तुमसे अवश्य दूर कर दूँगा, जो तुमने की हैं, तथा मैं क़ियामत के दिन तुम्हें ऐसे बाग़ों में अवश्य प्रवेश दूँगा, जिनके महलों के नीचे से नहरें बहती हैं। फिर जिसने इस दृढ़ वचन लिए जाने के बाद कुफ़्र किया, तो निश्चय वह जानबूझकर सत्य के मार्ग से अलग हो गया।

Maide 5:13

उनके उस वचन का उल्लंघन करने के कारण, जो उनसे लिया गया था, हमने उन्हें अपनी दया से निष्कासित कर दिया, तथा उनके दिलों को कठोर और सख़्त बना दिया, जिस तक न तो कोई अच्छाई पहुँचती है और न ही उसे कोई नसीहत लाभ देती है। वे (अल्लाह के) शब्दों को उनके स्थानों से फेर देते हैं, इस प्रकार कि उनके शब्दों को बदल देते हैं और उनके अर्थों की व्याख्या इस तरह करते हैं जो उनकी इच्छाओं से मेल खाती है। तथा उन्होंने उनमें से कुछ बातों पर अमल करना छोड़ दिया, जिनका उन्हें उपदेश दिया गया था। (ऐ रसूल!) आपके पास उनकी अल्लाह तथा उसके मोमिन बंदों के साथ किसी न किसी विश्वासघात की ख़बर आती रहेगी। परंतु उनमें से कुछ लोगों को छोड़कर, जिन्होंने उस वचन को पूरा किया, जो उनसे लिया गया था। अतः आप उन्हें क्षमा कर दें, उनकी पकड़ न करें और उन्हें माफ़ कर दें। क्योंकि यह उपकार में से है और अल्लाह उपकार करने वालों से प्रेम करता है।

Maide 5:14

जिस तरह हमने यहूदियों से दृढ़ वचन लिया था, उसी तरह हमने उन लोगों से भी वचन लिया, जिन्होंने अपनी पवित्रता जताते हुए कहा कि वे ईसा अलैहिस्सलाम के मानने वाले हैं। फिर उन्होंने उसमें से एक भाग पर अमल करना छोड़ दिया, जिसका उन्हें उपदेश दिया गया था, जैसा कि यहूदियों में से उनके पूर्वजों ने किया था। तथा हमने उनके बीच क़ियामत के दिन तक के लिए शत्रुता तथा सख़्त घृणा डाल दी। अतः वे आपस में लड़ने वाले बन गए, वे एक-दूसरे को काफ़िर कहने लगे। शीघ्र ही अल्लाह उन्हें बताएगा जो कुछ वे किया करते थे और उन्हें उसका बदला देगा।

Maide 5:15

ऐ किताब वालो! अर्थात् तौरात वाले यहूदियो और इंजील वाले ईसाइयो! तुम्हारे पास हमारे रसूल मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम आ चुके हैं, जो तुम्हारे लिए उनमें से बहुत-सी बातों को स्पष्ट रूप से बयान करते हैं, जो तुम अपने ऊपर उतरने वाली किताब में से छिपाया करते थे, तथा उसमें से बहुत कुछ नज़रअंदाज़ कर देते हैं जिसमें तुम्हें बेनक़ाब करने के सिवा कोई लाभ नहीं। क़ुरआन तुम्हारे पास अल्लाह की ओर से एक पुस्तक के रूप में आया है, और यह एक प्रकाश है जिससे प्रकाश प्राप्त किया जाता है, तथा हर उस चीज़ के लिए एक स्पष्ट पुस्तक है, जिसकी लोगों के अपने सांसारिक और आख़िरत के मामलों में आवश्यकता होती है।

Maide 5:16

अल्लाह इस किताब के द्वारा उन लोगों को, जो उसे प्रसन्न करने वाली चीज़ों जैसे ईमान और अच्छे कर्म का अनुसरण करते हैं, अल्लाह की यातना से सुरक्षा के रास्तों का मार्गदर्शन करता है, जो कि जन्नत की ओर ले जाने वाले रास्ते हैं। तथा उन्हें अपनी अनुमति से कुफ़्र और अवज्ञा के अँधेरे से बाहर निकालकर ईमान और आज्ञाकारिता के प्रकाश में लाता है, और उन्हें सीधे रास्ते, इस्लाम के मार्ग पर चलने का सामर्थ्य प्रदान करता है।

Maide 5:17

निश्चय ईसाइयों में से उन लोगों ने कुफ़्र किया, जिनका कहना है कि निःसंदेह अल्लाह मरयम का पुत्र मसीह ही है। (ऐ रसूल!) आप उनसे कह दें : मरयम के बेटे ईसा मसीह को विनष्ट करने से, उनकी माँ (मरयम) को विनष्ट करने से तथा धरती पर उपस्थित सभी लोगों को विनष्ट करने से, अल्लाह को कौन रोक सकता है यदि वह उन्हें नष्ट करना चाहे?! यदि कोई भी उसे इससे रोकने में सक्षम नहीं है, तो यह इंगित करता है कि अल्लाह के अलावा कोई पूज्य नहीं है और यह कि : ईसा बिन मरयम, उनकी माता तथा शेष सृष्टि सब अल्लाह की रचना हैं। तथा आकाशों और धरती का राज्य और जो कुछ उनके बीच है उसका राज्य अल्लाह ही के लिए है। वह जो चाहता है, पैदा करता है और उसने जिन चीज़ों को पैदा करना चाहा है, उनमें से ईसा अलैहिस्सलाम भी हैं। चुनाँचे वह उसके बंदे और उसके रसूल हैं। तथा अल्लाह हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है।

Maide 5:18

यहूदी और ईसाई दोनों ने दावा किया कि वे अल्लाह के पुत्र और उसके प्रिय हैं। (ऐ रसूल!) आप उनके जवाब में कह दें : अल्लाह तुम्हें तुम्हारे द्वारा किए गए पापों के कारण दंड क्यों देता है?! यदि तुम उसके प्रियजन होते, जैसा कि तुमने दावा किया है, तो वह तुम्हें इस दुनिया में हत्या और विरूपण के साथ तथा परलोक में आग के द्वारा दंड न देता; क्योंकि वह जिसे प्यार करता है उसे यातना नहीं देता है। बल्कि तुम भी अन्य सभी मनुष्यों की तरह मनुष्य हो। जो उनमें से अच्छा कर्म करेगा, वह उसे जन्नत का प्रतिफल देगा, और जो कोई भी बुराई करेगा, वह उसे (जहन्नम की) आग से दंडित करेगा। अल्लाह जिसे चाहता है, अपनी कृपा से क्षमा करता है और वह जिसे चाहता है, अपने न्याय से दंडित करता है। तथा आकाशों और धरती का राज्य और जो कुछ उनके बीच है उसका राज्य अल्लाह ही के लिए है। और अकेले उसी की ओर लौटकर जाना है।

Maide 5:19

ऐ किताब वाले यहूदियो तथा ईसाइयो! तुम्हारे पास हमारे रसूल मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम आ चुके हैं। वह ऐसे समय में आए हैं जब रसूलों का आगमन एक समय से बंद था तथा उनके आगमन की सख़्त आवश्यकता थी। ताकि तुम क्षमाप्रार्थी बनकर यह न को : हमारे पास कोई रसूल नहीं आया, जो हमें अल्लाह के प्रतिफल की शुभ सूचना देता और हमें उसके दंड से सावधान करता। अतः (अब) तुम्हारे पास मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम आ चुके हैं, जो उसके प्रतिफल की शुभ सूचना देने वाले और उसके दंड से सावधान करने वाले हैं। तथा अल्लाह हर चीज़ की क्षमता रखने वाला है, उसे कोई चीज़ विवश नहीं कर सकती। और रसूलों को भेजना और उनके क्रम को मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर समाप्त कर देना उसकी क्षमता में से है।

Maide 5:20

(ऐ रसूल!) उस समय को याद करो, जब मूसा अलैहिस्सलाम ने अपनी जाति बनी इसराईल से कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! तुम अपने दिलों से तथा अपनी ज़बानों से अपने ऊपर अल्लाह की उस नेमत को याद करो जब उसने तुममें से कुछ नबी बनाए, जो तुम्हें मार्गदर्शन की ओर बुलाते थे, तथा तुम्हें बादशाह बनाए कि तुम खुद के मामलों के मालिक हो गए जबकि तुम दास और ग़ुलाम हुआ करते थे, तथा उसने तुम्हें अपनी नेमतों में से वह प्रदान किया, जो उसने तुम्हारे समय में दुनिया वालों में से किसी को भी नहीं दिया।

Maide 5:21

मूसा अलैहिस्सलाम ने कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! उस पवित्र भूमि (यानी बैतुल मक़दिस तथा उसके आसपास के क्षेत्र) में प्रवेश करो, जिसमें प्रवेश करने और वहाँ के काफ़िरों से लड़ाई करने का अल्लाह ने तुमसे वादा किया था, तथा शक्तिशाली लोगों के सामने हार मत मानो, अन्यथा तुम्हारा परिणाम इस दुनिया और आख़िरत में घाटा होगा।

Maide 5:22

उनकी जाति के लोगों ने उनसे कहा : ऐ मूसा! पवित्र भूमि में ऐसे लोग हैं, जो बड़े बली और शक्तिशाली हैं। और यह हमें उसमें प्रवेश करने से रोकता है। इसलिए जब तक वे उसमें हैं, तब तक हम उसमें हरगिज़ प्रवेश नहीं करेंगे; क्योंकि हमारे पास उनसे लड़ने की कोई शक्ति और क्षमता नहीं है। अतः यदि वे उससे निकल जाएँ, तो हम उसमें अवश्य प्रवेश करेंगे।

Maide 5:23

मूसा अलैहिस्सलाम के साथियों में से दो व्यक्तियों ने, जो उन लोगों में से थे जो अल्लाह का भय रखते थे और उसकी यातना से डरते थे, अल्लाह ने उन दोनों को अपनी आज्ञाकारिता का सामर्थ्य प्रदान किया था, उन दोनों ने अपनी जाति के लोगों से मूसा अलैहिस्सलाम की आज्ञा का पालन करने का आग्रह करते हुए कहा : तुम शक्तिशाली लोगों पर शहर के दरवाज़े में प्रवेश कर जाओ। यदि तुम दरवाज़े में प्रवेश कर गए, तो तुम - अल्लाह की अनुमति से - उन्हें पराजित कर दोगे, अल्लाह की इस सुन्नत (नियम) पर भरोसा करते हुए कि अल्लाह पर ईमान और भौतिक साधनों को तैयार करने जैसे कारणों को अपनाने पर वह विजय प्रदान करता है। तथा यदि तुम सच्चे मोमिन हो, तो केवल अल्लाह ही पर भरोसा करो। क्योंकि ईमान आवश्यक रूप से अल्लाह ही पर भरोसा करने की अपेक्षा करता है।

Maide 5:24

बनी इसराईल में से मूसा की जाति के लोगों ने अपने नबी मूसा अलैहिस्सलाम के आदेश का उल्लंघन करने पर अडिग रहते हुए कहा : हम शहर में हरगिज़ प्रवेश नहीं करेंगे जब तक कि उसमें शक्तिशाली लोग मौजूद हैं। इसलिए ऐ मूसा! आप अपने पालनहार के साथ जाएँ और उन शक्तिशाली लोगों से लड़ें। जहाँ तक हमारी बात है, तो हम अपने स्थान पर रहेंगे, आपके साथ युद्ध करने के लिए नहीं निकलेंगे।

Maide 5:25

मूसा अलैहिस्सलाम ने अपने पालनहार से कहा : ऐ मेरे पालनहार! मेरा स्वयं अपने और अपने भाई हारून के अतिरिक्त किसी पर कोई अधिकार नहीं है। अतः तू हमारे तथा ऐसे लोगों के बीच अलगाव कर दे, जो तेरे तथा तेरे रसूल के आज्ञापालन से निकल जाने वाले हैं।

Maide 5:26

अल्लाह ने अपने नबी मूसा अलैहिस्सलाम से कहा : अल्लाह ने बनी इसराईल पर चालीस साल तक पवित्र भूमि में प्रवेश करना हराम कर दिया है। वे इस अवधि के दौरान रेगिस्तान में भ्रमित भटकते रहेंगे, वे निर्देशित नहीं होंगे। अतः (ऐ मूसा!) आप अल्लाह की अवज्ञा करने वालों पर अफ़सोस न करें। क्योंकि जो दंड उन्हें भुगतना पड़ रहा है, वह उनकी अवज्ञा और पापों के कारण है।

Maide 5:27

तथा (ऐ रसूल!) इन ईर्ष्यालु, अत्याचारी यहूदियों को आदम के दोनों बेटों : क़ाबील और हाबील की कहानी, संदेह रहित सच्चाई के साथ सुना दें। जब उन दोनों ने अल्लाह की निकटता प्राप्त करने के लिए एक क़ुर्बानी पेश की। अल्लाह ने हाबील की पेश की हुई क़ुर्बानी स्वीकार कर ली, क्योंकि वह तक़्वा (घर्मपरायणता) वालों में से था, जबकि क़ाबील की क़ुर्बानी को स्वीकार नहीं किया, क्योंकि वह तक़वा वालों में से नहीं था। क़ाबील ने ईर्ष्या के कारण हाबील की क़ुर्बानी की स्वीकृति की निंदा की और कहा : ऐ हाबील! मैं तुझे मार डालूँगा। तो हाबील ने कहा : अल्लाह केवल उसकी क़ुर्बानी स्वीकार करता है, जो उसके आदेशों का पालन करते हुए तथा उसके निषेधों से बचते हुए, उससे डरने वाला है।

Maide 5:28

यदि तूने मुझे मार डालने की नीयत से मेरी ओर अपना हाथ बढ़ाया, तो जो कुछ तूने किया है, मैं तुझे उसका बदला देने वाला नहीं हूँ। यह मेरी ओर से कायरता नहीं है, लेकिन मैं सृष्टि के पालनहार अल्लाह से डरता हूँ।

Maide 5:29

फिर उसने उसे डराते हुए कहा : मैं चाहता हूँ कि तू अपने पिछले पापों के साथ-साथ मेरी अवैध और आक्रामकता में हत्या करने के पाप के साथ लौटे। फिर तू उन आग (जहन्नम) वालों में से हो जाए, जो क़ियामत के दिन उसमें प्रवेश करेंगे। यही अत्याचारियों का बदला है, और मैं तेरी हत्या करने के पाप के साथ लौटकर उन लोगों में से नहीं होना चाहता।

Maide 5:30

क़ाबील के लिए उसके 'नफ़्से अम्मारा' (बुराई का आदेश देने वाली आत्मा) ने अपने भाई की अन्यायपूर्ण तरीक़े से हत्या को सुसज्जित कर दिया, और उसने उसकी हत्या कर दी। अतः वह इसके कारण उन लोगों में से हो गया, जिनके अंश दुनिया तथा आख़िरत दोनों स्थानों में कम हो गए।

Maide 5:31

फिर अल्लाह ने एक कौआ भेजा, जो उसके सामने भूमि को कुरेदता था, ताकि उसमें एक मरे हुए कौए को गाड़कर, उसे यह सिखाए कि वह अपने भाई के शव को कैसे छिपाए। उस समय अपने भाई के हत्यारे ने कहा : हाय मेरा विनाश! क्या मैं इस कौए जैसा भी न हो सका, जिसने दूसरे मरे हुए कौवे को दफन कर दिया, कि मैं अपने भाई के शव को छिपा सकूँ, फिर उसने उस समय उसे दफ़न किया; इस तरह वह पछताने वालों में से हो गया।

Maide 5:32

क़ाबील द्वारा अपने भाई की हत्या के कारण, हमने बनी इसराईल को सूचित किया कि जिसने किसी व्यक्ति की क़िसास (खून के बदले खून) या कुफ़्र अथवा विद्रोह द्वारा धरती में बिगाड़ पैदा करने के कारण के बिना हत्या कर दी, तो मानो उसने सभी लोगों की हत्या कर दी, क्योंकि उसके निकट निर्दोष और अपराधी के बीच कोई अंतर नहीं है। तथा जिसने किसी प्राणी की, जिसे अल्लाह ने हराम ठहराया है, यह मानते हुए हत्या करने से परहेज़ किया कि उसकी हत्या करना निषिद्ध (हराम) है और उसकी हत्या नहीं की; तो मानो उसने सभी लोगों को जीवन प्रदान किया; क्योंकि उसके इस व्यवहार में सभी लोगों की सुरक्षा है। निःसंदेह हमारे रसूल बनी इसराईल के पास स्पष्ट प्रमाण और खुली निशानियाँ लेकर आए, लेकिन इसके बावजूद उनमें से बहुत से लोग पाप करके तथा अपने रसूलों का विरोध करके अल्लाह की सीमाओं का उल्लंघन करने वाले हैं।

Maide 5:33

जो लोग अल्लाह और उसके रसूल से युद्ध करते हैं, और उनसे खुली दुश्मनी करते हुए हत्या, लूटमार और डकैती के द्वारा धरती में उत्पात मचाते हैं, उनकी सज़ा यही है कि उन्हें सूली पर चढ़ाए बिना क़त्ल कर दिया जाए, या उन्हें सूली पर चढ़ाकर क़त्ल कर दिया जाए, या उनका दायाँ हाथ और बायाँ पैर काट दिया जाए, यदि वह फिर से ऐसी हरकत करे, तो उसका बायाँ हाथ और दायाँ पैर काट दिया जाए, या उन्हें देश से निकाल दिया जाए। यह सज़ा उनके लिए इस दुनिया में एक अपमान है, तथा आख़िरत में उनके लिए बहुत बड़ी यातना है।

Maide 5:34

परंतु (ऐ अधिकार वालो!) इन लड़ाई करने वालों में से जो लोग तुम्हारी पकड़ में आने से पहले तौबा कर लें, तो जान लो कि अल्लाह तौबा के बाद उन्हें क्षमा करने वाला और उनपर दया करने वाला है। और उनपर उसकी दया में से उनसे दंड को हटा देना है।

Maide 5:35

ऐ ईमान वालो! अल्लाह के आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर उससे डरो, तथा उसने तुम्हें जिसका हुक्म दिया है, उसे पूरा करके और जिससे उसने तुम्हें मना किया है, उससे दूर रहकर उसकी निकटता तलाश करो, और उसकी प्रसन्नता प्राप्त करने के लिए काफ़िरों से जिहाद करो। ताकि ऐसा करने पर तुम्हें वह चीज़ प्राप्त हो जाए, जो तुम माँगते हो और उस चीज़ से बचा लिए जाओ, जिससे तुम डरते हो।

Maide 5:36

जिन लोगों ने अल्लाह और उसके रसूल के साथ कुफ़्र किया, यदि मान लिया जाए कि उनमें से हर एक धरती की सारी धन-दौलत का मालिक हो जाए और उसके साथ उतना ही और भी हो, फिर वे क़ियामत के दिन अपने आपको अल्लाह की यातना से मुक्त करने के लिए उसे पेश कर दें, तो वह उनसे स्वीकार नहीं किया जाएगा, और उनके लिए दर्दनाक यातना है।

Maide 5:37

वे जहन्नम की आग में प्रवेश करने के बाद उससे बाहर निकलना चाहेंगे, परंतु वे ऐसा कैसे कर सकते हैं?! वे उससे हाबर हरगिज़ नहीं निकलेंगे, तथा उनके लिए उसमें एक स्थायी यातना है।

Maide 5:38

जो चोरी करने वाला (पुरुष) और जो चोरी करने वाली (स्त्री) है (ऐ शासको!) उनमें से प्रत्येक के दाहिने हाथ को काट दो, यह उनके लिए अल्लाह की ओर से उसके बदले एवं दंड के रूप में है जो उन दोनों ने अवैध रूप से लोगों का माल लिया है, तथा उन्हें और दूसरों को डराने के लिए है। तथा अल्लाह सब पर प्रभुत्वशाली है, उसपर किसी का ज़ोर नहीं चलता। वह अपनी (सभी चीज़ों की) पूर्वनियति (तक़दीर) और अपने विधान में हिकमत वाला है।

Maide 5:39

जो व्यक्ति चोरी से अल्लाह के समक्ष तौबा कर ले और अपने कार्य को सुधार ले, तो अल्लाह अपने अनुग्रह से उसकी तौबा स्वीकार कर लेगा; क्योंकि अल्लाह अपने बंदों में से तौबा करने वालों के पापों को क्षमा करने वाला, उनपर दया करने वाला है। लेकिन अगर मामला शासकों के पास पहुँच गया है, तो तौबा करने से उनका शरई ह़द समाप्त नहीं होगा।

Maide 5:40

(ऐ रसूल!) निश्चय आपको मालूम है कि अल्लाह ही के पास आकाशों तथा धरती का राज्य है। वह उनमें अपनी इच्छानुसार व्यवहार करता है। वह जिसे चाहता है, अपने न्याय से दंडित करता है और जिसे चाहता है, अपने अनुग्रह से क्षमा कर देता है। निःसंदेह अल्लाह सब कुछ करने में सक्षम है, उसे कोई चीज़ विवश नहीं कर सकती।

Maide 5:41

ऐ रसूल! वे लोग आपको दुःखित न करें जो आपको क्रोधित करने के लिए कुफ़्र के कृत्यों को प्रकट करने में जल्दबाज़ी करते हैं, जो कि उन मुनाफ़िक़ों (पाखंडियों) में से हैं, जो ईमान को प्रदर्शित करते हैं और कुफ़्र को छिपाते हैं। इसी तरह वे यहूदी भी आपको दुखी न करें जो अपने बड़ों के झूठ को सुनते और उसे स्वीकार करते हैं, वे अपने उन नेताओं की नक़ल करते हैं, जो आपसे उपेक्षा करने के कारण आपके पास नहीं आए। ये लोग तौरात में मौजूद अल्लाह के शब्दों को अपनी इच्छाओं के अनुसार बदल देते हैं। वे अपने अनुयायियों से कहते हैं : यदि मुहम्मद का फैसला तुम्हारी इच्छाओं के अनुसार है, तो उसका अनुसरण करो और यदि वह उसके विरुद्ध हो, तो उससे सावधान रहना। तथा अल्लाह लोगों में से जिसे पथभ्रष्ट करना चाहे, तो (ऐ रसूल!) आप किसी ऐसे व्यक्ति को नहीं पाएँगे, जो उससे गुमराही को हटा सके और उसे सत्य के मार्ग पर ले जाए। इन विशेषताओं से विशेषित यहूदी और मुनाफ़िक़ वे लोग हैं, जिनके दिलों को अल्लाह ने कुफ़्र से पवित्र करना नहीं चाहा, उनके लिए इस दुनिया में अपमान और तिरस्कार है और आख़िरत में उनके लिए बहुत बड़ी यातना है, जो कि आग की यातना है।

Maide 5:42

ये यहूदी झूठी बातें बहुत सुनते हैं, सूद की तरह हराम धन बहुत खाते हैं। अतः यदि वे (ऐ रसूल!) आपके पास फ़ैसला करवाने के लिए आएँ, तो अगर आप चाहें, तो उनके बीच निर्णय कर दें, या अगर आप चाहें, तो उनके बीच फ़ैसला न करें। आपके पास दोनों के बीच एक विकल्प है। यदि आप उनके बीच फैसला न करें, तो वे आपको कुछ भी नुक़सान नहीं पहुँचा पाएँगे, और यदि आप उनके बीच निर्णय करें, तो उनके बीच न्याय के साथ निर्णय करें, भले ही वे अत्याचारी और दुश्मन हों। निःसंदेह अल्लाह ऐसे लोगों से प्रेम करता है, जो अपने फ़ैसले में न्याय करने वाले हैं, भले ही फ़ैसले के लिए आने वाले फ़ैसला करने वाले के दुश्मन हों।

Maide 5:43

इन लोगों का मामला निश्चय आश्चर्यजनक है। वे आपपर विश्वास नहीं रखते हैं, फिर भी अपने मामले का फ़ैसला कराने के लिए आपके पास इस आशा में आते हैं कि आपका फ़ैसला उनकी इच्छाओं के अनुसार हो जाए। जबकि उनके पास तौरात है, जिसपर वे ईमान रखने का दावा करते हैं, जिसमें अल्लाह का आदेश (फ़ैसला) मौजूद है। फिर वे आपके फ़ैसले से मुँह मोड़ लेते हैं, यदि वह उनकी इच्छाओं से मेल नहीं खाता है। इस तरह उन्होंने अपनी किताब में मौजूद हुक्म का इनकार किया है और आपके फ़ैसले से मुँह फेरा है। इनका यह व्यवहार ईमान वालों का व्यवहार नहीं है। इसलिए वे आपपर और आपकी लाई हुई शरीयत पर ईमान रखने वाले नहीं हैं।

Maide 5:44

निःसंदेह हमने मूसा अलैहिस्सलाम पर तौरात उतारी, जिसमें भलाई का मार्गदर्शन और ऐसा प्रकाश है जिसके द्वारा रौशनी हासिल की जाती है। उसके अनुसार बनी इसराईल के वे नबी जो अल्लाह के आज्ञाकारी थे, फ़ैसला करते हैं। तथा उसी के अनुसार वे विद्वान और धर्मशास्त्री (फुक़हा) भी फ़ैसला करते हैं जो लोगों का प्रशिक्षण करते हैं, क्योंकि अल्लाह ने उन्हें अपनी पुस्तक का निरीक्षक और संरक्षक बनाया है, जो उसे विकृति और परिवर्तन से बचाते हैं। तथा वे इस बात के गवाह हैं कि यह पुस्तक सत्य है। और लोग इस (पुस्तक) से संबंधित मामले में उन्हीं की तरफ लौटते हैं। अतः (ऐ यहूदियो!) लोगों से न डरो, केवल मुझसे डरो। तथा अल्लाह की उतारी हुई किताब के अनुसार फ़ैसला करने की बजाय सरदारी, पद-प्रतिष्ठा या धन की एक छोटी सी क़ीमत न लो। और जो अल्लाह की उतारी हुई वह़्य के अनुसार फ़ैसला न करे, उसे हलाल (अनुमेय) समझते हुए, या उसके अलावा को उसपर वरीयता देते हुए, या उसे उसके साथ बराबर ठहराते हुए, तो वही लोग वास्तव में काफ़िर हैं।

Maide 5:45

हमने तौरात में यहूदियों पर अनिवार्य कर दिया कि जो कोई जान-बूझकर किसी आत्मा को बिना हक़ के क़त्ल करेगा, तो वह उसके बदले में क़त्ल कर दिया जाएगा, और जो कोई जान-बूझकर आँख निकालेगा, उसकी आँख निकाल दी जाएगी, और जो कोई जान-बूझकर नाक काटेगा, उसकी नाक काट दी जाएगी, और जो कोई जान-बूझकर कान काटेगा, उसका कान काट दिया जाएगा, और जो कोई जान-बूझकर दाँत निकालेगा, उसका दाँत निकाल निकाल दिया जाएगा। और हमने उनपर यह भी अनिवार्य कर दिया कि घावों के मामले में अपराधी को उसके अपराध के समान ही दंडित किया जाएगा। तथा जो कोई भी स्वेच्छा से अपराधी को क्षमा कर दे, तो उसकी क्षमा उसके पापों का प्रायश्चित है; क्योंकि उसने उस व्यक्ति को क्षमा कर दिया, जिसने उसपर अत्याचार किया है। और जो उसके अनुसार फ़ैसला न करे जौ अल्लाह ने 'क़िसास' के बारे में तथा उसके अलावा चीज़ों के बारे में उतारा है, तो वह अल्लाह की सीमाओं का उल्लंघन करने वाला है।

Maide 5:46

और हमने बनी इसराईल के नबियों के पद-चिन्हों पर मरयम के पुत्र ईसा को भेजा, जो उसपर ईमान रखने वाले थे जो कुछ तौरात में था और उसी के अनुसार फैसला करने वाले थे। तथा हमने उन्हें इंजील प्रदान की, जिसमें सत्य के लिए मार्गदर्शन शामिल है, तथा उसमें ऐसे प्रमाण हैं, जो संदेहों को दूर करते हैं और ऐसे प्रावधान हैं जो समस्याओं का समाधान करते हैं, तथा वह उससे पहले उतरने वाली पुस्तक तौरात के अनुकूल है, सिवाय उसके कुछ नियमों में, जिन्हें उसने निरस्त कर दिया है। तथा हमने इंजील को संयमियों (परहेज़गारों) के लिए पथप्रदर्शक और उस चीज़ को करने से रोकने वाला बना दिया जिसे उसने उनपर निषिद्ध किया था।

Maide 5:47

ईसाइयों को चाहिए कि उसपर विश्वास करें, जो अल्लाह ने इंजील में उतारा है तथा (मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के उनके बीच नबी बनाकर भेजे जाने से पहले उसमें जो सच्चाई आई) उसके अनुसार फ़ैसला करें। और जो उसके अनुसार फ़ैसला न करे, जो अल्लाह ने उतारा है, तो वही लोग अल्लाह की अवज्ञा करने वाले, सत्य को छोड़ने वाले तथा असत्य की ओर झुकने वाले हैं।

Maide 5:48

(ऐ रसूल!) हमने आपकी ओर क़ुरआन को सच्चाई के साथ उतारा है, जिसके अल्लाह की ओर से होने में कोई शक एवं संदेह नहीं है। जो इससे पहले उतरी हुई पुस्तकों की पुष्टि करने वाला तथा उनका संरक्षक है। अतः उनमें से जो कुछ इसके मुताबिक़ है, वह सत्य है और जो कुछ इसके विरुद्ध है, वह असत्य है। इसलिए आप लोगों के बीच उसके अनुसार फ़ैसला करें, जो अल्लाह ने इस (क़ुरआन) में आपपर उतारा है, तथा आपके ऊपर जो संदेह रहित सत्य अवतिरत किया गया है उसे छोड़कर उनकी उन इच्छाओं का पालन न करें, जो उन्होंने ग्रहण की हैं। हमने हर समुदाय के लिए व्यावहारिक नियमों का एक कानून और एक स्पष्ट तरीक़ा बनाया है जिसके द्वारा वे मार्गदर्शन प्राप्त करते हैं। यदि अल्लाह सारी शरीयतों को एक करना चाहता, तो वह उन्हें एक कर देता। परंतु उसने प्रत्येक समुदाय के लिए एक (स्थायी) शरीयत बनाई है, ताकि वह सबकी परीक्षा ले, और आज्ञापालन करने वाला अवज्ञाकारी से प्रगट हो जाए। अतः अच्छे काम करने और बुरे काम छोड़ने में जल्दी करो। क्योंकि क़ियामत के दिन तुम सबको अकेले अल्लाह ही की ओर लौटना है, और वह तुम्हें उससे सूचित करेगा, जिसके बारे में तुम मतभेद किया करते थे, तथा वह तुम्हें तुम्हारे द्वारा किए गए कामों का बदला देगा।

Maide 5:49

(ऐ रसूल!) उनके बीच उसके अनुसार निर्णय करें, जो अल्लाह ने आपकी ओर अवतिरत किया है और उनके उन विचारों का पालन न करें जो इच्छाओं का पालन करने से उत्पन्न हुए हैं, तथा उनसे सावधान रहें कि ऐसा न हो कि वे आपको किसी ऐसी चीज़ से भटका दें, जो अल्लाह ने आपपर अवतरित किया है। क्योंकि वे ऐसा करने में कोई कसर न छोड़ेंगे। यदि वे अल्लाह के द्वारा आपपर उतारी गई शरीयत के अनुसार फ़ैसला को स्वीकार करने से इनकार करें, तो आप जान लें कि अल्लाह उन्हें उनके कुछ पापों की सज़ा दुनिया ही में देना चाहता है। जबकि उन सभी पर उन्हें आख़िरत में दंडित करेगा। और सच्चाई यह है कि बहुत-से लोग अल्लाह के आज्ञापालन से निकल जाने वाले हैं।

Maide 5:50

क्या वे आपके फ़ैसले को छोड़कर मूर्तिपूजा करने वाले जाहिलिय्यत (पूर्व-इस्लामिक काल) के लोगों का फ़ैसला चाहते हैं, जो अपनी इच्छाओं के अनुसार फ़ैसला करते हैं?! विश्वास रखने वालों के निकट, जो अल्लाह के बारे में उस चीज़ को समझते हैं जो उसने अपने रसूल पर उतारी है, अल्लाह से बेहतर फ़ैसला करने वाला कोई नहीं है। न कि अज्ञानता और इच्छाओं के पीछे चलने वाले लोग, जो केवल वही स्वीकार करते हैं जो उनकी इच्छाओं से मेल खाता है, भले ही वह ग़लत हो।

Maide 5:51

ऐ लोगो जो अल्लाह तथा उसके रसूल पर ईमान लाए हो! यहूदियों तथा ईसाइयों को सहयोगी एवं खास मित्र बनाकर उनसे दिली दोस्ती (वफ़ादारी) न रखो, क्योंकि यहूदी अपने धर्म वालों से दोस्ती (वफ़ादारी) रखते हैं और ईसाई अपने धर्म वालों से दोस्ती (वफ़ादारी) रखते हैं और दोनों समूह तुम्हारी दुश्मनी में एकजुट हैं। अतः तुममें से जो उनसे दोस्ती रखेगा, वह उन्हीं में गिना जाएगा। निःसंदेह अल्लाह काफ़िरों से दोस्ती (वफ़ादारी) रखकर अपने ऊपर अत्याचार करने वाले लोगों को सीधा मार्ग नहीं दिखाता।

Maide 5:52

तो (ऐ रसूल!) आप कमज़ोर ईमान वाले मुनाफ़िक़ों को यहूदियों तथा ईसाइयों से दोस्ती करने के लिए दौड़ते हुए देखेंगे, कहते हैं : ''हमें डर है कि ये लोग जीत हासिल कर लेंगे, और उनके पास राज्य होगा, फिर हमें उनसे नुक़सान पहुँचेगा।'' तो संभव है कि अल्लाह अपने रसूल तथा मोमिनों को जीत प्रदान कर दे, या अपनी ओर से कोई ऐसा मामला प्रकट कर दे, जिससे यहूदियों और उनके सहयोगियों का प्रभाव (दबदबा) समाप्त हो जाए। फिर उनसे दोस्ती करने के लिए जल्दी करने वाले अपने दिलों में छिपाए हुए निफ़ाक़ पर लज्जित होंगे; क्योंकि जिन कमज़ोर कारणों का उन्होंने सहारा लिया था सब व्यर्थ हो गया।

Maide 5:53

ईमान वाले, इन मुनाफ़िक़ों (पाखंडियों) की स्थिति से चकित होकर कहते हैं : क्या यही लोग हैं जिन्होंने अपनी क़समों की पुष्टि करते हुए यह क़सम खाई थी : निःसंदेह वे ईमान, समर्थन और निष्ठा (वफ़ादारी) में (ऐ ईमान वालो!) तुम्हारे साथ हैं?! उनके कार्य व्यर्थ हो गए। अतः वे अपने उद्देश्य को खो देने और उनके लिए तैयार किए जाने वाले अज़ाब के कारण घाटा उठाने वाले हो गए।

Maide 5:54

ऐ ईमान वालो! तुममें से जो कोई अपने धर्म को छोड़कर कुफ़्र की ओर पलट जाए, तो अल्लाह उनके बदले ऐसे लोगों को लाएगा, जिनसे वह उनके सीधे मार्ग पर चलने के कारण प्रेम करेगा तथा वे उससे प्रेम करेंगे, वे ईमान वालों के प्रति दयालु तथा काफ़िरों पर बहुत सख़्त होंगे। वे अपने मालों और अपनी जानों के साथ (अल्लाह के मार्ग में) जिहाद करेंगे, ताकि अल्लाह का वचन सर्वोच्च हो। वे निंदा करने वालों की निंदा से नहीं डरेंगे, क्योंकि वे अल्लाह की प्रसन्नता को प्राणियों की प्रसन्नता से ऊपर रखने वाले होंगे। यह अल्लाह का प्रदान है, जिसे अल्लाह अपने बंदों में से उसे देता है, जिसे वह चाहता है। अल्लाह विस्तृत अनुग्रह और उपकार वाला है। उसे मालूम है कि कौन उसके अनुग्रह के योग्य है, तो वह उसे प्रदान करता है, तथा कौन उसके लायक़ नहीं है, तो उसे वंचित कर देता है।

Maide 5:55

यहूदी, ईसाई तथा अन्य काफिर तुम्हारे मित्र नहीं हैं, बल्कि तुम्हारे मित्र और सहायक केवल अल्लाह, उसके रसूल और वे ईमान वाले हैं, जो पूरी तरह से नमाज़ अदा करते हैं, और अपने धन की ज़कात देते हैं तथा वे अल्लाह के प्रति विनीत और विनम्र होते हैं।

Maide 5:56

जो कोई अल्लाह, उसके रसूल तथा मोमिनों से दोस्ती रखे और उनका समर्थन करे, वह अल्लाह के दल में से है। और अल्लाह का दल ही वे लोग हैं, जो विजयी रहने वाले हैं, क्योंकि अल्लाह उनका सहायक है।

Maide 5:57

ऐ ईमान वालो! उन यहूदियों और ईसाइयों को जो तुमसे पहले किताब दिए गए तथा मुश्रिकों को सहयोगी और दिली दोस्त न बनाओ, जो तुम्हारे धर्म का मज़ाक उड़ाते हैं और उसके साथ खिलवाड़ करते हैं। तथा अल्लाह से उस चीज़ से बचकर डरो, जो उसने तुम्हें उनकी दोस्ती से मना किया है, यदि तुम अल्लाह पर तथा उसपर ईमान रखने वाले हो, जो उसने तुमपर उतारा है।

Maide 5:58

इसी तरह, वे उस समय (भी) मज़ाक उड़ाते और खेलते हैं, जब तुम नमाज़ के लिए अज़ान देते हो, जो कि अल्लाह की निकटता का सबसे महान कार्य है। ऐसा इसलिए है क्योंकि वे ऐसे लोग हैं जो अल्लाह की उपासना के अर्थ और उन विधानों को नहीं समझते जो उसने लोगों के लिए बनाए हैं।

Maide 5:59

(ऐ रसूल!) आप अह्ले किताब के उपहास करने वालों से कह दें : क्या तुम हमें केवल इस बात का दोष देते हो कि हम अल्लाह पर ईमान लाए, और उसपर जो हमारी ओर उतारा गया और उसपर भी जो हमसे पहले के लोगों पर उतारा गया, तथा इस बात पर ईमान लाए कि तुममें से अधिकांश लोग ईमान और आदेशों का पालन छोड़कर अल्लाह की आज्ञाकारिता से बाहर हैं?! इस तरह तुम हमें जिस चीज़ का दोष देते हो, वह हमारे लिए प्रशंसा की बात है, निंदनीय नहीं।

Maide 5:60

(ऐ रसूल!) आप कह दें : क्या मैं तुम्हें उन लोगों के बारे में बताऊँ, जो इनकी तुलना में दोष के अधिक योग्य हैं और अधिक कठोर सज़ा के हक़दार हैं? वे इनके पूर्वज ही हैं, जिन्हें अल्लाह ने अपनी दया से निकाल दिया, उनपर क्रोधित हुआ, उन्हें विरूपण के बाद वानर और सूअर बना दिया और उनमें से कुछ लोगों को ताग़ूत का पुजारी बना दिया। 'ताग़ूत' कहते हैं जिसकी अल्लाह के अलावा इस हाल में पूजा कि जाए कि वह उससे सहमत हो। ये लोग जिनका उल्लेख किया गया है, क़ियामत के दिन सबसे खराब स्थिति में होंगे, तथा सीधे रास्ते से बहुत भटके हुए होंगे।

Maide 5:61

(ऐ ईमान वालो!) जब उनमें से मुनाफ़िक़ लोग तुम्हारे पास आते हैं, तो वे अपने निफ़ाक़ के कारण तुम्हारे सामने ईमान को ज़ाहिर करते हैं। जबकि सच्चाई यह है कि वे प्रवेश करते और निकलते समय कुफ़्र में लिप्त होते हैं, उससे अलग नहीं होते। तथा अल्लाह उस कुफ़्र को अच्छी तरह जानता है जो वे अपने दिलों में छिपाते हैं, यदि वे तुम्हारे सामने ईमान को ज़ाहिर करते हैं और वह शीघ्र ही उन्हें उसका प्रतिफल देगा।

Maide 5:62

(ऐ रसूल!) आप देखेंगे कि बहुत से यहूदी और मुनाफ़िक़ पाप करने के लिए जल्दी करते हैं, जैसे कि झूठ बोलना, दूसरों पर अत्याचार करना और लोगों के माल को निषिद्ध तरीक़े से खाना। बहुत बुरा है जो कुछ वे कर रहे हैं।

Maide 5:63

उनके इमाम (पथ-प्रदर्शक) और विद्वान उन्हें झूठ बोलने, झूठी गवाही देने तथा अवैध रूप से लोगों का धन खाने से क्यों नहीं रोकते? उनके इमामों और विद्वानों का रवैया जो उन्हें बुराई करने से मना नहीं करते, बहुत बुरा है।

Maide 5:64

जब यहूदी कठिनाई और अकाल से पीड़ित हुए, तो कहने लगे : अल्लाह का हाथ दान करने तथा प्रदान करने से रुका हुआ है, उसके पास जो कुछ है उसे हमसे रोक रखा है। सुन लो, उनके हाथ भलाई करने और दान करने से बाँध दिए गए, और वे अपने इस कथन के कारण अल्लाह की दया से वंचित कर दिए गए। बल्कि अल्लाह सर्वशक्तिमान के दोनों हाथ भलाई और दान के साथ खुले हुए हैं, वह जैसे चाहता है, खर्च करता है। कभी विस्तार करता और कभी तंगी करता है। न कोई उसे रोकने वाला है, न कोई मजबूर करने वाला। और (ऐ रसूल!) आपकी ओर जो उतारा गया है, वह यहूदियों को सीमा के उल्लंघन और इनकार ही में बढ़ाता है; क्योंकि उनके दिल ईर्ष्या से भरे हुए हैं। तथा हमने यहूदियों के संप्रदायों के बीच शत्रुता और द्वेष डाल दिया। जब भी वे युद्ध के लिए इकट्ठे होते हैं और उसकी तैयारी करते हैं या उसे भड़काने की साज़िश रचते हैं, तो अल्लाह उन्हें तितर-बितर कर देता है और उनकी शक्ति छीन लेता है। तथा वे निरंतर ऐसा कार्य करने का प्रयास कर रहे हैं, जिससे धरती पर उपद्रव हो, जैसे कि इस्लाम को खत्म करने और उसके विरुद्ध साज़िश रचने का प्रयास। और अल्लाह उपद्रव करने वालों से प्रेम नहीं करता।

Maide 5:65

यदि यहूदी और ईसाई मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम द्वारा लाई हुई शरीयत पर ईमान ले आते तथा पापों से बचकर अल्लाह से डरते, तो हम अवश्य उनके द्वारा किए गए पापों को उनसे दूर कर देते, भले ही वे बहुत थे। तथा हम अवश्य उन्हें क़ियामत के दिन नेमतों वाली जन्नतों में दाख़िल करते, जिसमें वे निर्बाध नेमतों का आनंद लेते।

Maide 5:66

यदि यहूदी उसके अनुसार काम करते जो तौरात में है, तथा ईसाई उसके अनुसार काम करते जो इंजील में है और वे सभी उसके अनुसार काम करते जो उनपर क़ुरआन उतारा गया है - तो मैं उनके लिए बारिश उतारने और अन्न उगाने जैसे जीविका के साधन सुगम कर देता। किताब वालों में से कुछ लोग सत्य पर स्थिर मध्यम मार्ग वाले हैं। जबकि उनमें से बहुत से लोग ईमान न होने के कारण बुरे कार्य करने वाले हैं।

Maide 5:67

ऐ रसूल! जो कुछ आपके पालनहार की ओर से आपपर उतारा गया है, उसे पूरी तरह से पहुँचा दें, उसमें से कुछ भी न छिपाएँ। यदि आपने उसमें से कुछ भी छिपा लिया, तो आप अपने रब के संदेश को पहुँचाने वाले नहीं माने जाएँगे। (वस्तुतः अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने हर उस चीज़ को पहुँचा दिया है, जिसके पहुँचाने का आपको आदेश दिया गया था। अतः जो कोई भी इसके विपरीत दावा करे, तो निःसंदेह उसने अल्लाह के खिलाफ़ सबसे बड़ा झूठ बोला है)। तथा अल्लाह आज के बाद लोगों से आपकी रक्षा करेगा। इसलिए वे आप तक बुराई के साथ नहीं पहुँच सकते। अतः आपका काम केवल पहुँचा देना है। और अल्लाह उन काफ़िरों को मार्गदर्शन नहीं प्रदान करता, जो मार्गदर्शन नहीं चाहते हैं।

Maide 5:68

(ऐ रसूल!) आप कह दें : (ऐ यहूदियो तथा ईसाइयो!) तुम धर्म की किसी गणनीय चीज़ पर नहीं हो, यहाँ तक कि तुम उसके अनुसार काम करो जो कुछ तौरात और इंजील में है तथा उस क़ुरआन पर अमल करो जो तुमपर उतारा गया है, कि जिसपर ईमान लाए और उसकी शिक्षाओं पर अमल किए बिना तुम्हारा ईमान सही नहीं हो सकता। तथा निश्चय ही आपकी ओर आपके पालनहार की तरफ़ से जो पुस्तक उतारी गई है, वह बहुत से किताब वालों को, उनकी ईर्ष्या के कारण, सरकशी और कुफ़्र में अवश्य बढ़ा देगी।अतः आप इन काफ़िरों पर खेद न करें। तथा ईमान वालों में से जो आपका अनुसरण करने वाले हैं, वही आपके लिए काफ़ी हैं।

Maide 5:69

मोमिन, यहूदी, साबी (ये किसी नबी को मानने वालों का एक समूह था) तथा ईसाई, इनमें से जो कोई भी अल्लाह तथा अंतिम दिन पर ईमान लाए और अच्छे कर्म करे, तो ऐसे लोगों को उस चीज़ के बारे में जिसका वे सामना करने वाले हैं न कोई भय है, और न ही दुनिया में से जो चीज़ उनसे छूट गई है, उसके लिए उन्हें कोई मलाल होगा।

Maide 5:70

हमने बनी इसराईल से सुनने और मानने का दृढ़ वचन लिया, और हमने उनकी ओर रसूल भेजे ताकि उन्हें अल्लाह की शरीयत (नियम) पहुँचाएँ। परंतु उन्होंने उस वचन को तोड़ दिया जो उनसे लिया गया था, तथा उन्होंने अपनी इच्छाओं के पीछे चलते हुए उस चीज़ से उपेक्षा की जो उनके रसूल उनके पास लेकर आए थे, तथा उनमें से कुछ को झुठला दिया तथा कुछ को क़त्ल कर दिया।

Maide 5:71

उन्होंने सोचा कि उनके अनुबंधों और वचनों को तोड़ने, तथा नबियों को झुठलाने और उन्हें क़त्ल करने के परिणामस्वरूप उन्हें कोई नुक़सान नहीं होगा। परंतु उसका वह परिणाम सामने आया जो उन्होंने नहीं सोचा था। चुनाँचे वे सत्य से अंधे हो गए, उन्हें उसका रास्ता नज़र नहीं आता, तथा वे उसे स्वीकार करने के इरादे से सुनने से बहरे हो गए। फिर अल्लाह ने अपने अनुग्रह से उनकी तौबा क़बूल की। फिर इसके बाद वे पुनः सत्य से अंधे हो गए, और उसे सुनने से बहरे हो गए। उनमें से बहुतों के साथ ऐसा हुआ। तथा वे जो कुछ करते हैं, अल्लाह उसे ख़ूब देखने वाला है। इसमें से कुछ भी उससे छिपा नहीं है और वह उन्हें इसका बदला देगा।

Maide 5:72

निःसंदेह उन ईसाइयों ने कुफ़्र किया, जिन्होंने कहा कि "अल्लाह तो ईसा बिन मरयम ही है।" क्योंकि उन्होंने अल्लाह के सिवा दूसरे को पूज्य बना दिया। जबकि स्वयं ईसा बिन मरयम ने उनसे कहा था : ऐ बनी इसराईल! केवल अल्लाह की इबादत करो। क्योंकि वही मेरा पालनहार और तुम्हारा पालनहार है। इसलिए हम उसके बंदे होने में बराबर हैं। इसका कारण यह है कि जो कोई भी अल्लाह के साथ उसके अलावा किसी भी चीज़ को साझी ठहराता है, तो अल्लाह ने उसे हमेशा के लिए जन्नत में प्रवेश करने से रोक दिया है, और उसका ठिकाना जहन्नम की आग है। उसके लिए अल्लाह के पास न कोई सहायक है, न कोई मददगार, और न ही कोई उद्धारकर्ता है जो उसे उस यातना से बचा सके, जिसकी वह प्रतीक्षा कर रहा है।

Maide 5:73

उन ईसाइयों ने (भी) कुफ़्र किया, जो कहते हैं : अल्लाह तीन से बना है, वे हैं : पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा। अल्लाह उनकी इन बातों से बहुत बुलंद है। क्योंकि अल्लाह अनेक नहीं है। बल्कि वह केवल एक पूज्य है, जिसका कोई साझी नहीं। यदि वे इस जघन्य बात से नहीं रुके, तो उन्हें एक दर्दनाक यातना पहुँचेगी।

Maide 5:74

तो क्या ये लोग अपनी इस बात से, अल्लाह के समक्ष उससे तौबा करते हुए, पीछे नहीं हटते और उस शिर्क के लिए उससे क्षमा नहीं माँगते जो उन्होंने किया था?! तथा अल्लाह किसी भी गुनाह से तौबा करने वाले को क्षमा कर देने वाला है, भले ही वह गुनाह कुफ़्र ही क्यों न हो, वह ईमान वालों पर बहुत मेहरबान है।

Maide 5:75

मरयम के पुत्र ईसा मसीह (अल्लाह के) रसूलों में से एक रसूल के अलावा कुछ नहीं हैं। उन्हें भी उन्हीं रसूलों की तरह मौत से गुज़रना पड़ेगा। तथा उनकी माँ मरयम - अलैहस्सलाम - बहुत सच्ची तथा अल्लाह की बातों की पुष्टि करने वाली थीं और वे दोनों ही खाना खाया करते थे, क्योंकि उन्हें इसकी आवश्यकता थी। फिर भला वे भोजन की आवश्यकता के साथ पूज्य कैसे हो सकते हैं?! (ऐ रसूल!) आप चिंतनशील दृष्टि से देखें : हम उनके लिए उन निशानियों को किस प्रकार खोल-खोलकर बयान करते हैें, जो अल्लाह के एकेश्वरवाद को दर्शाती हैं तथा अल्लाह के अलावा की ओर उलूहियत (पूज्य होने) की निस्बत करने में उनकी अतिशयोक्ति की अमान्यता को इंगित करती हैं। इसके बावजूद वे इन निशानियों की उपेक्षा करते हैं। फिर आप एक चिंतनशील दृष्टि से देखें : अल्लाह के एकत्व को दर्शाने वाली इन स्पष्ट निशानियों के बावजूद, वे किस प्रकार सत्य से पूरी तरह से फेरे जाते हैं।

Maide 5:76

(ऐ रसूल!) आप उनके अल्लाह के अलावा की इबादत करने में उनके विरुद्ध तर्क देते हुए कह दें : क्या तुम ऐसी चीज़ की इबादत करते हो, जो न तुम्हें कोई लाभ पहुँचा सकती है और न तुमसे कोई नुक़सान दूर कर सकती है?! अतः वह अक्षम और विवश है, और अल्लाह विवशता से पाक है। तथा केवल अल्लाह ही तुम्हारी सभी बातों को सुनने वाला है, इसलिए उनमें से कोई भी चीज़ उससे नहीं छूटती है, तुम्हारे सभी कर्मों को जानने वाला है, इसलिए उनमें से कुछ भी उससे छिपा नहीं है। तथा वह तुम्हें उनका बदला देगा।

Maide 5:77

(ऐ रसूल!) आप ईसाइयों से कह दें : तुम्हें सत्य का अनुसरण करने का जो आदेश दिया गया है, उसमें सीमा से आगे न बढ़ो, तथा तुम्हें जिनके सम्मान का हुक्म दिया गया है (जैसे कि नबी गण), उनका सम्मान करने में अतिशयोक्ति न करो कि उनके बारे में ईश्वरत्व की आस्था रखने लगो, जैसा कि तुमने ईसा बिन मरयम के साथ किया। तुमने ऐसा अपने उन पथभ्रष्ट पूर्वजों का अनुसरण करने के कारण किया है, जिन्होंने बहुत-से लोगों को सीधे मार्ग से भटकाया और खुद भी सत्य के मार्ग से भटक गए।

Maide 5:78

अल्लाह तआला बता रहा है कि उसने बनी इसराईल के काफ़िरों को अपनी दया से निष्कासित कर दिया। इसका वर्णन उस किताब में है, जो उसने दाऊद अलैहिस्सलाम पर उतारी अर्थात् ज़बूर, तथा उस किताब में है, जो उसने ईसा बिन मरयम पर अवतिरत की और वह इंजील है। दया से यह निष्कासन उनके द्वारा किए गए पापों और अल्लाह की वर्जनाओं की पवित्रता भंग करने के कारण था।

Maide 5:79

वे एक-दूसरे को बुराई करने से रोकते नहीं थे। बल्कि उनमें से अवज्ञाकारी लोग उन पापों और बुराइयों को सार्वजनिक रूप से किया करते थे। क्योंकि उन्हें बुराई से रोकने वाला कोई नहीं था। बुराई से रोकना छोड़कर वे बहुत बुरा कर रहे थे।

Maide 5:80

(ऐ रसूल!) इन यहूदियों में से बहुत-से काफ़िरों को आप देखेंगे कि वे काफ़िरों से प्रेम करते हैं तथा उनकी ओर झुकाव रखते हैं, जबकि वे आपके प्रति शत्रुतापूर्ण हैं और एकेश्वरवादियों से शत्रुता रखते हैं। उनका काफ़िरों से दोस्ती रखने का यह कार्य बहुत बुरा है। क्योंकि यह अल्लाह के उनपर क्रोधित होने और उन्हें नरक की आग में डालने का कारण है, जिसमें वे हमेशा के लिए रहेंगे, वहाँ से वे कभी न निकलेंगे।

Maide 5:81

यदि ये यहूदी वास्तव में अल्लाह तथा उसके रसूल पर ईमान रखते होते, तो बहुदेववादियों को मित्र न बनाते कि मोमिनों को छोड़कर उनसे प्यार करते और उनकी ओर झुकाव रखते। क्योंकि उन्हें काफ़िरों को दोस्त बनाने से मना किया गया था। लेकिन इन यहूदियों में से बहुत-से लोग अल्लाह की आज्ञाकारिता और उसकी संरक्षकता तथा मोमिनों की संरक्षकता से बाहर हैं।

Maide 5:82

(ऐ रसूल!) आप उन लोगों के लिए, जो आपपर और आपकी लाई हुई शरीयत पर ईमान लाने वाले हैं, सभी लोगों में सबसे बड़ी दुश्मनी रखने वाला यहूदियों को पाएँगे; क्योंकि उनके अंदर द्वेष, ईर्ष्या और अहंकार पाया जाता है, तथा मूर्तिपूजकों और अन्य शिर्क करने वालों को पाएँगे। तथा आप उन लोगों के लिए, जो आपपर और आपकी लाई हुई शरीयत पर ईमान लाने वाले हैं, उनमें से दोस्ती में सबसे निकट उन लोगों को पाएँगे, जो अपने बारे में कहते हैं कि : वे ईसाई हैं। ईमान वालों के साथ उनके स्नेह की निकटता का कारण यह है कि उनमें विद्वान हैं और उपासक हैं। और यह कि वे विनीत हैं, अभिमानी नहीं हैं, क्योंकि अभिमानी के हृदय में अच्छी बात प्रवेश नहीं करती।

Maide 5:83

और इन लोगों (जैसे नजाशी और उनके साथियों) के दिल बड़े नरम हैं। यही कारण है कि क़ुरआन का पाठ सुनने के समय जब उन्हें पता चलता है कि वह सत्य है, तो विनम्रता से रोते हैं; क्योंकि वे उसे पहचानते हैं जो ईसा अलैहिस्सलाम लेकर आए थे। वे कहते हैं : ऐ हमारे रब! हम उसपर ईमान लाए, जो तूने अपने रसूल मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर उतारा है। अतः (ऐ हमारे रब!) हमें मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की उम्मत के साथ लिख ले, जो क़ियामत के दिन लोगों के ख़िलाफ हुज्जत (गवाही देने वाले) होंगे।

Maide 5:84

वह कौन-सा कारण है जो हमें अल्लाह पर तथा उस सत्य पर ईमान लाने से रोकता है, जो मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम लेकर आए हैं?! हालाँकि हम नबियों तथा उनके अनुयायियों के साथ जन्नत में प्रवेश करने की आशा करते हैं, जो अल्लाह के आज्ञाकारी हैं और उसकी सज़ा से डरने वाले हैं।

Maide 5:85

इसलिए अल्लाह ने उनके ईमान लाने तथा सत्य को मानने के बदले में उन्हें ऐसे बाग़ प्रदान किए, जिनके महलों तथा पेड़ों के नीचे से नहरें बहती हैं, जिनमें वे सदा सर्वदा के लिए रहेंगे। तथा यही उत्तमता के साथ सत्य का पालन करने और बिना शर्त के उसके अधीन होने वालों का प्रतिफल है।

Maide 5:86

जिन लोगों ने अल्लाह और उसके रसूल के साथ कुफ़्र किया, तथा अल्लाह की उन आयतों को झुठलाया, जो उसने अपने रसूल पर उतारी थीं, वही लोग सदैव धधकती आग में रहने वाले हैं, वे कभी भी उससे बाहर नहीं निकलेंगे।

Maide 5:87

ऐ ईमान वालो! खाने, पीने और महिलाओं में से आनंददायक वैध चीज़ों को हराम न ठहराओ, उन्हें ज़ुह्द (दुनिया से अरूचि) या उपासना के रूप में निषिद्ध मत करो, तथा उसकी सीमा से आगे न बढ़ो, जो अल्लाह ने तुमपर हराम किया है। निःसंदेह अल्लाह उन लोगों से प्यार नहीं करता, जो उसकी सीमाओं का उल्लंघन करते हैं, बल्कि वह उनसे नफ़रत करता है।

Maide 5:88

अल्लाह अपनी जीविका में से जो कुछ तुम्हें प्रदान करता है, उसमें से इस हाल में खाओ कि वह हलाल और पवित्र (अच्छी) हो, उस समय नहीं अगर वह हराम हो जैसे कि बलपूर्वक ली गई या गंदी चीज़। तथा अल्लाह से, उसकी आज्ञाओं का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर, डरो। क्योंकि अल्लाह वही है जिसपर तुम ईमान रखते हो और तुम्हारा उसपर ईमान रखना तुम्हारे लिए यह आवश्यक कर देता है कि तुम उससे डरो।

Maide 5:89

ऐ मोमिनो! अल्लाह तुमसे उन क़समों का कोई हिसाब नहीं लेगा, जो तुम्हारी ज़बानों पर बिना इरादे के आ जाती हैं। वह केवल तुमसे उस क़सम का हिसाब लेगा, जिसका तुमने दृढ़ निश्चय किया और अपने दिल से उसका पक्का इरादा किया और फिर उसे तोड़ दिया। जब तुम ऐसी क़सम को तोड़ दो, जिसका तुमने दृढ़ निश्चय किया था, तो तीन चीज़ों में से किसी एक चीज़ का करना तुमसे उसके पाप को मिटा देगा : अपने शहर के औसत भोजन से दस ग़रीबों को प्रत्येक ग़रीब के लिए आधा सा' के हिसाब से खाना खिलाना, या उन्हें ऐसे कपड़े पहनाना जो प्रथागत कपड़ा माना जाता है, अथवा एक मोमिन दास मुक्त करना। यदि अपनी क़सम का प्रायश्चित करने वाला इन तीनों चीज़ों में से कोई एक भी न पाए, तो वह अपनी क़सम का प्रायश्चित तीन दिन के रोज़े रखकर करेगा। (ऐ मोमिनो!) यह जिसका उल्लेख किया गया है, तुम्हारी क़समों का प्रायश्चित है - जब तुम अल्लाह की क़सम खा लो और उसे तोड़ दो। तथा अपनी क़समों की हिफ़ाज़त करते हुए अल्लाह की झूठी क़सम खाने से, तथा अल्लाह की बहुत अधिक क़सम खाने से और क़सम को न पूरी करने से बचो, सिवाय इसके कि क़सम पूरी न करना बेहतर हो। तो ऐसी स्थिति में जो कर्म अच्छा हो उसे करो तथा अपनी क़समों का प्रायश्चित करो। जिस प्रकार अल्लाह ने तुम्हारे लिए क़सम का कफ़्फ़ारा वर्णन किया है, उसी तरह वह तुम्हारे लिए हलाल व हराम को स्पष्ट करने वाले प्रावधानों को स्पष्ट करता है, ताकि तुम अल्लाह के आभारी बनो कि उसने तुम्हें उन चीज़ों का ज्ञान प्रदान किया है, जो तुम नहीं जानते थे।

Maide 5:90

ऐ ईमान वालो! नशा पैदा करने वाली चीज़ जिससे चेतना शून्य हो जाए, जुआ जिसमें दोनों पक्षों की ओर से धन लगा हो, वह पत्थर जिसके पास मुश्रिक लोग उसके सम्मान में जानवर ज़बह करते हैं अथवा जिसे उसकी पूजा करने के लिए लगाते हैं, और पाँसे के तीर जिनके द्वारा वे अपना अनदेखा भाग्य जानने की कोशिश करते थे, ये सब शैतान द्वारा शोभित किए गए पाप के काम हैं। अतः इनसे दूर रहो, ताकि तुम्हें दुनिया में अच्छा जीवन तथा आख़िरत में जन्नत का आनंद प्राप्त हो।

Maide 5:91

मादक पदार्थों तथा जुए को सुंदर बनाकर शैतान का इरादा तो सिर्फ दिलों के बीच दुश्मनी और नफरत पैदा करना, तथा अल्लाह के स्मरण से और नमाज़ से ध्यान भटकाना है। तो क्या तुम (ऐ मोमिनो!) इन बुरे कामों को छोड़ने वाले हो? इसमें कोई संदेह नहीं कि यही तुम्हारे लिए उपयुक्त है, इसलिए बाज़ आ जाओ।

Maide 5:92

शरीयत के आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से दूर रहकर अल्लाह का आज्ञापालन करो और रसूल का आज्ञापालन करो तथा अवज्ञा से सावधान रहो। फिर यदि तुम उससे मुँह मोड़ो, तो जान लो कि हमारे रसूल का दायित्व केवल उस संदेश को पहुँचा देना है, जिसका अल्लाह ने उन्हें पहुँचाने का आदेश दिया है और वह उसे पहुँचा चुके हैं। इसलिए यदि तुम मार्गदर्शन अपना लो, तो इसमें तुम्हारा ही लाभ है, और यदि बुरे कर्म करो, तो तुम्हारा ही नुक़सान होगा।

Maide 5:93

जो लोग अल्लाह पर ईमान लाए, तथा उसकी निकटता प्राप्त करने के लिए अच्छे कर्म किए, उनपर उसमें कोई पाप नहीं जो उन्होंने शराब का उसके निषिद्ध होने से पहले सेवन किया था, यदि वे निषिद्ध चीज़ों से परहेज़ करते थे, अपने ऊपर अल्लाह के क्रोध से डरने वाले, उसपर ईमान रखने वाले, अच्छे कर्म करने वाले थे, फिर अल्लाह के प्रति उनका ध्यान बढ़ गया यहाँ तक कि वे उसकी इस तरह इबादत करने लगें, मानो कि वे उसे देख रहे हों, और अल्लाह उन लोगों से प्रेम करता है जो उसकी इस तरह इबादत करते हैं कि मानो वे उसे देख रहे हों; क्योंकि वे उसमें हमेशा अल्लाह के निरीक्षण का आभास करने वाले होते हैं। और यह स्थिति मोमिन को अपने काम को अच्छी तरह और पूर्ण रूप से करने के लिए प्रेरित करती है।

Maide 5:94

ऐ ईमान वालो! अल्लाह तुम्हारी इस तरह परीक्षा लेगा कि वह जंगली शिकार में से कुछ तुम्हारे पास ले आएगा, जबकि तुम एहराम की अवस्था में होगे। उनमें से छोटे शिकार को तुम अपने हाथों से पकड़ोगे और बड़े शिकार को अपने भालों से, ताकि अल्लाह जान ले (प्रत्यक्ष रूप से जानना जिसपर बंदों की पकड़ होती है) कि कौन अल्लाह के ज्ञान पर पूर्ण ईमान रखने की वजह से उससे बिन देखे डरता है। इसलिए वह अपने उस स्रष्टा के डर से शिकार करने से रुक जाता है, जिससे उसका कार्य छिपा नहीं रहता है। अतः जो हद से आगे बढ़े और ह़ज्ज या उम्रा के एहराम की हालत में शिकार करे, तो उसके लिए क़ियामत के दिन दर्दनाक अज़ाब है; क्योंकि उसने वह कार्य किया है जिससे अल्लाह ने मना किया था।

Maide 5:95

ऐ ईमान वालो! हज्ज या उम्रा के एहराम की स्थिति में जंगली शिकार न मारो। तथा तुममें से जो व्यक्ति जान-बूझकर शिकार मारे, तो उसने जो शिकार मारा है उसी के समान उसपर ऊँट, या गाय, या बकरी में से बदला (दंड) अनिवार्य है, जिसका निर्णय मुसलमानों में से दो न्यायप्रिय व्यक्ति करेंगे। और जिस पशु का वे निर्णय कर दें, उसके साथ वही किया जाएगा जो हज्ज की क़ुर्बानी के जानवर के साथ किया जाता है। अर्थात् उसे मक्का भेजा जाएगा और हरम में ज़बह किया जाएगा, या उस जानवर की क़ीमत के बराबर खाद्य पदार्थ हरम के निर्धनों को दिया जाएगा, हर निर्धन को आधा सा'। या हर आधे सा' खाद्य पदार्थ के बदले एक दिन रोज़ा रखना होगा। यह सब इसलिए कि शिकार करने वाला अपने किए के परिणाम का स्वाद चख ले। अल्लाह ने उसे क्षमा कर दिया, जो अतीत में हरम का शिकार मारा गया और एहराम की स्थिति में जो भूमि का शिकार मारा गया उसके हराम ठहराए जाने से पहले। जो व्यक्ति हराम घोषित होने के बाद भी ऐसा करेगा, अल्लाह उसे उसपर यातना देकर उससे बदला लेगा। अल्लाह बहुत शक्तिशाली, ताक़त वाला है और उसकी शक्ति में से एक यह है कि वह उससे बदला लेता है जो उसकी अवज्ञा करता है, यदि वह चाहे, उसे कोई ऐसा करने से रोक नहीं सकता।

Maide 5:96

अल्लाह ने तुम्हारे लिए जलीय जानवरों का शिकार करना तथा उस जानवर को हलाल कर दिया है, जो समुद्र तुम्हारे लिए फेंक देता है, चाहे वह जीवित हो या मृत, यह तुममें से उसके लाभ के लिए है जो निवासी है या यात्री है जिसके साथ वह खुद की आपूर्ति करता है, तथा उसने तुमपर भूमि का शिकार करना हराम कर दिया है जब तक कि तुम हज्ज या उम्रा के एहराम की स्थिति में हो। तथा अल्लाह के आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर, उससे डरो। क्योंकि उसी अकेले की ओर तुम क़ियामत के दिन लौटाए जाओगे, फिर वह तुम्हें तुम्हारे कर्मों का बदला देगा।

Maide 5:97

अल्लाह ने सम्मानित घर काबा को लोगों के लिए स्थापना का साधन बनाया है, जिसके साथ उनके धार्मिक हितों जैसे नमाज़, रोज़ा, ह़ज्ज एवं उम्रा की, तथा उनके सांसारिक हितों की स्थापना होती है, जैसे हरम में सुरक्षा एवं शांति और वहाँ हर चीज़ के फलों का पहुँचना। तथा उसने सम्मानित महीनों अर्थात् : ज़ुल-क़ा'दा, ज़ुल-ह़िज्जा, मुहर्रम और रजब को उनके लिए स्थापना का कारण बनाया है कि वे उनमें दूसरों कि ओर से लड़ाई से सुरक्षित रहते हैं, इसी तरह ह़ज्ज की क़ुर्बानी के जानवरों तथा उन पट्टों को जो यह इंगित करते हैं कि वे हरम के लिए ले जाए गए हैं, उनके लिए स्थापना का साधन बनाया है, क्योंकि वे अपने स्वामियों को हानि पहुँचाए जाने से बचाते हैं। अल्लाह ने तुमपर यह उपकार इसलिए किया ताकि तुम जान लो कि अल्लाह जानता है जो कुछ आकाशों में तथा जो कुछ धरती में है, और यह कि अल्लाह हर चीज़ को ख़ूब जानने वाला है। क्योंकि उसका - तुम्हारे लिए हितों को लाने और तुमसे नुक़सान को उनके आने से पहले दूर करने के लिए - इन नियमों को बनाना, इस बात का प्रमाण है कि वह बंदों के हितों की चीज़ों को जानता है।

Maide 5:98

(ऐ लोगो!) यह जान लो कि निःसंदेह अल्लाह उसे बहुत कठोर दंड देने वाला है, जो उसकी अवज्ञा करे, तथा तौबा करने वाले को बहुत क्षमा करने वाला, उसपर बड़ा दयालु है।

Maide 5:99

रसूल का दायित्व केवल यह है कि उस उपदेश को पहुँचा दे, जिसको पहुँचाने का अल्लाह ने उसे आदेश दिया है, उसकी यह ज़िम्मेदारी नहीं कि लोगों को हिदायत की तौफीक़ दे, क्योंकि यह केवल अल्लाह के हाथ में है, तथा अल्लाह उसे जानता है जो कुछ तुम मार्गदर्शन या पथभ्रष्टता में से प्रकट करते और छिपाते हो। और वह तुम्हें उसका बदला देगा।

Maide 5:100

(ऐ रसूल!) आप कह दें कि कोई भी अपवित्र (बुरी) चीज़ किसी भी पवित्र (अच्छी) चीज़ के बराबर नहीं है, यद्यपि अपवित्र (बुरी) चीज़ की बहुतायत आपको भली लगे। क्योंकि उसकी बहुतायत उसकी श्रेष्ठता का संकेत नहीं देती है। अतः (ऐ बुद्धि वालो!) अपवित्र को छोड़कर और पवित्र को करके अल्लाह से डरो, ताकि तुम्हें जन्नत प्राप्त हो।

Maide 5:101

ऐ ईमान वालो! अपने रसूल से उन चीज़ों के संबंध में प्रश्न न करो, जिनकी तुम्हें कोई ज़रूरत नहीं है, और जो तुम्हारे धर्म के मामले में तुम्हारी मदद नहीं करती हैं। यदि वे तुम्हारे लिए प्रकट कर दी जाएँ, तो उनमें पाई जाने वाली कठिनाई के कारण तुम्हें बुरी लगेंगी। यदि तुम इन चीज़ों के बारे में जिनके बारे में पूछने से तुम्हें मना किया गया है उस समय प्रश्न करोगे जब रसूल पर वह़्य उतारी जाती है, तो वे तुम्हारे लिए स्पष्ट कर दी जाएँगी, और यह अल्लाह के लिए बड़ा आसान है। अल्लाह ने उन चीज़ों को नज़रअंदाज़ कर दिया है जिनके बारे में क़ुरआन खामोश है। अतः उनके बारे में प्रश्न न करो, क्योंकि अगर तुम उनके बारे में प्रश्न करोगे, तो तुम्हें उनके आदेश का बाध्य कर दिया जाएगा। तथा अल्लाह अपने बंदों के पापों को क्षमा करने वाला है यदि वे तौबा करते हैं, अत्यंत सहनशील है उन्हें उनपर दंडित नहीं करता है।

Maide 5:102

तुमसे पहले भी कुछ लोगों ने इसी तरह की बातों के बारे में प्रश्न किए थे, फिर जब उन्हें उनका बाध्य कर दिया गया, तो उन्होंने उनके अनुसार कार्य नहीं किया। इसलिए वे उसके कारण काफ़िर हो गए।

Maide 5:103

अल्लाह ने चौपायों को हलाल किया है। चुनाँचे उसने उनमें से उन जानवरों को हराम नहीं किया है, जिन्हें मुश्रिकों ने अपनी मूर्तियों के लिए अपने ऊपर हराम ठहरा लिया है। जैसे कि बहीरा, जो उस ऊँटनी को कहा जाता है, जिसके कान एक निश्चित संख्या में बच्चे जनने के बाद काट दिए जाते थे। तथा साइबा, जो उस ऊँटनी को कहा जाता है, जो एक निश्चित उम्र तक पहुँचने पर उनकी मूर्तियों के लिए छोड़ दी जाती थी। तथा वसीला, जो उस ऊँटनी को कहा जाता है, जिसने लगातार दो मादा बच्चे जने हों। तथा हामी, जो उस नर ऊँट को कहा जाता है, जिसकी पुश्त से कई ऊँट जन्म ले चुके हों। (अल्लाह ने इन्हें हराम नहीं किया), परंतु काफ़िरों ने झूठ-मूठ और मिथ्यारोपण करते हुए यह दावा किया कि अल्लाह ने उक्त जानवरों को हराम किया है, तथा अधिकांश काफ़िर सत्य और असत्य, हलाल और हराम के बीच अंतर नहीं करते हैं।

Maide 5:104

जब अल्लाह पर कुछ चौपायों को हराम ठहराने का झूठा आरोप लगाने वाले इन लोगों से कहा जाता है : अल्लाह के उतारे हुए क़ुरआन की ओर आओ, तथा रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की सुन्नत की ओर आओ, ताकि तुम हलाल और हराम को पहचान सको, तो वे कहते हैं : हमने जिन विश्वासों, कथनों और कार्यों को अपने पूर्वजों से लिया है और हमें विरासत में मिला है, वही हमारे लिए काफ़ी हैं। उनके लिए यह कैसे काफ़ी है जबकि उनके पूर्वज कुछ नहीं जानते थे, और न तो उन्हें सत्य का मार्गदर्शन प्राप्त था?! इसलिए उनका अनुसरण वही करेगा, जो उनसे अधिक अज्ञानी और उनसे अधिक मार्ग से भटका हुआ होगा। अतः वे अज्ञानी और पथभ्रष्ट हैं।

Maide 5:105

ऐ ईमान वालो! तुम अपनी चिंता करो। अतः अपने आपको ऐसा कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध करो, जिससे तुम्हारा सुधार हो। यदि तुम स्वयं मार्गदर्शन पा चुके, तो लोगों में से जो व्यक्ति गुमराह हो गया और उसने तुम्हारी बात नहीं मानी, वह तुम्हें कोई हानि नहीं पहुँचाएगा। तथा तुम्हारे मार्गदर्शन प्राप्त होने की अपेक्षा यह कि तुम भलाई का आदेश दो और बुराई से रोको। क़ियामत के दिन तुम्हें अकेले अल्लाह ही की ओर लौटकर जाना है, फिर वह तुम्हें बताएगा कि तुम दुनिया में क्या किया करते थे और तुम्हें उसका बदला देगा।

Maide 5:106

ऐ ईमान वालो! यदि तुममें से किसी की मृत्यु का समय मौत की किसी निशानी के प्रकट होने के साथ निकट आ जाए, तो वह अपनी वसीयत पर मुसलमानों में से दो न्यायप्रिय व्यक्तियों को, या मुसलमानों की अनुपस्थिति के कारण ज़रूरत पड़ने पर काफ़िरों में से दो आदमियों को गवाह बना दे, यदि तुम यात्रा कर रहे हो और तुमपर मृत्यु आ पहुँचे। यदि तुम्हें उन दोनों की गवाही के विषय में संदेह हो, तो किसी नमाज़ के बाद उन्हें रोक लो और वे दोनों अल्लाह की क़सम खाएँ कि : वे दोनों अल्लाह की ओर से मिले हुए अपने हिस्से (यानी अपनी क़सम) को किसी मुआवज़े के बदले नहीं बेचेंगे, और न उसके साथ किसी संबंधी का पक्ष लेंगे (लाभ पहुँचाएँगे), तथा वे दोनों अपने पास मौजूद अल्लाह की किसी गवाही को नहीं छिपाएँगे, और यदि उन्होंने ऐसा किया तो वे दोनों अल्लाह की अवज्ञा करने वाले पापियों में से होंगे।

Maide 5:107

यदि क़सम खिलाने के बाद यह स्पष्ट हो जाए कि उन दोनों ने गवाही अथवा क़सम में झूठ बोला है, या उन दोनों की ख़यानत (विश्वासघात) प्रकट हो जाए; तो उनके स्थान पर मरे हुए व्यक्ति के निकटतम संबंधियों में से दो व्यक्ति खड़े होकर सत्य की गवाही दें या क़सम खाएँ। वे दोनों अल्लाह की क़सम खाते हुए कहें : निश्चय उनके झूठ और ख़यानत पर हमारी गवाही, उन दोनों की अपनी सच्चाई और अमानत पर गवाही से अधिक सच्ची है, और हमने झूठी क़सम नहीं खाई है। यदि हमने झूठी गवाही दी है, तो निश्चय हम उन अत्याचारियों में से होंगे जो अल्लाह की सीमाओं का उल्लंघन करने वाले हैं।

Maide 5:108

दोनों गवाहों की गवाही में संदेह होने पर उन्हें नमाज़ के बाद क़सम खिलाने और उनकी गवाही को रद्द करने का जो उल्लेख किया गया है, यह इस बात के अधिक क़रीब है कि वे दोनों गवाही का निष्पादन उसके शरई तरीक़े के अनुसार करें। अतः वे गवाही को विकृत न करें या उसमें बदलाव न करें या ख़यानत (विश्वासघात) न करें। तथा यह इस तथ्य के अधिक क़रीब है कि वे इस बात से डरें कि वारिसों की क़सम उन दोनों की क़सम को ख़ारिज कर देगी, चुनाँचे वे लोग उन दोनों की गवाही के विपरीत क़सम खा लेंगे, इस तरह वे दोनों बेनक़ाब हो जाएँगे। गवाही और क़सम में झूठ और ख़यानत (विश्वासघात) को त्यागकर अल्लाह से डरो, तथा तुम्हें जिस बात का आदेश दिया गया है उसे सुनो और स्वीकार करो। और अल्लाह उन लोगों को सामर्थ्य प्रदान नहीं करता, जो उसके आज्ञापालन से निकल जाने वाले हैं।

Maide 5:109

ऐ लेगो! क़ियामत के दिन को याद करो, जब अल्लाह सभी रसूलों को इकट्ठा करेगा। फिर उनसे कहेगा : तुम्हारे उन समुदायों ने, जिनकी ओर तुम्हें भेजा गया था, तुम्हें क्या जवाब दिया? वे उसका जवाब अल्लाह को सौंपते हुए कहेंगे : हमें कुछ ज्ञान नहीं। बल्कि सारा ज्ञान - ऐ हमारे पालनहार! - केवल तुझे ही है, निःसंदेह तू ही एक अकेला है जो अनदेखी चीज़ों को जानता है।

Maide 5:110

तथा याद करो, जब अल्लाह (क़ियामत के दिन) ईसा अलैहिस्सलाम को संबोधित करते हुए कहेगा : ऐ मरयम के पुत्र ईसा! तुम अपने ऊपर मेरे अनुग्रह को याद करो जब मैंने तुम्हें बिना पिता के बनाया था, और अपनी माता मरयम अलैहस्सलाम के ऊपर मेरे अनुग्रह को याद करो, जब मैंने उसे उसके समय की महिलाओं के ऊपर चुन लिया। तथा अपने ऊपर मेरी उस नेमत को याद करो जो मैंने तुम्हें उस समय प्रदान की, जब मैंने तुम्हें जिबरील (अलैहिस्सलाम) द्वारा शक्ति प्रदान की, तुम लोगों से बात करते थे - जबकि तुम दूध पीते बच्चे थे - उन्हें अल्लाह की ओर बुलाते थे, तथा तुम अपनी अधेड़ आयु में उनसे उस चीज़ के बारे में बात करते थे जिसके साथ मैंने तुम्हें उनकी ओर भेजा था। मैंने तुमपर एक अनुग्रह यह किया कि तुम्हें लिखना सिखाया और उस तौरात का ज्ञान प्रदान किया जो मूसा (अलैहिस्सलाम) पर उतारी गई थी और उस इंजील की शिक्षा दी जो तुमपर उतारी गई, और मैंने तुम्हें शरीयत के रहस्य, उसके फ़ायदे तथा उसकी हिकमतें बताईं। तुम्हारे ऊपर मेरी नेमतों में से एक यह है कि तुम मिट्टी से पक्षी के रूप समान आकृति बनाते थे, फिर उसमें फूँक मारते थे, तो वह पक्षी बन जाती थी। तथा तुम जन्म से अंधे को उसकी अंधता से चंगा कर देते थे और कोढ़ी को रोगमुक्त कर देते थे, तो उसकी त्वचा स्वस्थ हो जाती थी। तथा तुम मुर्दों को अल्लाह से उन्हें पुनर्जीवित करने की दुआ करके उन्हें पुनर्जीवित कर देते थे। यह सब मेरी अनुमति से संपन्न होता था। मैंने तुमपर जो उपकार किया, उनमें से एक यह भी है कि मैंने बनी इसराईल को उस समय तुमसे दूर कर दिया जब वे तुम्हें मार डालने ही वाले थे, जब तुम उनके पास स्पष्ट चमत्कार लेकर आए थे। तो उन्होंने उनका इनकार कर दिया, और कहा : यह ईसा जो कुछ लेकर आए हैं एक स्पष्ट जादू के सिवा कुछ नहीं।

Maide 5:111

तथा तुम अपने ऊपर मेरे इस उपकार को भी याद करो कि मैंने तुम्हें कुछ सहायक प्रदान किए जब मैंने हवारियों (साथियों) के दिल में यह बात डाल दी कि वे मुझ पर और तुम पर ईमान लाएँ। तो उन्होंने आज्ञा मानी और जवाब देते हुए कहा : हम ईमान लाए, और - ऐ हमारे रब! - तू गवाह रह कि हम तेरे आज्ञाकारी और अधीन हैं।

Maide 5:112

उस समय को याद करो, जब हवारियों ने कहा कि क्या आपका पालनहार, यदि आप उससे दुआ करें, तो हमपर आकाश से एक थाल (भोजन सहित दस्तर-ख़्वान) उतार सकता है? तो ईसा (अलैहिस्सलाम) उन्हें अल्लाह से डरने और जो कुछ उन्होंने माँगा था, उसे त्यागने का आदेश देकर उन्हें उत्तर दिया। क्योंकि हो सकता है उसमें उनकी कोई परीक्षा हो, और उनसे कहा : जीविका की तलाश में अपने रब पर भरोसा करो, यदि तुम मोमिन हो।

Maide 5:113

हवारियों ने ईसा से कहा : हम चाहते हैं कि इस दस्तर-ख़्वान से खाएँ, और हमारे दिल अल्लाह की शक्ति की पूर्णता से और इस बात से आश्वस्त हो जाएँ कि आप उसके रसूल हैं, तथा हम निश्चित रूप से जान लें कि आप अल्लाह के पास से जो कुछ लेकर आए हैं, उसमें आपने हमसे सच्च कहा है, और हम उन लोगों के लिए इस बात के साक्षी बन जाएँ, जो यहाँ मौजूद नहीं हैं।

Maide 5:114

ईसा अलैहिस्सलाम ने उनके अनुरोध का उत्तर दिया और अल्लाह से यह कहते हुए दुआ की : हे हमारे रब! हमपर खाने का एक दस्तर-ख़्वान उतार दे, जिसके उतरने के दिन को हम एक पर्व बनाकर तेरे लिए आभार प्रकट करते हुए उसका सम्मान करें, तथा वह तेरे एकत्व (एकमात्र पूज्य होने) की निशानी और प्रमाण, तथा जिस चीज़ के साथ मैं भेजा गया हूँ उसकी सच्चाई का प्रमाण हो। तथा हमें ऐसी जीविका प्रदान कर, जो तेरी इबादत करने में हमारी मदद करे, और - ऐ हमारे रब! - तू सबसे उत्तम जीविका प्रदान करने वाला है।

Maide 5:115

अल्लाह ने ईसा अलैहिस्सलाम की दुआ क़बूल कर ली और फरमाया : मैं यह दस्तर-ख़्वान उतारने वाला हूँ, जो तुमने अपने ऊपर उतारने की माँग की है। अतः जो कोई भी उसके उतरने के बाद कुफ्र करे, वह केवल खुद को दोषी ठहराए। क्योंकि मैं उसे ऐसी कड़ी यातना दूँगा, जो किसी और को नहीं दूँगा। क्योंकि उसने प्रकाशमान (स्पष्ट) निशानी देखी, इसलिए उसका कुफ़्र हठ का कुफ़्र है। तथा अल्लाह ने उनसे अपना वचन पूरा किया, सो उसे उनपर उतार दिया।

Maide 5:116

और उस समय को याद करो, जब अल्लाह तआला क़ियामत के दिन ईसा बिन मरयम अलैहिमस्सलाम को संबोधित करते हुए कहेगा : ऐ ईसा बिन मरयम! क्या तुमने लोगों से कहा था : मुझे और मेरी माँ को अल्लाह के अलावा पूज्य बना लो? तो ईसा अलैहिस्सलाम अपने पालनहार की पवित्रता बयान करते हुए कहेंगे : मेरे लिए उचित ही नहीं कि मैं उनसे सत्य के अलावा कुछ कहूँ। और यदि मान लिया जाए कि मैंने ऐसा कहा था, तो निश्चय तुझे उसका ज्ञान है, क्योंकि तुझसे कुछ भी छिपा नहीं है। तू जानता है जो कुछ मैं अपने दिल में छिपाता हूँ, और मुझे नहीं पता जो तेरे मन में है। निश्चय अकेला तू ही है जो हर परोक्ष (अनुपस्थित), हर छिपी हुई और हर प्रत्यक्ष चीज़ को जानता है।

Maide 5:117

ईसा (अलैहिस्सलाम) ने अपने रब से कहा : मैंने उनसे केवल वही कहा, जो कुछ तूने मुझे कहने का आदेश दिया था कि उन्हें एकमात्र तेरी इबादत करने का आदेश दूँ। और जब तक मैं उनके बीच मौजूद था तो वे जो कुछ कहते थे मैं उसकी निगरानी करता था। फिर जब तूने मुझे जीवित आकाश पर उठाकर उनके बीच मेरे रहने की अवधि का समापन कर दिया, तो - ऐ मेरे रब! - तू ही उनके कर्मों का संरक्षक था, और तू हर चीज़ का साक्षी है, कोई भी चीज़ तुझसे छिपी नहीं। अतः जो कुछ मैंने उनसे कहा और जो कुछ उन्होंने मेरे बाद कहा, वह तुझसे छिपा नहीं।

Maide 5:118

(ऐ मेरे पालनहार!) यदि तू उन्हें दंड दे, तो बेशक वे तेरे बंदे हैं, तू उनके साथ जो चाहे करे, और यदि तू उनमें से ईमान लाने वालों पर उपकार करते हुए उन्हें क्षमा कर दे, तो कोई तुझे उससे रोकने वाला नहीं। क्योंकि तू सबपर प्रभुत्वशाली है जिसे पराजित नहीं किया जा सकता, तथा अपने प्रबंधन में हिकमत वाला है।

Maide 5:119

अल्लाह ईसा अलैहिस्सलाम से कहेगा : यह एक ऐसा दिन है जब सच्चे इरादों, कर्मों और बातों वालों को उनकी सच्चाई लाभ देगी। उनके लिए ऐसे बाग़ हैं, जिनके महलों तथा पेड़ों के नीचे से नहरें प्रवाहित हैं, वे उनमें सदा सर्वदा के लिए रहेंगे, उन्हें कभी मृत्यु नहीं आएगी। अल्लाह उनसे प्रसन्न होगा, अतः वह उनसे कभी नाराज़ नहीं होगा तथा वे शाश्वत आनंद प्राप्त होने के कारण अल्लाह से प्रसन्न होंगे। यह प्रतिफल और (अल्लाह का) उनसे प्रसन्न होना ही महान सफलता है, जिसके बराबर कोई सफलता नहीं।

Maide 5:120

आकाशों तथा धरती का राज्य अकेले अल्लाह ही का है, वही उनका स्रष्टा और उनके मामलों का प्रबंध करने वाला है, तथा उनमें विद्यमान् सभी प्राणियों का राज्य उसी का है, तथा वह हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है, उसे कोई चीज़ विवश नहीं कर सकती।

Enam 6:1

परम पूर्णता से विशिष्ट करना और प्रेम के साथ सर्वोच्च सद्गुणों द्वारा प्रशंसा, उस अल्लाह के लिए साबित है, जिसने बिना किसी पूर्व उदाहरण के आकाशों तथा धरती की रचना की, तथा रात और दिन की रचना की, जो एक-दूसरे के बाद आते रहते हैं। चुनाँचे उसने रात को अँधेरी और दिन को प्रकाशमान बनाया। इसके बावजूद, जिन लोगों ने कुफ़्र किया, वे उसके अलावा को उसके बराबर ठहराते हैं और उसे उसका साझीदार बना लेते हैं।

Enam 6:2

वही महिमावान है, जिसने - ऐ लोगो! - तुम्हें मिट्टी से पैदा किया, जब उसने तुम्हारे पिता आदम अलैहिस्सलाम की रचना मिट्टी से की। फिर उसने तुम्हारे इस दुनिया के जीवन में रहने के लिए एक अवधि निर्धारित की। तथा उसने एक और अवधि क़ियामत के दिन तुम्हें पुनर्जीवित करने के लिए निर्धारित की, जिसे केवल वही जानता है। फिर भी तुम उस महिमावान् के पुनर्जीवित करने की क्षमता पर संदेह करते हो।

Enam 6:3

आकाशों तथा धरती में वही महिमावान् सत्य पूज्य है, उससे कोई चीज़ छिपी नहीं है। वह तुम्हारे छिपे एवं खुले इरादों, बातों और कर्मों को जानता है, और वह तुम्हें उनका बदला देगा।

Enam 6:4

मुश्रिकों के पास उनके रब की ओर से जो भी प्रमाण आया, उन्होंने उसकी परवाह न करते हुए उसे छोड़ दिया। चुनाँचे उनके पास अल्लाह की तौहीद (एकेश्वरवाद) को प्रमाणित करने वाले स्पष्ट तर्क और खुले प्रमाण आए, तथा उनके पास उसके रसूलों की सच्चाई को इंगित करने वाली निशानियाँ आईं, इसके बावजूद भी वे उनकी परवाह किए बिना उनसे विमुख हो गए।

Enam 6:5

यदि उन्होंने उन स्पष्ट तर्कों और खुले प्रमाणों से मुँह मोड़ लिया, तो निःसंदेह वे उससे भी अधिक स्पष्ट चीज़ से मुँह मोड़ चुके हैं। क्योंकि उन्होंने उस क़ुरआन को झुठलाया है, जो मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम लेकर आए। और जब वे क़ियामत के दिन यातना को देख लेंगे, तो उनकी समझ में आ जाएगा कि जिसका वे उपहास किया करते थे, वही सत्य है।

Enam 6:6

क्या इन काफ़िरों को अत्याचारी समुदायों को नष्ट करने में अल्लाह के तरीक़े का पता नहीं?! अल्लाह ने इनसे पहले बहुत-से समुदायों को नष्ट कर दिया, जिन्हें उसने शक्ति तथा धरती पर जीवित रहने के ऐसे साधन दिए थे, जो इन काफ़िरों को नहीं दिए। तथा उनपर लगातार बारिश बरसाई और उनके लिए ऐसी नहरें प्रवाहित कीं जो उनके घरों के नीचे से बहती थीं। परंतु उन्होंने अल्लाह की अवज्ञा की, तो अल्लाह ने उनके द्वारा किए गए पापों के कारण उन्हें नष्ट कर दिया, और उनके बाद अन्य समुदायों को पैदा किया।

Enam 6:7

(ऐ रसूल!) यदि हम आपपर काग़ज़ में लिखी हुई कोई पुस्तक उतार दें और वे उसे अपनी आँखों से देख लें तथा पुस्तक को अपने हाथों से छूकर उसके बार में सुनिश्चित कर लें; तो भी वे अपने इनकार और हठ (दुराग्रह) के कारण उसपर हरगिज़ ईमान नहीं लाएँगे, और निश्चय यही कहेंगे : जो कुछ तुम लाए हो वह तो जादू के सिवा कुछ नहीं है। अतः हम उसपर कदापि ईमान नहीं लाएँगे।

Enam 6:8

और इन काफिरों ने कहा : यदि अल्लाह ने मुहम्मद के साथ कोई फ़रिश्ता उतारा होता, जो हमसे बात करता और गवाही देता कि वह एक रसूल हैं, तो हम अवश्य ईमान ले आते। और यदि हमने उनके चाहने के अनुसार कोई फ़रिश्ता उतारा होता, तो निश्चय हम उन्हें नष्ट कर देते यदि वे ईमान नहीं लाते, और यदि वे उतरते तो उन्हें तौबा करने का समय नहीं दिया जाता।

Enam 6:9

यदि हम उनकी ओर भेजे हुए रसूल को फ़रिश्ता बनाते, तो निश्चय हम उसे मनुष्य का रूप देते, ताकि वे उसकी बात सुन सकें और उससे ग्रहण कर सकें; क्योंकि वे फ़रिश्ते के साथ ऐसा नहीं कर सकते हैं यदि वह अपने उस रूप में हो जिसपर अल्लाह ने उसे बनाया है। और यदि हम उसे किसी आदमी के रूप में बनाते, तो अवश्य उसका मामला उनके लिए संदिग्ध हो जाता।

Enam 6:10

यदि ये लोग आपके साथ एक फ़रिश्ता उतारने की माँग करके उपहास करते हैं, तो निश्चय आपसे पहले कई समुदायों ने अपने रसूलों का उपहास किया था। तो उन्हें उस यातना ने घेर लिया, जिसका वे इनकार करते थे, और उससे डराए जाने पर उसका मज़ाक उड़ाते थे।

Enam 6:11

(ऐ रसूल!) आप इन उपहास करने वाले झुठलाने वाले लोगों से कह दें : धरती में चलो-फिरो, फिर विचार करो कि अल्लाह के रसूलों को झुठलाने वालों का अंत कैसे हुआ। निश्चय उनपर अल्लाह की यातना उतरी इसके उपरांत कि वे अति शक्तिशाली और अजेय थे।

Enam 6:12

(ऐ रसूल!) उनसे पूछिए : आकाशों तथा धरती की बादशाही और जो कुछ उन दोनों के बीच है, उसकी बादशाही किसकी है? आप कह दें : उन सब की बादशाही अल्लाह की है। उसने अपने बंदों पर अनुग्रह करते हुए अपने ऊपर दया करना लिख दिया है। इसलिए वह उन्हें यातना देने में जल्दी नहीं करता। यहाँ तक कि अगर उन्होंने तौबा नहीं की तो अल्लाह उन सभी को क़ियामत के दिन इकट्ठा करेगा, जिस दिन के बारे में कोई संदेह नहीं है। जिन लोगों ने अल्लाह का इनकार कर अपने आपको घाटे में डाला, वे ईमान नहीं लाते हैं, कि ख़ुद को घाटे से बचा सकें।

Enam 6:13

रात और दिन में जो कुछ बस रहा है, सबका मालिक अकेला अल्लाह है। तथा वह उनकी बातों को सुनने वाला, उनके कर्मों को जानने वाला है और वह उन्हें उनका प्रतिफल देगा।

Enam 6:14

(ऐ रसूल!) आप उन मुश्रिकों से कह दें, जो अल्लाह के साथ उसके अलावा मूर्तियों और अन्य चीज़ों की पूजा करते हैं : क्या यह बात विवेक संगत है कि मैं अल्लाह के अलावा किसी अन्य को सहायक बना लूँ, जिससे प्रेम करूँ और सहायता माँगूँ?! जबकि वह अल्लाह ही है, जिसने आकाशों और धरती को बिना किसी पूर्व उदाहरण के बनाया, चुनाँचे उससे पहले उन्हें किसी ने नहीं बनाया। तथा वही है, जो अपने बंदों में से जिसे चाहता है, जीविका प्रदान करता है। तथा उसके बंदों में से कोई भी उसे जीविका नहीं देता। क्योंकि वह अपने बंदों से बे-नियाज़ है (उसे किसी की आवश्यकता नहीं), जबकि उसके बंदे उसके ज़रूरतमंद हैं। (ऐ रसूल!) आप कह दें कि मेरे पालनहार ने मुझे आदेश दिया है कि मैं इस उम्मत में से सबसे पहले उसका आज्ञाकारी बन जाऊँ और मुझे उन लोगों में शामिल होने से रोका है, जो उसके साथ दूसरों को शरीक बनाते हैं।

Enam 6:15

(ऐ रसूल!) आप कह दें : मुझे डर है कि अगर मैं उन चीज़ों को करके जो अल्लाह ने मुझपर हराम की हैं, जैसे शिर्क इत्यादि, या उन चीज़ों को त्याग करके जिनका अल्लाह ने मुझे आदेश दिया है, जैसे ईमान और आज्ञाकारिता के अन्य कार्य, अल्लाह की अवज्ञा करूँ, तो वह मुझे क़ियामत के दिन बहुत बड़ी यातना देगा।

Enam 6:16

जिस व्यक्ति से अल्लाह क़ियामत के दिन उस यातना को दूर कर देता है, तो निश्चय वह अपने आप पर अल्लाह की दया के साथ सफल हो गया, तथा यातना से यह मुक्ति ही वह स्पष्ट सफलता है, जिसके बराबर कोई सफलता नहीं है।

Enam 6:17

(ऐ आदम के बेटे!) यदि अल्लाह की ओर से तुमपर कोई विपत्ति आ पड़े, तो अल्लाह के अलावा कोई भी उस विपत्ति को तुमसे टालने वाला नहीं है, और यदि उसकी ओर से तुम्हें कोई भलाई पहुँचे, तो उसके अनुग्रह को कोई हटाने वाला नहीं है। क्योंकि वह सब कुछ करने में सक्षम है, उसे कोई चीज़ विवश नहीं कर सकती।

Enam 6:18

वह अपने बंदों पर ग़ालिब (हावी) और उन्हें अपने अधीन रखने वाला है, हर प्रकार से उनसे ऊपर है। उसे कोई चीज़ विवश नहीं कर सकती और न कोई उसे पराजित कर सकता है। हर कोई उसके अधीन है। वह अपने बंदों के ऊपर है जैसा कि उसकी महिमा के योग्य है। वह अपनी रचना, प्रबंधन और विधान में पूर्ण हिकमत वाला, हर चीज़ की ख़बर रखने वाला है। अतः उससे कुछ भी छिपा नहीं है।

Enam 6:19

(ऐ रसूल!) आप उन मुश्रिकों से, जो आपको झुठलाते हैं, कह दें : मेरी सच्चाई की सबसे महान और सबसे बड़ी गवाही कौन-सी चीज़ है? आप कह दें कि अल्लाह मेरी सच्चाई की सबसे बड़ी गवाही और सबसे महान चीज़ है, वह मेरे और तुम्हारे बीच गवाह है, वह जानता है जो कुछ मैं तुम्हारे पास लेकर आया हूँ और तुम उसका क्या जवाब दोगे। अल्लाह ने मेरी ओर इस क़ुरआन की वह़्य की है, ताकि मैं इसके द्वारा तुम्हें डराऊँ, तथा मैं इससे उन मनुष्यों और जिन्नों को डराऊँ, जिन तक यह (क़ुरआन) पहुँचे। (ऐ मुश्रिकों!) निःसंदेह तुम मानते हो कि अल्लाह के साथ और भी पूज्य हैं। (ऐ रसूल!) आप कह दें : मैं उसकी गवाही नहीं देता, जो तुमने स्वीकारा है, क्योंकि वह असत्य है। अल्लाह तो केवल एक ही पूज्य है, जिसका कोई शरीक नहीं, तथा मैं हर उस चीज़ से बरी हूँ, जो तुम उसके साथ शरीक ठहराते हो।

Enam 6:20

जिन यहूदियों को हमने तौरात दिया और जिन ईसाइयों को हमने इंजील दिया, वे पैगंबर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को पूर्ण रूप से जानते हैं, जैसे वे अपने बच्चों को दूसरों के बच्चों के बीच से पहचान लेते हैं। अतः वे लोग जिन्होंने स्वयं को आग (नरक) में डालकर अपने आपको घाटे में डाला है, वे ईमान नहीं लाएँगे।

Enam 6:21

जिसने अल्लाह का कोई साझी ठहराया और उसके साथ उसकी इबादत की, अथवा अल्लाह की उन आयतों को झुठलाया, जो उसने अपने रसूल पर उतारीं, उससे बड़ा अत्याचारी कोई नहीं। अल्लाह की ओर साझी की निस्बत करके और उसकी आयतों को झुठलाकर अत्याचार करने वाले लोग कभी सफल नहीं होंगे, यदि उन्होंने तौबा न की।

Enam 6:22

और क़ियामत के दिन को याद करें, जब हम उन सबको इकट्ठा करेंगे, उनमें से किसी को भी नहीं छोड़ेंगे, फिर हम उन लोगों से जिन्होंने अल्लाह के साथ उसके अलावा की पूजा की, उन्हें फटकार लगाते हुए कहेंगे : तुम्हारे वे साझी कहाँ हैं, जिन्हें तुम झूठा दावा करते थे कि वे अल्लाह के साझी हैं?!

Enam 6:23

इस परीक्षा के बाद उनका इसके सिवा कोई बहाना न होगा कि वे अपने पूज्यों से किनारा कर लेंगे और झूठ-मूठ कहेंगे : अल्लाह की क़सम! जो हमारा पालनहार है, हम दुनिया में तेरे साथ शिर्क करने वाले नहीं थे, बल्कि हम तुझपर ईमान रखने वाले, तुझे एकमात्र पूज्य मानने वाले थे।

Enam 6:24

(ऐ मुहम्मद!) देखो कैसे इन लोगों ने अपने बारे में शिर्क का इनकार करके खुद से झूठ बोला, तथा ये अपने सांसारिक जीवन में अल्लाह के साथ जो साझी गढ़ा करते थे, वे इनसे ग़ायब हो गए और इन्हें असहाय छोड़ गए।

Enam 6:25

ऐ रसूल! जब आप क़ुरआन पढ़ते हैं, तो मुश्रिकों में से कुछ लोग आपकी तरफ़ कान लगाकर सुनते हैं, लेकिन वे जो कुछ सुनते हैं उससे लाभ नहीं उठाते; क्योंकि हमने उनके दिलों पर, उनके हठ और उनके मुँह फेरने के कारण, परदे डाल दिए हैं, ताकि वे क़ुरआन को ना समझ सकें और हमने उनके कानों में लाभप्रद सुनवाई से बहरापन रखा है। वे चाहे कितने ही स्पष्ट प्रमाण और स्पष्ट तर्क देख लें, उनपर ईमान नहीं लाएँगे, यहाँ तक कि जब वे आपके पास आते हैं, आपसे झूठ के साथ सत्य के बारे में झगड़ते हैं। वे कहते हैं : जो कुछ आप लेकर आए हैं, वह पहले लोगों की किताबों से लिया गया है।

Enam 6:26

वे लोगों को रसूल पर ईमान लाने से मना करते हैं, और खुद भी उससे दूर रहते हैं। चुनाँचे जो व्यक्ति उससे लाभ उठाना चाहता है उसे लाभ नहीं उठाने देते और न ही वे स्वयं उससे लाभ उठाते हैं। और वे ऐसा करके केवल स्वयं को विनष्ट करते हैं। परंतु वे जानते ही नहीं कि वे जो कुछ कर रहे हैं, वह स्वयं का विनाश है।

Enam 6:27

और (ऐ रसूल!) यदि आप देखें, जब वे क़ियामत के दिन आग पर पेश किए जाएँगे, तो वे पछताते हुए कहेंगे : ऐ काश! हम दुनिया के जीवन में लौटा दिए जाएँ और अल्लाह की आयतों को न झुठलाएँ, और हम अल्लाह पर ईमान लाने वालों में से हो जाएँ - तो आप उनकी बुरी स्थिति का आश्चर्यपूर्ण दृश्य देखेंगे।

Enam 6:28

बात ऐसी नहीं है जो उन्होंने कही है कि यदि उन्हें वापस भेज दिया जाए, तो वे अवश्य ईमान ले आएँगे, बल्कि उनके सामने वह स्पष्ट हो गया जो वे अपने कथन : (والله ربنا ما كنا مشركين) ''अल्लाह की क़सम! जो हमारा पालनहार है, हम मुश्रिक न थे।'' से छिपा रहे थे, जब उनके अंगों ने उनके खिलाफ़ गवाही दी। और यदि मान लिया जाए कि वे दुनिया में वापस लौट गए, तो निश्चय वे उसी कुफ़्र एवं शिर्क की ओर लौटेंगे, जिससे उन्हें रोका गया है और वे अपने इस वादे में झूठे हैं कि यदि वे वापस लौट गए तो ईमान लाएँगे।

Enam 6:29

और इन बहुदेववादियों ने कहा : इस जीवन के सिवा और कोई जीवन नहीं है, जिसमें हम रहते हैं और हम हिसाब के लिए उठाए जाने वाले नहीं हैं।

Enam 6:30

और (ऐ रसूल!) यदि आप उस समय देखें, जब (मरणोपरांत) पुनर्जीवन का इनकार करने वाले अपने रब के सामने खड़े किए जाएँगे, तो आप उनकी बुरी स्थिति का आश्चर्यजनक दृश्य देखेंगे, जब अल्लाह उनसे कहेगा : क्या यह पुनर्जीवन जिसे तुम झुठलाया करते थे, एक निश्चित सत्य नहीं है, जिसमें कोई शक या संदेह नहीं?! वे कहेंगे : हम अपने उस रब की क़सम खाते हैं, जिसने हमें बनाया है, कि निःसंदेह यह एक निश्चित सत्य है, जिसमें कोई संदेह नहीं। उस समय अल्लाह उनसे कहेगा : तुम इस दिन का इनकार करने के कारण यातना का स्वाद चखो; क्योंकि तुम दुनिया के जीवन में इसे झुठलाया करते थे।

Enam 6:31

निश्चय वे लोग घाटे में रहे, जिन्होंने क़ियामत के दिन दोबारा जीवित किए जाने को झुठलाया और अल्लाह के सामने खड़े होने को असंभव समझा, यहाँ तक कि जब बिना पूर्व ज्ञान के उनके पास अचानक क़ियामत आ पहुँचेगी, तो पछतावे की तीव्रता से कहेंगे : हाय हमारा अफसोस और हमारी निराशा! कि हमने अल्लाह के पक्ष में, उसके साथ कुफ़्र करके और क़ियामत के दिन के लिए तैयारी न करके, बड़ी कोताही की। और वे अपने पापों को अपनी पीठों पर उठाए होंगे। सुन लो! बहुत बुरा है, जो वे उन पापों का बोझ उठाएँगे।

Enam 6:32

इस संसार का जीवन जिसके प्रति तुम्हारा झुकाव है, उस व्यक्ति के लिए खेल-कूद और धोखे के सिवा कुछ नहीं है, जो इसमें अल्लाह को प्रसन्न करने वाला काम नहीं करता है। रही बात आख़िरत के घर की, तो यह उन लोगों के लिए बेहतर है, जो अल्लाह से डरते हैं, अतएव उसके ईमान और आज्ञाकारिता के आदेश का पालन करते हैं, तथा उसके शिर्क और अवज्ञा के निषेध से बचते हैं। तो क्या (ऐ बहुदेववादियो!) तुम इस बात को नहीं समझते?! ताकि तुम ईमान लाओ और अच्छे कर्म करो।

Enam 6:33

हम जानते हैं कि (ऐ रसूल!) आपको इस बात से बड़ा दुख होता है कि वे ज़ाहिरी तौर पर आपको झुठलाते हैं। इसलिए आप जान लें कि वे आपको अपने दिल से नहीं झुठलाते; क्योंकि वे आपकी सच्चाई तथा अमानत-दारी को जानते हैं। लेकिन वे अत्याचारी लोग हैं, जो बाह्य रूप से आपकी आज्ञा का खंडन करते हैं, जबकि वे अपने दिल में उसपर विश्वास करते हैं।

Enam 6:34

आप यह न समझें कि यह इनकार केवल उसी चीज़ के साथ खास है, जो आप लाए हैं। बल्कि तथ्य यह है कि आपसे पहले भी कई रसूलों को झुठलाया गया तथा उनकी क़ौम के लोगों ने उन्हें कष्ट पहुँचाया। तो उन्होंने उसका सामना, अल्लाह की ओर बुलाने और उसके रास्ते में जिहाद करने पर सब्र के साथ किया, यहाँ तक कि उनके पास अल्लाह की ओर से सहायता आ पहुँची। तथा अल्लाह ने जो विजय लिख दिया है और अपने रसूलों से उसका वादा किया है, उसे कोई बदलने वाला नहीं। और (ऐ रसूल!) आपके पास आपसे पहले रसूलों के समाचार आ चुके हैं और जिस चीज़ का उन्हें उनकी जातियों की ओर से सामना हुआ और जो अल्लाह ने उन्हें उनके दुश्मनों पर उनको विनष्ट करके विजय प्रदान किया।

Enam 6:35

(ऐ रसूल!) आप उनके पास जो सत्य लाए हैं, यदि उससे उनका मुँह फेरना और झुठलाना आपके लिए कठिन प्रतीत हो रहा है, तो यदि आप धरती में कोई सुरंग अथवा आकाश की ओर कोई सीढ़ी तलाश करने में सक्षम हो जाएँ, फिर आप उनके पास उसके अलावा कोई तर्क और प्रमाण ले आएँ, जिसके साथ हमने आपका समर्थन किया है, तो ले आएँ। और यदि अल्लाह उन्हें उस मार्गदर्शन पर एकत्र करना चाहता, जो आप लेकर आए हैं, तो उन्हें अवश्य एकत्र कर देता। लेकिन उसने किसी व्यापक हिकमत के कारण ऐसा नहीं चाहा। इसलिए आप इस तथ्य से अनजान मत बनें, कि इस बात पर अफ़सोस करते-करते आपकी जान जाती रहे कि वे ईमान नहीं लाए।

Enam 6:36

आपकी लाई बातों को स्वीकार करते हुए केवल वही आपको उत्तर देंगे, जो लोग बात को सुनते और समझते हैं, और काफिर लोग तो मरे हुए हैं जिनका उनसे कोई लेना-देना नहीं है। क्योंकि उनके दिल मर चुके हैं। और मरे हुओं को अल्लाह क़ियामत के दिन पुनर्जीवित करके उठाएगा, फिर वे उसी अकेले की ओर लौटाए जाएँगे, ताकि वह उन्हें उनके किए का बदला दे।

Enam 6:37

और मुश्रिकों ने हठ दिखाते हुए और ईमान लाने में टाल-मटोल करते हुए कहा : मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर कोई चमत्कारी निशानी क्यों नहीं उतारी गई, जो उसके पालनहार की ओर से उस चीज़ में उसकी सच्चाई का प्रमाण होती, जो वह लेकर आए हैं? (ऐ रसूल!) आप कह दें : अल्लाह तआला ऐसी निशानी उतारने में सक्षम है जैसा कि वे चाहते हैं, लेकिन निशानी उतारने की माँग करने वाले इन बहुदेववादियों में से अधिकांश लोग यह नहीं जानते हैं कि निशानियों का उतारना अल्लाह की अपनी हिकमत के अनुसार होता है, न कि उनके माँग करने के अनुसार। क्योंकि यदि अल्लाह ने निशानियों को उतार दिया, फिर वे ईमान न लाए, तो अल्लाह उन्हें अवश्य विनष्ट कर देगा।

Enam 6:38

धरती के ऊपर चलने वाला न कोई जानवर है और न आकाश में उड़ने वाला कोई पक्षी है, परंतु सब सृष्टि और जीविका में (ऐ आदम की संतान!) तुम्हारी तरह जातियाँ हैं। हमने 'लौहे महफूज़' में कुछ भी नहीं छोड़ा परंतु उसे साबित (अंकित) कर दिया, और सबका ज्ञान अल्लाह के पास है। फिर क़ियामत के दिन वे अपने रब के पास ही फ़ैसले के लिए एकत्र किए जाएँगे, तो वह हर एक को वह प्रतिफल देगा जिसका वह हक़दार है।

Enam 6:39

जिन लोगों ने हमारी आयतों (निशानियों) को झुठलाया, वे उन बहरों के समान हैं जो सुनते नहीं, और गूँगों के समान हैं जो बोलते नहीं, इसके उपरांत वे अँधेरों में पड़े हुए हैं, उन्हें कुछ दिखाई नहीं देता। तो जिसकी ऐसी दशा है, वह मार्गदर्शन कैसे प्राप्त कर सकता है?! अल्लाह लोगों में से जिसे पथभ्रष्ट करना चाहता है, उसे पथभ्रष्ट कर देता है, और जिसे मार्गदर्शन प्रदान करना चाहता है, उसका मार्गदर्शन करते हुए उसे सीधे मार्ग पर लगा देता है, जिसमें कोई टेढ़ापन नहीं होता।

Enam 6:40

(ऐ रसूल!) आप इन मुश्रिकों से कह दें : मुझे बताओ यदि तुम्हारे पास अल्लाह की ओर से कोई यातना आ जाए अथवा तुमपर वह क़ियामत आ जाए, जिसका तुमसे वादा किया गया है कि वह आने वाली है; तो क्या उस समय तुम अल्लाह के सिवा किसी और को पुकारोगे, ताकि वह तुमपर आने वाली विपत्ति और संकट को दूर करे? (बताओ) यदि तुम इस दावे में सच्चे हो कि तुम्हारे पूज्य लाभ पहुँचाते हैं या नुकसान को दूर करते हैं?!

Enam 6:41

सच तो यह है कि उस समय तुम उस अल्लाह के अलावा किसी और को नहीं पुकारोगे, जिसने तुम्हें पैदा किया है, फिर यदि वह चाहेगा तो तुम से विपत्ति को दूर कर देगा और तुम्हारी हानि को हटा देगा। क्योंकि वही उसका ज़िम्मेदार और उसे करने में सक्षम है। रही बात तुम्हारे उन पूज्यों की, जिन्हें तुमने अल्लाह के साथ साझी बनाया है, तो तुम उन्हें छोड़ दोगे; क्योंकि तुम्हें मालूम है कि उनसे न कोई लाभ होता है और न ही हानि।

Enam 6:42

और हमने (ऐ रसूल!) आपसे पहले कई समुदायों की ओर रसूल भेजे, लेकिन उन्होंने उन्हें झुठला दिया और वे जो कुछ उनके पास लेकर आए थे उससे मुँह फेर लिया, तो हमने उन्हें ग़रीबी जैसी कठिनाइयों के साथ, तथा बीमारी जैसी उनके शरीर को नुक़सान पहुँचाने वाली चीज़ों के साथ दंडित किया, ताकि वे अपने पालनहार के प्रति समर्पित हो जाएँ और उसके लिए विनम्र हो जाएँ।

Enam 6:43

यदि उनपर हमारी विपत्ति आने के समय, वे अल्लाह के प्रति विनम्र हो जाते और उसके अधीन हो जाते, ताकि वह उन पर से विपत्ति को दूर कर दे, तो हम अवश्य उनपर दया करते, परंतु उन्होंने ऐसा नहीं किया, बल्कि उनके दिल कठोर हो गए। चुनाँचे उन्होंने न सीख प्राप्त की और न उपदेश ग्रहण किया, तथा शैतान ने उनके लिए उसे सुशोभित कर दिया, जो कुफ्र तथा पाप वे किया करते थे। इसलिए वे उसी पर बने रहे जिसपर वे क़ायम थे।

Enam 6:44

जब उन्होंने गंभीर गरीबी तथा बीमारी के द्वारा उपदेश किए जाने को छोड़ दिया और अल्लाह के आदेशों के अनुसार काम नहीं किया, तो हमने उन्हें ढील देते हुए उनके लिए रोज़ी के द्वार खोल दिए, ग़रीबी के बाद उन्हें समृद्ध कर दिया और बीमारी के बाद उनके शरीर को स्वस्थ कर दिया, यहाँ तक कि जब वे अहंकार से ग्रस्त हो गए और उन्हें जो सुख-सुविधा प्राप्त था उसपर मगन हो गए, उनपर अचानक हमारी यातना आ गई, तो सहसा वे चकित और उस चीज़ से निराश थे, जिसकी वे आशा करते थे।

Enam 6:45

काफिरों का पूरी तरह से सर्वनाश करके उनकी जड़ काट दी गई, और अल्लाह के रसूलों को विजय प्राप्त हुआ। और हर प्रकार का आभार और प्रशंसा अकेले अल्लाह के लिए है, जो सारे संसारों का रब है कि उसने अपने शत्रुओं का नाश किया और अपने दोस्तों की सहायता की।

Enam 6:46

ऐ रसूल! आप इन मुश्रिकों से कह दें : मुझे बताओ कि यदि अल्लाह तुमसे सुनने की शक्ति छीनकर तुम्हें बहरा कर दे, तुम्हारी दृष्टि छीनकर तुम्हें अंधा कर दे, और तुम्हारे दिलों पर मुहर लगा दे, फिर तुम कुछ भी न समझ सको; तो कौन-सा सत्य पूज्य है, जो तुम्हें ये खोई हुई चीज़ें वापस ला दे? ऐ रसूल! ग़ौर करें कि कैसे हम इन्हें विभिन्न प्रकार के प्रमाण दिखलाते हैं, फिर ये उनसे मुँह मोड़ लेते हैं!

Enam 6:47

(ऐ रसूल!) आप इनसे कह दें : मुझे बताओ कि यदि तुमपर अल्लाह की यातना तुम्हें उसका एहसास हुए बिना अचानक आ जाए, अथवा वह तुमपर खुल्लम-खुल्ला सबके देखते हुए आ जाए, तो उस यातना के शिकार केवल वही लोग होंगे, जो अल्लाह के साथ कुफ़्र करके तथा उसके रसूलों को झुठलाकर अपने ऊपर अत्याचार करने वाले हैं।

Enam 6:48

हम अपने रसूलों में से जिन्हें भेजते हैं, उन्हें केवल इसलिए भेजते हैं कि वे ईमान और आज्ञाकारिता वालों को उस स्थायी नेमत की शुभ सूचना दें, जो न कभी ख़त्म होगी और न बाधित होगी, एवं काफिरों तथा पापियों को हमारी कठोर यातना से डराएँ। फिर जो व्यक्ति रसूलों पर ईमान लाए और अपने कर्मों को ठीक कर ले, तो उनपर उस बारे में कोई भय नहीं, जो आख़िरत में उन्हें प्राप्त होगा और न ही वे उसपर दुखी एवं शोकग्रस्त होंगे, जो सांसारिक सुखों में से उनसे छूट गया है।

Enam 6:49

और जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया, वे अल्लाह की आज्ञाकारिता से निकल जाने के कारण यातना से पीड़ित होंगे।

Enam 6:50

(ऐ रसूल!) आप इन मुश्रिकों से कह दें : मैं तुमसे नहीं कहता : मेरे पास अल्लाह की रोज़ी के ख़ज़ाने हैं, इसलिए मैं उन्हें अपनी इच्छानुसार ख़र्च करता हूँ। और न ही मैं तुमसे यह कहता हूँ : मुझे ग़ैब का ज्ञान है, सिवाय उस वह़्य के जिससे अल्लाह ने मुझे सूचित किया है। और न मैं तुमसे यह कहता हूँ : मैं फ़रिश्तों में से एक फ़रिश्ता हूँ। क्योंकि मैं अल्लाह का रसूल हूँ। मैं केवल उसी का अनुसरण करता हूँ, जो मेरी ओर वह़्य (प्रकाशना) की जाती है। मैं उसका दावा नहीं करता, जिसका मुझे अधिकार नहीं। (ऐ रसूल!) उनसे कह दें : क्या वह काफ़िर जिसकी अन्तर्दृष्टि सत्य से अंधी हो गई है, और वह मोमिन जिसने सत्य को देखा और उसपर ईमान लाया, क्या दोनों बराबर हो सकते हैं? तो क्या (ऐ मुश्रिको!) तुम अपनी बुद्धियों से अपने चारों ओर फैली हुई निशानियों पर ग़ौर नहीं करते।

Enam 6:51

और (ऐ रसूल!) इस क़ुरआन के द्वारा उन लोगों को डराएँ, जो इस बात का भय रखते हैं कि वे क़ियामत के दिन अपने रब के पास एकत्र किए जाएँगे, उनके लिए अल्लाह के अलावा कोई संरक्षक नहीं होगा जो उन्हें लाभ पहुँचाए, और न कोई सिफारिश करने वाला होगा, जो उनसे हानि को दूर कर सके। ताकि वे अल्लाह के आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर उससे डरें। क्योंकि यही लोगो हैं, जो क़ुरआन से लाभान्वित होते हैं।

Enam 6:52

(ऐ रसूल!) आप उन ग़रीब मुसलमानों को अपनी सभा से दूर न करें, जो दिन की शुरुआत और उसके अंत में हमेशा अल्लाह की उपासना में लगे रहते हैं, उसी के लिए उपासना को विशिष्ट करने वाले होते हैं। आप प्रमुख बहुदेववादियों को लुभाने के लिए उन्हें दूर मत करें। इन ग़रीबों के हिसाब में से आपपर कुछ भी नहीं है। बल्कि उनका हिसाब उनके रब के पास है। तथा आपके हिसाब में से उनपर भी कुछ नहीं है। यदि आपने उन्हें अपनी सभा से दूर किया, तो आप अल्लाह की सीमाओं का उल्लंघन करने वालों में से होंगे।

Enam 6:53

और इसी तरह हमने उनमें से कुछ का कुछ के साथ परीक्षण किया। चुनाँचे हमने उन्हें सांसारिक सुख-सुविधाओं में भिन्न-भिन्न कर दिया। हमने इसके द्वारा उनका परीक्षण किया ताकि धनवान काफ़िर, ग़रीब ईमान वालों से कहें : क्या यही ग़रीब लोग हैं, जिनपर अल्लाह ने हमारे बीच से मार्गदर्शन प्रदान किया है?! यदि ईमान अच्छा काम होता, तो वे इसमें हमसे पहल नहीं कर पाते, क्योंकि हम पहल करने वाले लोग हैं। क्या अल्लाह उन लोगों के बारे में अधिक जानने वाला नहीं है जो उसकी नेमतों के लिए आभारी हैं, इसलिए वह उन्हें ईमान का सामर्थ्य प्रदान करता है, तथा उनकी नाशुक्री करने वालों के बारे में अधिक जानने वाला नहीं है, इसलिए वह उन्हें विफल कर देता है, चुनाँचे वे ईमान नहीं लाते?! क्यों नहीं, निःसंदेह अल्लाह उन्हें सबसे अधिक जानने वाला है।

Enam 6:54

जब (ऐ रसूल!) आपके पास वे लोग आएँ, जो हमारी उन आयतों पर ईमान रखते हैं, जो आपके लाए हुए संदेश की सच्चाई की गवाही देती हैं, तो उनके सम्मान में उन्हें सलाम कहें और उन्हें अल्लाह की दया की विशालता की खुशख़बरी दें। क्योंकि अल्लाह ने अपने अनुग्रह से दया करना अपने ऊपर अनिवार्य कर लिया है। अतः तुममें से जो कोई भी अज्ञानता और मूर्खता की स्थिति में पाप कर बैठे, फिर वह उसे करने के बाद तौबा कर ले और अपने कर्मों को सुधार ले, तो निश्चय अल्लाह उसके किए हुए पाप को क्षमा कर देगा। क्योंकि अल्लाह अपने तौबा करने वाले बंदों को क्षमा करने वाला, तथा उनपर दया करने वाला है।

Enam 6:55

जिस प्रकार हमने आपके लिए वे बातें स्पष्ट कीं, जिनका उल्लेख किया गया, उसी तरह हम असत्यवादियों के खिलाफ़ अपने प्रमाणों और तर्कों को स्पष्ट रूप से वर्णन करते हैं, तथा अपराधियों के मार्ग और उनके दृष्टिकोण को स्पष्ट करने के लिए; ताकि उससे बचा जा सके और सावधान रहा जाए।

Enam 6:56

(ऐ रसूल!) आप कह दें : अल्लाह ने मुझे उनकी इबादत करने से मना कर दिया है जिनकी तुम अल्लाह के अलावा पूजा करते हो। (ऐ रसूल!) आप कह दें : मैं अल्लाह के अलावा किसी और की पूजा करने में तुम्हारी इच्छाओं का पालन नहीं करता। क्योंकि अगर मैं इस बारे में तुम्हारी इच्छाओं का पालन करू, तो मैं सत्य के मार्ग से भटका हुआ हूँगा, मैं उसकी ओर मार्गदर्शन नहीं पा सकूँगा। और यही हर उस व्यक्ति का मामला है, जो अल्लाह की ओर से किसी प्रमाण के बिना अपनी इच्छा का पालन करता है।

Enam 6:57

(ऐ रसूल!) आप इन मुश्रिकों से कह दें : मैं अपने रब की ओर से एक स्पष्ट प्रमाण पर क़ायम हूँ, न कि मन की इच्छा पर। और तुमने इस प्रमाण को झुठला दिया है। मेरे पास वह यातना नहीं है, जिसके लिए तुम जल्दी मचा रहे हो और न ही चमत्कारी निशानियाँ जो तुमने माँगी हैं। बल्कि वह केवल अल्लाह के हाथ में है। क्योंकि निर्णय करना (जिसमें वह भी शामिल है जिसकी तुमने माँग की है) केवल अल्लाह का अधिकार है। वह सत्य कहता है और उसके द्वारा फैसला करता है। और वह महिमावान सबसे अच्छा है, जिसने सत्यवादियों और असत्यवादियों को खोलकर बयान किया और उनके बीच अंतर स्पष्ट किया।

Enam 6:58

(ऐ रसूल!) आप उनसे कह दें : यदि मेरे पास और मेरे अधिकार में वह यातना होती जिसके लिए तुम जल्दी कर रहे हो, तो मैं उसे तुमपर अवश्य उतार देता। और उस समय मेरे और तुम्हारे बीच मामले का फैसला कर दिया जाता। (लेकिन मामला अल्लाह के अधिकार में है) और अल्लाह अत्याचारियों को अधिक जानता है कि वह उन्हें कितनी मोहलत देगा और कब उन्हें दंडित करेगा।

Enam 6:59

केवल अल्लाह ही के पास ग़ैब (परोक्ष) के खज़ाने हैं, जिन्हें उसके अलावा कोई और नहीं जानता। भूमि पर जो भी मख़्लूक़ात जैसे जानवर, पौधे और निर्जीव चीज़ें हैं, वह उन्हें जानता है, तथा वह जानता है जो कुछ समुद्र में जानवर, पौधे और निर्जीव चीज़ें हैं। तथा न कहीं कोई पत्ता गिरता है, और न ज़मीन में छिपा हुआ कोई दाना है, और न कोई गीली चीज़ है और न कोई सूखी चीज़, परंतु वह एक स्पष्ट पुस्तक अर्थात् 'लौह़े महफ़ूज़' में अंकित (संरक्षित) है।

Enam 6:60

अल्लाह ही है जो सोते समय तुम्हारी आत्माओं को अस्थायी रूप से क़ब्ज़ कर लेता है, और वह जानता है कि तुमने दिन के दौरान अपनी सक्रियता के समय क्या कमाया है। फिर वह सोते समय तुम्हारी आत्माओं को क़ब्ज़ करने के बाद दिन में तुम्हें उठा देता है ताकि तुम अपने काम कर सको, यहाँ तक कि अल्लाह के यहाँ तुम्हारे जीवन की निर्धारित अवधि समाप्त हो जाएगी। फिर क़ियामत के दिन पुनः जीवित किए जाने के उपरांत तुम्हें उसी अकेले की ओर लौटना है। फिर वह तुम्हें बताएगा जो कुछ तुम अपने दुनिया के जीवन में किया करते थे और तुम्हें उसका बदला देगा।

Enam 6:61

अल्लाह अपने बंदों पर ग़ालिब (हावी); उन्हें अपने अधीन रखने वाला है, हर प्रकार से उनसे ऊपर है। हर चीज़ उसके अधीनस्थ है। वह अपनी महिमा के योग्य अपने बंदों के ऊपर है। और (ऐ लोगो!) वह तुमपर सम्मानित फरिश्तों को भेजता है, जो तुम्हारे कामों को गिनकर रखते हैं यहाँ तक कि तुममें से किसी की अवधि, मृत्यु के फरिश्ते और उसके सहायकों द्वारा उसकी रूह़ क़ब्ज़ कर लेने के साथ समाप्त हो जाएगी। और वे उस काम में कोताही नहीं करते हैं जो उन्हें करने का आदेश दिया गया है।

Enam 6:62

फिर वे सभी लोग जिनके प्राण निकाल लिए गए हैं, अपने वास्तविक स्वामी अल्लाह की ओर लौटाए जाएँगे, ताकि वह उन्हें उनके कर्मों का बदला दे। उनके बीच उसी का प्रभावी फैसला और न्यायपूर्ण निर्णय है, और वही सबसे तेज़ी से तुम्हें गिनने वाला और तुम्हारे कर्मों का हिसाब रखने वाला है।

Enam 6:63

(ऐ रसूल!) आप इन मुश्रिकों से पूछें : तुम्हें थल और समुद्र के अँधेरों में मिलने वाले खतरों से कौन बचाता और छुटकारा देता है? तुम उसी अकेले को गिड़गिड़ाते हुए विनयपूर्वक गुप्त रूप से तथा खुले तौर पर पुकारते हो : यदि हमारा पालनहार हमें इन विपत्तियों से छुटकारा प्रदान कर दे, तो हम अवश्य अपने ऊपर उसकी नेमतों के लिए आभार प्रकट करते हुए उसके सिवा किसी और की पूजा नहीं करेंगे।

Enam 6:64

(ऐ रसूल!) इनसे कह दें : अल्लाह ही है जो तुम्हें उससे बचाता है, तथा तुम्हें हर संकट से छुटकारा देता है। फिर तुम उसके उपरांत (भी) समृद्धि के समय उसके साथ दूसरों को साझी बनाते हो। तो जो तुम कर रहे हो उससे बड़ा अत्याचार (अन्याय) क्या है?!

Enam 6:65

(ऐ रसूल!) आप इनसे कह दें : अल्लाह ही इस बात का सामर्थ्य रखता है कि तुमपर ऐसी यातना भेज दे, जो पत्थर, वज्र और बाढ़ की तरह तुम्हारे पास तुम्हारे ऊपर से आए, या वह तुम्हारे पास तुम्हारे नीचे से आए जैसे भूकंप और धरती में धंसना, या वह तुम्हारे दिलों में द्वन्द्व (असहमति) पैदा कर दे, तो तुममें से हर व्यक्ति अपनी इच्छा का पालन करने लगे, फिर तुम एक-दूसरे से लड़ने लगो। (ऐ पैग़ंबर!) ग़ौर कीजिए कैसे हम उनके लिए प्रमाणों और सबूतों में विविधता लाते हैं और उन्हें स्पष्ट करते हैं ताकि वे समझ सकें कि जो कुछ आप लाए हैं, वह सच है और जो उनके पास है वह झूठा है।

Enam 6:66

आपकी जाति ने इस क़ुरआन को झुठला दिया, हालाँकि वह सत्य है जिसके अल्लाह की ओर से होने में कोई संदेह नहीं। (ऐ रसूल!) आप उनसे कह दें : मुझे तुम्हारी निगरानी रखने का काम नहीं सौंपा गया है। मैं तो केवल तुम्हें एक कठोर यातना से पहले डराने वाला हूँ।

Enam 6:67

हर सूचना का एक समय है, जिसमें वह स्थिर हो जाता है और एक अंत है, जहाँ वह समाप्त हो जाता है, और इसी में से तुम्हारे अंजाम और परिणाम की सूचना है। इसलिए जब तुम क़ियामत के दिन उठाए जाओगे, तुम्हें उसका पता चल जाएगा।

Enam 6:68

जब (ऐ रसूल!) आप मुश्रिकों को देखें कि वे हमारी आयतों के विषय में व्यंग्य और उपहास के साथ बात करते हैं, तो आप उनसे दूर रहें यहाँ तक कि वे हमारी आयतों के उपहास और व्यंग्य से मुक्त बातचीत में लग जाएँ। यदि शैतान आपको भुला दे और आप उनके साथ बैठ जाएँ, फिर आपको याद आ जाए, तो उनकी सभा को छोड़ दें और इन ज़्यादती करने वालों के साथ न बैठें।

Enam 6:69

जो लोग अल्लाह के आदेशों का पालन करने और उसके निषेधों से बचने के द्वारा उससे डरते हैं, उनके ज़िम्मे इन अत्याचारियों के हिसाब में से कोई चीज़ नहीं है। बल्कि उनकी ज़िम्मेदारी केवल उन्हें उन बुराइयों से रोकना है जो वे करते हैं, ताकि उनके हृदय में अल्लाह का डर पैदा हो जाए, फिर वे अल्लाह के आदेशों का पालन करें और उसके निषेधों से बचें।

Enam 6:70

और ऐ रसूल! इन मुश्रिकों को छोड़ दें, जिन्होंने अपने धर्म को खेल-कूद और मनोरंजन बना लिया कि वे उसका मज़ाक उड़ाते और उपहास करते हैं, और इस दुनिया के जीवन ने उन्हें अपने नश्वर सुखों के साथ धोखे में डाल रखा है। (ऐ नबी!) क़ुरआन के साथ लोगों को उपदेश दें ताकि कोई भी प्राणी अपनी कमाई हुई बुराइयों के कारण विनाश की ओर न जाए, उसके लिए मदद माँगने के लिए अल्लाह के अलावा कोई सहयोगी न हो, और क़ियामत के दिन उससे अल्लाह की यातना को रोकने के लिए कोई सिफ़ारिश करने वाला न हो। तथा यदि वह कोई भी छुड़ौती देकर अल्लाह की यातना से छुटकारा लेना चाहे, तो वह उससे स्वीकार नहीं की जाएगी। यही लोग हैं, जो अपने पापों के कारण अपने आपके विनाश के हवाले कर दिए गए। उन्हें क़ियामत के दिन उनके कुफ़्र के कारण अत्यंत गरम पेय पिलाया जाएगा और दर्दनाक यातना दी जाएगी।

Enam 6:71

ऐ रसूल! आप इन मुश्रिकों से कह दें : क्या हम अल्लाह को छोड़कर ऐसी मूर्तियों की पूजा करने लगें, जो न किसी लाभ की मालिक हैं, कि हमें लाभ पहुँचाए और न किसी नुक़सान की मालिक हैं, कि हमें नुक़सान पहुँचा सकें। और हम ईमान से फिर जाएँ इसके बाद कि अल्लाह ने हमें उसका सामर्थ्य प्रदान किया है। फिर हम उस व्यक्ति के समान हो जाएँ, जिसे शैतानों ने पथभ्रष्ट करके चकित छोड़ दिया, उसे कोई रास्ता नहीं मिल रहा, तथा सीधे मार्ग पर उसके कुछ साथी हैं जो उसे सत्य की ओर बुलाते हैं, परंतु वह उनके बुलावे को स्वीकार करने से इनकार करता है। (ऐ रसूल!) आप उनसे कह दें : अल्लाह का मार्गदर्शन ही सच्चा मार्गदर्शन है, और अल्लाह ने हमें आदेश दिया है कि हम उसके आगे झुक जाएँ, उसी को एकमात्र पूज्य मानें और उसी अकेले की इबादत करें, क्योंकि वही सारे संसारों का रब है।

Enam 6:72

उसने हमें सबसे उत्तम तरीक़े से नमाज़ स्थापित करने का आदेश दिया है, तथा उसने हमें अल्लाह के आदेशों का पालन करते हुए और उसके निषेधों से बचते हुए तक़वा अपनाने का आदेश दिया है, क्योंकि वही अकेला है जिसकी ओर क़ियामत के दिन सारे बंदे एकत्र किए जाएँगे, ताकि वह उन्हें उनके कर्मों का बदला दे।

Enam 6:73

उसी महिमावान ने आकाशों तथा धरती को सत्य के साथ पैदा किया, (तथा उस दिन को याद करो) जिस दिन अल्लाह किसी वस्तु से कहेगा 'हो जा', तो वह हो जाएगी। जब वह क़ियामत के दिन कहेगा : उठ खड़े हो, तो सबके सब उठ खड़े होंगे। उसकी बात सत्य है, जो अनिवार्य रूप से होकर रहेगी और क़ियामत के दिन अकेले उसी महिमावान का राज्य होगा, जब इसराफील नरसिंघा में दूसरी बार फूँकेंगे। वह परोक्ष तथा प्रत्यक्ष का ज्ञानी है और वह अपनी रचना तथा प्रबंधन में हिकमत वाला है, हर चीज़ की ख़बर रखने वाला है, जिससे कोई भी चीज़ छिपी नहीं है। अतः उसके लिए, चीजों के अंदरूनी हिस्से उनके प्रत्यक्ष हिस्सों के समान हैं।

Enam 6:74

और (ऐ रसूल!) उस समय को याद करें, जब इबराहीम अलैहिस्सलाम ने अपने मुश्रिक पिता आज़र से कहा : ऐ मेरे पिता जी! क्या आप मूर्तियों को पूज्य बनाकर अल्लाह के अलावा उनकी पूजा करते हैं?! मैं आपको और आपकी जाति के लोगों को, जो मूर्तियों की पूजा करने वाले हैं, तुम्हारे अल्लाह के अलावा की पूजा करने के कारण सत्य के मार्ग से खुली गुमराही और भ्रम में देखता हूँ। क्योंकि वही महिमावान अकेला सत्य पूज्य है और उसके सिवा दूसरे असत्य पूज्य हैं।

Enam 6:75

जिस प्रकार हमने उन्हें उनके पिता तथा उनकी जाति की पथभ्रष्टता दिखाई, वैसे ही हम उन्हें आकाशों और धरती का विशाल राज्य दिखाते हैं; ताकि वह उस विशाल राज्य से अल्लाह की एकता और उसी अकेले के एकमात्र इबादत के योग्य होने पर प्रमाण प्रस्तुत करें; ताकि उन्हें परिपूर्ण विश्वास हो जाए कि अल्लाह एक है, उसका कोई साझी नहीं, और यह कि वह हर चीज़ करने में सक्षम है।

Enam 6:76

जब उनपर रात अंधेरी हो गई, तो उन्होंने एक तारा देखा। कहने लगे : यह मेरा रब है। फिर जब तारा ग़ायब हो गया, तो उन्होंने कहा : मैं ग़ायब होने वाले को पसंद नहीं करता। क्योंकि सच्चा पूज्य मौजूद रहने वाला होता है, ग़ायब नहीं होता।

Enam 6:77

जब उन्होंने चाँद को उगते देखा, तो कहा : यह मेरा रब है। फिर जब वह ग़ायब हो गया, तो उन्होंने कहा : यदि अल्लाह ने मुझे अपने एकेश्वरवाद और एकमात्र अपनी इबादत की तौफीक़ न दी, तो निश्चय मैं उन लोगों में से हो जाऊँगा, जो उसके सत्य धर्म से दूर हैं।

Enam 6:78

जब उन्होंने सूरज को उगते हुए देखा, तो कहा : यह उगने वाला (सूरज) मेरा रब है। यह उगने वाला, तारे और चाँद से बड़ा है। लेकिन जब वह भी ग़ायब हो गया, तो कहने लगे : ऐ मेरी जाति के लोगो! मैं उससे बरी हूँ, जो तुम अल्लाह के साथ शरीक ठहराते हो।

Enam 6:79

मैंने अपने धर्म (धार्मिकता) को उस अस्तित्व के लिए विशुद्ध कर दिया, जिसने बिना किसी पूर्व उदाहरण के आकाशों तथा धरती की रचना की है, शिर्क से विमुख होकर शुद्ध एकेश्वरवाद की ओर रुख करते हुए, तथा मैं उन बहुदेववादियों में से नहीं हूँ, जो अल्लाह के साथ उसके अलावा की पूजा करते हैं।

Enam 6:80

और उनकी मुश्रिक जाति ने अल्लाह की तौहीद (एकेश्वरवाद) के बारे में उनके साथ झगड़ा किया और उन्हें अपनी मूर्तियों से डराया, तो इबराहीम अलैहिस्सलाम ने उनसे कहा : क्या तुम मुझसे अल्लाह के एकेश्वरवाद और एकमात्र उसी की इबादत करने के बारे में झगड़ते हो, हालाँकि मेरे पालनहार ने मुझे इसकी तौफ़ीक़ दी है, तथा मैं तुम्हारी मूर्तियों से नहीं डरता, क्योंकि वे न किसी हानि की मालिक हैं कि मुझे हानि पहुँचा सकें और न किसी लाभ की मालिक हैं कि मुझे लाभ पहुँचा सकें, सिवाय इसके कि अल्लाह चाहे। क्योंकि अल्लाह जो चाहे वह होकर रहने वाला है। और अल्लाह के हर चीज़ को जानने के साथ, धरती पर या आकाश में कुछ भी उससे छिपा नहीं है। तो क्या (ऐ मेरी जाति के लोगो!) तुम यह नहीं सोचते कि तुम अल्लाह के साथ कुफ़्र और शिर्क में पड़े हो, कि तुम अकेले अल्लाह पर ईमान ले आओ?!

Enam 6:81

मैं उन मूर्तियों से कैसे डर सकता हूँ, जिनकी तुम अल्लाह के अलावा पूजा करते हो, जबकि तुम्हें अल्लाह के साथ शिर्क करते हुए डर नहीं लगता, जब तुम बिना किसी प्रमाण के अल्लाह के साथ उन चीज़ों को साझी बनाते हो जिन्हें उसने पैदा किया है?! तो दोनों दलों अर्थात् : एकेश्वरवादियों के दल और बहुदेववादियों के दल में से : कौन-सा दल शांति और सुरक्षा के अधिक योग्य है? यदि तुम उनमें से अधिक योग्य को जानते हो, तो उसका अनुसरण करो। और उनमें से अधिक योग्य - बिना किसी संदेह के - एकेश्वरवादी मोमिनों का दल है।

Enam 6:82

जो लोग अल्लाह पर ईमान लाए तथा उसके बनाए हुए नियमों का पालन किया, और अपने ईमान के साथ शिर्क की मिलावट नहीं की, वही लोग सफल हैं, उन्हें उनके पालनहार ने हिदायत के मार्ग पर चलने की तौफ़ीक दी है।

Enam 6:83

यह तर्क, अर्थात् अल्लाह का कथन : ( ... فَأَيُّ الْفَرِيقَيْنِ أَحَقُّ بِالْأَمْنِ) ''तो दोनों पक्षों में से कौन सुरक्षा के अधिक योग्य है।'', जिसके द्वारा इबराहीम ने अपनी जाति को पराजित किया, यहाँ तक कि उनका तर्क समाप्त हो गया, यही हमारा तर्क है, जिसकी हमने उन्हें अपनी जाति के साथ बहस करने के लिए तौफ़ीक़ दी और उन्हें वह प्रदान किया। हम दुनिया तथा आख़िरत में अपने बंदों में से जिसे चाहते हैं, पदों में ऊँचा कर देते हैं। (ऐ रसूल!) आपका पालनहार अपनी रचना और प्रबंधन में पूर्ण हिकमत वाला, अपने बंदों को जानने वाला है।

Enam 6:84

हमने इबराहीम को बेटे के रूप में इसहाक़ तथा पोते के रूप में याक़ूब प्रदान किए और उन दोनों में से हर एक को सीधा मार्ग दिखाया, तथा हमने उनसे पहले नूह़ को हिदयात की तौफ़ीक़ दी और नूह के वंश में से दाऊद और उनके पुत्र सुलैमान, अय्यूब, यूसुफ़, मूसा तथा उनके भाई हारून अलैहिमुस्सलाम को भी सीधे मार्ग पर चलने की तौफीक़ दी। और जिस प्रकार हमने नबियों को उनके अच्छे कर्म का बदला दिया, उसी प्रकार हम अच्छे कर्म करने वालों को उनके अच्छे कर्म का बदला देते हैं।

Enam 6:85

और इसी प्रकार हमने ज़करिया, यह़्या, ईसा बिन मरयम और इलयास अलैहिमुस्सलाम को भी सीधे मार्ग की तौफ़ीक़ दी। और ये सभी ईश्दूत सदाचारियों में से थे, जिन्हें अल्लाह ने रसूलों के रूप में चुन लिया था।

Enam 6:86

और इसी प्रकार हमने इसमाईल, अल-यसअ, यूनुस तथा लूत अलैहिमुस्सलाम को तौफ़ीक़ दी, और इन सभी नबियों को, जिनमें सबसे ऊपर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम हैं, (उनके समय के) समस्त लोगों पर श्रेष्ठता प्रदान की।

Enam 6:87

हमने उनके कुछ पिताओं, उनकी कुछ संतानों तथा उनके कुछ भाइयों को अपनी इच्छा के अनुसार तौफ़ीक़ दी और उन्हें चुन लिया तथा उन्हें उस सीधे मार्ग पर चलने का सामर्थ्य प्रदान किया, जो कि अल्लाह के एकेश्वरवाद और उसकी आज्ञाकारिता का मार्ग है।

Enam 6:88

यह तौफ़ीक़ (सफलता) जो उन्हें प्राप्त हुई, यह अल्लाह की तौफ़ीक़ है। वह अपने बंदों में से जिसे चाहता है तौफ़ीक़ देता है। और यदि ये लोग अल्लाह के साथ उसके अलावा को साझी बनाते, तो उनका कार्य व्यर्थ (अमान्य) हो जाता; क्योंकि शिर्क नेक कार्य को नष्ट (अमान्य) कर देने वाला है।

Enam 6:89

ये उपर्युक्त नबी गण ही वे लोग हैं, जिन्हें हमने किताबें प्रदान कीं, उन्हें हिकमत प्रदान की तथा उन्हें नुबुव्वत (पैगंबरी) प्रदान की। यदि आपकी जाति उसका इनकार करे, जो हमने इन्हें इन तीन चीज़ों में से प्रदान किया है, तो हमने उनके लिए ऐसे लोगों को तैयार कर रखा है, जो इनका इनकार करने वाले नहीं हैं, बल्कि वे इनपर ईमान लाने वाले और मज़बूती से उनका पालन करने वाले हैं। और वे मुहाजिर एवं अनसार तथा वे लोग हैं, जो क़ियामत के दिन तक अच्छे ढंग से उनका अनुसरण करने वाले हैं।

Enam 6:90

ये नबी गण तथा उनके साथ जिनका ज़िक्र हुआ, जैसे उनके पिता, उनके बेटे और उनके भाई, वही वास्तव में मार्गदर्शन पाने वाले हैं। इसलिए आप उनका अनुसरण करें और उन्हें अपना आदर्श बनाएँ। और (ऐ रसूल!) आप अपनी जाति से कह दें : मैं तुमसे इस क़ुरआन को पहुँचाने का कोई बदला नहीं माँगता। क्योंकि क़ुरआन मानवजाति और जिन्नों के लिए उसके द्वारा सीधे रास्ते और सही मार्ग पर मार्गदर्शन प्राप्त करने के लिए एक उपदेश के अलावा और कुछ नहीं है।

Enam 6:91

मुश्रिकों ने अल्लाह का उसकी महिमा के योग्य सम्मान नहीं किया, जब उन्होंने अपने नबी मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से कहा कि अल्लाह ने किसी इनसान पर कोई वह़्य नहीं उतारी। (ऐ रसूल!) आप उनसे कह दें : मूसा पर तौरात किसने उतारी, जो उनकी जाति के लिए प्रकाश, मार्गदर्शन तथा निर्देश पर आधारित थी?! जिसे यहूदी पत्रों में संचय करते हैं, उनमें से वे केवल उन्हीं बातों को ज़ाहिर करते हैं, जो उनकी इच्छाओं के अनुसार होती हैं, और जो उनके विपरीत होती हैं, उन्हें छिपाते हैं, जैसे कि मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का वर्णन। और (ऐ अरब वासियो!) तुम्हें क़ुरआन से वे बातें सिखाई गई हैं, जो न तो तुम और न तुम्हारे पूर्वज पहले से जानते थे। (ऐ रसूल!) उनसे कह दें कि उसे अल्लाह ने उतारा है। फिर उन्हें उनकी अज्ञानता और पथभ्रष्टता में छोड़ दें, मज़ाक़ उड़ाएँ और ठट्ठा करें यहाँ तक कि उनके पास निश्चितता (अर्थात् मौत) आ जाए।

Enam 6:92

यह क़ुरआन एक पुस्तक है, जिसे हमने (ऐ नबी!) आपपर उतारा है। यह एक बरकत वाली किताब है, जो अपने से पूर्व उरतने वाली आसमानी किताबों की पुष्टि करने वाली है। ताकि आप इसके साथ मक्का के लोगों और धरती के पूर्व और पश्चिम के सभी लोगों को सचेत करें ताकि उन्हें मार्गदर्शन प्राप्त हो। तथा जो लोग आख़िरत पर ईमान रखते हैं, वे इस क़ुरआन पर ईमान लाते हैं, उसकी शिक्षाओं पर अमल करते हैं और अपनी नमाज़ की, उसके अरकान (स्तंभों), फ़राइज़ (दायित्वों) और मुसतह़ब्बात (वांछनीय चीज़ों) को शरीयत द्वारा निर्धारित समय पर स्थापित करके, रक्षा करते हैं।

Enam 6:93

उससे बड़ा अत्याचारी कोई नहीं, जिसने यह कहते हुए अल्लाह के विरुद्ध झूठ गढ़ा कि : अल्लाह ने किसी मनुष्य पर कोई चीज़ नहीं उतारी। या उसने झूठ कहा : अल्लाह ने उसकी ओर वह़्य की है, जबकि अल्लाह ने उसकी ओर कोई वह़्य नहीं भेजी। या उसने यह कहा : अल्लाह ने जो क़ुरआन उतारा है, मैं भी वैसा ही उतार दूँगा। और काश! (ऐ रसूल!) आप उस समय को देखें, जब ये अत्याचारी लोग मौत की पीड़ा से ग्रस्त होते हैं और फ़रिश्ते प्रताड़ना और मार-पीट के साथ उनकी ओर हाथ बढ़ाए होते हैं, उन्हें डाँटते हुए कहते हैं : अपने प्राण निकालो, क्योंकि हम उन्हें क़ब्ज़ करने वाले हैं। आज के दिन तुम्हें ऐसी यातना दी जाएगी, जो तुम्हें अपमानित और तिरस्कृत कर देगी। इसका कारण यह है कि तुम नुबुव्वत, वह़्य और अल्लाह की उतारी हुई किताब की तरह उतारने का दावा करके अल्लाह पर झूठ गढ़ते थे, तथा इस कारण कि तुम अल्लाह की आयतों पर ईमान लाने से अहंकार करते थे। (ऐ नबी!) यदि आप यह दृश्य देखें, तो आपको एक भयानक चीज़ दिखाई देगी।

Enam 6:94

(मरने के बाद) दोबारा उठाए जाने के दिन उनसे कहा जाएगा : आज के दिन तुम हमारे पास अकेले आए हो, न तो तुम्हारे पास धन है और न ही सरदारी। जैसे हमने तुम्हें पहली बार नंगे पाँव, नंगे शरीर और खतनारहित पैदा किया था। और जो कुछ हमने तुम्हें दिया था, वह तुमने अपनी इच्छा के विरुद्ध संसार में छोड़ दिया। और हम आज तुम्हारे साथ तुम्हारे उन पूज्यों को नहीं देखते हैं, जिन्हें तुमने अपने लिए मध्यस्थ (सिफारिशी) होने का दावा किया था, तथा तुमने दावा किया था कि वे इबादत के योग्य होने में अल्लाह के साझी हैं। निश्चय तुम्हारे बीच का संबंध टूट गया, तथा जो कुछ तुम उनकी सिफारिश का दावा करते थे और यह कि वे अल्लाह के साझी हैं, वह (भ्रम) तुमसे दूर हो गया।

Enam 6:95

निःसंदेह केवल अल्लाह ही है जो दाने को फाड़ता है, तो उससे फसलें निकलती हैं, तथा गुठली को फाड़ता है, तो उससे पेड़ निकलते हैं, जैसे खजूर के पेड़,अंगूर आदि। वह सजीव को निर्जीव से निकालता है; जैसे मनुष्य और बाकी जानदार को वीर्य से निकालता है। तथा निर्जीव को सजीव से निकालता है; जैसे वीर्य को मनुष्य से तथा अंडे को मुर्गी से निकालता है। यह सब जो करता है, वही अल्लाह है जिसने तुम्हें पैदा किया है। फिर (ऐ मुश्रिको!) तुम सत्य से कैसे फेर दिए जाते हो, जबकि तुम अल्लाह की अद्भुत रचना का मुशाहदा करते हो?!

Enam 6:96

वही महिमावान और सर्वशक्तिमान (अल्लाह) है, जो रात के अंधेरे से सुबह के प्रकाश को फाड़ निकालता है, और वही है जिसने रात को लोगों के आराम करने का स्थान बनाया जिसमें वे आजीविका की तलाश में गतिविधि से स्थिर हो जाते हैं; ताकि वे दिन में उसकी खोज में अपनी थकान से आराम करें। तथा वही है जिसने सूरज और चाँद को एक पूर्वनिर्धारित गणना के अनुसार चलाया। यह उल्लिखित अद्भुत रचना उस प्रभुत्वशाली अस्तित्व का निर्धारित किया हुआ है, जिसे कोई पराजित नहीं कर सकता, वह अपनी रचना के बारे में और उनके हितों को जानने वाला है।

Enam 6:97

वही महिमावान और सर्वशक्तिमान (अल्लाह) है, जिसने (ऐ आदम की संतान!) तुम्हारे लिए आकाश में तारे बनाए, ताकि तुम अपनी यात्राओं में मार्ग पा सको यदि थल और समुद्र में तुमपर रास्ता संदिग्ध हो जाए। निश्चय हमने अपनी क्षमता को दर्शाने वाले प्रमाणों और सबूतों को उन लोगों के लिए स्पष्ट कर दिए हैं, जो उनपर विचार करते हैं, फिर उनसे लाभ उठाते हैं।

Enam 6:98

वही महिमावान और सर्वशक्तिमान (अल्लाह) है, जिसने तुम्हें एक आत्मा से पैदा किया जो तुम्हारे पिता आदम की आत्मा है। क्योंकि उसने तुम्हारी रचना का आरंभ तुम्हारे पिता आदम को मिट्टी से पैदा करके किया, फिर उनसे तुम्हें पैदा किया। तथा तुम्हारे लिए ठहरने का स्थान बनाया, जैसे तुम्हारी माँओं के गर्भ और तुम्हारे सौंपे जाने की जगह बनाई, जैसे तुम्हारे बापों की पीठ। हमने आयतों (निशानियों) को उन लोगों के लिए स्पष्ट कर दिया है जो अल्लाह की वाणी को समझते हैं।

Enam 6:99

वही महिमावान और सर्वशक्तिमान (अल्लाह) है, जिसने आकाश से बारिश का पानी उतारा, तो हमने उसके द्वारा हर प्रकार के पौधे उगाए। फिर हमने पौधे से फसल तथा हरे-भरे वृक्ष निकाले, जिसमें से हम तह-ब-तह चढ़े हुए दाने निकालते हैं, जैसे कि बालियों में होता है। तथा खजूर के गाभे से निकलने वाले उसके गुच्छे पास ही होते हैं, जिन्हें खड़ा हुआ और बैठा हुआ व्यक्ति तोड़ सकता है। और हमने अंगूर के बाग़ निकाले, तथा ज़ैतून और अनार निकाले, जिनके पत्ते एक जैसे और फल भिन्न-भिन्न होते हैं। (ऐ लोगो!) उसके फल को देखो, जब वह पहली बार प्रकट होता है, और जब वह पकता है। निःसंदेह इसमें अल्लाह पर ईमान रखने वाले लोगों के लिए अल्लाह की शक्ति के स्पष्ट प्रमाण हैं। क्योंकि वही लोग इन प्रमाणों और सबूतों से लाभ उठाते हैं।

Enam 6:100

मुश्रिकों ने जिन्नों को इबादत में अल्लाह का साझीदार बना लिया, जब उन्होंने यह मान लिया कि वे लाभ और हानि पहुँचाते हैं। जबकि अल्लाह ही ने उन्हें बनाया है, उसके अलावा किसी और ने उन्हें नहीं बनाया। इसलिए वही इस बात का अधिक योग्य है कि उसकी इबादत की जाए। तथा उन्होंने (अल्लाह के लिए) बेटे गढ़ लिए, जैसा कि यहूदियों ने उज़ैर के साथ और ईसाइयों ने ईसा के साथ किया। और बेटियाँ गढ़ लीं, जैसा कि मुश्रिकों ने फरिश्तों के साथ किया। अल्लाह तआला उससे बहुत पवित्र और सर्वोच्च है, जो झूठे लोग उसके बारे में वर्णन करते हैं।

Enam 6:101

वही महिमावान और सर्वशक्तिमान आकाशों तथा धरती को बिना किसी पूर्व उदाहरण के बनाने वाला है। उसकी संतान कैसे होगी, जबकि उसकी कोई पत्नी ही नहीं?! तथा उसी ने सब कुछ पैदा किया है और वह हर चीज़ का ज्ञान रखने वाला है, कोई चीज़ उससे छिपी नहीं है।

Enam 6:102

(ऐ लोगो!) यह अल्लाह, जो इन गुणों से विशेषित हैं, वही तुम्हारा रब है। अतः उसके अलावा तुम्हारा कोई रब नहीं, और न ही उसके अलावा कोई सच्चा पूज्य है। तथा वही हर चीज़ का अविष्कारक है। इसलिए केवल उसी की इबादत करो। क्योंकि वही इबादत के योग्य है और वह हर चीज़ का संरक्षक है।

Enam 6:103

उसे निगाहें नहीं पातीं, परंतु वह महिमावान सब निगाहों को पाता है और उन्हें घेरे हुए है। तथा वह अपने नेक बंदों के प्रति दयालु, उनकी ख़बर रखने वाला है।

Enam 6:104

(ऐ लोगो!) तुम्हारे पास तुम्हारे रब की ओर से स्पष्ट तर्क और खुले प्रमाण आ चुके हैं। तो जिसने उन्हें समझा और मान लिया, तो उसका लाभ उसी को मिलेगा, और जो उनसे अंधा बन गया, न उन्हें समझा और न उन्हें स्वीकार किया, तो उसका नुकसान उसी तक सीमित है। और मैं तुमपर कोई निगरानी करने वाला नहीं हूँ कि तुम्हारे कार्यों की गणना करूँ। मैं तो केवल अपने रब की ओर से एक रसूल हूँ, और वही तुम्हारा निरीक्षक है।

Enam 6:105

जिस तरह हमने अल्लाह की शक्ति के प्रमाणों और दलीलों को विविध तरीक़े से बयान किया है, उसी तरह हम वादे, धमकी तथा उपदेश से संबंधित आयतों में विविधता लाते हैं। तथा मुश्रिक लोग कहेंगे कि यह कोई वह़्य नहीं हैं, बल्कि तुमने इसे अपने से पहले किताब वाले लोगों से पढ़ा है। और ताकि हम मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की उम्मत में से ईमान वालों के लिए इन आयतों में विविधता लाकर लोगों के लिए सत्य को स्पष्ट कर दें। क्योंकि वही लोग हैं जो सत्य को स्वीकार करते हैं और उसका पालन करते हैं।

Enam 6:106

(ऐ रसूल!) आप उस सत्य का पालन करें, जो आपका पालनहार आपकी ओर वह़्य करता है। क्योंकि उस महिमावान के अलावा कोई सत्य पूज्य नहीं। तथा आप काफ़िरों और उनके हठ पर ध्यान न दें। क्योंकि उनका मामला अल्लाह के हवाले है।

Enam 6:107

यदि अल्लाह की इच्छा होती कि वे उसके साथ किसी को साझी न बनाएँ, तो वे उसके साथ किसी को भी साझी न बनाते। तथा (ऐ रसूल!) हमने आपको उनपर निरीक्षक नहीं बनाया कि आप उनके कार्यों की गणना करें, तथा आप उनके प्रभारी नहीं हैं। आप तो केवल एक रसूल हैं और आपका दायित्व केवल अल्लाह के संदेश को पहुँचा देना है।

Enam 6:108

ऐ मोमिनो! उन मूर्तियों को बुरा न कहो, जिन्हें बहुदेववादी अल्लाह के साथ पूजते हैं। भले ही वे सबसे तुच्छ तथा बुरा कहे जाने के सबसे योग्य हों। ताकि ऐसा न हो कि बहुदेववादी अल्लाह के प्रति सीमा से आगे बढ़ते हुए (मर्यादा का उल्लंघन करते हुए) और उस चीज़ से अज्ञानता के कारण जो उस महिमावान के योग्य है, उसे बुरा कहने लगें। जिस तरह इन लोगों के लिए उनकी पथभ्रष्टता को सुशोभित कर दिया गया है, उसी तरह हमने हर जाति के लिए उसके कर्म को सुशोभित कर दिया, चाहे वह अच्छा हो या बुरा। चुनाँचे उन्होंने वही किया, जिसे हमने उनके लिए सुंदर बना दिया था। फिर क़ियामत के दिन उन्हें अपने रब ही की ओर लौटकर जाना है। तो वह उन्हें बताएगा जो कुछ वे दुनिया में किया करते थे और उन्हें उसका बदला देगा।

Enam 6:109

बहुदेववादियों ने अपनी सबसे मज़बूत शपथ लेते हुए अल्लाह की क़सम खाई : निःसंदेह यदि मुहम्मद उनके पास उन निशानियों में से कोई निशानी लेकर आए, जिनका उन्होंने सुझाव दिया है, तो वे अवश्य ही उसपर ईमान ले आएँगे। (ऐ रसूल!) आप उनसे कह दें : निशानियाँ मेरे पास नहीं हैं कि मैं उन्हें उतार दूँ। बल्कि वे अल्लाह के पास हैं, वह जब चाहे उन्हें उतारता है। और (ऐ मोमिनो!) तुम्हें क्या मालूम कि जब ये निशानियाँ उनके प्रस्ताव के अनुसार आ जाएँ, वे उनपर ईमान नहीं लाएँगे? बल्कि वे अपने हठ और इनकार पर बने रहेंगे; क्योंकि वे मार्गदर्शन नहीं चाहते हैं।

Enam 6:110

हम उनके दिलों और उनकी आँखों को, उनके तथा सच्चाई के मार्ग पर चलने के बीच रुकावट डालकर फेर देंगे, जैसे हम उनके हठ के कारण पहली बार उनके और क़ुरआन पर ईमान लाने के बीच रुकावट बन गए थे। तथा हम उन्हें उनकी गुमराही और अपने रब के विरुद्ध सरकशी (विद्रोह) में भ्रमित भटकता छोड़ देंगे।

Enam 6:111

यदि हम उन्हें जवाब देते हुए उनकी प्रस्तावित चीज़ को ले आते, चुनाँचे हम उनके पास फ़रिश्ते उतार देते और वे उन्हें अपनी आँखों से देख लेते, तथा मरे हुए लोग उनसे बातें करते और आप जो कुछ लेकर आए हैं उसमें उन्हें आपकी सच्चाई की ख़बर देते, एवं हम उनके लिए वह सब कुछ इकट्ठा कर देते, जो उन्होंने सुझाव दिया था, जिन्हें वे आमने-सामने देख लेते; तो भी वे उस चीज़ पर ईमान न लाते जो आप लेकर आए हैं, परंतु यह कि अल्लाह उनमें से जिसे मार्गदर्शन दिखाना चाहे। लेकिन उनमें से अधिकतर लोग इस बात से अनजान हैं। इसलिए वे अल्लाह का सहारा नहीं लेते ताकि वह उन्हें मार्गदर्शन का सामर्थ्य प्रदान करे।

Enam 6:112

जिस प्रकार हमने इन बहुदेववादियों की शत्रुता के साथ आपकी परीक्षा ली, उसी प्रकार हमने आपसे पहले के हर नबी की परीक्षा ली। चुनाँचे हमने उनमें से प्रत्येक नबी के लिए सरकश मनुष्यों में से कुछ दुश्मन एवं सरकश जिन्नों में से कुछ दुश्मन बना दिए, जो एक-दूसरे के दिल में बुरी बातें डालते हैं, चुनाँचे वे उन्हें धोखा देने के लिए उनके लिए झूठ को सुशोभित करके प्रस्तुत करते हैं। और यदि अल्लाह चाहता कि वे ऐसा न करें, तो वे ऐसा नहीं करते। लेकिन अल्लाह ने परीक्षण के तौर पर उनके लिए ऐसा चाहा था। अतः आप उन्हें और जो कुछ वे कुफ़्र और झूठ गढ़ते हैं, उसे छोड़ दें और उनकी परवाह न करें।

Enam 6:113

और ताकि उन लोगों के दिल जो आख़िरत पर ईमान नहीं रखते उस (बुरी) बात की ओर झुक जाएँ, जो वे एक-दूसरे के दिलों में डालते हैं, और ताकि वे लोग उसे अपने लिए स्वीकार कर लें और उसे अपने लिए पसंद कर लें, और ताकि वे भी वही अवज्ञा और पाप करने लग जाएँ, जो ये लोग करने वाले हैं।

Enam 6:114

ऐ रसूल! आप इन बहुदेववादियों से, जो अल्लाह के साथ उसके अलावा को पूजते हैं, कह दें : क्या यह तर्कसंगत है कि मैं अपने और तुम्हारे बीच अल्लाह के अलावा किसी अन्य को न्यायकर्ता स्वीकार करूं? जबकि अल्लाह ही है, जिसने तुम्हारे ऊपर क़ुरआन को अवतरित किया है जो हर चीज़ को पूर्ण रूप से स्पष्ट करने वाला है। तथा यहूदी लोग जिन्हें हमने तौरात दी और ईसाई लोग जिन्हें हमने इंजील प्रदान की, इस तथ्य को जानते हैं कि क़ुरआन आपपर सत्य के साथ उतारा गया है। क्योंकि उन्होंने अपनी पुस्तकों में इसके प्रमाण पाए हैं। अतः आप उसपर शक करने वालों में से न बनें, जो हमने आपकी ओर वह़्य की है।

Enam 6:115

क़ुरआन बातों और ख़बरों में सत्य की पराकाष्ठा को पहुँचा हुआ है। उसकी बातों को कोई बदलने वाला नहीं। वह अपने बंदों की बातों को सुनने वाला, उन्हें जानने वाला है। इसलिए उनमें से कुछ भी उससे छिपा नहीं है, और वह उन लोगों को बदला देगा जो उसकी बातों को बदलने की चेष्टा करते हैं।

Enam 6:116

यदि मान लिया जाए कि (ऐ रसूल!) आपने पृथ्वी पर रहने वाले अधिकांश लोगों का पालन किया, तो वे आपको अल्लाह के धर्म से गुमराह कर देंगे। क्योंकि यह अल्लाह की सुन्नत (परंपरा) रही है कि सत्य कम लोगों के पास होता है। जबकि अधिकांश लोग केवल अनुमान का पालन करते हैं जिसका कोई आधार नहीं होता। क्योंकि उन्हें यह गुमान था कि उनके पूज्य उन्हें अल्लाह के निकट कर देते हैं। हालाँकि वे इसके बारे में झूठ बोलते हैं।

Enam 6:117

निःसंदेह (ऐ रसूल!) आपका पालनहार उसे सबसे अधिक जानता है जो उसके मार्ग से भटक जाता है, तथा वह उन लोगों को भी सबसे अधिक जानने वाला है जो उसके मार्ग पर निर्देशित हैं, उनमें से कुछ भी उससे छिपा नहीं है।

Enam 6:118

तो (ऐ लोगो!) उस पशु में से खाओ, जिसपर ज़बह़ करते समय अल्लाह का नाम लिया गया है, यदि तुम वास्तव में उसके स्पष्ट प्रमाणों पर ईमान रखने वाले हो।

Enam 6:119

(ऐ ईमान वालो!) अल्लाह के नाम पर ज़बह किए हुए जानवर को खाने से तुम्हें कौन-सी चीज़ रोकती है, जबकि अल्लाह ने तुम्हारे लिए वे चीज़ें स्पष्ट रूप से बयान कर दी हैं, जो उसने तुमपर हराम की हैं। अतः तुम्हारे लिए उन्हें छोड़ देना अनिवार्य है, यह और बात है कि ज़रूरत तुम्हें उन्हें खाने पर मजबूर कर दे। क्योंकि ज़रूरत निषिद्ध चीज़ को अनुमेय कर देती है। निःसंदेह बहुत-से बहुदेववादी अज्ञानतावश अपने भ्रष्ट विचारों के कारण अपने अनुयायियों को सत्य से दूर रखते हैं। क्योंकि वे उस चीज़ को वैध ठहराते हैं, जो अल्लाह ने उनपर हराम की है, जैसे मृत जानवर आदि, और उस चीज़ को हराम ठहराते हैं, जो अल्लाह ने उनके लिए हलाल की है, जैसे बह़ीरा, वसीला और ह़ामी इत्यादि। निःसंदेह आपका रब (ऐ रसूल!) उन लोगों को अधिक जानता है, जो अल्लाह की सीमाओं का उल्लंघन करने वाले हैं और वह उन्हें अपनी सीमाओं का उल्लंघन करने का बदला देगा।

Enam 6:120

(ऐ लोगो!) प्रत्यक्ष रूप से और गुप्त रूप से पाप करना छोड़ दो। निःसंदेह जो लोग गुप्त रूप से या खुले रूप से पाप करते हैं, शीघ्र ही अल्लाह उन्हें उनके किए हुए पाप का बदला देगा।

Enam 6:121

(ऐ मुसलमानो!) उस जानवर का मांस न खाओ, जिसपर अल्लाह का नाम नहीं लिया गया है, चाहे उसपर अल्लाह के सिवा किसी और का नाम लिया गया है या नहीं। क्योंकि उसमें से खाना निश्चित रूप से अल्लाह की आज्ञाकारिता से निकलकर उसकी अवज्ञा में प्रस्थान है। निःसंदेह शैतान अपने दोस्तों के मन में संशय डालते रहते हैं, ताकि वे तुमसे मृत मांस खाने के बारे में बहस करें। और यदि (ऐ मुसलमानो!) तुमने - मृत मांस को अनुमेय करने हेतु - उनके डाले जाने वाले संदेहों को स्वीकार कर लिया, तो तुम और वे बहुदेववाद में समान हैं।

Enam 6:122

क्या वह व्यक्ति, जो अल्लाह के उसे हिदायत देने से पहले मुर्दा था (क्योंकि वह कुफ़्र, अज्ञानता और पापों में लिप्त था), फिर हमने उसको ईमान, ज्ञान और आज्ञाकारिता का मार्गदर्शन प्रदान करके जीवित किया : उस आदमी के बराबर है, जो कुफ़्र, अज्ञानता और पापों के अंधेरों में पड़ा है जिनसे वह बाहर नहीं निकल सकता, उसके लिए सारे रास्ते भ्रमित और अंधेरे हो गए हैं?! जिस प्रकार इन मुश्रिकों के लिए उनका शिर्क पर क़ायम रहना तथा मृत जानवर का मांस खाना और झूठ के साथ बहस करना सुंदर बना दिया गया है, उसी प्रकार काफिरों के लिए उन पापों को सुंदर बना दिया गया है, जो वे किया करते थे, ताकि क़ियामत के दिन उन्हें उनके बदले में दर्दनाक यातना दी जाए।

Enam 6:123

जिस प्रकार मक्का में हुआ कि बहुदेववादियों के प्रमुखों ने अल्लाह के रास्ते से रोकने का काम किया, उसी तरह हमने हर बस्ती में सरदार और महापुरुष बनाए, जो शैतान के मार्ग की ओर बुलाने तथा रसूलों और उनके अनुयायियों से लड़ने की खातिर अपनी चालें चलते हैं। हालाँकि तथ्य यह है कि उनकी चालें खुद उन्हीं पर लौट आती हैं, लेकिन वे अपनी अज्ञानता और इच्छाओं का अनुसरण करने के कारण इसे महसूस नहीं करते हैं।

Enam 6:124

जब काफ़िरों के प्रमुखों के पास अल्लाह द्वारा उसके नबी पर उतारी हुई निशानियों में से कोई निशानी आती है, तो वे कहते हैं : हम कदापि ईमान नहीं लाएँगे, यहाँ तक कि अल्लाह हमें भी उसी जैसा प्रदान कर दे, जो उसने निबयों को नुबुव्वत तथा रिसालत प्रदान की है। तो अल्लाह ने उन्हें उत्तर दिया कि वह उसे अधिक जानने वाला है जो रिसालत (पैग़ंबरी) के लिए योग्य है और उसके बोझ को उठा सकता है। इसलिए वह उसे नुबुव्वत तथा रिसालत के लिए विशिष्ट कर लेता है। शीघ्र ही इन सरकशों को उनके सत्य से अभिमान के कारण अपमान और तिरस्कार, तथा उनकी चालबाज़ी (छल) के कारण कड़ी यातना का सामना करना पड़ेगा।

Enam 6:125

जिस व्यक्ति को अल्लाह हिदायत के मार्ग पर ले जाना चाहता है, उसके सीने को खोल देता है तथा उसे इस्लाम स्वीकार करने के लिए तैयार कर देता है। और जिसे वह विफल करना चाहता है और उसे हिदायत की तौफ़ीक़ नहीं देना चाहता, उसके सीने को सच्चाई को स्वीकार करने से बहुत संकीर्ण कर देता है, ताकि उसके हृदय में सत्य का प्रवेश असंभव हो जाए। जिस तरह कि उसका आसमान की ओर चढ़ना असंभव है और वह स्वयं ऐसा करने में असमर्थ है। तथा जैसे अल्लाह ने पथभ्रष्ट व्यक्ति की स्थिति को इस तरह की गंभीर संकट की स्थिति बना दी है, उसी तरह वह उन लोगों को यातना से ग्रस्त करता है, जो उसपर ईमान नहीं लाते।

Enam 6:126

यह धर्म जो हमने (ऐ रसूल!) आपके लिए निर्धारित किया है, अल्लाह का वह सीधा मार्ग है, जिसमें कोई टेढ़ापन नहीं। हमने उसके लिए निशानियाँ स्पष्ट कर दी हैं, जिसके पास समझ-बूझ है जिसके द्वारा वह अल्लाह के बारे में समझ सकता है।

Enam 6:127

उनके लिए एक घर है, जिसमें वे हर नुक़सान से सुरक्षित रहेंगे। यह घर जन्नत है। तथा अल्लाह उनका सहायक और समर्थक है, उनके उन अच्छे कामों के बदले जो वे किया करते थे।

Enam 6:128

और (ऐ रसूल!) याद करें, जिस दिन अल्लाह मानव जाति और जिन्नों को इकट्ठा करेगा, फिर अल्लाह कहेगा : ऐ जिन्नों के समूह! तुमने इनसानों को खूब गुमराह किया तथा उन्हें अल्लाह के मार्ग से रोक दिया। इसपर इनसानों में से उनके अनुयायी अपने रब को जवाब देते हुए कहेंगे : ऐ हमारे रब! हममें से प्रत्येक ने अपने साथी से लाभ उठाया है। चुनाँचे जिन्न ने इनसान की आज्ञाकारिता का लाभ उठाया, और इनसान ने अपनी इच्छाओं की पूर्ति का लाभ उठाया। और हम उस अवधि तक पहुँच गए, जो तूने हमारे लिए नियत कर रखी थी। तो अब यह क़ियामत का दिन है। अल्लाह कहेगा : आग ही तुम्हारा ठिकाना है, जिसमें तुम हमेशा रहोगे, सिवाय उसके जो अल्लाह चाहे, जो कि उनके क़ब्रों से उठने से लेकर उनके अपने गंतव्य जहन्नम की ओर जाने के बीच की अवधि है। यही वह अवधि है, जिसको अल्लाह ने उनके हमेशा जहन्नम में रहने से अलग किया है। निश्चय ही आपका रब (ऐ रसूल!) अपनी तक़दीर तथा प्रबंधन में पूर्ण हिकमत वाला, अपने बंदों और उनमें से उन लोगों के बारे में सब कुछ जानने वाला है जो यातना के योग्य हैं।

Enam 6:129

जिस प्रकार हमने सरकश जिन्नों को कुछ इनसानों का दोस्त बना दिया और उन्हें उनपर हावी कर दिया, ताकि वे उन्हें पथभ्रष्ट करते रहें, उसी प्रकार हम प्रत्येक अत्याचारी को एक अत्याचारी का दोस्त बना देते हैं, जो उसे बुराई करने पर उभारता और उसके लिए प्रेरित करता है, तथा उसे भलाई से नफरत दिलाता और उसके प्रति उसमें अरुचि पैदा करता है। यह दरअसल उन पापों के प्रतिफल के रूप में है, जो वे कमाया करते थे।

Enam 6:130

हम क़ियामत के दिन उनसे कहेंगे : ऐ इनसानों और जिन्नों के समूह! क्या तुम्हारे पास तुम्हारे ही वर्ग (मानव जाति) से रसूल नहीं आए, जो तुम्हें वह पढ़कर सुनाते हों जो अल्लाह ने उनपर अवतरित किया है, और तुम्हें इस दिन के भेंट अर्थात् क़ियामत के दिन से डराते हों? वे कहेंगे : बिलकुल आए थे। आज हम अपने विरुद्ध इक़रार करते हैं कि तेरे रसूलों ने हमें संदेश पहुँचा दिया, तथा हम इस दिन के भेंट का भी इक़रार करते हैं। परंतु हमने तेरे रसूलों को झुठला दिया था तथा इस दिन के भेंट के बारे में उनकी बात को अस्वीकार कर दिया था। दरअसल, इस दुनिया के जीवन ने उन्हें अपने अलंकरण, शोभा और क्षणभंगुर आनंद के साथ धोखा दिया, तथा वे स्वयं ही स्वीकार करेंगे कि वे दुनिया में अल्लाह तथा उसके रसूलों का इनकार करने वाले थे। हालाँकि इस स्वीकारोक्ति और ईमान से उन्हें कुछ भी लाभ नहीं होगा, क्योंकि उसका समय समाप्त हो चुका।

Enam 6:131

इनसानों तथा जिन्नों की ओर रसूल भेजकर इसलिए हुज्जत तमाम कर दी गई, ताकि किसी को उसके गुनाह की सज़ा इस हाल में न दी जाए कि उसकी ओर कोई रसूल न भेजा गया हो और उसके पास धर्म का संदेश न पहुँचा हो। अतः हमने किसी समुदाय को उसके पास रसूल भेजने के बाद ही दंडित किया।

Enam 6:132

उनमें से प्रत्येक के लिए अपने कर्मों के अनुसार दरजे हैं। अतः थोड़ी-बहुत बुराई करने वाला और अधिक बुराई करने वाला, दोनों बराबर नहीं हो सकते तथा अनुसरण करने वाला और जिसका अनुसरण किया गया है, दोनों बराबर नहीं हो सकते। जैसे कि सभी अच्छे कार्य करने वालों का बदला बराबर नहीं हो सकता। तथा आपका पालनहार उससे अनजान नहीं है जो कुछ वे कर रहे थे, बल्कि वह उसके बारे में जानता है, उससे कुछ भी छिपा नहीं है, और वह उन्हें उनके कार्यों का बदला देगा।

Enam 6:133

और (ऐ रसूल!) आपका रब अपने बंदों से बेनियाज़ है। उसे न उनकी आवश्यकता है, न उनकी इबादत की, और न ही उनके इनकार से उसे कोई नुक़सान होता है। वह उनसे अपनी इस बेनियाज़ी के बावजूद, उनपर दया करता है। यदि वह (ऐ अवज्ञाकारी बंदो!) तुम्हें नष्ट करना चाहे, तो अपनी यातना भेजकर तुम्हें जड़ से उखाड़ फेंके और तुम्हें विनष्ट करने के बाद अपनी इच्छा के अनुसार ऐसे लोगों को ले आए, जो उसपर ईमान रखें और उसकी आज्ञा मानें। जैसा कि उसने तुम्हें अन्य लोगों के वंश से पैदा किया जो तुमसे पहले थे।

Enam 6:134

(ऐ काफ़िरो!) तुमसे जिस पुनर्जीवन, दोबारा उठाए जाने, हिसाब-किताब और सज़ा का वादा किया जा रहा है, वह अनिवार्य रूप से आने वाला है और तुम अपने पालनहार की पकड़ से भागकर नहीं निकल सकते। क्योंकि वह तुम्हारे माथे की लट को पकड़े हुए है और तुम्हें अपनी यातना से दंडित करने वाला है।

Enam 6:135

(ऐ रसूल!) आप कह दीजिए : ऐ मेरे समुदाय के लोगो! अपने मार्ग पर और जिस कुफ़्र तथा पथभ्रष्टता में पड़े हो, उस पर अडिग रहो। मैंने स्पष्ट रूप से संदेश पहुँचाकर तुमपर हुज्जत तमाम कर दी और प्रमाण स्थापित कर दिया। अतः मुझे तुम्हारे कुफ़्र तथा पथभ्रष्टता की कोई परवाह नहीं है। बल्कि मैं जिस सत्य पर क़ायम हूँ उसपर अडिग रहूँगा। फिर तुम्हें शीघ्र ही मालूम हो जाएगा कि किसे दुनिया में विजय प्राप्त होती है, कौन धरती का वारिस होता है तथा किसे आख़िरत की खुशियाँ प्राप्त होती हैं। निश्चित रूप से बहुदेववादियों को न तो इस दुनिया में सफलता प्राप्त होगी, और न ही आख़िरत में। बल्कि उनका परिणाम घाटा एवं नुक़सान है, भले ही उन्होंने इस दुनिया में जो कुछ आनंद लिया हो, उसका आनंद लिया।

Enam 6:136

अल्लाह के साथ शिर्क करने वालों ने यह तरीक़ा निकाला कि अल्लाह की पैदा की हुई फसलों और मवेशियों में से उसके लिए एक हिस्सा निर्धारित कर दिया और यह दावा किया कि वह (हिस्सा) अल्लाह का है, और दूसरा हिस्सा उनकी मूर्तियों और थानों के लिए है। फिर उन्होंने जो हिस्सा अपने साझियों के लिए आवंटित किया है, वह उन मसरफ़ों तक नहीं पहुँचता, जिनमें ख़र्च करना अल्लाह ने धर्मसंगत बनाया है, जैसे ग़रीब और मिसकीन लोग। तथा उन्होंने जो हिस्सा अल्लाह के लिए निर्धारित किया है, वह उनके साझियों यानी मूर्तियों को पहुँच जाता है, वह उनके हितों में खर्च किया जा सकता है। उनका यह निर्णय और विभाजन बहुत बुरा है।

Enam 6:137

जिस तरह शैतान ने बहुदेववादियों के लिए इस अन्यायपूर्ण निर्णय को सुंदर बना दिया है, उसी तरह बहुत-से बहुदेववादियों के लिए उनके साझी शैतानों ने यह सुशोभित किया है कि वे गरीबी के डर से अपने बच्चों की हत्या कर दें; ताकि वह उनसे उस आत्मा की हत्या कराकर उन्हें नष्ट कर दे, जिसकी नाहक़ हत्या करना अल्लाह ने निषिद्ध ठहराया है, और ताकि वह उनपर उनके धर्म को गड्डमड्ड कर दे, फिर वे यह न जान सकें कि क्या वैध है और क्या अवैध। और यदि अल्लाह चाहता कि वे ऐसा न करें, तो वे ऐसा नहीं करते, परंतु अल्लाह ने अपनी व्यापक हिकमत के तहत ऐसा ही चाहा। अतः (ऐ रसूल!) आप इन बहुदेववादियों तथा अल्लाह पर इनके मिथ्यारोपण को छोड़ दें। क्योंकि इससे आपको कोई नुक़सान नहीं होगा, और उनका मामला अल्लाह को सौंप दें।

Enam 6:138

तथा बहुदेववादियों ने कहा : ये पशुधन और फसलें निषिद्ध हैं, जिनमें से केवल वही खा सकते हैं, जिन्हें वे चाहें, जैसे मूर्तियों के सेवक आदि। यह उनका अपना ख़याल और घड़ी हुई बात है। और (उन्होंने यह भी कहा कि) ये ऐसे मवेशी हैं जिनकी पीठें हराम (वर्जित) हैं; न उनकी सवारी की जाएगी और न ही उनपर बोझ लादा जाएगा। इन जानवरों से मुराद बहीरा (वह ऊँटनी जिसके पाँच बच्चे हो जाएँ और उसका कान चीरकर उसे छोड़ दिया जाए), साइबा (वह ऊँटनी जिसे मूर्तियों के लिए छोड़ दिया जाए) और हामी (वह नर ऊँट जिसकी नस्ल से दस बच्चे पैदा हो जाएँ और उसे आज़ाद कर दिया जाए) हैं। इन जानवरों को ज़बह करते समय वे अल्लाह का नाम लेने के बजाय अपनी मूर्तियों का नाम लेते थे। उन्होंने यह सब अल्लाह के विरुद्ध यह झूठ गढ़ते हुए किया कि यह उसकी ओर से है। अल्लाह शीघ्र ही उन्हें अपनी यातना से दंडित करेगा, क्योंकि वे अल्लाह पर झूठे आरोप लगाते थे।

Enam 6:139

उन्होंने यह भी कहा कि इन 'साइबा' एवं 'बहीरा' आदि जानवरों के पेट में जो बच्चे हैं, यदि वह जीवित पैदा हुआ है, तो वह हमारे पुरुषों के लिए अनुमेय और हमारी महिलाओं के लिए निषिद्ध है, और यदि उनके पेट में जो बच्चे हैं मृत पैदा हों, तो उसे पुरुष एवं महिला सब खा सकते हैं। शीघ्र ही अल्लाह उन्हें उनके ऐसा कहने का वह बदला देगा जिसके वे योग्य हैं। वह अपने विधान तथा अपनी सृष्टि के मामलों के प्रबंधन में पूर्ण हिकमत वाला, उनके बारे में सब कुछ जानने वाला है।

Enam 6:140

वे लोग नष्ट हो गए, जिन्होंने अपनी नासमझी एवं अज्ञानता के कारण अपनी संतान की हत्या की और अल्लाह के दिए हुए जानवरों को, झूठे तौर पर अल्लाह की ओर निसबत करके हराम ठहरा लिया। निश्चय वे सीधे रास्ते से दूर हो गए और वे उस पर निर्देशित नहीं थे।

Enam 6:141

और अल्लाह ही है, जिसने बिना तने वाले बाग़ पैदा किए, जो धरती पर बिछे हुए होते हैं, और तनों वाले बाग़ पैदा किए, जो धरती से ऊपर उठे हुए होते हैं। तथा उसी ने खजूर के पेड़ पैदा किए। और उसी ने फसलों को पैदा किया, जिनके फल आकार एवं स्वाद में विभिन्न प्रकार के होते हैं। तथा उसी ने ज़ैतून और अनार पैदा किए, जिनके पत्ते एक जैसे होते हैं, लेकिन फलों का स्वाद अलग-अलग होता है। (ऐ लोगो!) जब वह फल दे, तो उसका फल खाओ और उसकी कटाई के दिन उसकी ज़कात अदा करो। और खाने तथा खर्च करने के मामले में शरीयत की सीमाओं का उल्लंघन न करो। क्योंकि अल्लाह उन लोगों से प्यार नहीं करता जो उनमें या उनके अलावा में उसकी सीमाओं का उल्लंघन करने वाले हैं, बल्कि उनसे नफ़रत करता है। निश्चय जिसने इन सारी चीज़ों को पैदा किया, उसी ने उन्हें अपने बंदों के लिए अनुमेय किया है। अतः बहुदेववादियों को उन्हें हराम ठहराने का कोई अधिकार नहीं है।

Enam 6:142

उसी ने तुम्हारे लिए कुछ ऐसे जानवर पैदा किए, जो सामान लादे जाने के लिए उपयुक्त हैं, जैसे बड़े ऊँट, तथा कुछ ऐसे जानवर पैदा किए, जो उसके लिए उपयुक्त नहीं हैं, जैसे छोटे ऊँट और भेड़-बकरियाँ। (ऐ लोगो!) अल्लाह की दी हुई इन चीज़ों में से उन वस्तुओं को खाओ जो उसने तुम्हारे लिए हलाल की हैं, तथा हराम चीज़ों को हलाल करने एवं हलाल चीज़ों को हराम ठहराने के विषय में शैतान के चरणों का पालन न करो, जैसा कि बहुदेववादी करते हैं। निश्चय शैतान - ऐ लोगो! - तुम्हारा स्पष्ट दुश्मनी वाला दुश्मन है। क्योंकि वह चाहता है कि तुम इस तरह करके अल्लाह की अवज्ञा करो।

Enam 6:143

उसने तुम्हारे लिए पशुओं के आठ प्रकार पैदा किए; भेड़ में से दो : एक नर और एक मादा, तथा बकरी में से दो। (ऐ रसूल!) बहुदेववादियों से पूछें : क्या अल्लाह ने उन दोनों में से नर को उनके नर होने के कारण हराम किया है? यदि वे जवाब दें : हाँ, तो उनसे कहें : फिर तुम मादाओं को क्यों हराम कहते हो? या कि उसने मादाओं को स्त्रीत्व के कारण हराम किया है? यदि वे कहें : हाँ, तो आप उनसे कहें : फिर तुम नरों को क्यों हराम ठहराते हो? या कि उसने दोनों मादाओं के गर्भ में जो कुछ है इस कारण हराम किया है कि वह गर्भ में है? यदि वे कहें : हाँ, तो आप उनसे कहें : तुम कभी नर को हराम ठहराकर और कभी मादा को हराम करके गर्भ में जो कुछ है उसके बीच अंतर क्यों करते हो? ऐ बहुदेववादियो! यदि तुम अपने इस दावे में सच्चे हो कि इसका निषेध अल्लाह की ओर से है, तो मुझे उस सच्चे ज्ञान के बारे में बताओ, जिसे तुम अपना आधार बनाते हो।

Enam 6:144

आठ प्रकार के पशुओं में से शेष इस तरह हैं : ऊँटों के दो प्रकार और गायों के दो प्रकार। (ऐ रसूल!) बहुदेववादियों से पूछें : अल्लाह ने इनमें से जिसे हराम ठहराया है, क्या उसे नर होने के कारण या मादा होने के कारण या फिर गर्भ में होने के कारण हराम क्या है? (ऐ बहुदेववादियो!) क्या तुम (अपने दावे के अनुसार) उस समय उपस्थित थे जब अल्लाह ने तुम्हारे इन हराम ठहराए हुए जानवरों को हराम ठहराने की तुम्हें ताकीद की थी?! अतः उससे बड़ा अत्याचारी और उससे बड़ा अपराधी कोई नहीं, जिसने अल्लाह पर झूठा आरोप लगाया और उसकी ओर उस चीज़ को हराम करने का काम मनसूब किया, जिसे उसने हराम नहीं किया; उसने ऐसा इसलिए किया ताकि लोगों को बिना किसी ज्ञान के सीधे रास्ते से भटका दे। निश्चय अल्लाह उन ज़ालिमों को मार्गदर्शन की तौफ़ीक़ प्रदान नहीं करता, जो अल्लाह पर झूठा आरोप लगाते हैं।

Enam 6:145

(ऐ रसूल!) आप कह दें कि अल्लाह ने मुझपर जो वह़्य उतारी है, उसमें जिन हराम (निषिद्ध) वस्तुओं का उल्लेख है, वे केवल यह हैं : वह हलाल जानवर जो ज़बह किए बिना मर जाए, बहता खून, सूअर का मांस कि वह अशुद्ध और निषिद्ध है, वह जानवर जिसे अल्लाह के नाम के अलावा पर ज़बह किया गया हो, जैसेकि वह जानवर जिसे उनकी मूर्तियों के नाम पर ज़बह किया गया हो। परंतु जो व्यक्ति सख़्त भूख के कारण इन हराम चीज़ों मे से खाने के लिए मजबूर हो जाए, जबकि उसका उद्देश्य उन्हें खाने का आनंद लेना न हो तथा ज़रूरत से अधिक न खाए, तो इसमें उस पर कोई पाप नहीं है। निःसंदेह (ऐ रसूल!) आपका पालनहार मजबूर को क्षमा करने वाला है, यदि वह इनमें से खा ले, तथा उसपर दयालु है।

Enam 6:146

और हमने यहूदियों पर उन तमाम जानवरों को हराम कर दिया था, जिनकी उंगलियाँ अलग-अलग न हों, जैसे ऊँट तथा शुतुरमुर्ग़ आदि। तथा हमने उनपर गाय और बकरी की चर्बी को भी हराम कर दिया था, सिवाय उसके जो उनकी पीठ या आँत से लगी हो, या जो हड्डियों के साथ मिश्रित हो, जैसे नितंब और पहलू की चर्बी। हमने उनके अत्याचार के बदले के तौर पर, इन चीज़ों को उनपर हराम किया था। निःसंदेह हम जो कुछ भी बताते हैं, निश्चय उसमें सच्चे हैं।

Enam 6:147

(ऐ रसूल!) यदि वे आपको झुठलाएँ और जो कुछ आप अपने रब के पास से लाए हैं, उसे न मानें, तो उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए कह दें : तुम्हारा पालनहार बहुत दयालु है, और तुम्हारे प्रति उसकी दया में से उसका तुम्हें मोहलत देना और तुम्हें सज़ा देने में जल्दी न करना है। तथा उन्हें डराते हुए कह दें : जो लोग अवज्ञा और कुकर्म करते हैं, उनसे उसकी यातना टलती नहीं है।

Enam 6:148

बहुदेववादी लोग, अल्लाह के साथ अपने साझी बनाने की वैधता पर, अल्लाह की इच्छा और उसकी तक़दीर (नियति) को प्रमाण बनाते हुए कहेंगे : यदि अल्लाह चाहता कि हम और हमारे पूर्वज अल्लाह के साथ साझी न बनाएँ, तो हम उसके साथ साझी न बनाते। और यदि अल्लाह चाहता कि हम उस चीज़ को हराम न ठहराएँ जो हमने अपने ऊपर हराम ठहराया है, तो हम उसे हराम न ठहराते। इन लोगों के अमान्य तर्क के समान ही के साथ, उन लोगों ने भी अपने रसूलों को झुठलाया जो इनसे पहले थे, उन्होंने कहा : यदि अल्लाह चाहता कि हम उन्हें न झुठलाएँ, तो हम उन्हें कभी न झुठलाते। तथा वे निरंतर इस इनकार पर बने रहे यहाँ तक कि उन्होंने हमारी उस यातना का स्वाद चख लिया जो हमने उनपर उतारी। (ऐ रसूल!) आप इन मुश्रिकों से कह दें : क्या तुम्हारे पास कोई सबूत है जो इंगित करता है कि अल्लाह तुमसे प्रसन्न है कि तुम उसके साथ साझी ठहराओ तथा उसके हराम किए हुए को हलाल ठहरा लो और उसके हलाल किए हुए को हराम ठहरा दो? क्योंकि मात्र तुमसे इसका होना, इस बात का प्रमाण नहीं है कि वह तुमसे संतुष्ट है। क्योंकि इस विषय में तुम केवल अनुमान का पालन करते हो, और अनुमान से सत्य का कुछ भी लाभ नहीं होता है, और तुम केवल झूठ बोलते हो।

Enam 6:149

(ऐ रसूल!) आप मुश्रिकों से कह दें : यदि तुम्हारे पास इन कमज़ोर तर्कों के अलावा कोई तर्क नहीं है, तो (सुन लो कि) अल्लाह के पास निश्चित तर्क है जिस पर तुम्हारे द्वारा प्रस्तुत किए गए बहाने कट जाते हैं, और उसके द्वारा तुम्हारे संदेह जिनका तुम सहारा लेते हो निराकृत हो जाते हैं। अतः (ऐ बहुदेववादियो!) यदि अल्लाह तुम सभी को सत्य की तौफ़ीक़ देना चाहता, तो तुम सब को उसकी तौफ़ीक़ प्रदान कर देता।

Enam 6:150

(ऐ रसूल!) इन मुश्रिकों से, जो अल्लाह के हलाल किए हुए को हराम करते हैं और दावा करते हैं कि अल्लाह ही ने इसे हराम किया है, कह दें : तुम अपने गवाहों को प्रस्तुत करो, जो यह गवाही दें कि अल्लाह ने इन वस्तुओं को हराम किया है, जिन्हें तुमने हराम ठहरा लिया है। यदि वे बिना ज्ञान के गवाही दें कि अल्लाह ने उन्हें हराम किया है, तो (ऐ रसूल!) आप उनकी गवाही में उनको सच्चा न मानें; क्योंकि यह झूठी गवाही है। तथा आप उन लोगों की इच्छाओं का पालन न करें, जो अपनी इच्छाओं को ही निर्णायक मानते हैं। क्योंकि उन्होंने हमारी आयतों को झुठलाया है जब उन्होंने उस चीज़ को हराम ठहरा दिया जिसे अल्लाह ने उनके लिए हलाल किया था। तथा आप उनका अनुसरण न करें, जो आख़िरत पर ईमान नहीं रखते और वे अपने रब के साथ साझी बनाते हैं। चुनाँचे उसके अलावा को उसके बराबर (समकक्ष) ठहराते हैं। और जिसका अपने पालनहार के साथ यह रवैया हो उसका अनुसरण कैसे किया जा सकता है?!

Enam 6:151

(ऐ रसूल!) लोगों से कह दें : आओ, मैं तुम्हें पढ़कर सुनाऊँ कि अल्लाह ने क्या-क्या हराम किया है। अल्लाह ने तुमपर हराम किया है कि तुम उसकी सृष्टि में से किसी वस्तु को उसके साथ साझी बनाओ, और अपने माता-पिता की अवज्ञा करो। बल्कि तुमपर अनिवार्य है कि उनके साथ अच्छा व्यवहार करो। तथा उसने तुमपर हराम किया है कि तुम गरीबी के कारण अपनी संतानों की हत्या करो, जैसे जाहिलियत के युग में लोग किया करते थे। हम ही तुम्हें जीविका प्रदान करते हैं और उन्हें भी जीविका प्रदान करते हैं। तथा उसने निर्लज्जता (दुराचार) के निकट भी जाने को हराम किया है, चाहे वह खुली हो अथवा छिपी। और यह भी हराम किया है कि तुम उस प्राणी की हत्या करो, जिसकी हत्या करना अल्लाह ने हराम किया है, सिवाय इसके कि उसका कोई उचित कारण हो, जैसे कि शादीशुदा होने के बाद व्यभिचार, और इस्लाम के बाद धर्मत्याग। अल्लाह ने तुम्हें इन उक्त बातों की ताकीद की है, ताकि तुम अल्लाह के आदेशों और निषेधों को समझो।

Enam 6:152

तथा उसने यतीम (जिसने व्यस्क होने से पहले अपने पिता को खो दिया हो) के माल में हाथ लगाने को हराम करार दिया है, सिवाय इसके कि ऐसा कुछ किया जाए जिसमें उसके लिए बेहतरी और लाभ तथा उसके धन में वृद्धि हो। यह निषेध उस समय तक है, जब तक कि वह व्यस्क न हो जाए तथा उसके अंदर परिपक्वता महसूस न की जाए। तथा उसने तुम्हारे लिए नाप-तौल में कमी करने को भी हराम किया है। अतः तुम्हें लेने और देने में तथा खरीदने-बेचने में न्याय से काम लेना चाहिए। हम किसी प्राणी पर उसकी क्षमता से अधिक बोझ नहीं डालते। अतः नाप-तौल आदि में जिस (मा'मूली) कमी या बेशी से बचना संभव नहीं है, उसमें कोई पकड़ नहीं होगी। और उसने तुमपर, किसी रिश्तेदार या मित्र का पक्ष लेते हुए किसी समाचार या गवाही में ऐसी बात कहना हराम किया है, जो सत्य नहीं है। और यदि तुमने अल्लाह से या अल्लाह के नाम पर किसी से वादा किया हो, तो उसे तोड़ना भी तुमपर हराम है। बल्कि तुम्हारे लिए उसे पूरा करना अनिवार्य है। अल्लाह ने तुम्हें उक्त बातों का निश्चित रूप से पालन करने का आदेश दिया है, ताकि तुम अपने मामले के परिणाम को याद रखो।

Enam 6:153

तथा उसने तुम्हारे लिए गुमराही के रास्तों पर चलना हराम ठहराया है। बल्कि, तुम्हें अल्लाह के सीधे मार्ग का अनुसरण करना चाहिए, जिसमें कोई टेढ़ापन नहीं है। गुमराही के रास्ते तुम्हें अलगाव और सत्य के मार्ग से दूरी की ओर ले जाते हैं। अल्लाह के सीधे मार्ग पर चलना ही है वह तथ्य है जिसकी अल्लाह ने तुम्हें ताकीद की है; ताकि तुम अल्लाह से, उसके आदेशों का पालन करके एवं उसकी मना की हुई बातों से दूर रहकर, डरो।

Enam 6:154

फिर जो कुछ उल्लेख किया गया उससे सूचित करने के बाद, हम यह बताते हैं कि हमने मूसा को, उनके अच्छे काम के लिए बदला के रूप में अनुग्रह को पूरा करने के लिए, धर्म में उनकी ज़रूरत की हर चीज़ की व्याख्या के रूप में, तथा सच्चाई के सबूत और दया के रूप में, तौरात प्रदान की, इस उम्मीद में कि वे क़ियामत के दिन अपने पालनहार से मिलने पर ईमान लाएँ, ताकि वे नेक कामों के साथ उसके लिए तैयारी करें।

Enam 6:155

यह क़ुरआन एक महान किताब है, जिसे हमने अवतरित किया है, बड़ी बरकत वाली है। क्योंकि इसमें धार्मिक और सांसारिक लाभों का उल्लेख है। अतः जो कुछ उसमें अवतरित हुआ है, उसका पालन करो और उसका उल्लंघन करने से सावधान रहो, इस आशा से कि तुम पर दया की जाए।

Enam 6:156

ऐसा न हो कि (ऐ अरब के बहुदेववादियो!) तुम कहो : अल्लाह ने तौरात और इंजील तो हमसे पहले यहूदियों और ईसाइयों पर उतारी थी, और उसने हमपर कोई किताब नहीं उतारी। तथा हम उनकी किताबें पढ़ना नहीं जानते। क्योंकि वे उनकी भाषा में हैं, हमारी भाषा में नहीं हैं।

Enam 6:157

तथा ऐसा न हो कि तुम कहो : यदि अल्लाह यहूदियों तथा ईसाइयों की तरह हमारे ऊपर भी कोई किताब उतारता, तो हम उनसे अधिक सीधे मार्ग पर चलने वाले होते!! तो अब तुम्हारे पास एक किताब आ चुकी है, जिसे अल्लाह ने तुम्हारे नबी मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर तुम्हारी भाषा में अवतरित की है। यह किताब एक स्पष्ट तर्क, तथा सत्य की ओर मार्गदर्शन और उम्मत के लिए दया है। अतः तुम अनर्गल बहाने मत बनाओ और झूठे कारणों का सहारा न लो। उससे बड़ा अत्याचारी कोई नहीं, जो अल्लाह की आयतों को झुठलाए और उनसे मुँह फेर ले। शीघ्र ही हम उन लोगों को कड़ी सज़ा देंगे जो हमारी आयतों से मुँह फेर लेते हैं, उन्हें उनके मुँह मोड़ने के बदले के तौर पर जहन्नम की आग में दाखिल करके।

Enam 6:158

ये झुठलाने वाले केवल इस बात की प्रतीक्षा कर रहे हैं कि मौत का फ़रिश्ता तथा उसके सहायक दुनिया में उनके प्राणों को निकालने के लिए उनके पास आ जाएँ, या आख़िरत में निर्णय के दिन आपका रब उनके बीच फैसला करने के लिए आ जाए, या क़ियामत का पता देने वाली तुम्हारे रब की कुछ निशानियाँ आ जाएँ। जिस दिन तुम्हारे रब की कोई निशानी आएगी (जैसे पश्चिम से सूरज का उगना) तो किसी काफ़िर को उसके ईमान लाने से कोई फायदा नहीं होगा, और न ही किसी मोमिन को, जिसने उससे पहले भलाई नहीं की, उसका अमल लाभ देगा। (ऐ रसूल!) आप इन झुठलाने वाले मुश्रिकों से कह दें : तुम इन चीज़ों में से एक की प्रतीक्षा करो, हम (भी) प्रतीक्षा करने वाले हैं।

Enam 6:159

जिन यहूदियों एवं ईसाइयों ने अपने धर्म के टुकड़े-टुकड़े कर लिए, चुनाँचे उन्होंने उसमें से कुछ को अपनाया और कुछ को छोड़ दिया तथा वे अलग-अलग संप्रदाय हो गए, उनसे (ऐ रसूल!) आपका कोई संबंध नहीं है। क्योंकि वे जिस पथभ्रष्टता में पड़े हुए हैं, आप उससे बरी हैं। आपका दायित्व केवल उन्हें सचेत करना है। उनका मामला तो अल्लाह ही के हवाले है। फिर वह क़ियामत के दिन उन्हें बताएगा कि वे दुनिया में क्या कर रहे थे और उन्हें उसपर बदला देगा।

Enam 6:160

जो मोमिन क़ियामत के दिन एक नेकी के साथ आएगा, अल्लाह उसकी एक नेकी को बढ़ाकर दस नेकियाँ कर देगा, परंतु जो एक पाप के साथ आएगा, उसे उसके पाप के समान ही सज़ा दी जाएगी, उससे ज़्यादा सज़ा नहीं दी जाएगी। तथा क़ियामत के दिन उनकी नेकियों का सवाब घटाकर, या उनके गुनाहों की सज़ा बढ़ाकर उनपर कोई अत्याचार नहीं किया जाएगा।

Enam 6:161

(ऐ रसूल!) इन झुठलाने वाले मुश्रिकों से कह दें : मेरे रब ने मुझे एक सीधे मार्ग पर निर्देशित किया है, जो उस धर्म का मार्ग है जो दुनिया और आख़िरत के हितों पर आधारित है, और यही इबराहीम अलैहिस्सलाम का धर्म है जो सत्य की ओर झुके हुए थे और कभी भी मुश्रिकों में से नहीं थे।

Enam 6:162

(ऐ रसूल!) आप कह दें : निश्चय ही मेरी नमाज़, मेरा अल्लाह के लिए तथा उसके नाम पर जानवर ज़बह करना, मेरा जीवन तथा मेरी मृत्यु, सब कुछ केवल सारी सृष्टि के पालनहार अल्लाह के लिए है, किसी और का इसमें कोई हिस्सा नहीं है।

Enam 6:163

उस महिमावान अल्लाह का कोई साझी नहीं और न ही उसके सिवा कोई सत्य पूज्य है। इसी बहुदेववाद से पवित्र तौहीद (एकेश्वरवाद) का अल्लाह ने मुझे आदेश दिया है। तथा मैं उसके सामने आत्मसमर्पण करने वाला इस उम्मत का सबसे पहला व्यक्ति हूँ।

Enam 6:164

(ऐ रसूल!) इन मुश्रिकों से कह दें : क्या मैं अल्लाह के अतिरिक्त कोई अन्य पालनहार तलाश करूँ, हालाँकि वह महिमावान हर चीज़ का पालनहार है?! वही उन पूज्यों का भी पालनहार है, जिनकी तुम उसके सिवा पूजा करते हो। तथा कोई निर्दोष व्यक्ति किसी दूसरे के गुनाह का बोझ नहीं उठाएगा। फिर क़ियामत के दिन तुम सब को केवल अपने पालनहार ही के पास लौटना है। तब वह तुम्हें धर्म के उन सारे विषयों के बारे में बताएगा, जिनको ले कर तुम मतभेद किया करते थे।

Enam 6:165

और अल्लाह ही है जिसने तुम्हें उन लोगों का उत्तराधिकारी बनाया जो धरती पर तुमसे पहले थे; ताकि तुम उसे आबाद करो। तथा उसने तुम में से कुछ को रचना और जीविका में दूसरों की अपेक्षा में ऊँचे दरजे प्रदान किए; ताकि जो कुछ उसने तुम्हें दिया है, उसमें तुम्हारी परीक्षा ले। निःसंदेह (ऐ रसूल!) आपका पालनहार बहुत शीघ्र दंड देने वाला है, क्योंकि हर आने वाली चीज़ क़रीब है। तथा वह अपने बंदों में से तौबा करने वाले को क्षमा करने वाला तथा उसपर दया करने वाला है।