Lafzullah

Hindi Mokhtasar — Yunus 10:1 – Ra'd 13:43

Author / source: Hindi Mokhtasar

Contents
  1. Yunus 10:1
  2. Yunus 10:2
  3. Yunus 10:3
  4. Yunus 10:4
  5. Yunus 10:5
  6. Yunus 10:6
  7. Yunus 10:7
  8. Yunus 10:8
  9. Yunus 10:9
  10. Yunus 10:10
  11. Yunus 10:11
  12. Yunus 10:12
  13. Yunus 10:13
  14. Yunus 10:14
  15. Yunus 10:15
  16. Yunus 10:16
  17. Yunus 10:17
  18. Yunus 10:18
  19. Yunus 10:19
  20. Yunus 10:20
  21. Yunus 10:21
  22. Yunus 10:22
  23. Yunus 10:23
  24. Yunus 10:24
  25. Yunus 10:25
  26. Yunus 10:26
  27. Yunus 10:27
  28. Yunus 10:28
  29. Yunus 10:29
  30. Yunus 10:30
  31. Yunus 10:31
  32. Yunus 10:32
  33. Yunus 10:33
  34. Yunus 10:34
  35. Yunus 10:35
  36. Yunus 10:36
  37. Yunus 10:37
  38. Yunus 10:38
  39. Yunus 10:39
  40. Yunus 10:40
  41. Yunus 10:41
  42. Yunus 10:42
  43. Yunus 10:43
  44. Yunus 10:44
  45. Yunus 10:45
  46. Yunus 10:46
  47. Yunus 10:47
  48. Yunus 10:48
  49. Yunus 10:49
  50. Yunus 10:50
  51. Yunus 10:51
  52. Yunus 10:52
  53. Yunus 10:53
  54. Yunus 10:54
  55. Yunus 10:55
  56. Yunus 10:56
  57. Yunus 10:57
  58. Yunus 10:58
  59. Yunus 10:59
  60. Yunus 10:60
  61. Yunus 10:61
  62. Yunus 10:62
  63. Yunus 10:63
  64. Yunus 10:64
  65. Yunus 10:65
  66. Yunus 10:66
  67. Yunus 10:67
  68. Yunus 10:68
  69. Yunus 10:69
  70. Yunus 10:70
  71. Yunus 10:71
  72. Yunus 10:72
  73. Yunus 10:73
  74. Yunus 10:74
  75. Yunus 10:75
  76. Yunus 10:76
  77. Yunus 10:77
  78. Yunus 10:78
  79. Yunus 10:79
  80. Yunus 10:80
  81. Yunus 10:81
  82. Yunus 10:82
  83. Yunus 10:83
  84. Yunus 10:84
  85. Yunus 10:85
  86. Yunus 10:86
  87. Yunus 10:87
  88. Yunus 10:88
  89. Yunus 10:89
  90. Yunus 10:90
  91. Yunus 10:91
  92. Yunus 10:92
  93. Yunus 10:93
  94. Yunus 10:94
  95. Yunus 10:95
  96. Yunus 10:96
  97. Yunus 10:97
  98. Yunus 10:98
  99. Yunus 10:99
  100. Yunus 10:100
  101. Yunus 10:101
  102. Yunus 10:102
  103. Yunus 10:103
  104. Yunus 10:104
  105. Yunus 10:105
  106. Yunus 10:106
  107. Yunus 10:107
  108. Yunus 10:108
  109. Yunus 10:109
  110. Hud 11:1
  111. Hud 11:2
  112. Hud 11:3
  113. Hud 11:4
  114. Hud 11:5
  115. Hud 11:6
  116. Hud 11:7
  117. Hud 11:8
  118. Hud 11:9
  119. Hud 11:10
  120. Hud 11:11
  121. Hud 11:12
  122. Hud 11:13
  123. Hud 11:14
  124. Hud 11:15
  125. Hud 11:16
  126. Hud 11:17
  127. Hud 11:18
  128. Hud 11:19
  129. Hud 11:20
  130. Hud 11:21
  131. Hud 11:22
  132. Hud 11:23
  133. Hud 11:24
  134. Hud 11:25
  135. Hud 11:26
  136. Hud 11:27
  137. Hud 11:28
  138. Hud 11:29
  139. Hud 11:30
  140. Hud 11:31
  141. Hud 11:32
  142. Hud 11:33
  143. Hud 11:34
  144. Hud 11:35
  145. Hud 11:36
  146. Hud 11:37
  147. Hud 11:38
  148. Hud 11:39
  149. Hud 11:40
  150. Hud 11:41
  151. Hud 11:42
  152. Hud 11:43
  153. Hud 11:44
  154. Hud 11:45
  155. Hud 11:46
  156. Hud 11:47
  157. Hud 11:48
  158. Hud 11:49
  159. Hud 11:50
  160. Hud 11:51
  161. Hud 11:52
  162. Hud 11:53
  163. Hud 11:54
  164. Hud 11:55
  165. Hud 11:56
  166. Hud 11:57
  167. Hud 11:58
  168. Hud 11:59
  169. Hud 11:60
  170. Hud 11:61
  171. Hud 11:62
  172. Hud 11:63
  173. Hud 11:64
  174. Hud 11:65
  175. Hud 11:66
  176. Hud 11:67
  177. Hud 11:68
  178. Hud 11:69
  179. Hud 11:70
  180. Hud 11:71
  181. Hud 11:72
  182. Hud 11:73
  183. Hud 11:74
  184. Hud 11:75
  185. Hud 11:76
  186. Hud 11:77
  187. Hud 11:78
  188. Hud 11:79
  189. Hud 11:80
  190. Hud 11:81
  191. Hud 11:82
  192. Hud 11:83
  193. Hud 11:84
  194. Hud 11:85
  195. Hud 11:86
  196. Hud 11:87
  197. Hud 11:88
  198. Hud 11:89
  199. Hud 11:90
  200. Hud 11:91
  201. Hud 11:92
  202. Hud 11:93
  203. Hud 11:94
  204. Hud 11:95
  205. Hud 11:96
  206. Hud 11:97
  207. Hud 11:98
  208. Hud 11:99
  209. Hud 11:100
  210. Hud 11:101
  211. Hud 11:102
  212. Hud 11:103
  213. Hud 11:104
  214. Hud 11:105
  215. Hud 11:106
  216. Hud 11:107
  217. Hud 11:108
  218. Hud 11:109
  219. Hud 11:110
  220. Hud 11:111
  221. Hud 11:112
  222. Hud 11:113
  223. Hud 11:114
  224. Hud 11:115
  225. Hud 11:116
  226. Hud 11:117
  227. Hud 11:118
  228. Hud 11:119
  229. Hud 11:120
  230. Hud 11:121
  231. Hud 11:122
  232. Hud 11:123
  233. Yusuf 12:1
  234. Yusuf 12:2
  235. Yusuf 12:3
  236. Yusuf 12:4
  237. Yusuf 12:5
  238. Yusuf 12:6
  239. Yusuf 12:7
  240. Yusuf 12:8
  241. Yusuf 12:9
  242. Yusuf 12:10
  243. Yusuf 12:11
  244. Yusuf 12:12
  245. Yusuf 12:13
  246. Yusuf 12:14
  247. Yusuf 12:15
  248. Yusuf 12:16
  249. Yusuf 12:17
  250. Yusuf 12:18
  251. Yusuf 12:19
  252. Yusuf 12:20
  253. Yusuf 12:21
  254. Yusuf 12:22
  255. Yusuf 12:23
  256. Yusuf 12:24
  257. Yusuf 12:25
  258. Yusuf 12:26
  259. Yusuf 12:27
  260. Yusuf 12:28
  261. Yusuf 12:29
  262. Yusuf 12:30
  263. Yusuf 12:31
  264. Yusuf 12:32
  265. Yusuf 12:33
  266. Yusuf 12:34
  267. Yusuf 12:35
  268. Yusuf 12:36
  269. Yusuf 12:37
  270. Yusuf 12:38
  271. Yusuf 12:39
  272. Yusuf 12:40
  273. Yusuf 12:41
  274. Yusuf 12:42
  275. Yusuf 12:43
  276. Yusuf 12:44
  277. Yusuf 12:45
  278. Yusuf 12:46
  279. Yusuf 12:47
  280. Yusuf 12:48
  281. Yusuf 12:49
  282. Yusuf 12:50
  283. Yusuf 12:51
  284. Yusuf 12:52
  285. Yusuf 12:53
  286. Yusuf 12:54
  287. Yusuf 12:55
  288. Yusuf 12:56
  289. Yusuf 12:57
  290. Yusuf 12:58
  291. Yusuf 12:59
  292. Yusuf 12:60
  293. Yusuf 12:61
  294. Yusuf 12:62
  295. Yusuf 12:63
  296. Yusuf 12:64
  297. Yusuf 12:65
  298. Yusuf 12:66
  299. Yusuf 12:67
  300. Yusuf 12:68
  301. Yusuf 12:69
  302. Yusuf 12:70
  303. Yusuf 12:71
  304. Yusuf 12:72
  305. Yusuf 12:73
  306. Yusuf 12:74
  307. Yusuf 12:75
  308. Yusuf 12:76
  309. Yusuf 12:77
  310. Yusuf 12:78
  311. Yusuf 12:79
  312. Yusuf 12:80
  313. Yusuf 12:81
  314. Yusuf 12:82
  315. Yusuf 12:83
  316. Yusuf 12:84
  317. Yusuf 12:85
  318. Yusuf 12:86
  319. Yusuf 12:87
  320. Yusuf 12:88
  321. Yusuf 12:89
  322. Yusuf 12:90
  323. Yusuf 12:91
  324. Yusuf 12:92
  325. Yusuf 12:93
  326. Yusuf 12:94
  327. Yusuf 12:95
  328. Yusuf 12:96
  329. Yusuf 12:97
  330. Yusuf 12:98
  331. Yusuf 12:99
  332. Yusuf 12:100
  333. Yusuf 12:101
  334. Yusuf 12:102
  335. Yusuf 12:103
  336. Yusuf 12:104
  337. Yusuf 12:105
  338. Yusuf 12:106
  339. Yusuf 12:107
  340. Yusuf 12:108
  341. Yusuf 12:109
  342. Yusuf 12:110
  343. Yusuf 12:111
  344. Ra'd 13:1
  345. Ra'd 13:2
  346. Ra'd 13:3
  347. Ra'd 13:4
  348. Ra'd 13:5
  349. Ra'd 13:6
  350. Ra'd 13:7
  351. Ra'd 13:8
  352. Ra'd 13:9
  353. Ra'd 13:10
  354. Ra'd 13:11
  355. Ra'd 13:12
  356. Ra'd 13:13
  357. Ra'd 13:14
  358. Ra'd 13:15
  359. Ra'd 13:16
  360. Ra'd 13:17
  361. Ra'd 13:18
  362. Ra'd 13:19
  363. Ra'd 13:20
  364. Ra'd 13:21
  365. Ra'd 13:22
  366. Ra'd 13:23
  367. Ra'd 13:24
  368. Ra'd 13:25
  369. Ra'd 13:26
  370. Ra'd 13:27
  371. Ra'd 13:28
  372. Ra'd 13:29
  373. Ra'd 13:30
  374. Ra'd 13:31
  375. Ra'd 13:32
  376. Ra'd 13:33
  377. Ra'd 13:34
  378. Ra'd 13:35
  379. Ra'd 13:36
  380. Ra'd 13:37
  381. Ra'd 13:38
  382. Ra'd 13:39
  383. Ra'd 13:40
  384. Ra'd 13:41
  385. Ra'd 13:42
  386. Ra'd 13:43

Yunus 10:1

{अलिफ़, लाम, रा।} इस प्रकार के अक्षरों के बारे में सूरतुल-बक़रा के आरंभ में बात की जा चुकी है। इस सूरत में तिलावत की गई ये आयतें सुदृढ़ एवं मज़बूत क़ुरआन की आयतें हैं, जो हिकमत और अहकाम पर आधारित है।

Yunus 10:2

क्या लोगों के लिए यह आश्चर्य की बात है कि हमने उनकी जाति ही के एक व्यक्ति पर, उसे यह आदेश देते हुए, वह़्य (प्रकाशना) उतारी कि लोगों को अल्लाह की यातना से सचेत कर दे?! (ऐ रसूल!) आप अल्लाह पर ईमान लाने वाले लोगों को यह प्रसन्न करने वाली सूचना दे दें कि उन्होंने जो भी अच्छे कर्म आगे भेजे हैं, उसके प्रतिफल के तौर पर उनके लिए उनके पालानहार के पास उच्च स्थान (पद) है। काफिरों ने कहा : निःसंदेह यह आदमी जो इन आयतों को लेकर आया है, एक स्पष्ट जादूगर है।

Yunus 10:3

निःसंदेह (ऐ आश्चर्य करने वालो!) तुम्हारा पालनहार वही अल्लाह है, जिसने भव्य आकाशों तथा विशाल धरती को छह दिनों में बनाया, फिर वह अर्श पर बुलंद हुआ। तो तुम्हें कैसे आश्चर्य होता है कि उसने तुम्हारी ही जाति में से एक आदमी को रसूल बनाकर भेजा?! वह अपने विशाल राज्य में अकेले ही निर्णय लेता है और फ़ैसले करता है। उसके पास उसकी अनुमति तथा अनुशंसा करने वाले से उसकी संतुष्टि के बिना कोई व्यक्ति किसी चीज़ के बारे में अनुशंसा नहीं कर सकता। इन गुणों से विशेषित अल्लाह ही तुम्हारा पालनहार है। अतः निष्ठापूर्वक एकमात्र उसी की उपासना करो। तो क्या तुम उसके एकेश्वरवाद के इन सभी प्रमाणों एवं तर्कों से शिक्षा ग्रहण नहीं करतेॽ जिसके पास थोड़ी-सी भी शिक्षा ग्रहण करने की क्षमता होगी, वह उसे जान लेगा और उसपर ईमान लाएगा।

Yunus 10:4

क़ियामत के दिन तुम सब को उसी एक अल्लाह की ओर लौटना है, ताकि वह तुम्हें तुम्हारे कर्मों का प्रतिफल प्रदान करे। अल्लाह ने लोगों से इसका सच्चा वादा किया है, जो वह नहीं तोड़ेगा। निःसंदेह वह इसमें सक्षम है। वह किसी पिछले उदाहरण के बिना सृष्टि की रचना का आरंभ करता है और फिर उसकी मृत्यु के पश्चात उसे पुनः जीवित करेगा, ताकि उन लोगों को न्याय के साथ प्रतिफल प्रदान करे, जो अल्लाह पर ईमान लाए और सत्कर्म किए। वह न उनकी नेकियों को घटाएगा और न उनके गुनाहों को बढ़ाएगा। जिन लोगों ने अल्लाह और उसके रसूलों का इनकार किया, उनके लिए उनके इस इनकार के कारण खौलते हुए जल का पेय होगा, जो उनकी आँतों के टुकड़े-टुकड़े कर देगा तथा उनके लिए दर्दनाक यातना होगी।

Yunus 10:5

वही है, जिसने सूर्य को ज्योति फैलाने वाला बनाया और चाँद को प्रकाशमान बनाया, जिससे रोशनी प्राप्त की जाती है। साथ ही चाँद की अट्ठाईस मंज़िलों के अनुसार उसकी गति निर्धारित की। मंज़िल से अभिप्राय वह दूरी है, जिसे चाँद हर दिन और रात तय करता है। यह सब इसलिए किया, ताकि (ऐ लोगो!) तुम सूरज के द्वारा दिनों की संख्या तथा चाँद के द्वारा महीनों एवं वर्षों की संख्या जान सको। अल्लाह ने आकाशों और धरती तथा उनके बीच की चीज़ों को सत्य के साथ ही पैदा किया है; ताकि लोगों को अपनी शक्ति और महानता के दर्शन कराए। अल्लाह अपने एकेश्वरवाद के इन स्पष्ट प्रमाणों और उज्ज्वल तर्कों को ऐसे लोगों के लिए खोल-खोलकर बयान करता है, जो इनसे उसके एकेश्वरवाद का पता लगाना जानते हैं।

Yunus 10:6

निःसंदेह बंदों पर रात और दिन के एक-दूसरे के बाद आने में, उसके साथ होने वाले अंधकार और प्रकाश में तथा दोनों में से किसी एक के छोटे और दूसरे के लंबे होने में और आकाशों तथा धरती के अंदर मौजूद सारी सृष्टियों में, निश्चय उन लोगों के लिए अल्लाह की शक्ति को दर्शाने वाली निशानियाँ हैं, जो अल्लाह से उसके आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर डरते हैं।

Yunus 10:7

निःसंदेह जो काफ़िर लोग अल्लाह से मिलने की आशा नहीं रखते कि उससे डरें या उसकी लालसा करें, तथा वे सदैव रहने वाले परलोक के जीवन के बजाय इस दुनिया के नश्वर जीवन से प्रसन्न हो गए और उनके दिल उसपर खुश होकर उससे संतुष्ट हो गए और वे लोग जो अल्लाह की निशानियों और उसके प्रमाणों से मुँह फेरने वाले और उनसे असावधान हैं।

Yunus 10:8

इन गुणों से विशेषित लोगों का ठिकाना, जहाँ वे शरण लेंगे, जहन्नम है; इस कारण कि उन्होंने कुफ़्र किया और क़ियामत के दिन को झुठलाया।

Yunus 10:9

निःसंदेह जो लोग अल्लाह पर ईमान लाए और अच्छे कर्म किए, अल्लाह उन्हें उनके ईमान के कारण सुकर्म का मार्ग दिखाएगा, जो उसकी प्रसन्नता की ओर ले जाने वाला है। फिर, क़ियामत के दिन, अल्लाह उन्हें सदैव रहने वाली नेमत भरी जन्नतों में दाख़िल करेगा, जहाँ उनके नीचे से नहरें प्रवाहित होंगी।

Yunus 10:10

जन्नत में उनकी प्रार्थना अल्लाह की तसबीह व तक़दीस (प्रशंसा और पवित्रता) होगी तथा उन्हें अल्लाह का अभिवादन, फ़रिश्तों का अभिवादन और उनका एक-दूसरे का अभिवादन : सलाम (शांति) होगा, तथा उनकी प्रार्थना का अंत सभी प्राणियों के पालनहार की प्रशंसा पर होगा।

Yunus 10:11

यदि पवित्र अल्लाह लोगों के क्रोधित होने पर ख़ुद अपने, अपने बच्चों और अपने धन पर बद-दुआ (शाप) को उसी तरह जल्दी क़बूल कर ले, जिस तरह उनकी भलाई की दुआओं को स्वीकार करता है - तो वे नष्ट हो जाएँ। लेकिन अल्लाह उन्हें ढील देता है। अतः वह उन लोगों को, जो उससे मिलने की प्रतीक्षा नहीं करते (क्योंकि उन्हें न किसी दंड का भय होता है और न सवाब की आशा होती है) हिसाब के दिन के बारे में भ्रमित, चकित और शंकित छोड़ देता है।

Yunus 10:12

जब (पाप करके) अपने ऊपर अत्याचार करने वाले मनुष्य को किसी बीमारी या दुर्दशा का सामना होता है, तो वह अपने पहलू पर लेटा हुआ, या बैठा या खड़ा हुआ पूर्ण विनम्रता और विनय के साथ हमें पुकारता है; इस आशा में कि जो दुःख उसे पहुँचा है, उसे दूर कर दिया जाए। फिर जब हम उसकी प्रार्थना को स्वीकार कर लेते हैं और उसका दुःख दूर कर देते हैं, तो वह अपनी पूर्व स्थिति पर ऐसे चल पड़ता है जैसे उसने हमें कभी अपने किसी दुःख को दूर करने के लिए पुकारा ही नहीं था। जिस प्रकार इस उल्लंघनकारी के लिए अपनी पथभ्रष्टता में निरंतर बने रहना सुंदर बना दिया गया है, उसी प्रकार अपने कुफ़्र के द्वारा सीमाओं का उल्लंघन करने वालों के लिए उस कुफ़्र एवं अवज्ञा को शोभित कर दिया गया है, जो वे किया करते थे। अतः वे उसे नहीं छोड़ेंगें।

Yunus 10:13

तथा हमने (ऐ बहुदेववादियो!) तुमसे पहले के समुदायों को, अल्लाह के रसूलों को झुठलाने और पाप करने के कारण विनष्ट कर दिया, जबकि उनके पास उनके रसूल आ चुके थे, जिन्हें हमने उनकी ओर स्पष्ट प्रमाणों के साथ भेजा था। जो प्रमाण यह सिद्ध करते थे कि वे रसूल अपने रब के पास से जो कुछ लेकर आए हैं, उसमें वे सच्चे हैं। परंतु वे ईमान नहीं लाए; क्योंकि उनके अंदर ईमान लाने की योग्यता ही नहीं थी। सो, अल्लाह ने उन्हें असहाय छोड़ दिया और उन्हें ईमान लाने की तौफ़ीक़ नहीं दी। जिस प्रकार हमने उन अत्याचारी समुदायों को बदला दिया, उसी तरह हम हर समय और जगह में उनके जैसे लोगों को बदला देते रहेंगे।

Yunus 10:14

फिर हमने तुम्हें (ऐ लोगो!) उन झुठलाने वाले समुदायों के, जिन्हें हमने विनष्ट कर दिया था, उत्तराधिकारी बनाया; ताकि हम देखें कि तुम कैसे कर्म करते हो, क्या तुम अच्छे कार्य करते हो कि तुम्हें उसपर सवाब (पुण्य) दिया जाए, अथवा तुम बुरे कार्य करते हो कि उसपर तुम्हें दंडित किया जाए?

Yunus 10:15

जब उनके सामने अल्लाह की तौहीद (एकेश्वरवाद) को दर्शाने वाली क़ुरआन की स्पष्ट आयतें पढ़ी जाती हैं, तो दोबारा जीवित होकर उठने का इनकार करने वाले लोग, जो सवाब की आशा नहीं रखते और न सज़ा से डरते हैं, कहते हैं : (ऐ मुहम्मद!) मूर्तिपूजा के अपमान पर आधारित इस क़ुरआन के अलावा दूसरा क़ुरआन ले आओ, अथवा हमारी इच्छाओं के अनुसार इसके कुछ भाग या पूर्ण भाग को निरस्त करके इसे बदल दो। (ऐ रसूल!) आप उनसे कह दें : इसे बदलना मेरे लिए संभव नहीं है, और इसके सिवा कोई दूसरा क़ुरआन लाने में तो मैं - और भी - सक्षम नहीं हूँ। बल्कि, केवल अल्लाह ही है जो उसमें से जो चाहे बदल सकता है। मैं तो केवल उसी का अनुसरण करता हूँ, जो अल्लाह मेरी ओर वह़्य (प्रकाशना) भेजता है। यदि मैं तुम्हारी माँग का उत्तर देकर अल्लाह की अवज्ञा करूँ, तो मुझे एक महान दिन की सज़ा का डर है और वह क़ियामत का दिन है।

Yunus 10:16

(ऐ रसूल!) आप कह दें : यदि अल्लाह चाहता कि मैं तुम्हें क़ुरआन पढ़कर न सुनाऊँ, तो मैं तुम्हें क़ुरआन पढ़कर न सुनाता और इसे तुम तक न पहुँचाता। तथा यदि अल्लाह चाहता, तो तुम्हें मेरी ज़ुबानी क़ुरआन से सूचित न करता। फिर मैं तुम्हारे बीच जीवन की एक लंबी अवधि (चालीस वर्ष) व्यतीत कर चुका हूँ। न मैं पढ़ना जानता था और न लिखना। मैं इस तरह की किसी चीज़ की खोज और तलाश में भी नहीं था। तो क्या तुम अपनी बुद्धि से यह नहीं जानते कि जो कुछ मैं तुम्हारे पास लेकर आया हूँ वह अल्लाह की ओर से है, और उसमें मेरा कोई दख़ल नहीं है?!

Yunus 10:17

अतः उससे बढ़कर ज़ालिम कौन होगा जो अल्लाह पर झूठ गढ़े। फिर मेरे लिए यह कैसे संभव है कि मैं अल्लाह पर झूठ गढ़ते हुए क़ुरआन को बदल दूँ? बात यह है कि जो लोग अल्लाह पर झूठ गढ़कर उसकी सीमाओं का उल्लंघन करने वाले हैं, वे अपने उद्देश्य में सफल नहीं हो सकते।

Yunus 10:18

मुश्रिक (बहुदेववादी) लोग अल्लाह के सिवा कथित देवताओं की पूजा करते हैं, जो न लाभ पहुँचाते हैं और न हानि। जबकि सत्य पूज्य तो जब चाहे लाभ और हानि पहुँचा सकता है। तथा वे लोग अपने देवताओं के बारे में कहते हैं : ये मध्यस्थ हैं, जो अल्लाह के यहाँ हमारे लिए सिफारिश करेंगे। अतः वह हमारे पापों के कारण हमें यातना नहीं देगा। (ऐ रसूल!) आप उनसे कह दें : क्या तुम लोग सब कुछ जानने वाले अल्लाह को सूचना दे रहे हो कि उसका कोई साझी है, हालाँकि वह आकाशों में और धरती में अपना कोई साझी नहीं जानता! मुश्रिक (बहुदेववादी) लोग जो कुछ असत्य एवं झूठ कह रहे हैं, अल्लाह उससे पाक और पवित्र है।

Yunus 10:19

सारे मनुष्य केवल एक ही एकेश्वरवादी मोमिन समुदाय थे। फिर उन्होंने विभेद किया। अतः उनमें से कुछ लोग विश्वासी (मोमिन) बने रहे और कुछ ने कुफ़्र (अविश्वास) किया। यदि अल्लाह की तरफ से पहले ही यह निर्णय न किया जा चुका होता कि वह लोगों के बीच होने वाले मतभेद के बारे में इस दुनिया में फैसला नहीं करेगा, बल्कि उनके बीच उसके बारे में क़ियामत के दिन फ़ैसला करेगा। यदि यह बात न होती, तो इस संसार ही में उनके बीच उसका फ़ैसला कर दिया जाता, जिसमें वे विभेद कर रहे हैं। इस प्रकार यह स्पष्ट हो जाता कि कौन सीधे रास्ते पर चलने वाला है और कौन भटका हुआ है।

Yunus 10:20

तथा मुश्रिक (बहुदेववादी) लोग कहते हैं : मुहम्मद - सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम - पर उनके पालनहार की तरफ़ से उनकी सच्चाई को दर्शाने वाली कोई निशानी क्यों नहीं उतारी गईॽ तो (ऐ रसूल!) आप उनसे कह दें : निशानियों का उतरना परोक्ष की बात है, जिसे अल्लाह ही जानता है। इसलिए तुम उन भौतिक निशानियों की प्रतीक्षा करो, जिनका तुमने सुझाव दिया है। मैं भी तुम्हारे साथ उनकी प्रतीक्षा कर रहा हूँ।

Yunus 10:21

और जब हम बहुदेववादियों को उनके अकाल और दुखों से पीड़ित होने के पश्चात् बारिश एवं हरियाली का स्वाद चखाते हैं, तो वे हमारी निशानियों का मखौल उड़ाते और उन्हें झुठलाते हैं। (ऐ पैगंबर!) आप इन बहुदेववादियों से कह दें : अल्लाह का उपाय सबसे तीव्र है और वह तुम्हें ढील देने और सज़ा देने में अधिक तेज़ है। निःसंदेह संरक्षक फ़रिश्ते तुम्हारी चालबाज़ियों को लिख रहे हैं। उनसे कोई चीज़ नहीं छूटती है। तो फिर उनके पैदा करने वाले (अल्लाह) से कैसे छूट सकती है?! तथा अल्लाह तुम्हें तुम्हारी चालबाज़ी का बदला देगा।

Yunus 10:22

वह अल्लाह ही है, जो (ऐ लोगो!) तुम्हें थल में तुम्हारे पैरों पर तथा तुम्हारे चौपायों (सवारियों) पर चलाता है और वही तुम्हें समुद्र में नौकाओं में चलाता है। यहाँ तक कि जब तुम नौकाओं में समुद्र में होते हो और नौकाएँ यात्रियों को लेकर अच्छी हवा के सहारे चल पड़ती हैं, तो सवार लोग उस अच्छी हवा से प्रसन्न हो उठते हैं। चुनाँचे इसी दौरान जबकि वे अपने आनंद में होते हैं, उनपर एक तेज़ चलने वाली हवा आती है और हर तरफ़ से समुद्र की लहरें उनपर उठती चली आती हैं तथा उनका प्रबल गुमान यह होता है कि उनका सर्वनाश होने वाला है। ऐसे में, वे अकेले अल्लाह को पुकारते हैं और उसके साथ किसी दूसरे को साझी नहीं करते, यह कहते हुए : यदि तूने हमें इस विनाशकारी विपत्ति से बचा लिया, तो तेरे इस अनुग्रह के लिए हम अवश्य तेरे आभारी होंगे।

Yunus 10:23

फिर जब वह उनकी दुआ स्वीकार कर लेता है और उन्हें उस विपत्ति से बचा लेता है, तो वे अचानक धरती में कुफ़्र, अवज्ञा और पाप करके उपद्रव करने लगते हैं। (ऐ लोगो!), होश में आ जाओ, वास्तव में तुम्हारे उपद्रव का दुष्परिणाम स्वयं तुम्हें ही झेलना है। क्योंकि तुम्हारी सरकशी व उद्दंडता से अल्लाह को कोई नुक़सान नहीं होगा। तुम इस दुनिया के जीवन में उसका आनंद ले रहे हो, जबकि यह नश्वर है। फिर क़ियामत के दिन तुम्हें हमारी ही ओर लौटकर आना है। तब हम तुम्हें बताएँगे कि तुम क्या पाप कर रहे थे तथा हम तुम्हें उसका बदला देंगे।

Yunus 10:24

सांसारिक जीवन का उदाहरण, जिसके आनंद में तुम लीन हो, जल्दी समाप्त होने के मामले में, बारिश के पानी की तरह है, जिससे धरती से उगने वाले पौधे, जिन्हें इनसान भी खाते हैं, जैसे अनाज और फल आदि और पशु भी खाते हैं, जैसे घास आदि, खूब घने होकर निकल आए। यहाँ तक कि जब धरती ने सुंदरता की चादर ओढ़ ली और वह विभिन्न प्रकार के पौधों से सज गई तथा उसके मालिकों ने समझ लिया कि वे धरती की उगाई हुई फसलों को काटने और फलों को तोड़ने में सक्षम हैं, कि अचानक उसे नष्ट करने का हमारा निर्णय आ गया और हमने उसे कटी हुई फ़सल की तरह कर दिया, मानो वह खेत कुछ समय पहले तक पेड़-पौधों से भरा हुआ था ही नहीं। जिस प्रकार हमने तुम्हारे लिए दुनिया की स्थिति और उसके जल्दी ख़त्म होने को खोल-खोलकर बयान किया है, उसी प्रकार हम सोचने और विचार करने वालों के लिए प्रमाणों एवं तर्कों का वर्णन करते हैं।

Yunus 10:25

अल्लाह सभी लोगों को अपनी जन्नत की ओर बुलाता है, जो कि शांति का घर है, जिसमें लोग विपत्तियों और चिंताओं से सुरक्षित होंगे और मौत से भी महफ़ूज़ रहेंगे। अल्लाह अपने बंदों में से जिसे चाहता है, इस्लाम धर्म को अपनाने की तौफ़ीक़ देता है, जो इस शांति के घर की ओर ले जाता है।

Yunus 10:26

जिन लोगों ने अल्लाह के अनिवार्य किए हुए पूजा कार्यों (आज्ञाकारिता) को करके, तथा उसके निषिद्ध किए हुए पापों को त्यागकर अच्छा काम किया; उनके लिए सबसे अच्छा बदला अर्थात् जन्नत है, तथा उनके लिए इससे अधिक एक और वस्तु अर्थात् पवित्र अल्लाह के चेहरे के दर्शन का सौभाग्य है। और उनके चेहरों पर न धूल छाएगी और न ही उनपर तिरस्कार व अपमान छाएगा, एहसान के गुण से विशिष्ट यही लोग जन्नत वाले हैं, जिसमें वे सदैव रहेंगे।

Yunus 10:27

और जिन लोगों ने कुफ़्र और पाप जैसे बुरे कर्म किए, उनके लिए उस बुराई का बदला जो उन्होंने किया है, आख़िरत में उसी के समान अल्लाह की सज़ा है, और उनके चेहरों पर तिरस्कार व अपमान छाया होगा। जब अल्लाह उनपर अपनी यातना उतारेगा, तो कोई उन्हें अल्लाह के अज़ाब से बचाने वाला नहीं होगा, मानो कि उनके चेहरों पर अंधेरी रात की तारीकी ओढ़ा दी गई हो। स्याही की यह अधिकता जहन्नम के धुएँ तथा उसकी तारीकी छा जाने के कारण होगी। इन गुणों से विशिष्ट यही लोग जहन्नम वाले हैं, जिसमें वे हमेशा रहेंगे।

Yunus 10:28

(ऐ रसूल!) आप क़ियामत के दिन को याद करें, जब हम सभी प्राणियों को एकत्र करेंगे, फिर हम उन लोगों से कहेंगे, जिन्होंने दुनिया में अल्लाह के साथ शिर्क किया था : (ऐ मुश्रिको!) अपने-अपने स्थान पर ठहरे रहो, तुम भी और तुम्हारे वे पूज्य भी, जिन्हें तुम अल्लाह के सिवा पूजा करते थे। फिर हम पूज्यों (जिनकी पूजा की जाती थी) और पूजकों (पूजा करने वालों) के बीच अलगाव पैदा कर देंगे। तथा जिनकी पूजा की जाती थी, वे पूजा करने वालों से यह कहते हुए अलग हो जाएँगे : तुम दुनिया में हमारी तो पूजा नहीं करते थे।

Yunus 10:29

उस समय उनके वे देवी-देवता, जिनकी उन्होंने अल्लाह के सिवा पूजा की थी, यह कहते हुए अलग हो जाएँगे : अल्लाह गवाह है (और अकेले उसी की गवाही पर्याप्त है) कि हम अपने लिए तुम्हारी पूजा से प्रसन्न नहीं थे। न हमने तुम्हें इसका आदेश दिया था और न हमें तुम्हारी पूजा की ख़बर थी।

Yunus 10:30

उस महान स्थान में, प्रत्येक व्यक्ति अपने सांसारिक जीवन में किए हुए कामों को जाँच लेगा और बहुदेववादियों को उनके सत्य पालनहार अर्थात अल्लाह की ओर लौटाया जाएगा, जो उनका हिसाब लेगा और उन्होंने अपनी मूर्तियों की सिफारिश की जो झूठी बात गढ़ ली थी, वह उनसे दूर चली जाएगी।

Yunus 10:31

(ऐ रसूल!) आप अल्लाह के साथ शिर्क करने वाले इन लोगों से पूछें : वह कौन है, जो आकाश से बारिश बरसाकर तुम्हें जीविका प्रदान करता हैॽ तथा वह कौन है, जो तुम्हें धरती से उसमें उगने वाले पौधों और उसमें पाए जाने वाले खनिजों के साथ जीविका प्रदान करता है? और वह कौन है, जो जीव को निर्जीव से, जैसे मनुष्य को शुक्राणु से और पक्षी को अंडे से निकालता हैॽ तथा वह कौन है, जो निर्जीव को जीव से, जैसे शुक्राणु को जीवधारी से और अंडे को पक्षी से निकालता हैॽ और वह कौन है, जो आकाशों और धरती तथा उनमें रहने वाले प्राणियों के मामलों का प्रबंध करता हैॽ वे अवश्य जवाब देंगे कि इन सब चीज़ों का करने वाला अल्लाह ही है। तो आप उनसे कह दें : क्या तुम लोग इस बात को नहीं जानते और अल्लाह के आदेशों का पालन करके तथा उसके निषेधों से बचकर उससे डरते नहींॽ!

Yunus 10:32

तो (ऐ लोगो!) जो यह सब कर रहा है, वही सत्य अल्लाह तुम्हारा सृजनहार और तुम्हारे मामलों का प्रबंधन करने वाला है। फिर सत्य के ज्ञान के पश्चात् सत्य से दूरी और विनाश के सिवा और क्या रह जाता हैॽ! तो इस स्पष्ट सत्य को छोड़कर तुम्हारी बुद्धि कहाँ चली जाती हैॽ!

Yunus 10:33

जिस प्रकार अल्लाह के लिए वास्तविक रुबूबियत (प्रतिपालकता) की बात सत्य सिद्ध हो चुकी है, उसी तरह (ऐ रसूल!) हठ के कारण सत्य मार्ग से निकल जाने वालों के प्रति आपके पालनहार की पूर्वनियति वचन भी सत्य होकर रही कि वे लोग ईमान नहीं लाएँगे।

Yunus 10:34

(ऐ रसूल!) आप इन बहुदेववादियों से कह दें : क्या तुम्हारे ठहराए हुए साझीदारों में, जिनकी तुम अल्लाह के सिवा पूजा करते हो, कोई ऐसा है, जो पूर्व उदाहरण के बिना उत्पत्ति का आरंभ करे और फिर उसकी मृत्यु के पश्चात् उसे पुनर्जीवित करेॽ आप उनसे कह दें कि अल्लाह ही पूर्व उदाहरण के बिना उत्पत्ति का आरंभ करता है और फिर वही उसकी मृत्यु के पश्चात् उसे पुनर्जीवित करेगा। तो फिर (ऐ बहुदेववादियो!) तुम लोग सत्य से असत्य की ओर कैसे फिरे जा रहे होॽ!

Yunus 10:35

(ऐ रसूल!) आप उनसे कह दें : क्या तुम्हारे ठहराए हुए उन साझीदारों में, जिनकी तुम अल्लाह के अलावा पूजा करते हो, कोई ऐसा है, जो सत्य की ओर मार्गदर्शन करेॽ आप उनसे कह दें : केवल अल्लाह ही सत्य की ओर मार्गदर्शन करता है। तो क्या जो लोगों को सीधा रास्ता दिखाए और उसकी ओर लोगों को बुलाए, वह इसका अधिक योग्य है कि उसका अनुसरण किया जाए या कि तुम्हारे वे पूज्य जो स्वयं ही मार्ग नहीं पाते, जबतक कि कोई दूसरा उन्हें मार्ग न दिखा देॽ! फिर तुम्हें क्या हो गया है, तुम कैसे व्यर्थ फ़ैसले करते हो, जब यह दावा करते हो कि वे अल्लाह के साझीदार हैंॽ! अल्लाह तुम्हारे कथन से बहुत ऊँचा है।

Yunus 10:36

बहुदेववादियों में से अधिकांश लोग केवल उसी का अनुसरण करते हैं जिसका उन्हें कोई ज्ञान नहीं है। वे केवल भ्रम और संशय का पालन करते हैं। निश्चय संशय न तो ज्ञान का स्थान ले सकता और न ही उससे बेनियाज़ कर सकता है। वे जो कुछ कर रहे हैं, अल्लाह उसे भली-भाँति जानने वाला है। उनके कार्यों में से कोई चीज़ उससे छिपी नहीं है और वह जल्द ही उन्हें उसका बदला देगा।

Yunus 10:37

यह क़ुरआन कोई ऐसी किताब नहीं है कि उसे गढ़ लिया जाए और अल्लाह के अलावा किसी और की ओर मंसूब कर दिया जाए, क्योंकि लोग निश्चित रूप से इस क़ुरआन जैसी किताब लाने में असमर्थ हैं। बल्कि यह क़ुरआन उससे पहले उतरने वाली किताबों की पुष्टि करने वाला तथा उन पुस्तकों में सार रूप से वर्णन किए गए अहकाम का विवरण प्रस्तुत करने वाला है। अतः इसमें कोई संदेह नहीं कि यह सभी प्राणियों के पालनहार सर्वशक्तिमान (अल्लाह) की ओर से उतारा गया है।

Yunus 10:38

बल्कि, क्या ये बहुदेववादी कहते हैं : मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने इस क़ुरआन को अपनी तरफ़ से गढ़ लिया है और उसे अल्लाह की तरफ़ मंसूब कर दिया है? (ऐ रसूल!) आप उनका खंडन करते हुए कह दें : यदि (तुम्हारे कहने के अनुसार) मैं इसे अपनी तरफ़ से गढ़कर लाया हूँ, जबकि मैं तुम्हारे ही जैसा एक इनसान हूँ, तो तुम इसके समान एक सूरत ही ले आओ और अपनी सहायता के लिए जिसे बुला सकते हो, बुला लो, यदि तुम अपने इस दावे में सच्चे हो कि क़ुरआन मनगढ़ंत और झूठा है। सच्चाई यह है कि तुम ऐसा कभी नहीं कर पाओगे। यदि तुम भाषाविद तथा वाक्पटु होने के बावजूद ऐसा नहीं कर सकते, तो यह इस बात का प्रमाण है कि क़ुरआन अल्लाह की ओर से उतरने वाली पुस्तक है।

Yunus 10:39

उन्होंने क़ुरआन को नहीं माना, बल्कि उसको समझने और उसमें मनन-चिंतन करने से पहले ही तथा जिस यातना से उन्हें डराया गया था उसके आने से पूर्व ही उन्होंने इस क़ुरआन को झुठलाने में जल्दी दिखाई, जबकि उस यातना के आने का समय क़रीब हो चुका था। इनके झुठलाने ही की तरह, पिछले समुदायों ने भी झुठलाया था, जिसके कारण उन्हें यातनाओं का सामना करना पड़ा। अतः (ऐ रसूल!) आप सोचें कि उन झुठलाने वाले समुदायों का अंत कैसा रहा? निश्चित रूप से अल्लाह ने उन्हें नष्ट कर दिया।

Yunus 10:40

बहुदेववादियों में से कुछ लोग अपनी मृत्यु से पहले क़ुरआन पर ईमान ले आएँगे और कुछ लोग अपने हठ और अहंकार के कारण मरते दम तक इसपर ईमान नहीं लाएँगे। (ऐ रसूल!) आपका पालनहार कुफ़्र पर जमे रहने वालों को सबसे ज़्यादा जानने वाला है और उन्हें उनके कुफ़्र का बदला देगा।

Yunus 10:41

यदि (ऐ रसूल!) आपकी क़ौम के लोग आपको झुठलाएँ, तो उनसे कह दें : मेरे लिए मेरे कर्म का सवाब है और मुझे ही अपने कर्म की ज़िम्मेदारी उठानी है और तुम्हारे लिए तुम्हारे कर्म का सवाब है और तुम्हें ही उसका दंड झेलना है। जो कुछ मैं कर रहा हूँ उसके दंड से तुम बरी हो और जो कुछ तुम कर रहे हो उसके दंड से मैं बरी हूँ।

Yunus 10:42

बहुदेववादियों में से कुछ लोग ऐसे हैं कि जब आप क़ुरआन पढ़ते हैं, तो वे (ऐ रसूल!) आपकी ओर कान लगा लेते हैं, परंतु मानने और पालन करने के उद्देश्य से नहीं। तो क्या आप उन लोगों को सुना सकते हैं, जिनसे सुनने की शक्ति छीन ली गई है?! इसी प्रकार आप इन लोगों को सीधा मार्ग नहीं दिखा सकते, जो सत्य को सुनने से बहरे हैं। अतः वे उसे समझते नहीं हैं।

Yunus 10:43

तथा बहुदेववादियों में से कुछ लोग ऐसे हैं, जो (ऐ रसूल!) आपकी ओर केवल अपनी बाह्य दृष्टि से देखते हैं, अपनी अंतर्दृष्टि से नहीं। तो क्या आप उन लोगों को प्रबुद्ध कर सकते हैं, जिन्होंने अपनी दृष्टि खो दी है?! निःसंदेह आप ऐसा नहीं कर सकते। इसी प्रकार आप अंतर्दृष्टि से वंचित व्यक्ति को सीधा मार्ग नहीं दिखा सकते।

Yunus 10:44

निःसंदेह अल्लाह अपने बंदों पर अत्याचार करने से पाक है। वह उनपर कणभर भी अत्याचार नहीं करता, परंतु वे स्वयं ही असत्य के पक्षपात, अहंकार और हठ के कारण खुद को विनाश के साधनों में लाकर अपनी जानों पर अत्याचार करते हैं।

Yunus 10:45

और जब क़ियामत के दिन अल्लाह लोगों को हिसाब-किताब के लिए एकत्र करेगा, तो उन्हें लगेगा कि वे अपने दुनिया के जीवन और क़ब्र में केवल दिन की एक घड़ी भर ठहरे थे, उससे ज़्यादा नहीं। वहाँ वे एक-दूसरे को पहचानेंगे। फिर उनके एक-दूसरे को पहचानने का सिलसिला क़ियामत के दिन की भयावहता को देखकर समाप्त हो जाएगा। वास्तव में, वे लोग घाटे में पड़ गए, जिन्होंने क़ियामत के दिन अपने पालनहार से मिलने को झुठलाया तथा वे दुनिया में दोबारा जीवित होने के दिन पर ईमान रखने वाले नहीं थे कि घाटे से बच सकें।

Yunus 10:46

और यदि हम (ऐ रसूल!) आपको उस यातना का कुछ हिस्सा जिसका हमने उनसे वादा किया है, आपकी मृत्यु से पहले दिखा दें, या हम आपको उससे पहले मृत्यु दे दें, तो दोनों स्थितियों में उन्हें हमारे पास ही लौटकर आना है। फिर जो कुछ वे कर रहे हैं अल्लाह उससे अवगत है, उससे उनकी कोई चीज़ छिपी नहीं है और वह शीघ्र ही उन्हें उनके कर्मों का बदला देगा।

Yunus 10:47

पिछले समुदायों में से प्रत्येक समुदाय के लिए एक रसूल था, जो उनकी ओर भेजा गया था। फिर जब उस (रसूल) ने उन्हें वह संदेश पहुँचा दिया, जिसे पहुँचाने का उसे आदेश दिया गया था और लोगों ने उसे झुठला दिया, तो उनके तथा रसूल के बीच न्याय के साथ फ़ैसला कर दिया गया। चुनाँचे अल्लाह ने अपनी कृपा से रसूल को बचा लिया और अपने न्याय से उन लोगों को नष्ट कर दिया। तथा उनके कर्मों का बदला देने में उनके साथ कुछ भी अन्याय नहीं किया जाता।

Yunus 10:48

और ये काफ़िर लोग हठधर्मी करते हुए और चुनौती देते हुए कहते हैं : यदि तुम अपने दावे में सच्चे हो, तो बताओ कि जिस यातना का तुमने हमसे वादा किया था, उसका समय कब आएगा?!

Yunus 10:49

(ऐ रसूल!) आप उनसे कह दें : मैं स्वयं अपने लिए न किसी हानि का मालिक हूँ कि स्वयं को उससे नुक़सान पहुँचाऊँ या ख़ुद से उसे हटा सकूँ, और न ही किसी लाभ का मालिक हूँ कि उससे स्वयं को फायदा पहुँचाऊँ। तो मैं किसी और को कैसे फायदा या नुक़सान पहुँचा सकता हूँ? सिवाय उसके जो अल्लाह उसमें से चाहे, तो फिर मैं उसके ग़ैब की बातों को कैसे जान सकता हूँ? प्रत्येक समुदाय, जिसे अल्लाह ने विनाश की धमकी दी है, उसके विनाश का एक समय निर्धारित है, जिसका ज्ञान केवल अल्लाह को है। अतः जब उसके विनाश का समय आ जाता है, तो वे उससे न कुछ पीछे रह सकते हैं और न आगे बढ़ सकते हैं।

Yunus 10:50

(ऐ रसूल!) आप यातना की जल्दी मचाने वालों से कह दें : मुझे बताओ कि यदि तुमपर अल्लाह की यातना रात या दिन के किसी समय आ जाए, तो आख़िर कौन-सी चीज़ है, जिसे तुम इस यातना से जल्दी चाहते हो?!

Yunus 10:51

क्या जिस यातना का तुमसे वादा किया गया है, उसके तुम्हारे ऊपर घटित हो जाने के बाद तुम ईमान लाओगे, जबकि उस समय किसी व्यक्ति को उसका ईमान लाभ नहीं देगा, जो उससे पहले ईमान नहीं लाया था? क्या तुम अब ईमान ला रहे हो, हालाँकि इससे पहले तुम यातना के लिए उसे झुठलाने के तौर पर जल्दी मचाया करते थे?!

Yunus 10:52

फिर उन्हें यातना में डाले जाने और उनकी ओर से उससे बाहर निकलने की माँग किए जाने के पश्चात उनसे कहा जाएगा : आख़िरत की स्थायी यातना का स्वाद चखो। क्या जो कुफ़्र और पाप तुम किया करते थे, तुम्हें उसके अलावा किसी और चीज़ का बदला दिया जाएगा?!

Yunus 10:53

और (ऐ रसूल!) बहुदेववादी लोग आपसे पूछते हैं : क्या यह यातना, जिसका हमसे वादा किया गया है, सत्य है? आप उनसे कह दें : हाँ, (अल्लाह की क़सम!) निश्चय यह बिल्कुल सत्य है और तुम उससे बच नहीं सकते हो।

Yunus 10:54

यदि अल्लाह के साथ शिर्क करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को धरती का सारा बहुमूल्य धन प्राप्त हो जाए, तो वह उसे अपने आपको अल्लाह की यातना से छुड़ाने के बदले में दे देगा, यदि उसे ऐसा करने का अवसर प्रदान किया जाए। तथा बहुदेववादी लोग जब क़ियामत के दिन यातना को देखेंगे, तो अपने अविश्वास पर पछतावे को छिपाएँगे। और अल्लाह उनके बीच न्याय के साथ फ़ैसला कर देगा और उनपर अत्याचार नहीं किया जाएगा, बल्कि उन्हें उनके कर्मों का बदला दिया जाएगा।

Yunus 10:55

सुन लो! जो कुछ आकाशों में है उसका मालिक और जो कुछ धरती में है उसका मालिक केवल अल्लाह है। याद रखो! निःसंदेह काफिरों को दंडित करने का अल्लाह का वादा सच्चा है, जिसमें कोई संदेह नहीं है। परंतु अधिकांश लोग इस बात को नहीं जानते। अतः वे (इसके बारे में) संदेह करते हैं।

Yunus 10:56

वही पवित्र अल्लाह मरे हुए लोगों को जीवित करता है और जीवित लोगों को मौत देता है तथा क़ियामत के दिन तुम सब उसी की ओर लौटाए जाओगे। फिर वह तुम्हें तुम्हारे कर्मों का बदला देगा।

Yunus 10:57

ऐ लोगो! तुम्हारे पास क़ुरआन आ गया है, जिसमें सदुपदेश, प्रोत्साहन और डरावा है। तथा वह दिलों के अंदर मौजूद संशय और शंका की बीमारी का इलाज, और सत्य के रास्ते के लिए मार्गदर्शन है, तथा उसमें ईमान वालों के लिए दया है; क्योंकि वही उससे लाभ उठाते हैं।

Yunus 10:58

(ऐ रसूल!) आप लोगों से कह दें : मैं जो क़ुरआन तुम्हारे पास लेकर आया हूँ, वह अल्लाह की तरफ़ से तुमपर एक अनुकंपा और दया है। अतः अल्लाह ने इस क़ुरआन को उतारकर तुमपर जो अनुकंपा और दया की है, उसपर प्रसन्न हो, इनके सिवा किसी और बात पर नहीं। क्योंकि मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जो कुछ अपने पालनहार की तरफ़ से उनके पास लेकर आए हैं, वह दुनिया की उस नश्वर सामग्री से उत्तम है, जिसे वे इकट्ठा कर रहे हैं।

Yunus 10:59

(ऐ रसूल!) आप इन मुश्रिकों (बहुदेववादियों) से कह दें : मुझे इस बारे में बताओ कि अल्लाह ने जो रोज़ी उतारकर तुमपर उपकार किया है, फिर तुमने उसमें अपनी इच्छाओं से काम लेते हुए कुछ को हराम ठहरा लिया है और कुछ को हलाल। आप उनसे पूछें : क्या जिन चीज़ों को तुमने हलाल ठहराया है, उन्हें हलाल ठहराने तथा जिन चीज़ों को तुमने हराम ठहराया है, उन्हें हराम ठहराने की अल्लाह ने तुम्हें अनुमति प्रदान की है, या तुम लोग अल्लाह पर झूठ गढ़ते हो?!

Yunus 10:60

जो लोग अल्लाह पर झूठ गढ़ते हैं, वे क्या सोचते हैं कि क़ियामत के दिन उनके साथ क्या कुछ होने वाला है?! क्या वे यह समझते है कि उन्हें क्षमा कर दिया जाएगा?! यह बहुत दूर की बात है। वास्तव में अल्लाह लोगों पर बड़ा कृपालु है कि उन्हें मोहलत देता है और उन्हें दंड देने में जल्दी नहीं करता। परंतु उनमें से अधिकांश लोग अपने ऊपर अल्लाह की नेमतों का इनकार करने वाले हैं। अतः वे उनके प्रति आभारी नहीं होते।

Yunus 10:61

(ऐ रसूल!) आप जिस कार्य में भी होते हैं और क़ुरआन में से जो कुछ भी पढ़ते हैं, तथा (ऐ मोमिनों!) तुम जो काम भी करते हो, हम तुम्हें जानते हुए देख रहे होते हैं और तुम्हें सुन रहे होते हैं, जब तुम कार्य करना शुरू करते हो। तुम्हारे पालनहार के ज्ञान से आकाश या धरती में कणभर भी कोई चीज़ ग़ायब नहीं होती। तथा इससे कम वज़न या इससे अधिक वज़न की कोई चीज़ नहीं है, परंतु वह एक स्पष्ट पुस्तक में दर्ज है, जो न कोई छोटी बात छोड़ती है और न बड़ी, बल्कि सबको अपने अंदर समाहित कर रखा है।

Yunus 10:62

सुन लो! निःसंदेह अल्लाह के मित्रों को न भविष्य में क़ियामत की भयावहता का डर होगा और न वे दुनिया के छूट जाने वाले आनंद पर शोकाकुल होंगे।

Yunus 10:63

ये अल्लाह के मित्र वे लोग हैं, जो अल्लाह पर और उसके रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर ईमान रखते थे तथा अल्लाह से, उसके आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर, डरते थे।

Yunus 10:64

उनके लिए, उनके पालनहार की ओर से, दुनिया में प्रसन्नता प्रदान करने वाले अच्छे स्वप्न या लोगों की प्रशंसा के रूप में शुभ-सूचना है, तथा उनके लिए फ़रिश्तों की ओर से शुभ समाचार है जब उनके प्राण निकाले जाते हैं, तथा मृत्यु के बाद एवं प्रलय के दिन। अल्लाह ने उनसे जो वादा किया है, उसमें कोई परिवर्तन नहीं होगा। यह प्रतिफल ही महान सफलता है; क्योंकि इसमें उद्देश्य की प्राप्ति एवं भय से मुक्ति है।

Yunus 10:65

(ऐ रसूल!) ये लोग आपके धर्म के बारे में जो तिरस्कार और लांछन की बातें करते हैं, आप उससे दुःखी न हों। निःसंदेह समस्त प्रभुत्व एवं आधिपत्य अल्लाह ही के लिए है। उसे कोई चीज़ विवश नहीं कर सकती। वह उनकी बातों का सुनने वाला और उनके कार्यों का जानने वाला है और जल्द ही उन्हें उसका बदला देगा।

Yunus 10:66

सुन लो! जो कोई आकाशों में है और जो कोई धरती में है, सब का मालिक एकमात्र अल्लाह है। और ये बहुदेववादी लोग जो अल्लाह को छोड़कर दूसरे साझीदारों की पूजा करते हैं, वे किस चीज़ का अनुसरण कर रहे हैं?! वास्तव में, वे केवल संदेह का पालन करते हैं, तथा अपने साझीदारों की अल्लाह की ओर निसबत करनें में मात्र झूठ बोल रहे हैं। अल्लाह उनकी बातों से सर्वोच्च एवं महान है।

Yunus 10:67

वही अकेला है, जिसने (ऐ लोगो!) तुम्हारे लिए रात बनाई, ताकि तुम उसमें हरकत (चलने-फिरने) और थकान से आराम पा सको और दिन को प्रकाशमान बनाया, ताकि उसमें जीवनयापन के लिए लाभदायक वस्तुओं की तलाश में दौड़-धूप कर सको। निःसंदेह इसमें उन लोगों के लिए स्पष्ट निशानियाँ हैं, जो मानने और स्वीकार करने के उद्देश्य से सुनते हैं।

Yunus 10:68

बहुदेववादियों के एक समूह ने कहा : अल्लाह ने फ़रिश्तों को अपनी पुत्रियाँ बनाया है! अल्लाह उनके इस बात से पवित्र है। वह पवित्र अल्लाह अपनी सभी सृष्टियों से बेनियाज़ है। जो कुछ अकाशों में है और जो कुछ धरती में है, सबका मालिक वही है। तुम्हारे पास (ऐ बहुदेववादियो!) तुम्हारे इस कथन का कोई प्रमाण नहीं है। क्या तुम बिना किसी प्रमाण के अल्लाह पर एक गंभीर बात कहते हो - कि तुम उसकी ओर संतान की निसबत करते हो - जिसकी सच्चाई तुम नहीं जानते?!

Yunus 10:69

(ऐ रसूल!) आप उनसे कह दें : निःसंदेह जो लोग अल्लाह की ओर संतान की निसबत करके उसपर झूठ गढ़ते हैं, वे अपने उद्देश्य में कामयाब नहीं होंगे और न उस चीज़ से मुक्ति पा सकेंगे, जिससे वे डर रहे हैं।

Yunus 10:70

अतः वे संसार की सुख-सामग्रियों और नेमतों का जो आनंद ले रहे हैं, उससे धोखा न खाएँ। क्योंकि यह एक क्षणभंगुर थोड़ा-सा सुख है। फिर उन्हें क़ियामत के दिन हमारे ही पास लौटना है। फिर हम उन्हें उनके अल्लाह का इनकार करने और उसके रसूल को झुठलाने के कारण कठोर यातना का मज़ा चखाएँगे।

Yunus 10:71

(ऐ रसूल!) आप इन झुठलाने वाले मुश्रिकों (बहुदेववादियों) को नूह अलैहिस्सलाम का वृत्तांत सुनाएँ, जब उन्होंने अपनी क़ौम से कहा : ऐ मेरी क़ौम के लोगो! यदि मेरा तुम्हारे बीच खड़ा होना तुमपर भारी लगता है तथा मेरा अल्लाह की आयतों द्वारा उपदेश देना और नसीहत करना तुम्हारे लिए कष्ट का कारण बन गया है, और तुमने मेरी हत्या का संकल्प कर लिया है, तो मैंने तुम्हारी साजिश को विफल करने में केवल अल्लाह पर भरोसा किया है। अतः तुम अपना मामला सुनिश्चित कर लो और मुझे मारने का पक्का इरादा कर लो, तथा मदद के लिए अपने देवी-देवताओं को भी बुला लो। फिर अपनी साजिश को एक अस्पष्ट रहस्य न रखो और फिर मुझे मारने की योजना बनाने के बाद जो तुम्हारे दिल में है, उसे कर डालो और मुझे एक क्षण के लिए भी मोहलत न दो।

Yunus 10:72

यदि तुमने मेरे (अल्लाह के धर्म की ओर) बुलावे से मुँह फेर लिया, तो तुम जानते हो कि मैंने तुम्हें अपने पालनहार का संदेश पहुँचाने पर तुमसे कोई बदला नहीं माँगा है। तुम लोग मुझपर ईमान लाओ या कुफ़्र करो, मेरा सवाब (बदला) अल्लाह के ज़िम्मे है। अल्लाह ने मुझे आदेश दिया है कि मैं उन लोगों में से हो जाऊँ, जो आज्ञाकारित और सत्कर्म के साथ उसके अधीन रहने वाले हैं।

Yunus 10:73

फिर भी उनकी क़ौम ने उन्हें झुठलाया और उनको सच्चा नहीं माना। अतः हमने उन्हें और उनके साथ नाव में सवार मोमिनों को बचा लिया और उन्हें उनसे पहले के लोगों का उत्तराधिकारी बना दिया। तथा जिन लोगों ने उनकी लाई हुई निशानियों और प्रमाणों को झुठलाया था, हमने उन्हें तूफ़ान (बाढ़) के द्वारा नष्ट कर दिया। अतः (ऐ रसूल!) आप सोचें कि जिन लोगों को नूह अलैहिस्सलाम ने सचेत किया था, पर वे ईमान नहीं लाए, उनका अंतिम परिणाम क्या हुआ?

Yunus 10:74

फिर कुछ समय के बाद, हमने नूह अलैहिस्सलाम के पश्चात् बहुत-से रसूल उनकी क़ौमों की ओर भेजे। तो वे रसूल अपने समुदायों के पास निशानियों और प्रमाणों के साथ आए। परंतु रसूलों को झुठलाने के उनके पिछले आग्रह के कारण उनमें ईमान लाने की कोई इच्छा नहीं थी। अतः अल्लाह ने उनके दिलों पर मुहर लगा दी। जिस प्रकार हमने पिछले रसूलों के अनुयायियों के दिलों पर मुहर लगा दी थी, उसी प्रकार हम हर समय और जगह में उन काफ़िरों के दिलों पर मुहर लगा देते हैं, जो कुफ़्र के साथ अल्लाह की सीमाओं का उल्लंघन करने वाले हैं।

Yunus 10:75

फिर कुछ समय के बाद, हमने इन रसूलों के पश्चात मूसा और उनके भाई हारून अलैहिमस्सलाम को मिस्र के राजा फ़िरऔन और उसकी क़ौम के सरदारों की ओर भेजा। हमने उन दोनों को उनकी सत्यता को दर्शाने वाली निशानियों के साथ भेजा था। परंतु उन्होंने घमंड के कारण उन दोनों के लाए हुए धर्म को मानने से इनकार कर दिया। दरअसल, वे अल्लाह के साथ कुफ़्र करने और उसके रसूलों को झुठलाने के कारण अपराधी लोग थे।

Yunus 10:76

फिर जब फिरऔन और उसकी क़ौम के सरदारों के पास वह धर्म आ गया, जिसे मूसा और हारून अलैहिमस्सलाम लेकर आए थे, तो उन लोगों ने मूसा अलैहिस्सलाम के लाए हुए धर्म की सत्यता को दर्शाने वाली निशानियों के बारे में कहा : निःसंदेह यह तो खुला जादू है, यह सत्य नहीं है।

Yunus 10:77

मूसा अलैहिस्सलाम ने उनकी निंदा करते हुए कहा : क्या तुम सत्य के बारे में, जबकि वह तुम्हारे पास आ गया है, ऐसा कहते हो कि वह जादू है?! कदापि नहीं, वह जादू नहीं है। निश्चय मैं जानता हूँ कि जादूगर कभी सफल नहीं होता। फिर मैं इसका उपयोग कैसे कर सकता हूँ?!

Yunus 10:78

फिरऔन की क़ौम ने मूसा अलैहिस्सलाम को यह कहते हुए उत्तर दिया : क्या तुम इस जादू के साथ हमारे पास इसलिए आए हो, ताकि हमें उस धर्म से फेर दो, जिसपर हमने अपने बाप-दादा को पाया है, तथा तुम्हें और तुम्हारे भाई को राज्य प्राप्त हो जाए? हम (ऐ मूसा और हारून!) तुम्हारे लिए इस बात को स्वीकार करने वाले नहीं हैं कि तुम दोनों हमारी तरफ़ भेजे गए रसूल (संदेष्टा) हो।

Yunus 10:79

फ़िरऔन ने अपनी क़ौम से कहा : मेरे पास हर ऐसे जादूगर को लेकर आओ, जिसे जादू में महारत हासिल हो और उसमें निपुण हो।

Yunus 10:80

जब वे फ़िरऔन के पास जादूगरों को ले आए, तो मूसा अलैहिस्सलाम ने उनपर अपनी जीत के बारे में आश्वस्त होकर उनसे कहा : (ऐ जादूगरो!) तुम्हें जो कुछ डालना है, डालो।

Yunus 10:81

फिर जब उन्होंने अपने पास मौजूद जादू को फेंक दिया, तो मूसा अलैहिस्सलाम ने उनसे कहा : जो कुछ तुमने दिखाया है, वह जादू है। निःसंदेह अल्लाह, जो कुछ तुमने किया है, उसे इस तरह विनष्ट कर देगा कि उसका कोई निशान नहीं रहेगा। वास्तव में, तुम लोग अपने जादू द्वारा धरती में बिगाड़ पैदा करने वाले हो, और अल्लाह बिगाड़ पैदा करने वाले के कार्य को नहीं सुधारता है।

Yunus 10:82

अल्लाह अपने पूर्वनियति शब्दों के साथ तथा अपने शरई शब्दों में विद्यमान प्रमाणों एवं तर्कों के साथ सत्य को स्थापित और सशक्त कर देता है, भले ही फिरऔनियों के अपराधी काफिरों को बुरा लगे।

Yunus 10:83

मूसा अलैहिस्सलाम की क़ौम ने मुँह फेरने की ठान रखी थी। चुनाँचे मूसा अलैहिस्सलाम पर (उनके प्रत्यक्ष निशानियों और स्पष्ट प्रमाणों को लाने के बाद भी) उनकी क़ौम बनू इसराईल के केवल कुछ युवाओं ने विश्वास किया, जबकि वे फ़िरऔन और उसकी क़ौम के सरदारों से डरे हुए थे कि उनका मामला अगर प्रकाश में आ गया, तो वे उन्हें यातना में डालकर उन्हें उनके ईमान से विचलित न कर दें। दरअसल, फिरऔन अभिमानी तथा मिस्र और उसके लोगों पर हावी व मुसल्लत था। तथा निःसंदेह वह कुफ़्र, बनू इसराईल की हत्या करने और उन्हें यातना देने में हद से आगे बढ़ा हुआ था।

Yunus 10:84

मूसा अलैहिस्सलाम ने अपनी क़ौम से कहा : ऐ मेरी क़ौम के लोगो! यदि तुम अल्लाह पर सच्चा ईमान रखते हो, तो केवल अल्लाह ही पर भरोसा करो, अगर तुम आज्ञाकारी हो। क्योंकि अल्लाह पर भरोसा तुमसे बुराई को दूर कर देगा और तुम्हारे लिए भलाई लाएगा।

Yunus 10:85

तो उन्होंने मूसा अलैहिस्सलाम को जवाब देते हुए कहा : हमने केवल अल्लाह पर भरोसा किया है। ऐ हमारे पालनहार! तू हमपर अत्याचारियों को प्रभुत्व प्रदान न कर कि वे यातना, हत्या और प्रलोभन द्वारा हमें हमारे धर्म से भटका दें।

Yunus 10:86

और (ऐ हमारे पालनहार!) अपनी दया से हमें फ़िरऔन की काफ़िर क़ौम के हाथों से मुक्ति प्रदान कर, क्योंकि उन्होंने हमें गुलाम बनाकर रखा है और हमें यातना और हत्या द्वारा प्रताड़ित किया है।

Yunus 10:87

और हमने मूसा और उनके भाई हारून अलैहिमस्सलाम की ओर वह़्य (प्रकाशना) भेजी कि तुम दोनों अपनी क़ौम के लिए मिस्र में एक अल्लाह की उपासना हेतु कुछ घर बनाओ और अपने घरों का रुख क़िबला (बैतुल मक़्दिस) की दिशा में रखो तथा संपूर्ण रूप से नमाज़ अदा करो। तथा (ऐ मूसा!) आप ईमान वालों को यह प्रसन्नतापूर्ण सूचना दे दें कि अल्लाह उनकी मदद करेगा, उन्हें समर्थन देगा, उनके दुश्मनों का विनाश करेगा और उन्हें धर्ती में ख़लीफा (उत्तराधिकारी) बनाएगा।

Yunus 10:88

मूसा अलैहिस्सलाम ने कहा : ऐ हमारे पालनहार! तूने फ़िरऔन और उसकी क़ौम की अशराफिया को दुनिया की चमक-दमक और शोभा-सामग्री प्रदान की है और उन्हें इस सांसारिक जीवन में धन-संपत्ति दी है, परंतु जो कुछ तूने उन्हें दिया उसके लिए उन्होंने तेरा शुक्रिया अदा नहीं किया। बल्कि उन्होंने उनका इस्तेमाल तेरे रास्ते से लोगों को भटकाने के लिए किया। ऐ हमारे रब! उनके धन को तबाह और नष्ट कर दे और उनके हृदय को इतना कठोर बना दे कि वे उस समय तक ईमान न लाएँ जबतक कि दर्दनाक यातना को अपने सामने न देख लें, जिस समय उनके ईमान से उन्हें कोई फ़ायदा न होगा।

Yunus 10:89

अल्लाह ने फरमाया : मैंने (ऐ मूसा और हारून!) तुम दोनों की फ़िरऔन और उसकी क़ौम की अशराफिया के विरूद्ध दुआ को स्वीकार कर लिया। अतः तुम दोनों अपने धर्म पर जमे रहो और उससे मुँह फेरकर उन अज्ञानियों के मार्ग का अनुसरण न करो, जो सत्य के मार्ग का ज्ञान नहीं रखते।

Yunus 10:90

और हमने सागर को फाड़ने के बाद बनी इसराईल के लिए उसे पार करना आसान बना दिया, यहाँ तक कि उन्होंने उसे सुरक्षित रूप से पार कर लिया। फिर फ़िरऔन और उसके सैनिकों ने अत्याचार और ज़्यादती करते हुए उनका पीछा किया। यहाँ तक कि जब सागर के दोनों भाग उसपर मिल गए और वह डूबने लगा और बचने की कोई उम्मीद न रही, तो कहने लगा : मैं ईमान ले आया कि उसके सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं, जिसपर बनी इसराईल ईमान लाए हैं और मैं अल्लाह के आज्ञाकारियों में से हूँ।

Yunus 10:91

क्या तू जीवन से निराश होने के बाद अब ईमान ला रहा है?! हालाँकि (ऐ फ़िरऔन!) तू अल्लाह की यातना उतरने से पहले, उसका इनकार करके और उसके रास्ते से रोककर, अल्लाह की अवज्ञा करता रहा है और तू बिगाड़ पैदा करने वालों में से था, क्योंकि तू स्वयं पथभ्रष्ट था और दूसरों को भी पथभ्रष्ट करता था।

Yunus 10:92

आज हम तुझे (ऐ फिरऔन!) समुद्र से निकाल लेंगे और तुझे एक ऊँचे स्थान पर डाल देंगे, ताकि तेरे बाद आने वाले लोग तुझसे सीख ग्रहण करें। वास्तव में अधिकतर लोग हमारे तर्कों और हमारी शक्ति के प्रमाणों से अनभिज्ञ हैं, उनमें सोच-विचार नहीं करते।

Yunus 10:93

और हमने बनी इसराईल को शाम (लेवंत) की धन्य भूमि में एक सुखद स्थान और एक मनभावन ठिकाना दिया और उन्हें हलाल व शुद्ध चीज़ों से जीविका प्रदान की। फिर उन्होंने अपने धर्म के मामले में मतभेद नहीं किया, यहाँ तक कि उनके पास क़ुरआन आ गया, जो मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के उन गुणों एवं विशेषताओं की पुष्टि करने वाला है, जो उन्होंने तौरात में पढ़ा था। फिर जब उन लोगों ने इसका इनकार कर दिया, तो उनके क्षेत्रों को छीन लिया गया। निश्चय ही (ऐ रसूल!) आपका पालनहार क़ियामत के दिन उनके बीच उस चीज़ के बारे में फ़ैसला कर देगा, जिसमें वे मतभेद कर रहे थे। फिर वह उनमें से सत्यवादी और असत्यवादी को वह बदला देगा, जिसका उन दोनों में से प्रत्येक हक़दार होगा।

Yunus 10:94

यदि (ऐ रसूल!) आप उस क़ुरआन की सच्चाई के बारे में, जो हमने आपकी ओर उतारा है, संदेह और अचरज में हैं, तो ईमान लाने वाले उन यहूदियों से पूछ लें जो तौरात पढ़ते हैं और उन ईसाइयों से पूछ लें जो इंजील पढ़ते हैं। वे आपको बताएँगे कि आपपर जो उतारा गया है, वह सत्य है; क्योंकि वे अपनी पुस्तकों में उसका विवरण पाते हैं। निःसंदेह आपके पास आपके पालनहार की ओर से वह सत्य आया है, जिसमें कोई संदेह नहीं है। अतः आप कदापि संदेह करने वालों में से न हों।

Yunus 10:95

और आप कदापि उन लोगों में से न हों, जिन्होंने अल्लाह के तर्कों एवं प्रमाणों को झुठला दिया। अन्यथा इसकी वजह से आप उन घाटा उठाने वाले लोगों में से हो जाएँगे, जिन्होंने अपने अविश्वास के कारण अपने आपको विनाश से ग्रस्त करके खुद अपना घाटा किया। यह सारी चेतावनी शक और इनकार के खतरे एवं गंभीरता को बयान करने के लिए है, अन्यथा नबी इस बात से मा'सूम (पवित्र) हैं कि उनकी ओर से इस तरह की कोई बात सामने आए।

Yunus 10:96

निःसंदेह जिन लोगों के विषय में अल्लाह का फ़ैसला सिद्ध हो चुका है कि वे कुफ़्र पर जमे रहने के कारण कुफ़्र ही पर मरेंगे, वे कभी भी ईमान नहीं लाएँगे।

Yunus 10:97

यद्यपि उनके पास प्रत्येक धार्मिक अथवा ब्रह्मांडीय निशानी आ जाए। यहाँ तक कि वे दर्दनाक यातना अपनी आँखों से देख लें, तब वे ईमान ले आएँगे, जबकि उस समय ईमान लाना उनको लाभ नहीं देगा।

Yunus 10:98

ऐसा नहीं हुआ है कि जिन बस्तियों की ओर हमने अपने रसूलों को भेजा था, उनमें से कोई बस्ती यातना देखने से पहले सार्थक रूप से ईमान लाई हो, फिर यातना देखने से पहले ईमान लाने के कारण उसका ईमान उसे लाभ पहुँचाया हो, सिवाय यूनुस अलैहिस्सलाम की क़ौम के, कि जब वे सच्चा ईमान ले आए, तो हमने सांसारिक जीवन में उनके ऊपर से अपमान व तिरस्कार के अज़ाब को हटा दिया और उन्हें उनकी समय सीमा समाप्त होने तक (दुनिया की सामग्रियों से) लाभान्वित होने का अवसर प्रदान किया।

Yunus 10:99

और यदि (ऐ रसूल!) आपका पालनहार धरती में मौजूद सभी लोगों को ईमान वाला बनाना चाहता, तो सभी लोग अवश्य ईमान ले आते, परंतु अपनी हिकमत के कारण उसने ऐसा नहीं चाहा। अतः वह जिसे चाहता है, अपने न्याय से गुमराह कर देता है और जिसे चाहता है, अपनी कृपा से मार्गदर्शन प्रदान करता है। इसलिए आप लोगों को ईमान लाने पर मजबूर नहीं कर सकते। क्योंकि उन्हें ईमान लाने की तौफ़ीक़ देना केवल अल्लाह के हाथ में है।

Yunus 10:100

किसी भी व्यक्ति के लिए संभव नहीं है कि वह अल्लाह की अनुमति के बिना अपने आप ईमान ले आए। अतः अल्लाह की इच्छा के बिना ईमान नहीं पाया जा सकता। इसलिए आप उनपर अफ़सोस न करें। अल्लाह उन लोगों पर यातना और अपमान डाल देता है, जो उसके प्रमाणों व तर्कों तथा उसके आदेशों और निषेधों को नहीं समझते हैं।

Yunus 10:101

(ऐ रसूल!) आप उन मुश्रिकों से, जो आपसे निशानियों का प्रश्न करते हैं, कह दें : विचार करो कि आकाशों और धरती में अल्लाह के एकेश्वरवाद और उसकी शक्ति को इंगित करने वाली क्या-क्या निशानियाँ हैं। जो लोग, अविश्वास पर अपने हठ के कारण, ईमान लाने को तैयार नहीं हैं, उन्हें निशानियों, तर्कों और संदेशवाहकों का उतारना कोई लाभ नहीं देता।

Yunus 10:102

तो क्या ये झुठलाने वाले लोग उसी तरह की घटनाओं की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जिनसे अल्लाह ने इनसे पहले के झुठलाने वाले समुदायों को ग्रस्त किया था?! आप (ऐ रसूल!) उनसे कह दीजिए : तुम अल्लाह की यातना की प्रतीक्षा करो, मैं (भी) तुम्हारे साथ अपने पालनहार के वादे की प्रतीक्षा कर रहा हूँ।

Yunus 10:103

फिर हम उनपर दंड उतार देते हैं और अपने रसूलों को बचा लेते हैं, तथा उनके साथ ईमान लाने वालों को भी बचा लेते हैं। इसलिए वे उस यातना से पीड़ित नहीं होते, जिससे उनकी क़ौम ग्रस्त होती है। जिस प्रकार हमने उन रसूलों और उनके साथ मोमिनों को बचा लिया, ऐसे ही हम अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को और आपके साथ मोमिनों को बचा लेंगे। यह बचाना हमपर एक सिद्ध अधिकार है।

Yunus 10:104

(ऐ रसूल!) आप कह दें : ऐ लोगो! यदि तुम मेरे उस धर्म के विषय में संदेह में हो, जिसकी ओर मैं तुम्हें आमंत्रित करता हूँ और वह तौहीद (एकेश्वरवाद) का धर्म है, तो मैं तुम्हारे धर्म के भ्रष्ट होने के बारे में निश्चित हूँ, इसलिए मैं उसका अनुसरण नहीं करता। तथा मैं उनकी पूजा नहीं करता, जिनकी तुम अल्लाह को छोड़कर पूजा करते हो। परंतु मैं उस अल्लाह की इबादत करता हूँ, जो तुम्हें मौत देता है और उसने मुझे आदेश दिया है कि मैं उसके धर्म के प्रति निष्ठावान मोमिनों (विश्वासियों) में से रहूँ।

Yunus 10:105

तथा उसने मुझे यह भी आदेश दिया है कि मैं सत्य धर्म पर स्थापित रहूँ और सभी धर्मों से विमुख होकर उसी पर स्थिर रहूँ, और मुझे इस बात से मना किया है कि मैं उसके साथ शिर्क करने वालों में से होऊँ।

Yunus 10:106

(ऐ रसूल!) आप अल्लाह के सिवा उन मूर्तियों और प्रतिमाओं इत्यादि को न पुकारें, जो न किसी लाभ के मालिक हैं कि आपको लाभ पहुँचा सकें और न किसी हानि के मालिक हैं कि आपको हानि पहुँचा सकें। क्योंकि यदि आपने उनकी पूजा की, तो फिर आप अल्लाह के अधिकार और स्वयं के अधिकार पर अतिक्रमण करने वाले अत्याचारियों में से हो जाएँगे।

Yunus 10:107

यदि अल्लाह (ऐ रसूल!) आपको किसी विपत्ति से पीड़ित कर दे और आप उसे अपने से दूर करना चाहें, तो पवित्र अल्लाह के सिवा कोई उसे दूर करने वाला नहीं, और यदि वह आपके साथ भलाई का इरादा कर ले, तो कोई उसके अनुग्रह को रोक नहीं सकता। वह अपने बंदों में से जिसे चाहता है, अपने अनुग्रह से सम्मानित करता है। अतः उसे कोई विवश करने वाला नहीं। तथा वह अपने तौबा करने वाले बंदों को बहुत क्षमा करने वाला, उनपर अत्यंत दयावान है।

Yunus 10:108

(ऐ रसूल!) आप कह दीजिए : ऐ लोगो! तुम्हारे पालनहार की ओर से अवतिरत क़ुरआन तुम्हारे पास आ गया है। अतः जो कोई सीधा मार्ग अपनाएगा और उसपर ईमान लाएगा, उसका लाभ उसी को प्राप्त होगा, क्योंकि अल्लाह अपने बंदों की आज्ञाकारिता से निस्पृह है। और जो कोई पथभ्रष्टता का मार्ग अपनाएगा, उसकी पथभ्रष्टता का प्रभाव केवल उसी पर होगा, क्योंकि अल्लाह को उसके बंदों की अवज्ञा से हानि नहीं पहुँच सकती। और मैं तुम्हारे ऊपर कोई निरीक्षक नहीं हूँ कि तुम्हारे कर्मों का संरक्षण करूँ और तुमसे उनका हिसाब लूँ।

Yunus 10:109

और (ऐ रसूल!) आप उस चीज़ का अनुसरण करें, जो आपका पालनहार आपकी ओर वह़्य (प्रकाशना) करता है और उसके अनुसार कार्य करें, तथा आपकी क़ौम के जो लोग आपके विरोधी हैं उनके कष्ट पर, और जिस चीज़ के पहुँचाने का आपको आदेश दिया गया है, उसके पहुँचाने पर धैर्य से काम लें। तथा आप निरंतर इसी व्यवहार पर बने रहें, यहाँ तक कि अल्लाह उनके बारे में अपना फ़ैसला कर दे, इस प्रकार कि वह आपको इस दुनिया में उनपर विजय प्रदान कर दे और आख़िरत में उन्हें दंडित करे, यदि उनकी मृत्यु उनके कुफ़्र की अवस्था में हो।

Hud 11:1

(अलिफ़, लाम, रा) इस प्रकार के अक्षरों के बारे में सूरतुल-बक़रा के आरंभ में बात गुज़र चुकी है। क़ुरआन एक ऐसी किताब है, जिसकी आयतें संरचना और अर्थ के रूप से सुदृढ़ की गई हैं। अतः आप उनमें किसी प्रकार का विकार (दोष) और कमी नहीं पाएँगे। फिर हलाल व हराम, आदेश व निषेध, वादा व धमकी, कहानियों और अन्य बातों का उल्लेख करके उन्हें स्पष्ट कर दिया गया है। यह क़ुरआन उस अल्लाह की ओर से है, जो अपने प्रबंधन और विधान में हिकमत वाला है, अपने बंदों की स्थितियों और उनका सुधार करने वाली चीज़ों को जानने वाला है।

Hud 11:2

मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर अवतरित होने वाली इन आयतों का विषयवस्तु : बंदों को अल्लाह के साथ किसी अन्य की इबादत करने से मना करना है। (ऐ लोगो!) निःसंदेह मैं तुम्हें अल्लाह की यातना से डराने वाला हूँ, यदि तुमने उसके साथ कुफ़्र किया और उसकी अवज्ञा की, तथा मैं तुम्हें उसके सवाब की शुभ सूचना देने वाला हूँ, यदि तुम उसपर ईमान लाए और उसकी शरीयत के अनुसार कार्य करते रहे।

Hud 11:3

(ऐ लोगो!) अपने पालनहार से अपने पापों की क्षमा माँगो और तुमने उसके हक़ में जो कोताही की है, उसपर पश्चाताप करते हुए उसकी ओर पलट आओ। वह तुम्हें तुम्हारे सांसारिक जीवन में तुम्हारी निश्चित अवधि के समाप्त होने तक उत्तम सामग्री प्रदान करेगा, और हर उस व्यक्ति को जो अतिरिक्त आज्ञाकारिता और सत्कर्म करता है, उसके अतिरिक्त कार्य का संपूर्ण प्रतिकार प्रदान करेगा, उसमें कोई कमी नहीं करेगा। लेकिन यदि तुम उस बात पर ईमान लाने से उपेक्षा करते हो, जो मैं अपने पालनहार की ओर से लेकर आया हूँ, तो मैं तुमपर एक भयानक दिन की यातना से डरता हूँ, और वह क़ियामत का दिन है।

Hud 11:4

क़ियामत के दिन (ऐ लोगो!) तुम्हें केवल अल्लाह की ओर पलटना है, और पवित्र अल्लाह हर चीज़ की शक्ति रखता है, कोई चीज़ उसे विवश नहीं कर सकती। अतः तुम्हारी मृत्यु के बाद तुम्हें जीवित करके उठाना और तुम्हारा हिसाब व किताब लेना उसे विवश नहीं कर सकता।

Hud 11:5

सुन लो! निःसंदेह ये बहुदेववादी अपने सीनों को मोड़ लेते हैं, ताकि वे अपने सीनों में मौजूद संदेह को अल्लाह से छिपा सकें, वे उससे अनभिज्ञ होने के कारण ऐसा करते हैं। सुनो! जब वे अपने सिर को अपने कपड़ों से ढक लेते हैं, तो अल्लाह जानता है जो कुछ वे छिपाते हैं और जो कुछ वे प्रकट करते हैं। निःसंदेह वह सीनों की छिपाई हुई चीज़ों को भी जानता है।

Hud 11:6

धरती पर चलने वाला जो भी प्राणी है, अल्लाह ने अपनी कृपा से उसकी आजीविका की ज़िम्मेदारी ले रखी है। अल्लाह महिमावान धरती पर उसके बसने के स्थान को जानता है, तथा वह उस स्थान का भी ज्ञान रखता है, जहाँ उसकी मृत्यु आनी है। इस तरह, सभी प्राणी और उनकी आजीविका और उनके ठहरने की जगहें और उनकी मृत्यु के स्थान, एक स्पष्ट पुस्तक अर्थात 'लौह़े मह़फ़ूज़' (संरक्षित पट्टिका) में अंकित हैं।

Hud 11:7

वही महिमावान अल्लाह है, जिसने विशाल आकाशों तथा विस्तृत धरती को और उनमें पाई जाने वाली सारी वस्तुओं को छ: दिनों में पैदा किया। और उनकी रचना से पूर्व उसका सिंहासन पानी पर था। ताकि (ऐ लोगो!) वह तुम्हारा परीक्षण करे कि तुम में से कौन अल्लाह को प्रसन्न करने वाला सबसे अच्छा काम करता है, तथा तुम में से कौन उसे क्रोधित करने वाला सबसे बुरा काम करता है। फिर वह हर एक को वह बदला दे, जिसका वह हक़दार है। तथा (ऐ नबी!) यदि आप कहें : (ऐ लोगो!) तुम अपनी मृत्यु के बाद हिसाब-किताब के लिए पुनः जीवित किए जाओगे, तो निश्चय ही अल्लाह के साथ कुफ़्र करने वाले और मरणोपरांत पुनर्जीवन का इनकार करने वाले कहेंगे : आप जिस क़ुरआन को पढ़ते हैं, वह स्पष्ट जादू के अलावा कुछ नहीं है। अतः वह स्पष्ट रूप से असत्य है।

Hud 11:8

यदि हम मुश्रिकों से दुनिया के जीवन में उस यातना को कुछ दिनों के लिए विलंबित कर दें, जिसके वे हक़दार हैं, तो वे मज़ाक उड़ाते हुए, उसके लिए जल्दी मचाते हुए कहेंगे : हमसे किस चीज़ ने यातना को रोक रखा है? सुन लो, जिस सज़ा के वे हक़दार हैं, उसका अल्लाह के पास एक समय निर्धारित है। और जिस दिन वह उनपर आ जाएगी, तो उन्हें कोई उसे उनसे टालने वाला नहीं मिलेगा। बल्कि वह उनपर आकर रहेगी और वे उस यातना से घिर जाएँगे जिसके लिए वे उपहास और मज़ाक़ को तौर पर जल्दी मचा रहे थे।

Hud 11:9

और यदि हम मनुष्य को अपनी तरफ़ से कोई अनुग्रह प्रदान करें, जैसे स्वास्थ्य एवं धन-संपत्ति आदि, फिर उससे उस अनुग्रह को छीन लें, तो वह अल्लाह की दया से बहुत निराश हो जाता है और उसकी नेमतों का बड़ा कृतघ्न बन जाता है। जब अल्लाह उन्हें उससे छीन लेता है, तो वह उन्हें भूल जाता है।

Hud 11:10

और यदि हम उसे गरीबी और बीमारी के पश्चात आजीविका में विस्तार और स्वास्थ्य का मज़ा चखा दें, तो वह अवश्य कहेगा : विपत्ति मुझसे दूर हो गई और तकलीफ़ ख़त्म हो गई। वह इस पर अल्लाह का शुक्रिया अदा नहीं करता। वह ख़ुशी से इतराता फिरता है और अल्लाह की प्रदान की हुई नेमतों पर लोगों के सामने शेखी बघारता और गर्व करता है।

Hud 11:11

परन्तु जिन लोगों ने तकलीफों एवं आज्ञाकारिता पर धैर्य से काम लिया तथा गुनाहों से दूर रहे और अच्छे कार्य करते रहे, तो उनका मामला दूसरा है। वे निराशा से पीड़ित नहीं होते, न अल्लाह की नेमतों की नाशुक्री करते और न ही लोगों के सामने शेखी पघारते हैं। इन विशेषताओं से सुसज्जित लोगों के लिए उनके पालनहार कि ओर से उनके गुनाहों की क्षमा है तथा आख़िरत में उनके लिए बड़ा प्रतिफल है।

Hud 11:12

ऐसा लगता है कि (ऐ रसूल) आप (उनके कुफ़्र, हठधर्मी तथा निशानियों के सुझाव का सामना करने के कारण) कुछ ऐसी चीज़ों को पहुँचाने का काम छोड़ देने वाले हैं, जिन्हें पहुँचाने का अल्लाह ने आपको आदेश दिया है और उनपर अमल करना उनके लिए कठिन है। तथा उन बातों को पहुँचाने से आपका दिल इसलिए तंग हो रहा है कि वे यह न कह दें : उस (मुह़म्मद) पर कोई ख़ज़ाना क्यों नहीं उतारा गया, जिससे वह धनी हो जाता, या उसके साथ कोई फ़रिश्ता क्यों नहीं आया, जो उसके सच्चे नबी होने की पुष्टि करता। अतः इन बातों की वजह से आप अपनी ओर की जाने वाली वह़्य की कुछ चीज़ों को न छोड़ें। आप तो केवल डराने वाले हैं। आप उसी का प्रचार करते हैं जिसके प्रचार का अल्लाह ने आपको आदेश दिया है। वे लोग जिन निशानियों का प्रस्ताव रख रहे हैं, उन्हें प्रस्तुत करना आपका कर्तव्य नहीं है। और अल्लाह प्रत्येक चीज़ का संरक्षक है।

Hud 11:13

बल्कि क्या मुश्रिक लोग यह कहते हैं कि मुहम्मद ने कुरआन स्वयं गढ़ लिया है और यह अल्लाह की वह़्य नहीं है। (ऐ रसूल) आप उन्हें चुनौती देते हुए कह दीजिए : तुम भी इस कुरआन के समान गढ़ी हुई दस सूरतें ले आओ, जिनमें तुम उस क़ुरआन की तरह सच्चाई का पालन न करो, जिसके बारे में तुम्हारा दावा है कि वह गढ़ा हुआ है। तथा तुम जिसे भी बुला सकते हो, बुला लो; ताकि इस काम पर उसकी मदद ले सको, यदि तुम अपने इस दावा में सच्चे हो कि कुरआन गढ़ा हुआ है।

Hud 11:14

यदि वे तुम्हारी माँग पूरी न करें क्योंकि वे ऐसा करने में सक्षम नहीं है, तो (ऐ ईमान वालो) निश्चित रूप से जान लो कि अल्लाह ने क़ुरआन को अपने रसूल पर अपने ज्ञान के साथ उतारा है और यह मनगढ़ंत नहीं है। तथा यह भी ज्ञान में रखो कि अल्लाह के सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं। अब क्या तुम इन निश्चित तर्कों के बाद उसके आगे झुकने को तैयार हो?

Hud 11:15

जो व्यक्ति अपने कर्म से सांसारिक जीवन और उसका नश्वर आनंद चाहता है, वह उससे आख़िरत का इरादा नहीं रखता, हम उन्हें उनके कर्मों का बदला इसी दुनिया में स्वास्थ्य, शांति और आजीविका में विस्तार के रूप में दे देते हैं, उनके कार्य के प्रतिफल में कुछ भी कमी नहीं की जाती।

Hud 11:16

इस प्रकार का निंदित इरादा रखने वाले लोगों के लिए क़ियामत के दिन आग के सिवा कोई अन्य बदला नहीं है, जिसमें वे प्रवेश करेंगे और उनके कर्मों का प्रतिफल अकारथ हो जाएगा तथा उनके कार्य बरबाद हो जाएँगे। क्योंकि वे दुनिया में ईमान वाले नहीं थे और उनका इरादा सही नहीं था। चुनाँचे अपने कर्मों से उनका उद्देश्य अल्लाह की प्रसन्नता तथा आख़िरत नहीं था।

Hud 11:17

पैगंबर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम, जिनके पास उनके पालनहार की ओर से प्रमाण है और उनके समर्थन हेतु उनके पालनहार की ओर से एक साक्षी जिबरील अलैहिस्सलाम भी मौजूद हैं। तथा इससे पहले उनकी नुबुव्वत की गवाही वह तौरात भी देती है, जो मूसा अलैहिस्सलाम पर लोगों के लिए आदर्श तथा दया के रूप में उतारी गई थी। वह और उनके साथ ईमान लाने वाले लोग, उन काफिरों के समान नहीं हो सकते, जो गुमराही में भटक रहे हैं। वे लोग क़ुरआन पर तथा मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर विश्वास रखते हैं, जिनपर क़ुरआन उतरा है। उन समूहों में से जो भी उसका इनकार करेगा, क़ियामत के दिन उसके वादा की जगह (ठिकाना) दोज़ख है। अतः (ऐ रसूल!) आप कुरआन के बारे में और उन लोगों के ठिकाने के संबंध में संदेह न करें। क्योंकि यह ऐसा सत्य है जो संदेह से परे है। लेकिन अधिकतर लोग स्पष्ट सबूतों और खुले प्रमाणों के बाद भी ईमान नहीं लाते।

Hud 11:18

उस व्यक्ति से बढ़कर अत्याचारी कोई नहीं है, जो अल्लाह की ओर साझी अथवा संतान की निस्बत करके उसपर झूठ गढ़े। जो लोग अल्लाह पर झूठ गढते हैं, उन्हें क़ियामत के दिन उनके पालनहार के समक्ष उनके कर्मों के बारे में पूछने के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। फरिश्तों तथा रसूलों में से उनके विरद्ध गवाही देने वाले कहेंगे : यही वे लोग हैं, जिन्होंने अल्लाह पर उसकी ओर साझी तथा बेटे की निस्बत करके झूठ गढ़ा था। सुन लो, अल्लाह पर झूठ गढ़कर स्वयं पर अत्याचार करने वालों को अल्लाह ने अपनी दया से निष्कासित कर दिया।

Hud 11:19

जो लोगों को अल्लाह के सीधे रास्ते से रोकते हैं और चाहते हैं कि उसका मार्ग सही दिशा से मुड़ जाए, ताकि उसपर कोई न चले। तथा वे मृत्यु के बाद पुनर्जीवित किए जाने का इनकार करते और उसे नहीं मानते हैं।

Hud 11:20

इन विशेषताओं वाले लोग यदि उनपर अल्लाह की यातना आ जाए, तो धरती में उससे भागने में सक्षम नहीं हैं, और न तो उनके पास अल्लाह के सिवा समर्थक और सहायक हैं, जो उनसे अल्लाह के अज़ाब को टाल सकें। उनके स्वयं अपने आपको तथा दूसरों को अल्लाह के मार्ग से रोकने के कारण, क़ियामत के दिन उनकी यातना बढ़ा दी जाएगी। वे दुनिया में, सत्य और मार्गदर्शन की बात स्वीकार करने के तौर पर नहीं सुन सकते थे तथा वे ब्रह्मांड में अल्लाह की निशानियों को ऐसी दृष्टि से नहीं देखते थे जो उन्हें लाभान्वित करे; क्योंकि वे सत्य से अति विमुख थे।

Hud 11:21

इन विशेषताओं वाले लोग ही हैं, जिन्होंने अल्लाह के साथ साझेदार बनाने के कारण, अपने आपको विनाश की खाइयों में डालकर, अपना घाटा किया। और उनके गढ़े हुए साझेदार और सिफ़ारिशी उनसे दूर हो गए।

Hud 11:22

वास्तव में, क़ियामत के दिन यही लोग सबसे अधिक घाटे का सौदा करने वाले ठहरेंगे, क्योंकि उन्होंने ईमान के बदले कुफ्र, आख़िरत के बदले दुनिया और दया के बदले यातना को अपना लिया।

Hud 11:23

निःसंदेह जो लोग अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान लाए और अच्छे कार्य किए, तथा अल्लाह के प्रति विनम्र और विनीत हो गए, वही लोग जन्नत वाले हैं, जिसमें वे सदैव रहेंगे।

Hud 11:24

काफिरों और मोमिनों के पक्षों का उदाहरण अंधे की तरह है, जो देख नहीं सकता, और बहरे की तरह है, जो सुन नहीं सकता। यह उदाहरण काफिरों के पक्ष का है, जो सत्य को स्वीकार करने के इरादे से नहीं सुनता और न ही उसे ऐसी दृष्टि से देखता है जो उन्हें लाभान्वित करे। तथा दूसरे पक्ष का उदाहरण सुनने और देखने वाले की तरह है। यह मोमिनों के पक्ष का उदाहरण है, जो सुनता और देखता है। क्या ये दोनों पक्ष अपनी स्थिति और विशेषता में समान हो सकते हैं?! वे दोनों कभी समान नहीं हो सकते। क्या तुम इन दोनों की असमानता से कोई सीख नहीं लेते?!

Hud 11:25

हमने नूह़ अलैहिस्सलाम को उनकी जाति की ओर रसूल बनाकर भेजा। तो उन्होंने उनसे कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! मैं तुम्हें अल्लाह के अज़ाब से डराने वाला हूँ तथा मुझे तुम्हारी ओर जो कुछ देकर भेजा गया है, उसे खोल-खोलकर बताने वाला हूँ।

Hud 11:26

और मैं तुम्हें अकेले अल्लाह की इबादत करने की ओर आमंत्रित करता हूँ। अतः तुम केवल उसी की इबादत करो। निःसंदेह मैं तुमपर एक दर्दनाक दिन की यातना से डरता हूँ।

Hud 11:27

उनकी क़ौम के कुफ़्र करने वाले गणमान्य और प्रमुख लोगों ने कहा : हमें तुम्हारा आमंत्रण स्वीकार नहीं है। क्योंकि तुम्हारे अंदर कोई ऐसी विशेषता नहीं है, जो हमारे पास न हो। चुनाँचे तुम भी हमारी तरह ही इनसान हो। तथा इसलिए कि हम देखते हैं कि तुम्हारा अनुसरण हमारे निचले स्तर के लोगों ने किया है, जैसा कि यह हमारी राय से हमें दिखाई दिया है। और इसलिए भी कि तुम्हारे पास कोई अतिरिक्त सम्मान, धन और प्रतिष्ठा नहीं है, जो तुम्हें इस योग्य बनाता हो कि हम तुम्हारा अनुसरण करें। बल्कि हम तो तुम्हें तुम्हारे दावे में झूठा समझते हैं।

Hud 11:28

नूह अलैहिस्सलाम ने उनसे कहा : ऐ मेरी जाती के लोगो! मुझे बताओ कि यदि मैं अपने पालनहार की ओर से एक प्रमाण पर हूँ, जो मेरे सच्चे नबी होने की गवाही देता हो और तुमपर मुझे सच्चा मानना (मुझ पर विश्वास करना) अनिवार्य करता हो, तथा उसने मुझे अपनी ओर से दया अर्थात नुबुव्वत एवं रिसालत प्रदान की हो, लेकिन उसके बारे में तुम्हारी अज्ञानता के कारण वह तुम्हें दिखाई न दी, तो क्या हम तुम्हें उसपर ईमान लाने के लिए विवश कर सकते हैं और ज़बरदस्ती उसे तुम्हारे ह्रदय में डाल सकते हैं?! हम ऐसा नहीं कर सकते। क्योंकि जो ईमान की तौफीक देता है, वह केवल अल्लाह है।

Hud 11:29

ऐ मेरी जाति के लोगो! इस संदेश को पहुँचाने पर मैं तुमसे कोई धन नहीं चाहता, मेरा बदला तो केवल अल्लाह पर है। और मैं अपनी बैठक से ग़रीब मोमिनों को दूर नहीं कर सकता, जिन्हें निष्कासित करने की तुम माँग कर रहे हो। वे क़ियामत के दिन अपने पालनहार से मिलने वाले हैं और वह उन्हें उनके ईमान का बदला देने वाला है। लेकिन मैं देख रहा हूँ कि तुम इस दावत (इसलाम के संदेश) की वास्तविकता से अनभिज्ञ हो, तभी तो कमज़ोर मोमिनों को निष्कासित करने की माँग करते हो।

Hud 11:30

ऐ मेरी जाति के लोगो! यदि मैं इन मोमिनों को किसी दोष के बिना नाहक़ निष्कासित कर दूँ, तो मुझसे अल्लाह की सज़ा को कौन हटाएगा? क्या तुम शिक्षा ग्रहण नहीं करते और वह कार्य करने का प्रयास नहीं करते, जो तुम्हारे लिए सबसे अच्छा और सबसे लाभदायक हो?

Hud 11:31

ऐ मेरी जाति के लोगो! मैं तुमसे यह नहीं कहता कि मेरे पास अल्लाह के ख़ज़ाने हैं, जिनमें उसकी आजीविका है और यदि तुम ईमान ग्रहण कर लिए, तो मैं उसे तुमपर खर्च करूंगा। तथा मैं तुमसे यह नहीं कहता हूँ कि मेरे पास ग़ैब (परोक्ष) का ज्ञान है और न मैं तुमसे यह कहता हूँ कि मैं फ़रिश्तों में से हूँ, बल्कि मैं भी तुम्हारी तरह एक इनसान हूँ। तथा मैं उन ग़रीबों के विषय में, जिन्हें तुम्हारी आँखें तुच्छ और हीन समझती हैं, यह नहीं कहता कि अल्लाह उन्हें हरगिज़ तौफीक और मार्गदर्शन नहीं प्रदान करेगा। अल्लाह उनके इरादों और स्थितियों को अधिक जानता है। यदि मैं ऐसा दावा करूँ, तो मैं उन अत्याचारियों में से हो जाऊँगा, जो अल्लाह की यातना के हक़दार हैं।

Hud 11:32

उन लोगों ने हठपूर्वक और घमंड करते हुए कहा : ऐ नूह! तुमने हमसे झगड़ा किया और बहस की और हमारा झगड़ा और बहस बहुत हो चुकी। अब ऐसा करो कि जिस यातना का हमसे वादा करते हो, उसे हम पर ले ही आओ, यदि तुम अपने दावे में सच्चे हो।

Hud 11:33

नूह अलैहिस्सलाम ने उनसे कहा : मैं अज़ाब लेकर नहीं आऊँगा। उसे तो तुम्हारे पास अल्लाह ही लाएगा, यदि वह चाहेगा। और यदि अल्लाह तुम्हें सज़ा देना चाहे, तो तुम उसके अज़ाब से बच नहीं सकते।

Hud 11:34

और मेरा तुम्हें नसीहत और उपदेश करना तुम्हें कोई लाभ नहीं देगा, यदि अल्लाह तुम्हें सीधे मार्ग से भटकाना चाहता हो और तुम्हारे हठ के कारण तुम्हें मार्गदर्शन से वंचित कर दे। वह तुम्हारा पालनहार है। अतः वही तुम्हारे मामले का मालिक है और यदि वह चाहे तो तुम्हें कुपथ कर दे। क़ियामत के दिन तुम अकेले उसी की ओर लौटकर जाओगे। फिर वह तुम्हें तुम्हारे कार्यों का बदला देगा।

Hud 11:35

नूह की जाति के लोगों के कुफ़्र का कारण यह है कि वे दावा करते हैं कि यह धर्म, जिसे नूह़ अलैहिस्लाम लेकर आए हैं, उसे उन्होंने अल्लाह पर गढ़ लिया है। आप (ऐ रसूल) उनसे कह दीजिए : यदि मैंने इसे गढ़ लिया है, तो मेरे गुनाह की सज़ा केवल मेरे ऊपर होगी। और मैं तुम्हारे झुठलाने के गुनाह में से कुछ भी नहीं उठाऊँगा। क्योंकि मैं उससे निर्दोष हूँ।

Hud 11:36

और अल्लाह ने नूह़ की ओर वह़्य की : (ऐ नूह!) तुम्हारी जाति में से जो लोग पहले ईमान ला चुके हैं, अब उनके सिवा और कोई ईमान नहीं लाएगा। अतः (ऐ नूह) तुम इस लंबी अवधि के दौरान उनके झुठलाने और मज़ाक उड़ाने के कारण दु:खी न हो।

Hud 11:37

और तुम हमारी आँखों के सामने, हमारे संरक्षण में और नाव बनाने की विधि से संबंधित हमारी वह़्य का पालन करते हुए, एक नाव बनाओ। और तुम मुझसे कुफ्र करके अपने ऊपर अत्याचार करने वालों को मोहलत देने की बात मत करना। वे - अनिवार्य रूप से - बाढ़ के द्वारा डुबाए जाने वाले हैं। यह उनके कुफ्र पर अड़े रहने की सज़ा है।

Hud 11:38

नूह अलैहिस्सलाम ने अल्लाह के आदेश का पालन किया और नाव बनाना आरंभ कर दिया। जब भी उनकी जाति के प्रमुख और सरदार लोग उनके पास से गुज़रते, तो वे इस कारण उन्हें नाव बनाते हुए देखकर मज़ाक उड़ाते कि उनकी भूमि में पानी या नदियाँ नहीं हैं। जब वे बार-बार उनका मज़ाक उड़ाने लगे तो नूह़ अलैहिस्सलाम ने कहा : (ऐ मेरी जाति के सरदारो) यदि तुम आज हमारे नाव बनाने का मज़ाक उड़ाते हो, तो हम भी इस बात पर तुम्हारा मज़ाक़ उड़ाते हैं कि तुम अपने अंजाम अर्थात डूबकर मरने से बेख़बर हो।

Hud 11:39

तो तुम्हें शीघ्र ही मालूम हो जाएगा कि कौन है जिसपर इस दुनिया में वह यातना आती है जो उसे अपमानित और तिरस्कृत कर देती है तथा क़ियामत के दिन उसपर स्थायी यातना उतरेगी।

Hud 11:40

नूह अलैहिस्सलाम ने उस नाव को बनाने का काम संपन्न कर लिया, जिसे अल्लाह ने उन्हें बनाने का आदेश दिया था, यहाँ तक कि जब उनकी क़ौम को विनष्ट करने का हमारा आदेश आ गया, और तूफ़ान (बाढ़) की शुरुआत की सूचना के तौर पर उस तन्नूर से पानी उबल पड़ा, जिसमें वे रोटियाँ पकाया करते थे, तो हमने नूह अलैहिस्सलाम से कहा : धरती पर पाए जाने वाले हर प्रकार के जीव का एक-एक जोड़ा; नर और मादा नाव में सवार कर लो। और अपने परिवार को भी उसमें चढ़ा लो, सिवाय उसके, जिसेके बारे में यह निर्णय हो चुका है कि वह डुबाया जाने वाला है, क्योंकि वह ईमान नहीं लाया। तथा अपनी जाति के हर उस व्यक्ति को सवार कर लो, जो तुम्हारे साथ ईमान लाया है। और उनकी जाति के बहुत कम ही लोग उनके साथ ईमान लाए थे। हालाँकि वह एक लंबी अवधि तक उनके बीच रहकर ईमान की ओर बुलाते रहे।

Hud 11:41

और नूह ने अपनी जाति तथा अपने परिवार के ईमान लाने वाले लोगों को संबोधित करते हुए कहा : तुम लोग नाव में सवार हो जाओ। अल्लाह ही के नाम से इसका चलना और उसी के नाम से इसका ठहरना है। निःसंदेह मेरा पालनहार अपने तौबा करने वाले बंदों के गुनाहों को क्षमा करने वाला, उनपर दया करने वाला है। और मोमिनों पर उसकी दया ही का नतीजा है कि उसने उन्हें विनाश से बचा लिया।

Hud 11:42

और नाव उसपर सवार लोगों तथा अन्य चीज़ों को लेकर पर्वतों जैसी ऊँची-ऊँची लहरों में चलने लगी। नूह अलैहिस्सलाम ने पितृत्व की भावना से अपने काफ़िर पुत्र को पुकारा, जबकि वह अपने पिता तथा अपने समुदाय से अलग-थलग था : ऐ बेटे! हमारे संग नाव में सवार हो जा, ताकि तू डूबने से बच जाए और काफिरों के साथ न रह, कहीं तू भी उनके साथ डूबकर न मर जाए।

Hud 11:43

नूह अलैहिस्सलाम के पुत्र ने उनसे कहा : मैं किसी ऊँचे पर्वत की शरण ले लूँगा, ताकि मुझ तक पानी न पहुँच सके। नूह ने अपने बेटे से कहा : आज तूफ़ान (बाढ़) में डूबकर हलाक होने के अल्लाह के अज़ाब से बचाने वाला कोई नहीं, सिवाय इसके कि परम दयालु अल्लाह जिसे चाहे अपनी दया का पात्र बना ले, तो वह उसे डूबने से बचा लेगा। फिर लहर ने नूह और उनके काफ़िर बेटे को एक-दूसरे से अलग कर दिया। चुनाँचे उनका बेटा अपने कुफ़्र के कारण तूफ़ान (बाढ़) में डुबा दिए गए लोगों में से हो गया।

Hud 11:44

जब तूफ़ान थम गया, तो अल्लाह ने धरती से कहा : ऐ धरती! तेरे ऊपर जो बाढ़ का पानी है, उसे पी जा। और आकाश से कहा : ऐ आकाश! तू थम जा और पानी मत बरसा। चुनाँचे पानी कम हो गया, यहाँ तक कि धरती सूख गई। अल्लाह ने काफिरों को विनष्ट कर दिया। नाव जूदी पर्वत पर ठहर गई और कहा गया : उन लोगों के लिए दूरी और विनाश है, जो कुफ्र के द्वारा अल्लाह की सीमाओं को लाँघते हैं।

Hud 11:45

नूह अलैहिस्सलाम ने अपने पालनहार को मदद के लिए पुकारते हुए कहा : ऐ मेरे पालनहार! मेरा बेटा मेरे परिवार में से है जिसे बचाने का तूने मुझसे वादा किया है। और निःसंदेह तेरा वादा वह सत्य है, जो कभी भंग नहीं हो सकता। और तू सबसे अधिक न्याय करने वाला और सबसे अधिक जानने वाला शासक है।

Hud 11:46

अल्लाह ने नूह से कहा : ऐ नूह़! तेरा वह बेटा जिसे बचाने के लिए तूने मुझसे प्रश्न किया है, वह तेरे परिवार में से नहीं है, जिसे मैंने बचाने का वादा किया है। क्योंकि वह एक काफिर है। ऐ नूह! तेरा यह प्रश्न तेरी ओर से एक अनुचित काम है और यह तेरी जैसी स्थिति वाले लोगों के लिए उपयुक्त नहीं है। अतः तू मुझसे ऐसी चीज़ का प्रश्न न कर, जिसका तुझे कोई ज्ञान नहीं है। मैं तुझे चेतावनी देता हूँ कि कहीं तू अज्ञानियों में से न हो जाए और मुझसे ऐसी चीज़ का प्रश्न करे, जो मेरे ज्ञान और मेरी हिकमत के विपरीत है।

Hud 11:47

नूह अलैहिस्सलाम ने कहा: ऐ मेरे पालनहार! मैं तेरी शरण चाहता हूँ इस बात से कि मैं तुझसे किसी ऐसी चीज़ का प्रश्न कर बैठूँ, जिसका मुझे कोई ज्ञान न हो। यदि तूने मेरा पाप क्षमा नहीं किया और मुझपर दया नहीं की, तो मैं उन क्षतिग्रस्त लोगों में से हो जाऊँगा, जिन्होंने आख़िरत में अपना भाग खो दिया।

Hud 11:48

अल्लाह ने नूह अलैहिस्सलाम से फ़रमाया : ऐ नूह! अब सुरक्षा और शांति के साथ तथा अल्लाह की ओर से ढेर सारी नेमतों के साथ नाव से धरती पर उतर जाओ, जो कि तुम पर और तुम्हारे साथ नाव में सवार मोमिनों के वंशजों पर हैं, जो तुम्हारे बाद आएँगे। जबकि उनके वंशजों से कुछ अन्य काफ़िर समूह भी होंगे, जिन्हें हम इस सांसारिक जीवन में लाभ देंगे और उन्हें जीवन-यापन की सामग्री प्रदान करेंगे। फिर आख़िरत में उन्हें हमारी ओर से दर्दनाक यातना का सामना होगा।

Hud 11:49

नूह अलैहिस्सलाम की यह कहानी ग़ैब की सूचनाओं में से है। हमारी इस वह़्य से पहले जो हमने आपकी ओर की है, (ऐ रसूल!) न आप इसे जानते थे और न ही आपकी जाति के लोग इसे जानते थे। अतः आप अपनी क़ौम की ओर से मिलने वाले कष्ट और उनके झुठलाने पर उसी प्रकार सब्र करें, जैसे नूह अलैहिस्लाम ने सब्र किया। निःसंदेह विजय एवं सफलता उन्हीं लोगों के लिए है, जो अल्लाह के आदेशों का पालन करते और उसकी मना की हुई चीज़ों से बचते हैं।

Hud 11:50

और हमने आद की ओर उनके भाई हूद अलैहिस्सलाम को भेजा। उन्होंने उनसे कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! अकेले अल्लाह की इबादत करो और उसके साथ किसी अन्य को साझी मत बनाओ। उसके सिवा तुम्हारा कोई सत्य पूज्य नहीं है। और तुम लोग अपने इस दावे में झूठे हो कि उसका कोई साझी है।

Hud 11:51

ऐ मेरी जाति के लोगो! मैं अपने पालनहार की ओर से तुम्हें उपदेश देने और उसकी ओर तुम्हें आमंत्रित करने का कोई मुआवज़ा नहीं माँगता। मेरा बदला केवल उस अल्लाह पर है, जिसने मुझे पैदा किया है। तो क्या तुम यह नहीं समझते और मेरे आह्वान को स्वीकार नहीं करते?

Hud 11:52

और ऐ मेरी जाति के लोगो! अल्लाह से क्षमा माँगो, फिर अपने गुनाहों से - जिनमें से सबसे बड़ा शिर्क है - उसके समक्ष तौबा करो। वह उसके फलस्वरूप तुमपर बहुत बारिश बरसाएगा और तुम्हारे संतान और धन में वृद्धि करके तुम्हें अधिक शक्ति एवं सम्मान प्रदान करेगा। और मैं तुम्हें जिसकी ओर आमंत्रित कर रहा हूँ, उससे मुँह मत फेरो। अन्यथा तुम मेरे आह्वान से मुँह फेरने, अल्लाह के साथ कुफ्र करने और मेरी लाई हुई बात को झुठलाने के कारण, अपराधियों में से हो जाओगे।

Hud 11:53

उनकी जाति के लोगों ने कहा : ऐ हूद! तुम हमारे पास कोई ऐसा स्पष्ट प्रमाण लेकर नहीं आए, जो हमें तुमपर ईमान लाने के लिए आमादा करे। और हम तुम्हारी बिना तर्क की बात पर अपने देवी-देवताओं की पूजा छोड़ने वाले नहीं हैं। तथा तुम जो अपने रसूल होने का दावा करते हो, उसमें हम तुमपर विश्वास नहीं कर रहे हैं।

Hud 11:54

हम तो यही कहेंगे कि चूँकि तुम हमें अपने देवी-देवताओं की पूजा से रोकते थे, इसलिए हमारे किसी देवता ने तुम्हें पागल कर दिया है! हूद ने कहा : मैं अल्लाह को गवाह बनाता हूँ और तुम भी गवाह रहो कि मैं तुम्हारे उन देवी-देवताओं की पूजा से बरी हूँ, जिनकी तुम अल्लाह के सिवा पूजा करते हो। अतः तुम और तुम्हारे वे पूज्य जिनके बारे में तुम्हारा दावा है कि उन्होंने मुझे पागल कर दिया है, सब मिलकर मेरे विरुद्ध चाल चलो और मुझे कोई मोहलत न दो।

Hud 11:55

हम तो यही कहेंगे कि चूँकि तुम हमें अपने देवी-देवताओं की पूजा से रोकते थे, इसलिए हमारे किसी देवता ने तुम्हें पागल कर दिया है! हूद ने कहा : मैं अल्लाह को गवाह बनाता हूँ और तुम भी गवाह रहो कि मैं तुम्हारे उन देवी-देवताओं की पूजा से बरी हूँ, जिनकी तुम अल्लाह के सिवा पूजा करते हो। अतः तुम और तुम्हारे वे पूज्य जिनके बारे में तुम्हारा दावा है कि उन्होंने मुझे पागल कर दिया है, सब मिलकर मेरे विरुद्ध चाल चलो और मुझे कोई मोहलत न दो।

Hud 11:56

मैंने अकेले अल्लाह पर भरोसा किया तथा अपने मामले में उसी का सहारा लिया है। क्योंकि वही मेरा और तुम्हारा पालनहार है। धरती पर जो भी जीव चलता है, वह अल्लाह के अधीन उसकी संप्रभुता और अधिकार के मातहत है। वह उसे जैसे चाहता है, फेरता है। निःसंदेह मेरा पालनहार सत्य और न्याय पर है। इसलिए वह कदापि तुम्हें मेरे ऊपर सशक्त नहीं करेगा। क्योंकि मैं सत्य पर हूँ और तुम झूठ पर हो।

Hud 11:57

यदि तुमने मेरे लाए हुए संदेश से उपेक्षा किया और उससे पीछे हट गए, तो मेरा काम केवल तुम्हें संदेश पहुँचा देना है। और वास्तव में, मैंने वह सब कुछ तुम्हें पहुँचा दिया है, जिसके साथ अल्लाह ने मुझे भेजा था और मुझे उसके पहुँचाने का आदेश दिया था। अब तुमपर तर्क स्थापित हो चुका है। शीघ्र ही मेरा पालनहार तुम्हें विनष्ट कर देगा और तुम्हारे अलावा दूसरी जाति को लाएगा, जो तुम्हारे उत्तराधिकारी होंगे। तुम अपने झुठलाने और मुँह मोड़ने से अल्लाह को कोई छोटा या बड़ा नुक़सान नहीं पहुँचा सकते। क्योंकि वह अपने बंदों से बेनियाज़ है। निःसंदेह, मेरा पालनहार प्रत्येक वस्तु पर संरक्षक है। इसलिए वही तुम्हारी बुरी चाल से मेरी रक्षा करता है।

Hud 11:58

और जब उन्हें नष्ट करने का हमारा आदेश आ गया, तो हमने हूद और उनके साथ ईमान लाने वालों को अपनी दया एवं कृपा से बचा लिया। तथा उन्हें उस गंभीर यातना से छुटकारा दिलाया, जिसके द्वारा हमने उनकी जाति के काफ़िर लोगों को दंडित किया था।

Hud 11:59

ये वही आद जाति के लोग हैं, जिन्होंने अल्लाह की निशानियों का इनकार किया, अपने रसूल हूद की अवज्ञा की और हर ऐसे व्यक्ति के आदेश का पालन किया, जो सत्य के आगे अभिमान करने वाला, उद्दंड था, न वह सत्य को स्वीकार करता और न ही उसका अनुसरण करता था।

Hud 11:60

उनके साथ इस दुनिया के जीवन में अल्लाह की दया से दूरी और अपमान लगा रहा तथा क़ियामत के दिन भी वे अल्लाह की दया से वंचित रहेंगे। और यह उनके कुफ्र के कारण होगा। याद रखो, अल्लाह ने उन्हें हर भलाई से दूर और हर बुराई से क़रीब कर दिया है।

Hud 11:61

और हमने समूद की ओर उनके भाई सालेह को भेजा। उन्होंने कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! अकेले अल्लाह की इबादत करो। उसके सिवा तुम्हारा कोई पूज्य नहीं, जो इबादत का योग्य हो। उसी ने तुम्हें धरती की मिट्टी से पैदा किया, इस प्रकार कि तुम्हारे पिता आदम को उसी बनाया। और तुम्हें धरती को आबाद करने वाला बनाया। अतः तुम उससे क्षमा माँगो। और फिर अच्छे कार्य करके और गुनाहों को छोड़कर उसकी ओर पलट आओ। निःसंदेह मेरा पालनहार उससे निकट है जो निष्ठा के साथ उसकी इबादत करे, तथा उसकी प्रार्थना स्वीकार करने वाला है जो उसे पुकारे।

Hud 11:62

उनसे उनकी जाति के लोगों ने कहा : ऐ सालेह! तू अपने इस निमंत्रण से पहले हमारे बीच एक उच्च स्थिति वाला था। हम उम्मीद कर रहे थे कि तू सलाह व मशवरे वाला एक समझदार व्यक्ति होगा। ऐ सालेह! क्या तू हमें उसकी उपासना से रोक रहा है, जिसकी उपासना हमारे बाप दादा करते आए हैं? और तू जो हमें केवल एक अल्लाह की इबादत की ओर बुला रहा है, हमें उसमें संदेह है। यही कारण है कि हम तुझपर अल्लाह के बारे में झूठ बोलने का आरोप लगाते हैं।

Hud 11:63

सालेह ने अपनी जाति के लोगों को उत्तर देते हुए कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! मुझे बताओ कि यदि मैं अपने पालनहार की ओर से स्पष्ट प्रमाण पर हूँ और उसने मुझे अपनी ओर से दया अर्थात नुबुव्वत प्रदान की हो, फिर यदि मैं उस बात को पहुँचाना छोड़कर जिसे उसने मुझे तुम तक पहुँचाने का आदेश दिया है, उसकी अवज्ञा करूँ, तो ऐसी परिस्थिति में मुझे उसकी सज़ा से कौन बचाएगा? तुम लोग तो मुझे केवल और अधिक गुमराह और अल्लाह की प्रसन्नता से दूर ही करोगे।

Hud 11:64

और ऐ मेरी जाति के लोगो! यह अल्लाह की ऊँटनी तुम्हारे लिए मेरी सत्यता की निशानी है। अतः तुम इसे अल्लाह की धरती में चरने दो और उसे कोई नुकसान न पहुँचाओ। अन्यथा तुम्हारे उसको मारने के समय के निकट ही तुम्हें यातना आ घेरेगी।

Hud 11:65

उन लोगों ने झुठलाने में अति करते हुए उसे मार डाला। तब सालेह ने उनसे कहा : तुम इसकी हत्या करने से लेकर तीन दिन तक अपनी भूमि में जीवन के मज़े ले लो। फिर तुमपर अल्लाह की यातना आएगी। क्योंकि इसके बाद उसके अज़ाब का आना एक अपरिहार्य वादा है जो झूठा नहीं है, बल्कि वह एक सच्चा वादा है।

Hud 11:66

फिर जब उनको नष्ट करने का हमारा आदेश आ गया, तो हमने सालेह और उनके ईमान वाले साथियों को अपनी दया से बचा लिया तथा उन्हें उस दिन के अपमान और तिरस्कार से सुरक्षित रखा। निःसंदेह (ऐ रसूल!) आपका पालनहार ही शक्तिशाली और प्रभुत्वशाली है, जिसे कोई पराजित नहीं कर सकता। इसीलिए उसने झुठलाने वाले समुदायों को विनष्ट कर दिया।

Hud 11:67

और समूद को एक विनाशकारी भयानक ध्वनि ने पकड़ लिया, जिसकी तीव्रता से उनकी मृत्यु हो गई और वे इस तरह औंधे पड़े हुए थे कि उनके चेहरे मिट्टी से चिपक गए थे।

Hud 11:68

वे ऐसे हो गए, जैसे कि वे अपने देश में अनुग्रह और समृद्धि में रहे ही नहीं थे। सुन लो, समूद ने अल्लाह के साथ कुफ्र किया। वे सदैव अल्लाह कि दया से दूर रहें।

Hud 11:69

फ़रिश्ते इब्राहीम अलैहिस्सलाम के पास, उन्हें और उनकी पत्नी को इसहाक़ और फिर याक़ूब की शुभ सूचना देने के लिए पुरुषों के रूप में आए। फरिश्तों ने कहा : सलाम हो! तो इबराहीम अलैहिस्सलाम उन्हें यह कहकर उत्तर दिया : सलाम हो। फिर वह जल्दी से गए और उनके पास एक भुना हुआ बछड़ा लेकर आए; ताकि वे उससे खाएँ यह सोचकर कि वे पुरुष हैं।

Hud 11:70

फिर जब इबराहीम ने देखा कि उनके हाथ बछड़े की ओर नहीं बढ़ रहे हैं और उन्होंने उसे नहीं खाया, तो वह उनके प्रति अचंभे में पड़ गए और अपने दिल में उनसे भय महसूस किया। जब फरिश्तों ने उनका डर देखा तो कहा : हमसे मत डरो, हमें अल्लाह ने लूत की जाति को यातना देने के लिए भेजा है।

Hud 11:71

और इबराहीम की पत्नी 'सारा' खड़ी थी, तो हमने उसे यह प्रसन्न करने वाली सूचना दी कि वह इसहाक को जन्म देगी और इसहाक का एक लड़का होगा, जिसका नाम याक़ूब होगा। यह सुनकर वह हँस पड़ी और खुश हो गई।

Hud 11:72

जब फरिश्तों ने यह शुभसूचना दी, तो सारा ने अश्चर्यचकित होकर कहा : मेरी संतान कैसे होगी, जबकि मैं बूढ़ी और संतान से निराश हो चुकी हूँ, और मेरा यह पति भी बुढ़ापे की आयु को पहुँच गया है?! इस स्थिति में बच्चा होना आश्चर्यजनक है, आम तौर पर ऐसा नहीं होता है।

Hud 11:73

जब सारा शुभसूचना पर आश्चर्य प्रकट करने लगीं, तो फरिश्तों ने उनसे कहा : क्या तुझे अल्लाह के अनुमान और निर्णय पर आश्चर्य है? तुम जैसे लोगों से यह तथ्य छिपा नहीं है कि अल्लाह ऐसे कार्यों पर सामर्थ्य रखता है। ऐ इबराहीम के घर वालो! तुमपर अल्लाह की दया और उसकी बरकतें (विभूतियाँ) हों। निःसंदेह अल्लाह अपने कार्यों तथा गुणों में प्रशंसित और वैभवशाली एवं उच्च है।

Hud 11:74

फिर जब इबराहीम अलैहिस्सलाम अपने अतिथियों के बारे में, जिन्हों ने खाना नहीं खाया था, यह जान गए कि वे फ़रिश्ते हैं और भय दूर हो गया, और उन्हें शुभसूचना मिल गई कि उनके यहाँ इसहाक नामक एक पुत्र पैदा होगा और फिर याकूब का जन्म होगा, तो वह हमारे दूतों से लूत की जाति के संबंध में बहस करने लगे, शायद वे उनकी सज़ा पीछे हटा दें और शायद वे लूत और उनके घर वालों को बचा लें।

Hud 11:75

निःसंदेह इबराहीम अलैहिस्सलाम बहुत सहनशील थे, सज़ा का विलंबित किया जाना पसंद करते थे। अल्लाह के समक्ष बहुत विलाप करने वाले, बहुत दुआ करने वाले और अल्लाह की ओर पलटने वाले थे।

Hud 11:76

फ़रिश्तों ने कहा : ऐ इबराहीम! लूत की जाति के बारे में बहस करना छोड़ो। निःसंदेह उनपर उस यातना को लाने का अल्लाह का निर्णय आ चुका है, जो उसने उनपर मुक़द्दर किया है। निःसंदेह लूत की जाति पर बड़ा अज़ाब आने वाला है, जिसे न कोई बहस टाल सकती है और न कोई प्रार्थना।

Hud 11:77

और जब फ़रिश्ते लूत के पास पुरुषों की वेशभूषा में आए, तो उनका आना उन्हें बुरा लगा। और उनके संबंध में अपनी जाति के भय से उनका सीना तंग हो गया, जो महिलओं को छोड़कर परुषों से अपनी कामवासना पूरी करते थे। लूत ने कहा : यह बड़ा सख्त दिन है। क्योंकि उन्होंने सोचा कि उनकी जाति के लोग उनके अतिथियों के संबंध में उनपर हावी हो जाएँगे।

Hud 11:78

और लूत की जाति के लोग उनके अतिथियों के साथ कुकर्म के इरादे से दौड़ते हुए लूत के पास आए। और वे इससे पूर्व महिलाओं को छोड़कर पुरुषों से यौन संबंध बनाते थे। लूत ने अपनी जाति के लोगों को हटाते हुए और अपने अतिथियों के समक्ष अपना उज़्र दर्शाते हुए कहा : ये तुम्हारी महिलाओं में से मेरी बेटियाँ हैं, इसलिए इनसे शादी कर लो। ये तुम्हारे लिए बेह़याई के कार्य से अधिक पवित्र हैं। अतः तुम अल्लाह से डरो और मुझे अपने अतिथियों के संबंध में लज्जित न करो। (ऐ लोगो!) क्या तुम्हारे अंदर कोई अच्छे दिमाग का आदमी नहीं है, जो तुम्हें इस घृणित कार्य से रोक सके?

Hud 11:79

उनकी जाति के लोगों ने उनसे कहा : (ऐ लूत!) तुम तो जानते ही हो कि हमें तुम्हारी बेटियों की या तुम्हारी जाति की महिाओं की न कोई ज़रूरत है, और न कोई इच्छा (वासना) है। निःसंदेह तुम भली-भाँति जानते हो कि हम क्या चाहते हैं। हम तो केवल पुरुषों को चाहते हैं।

Hud 11:80

लूत ने कहा : काश, मेरे पास तुम्हें हटाने की शक्ति होती या मेरे पास रक्षा करने के लिए क़बीला होता, फिर मैं तुम्हारे और अपने अतिथियों के बीच दीवार बन जाता।

Hud 11:81

फ़रिश्तों ने लूत अलैहिस्सलाम से कहा : ऐ लूत! हम स्वर्गदूत हैं। हमें अल्लाह ने भेजा है। तेरी जाति के लोग कदापि बुराई के साथ तेरे पास नहीं पहुँच सकते। अतः तू अपने परिवार के साथ इस गाँव से रात के अंधेरे में निकल जा। और तुम में से कोई भी व्यक्ति पीछे मुड़कर न देखे। परन्तु तेरी पत्नी उल्लंघन करते हुए पीछे मुड़कर देखेगी। क्योंकि उसे भी वही यातना पहुँचने वाली है, जो तेरी जाति के लोगों को पहुँचेगी। उन्हें विनष्ट करने का समय प्रातः काल है और यह समय निकट ही है।

Hud 11:82

फिर जब लूत की जाति को विनष्ट करने का हमारा आदेश आ गया, तो हमने उनकी बस्तियों को उठाकर पटख दिया और ऊपर-तले कर दिया और हमने उनपर लगातार सख्त मिट्टी के पत्थर बरसाए।

Hud 11:83

इन पत्थरों को एक विशेष चिह्न के साथ अल्लाह के यहाँ से चिह्नित किया गया था। और ये पत्थर कुरैश और अन्य अत्याचारियों से कुछ दूर नहीं हैं। बल्कि वे निकट ही हैं, जब भी अल्लाह उन्हें उनपर बरसाने का फ़ैसला करेगा, बरस पड़ेंगे।

Hud 11:84

और हमने मदयन की ओर उनके भाई शुऐब को भेजा। उन्होंने कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! अकेले अल्लाह की इबादत करो। उसके अलावा तुम्हारा कोई पूज्य नहीं जो इबादत का हक़दार हो। तथा जब लोगों को नाप या तौलकर कुछ दो, तो उसमें कमी न करो। मैं तुम्हें विस्तृत आजीविका और नेमत में देख रहा हूँ। इसलिए पाप करके अपने ऊपर अल्लाह की नेमत को मत बदलो। मैं तुमपर उस घेरने वाले दिन की यातना से डरता हूँ, जो तुम में से हर एक को पकड़ लेगी, तुम्हें उससे भागने या शरण लेने का स्थान नहीं मिलेगा।

Hud 11:85

और ऐ मेरी जाति के लोगो! जब तुम किसी को नाप-तौलकर कुछ दो, तो न्याय के साथ पूरा-पूरा नापो और तौलो। तथा नाप-तौल में कमी, धोखाधड़ी और चालबाज़ी से लोगों के हुक़ूक़ में कमी न करो। और धरती में हत्या और अन्य गुनाहों से बिगाड़ मत फैलाओ।

Hud 11:86

अल्लाह की हलाल बचत, जो वह लोगों को उनके अधिकार न्याय के साथ देने के बाद तुम्हारे लिए बाक़ी रखता है, नाप-तौल में कमी और धरती में बिगाड़ पैदा करने के द्वारा प्राप्त वृद्धि से अधिक लाभदायक और बरकत वाली है। यदि तुम सचमुच मोमिन हो, तो उस बचत से खुश रहो। और मैं तुमपर संरक्षक नहीं हूँँ कि तुम्हारे कार्यों की गिनती रखूँ और उनपर तुम्हारी पकड़ करूँ। उसपर संरक्षक तो वही है, जिसके पास भेदों और कानाफूसियों का ज्ञान है।

Hud 11:87

शुऐब की जाति के लोगों ने शुऐब से कहा : ऐ शुऐब! क्या तेरी नमाज़ जो तू अल्लाह के लिए पढ़ता है, तुझे यह आदेश देती है कि हम उन मूर्तियों की पूजा छोड़ दें, जिनकी पूजा हमारे बाप-दादा किया करते थे। और तुम्हें यह आदेश देती है कि हम अपने धन का जैसे चाहें उपयोग न करें और जैसे चाहें उसे विकसित न करें?! वास्तव में, तुम बहुत सहनशील और भले आदमी हो। क्योंकि हम तुम्हें इस निमंत्रण से पूर्व समझदार और बुद्धिमान जानते थे, फिर तुम्हें क्या हुआ?!

Hud 11:88

शुऐब ने अपनी जाति के लोगों से कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! तुम मुझे ज़रा यह बताओ, यदि मैं अपने पालनहार की ओर से स्पष्ट प्रमाण तथा दूरदर्शिता पर हूँ और उसने अपनी ओर से मुझे हलाल रोज़ी भी दे रखी है और नुबुव्वत प्रदान की है, तो तुम्हारा हाल क्या होगा। मेरा उद्देश्य यह नहीं है कि मैं तुम्हें किसी चीज़ से रोकूँ और तुम्हारी मुखालफत करते हुए स्वयं वही काम करूँ। मेरा उद्देश्य केवल यह है कि तुम्हें अपने पालनहार की तौहीद की ओर बुलाकर और शक्ति भर उसका आज्ञापालन करके तुम्हारा सुधार करूँ। और मुझे इसका सामर्थ्य प्रदान करने वाला केवल अल्लाह महिमावान है। मैं अपने सभी कामों में अकेले उसी पर भरोसा करता हूँ और उसी की ओर लौटता हूँ।

Hud 11:89

ऐ मेरी जाति के लोगो! मेरी दुश्मनी तुम्हें मेरी लाई हुई शरीयत को झुठलाने पर न उभारे। मुझे डर है कि तुम्हें उसी प्रकार का अज़ाब न आ घेरे जिस प्रकार का अज़ाब नूह की जाति, या हूद की जाति, या सालेह की जाति पर आया और लूत की जाति तो तुमसे समय एवं स्थान के हिसाब से कुछ दूर नहीं है। और तुम जानते हो कि उनके साथ क्या हुआ था। अतः कुछ सीख लो।

Hud 11:90

और अपने पालनहार से क्षमा माँगो, फिर अपने गुनाहों से उससे तौबा करो। मेरा पालनहार तौबा करने वालों पर दयावान् और उनसे बहुत प्रेम करने वाला है।

Hud 11:91

शुऐब अलैहिस्सलाम की जाति के लोगों ने शुऐब से कहा : हम तुम्हारी लाई हुई बहुत-सी बातें नहीं समझते हैं। और चूँकि तुम्हारी आँखों में कमज़ोरी या अंधापन आ गया है, इसलिए हम तुम्हें अपने बीच कमज़ोर समझते हैं। यदि तुम्हारा कुल हमारे धर्म पर न होता, तो हम अवश्य तुम्हें पत्थर फेंककर मार डालते। तथा तुम हमारे निकट प्रिय (प्रतिष्ठित) भी नहीं हो कि हम तुम्हारी हत्या करने से डरें। हम केवल तुम्हारे कुल के सम्मान में तुम्हारी हत्या से रुके हुए हैं।

Hud 11:92

शुऐब ने अपनी जाति के लगों से कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! क्या मेरा क़बीला तुम्हारे निकट तुम्हारे पालनहार अल्लाह से अधिक सम्मानित एवं प्रभावशाली है?! और तुम लोगों ने अल्लाह को अपने पीछे छोड़ दिया, जब तुम उसके उस नबी पर ईमान नहीं लाए, जिसे उसने तुम्हारी ओर भेजा था। निश्चय ही मेरे पालनहार ने उसे अपने घेरे में ले रखा है जो कुछ तुम कर रहे हो। तुम्हारे कामों मे से कुछ भी उससे छिपा नहीं है। और वह तुम्हें इस दुनिया में विनाश के साथ और आख़िरत में अज़ाब की शक्ल में बदला देगा।

Hud 11:93

और ऐ मेरी जाति के लोगो! तुम अपने सामर्थ्य के अनुसार अपने मन पसंद तरीक़े पर काम करो, मैं (भी) अपने पसंद किए हुए तरीक़े पर अपने सामर्थ्य भर कार्य कर रहा हूँ। शीघ्र ही तुम्हें पता चाल जाएगा कि हममें से किसके पास, उसे दंडित करने के लिए, अपमानित करने वाली यातना आती है और हममें से कौन अपने दावे में झूठा है। अतः प्रतीक्षा करो कि अल्लाह क्या निर्णय करता है, मैं भी तुम्हारे साथ प्रतीक्षा कर रहा हूँ।

Hud 11:94

और जब शुऐब की जाति के लोगों को नष्ट करने का हमारा आदेश आ गया, तो हमने अपनी दया से शुऐब और उनके साथ ईमान लाने वालों को बचा लिया। और उसकी जाति के अत्याचारियों को एक विनाशकारी भयानक ध्वनि ने पकड़ लिया, जिससे उनकी मृत्यु हो गई और वे इस तरह औंधे पड़े हुए थे कि उनके चेहरे मिट्टी से चिपक गए थे।

Hud 11:95

वे ऐसे हो गए, जैसे वे इससे पहले कभी वहाँ बसे ही नहीं थे। सुन रखो, मदयन के लोग अल्लाह के प्रकोप के उतरने के कारण उसकी दया से दूर कर दिए गए, जैसे समूद के लोग अल्लाह का क्रोध उतरने के कारण उसकी दया से दूर कर दिए गए थे।

Hud 11:96

और हमने मूसा को अल्लाह की तौह़ीद को दर्शाने वाली अपनी निशानियों तथा जो कुछ वह लेकर आए थे उसकी सत्यता को प्रमाणित करने वाले अपने स्पष्ट तर्कों के साथ भेजा।

Hud 11:97

हमने उन्हें फ़िरऔन और उसकी जाति के गणमान्य लोगों की ओर भेजा। तो इन गणमान्य लोगों ने फ़िरऔन के अल्लाह का इनकार करने के आदेश को मान लिया। जबकि फ़िरऔन का आदेश सत्य तक पहुँचाने वाला नहीं था कि उसे माना जाता।

Hud 11:98

क़ियामत के दिन फिरऔन अपनी जाति की आग की ओर अगुवाई करेगा यहाँ तक कि उन्हें उसमें दाखिल कर देगा और वह बहुत ही बुरा उतरने का स्थान है जहाँ वह उन्हें ले जाएगा।

Hud 11:99

अल्लाह ने उन्हें डुबाकर विनष्ट करने के साथ-साथ, दुनिया के जीवन में उनपर धिक्कार, अभिशाप और अपनी दया से दूरी और निष्कासन अंकित कर दिया। तथा क़ियामत के दिन भी उनपर अपनी दया से दूरी और निष्कासन अंकित कर दिया। उनका दुनिया एवं आख़िरत दोनों जगहों में धिक्कार और अज़ाब का भागीदार बनना कितना बुरा है!

Hud 11:100

इस सूरत में बस्तियों के समाचार में से जो उल्लेख किया गया है, हम (ऐ रसूल) आपको उसके बारे में बता रहे हैं। इनमें से कुछ बस्तियाँ ऐसी हैं, जिनके निशान अभी बाक़ी हैं और कुछ ऐसी हैं, जिनके निशान मिट चुके हैं और उनका कोई चिह्न बाक़ी नहीं है।

Hud 11:101

और हमने उन्हें विनष्ट करके उनपर कोई अत्याचार नहीं किया, बल्कि उन्होंने अल्लाह के साथ कुफ़्र करके अपने आपको विनाश का हक़दार बनाकर स्वयं अपने ऊपर अत्याचार किया। ऐ रसूल! जब उन्हें विनष्ट करने का आपके पालनहार का आदेश आ गया, तो वे जिन पूज्यों की पूजा किया करते थे, वे उनसे उनपर आने वाले अज़ाब को न टाल सके तथा नुक़सान एवं विनाश में वृद्धि के सिवा उनके किसी काम न आए।

Hud 11:102

जिस तरह अल्लाह ने झुठलाने वाली जातियों की पकड़ की और उन्हें जड़ से उखाड़कर फेंक दिया, वैसे ही उसकी पकड़ हर काल और हर स्थान में होती है। निःसंदेह अत्याचार करने वाली बस्तियों के लिए उसकी पकड़ बहुत मज़बूत और दर्दनाक होती है।

Hud 11:103

निश्चय ही अल्लाह के उन अत्याचारी बस्तियों को पकड़ने में उसके लिए सीख और उपदेश है, जो क़ियामत के दिन के अज़ाब से डरता हो। यह वही दिन है, जिसमें अल्लाह लोगों को उनके हिसाब-किताब के लिए एकत्रित करेगा, और वह उपस्थिति का दिन है, जिसमें सभी मह्शर वाले उपस्थित होंगे।

Hud 11:104

और हम उस उपस्थिति (क़ियामत) के दिन को केवल एक ऐसी अवधि के लिए विलंबित कर रहे हैं जिसकी संख्या (अल्लाह के यहाँ) ज्ञात है।

Hud 11:105

जिस दिन वह दिन आ जाएगा, तो कोई भी प्राणी किसी तर्क अथवा अनुशंसा की बात उसकी अनुमति के बाद ही कर सकेगा। उस दिन लोग दो प्रकार के होंगे : एक अभागा जो दोज़ख में जाएगा और एक भाग्यशाली जो जन्नत में प्रवेश करेगा।

Hud 11:106

जहाँ तक अपने कुफ्र और भ्रष्ट कर्मों के कारण अभागा ठहरने वाले लोगों की बात है, तो वे नरक में प्रवेश करेंगे। जिसमें, आग की लपटों से ग्रस्त होने की गंभीरता से, उनकी आवाज़ें और साँसें ऊँची हो जाएँगी।

Hud 11:107

वे उसमें सदैव रहेंगे, जब तक आकाश और धरती विद्यमान् हैं, वे उससे बाहर नहीं निकलेंगे। परन्तु अल्लाह एकेश्वरवादी अवज्ञाकारियों में से जिसे निकालना चाहे (उसे निकाल सकता है)। निःसंदेह (ऐ रसूल) आपका पालनहार जो चाहे, उसे कर गुज़रने वाला है। उसे कोई विवश नहीं कर सकता।

Hud 11:108

जहाँ तक भाग्यशाली लोगों की बात है, जिनके लिए उनके ईमान और अच्छे कार्यों के कारण पहले ही से अल्लाह की ओर से भाग्यशाली होना लिख दिया गया है, वे सदैव जन्नत में रहेंगे जब तक आकाश और धरती विद्यमान् हैं, सिवाय इसके कि अल्लाह अवज्ञाकारी मोमिनों में से जिसे जन्नत से पूर्व दोज़ख में डालना चाहे। जन्नत वालों को मिलने वाली अल्लाह की नेमतें कभी ख़त्म नहीं होंगी।

Hud 11:109

(ऐ रसूल) ये मुश्रिक लोग जिन (मूर्तियों) की पूजा कर रहे हैं, उनके भ्रष्ट होने के संबंध में आपको कोई संदेह नहीं होना चाहिए। क्योंकि उनके पास उसके सही होने पर कोई बौद्धिक या शरई प्रमाण नहीं है। बल्कि, उनके अल्लाह के अलावा अन्य को पूजने का कारण, मात्र अपने बाप-दादा का अनुकरण (नकल) है। निःसंदेह हम बिना कमी के उन्हें उनकी यातना का पूरा-पूरा हिस्सा देने वाले हैं।

Hud 11:110

और हमने मूसा को तौरात दी थी, फिर लोगों ने उसमें विभेद किया। कुछ लोग उसपर ईमान लाए और कुछ लोगों ने उसका इनकार किया। यदि अल्लाह का यह पूर्व निर्धारित निर्णय न होता कि वह शीघ्र ही (दुनिया में) यातना नहीं देगा, बल्कि अपनी हिकमत के तहत उसे क़ियामत तक के लिए विलंबित रखेगा, तो दुनिया ही में वह अज़ाब आ जाता, जिसके वे हक़दार हैं। यहूदियों तथा बहुदेववादियों में से काफ़िर लोग कुरआन के संबंध में संदेह में पड़े हुए हैं, जो असमंजस में डालने वाला है।

Hud 11:111

जिन मतभेद करने वालों का भी उल्लेख किया गया है, उनमें से प्रत्येक को (ऐ रसूल!) आपका पालनहार उसके कर्मों का अवश्य पूरा बदला देगा। चुनाँचे जिसका कर्म अच्छा था, उसका बदला अच्छा होगा और जिसका कर्म बुरा था, उसका बदला बुरा होगा। निःसंदेह अल्लाह उनके छोटे-छोटे कर्मों से भी सूचित है, उनके कामों में से कुछ भी उससे छिपा नहीं है।

Hud 11:112

(ऐ रसूल) हमेशा सीधे रास्ते पर जमे रहें, जैसा कि अल्लाह ने आपको आदेश दिया है। अतः उसके आदेशों का पालन करें और उसके निषेधों से बचें। इसी तरह आपके साथ तौबा करने वाले मोमिन भी सीधे रास्ते पर जमे रहें। तथा तुम गुनाहों में पड़कर सीमा का उल्लंघन न करो। निश्चय ही वह तुम्हारे कर्मों को देख रहा है। उससे तुम्हारा कोई काम छिपा नहीं है और वह तुम्हें उसका बदला देगा।

Hud 11:113

चाटुकारिता या स्नेह के साथ अत्याचारी काफ़िरों की ओर झुकाव न करें, अन्यथा इस झुकाव के कारण तुम्हें (भी) आग पकड़ लेगी। और अल्लाह के सिवा तुम्हारा कोई सहायक न होगा, जो तुम्हें उससे बचा सके। फिर तुम्हें कोई ऐसा नहीं मिलेगा जो तुम्हारी सहायता कर सके।

Hud 11:114

(ऐ रसूल) आप दिन के दोनों सिरों में अर्थात दिन की शुरुआत और उसके अंत में अच्छे ढंग से नमाज़ क़ायम कीजिए। तथा रात के कुछ क्षणों में भी उसकी स्थापना कीजिए। निःसंदेह अच्छे कार्य छोटे गुनाहों को मिटा देते हैं। उपर्युक्त बातें सीख लेने वालों के लिए, एक सीख हैं।

Hud 11:115

तथा आपको सीधे मार्ग पर जमे रहने आदि का जो आदेश दिया गया है, उसे करने और सीमोल्लंघन एवं अत्याचारियों की ओर झुकाव से जो रोका गया है, उसे छोड़ने पर धैर्य से काम लें। निःसंदेह अल्लाह सदाचारियों का प्रतिफल नष्ट नहीं करता, बल्कि उनके अच्छे कर्मों को स्वीकार करता है और उनका बहुत अच्छा बदला देता है।

Hud 11:116

ऐसा क्यों न हुआ कि पहले के यातना ग्रस्त समुदायों में कुछ सदाचारी होते, जो उन समुदायों को कुफ्र से तथा गुनाहों के द्वारा धरती पर उपद्रव करने से रोकते। उनके अंदर ऐसे लोग नहीं रह गए थे, सिवाय उनमें से कुछ के जो भ्रष्टाचार से मना कर रहे थे। अतः उनकी अत्याचारी जाति को विनष्ट करते समय हमने उनको बचा लिया। जबकि उन जातियों के अत्याचारी लोग सुख और आनंद के पीछे लगे रहे। और ऐसा करके वे अन्याय कर रहे थे।

Hud 11:117

और आपका पालनहार (ऐ रसूल) ऐसा नहीं है कि वह बस्तियों में से किसी बस्ती को विनष्ट कर दे, जबकि उसके वासी धरती में सुधार का करने वाले हों। बल्कि वह उसे उसी समय विनष्ट करता है, जब उसके वासी कुफ्र, अत्याचार और गुनाहों के द्वारा बिगाड़ पैदा करने वाले हों।

Hud 11:118

(ऐ रसूल) यदि आपका पालनहार चाहता कि सभी लोगों को सत्य के पथ पर चलने वाला एक समुदाय बना दे, तो ऐसा कर सकता था। परन्तु उसने ऐसा नहीं चाहा। अतः वे इच्छाओं के पीछे चलने और अत्याचार के कारण सत्य के बारे में हमेशा मतभेद करते रहेंगे।

Hud 11:119

परन्तु जिन्हें अल्लाह सीधे मार्ग का सामर्थ्य प्रदानकर उनपर दया करे, तो वे अल्लाह महिमावान के एकेश्वरवाद में विभेद नहीं करेंगे। और इसी विभेद के द्वारा परीक्षण के लिए अल्लाह ने उन्हें पैदा किया है। चुनाँचे उनमें से कुछ अभागे हैं और कुछ भाग्यशाली। और (ऐ रसूल) आपके पालनहार की वह बात पूरी हुई, जिसका निर्णय उसने अनादिकाल में किया था कि वह जहन्नम को जिन्नों और इनसानों में से शैतान के अनुयायियों से भर देगा।

Hud 11:120

(ऐ रसूल) आपसे पूर्व नबियों की ख़बरों में से जो भी ख़बर हम आपको सुना रहे हैं, उसका उद्देश्य यह है कि हम उसके द्वारा आपके ह्रदय को सत्य पर सुदृढ़ कर दें और उसे मज़बूत कर दें। तथा इस सूरत में आपके पास वह सत्य आ गया, जिसमें कोई संदेह नहीं है। और इसमें आपके पास काफिरों के लिए उपदेश और उन मोमिनों के लिए स्मरण आया है, जो स्मरण से लाभ उठाते हैं।

Hud 11:121

और (ऐ रसूल!) आप उन लोगों से, जो न अल्लाह पर ईमान रखते हैं और न उसे एक मानते हैं, कह दीजिए कि : तुम सत्य से मुँह फेरने और उससे रोकने के अपने रास्ते पर काम करो, हम अपने सत्य पर सुदृढ़ रहने, उसकी ओर लोगों को बुलाने और उसपर सब्र करने के रास्ते पर काम कर रहे हैं।

Hud 11:122

और तुम हमपर आने वाले अज़ाब की प्रतीक्षा करो, निःसंदेह हम भी प्रतीक्षा करते हैं कि तुमपर क्या कुछ आता है।

Hud 11:123

और केवल अल्लाह ही के पास आकाशों तथा धरती कि छिपी चीज़ों का ज्ञान है। उससे इनमें से कुछ भी छिपा नहीं है। तथा अकेले उसी की ओर क़ियामत के दिन सभी मामले लौटाए जाएँगे। अतः (ऐ रसूल) आप अकेले उसी की इबादत करें और अपने सभी मामलों में उसी पर भरोसा करें। आपका पालनहार उससे अनजान नहीं है जो कुछ तुम करते हो, बल्कि वह उससे अवगत है और हर एक को उसके कर्मों का बदला देगा।

Yusuf 12:1

{अलिफ़, लाम, रा।} यह और इस प्रकार के अक्षरों के संबंध में सूरतुल बक़रा के प्रारंभ में बात गुज़र चुकी है। इस सूरत में जो आयतें उतारी गई हैं, वे उस क़ुरआन की आयतें हैं जो अपने विषयों (सामग्रियों) में स्पष्ट है।

Yusuf 12:2

हमने कुरआन को अरबी भाषा में उतारा है, ताकि (ऐ अरब वासियो!) तुम उसका अर्थ समझ सको।

Yusuf 12:3

(ऐ रसूल) हम आप पर यह क़ुरआन उतारकर, आपको सच्चाई, शब्दों की शुद्धता और उसकी बलाग़त से भरी सबसे अच्छी कहानी सुना रहे हैं। जबकि इसके उतारे जाने से पहले आप इस कहानी से अनजान थे, आपको इसका कोई ज्ञान नहीं था।

Yusuf 12:4

(ऐ रसूल) हम आपको सूचना दे रहे हैं कि जब यूसुफ़ ने अपने पिता याक़ूब से कहा : ऐ मेरे पिता! मैंने सपने में ग्यारह सितारे देखे, तथा मैंने सूर्य और चंद्रमा को देखा, मैंने उन सभी को मुझे सजदा करते हुए देखा है। यह दृष्टि (स्वप्न) यूसुफ़ अलैहिस्सलाम के लिए एक अग्रिम शुभसूचना थी।

Yusuf 12:5

याक़ूब ने अपने पुत्र यूसुफ़ से कहा : ऐ मेरे पुत्र! अपना सपना अपने भाइयों को न बताना। अन्यथा वे उसे समझ जाएँगे और तुमसे ईर्ष्या करेंगे। तथा वे ईर्ष्या करते हुए तुम्हारे लिए षडयंत्र रचेंगे। निःसंदेह शैतान मनुष्य का खुला श्मन है।

Yusuf 12:6

और जिस तरह तूने वह स्वप्न देखा है, वैसे ही (ऐ यूसुफ़!) तेरा पालनहार तुझे चुन लेगा और तुझे सपनों की व्याख्या का ज्ञान प्रदान करेगा। तथा तुझपर नुबुव्वत के द्वारा अपनी नेमत पूरी करेगा। जैसे कि तुझसे पूर्व उसने अपनी नेमत तेरे बाप-दादा : इबराहीम और इसहाक़ पर पूरी की थी। निःसंदेह तेरा पालनहार अपनी सृष्टि का ज्ञान रखने वाला और अपने प्रबंधन में हिकमत वाला है।

Yusuf 12:7

निश्चित रूप से यूसुफ़ अलैहिस्सलाम और उनके भाइयों की कहानी में उन लोगों के लिए सीख और उपदेश हैं, जो उनके समाचार के बारे में पूछने वाले हैं।

Yusuf 12:8

जब उनके भाइयों ने आपस में कहा : यूसुफ़ और उसका सगा भाई हमारे पिता के निकट हमसे अधिक प्रिय हैं। हालाँकि हम एक अच्छी संख्या वाले गिरोह हैं, तो आख़िर कैसे हमारे पिता ने उन दोनों को हमपर श्रेष्ठता दे रखी है? हम समझते हैं कि बिना किसी स्पष्ट कारण के उन दोनों को हमपर श्रेष्ठता देकर वे स्पष्ट भूल कर रहे हैं।

Yusuf 12:9

यूसुफ़ की हत्या कर दो अथवा दूर किसी धरती में फ़ेंक आओ, तुम्हारे पिता का ध्यान पूर्ण रूप से तुम्हारी ओर हो जाएगा और वह तुमसे पूरी तरह से प्यार करने लगेंगे। फिर उसकी हत्या करने अथवा उसे ग़ायब करने के बाद, अपने गुनाहों से तौबा करके, तुम अच्छे लोग बन जाओ।

Yusuf 12:10

एक भाई ने कहा : यूसुफ़ को मत मारो। बल्कि यदि उसके साथ वही कुछ करना चाहते हो जो तुमने कहा है, तो उसे किसी गहरे कुएँ में फ़ेंक दो कि वहाँ से गुज़रने वाले कुछ यात्री उसे उठा ले जाएँ। यह उसकी हत्या करने की तुलना में कम हानिकारक है।

Yusuf 12:11

और जब वे लोग यूसुफ़ अलैहिस्सलाम को दूर करने (हटाने) पर सहमत हो गए, तो उन्होंने अपने पिता याकूब से कहा : ऐ हमारे पिता! आप यूसुफ़ के संबंध में हमपर विश्वास क्यों नहीं करते? जबकि उसके प्रति हमारा रवैया स्नेहपूर्ण रहता है, हम हर कष्ट से उसे बचाते हैं। और जब तक वह आपके पास सुरक्षित रूप से वापस नहीं आ जाता है, तब तक हम उसकी रक्षा करने और उसकी देखभाल करने में उसके प्रति शुभचिंतक हैं। फिर आपको उसे हमारे साथ भेजने से कौन-सी चीज़ रोक रही है?

Yusuf 12:12

आप हमें अनुमति दें कि कल हम उसे अपने साथ ले जाएँ, वह खाए-पिएगा और आनंद लेगा और हम उसे हर पहुँचने वाले हर कष्ट से उसे सुरक्षित रखेंगे।

Yusuf 12:13

याक़ूब ने अपने बेटों से कहा : तुम्हारा उसे अपने साथ ले जाना मेरे लिए दुख का कारण है, क्योंकि मैं उसके अलगाव को बर्दाश्त नहीं कर सकता। साथ ही यह भी डर है कि उसे भेड़िया खा जाए और तुम लोग खाने और खेलने में व्यस्त होकर उससे असावधान हो जाओ।

Yusuf 12:14

उन्होंने अपने पिता से कहा : यदि भेड़िये ने यूसुफ़ को खा लिया, जबकि हम एक गिरोह हैं, तो इस स्थिति में हममें कोई भलाई नहीं है। अतः हम बड़े घाटे वाले हैं क्योंकि हम भेड़िये से उसकी रक्षा नहीं कर सके।

Yusuf 12:15

फिर याक़ूब ने उसे उनके साथ भेज दिया। जब वे उसे लेकर दूर चले गए और उसे कुएँ के तल में फेंकने का निश्चय कर लिया, तो उस वक़्त हमने यूसुफ़ की ओर वह़्य की : तुम अवश्य उन्हें उनके इस करतूत के बारे में बताओगे और उस समय वे तुम्हें पहचान भी नहीं पाएँगे।

Yusuf 12:16

और यूसुफ़ के भाई अपने फ़रेब को चलाने के लिए रोने का ढोंग करते हुए इशा के समय अपने पिता के पास आए।

Yusuf 12:17

उन्होंने कहा : ऐ हमारे पिता! हम दौड़ने और तीर फेंकने में प्रतिस्पर्धा करने लगे और यूसुफ़ को अपने कपड़ों और सामानों के पास उनकी हिफ़ाज़त के लिए छोड़ गए। फिर उसे भेड़िए ने खा लिया। और आप तो हमारा विश्वास करने वाले नहीं हैं, भले ही हम वास्तव में अपनी बात में सच्चे ही क्यों न हों।

Yusuf 12:18

उन्होंने अपनी ख़बर की पुष्टि एक चाल के द्वारा की। वे यूसुफ़ के कुर्ते पर किसी और चीज़ का खून लगाकर लाए, यह भ्रम पैदा करने के लिए कि यह भेड़िए के उनको खाने का निशान है। लेकिन याक़ूब अलैहिस्सलाम - इस तथ्य के साथ कि क़मीज़ फटी नहीं थी - उनका झूठ समझ गए। चुनाँचे उनसे कहा : मामला वैसा नहीं है, जैसा तुम बताया है। बल्कि तुम्हारे मन ने एक बुरे काम को सुंदर बनाकर पेश किया है, जिसे तुमने बना लिया है। अब मेरा काम बेहतर सब्र करना है, जिसमें कोई घबराहट नहीं। और यूसुफ़ का जो मामला तुम बता रहे हो, उसपर अल्लाह ही से सहायता अपेक्षित है।

Yusuf 12:19

उधर से गुज़रने वाला एक क़ाफ़िला आया और उन्होंने एक व्यक्ति को पानी लाने के लिए भेजा। उसने जैसे ही कुएँ में अपना डोल डाला, यूसुफ़ रस्सी पकड़कर लटक गए। जब डोल डालने वाले व्यक्ति ने उन्हें देखा, तो प्रसन्न होकर पुकार उठा : अरे, कितनी खुशी की बात है! यह तो एक लड़का है। फिर उसने और उसके कुछ साथियों ने मिलकर, उसे व्यापारिक माल समझकर क़ाफ़िले के दूसरे लोगों से छिपा लिया। और वे यूसुफ़ के साथ अपमान तथा ख़रीद-फ़रोख़्त का जो मामला कर रहे थे, अल्लाह उसे खूब जानने वाला है। उनके करतूतों में से कुछ भी उससे छिपा नहीं है।

Yusuf 12:20

पानी लाने वाले व्यक्ति तथा उसके साथियों ने उन्हें मिस्र के बाज़ार में सस्ते दाम में बेच दिय। वे मात्र कुछ दिरहम थे, जो कम होने के कारण आसानी से गिने जा सकते थे। और वे उन्हें महँगे दाम में बेचने के इच्छुक भी नहीं थे, क्योंकि वे उनसे जल्दी से छुटकारा पाने के लिए उत्सुक थे। उन्हें उनकी स्थिति से पता चल गया था कि वह कोई गुलाम नहीं हैं और वे उनके परिवार वालों की तरफ़ से अपने ऊपर डर महसूस करते थे। यह यूसुफ़ पर अल्लाह की अनंत कृपा थी, ताकि वह उनके साथ लंबे समय तक न रहें।

Yusuf 12:21

और मिस्र के जिस व्यक्ति ने उन्हें ख़रीदा था, उसने अपनी पत्नी से कहा : इसके साथ अच्छा व्यवहार करो, और हमारे साथ इसके ठहरने का अच्छा प्रबंध करो। हो सकता है यह हमारी कुछ आवश्यकताओं को पूरा करने में मददगार साबित हो अथवा हम इसे मुँह बोला बेटा बना लें। और जिस तरह हमने यूसुफ़ को हत्या से बचाया, कुएँ से निकाला और अज़ीज़ के दिल को उसके प्रति दयालु कर दिया; उसी तरह हमने उसे मिस्र में स्थापित किया और ताकि हम उसे स्वप्न की व्याख्या सिखाएँ। और अल्लाह अपने मामले पर हावी है। उसका आदेश लागू होकर रहता है। उसे कोई मजबूर करने वाला नहीं। परन्तु अधिकतर लोग - और वे काफ़िर लोग हैं - इस बात को नहीं जानते।

Yusuf 12:22

और जब यूसुफ़ शरीर की मज़बूती की आयु को पहुँच गए, तो हमने उन्हें समझ और ज्ञान प्रदान किया। और इसी प्रकार का प्रतिफल जो हमने उन्हें दिया, हम उन सदाचारियों को देते हैं, जो भली-भाँति अल्लाह की इबादत करते हैं।

Yusuf 12:23

अज़ीज़ की पत्नी ने नम्रता से और छल का सहारा लेकर यूसुफ़ अलैहिस्सलाम को कुकर्म पर आमादा करना चाहा और उन्हें बिलकुल एकांत में लेने के लिए द्वार बंद कर लिए और उनसे कहा: "आ जाओ, मेरे पास आओ।" तो यूसुफ़ ने उससे कहा : तू मुझे जिस चीज़ के लिए बुला रही है, मैं उससे अल्लाह की शरण में आता हूँ। मेरे स्वामी ने मुझे अपने पास बेहतर ढंग से ठहराया है। अतः मैं कभी उसके साथ विश्वासघात नहीं करूँगा। यदि मैंने उसके साथ विश्वासघात किया, तो मैं अत्याचारी हो जाऊँगा। निःसंदेह अत्याचारी लोग कभी सफल नहीं होते।

Yusuf 12:24

उस महिला का मन कुकर्म के लिए इच्छुक था। और यूसुफ़ के मन में भी ऐसी ही इच्छा उत्पन्न हो गई होती, यदि वह अल्लाह की उन निशानियों को न देख लेते, जो उन्हें बुराई से रोकने तथा दूर रखने का कारण बनीं। और हमने उन्हें यह सब इसलिए दिखाया, ताकि हम उनसे बुराई को दूर कर दें और उन्हें व्यभिचार तथा विश्वासघात से दूर रखें। यूसुफ़ हमारे उन बंदों में से हैं, जिन्हें हमने नुबुव्वत और रिसालत के लिए चुन लिया है।

Yusuf 12:25

वे दोनों दरवाज़े की ओर भागे : यूसुफ़ खुद को बचाने के लिए और वह औरत उन्हें बाहर जाने से रोकने के लिए। इसलिए उसने उन्हें बाहर जाने से रोकने के लिए उनका कुर्ता पकड़ लिया और उसे उसके पीछे से फाड़ दिया। और दोनों ने उस (महिला) के पति को दरवाज़े पर पाया। अज़ीज़ की पत्नी ने चाल चलते हुए अज़ीज़ से कहा : (ऐ अज़ीज़!) जिस व्यक्ति ने तेरी पत्नी के साथ कुकर्म का इरादा किया, उसकी सज़ा इसके सिवा और कुछ नहीं हो सकती कि उसे क़ैद कर दिया जाए, या उसे दर्दनाक सज़ा दी जाए।

Yusuf 12:26

यूसुफ़ अलैहिस्सलाम ने कहा : इसी ने मुझे कुकर्म करने को कहा था। मैंने उससे ऐसा नहीं चाहा था। ऐसे में उसके परिवार में से एक साक्षी उठ खड़ा हुआ और उसने यह कहकर गवाही दी : यदि यूसुफ़ का कुर्ता आगे से फटा है, तो यह उस स्त्री के सच्ची होने का संकेत है, क्योंकि वह उसे खुद से रोक रही थी, अतः वह (यूसुफ़) झूठा है।

Yusuf 12:27

और यदि यूसुफ़ का कुर्ता उसके पीछे से फाड़ा गया है, तो यह उनके सच्चे होने का सबूत है; क्योंकि वह उन्हें फुसला रही थी और वह उससे भाग रहे थे। इसलिए वह झूठी है।

Yusuf 12:28

चुनाँचे जब अज़ीज़ ने देखा कि यूसुफ़ अलैहिस्साम का कुर्ता पीछे की ओर से फटा हुआ है, तो उसके सामने यूसुफ़ की सच्चाई स्पष्ट हो गई। उसने कहा : तुम्हारा यूसुफ़ पर लगाया गया यह आरोप तुम औरतों के छल और फ़रेब का हिस्सा है। यक़ीनन तुम्हारा छल और फ़रेब बड़ा शक्तिशाली होता है।

Yusuf 12:29

और उसने यूसुफ़ से कहा : ऐ यूसुफ़! इस मामले को जाने दो और इसकी चर्चा किसी से न करना। और तू अपने पाप के लिए क्षमा माँग। क्योंकि यूसुफ़ को फुसलाने के कारण निश्चित रूप से तू ही पापियों में से है।

Yusuf 12:30

और उस (अज़ीज़ की पत्नी) की खबर शहर में फैल गई और महिलाओं के एक समूह ने निंदा के तौर पर कहा : अजीज की पत्नी अपने नौकर को रिझा रही है और उसका प्यार उसके दिल के अंदर तक पहुंच गया है। हम तो समझते हैं कि वह उसको रिझाने और उसके प्रति स्नेह और प्यार के कारण - जबकि वह उसका नौकर है - स्पष्ट गुमराही में पड़ चुकी है।

Yusuf 12:31

जब अज़ीज़ की पत्नी को उन स्त्रियों की उसकी निंदा करने और उसकी अनुपस्थिति में उसकी बुराई करने की बात पहुँची, तो उसने उन स्त्रियों को बुलवा भेजा, ताकि वे यूसुफ़ को देखें, फिर वे उसे मा'ज़ूर (क्षम्य) समझें। उसने उनके लिए बैठने की जगह तैयार की, जहाँ बिस्तर और गाव-तकिए लगवा दिए। फिर उसने आमंत्रित औरतों में से हर एक को खाना काटने के लिए एक-एक चाक़ू दिया और यूसुफ़ अलैहिस्सलाम से कहा : इनके सामने आ जाओ। चुनाँचे जब उन स्त्रियों ने उनकी ओर देखा, तो उन्हें बहुत बड़ा समझा और उनकी सुंदरता पर चकित रह गईं और उनकी ख़ूबसूरती को देखकर उनके होश उड़ गए और - उनके साथ आकर्षण की तीव्रता से - उन्होंने खाना काटने के लिए तैयार चाक़ू से अपने हाथों को घायल कर दिया और बोल उठीं : अल्लाह पवित्र है, यह लड़का मनुष्य नहीं है, क्योंकि इसमें जो सुंदरता है वह किसी इनसान में देखी नहीं गई। वह और कुछ नहीं बल्कि सम्माननीय फ़रिश्तों में से एक सम्मानित फ़रिश्ता है।

Yusuf 12:32

अज़ीज़ की पत्नी ने उन महिलाओं से कहा कि जब उसने देखा कि उनके साथ क्या हुआ है : यह वही नौजवान है, जिसके प्रेम के कारण तुमने मुझे ताना मारा था। मैंने ही उसे चाहा था और उसे प्रलोभित करने के लिए चाल चली थी, पर वह बच निकला। लेकिन अब यदि उसने वह नहीं किया जो मैं उसे करने के लिए कहूँगी, तो वह अवश्य जेल में प्रवेश करेगा और निश्चय ही वह ज़रूर अपमानित होगा।

Yusuf 12:33

यूसुफ़ अलैहिस्सलाम ने अपने पालनहार से प्रार्थना करते हुए कहा : ऐ मेरे पालनहार! जिस जेल की इसने मुझे धमकी दी है, वह मेरे निकट उस कुकर्म को करने से अधिक प्रिय है, जिसकी ओर ये स्त्रियाँ मुझे बुला रही हैं। यदि तूने इनके छल को मुझसे दूर नहीं किया, तो मैं इनकी ओर झुक जाऊँगा, और यदि मैं इनकी ओर झुक गया और उस चीज़ में उनका पालन किया जो वे मुझसे चाहती हैं, तो मैं अज्ञानियों में से हो जाऊँगा।

Yusuf 12:34

चुनाँचे अल्लाह ने उनकी प्रार्थना स्वीकार कर ली और अज़ीज़ की पत्नी के छल और नगर की स्त्रियों के छल को उनसे दूर कर दिया। निःसंदेह वह महिमावान व गौरवशाली अल्लाह यूसुफ़ की दुआ को तथा हर दुआ करने वाले की दुआ को सुनने वाला, तथा अनकी स्थिति और उनके सिवा अन्य की स्थिति को जानने वाला है।

Yusuf 12:35

फिर जब अज़ीज़ और उसके समुदाय के लोगों ने उनकी बेगुनाही का सबूत देखा, तो उनकी यह राय बनी कि उन्हें एक अज्ञात अवधि के लिए जेल में डाल दें। (ताकि वह मामला खुल न जाए)।

Yusuf 12:36

चुनाँचे उन्हें जेल में डाल दिया गया। उनके साथ जेल में दो युवक भी दाख़िल हुए थे। दोनों युवकों में से एक ने यूसुफ़ से कहा : मैंने सपने में देखा है कि मैं अंगूर निचोड़कर शराब बना रहा हूँ और दूसरे ने कहा : मैंने देखा कि मैं अपने सिर के ऊपर रोटी उठाए हुए हूँ जिससे पक्षी खा रहे हैं। ऐ यूसुफ़! हमें हमारे स्वप्न का अर्थ बताएं। हम देखते हैं कि आप बड़े नेक इनसान हैं।

Yusuf 12:37

यूसुफ़ अलैहिस्सलाम ने कहा : तुम्हारे लिए राजा या किसी अन्य की ओर से जो खाना आता है, उसके तुम्हारे पास आने से पहले ही मैं तुम्हें बता दूँगा कि उसकी सच्चाई क्या है और कैसे है। यह व्याख्या जो मैं जानता हूँ, उन बातों में से है, जो अल्लाह ने मुझे सिखाई है। यह अटकल भविष्यवाणी से या ज्योतिष से नहीं है। निःसंदेह मैंने ऐसे लोगों का धर्म छोड़ दिया, जो अल्लाह पर ईमान नहीं रखते और वे आख़िरत का इनकार करते हैं।

Yusuf 12:38

मैंने अपने बाप-दादाओं : इबराहीम, इसह़ाक़ और याक़ूब के धर्म का पालन किया है। और वह अल्लाह के प्रति एकेश्वरवाद (अर्थात अल्लाह को एकमात्र पूज्य मानने) का धर्म है। हमारे लिए सही नहीं है कि हम अल्लाह के साथ किसी को साझी ठहराएँ, जबकि वह एकेश्वरवाद में अकेला है। यह 'तौह़ीद' और ईमान जिसपर मैं और मेरे बाप-दादा क़ायम हैं, वह हमपर अल्लाह की कृपा है कि उसने हमें उसका सामर्थ्य प्रदान किया। तथा सभी लोगों पर उसकी कृपा है कि उसने उनके पास उस (तौह़ीद) के साथ नबियों को भेजा। लेकिन ज्यादातर लोग अल्लाह का उसकी नेमतों पर शुक्रिया अदा नहीं करते, बल्कि उसकी नाशुक्री करते हैं।

Yusuf 12:39

फिर यूसुफ़ अलैहिस्सलाम ने जेल के अंदर दोनों युवकों को संबोधित करते हुए कहा : क्या कई देवी-देवताओं की पूजा अच्छा है या एक अल्लाह की इबादत करना, जिसका कोई साझी नहीं, जो सब पर प्रभुत्वशाली है, जिसे पराजित नही किया जा सकता।

Yusuf 12:40

तुम अल्लाह के सिवा जिनकी इबादत करते हो, वे केवल नाम हैं, उनकी कोई वास्तविकता नहीं है। तुमने और तुम्हारे बाप-दादा ने उन्हें पूज्यों का नाम दे दिया है। उनका उलूहियत (देवत्व) में कोई हिस्सा नहीं है। अल्लाह ने तुम्हारे उन्हें पूज्यों का नाम देने का कोई प्रमाण नहीं उतारा है, जो उसकी वैधता को इंगित करता हो। सभी प्राणियों में केवल अल्लाह का आदेश चलता है, इन नामों का नहीं जो तुमने और तुम्हारे पूर्वजों ने रख लिए हैं। अल्लाह सर्वशक्तिमान ने आदेश दिया है कि तुम केवल उसी की इबादत करो और इस बात से मना किया है कि उसके साथ किसी को साझी बनाओ। यह तौहीद (एकेश्वरवाद) ही वह सीधा धर्म है, जिसमें कोई टेढ़ापन नहीं है। लेकिन अधिकतर लोग इस बात को नहीं जानते। इसलिए वे अल्लाह के साथ शिर्क करते हैं और उसके कुछ प्राणियों की पूजा करते हैं।

Yusuf 12:41

ऐ मेरे जेल के दोनों साथियो! जहाँ तक उसकी बात है, जिसने यह देखा कि वह शराब बनाने के लिए अंगूर निचोड़ रहा है, वह जेल से बाहर निकल जाएगा और अपने काम पर लौट आएगा और राजा को शराब पिलाएगा। और जहाँ तक उसकी बात है, जिसने यह देखा कि उसके सिर के ऊपर रोटी है, जिसे पक्षी खा रहे हैं, तो उसे क़त्ल कर दिया जाएगा और सूली पर चढ़ा दिया जाएगा। फिर पक्षी उसके सिर का मांस खाएँगे। तुमने जिस मामले के बारे में पूछा था, उसका फैसला हो चुका है। इसलिए वह अनिवार्य रूप से होकर रहेगा।

Yusuf 12:42

यूसुफ़ ने उन दोनों युवकों में से जिसके बारे में समझा था कि वह रिहा हो जाएगा (और वह राजा को शराब पिलाने वाला था) उससे कहा : राजा के पास मेरी कहानी और मेरे मामले का ज़िक्र करना; शायद वह मुझे जेल से निकाल दे। किन्तु शैतान ने शराब पिलाने वाले को राजा के पास यूसुफ़ का उल्लेख करना भुला दिया। इसलिए उसके बाद यूसुफ़ को कई वर्षों तक जेल में रहना पड़ा।

Yusuf 12:43

राजा ने कहा : मैंने सपने में देखा है कि सात मोटी गाएँ हैं, जिन्हें सात कमज़ोर गाएँ खा रही हैं। इसी तरह मैंने सात हरी बालियाँ और सात सूखी बालियाँ देखी हैं। ऐ प्रमुखो और गणमान्य लोगो! मुझे मेरे इस सपने का अर्थ बताओ, यदि तुम सपने का अर्थ जानने वाले हो।

Yusuf 12:44

उन लोगों ने कहा : आपका सपना, उलझे हुए सपनों का मिश्रण है। और जो ऐसा हो उसकी कोई व्याख्या नहीं है और हम मिश्रित सपनों की व्याख्या से अवगत नहीं हैं।

Yusuf 12:45

और दोनों क़ैदी युवकों में से रिहाई पाने वाले साक़ी (शराब पिलानेवाले व्यक्ति) ने, जिसे एक अवधि के बाद यूसुफ़ अलैहिस्सलाम और उनके सपने के अर्थ का ज्ञान रखने के बारे में याद आया, तो कहा : मैं आप लोगों को राजा के सपने का अर्थ एक ऐसे व्यक्ति से पूछने के बाद बता सकता हूँ, जिसके पास सपनों के अर्थ का ज्ञान है। इसलिए - ऐ राजा - मुझे यूसुफ़ के पास भेजें, ताकि वह आपके सपने का अर्थ बताएँ।

Yusuf 12:46

चुनाँचे जब रिहाई पाने वाला व्यक्ति यूसुफ़ के पास पहुँचा, तो उनसे कहा : ऐ यूसुफ़! ऐ सच्चे इनसान! हमें ऐसे व्यक्ति के सपने का अर्थ बताइँ, जिसने देखा कि सात मोटी गायों को सात दुबली गाएँ खा रही हैं, तथा उसने सात हरी बालियों और सात सूखी बालियों को देखा है। ताकि मैं राजा और उसके साथियों के पास वापस जाऊँ और वे राजा के सपने का अर्थ जान सकें। तथा वे आपकी प्रतिष्ठा और आपकी स्थिति जान सकें।

Yusuf 12:47

यूसुफ़ अलैहिस्सलाम ने इस सपने की व्याख्या करते हुए कहा : तुम लगातार सात सालों तक पूरी मेहनत के साथ खेती करोगे। अतः सात सालों में से हर साल जो भी फ़सल काटो, उसे कीड़ा लगने से बचाने के लिए उसकी बालियों में रहने दो। सिवाय थोड़े से अनाज के जिसे तुम्हें खाने के लिए ज़रूरत पड़े।

Yusuf 12:48

फिर उन सात उपजाऊ वर्षों के बाद, जिनमें तुम खूब खेती करोगे, सात अकाल वाले वर्ष आएँगे, जिनमें लोग उपजाऊ सालों में काटी हुए सारी फ़सलों को खा जाएँगे। सिवाय थोड़े से हिस्से के जिसे तुम बीज के तौर पर सुरक्षित कर लोगे।

Yusuf 12:49

फिर उन अकाल वाले सालों के बाद एक ऐसा साल आएगा जिसमें ख़ूब बारिश होगी और खेतियाँ उगेंगी, और लोग उन चीज़ों का रस निचोड़ेंगे, जिनका रस निचोड़ने की आवश्यकता होती है, जैसे कि अंगूर, ज़ैतून और ईख आदि।

Yusuf 12:50

जब राजा को पता चला कि यूसुफ़ ने उसके सपने का अर्थ बताया है, तो उसने अपने सहयोगियों से कहा : उसे जेल से बाहर निकालो और मेरे पास लाओ। लेकिन जब राजा का दूत यूसुफ़ के पास आया, तो उन्होंने उससे कहा : तुम अपने स्वामी राजा के पास वापस जाओ और उससे उन महिलाओं की कहानी के बारे में पूछो, जिन्होंने अपने हाथ घायल कर लिए थे, ताकि जेल से निकलने से पहले उनकी बेगुनाही स्पष्ट हो जाए। निःसंदेह, उन्होंने मुझे रिझाने का जो प्रयास किया था, उसे मेरा पालनहार जानता है। वह उससे छिपा नहीं है।

Yusuf 12:51

राजा ने स्त्रियों को संबोधित करते हुए कहा : उस समय तुम्हारा क्या मामला था, जब तुमने छल के द्वारा यूसुफ़ को अपने साथ कुकर्म करने के लिए प्रेरित करने की कोशिश की थी? स्त्रियों ने राजा के जवाब में कहा : अल्लाह न करे कि यूसुफ़ पर आरोप लगाया जाए, अल्लाह की क़सम! हमने उसमें कोई बुराई नहीं देखी। इसपर अज़ीज़ की पत्नी ने जो कुछ किया था, उसको स्वीकारते हुए कहा : अब सच्चाई सामने आ गई है, मैंने ही उसे बहकाने की कोशिश की थी, उसने मुझे फुसलाने की कोशिश नहीं की। निःसंदेह उसने मेरे लगाए हुए आरोप से निर्दोष होने का जो दावा किया है, उसमें वह बिल्कुल सच्चा है।

Yusuf 12:52

अज़ीज़ की स्त्री ने कहा : मैंने इस बात का इक़रार कि मैंने ही उसे रिझाया था और वह सच्चा है, इस उद्देश्य से किया है कि यूसुफ़ जान ले कि मैंने उसकी अनुपस्थिति में उसपर आरोप नहीं मढ़ा है। क्योंकि जो कुछ अब तक हुआ, उससे मेरे लिए यह स्पष्ट हो गया कि कि अल्लाह झूठ बोलने वाले और फ़रेब करने वाले को सफल नहीं करता।

Yusuf 12:53

और अज़ीज़ की स्त्री ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा : मैं खुद को बुराई की इच्छा से पाक नहीं ठहराती और न इससे मेरा उद्देश्य अपनी पवित्रता साबित करना था। क्योंकि इनसान के मन का मामला यह है कि वह इच्छाओं की ओर झुकाव रखने और उनसे बचना कठिन होने के कारण, बुराई का बहुत ज़्यादा आदेश देने वाला है। सिवाय उसके जिसपर अल्लाह दया करे और उसे बुराई का आदेश देने से सुरक्षित रखे। निश्चय मेरा पालनहार अपने तौबा करने वाले बंदों को क्षमा करने वाला और उनपर दया करने वाला है।

Yusuf 12:54

जब यूसुफ़ की बेगुनाही स्पष्ट हो गई और राजा को उसका ज्ञान हो गया, तो उसने अपने सहयोगियों से कहा : उन्हें मेरे पास लाओ। मैं उन्हें अपने लिए ख़ास कर लूँगा। चुनाँचे उन्हें राजा के पास लाया गया। फिर जब राजा ने उनसे बात की और उनका ज्ञान और बुद्धि उसके लिए स्पष्ट हो गई, तो उसने उनसे कहा : निश्चय (ऐ यूसुफ़!) आप आज हमारे यहाँ एक पद-प्रतिष्ठा वाले और विश्वसनीय व्यक्ति बन गए हैं।

Yusuf 12:55

यूसुफ़ ने राजा से कहा : मुझे मिस्र के देश में धन एवं अनाज के ख़ज़ानों के संरक्षण पर नियुक्त कर दीजिए, क्योंकि मैं एक विश्वसनीय कोषाध्यक्ष हूँ और जो ज़िम्मेदारी ले रहा हूँ उसका जानकार और समझ रखने वाला हूँ।

Yusuf 12:56

जिस तरह हमने यूसुफ़ पर निर्दोषता और जेल से मुक्ति के द्वारा उपकार किया, उसी तरह हमने उन्हें मिस्र की धरती में सशक्त बनाकर उनपर उपकार किया। वह जहाँ चाहें जाएँ और जहाँ चाहें रहें। हम इस दुनिया में अपने बंदों में से जिसे चाहते हैं, अपनी दया प्रदान करते हैं, और हम अच्छे कर्म करने वालों का सवाब बर्बाद नहीं करते, बल्कि उन्हें उसे बिना कमी के पूरा देते हैं।

Yusuf 12:57

निश्चय अल्लाह का बदला, जो उसने आख़िरत में तैयार किया है, उन लोगों के लिए दुनिया के बदले से बेहतर है, जो अल्लाह पर ईमान लाए और उसके आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर, उससे डरते रहे।

Yusuf 12:58

और यूसुफ़ के भाई अपने सामान लेकर मिस्र आए। जब वे उनके पास गए तो वह पहचान गए कि वे उनके भाई हैं, जबकि वे पहचान नहीं सके कि वह उनका भाई (यूसुफ़) है, क्योंकि काफ़ी समय बीत चुका था और उनकी शक्ल-सूरत भी बदल चुकी थी। क्योंकि जब उन्होंने यूसुफ़ को कुएँ में डाला था, तो वह बच्चे थे।

Yusuf 12:59

और जब यूसुफ़ ने उनको वह अनाज और खाद्य-सामग्री दे दी, जो उन्होंने माँगी और जब उन्होंने बताया कि उनका एक बाप-शरीक (सौतेला) भाई है, जिसे वे उसके पिता के पास छोड़ आए हैं, तो कहा : तुम अपने बाप शरीक भाई को मेरे पास ले आना, मैं तुम्हें एक ऊँट के भार का ग़ल्ला अधिक दूँगा। क्या तुम नहीं देखते कि मैं पूरी माप देता हूँ, उसमें कमी नहीं करता और मैं सबसे अच्छा मेहमान नवाज़ हूँ।

Yusuf 12:60

यदि तुम उसे मेरे पास नहीं लाए, तो तुम्हारा अपने इस दावे में झूठा होना स्पष्ट हो जाएगा कि तुम्हारा एक बाप शरीक भाई है। फिर मैं तुम्हें कभी भोजन नहीं दूँगा और तुम मेरे देश का रुख नहीं करना।

Yusuf 12:61

तो उनके भाइयों ने उन्हें उत्तर देते हुए कहा : हम उसके पिता से इसके लिए अनुरोध करेंगे और इसके लिए भरपूर प्रयास करेंगे। तथा आपने हमें जो आदेश दिया है, हम निश्चित रूप से उसे किसी लापरवाही के बिना अवश्य करने वाले हैं।

Yusuf 12:62

और यूसुफ़ ने अपने कार्यकर्ताओं से कहा : इन लोगों का धन इन्हें लौटा दो, ताकि वे अपनी वापसी पर जान सकें कि हमने उनसे यह नहीं खरीदा है। और यह उन्हें अपने भाई के साथ फिर से लौटने के लिए मजबूर करेगा, ताकि वे यूसुफ़ के सामने अपनी सच्चाई साबित करें और यूसुफ़ उनसे उनका धन स्वीकार कर लें।

Yusuf 12:63

जब वे अपने पिता के पास लौटे, और उन्हें बताया कि यूसुफ़ ने उनका किस तरह सम्मान किया है, तो उन्होंने कहा : हे हमारे पिता! हमारे अपने भाई को अपने साथ न लाने पर हमसे ग़ल्ले की आपूर्ति रोक दी गई है। इसलिए उसे हमारे साथ भेजें। क्योंकि यदि आप उसे हमारे साथ भेजते हैं, तो हमें ग़ल्ले का माप मिलेगा। और हम आपसे उसकी तब तक रक्षा करने की प्रतिज्ञा करते हैं जब तक कि वह आपके पास सुरक्षित रूप से वापस न आ जाए।

Yusuf 12:64

उनके पिता ने उनसे कहा : क्या मैं उसके बारे में तुमपर उसी तरह विश्वास करूँ, जिस तरह इससे पहले उसके सगे भाई यूसुफ़ के बारे में तुमपर विश्वास किया था?! मैंने उसके बारे में तुमपर भरोसा किया था, और तुमने उसकी रक्षा करने की प्रतिज्ञा की थी। लेकिन तुमने जो प्रतिज्ञा की थी, उसे पूरा नहीं किया। इसलिए मुझे उसकी रक्षा करने की तुम्हारी प्रतिज्ञा का कोई भरोसा नहीं है, बल्कि मेरा भरोसा केवल अल्लाह पर है। क्योंकि वह जिसकी रक्षा करना चाहे, उसका सबसे अच्छा रक्षक है और जिसपर दया करना चाहे, उसपर सबसे अधिक दया करने वाला है।

Yusuf 12:65

जब उन्होंने अपने लाए हुए अनाज की बोरियाँ खोलीं, तो देखा कि उसका दाम वापस कर दिया गया है। यह देखकर उन्होंने अपने पिता से कहा : इस सम्मान के बाद हमें इस अज़ीज़ से और क्या चाहिए? यह हमारे अनाज का दाम है, जिसे अज़ीज़ ने अपने अनुग्रह से हमें वापस कर दिया है। हम अपने घर वालों के लिए अनाज ले आएँगे और अपने भाई की उससे रक्षा करेंगे जिसका आपको भय है, और उसे साथ ले जाने के कारण एक ऊँट के बोझभर ग़ल्ला अधिक लाएँगे। क्योंकि अज़ीज़ के लिए एक ऊँट की माप बढ़ाना बहुत आसान है।

Yusuf 12:66

उनके पिता ने उनसे कहा : मैं उसे तुम्हारे साथ हरगिज़ नहीं भेजूँगा, यहाँ तक कि तुम मुझे अल्लाह का दृढ़ वचन दो कि उसे मेरे पास वापस लाओगे, सिवाय इस स्थिति के कि तुम सब को विनाश घेर ले और तुममें से कोई न बचे, और तुम उसे न रोकने में सक्षम हो और न ही वापस लौटने में। जब उन्होंने याक़ूब अलैहिस्सलाम को अल्लाह का दृढ़ वचन दे दिया, तो उन्होंने कहा : हम जो कुछ कह रहे हैं, उसपर अल्लाह गवाह है। इसलिए उसकी गवाही हमारे लिए पर्याप्त है।

Yusuf 12:67

और उनके पिता ने उन्हें वसीयत करते हुए कहा : तुम लोग मिस्र में एक साथ एक ही द्वार से प्रवेश न करना, बल्कि अलग-अलग दरवाज़ों से प्रवेश करना। यह सुरक्षा के दृष्टिकोण से अधिक उत्तम है, कि यदि कोई तुम्हें हानि पहुँचाना चाहे तो सब उसके शिकार न हो। मैं यह बात तुमसे इसलिए नहीं कह रहा हूँ कि तुमसे कोई ऐसा नुकसान दूर कर दूँ, जिससे अल्लाह तुम्हें पीड़ित करना चाहता है, या तुम्हें कोई ऐसा लाभ पहुँचा दूँ, जो अल्लाह नहीं चाहता है। क्योंकि फ़ैसला तो केवल अल्लाह का है और आदेश तो केवल उसी का चलता है। मैंने अपने सभी मामलों में अकेले उसी पर भरोसा किया है, और भरोसा करने वालों को अकेले उसी पर भरोसा करना चाहिए।

Yusuf 12:68

चुनाँचे वे चल पड़े। उनके साथ यूसुफ़ का सगा भाई भी था। जब वे अपने पिता के आदेशानुसार अलग-अलग दरवाजों से प्रवेश किए, तो उनका अलग-अलग दरवाजों से प्रवेश करना उनसे अल्लाह की उनपर नियत की हुई कोई चीज़ टालने वाला नहीं था। यह तो केवल याक़ूब अलैहिस्सलाम का अपने बेटों के प्रति स्नेह था, जिसे उन्होंने प्रकट कर दिया और उन्हें उसकी वसीयत कर दी। हालाँकि उन्हें खूब पता था कि अल्लाह के फैसले के अलावा कोई फैसला नहीं है। क्योंकि हमने उन्हें तक़दीर (भाग्य) पर ईमान रखने और कारणों को अपनाने की जो शिक्षा दी थे, उसका वह ज्ञान रखते थे। लेकिन अधिकांश लोग यह नहीं जानते हैं।

Yusuf 12:69

जब यूसुफ़ के भाई यूसुफ़ के पास आए, और उनके साथ यूसुफ़ का सगा भाई भी था, तो उन्होंने अपने सगे भाई को अपने साथ कर लिया और चुपके से उससे कहा : मैं तुम्हारा सगा भाई : यूसुफ़ हूँ। अतः उन धृष्ट और अविवेकपूर्ण कार्यों से दुःखी न हो, जो तुम्हारे भाई करते आए हैं, जैसे कष्ट देना, हमसे ईर्ष्या करना और मुझे कुएँ में फेंकना।

Yusuf 12:70

फिर जब यूसुफ़ ने अपने सेवकों को अपने भाइयों के ऊँटों पर ग़ल्ला लादने का आदेश दिया, तो राजा के मापने के बर्तन को जिससे ग़ल्ला लेने वालों को मापकर दिया करते थे, उनके ज्ञान के बिना अपने सगे भाई की बोरी में डाल दिया, ताकि वह उसे अपने पास रख सकें।। फिर जब वे अपने परिवार की ओर वापस लौटने के लिए निकलने पड़े, तो पीछे से एक आवाज़ देने वाले ने आवाज़ दी : ऐ अन्न से लदे हुए ऊँटों वालो! निश्चय तुम चोर हो।

Yusuf 12:71

यूसुफ़ के भाइयों ने पीछे से आवाज़ देने वाले और उसके साथियों की ओर मुतवज्जेह होकर कहा : तुम्हारी क्या चीज़ खो गई है कि हमपर चोरी का आरोप लगा रहे हो?

Yusuf 12:72

आवाज़ लगाने वाले और उसके साथियों ने यूसुफ़ के भाइयों से कहा : हमसे राजा का मापक खो गया है, जिससे मापकर देते हैं। जो व्यक्ति तलाशी से पहले राजा का मापक ले आएगा, उसे पुरस्कार दिया जाएगा और वह एक ऊँट के बोझभर ग़ल्ला है। और मैं उसके लिए इसकी गारंटी देता हूँ।

Yusuf 12:73

यूसुफ़ के भाइयों ने उनसे कहा : अल्लाह की क़सम! निश्चय तुम हमारी ईमानदारी और बेगुनाही को जान चुके हो, जैसा कि तुमने हमारी स्थितियों से देखा है। यक़ीन मानो हम मिस्र में बिगाड़ पैदा करने के लिए नहीं आए हैं, और हम अपने जीवन में कभी चोर नहीं थे।

Yusuf 12:74

आवाज़ देने वाले और उसके साथियों ने कहा : तुम्हारे यहाँ उसकी चोरी करने वाले का क्या दंड है, यदि तुम चोरी से बरी होने के अपने दावे में झूठे निकले?

Yusuf 12:75

यूसुफ़ के भाइयों ने उनसे कहा : हमारे यहाँ चोरी का दंड यह है कि जिसके सामान में चोरी का माल मिले, उसकी गरदन उस व्यक्ति के हवाले कर दी जाती है, जिसका माल चोरी हुआ है और वह उसे अपना ग़ुलाम बना लेता है। इस तरह ग़ुलाम बनाने के दंड के साथ हम चोरों को दंडित करते हैं।

Yusuf 12:76

चुनाँचे वे उनकी बोरियों की तलाशी के लिए उन्हें यूसुफ़ के पास वापस ले आए। यूसुफ़ ने योजना को गुप्त रखने के लिए, अपने सगे भाई की बोरी का निरीक्षण करने से पहले अपने सौतेले भाइयों की बोरियों की तलाशी लेनी शुरू की। फिर अंत में अपने सगे भाई की बोरी की तलाशी ली और उसमें से राजा का मापक निकाला। हमने जिस तरह यूसुफ़ को अपने भाई की बोरी में मापक रखने का उपाय सुझाया, उसी तरह हमने उसके लिए एक और उपाय किया कि उसके भाइयों ने चोर को दास बनाने के अपने देश के दंड संहिता को अपनाया। हालाँकि ऐसा संभव नहीं होता, यदि चोर के लिए राजा के दंड को लागू किया जाता, जो कि पिटाई करना और जुर्माना लगाना था। सिवाय इसके कि अल्लाह कोई और उपाय चाहता, क्योंकि वह उसका सामर्थ्य रखता है। हम अपने बंदों में से जिसके भी चाहते हैं, पद ऊँचे कर देते हैं, जैसे कि हमने यूसुफ़ का पद ऊँचा कर दिया। और हर ज्ञान वाले व्यक्ति के ऊपर, उससे अधिक ज्ञान वाला मौजूद है। और सभी लोगों के ज्ञान के ऊपर अल्लाह का ज्ञान है, जो सब कुछ जानता है।

Yusuf 12:77

यूसुफ़ के भाइयों ने कहा : यदि इसने चोरी की है, तो कोई आश्चर्य नहीं है। क्योंकि इसकी इस चोरी से पहले इसके एक सगे भाई ने भी चोरी की थी। उनका अभिप्रेत यूसुफ़ अलैहिस्सलाम थे। किंतु यूसुफ़ ने उनकी इस बात से अपने आहत होने को गुप्त रखा, और इसे उनके सामने प्रकट नहीं किया। उन्होंने अपने दिल में उनसे कहा : तुम जो ईर्ष्या रखते हो और पहले जो दुर्व्यवहार कर चुके हो, इस स्थान पर स्वयं वही बुराई है। और तुम जो यह मिथ्यारोपण कर रहे हो, अल्लाह उसे सबसे अधिक जानता है।

Yusuf 12:78

यूसुफ़ के भाइयों ने यूसुफ़ से कहा : ऐ अज़ीज़! इसका एक बहुत बूढ़ा बाप है, जो इससे बहुत प्रेम करता है। इसलिए हममें से किसी को इसके स्थान पर रख लीजिए। हम देखते हैं कि आप हमारे मामले तथा हमारे सिवा अन्य लोगों के मामले में उपकार करने वाले हैं। इसलिए हमपर यह उपकार कर दीजिए।

Yusuf 12:79

यूसुफ़ अलैहिस्सलाम ने कहा : इस बात से अल्लाह की शरण चाहते हैं कि हम एक अत्याचारी के अपराध के कारण एक निर्दोष पर अत्याचार करें और उसके अलावा किसी अन्य व्यक्ति को पकड़ ले, जिसकी बोरी में हमने राजा का मापक पाया है! यदि हमने ऐसा किया तो निश्चय हम अत्याचारी ठहरेंगे। क्योंकि हमने एक निर्दोष को दंडित किया और अपराधी को छोड़ दिया।

Yusuf 12:80

जब वे यूसुफ़ के उनके अनुरोध को स्वीकार करने से निराश हो गए, तो परामर्श करने के लिए लोगों से अलग हो गए। उनके बड़े भाई ने कहा : मैं तुम्हें याद दिलाता हूँ कि तुम्हारे पिता ने तुमसे अल्लाह का दृढ़ वचन लिया है कि तुम उनके बेटे को वापस ले आओगे, सिवाय इसके कि तुम्हें कोई ऐसी विपत्ति घेर ले, जिसे रोकने में तुम असमर्थ हो। तथा इससे पहले तुमने यूसुफ़ के बारे में कोताही की और उसके बारे में अपने पिता की प्रतिज्ञा पूरी नहीं की। इसलिए मैं मिस्र की धरती तब तक नहीं छोड़ूँगा, जब तक कि मेरे पिता मुझे अपने पास लौटने की अनुमति न प्रदान कर दें, या अल्लाह मेरे लिए मेरे भाई को लेने का फैसला न कर दे। और अल्लाह सब फैसला करने वालों से बेहतर है। क्योंकि वह सत्य और न्याय के अनुसार फैसला करता है।

Yusuf 12:81

और बड़े भाई ने कहा : अपने पिता के पास वापस जाओ और उनसे कहो : आपके बेटे ने चोरी की है। इसलिए अज़ीज़ -ए- मिस्र ने चोरी की सज़ा के तौर पर उसे दास बना लिया है। हम तो वही कह रहे हैं, जो हमने जाना है। क्योंकि हमने देखा है कि पैमाना उसी की बोरी से निकाला गया था। हमें क्या पता था कि वह चोरी करेगा। यदि पता होता, तो हम आपको उसे वापस लाने का वचन नहीं देते।

Yusuf 12:82

और हमारी सत्यता को सत्यापित करने के लिए (ऐ हमारे पिता!) मिस्र वासियों से पूझ लें, जहाँ हम थे और उस क़ाफ़िले वालों से पूछ लें, जिसके साथ हम आए हैं। वे सब आपको वही बताएँगे, जो हमने बताया है। निःसंदेह हमने आपको उसके चोरी करने की जो बात बताई है, उसमें हम बिलकुल सच्चे हैं।

Yusuf 12:83

उनके पिता ने उनसे कहा : तुमने उसके चोरी करने की जो बात बताई है, वास्तव में मामला वैसा नहीं है। बल्कि तुम्हारे दिलों ने तुम्हारे लिए इस बात को शोभित कर दिया है कि तुम उसके विरुद्ध भी उसी तरह चाल चलो, जिस तरह इससे पहले उसके भाई यूसुफ़ के विरुद्ध चाल चल चुके हो। इसलिए मेरा काम उत्तम सब्र करना है, जिसमें केवल अल्लाह ही से शिकायत है। उम्मीद है कि अल्लाह यूसुफ़, उसके सगे भाई और उनके बड़े भाई, सब को मेरे पास वापस ले आए। निःसंदेह वही पवित्र अल्लाह मेरे हाल से अवगत है और मेरे मामले के प्रबंधन में हिकमत वाला है।

Yusuf 12:84

वह उनसे मुँह फेरते हुए दूर हट गए और कहा : हाय मेरे दुःख की तीव्रता यूसुफ़ की जुदाई पर! और यूसुफ़ की जुदाई पर रोते-रोते उनकी आँखों के काले भाग सफ़ेद हो चुके थे। चुनाँचे उनका दिल शोक तथा दुःख से भरा हुआ था, वह अपने दुःख को लोगों से छिपाते थे।

Yusuf 12:85

यूसुफ़ के भाइयों ने अपने पिता से कहा : अल्लाह की क़सम! (ऐ हमारे पिता!) आप हमेशा यूसुफ़ को याद करते रहेंगे और उसके लिए शोक मनाते रहेंगे, यहाँ तक कि आप सख़्त बीमार हो जाएँ, या प्राण ही त्याग दें।

Yusuf 12:86

उनके पिता ने उनसे कहा : मैं जिस शोक और दुःख से पीड़ित हूँ उसकी शिकायत केवल अल्लाह से करता हूँ। और मैं अल्लाह की दया, उसके उपकार, परेशान हाल की दुआ क़बूल करने और पीड़ित को बदला देने के बारे में जो जानता हूँ, वह तुम नहीं जानते।

Yusuf 12:87

उनके पिता ने उनसे कहा : ऐ मेरे बेटो! जाओ और यूसुफ़ तथा उसके भाई की खबर के बारे में पता करो। और अल्लाह के अपने बंदों की परेशानी को दूर करने और राहत देने से निराश न हो। वास्तव में, केवल काफ़िर लोग ही अल्लाह के परेशानी को दूर करने और राहत देने से निराश होते हैं। क्योंकि वे अल्लाह की महान शक्ति और उसके अपने बंदों पर गुप्त अनुग्रह से अनभिज्ञ होते हैं।

Yusuf 12:88

उन्होंने अपने पिता के आदेश का पालन किया और यूसुफ़ तथा उनके भाई को ढूँढने के लिए निकल पड़े। चुनांचे जब यूसुफ़ के पास पहुँचे तो कहा : हम कठिनाई और गरीबी से पीड़ित हैं और थोड़ा-सा तुच्छ धन लेकर आए हैं। अतः हमें भरपूर माप दीजिए, जैसे इससे पहले हमें देते आए हैं। और उससे कुछ बढ़ाकर या हमारे तुच्छ धन को नज़र अंदाज़ करके, हमें दान दीजिए। निःसंदेह अल्लाह दान करने वालों को उत्तम बदला प्रदान करता है।

Yusuf 12:89

यूसुफ़ ने जब उनकी बात सुनी तो उनपर दया आ गई और दिल पसीज गया और उनसे अपनी पहचान करा दी। उनसे फरमाया : तुम जानते हो कि तुमने यूसुफ़ और उसके सगे भाई के साथ क्या किया था, जब तुम उसके परिणाम से अनभिज्ञ थे जो तुमने उन दोनों के साथ किया था?!

Yusuf 12:90

वे आश्चर्यचकित हो गए और बोले : क्या निश्चय आप ही यूसुफ़ हैं?! तो यूसुफ़ ने उनसे कहा : हाँ, मैं यूसुफ़ हूँ और यह, जिसे तुम मेरे साथ देख रहे हो, मेरा सगा भाई है। अल्लाह ने हमपर अनुग्रह किया है कि हमें उस चीज़ से मुक्ति दिलाई है, जिसमें हम थे और हमारे पद को ऊँचा कर दिया। निःसंदेह जो अल्लाह के आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर, उससे डरता है और विपत्ति पर धैर्य रखता है, तो उसका यह कार्य सदाचार में से है, और अल्लाह सदाचारियों का बदला नष्ट नहीं करता, बल्कि वह उनके लिए उसे सुरक्षित रखता है।

Yusuf 12:91

उनके भाइयों ने उनके साथ जो कुछ किया था उसके लिए क्षमायाचना करते हुए कहा : अल्लाह की क़सम! अल्लाह ने आपको पूर्णता के गुण प्रदान करके हमपर श्रेष्ठता प्रदान किया है। और हमने आपके साथ जो कुछ किया था, उसमें हम दोषी और अत्याचारी थे।

Yusuf 12:92

यूसुफ़ अलैहिस्सलाम ने उनकी क्षमायाचना को स्वीकार कर लिया और कहा : आज तुमपर कोई दोष नहीं है जिसके लिए तुम्हें दंडित करने या फटकार लगाने की आवश्यकता हो। मैं अल्लाह से प्रार्थना करता हूँ कि वह तुम्हें क्षमा करे। वह पवित्र अल्लाह दया करने वालों में सबसे अधिक दया करने वाला है।

Yusuf 12:93

चुनाँचे जब यूसुफ़ के भाइयों ने उन्हें बताया कि उनके पिता की आँखों की रोशनी चली गई है, तो उन्हें अपना कुर्ता दे दिया और कहा : मेरे इस कुर्ते को ले जाओ और इसे मेरे पिता के चेहरे पर डाल दो, उनकी आँखों की रोशनी लौट आएगी। फिर अपने तमाम घर वालों को मेरे पास ले आओ।

Yusuf 12:94

और जब क़ाफ़िला मिस्र से चल पड़ा और उसकी आबादियों से निकल गया, तो याक़ूब अलैहिस्सलाम ने अपने बेटों और अपने पास मौजूद लोगों से कहा : निश्चय मुझे यूसुफ़ की सुगंध आ रही है, यदि तुम मुझे नासमझ न समझो और यह न कहने लगो कि यह बहका हुआ बूढ़ा है। ऐसी बात करता है, जो खुद नहीं जानता।

Yusuf 12:95

उनके पास मौजूद उनके बेटों ने कहा : अल्लाह की क़सम! आप अभी भी अपने निकट यूसुफ़ की स्थिति और उन्हें फिर से देखने की संभावना के बारे में अपने पिछले भ्रम में हैं।

Yusuf 12:96

फिर जब याक़ूब के लिए ख़ुशियों भरी ख़बर लाने वाला व्यक्ति आया, उसने यूसुफ़ का कुर्ता उनके चेहरे पर डाल दिया, तो वह देखने लगे। तब उन्होंने अपने बेटों से कहा : क्या मैंने तुमसे कहा नहीं था कि मुझे अल्लाह की दया और उपकार की जो बातें मालूम हैं, तुम उन्हें नहीं जानते?

Yusuf 12:97

याक़ूब अलैहिस्सलाम के बेटों ने यूसुफ़ और उनके भाई के साथ जो कुछ किया था उसके लिए अपने बाप से माफ़ी माँगते हुए कहा : ऐ हमारे पिता! अल्लाह से हमारे पिछले पापों के लिए क्षमा माँगे। निश्चित रूप से हमने यूसुफ़ और उनके सगे भई के साथ जो कुछ किया था, उसमें हम गुनहगार और दोषी थे।

Yusuf 12:98

उनके पिता ने उनसे कहा : मैं अपने पालनहार से तुम्हारे लिए क्षमा माँगूँगा। निःसंदेह वही अपने तौबा करने वाले बंदों के पापों को माफ़ करने वाला, उनपर दया करने वाला है।

Yusuf 12:99

याक़ूब अलैहिस्सलाम और उनका परिवार मिस्र में यूसुफ़ के पास जाने के लिए निकल पड़ा। जब वे यूसुफ़ के पास पहुँचे, तो यूसुफ़ ने अपने माता-पिता को अपने से क़रीब कर लिया और अपने भाइयों तथा उनके परिजनों से कहा : अल्लाह की इच्छा से सुरक्षित व निश्चिंत मिस्र में प्रवेश करो, तुम्हें यहाँ कोई कष्ट नहीं होगा।

Yusuf 12:100

तथा उन्होंने अपने माता-पिता को उस सिंहासन पर बिठाया, जिस पर वह बैठते थे। और उनको उनके माता-पिता एवं ग्यारह भाइयों ने सजदा करके सलाम पेश किया। ज्ञात हो कि यह सम्मान का सजदा था, इबादत का नहीं। यह अल्लाह के आदेश की पूर्ति के रूप में था जैसा कि स्वप्न में दिखाया गया था। इसीलिए यूसुफ़ अलैहिस्सलाम ने अपने पिता से कहा : आप लोगों का यह मुझे सजदा करके अभिवादन करना, मेरे उस सपने का साकार रूप है, जिसे मैंने पहले देखा था और आपको बताया था। आज मेरे रब ने उसके घटित होने से उसे सच कर दिया। निश्चय मेरे पालनहार ने मुझपर उपकार किया, जब मुझे क़ैदखाने से निकाला और जब आपको देहात से यहाँ ले आया, जबकि शैतान ने मेरे और मेरे भाइयों के बीच बिगाड़ पैदा कर दिया था। निःसंदेह मेरा पालनहार जो चाहे, उसका उपाय करने में अत्यंत सूक्ष्म है। निःसंदेह वह अपने बंदों के हालात से पूरी तरह अवगत, अपने प्रबंधन में पूर्ण हिकमत वाला है।

Yusuf 12:101

फिर यूसुफ़ ने अपने पालनहार से दुआ की। कहा : ऐ मेरे रब! तूने मुझे मिस्र का राज्य प्रदान किया और मुझे सप्नों का अर्थ सिखाया। ऐ आकाशों और धरती के पैदा करने वाले तथा उन्हें किसी पूर्व नमूने के बिना बनाने वाले! तू ही सांसारिक जीवन में मेरे सभी मामलों का संरक्षक है, तथा आख़िरत में भी मेरे सभी मामलों संरक्षक है। मेरे जीवन के अंत में, मुझे एक मुसलमान के रूप में उठा और मुझे जन्नत के सबसे उच्च स्थान में मेरे बाप-दादाओं तथा अन्य लोगों में से सदाचारी नबियों के साथ मिला दे।

Yusuf 12:102

यूसुफ़ और उनके भाइयों की यह उल्लिखित कहानी, हम इसकी (ऐ रसूल) आपकी ओर वह़्य कर रहे हैं। आपको इसकी जानकारी नहीं थी। क्योंकि आप यूसुफ़ के भाइयों के पास मौजूद नहीं थे, जब उन्होंने यूसुफ़ को कुएँ के अंदर डालने का निर्णय किया था और इसके लिए एक बड़ी चाल चली थी। लेकिन हमने आपकी ओर इसकी वह़्य की।

Yusuf 12:103

और अधिकांश लोग हरगिज़ ईमान लाने वाले नहीं हैं, चाहे (ऐ रसूल) आप उनके ईमान के लिए हर संभव प्रयास कर लें। इसलिए आप उनपर अफ़सोस न करें।

Yusuf 12:104

यदि वे समझ-बूझ से काम लेते तो आप पर ईमान ले आते। क्योंकि (ऐ रसूल) आप उनसे क़ुरआन तथा धर्म प्रचार पर कोई पारिश्रमिक नहीं माँगते। क़ुरआन तो केवल सभी लोगों के लिए एक उपदेश (याददेहानी) है।

Yusuf 12:105

अल्लाह पाक के एकल पूज्य होने को दर्शाने वाली बहुत-सी निशानियाँ हैं, जो आकाशों तथा धरती में फैली हुई हैं, जिनपर से वे गुज़रते हैं, परंतु वे उन पर विचार करने और उनसे सीख लेने से उपेक्षा करने वाले होते हैं, उनपर कोई ध्यान नहीं देते हैं।

Yusuf 12:106

अधिकांश लोग अल्लाह पर यह ईमान नहीं रखते कि वह पैदा करने वाला, रोज़ी देने वाला, जीवन एवं मृत्यु देने वाला है, परंतु इस हाल में कि वे उसके साथ अन्य मूर्तियों और बुतों की पूजा करते हैं और यह दावा करते हैं कि अल्लाह का कोई बेटा है, अल्लाह इससे बहुत पवित्र है।

Yusuf 12:107

तो क्या ये मुश्रिक लोग इस बात से निश्चिंत हो गए हैं कि उनपर दुनिया में कोई सज़ा आ जाए, जो उन्हें ढाँक ले और वे उसे टाल न सकें, या उनपर अचानक क़ियामत आ जाए, और उन्हें उसके आने की भनक तक न लगे कि उसके लिए तैयारी कर लें। क्या इसी (निर्भय होने के) कारण ये लोग ईमान नहीं लाए?

Yusuf 12:108

(ऐ रसूल!) आप उससे कह दीजिए जिसे आप आमंत्रित करते हैं : यही मेरा मार्ग है जिसकी ओर मैं लोगों को आमंत्रित करता हूँ। मैं इसकी ओर स्पष्ट तर्क के साथ आमंत्रित करता हूँ, तथा मेरा अनुसरण करने वाले, मेरे मार्गदर्शन को ग्रहण करने वाले और मेरी सुन्नत (तरीक़े) का पालन करने वाले (भी) इसी की ओर आमंत्रित करते हैं। तथा अल्लाह पवित्र है उस चीज़ से जिसकी उसकी ओर निस्बत की गई है जो उसकी महिमा के योग्य नहीं है, या उसकी पूर्णता के विपरीत है और मैं अल्लाह का साझी ठहराने वालों में से नहीं हूँ। बल्कि, मैं उसके एकेश्वरवादियों में से हूँ।

Yusuf 12:109

(ऐ रसूल!) हमने आपसे पहले मानव जाति में से पुरुषों ही को (नबी बनाकर) भेजे, फरिश्तों को नहीं। हम उनकी ओर वह़्य करते थे, जैसे हमने आपकी ओर वह़्य की है। वे शहरों के लोगों में से थे, देहात वालों में से नहीं। उनके समुदायों ने उन्हें झुठलाया, तो हमने उन्हें नष्ट कर दिया। तो क्या आपको झुठलाने वाले ये लोग धरती में नहीं चले-फिरे कि विचार करते कि इनसे पहले झुठलाने वालों का अंत कैसा रहा और उनसे सीख प्राप्त करते?! और आख़िरत की नेमतें उन लोगों के लिए उत्तम हैं, जो दुनिया में अल्लाह से डरते रहे। तो क्या तुम नहीं समझते कि यह उत्तम है, इसलिए (तुम भी) अल्लाह से, उसके आदेशों का पालन करके (जिनमें सबसे महान ईमान है) और उसके निषेधों से बचकर (जिनमें सबसे बड़ा शिर्क है), डरने लगो।

Yusuf 12:110

हम इन रसूलों के दुश्मनों को मोहलत देते रहते हैं और इसी ढील के कारण उन्हें अज़ाब देने में जल्दी नहीं करते। यहाँ तक कि जब उन्हें विनाश करने में देरी हो गई और रसूल उनके विनाश से निराश हो गए और काफ़िरों को यक़ीन हो गया कि उनके रसूलों ने उनसे झुठलाने वालों के अज़ाब और मोमिनों की मुक्ति का जो वादा किया था, वह झूठा था; तो रसूलों के पास हमारी मदद आ गई और रसूलों तथा मोमिनों को झुठलाने वालों पर आने वाले विनाश से बचा लिया गया। और हमारा अज़ाब जब अपराधियों पर आ जाता है, तो उसे हटाया नहीं जाता है।

Yusuf 12:111

रसूलों की कहानियों और उनके समुदायों की कहानियों में, तथा यूसुफ़ अलैहिस्सलाम और उनके भाइयों की कहानियों में बड़ी सीख और उपदेश है, जिससे सद्बुद्धि वाले उपदेश ग्रहण करते हैं। इन कथाओं पर आधारित क़ुरआन कोई गढ़ा हुआ कलाम नहीं है, जो झूठ-मूठ अल्लाह की ओर मनसूब कर दिया गया हो। बल्कि यह अल्लाह की ओर से उतरने वाली दिव्य पुस्तकों की पुष्टि करने वाला, जिन शरई प्रावधानों और नियमों के विस्तृत होने की आवश्यकता है उनका विस्तृत विवरण, हर भलाई के लिए मार्गदर्शन और उसपर ईमान रखने वालों के लिए दया है। क्योंकि वही उसकी शिक्षाओं से लाभ उठाते हैं।

Ra'd 13:1

{अलिफ़॰ लाम॰ मीम॰ रा॰।} सूरतुल-बक़रा के आरंभ में इस प्रकार के अक्षरों के बारे में बात गुज़र चुकी है। इस सूरत की ये उच्च आयतें और क़ुरआन जिसे अल्लाह ने (ऐ रसूल!) आपपर उतारा है, वह सत्य हैं, जिसमें कोई संशय नहीं है, और इसमें कोई संदेह नहीं है कि यह अल्लाह की ओर से है। किंतु अधिकांश लोग हठ और अहंकार के कारण इसपर ईमान नहीं लाते।

Ra'd 13:2

अल्लाह वह है, जिसने खंभों के बिना आकाशों को ऊँचा बनाया, जिन्हें तुम देखते हो। फिर अर्श (सिंहासन) पर बुलंद हुआ, जैसा उसकी महिमा के योग्य है। हम उसके बुलंद होने की कोई दशा एवं स्थिति नहीं निर्धारित करते और न उसे किसी चीज़ के समान क़रार देते हैं। उसने सूर्य एवं चंद्रमा को अपनी सृष्टि के लाभों के लिए वशीभूत कर दिया। सूर्य और चंद्रमा में से प्रत्येक अल्लाह के ज्ञान में एक विशिष्ट अवधि के लिए चल रहा है। वह पाक अल्लाह आसमानों और धरती में पूर्ण मामले का जैसे चाहता है, संचालन करता है। वह अपनी शक्ति को दर्शाने वाली निशानियाँ खोल-खोलकर बयान करता है, ताकि तुम क़ियामत के दिन अपने रब से मिलने पर विश्वास कर लो, फिर उसके लिए अच्छे कार्यों के साथ तैयारी करने लगो।

Ra'd 13:3

वही अल्लाह है, जिसने धरती को फैलाया और उसमें मज़बूत पर्वत बनाए, ताकि धरती लोगों को लेकर हिलने-डुलने न लगे, तथा लोगों, उनके पशुओं और उनकी फसलों को पानी की आपूर्ति करने के लिए उसमें जल की नदियाँ बनाईं। और सभी तरह के फलों के उसने दो-दो प्रकार बनाए, जैसे कि पशु में नर और मादा। वह रात को दिन पर उढ़ा देता है, तो वह प्रकाशमान होने के बाद अंधेरा हो जाता है। निःसंदेह इस पूर्वोक्त में उन लोगों के लिए निशानियाँ और प्रमाण हैं, जो अल्लाह की रचना में सोच-विचार और चिंतन करते हैं। क्योंकि वही उन प्रमाणों और दलीलों से लाभान्वित होते हैं।

Ra'd 13:4

और धरती पर पास-पास विभिन्न भू-भाग हैं, और उसमें अंगूरों के बाग़ हैं, तथा उसमें खेती और खजूर के एक ही जड़ से कई तनों वाले पेड़ और एक जड़ से एकल तनों वाले खजूर के पेड़ भी हैं। इन बाग़ों और उन फ़सलों को एक ही पानी से सिंचित किया जाता है। और उनके परस्पर मिले हुए होने और एक ही पानी से सिंचित किए जाने के बावजूद, हम स्वाद और अन्य लाभों में उनमें से कुछ को कुछ पर श्रेष्ठता प्रदान करते हैं। निःसंदेह इस पूर्वोक्त में उन लोगों के लिए दलीलें और प्रमाण हैं, जो बुद्धि रखते हैं। क्योंकि वही उनसे सीख प्राप्त करते हैं।

Ra'd 13:5

(ऐ रसूल) यदि आप किसी चीज़ पर आश्चर्य करते हैं, तो आपके लिए सबसे अधिक आश्चर्य की बात उनका पुनर्जीवन का इनकार करना और इसके इनकार के तर्क के रूप में उनका यह कहना है : क्या जब हम मर जाएँगे और मिट्टी तथा सड़ी-गली हड्डियाँ हो जाएँगे, तो क्या हमें दोबारा जीवित किया जाएगा?! यही मृत्यु के बाद दोबारा जीवित किए जाने का इनकार करने वाले लोग हैं, जिन्होंने अपने पालनहार के साथ कुफ़्र किया, इसलिए मृतकों को पुनर्जीवित कर उठाने की उसकी शक्ति का इनकार कर दिया। और यही लोग हैं जिनके गले में क़ियामत के दिन आग की ज़ंजीरें डाली जाएँगी और यही दोज़ख़ वाले हैं, जो उसमें हमेशा के लिए रहने वाले हैं, न उनका विनाश होगा और न उनकी यातना ख़त्म होगी।

Ra'd 13:6

(ऐ रसूल!) मुश्रिक लोग आपसे यातना जल्दी माँग रहे हैं और उसके आने में देरी की शिकायत कर रहे हैं, इससे पहले कि वे अल्लाह के द्वारा उनके लिए निर्धारित नेमतों को पूरा करें। जबकि उनसे पहले उन्हीं जैसे झुठलाने वाले समुदायों पर यातनाएँ गुज़र चुकी हैं। फिर वे उनसे सीख क्यों नहीं लेते? और (ऐ रसूल!) निःसंदेह आपका पालनहार लोगों को, उनके अत्याचार के बावजूद, नज़र अंदाज़ करने वाला है। चुनाँचे वह उन्हें अज़ाब देने में जल्दी नहीं करता, ताकि वे अल्लाह के समक्ष तौबा कर लें। और निःसंदेह वह अपने कुफ़्र पर अडिग रहने वालों को, यदि वे तौबा न करें, निश्चित रूप से सख़्त सज़ा देने वाला है।

Ra'd 13:7

तथा अल्लाह का इनकार करने वाले (अपने इनकार और शत्रुता में अति करते हुए) कहते हैं : मुहम्मद पर उनके पालनहार की ओर से उस प्रकार की कोई निशानी क्यों नहीं उतारी गई, जो मूसा और ईसा पर उतारा गई थी? आप तो (ऐ नबी!) केवल एक डराने वाले हैं। आप लोगों को अल्लाह की यातना से डराते हैं। और आपके लिए केवल वही निशानी है, जो अल्लाह ने आपको प्रदान की है। और हर समुदाय के लिए एक नबी होता है, जो उन्हें सत्य के मार्ग पर ले जाता है, और उन्हें उसका मार्गदर्शन करता है।

Ra'd 13:8

अल्लाह जानता है जो कुछ हर मादा अपने पेट में उठाए होती है। वह उसके बारे में सब कुछ जानता है। तथा गर्भाशयों में जो कमी, वृद्धि, स्वास्थ्य और बीमारी होती है, उसे भी जानता है। और अल्लाह के निकट हर वस्तु की एक मात्रा निश्चित है, जिससे वह घट-बढ़ नहीं सकती।

Ra'd 13:9

क्योंकि अल्लाह उन सभी चीज़ों को जानता है, जो उसकी सृष्टि की इंद्रियों से अनुपस्थित हैं, तथा उन सभी चीज़ों को भी जानता है जिनका उनकी इंद्रियाँ बोध रखती हैं। वह अपनी विशेषताओं, नामों और कार्यों में महान है। अपने अस्तित्व और विशेषताओं के साथ अपने प्रत्येक प्राणी से ऊँचा है।

Ra'd 13:10

वह भेद और छिपे हुए को जानता है। (ऐ लोगो!) तुममें से जो व्यक्ति बात को छिपाता है और जो इसकी घोषणा करता है, दोनों उसके ज्ञान में बराबर हैं। इसी तरह जो रात के अंधेरे में लोगों की आँखों से छिपा हुआ है और जो दिन के उजाले में अपने कार्यों से स्पष्ट है, सब उसके ज्ञान में बराबर हैं।

Ra'd 13:11

सर्वशक्तिमान अल्लाह के कुछ फ़रिश्ते ऐसे हैं, जो इनसान के पास बारी-बारी आते हैं। उनमें से कुछ रात में आते हैं, और कुछ दिन के दौरान। वे अल्लाह के आदेश से इनसान की उन समस्त विपत्तियों से रक्षा करते हैं, जिनसे इनसान के बचाव का अल्लाह ने फ़ैसला कर रखा होता है। तथा वे इनसान की बातों और कार्यों को लिखते हैं। निःसंदेह अल्लाह किसी समुदाय की दशा को एक अच्छी स्थिति से उसके विपरीत एक अप्रिय स्थिति में नहीं बदलता, जब तक कि वे अपने स्वयं के धन्यवाद (शुक्र) की स्थिति को न बदल लें। और जब अल्लाह किसी क़ौम को विनष्ट करना चाहता है, तो उसके इरादे को कोई टाल नहीं सकता। और (ऐ लोगो!) तुम्हारा अल्लाह के सिवा कोई संरक्षक नहीं है, जो तुम्हारे मामलों का संरक्षण कर सके, कि तुम अपनी विपत्ति को दूर करने के लिए उसका सहारा ले सको।

Ra'd 13:12

वही है जो तुम्हें (ऐ लोगो!) बिजली दिखाता है, और उसके द्वारा तुम्हारे लिए चिर्री का भय और वर्षा की आशा इकट्ठा कर देता है। तथा वही है जो तुम्हारे लिए भारी वर्षा के पानी से भरा हुआ बादल पैदा करता है।

Ra'd 13:13

और बिजली की कड़क अपने पालनहार की प्रशंसा के साथ उसकी पवित्रता का गान करती है और फ़रिश्ते अपने पालनहार की पवित्रता का गुणगान उसके भय से तथा उसके प्रताप और सम्मान में करते हैं। और अल्लाह अपने प्राणियों में से जिसपर चाहता है, जलाने वाली बिजलियाँ भेजकर उसे विनष्ट कर देता है। जबकि काफ़िर लोग अल्लाह की एकता (एकेश्वरवाद) के विषय में झगड़ते हैं, और अल्लाह बहुत समर्थ और शक्तिशाली है। अतः वह जो चीज़ भी चाहता है, उसे कर गुज़रता है।

Ra'd 13:14

केवल अल्लाह ही के लिए तौह़ीद (एकेश्वरवाद) की पुकार है, जिसमें उसका कोई साझी नहीं है। और जिन मूर्तियों को मुश्रिक लोग अल्लाह को छोड़कर पुकारते हैं, वे किसी भी मामले में उन्हें पुकारने वाले की पुकार का जवाब नहीं देतीं। उनका उन मूर्तियों को पुकारना एक प्यासे की तरह है, जो पानी की ओर अपना हाथ फैलाता है, ताकि वह उसके मुँह तक पहुँच जाए और वह उसे पी ले। हालाँकि पानी उसके मुँह तक कभी भी पहुँचने वाला नहीं। दरअसल काफ़िरों का अपनी मूर्तियों को पुकारना व्यर्थ है और सही से दूर है। क्योंकि वे उन्हें न कोई लाभ पहुँचा सकती हैं और न कोई हानि दूर कर सकती हैं।

Ra'd 13:15

आकाशों और धरती में जो भी हैं, सब अकेले अल्लाह ही को सजदा करते हैं। इसमें मोमिन और काफ़िर बराबर हैं। सिवाय इसके कि मोमिन उसके सामने स्वेच्छा से झुकता और सजदा करता है। जबकि काफ़िर न चाहते हुए भी उसके सामने झुकने पर मजबूर होता है। तथा उसकी प्रकृति उसे उसके सामने स्वेच्छा से झुकने के लिए निर्देश देती है। और प्राणियों में से जिसकी भी परछाई है, उसकी परछाई दिन की शुरुआत और उसके अंत में उसी के अधीन होती है।

Ra'd 13:16

(ऐ रसूल!) अल्लाह के साथ दूसरों की पूजा करने वाले काफ़िरों से कह दें : आकाशों और धरती को पैदा करने वाला और उनके मामलों का व्यवस्थापक कौन है? (ऐ रसूल!) कह दें : अल्लाह ही उनका पैदा करने वाला और उनके मामले का प्रबंध करने वाला है और तुम इस बात को स्वीकार करते हो। (ऐ रसूल!) उनसे कह दें : क्या तुमने अल्लाह को छोड़कर अपने लिए ऐसे विवश सहायक बना रखे हैं, जो खुद अपने लिए न कोई लाभ ला सकते हैं और न कोई नुक़सान दूर सर सकते हैं, तो वे दूसरों के लिए ऐसा कहाँ से कर सकते हैं? (ऐ रसूल!) उनसे कह दीजिए : क्या काफ़िर जो दृष्टि से अंधा है और मोमिन जो द्रष्टा और मार्गदर्शित है, दोनों बराबर हो सकते हैं? या क्या कुफ़्र जो अंधकार है और ईमान जो रोशनी है, दोनों बराबर हो सकते हैं? क्या उन लोगों ने पैदा करने के मामले में कुछ ऐसे लोगों को अल्लाह का साझी बना रखा है, जिन्होंने अल्लाह के पैदा करने की तरह कुछ पैदा किया है, जिसके कारण उनके लिए अल्लाह की रचना उनके साझियों की रचना के साथ गडमड हो गई है? (ऐ रसूल!) उनसे कह दीजिए : केवल अल्लाह ही हर चीज़ का पैदा करने वाला है। पैदा करने में उसका कोई साझी नहीं है। और वही अकेला पूज्य है, जो एकमात्र इबादत किए जाने का हक़दार है, हर चीज़ पर प्रभुत्वशाली है।

Ra'd 13:17

अल्लाह ने असत्य के मिटने और सत्य के बाक़ी रहने का एक उदाहरण आकाश से उतरने वाली बारिश के पानी के साथ दिया है, जिसके साथ घाटियाँ, अपने-अपने छोटे या बड़े आकार के अनुसार, बह निकलीं। फिर इस रेले ने झाग और कूड़ा पानी के ऊपर उठा लिया। अल्लाह ने सत्य और असत्य का एक दूसरा उदाहरण कुछ क़ीमती धातुओं के साथ दिया है, जिन्हें लोग पिघलाकर ज़ेवर बनाने के लिए तपाते हैं। तो इसका झाग इसके ऊपर आ जाता है, जिस तरह कि उसका झाग उसके ऊपर होता है। इन दो उदाहरणों के साथ, अल्लाह सत्य और असत्य के उदाहरण प्रस्तुत करता है। चुनाँचे असत्य जल पर तैरते हुए मैल और झाग की तरह तथा उस ज़ंग (मोरचे) के समान है, जो धातु को तपाने से अलग हो जाता है। जबकि सत्य शुद्ध जल के समान है जिसमें से पिया जाता है, और वह फल, चारा और घास उगाता है, तथा उस धातु के समान है जो पिघलाने के बाद बचता है, जिससे लोग लाभान्वित होते हैं। जिस तरह अल्लाह ने ये दो उदाहरण दिए हैं, वैसे ही अल्लाह लोगों के लिए उदाहरणों को प्रस्तुत करता रहता है, ताकि असत्य से सत्य स्पष्ट हो जाए।

Ra'd 13:18

जिन लोगों ने अपने पालनहार की बात मान ली, जो उसने उन्हें अपने एकत्व (एकेश्वरवाद) और आज्ञापालन के लिए आमंत्रित किया, उनके लिए सबसे अच्छा बदला है और वह जन्नत है। और काफ़िर लोग जिन्होंने अपने पालनहार की तौहीद तथा आज्ञापालन के आमंत्रण को स्वीकार नहीं किया, यदि ऐसा हो जाए कि दुनिया का सारा धन उनके पास आ जाए और इसके साथ उनके पास इसके बराबर और भी धन आ जाए, तो वे अपने आपको अज़ाब से छुड़ाने के लिए वह सारा धन अवश्य खर्च कर देंगे। अल्लाह के आमंत्रण को स्वीकार न करने वाले इन लोगों से उनके सभी पापों का हिसाब लिया जाएगा। और उनका निवास जिसमें वे रहेंगे, जहन्नम है। और उनका बिस्तर तथा ठिकाना जो कि आग है, बहुत बुरा है।

Ra'd 13:19

वह आदमी जो जानता है कि अल्लाह ने जो कुछ (ऐ रसूल) आप पर अपनी ओर से उतारा है, वही सत्य है, जिसमें कोई संदेह नहीं है, और वह अल्लाह के आमंत्रण को स्वीकार करने वाला मोमिन व्यक्ति है, उस व्यक्ति के समान नहीं हो सकता, जो अंधा है और वह अल्लाह के आमंत्रण को स्वीकार ने करने वाला काफ़िर व्कायक्ति है। तथ्य यह है कि इससे सद्बुद्धि वाले लोग ही सीख लेते और उपदेश ग्रहण करते हैं।

Ra'd 13:20

जिन लोगों ने अल्लाह का आमंत्रण स्वीकार किया, वे ऐसे लोग हैं जो अल्लाह के साथ की हुई प्रतिज्ञा या उसके बंदों के साथ की हुई प्रतिज्ञा को पूरा करते हैं। तथा अल्लाह के साथ या उसके अलावा के साथ की हुई दृढ़ प्रतिज्ञाओं को नहीं तोड़ते।

Ra'd 13:21

और वे ऐसे लोग हैं, जो उन सभी रिश्तों-नातों को जोड़ते हैं, जिन्हें जोड़ने का अल्लाह ने आदेश दिया है, और वे अल्लाह का ऐसा भय रखते हैं, जो उन्हें अल्लाह के आदेशों का पानल करने और उसके निषेधों से बचने के लिए प्रेरित करता है, तथा उन्हें डर है कि कहीं अल्लाह उनके किए हुए प्रत्येक पाप का हिसाब न ले। क्योंकि जिसके हिसाब में एक-एक चीज़ की पड़ताल की गई, उसका सर्वनाश हो जाएगा।

Ra'd 13:22

और वे ऐसे लोग हैं, जिन्होंने अल्लाह की प्रसन्नता के लिए अल्लाह के आज्ञापालन पर तथा अल्लाह ने जो कुछ अच्छा या बुरा उनपर नियत किया है, उसपर सब्र किया और अल्लाह की अवज्ञा से रुक गए, और संपूर्ण रूप से नमाज़ अदा किया, तथा हमारे दिए हुए धन से अनिवार्य हुक़ूक़ (अधिकार) का भुगतान किया, और उसमें से कभी दिखावे से बचने के लिए चुपके से स्वेच्छिक दान दिया और कभी खुले तौर पर दान किया ताकि दूसरे लोग उनका अनुकरण करें, तथा उनके साथ जो दुर्व्यवहार करे उसकी बुराई को उसके साथ अच्छा व्यवहार करके दूर करते हैं। इन विशेषताओं से विशेषित लोगों के लिए क़ियामत के दिन अच्छा परिणाम है।

Ra'd 13:23

यह अच्छा परिणाम ऐसे बाग़ हैं, जिनमें वे स्थायी रूप से समृद्धिपूर्वक रहेंगे। उसमें उनकी नेमत की पूर्ति इससे होगी कि उसमें उनके साथ उनके बाप-दादाओं, माताओं, पत्नियों और संतानों में से नेक लोग भी प्रवेश करेंगे। ताकि उनसे मुलाक़ात के द्वारा उनके आनंद को पूरा कर दिया जाए। और जन्नत में फ़रिश्ते उनके घरों के सभी द्वारों से बधाई देते हुए उनके पास आएँगे।

Ra'd 13:24

फ़रिश्ते जब भी उनके पास आएँगे, उनका यह कहते हुए अभिवादन करेंगे : तुमपर सलाम (शांति) हो! अर्थात् : तुम अल्लाह के आज्ञापालन और उसके कष्टदायक फैसलों पर धैर्य से काम लेने, और उसकी अवज्ञा से बचने के कारण विपत्तियों से सुरक्षित रहो। तो क्या ही अच्छा है इस घर का परिणाम, जो तुम्हें प्राप्त हुआ है।

Ra'd 13:25

और जो लोग अल्लाह की प्रतिज्ञा को उसे दृढ़ करने के बाद तोड़ देते हैं, और उन रिश्तों-नातों को काटते हैं, जिन्हें अल्लाह ने जोड़ने का आदेश दिया है, तथा अल्लाह तआला की अवज्ञा करके धरती में उत्पात मचाते हैं। यही अभागे (दुर्भाग्यशाली) लोग हैं, जिनके लिए अल्लाह की दया से निष्कासन है और उनके लिए बुरा परिणाम है, जो कि नरक है।

Ra'd 13:26

अल्लाह अपने बंदों में से जिसके लिए चाहता है, उसकी रोज़ी में विस्तार कर देता है और जिस पर चाहता है, तंग कर देता है। रोज़ी का विस्तार सौभाग्य और अल्लाह के प्रेम की निशानी नहीं है, और न ही उसका तंग होना दुर्भाग्य की निशानी है। और काफ़िर लोग दुनिया ही के जीवन पर प्रसन्न हैं। इसलिए उसकी ओर झुक गए हैं और उसी पर संतुष्ट हो गए हैं। हालाँकि दुनिया क जीवन आख़िरत के मुक़ाबले में थोड़े-से सामान के सिवा कुछ नहीं है, जो समाप्त हो जाने वाला है।

Ra'd 13:27

अल्लाह और उसकी निशानियों का इनकार करने वाले कहते हैं : मुह़म्मद पर उनके पालनहार की ओर से कोई साक्षात निशानी क्यों नहीं उतारी गई, जो उनकी सच्चाई को इंगित करती, फिर हम उनपर ईमान ले आते। (ऐ रसूल!) आप इन प्रस्ताव रखने वालों से कह दें : अल्लाह जिसे चाहता है, अपने न्याय के अनुसार गुमराह करता है। और अपनी कृपा से उसका अपनी ओर मार्गदर्शन करता है, जो उसकी ओर तौबा के साथ लौटता है। तथा मार्गदर्शन उनके हाथ में नहीं है कि वे उसे निशानियाँ उतारने के साथ जोड़ें।

Ra'd 13:28

ये लोग जिन्हें अल्लाह मार्गदर्शन प्रदान करता है, वे हैं जो ईमान लाए, और उनके दिलों को अल्लाह को याद करने; उसकी पवित्रता का गान करने और उसकी स्तुति व प्रशंसा करने, तथा उसकी किताब की तिलावत करने और उसे सुनने से और इसके अलावा अन्य प्रकार के स्मरण से चैन और आराम मिलता है। सुन लो! केवल अल्लाह को याद करने ही से दिलों को आराम मिलता है। यही दिलों के लायक़ है।

Ra'd 13:29

और ये लोग जो अल्लाह पर ईमान लाए और ऐसे अच्छे कार्य किए, जो उन्हें अल्लाह से क़रीब लाते हैं, उनके लिए आख़िरत में एक अच्छा जीवन है तथा उनके लिए अच्छा परिणाम है, जो कि जन्नत है।

Ra'd 13:30

जिस तरह हमने पिछले नबियों को उनके समुदायों की ओर भेजा था, वैसे ही हमने आपको (ऐ रसूल!) आपके समुदाय की ओर भेजा है; ताकि आप उन्हें वह क़ुरआन पढ़कर सुनाएँ, जो हमने आपकी ओर वह़्य की है। क्योंकि वह आपकी सच्चाई को प्रमाणित करने के लिए काफ़ी है। लेकिन आपके समुदाय का हाल यह है कि वे इस निशानी का इनकार करते हैं। क्योंकि वे 'रहमान' (अत्यंत दयावान्) पर अविश्वास करते हैं, जब वे उसके साथ उसके अलावा को साझी बनाते हैं। (ऐ रसूल!) आप उनसे कह दीजिए : वह 'रहमान' (अत्यंत दयावान् हस्ती) जिसके साथ तुम उसके अलावा को साझी बनाते हो, वही मेरा पालनहार है, जिसके अलावा कोई सत्य पूज्य नहीं। मैंने अपने सभी मामलों में उसी पर भरोसा किया है और उसी की ओर मेरा लौटना है।

Ra'd 13:31

यदि ईश्वरीय किताबों में से किसी किताब की यह विशेषता होती कि उसके द्वारा पहाड़ों को उनके स्थानों से हटा दिया जाता, या उसके द्वारा धरती को फाड़ दिया जाता और वह नदियों और जल-स्रोतों में बदल जाती, या उसे मुर्दों पर पढ़ा जाता और वे जीवित हो जाते - तो वह अवश्य (ऐ रसूल!) आप पर अवतरित किया गया यह क़ुरआन होता। क्योंकि यह किताब स्पष्ट प्रमाण वाली और महान प्रभाव वाली है, यदि वे साफ़-सुथरे हृदय के मालिक होते, लेकिन वे इनकार करने वाले हैं। बल्कि चमत्कारों आदि के उतारने का सारा काम अल्लाह के अधिकार में हैं। तो क्या अल्लाह पर ईमान रखने वालों ने नहीं जाना कि यदि अल्लाह चमत्कार उतारे बिना ही समस्त लोगों को हिदायत देना चाहता, तो अवश्य उन्हें उसके बिना ही हिदायत दे देता? लेकिन उसने ऐसा नहीं चाहा। तथा अल्लाह का इनकार करने वालों पर उनके कुफ़्र तथा पापों के कारण हमेशा कोई सख़्त आपदा आती रहेगी, जो उनकी शांति भंग कर देगी, या वह आपदा उनके घर के निकट उतरेगी, यहाँ तक कि निरंतर यातना उतरने का अल्लाह का वादा आ जाए। निश्चय अल्लाह अपने वादे को पूरा करना नहीं छोड़ता है, जब उसका नियत समय आ जाए।

Ra'd 13:32

आप पहले रसूल नहीं हैं, जिसे उसके समुदाय ने झुठलाया और उसका मज़ाक़ उड़ाया है। (ऐ रसूल) आपसे पहले भी कई समुदायों ने अपने रसूलों का मज़ाक़ उड़ाया और उन्हें झुठलाया है। तो मैंने उन लोगों को मोहलत दी जिन्होंने अपने रसूलों को झुठलाया था, यहाँ तक कि उन्हें विश्वास हो गया कि मैं उन्हें नष्ट करने वाला नहीं हूँ। फिर मैंने मोहलत के बाद उन्हें तरह-तरह की यातना से ग्रस्त कर दिया, तो आपने उनके लिए मेरी सज़ा को कैसा पाया? निश्चय वह एक कड़ी सज़ा थी।

Ra'd 13:33

तो क्या जो सभी सृष्टि की जीविका के संरक्षण का ज़िम्मेदार, हर प्राणी के कार्यों की निगरानी करने वाला है, चुनाँचे वह उसे उसके कार्यों का बदला देगा, वह उपासना किए जाने के अधिक योग्य है, या ये मूर्तियाँ जिन्हें इस बात का कोई अधिकार नहीं कि उनकी पूजा की जाए? हालाँकि काफ़िरों ने उन्हें अन्यायपूर्वक और झूठमूठ अल्लाह का साझी बना लिया है। (ऐ रसूल!) आप उनसे कह दें : तुम हमें उन साझियों के नाम बताओ, जिनकी तुमने अल्लाह के साथ पूजा की है, यदि तुम अपने दावे में सच्चे हो। या क्या तुम अल्लाह को ऐसे साझियों के बारे में बता रहे हो, जिन्हें वह धरती में नहीं जानता? या फिर तुम उसे एक ऊपरी बात बता रहे हो, जिसमें कोई सच्चाई नहीं है? बल्कि, शैतान ने इनकार करने वालों की नज़र में उनके छल को सुंदर बना दिया है, जिसके कारण वे अल्लाह का इनकार कर बैठे हैं और शैतान ने उन्हें हिदायत के रास्ते से हटा दिया है। और जिसे अल्लाह हिदायत के मार्ग से दूर कर दे, उसके लिए कोई मार्गदर्शक नहीं, जो उसका मार्गदर्शन कर सके।

Ra'd 13:34

इस सांसारिक जीवन ही में उनके लिए यातना है कि उन्हें मोमिनों के हाथों क़त्ल एवं क़ैद का सामना करना पड़ेगा। जबकि आख़िरत की यातना जो उनकी प्रतीक्षा कर रही है, उनके लिए दुनिया की यातना से अधिक कठोर और भारी है। क्योंकि उसमें तीव्रता और निर्बाध स्थायित्व होगा। और उन्हें क़ियामत के दिन अल्लाह की यातना से कोई बचाने वाला भी न होगा।

Ra'd 13:35

उस जन्नत की विशेषता जिसका अल्लाह ने उन लोगों से वादा किया है, जो उसके आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर उससे डरने वाले हैं, यह है कि उसके महलों और पेड़ों के नीचे से नहरें बहती हैं, उसके फल, दुनिया के फलों के विपरीत, स्थायी हैं, जो कभी खत्म नहीं होंगे और उसकी छाया भी स्थायी है, जो न कभी समाप्त होगी और न छोटी होगी। यही उन लोगों का परिणाम है, जो अल्लाह के आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर उससे डरते रहे। और काफ़िरों का परिणाम आग है, जिसमें वे प्रवेश करेंगे और हमेशा के लिए उसी में रहेंगे।

Ra'd 13:36

जिन यहूदियों को हमने तौरात दी और जिन ईसाइयों को हमने इंजील दी, वे उस (क़ुरआन) से प्रसन्न होते हैं, जो (ऐ रसूल!) आपपर उतारा गया है; क्योंकि वह उनकी पुस्तकों की कुछ बातों से सहमति रखता है। तथा यहूदियों और ईसाइयों के संप्रदायों में से कुछ लोग आपकी ओर अवतिरत पुस्तक के कुछ भाग का इनकार करते हैं, जो उनकी इच्छाओं से मेल नहीं खाता, या जो उनके परिवर्तन और विकृति को उजागर करता है। (ऐ रसूल!) आप उनसे कह दें : अल्लाह ने मुझे आदेश दिया है कि मैं केवल उसी की इबादत करूँ और उसके साथ उसके अलावा को साझी न बनाऊँ। मैं केवल उसी की ओर बुलाता हूँ और उसके अलावा किसी और की ओर नहीं बुलाता। और केवल उसी की ओर मेरा लौटना है। तौरात और इंजील ने भी यही शिक्षा दी है।

Ra'd 13:37

और जैसे हमने पिछली पुस्तकों को उनके समुदायों की भाषा में उतारा था, उसी प्रकार हमने (ऐ रसूल!) आपपर क़ुरआन को अरबी भाषा में सच्चाई को स्पष्ट करने वाला एक निर्णायक फ़रमान बनाकर उतारा है। और यदि (ऐ रसूल!) आपने अपने पास उस ज्ञान के आ जाने के पश्चात जो अल्लाह ने आपको सिखाया है, किताब वालों की इच्छाओं का पालन किया उनके उस चीज़ को हटाने की सौदेबाज़ी में जो उनकी इच्छाओं से मेल नहीं खाती, तो अल्लाह के मुक़ाबले में आपका कोई संरक्षक नहीं होगा, जो आपके मामले को संभाले और आपके दुश्मनों के खिलाफ़ आपकी सहायता करे, और न ही आपको अल्लाह की यातना से कोई बचाने वाला होगा।

Ra'd 13:38

(ऐ रसूल!) हमने आपसे पहले रसूलों को मनुष्यों ही में से भेजे। इसलिए आप (दूसरे) रसूलों से अलग कोई (अनोखे) रसूल नहीं हैं। तथा हमने अन्य सभी मनुष्यों की तरह उनके लिए पत्नियाँ और बच्चे बनाए। हमने उन्हें फ़िरिश्ते नहीं बनाए,जो न शादी करते हैं और न बच्चे जनते हैं। और आप भी उन्हीं रसूलों में से हैं, जो मनुष्य थे, शादी-ब्याह करते थे और बच्चे पैदा करते थे, तो फिर आपके ऐसा होने पर इन मुश्रिकों को आश्चर्य क्यों होता है?! तथा किसी रसूल के बस की बात नहीं है कि अल्लाह की अनुमति के बिना अपनी ओर से कोई निशानी ले आए। हर मामले के लिए जिसका अल्लाह ने फ़ैसला किया है एक किताब है, जिसमें वह उल्लिखित है और उसका एक निर्धारित समय है, जो आगे-पीछे नहीं हो सकता।

Ra'd 13:39

अल्लाह जिस भलाई, या बुराई, या सौभाग्य, या दुर्भाग्य को चाहता है, मिटा देता है और उनमें से जिसे चाहता है बाक़ी रखता है। और उसी के पास 'लौह़ -ए- महफ़ूज़' है। वह उन सब का संदर्भ है, और जो कुछ भी मिटाया जाता या बाक़ी रखा जाता है, उसी के अनुसार होता है, जो उसमें अंकित है।

Ra'd 13:40

(ऐ नबी!) यदि हम आपकी मृत्यु से पहले आपको उस यातना का कुछ भाग दिखा दें जिसका हम उनसे वादा करते हैं, तो यह हमारा काम है, या उसे आपको दिखाने से पहले ही आपको मौत दे दें, तो आपका काम केवल उसको पहुँचा देना है, जिसे पहुँचाने का हमने आपको आदेश दिया है। आपका काम उन्हें बदला देना या उनका हिसाब लेना नहीं है। क्योंकि यह हमारा काम है।

Ra'd 13:41

क्या इन काफ़िरों ने यह नहीं देखा कि हम कुफ़्र की धरती पर आते हैं, इस्लाम का प्रसार कर और मुसलमानों को उसपर विजय प्रदान करके उसे उसके किनारों से कम कर देते हैं। और अल्लाह जो कुछ चाहता है, आदेश देता है और अपने बंदों के बीच फ़ैसला करता है। उसके फ़ैसले को कोई टालने वाला, या उसमें संशोधन करने वाला, या उसे बदलने वाला नहीं है। वह महिमावान बहुत शीघ्र हिसाब लेने वाला है, वह अगले और पिछले सभी लोगों का एक ही दिन में हिसाब ले लेगा।

Ra'd 13:42

पिछले समुदायों ने अपने नबियों के साथ छल किया, चालें चलीं और उनकी लाई हई बातों को झुठलाया। परंतु उन्होंने उनके ख़िलाफ़ उपाय (साज़िश) करके क्या कर लिया? कुछ नहीं; क्योंकि प्रभावी उपाय केवल अल्लाह का उपाय है, किसी और का नहीं। तथा वह महिमावान् (अल्लाह) ही है, जो सारी सृष्टि के सभी कर्मों को जानता है, उनमें से कुछ भी उससे छिपा नहीं है। और उस समय इन झुठलाने वालों को पता चल जाएगा कि वे अल्लाह पर ईमान न लाने में कितने गलत थे और ईमान वाले लोग कितने सही थे। इसलिए उन्होंने जन्नत और अच्छा परिणाम प्राप्त किया।

Ra'd 13:43

जिन लोगों ने कुफ़्र की नीति अपनाई, वे कहते हैं : (ऐ मुहम्मद!) आप अल्लाह द्वारा भेजे नहीं गए हैं। (ऐ रसूल!) आप उनसे कह दें : मेरे और तुम्हारे बीच, इस बात पर अल्लाह गवाह के रूप में काफ़ी है कि मैं अपने पालनहार की ओर से तुम्हारी तरफ़ रसूल बनाकर भेजा गया हूँ, तथा उनकी भी गवाही काफ़ी है, जिनके पास आकाशीय ग्रंथों का ज्ञान है, जिनमें मेरी विशेषताएँ वर्णित हैं। और जिसकी सत्यता का साक्षी अल्लाह है, उसे किसी के झुठलाने से कोई नुकसान नहीं पहुँचता।