Lafzullah

Hindi Mokhtasar — A'raf 7:1 – Tevbe 9:129

Author / source: Hindi Mokhtasar

Contents
  1. A'raf 7:1
  2. A'raf 7:2
  3. A'raf 7:3
  4. A'raf 7:4
  5. A'raf 7:5
  6. A'raf 7:6
  7. A'raf 7:7
  8. A'raf 7:8
  9. A'raf 7:9
  10. A'raf 7:10
  11. A'raf 7:11
  12. A'raf 7:12
  13. A'raf 7:13
  14. A'raf 7:14
  15. A'raf 7:15
  16. A'raf 7:16
  17. A'raf 7:17
  18. A'raf 7:18
  19. A'raf 7:19
  20. A'raf 7:20
  21. A'raf 7:21
  22. A'raf 7:22
  23. A'raf 7:23
  24. A'raf 7:24
  25. A'raf 7:25
  26. A'raf 7:26
  27. A'raf 7:27
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  29. A'raf 7:29
  30. A'raf 7:30
  31. A'raf 7:31
  32. A'raf 7:32
  33. A'raf 7:33
  34. A'raf 7:34
  35. A'raf 7:35
  36. A'raf 7:36
  37. A'raf 7:37
  38. A'raf 7:38
  39. A'raf 7:39
  40. A'raf 7:40
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  408. Tevbe 9:127
  409. Tevbe 9:128
  410. Tevbe 9:129

A'raf 7:1

(अलिफ़, लाम, मीम, साद) सूरतुल-बक़रा की शुरुआत में इस प्रकार के अक्षरों के बारे में बात गुज़र चुकी है।

A'raf 7:2

क़ुरआन-ए-करीम एक पुस्तक है, जिसे अल्लाह ने (ऐ रसूल!) आपपर उतारा है। अतः आपके सीने में उसके संबंध में कोई तंगी या संदेह न हो। अल्लाह ने इसे आपकी ओर इसलिए अवतरित किया है, ताकि आप उसके द्वारा लोगों को डराएँ और तर्क स्थापित करें, तथा उसके द्वारा ईमान वालों को नसीहत करें। क्योंकि वही लोग नसीहत से लाभान्वित होते हैं।

A'raf 7:3

(ऐ लोगो!) उस किताब का अनुसरण करो, जो तुम्हारे पालनहार ने तुमपर उतारी है, तथा अपने नबी की सुन्नत का पालन करो, और उन शैतानों या दुष्ट रब्बियों की इच्छाओं का पालन न करो, जिन्हें तुम अपने संरक्षक समझते हो, उनकी इच्छाएँ जो कुछ निर्देशित करती हैं उसकी ख़ातिर तुम उसे छोड़कर, जो तुमपर उतारा गया है, उनसे दोस्ती करते हो। दरअसल, तुम बहुत ही कम शिक्षा ग्रहण करते हो; क्योंकि यदि तुम शिक्षा ग्रहण करते, तो तुम सत्य पर उसके अलावा को तरजीह न देते, और अवश्य तुम उसका अनुसरण करते जो तुम्हारे रसूल लेकर आए हैं, तथा उसपर अमल करते और उसके सिवा अन्य चीज़ों को छोड़ देते।

A'raf 7:4

कितनी ही बस्तियाँ ऐसी हैं, जिन्हें हमने अपने अज़ाब से विनष्ट कर दिया, जब वे अपने इनकार तथा गुमराही पर अडिग रहीं। चुनाँचे उनपर हमारा गंभीर अज़ाब रात या दिन में उनकी ग़फ़लत के समय आ पहुँचा। फिर वे अपने आपसे अज़ाब को नहीं हटा सके, और न ही उसे उनसे उनके तथाकथित पूज्यों ने हटाया।

A'raf 7:5

फिर यातना के उतर जाने के बाद उनसे इसके सिवा कुछ न बन पड़ा कि उन्होंने अल्लाह का इनकार करके अपने ऊपर अत्याचार करने के अपराध को स्वीकार कर लिया।

A'raf 7:6

हम क़ियामत के दिन उन समुदायों से अवश्य पूछेंगे, जिनकी ओर हमने अपने रसूल भेजे थे कि उन्होंने रसूलों को क्या जवाब दिया, तथा हम उन रसूलों से भी उस संदेश को पहुँचाने के बारे में अवश्य पूछेंगे जिसके पहुँचाने का उन्हें आदेश दिया गया था, और इस बारे में कि उनके समुदायों ने उन्हें क्या जवाब दिया।

A'raf 7:7

फिर हम समस्त लोगों के सामने अपने पूर्ण ज्ञान के साथ उनके उन कामों का वर्णन करेंगे जो उन्होंने इस संसार में किए थे। क्योंकि हम उनके सब कामों से अवगत थे, उनमें से कोई भी चीज़ हमसे ओझल नहीं थी, तथा हम किसी भी समय उनसे ग़ायब नहीं थे।

A'raf 7:8

तथा क़ियामत के दिन कर्मों को न्याय (इंसाफ़) के साथ तौला जाएगा, जिसके साथ कोई अन्याय या अत्याचार नहीं होगा। फिर जिसकी नेकियों का पलड़ा उसके पापों के पलड़े से भारी हो गया, तो वही वे लोग हैं जो अपनी वांछित चीज़ को प्राप्त करने में सफल हो गए और उस चीज़ से बच गए जिसका उन्हें भय था।

A'raf 7:9

तथा जिसके पापों का पलड़ा उसकी नेकियों के पलड़े से भारी हो गया, तो यही लोग हैं जिन्होंने, अल्लाह की आयतों का इनकार करने के कारण, क़ियामत के दिन अपने आपको विनाश के घाट उतार कर खुद को घाटे में डाल दिया।

A'raf 7:10

(ऐ आदम की औलाद!) हमने धरती में तुम्हें अधिकार दिया और उसमें तुम्हारे लिए जीने के साधन बनाए। इसलिए तुम्हें इसपर अल्लाह का शुक्रिया अदा करना चाहिए था, लेकिन तुम बहुत कम शुक्र करते हो।

A'raf 7:11

(ऐ लोगो!) हमने तुम्हारे पिता आदम को बनाया, फिर हमने उसे सबसे अच्छा रूप और सबसे अच्छा आकार दिया, फिर हमने फ़रिश्तों को उसके सम्मान में सजदा करने का आदेश दिया। तो उन्होंने पालन किया और सजदा किया, सिवाय इबलीस के। उसने अहंकार और हठ करते हुए सजदा करने से इनकार कर दिया।

A'raf 7:12

अल्लाह ने इबलीस को फटकार लगाते हुए कहा : आदम को सजदा करने की मेरी आज्ञा का पालन करने से तुझे किस बात ने रोका? इबलीस ने अपने रब को जवाब देते हुए कहा : मुझे इस बात ने रोका कि मैं उससे बेहतर हूँ। क्योंकि तूने मुझे आग से पैदा किया और उसे मिट्टी से बनाया, और आग मिट्टी से अधिक प्रतिष्ठित है।

A'raf 7:13

अल्लाह ने उससे कहा : जन्नत से उतर जा। तुझे यहाँ अहंकार करने का अधिकार नहीं है; क्योंकि यह अच्छे तथा पवित्र लोगों का घर है। इसलिए तेरा इसमें रहना उचित नहीं है। निश्चय - ऐ इबलीस! - तू तुच्छ और अपमानित है, भले ही तू अपने आपको आदम से अधिक प्रतिष्ठित समझता हो।

A'raf 7:14

इबलीस ने कहा : ऐ मेरे पालनहार! मुझे पुणः जीवित किए जाने के दिन तक का समय दे, ताकि मैं उन लोगों को बहका सकूँ जिन्हें मैं बहका सकता हूँ।

A'raf 7:15

अल्लाह ने उससे कहा : निःसंदेह - ऐ इबलीस! - तू उन मोहलत दिए जाने वालों में से है, जिनकी मृत्यु सूर में प्रथम फूँक मारने के दिन लिखी गई है, जब सारी सृष्टि मर जाएगी, और केवल उनका स्रष्टा बाक़ी रहेगा।

A'raf 7:16

इबलीस ने कहा : इस कारण कि तूने मुझे गुमराह किया, कि मैंने आदम को सजदा करने के तेरे आदेश का पालन करना छोड़ दिया, मैं अवश्य ही आदम की संतान के लिए तेरे सीधे रास्ते पर बैठूँगा; ताकि मैं उन्हें उससे भटका दूँ और उन्हें पथभ्रष्ट कर दूँ, जिस तरह मैं उनके पिता आदम को सजदा करने से भटक गया।

A'raf 7:17

फिर मैं उनके पास हर तरफ़ से आख़िरत के प्रति अरुचि पैदा करने, दुनिया के प्रति रुचि पैदा करने, दिलों में संदेह डालने और इच्छाओं को सुसज्जित करने के साथ आऊँगा। तथा मैं उनके अंदर कुफ़्र की बात इस क़दर डालूँगा कि तू उनमें से अधिकतर लोगों को अपना आभारी नहीं पाएगा।

A'raf 7:18

अल्लाह ने उससे कहा : (ऐ इबलीस!) तू निंदित और अल्लाह की दया से धुत्कारा हुआ जन्नत से निकल जा। निश्चय मैं क़ियामत के दिन जहन्नम को तुझसे और हर उस व्यक्ति से अवश्य भर दूँगा जो तेरे पीछे चलेगा और तेरी बात मानेगा और अपने रब की आज्ञा का उल्लंघन करेगा।

A'raf 7:19

और अल्लाह ने आदम से कहा : ऐ आदम! तुम और तुम्हारी पत्नी हव्वा जन्नत में रहो। अतः उसमें जो अच्छी चीजें हैं, उनमें से जो चाहो खाओ, और इस पेड़ (एक पेड़ जिसे अल्लाह ने उनके लिए निर्दिष्ट किया) से मत खाओ। क्योंकि यदि तुम मेरे मना करने के बाद भी उसमें से कुछ खाओगे, तो तुम अल्लाह की सीमाओं का उल्लंघन करने वालों में से हो जाओगे।

A'raf 7:20

फिर इबलीस ने उन दोनों के मन में एक गुप्त बात डाली, ताकि उनके लिए प्रकट कर दे जो कुछ उनके गुप्तांगों में से उनसे छिपाया गया था। उसने उन दोनों से कहा : अल्लाह ने तुम दोनों को इस पेड़ से खाने से केवल इसलिए मना किया है कि कहीं तुम दोनों फ़रिश्ते न हो जाओ, अथवा जन्नत में हमेशा रहने वालों में से न हो जाओ।

A'raf 7:21

तथा उसने उन दोनों से अल्लाह की क़सम खाकर कहा : निश्चय (ऐ आदम और हव्वा!) मैंने तुम दोनों से जो बात कही है, उसमें मैं तुम्हारा शुभचिंतक हूँ।

A'raf 7:22

इस तरह उसने उन दोनों को धोखे से उस स्थान से नीचे उतार लिया, जहाँ वे थे। चुनाँचे जब उन दोनों ने उस पेड़ से खाया, जिसमें से उन्हें खाने से मना किया गया था, तो उनके लिए उनके गुप्तांग प्रकट हो गए और दोनों अपने गुप्तांगों को ढकने के लिए अपने आपपर जन्नत के पत्ते चिपकाने लगे। तथा उनके रब ने उन्हें यह कहते हुए आवाज़ दी : क्या मैंने तुम दोनों को इस पेड़ से खाने के लिए मना नहीं किया था और तुम्हें सावधान करते हुए नहीं कहा था : निःसंदेह शैतान तुम्हारा खुला दुश्मन है?!

A'raf 7:23

आदम और हव्वा ने कहा : ऐ हमारे रब! जो तूने हमें पेड़ से खाने से मना किया था उसका इर्तिकाब करके हमने अपने आप पर अत्याचार किया है। यदि तूने हमारे पापों को क्षमा नहीं किया और अपनी दयालुता से हमपर दया नहीं की, तो निश्चय हम दुनिया एवं आख़िरत में अपना भाग्य खोकर घाटा उठाने वालों में से हो जाएँगे।

A'raf 7:24

अल्लाह ने आदम, हव्वा और इबलीस से कहा : जन्नत से पृथ्वी पर उतरो, तुम एक-दूसरे के दुश्मन होगे। तथा तुम्हारे लिए एक ज्ञात समय तक पृथ्वी पर ठहरने का स्थान और एक निर्धारित अवधि के लिए उसमें जो कुछ है उससे लाभ उठाने का अवसर है।

A'raf 7:25

अल्लाह ने आदम, हव्वा तथा उनकी संतान को संबोधित करते हुए कहा : तुम इसी धरती में उस अवधि तक जीवित रहोगे जो अल्लाह ने तुम्हारे लिए निर्धारित की है, तथा इसी में मरोगे और दफ़न किए जाओगे, और अपनी क़ब्रों ही से क़ियामत (महा प्रलय) के लिए निकाले जाओगे।

A'raf 7:26

ऐ आदम की संतान! हमने तुम्हारे लिए तुम्हारे गुप्तांगों को ढकने के लिए एक आवश्यक वस्त्र बनाया है, तथा हमने तुम्हारे लिए एक विलासिता का वस्त्र बनाया है, जिससे तुम लोगों के बीच अपने आपको सुशोभित करते हो। तथा तक़्वा (अर्थात् अल्लाह के आदेशों का पालन करने और उसके निषेधों से बचने) का पोशाक, इस संवेदी पोशाक से बेहतर है। यह उपर्युक्त वस्त्र अल्लाह की उन निशानियों में से है जो उसकी शक्ति को इंगित करने वाली है। ताकि तुम अपने ऊपर अल्लाह कि नेमतों को याद करो और उनका शुक्र अदा करो।

A'raf 7:27

ऐ आदम की संतान! शैतान तुम्हारे लिए, गुप्त अंगों को ढकने के लिए संवेदी वस्त्र को त्यागने या तक़्वा (धर्मपरायणता) की पोशाक को त्यागने की अवज्ञा को सुशोभित करके तुम्हें हरगिज़ धोखे में न डाले। क्योंकि उसने तुम्हारे माता-पिता को पेड़ से खाने को सुसज्जित करके धोखा दिया था, यहाँ तक कि उसका परिणाम यह हुआ कि उसने उन्हें जन्नत से निकाल दिया और उनके लिए उनके गुप्तांग प्रकट हो गए। निःसंदेह शैतान और उसका वंश तुम्हें देखते हैं, लेकिन तुम उन्हें नहीं देखते। अतः तुम्हें उससे और उसके वंश से सावधान रहना होगा। हमने शैतानों को ऐसे लोगों का मित्र बना दिया है, जो अल्लाह पर ईमान नहीं रखते। रहे ईमान वाले, जो अच्छे कर्म करते हैं, तो उनपर उन (शैतानों) का कोई रास्ता नहीं है।

A'raf 7:28

और जब मुश्रिक लोग कोई अति घृणित काम करते हैं, जैसे शिर्क तथा निर्वस्त्र होकर काबा का तवाफ़ करना आदि, तो वे यह बहाना पेश करते हैं कि उन्होंने अपने बाप-दादा को ऐसा करते पाया है और यह कि अल्लाह ने उन्हें ऐसा करने का आदेश दिया है। (ऐ मुहम्मद!) आप उनके जवाब में कह दें : अल्लाह गुनाहों का आदेश नहीं देता, बल्कि वह उनसे मना करता है। तो फिर तुम अल्लाह पर कैसे इसका दावा करते हो? क्या (ऐ मुश्रिको!) तुम झूठ बोलते हुए और झूठा आरोप लगाते हुए अल्लाह के बारे में ऐसी बात कहते हो, जो तुम नहीं जानते?!

A'raf 7:29

(ऐ मुहम्मद!) इन मुश्रिकों से कह दें : अल्लाह ने न्याय का आदेश दिया है, अश्लीलता और बुराई का आदेश नहीं दिया है। तथा उसने आदेश दिया है कि तुम इबादत को सामान्य रूप से और विशेष रूप से मस्जिदों में उसी के लिए ख़ालिस करो, और यह कि तुम केवल उसे ही पुकारो आज्ञाकारिता को उसी के लिए विशिष्ट करते हुए। जिस तरह उसने तुम्हें पहली बार अनस्तित्व से पैदा किया, उसी तरह वह तुम्हें दोबारा जीवित करेगा। क्योंकि जो तुम्हें पहली बार पैदा करने में सक्षम है, वह तुम्हें वापस लौटाने और तुम्हें पुनर्जीवित करने में भी सक्षम है।

A'raf 7:30

अल्लाह ने लोगों के दो समूह बनाए हैं : तुममें से एक समूह को उसने सीधी राह दिखाई, उसके लिए मार्गदर्शन के कारणों को आसान बनाया और उसकी बाधाओं को दूर कर दिया, जबकि दूसरे समूह पर सच्चाई के मार्ग से भटकना अनिवार्य (सिद्ध) हो चुका है।क्योंकि उन्होंने अल्लाह को छोड़कर शैतानों को दोस्त बना लिया, और अज्ञानता में उनका पालन किया, हालाँकि वे यह समझते हैं कि वे सीधे रास्ते पर चल रहे हैं।

A'raf 7:31

ऐ आदम की संतान! नमाज़ तथा तवाफ़ के समय ऐसा साफ़-सुथरा एवं पवित्र वस्त्र पहनो, जो तुम्हारे गुप्तांगों को छिपाए और तुम्हें सुंदरता प्रदान करे। तथा अल्लाह की हलाल की हुई पाक चीज़ों में से जो चाहो खाओ और पियो, परंतु संतुलन की सीमा को पार न करो एवं हलाल से हराम की ओर न जाओ। निश्चय ही अल्लाह संतुलन की सीमा को पार करने वालों को पसंद नहीं करता।

A'raf 7:32

(ऐ रसूल!) जो मुश्रिक अल्लाह के हलाल किए हुए वस्त्र और अच्छे भोजन और अन्य चीजों को हराम ठहराते हैं, उनका खंडन करते हुए कह दें : तुम्हारे लिए उस वस्त्र को किसने हराम किया है, जो तुम्हारी शोभा है? तथा खाने-पीने आदि की अच्छी चीज़ों को तुम्हारे लिए किसने हराम किया है, जो अल्लाह ने तुम्हें प्रदान की हैं? (ऐ रसूल!) आप कह दें : ये अच्छी चीज़ें दुनिया के जीवन में ईमान वालों के लिए हैं, और अगर दूसरे लोग (भी) इस दुनिया में उन्हें साझा करते हैं, परंतु क़ियामत के दिन ये केवल मोमिनों के लिए विशिष्ट होंगी, कोई काफिर इसमें उनके साथ साझी नहीं होगा; क्योंकि जन्नत काफ़िरों पर हराम कर दी गई है। इसी विवरण की तरह, हम उन लोगों के लिए आयतों का विवरण करते हैं जो समझते हैं; क्योंकि वही इनसे लाभ उठाते हैं।

A'raf 7:33

(ऐ रसूल!) आप अल्लाह की हलाल की हुई वस्तुओं को हराम ठहराने वाले इन मुश्रिकों से कह दें : अल्लाह ने तो अपने बंदों पर केवल अनैतिक कार्यों, अर्थात् घृणित पापों को हराम किया है, चाहे वे प्रत्यक्ष हों या छिपे हुए, तथा सभी अवज्ञाओं, और लोगों पर उनके खून, धन तथा सम्मान (सतीत्व) के संबंध में अन्यायपूर्ण तरीके से ज़्यादती करने को हराम किया है। इसी तरह उसने तुम्हारे लिए बिना किसी प्रमाण के किसी को अल्लाह का साझी ठहराने एवं बिना ज्ञान के उसके नामों, गुणों, कार्यों तथा उसकी शरीयत के संबंध में बात करने को हराम क़रार दिया है।

A'raf 7:34

हर पीढ़ी के लिए उनकी समय सीमा के लिए एक निर्धारित अवधि और समय है। जब उनका नियत समय आ जाता है, तो वे कुछ समय के लिए भी, भले ही वह थोड़ा-सा क्यों न हो, न उससे पीछे हटते हैं और न उससे आगे बढ़ते हैं।

A'raf 7:35

ऐ आदम की संतान! यदि तुम्हारे पास तुम्हारी ही जातियों में से मेरे कुछ रसूल आएँ, जो तुम्हें वह किताबें पढ़कर सुनाएँ, जो मैंने उनपर उतारी है, तो उनकी बात मानो और जो कुछ वे लेकर आए हैं उसका पालन करो। अतः जो लोग अल्लाह के आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर, उससे डरते हैं और अपने कामों को सुधार लेते हैं, उन्हें क़ियामत के दिन कोई भय नहीं होगा, और न ही वे दुनिया के छूटे हुए सुख और आनंद पर शोक करेंगे।

A'raf 7:36

जहाँ तक उन काफ़िरों की बात है, जिन्होंने हमारी आयतों को झुठलाया और उन पर ईमान नहीं लाए, तथा जो कुछ उनके रसूल उनके पास लाए थे, अहंकार करते हुए उसपर अमल नहीं किया, तो वही आग (जहन्नम) वाले हैं जो हमेशा उसी में रहने वाले हैं।

A'raf 7:37

उससे बड़ा अत्याचारी कोई नहीं है, जो अल्लाह पर झूठा आरोप लगाते हुऐ किसी को उसका साझी ठहराए, या उसकी ओर कमी की निस्बत करे, या उसके बारे में ऐसी बात कहे जो उसने नहीं कही है, या उसकी सीधे रास्ते की ओर मार्गदर्शन करने वाली स्पष्ट आयतों को झुठलाए। उक्त गुणों से विशेषित इन लोगों को उनका वह हिस्सा मिलेगा, जो लौहे महफूज़ में उनके लिए अच्छा या बुरा हिस्सा लिखा गया है। यहाँ तक कि जब मौत का फ़रिश्ता और उसके सहयोगी फरिश्ते उनके प्राण निकालने के लिए उनके पास आएँगे, तो उन्हें फटकार लगाते हुए उनसे कहेंगे : कहाँ हैं वे पूज्य जिनकी तुम अल्लाह के अलावा पूजा करते थे?! उन्हें पुकारो कि वे तुम्हें लाभ पहुँचाएँ। मुश्रिक लोग फरिश्तों से कहेंगे : जिन पूज्यों की हम पूजा करते थे वे हमसे लुप्त हो गए, इसलिए हम नहीं जानते कि वे कहाँ हैं। तथा वे अपने आप स्वीकार करेंगे कि वे काफ़िर थे, लेकिन उस समय उनकी स्वीकृति उनके विरुद्ध एक तर्क होगी और इससे उन्हें कोई लाभ नहीं होगा।

A'raf 7:38

फ़रिश्ते उनसे कहेंगे : (ऐ मुश्रिको!) जिन्नों और इनसानों में से जो जातियाँ तुमसे पहले कुफ़्र तथा गुमराही पर गुज़र चुकी हैं, उनके साथ जहन्नम में प्रवेश कर जाओ। जब भी कोई जाति प्रवेश करेगी अपने से पहले आग में आने वाली जाति पर लानत करेगी। यहाँ तक कि जब वे सभी उसमें एकत्र हो जाएँगे, तो उनमें से अंतिम में प्रवेश करने वाले, जो कि दीन और अनुयायी लोग होंगे, उनमें से सबसे पहले प्रवेश करने वाले प्रमुखों तथा सरदारों के बारे में कहेंगे : ऐ हमारे पालनहार! यही बड़े लोग हैं जिन्होंने हमें मार्गदर्शन के रास्ते से भटका दिया था, इसलिए उन्हें हमारे लिए पथभ्रष्टता को अलंकृत करने के लिए दोहरी सज़ा दे। अल्लाह उनके जवाब में कहेगा : तुममें से हर समूह के लिए दोहरा दंड है, लेकिन तुम उससे अनजान हो और तुम्हें उसका एहसास नहीं।

A'raf 7:39

तथा अनुसरण किए गए सरदार अपने अनुयायियों से कहेंगे : (ऐ अनुयायियो!) तुम्हें हमपर कोई श्रेष्ठता प्राप्त नहीं है कि जिसके कारण तुम इस बात के पात्र हो कि तुम्हारी यातना कम कर दी जाए। क्योंकि यहाँ केवल तुम्हारे किए हुए कर्मों का एतिबार है, और असत्य का पालन करने के लिए तुम्हारे पास कोई बहाना नहीं है। अतः हमारी तरह (ऐ अनुयायियो!) तुम भी यातना का मज़ा चखो, उस कुफ़्र और पापों के कारण, जो तुम किया करते थे।

A'raf 7:40

जिन लोगों ने हमारी स्पष्ट आयतों को झुठलाया और अहंकार करते हुए उन्हें मानने और उनके अधीन होने से इनकार कर दिया, वे हर प्रकार की भलाई से निराश हैं। उनके कुफ़्र के कारण उनके कार्यों के लिए आसमान के द्वार नहीं खोले जाएँगे, न ही उनकी आत्माओं के लिए जब वे मर जाएँगे। तथा वे कभी भी जन्नत में प्रवेश नहीं करेंगे जब तक कि ऊँट - जो सबसे बड़े जानवरों में से एक है - सुई के छेद में प्रवेश न कर जाए, जो कि सबसे संकीर्ण चीज़ों में से है। और यह असंभव है। इसलिए जो चीज़ इसपर लंबित है यानी उनका जन्नत में प्रवेश करना, वह भी असंभव है। इसी बदले के समान अल्लाह उन लोगों को बदला देता है जिनके पाप बहुत बड़े हैं।

A'raf 7:41

इन अहंकारी झुठलाने वालों के लिए जहन्नम ही का बिछौना होगा और उनके ऊपर आग के ओढ़ने (कंबल) होंगे। इसी तरह का बदला हम उन लोगों को देते हैं, जो अल्लाह का इनकार करके और उससे मुँह मोड़कर उसकी सीमाओं का उल्लंघन करने वाले हैं।

A'raf 7:42

और जो लोग अपने रब पर ईमान लाए और जितना हो सका अच्छे कर्म किए - और अल्लाह किसी आत्मा पर उसकी क्षमता से अधिक बोझ नहीं डालता - वही जन्नत वाले हैं, जो उसमें प्रवेश करके हमेशा के लिए उसी में रहेंगे।

A'raf 7:43

जन्नत में उनके आनंद की पूर्णता में से एक यह है कि अल्लाह उनके दिलों में जो भी द्वेष और ईर्ष्या होगी निकालकर दूर कर देगा और उनके नीचे से नहरें जारी कर देगा। तथा वे अपने ऊपर अल्लाह की नेमतों को स्वीकार करते हुए कहेंगे : हर प्रकार की स्तुति अल्लाह के लिए है, जिसने हमें इस नेक कार्य की तौफ़ीक़ दी जिसके कारण हमें यह स्थान प्राप्त हुआ। तथा हम अपने दम पर इसमें सफल नहीं हो सकते थे, यदि ऐसा न होता कि अल्लाह ने हमें उसकी ओर मार्गदर्शन किया। निश्चय हमारे रब के रसूल निर्विवाद सत्य तथा वा'दे और वईद (धमकी) में सच्चाई के साथ आए, और एक पुकारने वाला उनके बीच पुकारकर कहेगा : यही वही जन्नत है जिसके बारे में मेरे रसूलों ने तुम्हें दुनिया में बताया था। यह जन्नत अल्लाह ने तुम्हें उन नेक कामों के बदले में दी है जो तुम करते थे, जिनसे तुम अल्लाह की प्रसन्नता चाहते थे।

A'raf 7:44

जब जन्नत वाले जन्नत में और जहन्नम वाले जहन्नम में चले जाएँगे, तो जन्नत के निवासी जहन्नम वालों को आवाज़ देंगे : हमारे रब ने हमसे जिस जन्नत का वादा किया था, निश्चय हमने उसे सच्चा व सिद्ध पाया और हम उसमें प्रवेश पा चुके हैं। तो क्या (ऐ काफ़िरों!) अल्लाह ने तुम्हें जिस जहन्नम की धमकी दी थी तुमने उसको सच्चा व सिद्ध पाया? काफिर कहेंगे : वास्तव में, हमने भी उसे सच्चा पाया जो उसने हमें जहन्नम की धमकी दी थी। फिर एक आवाज़ देने वाला अल्लाह से दुआ करते हुए आवाज़ देगा कि अल्लाह ज़ालिमों को अपनी दया से दूर कर दे। क्योंकि उसने दुनिया के जीवन में उनके लिए अपनी दया के द्वार खोल दिए, परंतु उन्होंने उससे मुँह फेर लिया।

A'raf 7:45

ये ज़ालिम वही हैं, जो खुद भी अल्लाह की राह से दूर रहते थे और दूसरों को भी उससे दूर कर रहे थे, और आशा करते थे कि सत्य का रास्ता टेढ़ा हो जाए, ताकि लोग उसपर न चलें, तथा ये लोग आख़िरत का इनकार करने वाले हैं, उसके लिए तैयारी करने वाले नहीं हैं।

A'raf 7:46

इन दो समूहों : जन्नत के निवासियों तथा दोज़ख के निवासियों के बीच एक ऊँची आड़ होगी, जिसका नाम 'आराफ़' है, और इस ऊँची आड़ पर वे लोग होंगे जिनके अच्छे और बुरे कर्म बराबर होंगे। वे जन्नतियों को उनके लक्षणों, जैसे कि उनके चेहरे की सफेदी से, तथा जहन्नमियों को उनके लक्षणों, जैसे कि उनके चेहरों के कालेपन से पहचान लेंगे। ये लोग जन्नत वालों को उनके सम्मान में आवाज़ देकर कहेंगे : "तुम पर शांति हो"। 'आराफ़' वाले अभी जन्नत में दाखिल नहीं हुए होंगे और वे अल्लाह की दया से उसमें प्रवेश करने की आशा रखते होंगे।

A'raf 7:47

और जब 'आराफ़' वालों की निगाहें आग वालों की ओर फेरी जाएँगी और वे उनकी गंभीर यातना को देखेंगे, तो अल्लाह से प्रार्थना करते हुए कहेंगे : ऐ हमारे रब! हमें कुफ़्र एवं शिर्क करने वाले इन ज़ालिमों के साथ मत कर।

A'raf 7:48

और 'आराफ़' वाले काफ़िरों में से कुछ नरकवासी लोगों को, जिन्हें वे उनके लक्षणों, जैसे कि उनके चेहरे के कालेपन और उनकी आँखों के नीलेपन से पहचानते होंगे, आवाज़ देकर कहेंगे : तुम्हारा धन और संख्या में बहुत अधिक होना तुम्हारे कुछ काम न आया, और न ही अभिमान और अहंकार में तुम्हारे सत्य से मुँह फेर लेने से तुम्हें कुछ फायदा हुआ।

A'raf 7:49

और अल्लाह काफ़िरों को फटकार लगाते हुए कहेगा : क्या ये वही लोग हैं, जिनके बारे में तुमने क़सम खाई थी कि अल्लाह उन्हें अपने पास से कोई दया प्रदान नहीं करेगा?! तथा अल्लाह मोमिनों से कहेगा : (ऐ मोमिनो!) जन्नत में प्रवेश कर जाओ। न तुम्हें आगे कोई डर है और न ही तुम दुनिया के छूटे हुए आनंद पर शोक करोगे; क्योंकि तुम्हें शाश्वत आनंद प्राप्त हो चुका है।

A'raf 7:50

नरक वाले जन्नत के निवासियों को आवाज़ देकर उनसे याचना करते हुए कहेंगे : (ऐ जन्नत वालो!) हमपर थोड़ा-सा पानी बहा दो, अथवा उस खाने में से कुछ (दे दो) जो अल्लाह ने तुम्हें प्रदान किया है। जन्नत वाले जवाब देंगे : अल्लाह ने ये दोनों चीज़ें काफ़िरों पर उनके कुफ़्र के कारण हराम कर दी हैं और हम उस चीज़ के साथ तुम्हारी कदापि मदद नहीं करेंगे जो अल्लाह ने तुमपर हराम कर दी है।

A'raf 7:51

ये काफ़िर वही लोग हैं, जिन्होंने अपने धर्म को उपहास और मनोरंजन बना लिया और दुनिया के जीवन ने उन्हें अपने अलंकरण और शोभा से धोखे में डाल दिया। इसलिए क़ियामत के दिन अल्लाह उन्हें भुला देगा और उन्हें यातना भुगतने के लिए छोड़ देगा, जिस तरह वे क़ियामत के दिन की भेंट को भूल गए थे। जिसके कारण उन्होंने इसके लिए काम नहीं किया और तैयारी नहीं की। और इसलिए भी कि वे अल्लाह के तर्कों और प्रमाणों को नकारते तथा यह जानने के बावजूद कि वह सत्य है उसका इनकार करते थे।

A'raf 7:52

निश्चय हम उनके पास यह क़ुरआन लाए हैं, जो मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर उतारी गई एक किताब है। हमने उसे अपने ज्ञान के आधार पर स्पष्ट रूप से बयान किया है। यह किताब मोमिनों को धार्मिकता और सच्चाई के मार्ग पर ले जाने वाली है, तथा उनके लिए एक दया है क्योंकि इसमें दुनिया और आख़िरत की भलाई के बारे में मार्गदर्शन मौजूद है।

A'raf 7:53

काफ़िर लोग केवल उस दर्दनाक यातना के आने की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जिसके बारे में उन्हें बताया गया है और जो आख़िरत में उनका अंजाम होने वाले है। जिस दिन वह यातना आ जाएगी जिसके बारे में उन्हें बताया गया है और वह प्रतिफल भी सामने आ जाएगा जिसके बारे में ईमान वालों को बताया गया है, तो वे लोग जिन्होंने इस दुनिया में क़ुरआन को भुला दिया और उसके निर्देशों के अनुसार काम नहीं किया, कहेंगे : निश्चय हमारे रब के रसूल उस सच्चाई के साथ आए थे जिसमें कोई संदेह नहीं, और इसमें कोई संदेह नहीं कि यह अल्लाह की ओर से है। तो काश! हमारे लिए कोई मध्यस्थ होते जो हमारे लिए अल्लाह के पास सिफ़ारिश करते कि वह हमें यातना से मुक्त कर दे, या काश! हम दुनिया के जीवन में वापस भेज दिए जाते ताकि हम उन बुरे कामों के बजाय जो हम किया करते थे, अच्छे कर्म करके मोक्ष प्राप्त कर लेते। इन काफ़िरों ने अपने कुफ़्र के कारण अपने आपको विनाश के संसाधनों पर लाकर खुद को घाटे में डाल दिया, और जिनकी वे अल्लाह को छोड़कर पूजा करते थे, वे उनसे लुप्त हो गए, इसलिए वे उनके कुछ भी काम न आए।

A'raf 7:54

निःसंदेह (ऐ लोगो!) तुम्हारा रब वह अल्लाह है, जिसने आकाशों तथा धरती को बिना किसी पूर्व उदाहरण के छः दिनों में बनाया। फिर वह सर्वशक्तिमान अपनी महिमा के अनुरूप अर्श पर बुलंद हुआ, जिसकी कैफ़ियत (विवरण) हम नहीं जानते। वह दिन के उजाले से रात के अँधेरे को और रात के अँधेरे से दिन के उजाले को दूर करता है। रात और दिन में से प्रत्येक दूसरे के पीछे इस तरह तेज़ी से पहुँच जाता है कि उससे विलंब नहीं होता। एक गया कि दूसरा आ गया। तथा उस महिमावान ने सूरज बनाया, चाँद बनाया और सितारे बनाए, इस हाल में कि वे उसके आदेश के अधीन किए हुए हैं। सुन लो! सारी चीज़ों का पैदा करना केवल अल्लाह ही का काम है, तो क्या उसके अलावा भी कोई पैदा करने वाला है?! तथा केवल उसी का काम है आदेश देना। उसकी भलाई महान और उसका उपकार बहुत अधिक है। क्योंकि वह ऐश्वर्य और पूर्णता के गुणों से विशेषित है, जो सारे संसारों का पालनहार है।

A'raf 7:55

(ऐ ईमान वालो!) अपने रब को पूरी विनम्रता के साथ और गुप्त रूप से पुकारो, निष्ठावान होकर केवल उसी से दुआ करो, दिखावा करने वाले या दुआ में उसके साथ किसी को साझी करने वाले न हो। निःसंदेह वह उन लोगों को पसंद नहीं करता, जो दुआ में उसकी सीमाओं का उल्लंघन करने वाले हैं, और दुआ में उसकी सीमाओं का सबसे बड़ा उल्लंघन उसके साथ किसी अन्य को पुकारना है, जैसा कि बहुदेववादी करते हैं।

A'raf 7:56

तथा पाप करके धरती में बिगाड़ न फैलाओ, जबकि अल्लाह ने रसूलों को भेजकर और उसे केवल अपनी आज्ञाकारिता के साथ आबाद करके उसे सुधारा है। और केवल अल्लाह को पुकारो, उसकी सज़ा से डर महसूस करते हुए, और उसके प्रतिफल के प्राप्त होने की प्रतीक्षा करते हुए। निःसंदेह अल्लाह की दया अच्छे कर्म करने वालों के क़रीब है, अतः तुम भी उन्हीं में शामिल हो जाओ।

A'raf 7:57

और अल्लाह ही है जो बारिश की शुभ सूचना देने वाली हवाओं को भेजता है, यहाँ तक कि जब हवाएँ पानी से लदे बादल को उठाती हैं, तो हम बादल को किसी बंजर भूमि की ओर ले जाते हैं। फिर हम उस भूमि पर पानी बरसाते हैं। फिर पानी से सभी प्रकार के कुछ फल पैदा करते हैं। इस रूप से फल को निकालने के समान ही, हम मृतकों को उनकी कब्रों से जीवित करके निकालेंगे। हमने ऐसा इस आशा में किया है कि (ऐ लोगो!) तुम अल्लाह की शक्ति और उसके अद्भुत कार्य को याद रखो, और यह कि वह मरे हुओं को पुनर्जीवित करने में सक्षम है।

A'raf 7:58

अच्छी भूमि अल्लाह की अनुमति से अपने पौधे अच्छे और पूर्ण रूप से निकालती है। यही हाल ईमान वाले का है, वह उपदेश को सुनता और उससे लाभ उठाता है, जिसके परिणामस्वरूप वह अच्छे कार्य करता है। जबकि दलदली और खारी भूमि अपना पौधा कठिनाई से निकालती है, जिसमें कोई अच्छाई नहीं होती। यही हाल काफ़िर का है, वह उपदेशों से लाभ नहीं उठाता है, इसलिए उसके परिणामस्वरूप वह नेक कार्य नहीं करता है, जिससे उसे लाभ प्राप्त हो। इस अद्भुत विविधीकरण की तरह, हम उन लोगों के लिए सत्य को साबित करने के लिए प्रमाणों और तर्कों में विविधता लाते हैं, जो अल्लाह की नेमतों का शुक्रिया अदा करते हैं। इसलिए वे उनकी नाशुक्री नहीं करते हैं, और अपने रब की आज्ञा का पालन करते हैं।

A'raf 7:59

निःसंदेह हमने नूह को उनकी जाति की ओर रसूल बनाकर भेजा, जो उन्हें अल्लाह को एकमात्र पूज्य मानने और उसके अलावा की पूजा छोड़ने के लिए बुला रहे थे। चुनाँचे उन्होंने अपनी जाति से कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! केवल अल्लाह की इबादत करो, क्योंकि उसके सिवा तुम्हारा कोई सत्य पूज्य नहीं है। निश्चय मुझे तुमपर एक महान दिन की यातना का डर है, यदि तुम अपने कुफ़्र पर अड़े रहे।

A'raf 7:60

उनकी जाति के सरदारों और प्रमुखों ने उनसे कहा : निःसंदेह (ऐ नूह!) हम तुम्हें सत्य से स्पष्ट दूरी पर देख रहे हैं।

A'raf 7:61

नूह ने अपनी जाति के प्रमुखों से कहा : जैसा तुम कहते हो, मैं पथभ्रष्ट नहीं हूँ। मैं तो अपने रब की ओर से मार्गदर्शन पर हूँ। क्योंकि मैं उस अल्लाह की ओर से तुम्हारी ओर भेजा हुआ (रसूल) हूँ, जो मेरा रब, तुम्हारा रब और सारे संसारों का रब है।

A'raf 7:62

अल्लाह ने मेरी ओर जो वह़्य की है, उसमें से जिसके साथ अल्लाह ने मुझे तुम्हारी ओर भेजा है, उसे मैं तुम्हें पहुँचाता हूँ। तथा तुम्हें अल्लाह के आदेश का पालन करने और उसपर निष्कर्षित होने वाले प्रतिफल के लिए प्रोत्साहित करके, तथा तुम्हें उसके निषेधों को करने और उसपर निष्कर्षित होने वाले दंड से भयभीत करके, मैं तुम्हारा भला चाहता हूँ। और मैं सर्वशक्तिमान अल्लाह की ओर से वह (बातें) जानता हूँ जो तुम नहीं जानते, जो उसने मुझे वह़्य के माध्यम से सिखाया है।

A'raf 7:63

क्या यह बात तुम्हारे आश्चर्य और विस्मय का कारण है कि तुम्हारे पास तुम्हारे रब की ओर से वह़्य तथा उपदेश तुममें से एक ऐसे व्यक्ति द्वारा आया, जिसे तुम पहचानते हो?! क्योंकि वह तुम्हारे ही बीच पला-बढ़ा, और वह न तो झूठा था, न पथभ्रष्ट था, न ही किसी अन्य जाति का था। वह तुम्हारे पास तुम्हें अल्लाह की सज़ा से डराने के लिए आया था, यदि तुमने झुठलाया और अवज्ञा किया, और ताकि तुम अल्लाह के आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर, उससे डरो, तथा इस आशा में कि तुम पर दया की जाए, अगर तुम उसपर ईमान ले आओ।

A'raf 7:64

परंतु उनकी क़ौम ने उन्हें झुठला दिया और उनपर ईमान न लाए, बल्कि अपने कुफ़्र पर बने रहे। इसलिए नूह अलैहिस्सलाम ने उनपर बद्दुआ की कि अल्लाह उन्हें विनष्ट कर दे। अतः हमने उन्हें और उनके साथ नाव में सवार मोमिनों को डूबने से बचा लिया और उन लोगों को, जिन्होंने हमारी आयतों को झुठलाया और अपने झुठलाने की रीति पर बने रहे, उनके लिए दंड के रूप में उतरने वाले तूफ़ान (बाढ़) में डुबोकर नष्ट कर दिया। निश्चय उनके हृदय सत्य से अंधे थे।

A'raf 7:65

और हमने आद के गोत्र की ओर उन्ही में से एक व्यक्ति हूद - अलैहिस्सलाम - को रसूल बनाकर भेजा। उन्होंने कहा : ऐ मेरी क़ौम के लोगो! केवल अल्लाह की इबादत करो। क्योंकि उसके सिवा तुम्हारा कोई सत्य पूज्य नहीं। तो क्या तुम उसके आदेशों का पालन करके तथा उसके निषेधों से बचकर, उससे नहीं डरते, ताकि तुम उसकी यातना से बच जाओ?!

A'raf 7:66

उनकी जाति के प्रमुख तथा सरदार, जिन्होंने अल्लाह का इनकार किया और उसके रसूल को झुठलाया था, कहने लगे : निश्चय हम जानते हैं कि (ऐ हूद!) तुम मंदबुद्धिता और मूर्खता से ग्रस्त हो, जब तुम हमें अकेले अल्लाह की इबादत करने और मूर्तिपूजा को त्यागने के लिए आमंत्रित करते हो। तथा हमारा निश्चित रूप से मानना है कि तुम अपने रसूल होने के दावे में बिलकुल झूठे हो।

A'raf 7:67

हूद ने अपनी क़ौम को उत्तर देते हुए कहा : ऐ मेरी क़ौम के लोगो! मेरे अंदर कोई मंदबुद्धिता और मूर्खता नहीं है। बल्कि मैं सारे संसारों के पालनहार की ओर से भेजा हुआ (दूत) हूँ।

A'raf 7:68

मैं तुम्हें अल्लाह की वह तौहीद (एकेश्वरवाद) और उसकी शरीयत पहुँचाता हूँ, जिसका उसने मुझे तुमको पहुँचाने का आदेश दिया है, तथा जो मुझे पहुँचाने का आदेश दिया गया है, उसमें मैं तुम्हारा विश्वस्त हितैषी हूँ, न तो उसमें कुछ वृद्धि करता हूँ और न ही उसमें कमी करता हूँ।

A'raf 7:69

क्या तुम्हें इस बात पर आश्चर्य हो रहा है कि तुम्हारे पास तुम्हारे पालनहार की ओर से एक ऐसे व्यक्ति के माध्यम से सदुपदेश आया जो तुम्हारी ही जाति में से है, फ़रिश्तों या जिन्नो की जाति से नहीं है, ताकि वह तुम्हें सचेत करे?! तुम अपने पालनहार की स्तुति करो और उसका शुक्र अदा करो कि उसने तुम्हें धरती में प्रभुत्व प्रदान किया और तुम्हें नूह की जाति का उत्तराधिकारी बनाया, जिन्हें अल्लाह ने उनके कुफ़्र के कारण नष्ट कर दिया था। तथा अल्लाह का शुक्र अदा करो कि उसने तुम्हें भारी-भरकम डील-डौल और शक्ति-बल प्रदान की, और अपने ऊपर अल्लाह की विशाल नेमतों को याद करो, इस आशा में कि तुम अपनी वांछित चीज़ को प्राप्त कर सको और उस चीज़ से बच सको जिससे तुम डरते हो।

A'raf 7:70

उनकी जाति के लोगों ने उनसे कहा : (ऐ हूद!) क्या तुम हमारे पास इसलिए आए हो कि हमें अकेले अल्लाह की इबादत का आदेश दो, और ताकि हम उन्हें छोड़ दें जिनकी पूजा हमारे बाप-दादा करते थे?! तो हमपर वह अज़ाब ले आओ जिसकी तुम हमें धमकी देते हो, यदि तुम अपने दावे में सच्चे हो।

A'raf 7:71

हूद अलैहिस्सलाम ने उन्हें उत्तर देते हुए कहा : निश्चय तुम अल्लाह की यातना और प्रकोप के हक़दार बन चुके हो, इसलिए वह निश्चित रूप से तुमपर टूट पड़ने वाला है। क्या तुम मुझसे उन मूर्तियों के बारे में बहस करते हो, जिन्हें तुमने और तुम्हारे बाप-दादा ने पूज्य का नाम दे दिया है, जबकि उनकी कोई वास्तविकता नहीं है?! क्योंकि अल्लाह ने कोई प्रमाण नहीं उतारा है, जिसे तुम इनके पूज्य होने के अपने दावे पर तर्क बना सको। अतः जिस यातना को जल्दी लाने की तुमने माँग की है, उसकी प्रतीक्षा करो, मैं भी तुम्हारे साथ प्रतीक्षा करने वालों में से हूँ। क्योंकि उसे तो आना ही है।

A'raf 7:72

अंततः हमने हूद - अलैहिस्सलाम - तथा उनके साथ जो मोमिन थे, उन्हें अपनी दया से बचा लिया और उन लोगों को नष्ट कर दिया, जिन्होंने हमारी आयतों को झुठलाया। वे ईमान वाले न थे, बल्कि वे झुठलाने वाले थे। इस कारण वे यातना के भागी थे।

A'raf 7:73

और हमने 'समूद' के गोत्र की ओर उनके भाई सालेह - अलैहिस्सलाम - को भेजा, कि वह उन्हें अल्लाह की तौहीद (एकेश्वरवाद) और उसकी इबादत की ओर बुलाएँ। सालेह ने उनसे कहा : ऐ मेरी क़ौम के लोगो! केवल अल्लाह की इबादत करो। क्योंकि तुम्हारे लिए उसके सिवा कोई पूज्य नहीं, जो इबादत के योग्य हो। तुम्हारे पास अल्लाह की ओर से उस चीज़ की सच्चाई पर स्पष्ट निशानी आ चुकी है, जो कुछ मैं तुम्हारे पास लेकर आया हूँ, जो एक चट्टान से निकलने वाली एक ऊँटनी के रूप में है। उसके पानी पीने का एक समय निर्धारित है और तुम्हारे पीने का भी एक ज्ञात दिन है। अतः उसे अल्लाह की भूमि में खाने के लिए छोड़ दो, क्योंकि तुमपर इसके भोजन में से किसी चीज़ की ज़िम्मेदारी नहीं है, तथा उसे कोई नुक़सान न पहुँचाओ। क्योंकि उसे नुक़सान पहुँचाने के कारण तुम्हें दर्दनाक यातना का सामना करना पड़ेगा।

A'raf 7:74

अपने ऊपर अल्लाह की नेमत को याद करो, जब उसने तुम्हें 'आद' जाति का उत्तराधिकारी बनाया और तुम्हें तुम्हारी भूमि में उतारा, जिससे तुम लाभान्वित होते हो और अपने उद्देश्यों को प्राप्त करते हो। ऐसा आद जाति को विनाश करने के बाद हुआ, जब वे अपने कुफ़्र तथा झुठलाने में चरम पर पहुँच गए। तुम पृथ्वी के मैदानों में महलों का निर्माण करते हो और पहाड़ों को तराश कर अपने लिए घर बनाते हो। सो अपने ऊपर अल्लाह की इन नेमतों को याद करो, ताकि उनपर अल्लाह का शुक्रिया अदा कर सको। तथा अल्लाह पर अविश्वास और पापों को त्यागकर, धरती में बिगाड़ फैलाना छोड़ दो।

A'raf 7:75

उनकी जाति के घमंडी प्रमुखों और सरदारों ने उनकी जाति के मोमिनों से कहा, जिन्हें वे कमज़ोर समझते थे : क्या (ऐ ईमान वालो!) तुम जानते हो कि सालेह सच में अल्लाह का रसूल है? मोमिनों ने उन्हें उत्तर दिया : निःसंदेह सालेह - अलैहिस्सलाम - को जो कुछ देकर हमारी ओर भेजा गया है, हम उसकी पुष्टि करते, स्वीकारते और अनुसरण करते हैं तथा उनकी लाई हुई शरीयत के अनुसार कार्य करने वाले हैं।

A'raf 7:76

उनकी जाति के अभिमानी लोगों ने कहा : निःसंदेह हम उसका इनकार करने वाले हैं, जिसपर (ऐ मोमिनो!) तुम ईमान लाए हो। अतः हम उसपर ईमान नहीं लाएँगे और उसकी शरीयत के अनुसार कार्य नहीं करेंगे।

A'raf 7:77

फिर उन्होंने अहंकार में आकर अल्लाह के आदेश की अवहेलना करते हुए, उस ऊँटनी का वध कर दिया, जिसे सालेह अलैहिस्सलाम ने कोई नुक़सान पहुँचाने से उन्हें मना किया था। तथा सालेह अलैहिस्सलाम ने उन्हें जिस चीज़ की धमकी दी थी, उसका मज़ाक़ उड़ाते हुए और उसे खारिज करते हुए उन्होंने कहा : ऐ सालेह! यदि तू वास्तव में अल्लाह के रसूलों में से है, तो वह दर्दनाक यातना हमपर ले आ, जिसकी तूने हमें धमकी दी थी।

A'raf 7:78

अतः काफ़िरों पर वह यातना आ गई, जिसके लिए उन्होंने जल्दी मचा रखी थी, जब उन्हें भयंकर भूकंप ने पकड़ लिया। फिर वे इस हाल में गिरे पड़े थे कि उनके मुँह और घुटने भूमि से चिपके हुए थे, और उनमें से कोई भी विनाश से नहीं बचा।

A'raf 7:79

सालेह - अलैहिस्सलाम - अपनी जाति के स्वीकरण से निराश होकर, उनसे मुँह फेर लिए और बोले : ऐ मेरी जाति के लोगो! निःसंदेह मैं तुम्हें वह संदेश पहुँचा चुका, जिसे अल्लाह ने मुझे तुम तक पहुँचाने का आदेश दिया था, और तुम्हें कभी प्रेरित करके और कभी भयभीत करके नसीहत की, लेकिन तुम ऐसे लोग हो कि उन नसीहत करने वालों को पसंद नहीं करते, जो तुम्हें भलाई के लिए मार्गदर्शन करने और बुराई से दूर रखने के इच्छुक हैं।

A'raf 7:80

और लूत को याद करो, जब उन्होंने अपनी जाति की निंदा करते हुए कहा : क्या तुम पुरुषों के साथ संभोग का यह घिनौना और निंदनीय काम करते हो?! यह कार्य जो तुमने आविष्कार किया है, तुमसे पहले इसे किसी ने नहीं किया!

A'raf 7:81

तुम काम-वासना को पूरा करने के लिए पुरुषों के पास आते हो, उन महिलाओं को छोड़कर जिन्हें इसे पूरा करने के लिए बनाया गया है। अतः तुमने अपने इस कार्य में बुद्धि, या धर्म, या मानव प्रकृति का पालन नहीं किया। बल्कि, तुम मानव संयम की सीमा से निकलकर और स्वस्थ बुद्धि् और अच्छी प्रकृति की अपेक्षाओं से विचलित होकर, अल्लाह की सीमाओं का उल्लंघन करने वाले हो।

A'raf 7:82

जब लूत - अलैहिस्सलाम - ने अपनी जाति के इस अनैतिक काम करने वालों का खंडन किया, तो उनका उत्तर इसके सिवा कुछ न था कि उन्होंने सत्य से मुँह मोड़ते हुए कहा : लूत और उसके परिवार को अपने गाँव से निकाल दो। ये ऐसे लोग हैं जो हमारे इस काम से बड़े पाक बनते हैं। इसलिए उनका हमारे बीच रहना हमारे लिए उचित नहीं है।

A'raf 7:83

सो हमने उन्हें और उनके परिवार को बचा लिया, क्योंकि हमने उन्हें रात ही में उस गाँव से निकल जाने का आदेश दे दिया था, जिसपर यातना आने वाली थी। उनकी पत्नी को छोड़कर, जो अपनी जाति के बाकी लोगों के साथ हो गई थी, अतः वह भी उस यातना से पीड़ित हुई, जो उनपर आई थी।

A'raf 7:84

और हमने उनपर एक भीषण बारिश बरसाई। हमने उन पर मिट्टी के पत्थर (कंकड़) बरसाए और गाँव को उलट दिया। चुनाँचे उसके ऊपरी हिस्से को नीचे कर दिया। अतः (ऐ रसूल!) विचार करें कि लूत की जाति के अपराधियों का परिणाम कैसा हुआ? निश्चय उनका परिणाम विनाश और अनंत अपमान था।

A'raf 7:85

हमने मदयन के गोत्र की ओर उनके भाई शुऐब अलैहिस्सलाम को भेजा। उन्होंने उनसे कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! अकेले अल्लाह की इबादत करो। उसके सिवा तुम्हारा कोई पूज्य नहीं, जो इबादत के योग्य हो। मैं अपने रब की ओर से तुम्हारे पास जो कुछ लेकर आया हूँ उसकी सच्चाई का अल्लाह की ओर से तुम्हारे पास एक स्पष्ट प्रमाण आ चुका है। अतः नाप और तौल पूरे करके लोगों को उनके अधिकार दो। तथा लोगों का उनके सामान में दोष निकालकर और उसके प्रति अरुचि जगाकर, या उनके मालिकों को धोखा देकर घाटा न करो। इससे पहले नबियों के द्वारा धरती पर सुधार होने के बाद, कुफ़्र और पाप करके उसमें बिगाड़ न फैलाओ। यदि तुम मोमिन हो, तो जो कुछ उल्लेख किया गया है तुम्हारे लिए बेहतर और अधिक लाभकारी है। क्योंकि इसमें अल्लाह के निषेधों से बचने हेतु पापों का परित्याग करना शामिल है, और क्योंकि इसमें अल्लाह के आदेशों का पालन करके उसके क़रीब आना शामिल है।

A'raf 7:86

और प्रत्येक मार्ग पर इस कारण न बैठो कि उसपर चलने वाले लोगों को धमकाओ ताकि उनका धन लूट लो, तथा उस व्यक्ति को अल्लाह के धर्म से रोक दो जो उससे मार्गदर्शन प्राप्त करना चाहे। तुम्हारी इच्छा है कि अल्लाह का मार्ग टेढ़ा हो ताकि लोग उसपर न चलें। तथा अपने ऊपर अल्लाह की नेमत को याद करो, ताकि तुम उसपर उसका शुक्र अदा करो। क्योंकि तुम्हारी संख्या कम थी, तो उसने तुम्हें अधिक कर दिया। तथा विचार करो कि तुमसे पहले घरती में बिगाड़ पैदा करने वालों का परिणाम कैसा हुआ। निश्चय उनका परिणाम तबाही और विनाश था।

A'raf 7:87

और यदि तुम में से एक समूह उसपर ईमान लाया है, जो मैं अपने रब की ओर से लाया हूँ और दूसरा समूह उसपर ईमान नहीं लाया, तो (ऐ झुठलाने वालो!) प्रतीक्षा करो कि अल्लाह तुम्हारे बीच क्या निर्णय करता है। वह निर्णय करने वालों में सबसे अच्छा और न्याय करने वालों में सबसे अधिक न्यायशील है।

A'raf 7:88

शुऐब अलैहिस्सलाम की क़ौम के घमंडी प्रमुखाें और बड़े लोगों ने शुऐब अलैहिस्सलाम से कहा : (ऐ शुऐब!) हम तुझे और तेरे साथ तेरी बात मानने वालों काे अपने इस गाँव से अवश्य निकाल देंगे, या तुम अवश्य ही हमारे धर्म में वापस आ जाओगे। तो शुऐब अलैहिस्सलाम ने इनकार करते हुए और आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा : क्या हम तुम्हारे धर्म पर चलने लगें, अगरचे हम उसे नापसंद ही करते हों, क्योंकि हम जानते हैं कि तुम्हारा धर्म असत्य है?!

A'raf 7:89

यदि हम भी तुम्हारी ही तरह शिर्क व कुफ़्र का अक़ीदा रखने लगें, जबकि अल्लाह ने हमें अपनी कृपा से उससे बचा लिया है, तो हम अल्लाह पर झूठ गढ़ने वाले ठहरेंगे। और हमसे यह भी नहीं हो सकता कि तुम्हारे असत्य धर्म की ओर लौट आएँ। परंतु यह कि हमारा पालनहार अल्लाह ऐसा चाहे। क्योंकि सब उसी के इरादे के अधीन हैं। हमारे पालनहार ने प्रत्येक वस्तु को अपने ज्ञान के दायरे में ले रखा है। उससे कुछ भी छिपा नहीं है। केवल अल्लाह ही पर हमारा भरोसा है कि वह हमें सीधे रास्ते पर सुदृढ़ रखेगा और जहन्नम के रास्तों से बचाएगा। ऐ हमारे पालनहार! हमारे और हमारी काफ़िर जाति के बीच न्याय के साथ निर्णय कर दे। अतः सत्यवादी मज़लूम को हठी ज़ालिम के विरुद्ध विजय प्रदान कर। क्योंकि तू ही (ऐ हमारे पालनहार!) सबसे उत्तम निर्णय करने वाला है।

A'raf 7:90

उनकी जाति के काफ़िर एवं तौहीद के आह्वान को ठुकराने वाले प्रमुखों तथा सरदारों ने शुऐब अलैहिस्सलाम और उनके धर्म से सावधान करते हुए कहा : (ऐ हमारी जाति के लोगो!) अगर तुमने शुऐब का धर्म अपना लिया तथा अपना और अपने बाप-दादा का धर्म छोड़ दिया, तो निश्चित रूप से तुम्हारा सर्वनाश हो जाएगा।

A'raf 7:91

चुनाँचे उन्हें भयंकर भूकंप ने पकड़ लिया, तो वे अपने घरों में विनष्ट हो गए, इस हाल में कि अपने घुटनों और चेहरों के बल अपने घरों में मृत और बेजान पड़े हुए थे।

A'raf 7:92

जिन लोगों ने शुऐब अलैहिस्सलाम को झुठलाया, वे सब के सब विनष्ट हो गए, और वे ऐसे हो गए जैसे वे अपने घरों में बसे ही न थे और उन्होंने इसका आनंद ही नहीं लिया था। जिन लोगों ने शुऐब अलैहिस्सलाम को झुठलाया, वही लोग घाटे में रहे; इसलिए कि उन्होंने अपना और अपनी धन-संपत्ति का विनाश किया। जबकि उनकी जाति के मोमिनों का कोई घाटा नहीं हुआ, जैसा कि इन झुठलाने वाले काफ़िरों ने दावा किया था।

A'raf 7:93

जब उनका विनाश हो गया, तो उनके पैगंबर शुऐब अलैहिस्सलाम उनसे विमुख हो गए और उन्हें संबोधित करते हुए बोले : ऐ मेरी जाति के लोगो! मैंने तुम्हें वह संदेश पहुँचा दिया था जिसका मेरे पालनहार ने मुझे तुमको पहुँचाने का आदेश दिया था, तथा मैं तुम्हारा हितैषी व शुभ चिंतक बना रहा, किंतु तुमने मेरी ख़ैर-ख़्वाही (शुभचिंतन) को स्वीकार नहीं किया और मेरे मार्गदर्शन पर चलने को तैयार न हुए। तो भला मैं ऐसे लोगों पर शोक कैसे करूँ, जो अल्लाह के साथ कुफ़्र करने वाले हैं और अपने कुफ़्र पर अडिग हैं?

A'raf 7:94

तथा हमने किसी बस्ती में अपना जो भी रसूल भेजा, फिर उसके वासियों ने नबी को झुठला दिया और कुफ्र का मार्ग अपनाया, तो हमने उन्हें कठिनाई, ग़रीबी और बीमारी से पीड़ित कर दिया, ताकि वे अल्लाह के सामने अपनी विनम्रता प्रकट करें। जिसके परिणामस्वरूप वे अपने कुफ़्र और अहंकार को छोड़ दें। यह झुठलाने वाले समुदायों के बारे में अल्लाह की परंपरा का उल्लेख करके क़ुरैश के लिए तथा सभी इनकार करने और झुठलाने वालों के लिए एक चेतावनी है।

A'raf 7:95

फिर हमने तंगी और बीमारी से ग्रस्त करने के बाद उन्हें अच्छाई, विस्तार और सुरक्षा प्रदान की, यहाँ तक कि उनकी संख्या अधिक हो गई तथा उनकी धन-संपत्ति में वृद्धि हो गई और वे कहने लगे : हमें जो बुराई और अच्छाई पहुँची है, वह एक नियमित आदत है, जो पहले हमारे पूर्वजों को भी पहुँच चुकी है। उन्हें इस बात का एहसास नहीं हुआ कि वे जिस दुर्दशा से पीड़ित हुए थे, उससे उन्हें सीख लेना चाहिए था, तथा उन्हें जो नेमतें प्राप्त हुई थीं, उनका उद्देश्य ढील देना था। अतः हमने अचानक उन्हें यातना द्वारा पकड़ लिया और उन्हें यातना का एहसास भी नहीं हुआ और न ही वे इसकी कल्पना करते थे।

A'raf 7:96

और यदि इन बस्तियों के वासी, जिनकी ओर हमने अपने रसूलों को भेजा था, उन बातों पर विश्वास करते जो उनके रसूल उनके पास लेकर आए थे, तथा अपने पालनहार से, कुफ़्र और गुनाहों को छोड़कर और उसके आदेशों का पालन करके, डरते, तो हम उनके लिए चारों ओर से भलाई के द्वार खोल देते, लेकिन उन्होंने न तो विश्वास किया और न डरे, बल्कि अपने रसूलों के लाए हुए संदेश को झुठलाया। अतः हमने उन्हें उनके किए हुए गुनाहों और पापों के कारण अचानक यातना से ग्रस्त कर दिया।

A'raf 7:97

तो क्या इन झुठलाने वाली बस्तियों के लोग इस बात से निश्चिंत हो गए हैं कि उनपर हमारी यातना रात के समय आ जाए और वे अपने आराम और शांति में लीन होकर सो रहे हैं?

A'raf 7:98

और क्या वे इस बात से निश्चिंत हो गए हैं कि उनपर हमारी यातना दिन की शुरुआत में आ जाए और वे अपनी दुनिया में व्यस्त होने की वजह से बेपरवाह और ग़ाफ़िल हों?!

A'raf 7:99

देखो, अल्लाह ने उन्हे किस क़दर मोहलत दी है, और ढील देते हुए शक्ति तथा विस्तृत जीविका प्रदान की है; तो क्या इन नगरों के ये झुठलनाने वाले लोग अल्लाह की चाल और उसके गुप्त उपाय से निश्चिंत हो गए हैं? तो (याद रखो!) अल्लाह के गुप्त उपाय से निश्चिंत केवल वही लोग होते हैं, जिनके भाग्य में विनाश लिखा हो। रही बात तौफ़ीक़ वाले लोगों की, तो वे उसके गुप्त उपाय से डरते हैं। यही कारण है कि उसकी नेमतों से धोखा नहीं खाते, बल्कि उसके एहसान के आभारी रहते हैं और उसका शुक्रिया अदा करते हैं।

A'raf 7:100

तो क्या उन लोगों के सामने यह तथ्य स्पष्ट नहीं हुआ, जो अपने पूर्वजों के बाद धरती के वारिस हुए, जिन्हें उनके गुनाहों के कारण विनष्ट कर दिया गया था, फिर उन्होंने उनपर उतरने वाली यातना से शिक्षा ग्रहण नहीं की, बल्कि उन्हीं जैसे कर्म करते रहे। क्या इन लोगों के सामने यह तथ्य स्पष्ट नहीं हुआ कि अगर अल्लाह उन्हें उनके गुनाहों के कारण पकड़ना चाहे, तो अपनी रीति के अनुसार पकड़ ले और उनके दिलों पर मुहर लगा दे, फिर उन्हें न किसी उपदेश से लाभ हो, न किसी याद-दहानी से फ़ायदा?!

A'raf 7:101

ये पिछली बस्तियाँ हैं (अर्थात नूह, हूद, सालेह, लूत और शुऐब अलैहिमुस्सलाम की बस्तियाँ), जिनकी खबरें और उनके झुठलाने तथा हठधर्मी की दास्तानें और उनके विनाश का विवरण हम आपको सुना रहे हैं, ताकि यह शिक्षा प्राप्त करने वालों के लिए एक शिक्षा और नसीहत हासिल करने वालों के लिए एक नसीहत हो। इन बस्तियों वालों के पास उनके रसूल अपने सच्चे रसूल होने के स्पष्ट प्रमाण लेकर आए थे, परंतु उनसे यह न हो सका कि जब रसूल आ गए, तो उन्हें मान लेते, क्योंकि यह बात पहले ही से अल्लाह के ज्ञान में थी कि वे उन्हें झुठला देंगे। जिस तरह इन बस्तियों वालों के दिलों पर अल्लाह ने मुहर लगा दी थी, वैसे ही अल्लाह मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को झुठलाने वालों के दिलों पर भी मुहर लगा देगा, फिर वे ईमान की राह प्राप्त नहीं कर सकेंगे।

A'raf 7:102

जिन समुदायों की ओर रसूल भेजे गए थे, उनमें से अधिकांश में हमने अल्लाह के आदेशों के प्रति प्रतिबद्धता और प्रतिज्ञा पालन नहीं पाया, तथा हमने उन्हें उसकी आज्ञाओं का पालन करते हुए नहीं पाया। बल्कि हमने उनमें से अधिकांश को अल्लाह की अवज्ञा करते हुए ही पाया।

A'raf 7:103

फिर हमने उन रसूलों के बाद मूसा अलैहिस्सलाम को अपने तर्कों और स्पष्ट प्रमाणों के साथ, जो उनके सच्चे नबी होने को स्पष्ट कर रहे थे, फ़िरऔन और उसके प्रमुखों के पास भेजा। परंतु उन्होंने उन आयतों का इनकार कर दिया और उनपर विश्वास नहीं किया। तो (ऐ रसूल!) आप ग़ौर करें कि फ़िरऔन और उसकी जाति का परिणाम कैसा रहा?! अल्लाह ने उन्हें डुबोकर नष्ट कर दिया और दुनिया तथा आख़िरत में उनके पीछे लानत लगा दिया।

A'raf 7:104

जब अल्लाह ने मूसा अलैहिस्सलाम को फ़िरऔन के पास भेजा और वह उसके पास आए, तो कहा : ऐ फ़िरऔन! निःसंदेह मैं सारी सृष्टि के रचयिता, उनके स्वामी और उनके मामलों के व्यवस्थापक की ओर से भेजा हुआ रसूल हूँ।

A'raf 7:105

मूसा ने कहा : चूँकि मैं अल्लाह की ओर से भेजा गया हूँ, इसलिए मैं उसके बारे में सत्य के अलावा कुछ भी कहने के योग्य नहीं हूँ। निश्चय मैं तम्हारे पास एक स्पष्ट प्रमाण लेकर आया हूँ, जो मेरे सच्चे होने और मेरे अपने पालनहार की ओर से तुम्हारे पास भेजे हुए (रसूल) होने को दर्शाता है। अतः बनी इसराईल को क़ैद तथा उत्पीड़न से आज़ाद करके मेरे साथ जाने दे।

A'raf 7:106

फ़िरऔन ने मूसा अलैहिस्सलाम से कहा : यदि तुम कोई प्रमाण (चमत्कार) लेकर आए हो, जैसा कि तुम्हारा दावा है, तो उसे प्रस्तुत करो, यदि तुम अपने दावे में सच्चे हो।

A'raf 7:107

फिर मूसा अलैहिस्सलाम ने अपनी लाठी फेंकी, तो वह एक महान साँप में बदल गई, जो उसे देखने वालों के लिए प्रत्यक्ष था।

A'raf 7:108

तथा उन्होंने अपने सीने के पास से अपनी कमीज़ की छेद से, या अपने बग़ल के नीचे से अपना हाथ निकाला, तो वह बरस (सफ़ेद कुष्ठ रोग) के बिना बिलकुल सफ़ेद निकला, जो इतना सफ़ेद था कि देखने वालों के लिए चमक रहा था।

A'raf 7:109

फ़िरऔन की जाति के बड़ों और प्रमुखों ने जब मूसा अलैहिस्सलाम की लाठी का साँप बन जाना और उनके हाथ का बरस के बिना सफ़ेद हो जाना देखा, तो बोल उठे : मूसा एक दक्ष जादूगर के अलावा कुछ नहीं है।

A'raf 7:110

वह चाहता है कि अपने जादू के बल से तुम्हें, तुम्हारी इस धरती मिस्र से निकाल दे। फिर फ़िरऔन ने उनसे मूसा अलैहिस्सलाम के बारे में परामर्श करते हुए कहा : तुम मुझे क्या सलाह देते हो?

A'raf 7:111

उन्होंने फ़िरऔन से कहा : मूसा तथा उसके भाई के मामले को स्थगित कर दे और मिस्र के शहरों में जादूगरों को इकट्ठा करने के लिए किसी को भेज दे।

A'raf 7:112

ये लोग जिन्हें तूने शहरों से जादूगरों को इकट्ठा करने के लिए भेजा है, वे हर कुशल और दक्ष जादूगर को तेरे पास ले आएँ।

A'raf 7:113

चुनाँचे फ़िरऔन ने जादूगरों को जमा करने के लिए हरकारे भेज दिए। फिर जब जादूगर फिरऔन के पास आए, तो उन्होंने उससे पूछा : क्या उन्हें कोई इनाम मिलेगा यदि उन्होंने मूसा को अपने जादू से हरा दिया और उस पर जीत हासिल की?

A'raf 7:114

तो फिरऔन ने जवाब दिया कि हाँ, तुम्हें उसका बदला और पुरस्कार मिलेगा और तुम्हें ऐसे पद भी दिए जाएँगे कि मेरे निकटवर्ती बन जाओगे।

A'raf 7:115

जादूगरों ने मूसा पर अपनी जीत के बारे में आश्वस्त होकर, घमंड और अहंकार से कहा : (ऐ मूसा!) आप जो चाहें चुन लें, कि आप उस चीज़ को फेंकने की शुरुआत करेंगे जो आप फेंकना चाहते हैं, यह हम ही उसकी शुरुआत करें।

A'raf 7:116

मूसा (अलैहिस्सलाम) ने अपने पालनहार की मदद पर भरोसा करते हुए, उनकी परवाह न करते हुए, उन्हें जवाब दिया : तुम्हीं अपनी रस्सियाँ और लाठियाँ फेंको। तो जब उन्होंने रस्सियाँ और लाठियाँ फेंकीं, तो लोगों की आँखों को, उन्हें शुद्ध बोध से विचलित करके, मंत्रमुग्ध कर दिया और उन्हें भयभीत कर दिया तथा वे देखने वालों की आँखों में शक्तिशाली जादू लेकर आए।

A'raf 7:117

तो अल्लाह ने अपने नबी तथा कलीम मूसा अलैहिस्सलाम को वह़्य की कि अपनी लाठी फेंको। चुनाँचे उन्होंने अपनी लाठी फेंकी। और देखते ही देखते लाठी साँप बनकर उनकी रस्सियाें तथा लाठियाें को निगलने लगी, जिनका प्रयोग वे तथ्यों को बदलने और लोगों को इस भ्रम में डालने के लिए करते थे कि ये दौड़ते हुए साँप हैं।

A'raf 7:118

अतः सत्य प्रकट हो गया तथा मूसा अलैहिस्सलाम जो कुछ लेकर आए थे, उसकी सच्चाई स्पष्ट हो गई और जादूगरों ने जो जादू बनाया था, उसका झूठा होना जग-ज़ाहिर हो गया।

A'raf 7:119

अंततः वे उस अवसर पर पराजित हुए और हार गए तथा मूसा अलैहिस्सलाम को उनपर विजय प्राप्त हुआ। और वे लोग अपमानित और मग़लूब होकर लौटे।

A'raf 7:120

जब जादूगरों ने अल्लाह की महान शक्ति और स्पष्ट निशानियों को देखा, तो बे-साख्ता पवित्र अल्लाह के सामने सजदे में गिर गए।

A'raf 7:121

जादूगरों ने कहा : हम सारी सृष्टि के पालनहार पर ईमान लाए।

A'raf 7:122

मूसा तथा हारून अलैहिमस्सलाम के पालनहार पर, क्योंकि वही उपासना का हक़दार है। उसके सिवा अन्य तथाकथित पूज्य उपासना के हक़दार नहीं हैं।

A'raf 7:123

जब वे एक अल्लाह पर ईमान ले आए, तो फ़िरऔन ने उन्हें धमकी देते हुए कहा : मेरी अनुमति से पहले ही तुमने मूसा को सच्चा मान लिया? निश्चय तुम्हारा मूसा पर ईमान लाना और उसके लाए हुए धर्म को सत्य मानना एक धोखा और साज़िश है, जो तुमने और मूसा ने इस नगर के निवासियों को यहाँ से निकालने के लिए रची है। तो (ऐ जादूगरो!) तुम्हें शीघ्र ही पता चल जाएगा कि तुम्हें कैसी सज़ा और यातना का सामना करना पड़ता है।

A'raf 7:124

मैं अवश्य तुममें से प्रत्येक व्यक्ति का दाहिना हाथ और बायाँ पैर, या उसका बायाँ हाथ और दाहिना पैर काट दूँगा। फिर मैं तुम सभी को खजूर के पेड़ के तने पर लटका दूँगा। ऐसा तुम्हें भयंकर सज़ा देने और इस स्थिति में तुम्हें देखने वाले सभी लोगों को डराने के लिए किया जाएगा।

A'raf 7:125

जादूगरों ने फिरऔन की धमकी के जवाब में कहा : निश्चय हम अकेले अपने पालनहार ही की ओर लौटने वाले हैं। इसलिए हमें तुम्हारी धमकी की परवाह नहीं है।

A'raf 7:126

और तुम्हारे निकट (ऐ फिरऔन!) हमारा दोष केवल यह है कि हमने अपने रब की निशानियों को सत्य मान लिया, जब वे मूसा अलैहिसल्लाम के हाथ पर हमारे पास आईं। यदि यह कोई दोष दिया जाने वाला पाप है, तो यह हमारा पाप है। फिर वे विनयपूर्वक अपने रब से दुआ करने लगे : ऐ हमारे पालनहार! हमपर धैर्य उड़ेल दे, ताकि हम सत्य पर अडिग रहें। तथा हमें इस हाल में मौत दे कि हम तेरे प्रति समर्पित हों, तेरे आदेश का पालन करने वाले तथा तेरे रसूल का अनुसरण करने वाले हों।

A'raf 7:127

फ़िरऔन की जाति के प्रमुखों और बड़े लोगों ने, उसे मूसा तथा उनके साथ मोमिनों के खिलाफ भड़काते हुए कहा : क्या (ऐ फ़िरऔन!) तुम मूसा और उसकी जाति को छोड़े रखोगे कि वे देश में बिगाड़ फैलाएँ, तथा वे तुमसे और तुम्हारे पूज्यों से किनारा कर लें और (लोगों को) अकेले अल्लाह की इबादत की ओर बुलाएँ?! फ़िरऔन ने कहा : हम बनी इसराईल के बेटों को मार डालेंगे, और उनकी स्त्रियों को सेवा करने के लिए बाक़ी रखेंगे। और निश्चय हमें उनपर ज़ोर, ग़लबा और प्रभुत्व प्राप्त है।

A'raf 7:128

मूसा अलैहिस्सलाम ने अपनी जाति के लोगों को वसीयत करते हुए कहा : ऐ लोगों! केवल एक अल्लाह से सहायता माँगो कि वह तुम्हारी मुसीबत दूर कर दे तथा तुम्हें लाभ पहुँचाए, और जिस आज़माइश से तुम पीड़ित हो, उसपर धैर्य रखो। क्योंकि यह धरती अकेले अल्लाह की है। फ़िरऔन या उसके सिवा किसी और की नहीं कि वह उसमें जो चाहे, करता फिरे। अल्लाह अपनी इच्छा अनुसार लोगों को बारी-बारी उसमें अवसर देता रहता है। लेकिन धरती पर अच्छा परिणाम केवल उन ईमान वालों के लिए है, जो अपने पालनहार के आदेशों का पालन करते हैं और उसकी मना की हुई चीज़ों से बचते हैं। अंततः यह उन्हीं के लिए है, यद्यपि उन्हें कुछ आज़माइशों और परीक्षाओं से गुज़रना पड़े।

A'raf 7:129

मूसा अलैहिस्सलाम की जाति बनी इसराईल ने उनसे कहा : हम तुम्हारे आने से पहले भी फ़िरऔन के हाथों सताए गए। वह हमारे पुत्रों को मार देता और हमारी स्त्रियों को जीवित रहने देता था। और तुम्हारे आने के पश्चात् भी सताए जा रहे हैं! मूसा अलैहिस्सलाम ने उन्हें समझाते हुए और मुसीबत से छुटकारे की खुशख़बरी देते हुए कहा : निकट है कि तुम्हारा पालनहार तुम्हारे शत्रु फिरऔन तथा उसकी जाति को विनष्ट कर दे और उनके बाद धरती में तुम्हारा आधिपत्य क़ायम कर दे, और फिर देखे कि तुम उसके बाद क्या करते हो, शुक्र या नाशुक्री?

A'raf 7:130

हमने फ़िरऔन की जाति को सूखे और अकाल से दंडित किया, तथा हमने उनका धरती के फलों और उसकी पैदावार की कमी के साथ परीक्षण किया। इस आशा में कि वे सीख और उपदेश ग्रहण करें कि उनके साथ यह जो कुछ घटित हुआ है, वह उनके कुफ़्र की सज़ा के तौर पर है, इसलिए वे अल्लाह के सामने तौबा कर लें।

A'raf 7:131

जब फ़िरऔन की जाति पर उर्वरता, अच्छे फलों और सस्ते दामों के रूप में सुखद स्थिति आती, तो वे कहते : हमें यह इसलिए दिया गया क्योंकि हम इसके हक़दार हैं और यह हमारे ही लिए विशिष्ट है। और अगर उनपर अकाल, सूखे, बीमारियों की अधिकता तथा अन्य विपत्तियों के रूप में कोई मुसीबत आती, तो वे मूसा अलैहिस्सलाम और उनके साथ मौजूद बनी इसराईल से अपशकुन लेते। जबकि सच्चाई यह है कि उन्हें इस तरह की जो भी चीज़ पहुँचती है, वह केवल अल्लाह की नियति (तक़दीर) के अनुसार पहुँचती है। इससे उनका और मूसा अलैहिस्सलाम का कोई लेना देना नहीं है, सिवाय मूसा अलैहिस्सलाम के उनपर बद्-दुआ करने के। लेकिन उनमें से अधिकतर लोग नहीं जानते, इसलिए वे इसे अल्लाह के अलावा किसी और से संबद्ध करते हैं।

A'raf 7:132

फ़िरऔन की जाति ने मूसा अलैहिस्सलाम से, सत्य से दुश्मनी के कारण कहा : तुम हमारे पास जो निशानी भी ले आओ, और हमें हमारे धर्म से फेरने के लिए उसे ग़लत साबित करने और अपने धर्म की सच्चाई सिद्ध करने के लिए जो भी तर्क और प्रमाण ले आओ, हम तुमपर कभी विश्वास नहीं करेंगे।

A'raf 7:133

अंततः हमने उनके झुठलाने और हठ पर सज़ा के रूप में उनपर बहुत सारा पानी भेजा, जिसने उनकी फसलों और फलों को डुबो दिया। और हमने उन पर टिड्डियाँ भेजीं, जो उनकी फसलें खा गईं। और हमने उनपर जुएँ भेजीं, जो खेतियों को लग जाती हैं या इनसान के बाल में रहकर उसे कष्ट देती हैं, और हमने उन पर मेंढक भेजे, जो उनके बर्तनों में भर गए, उनके खाने-पीने की चीज़ों को खराब कर दिए और उनकी नींदें उड़ा दीं। और हमने उनपर रक्त भेजा, जिससे उनके कुएँ और उनकी नहरें रक्तमय हो गईं। हमने ये सब अलग-अलग और स्पष्ट निशानियाँ भेजीं, जो एक के बाद एक आती रहीं। परंतु ये सारी सज़ाएँ आने के बावजूद वे अल्लाह पर ईमान लाने और मूसा अलैहिस्सलाम के लाए हुए संदेश को मानने से अभिमान करते रहे। और वे ऐसे लोग थे जो पाप किया करते थे, वे न असत्य दूर रहते थे और न सत्य की राह पकड़ते थे।

A'raf 7:134

और जब उनपर ये सारी यातनाएँ आ पड़ीं, तो वे मूसा अलैहिस्सलाम के पास पहुँचे और कहने लगे : ऐ मूसा! तुम अपने पालनहार से, उस नुबुव्वत के हवाले से जो उसने तुम्हें प्रदान की है और उसके हवाले से जो उसने तौबा के द्वारा यातना दूर करने का तुमहें वचन दिया है, हमारे लिए दुआ करो कि हमारे ऊपर आई हुई यातना को हमसे दूर कर दे। अगर तुमने हमसे यह यातना दूर कर दी, तो अवश्य ही हम तुमपर ईमान ले आएँगे और बनी इसराईल को आज़ाद करके तुम्हारे साथ भेज देंगे।

A'raf 7:135

फिर जब हम उन्हें सागर में डुबोकर विनष्ट करने से पहले, एक निश्चित अवधि के लिए उनसे यातना को दूर कर देते, तो अचानक वे मूसा अलैहिस्सलाम पर ईमान लाने और बनी इसराईल को भेजने का अपना किया हुआ वादा तोड़ देत। चुनाँचे वे अपने कुफ़्र ही पर क़ायम रहते और बनी इसराईल को मूसा अलैहिस्सलाम के साथ भेजने से मुकर जाते।

A'raf 7:136

फिर जब उनके विनाश का निश्चित समय आ गया, तो हमने उन्हें समुद्र में डुबोकर उनपर अपनी सज़ा उतार दी, क्योंकि उन्होंने अल्लाह की निशानियों को झुठलाया और उनसे इंगति होने वाले उस सत्य से उपेक्षा किया था, जिसमें कोई संदेह नहीं।

A'raf 7:137

हमने बनी इसराईल को, जिन्हें फिरऔन और उसकी जाति के लोग कमज़ोर समझ रहे थे, धरती के पूर्व और पश्चिम के भूभागों का वारिस बना दिया। इस धरती से अभिप्राय शाम के देश (लेवंत) हैं, ये वे देश हैं जिनमें अल्लाह ने उनकी फसलों और फलों को पूरी तरह से पैदा करके बरकत रखी है। और इस प्रकार (ऐ नबी!) आपके पालनहार की सर्वश्रेष्ठ बात पूरी हो गई। वह बात अल्लाह सर्वशक्तिमान के इस कथन में उल्लिखित है : {وَنُرِيدُ أَن نَّمُنَّ عَلَى الَّذِينَ اسْتُضْعِفُوا فِي الْأَرْضِ وَنَجْعَلَهُمْ أَئِمَّةً وَنَجْعَلَهُمُ الْوَارِثِينَ} (القصص: ٥) ''हम चाहते हैं कि उन लोगों पर उपकार करें, जो धरती में कमज़ोर समझ लिए गए थे और उन्हें 'इमाम' बना दें और उन्हें वारिस बना दें।'' (सूरतुल-क़सस : 5)। अतः अल्लाह ने उन्हें फ़िरऔन और उसकी जाति की ओर से पहुँचने वाले कष्ट पर धैर्य के कारण धरती में प्रभुत्व प्रदान कर दिया। तथा हमने फ़िरऔन के बनाए हुए खेतों तथा घरों और उनके द्वारा निर्मित महलों को ध्वस्त कर दिया।

A'raf 7:138

और हमने बनी इसराईल को समुद्र पार करा दिया, जब मूसा ने उसमें अपनी लाठी मारी और वह फट गया। चुनाँचे उसे पार करने के बाद वे ऐसी जाति के पास से गुज़रे, जो अपनी कुछ मूर्तियों की पूजा में लगी हुई थी, जिन्हें वह अल्लाह को छोड़कर पूजती थी। उसे देखकर बनी इसराईल ने मूसा अलैहिस्सलाम से कहा : ऐ मूसा! हमारे लिए एक ऐसी मूर्ति बना दीजिए जिसकी हम पूज करें, जैसे कि इन लोगों के पास कुछ मूर्तियों हैं, जिनकी वे अल्लाह के सिवा पूजा करते हैं। तो मूसा अलैहिस्सलाम ने उनसे कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! निश्चय तुम ऐसे लोग हो जो इस बात से अनभिज्ञ हो कि अल्लाह के लिए क्या सम्मान और एकेश्वरवाद अनिवार्य है, और उसके लिए क्या चीज़ अशोभनीय है जैसे कि शिर्क और उसके अलावा की पूजा।

A'raf 7:139

ये लोग जो अपनी मूर्तियों की पूजा में लगे हुए हैं, वे अल्लाह के अलावा की पूजा के जिस काम में लगे हुए हैं, वह नष्ट किया जाने वाला है और वे जो कुछ नेकी के कार्य करते चले आ रहे हैं, वह व्यर्थ (अमान्य) है, क्योंकि उन्होंने इबादत में अल्लाह के साथ दूसरों को साझी बनाया है।

A'raf 7:140

मूसा अलैहिस्सलाम ने अपनी जाति से कहा : मैं तुम्हारे लिए भला अल्लाह के सिवा कोई पूज्य कैसे तलाश करूँ, जिसकी तुम इबादत करो, जबकि तुमने अल्लाह की बड़ी-बड़ी निशानियाँ देखी हैं, और अल्लाह ने तुम्हारे दुश्मनों को विनष्ट करके और तुम्हें धरती का उत्तराधिकारी बनाकर और उसमें तुम्हें प्रभुत्व प्रदान करके, तुम्हें तुम्हारे समय के सारे संसार वासियों पर श्रेष्ठता प्रदान की है?!

A'raf 7:141

तथा (ऐ बनी इसराईल!) वह समय याद करो, जब हमने तुम्हें फ़िरऔन और उसकी जाति के अपमानजनक व्यवहार से बचाकर तुम्हें मुक्ति दिलाई, क्योंकि वे तुम्हें तरह-तरह से सताते थे; तुम्हारे पुत्रों को बुरी तरह क़त्ल कर देते थे और तुम्हारी स्त्रियों को अपनी सेवा के लिए जीवित रहने देते थे। तथा तुम्हें फ़िरऔन और उसकी जाति के चंगुल से मुक्त करने की इस घटना में तुम्हारे पालनहार की ओर से बहुत बड़ी परीक्षा है, जिसके लिए तुम्हें आभार प्रकट करने की आवश्यकता है।

A'raf 7:142

अल्लाह ने अपने रसूल मूसा अलैहिस्सलाम से बात करने के लिए, उनसे तीस रातों का वादा किया और फिर दस रातें बढ़ाकर यह अवधि पूरी कर दी। इस तरह यह (अवधि) चालीस रातों की हो गई। तथा मूसा ने अपने भाई हारून से, अपने पालनहार से बात करने के लिए जाते समय कहा : ऐ हारून! मेरी जाति में मेरा उत्तराधिकारी बनकर रहना और उनके मामलों को अच्छी नीति और उनके साथ नरमी के व्यवहार के साथ ठीक रखना, और पापों को अंजाम देकर भ्रष्टाचारियों के रास्ते पर मत चलना और अवज्ञाकारियों का सहायक मत बनना।

A'raf 7:143

जब मूसा अलैहिस्सलाम अपने पालनहार से बात करने के लिए उसके लिए निर्धारित समय पर अर्थात् चालीस रातें पूरी होने के बाद आए, और उनके पालनहार ने उनसे आदेशों, निषेधों और अन्य चीजों के बारे में बात की, तो मूसा अलैहिस्सलाम के मन में अपने पालनहार को देखने की लालसा पैदा हुई और उससे अपना दर्शन कराने का अनुरोध कर दिया। तो अल्लाह ने उसे जवाब दिया : तुम दुनिया के जीवन में मुझे कदापि नहीं देखोगे। क्योंकि तुम्हारे पास इसकी क्षमता नहीं है। लेकिन पहाड़ को देखो, जब मैं खुद को उसके सामने प्रकट करूँ। अगर वह अपने स्थान पर स्थिर रहा, प्रभावित नहीं हुआ, तो तुम मुझे देख लोगे। और अगर वह धरती के साथ समतल हो गया, तो तुम मुझे इस संसार में हरगिज़ नहीं देख सकोगे। चुनाँचे जब अल्लाह ने स्वयं को पहाड़ पर प्रकट किया, तो उसे धरती के साथ समतल कर दिया, और मूसा अलैहिस्सलाम बेहोश होकर गिर पड़े। फिर जब होश में आए तो कहने लगे : (ऐ मेरे पालनहार!) मैं तुझे उन सभी चीज़ों से पवित्र मानता हूँ, जो तेरे लिए शोभनीय नहीं हैं। देख, मैं दुनिया में तेरे दर्शन की माँग करने की भूल से तौबा करता हूँ और मैं अपनी जाति का प्रथम मोमिन व्यक्ति हूँ।

A'raf 7:144

अल्लाह ने कहा : ऐ मूसा! मैंने तुम्हें चुन लिया और अपने संदेशों के साथ लोगों पर तुम्हें श्रेष्ठता प्रदान की जब मैंने तुम्हें उनके पास भेजा, और मैंने तुम्हें बिना किसी मध्यस्थ के अपनी वार्ता का सौभाग्य प्रदान किया। अतः हमारे दिए हुए इस उदार सम्मान को ले लो और इस महान प्रदान पर अल्लाह का शुक्रिया अदा करने वालों में से हो जाओ।

A'raf 7:145

हमने मूसा के लिए लकड़ी अथवा अन्य किसी वस्तु से बनी तख़्तियों में, हर वह चीज़ लिख दी, जिसकी बनी इसराईल को उनके धर्म और दुनिया के मामलों में ज़रूरत थी, ताकि उनमें से उपदेश ग्रहण करने वालों के लिए उपदेश और उन नियमों का विवरण हो जाए, जिनके विवरण की आवश्यकता हो। अब (ऐ मूसा!) इस तौरात को पूरी शक्ति से थाम लो, और अपनी जाति बनी इसराईल को आदेश दो कि वे इसकी उत्तम चीज़ों को पकड़ लें, जिनका बदला बहुत बड़ा है, जैसे आदेशों का संपूर्ण तरीके से पालन करना, और जैसे कि धैर्य रखना और माफ़ करना। मैं शीघ्र ही तुम्हें उन लोगों का परिणाम दिखाऊँगा, जिन्होंने मेरे आदेश का उल्लंघन किया और मेरी आज्ञाकारिता से निकल गए, तथा उन्हें किस तरह के विनाश और तबाही का सामना करना पड़ेगा।

A'raf 7:146

मैं संसार एवं इनसान के अंदर मौजूद अपनी निशानियों से सीख ग्रहण करने और मेरी किताब की आयतों को समझने से उन लोगों को विचलित कर दूँगा, जो अल्लाह के बंदों पर और सत्य पर नाहक़ अभिमान करते हैं। और जिनका हाल यह है कि यदि वे हर प्रकार की निशानियाँ देखते हैं, तो भी उन्हें नहीं मानते हैं; क्योंकि वे उनपर आपत्ति करते और उनसे मुँह फेरते हैं, तथा इसलिए भी कि वे अल्लाह और उसके रसूल का विरोध करते हैं। और यदि वे सत्य का मार्ग देखते हैं, जो अल्लाह की प्रसन्नता की ओर ले जाता है, तो वे उसका पालन नहीं करते हैं और न उसमें कोई दिलचस्पी रखते हैं। और अगर वे अल्लाह के क्रोध की ओर ले जाने वाले गुमराही के रास्ते को देखते हैं, तो उसका अनुसरण करते हैं। यह मुसीबत जो उनपर आई, केवल इस कारण आई कि उन्होंने रसूलों के लाए हुए संदेश की सच्चाई को दर्शाने वाली अल्लाह की महान निशानियों को झुठलाया, और इसलिए कि उन्होंने उनपर सोच-विचार करने से उपेक्षा की।

A'raf 7:147

जिन लोगों ने हमारे रसूलों की सच्चाई को दर्शाने वाली हमारी आयतों को झुठलाया तथा क़ियामत के दिन अल्लाह से मिलने को झुठलाया, उनके वे कर्म व्यर्थ हो गए, जो इबादत के वर्ग से हैं। चुनाँचे उन्हें उनका प्रतिफल नहीं मिलेगा। क्योंकि उसकी शर्त अर्थ ईमान ही मौजूद नहीं है। और क़ियामत के दिन उन्हें उसी कुफ़्र और शिर्क का बदला दिया जाएगा, जो वे किया करते थे। और उसका बदला हमेशा के लिए जहन्नम में रहना है।

A'raf 7:148

जब मूसा अलैहिस्सलाम अपने पालनहार से बात करने के लिए गए, तो उनकी जाति के लोगों ने अपने गहनों से बछड़े की एक मूर्ति बना ली, जिसमें कोई आत्मा नहीं थी, जबकि उसकी एक आवाज़ थी। क्या उन्हें पता नहीं कि यह बछड़ा न तो उनसे बात करता है, न किसी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष भलाई का मार्ग दिखाता है और न उन्हें कोई लाभ पहुँचाता है या उनसे कोई हानि दूर करता है?! उन्होंने उसे पूज्य बना लिया तथा ऐसा करके वे अपने ऊपर अत्याचार करने वाले थे।

A'raf 7:149

और जब वे (अपने किए पर) लज्जित और चकित हुए तथा समझ गए कि वे अल्लाह के साथ बछड़े को पूज्य बनाने के कारण सही मार्ग से भटक गए हैं, तो अल्लाह से विनयपूर्वक प्रार्थना करते हुए कहने लगे : यदि हमारे पालनहार ने अपने आज्ञापालन की तौफ़ीक़ देकर हमपर दया नहीं की, और हमने बछड़े की पूजा करके जो पाप किया है, उसे क्षमा नहीं किया, तो हम निश्चित रूप से उन लोगों में से हो जाएँगे जिन्होंने अपनी दुनिया और आख़िरत दोनों का घाटा किया।

A'raf 7:150

जब मूसा अलैहिस्सलाम अपने पालनहार से वार्तालाप करके अपनी जाति के पास इस हाल में वापस आए कि वह उन्हें बछड़े की इबादत में लीन पाकर उन पर क्रोध और शोक से भरे हुए थे, तो कहने लगे : यह बहुत बुरी स्थिति है जिसके साथ तुमने (ऐ मेरी जाति के लोगो!) मेरे जाने के बाद मेरा उत्तराधिकार निभाया है, क्योंकि इसका परिणाम विनाश और दुर्भाग्य है। क्या तुम मेरी प्रतीक्षा करते-करते थक गए थे, तो बछड़े की पूजा करने लगे?! उन्होंने अपने क्रोध और शोक की तीव्रता से तख़्तियाँ फेंक दीं और अपने भाई हारून का सिर और दाढ़ी पकड़कर अपनी ओर खींचने लगे, क्योंकि वह उनके साथ रहे और उन्हें बछड़े की पूजा करते देखकर उन्हें नहीं रोका। ऐसे में हारून अलैहिस्सलाम ने मूसा अलैहिस्सलाम के आगे अपनी सफ़ाई पेश करते हुए और नर्म व्यवहार का मुतालबा करते हुए कहा : ऐ मेरी माँ के बेटे! मेरी जाति के लोगों ने मुझे कमज़ोर समझकर दबा दिया और निकट था कि मुझे मार डालते। अतः मुझे ऐसी सज़ा न दें जो मेरे शत्रुओं को प्रसन्न करे, और मुझपर अपने क्रोध के कारण मुझे उन लोगों में शामिल न करें, जो अल्लाह के सिवा अन्य की पूजा के कारण अत्याचारी हैं।

A'raf 7:151

मूसा ने अपने पालनहार से प्रार्थना करते हुए कहा : ऐ मेरे पालनहार! मुझे तथा मेरे भाई हारून को क्षमा कर दे और हमें अपनी दया में दाखिल कर दे और उसे इस तरह कर दे कि हर तरफ़ से हमें घेरे हुए हो। और तू (ऐ हमारे पालनहार!) हमपर हर दया करने वाले से अधिक दया करने वाला है।

A'raf 7:152

जिन लोगों ने बछड़े को पूज्य बनाकर उसकी पूजा शुरू कर दी, वे अपने पालनहार को क्रुद्ध करने और इसके द्वारा उसका अपमान करने के कारण, शीघ्र ही अपने पालनहार की ओर से सख़्त क्रोध और इस सांसारिक जीवन में अपमान से पीड़ित होंगे। और हम अल्लाह पर झूठ गढ़ने वालों को इसी तरह का बदला देते हैं।

A'raf 7:153

जिन लोगों ने बुरे कर्म किए, जैसे अल्लाह के साथ शिर्क और पाप करना आदि, फिर अल्लाह की ओर लौट आए, अर्थात् उसपर ईमान ले आए और जो पाप किया करते थे उससे रुक गए, तो (ऐ नबी!) निश्चय आपका पालनहार इस तौबा और शिर्क से ईमान की ओर तथा पापों से आज्ञाकारिता की ओर वापसी के बाद अवश्य उनके गुनाहों को माफ़ करने वाला, उनपर दया करने वाला है।

A'raf 7:154

फिर जब मूसा अलैहिस्सलाम का क्रोध शांत हो गया, तो उसने उन तख़्तियों को उठा लिया, जिन्हें उसने क्रोध में आकर फेंक दिया था। ये तख़्तियाँ पथभ्रष्टता से मार्गदर्शन और सत्य के बयान पर आधारित थीं, तथा उन लोगों के लिए दया पर आधारित थीं, जो अपने पालनहार का भय रखते और उसकी यातना से डरते हैं।

A'raf 7:155

और मूसा अलैहिस्सलाम ने अपनी जाति के सत्तर नेक लोगों को चुन लिया, ताकि वे अपने पालनहार से उस गुनाह की क्षमा माँगें, जो उनके मूर्खों ने बछड़े की पूजा की है। और अल्लाह ने उनसे एक निर्धारित समय का वादा किया जिसमें वे उपस्थित हों। लेकिन जब वे उपस्थित हुए, तो अल्लाह पर दुस्साहस कर बैठे और मूसा अलैहिस्सलाम से मुतालबा किया कि उन्हें आँखों से (खुल्लम-खुल्ला) अल्लाह का दर्शन कराएँ। इसपर उन्हें भूकंप ने अपनी चपेट में ले लिया और वे उसकी भयावहता से बेहोश होकर मर गए। ऐसे में मूसा ने अपने पालनहार से विनयपूर्वक विनती करते हुए कहा : ऐ मेरे पालनहार! अगर तू उन्हें तथा उनके साथ मुझे उनके यहाँ आने से पहले ही विनष्ट करना चाहता, तो विनष्ट कर देता। क्या तू हमें उसके कारण विनष्ट करता है जो हममें से अल्प बुद्धि वाले लोगों ने किया है? दरअसल मेरी जाति के लोगों का बछड़े की पूजा में लगना एक आज़माइश और परीक्षा है, जिसके द्वारा तू जिसे चाहता है, मार्ग से हटा देता है और जिसे चाहता है, सीधे रास्ते पर लगा देता है। तू ही हमारे मामले का संरक्षक है। अतः हमारे गुनाहों को क्षमा कर दे, और अपनी व्यापक दया के साथ हम पर दया कर। तू ही सबसे बेहतर पाप को क्षमा करने वाला और गुनाह को माफ़ करने वाला है।

A'raf 7:156

हमें उन लोगों में से बना दे, जिन्हें तूने इस जीवन में नेमतों और शांति से सम्मानित किया है और सत्कर्म की तौफ़ीक़ दी है, और आख़िरत में अपने उन नेक बंदों में से बना दे, जिनके लिए तूने जन्नत तैयार कर रखी है। निःसंदेह हमने तेरे समक्ष पश्चाताप किया और हम अपनी कमियों को स्वीकार करते हुए वापस आए हैं। इसपर अल्लाह ने फरमाया : मैं दुर्भाग्य के कारणों को अपनाने वाले लोगों में से जिसे चाहता हूँ, अपनी यातना से ग्रस्त करता हूँ, और मेरी दया इस दुनिया में हर चीज़ को व्याप्त है; अतः कोई भी प्राणी नहीं है परंतु अल्लाह की दया उसके पास पहुँच गई है और उसके अनुग्रह और उपकार ने उसे घेर रखा है। इसलिए मैं आख़िरत में अपनी दया को उन लोगों के लिए लिख दूँगा, जो अल्लाह से, उसके आदेशों का पालन करके और उसकी मना की हुई बातों से दूर रहकर डरते हैं, और जो अपने धन की ज़कात उसके हक़दारों को अदा करते हैं और जो हमारी निशानियों पर विश्वास रखते हैं।

A'raf 7:157

जो लोग मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का अनुसरण करते हैं, जो कि उम्मी नबी हैं, पढ़ना एवं लिखना नही जानते, बल्कि उनपर उनके पालनहार की ओर से वह़्य की जाती है, और वह वही हैं जिनके नाम, विवरण और नुबुव्वत का उल्लेख वे मूसा अलैहिस्सलाम पर उतरने वाली तौरात तथा ईसा अलैहिस्सलाम पर उतरने वाली इंजील में पाते हैं; जो उन्हें उन बातों का आदेश देते हैं जिनका अच्छा और भला होना सर्वज्ञात है, और उन्हें उन बातों से रोकते हैं, जिनके बुरे होने की पुष्टि शुद्ध बुद्धि और सही प्रकृति भी करती है, और उनके लिए खाने-पीने और औरतों से संबंधित उन आनंददायक चीजों को वैध ठहराते हैं, जिनमें कोई नुक़सान नहीं है और उनपर उनमें से उन चीज़ों को निषिद्ध ठहराते हैं, जो गंदी और अपवित्र हैं, और उनसे उन कष्टदायक आदेशों का बोझ हटाते हैं, जो उनपर डाले जाते थे, जैसे हत्यारे की हत्या कर देना, हत्या चाहे जान-बूझकर हो या ग़लती से। अतः जो बनी इसराईल तथा अन्य लोग उनपर ईमान लाए, उनका आदर एवं सम्मान किया, और उनसे दुश्मनी रखने वाले काफ़िरों के विरुद्ध उनकी मदद की, और उस क़ुरआन का अनुसरण किया, जो उनपर मार्गदर्शक प्रकाश के रूप में उतारा गया है; तो वही लोग सफल होने वाले हैं, जो अपनी अपेक्षित चीज़ों को प्राप्त करेंगे और अपने भय की चीज़ों से मुक्ति पाएँगे।

A'raf 7:158

(ऐ रसूल!) आप कह दें : ऐ लोगो! मैं तुम सभी की ओर, अरब हों या ग़ैर-अरब, उस अल्लाह का रसूल बनकर आया हूँ, जिसके ही हाथ में आकाशों का राज्य है और उसी के लिए धरती का राज्य है, उस पवित्र अल्लाह के सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं, वह मरे हुए लोगों को जीवित करता है, और जीवित लोगों को मौत देता है। इसलिए (ऐ लोगो!) अल्लाह पर ईमान लाओ और उसके रसूल मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर ईमान लाओ, जो ऐसे नबी हैं कि न पढ़ सकते हैं न लिख सकते हैं, बल्कि वह एक वह़्य के साथ आए हैं, जिसे उनका पालनहार उनकी ओर उतारता है, जो अल्लाह पर ईमान रखते हैं, तथा अपने ऊपर उतरने वाली पुस्तक पर ईमान रखते हैं और अपने पहले नबियों पर उतरने वाली पुस्तकों पर बिना किसी भेदभाव के ईमान रखते हैं, तथा जो कुछ वह अपने पालनहार की ओर से लाए हैं उसमें उनका अनुसरण करो, ताकि तुम वह रास्ता पा सको, जिसमें दुनिया एवं आख़िरत में तुम्हारा हित निहित है।

A'raf 7:159

और मूसा की जाति बनी इसराईल में कुछ लोग ऐसे हैं, जो सही धर्म पर क़ायम हैं, लोगों को उसी का मार्गदर्शन करते और न्याय के साथ निर्णय करते हैं। अतः वे अन्याय नहीं करते हैं।

A'raf 7:160

और हमने बनी इसराईल को बारह गोत्रों में बाँट दिया, और हमने मूसा की ओर वह़्य भेजी, जब उनकी जाति ने उनसे अल्लाह से यह दुआ करने के लिए कहा कि वह उन्हें पानी पिलाए : (ऐ मूसा!) अपनी लाठी को इस पत्थर पर मारो। चुनाँचे मूसा ने उसपर लाठी मारी, तो उसमें से उनके बारह क़बीलों की संख्या के अनुसार बारह स्रोत फूट निकले। उनमें से प्रत्येक क़बीले ने अपने पानी पीने का विशेष स्थान जान लिया। इसलिए कोई भी अन्य क़बीला उसके साथ उसमें साझी नहीं होता था। और हमने उनपर बादलों की छाया कर दी, जो उनके चलने के साथ चलते थे और उनके रुकने से रुक जाते थे। और उनपर शहद की तरह एक मीठा पेय तथा बटेर के समान स्वादिष्ट माँस वाला एक छोटा पक्षी उतारा। और हमने उनसे कहा : इन पवित्र चीज़ों में से, जो हमने तुम्हें प्रदान की हैं, खाओ। और उन्होंने अत्याचार और नेमतों की नाशुक्री करके और यथोचित उनका आदर न करके हमारा कुछ भी घाटा नहीं किया। परंतु वे स्वयं अपने हितों का घाटा करके अपने आप ही पर अत्याचार करते थे, जब उन्होंने अल्लाह के आदेश का उल्लंघन करके और उसकी नेमतों की अवमानना करके अपने आपको विनाश के घाट लगा दिया।

A'raf 7:161

और (ऐ रसूल!) उस समय को याद करें, जब अल्लाह ने बनी इसराईल से कहा कि बैतुल मक़्दिस में प्रवेश कर जाओ, और उसकी बस्ती के फलों को किसी भी स्थान से और जिस समय भी तुम चाहो, खाओ और कहो कि : ऐ हमारे पालनहार! हमारे पाप क्षमा कर दे। तथा द्वार में झुकते हुए, अपने पालनहार के लिए विनम्रता अपनाते हुए प्रवेश करो। यदि तुमने ऐसा किया, (तो) हम तुम्हारे गुनाह क्षमा कर देंगे और सत्कर्म करने वालों को दुनिया एवं आख़िरत की भलाइयाँ और अधिक प्रदान करेंगे।

A'raf 7:162

उनमें से अत्याचारियों ने, उस बात को बदल दिया जिसका उन्हें आदेश दिया गया था। चुनाँचे उन्होंने क्षमा का अनुरोध करने के बजाय "दाना बाली में" कहा। तथा उन्होंने उस कार्य को को भी बदल दिया जिसका उन्हें आदेश दिया गया था। चुनाँचे वे अल्लाह के लिए विनम्रता अपनाते हुए, अपने सिर को झुकाए हुए प्रवेश करने के बजाय अपनी पीठ के बल घिसटते हुए दाखिल हुए। अतः हमने उनके अत्याचार के कारण, उनपर आकाश से एक यातना भेज दी।

A'raf 7:163

तथा (ऐ रसूल!) इन यहूदियों को वह सज़ा याद दिलाने के लिए, जिसके साथ अल्लाह ने उनके पूर्वजों को दंडित किया था, उनसे उस बस्ती की कहानी पूछिए, जो समुद्र के निकट थी, जब उसके निवासी मनाही के बावजूद शनिवार के दिन शिकार करके अल्लाह की सीमाओं का उल्लंघन कर रहे थे। जब अल्लाह ने उनका इस तरह परीक्षण किया कि शनिवार के दिन मछलियाँ समुद्र की सतह पर प्रत्यक्ष होकर उनके पास आने लगीं, जबकि अन्य दिनों में वे उनके पास नहीं आती थीं। अल्लाह ने उन्हें इस प्रकार की परीक्षा में इसलिए डाला कि वे अल्लाह के आज्ञापालन के दायरे से निकल गए थे और गुनाह करने लगे थे। चुनाँचे उन्होंने मछलियों का शिकार करने के लिए यह चाल चली कि उन्होंने जाल लगा दिए और गड्ढे खोद लिए। इस तरह शनिवार के दिन मछलियाँ उन जालों फँस जाती थीं और गड्ढों में गिर जाती थीं। फिर वे रविवार के दिन उन्हें पकड़कर खा जाते थे।

A'raf 7:164

और (ऐ रसूल!) उस समय को याद करें, जब उनका एक समूह उन्हें इस बुराई से रोक रहा था और उन्हें इससे सावधान कर रहा था, तो एक अन्य समूह ने उससे कहा : तुम ऐसे लोगों को क्यों नसीहत करते हो, जिन्हें अल्लाह उनके गुनाहों के कारण इस दुनिया में नष्ट करने वाला है, या क़ियामत के दिन उन्हें कठोर यातना देने वाला है? इसपर नसीहत करने वालों ने कहा : हम उन्हें नसीहत, अल्लाह के समक्ष उज़्र करने के लिए कर रहे हैं, हम भलाई का आदेश देने और बुराई से रोकने के कर्तव्य का पालन कर रहे हैं, जिसका अल्लाह ने हमें आदेश दिया है। ताकि उसे त्याग करने पर वह हमारी पकड़ न करे, और इसलिए कि शायद वे नसीहत से लाभान्वित हों और जिस पाप में लिप्त हैं, उसे छोड़ दें।

A'raf 7:165

फिर जब अवज्ञाकारियों ने नसीहत करने वालों की नसीहत से मुँह फेर लिया और अपनी हरकत से बाज़ नहीं आए, तो हमने बुराई से रोकने वालों को यातना से बचा लिया और शनिवार के दिन शिकार करके अत्याचार करने वालों को, उनके अल्लाह की अवज्ञा करने और गुनाह पर अड़े रहने के कारण, गंभीर यातना में पकड़ लिया।

A'raf 7:166

फिर जब वे अभिमान एवं हठ के कारण अल्लाह की अवज्ञा करने में सीमा पार कर गए और नसीहत हासिल नहीं की, तो हमने उनसे कहा : ऐ अवज्ञाकारियो! तुम अपमानित बंदर हो जाओ। चुनाँचे वे हमारी मंशा के अनुसार बंदर हो गए। क्योंकि हमारा मामला यह है कि हम जब कसी चीज़ का इरादा करते हैं, तो उससे कहते हैं कि "हो जा" तो वह हो जाती है।

A'raf 7:167

और (ऐ रसूल!) उस समय को याद करें, जब अल्लाह ने स्पष्ट घोषणा कर दी कि वह क़ियामत के दिन तक यहूदियों पर ऐसे व्यक्ति को अवश्य प्रभुत्व प्रदान करता रहेगा, जो उन्हें उनके सांसारिक जीवन में अपमानित और तिरस्कृत करता रहे। निःसंदेह (ऐ रसूल!) आपका पालनहार अवज्ञाकारियों को शीघ्र दंड देने वाला है। यहाँ तक कि कभी-कभी वह उन्हें इसी दुनिया में दंड दे देता है। और वह अपने तौबा करने वाले बंदों की तौबा क़बूल करने वाला, उनपर दया करने वाला है।

A'raf 7:168

और हमने उन्हें धरती में बिखेर दिया और उन्हें उसमें कई संप्रदायों में विभाजित कर दिया, जबकि वे पहले एक साथ (इकट्ठा) थे। उनमें से कुछ लोग सदाचारी थे, जो अल्लाह के हक़ और उसके बंदों के हक़ अदा करने वाले थे। तथा उनमें से कुछ लोग बीच की राह चलने वाले थे, जबकि उनमें से कुछ लोग पापों के द्वारा अपने ऊपर अत्याचार करने वाले थे। और हमने उन्हें खुशहाली और तंगी के ज़रिए आज़माया, इस आशा में कि वे अपने रवैये से बाज़ आ जाएँ।

A'raf 7:169

फिर इन लोगों के बाद, दुष्ट लोग आए जो इनके उत्तराधिकारी बने। उन्होंने तौरात को अपने पूर्वजों से लिया। वे उसे पढ़ते हैं, लेकिन उसमें जो कुछ है, उसपर अमल नहीं करते हैं। वे अल्लाह की पुस्तक को विकृत करने और जो कुछ उसमें उतारा गया है उसके अलावा के साथ फैसला करने के लिए इस दुनिया के तुच्छ सामान को रिश्वत के रूप में लेते हैं। इसके बावजूद, वे यह आशा रखते हैं कि अल्लाह उनके पापों को क्षमा कर देगा। और यदि उनके पास दुनिया का तुच्छ सामान दोबारा आ जाए, तो वे इसे फिर से ले लेंगे। क्या अल्लाह ने इन लोगों से दृढ़ वचन नहीं लिया था कि वे अल्लाह पर बिना किसी विरूपण या परिवर्तन के, सत्य के अलावा कुछ नहीं कहेंगे?! उनका पुस्तक पर अमल न करना अज्ञानता के कारण नहीं था, बल्कि ज्ञान के बावजूद था। चुनाँचे उन्होंने पुस्तक में जो कुछ था, उसे पढ़ा था और उसकी उन्हें जानकारी थी। इसलिए उनका पाप अधिक गंभीर है। तथा आख़िरत का घर और आख़िरत के घर में जो स्थायी नेमतें हैं, उन लोगों के लिए क्षणभंगुर संपत्ति से बेहतर हैं, जो अल्लाह से, उसके आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर, डरते हैं। क्या ये लोग जो इस तुच्छ सामान को लेते हैं, इस बात को नहीं समझते कि अल्लाह ने डरने वालों के लिए आख़िरत में जो कुछ तैयार कर रखा है, वह सबसे बेहतर और अधिक स्थायी है।

A'raf 7:170

और जो लोग पुस्तक को दृढ़ता से पकड़ते हैं और उसमें जो कुछ है उसपर अमल करते हैं, तथा नमाज़ को उसके समय, उसकी शर्तों, उसकी वाजिबात (अनिवार्य कार्यों) और उसकी सुन्नतों की पाबंदी करते हुए अदा करते हैं, अल्लाह क़रीब ही उन्हें उनके कर्मों का बदला देगा। क्योंकि अल्लाह उस व्यक्ति का प्रतिफल बर्बाद नहीं करता, जिसका कार्य अच्छा हो।

A'raf 7:171

और (ऐ मुहम्मद!) उस समय को याद करें, जब हमने पर्वत को उखाड़कर बनी इसराईल के ऊपर उठा लिया, जब उन्होंने तौरात की शिक्षाओं को ग्रहण करने से उपेक्षा की। चुनाँचे पहाड़ एक बादल की तरह हो गया, जो उनके सिर पर छाया कर रहा हो। तथा उन्हें यक़ीन हो गया कि वह उनपर गिरने ही वाला है, और उनसे कहा गया : हमने जो कुछ तुम्हें दिया है, उसे पूरी मज़बूती और दृढ़ संकल्प के साथ थाम लो और उसमें मौजूद नियमों को, जो अल्लाह ने तुम्हारे लिए निर्धारित किए हैं, ठीक से याद रखो और उन्हें भूलो नहीं; इस आशा में कि ऐसा करने के बाद तुम अल्लाह से डरने लगो।

A'raf 7:172

तथा (ऐ मुहम्मद!) वह समय याद करें, जब आपके पालनहार ने आदम के पुत्रों की पीठों से उनकी संतति को निकाला और उनसे अपनी रुबूबीयत को साबित करने का इक़रार लिया, जो दरअसल उसने उनकी प्रकृति में रखी है कि वे उसे अपना सृष्टिकर्ता और पालनहार मानते हैं, यह कहते हुए कि "क्या मैं तुम्हारा पालनहार नहीं हूँ?" सबने कहा : "क्यों नहीं, तू हमारा पालनहार है।" अल्लाह ने कहा : "हमने तुम्हारा परीक्षण किया और तुमसे वचन लिया, ताकि तुम क़ियामत के दिन अपने विरुद्ध अल्लाह के तर्क का इनकार न कर दो और यह न कह दो कि हमें तो इसकी कोई ख़बर ही नहीं थी।"

A'raf 7:173

अथवा तुम यह तर्क प्रस्तुत करो कि दरअसल तुम्हारे बाप-दादा ही ने वचन तोड़ा और अल्लाह के साथ शिर्क किया था। और तुम उनकी देखा-देखी शिर्क की राह पर चल पड़े थे। इसलिए तुम यह कहो : तो क्या (ऐ हमारे पालनहार!) तू हमारी पकड़ उसके कारण करके हमें यातना देगा, जो हमारे उन पूर्वजों ने किया था जिन्होंने अल्लाह के साथ शिर्क करके अपने अच्छे कर्मों को नष्ट कर लिया था? अतः हम दोषी नहीं हैं, क्योंकि हमें कुछ पता नहीं था और हमने केवल अपने बाप-दादा की देखा-देखी ऐसा किया था।

A'raf 7:174

जिस प्रकार हमने झुठलाने वाली जातियों के परिणाम के बारे में आयतें खोल-खोल कर बयान की हैं, उसी तरह हम इन लोगों के लिए भी आयतें खोल-खोल कर बयान करते हें, इस आशा में कि वे अपने शिर्क से अल्लाह की तौह़ीद (एकेश्वरवाद) और अकेले उसी की इबादत करने की ओर पलट आएँ, जैसा कि उस वचन में आया है, जो उन्होंने अपने बारे में अल्लाह को दिया था।

A'raf 7:175

और (ऐ रसूल!) बनी इसराईल को, उन्हीं के समुदाय के उस व्यक्ति की खबर पढ़कर सुनाएँ, जिसे हमने अपनी आयतें दी थीं, जिन्हें उसने सीखा और उनसे प्रकट होने वाले सत्य को समझा, लेकिन उसने उन पर अमल नहीं किया, बल्कि उन्हें छोड़ दिया और उनसे किनारा कर लिया। अतः शैतान ने उसका पीछा किया और उसका साथी बन गया। अंततः वह पथभ्रष्टों और विनष्ट होने वालों में से हो गया, जबकि पहले मार्गदर्शित और मुक्ति पाने वालों में से था।

A'raf 7:176

और यदि हम उसे इन आयतों से लाभ पहुँचाना चाहते, तो इनके द्वारा उसे ऊँचाइयाँ प्रदान करते। वह इस तरह कि उसे इनपर अमल करने की तौफीक़ देते, तो वह दुनिया एवं आख़िरत में ऊँचाइयाँ प्राप्त कर लेता। लेकिन उसने वह रास्ता चुना जो उसकी विफलता की ओर ले जाता है, जब वह अपनी आख़िरत पर अपनी दुनिया को प्राथमिकता देते हुए संसार की इच्छाओं की ओर अग्रसर हो गया और अपने मन की असत्य आकांक्षाओं के पीछे चलने लगा। अतः दुनिया के अत्यधिक मोह के विषय में उसकी मिसाल कुत्ते की तरह है, जो हर हाल में हाँफता रहता है, यदि वह बैठा हुआ है तो भी हाँफता रहता है और अगर धुतकार दिया जाता है तो भी हाँफता रहता है। यह मिसाल उन लोगों की है जो हमारी आयतों को झुठलाने के कारण गुमराह होने वाले हैं।तो (ऐ रसूल!) आप उन्हें कहानियाँ सुनाएँ; इस आशा में कि वे सोच-विचार करें, और परिणाम स्वरूप, वे जिस गुमराही और झुठलाने में लिप्त हैं, उससे बाज़ आ जाएँ।

A'raf 7:177

उन लोगों से अधिक बुरा कोई नहीं है, जिन्होंने हमारे तर्कों और सबूतों को झुठला दिया और उनपर विश्वास नहीं किया। इस प्रकार वे खुद को विनाश के घाट उतार कर अपने ही ऊपर अत्याचार कर रहे थे।

A'raf 7:178

जिसे अल्लाह अपने सीधे मार्ग की ओर हिदायत की तौफ़ीक़ प्रदान कर दे, तो वही सही मायने में हिदायत पाने वाला है; और जिसे वह सीधे मार्ग से दूर कर दे, तो वही लोग हैं जो वास्तव में अपने हितों का नुक़सान करने वाले हैं, जो क़ियामत के दिन अपना और अपने परिवार का घाटा करेंगे। आगाह रहो! यही खुला हुआ घाटा है।

A'raf 7:179

और हमने बहुत-से जिन्नों और इनसानों को जहन्नम के लिए पैदा किए हैं; क्योंकि हम जानते हैं कि वे जहन्नम वालों का काम करेंगे। उनके पास दिल हैं जिनके साथ वे अपने लाभ एवं नुक़सान को नहीं समझते, उनकी आँखें हैं जिनके साथ वे आत्माओं और क्षितिज में अल्लाह की निशानियाँ नहीं देखते कि उनसे शिक्षा ग्रहण करते, और उनके पास कान हैं, जिनसे वे अल्लाह की आयतों को नहीं सुनते कि वे उसमें जो कुछ है उसपर चिंतन करते। जो लोग इन गुणों से विशेषित हैं, वे बुद्धिहीन होने में जानवरों की तरह हैं, बल्कि वे जानवरों की तुलना में अधिक गुमराह हैं। यही लोग हैं जो अल्लाह और आख़िरत के दिन पर ईमान लाने से ग़फ़लत में पड़े हुए हैं।

A'raf 7:180

सबसे अच्छे नाम अल्लाह ही के हैं, जो उसकी महिमा और पूर्णता को इंगित करते हैं। अतः अल्लाह से कुछ माँगते समय उनको वसीला बनाओ और उनके ज़रिए अल्लाह की प्रशंसा करो, और उन लोगों को छोड़ दो, जो इन नामों के मामले में सही रास्ते से हट जाते हैं, इस प्रकार कि उन्हें अल्लाह के अलावा के लिए ठहरा देते हैं, या अल्लाह से उनको अलग कर देते हैं, या उनके अर्थ को विकृत करते हैं, या अल्लाह के अलावा को उनके समान (सदृश्य) ठहराते हैं। हम इन नामों के विषय में सही रास्ते से हटने वालों को जल्द ही उनके कर्मों के कारण दर्दनाक यातना देंगे।

A'raf 7:181

और जिन लोगों को हमने पैदा किया, उनके अंदर कुछ लोग ऐसे हैं, जो खुद सत्य पर क़ायम रहते हैं और दूसरों को उसकी ओर आमंत्रित करते हैं, चुनाँचे वे भी सही रास्ते पर आ जाते हैं, और वे उसी के अनुसार न्याय के साथ निर्णय करते हैं। अतः वे अन्याय नहीं करते हैं।

A'raf 7:182

और जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठला दिया और उनपर ईमान नहीं लाए, बल्कि उनका इनकार कर दिया, हम उनके लिए आजीविका के दरवाज़े खोल देंगे। लेकिन यह उनके सम्मान के तौर पर नहीं होगा, बल्कि उन्हें ढील देने के लिए होगा; ताकि वे जिस गुमराही में लिप्त हैं उसी में पड़े रहें। फिर हामरी यातना अचानक उन्हें अपनी पकड़ में ले ले।

A'raf 7:183

और मैं उनकी सज़ा को टालता रहूँगा, यहाँ तक कि वे समझने लगेंगे कि उनपर यातना नहीं आने वाली। परिणामस्वरूप वे अपने कुफ़्र और झुठलाने का क्रम जारी रखेंगे, यहाँ तक कि उनपर यातना कई गुना कर दी जाएगी। निश्चय मेरा उपाय बड़ा मज़बूत है। चुनाँचे मैं उनके लिए उपकार ज़ाहिर करता हूँ, लेकिन मैं उनकी विफलता चाहता हूँ।

A'raf 7:184

और क्या अल्लाह की आयतों और उसके रसूल को झुठलाने वाले इन लोगों ने अपनी बुद्धि को काम में लाते हुए ग़ौर नहीं किया कि उनके लिए यह स्पष्ट हो जाता कि मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पागल नहीं हैं। वह तो केवल अल्लाह के रसूल हैं, जिन्हें अल्लाह ने अपनी यातना से खुले रूप से सावधान करने के लिए भेजा है।

A'raf 7:185

क्या इन लोगों ने आकाशों तथा धरती में अल्लाह के राज्य को शिक्षा ग्रहण करने के उद्देश्य से नहीं देखा? और उन दोनों के अंदर अल्लाह ने जो जीव और निर्जीव चीज़ें पैदा की हैं, उनपर निगाह नहीं डाली? और अपने निर्धारित समय (आयु) पर ग़ौर नहीं किया, जिसका अंत हो सकता है बहुत निकट हो, इसलिए समय निकलने से पहले तौबा कर लेते? जब वे क़ुरआन और उसके वादों और धमकियों पर ईमान नहीं लाए, तो उसके अलावा किस किताब पर ईमान लाएँगे?

A'raf 7:186

जिसे अल्लाह सत्य की ओर हिदायत से विफल कर दे और उसे सीधे रास्ते से भटका दे, तो उसके लिए कोई मार्गदर्शक नहीं है, जो उसकी ओर उसका मार्गदर्शन कर सके।और अल्लाह उन्हें उनकी गुमराही और कुफ़्र में छोड़ देता है कि वे भटकते फिरते हैं, उन्हें कोई रास्ता सुझाई नहीं देता।

A'raf 7:187

(ऐ नबी!) ये हठी झुठलाने वाले आपसे क़ियामत के बारे में पूछते हैं कि वह किस समय घटित होगी और उसका सटीक ज्ञान कब होगा? आप कह दें कि उसका ज्ञान न तो मेरे पास है और न मेरे अलावा किसी और के पास है। उसकी जानकारी केवल अल्लाह के पास है। उसे उसके निर्धारित समय पर केवल अल्लाह ही प्रकट करेगा। उसके प्रकट होने का मामला आकाश वालों तथा धरती वालों से छिपा है। वह तुम्हारे पास अचानक ही आएगी। वे आपसे क़ियामत के बारे में ऐसे पूछ रहे हैं, जैसे कि आप उसके बारे में जानने के लिए उत्सुक हैं। हालाँकि उन्हें यह पता ही नहीं कि आप अपने रब से पूरी तरह अवगत होने के कारण उससे क़ियामत के बारे में नहीं पूछते हैं। (ऐ मुहम्मद!) उनसे कह दें कि क़ियामत की जानकारी केवल अल्लाह ही के पास है, लेकिन अधिकतर लोग इस बात से अवगत नहीं हैं।

A'raf 7:188

(ऐ मुहम्मद!) आप कह दें : मैं न अपने लिए कोई भलाई प्राप्त कर सकता हूँ और न अपने आपसे कोई बुराई दूर कर सकता हूँ, सिवाय इसके कि अल्लाह चाहे। यह काम केवल अल्लाह का है। मैं केवल वही जानता हूँ, जो अल्लाह ने मुझे सिखाया है। चुनाँचे मैं ग़ैब की बात नहीं जानता। अगर मैं ग़ैब की बात जानता होता, तो चीज़ों को उनके होने से पहले जानने और उनके परिणाम से अवगत होने की वजह से अवश्य उन कारणों को अपनाया होता, जिन्हें मैं जानता हूँ कि वे मेरे हितों की पूर्ति करते और मुझसे बुराइयों को दूर करते हैं। मैं तो केवल अल्लाह की ओर से भेजा हुआ एक रसूल हूँ। उसकी दुखदायी यातना से डराता हूँ और उन लोगों को उसके उदार प्रतिफल की शुभ सूचना देता हूँ, जो इस बात पर विश्वास रखते हैं कि मैं अल्लाह का रसूल हूँ और मैं जो कुछ लेकर आया हूँ, उसे सच्चा मानते हैं।

A'raf 7:189

वही अल्लाह है, जिसने तुम्हें (ऐ पुरुषो और महिलाओ!) एक ही जान अर्थात् आदम अलैहिस्सलाम से पैदा किया और आदम अलैहिस्सलाम से उनकी पत्नी ह़व्वा को पैदा किया। ह़व्वा को आदम अलैहिस्सलाम की पसली से पैदा किया, ताकि आदम अलैहिस्सलाम उनसे सुकून हासिल करें और संतुष्ट रहें। फिर जब एक पति ने अपनी पत्नी के साथ संभोग किया, तो उसे हल्का सा गर्भ ठहर गया, जिसे वह महसूस नहीं करती थी। क्योंकि वह अपनी शुरुआत में था। वह अपनी इस गर्भावस्था पर रहते हुए अपनी ज़रूरत के काम-काज करती रही, उसे कोई बोझ महसूस नहीं होता था। फिर उसके पेट में गर्भ के बड़ा होने पर, उसे भारीपन महसूस हुआ, तो पति-पत्नी ने मिलकर अल्लाह से दुआ करते हुए कहा : (ऐ हमारे पालनहार!) अगर तूने हमें एक स्वस्थ बच्चा प्रदान किया, तो हम तेरी नेमतों का शुक्रिया अदा करने वालों में से होंगे।

A'raf 7:190

जब अल्लाह ने उन दोनों की प्रार्थना स्वीकार करके उन्हें एक स्वस्थ बच्चा प्रदान कर दिया, तो उन्होंने अल्लाह की दी हुई संतान में उसके साझीदार बना लिए। चुनाँचे उन्होंने अपने बेटे को अल्लाह के अलावा अन्य का बंदा बना दिया और उसका नाम अब्दुल ह़ारिस (हारिस का बंदा) रख दिया। तो अल्लाह हर साझी व शरीक से बहुत ऊँचा है। क्योंकि वह पालनहार और पूज्य होने में अकेला है।

A'raf 7:191

क्या वे इन मूर्तियों और इनके सिवा अन्य चीज़ों को इबादत में अल्लाह का साझी बनाते हैं, जबकि वे जानते हैं कि ये मूर्तियाँ कुछ पैदा नहीं करतीं, कि पूजा की हक़दार हों। बल्कि, वे स्वयं पैदा की गई हैं। तो फिर वे इन्हें कैसे अल्लाह का साझी ठहराते हैं?

A'raf 7:192

ये पूज्य न अपने पूजकों की सहायता कर सकते हैं और न खुद अपनी सहायता कर सकते हैं, तो फिर वे इनकी इबादत कैसे करते हैं?!

A'raf 7:193

और अगर तुम (ऐ मुश्रिको!) इन मूर्तियों को, जिन्हें तुम अल्लाह को छोड़कर पूज्य बनाते हो, हिदायत की ओर बुलाओ, तो वे तुम्हें उसका जवाब नहीं देंगी जिनकी ओर तुमने उन्हें बुलाया है और न ही वे तुम्हारा अनुसरण करेंगी। अतः उनके निकट तुम्हारा उन्हें पुकारना या तुम्हारा चुप रहना दोनों बराबर है। क्योंकि वे मात्र निर्जीव वस्तुएं हैं; जो न समझती हैं, न सुनती हैं और न बोलती हैं।

A'raf 7:194

निःसंदेह जिन लोगों की तुम (ऐ मुश्रिको!) अल्लाह के सिवा इबादत करते हो, वे अल्लाह ही के पैदा किए हुए हैं और उनका मालिक भी वही है। इस तरह वे इस बारे में तुम्हारे ही जैसे हैं। बल्कि तुम उनसे उत्तम स्थिति में हो। क्योंकि तुम ज़िंदा हो, बोलते हो, चलते-फिरते हो, सुनते हो और देखते हो। जबकि तुम्हारी मूर्तियों के पास ये शक्तियाँ नहीं हैं। अतः तुम उनको पुकारो और वे तुम्हारी पुकार का जवाब दें, यदि तुम उनके बारे में अपने दावे में सच्चे हो।

A'raf 7:195

क्या इन मूर्तियों के, जिन्हें तुमने पूज्य बना रखा है, पाँव हैं, जिनसे वे चलती हैं, कि तुम्हारी ज़रूरतें पूरी करें? या उनके हाथ हैं, जिनसे वे तुम्हारा पूरी शक्ति से बचाव करें? या उनकी आँखें हैं, जिनसे वे उन चीज़ों को देखती हैं, जिन्हें तुम नहीं देख सकते कि तुम्हें उनसे अवगत करा सकें? या उनके कान हैं, जिनसे वे उन बातों को सुन लेती हैं, जिन्हें तुम नहीं सुन सकते, तो वे तुम्हें उनसे सूचित कर देती हैं? अगर वे इन सारी चीज़ों से खाली हैं, तो फिर तुम उन्हें लाभ प्राप्त करने या हानि से बचने की आशा में कैसे पूजते हो?! (ऐ रसूल!) आप इन मुश्रिकों से कह दें : उन लोगों को पुकारो, जिन्हें तुमने अल्लाह के बराबर बना रखा है, फिर तुम मुझे नुक़सान पहुँचाने का उपाय करो और मुझे कोई मोहलत न दो।

A'raf 7:196

वास्तव में, मेरा मददगार और सहायक अल्लाह है, जो मेरा संरक्षण करता है। अतः मैं उसके अलावा किसी और से आशा नहीं रखता, और मुझे तुम्हारी मूर्तियों से कुछ भी डर नहीं है। क्योंकि वही (अल्लाह) है जिसने मुझपर क़ुरआन को लोगों के मार्गदर्शन के लिए उतारा है और वही अपने सत्कर्मी बंदों के सारे काम संभालता है। चुनाँचे उनका संरक्षण करता और उनकी सहायता करता है।

A'raf 7:197

और इन मूर्तियों में से जिन्हें (ऐ मुश्रिको!) तुम पुकारते हो, वे न तुम्हारी सहायता करने में सक्षम हैं, और न ही वे स्वयं का समर्थन करने में सक्षम हैं। क्योंकि वे असहाय हैं। तो फिर तुम अल्लाह को छोड़कर उन्हें कैसे पुकारते हो?!

A'raf 7:198

और (ऐ मुश्रिको!) यदि तुम अपनी मूर्तियों को, जिन्हें तुम अल्लाह के सिवा पूजते हो, सीधी राह की ओर बुलाओ, तो वे तुम्हारे बुलावे को नहीं सुनेंगी। और तुम उन्हें देखोगे कि वे तुम्हारी ओर तुम्हारी ही बनाई हुई आँखों से देख रही हैं, हालाँकि वे निर्जीव चीज़ें हैं, जो नहीं देखती हैं। दरअसल मुश्रिक लोग मनुष्यों या जानवरों के रूप में मूर्तियाँ बनाते थे, जिनके हाथ, पैर और आँखें होती थीं। लेकिन वे बेजान होती थीं, न उनके अंदर जीवन होता था न हरकत।

A'raf 7:199

(ऐ रसूल!) आप लोगों के उन कार्यों और व्यवहारों को स्वीकार करें, जो वे खुशी मन से करें और जो उनके लिए आसान हों। उनपर ऐसे कार्य और व्यवहार का बोझ न डालें जिनकी उनके स्वभाव अनुमति नहीं देते हैं। क्योंकि यह उन्हें आपसे दूर करने का कारण बनेगा। और आप हर सुंदर बात तथा अच्छे कार्य का आदेश दें और अज्ञानी लोगों से उपेक्षा करें। इसलिए उनकी अज्ञानता का जवाब अज्ञानता से न दें। चुनाँचे जो आपको कष्ट दे, आप उसे कष्ट न दें और जो आपको वंचित करे, आप उसे वंचित न करें।

A'raf 7:200

और यदि (ऐ रसूल!) आप महसूस करें कि शैतान आपके दिल में कोई ग़लत ख़याल डाल रहा है या आपको सत्कर्म से रोकने का प्रयास करता है, तो अल्लाह का शरण लें और उसे मज़बूती से पकड़ लें। क्योंकि वह आपकी बात को सुनने वाला और आपके शरण लेने को जानने वाला है। अतः वह शैतान से आपकी रक्षा करेगा।

A'raf 7:201

वास्तव में, जो लोग अल्लाह से, उसके आदेशों का पालन करके और उसकी मना की हुई बातों से दूर रहकर, डरते हैं, जब वे शैतान की ओर से किसी बुरे ख़याल से पीड़ित होकर गुनाह कर बैठते हैं; तो वे अल्लाह की महानता, अवज्ञाकारियों के लिए उसकी सज़ा और आज्ञाकारियों के लिए उसके प्रतिफल को याद करते हैं। इसलिए वे अपने गुनाहों से तौबा करके अपने पालनहार की ओर लौट जाते हैं। फिर क्या देखते हैं कि वे सत्य मार्ग पर जम गए, ग़फ़लत से जाग गए और गुनाह से बाज़ आ गए।

A'raf 7:202

दुराचारियों और काफ़िरों जैसे शैतान के भाइयों को, शैतान एक के बाद एक पाप में लिप्त करके उन्हें गुमराही में बढ़ाते जाते हैं। वे रुकने का नाम ही नहीं लेते, न शैतान बहकाने और गुमराह करने से और न ही दुराचारी लोग उनकी बात मानने और बुराई करने से।

A'raf 7:203

जब (ऐ रसूल!) आप कोई आयत (निशानी) लाएँ, तो वे आपको झुठला देते हैं और उससे मुँह फेर लेते हैं। और अगर आप उनके पास कोई आयत न लाएँ, तो वे कहते हैं : आपने अपनी ओर से कोई आयत क्यों न गढ़ ली? आप (ऐ रसूल!) ऐसे लोगों से कह दें : मुझे यह अधिकार नहीं कि मैं अपनी ओर से कोई आयत ले आऊँ। मैं तो केवल उसी का अनुसरण करता हूँ, जो अल्लाह मेरी ओर वह़्य (प्रकाशना) करता है। यह क़ुरआन जो मैं तुम्हारे सामने पढ़ता हूँ, अल्लाह की ओर से, जो तुम्हारा रचयिता और तुम्हारे सब काम संभालने वाला है, प्रमाण और दलील है, तथा उसके मोमिन बंदों के लिए मार्गदर्शन और दया है। रही बात ग़ैर मोमिनों की, तो वे गुमराह और दुर्भाग्य वाले लोग हैं।

A'raf 7:204

और जब क़ुरआन पढ़ा जाए, तो उसकी तिलावत को ध्यानपूर्वक सुनो तथा न बात करो और न किसी अन्य काम में व्यस्त हो, उम्मीद है अल्लाह तुमपर दया करे।

A'raf 7:205

और (ऐ नबी!) अल्लाह को, जो आपका पालनहार है, विनयपूर्वक और डरते हुए याद करें, और दुआ के समय अपनी आवाज़ मध्यम रखें, न बहुत ऊँची, न बहुत नीची, दिन के प्रथम और उसके अंतिम भाग में। क्योंकि इन दोनों समय की बड़ी फ़ज़ीलत है। और आप उन लोगों में से न हों, जो अल्लाह की याद से ग़ाफ़िल रहते हैं।

A'raf 7:206

निःसंदेह जो फ़रिश्ते (ऐ रसूल!) आपके पालनहार के पास हैं, वे उसकी इबादत (वंदना) से अभिमान नहीं करते, बल्कि उसके आज्ञापालन में समर्पित रहते हैं, उससे थकते नहीं हैं। तथा वे दिन-रात अल्लाह को उन बातों से पवित्र ठहराते रहते हैं, जो उसके लायक़ नहीं हैं और केवल उसी के आगे सजदा करते हैं।

Enfal 8:1

(ऐ रसूल!) आपके साथी आपसे ग़नीमतों (युद्ध में प्राप्त होने वाले धन) के विषय में पूछते हैं कि उन्हें कैसे विभाजित किया जाएगा? और किन लोगों में वितरण किया जाएगा? (ऐ रसूल!) उनके प्रश्न का उत्तर देते हुए कह दें : ग़नीमतें (युद्ध में प्राप्त धन) अल्लाह और उसके रसूल के लिए हैं और उन्हें खर्च करने और बाँटने के विषय में निर्णय का अधिकार अल्लाह और उसके रसूल का है। तुम्हारा काम केवल मान लेना और आज्ञापालन करना है। अतः (ऐ मोमिनो!) तुम अल्लाह से, उसके आदेशों का पालन करके और उसकी मना की हुई बातों से दूर रहकर, डरो। तथा तुम्हारे बीच जो संबंध-विच्छेद और वियोग है, उसे आपसी प्रेम, परस्पर संपर्क (संयोग), अच्छे शिष्टाचार और क्षमा के द्वारा सुधार लो। और अगर तुम सच में ईमान वाले हो, तो अल्लाह और उसके रसूल की आज्ञा का पालन करो। क्योंकि ईमान आज्ञापालन करने और गुनाहों से दूर रहने की प्रेरणा देता है। यह प्रश्न बद्र के युद्ध के बाद किया गया था।

Enfal 8:2

वास्तव में, ईमान वाले वही लोग हैं कि जब अल्लाह का वर्णन किया जाए, तो उनके दिल काँप उठते हैं, और उनके दिल और शरीर आज्ञापालन की ओर आकर्षित हो जाते हैं, और जब उनके सामने अल्लाह की आयतें पढ़ी जाती हैं, तो उनपर चिंतन करते हैं, जिसके फलस्वरूप उनका ईमान बढ़ जाता है, तथा वे अपने हितों को प्राप्त करने और अपनी बुराइयों को दूर करने में केवल अपने पालनहार ही पर भरोसा करते हैं।

Enfal 8:3

जो लोग समय पर पूर्ण रूप से नमाज़ अदा करते हैं और हमारे दिए हुए धन से उन जगहों में खर्च करते हैं, जहाँ खर्च करना वाजिब या मुस्तहब है।

Enfal 8:4

इन्हीं विशेषताओं के मालिक लोग सच्चे ईमान वाले हैं; क्योंकि उनके अंदर ईमान और इस्लाम की ज़ाहिरी विशेषताएँ मौजूद हैं। और उनका बदला उनके पालनहार के पास ऊँचे-ऊँचे घर, उनके गुनाहों की क्षमा और सम्मानित (उत्तम) जीविका है। ये वही नेमतें हैं, जो अल्लाह ने उनके लिए तैयार कर रखी हैं।

Enfal 8:5

जिस प्रकार अल्लाह पाक ने, युद्ध में प्राप्त धन को विभाजित करने का मामला, उसके विभाजन के बारे में तुम्हारी असहमति और विवाद के बाद, तुम्हारे हाथ से ले लिया और उसे अल्लाह एवं उसके रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के अधिकार में दे दिया, उसी तरह आपके पालनहार ने (ऐ रसूल!) आपपर वह़्य उतारकर, बहुदेववादियों से युद्ध करने के लिए आपको मदीना से निकलने का आदेश दिया है, हालाँकि मोमिनों के एक गिरोह को यह पसंद नहीं था।

Enfal 8:6

(ऐ रसूल!) मोमिनों का यह समूह बहुदेववादियों से युद्ध करने के बारे में आपके साथ बहस कर रहा था, जबकि उनके लिए यह स्पष्ट हो चुका था कि युद्ध होनी ही है। ऐसा मालूम हो रहा था कि वे मौत की ओर हाँके जा रहे हैं और वे उसे अपनी आँखों से देख रहे हैं। ऐसा इसलिए था कि उन्हें युद्ध के लिए निकलना सख़्त नापसंद था; क्योंकि उन्होंने उसके लिए कोई तैयारी नहीं की थी।

Enfal 8:7

और ऐ (झगड़ने वाले मोमिनो!) उस समय को याद करो, जब अल्लाह तुम्हें वचन दे रहा था कि तुम्हें बहुदेववादियों के दो गिरोहों में से एक पर विजय ज़रूर प्राप्त होगी। यह गिरोह या तो काफ़िला की शक्ल में होगा, जिसपर क़ब्ज़ा करके तुम उसके साथ मौजूद धन को ग़नीमत के धन के तौर पर प्राप्त कर लोगे, या मक्का से आए हुए जत्थे की शक्ल में होगा, जिससे लड़ाई करके उसपर विजय प्राप्त करोगे। और तुम चाहते थे कि तुम्हारा सामना क़ाफ़िले ही से हो, क्योंकि उसे बिना किसी लड़ाई के अपने नियंत्रण में करना आसान था। और अल्लाह चाहता था कि तुम्हें लड़ने का आदेश देकर सत्य को सत्य कर दिखाए; ताकि तुम बहुदेववादियों के सरदारों को क़त्ल करो, और उनमें से बहुतों को बंदी बना लो, और इस तरह इस्लाम की शक्ति का प्रदर्शन हो।

Enfal 8:8

ताकि अल्लाह इस्लाम और मुसलमानों को विजय प्रदान करके सत्य को सत्य कर दिखाए, इस प्रकार कि उसकी सत्यता के सबूत प्रदर्शित कर दे। तथा असत्य के असत्य होने के प्रमाण सामने लाकर उसकी असत्यता को साबित कर दे। यद्यपि काफ़िरों को यह बुरा लगे, लेकिन अल्लाह इसे प्रकट ही करने वाला था।

Enfal 8:9

बद्र के दिन को याद करो, जब तुमने अल्लाह से अपने दुश्मन के विरुद्ध सहायता माँगी, तो अल्लाह ने तुम्हारी दुआ क़बूल कर ली कि वह एक हज़ार फ़रिश्तों के द्वारा (ऐ मोमिनो!) तुम्हारी मदद करने वाला है, जो एक-दूसरे के पीछे आएँगे।

Enfal 8:10

अल्लाह ने फ़रिश्तों के द्वारा सहायता को तुम्हारे लिए (ऐ मोमिनो!) केवल इस बात की शुभ सूचना बनाया है कि वह तुम्हारे दुश्मनों के विरुद्ध तुम्हारी मदद करने वाला है, और ताकि मदद के यक़ीन के साथ तुम्हारे दिलों को संतोष प्राप्त हो जाए। और (दरअसल) विजय संख्याओं की अधिकता और उपकरणों की प्रचुरता के आधार पर प्राप्त नहीं होती, बल्कि विजय अल्लाह की ओर से मिलती है। निःसंदेह अल्लाह अपने राज्य में प्रभुत्वशाली है, उसपर किसी का ज़ोर नहीं चलता। अपने विधान और निर्णय (नियति) में हिकमत वाला है।

Enfal 8:11

(ऐ मोमिनो!) उस समय को याद करो, जब अल्लाह तुम्हें अपने दुश्मन से होने वाले भय को दूर करने के लिए तुमपर ऊँघ डाल रहा था, तथा तुमपर आकाश से जल बरसा रहा था; ताकि तुम्हें मलिनता से पवित्र कर दे, और ताकि तुमसे शैतान के बुरे ख़यालों को दूर कर दे, और ताकि उसके द्वारा तुम्हारे दिलों को सुदृढ़ कर दे, ताकि मुठभेड़ के समय तुम्हारे शरीर स्थिर रहें, और ताकि उसकी वजह से रेतीली ज़मीन को ठोस करके तुम्हारे क़दमों को जमा दे ताकि उसमें तुम्हारे पाँव न धँसें।

Enfal 8:12

(ऐ नबी!) जब आपका पालनहार उन फ़रिश्तों की ओर वह़्य कर रहा था, जिन्हें बद्र के दिन मोमिनों की सहायता के लिए भेजा था कि (ऐ फ़रिश्तो!) मैं मदद और समर्थन के द्वारा तुम्हारे साथ हूँ। अतः अपने दुश्मनों से लड़ने में मोमिनों के संकल्प को मज़बूत करो। मैं शीघ्र ही काफ़िरों के दिलों में अत्यधिक भय डाल दूँगा। इसलिए तुम (ऐ मोमिनो!) काफ़िरों की गरदनें उड़ाते जाओ, ताकि उनका काम तमाम हो जाए, और उनके जोड़ों और शरीर के अंगों पर वार किए जाओ, ताकि तुमसे युद्ध करने से असमर्थ हो जाएँ।

Enfal 8:13

काफ़िरों के क़त्ल किए जाने और उनके अंगों के भंग किए जाने का कारण यह है कि उन्होंने अल्लाह और उसके रसूल का विरोध किया। चुनाँचे उन्हें जो आदेश दिया गया था, उसका उन्होंने पालन नहीं किया, और उन्हें जिस चीज़ से मना किया गया था, उससे नहीं रुके। तथा जो कोई भी अल्लाह और उसके रसूल का विरोध करे, तो अल्लाह उसे दुनिया में क़त्ल और क़ैद, तथा आख़िरत में जहन्नम की आग के द्वारा, कठोर यातना देने वाला है।

Enfal 8:14

(ऐ अल्लाह और उसके रसूल का विरोध करने वालो!) यह उक्त सज़ा तुम्हारे लिए है। तो इसे दुनिया के जीवन में अग्रिम ही चखो, और आख़िरत में तुम्हारे लिए आग की यातना है, यदि तुम अपने कुफ़्र और हठ की अवस्था में मर गए।

Enfal 8:15

ऐ अल्लाह पर ईमान लाने और उसके रसूल का अनुसरण करने वालो! जब युद्ध के मैदान में मुश्रिकों से आमने-सामना हो जाओ, तो उनसे हार न मानो और उनसे पीठ फेरकर न भागो, बल्कि उनके सामने डट जाओ और धैर्य के साथ उनका मुक़ाबला करो। क्योंकि अल्लाह अपनी मदद और समर्थन के द्वारा तुम्हारे साथ है।

Enfal 8:16

और जो व्यक्ति उनसे भागते हुए अपनी पीठ फेरे, जबकि वह उनसे लड़ाई के लिए मुड़ने वाला नहीं है कि वह चाल के तौर पर उनसे भागने का दिखावा करे, जबकि वह पलटकर उनपर हमला करना चाहता हो, या वह मदद लेने के लिए मुसलमानों के किसी उपस्थित समूह में शामिल होने वाला नहीं है, तो निश्चय वह अल्लाह के प्रकोप के साथ लौटा और उसका हक़दार हो गया, और आख़िरत में उसका ठिकाना जहन्नम है और उसका वह ठिकाना बहुत बुरा है और उसके पलटने की वह जगह बहुत बुरी है।

Enfal 8:17

(ऐ मोमिनो!) तुमने बद्र के दिन मुश्रिकों को अपनी ताक़त और शक्ति से नहीं मारा, बल्कि अल्लाह ने इसमें तुम्हारी मदद की। और (ऐ नबी!) जब आपने मुश्रिकों की ओर मिट्टी फेंकी, तो आपने मिट्टी नहीं फेंकी, बल्कि अल्लाह ही ने फेंकी, जब आपकी फेंकी हुई मिट्टी को उनके पास पहुँचा दिया। और ताकि वह मोमिनों को अपने इस उपकार के साथ आज़माए कि उसने उन्हें संख्याबल और उपकरणों की कमी के बावजूद उनके दुश्मन पर विजय प्रदान किया ताकि वे उसका शुक्रिया अदा करें। निश्चय अल्लाह तुम्हारी दुआओं और बातों को सुनने वाला, तथा तुम्हारे कर्मों और हितों को जानने वाला है।

Enfal 8:18

यह उल्लिखित बातें, जैसे मुश्रिकों को क़त्ल करना, उनकी ओर मिट्टी फेंकना यहाँ तक कि वे पराजित हो गए और पीठ फेरकर भाग गए, तथा मुसलमानों को उनके दुश्मन पर विजय प्रदान करना; यह सब अल्लाह की ओर से है। और अल्लाह काफ़िरों की उस चाल को कमज़ोर कर देने वाला है, जो वे इस्लाम के खिलाफ़ चल रहे हैं।

Enfal 8:19

(ऐ बहुदेववादियो!) अगर तुम यह चाहते हो कि अल्लाह अपराधियों व अत्याचारियों पर अपनी यातना उतार दे, तो अल्लाह ने तुमपर वह यातना उतार दी है, जो तुमने माँगी थी। क्योंकि वह तुम्हें ऐसी सज़ा दे चुका है, जो तुम्हारे लिए शिक्षाप्रद और अल्लाह का भय रखने वालों के लिए नसीहत (इबरत) का कारण है। और यदि तुम इसकी माँग से बाज़ आ जाओ, तो यह तुम्हारे लिए उत्तम है। क्योंकि हो सकता है कि अल्लाह तुम्हें मोहलत दे दे और तुमसे बदला लेने में जल्दी न करे। और अगर तुम दोबारा उसकी माँग करने और मुसलमानों से युद्ध करने की ओर लौट आए, तो हम फिर से तुम्हें यातना में डालेंगे और मोमिनों को विजय प्रदान करेंगे। और तुम्हारा जत्था और तुम्हारे सहायक, चाहे वे बहुत अधिक संख्या एवं उपकरण वाले हों और ईमान वालों की संख्या कम हो, तुम्हारे कुछ काम न आएँगे। और इसलिए कि निश्चय अल्लाह की सहायता और समर्थन मोमिनों के साथ है। और जिसके साथ अल्लाह हो, उसे कोई पराजित नहीं कर सकता।

Enfal 8:20

ऐ अल्लाह पर ईमान लाने और उसके रसूल का अनुसरण करने वालो! अल्लाह की आज्ञा का पालन और उसके रसूल की आज्ञा का पालन, उसके आदेशों पर अमल करके और उसकी मना की हुई चीज़ों से दूर रहकर, करो। तथा उसके आदेश की अवहेलना करके और उसके मना किए हुए कार्य को करके, उससे मुँह न फेरो, जबकि तुम अल्लाह की आयतों को सुनते हो, जो तुम्हारे सामने पढ़ी जाती हैं।

Enfal 8:21

और (ऐ मोमिनो!) तुम उन मुनाफ़िक़ों और मुश्रिकों की तरह न हो जाओ, जिनके सामने हमारी आयतें पढ़ी जाती हैं तो वे कहते हैं : हमने अपने कानों से वह क़ुरआन सुना, जो हमारे सामने पढ़ा जाता है, हालाँकि वे चिंतन करने और उपदेश ग्रहण करने के उद्देश्य से नहीं सुनते, कि जो कुछ उन्होंने सुना है उससे लाभ उठाएँ।

Enfal 8:22

अल्लाह के निकट धरती पर चलने वाली सारी मख़लूक़ में सबसे बुरे वे बहरे हैं, जो सत्य को स्वीकार करने के लिए नहीं सुनते, वे गूँगे हैं, जो बोल नहीं पाते। क्योंकि वे ऐसे लोग हैं जो अल्लाह के आदेशों और निषेधों को नहीं समझते।

Enfal 8:23

और अगर अल्लाह जानता कि इन झुठलाने वाले बहुदेववादियों के अंदर कोई भलाई है, तो उन्हें अवश्य इस तरह सुना देता कि वे उससे लाभ उठाते और उसके तर्कों और प्रमाणों को समझते, लेकिन उसे पता है कि उनके अंदर कोई भलाई नहीं है। और अगर (मान लिया जाए कि) अल्लाह उन्हें सुना देता, तो भी वे हठ के कारण ईमान से फिर जाते, इस हाल में कि वे मुँह फेरने वाले होते।

Enfal 8:24

ऐ अल्लाह पर ईमान रखने और उसके रसूल का अनुसरण करने वालो ! अल्लाह और उसके रसूल की पुकार का, उनके आदेशों का पालन करके और उनके निषेधों से बचकर जवाब दो, जब रसूल तुम्हें उस सत्य के लिए बुलाएँ, जिसमें तुम्हारा जीवन है। और इस बात से सुनिश्चित हो जाओ कि अल्लाह हर चीज़ की शक्ति रखता है। चुनाँचे वह इस बात की शक्ति रखता है कि यदि तुम सत्य को अस्वीकार करने के बाद उसे मानना चाहो तो वह तुम्हारे और सत्य को मानने के बीच रुकावट बन जाए। इसलिए सत्य को स्वीकार करने में जल्दी करो। और इस बात का यक़ीन रखो कि तुम क़ियामत के दिन अकेले अल्लाह ही के पास एकत्र किए जाओगे। फिर वह तुम्हें तुम्हारे दुनिया में किए हुए कर्मों का बदला देगा।

Enfal 8:25

और (ऐ ईमान वालो!) उस यातना से बचो, जो तुममें से केवल उसी पर नहीं आएगी, जो पापी है, बल्कि उसके साथ-साथ दूसरे लोग भी उसकी चपेट में आएँगे। यह उस समय होगा, जब अत्याचार प्रकट होगा और उसे दूर नहीं किया जाएगा। और यक़ीन मानो कि अल्लाह अपनी अवज्ञा करने वाले को सख़्त सज़ा देने वाला है। अतः उसकी अवज्ञा से बचो।

Enfal 8:26

तथा (ऐ ईमान वालो!) उस समय को याद करो, जब तुम मक्का में बहुत कम संख्या में थे, मक्का वाले तुम्हें कमज़ोर समझे हुए थे और तुम्हें दबाए हुए थे। तुम्हें डर था कि तुम्हारे दुश्मन तुम्हें उचक ले जाएँगे। तो अल्लाह ने तुम्हें मदीना के रूप में एक शरण स्थल दिया और युद्ध के स्थानों में तुम्हारे दुश्मनों पर तुम्हें विजय प्रदान करके तुम्हें शक्ति प्रदान की, जैसे कि बद्र के दिन हुआ, और तुम्हें पवित्र चीज़ों से जीविका प्रदान की, जिनमें युद्ध के मैदान में तुम्हारे शत्रुओं से प्राप्त किया हुआ ग़नीमत का धन भी शामिल है, ताकि तुम अल्लाह की नेमतों का शुक्रिया अदा करो, जिसके कारण वह तुम्हें और नेमतें प्रदान करेगा, तथा उनकी नाशुक्री न करो कि अल्लाह तुमसे वे नेमतें छीन ले और तुम्हें यातना से ग्रस्त कर दे।

Enfal 8:27

ऐ अल्लाह पर ईमान रखने और उसके रसूल का अनुसरण करने वालो! अल्लाह और उसके रसूल के साथ, उनके आदेशों का पालन न करके और उनके निषेधों से न बचकर, विश्वासघात न करो, तथा तुम्हारे पास जो अमानत रखी जाए उसमें ख़यानत न करो, जबकि तुम जान रहे हो कि तुम्हारा यह काम ख़यानत है, अन्यथा तुम ख़यानत करने वालों में से हो जाओगे।

Enfal 8:28

और (ऐ ईमान वालो!) जान लो कि तुम्हारे धन और तुम्हारी संतान तुम्हारे लिए अल्लाह की ओर से आज़माइश और परीक्षण हैं। क्योंकि ये चीज़ें तुम्हें आख़िरत के लिए कार्य करने से रोक सकती हैं और तुम्हें ख़यानत पर आमादा कर सकती हैं। तथा जान लो कि अल्लाह के पास बहुत बड़ा सवाब है। अतः अपने धन और अपने बच्चों को ध्यान में रखकर और उनकी खातिर ख़यानत करके, यह सवाब अपने हाथ से न जाने दो।

Enfal 8:29

ऐ अल्लाह पर ईमान रखने और उसके रसूल का अनुसरण करने वालो! जान लो कि अगर तुम अल्लाह से, उसके आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर, डरोगे, तो वह तुम्हें सत्य और असत्य के बीच अंतर करने की शक्ति प्रदान करेगा, जिससे तुम्हारे लिए दोनों गड्ड-मड्ड नहीं होंगे। तथा जो कुछ तुमने बुरे कार्य किए होंगे, वह उन्हें तुमसे मिटा देगा और तुम्हारे पापों को क्षमा कर देगा। और अल्लाह बहुत बड़े अनुग्रह वाला है। और उसका एक बड़ा अनुग्रह उसकी जन्नत है, जिसे उसने अपने डरने वाले बंदों के लिए तैयार की है।

Enfal 8:30

और (ऐ रसूल) उस समय को याद करें, जब सब मुश्रिकों ने मिलकर आपको क़ैद करने, मार डालने या अपने नगर से किसी और नगर की ओर निकाल देने का षड्यंत्र किया। वे आपके विरुद्ध षड्यंत्र कर रहे थे और अल्लाह उनके षड्यंत्र को उन्हीं पर लौटा रहा था तथा उससे आपोक बचाने का उपाय कर रहा था और अल्लाह ही सबसे अत्तम उपाय करने वाला है।

Enfal 8:31

और जब उनके सामने हमारी आयतें पढ़ी जाती हैं, तो वे सत्य से वैर और अहंकार के कारण कहते हैं : हमने पहले भी ऐसा कुछ सुना है। अगर हम इस क़ुरआन जैसा कहना चाहें, तो निश्चय हम कह सकते हैं। यह क़ुरआन जो हमने सुना है, पहले लोगों की झूठी कहानियों के सिवा कुछ नहीं है। इसलिए हम इसपर हरगिज़ विश्वास नहीं करेंगे।

Enfal 8:32

और (ऐ रसूल!) उस समय को याद करें, जब बहुदेववादियों ने कहा : ऐ अल्लाह! यदि मुहम्मद का लाया हुआ धर्म सत्य है, तो हमपर आकाश से पत्थर गिरा दे जो हमें नष्ट कर दे, अथवा हमपर कोई गंभीर यातना ले आ। उन्होंने यह बात इनकार में अतिशयोक्ति के तौर पर कही थी।

Enfal 8:33

और अल्लाह आपकी उम्मत को (चाहे वह उन लोगों में से हो जिन्होंने आपके निमंत्रण को स्वीकार किया या उन लोगों में से हो जो आपके निमंत्रण को स्वीकार करने के लिए बाध्य हैं), ऐसी यातना से ग्रस्त नहीं करेगा, जो उन्हें जड़ से मिटा दे, जबकि (ऐ मुहम्मद!) आप उनके बीच जीवित मौजूद हैं। क्योंकि उनके बीच आपकी उपस्थिति उनके लिए यातना से सुरक्षा है। तथा अल्लाह उन्हें यातना से ग्रस्त करने वाला नहीं है, जबकि वे अपने पापों के लिए अल्लाह से क्षमा मांगते हों।

Enfal 8:34

भला उनको यातना क्यों न दी जाए, जबकि उन्होंने लोगों को 'मस्जिदे ह़राम' (काबा) का तवाफ़ करने या उसमें नमाज़ अदा करने से रोककर ऐसा कार्य किया है जो उन्हें यातना का पात्र बनाता है? तथा ये मुश्रिक अल्लाह के दोस्त नहीं हैं, अल्लाह के दोस्त तो केवल उसके डरने वाले बंदे हैं, जो उसकी आज्ञाओं का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर उससे डरते हैं। परंतु अधिकतर मुश्रिक इस बात को नहीं जानते, यही कारण है कि वे कहते हैं कि वे अल्लाह के दोस्त हैं, जबकि वे अल्लाह के दोस्त नहीं हैं।

Enfal 8:35

मस्जिदे ह़राम के पास मुश्रिकों की नमाज़ सीटी बजाने और ताली बजाने के अलावा और कुछ नहीं थी। अतः (ऐ मुश्रिको!) अल्लाह का इनकार करने और उसके रसूल को झुठलाने के कारण बद्र के दिन क़त्ल और क़ैद की यातना चखो।

Enfal 8:36

निश्चय जिन लोगों ने अल्लाह के साथ कुफ़्र किया, वे अपना धन लोगों को अल्लाह के धर्म से रोकने के लिए ख़र्च करते हैं। चुनाँचे वे इसी तरह खर्च करते रहेंगे और उनकी मनोकामना कभी पूरी नहीं होगी। फिर उनके धन खर्च करने का परिणाम पछतावा होगा; क्योंकि धन भी चला गया और उसके खर्च करने का उद्देश्य भी प्राप्त नहीं हुआ। फिर वे ईमान वालों के उनपर विजय से पराजित हो जाएँगे। और जिन लोगों ने अल्लाह के साथ कुफ़्र किया, वे क़ियामत के दिन जहन्नम की ओर हाँककर ले जाए जाएँगे। फिर वे उसमें प्रवेश करेंगे और हमेशा के लिए उसी में रहेंगे।

Enfal 8:37

इन काफ़िरों को, जो अल्लाह के मार्ग से रोकने के लिए अपना धन खर्च करते हैं, जहन्नम की आग की ओर ले जाया जाएगा, ताकि अल्लाह काफ़िरों के अपवित्र (दुष्ट) समूह को मोमिनों के पवित्र (अच्छे) समूह से अलग कर दे, तथा अपवित्र व्यक्तियों, कार्यों और धनों को एक-दूसरे पर रखकर ढेर बना दे। फिर उसे जहन्नम में डाल दे। यही लोग घाटा उठाने वाले हैं; क्योंकि उन्होंने क़ियामत के दिन अपना और अपने घर वालों का नुक़सान किया।

Enfal 8:38

(ऐ रसूल!) आप अपनी जाति के उन लोगों से कह दें, जिन्होंने अल्लाह और उसके रसूल के साथ कुफ़्र किया : यदि वे अल्लाह और उसके रसूल के साथ कुफ़्र करने से, तथा ईमान लाने वालों को अल्लाह के मार्ग से रोकने से बाज़ आ जाएँ; तो अल्लाह उनके पिछले गुनाहों को माफ़ कर देगा। क्योंकि इस्लाम अपने से पहले जो कुछ हुआ, उसे मिटा देता है। और अगर वे अपने कुफ़्र की ओर लौट गए, तो पहले लोगों के बारे में अल्लाह की रीति गुज़र चुकी है। वह यह है कि जब उन्होंने झुठलाया और अपने कुफ़्र पर अड़े रहे, तो अल्लाह ने उन्हें अविलंब सज़ा दे दी।

Enfal 8:39

और (ऐ मोमिनो!) अपने काफिर दुश्मनों से युद्ध करो, यहाँ तक कि न शिर्क रहे और न ही मुसलमानों को अल्लाह के धर्म से रोकना, तथा धर्म और आज्ञाकारिता एकमात्र अल्लाह के लिए रह जाए, जिसमें उसका कोई साझी न हो। फिर यदि काफ़िर अपने शिर्क और अल्लाह के मार्ग से रोकने से बाज़ आ जाएँ, तो उन्हें छोड़ दो। क्योंकि अल्लाह उनके कर्मों को जानता है, उससे कोई बात छिपी नहीं है।

Enfal 8:40

और अगर वे, कुफ़्र और अल्लाह के मार्ग से रोकने से बाज़ आने का जो उन्हें आदेश दिया गया है, उससे मुँह फेरें, तो (ऐ मोमिनो!) निश्चित हो जाओ कि अल्लाह उनके विरुद्ध तुम्हारा मददगार है। वह उसके लिए बहुत अच्छा संरक्षक है, जिसका वह संरक्षक हो, तथा वह उसके लिए बहुत अच्छा सहायक है, जिसका वह सहायक हो। अतः वह जिसका संरक्षक हो गया, वह सफल हुआ और वह जिसका मददगार हो गया, वह विजयी हुआ।

Enfal 8:41

और (ऐ ईमान वालो!) जान लो कि तुमने अल्लाह के मार्ग में काफ़िरों से जिहाद करते हुए जो ग़नीमत का धन हासिल किया है, उसे पाँच भागों में विभाजित किया जाएगा। उनमें से चार भाग मुजाहिदों में बाँट दिए जाएँगे, जबकि शेष पाँचवें भाग को फिर पाँच हिस्सों में विभाजित किया जाएगा : उसका एक हिस्सा अल्लाह और उसके रसूल का होगा, जिसे मुसलमानों के सार्वजनिक हितों में खर्च किया जाएगा, तथा एक हिस्सा नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के निकट-संबंधियों अर्थात् बनू हाशिम एवं बनू मुत्तलिब के लिए, एक हिस्सा अनाथों के लिए, एक हिस्सा गरीबों एवं मिसकीनों के लिए, तथा एक हिस्सा ऐसे यात्रियों के लिए है, जो रास्ते में फँसे हुए हों। यदि तुम अल्लाह पर तथा उस चीज़ पर ईमान रखते हो, जो हमने अपने बंदे मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर बद्र के दिन उतारी, जिसके द्वारा अल्लाह ने सत्य और झूठ के बीच अंतर कर दिया जब उसने तुम्हें तुम्हारे दुश्मनों पर जीत दिलाई। और अल्लाह, जिसने तुम्हारी मदद की, हर चीज़ का सामर्थ्य रखता है।

Enfal 8:42

तथा उस समय को याद करो, जब तुम घाटी के उस किनारे पर थे जो मदीना से सबसे निकट है, तथा बहुदेववादी उसी घाटी के दूर वाले किनारे पर थे, जो मक्का से करीब है, और क़ाफ़िला तुमसे नीचे क्षेत्र में लाल सागर के तट के निकट था। यदि तुमने और बहुदेववादियों ने बद्र में मिलने का वादा किया होता, तो तुम निर्धारित समय (पर पहुँचने) के बारे में एक-दूसरे से असहमत होते। परंतु अल्लाह ने तुम्हें बिना पूर्वनिर्धारित अवधि के बद्र में एकत्र कर दिया। ताकि अल्लाह वह काम पूरा कर दे, जो किया जाने वाला था, अर्थात् ईमान वालों की जीत और काफ़िरों की विफलता, अपने धर्म (इस्लाम) का सम्मान और बहुदेववाद का अपमान; ताकि उनमें से जो मरे, वह ईमान वालों की संख्याबल और उपकरणों की कमी के बावजूद काफ़िरों पर जीत के द्वारा उसपर तर्क स्थापित होने के बाद मरे, तथा जो जीवित रहे, वह उस सबूत और तर्क को देखकर जीवित रहे, जो अल्लाह ने उसके लिए प्रकट किया है। ताकि किसी के लिए अल्लाह के विरुद्ध कोई तर्क बाक़ी न रहे, जिसे वह प्रस्तुत कर सके। निःसंदेह अल्लाह सभी की बातों को सुनने वाला, उनके कार्यों को जानने वाला है। उससे कुछ भी छिपा नहीं है और वह उन्हें उनका बदला देगा।

Enfal 8:43

तथा (ऐ रसूल!) आप, अपने और मोमिनों के ऊपर अल्लाह की नेमत को याद करें, जब अल्लाह ने आपको सपने में मुश्रिकों की संख्या कम करके दिखाई, और आपने ईमान वालों को इसके बारे में बताया, तो वे इस शुभ समाचार से आनंदित हुए और अपने दुश्मन से मिलने और उससे लड़ने का उनका संकल्प और भी मज़बूत हो गया। यदि अल्लाह आपको मुश्रिकों की संख्या अधिक दिखाता, तो अवश्य ही आपके साथियों के संकल्प कमज़ोर पड़ जाते और वे लड़ने से भय खाने लगते। परंतु अल्लाह ने इससे सुरक्षित रखा और उन्हें असफलता से बचाया। इसलिए उन्हें अपने रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की नज़र में कम कर दिया। निःसंदेह वह सीनों की बातों से भली-भाँति अवगत, तथा दिलों के भेदों को जानने वाला है।

Enfal 8:44

तथा (ऐ ईमान वालो!) उस समय को याद करो, जब अल्लाह बहुदेववादियों को लड़ाई के समय तुम्हारी आँखों में थोड़ा करके दिखा रहा था। इस तरह उसने तुम्हें उनसे लड़ने का साहस दिया। तथा उनकी आँखों में तुम्हें थोड़ा करके दिखा रहा था, इसलिए वे भी तुमसे लड़ाई के लिए आगे बढ़े और वापस जाने के बारे में नहीं सोचा। ताकि अल्लाह उस काम को पूरा कर दे, जो होकर रहना था, यानी बहुदेववादियों से (उन्हें) मारकर और बंदी बनाकर बदला लेना और ईमान वालों को दुश्मनों पर जीत एवं सफलता द्वारा पुरस्कृत करना। तथा सभी मामले अल्लाह ही की ओर लौटाए जाते हैं, फिर वह कुकर्म करने वाले को उसके कुकर्म का, और सुकर्म करने वाले को उसके सुकर्म का बदला देता है।

Enfal 8:45

ऐ अल्लाह पर ईमान लाने वालो एवं उसके रसूल का अनुसरण करने वालो! जब तुम काफ़िरों के किसी समूह का सामना करो, तो उनसे मिलते समय दृढ़ रहो और कायरता न दिखाओ। तथा अल्लाह को बहुत याद करो और उससे प्रार्थना करो। क्योंकि वही तुम्हें उनपर विजय दिलाने में समर्थ है; आशा है कि वह तुम्हें वह चीज़ प्रदान करे जो तुम माँगते हो और तुम्हें उस चीज़ से बचाए, जिसका तुम्हें डर है।

Enfal 8:46

तुम अपने कथनों एवं कार्यों और अपनी सभी स्थितियों में अल्लाह और उसके रसूल की आज्ञा का पालन करो और आपस में मतभेद न करो। क्योंकि मतभेद तुम्हारी कमज़ोरी और कायरता, तथा तुम्हारी शक्ति के मिट जाने का कारण है। तथा अपने शत्रु से मुठभेड़ के समय धैर्य रखो। निःसंदेह अल्लाह विजय, समर्थन और सहायता के साथ धैर्य रखने वालों के संग है। और अल्लाह जिसके साथ हो, वही अनिवार्य रूप से विजयी और ग़ालिब रहता है।

Enfal 8:47

और उन मुश्रिकों के समान न हो जाओ, जो मक्का से घमंड करते हुए तथा लोगों को दिखावा करते हुए निकले। तथा वे लोगों को अल्लाह के धर्म (इस्लाम) से दूर करते और उन्हें उसमें प्रवेश करने से रोकते हैं। हालाँकि जो कुछ वे करते हैं, अल्लाह उसे (अपने ज्ञान के) घेरे में लिए हुए है। उनके कामों में से कुछ भी उससे छिपा नहीं है, और वह उन्हें उनका बदला देगा।

Enfal 8:48

(ऐ ईमान वालो!) अपने ऊपर अल्लाह की नेमत को याद करो कि शैतान ने बहुदेववादियों के लिए उनके कर्म सुंदर बना दिए। इस तरह उसने उन्हें मुसलमानों का सामना करने और उनसे लड़ने के लिए प्रोत्साहित किया और उनसे कहा : आज तुमपर कोई विजय पाने वाला नहीं, निश्चय मैं तुम्हारी सहायता करूँगा और तुम्हारे शत्रुओं से तुम्हारी रक्षा करूँगा। फिर जब दोनों गिरोह आमने-सामने हुए : एक तरफ़ ईमान वालों का गिरोह, जिनके साथ उनकी मदद के लिए फ़रिश्ते थे, और दूसरी तरफ़ बहुदेववादियों का गिरोह, जिनके साथ शैतान था, जो शीघ्र ही उनका साथ छोड़ने वाला था; ऐसी परिस्थिति में शैतान पीठ फेरकर भाग खड़ा हुआ और बहुदेववादियों से कहा : मैं तुमसे बरी हूँ। मैं उन फ़रिश्तों को देख रहा हूँ, जो मोमिनों की सहायता के लिए आए हैं। मुझे डर है कि कहीं अल्लाह मुझे नष्ट न कर दे, और अल्लाह बहुत कठोर सज़ा देने वाला है। इसलिए कोई भी उसकी सज़ा सहन करने में सक्षम नहीं है।

Enfal 8:49

तथा (वह समय याद करो) जब मुनाफ़िक़ तथा कमज़ोर ईमान वाले लोग कह रहे थे : इन मुसलमानों को इनके धर्म ने धोखा दिया है, जो इनसे इनकी कम संख्या और कमज़ोर उपकरण के बावजूद, इनसे अधिक संख्या और मज़बूत उपकरण वाले इनके दुश्मनों पर जीत का वादा कर रहा है। लेकिन इन लोगों को इस बात का एहसास नहीं था कि जो व्यक्ति एक अल्लाह पर भरोसा करता और उसके मदद के वादे पर विश्वास रखता है, तो निश्चय अल्लाह उसकी सहायता करने वाला है और वह उसे कभी असहाय नहीं छोड़ेगा, चाहे वह कितना भी कमज़ोर क्यों न हो। अल्लाह सब पर प्रभुत्वशाली है, कोई भी उसे परास्त नहीं कर सकता, वह अपनी नियति और विधान में पूर्ण हिकमत वाला है।

Enfal 8:50

और यदि (ऐ रसूल!) आप अल्लाह और उसके रसूलों का इनकार करने वालों को उस समय देखते, जब फ़रिश्ते उनके प्राण निकाल रहे थे; जब वे आगे बढ़ते थे, तो उनके चेहरों पर मारते और जब वे पीठ फेरकर भागते, तो उनकी पीठ पर मारते थे और उनसे कहते थे : (ऐ काफ़िरो!) जलाने वाली यातना का मज़ा चखो। यदि आप इसे देखते, तो आप एक भयानक दृश्य देखते।

Enfal 8:51

(ऐ काफ़िरो!) तुम्हारे प्राण निकालते समय यह दर्दनाक पीड़ा, तथा तुम्हारी क़ब्रों में और आख़िरत में जलाने वाली यातना, यह (सब) उसके कारण है, जो दुनिया में तुम्हारे हाथों ने कमाया है। इसलिए कि अल्लाह लोगों पर अत्याचार नहीं करता, बल्कि उनके बीच न्याय के साथ फ़ैसला करता है। क्योंकि वह न्याय के साथ निर्णय करने वाला है।

Enfal 8:52

इन काफ़िरों पर उतरने वाली यह यातना उन्हीं के लिए विशिष्ट नहीं है, बल्कि यह अल्लाह का नियम है जो वह हर समय और जगह में काफ़िरों पर लागू करता रहा है। चुनाँचे फ़िरऔन के लोग तथा उनसे पहले के समुदाय इससे पीड़ित हो चुके हैं, जब उन्होंने अल्लाह की निशानियों का इनकार किया। इसलिए अल्लाह ने उन्हें, उनके गुनाहों के कारण एक प्रभुत्वशाली और शक्तिमान की तरह पकड़ लिया और उनपर अपना दंड उतार दिया। निःसंदेह अल्लाह बहुत शक्तिशाली, अजेय और अपराजेय है, अपनी अवज्ञा करने वालों को कठोर दंड देने वाला है।

Enfal 8:53

यह दर्दनाक यातना इस कारण है कि अल्लाह जब किसी जाति को कोई अनुग्रह प्रदान करता है, तो उसे उनसे उस समय तक नहीं छीनता, जब तक कि वे ईमान, धार्मिकता और नेमतों के प्रति आभार की अपनी अच्छी स्थिति को बदलकर अल्लाह के इनकार, उसकी अवज्ञा और उसकी नेमतों की नाशुक्री की बुरी स्थिति को न अपना लें। और यह कि अल्लाह अपने बंदों की बातों को सुनने वाला, उनके कार्यों को जानने वाला है। उनकी कोई चीज़ उससे छिपी नहीं है।

Enfal 8:54

इन काफ़िरों की स्थिति उन अन्य लोगों की तरह है, जिन्होंने फ़िरऔनियों तथा उनसे पहले के झुठलाने वाले समुदायों की तरह अल्लाह का इनकार किया। उन्होंने अपने रब की निशानियों को झुठलाया, इसलिए अल्लाह ने उनके द्वारा किए गए पापों के कारण उन्हें विनष्ट कर दिया, तथा अल्लाह ने फ़िरऔनियों को समुद्र में डुबोकर विनष्ट किया। दरअसल, फ़िरऔन के लोग और उनसे पहले के झुठलाने वाले सभी समुदाय, अपने कुफ़्र एवं शिर्क के कारण ज़ालिम थे। इसलिए वे अल्लाह की सज़ा के हक़दार बन गए थे, तो अल्लाह ने उनपर सज़ा उतार दी।

Enfal 8:55

धरती पर चलने वाले सबसे बुरे लोग वे हैं, जिन्होंने अल्लाह और उसके रसूलों का इनकार किया। भले ही उनके पास हर तरह की निशानी आ जाए, वे ईमान नहीं लाएँगे; क्योंकि वे कुफ़्र पर अड़े हुए हैं। उनके अंदर मार्गदर्शन के साधन जैसे बुद्धि, कान और आँख निष्कर्म हो चुके हैं।

Enfal 8:56

जिन लोगों के साथ आपने संधियाँ और समझौते किए हैं (जैसे बनू क़ुरैज़ा), फिर वे हर बार अपना समझौता भंग कर देते हैं और वे अल्लाह से नहीं डरते। इसलिए वे अपनी प्रतिज्ञाएँ पूरी नहीं करते और उनसे ली गई वाचाओं का पालन नहीं करते।

Enfal 8:57

तो यदि कभी (ऐ रसूल!) आप इन वचन तोड़ने वाले लोगों को युद्धभूमि में पा लें, तो उन्हें और अधिक कठोर दंड दें यहाँ तक कि दूसरे लोग भी इसके बारे में सुन लें, ताकि वे इनकी स्थिति से सीख ग्रहण करें। फिर वे आपसे लड़ने और आपके विरुद्ध आपके शत्रुओं की मदद करने से डर महसूस करें।

Enfal 8:58

और यदि (ऐ रसूल!) आपको किसी ऐसी जाति की ओर से जिनसे आपने संधि कर रखी है, धोखा देने और वचन तोड़ने का भय हो, जिसके आपको संकेत दिखाई पड़ रहे हों, तो आप उन्हें उनके वचन को तोड़ने के बारे में सूचित कर दें, ताकि वे इसकी जानकारी में आपके बराबर हो जाएँ। उन्हें सूचित करने से पहले उनपर अचानक हमला न करें। क्योंकि सूचना देने से पहले अचानक उनपर हमला करना विश्वासघात है। और अल्लाह विश्वासघात करने वालों से प्रेम नहीं करता, बल्कि उनसे घृणा करता है। इसलिए आप विश्वासघात से सावधान रहें।

Enfal 8:59

जो लोग काफ़िर हैं, वे हरगिज़ यह न समझें कि वे अल्लाह के दंड से छूट गए हैं और उससे बच निकले हैं। वे अल्लाह से नहीं छूट सकते और उसके दंड से नहीं बच सकते। बल्कि वह हर हाल में उन्हें पाकर रहेगा।

Enfal 8:60

तथा (ऐ ईमान वालो!) तुमसे जितना हो सके संख्याबल और (सैन्य) उपकरण तैयार रखो, और उनके लिए उन घोड़ों को तैयार रखो, जिन्हें अल्लाह के मार्ग में जिहाद के लिए पाले हुए हो, जिससे तुम उन काफ़िरों में से अल्लाह के शत्रुओं तथा अपने शत्रुओं को डरा सको, जो हमेशा तुम्हें नुकसान पहुँचाने की फिराक में रहते हैं, तथा जिससे कुछ अन्य लोगों को भी डरा सको, जिन्हें तुम नहीं जानते तथा तुम यह भी नहीं जानते कि उन्होंने अपने दिलों में तुम्हारे खिलाफ कितनी (बड़ी) दुश्मनी छिपा रखी है। बल्कि उन्हें और उनके दिलों में छिपी बातों को केवल अल्लाह ही जानता है। तथा अल्लाह की राह में तुम जो भी खर्च करोगे, कम हो या ज़्यादा, अल्लाह उसका इस दुनिया में तुम्हें बदला देगा और आख़िरत में तुम्हें उसका पूरा-पूरा सवाब देगा। इसलिए अल्लाह की राह में ख़र्च करने में जल्दी करो।

Enfal 8:61

और यदि वे संधि की ओर झुकें और आपसे लड़ाई करना त्याग दें, तो (ऐ रसूल!) आप भी उसकी ओर झुक जाएँ और उनसे समझौता कर लें, तथा अल्लाह पर भरोसा करें और उसपर विश्वास रखें। क्योंकि वह हरगिज़ आपको असहाय नहीं छोड़ेगा। निःसंदेह वह उनकी बातों को सुनने वाला, उनके इरादों और कार्यों को जानने वाला है।

Enfal 8:62

और यदि संधि करने और युद्ध करना छोड़ने से उनका उद्देश्य (ऐ रसूल!) आपको धोखा देना है, ताकि वे आपसे लड़ने के लिए तैयारी कर सकें, तो अल्लाह उनकी साज़िश और धोखे से आपको बचाने के लिए काफ़ी है। वही है जिसने अपनी सहायता से आपको मज़बूती प्रदान की, तथा ईमान लाने वाले मुहाजिरों और अनसारियों की मदद से आपको सशक्त किया।

Enfal 8:63

तथा उसने उन ईमान वालों के दिलों को, जिनके द्वारा उसने आपकी मदद की, आपस में जोड़ दिया, जबकि वे बिखरे हुए थे। यदि आप उनके बिखरे हुए दिलों को जोड़ने के लिए, धरती के अंदर जितना धन है, सब खर्च कर देते, तो भी आप उन्हें जोड़ न पाते। लेकिन अकेले अल्लाह ने उन्हें जोड़ दिया। वह अपने राज्य में शक्तिशाली है, उसे कोई परास्त नहीं कर सकता। वह अपनी नियति, प्रबंधन और विधान में हिकमत वाला है।

Enfal 8:64

ऐ नबी! आपको तथा आपके ईमान वाले साथियों को, आपके दुश्मनों की बुराई से बचाने के लिए अल्लाह काफ़ी है। इसलिए अल्लाह पर विश्वास और भरोसा रखें।

Enfal 8:65

ऐ नबी! ईमान वालों को लड़ने के लिए प्रोत्साहित करें, तथा उन्हें इसके लिए इस तरह से प्रोत्साहन दें कि उनके संकल्प को मज़बूत करें और उनका हौसला बढ़ाएँ। (ऐ ईमान वालो!) अगर तुममें से बीस आदमी काफ़िरों से लड़ने में धैर्य रखने वाले हों, तो दो सौ काफ़िरों पर प्रभावी रहेंगे। और अगर तुममें से एक सौ धैर्य रखने वाले हों, तो एक हज़ार काफ़िरों को हरा देंगे। इसका कारण यह है कि काफ़िर लोग अल्लाह का यह नियम नहीं समझते कि वह अपने दोस्तों को विजय प्रदान करता है और अपने शत्रुओं को परास्त कर देता है। तथा वे नहीं जानते कि लड़ने का क्या उद्देश्य है। यही कारण है कि वे दुनिया में वर्चस्व प्राप्त करने के लिए लड़ते हैं।

Enfal 8:66

अब अल्लाह ने (ऐ ईमान वालो!) तुम्हारी कमज़ोरी को देखते हुए अपनी कृपा से तुम्हारे बोझ को हल्का कर दिया है। अब उसने अनिवार्य किया है कि तुममें से एक व्यक्ति को दस के बजाय दो काफिरों के सामने खड़ा होना है। अतः यदि तुममें से सौ लोग काफ़िरों से लड़ने में धैर्य रखने वाले हों, तो दो सौ पर विजय प्राप्त करेंगे। और अगर तुममें से एक हज़ार धैर्य रखने वाले व्यक्ति हों, तो अल्लाह की अनुमति से दो हज़ार काफ़िरों पर विजयी रहेंगे। तथा अल्लाह समर्थन और विजय के साथ धैर्यवान मोमिनों के संग है।

Enfal 8:67

किसी नबी के लिए उचित नहीं है कि उसके पास उन काफ़िरों में से बंदी हों, जो उससे लड़ रहे हैं, यहाँ तक कि उनका अच्छी तरह खून बहा ले; ताकि उनके दिलों में भय दाखिल हो जाए, फिर वे दोबारा युद्ध करने की हिम्मत न करें। (ऐ ईमान वालो!) तुम बद्र में दुश्मनों को बंदी बनाकर फिरौती लेना चाहते हो और अल्लाह आख़िरत चाहता है, जिसे धर्म की जीत और उसके प्रभुत्व से प्राप्त किया जा सकता है। अल्लाह अपने अस्तित्व, अपने गुणों और शक्ति में प्रभुत्वशाली है, उसपर किसी का ज़ोर नहीं चलता। वह अपनी नियति और शरीयत में हिकमत वाला है।

Enfal 8:68

यदि अल्लाह की ओर से यह लिखी हुई बात न होती, जिसमें उसने पूर्वनियत और फ़ैसला कर दिया था कि उसने तुम्हारे लिए ग़नीमत का धन हलाल कर दिया तथा बंदियों को फिरौती के बदले छोड़ना अनुमेय कर दिया, तो अल्लाह की ओर से उसकी अनुमति के बारे में वह़्य उतरने से पहले, तुम्हारे ग़नीमत का धन और क़ैदियों से फिरौती लेने के कारण, तुम्हें अल्लाह की ओर से सख़्त यातना पहुँचती।

Enfal 8:69

अतः (ऐ ईमान वालो!) तुमने काफ़िरों से जो ग़नीमत का धन प्राप्त किया है, उसे खाओ। वह तुम्हारे लिए हलाल है। तथा अल्लाह से, उसके आदेशों का पालन करके और उसकी मना की हुई चीज़ों से दूर रहकर, डरो। निःसंदेह अल्लाह अपने ईमान वाले बंदों को बहुत क्षमा करने वाला, उनपर अत्यंत दया करने वाला है।

Enfal 8:70

ऐ नबी! उन लोगों से कहो जो बहुदेववादियों के बंदियों में से तुम्हारे हाथों में आए हैं, जिन्हें तुमने बद्र के दिन क़ैद कर लिया था : अगर अल्लाह तुम्हारे दिलों में नेकी की मंशा और अच्छा इरादा जान लेगा, तो तुम्हें उससे बेहतर देगा जो तुमसे छुड़ौती में लिया गया है। इसलिए जो कुछ तुमसे लिया गया है, उसपर शोक मत करो। तथा वह तुम्हारे गुनाहों को क्षमा कर देगा। अल्लाह अपने तौबा करने वाले बंदों को बहुत क्षमा करने वाला, उनपर अत्यंत दया करने वाला है। वास्तव में, नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के चाचा अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हु और उनके अलावा अन्य मुसलमान होने वालों के संबंध में अल्लाह का यह वादा पूरा हो गया।

Enfal 8:71

और अगर वे (ऐ मुहम्मद!) आपसे जो कुछ कहते हैं, उसके द्वारा आपके साथ विश्वासघात करना चाहें, तो निश्चय वे इससे पहले अल्लाह के साथ विश्वासघात कर चुके हैं, और अल्लाह ने उनके विरुद्ध आपकी सहायता की। चुनाँचे उनमें से कुछ लोग मारे गए और कुछ लोग क़ैद हुए। अब अगर वे दोबारा ऐसी हरकत करें, तो उन्हें इसी तरह की सज़ा की प्रतीक्षा करनी चाहिए। अल्लाह अपनी सृष्टि और उसके हितों से अवगत है, अपने प्रबंधन में हिकमत वाला है।

Enfal 8:72

निःसंदेह जो लोग अल्लाह पर ईमान लाए, उसके रसूल की पुष्टि की, उसकी शरीयत पर अमल किया तथा कुफ़्र के देश से इस्लाम के देश की ओर या ऐसी जगह की ओर हिजरत की जहाँ निर्भय होकर अल्लाह की इबादत कर सकें, तथा अल्लाह की बात को सर्वोच्च करने के लिए अपनी जान और माल के साथ जिहाद किया, तथा वे लोग जिन्होंने उनको अपने घरों में ठहराया और उनकी सहायता की - वे मुहाजिर लोग और उनकी मदद करने वाले मदीना के वासी मदद और सहयोग में एक-दूसरे के दोस्त हैं। और जो लोग अल्लाह पर ईमान लाए, परंतु उन्होंने कुफ़्र के देश से इस्लाम के देश की ओर हिजरत नहीं की, तो (ऐ मोमिनो!) तुमपर उनकी मदद करना और उनकी रक्षा करना ज़रूरी नहीं है यहाँ तक कि वे अल्लाह के मार्ग में हिजरत करें। अगर काफ़िर लोग उनपर अत्याचार करें और वे तुमसे मदद की गुहार लगाएँ, तो उनके दुश्मन के विरुद्ध उनकी सहायता करो, सिवाय इसके कि तुम्हारे और उनके दुश्मनों (काफ़िरों) के बीच कोई संधि हो जिसे उन्होंने भंग न किया हो। तथा तुम जो कुछ कर रहे हो, अल्लाह उसे देख रहा है। उससे तुम्हारा कोई कार्य छिपा नहीं है, और वह तुम्हें उसका बदला देगा।

Enfal 8:73

जिन लोगों ने अल्लाह का इनकार किया, उन्हें यही इनकार एक-दूसरे से जोड़े रखता है। इसलिए वे एक दूसरे की मदद करते हैं। अतः किसी मोमिन को उनसे दोस्ती नहीं रखनी चाहिए। अगर तुम मोमिनों से दोस्ती और काफ़िरों से दुश्मनी नहीं रखोगे, तो ईमान वालों के लिए बड़ा फ़ितना (परीक्षण) होगा। क्योंकि उन्हें उनका कोई इस्लामी भाई मदद करने के लिए नहीं मिलेगा। तथा अल्लाह की राह से रोकने की वजह से धरती पर बहुत बड़ा बिगाड़ पैदा होगा।

Enfal 8:74

तथ जो लोग अल्लाह पर ईमान लाए और उसके मार्ग में हिजरत की, तथा जिन्होंने अल्लाह के मार्ग में हिजरत करने वालों को शरण दी और उनकी मदद की, वही लोग सच्चे ईमान वाले हैं। अल्लाह की ओर से उनका प्रतिफल उनके पापों की क्षमा, और उसकी ओर से एक उदार जीविका है, और वह जन्नत है।

Enfal 8:75

जो लोग, सबसे पहले ईमान लाने वाले मुहाजिरों और अनसारियों के बाद ईमान लाए, तथा उन्होंने कुफ़्र के देश से इस्लाम के देश की ओर हिजरत की और अल्लाह के मार्ग में जिहाद किया, ताकि अल्लाह की बात सर्वोच्च हो और काफ़िरों की बात नीची, तो वे लोग (ऐ मोमिनो!) तुम ही में से हैं। उनके लिए वही अधिकार हैं, जो तुम्हारे लिए हैं तथा उनके वही कर्तव्य (और दायित्व) हैं, जो तुम्हारे हैं। तथा अल्लाह के निर्णय में रिश्तेदारी के लोग, आपस में एक-दूसरे के वारिस होने के, पहले से मौजूद ईमान और हिजरत के आधार पर वारिस होने से अधिक हक़दार हैं। निःसंदेह अल्लाह हर चीज़ को जानने वाला है। उससे कोई चीज़ छिपी नहीं है। अतः वह जानता है कि उसके बंदों के हित में क्या है, इसलिए वह उसे उनके लिए धर्मसंगत कर देता है।

Tevbe 9:1

यह अल्लाह तथा उसके रसूल की ओर से ज़िम्मेदारी से बरी होने, तथा उन संधियों के अंत की घोषणा है, जो (ऐ मुसलमानो!) तुमने अरब प्रायद्वीप में बहुदेववादियों के साथ की थी।

Tevbe 9:2

अतः (ऐ बहुदेववादियो!) तुम धरती में चार महीने सुरक्षित रूप से चलो-फिरो। उसके बाद तुम्हारे लिए न कोई संधि होगी और न कोई सुरक्षा। तथा निश्चित रहो कि अगर तुम अपने कुफ़्र पर बने रहे, तो अल्लाह की यातना और दंड से हरगिज़ नहीं बचोगे। तथा इस बात से भी निश्चित रहो कि अल्लाह काफ़िरों को इस दुनिया में क़ल्त और क़ैद करके तथा क़ियामत के दिन आग में डालकर अपमानित करने वाला है। इस घोषणा में वे सभी शामिल हैं, जिन्होंने अपनी संधि तोड़ दी और जिनकी संधि का समय निर्धारित नहीं था। जहाँ तक उन लोगों की बात है, जिनकी संधि का समय निर्धारित था, तो उनकी संधि को उसके कार्यकाल तक पूरा किया जाएगा, भले ही वह चार महीने से अधिक की हो।

Tevbe 9:3

तथा अल्लाह की तरफ़ से और उसके रसूल की तरफ़ से क़ुर्बानी के दिन तमाम लोगों को यह सूचना है कि अल्लाह बहुदेववादियों (मुश्रिकों) से बरी है, तथा उसका रसूल भी उनसे अलग है। फिर यदि (ऐ बहुदेववादियो!) तुम अपने शिर्क से तौबा कर लो, तो तुम्हारा तौबा करना तुम्हारे लिए बेहतर है, और यदि तुम तौबा से मुँह फेरो, तो सुनिश्चित हो जाओ कि तुम अल्लाह से कभी नहीं छूट सकते, और उसकी यातना से हरगिज़ नहीं बच सकते। तथा (ऐ रसूल!) आप अल्लाह का इनकार करने वालों को यह बुरी सूचना सुना दें कि एक दर्दनाक अज़ाब उनकी प्रतीक्षा कर रहा है।

Tevbe 9:4

सिवाय उन मुश्रिकों के, जिनसे तुमने संधि की, और उन्होंने अपनी संधि को पूरा किया तथा उसमें कुछ भी कमी नहीं की, तो वे लोग पिछले हुक्म से अलग हैं। ऐसे लोगों की संधि को उसकी अवधि समाप्त होने तक पूरा करो। निःसंदेह अल्लाह उन लोगों से प्रेम करता है, जो उसके आदेशों का पालन करके, जिनमें संधि को पूरा करना भी शामिल है और उसकी मना की हुई चीज़ों से दूर रहकर, जिनमें विश्वासघात भी शामिल है, उससे डरने वाले हैं।

Tevbe 9:5

फिर जब सम्मानित महीने बीत जाएँ, जिनमें तुमने अपने दुश्मनों को सुरक्षा प्रदान किया है, तो बहुदेववादियों (मुश्रिकों) को जहाँ कहीं भी पाओ, उन्हें क़त्ल करो, उन्हें पकड़ लो, उन्हें उनके गढ़ों में घेर लो और उनके रास्तों में उनकी घात में रहो। फिर यदि वे अल्लाह के समक्ष शिर्क से तौबा कर लें, नमाज़ स्थापित करें तथा ज़कात अदा करें, तो वे तुम्हारे इस्लामी भाई हो गए। इसलिए उनसे युद्ध करना छोड़ दो। निःसंदेह अल्लाह अपने तौबा करने वाले बंदे को बहुत क्षमा करने वाला, उसपर अति दयावान् है।

Tevbe 9:6

और यदि मुश्रिकों में से कोई व्यक्ति - जिसका रक्त और धन हलाल हो - आए और (ऐ रसूल!) आपसे शरण माँगे, तो उसके अनुरोध का जवाब दें, ताकि वह क़ुरआन सुन सके, फिर उसे ऐसे स्थान पर पहुँचा दें, जहाँ वह सुरक्षित हो। ऐसा इसलिए कि काफ़िर ऐसे लोग हैं, जो इस्लाम के तथ्यों को नहीं जानते हैं। इसलिए यदि वे क़ुरआन के पाठ को सुनकर उनसे अवगत हो जाएँगे, तो संभव है कि मार्गदर्शन ग्रहण कर लें।

Tevbe 9:7

यह उचित नहीं है कि अल्लाह के साथ शिर्क करने वालों की अल्लाह और उसके रसूल के पास कोई संधि तथा सुरक्षा का वचन हो, सिवाय उन बहुदेववादियों के वचन के, जिनके साथ (ऐ ईमान वालो!) तुमने मस्जिदे-हराम के पास हुदैबिय्यह की संधि में समझौता किया था। तो जब तक वे तुम्हारे लिए उस वचन पर क़ायम रहें जो तुम्हारे और उनके बीच है और उसे न तोड़ें, तो तुम भी उनके लिए उसपर क़ायम रहो और उसे न तोड़ो। निःसंदेह अल्लाह अपने मुत्तक़ी बंदों से प्रेम करता है, जो उसके आदेशों का पालन करते और उसके निषेधों से दूर रहते हैं।

Tevbe 9:8

उनके लिए प्रतिज्ञा और सुरक्षा का वचन कैसे हो सकता है, जबकि वे तुम्हारे शत्रु हैं। और यदि वे तुमपर आधिपत्य प्राप्त कर लें, तो वे तुम्हारे बारे में अल्लाह, या किसी रिश्तेदारी, या किसी प्रतिज्ञा का सम्मान नहीं करेंगे, बल्कि वे तुम्हें बुरी यातना से दंडित करेंगे?! वे तुम्हें उन अच्छे शब्दों से प्रसन्न करते हैं जो उनकी ज़बानें बोलती हैं, लेकिन उनके दिल उनकी ज़बानों का साथ नहीं देते। इसलिए वे जो कहते हैं, उसे पूरा नहीं करते हैं। तथा उनमें से अधिकांश लोग वचन तोड़ने के कारण अल्लाह की आज्ञाकारिता से बाहर हैं।

Tevbe 9:9

उन्होंने अल्लाह की आयतों का अनुसरण करने के बदले में, जिसमें प्रतिज्ञाओं की पूर्ति भी शामिल है, दुनिया का तुच्छ मूल्य ले लिया, जिससे वे अपनी वासनाओं और इच्छाओं तक पहुँचते हैं। इस तरह उन्होंने अपने आपको सत्य का पालन करने से रोका और उससे मुँह फेर लिया, तथा उन्होंने दूसरों को भी सत्य से रोका। निश्चय उनका वह अमल बहुत बुरा है, जो वे करते रहे हैं।

Tevbe 9:10

वे अपनी शत्रुता के कारण किसी मोमिन के बारे में अल्लाह का, या किसी रिश्तेदारी, या किसी प्रतिज्ञा का सम्मान नहीं करते हैं। वे अल्लाह की सीमाओं का उल्लंघन करने वाले हैं; क्योंकि वे अन्याय और आक्रामकता की विशेषता रखते हैं।

Tevbe 9:11

यदि वे अपने कुफ़्र से अल्लाह के समक्ष तौबा कर लें, और इस बात की गवाही दें कि अल्लाह के सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं और मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम अल्लाह के रसूल हैं, नमाज़ क़ायम करें और अपने धन की ज़कात दें - तो वे मुसलमान हो गए और वे धर्म में तुम्हारे भाई हैं। उनके लिए वे सभी अधिकार हैं, जो तुम्हारे लिए हैं और उनपर वे सभी दायित्व हैं, जो तुमपर हैं। तुम्हारे लिए उनसे लड़ना जायज़ नहीं है, क्योंकि उनका इस्लाम उनके खून, धन और सम्मान की रक्षा करता है। हम उन लोगों के लिए आयतों को स्पष्ट करते और उन्हें खोल-खोलकर बयान करते हैं, जो ज्ञान रखते हैं। क्योंकि वही वे लोग हैं, जो उनसे लाभान्वित होते हैं, और दूसरों को भी उनसे लाभान्वित करते हैं।

Tevbe 9:12

और यदि ये मुश्रिक लोग, जिनसे तुमने एक ज्ञात अवधि के लिए लड़ाई बंद रखने का समझौता कर रखा है, अपने वचनों और प्रतिज्ञाओं को तोड़ दें, और तुम्हारे धर्म में बुराई निकालें और उसमें दोष ढूँढ़ें, तो उनसे युद्ध करो। क्योंकि वे कुफ़्र के अगुवा और सरग़ना हैं और उनकी कोई प्रतिज्ञाएँ और वाचाएँ नहीं हैं, जो उनके रक्त की रक्षा करें। उनसे इस आशा में युद्ध करो कि वे अपने कुफ़्र, अनुबंधों को तोड़ने और धर्म में दोष निकालने से बाज़ आ जाएँ।

Tevbe 9:13

(ऐ ईमान वालो!) तुम उन लोगों से युद्ध क्यों नहीं करते, जिन्होंने अपने वचनों और प्रतिज्ञाओं को तोड़ दिया, और दारुन-नदवा में अपनी बैठक में रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को मक्का से निकालने के लिए प्रयास किया, और उन्होंने ही अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के सहयोगी खुज़ाआ कबीले के विरुद्ध कुरैश के सहयोगी बक्र क़बीले की मदद करके, तुमसे युद्ध करने में पहल की है। क्या तुम युद्ध में उनके साथ मुठभेड़ से डरते हो?! तो (जान लो कि) यदि तुम वास्तव में ईमान वाले हो, तो अल्लाह इस बात का अधिक हक़दार है कि तुम उससे डरो।

Tevbe 9:14

(ऐ ईमान वालो!) इन मुश्रिकों से लड़ो। क्योंकि यदि तुम उनसे लड़ोगे, तो अल्लाह उन्हें तुम्हारे हाथों से दंडित करेगा, इस प्रकार की तुम उन्हें क़त्ल करोगे, उन्हें हार और क़ैद से अपमानित करेगा, और तुम्हें प्रबल करके तुम्हें उनपर विजय प्रदान करेगा, और उन ईमान वालों के सीनों की बीमारी, जो युद्ध में शामिल नहीं हुए, उनके दुश्मन की हत्या, क़ैद और पराजय, तथा उनपर विश्वासियों की जीत के साथ ठीक कर देगा।

Tevbe 9:15

और अपने मोमिन बंदों के दिलों से क्रोध को, दुश्मनों पर उन्हें विजय प्रदान करके दूर कर देगा। तथा अल्लाह इन हठी लोगों में से जिसकी चाहता, तौबा क़बूल करता है, यदि वे तौबा करें, जैसा कि (मक्का पर) विजय के दिन मक्का के कुछ लोगों के साथ हुआ था। और अल्लाह उनमें से तौबा करने वालों की सच्चाई को भली-भाँति जानने वाला, तथा अपनी रचना, प्रबंधन और विधान में हिकमत वाला है।

Tevbe 9:16

(ऐ ईमान वालो!) क्या तुमने समझ रखा है कि अल्लाह तुम्हें बिना परीक्षण के यूँ ही छोड़ देगा?! हालाँकि परीक्षण करना अल्लाह के नियमों में से एक नियम है। तुम्हारी परीक्षा होती रहेगी यहाँ तक कि अल्लाह तुममें से निष्ठापूर्वक जिहाद करने वालों को इस तरह जान ले कि वह ज्ञान बंदों के लिए प्रत्यक्ष और स्पष्ट हो, जिन्होंने अल्लाह, उसके रसूल और ईमान वालों को छोड़कर काफ़िरों में से रहस्यज्ञ और घनिष्ठ मित्र नहीं बनाए, जिनसे वे मित्रता और प्रेम का संबंध रखते हों। तथा तुम जो कुछ करते हो, अल्लाह उससे सूचित है, उसमें से कुछ भी अल्लाह से छिपा नहीं है और वह तुम्हें तुम्हारे कार्यों का बदला देगा।

Tevbe 9:17

मुश्रिकों (बहुदेववादियों) के लिए योग्य नहीं है कि वे अल्लाह की मस्जिदों को इबादत तथा विभिन्न प्रकार की आज्ञाकारिता के साथ आबाद करें, जबकि जो कुछ वे कुफ़्र का प्रदर्शन करते हैं, उसके द्वारा वे स्वयं अपने विरुद्ध कुफ़्र की गवाही दे रहे हैं। उनके कर्म व्यर्थ हैं क्योंकि उनके क़बूल होने की शर्त नहीं पाई जाती है और वह (शर्त) अल्लाह पर ईमान है। वे लोग क़ियामत के दिन आग में प्रवेश करेंगे और हमेशा के लिए उसी में रहेंगे, सिवाय इसके कि वे अपनी मृत्यु से पहले बहुदेववाद से तौबा कर लें।

Tevbe 9:18

मस्जिदों को आबाद करने के योग्य और उसके हक़ को पूरा करने वाला केवल वही व्यक्ति है, जो अकेले अल्लाह पर ईमान रखता है और उसके साथ किसी को साझी नहीं बनाता है, तथा क़ियामत के दिन पर ईमान रखता, नमाज़ क़ायम करता, अपने धन की ज़कात देता और पवित्र अल्लाह के सिवा किसी से नहीं डरता है। तो यही वे लोग हैं, जिनके बारे में उम्मीद की जाती है कि वे सीधे रास्ते पर चलेंगे, और जहाँ तक बहुदेववादियों का सवाल है, तो वे इससे बहुत दूर हैं।

Tevbe 9:19

(ऐ बहुदेववादियो!) क्या तुमने हाजियों को पानी पिलाने वाले और मस्जिद-ए-हराम की देखभाल करने वाले लोगों को उस व्यक्ति की तरह बना दिया, जो अल्लाह पर ईमान लाया और उसके साथ किसी को साझी नहीं बनाया, तथा क़ियामत के दिन पर ईमान लाया और अपने जान-माल के साथ जिहाद किया, ताकि अल्लाह की बात सबसे ऊँची हो और काफ़िरों की बात सबसे नीची? क्या तुमने इन दोनों प्रकार के लोगों को अल्लाह के यहाँ प्रतिष्ठा में बराबर कर दिया?! वे अल्लाह के यहाँ कदापि बराबर नहीं हो सकते। और अल्लाह बहुदेववाद जैसे अत्याचार में पड़े हुए लोगों को सामर्थ्य नहीं देता, भले ही वे हाजियों को पानी पिलाने जैसे अच्छे काम करते हों।

Tevbe 9:20

जो लोग ईमान लाए तथा कुफ़्र की भूमि से इस्लाम की भूमि की ओर हिजरत की और अल्लाह के मार्ग में अपने धनों और प्राणों के साथ जिहाद किया, उनका दूसरों की तुलना में अल्लाह के यहाँ बहुत बड़ा पद है, तथा इन गुणों से सुसज्जित यही लोग जन्नत पाने में सफल होने वाले हैं।

Tevbe 9:21

उनका पालनहार अल्लाह उन्हें अपनी दया की आनंददायक सूचना देता है और यह कि वह उनसे प्रसन्न हो जाएगा, फिर उनसे कभी नाराज़ नहीं होगा, तथा वे ऐसे बाग़ों में प्रवेश करेंगे जिनमें शाश्वत नेमतें हैं, जो कभी बाधित नहीं होंगी।

Tevbe 9:22

वे उन बाग़ों में, दुनिया में किए हुए नेक कार्यों के बदले में, अनंत काल तक रहेंगे। निःसंदेह अल्लाह के यहाँ, निष्ठापूर्वक उसके आदेशों का पालन करने वाले तथा उसके निषेधों से बचने वाले के लिए बड़ा बदला है।

Tevbe 9:23

ऐ अल्लाह पर ईमान लाने वालो और उसके रसूल के द्वारा लाई गई बातों का अनुसरण करने वालो! अपने आनुवंशिक बापों और भाइयों और अपने रिश्तेदारों में से अन्य लोगों को अपना दोस्त मत बनाओ, कि ईमान वालों के रहस्यों को उन पर प्रकट करके और उनके साथ परामर्श करके उनके प्रति वफ़ादार बन जाओ; यदि वे एक अल्लाह पर ईमान लाने पर कुफ़्र को प्राथमिकता दें। तुममें से जो व्यक्ति उनके कुफ़्र पर बने रहने के बावजूद उनसे दोस्ती रखेगा और उनके प्रति स्नेह दिखाएगा, तो निश्चय उसने अल्लाह की अवज्ञा की, और अवज्ञा के कारण अपने आपको विनाश की जगह में डालकर खुद पर अत्याचार किया।

Tevbe 9:24

(ऐ रसूल!) आप कह दीजिए : यदि (ऐ मोमिनो!) तुम्हारे बाप, तुम्हारे बेटे, तुम्हारे भाई, तुम्हारी पत्नियाँ, तुम्हारे रिश्तेदार, तुम्हारा धन जो तुमने कमाया है और तुम्हारा व्यापार जिसके प्रचलन को तुम पसंद करते हो और उसकी मंदी से डरते हो, तथा तुम्हारे घर जिनमें रहने का मोह रखते हो - यदि ये सब तुम्हें अल्लाह और उसके रसूल से, तथा उसकी राह में जिहाद करने से अधिक प्रिय हैं, तो अल्लाह की ओर से आने वाली यातना की प्रतीक्षा करो। और अल्लाह अपनी आज्ञाकारिता से निकल जाने वालों को उस काम को करने का सामर्थ्य नहीं देता, जिससे वह प्रसन्न होता है।

Tevbe 9:25

निःसंदेह अल्लाह ने बहुत-से युद्धों में (ऐ ईमान वालो!) तुम्हारी कम संख्या और कमज़ोर तैयारी के बावजूद तुम्हारे दुश्मन बहुदेववादियों के खिलाफ तुम्हारी मदद की, जब तुमने अल्लाह पर भरोसा किया और साधनों को अपनाया, तथा अपनी अधिक संख्या पर आत्ममुग्ध नहीं हुए। क्योंकि अधिक संख्या, उनपर तुम्हारी जीत का कारण नहीं थी। तथा हुनैन के दिन भी तुम्हारी मदद की, जब तुम अपनी अधिक संख्या पर आत्ममुग्ध हो गए और कहने लगे : आज हम कम संख्या के कारण नहीं हारेंगे। पर तुम्हारी अधिक संख्या तुम्हारे कुछ काम न आई, जिसपर तुम आत्ममुग्ध थे। चुनाँचे तुम्हारा दुश्मन तुमपर हावी हो गया और धरती अपने विस्तार के बावजूद तुमपर तंग हो गई, फिर तुम अपने शत्रुओं से हारकर भाग खड़े हुए।

Tevbe 9:26

फिर तुम्हारे अपने शत्रुओं से भाग जाने के बाद, अल्लाह ने अपने रसूल पर और ईमान वालों पर शांति उतारी, तो वे लड़ाई के लिए दृढ़ हो गए। तथा अल्लाह ने फ़रिश्ते उतारे जिन्हें तुमने नहीं देखा, और काफ़िरों को इस तरह दंडित किया कि वे मारे गए, बंदी बना लिए गए, (उनके) धनों पर क़ब्ज़ा कर लिया गया और संतानों को पकड़ लिया गया। यह बदला जो इन लोगों को दिया गया, यही उन काफ़िरों का बदला है, जो अपने रसूल को झुठलाते हैं और उनके लाए हुए संदेश से मुँह मोड़ते हैं।

Tevbe 9:27

फिर जो कोई उस यातना के बाद अपने कुफ़्र और गुमराही से तौबा करेगा, तो अल्लाह उसकी तौबा क़बूल करेगा। अल्लाह अपने तौबा करने वाले बंदों की तौबा क़बूल करने वाला, उनपर बहुत दया करने वाला है। क्योंकि वह कुफ़्र और पाप करने के बाद उनकी तौबा क़बूल करता है।

Tevbe 9:28

ऐ अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान लाने वालो और उसकी शरीयत का पालन करने वालो! जान लो कि मुश्रिक (बहुदेववादी) अशुद्ध हैं। ऐसा उस कुफ़्र, अत्याचार, निंदनीय नैतिकता और बुरी आदतों के कारण है, जो उनके अंदर मौजूद है। अतः वे इस वर्ष अर्थात नौ हिजरी के बाद 'हरम-ए-मक्की' (मस्जिद-ए-हराम सहित) में प्रवेश न करें, भले ही वे हज्ज या उम्रा का इरादा रखते हों। और यदि (ऐ मोमिनो!) तुम उनके द्वारा लाए जाने वाले विभिन्न खाद्य पदार्थों और व्यापारों के बंद होने के कारण गरीबी से डरते हो, तो अल्लाह यदि चाहे, तो अपने अनुग्रह से तुम्हारे लिए पर्याप्त हो जाएगा। निःसंदेह अल्लाह तुम्हारी वर्तमान स्थिति से अवगत है, तुम्हारे लिए जो प्रबंध करता है उसमें हिकमत वाला है।

Tevbe 9:29

ऐ ईमान वालो!! उन यहूदी एवं ईसाई काफ़िरों से युद्ध करो, जो अल्लाह को एकमात्र पूज्य नहीं मानते जिसका कोई साझी नहीं, तथा क़ियामत के दिन पर विश्वास नहीं रखते, अल्लाह और उसके रसूल ने जो मृत मांस, सूअर का मांस, शराब और सूद इत्यादि उनपर हराम क़रार दिए हैं, उनसे नहीं बचते हैं, और अल्लाह की शरीयत का पालन नहीं करते हैं, यहाँ तक कि वे अपमानित होकर अपने हाथों से जिज़्या अदा करें।

Tevbe 9:30

यहूदी एवं ईसाई दोनों बहुदेववादी हैं। क्योंकि यहूदियों ने उज़ैर अलैहिस्सलाम को अल्लाह का बेटा कहकर अल्लाह का साझी बनाया और ईसाइयों ने ईसा मसीह को अल्लाह का बेटा कहकर अल्लाह का साझी बनाया। उनकी यह गढ़ी हुई बात, बिना किसी सबूत के मात्र उनके मुँह से कही हुई बात है। उनकी यह बात दरअसल उनके पहले के उन बहुदेववादियों की बात जैसी है, जिन्होंने कहा था कि फ़रिश्ते अल्लाह की बेटियाँ हैं। अल्लाह उनके इस दावे से बहुत ऊँचा है। अल्लाह उन्हें नष्ट करे। वे स्पष्ट सत्य से असत्य की ओर कैसे फेर दिए जाते हैं?!

Tevbe 9:31

यहूदियों ने अपने विद्वानों और इसाइयों ने अपने पुजारियों को अल्लाह के अलावा रब बना लिए। वे उनके लिए उस चीज़ को हलाल करते हैं, जो अल्लाह ने उनपर हराम की है और उस चीज़ को उनपर हराम कर देते हैं, जो अल्लाह ने उनके लिए हलाल की है। तथा ईसाइयों ने मरयम के पुत्र ईसा मसीह को अल्लाह के साथ पूज्य बना लिया। हालाँकि, अल्लाह ने यहूदियों के विद्वानों और ईसाइयों के पुजारियों को तथा उज़ैर और ईसा बिन मरयम को इसके सिवा कोई आदेश नहीं दिया था कि वे एक अल्लाह की इबादत करें और उसके साथ किसी चीज़ को शरीक न करें। क्योंकि वह सर्वशक्तिमान केवल एक पूज्य है, उसके सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं। अल्लाह इस बात से पवित्र है कि उसका कोई साझी हो, जैसा कि इन मुश्रिकों तथा अन्य लोगों का दावा है।

Tevbe 9:32

ये लोग और इनके अलावा अन्य काफ़िर समुदायों का उद्देश्य यह है कि अपने इन झूठे आरोपों और मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के लाए हुए संदेश को झुठलाकर इस्लाम का सफाया कर दें और उसे गलत ठहरा दें, तथा अल्लाह के एकेश्वरवाद और उसके रसूल की लाई हुई शरीयत के सत्य होने के स्पष्ट तर्कों और खुले प्रमाणों को अमान्य कर दें। परंतु अल्लाह अपने धर्म को पूरा करके और अन्य धर्मों पर उसे ग़ालिब और सर्वोच्च करके ही रहेगा, भले ही काफ़िरों को उसका अपने धर्म को पूरा करना, उसे ग़ालिब और सर्वोच्च करना बुरा लगे। और जब अल्लाह किसी चीज़ का इरादा करता है, तो अन्य लोगों का इरादा अमान्य हो जाता है।

Tevbe 9:33

अल्लाह ही ने अपने रसूल मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को क़ुरआन के साथ, जो लोगों के लिए मार्गदर्शन है, तथा सत्य धर्म इस्लाम के साथ भेजा, ताकि उसमें मौजूद तर्कों, प्रमाणों और आदेशों के साथ उसे अन्य धर्मों पर सर्वोच्च कर दे, भले ही बहुदेववादियों को यह बुरा लगे।

Tevbe 9:34

ऐ अल्लाह पर ईमान रखने वालो और उसकी शरीयत का अनुसरण करने वालो! बहुत-से यहूदी विद्वान और बहुत-से ईसाई उपासक, लोगों के धनों को बिना किसी वैध अधिकार के लेते हैं। चुनाँचे वे उन्हें रिश्वत और अन्य अवैध ढंग से लेते हैं, और वे लोगों को अल्लाह के धर्म में प्रवेश करने से रोकते हैं। तथा जो लोग सोना-चाँदी जमा करके रखते हैं और अपने ऊपर अनिवार्य उसकी ज़कात नहीं देते, तो (ऐ रसूल!) आप उन्हें क़ियामत के दिन दर्दनाक यातना की सूचना दे दें, जिससे उन्हें बहुत तकलीफ़ होगी।

Tevbe 9:35

जो कुछ उन्होंने इकट्ठा किया और उसका हक़ रोक लिया, उसे क़ियामत के दिन जहन्नम की आग में तपाया जाएगा। जब वह बहुत गर्म हो जाएगा, तो उसे उनके माथों, पहलुओं और पीठों पर रखा जाएगा, और उन्हें फटकार के रूप में कहा जाएगा : ये हैं तुम्हारे धन, जो तुमने एकत्र किए थे लेकिन उनमें अनिवार्य अधिकारों का भुगतान नहीं किए थे। तो अब, जो कुछ तुम इकट्ठा कर रहे थे और उसके अधिकारों का भुगतान नहीं कर रहे थे, उसका कष्ट और उसके परिणाम का स्वाद चखो।

Tevbe 9:36

निःसंदेह अल्लाह के निर्णय और फैसले के अनुसार वर्ष के महीनों की संख्या बारह है, जिसे उसने आकाशों और धरती की रचना के समय ही लौह़-ए-मह़फूज़ में लिख दिया था। इन बारह महीनों में से चार महीनों में अल्लाह ने लड़ने से मना किया है। इनमें से तीन महीने तगातार हैं : 'ज़ुलक़ादा, ज़ुलहिज्जा और मुहर्रम' और एक अकेला, जो कि 'रजब' है। यह जो वर्ष के महीनों की संख्या और उनमें से चार के हुरमत वाले होने का उल्लेख किया गया है, वही सीधा धर्म है। अतः इन हुरमत वाले महीनों के अंदर युद्ध करके और उनकी पवित्रता को भंग करके अपने प्राणों पर अत्याचार न करो। तथा बहुदेववादियों से सब मिलकर युद्ध करो, जैसे वे मिलकर तुमसे युद्ध करते हैं। और यह जान लो कि अल्लाह अपनी मदद और सुदृढ़ीकरण के द्वारा उन लोगों के साथ है, जो उसके आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर उससे डरते हैं। और जिसके साथ अल्लाह हो, उसे कोई पराजित नही कर सकता।

Tevbe 9:37

किसी हुरमत वाले महीने की पवित्रता को एक ग़ैर-हुरमत वाले महीने तक विलंब करना और इसे उसके स्थान पर रखना (जैसा कि पूर्व-इस्लामिक युग में अरब करते थे) उनके अल्लाह के साथ कुफ़्र पर कुफ़्र में वृद्धि है; क्योंकि उन्होंने हुरमत वाले महीनों के बारे में अल्लाह के आदेश का इनकार किया है। शैतान इसके द्वारा उन लोगों को गुमराह करता है, जिन्होंने अल्लाह का इनकार किया जब उसने उनके लिए यह बुरा तरीक़ा जारी किया। वे एक साल हुरमत वाले महीने को किसी हलाल महीने से बदलकर हलाल कर लेते हैं और एक साल उसकी हुरमत को बाक़ी रहने देते हैं, ताकि वे उन महीनों की संख्या के अनुरूप हों जिन्हें अल्लाह ने हुरमत वाला बनाया है, भले ही वे उनकी यथार्था के विपरीत हों। चुनाँचे वे किसी महीने को हलाल बनाते हैं, तो उसके स्थान पर एक महीने को हराम घोषित कर देते हैं। इस तरह वे अल्लाह के हराम किए हुए हुरमत वाले महीनों को हलाल कर लेते हैं और उसके आदेश का उल्लंघन करते हैं। दरअसल शैतान ने उनके लिए बुरे कामों को अच्छा बना दिया और वे उन्हें करने लगे। जिनमें से एक महीनों को आगे-पीछे करना भी है। और अल्लाह उन काफ़िरों को हिदायत नहीं देता, जो अपने कुफ़्र पर अडिग रहते हैं।

Tevbe 9:38

ऐ अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान लाने वालो और उसकी शरीयत का पालन करने वालो! तुम्हें क्या हो गया है कि जब तुम्हें अपने दुश्मन से लड़ने के लिए अल्लाह के मार्ग में जिहाद के लिए बुलाया जाता है, तो तुम धीमे हो जाते हो और अपने घरों में स्थिरता को तरजीह देते हो?! क्या तुम आख़िरत (परलोक) के शाश्वत आनंद (सुख) के बदले, जो अल्लाह ने अपने मार्ग में जिहाद करने वालों के लिए तैयार कर रखा है, इस दुनिया के क्षणभंगुर जीवन के सुखों और समाप्त हो जाने वाले आनंदों से संतुष्ट हो गए हो?! तो (जान लो कि) आख़िरत के पक्ष में इस सांसारिक जीवन का आनंद बहुत तुच्छ है। फिर एक समझदार व्यक्ति नश्वर को शाश्वत पर, और महान पर तुच्छ को कैसे चुन सकता है?!

Tevbe 9:39

यदि (ऐ मोमिनो!) तुम अपने दुश्मन से लड़ने के लिए अल्लाह के रास्ते में जिहाद करने के लिए नहीं निकलोगे, तो अल्लाह तुम्हें उत्पीड़न, अपमान और अन्य चीजों से दंडित करेगा, तथा तुम्हारे स्थान पर ऐसे लोगों को ले आएगा, जो अल्लाह के आज्ञाकारी होंगे, जब उन्हें जिहाद के लिए निकलने को कहा जाएगा, तो निकल पड़ेंगे। और तुम उसके आदेश की अवहेलना करके उसे कुछ भी हानि नहीं पहुँचा सकोगे। क्योंकि वह तुमसे बेनयाज़ है और तुम उसके मोहताज हो। और अल्लाह हर चीज़ करने में समर्थ है। कोई चीज़ उसे विवश नहीं कर सकती। अतः वह तुम्हारे बिना अपने धर्म और अपने नबी का समर्थन करने में सक्षम है।

Tevbe 9:40

यदि (ऐ मोमिनो!) तुम रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की सहायता नहीं करते, और अल्लाह के मार्ग में जिहाद के लिए उसके आह्वान का जवाब नहीं देते, तो अल्लाह ने तुम्हारे बिना ही उनकी सहायता उस समय की है, जब बहुदेववादियों ने उन्हें (मक्का से) निकाल दिया था। केवल वह और अबू बक्र थे। उनका कोई तीसरा नहीं था। जब वे दोनों 'साैर' नामी गुफा में उन काफ़िरों से छिपे हुए थे, जो उन दोनों को तलाश कर रहे थे। जब अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम अपने साथी अबू बक्र सिद्दीक़ से, उन्हें मुश्रिकों द्वारा उनके पकड़े जाने का डर होने पर, कह रहे थे : दुखी मत हो। निःसंदेह अल्लाह अपने समर्थन और मदद के साथ, हमारे साथ है। तो अल्लाह ने अपने रसूल के दिल पर शांति उतार दी और आपपर ऐसे सैनिक उतारे जिन्हें तुम नहीं देखते, और वे फ़रिश्ते थे जो आपका समर्थन कर रहे थे। तथा उसने काफ़िरों की बात नीची कर दी, और अल्लाह की बात ही सर्वोच्च है जब उसने इस्लाम को ऊँचा कर दिया। और अल्लाह अपने अस्तित्व, अपनी प्रबलता और राज्य में प्रभुत्वशाली है, उसे कोई पराजित नहीं कर सकता, अपने प्रबंधन, नियति और विधान में पूर्ण हिकमत वाला है।

Tevbe 9:41

(ऐ मोमिनो!) तुम कठिनाई और आराम में, युवा और बूढ़े अल्लाह के मार्ग में जिहाद के लिए निकल पड़ो और अपने धनों और अपनी जानों के साथ जिहाद करो। क्योंकि यह निकलना और धनों और जानों के साथ जिहाद करना, दुनिया एवं आख़िरत के जीवन में, घर में बैठे रहने और जान एवं माल की सुरक्षा से चिपके रहने से ज़्यादा फायदेमंद है। यदि तुम इसका ज्ञान रखते हो, तो इसके लालायित बनो।

Tevbe 9:42

यदि आप जिसकी ओर उन मुनाफ़िक़ों को बुला रहे थे, जिन्होंने आपसे पीछे रहने की अनुमति माँगी थी, आसानी से प्राप्त होने वाला ग़नीमत का धन और बिना कठिनाई का सफ़र होता, तो वे (ऐ नबी!) आपका अवश्य अनुसरण करते। लेकिन वह फ़ासला जो आपने उनको शत्रु के पास जाने के लिए तय करने को कहा था, उनसे बहुत दूर था, सो वे पीछे रह गए। और जब आप (युद्ध से) उनके पास लौटेंगे, तो ये पीछे रहने की अनुमति माँगने वाले मुनाफ़िक़ अल्लाह की क़समें खाकर कहेंगे : अगर हम आपके साथ जिहाद में निकलने की ताक़त रखते, तो हम ज़रूर निकलते। वे जिहाद से पीछे रहकर और इन झूठी क़समों के कारण, खुद को अल्लाह की सज़ा के लिए पेश करके, अपनी तबाही मोल ले रहे हैं। जबकि अल्लाह जानता है कि निश्चय वे अपने दावे और अपनी इन क़समों में झूठे हैं।

Tevbe 9:43

अल्लाह ने (ऐ रसूल!) आपके उन्हें पीछे रहने की अनुमति देने के इज्तिहाद (निर्णय) को क्षमा कर दिया। आपने उन्हें इसकी अनुमति क्यों दी? यहाँ तक कि आपके लिए यह स्पष्ट हो जाता कि कौन लोग अपने बहाने में सच्चे हैं और कौन झूठे। ताकि आप उनमें से सच्चे लोगों को अनुमति देते, न कि झूठे लोगों को।

Tevbe 9:44

(ऐ रसूल!) जो लोग अल्लाह और क़ियामत के दिन पर सच्चा ईमान रखते हैं, उनका यह काम नहीं है कि अपने धनों और अपनी जानों के साथ अल्लाह के मार्ग में जिहाद करने से पीछे रहने की आपसे अनुमति माँगें, बल्कि उनका हाल यह होना चाहिए कि जब उनसे निकलने को कहा जाए, तो निकल पड़ें और अपने धनों और अपनी जानों के साथ जिहाद करें। और अल्लाह अपने उन डर रखने वाले बंदों को जानता है, जो आपसे उसी समय अनुमति माँगते हैं, जब उनके साथ कोई ऐसी मजबूरी हो, जो उन्हें आपके साथ निकलने से रोकती हो।

Tevbe 9:45

(ऐ रसूल!) जो लोग आपसे अल्लाह की राह में जिहाद से पीछे रहने की अनुमति माँग रहे हैं, वे मुनाफ़िक़ लोग हैं, जो न अल्लाह पर ईमान रखते हैं और न क़ियामत के दिन पर ईमान रखते हैं, तथा उनके दिलों में अल्लाह के धर्म के बारे में शक है। अतः वे अपने संदेह में भ्रमित भटक रहे हैं, सत्य का मार्ग नहीं पाते हैं।

Tevbe 9:46

यदि वे अपने इस दावे में सच्चे होते कि वे आपके साथ अल्लाह की राह में जिहाद के लिए निकलना चाहते थे, तो वे उपकरण तैयार करके अवश्य उसके लिए तैयारी करते। परंतु अल्लाह ने उनका आपके साथ निकलना पसंद नहीं किया। इसलिए उनके लिए निकलना भारी बना दिया यहाँ तक कि उन्होंने अपने घरों में बैठने को तरजीह दी।

Tevbe 9:47

इन मुनाफ़िक़ों का तुम्हारे साथ न निकलना ही अचछा था। यदि वे तुम्हरे साथ निकलते, तो तुम्हारी हिम्मत तोड़कर और संदेह पैदा करके, तुम्हारे अंदर बिगाड़ के सिवा कुछ न बढ़ाते, और तुम्हें विभाजित करने के लिए तुम्हारे बीच द्वेष की बातें फैलाते। और (ऐ नबी!) तुम्हारे अंदर ऐसे लोग भी मौजूद हैं, जो उनके फैलाए हुए झूठ को सुनते हैं, उसे स्वीकार करते हैं और फैलाते हैं। जिसके कारण तुम्हारे बीच मतभेद पैदा होता है। और अल्लाह उन अत्याचारी मुनाफ़िकों को भली-भाँति जानता है, जो ईमान वालों के बीच साज़िशें करते हैं और संदेह फैलाते हैं।

Tevbe 9:48

ये मुनाफ़िक़ लोग तबूक के युद्ध से पहले भी मुसलमानों के बीच मतभेद पैदा करके और उनकी एकता को भंग करके उपद्रव मचाने का प्रयास कर चुके हैं, तथा तरकीबों की व्यवस्था करके (ऐ रसूल!) आपके लिए मामलों में विविधता लाते रहे हैं और उलट-फेर करते रहे हैं, शायद उनकी चालें जिहाद करने के आपके संकल्प को प्रभावित कर दें, यहाँ तक कि आपके लिए अल्लाह की मदद और उसका समर्थन आ गया और अल्लाह ने अपने दीन को प्रभुत्व प्रदान किया और अपने दुश्मनों को वशीभूत कर दिया। जबकि वे इसे नापसंद करते थे; क्योंकि वे सत्य पर असत्य की जीत चाहते थे।

Tevbe 9:49

मुनाफ़िक़ों में से कुछ ऐसे हैं, जो गढ़े हुए बहाने पेश करते हैं और कहते हैं : ऐ अल्लाह के रसूल! मुझे जिहाद से पीछे रहने की अनुमति प्रदान करें और मुझे अपने साथ निकलने पर मजबूर न करें, कहीं ऐसा न हो कि मैं रूमी शत्रुओं की स्त्रियों को देखकर किसी गुनाह में पड़ जाऊँ। सुन लो! वास्तव में, वे जो दावा करते हैं उससे कहीं अधिक बड़े फ़ितने में पड़ चुके हैं, जो कि निफ़ाक़ का फ़ितना और युद्ध से पीछे रहने का फ़ितना है। निःसंदेह क़ियामत के दिन जहन्नम काफ़िरों को अवश्य घेरने वाली है। उनमें से कोई भी उससे बच नहीं सकता और न ही वे उससे भागने की कोई जगह पाएँगे।

Tevbe 9:50

यदि (ऐ अल्लाह के रसूल!) आपको विजय या ग़नीमत के धन के रूप में अल्लाह की ओर से कोई आनंदकर नेमत प्राप्त होती है, तो वे उसे नापसंद करते हैं और उसके लिए शोक मनाते हैं। और यदि कठिनाई या दुश्मन की विजय के रूप में आपपर कोई विपत्ति आ पड़ती है, तो ये मुनाफ़िक़ लोग कहते हैं : हमने अपने लिए सावधानी बरती और हमने उस समय समझदारी (विवेक) से काम लिया जब हम लड़ाई के लिए नहीं निकले, जिस तरह कि ईमान वाले निकले थे। जिसके कारण उन्हें क़त्ल और क़ैद का सामना करना पड़ा। फिर ये मुनाफ़िक़ लोग अपनी सुरक्षा से खुश अपने परिवारों की ओर लौटते हैं।

Tevbe 9:51

(ऐ रसूल!) आप इन मुनाफ़िक़ों से कह दें : अल्लाह ने हमारे लिए जो कुछ लिख दिया है, उसके अलावा हमें कुछ भी नहीं पहुँचेगा। क्योंकि वही महिमावान हमारा मालिक और हमारा आश्रय है जिसका हम सहारा लेते हैं, और हम अपने मामलों में उसी पर भरोसा करते हैं। तथा ईमान वाले अपने मामलों को केवल उसी को सौंपते हैं। क्योंकि वही उनके लिए पर्याप्त, और सबसे अच्छा काम बनाने वाला है।

Tevbe 9:52

(ऐ रसूल!) आप उनसे कह दें : तुम हमारे लिए जीत या शहादत के अलावा किसकी प्रतीक्षा कर रहे हो?! और हम तुम्हारे बारे में प्रतीक्षा कर रहे हैं कि अल्लाह तुम्हें अपने पास से कोई यातना दे, जो तुम्हें नष्ट कर दे या हमारे हाथों तुम्हें क़त्ल करवाकर या बंदी बनाकर सज़ा दे, यदि वह हमें तुमसे लड़ाई की अनुमति प्रदान कर दे। तो तुम हमारे परिणाम की प्रतीक्षा करो। हम भी तुम्हारे परिणाम की प्रतीक्षा करते हैं।

Tevbe 9:53

(ऐ रसूल!) आप उनसे कह दें : जो कुछ तुम अपने धन में से खर्च करते हो, उसे स्वेच्छा से या अनिच्छा से खर्च करो। जो कुछ तुमने खर्च किया है वह तुम्हारे कुफ़्र और अल्लाह की अवज्ञा के कारण तुमसे कभी भी स्वीकार नहीं किया जाएगा।

Tevbe 9:54

उनकी ख़र्च की हुई चीज़ों को स्वीकार न किए जाने के तीन कारण हैं : उनका अल्लाह और उसके रसूल का इनकार करना, उनका नमाज़ पढ़ते समय आलस्य और सुस्ती, तथा वे अपना धन स्वेच्छा से खर्च नहीं करते हैं, बल्कि उसे अनैच्छिक रूप से खर्च करते हैं; क्योंकि वे न तो अपनी नमाज़ों में प्रतिफल की आशा रखते हैं और न ही अपने खर्च करने में।

Tevbe 9:55

अतः (ऐ रसूल!) आपको इन मुनाफ़िक़ों के धन तथा उनकी संतान विस्मित न करें और न ही आप उन्हें अच्छा समझें। क्योंकि उनके धन एवं संतान का परिणाम बहुत बुरा है। अल्लाह उन्हें उनके लिए अज़ाब बना देगा कि उसे कमाने में कड़ी मेहनत करेंगे और थकान सहेंगे और दूसरी ओर अल्लाह उनमें विपत्तियाँ उतारता रहेगा यहाँ तक कि अल्लाह उनके कुफ़्र ही की हालत में उनके प्राण निकालेगा, फिर वे जहन्नम के सबसे निचले गड्ढे में अनंत काल के लिए यातना दिए जाएँगे।

Tevbe 9:56

(ऐ मोमिनो!) मुनाफ़िक़ तुम्हारे लिए अल्लाह की झूठी शपथ खाकर कहते हैं कि निःसंदेह वे अवश्य तुममें से हैं। हालाँकि वे अंदरूनी तौर पर तुममें से नहीं हैं, भले ही वे यह प्रकट करें कि वे तुममें से हैं। परंतु वे ऐसे लोग हैं जो डरते हैं कि उन्हें उसी क़त्ल और क़ैद का सामना न करना पड़े, जिसका सामना बहुदेववादियों को करना पड़ा। इसलिए वे बचने के लिए इस्लाम को प्रकट करते हैं।

Tevbe 9:57

यदि इन मुश्रिकों को शरण लेने के लिए कोई क़िला मिल जाए, जिसमें वे अपनी रक्षा कर सकें, या पहाड़ों के अंदर गुफाएँ मिल जाएँ, जिनमें वे छिप सकें, या कोई सुरंग मिल जाए, जिसमें वे प्रवेश कर सकें, तो वे अवश्य उसमें शरण लेंगे ओर दौड़कर उसमें घुस जाएँगे।

Tevbe 9:58

मुनाफ़िक़ों में से कुछ लोग ऐसे हैं, जो सदक़ों के वितरण के बारे में (ऐ रसूल!) आपकी आलोचना करते हैं, जब उन्हें उनमें से वह चीज़ नहीं मिलती, जो वे चाहते हैं। यदि आप उन्हें वह चीज़ दे दें, जो वे माँगते हैं, तो वे आपसे प्रसन्न हो जाते हैं। और यदि आप उन्हें वह चीज़ न दें, जो वे माँगते हैं, तो वे नाराज़गी दिखाते हैं।

Tevbe 9:59

यदि ये मुनाफ़िक़, जो सदक़ों के विभाजन के बारे में आपकी आलोचना करते हैं, उससे संतुष्ट होते, जो अल्लाह ने उनके लिए नियत किया है और जो उसके रसूल ने उन्हें उनमें से दिया है, तथा वे कहते : अल्लाह हमारे लिए पर्याप्त है, अल्लाह हमें अपने अनुग्रह से जो चाहे, देगा और उसके रसूल भी हमें अल्लाह की दी हुई चीज़ों में से प्रदान करेंगे। हम केवल अल्लाह ही से आशा रखते हैं कि वह हमें अपने अनुग्रह से प्रदान करे। यदि उन्होंने ऐसा किया होता, तो यह उनके लिए आपकी आलोचना करने से बेहतर होता।

Tevbe 9:60

अनिवार्य ज़कात फ़क़ीरों को दी जाएगी, इससे अभिप्राय वे ज़रूरतमंद हैं जिनके पास पेशे या नौकरी से प्राप्त कुछ धन है, लेकिन यह उनके लिए पर्याप्त नहीं है और उनकी स्थिति पर ध्यान नहीं दिया जाता है। और मिस्कीनों को, जिनके पास शायद ही कुछ होता है और वे अपनी दयनीय स्थिति या अपनी बात कहने के कारण लोगों से छिपे नहीं होते हैं। और ज़कात कर्मियों को, जिन्हें शासक ज़कात वसूल करने के कार्य पर नियुक्त करता है। और उन काफ़िरों को, जिन्हें परचाना अभीष्ट हो ताकि वे इस्लाम ले आएँ, या कमज़ोर ईमान वालों को, ताकि उनका ईमान मज़बूत हो जाए, या ऐसे व्यक्ति को, जिसकी बुराई को उसके द्वारा दूर किया जाए। और गुलामों को आज़ाद करने के लिए खर्च किया जाएगा, और बिना फ़िज़ूलखर्ची और अवज्ञा के क़र्ज़ लेने वालों को, यदि उनके पास अपना क़र्ज़ चुकाने का सामर्थ्य न हो। और अल्लाह के रास्ते में जिहाद करने वाले मुजाहिदों की तैयारी में खर्च किया जाएगा और उस यात्री पर, जिसका खर्च सफर के दौरान खत्म हो गया। ज़कात के व्यय को केवल इन्हीं लोगों तक सीमित रखना अल्लाह की ओर से एक दायित्व है, और अल्लाह अपने बंदों के हितों के बारे में जानने वाला, अपने प्रबंधन और विधान में हिकमत वाला है।

Tevbe 9:61

तथा मुनाफ़िक़ों में से कुछ लोग ऐसे हैं, जो रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को अपने शब्दों के साथ कष्ट पहुँचाते हैं। वे आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की सहनशीलता को देखकर कहते हैं : वह हर एक की बात सुनते हैं और उसपर विश्वास कर लेते हैं, और सत्य और झूठ के बीच अंतर नहीं करते हैं। (ऐ रसूल!) आप उनसे कह दें : रसूल अच्छे के अलावा कुछ नहीं सुनते। वह अल्लाह पर विश्वास रखते हैं और सच्चे ईमान वाले जो कहते हैं उस पर विश्वास करते हैं और उनपर दया करते हैं। क्योंकि आपका रसूल बनाकर भेजा जाना उन लोगों के लिए दया है जो आपपर ईमान रखते हैं। और जो लोग आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को किसी भी तरह के दुर्व्यवहार से कष्ट पहुँचाते हैं, उनके लिए दर्दनाक यातना है।

Tevbe 9:62

(ऐ मोमिनो!) मुनाफ़िक़ तुम्हारे सामने अल्लाह की क़सम खाते हैं कि उन्होंने ऐसा कुछ भी नहीं कहा, जो नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को कष्ट पहुँचाए। ऐसा तुम्हें खुश करने के लिए कह रहें। हालाँकि अल्लाह और उसके रसूल ईमान और सत्कर्म द्वारा खुश किए जाने के ज़्यादा हक़दार हैं, यदि ये लोग सच्चे ईमान वाले हैं।

Tevbe 9:63

क्या इन मुनाफ़िक़ों को नहीं पता कि वे ऐसा करने से अल्लाह और उसके रसूल का विरोध करने वाले हैं, और यह कि जो भी उनसे दुश्मनी करेगा, वह क़ियामत के दिन जहन्नम की आग में प्रवेश करेगा, जिसमें वह हमेशा रहेगा?! यही बहुत बड़ा अपमान और रुसवाई है।

Tevbe 9:64

मुनाफ़िक़ इस बात से डरते हैं कि अल्लाह अपने रसूल पर कोई ऐसी सूरत न उतार दे, जो मोमिनों को, उनके दिल के अंदर मौजूद कुफ़्र से अवगत करा दे। (ऐ रसूल!) आप कह दें : (ऐ मुनाफ़िक़ो!) तुम मज़ाक़ उड़ाते और धर्म (इस्लाम) के अंदर दोष निकालते रहो। निश्चय अल्लाह कोई सूरत उतारकर अथवा अपने रसूल को उसके बारे में सूचित करके, उस बात को प्रकट करने वाला है, जिससे तुम डर रहे हो।

Tevbe 9:65

और यदि (ऐ रसूल!) आप मुनाफ़िक़ों से उसके बारे में पूछें, जो उन्होंने व्यंग्य किया है और मोमिनों को बुरा-भला कहा है, जबकि अल्लाह ने आपको उसके बारे में सूचित कर दिया, तो वे अवश्य कहेंगे : हम तो यूँ ही बातचीत और हँसी-मज़ाक़ कर रहे थे, हम गंभीर मुद्रा में नहीं थे। (ऐ रसूल!) आप कह दें : क्या तुम अल्लाह, उसकी आयतों और उसके रसूल का मज़ाक़ उड़ा रहे थे?!

Tevbe 9:66

तुम ये झूठे बहाने न बनाओ, क्योंकि तुमने उपहास करके अपने छिपे हुए कुफ़्र को प्रकाश में ला दिया है। यदि हम तुम्हारे एक समूह को, निफ़ाक़ से किनारा करने, उससे तौबा करने और अल्लाह के लिए निष्ठावान हो जाने के कारण क्षमा कर दें, तो भी तुम्हारे एक समूह को, उसके निफ़ाक़ पर बने रहने और उससे तौबा न करने के कारण अवश्य यातना देंगे।

Tevbe 9:67

मुनाफ़िक़ पुरुष और महिलाएँ, सबके सब निफ़ाक़ की स्थितियों में एक जैसे हैं, और वे मोमिनों के विपरीत हैं। वे बुराई का आदेश देते हैं, भलाई से रोकते हैं और अपने धन में कंजूसी करते हैं। इसलिए वे उसे अल्लाह के रास्ते में खर्च नहीं करते हैं। उन्होंने अल्लाह की आज्ञा का पालन करना छोड़ दिया, तो अल्लाह ने भी उन्हें अपनी तौफ़ीक़ से वंचित कर दिया। निश्चय मुनाफ़िक़ लोग ही अल्लाह के आज्ञापालन और सत्य के मार्ग से निकलकर उसकी अवज्ञा और गुमराही के मार्ग की ओर जाने वाले हैं।

Tevbe 9:68

अल्लाह ने मुनाफ़िक़ों और काफ़िरों से, जिन्होंने तौबा नहीं की, उन्हें जहन्नम की आग में दाख़िल करने का वादा किया है, जिसमें वे हमेशा के लिए रहेंगे। यह उन्हें दंड के रूप में पर्याप्त होगा, तथा अल्लाह उन्हें अपनी दया से निष्कासित कर देगा और उनके लिए निरंतर यातना होगी।

Tevbe 9:69

(ऐ मुनाफ़िक़ो!) तुम, कुफ़्र और मज़ाक उड़ाने के मामले में अपने से पहले झुठलाने वाले समुदायों की तरह हो। वे तुमसे अधिक शक्तिशाली और अधिक धन और संतान वाले थे। चुनाँचे उन्होंने सांसारिक सुखों और इच्छाओं के अपने लिखे हिस्से का आनंद लिया। फिर तुमने उसमें से अपने लिए नियत हिस्से का आनंद लिया, जैसा कि पिछले झुठलाने वाले समुदायों ने अपने हिस्से का आनंद लिया था। तथा तुमने उसी तरह सत्य को झुठलाया और रसूल पर दोष लगाया, जिस तरह उन्होंने सत्य को झुठलाया और अपने रसूलों पर दोष लगाया था। ये इन निंदनीय गुणों से विशेषित लोग ही हैं, जिनके कर्म कुफ़्र के कारण अल्लाह की दृष्टि में भ्रष्ट होने की वजह से व्यर्थ हो गए और यही वास्तविक नुकसान उठाने वाले लोग हैं, जिन्होंने खुद को विनाश के स्थानों में ले जाकर अपना नुकसान किया है।

Tevbe 9:70

क्या इन मुनाफ़िक़ों के पास यह खबर नहीं आई कि झुठलाने वाले समुदायों ने क्या किया, और उन्हें क्या दंड दिया गया : जैसे नूह अलैहिस्सलाम की जाति, हूद अलैहिस्सलाम की जाति, सालेह अलैहिस्सलाम की जाति, इबराहीम अलैहिस्सलाम की जाति, मदयन वाले और लूत अलैहिस्सलाम की जाति की बस्तियों वाले; उनके पास उनके रसूल स्पष्ट प्रमाणों और खुले तर्कों के साथ आए। फिर अल्लाह ऐसा न था कि उनपर अत्याचार करता; क्योंकि उनके रसूलों ने उन्हें सावधान कर दिया था। परंतु वे अल्लाह के साथ कुफ़्र करने और उसके रसूलों को झुठलाने के कारण खुद अपने ऊपर अत्याचार करते थे।

Tevbe 9:71

तथा ईमान वाले पुरुष और ईमान वाली स्त्रियाँ एक-दूसरे के समर्थक और मददगार हैं; क्योंकि ईमान ने उन्हें एक-दूसरे से जोड़ दिया है। वे भलाई अर्थात हर उस कार्य का आदेश देते हैं, जो अल्लाह को पसंद है, जैसे तौहीद और नमाज़ आदि, और बुराई अर्थात हर उस कार्य से रोकते हैं, जिससे अल्लाह घृणा करता है, जैसे कुफ़्र और सूद आदि, तथा पूरी नमाज़ को पूर्णतम तरीक़े से अदा करते हैं और अल्लाह तथा उसके रसूल का कहा मानते हैं। ये लोग जो इन प्रशंसनीय गुणों से सुसज्जित हैं, अल्लाह उन्हें अपनी दया में प्रवेश करेगा। निःसंदेह अल्लाह सब पर प्रभुत्वशाली है, उसपर किसी का ज़ोर नहीं चलता। वह अपनी रचना, प्रबंधन और विधान में हिकमत वाला है।

Tevbe 9:72

अल्लाह ने ईमान वाले पुरुषों तथा ईमान वाली स्त्रियों से वादा किया है कि वह क़ियामत के दिन उन्हें ऐसी जन्नतों में प्रवेश करेगा, जिनके महलों के नीचे से नहरें प्रवाहित होंगी, जहाँ वे हमेशा रहेंगे, उसमें न उन्हें कभी मौत आएगी और न उनकी नेमतें खत्म होंगी। तथा अल्लाह ने उनसे स्थायी बाग़ों में अच्छे आवासों में प्रवेश देने का वादा किया है। और उनपर अल्लाह की उतरने वाली प्रसन्नता, इन सबसे बढ़कर है। यही बदला, जिसका उल्लेख किया गया, बहुत बड़ी कामयाबी है, जिसके बराबर कोई कामयाबी नहीं हो सकती।

Tevbe 9:73

(ऐ रसूल!) आप काफ़िरों के साथ तलवार से जिहाद करें और मुनाफ़िक़ों के साथ ज़ुबान एवं तर्क से जिहाद करें, तथा उन दोनों पक्षों पर सख़्ती करें। क्योंकि वे इसी के योग्य हैं। और क़ियामत के दिन उनका ठिकाना जहन्नम है और वह बहुत बुरा स्थान है।

Tevbe 9:74

ये मुनाफ़िक़ अल्लाह की झूठी शपथ खाकर कहते हैं : आपको उनके विषय में जो बात पहुँची है कि उन्होंने आपको बुरा-भला कहा है और आपके धर्म पर दोष लगाया है, वह बात उन्होंने नहीं कही है। हालाँकि निःसंदेह उन्होंने कुफ़्र की ओर ले जाने वाली वह बात सचमुच कही है, जिसकी सूचना आपको मिली है और उन्होंने ईमान का प्रदर्शन करने के बाद कुफ़्र का प्रदर्शन किया है। तथा उन्होंने नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की हत्या करने का इरादा किया, जिसमें वे सफल न हो सके। उन्होंने उस चीज़ को नकार दिया, जिसे नकारा नहीं जाता और वह यह कि अल्लाह ने उनपर अनुग्रह करते हुए उन्हें उस ग़नीमत के धन द्वारा समृद्ध कर दिया, जो उसने अपने नबी को प्रदान किया। अब यदि वे अपने निफ़ाक से तौबा कर लें, तो यह उनके लिए निफ़ाक़ पर जमे रहने से बेहतर होगा। और यदि तौबा करने से मुँह फेर लें, तो अल्लाह उन्हें दुनिया में क़त्ल और क़ैद के रूप में दर्दनाक यातना से पीड़ित करेगा तथा वह आखिरत में उन्हें आग से दर्दनाक अज़ाब देगा। और उनका कोई संरक्षक नहीं होगा, जो उनकी सहायता करके उन्हें अज़ाब से बचा सके, और न कोई सहायक होगा, जो उनपर से अज़ाब को दूर कर सके।

Tevbe 9:75

मुनाफ़िक़ो में से कुछ लोग ऐसे हैं, जिन्होंने अल्लाह को यह कहते हुए वचन दिया था : यदि अल्लाह ने हमें अपने अनुग्रह से कुछ प्रदान किया, तो हम अवश्य ज़रूरतमंदों को दान करेंगे और अच्छे कार्य करने वालों में से हो जाएँगे।

Tevbe 9:76

फिर जब अल्लाह ने उन्हें अपने अनुग्रह में से कुछ प्रदान कर दिया, तो उन्होंने अल्लाह से किए हुए अपने वादे को पूरा नहीं किया, बल्कि उन्होंने अपने धन को रोक लिया और दान में कुछ भी नहीं दिया और ईमान से मुँह मोड़ते हुए फिर गए।

Tevbe 9:77

तो इसका परिणाम यह हुआ कि अल्लाह ने उनके दिलों में क़ियामत के दिन तक के लिए निफ़ाक़ को स्थिर कर दिया; उनके अल्लाह के वादे को तोड़ने और झूठ बोलने पर उनके लिए दंड के रूप में।

Tevbe 9:78

क्या इन मुनाफ़िक़ों को यह नहीं मालूम कि अल्लाह उस छल-कपट और चाल को जानता है, जो वे अपनी सभाओं में छिपाते हैं और यह कि अल्लाह परोक्ष की सभी बातों को अच्छी तरह जानने वाला है? इसलिए उनके कामों में से कुछ भी उससे छिपा नहीं है और वह उन्हें उनका बदला देगा।

Tevbe 9:79

जो लोग स्वेच्छापूर्वक दान देने वाले मोमिनों को अल्प-दान देने का ताना देते हैं, जो केवल थोड़ी-सी चीज़ पाते हैं जो उनकी भरसक परिश्रम का परिणाम होता है। इसलिए ये उनका उपहास करते हुए कहते हैं : उनके इस दान से क्या होने वाला है?! उनके ईमान वालों का उपहास करने के बदले के तौर पर अल्लाह ने उनका उपहास किया और उनके लिए दर्दनाक यातना है।

Tevbe 9:80

(ऐ रसूल!) आप उनके लिए क्षमा याचना करें अथवा न करें। यदि आप उनके लिए सत्तर बार भी क्षमा याचना करें, तो यह अपनी बहुतायत के बावजूद उनके लिए अल्लाह की क्षमा की प्राप्ति तक कभी नहीं पहुँचाएगी। क्योंकि वे अल्लाह और उसके रसूल का इनकार करने वाले हैं और अल्लाह जान बूझकर अपनी शरीयत के दायरे से निकल जाने वालों को सत्य की तौफ़ीक़ नहीं देता।

Tevbe 9:81

तबूक के युद्ध से पीछे छोड़ दिए गए मुनाफ़िक़, अल्लाह के रसूल के आदेश का उल्लंघन करते हुए, अल्लाह के मार्ग में जिहाद से अपने बैठ रहने पर प्रसन्न हुए, तथा उन्होंने अपने धन एवं प्राण के साथ अल्लाह के मार्ग में मोमिनों की तरह जिहाद करने को नापसंंद किया, और अपने मुनाफ़िक़ भाइयों को हतोत्साहित करते हुए कहा : इस गर्मी में न निकलो। क्योंकि तबूक का युद्ध सख़्त गर्मी के दिनों में हुआ था। (ऐ रसूल!) आप उनसे कह दें : जहन्नम की आग, जो मुनाफ़िक़ों की प्रतीक्षा कर रही है, इस गर्मी से कहीं ज़्यादा गर्म है, जिससे वे भागे हैं, यदि वे जानते होते।

Tevbe 9:82

अतः जिहाद से पीछे रहने वाले इन मुनाफ़िक़ों को अपने नश्वर सांसारिक जीवन में थोड़ा हँसना चाहिए और उन्हें अपने बाक़ी रहने वाले आखिरत के जीवन में बहुत ज़्यादा रोना चाहिए। यह उस कुफ़्र, पाप और अवज्ञा का बदला है, जो उन्होंने दुनिया में कमाया है।

Tevbe 9:83

तो (ऐ नबी!) यदि अल्लाह आपको इन मुनाफ़िक़ों के किसी समूह की ओर वापस लाए, जो अपने निफ़ाक़ पर क़ायम हो। फिर वह आपके साथ किसी अन्य युद्ध में निकलने की अनुमति माँगे, तो आप उनसे कह दें : (ऐ मुनाफ़िक़ो!) तुम मेरे साथ अल्लाह की राह में जिहाद के लिए कभी नहीं निकलोगे। यह तुम्हारे लिए एक सज़ा के तौर पर और तुम्हारे मेरे साथ मौजूद होने से निष्कर्षित होने वाली बुराइयों से बचाव के रूप में है। तुम तबूक के युद्ध में पीछे बैठ रहने पर खुश थे, इसलिए पीछे रहने वाले बीमारों, स्त्रियों और बच्चों के साथ बैठे रहो।

Tevbe 9:84

इन मुनाफ़िक़ों में से कोई मर जाए, तो (ऐ रसूल!) आप उसका कभी जनाज़ा न पढ़ना और न उसकी क़ब्र पर उसकी क्षमा की प्रार्थना के लिए खड़े होना। क्योंकि उन्होंने अल्लाह और उसके रसूल के साथ कुफ़्र किया है और अल्लाह की अवज्ञा करते हुए मरे हैं। और जो कोई ऐसा हो, उसका न तो जनाज़ा पढ़ा जाएगा और न उसके लिए दुआ की जाएगी।

Tevbe 9:85

और (ऐ रसूल!) आपको इन मुनाफ़िक़ों के धन तथा उनकी संतान आश्चर्यचकित न करें। अल्लाह तो यह चाहता है कि उन्हें इनके द्वारा सांसारिक जीवन में यातना दे, क्योंकि वे इस रास्ते में आने वाली कठिनाइयों और विपत्तियों को झेलते हैं, और यह कि उनके प्राण उनके शरीर से इस दशा में निकलें कि वे काफ़िर हों।

Tevbe 9:86

तथा जब अल्लाह अपने नबी मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर कोई सूरत उतारता है, जिसमें अल्लाह पर ईमान लाने तथा उसके रास्ते में जिहाद करने का आदेश होता है, तो उन मुनाफ़िक़ों में से धनवान लोग आपसे पीछे रहने की अनुमति माँगते हैं और कहते हैं : आप हमें छोड़ दें कि हम कमज़ोरों और अपाहिजों जैसे बहाने वाले लोगों के साथ पीछे रह जाएँ।

Tevbe 9:87

इन मुनाफ़िक़ों ने अपने लिए अपमान और रुसवाई को पसंद कर लिया, जब वे बहाने वाले लोगों के साथ (जिहाद से) पीछे रह जाने पर संतुष्ट हो गए, तथा अल्लाह ने उनके कुफ़्र एवं निफ़ाक़ के कारण उनके दिलों पर मुहर लगा दी। अतः वे नहीं जानते कि किस चीज़ में उनका हित है।

Tevbe 9:88

जहाँ तक रसूल और उनके साथ के ईमान वालों का सवाल है, तो वे इन लोगों की तरह अल्लाह के मार्ग में जिहाद से पीछे नहीं रहे। बल्कि उन्होंने अल्लाह के मार्ग में अपने धन तथा प्राण के साथ जिहाद किया। जिसके परिणामस्वरूप अल्लाह के पास उनका बदला उनके लिए सांसारिक लाभों की प्राप्ति था जैसे कि विजय और ग़नीमत के धन, तथा परलोक में भी लाभ प्राप्त होगा, जिसमें जन्नत में प्रवेश, वांछित उद्देश्य की प्राप्ति और भय से मुक्ति शामिल है।

Tevbe 9:89

अल्लाह ने उनके लिए ऐसे स्वर्ग तैयार किए हैं, जिनके महलों के नीचे से नहरें बहती हैं। वे वहाँ हमेशा के लिए रहेंगे, कभी भी नष्ट नहीं होंगे। यही बदला ही वह बड़ी सफलता है, जिसके बराबर कोई सफलता नहीं हो सकती।

Tevbe 9:90

मदीना और उसके आस-पास के देहातियों में से कुछ लोग, अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास बहाने लेकर आए, ताकि आप उन्हें अल्लाह के रास्ते में जिहाद के लिए निकलने से पीछे रहने की अनुमति प्रदान कर दें। जबकि कुछ अन्य लोग भी पीछे रह गए, जिन्होंने जिहाद में न निकलने का बिल्कुल भी कोई बहाना पेश नहीं किया; क्योंकि वे नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को सच्चा नहीं मानते थे और अल्लाह के वादे पर विश्वास नहीं करते थे। ये लोग अपने इस कुफ़्र के कारण एक दर्दनाक और कष्टदायी यातना से पीड़ित होंगे।

Tevbe 9:91

महिलाओं, बच्चों, बीमारों, बुज़ुर्गों, अंधों और उन गरीबों पर जिनके पास युद्ध की तैयारी में खर्च करने को कुछ नहीं होता, इन सभी लोगों पर जिहाद में निकलने से पीछे रहने में कोई गुनाह नहीं है; क्योंकि उनके पास उचित बहाने मौजूद हैं, जबकि वे अल्लाह और उसके रसूल के प्रति निष्ठावान हों और उसकी शरीयत पर अमल करें। इन बहाने वालों में से भलाई करने वालों को दंडित करने के लिए कोई रास्ता नहीं है। और अल्लाह भलाई करने वालों के पापों को क्षमा करने वाला, उनपर दया करने वाला है।

Tevbe 9:92

इसी तरह आपसे पीछे रहने वाले उन लोगों पर भी कोई पाप नहीं है, कि जब वे (ऐ रसूल!) आपके पास यह अनुरोध लेकर आए कि आप उनके लिए सवारी का प्रबंध कर दें, और आपने उनसे कहा कि मैं तुम्हारे लिए सवारी की व्यवस्था करने के लिए कुछ नहीं पाता; तो वे आपके पास से इस दशा में वापस हुए कि उनकी आँखों से आँसू बह रहे थे, उन्हें इस बात का अफसोस था कि उन्हें खुद अपने पास से या आपके पास से वह नहीं मिला जो वे खर्च करें।

Tevbe 9:93

जब अल्लाह ने यह स्पष्ट कर दिया कि बहाने वाले लोगों को दंडित करने का कोई रास्ता नहीं है, तो उन लोगों का उल्लेख किया, जो दंड और पकड़ के योग्य हैं। चुनाँचे फरमाया : सज़ा और पकड़ के हक़दार वे लोग हैं, जो (ऐ रसूल!) आपसे युद्ध से पीछे रहने की अनुमति माँगते हैं। हालाँकि उनके पास युद्ध की तैयारी के साधन मौजूद हैं। उन्होंने घरों में पीछे रहने वाली स्त्रियों के साथ रहकर अपने लिए अपमान और रुसवाई से संतुष्ट हो गए, तथा अल्लाह ने उनके दिलों पर मुहर लगा दी। अतः कोई उपदेश उनपर असर नहीं करता। और इस मुहर लगने के कारण उन्हें पता ही नहीं है कि कौन-सा काम उनके हित में है ताकि उसे अपनाएँ और किसमें उनका अहित है ताकि उससे दूर रहें।

Tevbe 9:94

जिहाद से पीछे रह जाने वाले मुनाफिक़, मुसलमानों के जिहाद से लौटने के समय, उनके सामने कमज़ोर और बेतुके बहाने पेश करेंगे। ऐसे में, अल्लाह अपने नबी और मोमिनों को उन्हें यह जवाब देने का निर्देश देता है : झूठे बहाने मत करो, जो कुछ तुमने हमें बताया है हम कदापि उसपर विश्वास नहीं करेंगे। अल्लाह ने हमें तुम्हारे दिलों की कुछ बातें बता दी हैं। अल्लाह और उसके रसूल देखेंगे : क्या तुम लोग तौबा करते हो, ताकि अल्लाह तुम्हारी तौबा स्वीकार कर ले, या तुम अपने निफ़ाक़ ही पर जमे रहते हो? फिर तुम अल्लाह की ओर लौटाए जाओगे, जो हर चीज़ का ज्ञान रखता है। तो वह तुम्हें बताएगा जो कुछ तुम किया करते थे और तुम्हें उसका बदला देगा। अतः तुम तौबा और सत्कर्म में जल्दी करो।

Tevbe 9:95

ये पीछे रह जाने वाले लोग, जब (ऐ ईमान वालो!) तुम उनकी ओर वापस जाओगे तो अपने झूठे बहानों की पुष्टि के लिए, अल्लाह की क़समें खाएँगे; ताकि तुम उनकी भर्त्सना और निंदा करने से रुक जाओ। अतः आप उन्हें उनकी हालत पर छोड़ दें, क्रोधित व्यक्ति के छोड़ने की तरह। निश्चय ये अशुद्ध और दुष्ट हृदय वाले हैं और इनका ठिकाना जहाँ ये शरण लेंगे, जहन्नम है। यह बदला है उस पाखंड और पाप का, जो वे कमाया करते थे।

Tevbe 9:96

(ऐ ईमान वालो!) ये पीछे रह जाने वाले लोग, तुम्हारे आगे क़समें खाएँगे; ताकि तुम उनसे खुश हो जाओ और उनके बहाने स्वीकार कर लो। पर तुम उनसे खुश न होना। यदि तुम उनसे खुश हो गए, तो तुम अपने पालनहार की अवहेलना करने वाले ठहरोगे। क्योंकि अल्लाह कुफ़्र और निफ़ाक़ के द्वारा उसकी आज्ञाकारिता से निकल जाने वाले लोगों से खुश नहीं होता। अतः (ऐ मुसलमानो!) ऐसे लोगों से खुश होने से सावधान रहो, जिनसे अल्लाह प्रसन्न नहीं होता।

Tevbe 9:97

देहात के रहने वाले यदि अविश्वास या पाखंड के मार्ग पर चल पड़ें, तो उनका कुफ्र अन्य शहरी क्षेत्र के लोगों के कुफ़्र से अधिक गंभीर और उनका पाखंड उन लोगों की तुलना में अधिक सख़्त होगा। तथा ये लोग इस बात के अधिक योग्य हैं कि धर्म से अनभिज्ञ हों और इनके बारे में इस बात की अधिक संभावना है कि धार्मिक कर्तव्यों, सुन्नतों तथा उन आदेशों के नियमों को न जानें, जिन्हें अल्लाह ने अपने रसूल पर उतारा है। क्योंकि वे उजड्डपन, अक्खड़पन और लोगों के साथ मेल-मिलाप और संपर्क के अभाव से पीड़ित हैं। अल्लाह उनकी स्थितियों को जानने वाला है। उनकी कोई बात उससे छिपी नहीं है। वह अपने प्रबंधन और अपने विधान में हिकमत वाला है।

Tevbe 9:98

देहात में रहने वाले पाखंडियों में कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो अल्लाह के मार्ग में खर्च किए हुए धन को घाटा और जुर्माना समझते हैं, क्योंकि उनका भ्रम है कि यदि उन्होंने खर्च किया तो उन्हें प्रतिफल नहीं मिलेगा और अगर खर्च नहीं किया तो अल्लाह उन्हें दंडित नहीं करेगा। किंतु इसके बावजूद कभी-कभी दिखावा और अपने बचाव के लिए खर्च कर देते हैं। वे इस बात की प्रतीक्षा में रहते हैं कि (ऐ ईमान वालो!) तुमपर कोई बुराई उतर पड़े और उन्हें तुमसे छुटकारा मिल जाए। वे जिस बुराई और गंभीर परिणाम वाले कालचक्र के मुसलमानों पर उतरने की कामना कर रहे हैं, अल्लाह उसे ईमान वालों के बजाय, स्वयं उन्हीं पर उतार दे। वे जो कुछ कहते हैं अल्लाह उसे सुनने वाला और जो कुछ छिपाते हैं उसे जानने वाला है।

Tevbe 9:99

देहात में रहने वालों में से कुछ ऐसे भी हैं, जो अल्लाह पर तथा क़ियामत के दिन पर ईमान रखते हैं और अल्लाह के रास्ते में जो धन खर्च करते हैं, उसे अल्लाह की निकटता प्राप्त करने का ज़रिया तथा रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की दुआ और क्षमायाचना की प्राप्ति का साधन समझते हैं। सुन लो, उसका अल्लाह के रास्ते में खर्च करना और रसूल का उसके लिए दुआ करना, निश्चय ही उसके लिए अल्लाह के पास निकटता प्राप्त करने का साधन है, जिसका अल्लाह के पास उसे यह प्रतिफल मिलेगा कि अल्लाह उसे अपनी विशाल दया में प्रवेश करेगा, जिसमें उसकी क्षमा और उसकी जन्नत शामिल है। निःसंदेह अल्लाह अपने तौबा करने वाले बंदों को क्षमा करने वाला, उनपर दया करने वाला है।

Tevbe 9:100

जिन लोगों ने सबसे पहले ईमान लाने में जल्दी की, चाहे वे मुहाजिरीन हों, जो अपना घर और देश छोड़कर अल्लाह की ओर निकल पड़े, या अंसार, जिन्होंने अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की मदद की, तथा वे लोग जिन्होंने अक़ीदा, कथनों और कर्मों में अच्छाई के साथ ईमान की ओर पहल करने वाले मुहाजिरीन और अंसार का अनुसरण किया - अल्लाह इन सभी लोगों से खुश हो गया और उनकी आज्ञाकारिता को स्वीकार कर लिया, तथा वे लोग भी उससे प्रसन्न हो गए, क्योंकि उसने उन्हें अपना महान प्रतिफल प्रदान किया और उनके लिए ऐसी जन्नतें तैयार कर रखी हैं, जिनके महलों के नीचे नहरें बहती हैं, जिनमें वे सदैव रहने वाले हैं। यह बदला ही महान सफलता है।

Tevbe 9:101

देहात के वासियों में से जो लोग मदीना के आस-पास हैं, उनमें से कुछ लोग मुनाफ़िक़ हैं और मदीना वालों में से भी कुछ लोग मुनाफ़िक़ हैं, जो निफाक़ पर क़ायम और उसपर जमे हुए हैं। (ऐ रसूल!) आप उन्हें नहीं जानते, अल्लाह ही उन्हें भली-भाँति जानता है। शीघ्र ही अल्लाह उन्हें दो बार यातना देगा : एक बार दुनिया में उनके पाखंड को उजागर करके तथा उन्हें क़त्ल किए जाने और बंदी बनाए जाने के द्वारा, तथा दूसरी बार आख़िरत में क़ब्र की यातना देकर। फिर वे क़ियामत के दिन जहन्नम के पाताल में एक बड़ी यातना की ओर लौटाए जाएँगे।

Tevbe 9:102

तथा मदीना वालों में से कुछ अन्य लोग भी हैं, जो बिना किसी कारण (बहाने) के युद्ध से पीछे रह गए। लेकिन उन्होंने झूठे बहाने बनाने के बजाय, स्वयं स्वीकार कर लिया कि उनके पास (युद्ध में शामिल न होने का) कोई कारण (बहाना) नहीं था। उन्होंने अपने पिछले अच्छे कर्मों, जैसे अल्लाह की आज्ञाकारिता करने, उसके नियमों का पालन करने और उसके मार्ग में जिहाद करने के साथ एक बुरे काम को मिला दिया। उन्हें आशा है कि अल्लाह उनके पश्चाताप को स्वीकार करेगा और उन्हें क्षमा कर देगा। निःसंदेह अल्लाह अपने तौबा करने वाले बंदो को क्षमा करने वाला, उनपर दया करने वाला है।

Tevbe 9:103

(ऐ रसूल!) आप उनके मालों में से ज़कात लें, जिसके द्वारा आप उन्हें अवज्ञा और पापों की गंदगी से शुद्ध करें और उसके साथ उनके अच्छे कर्मों को विकसित करें। तथा उसे उनसे लेने के बाद, उनके लिए दुआ करें। निःसंदेह आपकी दुआ उनके लिए दया और संतोष का कारण है। अल्लाह आपकी दुआ को सुनने वाला, उनके कार्यों और इरादों को जानने वाला है।

Tevbe 9:104

जिहाद से पीछे रह जाने वालों और पश्चाताप करके अल्लाह की ओर लौटने वालों को पता होना चाहिए कि अल्लाह अपने तौबा करने वाले बंदों की तौबा क़बूल करता है, और यह कि वह दान को स्वीकार करता है, जबकि उसे उसकी कोई आवश्यकता नहीं है, तथा दान करने वाले को उसके दान का सवाब देता है। निःसंदेह पवित्र अल्लाह अपने तौबा करने वाले बंदो की तौबा क़बूल करने वाला, उनपर दया करने वाला है।

Tevbe 9:105

तथा (ऐ रसूल!) आप इन जिहाद से पीछे रह जाने वालों और अपने पाप से तौबा करने वालों से कह दीजिए : जो चीज़ तुमसे छूट गई है, उसके नुक़सान की भरपाई करो, अपने कार्यों को अल्लाह के लिए ख़ालिस (विशुद्ध) रखो और उसे प्रसन्न करने वाले कार्य करो। अल्लाह, उसके रसूल और ईमान वाले तुम्हारे कार्यों को देखेंगे। तथा क़ियामत के दिन तुम अपने पालनहार की ओर लौटाए जाओगे, जो हर चीज़ का ज्ञान रखता है। वह जानता है जो कुछ तुम गुप्त रखते हो और जो कुछ तुम प्रदर्शित करते हो। फिर वह तुम्हें बता देगा जो कुछ तुम दुनिया में किया करते थे और तुम्हें उसका बदला देगा।

Tevbe 9:106

तबूक की लड़ाई से पीछे रहने वालों में से कुछ दूसरे लोग भी हैं, जिनके पास कोई बहाना नहीं था। इनका मामला अल्लाह का फ़ैसला और इनके बारे में उसका आदेश आने तक स्थगित कर दिया गया है। अल्लाह उनके बारे में जो चाहे, फैसला करे : या तो वह उन्हें दंडित करे यदि वे तौबा न करें, या उनकी तौबा स्वीकार करे अगर वे तौबा कर लें। अल्लाह अच्छी तरह जानता है कि कौन उसके दंड का हक़दार है और कौन उसकी क्षमा के योग्य है। वह अपने विधान और प्रबंधन में हिकमत वाला है। ये लोग : मुरारा बिन रबी', कअब बिन मालिक और हिलाल बिन उमैया थे।

Tevbe 9:107

तथा मुनाफ़िक़ो में से वे लोग भी हैं, जिन्होंने एक मस्जिद बनाई पर अल्लाह की आज्ञाकारिता के लिए नहीं, बल्कि मुसलमानों को नुक़सान पहुँचाने के लिए, मुनाफ़िक़ों को मज़बूत करके कुफ़्र का प्रदर्शन करने के लिए, ईमान वालों के बीच फूट डालने के लिए और उन लोगों को तैयारी का स्थान तथा घात स्थल प्रदान करने के लिए, जिन्होंने मस्जिद के निर्माण से पूर्व अल्लाह और उसके रसूल से लड़ाई की। निश्चय ये मुनाफ़िक़ तुमसे अवश्य ही क़समें खाकर कहेंगे : हमारा मक़सद तो केवल मुसलमानों के साथ आसानी (दयालुता) का था। जबकि अल्लाह गवाही देता है कि निश्चय वे अपने इस दावे में झूठे हैं।

Tevbe 9:108

(ऐ नबी!) आप इस तरह की मस्जिद में नमाज़ पढ़ने के लिए मुनाफ़िक़ों के आमंत्रण को स्वीकार न करें। क्योंकि क़ुबा की मस्जिद, जिसे शुरू ही से तक़्वा (धर्मपरायणता) पर स्थापित किया गया है, आपका उसमें नमाज़ पढ़ना इस मस्जिद की तुलना में अधिक उपयुक्त है, जिसे कुफ़्र पर स्थापित किया गया है। क़ुबा की मस्जिद में ऐसे लोग हैं, जो अशुद्धियों और गंदगियों से पानी के द्वारा और पापों से तौबा और क्षमायाचना के द्वारा शुद्ध रहना पसंद करते हैं, और अल्लाह अशुद्धताओं, गंदगियों और पापों से शुद्ध रहने वालों को पसंद करता है।

Tevbe 9:109

क्या जिसने अपने भवन की आधारशिला अल्लाह के आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर उसके तक़्वा तथा अधिक से अधिक नेकी के कार्य करके अल्लाह की प्रसन्नता पर रखी है, वह उसके बराबर है, जिसने मुसलमानों को नुक़सान पहुँचाने, कुफ़्र को मज़बूत करने और ईमान वालों के बीच विभेद पैदा करने के लिए मस्जिद बनाई?! दोनों कभी बराबर नहीं हो सकते। पहले व्यक्ति का भवन शक्तिशाली और मज़बूत है, जिसके गिरने का डर नहीं है। जबकि दूसरे व्यक्ति का उदाहरण उस व्यक्ति की तरह है, जिसने किसी गड्ढे के किनारे एक भवन बनाया, पर वह ढह गया और गिर गया और उसके साथ ही उसका भवन जहन्नम की गहराई में जा गिरा। सच्चाई यह है कि अल्लाह कुफ़्र और निफ़ाक़ वग़ैरह के ज़रिए अत्याचार करने वाले लोगों को सीधा मार्ग नहीं दिखाता।

Tevbe 9:110

उनकी यह मस्जिद, जिसे उन्होंने (मुसलमानों को) नुक़सान पहुँचाने के लिए बनाया है, सदा उनके दिलों में संदेह और निफ़ाक़ के रूप में बसी रहेगी, यहाँ तक कि मौत से अथवा तलवार के द्वारा वध से उनके दिल टुकड़े-टुकड़े हो जाएँ। अल्लाह अपने बंदों के कामों को जानने वाला, उनके अच्छे या बुरे कर्म का बदला देने में हिकमत वाला है।

Tevbe 9:111

निःसंदेह अल्लाह ने (अपनी कृपा से) ईमान वालों से उनके प्राणों को एक उच्च क़ीमत अर्थात जन्नत के बदले में ख़रीद लिया है, (हालाँकि वे अल्लाह ही की संपत्ति हैं)। क्योंकि वे काफ़िरों से लड़ते हैं ताकि अल्लाह का वचन सर्वोच्च हो। चुनाँचे वे काफ़िरों को क़त्ल करते हैं और काफ़िर उन्हें क़त्ल करते हैं। अल्लाह ने इसका सच्चा वादा मूसा अलैहिस्सलाम की पुस्तक तौरात, ईसा अलैहिस्सलाम की पुस्तक इनजील और मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की पुस्तक क़ुरआन में किया है, तथा अल्लाह से बढ़कर अपना वादा पूरा करने वाला कोई नहीं है। अतः (ऐ ईमान वालो!) अपने इस सौदे से प्रसन्न हो जाओ, जो तुमने अल्लाह से किया है। क्योंकि तुमने इसमें बहुत लाभ कमाया है और यह सौदा ही बहुत बड़ी सफलता है।

Tevbe 9:112

यह प्रतिफल प्राप्त करने वाले लोग वे हैं, जो अल्लाह को पसंद न आने वाली और उसे क्रोधित करने वाली चीज़ों की उपेक्षाकर उसे पसंद आने वाली तथा प्रसन्न करने वाली चीज़ों की ओर लौटने वाले हैं, जो अल्लाह के भय और विनम्रता के कारण विनयशील होकर उसकी आज्ञाकारिता में बहुत परिश्रम करते हैं, जो हर परिस्थिति में अपने रब की स्तुति करने वाले, रोज़े रखने वाले, नमाज़ पढ़ने वाले, अल्लाह ने या उसके रसूल ने जिसका आदेश दिया है उसका आदेश देने वाले, अल्लाह और उसके रसूल ने जिससे मना किया है उससे मनाही करने वाले, तथा अल्लाह के आदेशों की, उनका अनुपालन करके और उसके निषेधों की, उनसे बचकर रक्षा करने वाले हैं। (ऐ रसूल!) आप इन गुणों से विशेषित मोमिनों को उस चीज़ की सूचना दे दें, जो उन्हें दुनिया और आखिरत में प्रसन्न कर देगी।

Tevbe 9:113

नबी के लिए उचित नहीं है और न ही ईमान वालों के लिए उचित है कि वे मुश्रिकों के लिए अल्लाह से क्षमा याचना करें, भले ही वे उनके रिश्तेदार हों, जबकि उनके लिए यह स्पष्ट हो गया कि वे शिर्क की अवस्था में मरने के कारण जहन्नमियों में से हैं।

Tevbe 9:114

इबराहीम अलैहिस्सलाम का अपने पिता के लिए क्षमायाचना करना केवल इस कारण था कि उन्होंने अपने पिता से वादा किया था कि वह उनके लिए अवश्य क्षमायाचना करेंगे; इस आशा में कि वह इस्लाम स्वीकार कर लेंगे। परंतु जब इबराहीम अलैहिस्सलाम के लिए यह स्पष्ट हो गया कि उनका पिता अल्लाह का दुश्मन है, क्योंकि उसे उनके उपदेश से कोई फायदा नहीं हुआ, या इसलिए कि उन्हें वह़्य के द्वारा मालूम हो गया था कि उसकी मृत्यु एक काफ़िर के रूप में होगी, तो वह उससे अलग हो गए। उनका अपने पिता के लिए क्षमायाचना करना उनका अपना इजतिहाद था, किसी आदेश का उल्लंघन नहीं था जिसकी अल्लाह ने उनकी ओर वह़्य की थी। निःसंदेह इबराहीम अलैहिस्सलाम अल्लाह के सामने अत्यधिक गिड़गिड़ाने वाले और अपनी अत्याचारी क़ौम को बहुत माफ़ करने वाले थे।

Tevbe 9:115

अल्लाह किसी जाति को मार्गदर्शन प्रदान करने के बाद उसके लिए पथभ्रष्टता का फ़ैसला नही करता, जब तक कि वह उनके लिए उन निषेधों को स्पष्ट नहीं कर देता जिनसे बचना अनिवार्य है। फिर यदि वे निषेध की व्याख्या करने के बाद उस कार्य को करें जो उनके लिए निषिद्ध ठहराया गया है, तो उनपर पथभ्रष्टता का फैसला कर देता है। निःसंदेह अल्लाह सब कुछ जानने वाला है, उससे कुछ भी छिपा नहीं है। और उसने तुम्हें वह सिखाया है जो तुम नहीं जानते थे।

Tevbe 9:116

निःसंदेह आकाशों और धरती का राज्य अल्लाह ही का है। उन दोनों में उसका कोई साझी नहीं, उन दोनों में उससे कुछ भी छिपा नहीं है। वह जिसे जीवन देना चाहता है, उसे जीवन देता है और जिसे मारना चाहता है, उसे मारता है। और (ऐ लोगो!) तुम्हारा अल्लाह के सिवा कोई संरक्षक नहीं है, जो तुम्हारे मामलों का प्रभारी हो, और न तुम्हारा कोई सहायक है, जो तुमसे बुराई को दूर करे और तुम्हारे दुश्मन के खिलाफ तुम्हारी मदद करे।

Tevbe 9:117

अल्लाह ने पैगंबर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को माफ़ कर दिया, जो आपने मुनाफ़िक़ों को तबूक के युद्ध से पीछे रहने की अनुमति प्रदान कर दी थी। तथा मुहाजिरों और अंसार को भी माफ़ कर दिया, जो उससे पीछे नहीं रहे, बल्कि भीषण गरमी, माली परेशानी और शक्तिशाली दुश्मन का सामना होने के बावजूद तबूक के युद्ध में आपके साथ निकल पड़े। जबकि उनमें से एक समूह के दिल विपरीत परिस्थितियों के कारण बहकने लगे थे, जो युद्ध छोड़ने का इरादा कर चुके थे। फिर अल्लाह ने उन्हें दृढ़ रहने और लड़ाई के लिए निकलने की तौफ़ीक़ प्रदान की और उनकी तौबा क़बूल कर ली। निःसंदेह अल्लाह उनपर कृपा करने वाला और दयावान् है और यह उसकी दया ही है कि उन्हें तौबा की तौफ़ीक़ दी और उनकी तौबा क़बूल कर ली।

Tevbe 9:118

अल्लाह ने उन तीनों व्यक्तियों अर्थात् कअब बिन मालिक, मुरारा बिन रबी' और हिलाल बिन उमय्यह को भी क्षमा कर दिया, जिनके अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के साथ तबूक की ओर निकलने से पीछे रह जाने के बाद उनकी तौबा के क़बूल होने का मामला स्थगित कर दिया गया था। चुनाँचे नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने लोगों को इन तीनों से अलग-थलग रहने का आदेश दे दिया, जिसपर उन्हें दु:ख और शोक ने घेर लिया, यहाँ तक कि धरती अपने विस्तार के बावजूद उनपर तंग हो गई और उन्हें जिस अकेलेपन का सामना हुआ उसके कारण उनके दिल संकुचित हो गए और उन्होंने जान लिया कि एकमात्र अल्लाह के सिवा उनके लिए कोई शरण लेने का स्थान नहीं है। इसलिए अल्लाह ने उनपर दया करते हुए उन्हें तौबा की तौफ़ीक़ दी, फिर उनकी तौबा क़बूल फरमाई। निःसंदेह वह अपने बंदों की तौबा क़बूल करने वाला, उनपर दया करने वाला है।

Tevbe 9:119

ऐ अल्लाह पर ईमान रखने, उसके रसूल का अनुसरण करने और उसकी शरीयत पर अमल करने वालो! अल्लाह के आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर अल्लाह से डरो तथा उन लोगों के साथ रहो, जो अपने ईमान तथा अपने वचन और कर्म में सच्चे हैं। क्योंकि तुम्हारे लिए मोक्ष केवल सच्चाई में है।

Tevbe 9:120

मदीना वालों तथा उनके आस-पास के देहात के वासियों के लिए उचित नहीं है कि जब अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम स्वयं जिहाद के लिए निकलें, तो वे आपसे पीछे रह जाएँ। उनके लिए यह भी उचित नहीं है कि वे अपने प्राणों के मामले में कंजूसी करें और नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के प्राण की उपेक्षा कर अपने प्राणों की रक्षा करें। बल्कि उनके लिए अनिवार्य है कि आपके प्राण की रक्षा के लिए अपने प्राणों को न्योछावर कर दें; क्योंकि उन्हें अल्लाह के मार्ग में जो भी प्यास, थकान या भूख पहुँचती है, तथा वे जिस स्थान पर भी उतरते हैं, जहाँ उनकी उपस्थिति काफ़िरों के क्रोध को भड़काती है, और वे किसी दुश्मन को क़त्ल, या क़ैद या पराजय से पीड़ित करते, या ग़नीमत का धन प्राप्त करते हैं - तो उसके बदले में अल्लाह उनके लिए एक सत्कर्म का सवाब लिख देता है जिसे वह उनसे स्वीकार करता है। निःसंदेह अल्लाह सत्कर्मियों के प्रतिफल को नष्ट नहीं करता, बल्कि उन्हें उसका पूर्ण बदला देता है और उससे भी बढ़ाकर देता है।

Tevbe 9:121

और वे जो भी थोड़ा या अधिक धन खर्च करते हैं और जो भी घाटी पार करते हैं, तो उनके उस खर्च करने और यात्रा को लिख लिया जाता है, ताकि अल्लाह उन्हें पुरस्कृत करे। चुनाँचे वह उन्हें आख़िरत में उनके सर्वोत्तम कार्यों का बदला प्रदान करेगा।

Tevbe 9:122

मोमिनों के लिए उचित नहीं है कि वे सब के सब लड़ाई के लिए निकल खड़े हों, ताकि ऐसा न हो कि यदि उनका दुश्मन उनपर गालिब आ जाए तो उनका सफ़ाया कर दिया जाए। इसलिए ऐसा क्यों नहीं किया गया कि उनका एक समूह जिहाद के लिए निकलता और एक समूह अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के साथ रहता। ताकि वे आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से क़ुरआन और शरीयत के अहकाम सुनकर धर्म की समझ हासिल करते और अपनी जाति के लोगों को सचेत करते जब वे जो कुछ उन्होंने सीखा था उसे लेकर उनके पास लौटते; इस आशा में कि वे अल्लाह की यातना और उसके दंड से सावधान हो जाएँ तथा उसके आदेशों का पालन करने लगें और उसके निषेधों से बचने लगें। यह आयत उन सैन्यदलों के बारे में है, जिन्हें अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम आस-पास के क्षेत्रों में भेजते थे और उनके लिए अपने सहाबा के एक समूह का चयन करते थे।

Tevbe 9:123

अल्लाह ने ईमान वालों को उन काफ़िरों से लड़ने का आदेश दिया है, जो उनके आस-पास रहते हैं; क्योंकि वे अपनी निकटता के कारण मोमिनों के लिए खतरे का कारण बनते हैं। इसी तरह उन्हें भयभीत करने और उनकी बुराई को दूर करने के लिए मुसलमानों को शक्ति और कठोरता दिखाने का भी आदेश दिया है। तथा सर्वशक्तिमान अल्लाह अपनी सहायता और समर्थन के साथ परहेज़गार मोमिनों के संग है।

Tevbe 9:124

जब अल्लाह अपने रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर कोई सूरत अवतरित करता है, तो मुनाफ़िक़ों में से कुछ लोग उपहास करते हुऐ पूछते हैं : इस अवतिरत होने वाली सूरत ने मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के दुवारा लाई गई शरीयत पर किसके विश्वास को बढ़ायाॽ चुनाँचे जो लोग अल्लाह पर ईमान लाए और उसके रसूल को सच्चा माना, तो इस सूरत के अवतरण ने उनके पूर्व विश्वास में और वृद्धि कर दी, तथा वे उस अवतरित वह़्य (प्रकाशना) से प्रसन्न हैं; क्योंकि उसमें उनके दुनिया और आख़िरत के लाभ निहित हैं।

Tevbe 9:125

जहाँ तक मुनाफ़िक़ों का संबंध है, तो अहकाम और कहानियों पर आधारित इस क़ुरआन का अवतरण उनके रोग और गंदगी को और बढ़ा देता है, क्योंकि वे उस उतरने वाली वह़्य को झुठलाते हैं। अतः क़ुरआन के अवतरण में वृद्धि के साथ उनके दिल की बीमारी बढ़ जाती है; क्योंकि जब भी कोई वह़्य उतरती थी, वे उसके बारे में संदेह करते थे और वे कुफ़्र ही की अवस्था में मर गए।

Tevbe 9:126

क्या ये मुनाफ़िक़ लोग सीख ग्रहण करते हुए नहीं देखते कि अल्लाह हर साल एक या दो बार उनकी हालत को प्रकट करके और उनके निफ़ाक़ का पर्दाफ़ाश करके उनकी परीक्षा लेता है?! फिर यह जानने के बावजूद कि अल्लाह ही उनके साथ ऐसा करता है, वे उसके समक्ष अपने कुफ़्र (अविश्वास) से तौबा नहीं करते हैं और अपने निफ़ाक़ को नहीं छोड़ते हैं और न ही उससे उपदेश ग्रहण करते हैं, जो उनके साथ घटित हुआ है और यह कि वह अल्लाह की ओर से है!

Tevbe 9:127

और जब अल्लाह अपने रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर कोई सूरत उतारता है, जिसमें मुनाफ़िक़ों की स्थितियों का ज़िक्र होता है, तो कुछ मुनाफ़िक़ यह कहते हुए एक-दूसरे को देखते हैं : क्या तुम्हें कोई देख रहा है? यदि कोई उन्हें न देख रहा हो, तो मजलिस से चले जाते हैं। सुन लो! अल्लाह ने उनके दिलों को मार्गदर्शन और भलाई से फेर दिया है और उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया है, क्योंकि वे ऐसे लोग हैं जो नहीं समझते।

Tevbe 9:128

निःसंदेह तुम्हारे पास (ऐ अरब के लोगो!) तुम्हारे ही वर्ग से एक रसूल आया है, वह तुम्हारी ही तरह एक अरबी है। उसके लिए वह बहुत कष्टदायक है, जिससे तुम्हें कष्ट पहुँचे। वह तुम्हारे मार्गदर्शन का बहुत इच्छुक और तुम्हारा बहुत ध्यान रखने वाला है तथा वह विशेष रूप से ईमान वालों के प्रति बहुत करुणा और दया वाला है।

Tevbe 9:129

फिर अगर वे आपसे मुँह मोड़ें और उसपर ईमान न लाएँ, जो आप लेकर आए हैं, तो (ऐ रसूल!) आप उनसे कह दें : मेरे लिए अल्लाह ही काफ़ी है, जिसके सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं। मैंने उसी अकेले (अल्लाह) पर भरोसा किया और वही महिमावान महान सिंहासन (अर्श) का मालिक है।