Marathi Meal — Muhammed Şefî' Ensârî — Nisa' 4:1 – Enam 6:165
Contents
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Nisa' 4:1
१. हे लोकांनो! आपल्या त्या पालनकर्त्याचे भय राखा, ज्याने तुम्हाला एकाच जीवापासून निर्माण केले आणि त्याच्यापासूनच त्याच्या पत्नीलाही निर्माण केले, आणि त्या दोघांपासून अनेक स्त्री-पुरुष पसरविले आणि त्या अल्लाहचे भय राखा, ज्याच्या नावाने तुम्ही एकमेकांकडे याचना करतात आणि नाते-संबंध तोडण्यापासूनही (स्वतःला वाचवा) निःसंशय, अल्लाह तुम्हा सर्वांची देखरेख करणारा आहे.
Nisa' 4:2
२. आणि अनाथांना त्यांची धन-संपत्ती देऊन टाका आणि अनाथांचा चांगला माल हडप करून त्याऐवजी खरबा माल देऊ नका. आणि आपल्या मालात (धनात) त्यांचा माल मिसळवून गिळंकृत करू नका. निःसंशय हा फार मोठा अपराध आहे.
Nisa' 4:3
३. आणि जर तुम्हाला हे भय वाटत असेल की अनाथ मुलींशी विवाह करून तुम्ही न्याय (वर्तन) करू शकणार नाहीत तर मग इतर स्त्रियांपैकी ज्या तुम्हाला चांगल्या वाटतील त्यांच्याशी तुम्ही विवाह करून घ्या. दोन-दोन, तीन-तीन, चार-चार, परंतु (अशा स्थितीत) न्याय न राखला जाण्याचे भय असेल तर एक (पत्नी) पुरेशी आहे अथवा तुमच्या मालकीच्या दासींना. हे अधिक निकट आहे की (असे केल्याने अन्यायाकडे आणि) एकतर्फी झुकण्यापासून वाचाल.
Nisa' 4:4
४. आणि स्त्रियांना त्यांचे महर (विवाहप्रसंगी वरातर्फे वधूसाठी निर्धारीत केलेली रक्कम) राजीखुशीने देऊन टाका आणि जर स्त्री आपल्या मर्जीने काही महर सोडून देईल तर तो उचित समजून खाऊ पिऊ शकता.
Nisa' 4:5
५. आपली ती धन-संपत्ती, जिला अल्लाहने तुमच्या जीवनाचा आधार बनविले आहे ती नादान व अक्कल नसलेल्यांना देऊ नका आणि त्यातून त्यांना खाऊ घाला, त्यांना कपडे-लत्ते द्या आणि त्यांच्याशी नरमीने बोला.
Nisa' 4:6
६. आणि अनाथांना ते वयात येइपर्यंत त्यांची देखरेख ठेवा आणि त्यांची परीक्षा घेत राहा. मग जेव्हा तुम्हाला त्यांच्यात सुधारणा व लायकी दिसून येईल, तेव्हा त्यांची संपत्ती त्यांच्या हवाली करा आणि ते मोठे होतील या भीतीने त्यांचे धन घाईघाईने उधळपट्टी करीत खाऊन टाकू नका. श्रीमंतांनी त्यांच्या संपत्तीबाबत असे करण्यापासून अलिप्त राहावे, तथापि गरीब असेल तर त्याने वाजवी रितीनेे खावे, मग जेव्हा तुम्ही त्यांना त्यांची संपत्ती सोपवाल तेव्हा साक्षी करून घ्या, आणि हिशोब घेण्यासाठी तर अल्लाह पुरेसा आहे.
Nisa' 4:7
७. आई-बाप आणि जवळच्या नातेवाईकांच्या संपत्तीत पुरुषांचा हिस्सा आहे, आणि स्त्रियांचाही (अर्थात जी धन-संपत्ती आई-वडील आणि जवळचे नातेवाईक मागे सोडून जातील), मग ती संपत्ती कमी असो किंवा जास्त (त्यात) हिस्सा ठरलेला आहे.१
———
(१) इस्लामच्या आगमनापूर्वी हादेखील अत्याचार होता की स्त्रियांना आणि लहान मुलांना वारस या नात्याने काहीच दिले जात नव्हते. केवळ मोठी मुले, जी लढण्यायोग्य असत तेच साऱ्या संपत्तीचे उत्तराधिकारी मानले जात. या आयतीत सर्वश्रेष्ठ अल्लाहने फर्माविले की पुरुषांप्रमाणे स्त्रिया आणि लहान मुले-मुलीदेखील आपल्या माता-पित्याचे आणि नातेवाईकांचे वारसदार ठरतील. त्यांना वारसाहक्कापासून वंचित ठेवले जाणार नाही.
Nisa' 4:8
८. आणि वाटणीच्या वेळी जेव्हा नातेवाईक, अनाथ आणि गरीब दुबळे येतील तर तुम्ही त्या संपत्तीतून त्यांनाही थोडे-फार द्या आणि त्यांच्याशी नरमीने बोला.
Nisa' 4:9
९. लोकांनी हा विचार केला पाहिजे की आपल्या मागे जर ते लहान लहान कमजोर मुलेबाळे सोडून मेले असते तर त्यांना आपल्या मुलांबद्दल कशी भीती वाटली असती, स्वतः आपल्यावर कयास(अंदाज) करून भय राखले पाहिजे आणि त्यांनी अल्लाहचे भय बाळगले पाहिजे आणि बोलताना यथायोग्य बोलले पाहिजे.
Nisa' 4:10
१०. जे लोक नाहक अत्याचारपूर्वक अनाथांची संपत्ती गिळंकृत करतात, ते आपल्या पोटात आग भरत आहेत आणि ते जहन्नममध्ये जातील.
Nisa' 4:11
११. सर्वश्रेष्ठ अल्लाह तुम्हाला तुमच्या संततीविषयी आदेश देतो की एका मुलाचा हिस्सा दोन मुलींच्या हिश्याइतका आहे. जर फक्त मुलीच असतील आणि त्या दोनपेक्षा जास्त असतील तर त्यांना, मयताने मागे सोडलेल्या संपत्तीमधून दोन तृतियांश हिस्सा मिळेल आणि जर एकच मुलगी असेल तर तिच्यासाठी अर्धा हिस्सा आहे आणि मयताच्या आई-बापापैकी प्रत्येकाला, त्याने मागे सोडलेल्या संपत्तीचा सहावा हिस्सा आहे. मयताला संतान असेल अथवा संतान नसेल, आणि आई-बाप वारसदार असतील तर मग त्याच्या आईचा तिसरा हिस्सा आहे. तथापि मयताचे जर अनेक भाऊ असतील तर मग त्याच्या आईचा सहावा हिस्सा आहे. हा हिस्सा मयताने केलेल्या मृत्युपत्रा (वसीयत) ची पूर्तता केल्यानंतर आहे किंवा त्याचे कर्ज फेडल्यानंतर. तुमचा पिता असेल किंवा तुमची मुले, पण तुम्ही नाही जाणत की त्यांच्यापैकी कोण तुम्हाला लाभ पोहचविण्यात जास्त जवळचा आहे. हे सर्व हिस्से अल्लाहतर्फे निर्धारीत केलेले आहेत. निःसंशय अल्लाह सर्व काही जाणणारा हिकमतशाली आहे.
Nisa' 4:12
१२. आणि तुमच्या पत्न्या, जी काही संपत्ती मागे सोडून जातील आणि त्यांना मुलेबाळे नसतील तर त्यात तुमचा अर्धा हिस्सा आहे आणि जर त्यांना मुलेबाळे असतील तर त्यांनी मागे सोडलेल्या संपत्तीत तुमचा चौथा हिस्सा आहे, मात्र त्यांनी केलेल्या मृत्युपत्राची पूर्तता झाल्यानंतर किंवा त्यांचे कर्ज फेडल्यानंतर आणि जी संपत्ती तुम्ही आपल्या मागे सोडून जाल, त्यात त्यांचा एक चतुर्थांश हिस्सा आहे जर तुम्हाला संतती नसेल, आणि जर तुम्हाला संतती असेल तर मग त्यांना तुम्ही मागे सोडलेल्या संपत्तीत आठवा हिस्सा मिळेल, मात्र तुम्ही केलेल्या मृत्युपत्राची पूर्तता झाल्यानंतर आणि तुमचे कर्ज फेडून झाल्यानंतर, आणि जर अशा पुरुष किंवा स्त्रीने मागे सोडलेल्या संपत्तीचा मामला आला, ज्याला आई-बाप किंवा मुलेबाळे नसतील, परंतु भाऊ-बहीण असतील तर त्यांच्यापैकी प्रत्येकाला सहावा हिस्सा मिळेल आणि जर याहून जास्त असतील तर एक तृतियांश संपत्तीत सर्वांचा हिस्सा राहील. मात्र त्याने केलेल्या मृत्युपत्राची पूर्तता झाल्यानंतर व कर्जाची अदायगी झाल्यानंतरच अशा प्रकारे की इतरांना नुकसान पोहचविले गेले नसावे. हे अल्लाहतर्फे निर्धारीत केलेले आहे आणि अल्लाह प्रत्येक गोष्ट जाणणारा आणि धर्य राखणारा आहे.
Nisa' 4:13
१३. या सर्वश्रेष्ठ अल्लाहने निर्धारीत केलेल्या सीमा आहेत आणि जो कोणी अल्लाह आणि त्याचे रसूल (पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) यांच्या आदेशाचे पालन करील, त्याला अल्लाह जन्नतमध्ये दाखल करील, ज्यांच्या खाली नहरी (प्रवाह) वाहत असतील, ज्यात ते नेहमी नेहमी राहतील, आणि ही फार मोठी सफलता आहे.
Nisa' 4:14
१४. आणि जो मनुष्य अल्लाहची आणि रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) यांची अवज्ञा करील आणि अल्लाहने निर्धारीत केलेल्या सीमांचे उल्लंघन करील त्याला तो जहन्नममध्ये टाकील, ज्यात तो नेहमी नेहमी राहील. अशा लोकांकरिता अपमानदायक अज़ाब (शिक्षा-यातना) आहे.
Nisa' 4:15
१५. तुमच्या स्त्रियांपैकी ज्या व्यभिचार करतील तर त्यांच्याबद्दल आपल्यापैकी चार साक्षीदार बोलवून घ्या जर त्यांनी साक्ष दिली तर त्या स्त्रियांना घरात बंदिस्त करून ठेवा, येथपर्यंत की मृत्युने त्यांचे आयुष्य संपवावे, किंवा सर्वश्रेष्ठ अल्लाहने त्यांच्यासाठी एखादा दुसरा मार्ग काढावा.
Nisa' 4:16
१६. आणि तुमच्यापैकी जे दोनजण असे कृत्य करतील तर त्यांना दुःख-यातना द्या. जर ते तौबा (क्षमा-याचना) करतील आणि आपले आचरण सुधारतील तर त्यांना सोडून द्या. निःसंशय, सर्वश्रेष्ठ अल्लाह तौबा (क्षमा-याचना) कबूल करणारा आणि दया करणारा आहे.
Nisa' 4:17
१७. अल्लाह केवळ अशाच लोकांची तौबा कबूल करतो, जे अजाणतेपणी वाईट कृत्य करून बसतात, पण लवकरच तसे कृत्य करणे सोडतात आणि अल्लाहजवळ माफी मागतात, जेव्हा अल्लाहदेखील त्यांची क्षमा-याचना स्वीकारतो अल्लाह सर्व काही जाणणारा बुद्धिमान आहे.
Nisa' 4:18
१८. आणि त्यांची तौबा कदापि कबूल नाही, जे दुष्कर्मांवर दुष्कर्म करीत जातात इतके की त्यांच्यापैकी एखाद्याचे मरण जवळ येऊन ठेपते, तेव्हा म्हणू लागतो की आता मी तौबा करतो! आणि अशा लोकांचीही तौबा कबूल केली जात नाही जे इन्कार करण्याच्या अवस्थेतच मरण पावतात. अशाच लोकांसाठी आम्ही सक्त अज़ाब (कठोर शिक्षा-यातना) तयार करून ठेवला आहे.
Nisa' 4:19
१९. हे ईमान राखणाऱ्यांनो! तुमच्यासाठी हे हलाल (वैध) नव्हे की जबरदस्तीने स्त्रियांचे, त्यांच्या मर्जीविरूद्ध वारसदार बनावे१ आणि आपण दिलेले त्यांच्याकडून काही परत घ्यावे या हेतुने त्यांना रोखून ठेवू नका मात्र जर त्या उघडपणे एखादे दुष्कर्म आणि व्यभिचाराचे काम करतील तर गोष्ट वेगळी. त्यांच्याशी चांगले वर्तन राखा, मग त्या तुम्हाला नापसंत का असेनात, कारण फार शक्य आहे की तुम्ही एखाद्या गोष्टीला वाईट जाणावे आणि अल्लाहने तिच्यात मोठी भलाई आणि खूबी ठेवली असावी.
———
(१) इस्लामच्या आगमनापूर्वी स्त्रियांवर हाही अत्याचार होत असे की एखाद्याच्या मृत्युनंतर त्याच्या घरचे लोक, मयताच्या मागे सोडलेल्या संपत्तीप्रमाणे तिच्या पत्नीचेही जबरदस्तीने उत्तराधिकारी बनत आणि स्वतः आपल्या मर्जीने तिच्या इच्छेविरूद्ध तिच्याशी विवाह करून घेत किंवा आपल्या भावाशी, पुतण्याशी विवाह करून देत. एवढेच नव्हे तर, सावत्र मुलगा आपल्या मरण पावलेल्या बापाच्या पत्नीशी विवाह करून घेई किंवा वाटल्यास तिला दुसऱ्या कोणाशी विवाह करण्याची परवानगी देत नसत. ती बिचारी संपूर्ण आयुष्य अशाच स्थितीत जगण्यास विवश होत असे. इस्लामने अत्याचारपूर्ण अशा सर्व पद्धतींना हराम (अवैध) ठरविले.
Nisa' 4:20
२०. आणि जर एका पत्नीच्या ठिकाणी तुम्ही दुसरी पत्नी करू इच्छित असाल तर त्यांच्यापैकी एखादीला तुम्ही धन-संपत्तीचा खजिना देऊन ठेवला असेल, तरीही त्यातून काही (परत) घेऊ नका. काय तुम्ही तिला बदनाम करून उघड अशा अपराधाने परत घ्याल?
Nisa' 4:21
२१. आणि तुम्ही ते कसे परत घ्याल? यानंतरही की तुम्ही एकमेकांशी सहवास केलेला आहे आणि त्या स्त्रियांनी तुमच्याकडून पक्का वायदा-करार घेतला आहे.
Nisa' 4:22
२२. आणि त्या स्त्रियांशी विवाह करू नका, ज्यांच्याशी तुमच्या पित्यांनी विवाह केला असेल, परंतु यापूर्वी जे झाले ते झाले हे निर्लज्जतेचे काम आणि कपटीपणामुळे आहे आणि मोठा वाईट (आचरणाचा) मार्ग आहे.
Nisa' 4:23
२३. तुमच्यावर हराम (निषिद्ध) केल्या गेल्या तुमच्या माता आणि कन्या, आणि तुमच्या बहिणी तुमच्या आत्या तुमच्या मावश्या , भावाच्या मुली, बहिणीच्या मुली आणि तुमच्या त्या माता, ज्यांनी तुम्हाला आपले दूध पाजले असेल आणि तुमच्या (आईच्या) दुधात सहभागी असलेल्या बहिणी, तुमची सासू आणि तुम्ही ज्यांचे पालनपोषण केले त्या मुली ज्या तुमच्या कुशीत (कडेवर) आहेत तुमच्या त्या स्त्रियांपासून ज्यांच्याशी तुम्ही सहवास केलेला आहे, परंतु जर तुम्ही त्यांच्याशी सहवास केला नसेल तर तुमच्यावर कसलाही गुन्हा नाही, आणि तुमच्या सख्या पुत्रांच्या पत्न्यासुद्धा हराम आहेत आणि दोन बहिणींना एकाच वेळा (एकत्रपणे) निकाहमध्ये जमा करणे हेदेखील हराम आहे. मात्र यापूर्वी जे झाले ते झाले. निःसंशय अल्लाह मोठा माफ करणारा, मेहरबान, दयावान आहे.
Nisa' 4:24
२४. आणि (तुमच्यासाठी) विवाहित स्त्रिया (अवैध) केल्या गेल्या आहेत तथापि जी (दासी) तुमच्या स्वतःच्या मालकीची असेल. हे आदेश अल्लाहने तुमच्यावर अनिवार्य केले आहेत आणि याखेरीज ज्या दुसऱ्या स्त्रिया तुमच्यासाठी हलाल (वैध) केल्या गेल्या आहेत की आपले धन (महर) अदा करून त्यांच्याशी विवाह करा, व्यभिचारासाठी नाही तर पावित्र्य कायम राखण्याकरिता, यास्तव ज्यांच्यापासून तुम्ही लाभ घ्याल त्यांना त्यांचा महर अदा करा आणि तुम्ही ठरलेल्या महर नंतर एकमेकांच्या मर्जीने जे वाटेल ते ठरवाल तर यात तुमच्यावर काही गुन्हा नाही. निःसंशय अल्लाह सर्व काही जाणणारा हिकमतशाली आहे.
Nisa' 4:25
२५. आणि तुमच्यापैकी जो स्वतंत्र अशा मुलसमान स्त्रीशी विवाह करण्याचे सामर्थ्य बाळगत नसेल तर त्याने त्या मुसलमान दासीशी (विवाह करावा) जी स्वतःच्या मालकीची असावी. अल्लाह तुमच्या कर्माशी पूर्णतः जाणता आहे. तुम्ही आपसात एकमेकांचे जोडीदार आहात, यास्तव तुम्ही त्यांच्या कुटुंबियांच्या परवानगीने त्यांच्याशी विवाह करा आणि नियमानुसार त्यांचा महर देऊन टाका. त्या सत्शील, सदाचारी असाव्यात, उघडपणे दुराचार करणाऱ्या नसाव्यात, न लपून छपून प्रेम-संबंध राखणाऱ्या असाव्यात, मग जेव्हा त्या विवाहित झाल्यानंतर पुन्हा व्यभिचार करतील तर त्यांच्यासाठी, स्वतंत्र स्त्रियांना दिल्या जाणाऱ्या शिक्षेच्या निम्मी शिक्षा आहे. हा विवाहाचा आदेश त्याच्यासाठी आहे ज्याला आपल्या हातून कुकर्म होईल अशी भीती आहे धीर धराल तर तुमच्यासाठी उत्तम आहे. आणि अल्लाह माफ करणारा, दया करणारा आहे.
Nisa' 4:26
२६. अल्लाह इच्छितो की तुमच्यासाठी स्पष्ट आदेशांचे निवेदन करावे आणि तुम्हाला त्या लोकांच्या उचित मार्गावर चालवावे, जे तुमच्या पूर्वी होऊन गेलेत आणि तुमची क्षमा-याचना (तौबा) कबूल करावी आणि अल्लाह जाणणारा, हिकमतशाली आहे.
Nisa' 4:27
२७. आणि अल्लाह इच्छितो की तुमची तौबा कबूल करावी आणि जे लोक कामवासनेच्या मागे लागले आहेत, ते इच्छितात की तुम्ही सन्मार्गापासून खूप दूर हटावे.
Nisa' 4:28
२८. अल्लाह तुमचा सर्व भार हलका करू इच्छितो आणि माणूस मोठा कमकुवत निर्माण केला गेला आहे.
Nisa' 4:29
२९. हे ईमान राखणाऱ्यांनो! आपसात एकमेकांची धन-संपत्ती नाहक हडप करू नका, परंतु आशा पध्दतीने की तुम्ही आपसात राजीखुशीने व्यापार-उद्योग करा. आणि स्वतःला जीवे ठार करू नका. निःसंशय अल्लाह तुमच्यावर दया करणारा आहे.
Nisa' 4:30
३०. आणि जे मनुष्य ही सीमा ओलांडून आणखी अत्याचार करील तर फार लवकर आम्ही त्याला आगीत टाकू आणि हे अल्लाहकरिता फार सोपे आहे.
Nisa' 4:31
३१. जर तुम्ही या मोठ्या अपराधांपासून स्वतःला वाचवाल, ज्यांच्याविषयी तुम्हाला मनाई केली जात आहे तर आम्ही तुमच्या लहान सहान अपराधांना माफ करू आणि मान सन्मानाच्या दरवाज्यात दाखल करू.
Nisa' 4:32
३२. आणि त्या गोष्टीची इच्छा धरू नका, जिच्यामुळे अल्लाहने तुमच्यापैकी एकाला दुसऱ्यावर श्रेष्ठता प्रदान केली आहे. पुरुषांचा हिस्सा तो आहे, जो त्यांनी कमविला आणि स्त्रियांसाठी तो हिस्सा आहे जो त्यांनी कमवीला अल्लाहजवळ त्याच्या दया-कृपेची याचना करा. निःसंशय अल्लाह प्रत्येक गोष्टीचे ज्ञान राखतो.
Nisa' 4:33
३३. आणि आई-बाप किंवा जवळचे नातेवाईक आपल्या मागे जे काही सोडून मरतील, त्याचे वारसदार आम्ही प्रत्येकाचे निश्चित केले आहेत आणि ज्यांच्याशी तुम्ही स्वतः वचन-करार केला आहे. त्यांना त्यांचा हिस्सा देऊन टाका. निःसंशय, अल्लाह प्रत्येक गोष्ट पाहात आहे.
Nisa' 4:34
३४. पुरुष, स्त्रीवर शासक (आणि संरक्षक) आहे. या कारणास्तव की अल्लाहने एकाला दुसऱ्यावर श्रेष्ठत्व प्रदान केले आहे आणि या कारणास्तव की पुरुषांनी आपले धन खर्च केले आहे. यास्तव नेक, आज्ञाधारक स्त्रिया पतीच्या अनुपस्थितीत अल्लाहच्या संरक्षणाद्वारे धन-संपत्ती व शील-अब्रूचे रक्षण करतात आणि ज्या स्त्रियांपासून तुम्हाला अवज्ञेचे भय असेल त्यांना चांगली ताकीद करा, त्यांचे अंथरुण वेगळे करा (तरीही न मानतील) तर मारा आणि जर तुमचे म्हणणे मानून घेतील तर त्यांच्यावर दोषारोप ठेवण्याचे निमित्त शोधू नका. निःसंशय अल्लाह मोठा महान आहे.
Nisa' 4:35
३५. जर तुम्हाला (पती-पत्नीमध्ये) मनमुटाव होण्याची भीती असेल तर एक न्याय करणारा पंच, पतीच्या कुटुंबातर्फे आणि एक पत्नीच्या कुटुंबातर्फे ठरवून घ्या. जर हे दोघे समझोता घडवून आणू इच्छितील तर अल्लाह त्या दोघांचा मिलाप करील. निःसंशय, अल्लाह जाणणारा, खबर राखणारा आहे.
Nisa' 4:36
३६. आणि अल्लाहची उपासना करा. त्याच्यासह दुसऱ्या कोणाला सहभागी करू नका आणि आई-बाप, नातेवाईक, अनाथ, गरीब दुबळे, जवळचे शेजारी, दूरचे शेजारी आणि सोबत असलेल्या प्रवाशांसीी भलेपणाचे, उपकाराचे वर्तन करा, तसेच प्रवाशी आणि तुमच्या ताब्यात असेलल्यांशीही. निःसंशय अल्लाह ऐट दाखविणाऱ्या घमेंडीशी प्रेम राखत नाही.
Nisa' 4:37
३७. जे लोक स्वतः कंजूषपणा करतात आणि इतरांनाही कंजूषपणा करण्यास सांगतात आणि सर्वश्रेष्ठ अल्लाहने, जे आपल्या कृपेने त्यांना प्रदान केले आहे, ते लपवितात, तर आम्ही अशा कृतघ्न लोकांसाठी अपमानदायक अज़ाब (शिक्षा-यातना) तयार करून ठेवला आहे.
Nisa' 4:38
३८. आणि जे लोक आपले धन लोकांना दाखविण्यासाठी खर्च करतात, आणि अल्लाहवर आणि कयामतच्या दिवसावर ईमान राखत नाही आणि ज्याचा सखा-सोबती सैतान असेल तर तो मोठा वाईट सोबती आहे.
Nisa' 4:39
३९. आणि त्यांचे काय बिघडले असते तर त्यांनी अल्लाहवर आणि कयामतच्या दिवसावर ईमान राखले असते आणि अल्लाहने जे त्यांना देऊन ठेवले आहे, त्यातून खर्च करीत राहिले असते. अल्लाह त्यांना चांगल्या प्रकारे जाणणारा आहे.
Nisa' 4:40
४०. निःसंशय, सर्वश्रेष्ठ अल्लाह एका कणाइतकाही अत्याचार करीत नाही. आणि सत्कर्म (नेकी) असेल तर त्याला दुप्पट करतो आणि विशेषतः आपल्या जवळून फार मोठा मोबदला प्रदान करतो.
Nisa' 4:41
४१. तेव्हा काय अवस्था होईल, जेव्हा प्रत्येक जनसमूहा (उम्मत) मधून एक साक्ष देणारा आम्ही आणू आणि तुम्हाला त्या लोकांवर साक्षीदार बनवून आणू.१
———
(१) प्रत्येक उम्मत (जनसमूह) चा पैगंबर अल्लाहच्या दरबारात साक्ष देईल, हे अल्लाह, आम्ही तर तुझा संदेश आपल्या लोकांपर्यंत पोहचविला होता, आता त्यांनी मानले नाही तर यात आमचा काय दोष आहे? मग त्यांच्या कथनावर पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम साक्ष देतील, हे अल्लाह! हे खरे सांगतात. पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ही साक्ष त्या कुरआनाद्वारे देतील जे त्यांच्यावर अवतरित झाले आणि ज्यात पूर्वी होऊन गेलेल्या पैगंबरांचे आणि त्यांच्या लोकांचे वृत्तांत आवश्यकतेनुसार सांगितले आहेत.
Nisa' 4:42
४२. ज्या दिवशी इन्कार करणारे आणि पैगंबराची अवज्ञा करणारे ही इच्छा करतील की त्यांना जमिनीशी सपाट (समतल) केले गेले असते तर फार बरे झाले असते आणि अल्लाहपासून ते काहीही लपवू शकणार नाहीत.
Nisa' 4:43
४३. हे ईमान राखणाऱ्यांनो! जेव्हा तुम्ही नशेत चूर असाल तेव्हा नमाजच्या जवळ जाऊ नका, जोपर्यंत आपले म्हणणे समजू न लागाल आणि (संभोगानंतरच्या) अपवित्र अवस्थेत, जोपर्यंत स्नान न करून घ्याल, परंतु रस्त्याने जाताना (नमाजच्या स्थानावरून) जाणे होत असेल तर गोष्ट वेगळी आणि जर तुम्ही आजारी असाल, किंवा प्रवासात असाल किंवा तुमच्यापैकी कोणी शौचास जाऊन आला असेल किंवा तुम्ही स्त्रियांशी समागम केला असेल आणि तुम्हाला पाणी मिळत नसेल तर साफ स्वच्छ मातीने तयम्मुम करा आणि आपले तोंड आणि आपले हात (मातीने) मळून घ्या. निःसंशय अल्लाह मोठा माफ करणारा आणि क्षमाशील आहे.
Nisa' 4:44
४४. काय तुम्ही त्यांना नाही पाहिले, ज्यांना ग्रंथाचा काही भाग दिला गेला? ते मार्गभ्रष्टता खरेदी करतात आणि इच्छितात की तुम्हीही मार्गभ्रष्ट व्हावे.
Nisa' 4:45
४५. आणि अल्लाह तुमच्या शत्रूंना चांगल्या प्रकारे जाणणारा आहे आणि अल्लाह पुरेसा आहे दोस्त होण्यासाठी आणि अल्लाह पर्याप्त आहे मदतकर्ता होण्यासाठी.
Nisa' 4:46
४६. काही यहूदी, वाणी (कलाम) ला तिच्या योग्य स्थानापासून बदलून टाकतात. आणि म्हणतात की आम्ही ऐकले आणि अवज्ञा केली आणि ऐक त्याच्याविना की तुला ऐकले न जावे आणि आमची ताबेदारी कबूल करा (परंतु हे बोलताना) आपल्या जीभेला मोड देतात आणि दीन (धर्म) कलंकित करतात आणि जर हे लोक असे म्हणाले असते की आम्ही ऐकले आणि आम्ही मान्य केले आणि तुम्ही ऐका आणि आम्हाला पाहा तर हे त्यांच्यासाठी फार चांगले झाले असते आणि अधिक उत्तम ठरले असते. परंतु अल्लाहने त्यांच्या इन्कारामुळे त्यांचा धिःक्कार केला, तेव्हा हे फार कमी ईमान राखतात.
Nisa' 4:47
४७. हे ग्रंथधारकांनो! जे काही आम्ही अवतरित केले आहे, जे तुमच्याजवळ असलेल्या (ग्रंथा) ला सत्य असल्याचे सांगतो, त्यावर यापूर्वी ईमान राखा की आम्ही चेहरे बिघडवून टाकावेत आणि त्यांना फिरवून पाठीकडे करावे किंवा त्यांच्यावर धिःक्काराचा मारा करावा, जसा आम्ही शनिवारवाल्या लोकांवर केला आहे, आणि अल्लाहचा निर्णय पूर्ण झाल्याशिवाय राहात नाही.
Nisa' 4:48
४८. निःसंशय, अल्लाह आपल्यासह कोणाला सहभागी केले जाणे माफ करत नाही आणि याच्याखेरीज ज्याला इच्छिल माफ करील १ आणि जो अल्लाहसोबत दुसऱ्याला सहभागी करील तर त्याने अल्लाहवर फार मोठे असत्य रचले. २
———
(१) अर्थात असे अपराध की ज्यांची माफी मागितल्याविना ईमानधारकांनी मरण पावावे, तेव्हा अल्लाहने इच्छिल्यास एखाद्याला शिक्षा-यातना न देता माफ करील, परंतु बहुतेकांना शिक्षा दिल्यानंतर आणि बहुतेकांना पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम यांच्या शिफारसीवर माफ करील, परंतु शिर्क (अल्लाहसह कोणाला सहभागी ठरविणे) कदापि माफ करणार नाही, कारण अनेकेश्ववाद्यांवर अल्लाहने जन्नतला हराम केले आहे. (२) अन्य एका ठिकाणी फर्माविले ‘1शिर्क फार मोठा अत्याचार आहे’ (लुकमान) हदीस वचनातही याला फार मोठे अपराध असल्याचे सांगितले गेले आहे.
Nisa' 4:49
४९. काय तुम्ही त्यांना नाही पाहिले जे स्वतला फार शुद्ध पवित्र असल्याचे सांगतात? किंबहुना अल्लाह ज्याला इच्छितो स्वच्छ, शुद्ध, पवित्र करतो, आणि कोणावर धाग्याइतकाही अत्याचार केला जाणार नाही.
Nisa' 4:50
५०. पाहा, हे लोक अल्लाहवर कशा प्रकारे खोटा आरोप ठेवतात आणि हे फार मोठा गुन्हा साबीत होण्यास पुरेसे आहे.
Nisa' 4:51
५१. काय तुम्ही त्यांना नाही पाहिले, ज्यांना ग्रंथाचा काही हिस्सा लाभला आहे जे मूर्त्यांवर आणि मिथ्या देवांवर ईमान (श्रद्धा) राखतात आणि इन्कारी लोकांच्या हक्कात म्हणतात की हे लोक ईमान राखणाऱ्यांपेक्षा अधिक सरळ आणि सत्य-मार्गावर आहेत.
Nisa' 4:52
५२. हेच लोक आहेत, ज्यांचा अल्लाहने धिःक्कार केला आहे आणि अल्लाह ज्याचा धिःक्कार करील तर तुम्हाला त्याची मदत करणारा कोणीही आढळणार नाही.
Nisa' 4:53
५३. काय त्यांच्याजवळ एखाद्या साम्राज्याचा हिस्सा आहे, असे असेल तर हे कोणाला तीळभरसुद्धा देणार नाहीत.
Nisa' 4:54
५४. हे लोकांशी द्वेष-मत्सर राखतात, त्याबद्दल, जे अल्लाहने आपल्या कृपेने त्यांना प्रदान केले आहे, तेव्हा आम्ही इब्राहीमच्या संततीला ग्रंथ आणि हिकमतही प्रदान केली आणि मोठे साम्राज्यही प्रदान केले.
Nisa' 4:55
५५. मग त्यांच्यापैकी काहींनी तर ग्रंथावर ईमान राखले आणि काही त्यापासून थांबले तेव्हा (अशा लोकांसाठी) जहन्नमची आग पुरेशी आहे.
Nisa' 4:56
५६. ज्या लोकांनी आमच्या आयतींचा इन्कार केला, त्यांना आम्ही अवश्य आगीत टाकू, जेव्हा त्यांची कातडी शिजून गळून पडेल, आम्ही लगेच तिच्या जागी दुसरी कातडी बदलून टाकू यासाठी की त्यांनी अज़ाब (शिक्षा-यातना) चाखतच राहावे. निःसंशय अल्लाह जबरदस्त हिकमतशाली आहे.
Nisa' 4:57
५७. आणि ज्यांनी ईमान राखले आणि सत्कर्म करीत राहिले, आम्ही लवकरच त्यांना जन्नतच्या बागांमध्ये दाखल करू, ज्यांच्या खाली नहरी (प्रवाह) वाहत आहेत, ज्यात ते नेहमी राहतील. तिथे त्यांच्यासाठी पावित्र्यपूर्ण, शीलवान पत्न्या असतील आणि आम्ही त्यांना दाट सावलीत (आरामशीर जागी) ठेवू.
Nisa' 4:58
५८. सर्वश्रेष्ठ अल्लाह तुम्हाला आदेश देतो की अनामत (ठेव, धरोहर) त्यांच्या मालकांना परत करा, आणि जेव्हा लोकांच्या दरम्यान फैसला कराल तर न्यायपूर्वक फैसला करा. निःसंशय, ती फार चांगली गोष्ट आहे, ज्याची शिकवण अल्लाह तुम्हाला देत आहे आणि निःसंशय अल्लाह सर्व काही ऐकणारा, पाहणारा आहे.
Nisa' 4:59
५९. हे ईमान राखणाऱ्यांनो! अल्लाहच्या आदेशाचे पालन करा आणि रसूल (पैगंबर) सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम यांच्या आदेशाचे पालन करा आणि आपल्यापैकी शासक असलेल्यांचा आदेश माना, मग जर एखाद्या गोष्टीत मतभेद कराल तर तो अल्लाह आणि पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम यांच्याकडे रुजू करा, जर तुम्ही अल्लाहवर आणि कयामतच्या दिवसावर ईमान राखत असाल. हे सर्वांत चांगले आहे आणि परिणामाच्या दृष्टीनेही फार उत्तम आहे.१
———
(१) अल्लाह आणि पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम यांच्याकडे रुजू करा याचा अर्थ पवित्र कुरआन आणि पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लमयांचे कथन आणि त्यांची आदर्श आचरणशैली आहे. आपसातील मतभेद मिटविण्यासाठी हा सर्वांत चांगला उपाय सांगितला गेला आहे. या नियमान्वये हेही स्पष्ट होते की त्यानंतर आणखी तिसऱ्या कोणाचा आदेश मानणे आवश्यक नाही.
Nisa' 4:60
६०. काय तुम्ही त्यांना नाही पाहिले, जे दावा करतात की, जे काही तुमच्यावर उतरविले गेले आहे आणि जे काही तुमच्या पूर्वी उतरविले गेले त्यावर ते ईमान राखतात, परंतु आपसातले तंटे सोडविण्यासाठी, अल्लाहऐवजी ते दुसऱ्यांजवळ जाऊ इच्छितात, वास्तविक त्यांना आदेश दिला गेला आहे की त्यांनी, त्याचा (सैतानाचा) इन्कार करावा. सैतान तर हे इच्छितोच की त्यांना बहकवून दूर फेकून द्यावे.
Nisa' 4:61
६१. आणि जेव्हा जेव्हा त्यांना सांगितले जाते की अल्लाहने जो (पवित्र ग्रंथ) अवतरित केला आहे, त्याच्याकडे आणि पैगंबराकडे या, तेव्हा तुम्ही पाहाल की हे मुनाफिक (संधीसाधू) तुमच्याकडून तोंड फिरवून थांबतात.
Nisa' 4:62
६२. मग काय कारण आहे की जेव्हा त्यांच्यावर त्यांच्या वाईट कर्मांमुळे एखादे संकट येऊन कोसळते तर मग हे तुमच्याजवळ येऊन अल्लाहची शपथ घेतात, आणि सांगतात, आमचा इरादा तर केवळ भलाईचा आणि चांगले संबंध घडवून आणण्याचाच होता.
Nisa' 4:63
६३. हे असे लोक आहेत, ज्यांच्या मनातील रहस्यभेद, अल्लाहला चांगल्या प्रकारे माहीत आहे. तुम्ही त्यांच्या बोलण्याकडे दुर्लक्ष करा, मात्र त्यांना शिकवण देत राहा, आणि त्यांना अशी गोष्ट बोला जी त्यांच्या मनावर प्रभाव टाकणारी असेल.
Nisa' 4:64
६४. आणि आम्ही प्रत्येक पैगंबर केवळ यासाठी पाठविला की अल्लाहच्या आदेशान्वये, त्याच्या आदेशाचे पालन केले जावे, आणि जर हे लोक, ज्यांनी स्वतःच्या प्राणांवर अत्याचार केला, तुमच्याजवळ आले असते आणि त्यांनी अल्लाहजवळ तौबा (क्षमा-याचना) केली असती आणि पैगंबरांनीही त्यांच्यासाठी माफी मागितली असती तर निःसंशय, अल्लाह या लोकांना मोठा माफ करणारा, दया करणारा आढळला असता.
Nisa' 4:65
६५. तेव्हा शपथ आहे तुमच्या पालनकर्त्याची, हे लोक (तोपर्यंत) ईमानधारक होऊ शकत नाही, जोपर्यंत सर्व आपसातील मतभेदात तुम्हाला न्याय-निवाडा करणारा स्वीकारीत नाही, मग जो फैसला तुम्ही कराल, त्यावर मनातून नाराजही नसावेत आणि आज्ञाधारकाप्रमाणे त्यांनी तो मान्य करून घ्यावा.
Nisa' 4:66
६६. आणि जर आम्ही त्यांच्यावर हे फर्ज (अनिवार्य) केले असते की स्वतःची हत्या करून घ्या, किंवा आपल्या घरातून निघून जा, तर त्यांच्यापैकी फार थोड्याच लोकांनी त्याचे पालन केले असते. आणि जर हे तेच करतील ज्याची त्यांना शिकवण दिली जाते तर निश्चितच त्यांच्यासाठी फार चांगले झाले असते आणि खूप मजबूतीचे ठरले असते.
Nisa' 4:67
६७. आणि मग तर आम्ही त्यांना आपल्या जवळून फार मोठा मोबदला प्रदान केला असता.
Nisa' 4:68
६८. आणि निःसंशय त्यांना सत्य व सरळ मार्ग प्रदान केला असता.
Nisa' 4:69
६९. आणि जो कोणी अल्लाह आणि रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) यांच्या आदेशाचे पालन करील तर तो त्या लोकांसोबत राहील, ज्यांच्यावर अल्लाहने आपला इनाम फर्माविला आहे, जसे नबी (पैगंबर), सिद्दीक (सत्यवचनी) आणि शहीद व नेक सदाचारी लोक. हे फार चांगले सोबती आहेत.
Nisa' 4:70
७०. ही सर्वश्रेष्ठ अल्लाहतर्फे फार मोठी कृपा आहे आणि अल्लाह पर्याप्त आहे ज्ञान राखणारा.
Nisa' 4:71
७१. हे ईमान राखणाऱ्यांनो! आपल्या बचावाची सामग्री सोबत घ्या, मग समूहा-समूहाने किंवा सर्व एकत्र मिळून कूच करा.
Nisa' 4:72
७२. आणि निःसंशय तुमच्यापैकी काही असेही आहेत जे संकोच करतात, मग जर तुम्हाला एखादे नुकसान पोहोचते, तेव्हा म्हणतात की अल्लाहने माझ्यावर मोठी कृपा केली मी त्यांच्यासह हजर नव्हतो.
Nisa' 4:73
७३. आणि जर तुम्हाला अल्लाहची एखादी कृपा लाभली तर असे बोलू लागतील की जणू तुमच्या व त्यांच्या दरम्यान काही नातेच नव्हते, म्हणतील की, अरेरे! मी त्यांच्यासोबत असतो तर मोठी सफलता प्राप्त केली असती.
Nisa' 4:74
७४. तथापि ज्या लोकांनी या जगाचे जीवन, मरणोत्तर जीवना (आखिरत) च्या मोबदल्यात विकून टाकले आहे, त्यांनी अल्लाहच्या मार्गात लढले पाहिजे आणि जो अल्लाहच्या मार्गात लढता लढता शहीद होईल किंवा विजयी होईल तर खात्रीने आम्ही त्याला फार चांगला मोबदला प्रदान करू.
Nisa' 4:75
७५. बरे काय कारण आहे की तुम्ही अल्लाहच्या मार्गात आणि त्या दुर्बल पुरुष स्त्रिया आणि लहान लहान बालकांच्या सुटकेकरिता न लढावे? जे अशा प्रकारे दुआ (प्रार्थना) करीत आहेत की हे आमच्या पालनहार! या अत्याचारी लोकांच्या वस्तीतून आम्हाला बाहेर काढआणि आमच्यासाठी स्वतः आपल्यातर्फे एखादा हिमायती (समर्थक निश्चित कर, आणि आमच्यासाठी विशेषरित्या आपल्यातर्फे मदत करणारा पाठव.
Nisa' 4:76
७६. ज्या लोकांनी ईमान राखले आहे, ते तर अल्लाहच्या मार्गात जिहाद करतात आणि ज्या लोकांनी कुप्र (इन्कार) केला आहे ते तर तागूत (सैतान) च्या मार्गात लढतात. तेव्हा तुम्ही सैतानाच्या मित्रांशी युद्ध करा. निःसंशय सैतानाचे (डावपेच) अतिशय कमकुवत आहेत.
Nisa' 4:77
७७. काय तुम्ही त्यांना नाही पाहिले, ज्यांना आदेश दिला गेला की आपल्या हातांना रोखून ठेवा आणि नमाज नियमित पढत राहा आणि जकात अदा करीत राहा, मग जेव्हा त्यांना जिहाद (धर्मयुद्धा) चा आदेश दिला गेला तेव्हा त्याच वेळी त्यांच्यातला एक समूह, लोकांपासून असा भयभीत होता, जणू अल्लाहचे भय असावे, किंबहुना यापेक्षा अधिक आणि म्हणू लागले, हे आमच्या पालनकर्त्या! तू आमच्यावर जिहाद अनिवार्य का केले? आणखी थोडे जीवन आम्हाला का व्यतीत करू दिले नाही? तुम्ही त्यांना सांगा की या जगाचा लाभ तर फार थोडासा आहे आणि अल्लाहचे भय राखणाऱ्यांकरिता आखिरत कितीतरी उत्तम आहे, आणि तुमच्यावर एका धाग्याइतकाही अत्याचार केला जाणार नाही.
Nisa' 4:78
७८. तुम्ही कोठेही असा, मृत्यु कोणत्याही स्थितीत तुम्हाला येऊन धरील, मग तुम्ही मजबूत अशा किल्ल्यामध्ये असाल तरीही. आणि जर यांना एखादी भलाई प्राप्त होते, तेव्हा म्हणतात, की ही सर्वश्रेष्ठ अल्लाहतर्फे आहे, आणि जर एखादी असफलता पदरी पडते तेव्हा म्हणू लागतात, हे तुमच्यामुळे झाले. त्यांना सांगा, हे सर्व काही अल्लाहतर्फे आहे. यांना झाले तरी काय की एखादी गोष्ट नीट समजूनही घेत नाही.
Nisa' 4:79
७९. तुम्हाला जी काही भलाई लाभते, ती अल्लाहतर्फे आहे आणि जी काही हानि पोहचते ती स्वतः तुमच्याकडून आहे. आम्ही (हे पैगंबर!) तुम्हाला समस्त मानवजातीकरिता रसूल बनवून पाठविले आहे आणि अल्लाह या गोष्टीची साक्ष देण्यास पुरेसा आहे.
Nisa' 4:80
८०. जो कोणी या पैगंबर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) चे आज्ञापालन करील, त्याने अल्लाहचे आज्ञापालन केले आणि जो तोंड फिरवील तर आम्ही तुम्हाला त्यांच्यावर देखरेख ठेवणारा बनवून पाठविले नाही.
Nisa' 4:81
८१. आणि हे म्हणतात की आम्ही आज्ञापालन करतो परंतु जेव्हा तुमच्या जवळून उठून बाहेर पडतात, तेव्हा त्यांच्यातला एक गट, जी गोष्ट तुम्ही किंवा त्याने सांगितली आहे त्याविरूद्ध रात्री सल्लामसलत करतात. त्यांचा रात्रींचा वार्तालाप अल्लाह लिहून घेत आहे. तुम्ही त्यांच्या बोलण्याकडे दुर्लक्ष करा आणि सर्वश्रेष्ठ अल्लाहवर भरोसा ठेवा. काम बनविण्यासाठी अल्लाह पुरेसा आहे.
Nisa' 4:82
८२. काय हे लोक कुरआनवर विचार-चिंतन करीत नाही? जर हा ग्रंथ अल्लाहशिवाय दुसऱ्या कोणातर्फे असता तर खात्रीने यात अनेक मतभेद आढळले असते.
Nisa' 4:83
८३. आणि जेव्हा त्यांना एखादी खबर शांती या भीतीची पोहोचते, ते लगेच तिचा प्रचार करायला सुरुवात करतात. जर यांनी ती खबर पैगंबर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) यांच्यापर्यंत पोहचविली असती किंवा आपल्यातल्या जबाबदार लोकांच्या कानावर टाकली असती तर तिची जाच-पडताळ करणाऱ्यांनी तिची खरी हकीकत माहिती करून घेतली असती. आणि जर अल्लाहची कृपा आणि त्याची दयादृष्टी तुमच्यावर राहिली नसती तर काही लोकांना सोडून तुम्ही सर्व सैतानाच्या मागे चालणारे बनले असते.
Nisa' 4:84
८४. तेव्हा तुम्ही अल्लाहच्या मार्गात जिहाद करीत राहा. तुम्हाला फक्त तुमच्यासाठीच आदेश दिला जात आहे. ईमानधारकांना आकर्षित करीत राहा. फार शक्य आहे की, अल्लाह इन्कारी लोकांचा हल्ला रोखेल आणि अल्लाह मोठा शक्तिशाली आहे आणि शिक्षा देण्यातही फार कठोर आहे.
Nisa' 4:85
८५. जो मनुष्य एखादे पुण्य-कार्य आणि सत्कर्म करण्याची शिफारस करेल तर त्यालाही त्याचा काही हिस्सा मिळेल आणि जो दुराचार व दुष्कर्म करण्याची शिफारस करेल, त्याच्यासाठीही त्यात एक हिस्सा आहे, आणि अल्लाह प्रत्येक गोष्टीचे सामर्थ्य राखतो.
Nisa' 4:86
८६. आणि जेव्हा तुम्हाला सलाम केला जाईल तर तुम्ही त्यापेक्षा चांगले प्रत्युत्तर द्या किंवा तेच शब्द परतून बोला. निःसंशय, अल्लाह प्रत्येक गोष्टीचा हिशोब घेणार आहे.
Nisa' 4:87
८७. अल्लाह तो आहे, ज्याच्याशिवाय दुसरा कोणी (सच्चा) उपास्य नाही. तो तुम्हा सर्वांना निश्चितच कयामतच्या दिवशी एकत्र करील, ज्याच्या येण्याबाबत काहीच शंका नाही. अल्लाहपेक्षा जास्त सत्य वचन आणखी कोणाचे असू शकेल?
Nisa' 4:88
८८. तुम्हाला झाले तरी काय की मुनाफिकां (वरकरणी मुसलमानां) बाबत दोन गटांत विभागले जात आहात. त्यांना तर त्यांच्या करतूतींमुळे अल्लाहने तोंडघशी पाडले आहे. आता काय तुम्ही हे इच्छिता की त्याला मार्ग दाखवावा ज्याला अल्लाहने मार्गभ्रष्ट केले आहे? तेव्हा ज्याला अल्लाह मार्गभ्रष्ट करील, त्याच्यासाठी तुम्हाला कधीही, कोणताही मार्ग दिसून येणार नाही.
Nisa' 4:89
८९. यांना तर मनापासून वाटते की, जसे ते काफिर आहेत तसे तुम्हीही त्यांच्यासारखे ईमानाचा इन्कार करू लागावे आणि तुम्ही सर्व एकसमान व्हावे, यास्तव त्यांच्यापैकी कोणाला आपला खराखुरा मित्र बनवू नका, जोपर्यंत ते अल्लाहच्या मार्गात हिजरत (देश-त्याग) करीत नाहीत. मग जर (यापासून) तोंड फिरवतील तर त्यांना धरा आणि ठार करा, जिथेदेखील आढळतील. खबरदार! त्यांच्यापैकी कोणालाही आपला मित्र आणि सहाय्यक समजून घेऊ नका.
Nisa' 4:90
९०. परंतु जे त्या लोकांशी नाते राखतात, ज्यांच्या आणि तुमच्या दरम्यान समझोता झालेला असेल किंवा ते लोक जे तुमच्या जवळ येतात, ज्यांची मने संकुचित झाली आहेत की तुमच्याशी लढावे की आपल्या लोकांशी लढावे. अल्लाहने इच्छिले असते तर यांना तुमच्यावर वर्चस्व प्रदान केले असते आणि ते अवश्य तुमच्याशी लढले असते. तेव्हा जर असे लोक तुमच्यापासून दूर राहतील आणि लढाई न करतील आणि तुमच्याकडे संधी-समझोत्याचा प्रस्ताव मांडतील तर (अशा स्थितीत) अल्लाहने तुमच्यासाठी, त्यांच्याविरूद्ध लढाईचा कोणताही मार्ग ठेवला नाही.
Nisa' 4:91
९१. तुम्हाला दुसरे काही असेही लोक आढळतील, जे तुमच्यापासून आणि आपल्या जमातीच्या लोकांपासून सुरक्षित राहू इच्छितात, परंतु जेव्हा उपद्रवाकडे त्यांना वळविले जाते तर त्यात तोंडघशी पडतात. जर ते तुमच्यापासून हटले नाहीत आणि तुमच्याशी समझोता न करतील आणि आपले हात न रोखतील तर ते जिथे सापडतील तिथे त्यांना धरा आणि ठार करा. हेच ते लोक आहेत, ज्यांच्याबाबत आम्ही तुम्हाला खुले प्रमाण दिले आहे.
Nisa' 4:92
९२. कोणत्याही ईमानधारकाकरिता हे उचित नाही की त्याने एखाद्या ईमानधारकाची हत्या करावी. परंतु अजाणतेपणी तसे झाल्यास गोष्ट वेगळी. आणि जो मनुष्य एखाद्या ईमानधारकाची चुकीने हत्या करील तर त्याबद्दल त्याला एक ईमानधारक गुलाम (किंवा दासी) मुक्त करणे आणि मारल्या गेलेल्या व्यक्तीच्या नातेवाईकांना रक्ताची किंमत देणे आवश्यक आहे. परंतु त्याने माफ केले तर गोष्ट वेगळी. आणि ज्याची हत्या केली गेली तो मनुष्य जर तुमच्या शत्रू जमातीचा, पण मुस्लिम असेल तर एक मुस्लिम गुलाम मुक्त करणे आवश्यक आहे आणि जर ठार केली गेलेली व्यक्ती त्या जमातीची आहे ज्याच्या आणि तुमच्या (ईमानधारकांच्या) दरम्यान समझोता आहे तर रक्ताची किंमत त्याच्या नातेवाईकांना द्यावी लागेल, तसेच एक ईमानधारक (मुस्लिम) गुलामही मुक्त करावा लागेल आणि ज्याला तसा न आढळेल, त्याला दोन महिने सतत रोजे ठावावे लागतील अल्लाहकडून माफ करून घेण्यासाठी आणि अल्लाह जाणणारा व हिकमत बाळगणारा आहे.
Nisa' 4:93
९३. आणि जो कोणी एखाद्या ईमानधारकाला जाणूनबुजून ठार करील, तर त्याची शिक्षा जहन्नम आहे, ज्यात तो नेहमीकरिता राहील, त्याच्यावर अल्लाहचा प्रकोप आहे. अल्लाहने त्याचा धिःक्कार केला आहे आणि त्याच्यासाठी फार मोठी सजा-यातना तयार करून ठेवली आहे.
Nisa' 4:94
९४. हे ईमान राखणाऱ्यांनो! जेव्हा तुम्ही अल्लाहच्या मार्गात निघाल, तेव्हा नीट जाच-पडताळ करून घेत जा आणि जो तुम्हाला सलाम करून बोलेल त्याला तुम्ही असेही म्हणू नका की तू ईमानधारक नाहीस. तुम्ही ऐहिक जीवनाच्या सुख-साधनांच्या शोधात आहात, तेव्हा अल्लाहजवळ विपुल सुख-साधने आहेत. पूर्वी तुम्हीसुद्धा असेच होते, मग अल्लाहने तुमच्यावर अनुग्रह (उपकार) केला. यास्तव तुम्ही नीट छान-बिन (चौकशी) करून घेत जा. निःसंशय अल्लाह तुमच्या कर्मांना चांगल्या प्रकारे जाणतो.
Nisa' 4:95
९५. जे ईमानधारक अकारण स्वस्थ बसून राहतील आणि जे अल्लाहच्या मार्गात आपल्या प्राणाने व धनाने जिहाद करत असतील तर दोघे समान ठरणार नाहीत. अल्लाहने त्यांना, जे आपले प्राण आणि धन लावून जिहाद करतात, स्वस्थ बसून राहणाऱ्यांवर दर्जाच्या दृष्टीने श्रेष्ठता प्रदान केली आहे. आणि तसे पाहता नेक मोबदल्याचा वायदा तर प्रत्येकाला दिला आहे. तथापि अल्लाहने जिहाद करणाऱ्यांना, स्वस्थ बसून राहणाऱ्यांवर महान मोबदल्याची श्रेष्ठता प्रदान केली आहे.
Nisa' 4:96
९६. आपल्यातर्फे दर्जाचीही, माफीचीही आणि दया-कृपेचीही, आणि अल्लाह मोठा माफ करणारा, दया करणारा आहे.
Nisa' 4:97
९७. जे लोक स्वतःवर अत्याचार करतात, जेव्हा फरिश्ते त्यांचे प्राण ताब्यात घेतात तेव्हा म्हणतात की तुम्ही कोणत्या अवस्थेत होते? ते म्हणतात, आम्ही धरतीवर कमजोर होतो. तेव्हा फरिश्ते विचारतात, काय अल्लाहची जमीन विशाल, व्यापक नव्हती की तुम्ही तिच्यात स्थलांतर केले असते. अशाच लोकांचे ठिकाण जहन्नम आहे आणि ते मोठे वाईट ठिकाण आहे.
Nisa' 4:98
९८. परंतु जे पुरुष, ज्या स्त्रिया आणि लहान मुले लाचार-विवश आहेत, जे कसलीही उपाययोजना करू शकत नाहीत आणि ना मार्ग जाणतात.
Nisa' 4:99
९९. तेव्हा फार शक्य आहे की अल्लाह त्यांना माफ करील आणि अल्लाह मोठा माफ करणारा, क्षमाशील आहे.
Nisa' 4:100
१००. आणि जो कोणी अल्लाहच्या मार्गात हिजरत (देश-त्याग) करील, तर त्याला धरतीवर निवासाकरिता खूप विस्तृत जागा मिळेल आणि खूप समृद्धीही. आणि जो आपल्या घरापासून अल्लाह आणि त्याच्या पैगंबराकडे हिजरत करील, मग त्याला मृत्युने येऊन गाठावे, तरीदेखील त्याचा मोबदला अल्लाहजवळ निश्चित आहे आणि अल्लाह मोठा माफ करणारा, दयावान आहे.
Nisa' 4:101
१०१. आणि जेव्हा जमिनीवर प्रवास करीत असाल तेव्हा नमाज कस्र करण्यात (चार रकअतची नमाज दोन रकअत पढण्यात) तुमच्यावर काही गुन्हा नाही, जर तुम्हाला हे भय असेल की काफिर (श्रद्धाहीन) तुम्हाला त्रास देतील. निःसंशय काफिर लोक तुमचे खुले वैरी आहेत.
Nisa' 4:102
१०२. आणि जेव्हा तुम्ही त्यांच्या दरम्यान असाल आणि त्यांच्यासाठी नमाज कायम कराल, तेव्हा त्यांच्यातला एक गट तुमच्यासोबत शस्त्रानिशी सज्ज उभा राहिला पाहिजे, मग जेव्हा हे सजदा करून घेतील, तेव्हा यांनी तेथून हटावे, व तुमच्या पाठीमागे यावे आणि मग दुसरा गट, ज्याने अद्याप नमाज अदा केली नाही त्याने (पुढे) यावे आणि तुमच्यासोबत नमाज अदा करावी आणि आपला बचाव आणि आपली हत्यारे सोबत बाळगावित. काफिर तर इच्छितात की तुम्ही कसेही करून आपल्या हत्यारांपासून व आपल्या सामुग्रीपासून गाफील व्हावे तर मग त्यांनी अचाानक तुमच्यावर हल्ला करावा, मात्र जेव्हा तुम्हाला काही त्रास-यातना असेल किंवा जोरदार पाऊस अथवा आजारपणामुळे आपली हत्यारे उतरवून ठेवाल तर अशा वेळी तुमच्यावर काही गुन्हा नाही. आणि आपल्या बचावाची सामुग्री सोबत राखत जा. निःसंशय अल्लाहने इन्कार करणाऱ्यांसाठी अपमानदायक शिक्षा तयार करून ठेवली आहे.
Nisa' 4:103
१०३. मग जेव्हा तुम्ही नमाज पढून घ्याल जेव्हा उठता बसता आणि पहुडलेल्या स्थितीत अल्लाहचे स्मरण करीत राहा आणि शांतीपूर्ण स्थिती असेल तर नमाज कायम करा. निःसंशय, नमाज ईमानधारकांवर निश्चित आणि निर्धारीत वेळेवर अदा करणे फर्ज (अनिवार्य) केले गेले आहे.
Nisa' 4:104
१०४. आणि त्या लोकांचा पाठलाग करण्यात आळस करू नका. जर तुम्हाला त्रास-यातना होत आहे तर त्यांनाही त्रास-यातना होते, जशी तुम्हाला होते, आणि तुम्ही अल्लाहकडून त्या आशा-अपेक्षा बाळगता, ज्या ते बाळगत नाहीत, आणि अल्लाह सर्व काही जाणणारा, हिकमतशाली आहे.
Nisa' 4:105
१०५. निःसंशय, आम्ही तुमच्याकडे सत्यासह ग्रंथ अवतरीत केला आहे, यासाठी की तुम्ही लोकांच्या दरम्यान त्याला अनुसरून न्याय-निवाडा करावा, ज्याबाबत अल्लाहने तुम्हाला अवगत केले आणि अपहार करणाऱ्यांचे समर्थक बनू नका.
Nisa' 4:106
१०६. आणि अल्लाहजवळ क्षमा-याचना करीत राहा. निःसंशय अल्लाह मोठा माफ करणारा, दया करणारा आहे.
Nisa' 4:107
१०७. आणि अशा लोकांशी बाजू घेऊन भांडू नका जे स्वतः आपलाच विश्वासघात करतात. निःसंशय, धोकेबाज विश्वासघातकीशी अल्लाह प्रेम राखत नाही.
Nisa' 4:108
१०८. ते लोकांपासून तर लपतात, परंतु अल्लाहपासून लपू शकत नाही. तो त्यांच्यासोबत आहे जेव्हा ते रात्री अप्रिय गोष्टींच्या योजना आखतात आणि अल्लाहने त्यांच्या कारवायांना घेरा टाकलेला आहे.
Nisa' 4:109
१०९. हे तुम्ही आहात की त्यांच्या हक्कात या जगात वाद घालता, परंतु कयामतच्या दिवशी त्यांच्यातर्फे कोण हुज्जत घालील आणि कोण त्यांचा समर्थक बनून उभा राहील?
Nisa' 4:110
११०. आणि जो कोणी वाईट कर्म करील किंवा स्वतः आपल्यावर अत्याचार करील, नंतर अल्लाहजवळ माफी मागील तर त्याला अल्लाह माफ करणारा, दया करणारा आढळून येईल.
Nisa' 4:111
१११. आणि जो गुन्हा करतो, तर त्या गुन्ह्याचे ओझे त्याच्याच (शिरा) वर आहे आणि अल्लाह सर्व काही जाणणारा, हिकमतशाली आहे.
Nisa' 4:112
११२. आणि जो कोणी दुष्कर्म करतो, मग एखाद्या निरपराधीवर त्याचा आरोप ठेवतो, तर त्याने मोठे कुभांड(मोेठा आळ घेतला) रचले आणि फार मोठा गुन्हा केला.
Nisa' 4:113
११३. आणि जर तुमच्यावर अल्लाहची दया-कृपा राहिली नसती, तर त्यांच्या एका गटाने तुम्हाला मार्गभ्रष्ट करण्याचे कारस्थान रचले होते, परंतु ते स्वतःलाच मार्गभ्रष्ट करतात आणि ते तुम्हाला काहीच नुकसान पोहचवू शकत नाही आणि अल्लाहने तुमच्यावर ग्रंथ आणि ज्ञान उतरविले आहे आणि तुम्ही जे जाणत नव्हते ते ज्ञान प्रदान केले आहे आणि तुमच्यावर अल्लाहची फार मोठी कृपा आहे.
Nisa' 4:114
११४. त्यांच्या बहुतेक गुप्त काानगोष्टींमध्ये कसलीही भलाई नाही. परंतु ज्याने उपकार, नेकी किंवा लोकांमध्ये सुधारणा होण्यासाठी आदेश दिला आणि जो हे कार्य अल्लाहची मर्जी (प्रसन्नता) प्राप्त करण्यासाठी करेल, आम्ही खरोखर त्याला फार मोठा मोबदला प्रदान करू.
Nisa' 4:115
११५. आणि जो कोणी, सरळ व सत्य मार्ग स्पष्ट झाल्यानंतर पैगंबर (मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) यांचा विरोध करील आणि ईमानधारकांच्या मार्गाशिवाय अन्य मार्गावर चालेल तर आम्ही त्याला त्याच दिशेने, जिकडे तो फिरत असेल, वळवून टाकू, मग त्याला आम्ही जहन्नममध्ये फेकून देऊ आणि ते मोठे वाईट स्थान आहे.
Nisa' 4:116
११६. अल्लाह, आपल्यासह दुसऱ्या कोणाला सहभागी केले जाणे कदापि माफ करणार नाही आणि याखेरीज इतर अपराधांना, तो ज्याला इच्छिल माफ करील आणि ज्याने अल्लाहसह अन्य कोणाला सहभागी ठरविले तो (सन्मार्गापासून) फार दूर बहकत गेला.
Nisa' 4:117
११७. हे तर अल्लाहला सोडून केवळ देवींना पुकारतात आणि वस्तुतः हे धिःक्कारलेल्या दुष्ट सैतानाला पुकारतात.
Nisa' 4:118
११८. ज्याचा अल्लाहने धिःक्कार केला आहे आणि त्याने (सैतानाने) म्हटले आहे की मी तुझ्या दासांमधून आपला ठराविक हिस्सा निश्चित घेईन.
Nisa' 4:119
११९. आणि त्यांना सरळ मार्गापासून भटकवित राहीन आणि त्यांना खोट्या आशा देत राहील आणि त्यांना शिकवण देईन की जनावरांचे कान चिरा आणि त्यांना सांगेन की अल्लाहने बनविलेले स्वरूप विकृत करा. ऐका! जो, अल्लाहला सोडून सैतानाला आपला मित्र बनवील तर तो उघड अशा तोट्यात राहील.
Nisa' 4:120
१२०. तो त्यांच्याशी तोंडी वायदे करत राहील आणि त्यांना भ्रमाच्या हिरव्या बागा दाखवित राहील (परंतु लक्षात ठेवा) सैतानाने त्यांच्याशी केलेले वायदे पूर्णपणे धोका आहे (मृगजळ) आहे.
Nisa' 4:121
१२१. हेच ते लोक आहेत, ज्यांचे ठिकाण जहन्नम आहे. जिथून त्यांना कदापि सुटका मिळणार नाही.
Nisa' 4:122
१२२. आणि ज्या लोकांनी ईमान राखले, आणि सत्कर्म केले आम्ही त्यांना त्या जन्नतीमध्ये दाखल करू, ज्यांच्या खाली नहरी (प्रवाह) वाहत आहेत. जिथे ते नेहमी नेहमी राहतील. हा अल्लाहचा वायदा आहे जो निःसंशय खरा आहे. आणि अल्लाहपेक्षा, आपल्या कथनात सच्चा आणखी कोण असू शकतो?
Nisa' 4:123
१२३. तुमच्या इच्छा-आकांक्षांनी आणि ग्रंथधारकांच्या इच्छा-आकांक्षांनी काहीही होणार नाही. जो वाईट कर्म करील, त्याची शिक्षा तो प्राप्त करील आणि त्याला अल्लाहखेरीज आपला कोणी मित्र आणि मदत करणारा आढळणार नाही.
Nisa' 4:124
१२४. आणि जो ईमानधारक असेल, मग तो पुरुष असो किंवा स्त्री आणि तो नेक आचरण करील, निःसंशय असे लोक जन्नतमध्ये दाखल होतील आणि तिळाइतकाही त्याचा हक्क मारला जाणार नाही.
Nisa' 4:125
१२५. आणि दीन-धर्म संदर्भात त्याहून चांगला कोण असू शकतो, जो अल्लाहकरिता पूर्णतः आत्मसमर्पण करील आणि तो नेक-सदाचारीही असेल आणि इब्राहीमच्या दीन-धर्माचे अनुसरण केलेला असेल जे एकाग्र होते आणि इब्राहीमला अल्लाहने आपला मित्र बनविले आहे.
Nisa' 4:126
१२६. आणि जे काही आकाशांमध्ये, आणि जमिनीवर आहे, सर्व अल्लाहचेच आहे आणि अल्लाहने प्रत्येक चीज-वस्तूला आपल्या घेऱ्यात घेतले आहे.
Nisa' 4:127
१२७. ते लोक स्त्रियांबाबत तुम्हाला विचारतात. तुम्ही त्यांना सांगा की स्वतः अल्लाह तुम्हाला त्यांच्याविषयी आदेश देतो आणि जे काही ग्रंथात (कुरआनात) तुमच्यासमोर वाचले जाते, त्या अनाथ स्त्रियां (मुलीं) विषयी, ज्यांना तुम्ही त्यांचा अनिवार्य हक्क देत नाही आणि त्यांच्याशी विवाह करू इच्छिता आणि कमजोर मुलांविषयी आणि हे की तुम्ही अनाथांबाबत न्याय करा आणि तुम्ही जेदेखील सत्कर्म कराल अल्लाह ते चांगल्या प्रकारे जाणणारा आहे.
Nisa' 4:128
१२८. आणि जर एखाद्या पत्नीला आपल्या पतीकडून उपेक्षा आणि दुर्लक्ष होण्याचे भय असेल तर त्या दोघांनी आपसात समझोता करून घेण्यात काही वाईट नाही आणि समझोता अधिक चांगला आहे आणि लोभ तर प्रत्येक मनात समाविष्ट केला गेला आहे आणि जर तुम्ही उपकार कराल आणि अल्लाहचे भय राखून आचरण अंगिकाराल तर अल्लाह तुमच्या प्रत्येक कर्माला जाणून आहे.
Nisa' 4:129
१२९. आणि तुम्ही मनापासून इच्छा केली तरीही पत्नींच्या दरम्यान कधीही न्याय करू शकणार नाहीत. यास्तव तुम्ही (एकीच्याचकडे) पूर्णपणे न झुकावे की दुसरीला अधर लोंबकळत सोडून द्यावे आणि जर तुम्ही सुधारणा करून घ्याल, आणि (अन्याय करण्यापासून) स्वतःला वाचवाल तर खात्रीने अल्लाह मोठा माफ करणारा, दया करणारा आहे.
Nisa' 4:130
१३०. आणि जर दोन्ही विभक्त झाले तर अल्लाह आपल्या दया-कृपेने दोघांना निःस्पृह (बेपर्वा) करील आणि अल्लाह मोठा व्यापकता राखणारा हिकमत बाळगणारा आहे.
Nisa' 4:131
१३१. आणि आकाशांचे व जमिनीचे सर्व काही अल्लाहचेच आहे आणि आम्ही तुमच्या पूर्वीचे लोक, ज्यांना ग्रंथ दिला गेला होता, त्यांना आणि तुम्हाला हाच आदेश दिला की अल्लाहचे भय राखा आणि जर तुम्ही मानले नाही तर निःसंशय जे काही आकाशांमध्ये व जमिनीवर आहे सर्व अल्लाहचेच आहे आणि अल्लाह कोणाची गरज नसलेला, प्रशंसनीय आहे.
Nisa' 4:132
१३२. आणि जे काही आकाशांमध्ये व जमिनीवर आहे, सर्व अल्लाहचेच आहे आणि कार्य तडीस नेण्यास अल्लाह पुरेसा आहे.
Nisa' 4:133
१३३. लोकांनो! जर अल्लाहने इच्छिले तर तुम्हाला सर्वांना हटवून देईल, आणि दुसऱ्यांना आणील आणि अल्लाह असे करण्यास पूर्णतः समर्थ आहे.
Nisa' 4:134
१३४. जो मनुष्य या जगाचा मोबदला इच्छित असेल तर (लक्षात ठेवा की) अल्लाहजवळ या जगाचा व आखिरतचा (दोघांचाही) मोबदला हजर आहे आणि अल्लाह ऐकणारा व पाहणारा आहे.
Nisa' 4:135
१३५. हे ईमान राखणाऱ्यांनो! न्यायावर मजबूतीने कायम राहणारे आणि अल्लाहकरिता खरी साक्ष देणारे बना, मग तो साक्ष स्वतः तुमच्याविरूद्ध आणि तुमचे माता-पिता व नातेवाईकांच्या विरूद्ध का असेना, मग तो मनुष्य धनवान असो किंवा गरीब असो तर त्या दोघांपेक्षा अल्लाहचे नाते खूप (जवळचे) आहे. यास्तव न्याय करण्यात मनाला वाटेल ते करू नका, आणि जर चुकीचे निवेदन द्याल किंवा न मानाल तर (जाणून असा की) अल्लाह तुमच्या प्रत्येक कर्माला जाणून आहे.
Nisa' 4:136
१३६. हे ईमान राखणाऱ्यांनो! अल्लाह आणि त्याचे पैगंबर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) आणि त्या ग्रंथा (पवित्र कुरआन) वर जो त्याने आपले पैगंबर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) यांच्यावर अवतरीत केला आहे आणि त्या ग्रंथांवर जे यापूर्वी अवतरीत केले गेले, ईमान राखा आणि जो अल्लाह आणि त्याच्या फरिश्त्यांना आणि त्याच्या ग्रंथांना, त्याच्या पैगंबरांना आणि कयामतच्या दिवसाला न मानेल तो वाट चुकून दूर गेला.
Nisa' 4:137
१३७. निःसंशय, ज्यांनी ईमान राखले मग इन्कार केला, पुन्हा ईमान राखले मग इन्कार केला, इन्कार करण्यात पुढेच जात राहिले, अल्लाह त्यांना कदापि माफ करणार नाही आणि ना सरळ मार्ग दाखविल.
Nisa' 4:138
१३८. मुनाफिक लोकांना (वरकरणी मुसलमानांना) दुःखदायक शिक्षा-यातनेचा शुभ-समाचार द्या.
Nisa' 4:139
१३९. जे ईमानधारकांना सोडून इन्कारी लोकांना आपला मित्र बनवितात काय ते त्यांच्याशी दोस्ती करून मान-प्रतिष्ठा मिळवू इच्छितात? (लक्षात ठेवा) सर्व मान-प्रतिष्ठा अल्लाहकरिता आहे.
Nisa' 4:140
१४०. आणि अल्लाहने तुमच्यासाठी आपल्या ग्रंथात (पवित्र कुरआनात) हा आदेश उतरविला आहे की जेव्हा तुम्ही अल्लाहच्या आयतींशी इन्कार आणि थट्टा-मस्करी होत असल्याचे ऐकाल तेव्हा त्यांच्यासोबत त्या बैठकीत बसू नका जोपर्यंत ते दुसऱ्या गोष्टीवर बोलत नाहीत कारण त्या वेळी तुम्ही त्यांच्यासमान ठराल. निःसंशय अल्लाह, मुनाफिकांना आणि इन्कारी लोकांना जहन्नममध्ये एकत्र करणार आहे.
Nisa' 4:141
१४१. जे तुमच्या बाबतीत प्रतिक्षा करतात, मग जर अल्लाहतर्फे तुमचा विजय असेल तर हे म्हणतात की, काय आम्ही तुमच्यासोबत नव्हतो? आणि जर काफिर लोकांना थोडीशीही सफलता मिळाली तर म्हणतात की, काय आम्ही तुम्हाला (रक्षणआसाठी) घेरा टाकला नव्हता, आणि ईमानधारकांपासून तुमचा बचाव केला नव्हता? तेव्हा, कयामतच्या दिवशी अल्लाहच तुमच्या दरम्यान फैसला करील आणि अल्लाह कधीही काफिरांना (इन्कारी लोकांना) ईमानधारकांवर वर्चस्वशाली होऊ देणार नाही.
Nisa' 4:142
१४२. निःसंशय, मुनाफिक (दुतोंडी) लोक अल्लाहशी कपट करीत आहेत, आणि अल्लाह त्यांना त्या कपटनीतीचा मोबदला देणार आहे आणि जेव्हा नमाजसाठी उभे राहतात तर केवळ लोकांना दाखविण्यासाठी आणि अल्लाहचे स्मरण फार कमी करतात.
Nisa' 4:143
१४३. ते मधल्यामधेच (शंका-संशयाच्या) दुविधापूर्ण अवस्थेत आहेत ना पूर्णपणे त्यांच्या बाजूला आणि ना उचितरित्या यांच्या बाजूला, आणि ज्याला अल्लाह सरळ मार्गापासून दूर करील, तर त्याच्यासाठी तुम्हाला कोणताही मार्ग आढळणार नाही.
Nisa' 4:144
१४४. हे ईमान राखणाऱ्यांनो! ईमानधारकांना सोडून इन्कारी लोकांना आपला मित्र बनवू नका. काय तुम्ही असे इच्छिता की आपल्यावर अल्लाहतर्फे (शिक्षेचे) खुले प्रमाण कायम करून घ्यावे?
Nisa' 4:145
१४५. निःसंशय, मुनाफिक लोक तर जहन्नमच्या सर्वांत खालच्या दर्जात जातील. निश्चितच तुम्हाला त्यांचा कोणताही मदत करणारा आढळणार नाही.
Nisa' 4:146
१४६. परंतु जर माफी मागतील आणि आपले आचरण सुधारतील आणि अल्लाहवर पूर्ण ईमान राखतील आणि प्रामाणिकपणे अल्लाहकरिताच दीन-धर्माचे कार्य करतील तर हे लोक ईमानधारकांच्या सोबत आहेत. अल्लाह ईमान राखणाऱ्यांना फार मोठा मोबदला प्रदान करील.
Nisa' 4:147
१४७. अल्लाह तुम्हाला शिक्षा-यातना देऊन काय करील जर तुम्ही कृतज्ञशील राहाल आणि ईमानासह राहाल आणि अल्लाह फार कदर करणारा आणि सर्व काही जाणणारा आहे.
Nisa' 4:148
१४८. उंच स्वरात वाईट गोष्ट जाहीर करणे अल्लाहला पसंत नाही, तथापि अत्याचारपीडिताला याची मुभा आहे, आणि अल्लाह ऐकणारा व जाणणारा आहे.
Nisa' 4:149
१४९. जर तुम्ही एखादे सत्कर्म उघडपणे करा किंवा लपवून करा अथवा एखाद्या वाईट गोष्टीला माफ कराल तर निःसंशय अल्लाह माफ करणारा, सामर्थ्यशाली आहे.
Nisa' 4:150
१५०. जे लोक अल्लाह आणि त्याच्या पैगंबरांवर ईमान राखत नाहीत आणि असे इच्छितात की अल्लाह आणि त्याच्या पैगंबरांच्या दरम्यान दुरावा निर्माण करावा आणि म्हणतात की आम्ही काहींना मानतो आणि काहींना मानत नाही. आणि याच्या दरम्यान एक वेगळा मार्ग काढू इच्छितात.
Nisa' 4:151
१५१. निःसंशय, हे सर्व लोक पक्के काफिर आहेत१ आणि अशा इन्कारी लोकांसाठी आम्ही अतिशय कठोर शिक्षा-यातना तयार करून ठेवली आहे.
———
(१) ग्रंथधारकांविषयी यापूर्वी हे सांगितले गेले की ते काही पैगंबरांना मान्य करीत, तर काहींना मानत नसत. उदा. यहूदी लोक पैगंबर ईसा आणि हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम यांना मानत नाहीत आणि ख्रिश्चन लोक हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लमयांना मान्य करीत नाही. सर्वश्रेष्ठ अल्लाहने फर्माविले की पैगंबरांच्या दरम्यान फरक करणारे कट्टर काफिर आहेत.
Nisa' 4:152
१५२. आणि ज्या लोकांनी अल्लाह आणि त्याच्या पैगंबरांवर ईमान राखले, आणि त्यांच्यापैकी कोणाच्या दरम्यान फरक केला नाही, तर अशाच लोकांना अल्लाह त्यांचा पुरेपूर मोबदला देईल आणि अल्लाह मोठा माफ करणारा दया करणारा आहे.
Nisa' 4:153
१५३. (हे पैगंबर!) ग्रंथधारक तुमच्याजवळ अशी मागणी करतात की तुम्ही त्यांच्यावर आकाशातून एखादा ग्रंथ उतरवून दाखवा १ तेव्हा त्यांनी मूसाकडे यापेक्षा मोठी मागणी केली होती आणि म्हटले की आम्हाला स्पष्टपणे अल्लाहला दाखवा. मग त्यांना त्यांच्या या अत्याचारामुळे विजेने येऊन घेरले, मग त्यांनी स्पष्ट निशाण्या येऊन पोहचल्यावरही वासराला उपास्य बनविले. तरीही आम्ही त्यांना माफ केले आणि मूसा यांना स्पष्ट प्रमाण प्रदान केले.
———
(१) अर्थात ज्याप्रमाणे हजरत मूसा (अलैहिस्सलाम) तूर पर्वतावर गेले आणि येताना शिळांवर लिहिलेला तौरात घेऊन आले. त्याचप्रमाणे तुम्ही आकाशात जाऊन लिखित स्वरूपात पवित्र कुरआन घेऊन या. अर्थात ही मागणी केवळ उपद्रव, इन्कार आणि द्वेष मस्तरावर आधारीत होती.
Nisa' 4:154
१५४. आणि त्यांच्याकडून वचन घेण्याकरिता, आम्ही तूर पर्वताला त्यांच्यावर अधांतरीत ठेवले आणि त्यांना आदेश दिला की सजदा करीत दरवाज्यात प्रवेश करा आणि हाही आदेश दिला की शनिवारच्या दिवशी उल्लंघन करून नका आणि आम्ही त्यांच्याकडून अगदी पक्का वायदा घेतला.
Nisa' 4:155
१५५. मग त्यांनी आमच्याशी जो वायदा केला होता, त्यापासून मुकरले आणि अल्लाहच्या आयतींचा इन्कार करू लागले, येथपर्यंत की अल्लाहच्या पैगंबरांना नाहक ठार मारले आणि असेही म्हणू लागले होते की आमची मने आवरणाखाली आहेत, (असे नाही) किंबहुना अल्लाहने त्यांच्या इन्कार करण्यापायी त्यांच्या हृदयांना मोहरबंद केले आहे. तेव्हा त्यांच्यापैकी फार थोडेच लोक ईमान राखतात.
Nisa' 4:156
१५६. आणि त्यांच्या इन्कार करण्यामुळे आणि मरियमवर मिथ्या आरोप ठेवण्यामुळे.
Nisa' 4:157
१५७. आणि त्यांच्या या कथनामुळे की आम्ही मरियमचे पुत्र ईसा मसीहची हत्या करून टाकली, जे अल्लाहचे पैगंबर होते, वास्तविक ना तर त्यांनी हत्या केली, ना त्यांना सूळावर चढविले, परंतु त्यांच्यासाठी ईसाची छबी बनविली गेली१ निश्चितच ईसा यांच्याविषयी मतभेद करणारे संशयात पडले आहेत. केवळ अटकळीच्या गोष्टीवर चालण्याखेरीज त्यांना कसलेही ज्ञान नाही. एवढे निश्चित की त्यांचा वध केला गेला नाही.
———
(१) अर्थात जेव्हा हजरत ईसा यांना यहूद्यांच्या कटाची बातमी कळाली तेव्हा त्यांनी आपल्या अनुयायींना, ज्यांची संख्या १२ किंवा १७ होती, जमा केले आणि फर्माविले की तुमच्यापैकी कोण माझ्या जागी बलिदान देण्यास तयार आहे? यासाठी की अल्लाहने त्याचे स्वरूप अगदी माझ्यासारखे बनवावे. एक तरुण यासाठी तयार झाला, म्हणून हजरत ईसा यांना तेथून आकाशात उचलले गेले, त्यानंतर यहूदी आले आणि त्यांनी या तरुणाला सूळावर चढविले, ज्याला ईसासारखे बनविले गेले होते. यहूदी हेच समजत राहिले की आम्ही हजरत ईसा यांना सूळावर चढविले. वास्तविक हजरत ईसा त्याच क्षणी तिथे हजर नव्हतेच. त्यांना तर जिवंत अवस्थेत सशरीर आकाशात उचलले गेले होते. (इब्ने कसीर आणि फतहुल कदीर)
Nisa' 4:158
१५८. किंबहुना अल्लाहने त्यांना आपल्याकडे उचलून घेतले आणि अल्लाह जबरदस्त हिकमत बाळगणारा आहे.
Nisa' 4:159
१५९. ग्रंथधारकांपैकी कोणी असा नसेल जो (हजरत) ईसा यांच्या मृत्युपूर्वी त्यांच्यावर ईमान न राखेल, आणि कयामतच्या दिवशी ते त्यांच्यावर साक्षी राहतील.
Nisa' 4:160
१६०. यहूदी लोकांच्या जुलूम-अत्याचारामुळे आम्ही त्यांच्यावर हलाल (वैध) चीज वस्तूंना, हराम (अवैध) करून टाकले आणि त्यांचे अल्लाहच्या मार्गापासून लोकांना अडवण्यामुळे.
Nisa' 4:161
१६१. आणि त्यांच्या व्याज घेण्यामुळे, ज्यापासून त्यांना रोखले गेले होते, आणि लोकांचा माल (धन-दौलत) नाहक हडप केल्यामुळे, आणि आम्ही यांच्यातल्या काफिरांकरिता दुःखदायक शिक्षा-यातना तयार करून ठेवली आहे.
Nisa' 4:162
१६२. परंतु त्यांच्यात जे परिपक्व आणि मजबूत ज्ञान राखणारे आहेत, आणि ईमानधारक आहेत, जे त्यावर ईमान राखतात, जे तुमच्याकडे उतरविले गेले, आणि जे तुमच्यापूर्वी उतरविले गेले आणि नमाज कायम करणारे आहेत, जकात अदा करणारे आहेत, अल्लाहवर आणि कयामतच्या दिवसावर ईमान राखणारे आहेत. हे असे लोक आहेत, ज्यांना आम्ही फार मोठा मोबदला प्रदान करू.
Nisa' 4:163
१६३. निःसंशय, आम्ही तुमच्याकडे त्याचप्रमाणे संदेश अवतरीत केला आहे, ज्याप्रमाणे नूह (अलैहिस्सलाम) आणि त्यांच्या नंतरच्या पैगंबरांकडे आम्ही संदेश अवतरीत केला, आणि इब्राहीम आणि इस्माईल आणि इसहाक आणि याकूब आणि त्यांच्या संततीवर आणि ईसा व अय्यूब आणि यूनुस आणि हारुन आणि सुलेमान यांच्याकडे आणि आम्ही दाऊद (अलैहिस्सलाम) यांना जबूर (ग्रंथ) प्रदान केला.
Nisa' 4:164
१६४. आणि तुमच्या पूर्वीच्या अनेक पैगंबरांचे वृत्तांत आम्ही तुम्हाला सांगितले आहेत, आणि बहुतेक पैगंबरांचे सांगितले नाहीत आणि (हजरत) मूसा यांच्याशी अल्लाहने सरळ संभाषण केले.
Nisa' 4:165
१६५. (आम्ही या सर्वांना) शुभ वार्ता देणारा आणि सचेत करणारा रसूल (पैगंबर) बनविले, यासाठी की पैगंबरांना पाठविल्यानंतर लोकांना एखादे निमित्त वा सबब अल्लाहपुढे मांडण्याची संधी राहू नये आणि अल्लाह मोठा जबरदस्त आणि हिकमतशाली आहे.
Nisa' 4:166
१६६. जे काही तुमच्याकडे उतरविले गेले आहे, त्याविषयी अल्लाह स्वतः साक्ष देतो की ते त्याने आपल्या ज्ञानाने अवतरीत केले आहे आणि फरिश्तेदेखील साक्ष देतात आणि साक्ष देण्यास केवळ अल्लाह पुरेसा आहे.
Nisa' 4:167
१६७. निःसंशय, ज्यांनी इन्कार केला आणि अल्लाहच्या मार्गा (दीन-धर्मा) पासून रोखले, तर ते खूप दूर भटकले.
Nisa' 4:168
१६८. निःसंशय, ज्यांनी इन्कार केला आणि जुलूम-अत्याचार केला तर अल्लाह त्यांना माफ करणारा नाही आणि ना त्यांना एखादा सन्मार्ग दाखवील.
Nisa' 4:169
१६९. परंतु जहन्नमचा मार्ग, ज्यात ते सदासर्वदा राहतील आणि हे अल्लाहकरिता फार सोपे आहे.
Nisa' 4:170
१७०. लोक हो! तुमच्याजवळ तुमच्या पालनकर्त्यातर्फे सत्य घेऊन पैगंबर (मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) आले. त्यांच्यावर ईमान राखा. तुमच्यासाठी अधिक चांगले आहे आणि जर तुम्ही इन्कार केला तर आकाशांमध्ये व धरतीवर जे काही आहे सर्व अल्लाहचेच आहे आणि अल्लाह सर्वज्ञ आणि हिकमतशाली आहे.
Nisa' 4:171
१७१. हे ग्रंथधारकांनो! आपल्या दीन-धर्माबाबत अतिशयोक्ती करू नका, आणि अल्लाहच्या संबंधाने सत्य तेच बोला. निःसंशय मरियमपुत्र ईसा मसीह केवळ अल्लाहचे रसूल आणि कलिमा आहे जो मरियमकडे पाठविला गेला आणि त्याच्यातर्फे आत्मा आहे, यास्तव अल्लाह आणि त्याच्या पैगंबरांवर ईमान राखा आणि अल्लाह तीन आहे असे म्हणू नका.१ हे म्हणणे थांबवा यातच तुमचे हित आहे. निःसंशय तुमचा उपास्य केवळ एक अल्लाह आहे. तो पाक-पवित्र आहे, यापासून की त्याची एखादी संतान असावी. त्याच्याचकरिता आहे जे काही आकाशांमध्ये व धरतीवर आहे आणि अल्लाह काम बनविण्यासाठी पुरेसा आहे.
———
(१) ख्रिश्चनांमध्ये अनेक गट आहेत. काहीजण हजरत ईसा यांना अल्लाह, काहीजण अल्लाहचे सहभागी तर काही अल्लाहचा पुत्र मानतात, मग जे अल्लाह मानतात ते तीन अल्लाहचे आणि हजरत ईसा यांना तीनपैकी एक असण्यावर श्रद्धा ठेवतात. यास्तव सर्वश्रेष्ठ अल्लाह फर्मावितो की तीन अल्लाह म्हणणे थांबवा. अल्लाह केवळ एक आहे.
Nisa' 4:172
१७२. मसीह, अल्लाहचे दास होण्यात कधीही तिरस्कार करीत नाहीत आणि ना निकटचे फरिश्ते, आणि जो अल्लाहची उपासना करण्यापासून तिरस्कार व घमेंड करील तर तो त्या सर्वांना आपल्याकडे एकत्र करील.
Nisa' 4:173
१७३. तेव्हा, ज्या लोकांनी ईमान राखले आणि सत्कर्म करीत राहिले, त्यांना त्यांचा पुरेपूर मोबदला देईल, आणि आपल्या कृपेने आणखी जास्त प्रदान करील, परंतु ज्यांनी तिरस्कार केला आणि घमेंड केली त्यांना दुःखदायक शिक्षा-यातना देईल, मग त्यांना अल्लाहशिवाय आपला कोणी मित्र व मदत करणारा आढळणार नाही.
Nisa' 4:174
१७४. लोकांनो! तुमच्याजवळ तुमच्या पालनकर्त्यातर्फे प्रमाण येऊन पोहचले आहे १ आणि आम्ही तुमच्याकडे दिव्य तेज (पवित्र कुरआन) अवतरीत केले आहे.
———
(१) मूळ शब्द बुरहान अर्थात असे अकाट्य प्रमाण की ज्याच्यानंतर कसल्याही निमित्त किंवा बहाण्याला वाव न राहावा. अशी उपाययोजना की ज्यामुळे सर्व प्रकारच्या शंका-कुशंका नष्ट व्हाव्यात यास्तव पुढे याला आकाशीय दिव्य तेज (नूर) म्हटले गेले आहे.
Nisa' 4:175
१७५. मग ज्या लोकांनी अल्लाहवर ईमान राखले आणि त्याला मजबूतपणे धरले तर अल्लाह त्यांना आपल्या कृपाछत्रात घेईल आणि त्यांना आपल्याकडे येण्याचा सरळ मार्ग दाखवील.
Nisa' 4:176
१७६. ते तुम्हाला कलालाविषयी (अर्थात आई-बाप आणि संतती नसलेल्या मयताविषयी) विचारतात. तुम्ही सांगा, अल्लाह कलालाविषयी आदेश देतो की जर एखादा पुरुष मरण पावेल आणि त्याच्या वारसांमध्ये कोणी संतान नसेल आणि त्याला एक बहीण असेल तर तिच्यासाठी मयताने मागे सोडलेल्या धन-संपत्तीचा अर्धा हिस्सा आहे आणि तो त्या (बहिणी) चा वारस आहे. जर त्याला एखादी संतती नसेल, जर दोन बहिणी असतील तर त्या दोघींसाठी दोन तृतियांश हिस्सा आहे. त्यातून जे तो सोडून गेला. आणि जर भाऊ बहिणी दोन्ही असतील पुरुषही आणि स्त्रियाही तर पुरुषाकरिता, दोन स्त्रियांच्या हिश्याइतका हिस्सा आहे. अल्लाह तुमच्यासाठी स्पष्ट सांगत आहे, यासाठी की तुम्ही (इतस्ततः) भटकत फिरू नये आणि अल्लाह सर्व काही जाणणारा आहे.
Maide 5:1
१. हे ईमान राखणाऱ्यांनो! आपले वचन-करार पूर्ण करा. तुमच्यासाठी चार पायांचे पाळीव पशू हलाल (वैध) केले गेले आहेत, त्यांच्याखेरीज, जे वाचून तुम्हाला ऐकविले जात आहेत. परंतु एहरामच्या स्थितीत शिकार करू नका. निःसंशय अल्लाहने जे इच्छिले त्याचा आदेश देतो.
Maide 5:2
२. हे ईमान राखणाऱ्यांनो! अल्लाहच्या धर्म-प्रतिकांचा (शआईरचा) अवमान करू नका, ना आदरणीय महिन्यांचा, ना कुर्बानीकरिता हरम (काबागृहा) पर्यंत नेल्या जाणाऱ्या आणि गळ्यात पट्टा घातलेल्या जनावराचा, ना आदरणीय घरा (काबागृहा) कडे जाणाऱ्या लोकांचा जे अल्लाहची दया आणि प्रसन्नता शोधत आहेत. आणि जेव्हा एहराम उतरवाल तेव्हा मग शिकार करू शकतात आणि ज्यांनी तुम्हाला आदरणीय मसजिदीपासून रोखले, त्यांची शत्रूता तुम्हाला हद्द ओलांडण्यास प्रवृत्त न करावी आणि नेकी व अल्लाहचे भय राखण्यात एकमेकांची मदत करा. अपराध आणि अत्याचाराच्या कामात मदत करू नका. अल्लाहचे भय बाळगून राहा. निःसंशय अल्लाह मोठा सक्त अज़ाब (कठोर शिक्षा-यातना) देणारा आहे.
Maide 5:3
३. तुमच्यावर हराम (अवैध) केले गेले आहे मेलेले जनावर आणि रक्त आणि डुकराचे मांस, आणि ज्यावर अल्लाहशिवाय दुसऱ्यांचे नाव घेतले गेले असेल आणि ते जनावर जे गळा दाबल्याने मेले आणि जे ठोस लागून मेले असेल आणि जे खाली कोसळून मेले आणि जे दुसऱ्या जनावराने शिंग मारल्याने मेले आणि ज्याचा काही हिस्सा हिंस्र पशूंनी खआऊन टाकला असेल, परंतु ज्याला तुम्ही जिबह करून टाकले आणि जे देवस्थानावर बळी दिले गेले असेल आणि फाँसे टाकून (जुगार सट्ट्याप्रमाणे) वाटणी करणे हे सर्व फार मोठे अपराध आहेत. आज काफिर (अनेकेश्वरवादी) तुमच्या दीन-धर्माद्वारे निराश झाले, यास्तव त्यांचे भय बाळगू नका, फक्त माझेच भय बाळगा. आज मी तुमच्यासाठी तुमच्या दीन-धर्माला परिपूर्ण केले आणि तुमच्यावर आपल्या कृपा-देणग्या पूर्ण केल्या आणि तुमच्यासाठी इस्लाम धर्म पसंत केला. तथापि जो भूकेने व्याकूळ होईल आणि कोणताही गुन्हा करू इच्छित नसेल तर खात्रीने अल्लाह माफ करणारा, मोठा दयाशील आहे.
Maide 5:4
४. ते तुम्हाला विचारतात की त्यांच्यासाठी कोणकोणते खाद्य उचित आहे. तुम्ही सांगा की तुमच्यासाठी स्वच्छ शुद्ध व पवित्र वस्तू उचित आहेत. आणि ते शिकारी जनावर, ज्याला तुम्ही प्रशिक्षण देऊन तयार केले असेल, ज्यांना काही गोष्टी शिकविता, ज्या अल्लाहने तुम्हाला शिकविल्या, तेव्हा जर तुमच्यासाठी ते जनावर, शिकार जखमी करून धरून ठेवील आणि त्याला सोडताना अल्लाहचे नाव त्याच्यावर घ्याल तर ती शिकार तुम्ही खाऊ शकता आणि अल्लाहचे भय राखा निःसंशय, अल्लाह लवकरच हिशोब घेणारा आहे.
Maide 5:5
५. आज सर्व पाक-साफ वस्तू तुमच्यासाठी हलाल (वैध) केल्या गेल्या आहेत. आणि ग्रंथधारकांनी जिबह केलेले जनावर तुमच्यासाठी हलाल आहे. आणि तुम्ही जिबह केलेले त्यांच्यासाठी हलाल आहे आणि सुशील सदाचारी ईमानधारक स्त्रिया आणि ज्यांना तुमच्यापूर्वी ग्रंथ (धर्मशास्त्र) दिले गेले, त्यांच्यातल्या सुशील, सदाचारी स्त्रिया, जेव्हा तुम्ही त्यांना त्यांचा महर अदा कराल, विवाह करून, दुराचार करण्यासाठी नव्हे आणि ना लपून छपून प्रेयसी बनविण्याकरिता आणि जो ईमानचा इन्कार करील तर त्याचे सर्व कर्म वाया गेले आणि तो आखिरतमध्ये तोट्यात राहील.
Maide 5:6
६. हे ईमान राखणाऱ्यांनो! जेव्हा तुम्ही नमाजसाठी उठाल तेव्हा आपले तोंड व कोपरांपर्यंत आपले हात धुवून घ्या आणि दोन्ही हात पाण्याने ओले करून आपल्या डोक्यावरून फिरवून घ्या आणि आपले पाय, घोट्यापर्यंत धुवून घ्या आणि तुम्ही जर नापाक (अपवित्र) असाल तर स्नान करा आणि जर तुम्ही आजारी किंवा प्रवासात असाल, किंवा तुमच्यापैकी कोणी शौचास जाऊन येईल किंवा तुम्ही पत्नीशी सहवास केला असेल आणि पाणी मिळत नसेल तर साफ स्वच्छ मातीने तयम्मुम करून घ्या. ती माती आपल्या चेहऱ्यावर आणि हातांवर मळा, अल्लाह तुम्हाला अडचणीत टाकू इच्छित नाही. किंबहुना तुम्हाला स्वच्छ शुद्ध व पवित्र करू इच्छितो आणि यासाठी की तुमच्यावर आपली कृपा-देणगी पूर्ण करावी आणि यासाठी की तुम्ही कृतज्ञशील राहावे.
Maide 5:7
७. आणि आपल्यावर झालेली अल्लाहची कृपा देणगी आणि त्या वचन कराराचे स्मरण करा, ज्याचा तुमच्याशी करार झाला, जेव्हा तुम्ही म्हटले की आम्ही ऐकले आणि मान्य केले आणि सर्वश्रेष्ठ अल्लाहचे भय बाळगत राहा. निःसंशय अल्लाह मनात लपलेल्या गोष्टींनाही जाणतो.
Maide 5:8
८. हे ईमान राखणाऱ्यांनो! अल्लाहकरिता सत्यावर अटळ राहून न्यायाच्या बाजूने साक्षी व्हा, आणि एखाद्या जमातीची शत्रूता तुम्हाला न्याय न करण्यावर प्रवृत्त न करावी. न्याय करा, ते अल्लाहचे भय राखण्याशी फार जवळचे आहे, आणि अल्लाहचे भय राखा. निःसंशय, अल्लाह तुमच्या प्रत्येक कर्माला चांगल्या प्रकारे जाणून आहे.
Maide 5:9
९. ज्या लोकांनी ईमान राखले आणि सत्कर्म करीत राहिले, अल्लाहने त्यांच्याशी माफी आणि फार मोठ्या मोबदल्याचा वायदा केला आहे.
Maide 5:10
१०. आणि ज्यांनी ईमान राखले नाही आणि आमच्या आदेशांना खोटे ठरविले तेच जहन्नमी आहेत.
Maide 5:11
११. हे ईमान राखणाऱ्यांनो! अल्लाहने तुमच्यावर जे उपकार केले आहेत, त्यांचे स्मरण करा, जेव्हा एका जनसमूहाने तुमच्यावर अत्याचार करू इच्छिले, तेव्हा अल्लाहने त्यांच्या हातांना तुमच्यापर्यंत पोहचण्यापासून रोखले, आणि अल्लाहचे भय बाळगून राहा आणि ईमान राखणाऱ्यांनी तर सर्वश्रेष्ठ अल्लाहवरच भरोसा ठेवला पाहिजे.
Maide 5:12
१२. आणि सर्वश्रेष्ठ अल्लाहने इस्राईलच्या पुत्रांकडून वचन-करार घेतला आणि त्यांच्यातूनच बारा सरदार आम्ही नियुक्त केले, आणि अल्लाहने फर्माविले, मी निश्चितच तुमच्यासोबत आहे, जर तुम्ही नमाज कायम राखाल आणि जकात देत राहाल आणि माझ्या पैगंबरांना मानत राहाल आणि त्यांची मदत करीत राहाल आणि अल्लाहला उत्तम कर्ज देत राहाल तर निःसंशय मी तुमचे अपराध माफ करीन आणि तुम्हाला अशा जन्नतींमध्ये दाखल करीन, ज्यांच्या खाली नहरी (प्रवाह) वाहत आहे. आता या वायद्यानंतरही तुमच्यापैकी जो इन्कार करील तर निःसंशय तो सरळ मार्गापासून दूर भटकला.
Maide 5:13
१३. मग जेव्हा त्यांनी वचन-कराराचा भंग केला, तेव्हा आम्ही त्यांच्यावर धिःक्काराचा मारा केला आणि त्यांची मने कठोर केलीत की ते अल्लाहच्या वाणीला तिच्या स्थानापासून बदलून टाकतात आणि जो उपदेश त्यांना दिला गेला, त्याचा फार मोठा भाग ते विसरले. त्यांच्या बेईमानी व दगाबाजीची एक न एक खबर तुम्हाला मिळत राहील. परंतु थोडेसे (लोक) असेही नाहीत, तरीही तुम्ही त्यांना माफ करीत राहा. आणि माफ करीत राहा. निःसंशय अल्लाह उपकार करणाऱ्यांना पसंत करतो.
Maide 5:14
१४. आणि जे स्वतःला ख्रिश्चन म्हणवून घेतात, आम्ही त्यांच्याकडूनही वायदा घेतला होता, त्यांनीही त्याचा मोठा हिस्सा ध्यानी राखला नाही, जी शिकवण त्यांना दिली गेली होती, तेव्हा आम्हीही त्यांच्या दरम्यान शत्रूता आणि तिरस्कार निर्माण केला, जो कयामतपर्यर्ंत राहील आणि जे काही हे करतात लवकरच अल्लाह त्यांना ते सर्व दाखवून देईल.
Maide 5:15
१५. हे ग्रंथधारकांनो! तुमच्याजवळ आमचे पैगंबर (मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) आले आहेत, जे अनेक अशा गोष्टी सांगत आहेत, ज्या ग्रंथा (तौरात आणि इंजील) च्या गोष्टी तुम्ही लपवित होते, आणि बहुतेक गोष्टींना सोडत आहात. तुमच्याजवळ अल्लाहतर्फे नूर (दिव्य तेज) आणि स्पष्ट असा ग्रंथ (पवित्र कुरआन) येऊन पोहोचला आहे.१
———
(१) नूर आणि स्पष्ट ग्रंथ, दोघांशी अभिप्रेत एकच ‘पवित्र कुरआन’ आहे यांच्यामधील ‘वाव’ (अरबी शब्द) भाष्यकरिता आहे. तथापि दोघांशी अभिप्रेत एकच अर्थात कुरआन आहे. ज्याचा स्पष्ट पुरावा पवित्र कुरआनाची पुढची आयत आहे, ज्यात म्हटले जात आहे की याच्याद्वारे अल्लाह मार्ग दाखवितो जर नूर आणि ग्रंथ दोन भिन्न गोष्टी असत्या तर वाक्य असे राहिले असते- ‘अल्लाह या दोघांद्वारे मार्गदर्शन करतो.’ परंतु असे नाही. यास्तव कुरआनातील या शब्दांद्वारे स्पष्ट झाले की नूर आणि स्पष्ट ग्रंथ या दोघांशी अभिप्रेत कुरआनच आहे असे नव्हे की नूरशी अभिप्रेत नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) आणि स्पष्ट ग्रंथाशी अभिप्रेत पवित्र कुरआन, अर्थात हा आशय, इस्लाम धर्मात नवनवीन गोष्टींचा समाविष्ट करणाऱ्या, मनगढत रचना करणाऱ्या लोकांनी आपल्या मनाने घेतला आहे.
Maide 5:16
१६. ज्याच्याद्वारे अल्लाह त्या लोकांना सलामतीचा मार्ग दाखवितो, जे त्याच्या प्रसन्नतेच्या मार्गावर चालतील आणि त्यांना अंधारातून बाहेर काढून आपल्या दया-कृपेच्या दिव्य तेजाकडे आणतो आणि त्यांना सरळ मार्ग दाखवितो.
Maide 5:17
१७. निःसंशय ते लोक काफिर (अविश्वासी) झाले, जे म्हणाले की मरियम-पुत्र मसीह अल्लाह आहे. त्यांना सांगा की जर मरियम-पुत्र मसीह आणि त्याची माता आणि साऱ्या जगातील सर्व लोकांना तो नष्ट करू इच्छिल तर असा कोण आहे, ज्याला अल्लाहसमोर (वाचविण्याचा) तिळमात्र अधिकार आहे? आणि आकाशांमध्ये व धरतीवर आणि जे काही या दोघांच्या दरम्यान आहे, सर्वत्र अल्लाहचीच राज्य-सत्ता आहे. तो जे काही इच्छितो, निर्माण करतो आणि अल्लाह प्रत्येक गोष्टीचे सामर्थ्य बाळगतो.
Maide 5:18
१८. आणि यहूदी व ख्रिश्चन म्हणतात की आम्ही अल्लाहचे पुत्र आणि मित्र आहोत. तुम्ही सांगा की मग अल्लाह तुमच्या अपराधांपायी तुम्हाला शिक्षा का देतो? नव्हे, किंबहुना तुम्ही त्याच्या सृष्ट निर्मितीत एक मानव आहात. तो ज्याला इच्छितो, माफ करतो आणि ज्याला इच्छितो शिक्षा-यातना देतो. आकाशांची व जमिनीची आणि यांच्या दरम्यानची राज्यसत्ता केवळ अल्लाहचीच आहे, आणि त्याच्याचकडे परतावयाचे आहे.
Maide 5:19
१९. हे ग्रंथधारकांनो! पैगंबरांच्या आगमनात एक दीर्घ काळाच्या खंडानंतर आमचे रसूल (मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) येऊन पोहोचले आहेत, जे तुमच्यासाठी धर्म विधानांचे निवेदन करीत आहेत यासाठी की तुम्ही असे न म्हणावे की आमच्याजवळ कोणी शुभ समाचार देणारा आणि सचेत करणारा आला नाही. तेव्हा तुमच्याजवळ एक शुभ समाचार देणारा आणि सचेत करणारा (अंतिम रसूल) येऊन पोहोचला आहे. निःसंशय अल्लाह प्रत्येक गोष्टीचे सामर्थ्य बाळगतो.
Maide 5:20
२०. आणि स्मरण करा जेव्हा मूसा (अलैहिस्सलाम) यांनी आपल्या लोकांना म्हटले की हे माझ्या जनसमूहाच्या लोकांनो! अल्लाहच्या त्या उपकाराची आठवण करा की त्याने तुमच्यामधून पैगंबर बनविले आणि तुम्हाला राज्य प्रदान केले आणि तुम्हाला ते प्रदान केले, जे साऱ्या जगात कोणालाही प्रदान केले नाही.
Maide 5:21
२१. हे माझ्या लोकांनो! त्या पवित्र भूमीत दाखल व्हा, जी अल्लाहने तुमच्या नावे लिहून दिली आहे. आणि आपली पाठ दाखवू नका की ज्यामुळे मोठे हानिकारक व्हाल.
Maide 5:22
२२. त्यांनी उत्तर दिले, हे मूसा! तिथे तर शक्तिशाली लढवय्ये लोक आहेत. आणि जोपर्यंत ते तिथून निघून जात नाहीत, तोपर्यंत आम्ही कधीही जाणार नाहीत, मात्र जर ते तिथून निघून जातील तर मग आम्ही (आनंदाने) तेथे जाऊ.
Maide 5:23
२३. परंतु जे अल्लाहचे भय बाळगत होते, त्यांच्यापैकी दोन मनुष्य म्हणाले, ज्यांच्यावर अल्लाहने कृपा देणगी केली, की तुम्ही त्यांच्यावर (आक्रमणासाठी) दरवाजातून दाखल व्हा, जेव्हा दाखल व्हाल तेव्हा तुम्हीच वरचढराहाल, आणि ईमान राखत असाल तर अल्लाहवरच भरोसा ठेवा.
Maide 5:24
२४. ते म्हणाले, हे मूसा! आम्ही कधीही तिथे जाणार नाहीत, जोपर्यंत ते तिथे राहतील, यास्तव तुम्ही आणि तुमचा रब (पालनहार) दोघे जाऊन लढा, आम्ही इथेच बसतो.
Maide 5:25
२५. मूसा म्हणाले, हे माझ्या पालनकर्त्या! मी फक्त स्वतःवर आणि आपला भाऊ (हारून) वर अधिकार राखतो, तेव्हा आमच्या आणि या दुराचारी लोकांच्या दरम्यान अलगाव निर्माण कर.
Maide 5:26
२६. अल्लाहने फर्माविले, ती भूमी त्यांच्यावर चाळीस वर्षांपर्यंत हराम (निषिद्ध) राहील, ते धरतीवर भटकत फिरतील, यास्तव तुम्ही (हे मूसा!) या दुराचारी लोकांबद्दल खेद करू नका.
Maide 5:27
२७. आणि आदमच्या दोन पुत्रांचा किस्सा त्यांना वाचून ऐकवा. जेव्हा त्या दोघांनी एक एक कुर्बानी सादर केली तेव्हा एकाची कुर्बानी स्वीकारली गेली आणि दुसऱ्याची स्वीकारली गेली नाही, तेव्हा तो म्हणाला की मी निश्चित तुला ठार करीन, त्यावर तो म्हणाला की अल्लाह, दुराचारापासून दूर राहणाऱ्या लोकांचीच कुर्बानी कबूल करतो.
Maide 5:28
२८. जर तू माझी हत्या करण्यासाठी हात पुढे करशील तर मी तुझी हत्या करण्यासाठी आपला हात पुढे करू शकत नाही, मी अल्लाहचे भय राखतो जो समस्त विश्वाचा स्वामी आणि पालनहार आहे.
Maide 5:29
२९. मी इच्छितो की तू माझा गुन्हा आणि स्वतःचा गुन्हा गोळा कर आणि जहन्नमी लोकांपैकी हो आणि अत्याचारी लोकांचा हाच वाईट मोबदला आहे.
Maide 5:30
३०. तरीही त्याच्या मनाने आपल्या भावाची नाहक हत्या करण्यास प्रवृत्त केले आणि त्याने आपल्या भावाला शेवटी मारून टाकले, ज्यामुळे तो नुकसान उचलणाऱ्यांपैकी झाला.
Maide 5:31
३१. मग अल्लाहने एक कावळ पाठविला, जो जमीन खोदत होता, यासाठी की त्याला हे दाखवावे की, आपल्या मृत भावाचे प्रेत त्याने कशा प्रकारे लपवावे. तो म्हणू लागला, अरेरे! खेद आहे माझ्यावर! काय मी असे करण्यायोग्यही राहिलो नाही की आपल्या भावाचे प्रेत या कावळ्याप्रमाणे जमिनीत गाडू शकलो असतो? मग तर तो खूप दुःखी आणि लज्जित झाला.
Maide 5:32
३२. याच कारणाने आम्ही इस्राईलच्या संततीकरिता निर्धारीत केले की जो मनुष्य एखाद्याची, याविना की तो एखाद्याचा मारेकरी असेल, किंवा धरतीवर उत्पात माजविणारा असेल, हत्या करील तर त्याने जणू समस्त लोकांची हत्या केली आणि जो मनुष्य एखाद्याचा जीव वाचवील, तर त्याने जणू समस्त मानवांना जीवन-दान दिले आणि त्यांच्याजवळ आमचे रसूल (पैगंबर) अनेक स्पष्ट निशाण्या घेऊन आले, परंतु तरीही त्यांच्यापैकी अधिकांश लोक जुलूम-अत्याचार करणारेच राहिले.
Maide 5:33
३३. जे लोक अल्लाह आणि त्याच्या पैगंबराशी युद्ध करतात आणि धरतीवर फसाद (उत्पात) माजवितात तर त्यांना या अपराधाची शिक्षा म्हणून ठार मारले पाहिजे, किंवा त्यांना सूळावर चढविले पाहिजे किंवा त्यांचा एका बाजूचा हात आणि दुसऱ्या बाजूचा पाय कापून टाकला जावा अथवा त्यांना देशाबाहेर काढले जावे. ही अपमानाची शिक्षा त्यांना या जगाच्या जीवनात आहे आणि आखिरतमध्ये तर त्यांच्यासाठी महाभयंकर अज़ाब (शिक्षा-यातना) आहे.
Maide 5:34
३४. तथापि ज्यांनी पकडीत येण्यापूर्वीच तौबा (क्षमा-याचना) केली असेल तर खात्रीने अल्लाह मोठा माफ करणारा, मोठा मेहरबान आहे.
Maide 5:35
३५. हे ईमान राखणाऱ्यांनो! अल्लाहचे भय बाळगून राहा आणि त्याच्या दिशेने सान्निध्य प्राप्त करण्याचा प्रयत्न करा१ आणि त्याच्या मार्गात जिहाद करा, यासाठी की तुम्हाला सफलता लाभावी.
———
(१) मूळ शब्द ‘वसीला’ अर्थात हेतुप्राप्तीसाठी व निकटता प्राप्त करण्यासाठी प्रयोगात आणले जाणारे माध्यम. ‘अल्लाहचे जवळीक प्राप्त करण्याचे साधन शोधा’चा खरा अर्थ असे कर्म की ज्यामुळे तुम्हाला अल्लाहची मर्जी आणि त्याचे जवळीव लाभावे. इमाम शौकानीच्या कथनानुसार वसीला म्हणजे ते सत्कर्म की ज्याद्वारे मनुष्य अल्लाहचे जवळीव प्राप्त करतो. त्याचप्रमाणे वर्जित आणि हराम केलेल्या वस्तू आणि कर्मापासून अलिप्त राहिल्यानेही अल्लाहचे जवळीक प्राप्त होते. तथापि मूर्ख लोकांनी हे खरे माध्यम सोडून कबरीत गाडल्या गेलेल्या लोकांना आपला ‘वसीला’ बनवून घेतले आहे, ज्याला इस्लामी धर्मशास्त्रात तिळमात्र जागा नाही.
Maide 5:36
३६. निःसंशय, जे लोक काफिर (इन्कारी) आहेत, त्यांनी जर अल्लाहच्या शिक्षा-यातने (अज़ाब) पासून सुटका होण्याकरिता, धरतीवर जे काही आहे, ते सर्वच्या सर्व दंड म्हणून देऊन टाकले आणि तेवढेच आणखी घेऊन आले, तरीदेखील कयामतीच्या दिवशी अज़ाबपासून सुटका होण्याकरिता कबूल केले जाणार नाही, आणि त्यांच्याकरिता दुःखदायक शिक्षा-यातनेचा क्रम जारी राहील.
Maide 5:37
३७. ते जहन्नममधून बाहेर पडण्याची खूप इच्छा करतील, परंतु त्यातून कधीच बाहेर पडू शकणार नाहीत. त्यांच्यासाठी तर निरंतर अज़ाब आहे.
Maide 5:38
३८. चोरी करणारा व चोरी करणारीचे हात कापून टाका. हे त्याच्या दुष्कर्माचे फळ आणि अल्लाहतर्फे शिक्षा आहे आणि सर्वश्रेष्ठ अल्लाह शक्तिशाली आणि हिकमतशाली आहे.
Maide 5:39
३९. जो मनुष्य अपराधानंतर (अल्लाहकडे) क्षमा याचना करील, आणि आपले आचरण सुधारेल तर अल्लाह त्याची तौबा (क्षमा याचना) कबूल करतो. निःसंशय सर्वश्रेष्ठ अल्लाह माफ करणारा, दया करणारा आहे.
Maide 5:40
४०. काय तुम्ही नाही जाणत की आकाशआंची व जमिनीची राज्य सत्ता केवळ अल्लाहकरिताच आहे? तो ज्याला इच्छितो अज़ाब (शिक्षा-यातना) देतो, आणि ज्याला इच्छितो माफ करतो. अल्लाह प्रत्येक गोष्टीचे सामर्थ्य बाळगतो.
Maide 5:41
४१. हे पैगंबर! तुम्ही त्यांच्यासाठी दुःखी होऊ नका जे इन्कार करण्यात धाव घेत आहेत, जे आपल्या तोंडाने म्हणाले की आम्ही ईमान राखले आणि त्यांच्या मनाने ईमान राखले नाही आणि जे यहूदी झाले, त्यांच्यातले काही खोटे बोलण्याचे अभ्यस्त आणि दुसऱ्या लोकांचे गुप्तहेर आहेत, जे तुमच्याजवळ आले नाहीत. ते वाणीला (वचनाला) मूळ स्थानापासून हटवून तिचा अर्थ बदलून टाकतात आणि असे सांगतात की जर तुम्हाला हा आदेश मिळाला तर कबूल करा आणि न मिळाल्यास अलग राहा. जर अल्लाह एखाद्यास भटकत ठेवू इच्छिल तर त्याच्यासाठी अल्लाहवर तुम्हाला किंचितही अधिकार नाही. अशाच लोकांच्या हृदयांना अल्लाह पाक (पवित्र) करू इच्छित नाही. याच लोकांसाठी या जगात अपमान आणि आखिरतमध्ये मोठा जबरदस्त अज़ाब आहे.
Maide 5:42
४२. हे कान लावून खोट्या गोष्टी ऐकणारे आणि मन तृप्त होईपर्यंत हराम खाणारे आहेत. जर हे तुमच्याजवळ येतील तर तुम्हाला अधिकार आहे, वाटल्यास त्यांच्या दरम्यान फैसला करा, वाटल्यास करू नका. जर तुम्ही त्यांच्यापासून तोड फिरवूनही घ्याल तरीही ते तुम्हाला कसलेही नुकसान पोहचवू शकत नाही आणि जर तुम्ही फैसला कराल तर त्यांच्या दरम्यान न्यायासह फैसला करा. निःसंशय, न्याय करणाऱ्यांशी अल्लाह प्रेम राखतो.
Maide 5:43
४३. आणि (आश्चर्याची गोष्ट अशी की) स्वतःजवळ तौरात असताना, ज्यात अल्लाहचा आदेश आहे, ते कसे तुम्हाला फैसला करणारा बनवितात, मग त्यानंतर आदेश मानण्याचे टाळतात. वास्तविक हे लोक (खऱ्या अर्थाने) ईमानधारक नाहीत.
Maide 5:44
४४. आम्ही तौरात आवतरीत केली, ज्यात मार्गदर्शन आणि नूर (दिव्य प्रकाश) आहे. यहूदी लोकांमध्ये याच तौरातद्वारे अल्लाहला मानणारे पैगंबर आणि अल्लाहवाले आणि धर्मज्ञानी लोक फैसला करीत असत कारण त्यांना अल्लाहच्या या ग्रंथाचे रक्षण करण्याचा आदेश दिला गेला होता आणि ते यावर स्वीकारणारे साक्षी होते. आता तुम्ही लोकांचे भय बाळगू नका, किंबहुना माझे भय बाळगा. माझ्या आयतींना थोड्याशा किंमतीवर विकू नका आणि जो, अल्लाहने अवतरीत केलेल्या संदेशा (वहयी) च्या आधारावर फैसला न करील तर असे लोक पुरेपूर काफीर आहेत.
Maide 5:45
४५. आणि आम्ही (तौरातमध्ये) यहूदींच्या हक्कात ही गोष्ट निर्धारीत केली की जीवाच्या बदल्यात जीव, आणि डोळ्याच्या बदल्यात डोळा आणि नाकाच्या बदल्यात नाक आणि कानाच्या बदल्यात कान आणि दाताच्या बदल्यात दात आणि खास जखमांचाही बदला आहे, मग जो कोणी त्यास माफ करील तर ते त्याच्यासाठी पश्चात्ताप आहे आणि जे लोक अल्लाहच्या आदेशानुसार फैसला करणार नाहीत तर असेच लोक अत्याचारी आहेत.
Maide 5:46
४६. आणि आम्ही त्यांच्यामागे मरियम-पुत्र ईसाला पाठविले, जे आपल्या पूर्वीचा ग्रंथ तौरात सत्य असल्याचे सांगत होते आणि आम्ही त्यांना इंजील (हा ग्रंथ) प्रदान केला. ज्यात नूर (दिव्य प्रकाश) आणि मार्गदर्शन होते आणि तो आपल्या पूर्वीचा ग्रंथ तौरात सत्य असल्याचे सांगत होता आणि ते स्पष्ट मार्गदर्शन आणि शिकवण होती, अल्लाहचे भय राखणाऱ्यांकरिता.
Maide 5:47
४७. आणि इंजील बाळगणाऱ्यांकरिता हे बंधनकारक ठरते की जे काही अल्लाहने इंजीलमध्ये अवतरीत केले आहे, त्याच्याचनुसार फैसला करावा आणि जो मनुष्यदेखील अल्लाहने अवतरीत केल्यानुसार फैसला करणार नाही किंवा मानणार नाही तर असे लोक दुराचारी आहेत.
Maide 5:48
४८. आणि आम्ही तुमच्याकडे हा सत्यपूर्ण ग्रंथ अवतरीत केला आहे, जो आपल्या पूर्वीच्या समस्त आसमानी ग्रंथांची सत्यता दर्शवितो आणि त्यांचा संरक्षक आहे. यास्तव तुम्ही त्यांच्या दरम्यान, अल्लाहने अवतरीत केलेल्या ग्रंथानुसार फैसाला करा, या सत्याकडे पाठ फिरवून त्यांच्या इच्छा आकांक्षांवर जाऊ नका. तुमच्यापैकी प्रत्येकासाठी आम्ही एक शरीअत (धर्मशास्त्र) आणि मार्ग निर्धारीत केला आहे. अल्लाहने इच्छिले असते तर तुम्हा सर्वांचा एकच जनसमूह (उम्मत) बनविला असता. परंतु तो असे इच्छितो की, जे काही तुम्हाला दिले आहे, त्यात तुमची कसोटी घ्यावी, तेव्हा तुम्ही चांगल्या मोबदल्याच्या दिशेने त्वरा करा, तुम्हा सर्वांना अल्लाहच्याचकडे परत जायचे आहे. मग तो तुम्हाला ती प्रत्येक गोष्ट दाखवून देईल, ज्यासंदर्भात तुम्ही मतभेद राखता.
Maide 5:49
४९. आणि तुम्ही त्यांच्या तंट्यात अल्लाहने अवतरीत केलेल्या वहयीनुसार फैसला करा. त्यांच्या इच्छा अभिलाषांचे अनुसरण करू नका आणि त्यांच्यापासून सावध राहा की कदाचित हे तुम्हाला अल्लाहच्या अवतरीत केलेल्या एखाद्या आदेशापासून डळमळीत न करावेत. जर हे तोंड फिरवतील तर खात्रीने अल्लाहचा हाच इरादा आहे की त्यांना त्यांच्या काही अपराधांची शिक्षा देऊनच टाकावी आणि अधिकांश लोक अवज्ञाकारी असतात.
Maide 5:50
५०. काय हे लोक पुनश्च अज्ञानतापूर्ण फैसला इच्छितात? आणि ईमान राखणाऱ्यांकरिता अल्लाहपेक्षा उत्तम फैसला करणारा आणि आदेश करणारा आणखी कोण असू शकतो?
Maide 5:51
५१. हे ईमानधारकांनो! तुम्ही यहूदींना आणि ख्रिश्चनांना दोस्त बनवू नका, हे तर आपसातच एकमेकांचे दोस्त आहेत. तुमच्यापैकी जो कोणी यांच्याशी दोस्ती करील तर तो त्यांच्यापैकीच ठरेल. अत्याचारी लोकांना अल्लाह कधीही (सरळ) मार्ग दाखवित नाही.
Maide 5:52
५२. तुम्ही पाहाल की ज्यांच्या मनात विकार आहे ते धावत जाऊन त्यांच्यात मिसळतात आणि म्हणतात की आम्हाला भय वाटते की कदाचित असे न व्हावे की एखादे संकट आमच्यावर कोसळावे, फार शक्य आहे की अल्लाहने विजय प्रदान करावा किंवा आपल्याकडून अन्य एखादा फैसला करावा मग तर हे आपल्या मनात लपविलेल्या गोष्टीबद्दल खूप लज्जित होतील.
Maide 5:53
५३. आणि ईमानधारक म्हणतील की काय हेच ते लोक होते, जे मोठ्या विश्वासाने अल्लाहची शपथ घेऊन म्हणतात की आम्ही तुमच्यासोबत आहोत, त्यांचे सर्व कर्म वाया गेले आणि ते असफल झाले.
Maide 5:54
५४. हे ईमान राखणाऱ्यांनो! तुमच्यापैकी जो कोणी आपल्या दीन-धर्मापासून परावृत्त होईल, तर सर्वश्रेष्ठ अल्लाह लवकरच अशा जनसमूहाच्या लोकांना आणील अल्लाह ज्यांच्याशी प्रेम राखील आणि तेदेखील अल्लाहशी प्रेम करत असतील. ईमानधारकांसाठी ते कोमलहृदयी असतील, परंतु काफिरांसाठी मात्र कठोर आणि निर्दयी असतील, ते अल्लाहच्या मार्गात जिहाद करतील, कोणा निंदा-नालस्ती करणाऱ्यांच्या आरोपाची पर्वा करणार नाहीत. ही अल्लाहची कृपा आहे, ज्याला इच्छितो, प्रदान करतो, अल्लाह सर्वशक्तिमान आहे आणि अतिशय ज्ञान बाळगणारा आहे.
Maide 5:55
५५. (हे ईमानधारकांनो!) तुमचा मित्र स्वतः अल्लाह आणि त्याचा पैगंबर आहे आणि ईमान राखणारे लोक आहेत. जे नमाज कायम करतात आणि जकात देत राहतात आणि अल्लाहसमोर (एकाग्रचित्त होऊन) झुकणारे आहेत.
Maide 5:56
५६. आणि जो मनुष्य, सर्वश्रेष्ठ अल्लाहशी, त्याच्या पैगंबराशी आणि ईमानधारकांशी दोस्ती राखील तर त्याने विश्वास ठेवला पाहिजे की अल्लाहचे दासच वर्चस्वशाली राहतील.
Maide 5:57
५७. (ईमानधारकांनो!) तुम्ही अशा लोकांना आपला मित्र बनवू नका, जे तुमच्या दीन-धर्माला खेळ-तमाशा बनवून थट्टा उडवितात, मग ते त्यांच्यापैकी असोत ज्यांना तुमच्यापूर्वी ग्रंथ दिला गेला किंवा काफिर (इन्कारी) असोत जर तुम्ही (खरोखर) ईमानधारक असाल तर अल्लाहचे भय बाळगून राहा.
Maide 5:58
५८. आणि जेव्हा तुम्ही नमाजकरिता (अजान) पुकारता तेव्हा ते त्यास खेळ-तमाशा ठरवितात, हे अशासाठी की ते अक्कल बाळगत नाहीत.
Maide 5:59
५९. तुम्ही सांगा, हे यहूद्यांनो आणि ख्रिश्चनांनो! तुम्ही आमच्याशी केवळ या कारणास्तव वैर राखता की आम्ही अल्लाहवर आणि जे काही आमच्याकडे उतरविले गेले आहे आणि जे काही यापूर्वी उतरविले गेले आहे त्यावर ईमान राखले आहे आणि यासाठीही की तुमच्यात अधिकांश लोक दुराचारी आहेत.
Maide 5:60
६०. तुम्ही सांगा की काय मी तुम्हाला सांगू की याहून जास्त वाईट मोबदला प्राप्त करणारा अल्लाहच्या जवळ कोण आहे? तो, ज्याचा सर्वश्रेष्ठ अल्लाहने धिःक्कार केला असेल आणि त्यावर क्रोधित झाला असेल आणि त्यांच्यापैकी काहींना वानर आणि डुक्कर बनविले आणि ज्यांनी खोट्या दैवतांची उपासना केली तर हेच लोक वाईट दर्जाचे आहेत आणि हेच सत्य-मार्गापासून फार जास्त भटकलेले आहेत.
Maide 5:61
६१. आणि जेव्हा ते तुमच्याजवळ येतात, तेव्हा म्हणतात की आम्ही ईमान राखले जरी ते इन्कार सोबत घेऊन आले होते आणि त्याच इन्कारासोबत (या जगातून) गेलेतही आणि हे जे काही लपवित आहेत, अल्लाह ते चांगल्या प्रकारे जाणतो.
Maide 5:62
६२. आणि तुम्ही पाहाल की यांच्यापैकी बहुतेक जण अपराधाच्या कामांकडे अत्याचार आणि विद्रोहाकडे आणि हराम माल (धन) खाणयाकडे धाव घेत आहेत. जे काही हे करीत आहेत, ते अतिशय वाईट कर्म आहे.
Maide 5:63
६३. त्यांना त्यांचे संत-महंत आणि धर्मज्ञानी लोक खोटे बोलण्यापासून आणि हराम (अवैध) खाण्यापासून रोखत का नाही? निःसंशय ही वाईट कर्मे आहेत, जी हे करीत आहेत.
Maide 5:64
६४. आणि यहूदी म्हणाले, अल्लाहचा हात बांधलेला आहे, (उलट) त्यांचेच हात बांधलेले आहेत आणि त्यांच्या या कथनामुळे त्यांचा धिःक्कार केला गेला. किंबहुना अल्लाहचे दोन्ही हात खुले आहेत. ज्याप्रकारे इच्छितो, खर्च करतो, आणि जे काही तुमच्याकडे, तुमच्या पालनकर्त्यातर्फे उतरविले गेले आहे, ते त्यांच्यापैकी बहुतेकांच्या विद्रोह आणि इन्कारात वाढकरते, आणि आम्ही त्यांच्यात आपसात कयामतापर्यंत शत्रूता आणि द्वेष मत्सर पेरले आहे. ते जेव्हा जेव्हा युद्धाची आग भडकवू इच्छितात, अल्लाह तिला विझवितो. हे जमिनीवर दहशत आणि उत्पाद माजवित फिरतात आणि अल्लाह अशा विध्वंस करणाऱ्यांशी प्रेम राखत नाही.
Maide 5:65
६५. आणि जर या ग्रंथधारकांनी ईमान राखले असते आणि अल्लाहचे भय बाळगले असते तर आम्ही त्यांच्या दुष्कृत्यांवर पडदा टाकला असता आणि निश्चितच त्यांना कृपा देणग्यांनी भरलेल्या जन्नतमध्ये दाखल केले असते.
Maide 5:66
६६. जर त्यांनी तौरात आणि इंजील आणि त्या धर्मशास्त्रांचे पालन केले असते जे त्यांच्याकडे, त्यांच्या पालनकर्त्यातर्फे उतरविले गेलेत तर त्यांना आपल्या वरूनही आणि पायाखालूनही भरपूर (अन्नसामग्री) खायला लाभले असते. त्याच्याताला एक समूह मधल्या मार्गावर आहे, मात्र अधिकांश दुराचारी आहेत.
Maide 5:67
६७. हे पैगंबर! तुमच्याकडे, तुमच्या पालनकर्त्यातर्फे जो (संदेश) उतरविला गेला आहे, तो लोकांपर्यंत पोहचवा. जर तुम्ही असे केले नाही, तर त्याच्या संदेशाचा हक्क अदा केला नाही आणि अल्लाह लोकांपासून तुमचे रक्षण करील निःसंशय अल्लाह इन्कारी लोकांना मार्गदर्शन करीत नाही.
Maide 5:68
६८. तुम्ही सांगा की, हे ग्रंथधारकांनो! तुम्हाला कसलाही आधार नाही, जोपर्यंत तौरात आणि इंजील आणि जेदेखील (धर्मशास्त्र) तुमच्या पालनकर्त्यातर्फे तुमच्याकडे उतरविले गेले आहे, त्याचे पालन न कराल आणि तुमच्याकडे जे (पवित्र कुरआन) तुमच्या पालनकर्त्यातर्फे अवतरीत केले गेले आहे, ते यांच्यातल्या बहुतेक लोकांच्या हट्ट आणि इन्कारास वाढविल. तेव्हा या इन्कारी लोकांबद्दल तुम्ही दुःख करू नका.
Maide 5:69
६९. ईमानधारक, यहूदी, ताऱ्यांचे उपासक आणि ख्रिश्चनांपैकी जोदेखील अल्लाह आणि अंतिम दिवसा (कयामत) वर ईमान राखील आणि सत्कर्म करीत राहील तर अशा लोकांना, ना कसले भय राहील, ना ते दुःखी होतील.
Maide 5:70
७०. आम्ही इस्राईलच्या पुत्रां (यहूदीं) कडून वायदा घेतला आणि त्यांच्याकडे पैगंबरांना पाठविले, जेव्हा एखादा पैगंबर त्यांच्याजवळ असा आदेश घेऊन आला ज्याला त्यांचे मन स्वीकारत नव्हते तर त्यांनी एका गटाला खोटे ठरविले आणि एका गटाची हत्या करीत राहिले.
Maide 5:71
७१. आणि समजून बसले की काहीच शिक्षा मिळणार नाही, यास्तव आंधळे बहीरे झाले, तरीही अल्लाहने त्यांना माफ केले.असे असतानाही त्यांच्यापैकी अधिकांश लोक आंधळे बहीरे झाले आणि अल्लाह त्यांच्या कर्मांना खूप चांगल्या प्रकारे पाहणारा आहे.
Maide 5:72
७२. ते लोक काफिर (इन्कारी) झालेत, ज्यांनी म्हटले की मरियमचा पुत्र मसीह हाच अल्लाह आहे, वास्तविक मसीहने (स्वतः) म्हटले की हे इस्राईलच्या पुत्रांनो! माझ्या आणि तुमच्या पालनकर्त्या अल्लाहची उपासना करा कारण जो कोणी अल्लाहसोबत दुसऱ्याला सहभागी ठरवील तर अल्लाहने त्याच्यासाठी जन्नत हराम केली आहे आणि त्याचे ठिकाण जहन्नम आहे, आणि अत्याचारी लोकांचा कोणीही मदत करणारा नसेल.
Maide 5:73
७३. ते लोकही पूर्णतः काफिर झाले, ज्यांनी म्हटले की अल्लाह तीनचा तिसरा आहे. वास्तविक अल्लाहशिवाय कोणीही उपास्य नाही आणि जर हे लोक असे बोलणे सोडणार नाहीत तर त्यांच्यापैकी जे इन्कार करत राहतील तर त्यांना निश्चितच मोठा सक्त अज़ाब पोहोचेल.
Maide 5:74
७४. हे लोक अल्लाहकडे का नाही झुकत आणि का नाही क्षमा याचना करीत? अल्लाह अतिशय माफ करणारा आणि मोठा दया करणारा आहे.
Maide 5:75
७५. मरियमचे पुत्र मसीह केवळ एक पैगंबर असण्याखेरीज आणखी काहीही नाही. त्यांच्या पूर्वीही अनेक पैगंबर होऊन गेलेत. त्यांची माता एक सुशील आणि सत्यनिष्ठ स्त्री होती. दोघे (माता-पुत्र) जेवण करीत असत. तुम्ही पाहा आम्ही कशा प्रकारे त्यांच्यासमोर प्रमाण प्रस्तुत करतो, मग विचार करा की ते कशा प्रकारे परतविले जातात.
Maide 5:76
७६. तुम्ही सांगा की, काय तुम्ही अल्लाहशिवाय त्यांची भक्ती- उपासना करता जे ना तुम्हाला नुकसान पोहचविण्याचा अधिकार राखतात, ना कसल्याही प्रकारच्या फायद्याचा. अल्लाह चांगल्या प्रकारे ऐकणारा आणि पूर्णतः ज्ञानी आहे.
Maide 5:77
७७. सांगा, हे ग्रंथधारकांनो! आपल्या दीन-धर्मात अतिशयोक्ती करू नका आणि अशा लोकांच्या इच्छा अभिलाषांचे अनुसरण करू नका, जे पूर्वीपासून भटकलेले आहेत. आणि बहुतेकांना पथभ्रष्ट करून गेलेत आणि सरळ मार्गापासून दूर झाले आहेत.
Maide 5:78
७८. इस्राईलच्या संततीमधील इन्कारी लोकांचा (हजरत) दाऊद आणि मरियम-पुत्र हजरत ईसा यांच्या तोंडून धिःक्कार केला गेला, या कारणाने की ते आज्ञा भंग करणारे होते आणि मर्यादेचे उल्लंघन करीत होते.
Maide 5:79
७९. ते आपसात एकमेकांना वाईट कामांपासून, जे ते करीत असत, रोखत नव्हते, निश्चितच जे काही ते करीत, अतिशय वाईट होते.
Maide 5:80
८०. त्यांच्यातल्या अधिकांश लोकांना तुम्ही पाहाल की ते इन्कारी लोकांशी मैत्री करतात. जे काही त्यांनी आपल्या पुढे पाठविले आहे ते अतिशय वाईट आहे. (परिणामी) सर्वश्रेष्ठ अल्लाह त्यांच्याशी नाराज झाला आणि ते नेहमी अज़ाब (शिक्षा-यातने) मध्ये राहतील.
Maide 5:81
८१. जर त्यांनी अल्लाहवर, पैगंबरांवर आणि जे अवतरीत केले गेले आहे त्यावर ईमान राखले असते तर इन्कारी लोकांशी मैत्री केली नसती, परंतु त्यांच्यापैकी बहुतेक लोक दुराचारी आहेत.
Maide 5:82
८२. निःसंशय, तुम्हाला ईमानधारकांचे सक्त (कट्टर) वैरी यहूदी आणि अनेकेश्वरवादी आढळून येतील आणि ईमानधारकांचे सर्वाधिक निकटचे मित्र तुम्हाला जरूर त्यांच्यात आढळतील, जे स्वतःला ख्रिश्चन म्हणतात, हे अशासाठी की त्यांच्यात धर्मज्ञानी- विद्वान आणि संत-महात्मा आहेत, आणि या कारणास्तव की ते घमेंड करीत नाहीत.
Maide 5:83
८३. आणि जेव्हा ते पैगंबराकडे अवतरित झालेला संदेश ऐकतात, तेव्हा तुम्हाला त्यांच्या डोळ्यांतून अश्रूधारा वाहताना दिसतील. या कारणाने की त्यांनी सत्य ओळखून घेतले. ते म्हणतात, हे आमच्या पालनकर्त्या! आम्ही ईमान राखले, तेव्हा तू आम्हालाही साक्ष देणाऱ्यांमध्ये लिहून घे.
Maide 5:84
८४. आणि आम्ही का म्हणून ईमान न राखावे अल्लाहवर आणि त्या सत्यावर, जे आमच्याजवळ येऊन पोहोचले आहे आणि ही आशा न बाळगावी की आमचा पालनहार आम्हाला नेक सदाचारी लोकांमध्ये सामील करील.
Maide 5:85
८५. तर अल्लाहने त्यांच्या या दुआ (प्रार्थना) मुळे त्यांना (जन्नतच्या) अशा बागा प्रदान केल्या, ज्यांच्याखाली प्रवाह वाहत आहेत, ज्यात ते सदैव राहतील आणि नेक लोकांचा हाच मोबदला आहे.
Maide 5:86
८६. आणि जे काफिर (इन्कारी) झाले आणि ज्यांनी आमच्या आयतींना खोटे ठरविले, तेच जहन्नमी आहेत.
Maide 5:87
८७. हे ईमानधारकांनो! त्या पाक (स्वच्छ- शुद्ध) वस्तूंना हराम ठरवून का ज्या अल्लाहने तुमच्यासाठी हलाल ठरविल्या आहेत, आणि मर्यादेच्या बाहेर जाऊ नका निःसंशय अल्लाह अतिरेक करणाऱ्यांशी प्रेम राखत नाही.
Maide 5:88
८८. आणि अल्लाहने जी अन्न-सामुग्री तुम्हाला प्रदान केली आहे, त्यातून स्वच्छ-शुद्ध हलाल वस्तू खा आणि अल्लाहचे भय बाळगा, ज्याच्यावर तुम्ही ईमान राखता.
Maide 5:89
८९. अल्लाह तुमच्या व्यर्थ, निरर्थक शपथांबद्दल तुमची पकड करीत नाही तथापि अशाच शपथांबद्दल पकड करतो, ज्या तुम्ही पक्क्या इराद्याने घेतल्या. त्याचे प्रायश्चित्त दहा गरीबांना भोजन देणे, बऱ्यापैकी, जसे आपल्या घरच्या लोकांना खाऊ घालता किंवा त्यांना कपडे लत्ते देणे किंवा एक गुलाम अथवा दासी मुक्त करणे, आणि ज्याला हे शक्य नसेल तर त्याने तीन दिवस रोजे (उपवास- व्रत) राखावे. हे तुमच्या त्या शपथांचे प्रायश्चित्त आहे, जेव्हा तुम्ही अशी शपथ घ्याल. आणि आपल्या शपथांवर कायम राहून त्यांचे रक्षण करा, अशा प्रकारे सर्वश्रेष्ठ अल्लाह तुमच्यासाठी आपले आदेश स्पष्टतः सांगतो यासाठी की तुम्ही आभार मानावेत.
Maide 5:90
९०. हे ईमान राखणाऱ्यांनो! मद्य, जुगार आणि देव-स्थान आणि भविष्य वर्तविणारे फांसे हे सर्व अमंगल सैतानी कामे आहेत, तेव्हा तुम्ही यापासून दूर राहा, यासाठी की सफल व्हावे.
Maide 5:91
९१. सैतान तर इच्छितोच की मद्य आणि जुगाराद्वारे तुमच्या दरम्यान शत्रूता आणि द्वेष मत्सर निर्माण करावे आणि तुम्हाला अल्लाहच्या स्मरणापासून व नमाजपासून रोखावे, तेव्हा तुम्ही अशा कामांपासून दूर का राहात नाही?
Maide 5:92
९२. आणि अल्लाहच्या आदेशाचे पालन करा आणि पैगंबरांचे आज्ञापालन करा आणि सावधगिरी पाळा आणि जर तुम्ही तोंड फिरवले तर लक्षात ठेवा की आमच्या पैगंबराची जबाबदारी स्पष्ट संदेश पोहचविण्याची आहे.
Maide 5:93
९३. ज्या लोकांनी ईमान राखले आणि सत्कर्म केले, अशांवर गुन्हा नाही जर पूर्वी काही खाल्ले असेल, वस्तुतः नंतर ते परहेजगार (दुष्कर्मापासून दूर राहणारे) बनले, आणि ईमानधारक झाले व सत्कर्म करू लागले, परहेजगारीवर कायम राहिले आणि ईमानावर अटळ राहिले, मग अल्लाहची अवज्ञा करण्यापासून दूर राहिले आणि नेकी (च्या मार्गा) वर चालत राहिले आणि अल्लाह अशा नेक काम करणाऱ्यांशी प्रेम राखतो.
Maide 5:94
९४. हे ईमान राखणाऱ्यांनो! अल्लाह काही शिकारद्वारे तुमची परीक्षा घेतो, ज्या पर्यंत तुमचे हात आणि तुमचे भाले पोहोचू शकतील, यासाठी की अल्लाहने हे जाणून घ्यावे की कोण त्याला न पाहता भय राखतो जो मनुष्य यानंतरही मर्यादा पार करील, त्याच्यासाठी कठोर सजा आहे.
Maide 5:95
९५. हे ईमान राखणाऱ्यांनो! जेव्हा तुम्ही (हज किंवा उमराप्रसंगी) एहरामच्या अवस्थेत असाल तर शिकार करू नका आणि तुमच्यापैकी जो कोणी त्याला मारेल तर त्याला फिदिया द्यावा लागेल त्याच्यासारख्याच पाळीव जनावराने, ज्याचा फैसला तुमच्यापैकी दोन न्याय करणारे करतील जे कुर्बानीकरिता काबापर्यंत पोहचविले जाईल किंवा फिदिया म्हणून गरीबांना भोजन द्यावे लागेल किंवा त्याच्या बरोबरीने रोजे (उपवास-व्रत) ठेवावे लागतील, यासाठी की आपल्या कर्माचे फळ चाखावे, जे पूर्वी झाले, अल्लाहने ते माफ केले आणि जो कोणी या (मनाई आदेशा) नंतर पुन्हा असे करील तर अल्लाह त्याचा सूड घेईल, अल्लाह मोठा शक्तिशाली सूड घेणारा आहे.
Maide 5:96
९६. तुमच्यासाठी समुद्रातील (प्राण्याची) शिकार पकडणे व खाणे हलाल केले गेले आहे. तुमच्या वापरासाठी आणि प्रवाशांसाठी, आणि जोपर्यंत तुम्ही एहरामच्या अवस्थेत असाल, खुश्कीची शिकार हराम केली गेली आहे आणि अल्लाहचे भय राखा, ज्याच्याजवळ तुम्ही एकत्र केले जाल.
Maide 5:97
९७. अल्लाहने काबागृहाला, जे आदर-सन्मानपूर्ण घर आहे, लोकांकरिता कायम राहण्याचे कारण बनविले आणि आदरणीय महिन्याला आणि हरममध्ये कुर्बानी दिल्या जाणाऱ्या जनावरांनाही आणि त्या जनावरांनाही, ज्यांच्या गळ्यात पट्टे असतील, हे अशासाठी की तुम्ही या गोष्टीवर विश्वास राखावा की निःसंशय अल्लाह आकाशांच्या व जमिनीच्या समस्त चीज-वस्तूंचे ज्ञान राखतो आणि निःसंशय अल्लाह प्रत्येक गोष्टीचे चांगल्या प्रकारे ज्ञान राखतो.
Maide 5:98
९८. तुम्ही जाणून असा की सर्वश्रेष्ठ अल्लाह शिक्षा यातनाही कठोर देणारा आहे आणि अल्लाह मोठा माफ करणारा आणि अतिशय दया करणाराही आहे.
Maide 5:99
९९. पैगंबराचे कर्तव्य तर केवळ पोहचविण्याचे आहे आणि अल्लाह सर्व काही जाणतो, जे काही तुम्ही जाहीर करता आणि जे काही तुम्ही लपविता.
Maide 5:100
१००. तुम्ही सांगा की नापाक आणि पाक (गलिच्छ व स्वच्छ शुद्ध) समान नाहीत, मग तुम्हाला नापाकची विपुलता चांगली वाटत असली तरी, अल्लाहचे भय बाळगून राहा हे बुद्धिमानांनो! यासाठी की तुम्ही सफल व्हावे.
Maide 5:101
१०१. हे ईमान राखणाऱ्यांनो! अशी गोष्ट विचारू नका की जी जाहीर केली गेली तर तुम्हाला वाईट वाटेल आणि जर कुरआन उतरतेवेळी विचाराल तर तुम्हाला त्याचे उत्तर उघड दिले जाईल. यापूर्वी जे झाले ते अल्लाहने माफ केले आणि अल्लाह मोठा माफ करणारा सहनशील आहे.
Maide 5:102
१०२. तुमच्यापूर्वी काही लोकांनी असेच प्रश्न विचारले, नंतर त्याचे इन्कारी झाले.
Maide 5:103
१०३. बहीरा, साएबा, वसीला आणि हाम वगैरेचा अल्लाहने आदेश दिला नाही, परंतु इन्कारी लोक अल्लाहवर मिथ्या आरोप ठेवतात, आणि त्यांच्यातले बहुतेक जण अक्कल बाळगत नाही.
Maide 5:104
१०४. आणि जेव्हा त्यांना सांगितले गेले की त्या (पवित्र कुरआना) कडे आणि पैगंबर (मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) कडे या, तेव्हा ते म्हणाले की ज्या (रीति-रिवाजा) वर आम्हाला आमचे वाडवडील आढळलेत, ते आम्हाला पुरेसे आहे. मग त्यांचे ते वाडवडील काही जाणत नसावेत आणि सन्मार्गावर नसावेत, तरीही?
Maide 5:105
१०५. हे ईमान राखणाऱ्यांनो! आपली काळजी घ्या, जेव्हा तुम्ही सत्य मार्गावर चालत असाल, तर जो मनुष्य पथभ्रष्ट होईल तर त्यामुळे तुमचे काहीच नुकसान नाही, अल्लाहच्याच जवळ तुम्हा सर्वांना जायचे आहे, मग तो तुम्हा सर्वांना सांगेल तुम्ही कसकसे कर्म करीत होते.
Maide 5:106
१०६. हे ईमान राखणाऱ्यांनो! जेव्हा तुमच्यापैकी एखाद्याचा मृत्युसमय जवळ आला असेल तेव्हा वसीयत (मृत्युपत्र) करतेवेळी तुमच्यातले दोन न्याय करणारे साक्षी म्हणून असले पाहिजे किंवा तुमच्याखेरीज इतर दोन जण जर तुम्ही जमिनीवर प्रवास करीत असाल आणि अचाानक मृत्युचे संकट तुमच्यावर यावे (संशयाच्या स्थितीत) तुम्ही दोघा (साक्षीं) ना (जमातची) नमाज झाल्यानंतर रोखा, मग ते दोघे अल्लाहची शपथ घेतील की आम्ही या (साक्ष देण्या) च्या मोबदल्यात कसलेही मूल्य घेऊ इच्छित नाही, मग कोणी जवळचा नातेवाईक का असेना आणि आम्ही अल्लाहची साक्ष लपवू शकत नाही, जर आम्ही असे केले तर दोषी ठरू.
Maide 5:107
१०७. नंतर जर असे कळाले की ते दोघे (साक्षी) एखआद्या अपराधआस पात्र ठरले आहेत, तर अशा लोकांपैकी ज्यांच्या विरोधात गुन्हा घडला होता, आणखी दोन व्यक्ती, ज्या सर्वांत जवळच्या असतील, जिथे ते दोघे उभे होते, त्या जागी या दोघांनी उभे राहावे, मग ते अल्लाहची शपथ घेतील की आमची साक्ष या दोघांच्या साक्षीपेक्षा अधिक खरी आहे. आणि आम्ही मर्यादा पार केली नाही असे केल्यास आमची गणना अत्याचारी लोकांमध्ये होईल.
Maide 5:108
१०८. हा सर्वाधिक जवळचा मार्ग आहे की ते लोक खरी साक्ष देतील किंवा त्यांना हे भय असेल की शपथ घेतल्यानंतर पुन्हा शपथ उलट पडेल आणि अल्लाहचे भय राखा आणि ऐका! अल्लाह दुराचारी लोकांना मार्गदर्शन करीत नाही.
Maide 5:109
१०९. ज्या (कयामतच्या) दिवशी अल्लाह समस्त पैगंबरांना एकत्र करील, मग विचारेल की तुम्हाला काय उत्तर मिळाले होते? ते म्हणतील, आम्हाला काहीच माहीत नाही. गैब (अपरोक्ष) जाणणारा तूच आहेस.
Maide 5:110
११०. जेव्हा अल्लाह फर्माविल, हे मरियम-पुत्र ईसा! तुमच्यावर आणि तुमच्या मातेवर मी केलेल्या कृपा देणगीचे स्मरण करा. जेव्हा मी पवित्र आत्मा (जिब्रील) द्वारे तुमची मदत केली. तुम्ही पाळण्यात असताना व मोठ्या वयात लोकांशी संभाषण करीत राहिले आणि जेव्हा आम्ही ग्रंथ व हिकमत आणि तौरात व इंजीलचे ज्ञान दिले आणि जेव्हा तुम्ही माझ्या हुकूमाने पक्षीरूप पुतळा मातीने तयार करीत असत आणि त्यात फुंक मारीत असत, तेव्हा माझ्या हुकूमाने तो (जिवंत) पक्षी बनत असे, आणि तुम्ही माझ्या हुकूमाने जन्मजात आंधळ्याला आणि कोढी इसमाला चांगले करीत असत, आणि माझ्या हुकूमाने मेलेल्यांना (जिवंत करून) बाहेर काढीत असत आणि जेव्हा मी इस्राईलच्या पुत्रांना तुमच्यापासून रोखले. जेव्हा तुम्ही त्यांच्याजवळ मोजिजा घेऊन आले तेव्हा त्यांच्यातले इन्कारी लोक म्हणाले, की ही केवळ उघड जादू आहे.
Maide 5:111
१११. आणि ज्याअर्थी मी हवारींना प्रेरित केले की तुम्ही माझ्यावर आणि माझ्या पैगंबरांवर ईमान राखा, तेव्हा ते म्हणाले, आम्ही ईमान राखले आणि तुम्ही साक्षी राहा की आम्ही पूर्णतः आज्ञाधारक आहोत.
Maide 5:112
११२. स्मरण करा, जेव्हा हवारी म्हणाले की हे मरियम-पुत्र ईसा! काय तुमचा पालनकर्ता आमच्यावर आकाशातून (भोजनाची) एक थाळी उतरवू शकतो? ईसा म्हणाले, ईमान राखत असाल तर अल्लाहचे भय बाळगा.
Maide 5:113
११३. ते म्हणाले की आम्ही त्यातून खआऊ इच्छितो आणि आमच्या मनाला समाधान लाभावे आणि आमची खात्री व्हावी की तुम्ही आम्हाला खरे सांगितले आणि आम्ही त्यावर साक्षी राहावे.
Maide 5:114
११४. मरियम-पुत्र ईसा म्हणाले, हे अल्लाह! आमच्यावर आकाशातून एक थाळी उतरव, जी आमच्या पूर्वीच्या आणि नंतरच्या लोकांकरिता आनंदाची गोष्ट ठरावी आणि तुझ्यातर्फे एक निशाणी ठरावी आणि अम्हाला रोजी (आजिविका) प्रदान कर. तू उत्तम रोजी देणारा आहेस.
Maide 5:115
११५. अल्लाहने फर्माविले की मी ते भोजन तुम्हा लोकांसाठी उतरवित आहे, मग तुमच्यापैकी जो कोणी यानंतरही कुप्र (इन्कार) करील तर मी त्याला अशी सक्त सजा देईन की तशी सजा साऱ्या जगात कोणालाही देणार नाही.
Maide 5:116
११६. आणि (त्या वेळेचेही स्मरण करा) जेव्हा सर्वश्रेष्ठ अल्लाह फर्माविल की हे मरियम-पुत्र ईसा! काय तुम्ही त्या लोकांना असे सांगितले होते की मला आणि माझ्या मातेला अल्लाहशिवाय उपास्य बनवून घ्या? ईसा उत्तर देतील की मी तर तुला प्रत्येक व्यंग- दोषापासून मुक्त (पाक) समजतो तेव्हा मला अशा प्रकारे शोभेल की मी अशी गोष्ट बोलावे, जी बोलण्याचा मला काहीच हक्क नाही, जर मी असे बोललो असेल तर तुला ते माहीतही असेल. तू तर माझ्या मनातील गोष्टही जाणतो, मात्र तुझ्या मनात जे काही आहे, ते मी नाही जाणत. केवळ तूच अपरोक्ष गोष्टींचा ज्ञाता आहेस.
Maide 5:117
११७. मी त्यांना केवळ तेच सांगितले, ज्याचा तू मला आदेश दिला की तुमचा व माझा पालनकर्ता असलेल्या अल्लाहची उपासना करा आणि जोपर्यंत मी त्यांच्यात राहिलो, त्यांच्यावर साक्षी राहिलो, आणि जेव्हा तू मला उचलून घेतले तेव्हा तूच त्यांचा देखरेखकर्ता होता, आणि तू प्रत्येक गोष्टीवर साक्षी आहे.
Maide 5:118
११८. जर तू यांना अज़ाब (शिक्षा-यातना) देशील तर हे तुझेच दास आहेत आणि जर तू यांना माफ करशील तर तू मोठा जबरदस्त हिकमत बाळगणारा आहे.
Maide 5:119
११९. अल्लाह फर्माविल की हा तो दिवस आहे की सत्यनिष्ठ लोकांचे सत्य त्यांच्याकरिता लाभदायक ठरेल. त्यांना (जन्नतच्या) बागा मिळतील, ज्यांच्याखाली प्रवाह वाहत असतील, ज्यात ते नेहमी नेहमी राहतील. अल्लाह त्यांच्याशी प्रसन्न आणि ते अल्लाहशी खूश असतील. ही फार मोठी सफलता आहे.
Maide 5:120
१२०. अल्लाहचीच राज्य-सत्ता आहे आकाशांमध्ये व जमिनीवर आणि जे काही यांच्या दरम्यान आहे त्यावरदेखील! आणि अल्लाह सर्व काही करण्याचे सामर्थ्य बाळगतो.
Enam 6:1
१. सर्व प्रशंसा त्या अल्लाहकरिता आहे, ज्याने आकाशांना व जमिनीला निर्माण केले आणि अंधःकार व प्रकाश बनविला तरीदेखील ईमान न राखणारे लोक (इतरांना) आपल्या पालनकर्त्याच्या बरोबरीचा मानतात.
Enam 6:2
२. त्यानेच तुम्हाला मातीपासून घडविले, मग एक अवधी ठरविला आणि एक निर्धारीत अवधी त्याच्याजवळ आहे तरीही तुम्ही संशयात पडले आहाता?
Enam 6:3
३. आणि तोच अल्लाह आहे आकाशांमध्ये आणि जमिनीवर. तो तुमचे गुप्त भेद व जाहीर सर्व काही जाणतो आणि तुमच्या कमाईला जाणून आहे.१
———
(१) ‘अहले सुन्नत’ अर्थात ‘सलफ’ची श्रद्धा आहे की अल्लाह स्वतः अर्शवर आहे. जसा तो प्रशंसनीय आहे. परंतु आपल्या ज्ञानाच्या आधारे तो सर्व ठिकाणी आहे. अर्थात त्याच्या ज्ञानकक्षेच्या बाहेर काहीही नाही. तथापि काही लोकांच्या मते तो अर्शवर नाही तर सर्व ठिकाणी आहे आणि ते या आयतीद्वआरे आपल्या धारणेचे(आकिदा) समर्थन करतात की ती शक्ती जिला आकाशांमध्ये व धरतीवर ‘अल्लाह’ म्हणून पुकारतात आणि आकाशांमध्ये व धरतीवर जिची राज्यसत्ता आहे. आणि या दोन्ही ठिकाणी जिला उपास्य समजले जाते ती शक्ती अर्थात अल्लाह तुमचे प्रकट-अप्रकट सर्व कर्म चांगल्या प्रकारे जाणतो. (फतहुल कदीर) याचे दुसरे प्रमाणही प्रस्तुत केले गेले आहे, जे धर्माचे सखोल ज्ञान बाळगणाऱ्या विद्वानांच्या भाष्यात आढळते. उदा. ‘तफसीर तबरी’ आणि ‘इब्ने कसीर’ वगैरे.
Enam 6:4
४. आणि त्यांच्याजवळ त्यांच्या पालनकर्त्याच्या निशाण्यांपैकी कोणतीही निशाणी आणली गेली तरीही ते तिच्यापासून तोंड फिरवितात.
Enam 6:5
५. त्यांनी त्या सत्य-ग्रंथालाही खोटे ठरविले, जेव्हा तो त्यांच्याजवळ येऊन पोहोचला तेव्हा लवकरच त्यांना खबर मिळेल त्या गोष्टीची जिची ते थट्टा उडवित होते.
Enam 6:6
६. काय त्यांनी पाहिले नाही की आम्ही त्यांच्यापूर्वी कित्येक जनसमूहांना नष्ट करून टाकले, ज्यांना आम्ही या जगात एवढे सामर्थ्य प्रदान केले होते तसे तुम्हालाही प्रदान केले नाही आणि आम्ही त्यांच्यावर मुसळधार पाऊस पाडला आणि आम्ही त्यांच्या खालून जलप्रवाह जारी केले, मग आम्ही त्यांना त्यांच्या अपराधांपायी बरबाद करून टाकले आणि त्यांच्यानंतर दुसरा जनसमूह निर्माण केला.
Enam 6:7
७. आणि जर आम्ही कागदावर लिहिलेला एखादा ग्रंथ जरी तुमच्यावर उतरविला असता, आणि त्यास या लोकांनी आपल्या हातांनी स्पर्शही केला असता, तरीदेखील हे इन्कारी लोक असेच म्हणाले असते की ही तर उघड जादू आहे आणखी काही नाही.
Enam 6:8
८. आणि ते म्हणाले, तुमच्यावर एखादाा फरिश्ता का नाही उतरविला गेला? आणि जर आम्ही फरिश्ता उतरविला असता तर सारा किस्साच पूर्ण झाला असता, मग त्यांना (थोडासाही) अवसर दिला गेला नसता.
Enam 6:9
९. आणि जर आम्ही पैगंबराला फरिश्ता बनविले असते तर त्याला पुरुष रूप दिले असते आणि तरीदेखील त्यावर त्याच लोकांनी संशय घेतला असता, जे या क्षणी संशय घेत आहेत.
Enam 6:10
१०. आणि तुमच्यापूर्वी अनेक पैगंबरांची थट्टा उडविली गेली, तर ते थट्टा उडवित होते, त्यांच्या त्या थट्टा-मस्करीचा दुष्परिणाम त्यांच्यावर उलटला.
Enam 6:11
११. तुम्ही सांगा, जरा जमिनीवर हिंडून फिरून पाहा की खोटे ठरविणाऱ्यांचा कसा अंत झाला!
Enam 6:12
१२. तुम्ही सांगा की, जे काही आकाशांमध्ये व जमिनीवर आहे ते सर्व कोणाच्या मालकीचे आहे? तुम्ही सांगा, सर्व काही अल्लाहच्याच मालकीचे आहे. दया कृपा करणे अल्लाहने स्वतःवर अनिवार्य करून घेतले आहे. तुम्हाला अल्लाह कयामतच्या दिवशी एकत्र करील, यात मुळीच शंका नाही. ज्या लोकांनी स्वतःचा सर्वनाश करून घेतला आहे, तेच ईमान राखणारे नाहीत.
Enam 6:13
१३. आणि जे काही दिवस आणि रात्रीत राहते ते सर्व काही अल्लाहचेच आहे आणि अल्लाह खूप ऐकणारा आणि मोठा जाणणारा आहे.
Enam 6:14
१४. तुम्ही सांगा, काय मी त्या अल्लाहशिवाय दुसऱ्याला आपला सहाय्यक मित्र बनवू, जो आकाशांचा व जमिनीचा रचयिता आहे आणि तो सर्वांना खाऊ घालतो, त्याला कोणी खाऊ घालत नाही. तुम्ही सांगा, मला हा आदेश दिला गेला आहे की मी त्या सर्वांत प्रथम राहावे, ज्यांनी अल्लाहसाठी आत्मसमर्पण केले आणि अनेकेश्वरवाद्यांपैकी कधीही न राहावे.
Enam 6:15
१५. तुम्ही सांगा की मी जर आपल्या पालनकर्त्याचा आदेश मानला नाही तर एका मोठ्या दिवसाच्या अज़ाब (शिक्षा-यातने) चे मला भय वाटते.
Enam 6:16
१६. ज्याच्यावरून हा अज़ाब त्या दिवशी हटविला गेला, तर त्याच्यावर अल्लाहने फार मोठी दया केली आणि ही स्पष्ट अशी सफलता आहे.
Enam 6:17
१७. आणि जर अल्लाह तुम्हाला काही त्रास-यातना देईल तर तिला दूर करणारा अल्लाहशिवाय अन्य कोणीही नाही आणि जर अल्लाह तुम्हाला लाभ प्रदान करील तर तो प्रत्येक गोष्टीचे सामर्थ्य बाळगतो.
Enam 6:18
१८. तोच आपल्या दासांवर प्रभावशाली आणि वर्चस्वशाली आहे आणि तोच हिकमत बाळगणारा, खबर राखणारा आहे.
Enam 6:19
१९. तुम्ही सांगा की कोणाची साक्ष मोठी आहे? सांगा की आमच्या आणि तुमच्या दरम्यान अल्लाह साक्षी आहे आणि हा कुरआन माझ्याकडे वहयी (अवतरीत) केला गेला आहे, यासाठी की त्याच्याद्वारे तुम्हाला आणि ज्यांच्यापर्यंत हे पोहोचेल, त्या सर्वांना सचेत करावे.१ काय तुम्ही साक्ष देता की अल्लाहसोबत अन्य इतर उपास्ये (माबूद) आहेत? तुम्ही सांगा की मी या गोष्टीची साक्ष नाही देत. तुम्ही सांगा, तो एकच उपासना करण्यायोग्य आहे आणि मी तुमच्या शिर्कपासून मुक्त आहे.
———
(१) रबीअ बिन अनस कथन करतात की आता ज्या कोणापर्यंत कुरआन पोहोचले, जर तो पैगंबर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम यांचा सच्चा अनुयायी आहे तर त्याचे हे कर्तव्य ठरते की त्यानेही लोकांना अल्लाहकडे, त्याचप्रमाणे बोलवावे ज्याप्रमाणे पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम लोकांना आवाहन करीत असत आणि त्याचप्रमाणे जागृत करावे जसे पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम यांनी जागृत केले होते. (इब्ने कसीर)
Enam 6:20
२०. ज्यांना आम्ही ग्रंथ (तौरात आणि इंजील) दिला आहे ते तुम्हाला (हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम यांना) त्याचप्रमाणे ओळखतात, ज्याप्रमाणे आपल्या पुत्रांना ओळखतात. जे स्वतः आपल्याला हरवून बसले आहेत, तेच ईमान राखणार नाहीत.
Enam 6:21
२१. आणि या हून मोठा अत्याचारी कोण आहे, जो अल्लाहवर खोटा आळ घेईल त्याच्या निशाण्यां (प्रतिकां) ना खोटे जाणेल. निःसंशय, अत्याचारी लोक सफल होत नाहीत.
Enam 6:22
२२. आणि ज्या दिवशी आम्ही सर्वांना एकत्र करू, मंग ज्यांनी अल्लाहसोबत दुसऱ्यांना सहभागी ठरविले, त्यांना सांगू, कोठे आहेत ते, ज्यांना तुम्ही (अल्लाहचा) सहभागी जाणत होते (तो दिवस आठवतो).
Enam 6:23
२३. मग त्यांच्या शिर्कची, याखेरीज कोणतीही सबब नसेल की म्हणतील, आमच्या पालनकर्त्या अल्लाहची शपथ, आम्ही अनेक ईश्वरांची उपासना करणारे नव्हतो. १
———
(१) फितना या शब्दाचा एक अर्थ शिर्क आणि एक अर्थ तौबा असा केला गेला आहे. अर्थात शेवटी हे लोक प्रमाण व क्षमा याचना सादर करून अज़ाबपासून सुटका प्राप्त करण्याचा प्रयत्न करतील की आम्ही तर अनेक ईश्वरांचे उपासक नव्हतो. या ठिकाणी ही शंका नसावी की तिथे तर माणसाचे हात पाय साक्ष देतील आणि तोंडावर मोहर लावली जाईल, मग हे इन्कार कसे करतील? याचे उत्तर हजरत अब्बास यांनी दिले आहे की जेव्हा मूर्तिपूजक पाहतील की ईमानधारक जन्नतमध्ये प्रवेश करीत आहेत, तेव्हा ते आपसात सल्लामसलत करून मूर्तिपूजा करण्याचाच इन्कार करतील तेव्हा अल्लाह त्यांच्या तोंडावर मोहर लावील आणि त्यांचे हात पाय त्यांच्या कृत-कर्मांची साक्ष देतील. मग ते सर्वश्रेष्ठ अल्लाहपासून कोणतीही गोष्ट लपविण्याचे सामर्थ्य राखू शकणार नाहीत. (इब्ने कसीर)
Enam 6:24
२४. बघा, आपल्याविषयी त्यांनी कसे खोटे सांगितले आणि त्यांचे ते मिथ्या आरोप त्यांच्याकडून हरवले, गायब झाले.
Enam 6:25
२५. त्यांच्यापैकी काहीजण तुमच्याकडे कान लावून बसतात आणि आम्ही त्यांच्या हृदयांवर पडदे टाकून ठेवले आहेत की त्यास समजावे आणि त्यांचे कान बधीर आहेत आणि सर्व निशाण्या त्यांनी पाहून घेतल्या तरीही त्यांच्यावर ईमान राखणार नाहीत, येथपर्यंत की जेव्हा ते तुमच्याजवळ येतात, भांडण करतात, ईमान न राखणारे म्हणतात की या सर्व थोर बुजूर्ग लोकांच्या कथा-कहाण्या आहेत.
Enam 6:26
२६. आणि हे लोक याच्यापासून दुसऱ्यांनाही रोखतात आणि स्वतःदेखील दूर दूर राहतात आणि हे स्वतःचा सर्वनाश करून घेत आहेत आणि ध्यानी घेत नाही.
Enam 6:27
२७. आणि जर तुम्ही त्या वेळी पाहाल, जेव्हा या लोकांना जहन्नमच्या जवळ उभे केले जाईल, तेव्हा म्हणतील, अरेरे! आम्हाला पुन्हा परत पाठविले गेले तर किती चांगले होईल (आणि असे झाल्यास) तर आम्ही आपल्या पालनकर्त्याच्या निशाण्यांना खोटे ठरवणार नाही आणि आम्ही ईमान राखणाऱ्यांपैकी होऊ.
Enam 6:28
२८. किंबहुना ज्या गोष्टीला यापूर्वी लपवित असत, ती त्यांच्यासमोर आली आहे. जर या लोकांना पुन्हा परत पाठविले गेले, तरीही हे तेच करतील, ज्यापासून यांना रोखले गेले होते आणि निःसंशय हे लोक खोटे आहेत.
Enam 6:29
२९. आणि हे असे म्हणतात की केवळ हे ऐहिक जीवनच आमचे जीवन आहे आणि आम्हाला दुसऱ्यांदा जिवंत केले जाणार नाही.
Enam 6:30
३०. आणि जर तुम्ही त्या वेळी पाहाल, जेव्हा हे लोक आपल्या पालनकर्त्यासमोर उभे केले जातील, अल्लाह फर्माविल, काय हे खरे नाही? ते म्हणतील, निःसंशय, पालनकर्त्याची शपथ, हे खरे आहे. अल्लाह फर्माविल, तर मग आपल्या ईमान न राखण्याच्या परिणामी अज़ाब (शिक्षा-यातना) सहन करा.
Enam 6:31
३१. निःसंशय, मोठ्या तोट्यात पडले ते लोक ज्यांनी अल्लहाची भेट होण्याला खोटे ठरविले, येथपर्यंत की जेव्हा ती निर्धारीत वेळ त्यांच्यावर अचानक येईल, तेव्हा म्हणतील, की अरेरे! खेद आहे आमच्या सुस्तीबद्दल जी या बाबतीत झाली आणि त्यांची अवस्था अशी होईल की आपले ओझे आपल्या कमरेवर लादुन घेतलेले असतील. शावधान! ते मोठेे वाईट ओझे लादून घेतील.
Enam 6:32
३२. आणि या जगाचे जीवन तर, खेळ-तमाशाव्यतिरिक्त आणखी काहीच नाही. आणि अंतिम घर (आखिरत) अल्लाहचे भय राखणाऱ्यांकरिता अधिक चांगले आहे, काय तुम्ही विचार चिंतन करीत नाही?
Enam 6:33
३३. आम्ही हे चांगल्या प्रकारे जाणतो की, त्यांच्या कथनांनी तुम्ही दुःखी कष्टी होता, तर हे लोक तुम्हाला खोटे म्हणत नाहीत, तर हे अत्याचारी अल्लाहच्या आयतींचा इन्कार करतात.१
———
(१) पैगंबर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम यांना इन्कारी लोकांतर्फे खोटे ठरविले जाण्यावर जे दुःख होत असे, त्याच्या निराकरणासाठी व पैगंबरांना सांत्वना देण्यासाठी हे सांगितले जात आहे की हे तुम्हाला खोटे ठरवित नाही. किंबहुना हे अल्लाहच्या आयतींना खोटे ठरवित आहेत. अर्थात ते अत्याचार करीत आहेत आजदेखील जे लोक पैगंबर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम यांच्या आदर्श चारित्र्य, न्यायदान, ईमानदारी व सत्यतेविषयी खूप जोरदार भाषणे देतात, परंतु पैगंबरांचे अनुसरण करण्यात त्यांना कठीणता वाटते. पैगंबरांच्या तुलनेत ते विचार चिंतन आणि आपल्या नेत्यांच्या कथनाला जास्त महत्त्व देतात. त्यांन स्वतःलाच विचारावे की हे कोणाचे चारित्र्य आहे जे त्यांनी अंगिकारले आहे?
Enam 6:34
३४. आणि तुमच्या पूर्वीच्या पैगंबरांनाही खोटे ठरविले गेले आहे आणि त्यांनी, त्या खोटे ठरविले जाण्यावर धीर-संयम राखला आणि त्यांना त्रास-यातना दिली गेली, येथपावेतो की त्यांच्याजवळ आमची मदत पोहोचली. अल्लाहचे फर्मान कोणी बदलणारा नाही आणि तुमच्याजवळ पैगंबरांचे वृत्तांत येऊन पोहोचले आहेत.
Enam 6:35
३५. आणि जर त्यांचे तोंड फिरविणे तुम्हाला असह्य होत असेल तर तुमच्याने हे शक्य असेल तर जमिनीत एखादे भुयार किंवा आकाशात (चढून जाण्यासाठी) एखादी शिडी शोधा आणि त्यांना एखादा मोजिजा (चमत्कार) आणून दाखवा. अल्लाहने इच्छिले असते तर त्या सर्वांना सत्य मार्गावर जमा केले असते. यास्तव नादान लोकांपैकी होऊ नका.
Enam 6:36
३६. आणि तेच लोक स्वीकार करतात, जे ऐकतात आणि मेलेल्या लोकांना अल्लाह जिवंत करून उठविल, मग सर्व त्या (अल्लाहच्याच) कडे आणले जातील.
Enam 6:37
३७. आणि ते म्हणाले की, त्यांच्यावर त्यांच्या पानलकर्त्यातर्फे एखादा मोजिजा (चमत्कार) का नाही उतरविला गेला? तुम्ही सांगा की अल्लाह एखादा चमत्कार उतरविण्याचे पुरेपूर सामर्थ्य राखतो तथापि बहुतेक लोक जाणत नाहीत.
Enam 6:38
३८. आणि जितक्या प्रकारचे सजीव जमिनीवर चालणारे आहेत, आणि जितक्या प्रकारचे पंखांनी उडणारे पक्षी आहेत, त्यांच्यापैकी कोणीही असा नाही, जो तुमच्यासारखा एक समूह नसावा. आम्ही ग्रंथात लिहून ठेवण्यात एकही गोष्ट सोडली नाही, मग सर्व लोक आपल्या पालनकर्त्याजवळ जमा केले जातील.
Enam 6:39
३९. आणि ज्या लोकांनी आमच्या आयतींचा इन्कार केला, ते बहीरे, मुके आहेत, अंधारात पडले आहेत. अल्लाह ज्याला इच्छितो पथभ्रष्ट करतो आणि ज्याला इच्छितो सन्मार्गास लावतो.
Enam 6:40
४०. तुम्ही सांगा की आपली काय अवस्था होईल ते सांगा की जर तुमच्यावर अल्लाहचा एखादा अज़ाब येऊन कोसळावा किंवा तुमच्यापर्यंत कयामतच येऊन पोहचावी, तर काय अल्लाहशिवाय इतरांना पुकाराल? (सांगा) जर तुम्ही सच्चे असाल.
Enam 6:41
४१. किंबहुना, विशेषतः त्यालाच पुकाराल, मग ज्यासाठी तुम्ही पुकाराल, जर त्याने इच्छिले तर त्यास हटवूनही देईल आणि ज्यांना तुम्ही अल्लाहचे सहभागी ठरविता, त्या सर्वांना विसरून जाल.
Enam 6:42
४२. आणि आम्ही तुमच्यापूर्वी होऊन गेलेल्या इतर जनसमूहांकडेही पैगंबर पाठविले होते. त्यांनादेखील आम्ही गरीबी व रोगराईने धरले, यासाठी की त्यांनी गयावया करावी.
Enam 6:43
४३. अशा प्रकारे जेव्हा त्यांना आमची सजा मिळाली तर ते कमजोर का नाही पडतील? परंतु त्यांची मने कठोर झालीत आणि सैतानाने त्यांच्या कर्मांना, त्यांच्या विचारात चांगले करून दाखविले.
Enam 6:44
४४. आणि जेव्हा ते त्या उपदेशाला विसरले, ज्याची त्यांना शिकवण दिली गेली होती, तर आम्ही त्यांच्यावर प्रत्येक चीज-वस्तूचे दरवाजे खुले केले, येथपर्यंत की जेव्हा आपण प्राप्त केलेल्या चीजवस्तूंवर ते घमेंड करू लागले तेव्हा त्यांना आम्ही अचानक तावडीत घेतले, मग ते निराश होऊन बसले.
Enam 6:45
४५. मग अत्याचारी लोकांची पाळेमुळे कापली गेली आणि सर्वश्रेष्ठ अल्लाहची प्रशंसा आहे, जो साऱ्या जगाचा पालनहार आहे.
Enam 6:46
४६. तुम्ही त्यांना सांगा, बरे हे सांगा की जर अल्लाह तुमची ऐकण्याची व पाहण्याची शक्ती पूर्णतः हिरावून घेईल आणि तुमच्या हृदयांवर मोहर लावून देईल तर अल्लाहशिवाय कोणी उपास्य (माबूद) आहे जो तुम्हाला हे पुन्हा परत करील? तुम्ही पाहा की आम्ही कशा प्रकारे आपल्या निशाण्यांना अनेक रूपांनी प्रस्तुत करीत आहोत, तरीदेखील ते कानाडोळा करीत आहेत.
Enam 6:47
४७. तुम्ही सांगा, बरे हे सांगा की जर तुमच्यावर अल्लाहचा अज़ाब अचानक किंवा सावध असताना कोसळून पडला तर (या स्थितीत) काय अत्याचारी लोकांशिवाय दुसरा कोणी मारला जाईल?
Enam 6:48
४८. आणि आम्ही पैगंबर अशासाठी पाठवितो की त्यांनी शुभ-वार्ता दयावी आणि लोकांना (दुष्परिणतीचे) भय दाखवावे, मग जो कोणी ईमान राखील आणि आपले वर्तन सुधारेल तर अशांना ना कसले भय राहील आणि ना ते दुःखी होतील.
Enam 6:49
४९. आणि जे लोक आमच्या आयतींना खोटे ठरवतील, तर त्यांना अल्लाहचा अज़ाब येऊन घेरेल, कारण ते अवज्ञाकारी आहेत.
Enam 6:50
५०. तुम्ही सांगा की मी ना तर तुम्हाला हे सांगतो की माझ्याजवळ अल्लाहचा खजिना आहे आणि ना मी परोक्ष गोष्टींना जाणतो आणि ना मी असे सांगतो की मी फरिश्ता आहे, मी तर केवळ, जे काही वहयीच्या रूपाने माझ्याजवळ येते, त्याचे अनुसरण करतो.१ तुम्ही सांगा की आंधळा आणि डोळस दोघे समान कसे असू शकतात? तर मग तुम्ही विचार चिंतन का नाही करीत?
———
(१) ‘माझ्याजवळ अल्लाहचे खजिने नाहीत’ यास अभिप्रेत हे की प्रत्येक प्रकारचे सामर्थ्य मी बाळगणार नाही की मी तुम्हाला अल्लाहच्या हुकूमाविना व मर्जीविना एखादा चमत्कार दाखवावा, जसे तुम्ही इच्छिता, ज्याला पाहून तुम्हाला माझ्या सत्यतेवर विश्वास बसावा. मी परोक्ष ज्ञानही बाळगत नाही की ज्याद्वारे मी भविष्यकालीन घटनांबद्दल तुम्हाला माहीत करावे. मी फरिश्ता असण्याचाही दावा करीत नाही की ज्यामुळे तुम्ही मला अशी कामे करण्यास विवश करावे, जी मानव-सामर्थ्यापलीकडची असावीत, मी तर केवळ त्या वहयीला मानणारा आहे जी माझ्यावर अवतरीत केली गेली आणि या हदीसमध्येही उल्लेखित आहे. जसे की पैगंबरानी फर्माविले, मला कुरआनसोबत त्याच्याच समानही प्रदान केले गेले यात ‘समान’शी अभिप्रेत पैगंबर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम यांची हदीस (कथने व आचरणशैली) आहेत.
Enam 6:51
५१. आणि अशा लोकांना भय दाखवा, जे या गोष्टीचे भय बाळगतात की आपल्या पालनकर्त्यासमोर अशा स्थितीत एकत्र केले जातील की अल्लाहखेरीज जेवढे आहेत, ना त्यांची मदत करतील आणि ना कोणी शिफारस करणारा असेल, या आशेसह की त्यांनी भय राखावे.
Enam 6:52
५२. आणि तुम्ही त्यांना बाहेर काढू नका, जे सकाळ-संध्याकाळ आपल्या पालनकर्त्याची उपासना करतात, विशेषतः त्याची मर्जी प्राप्त करू इच्छितात, त्यांच्या हिशोबाशी तुमचा किंचितही संबंध नाही आणि तुमच्या हिशोबाशी त्यांचा किंचितही संबंध नाही की ज्यामुळे तुम्ही त्यांना बाहेर घालवावे, किंबहुना तुम्ही अत्याचार करणाऱ्यांपैकी ठराल.
Enam 6:53
५३. आणि अशा प्रकारे आम्ही त्यांना आपसात कसोटीत टाकले, यासाठी की त्यांनी म्हणावे, काय अल्लाहने आमच्यामधून फक्त यांच्यावरच उपकार केला? तेव्हा काय असे नाही की अल्लाह कृतज्ञशील लोकांना चांगल्या प्रकारे जाणतो.
Enam 6:54
५४. आणि तुमच्याजवळ जेव्हा ते लोक येतील, जे आमच्या आयतींवर ईमान राखतात, तर त्यांना सांगा, तुमच्यावर सलामती असो तुमच्या पालनकर्त्याने स्वतःवर दया अनिवार्य करून घेतली आहे की तुमच्यापैकी ज्याने मूर्खपणाने वाईट कृत्य केले मग त्यानंतर क्षमा याचना केली आणि सुधारणा करून घेतली तर अल्लाह मोठा माफ करणारा दया करणारा आहे.
Enam 6:55
५५. अशा प्रकारे आम्ही आपल्या आयतींचे सविस्तर निवेदन करतो यासाठी की अपराधी लोकांचा मार्ग स्पष्ट व्हावा.
Enam 6:56
५६. तुम्ही सांगा की मला या गोष्टीपासून रोखले गेले आहे की मी त्यांची उपासना करावी, ज्यांना अल्लाहशिवाय तुम्ही पुकारता. तुम्ही सांगा की मी तुमच्या मनाच्या इच्छेनुसार चालणार नाही कारण अशा स्थितीत मी मार्गभ्रष्ट होईन आणि सन्मार्गावर राहणार नाही.
Enam 6:57
५७. तुम्ही सांगा, माझ्याजवळ माझ्या पालनकर्त्यातर्फे एक प्रमाण आहे आणि ते तुम्ही खोटे ठरविता. ज्या गोष्टीची तुम्ही घाई करीत आहात ती माझ्याजवळ नाही. अल्लाहशिवाय दुसऱ्या कोणाचाही आदेश नाही अल्लाह वास्तव गोष्टींना स्पष्टतः सांगतो आणि तोच सर्वांत चांगला फैसला करणारा आहे.
Enam 6:58
५८. तुम्ही सांगा, ज्या गोष्टीची तुम्ही एवढ्या घाईने मागणी करीत आहात ती जर माझ्या अवाख्यात असती तर माझ्या व तुमच्या दरम्यान केव्हाच फैसला झाला असता आणि अल्लाह अत्याचारी लोकांना चांगल्या प्रकारे ओळखतो.
Enam 6:59
५९. आणि त्या (अल्लाह) कडेच परोक्षाच्या चाव्या आहेत, ज्यांना फक्त तोच जाणतो आणि जे काही धरतीवर आणि जलाशयात आहे ते सर्व तो जाणतो आणि जमिनीच्या अंधःकारात एक दाणाही खाली पडत नाही. आणि ना एखादी ओली व कोरडी वस्तू पडते, परंतु हे सर्व काही स्पष्ट ग्रंथात नमूद आहे.१
———
(१) स्पष्ट ग्रंथाशी अभिप्रेत ‘सुरक्षित ग्रंथ’ या आयतीद्वारे हे स्पष्ट कळते की गैब (परोक्ष) चे ज्ञान फक्त अल्लाहलाच आहे. समस्त परोक्षा-खजिना त्याच्याचजवळ आहे. यास्तव कृतघ्न, अनेकेश्वरवादी आणि विरोधी लोकांवर केव्हा अज़ाब टाकायचा तेही अल्लाह जाणतो. हदीसमधील उल्लेखानुसार परोक्ष गोष्टी पाच आहेत? १. खयामतचे ज्ञान. २. पर्जन्यवृष्टी. ३. मातेच्या गर्भातले मूल. ४. उद्या घडणारी घटना. ५. मृत्यु कोणत्या जागी होईल. या पाचही गोष्टींचे ज्ञान फक्त अल्लाहला आहे. (सही बुखारी : तफसीर सूरह अल अनआम)
Enam 6:60
६०. तोच (अल्लाह) होय, जो रात्री तुमचा आत्मा (एक पट) ताब्यात घेतो आणि दिवसा जे काही करता तेही जाणतो, मग तुम्हाला त्यात एक ठरलेली मुदत पूर्ण करण्याकरिता जागे करतो. मग तुम्हाला त्याच्याचकडे परत जायचे आहे. तेव्हा तुम्ही जे काही करीत राहिले ते तुम्हाला सांगेल.
Enam 6:61
६१. तोच आपल्या दासांवर वर्चस्वशाली आहे आणि तुमच्यावर देखरेख ठेवणारे (फरिश्ते) पाठवितो, येथ पर्यंत की जेव्हा तुमच्यापैकी एखाद्याचा मृत्यु (समय) जवळ येतो, तेव्हा आमचे फरिश्ते त्याचा जीव काढून घेतात आणि ते किंचितही आळस करीत नाहीत.
Enam 6:62
६२. मग ते आपल्या सच्चा पालनकर्त्या (अल्लाह) जवळ आणले जातील सावधान! त्याचाच आदेश चालेल आणि तो फार लवकर हिशोब घेईल.
Enam 6:63
६३. तुम्ही सांगा, जमीन आणि जलाशयाच्या अंधःकारातून जेव्हा त्याला नरमी आणि हळू स्वरात पुकारता की जर आम्हाला यातून सोडवशिल तर आम्ही खआत्रीने तुझे कृतज्ञशील बनू, तेव्हा कोण तुम्हाला वाचवितो.
Enam 6:64
६४. तुम्ही स्वतः सांगा की यापासून आणि प्रत्येक संकटापासून तुम्हाला अल्लाहच वाचवितो, पण तरीही तुम्ही शिर्क करता.
Enam 6:65
६५. तुम्ही सांगा, तोच तुमच्यावर, तुमच्यावरून किंवा तुमच्या पायांखालून अज़ाब (शिक्षा-यातना) पाठविण्याचे किंवा तुमचे अनेक समूह बनवून आपसात लढाईची मजा चाखविण्याचे सामर्थ्य राखतो. तुम्ही पाहा की आम्ही अनेकरित्या कशा प्रकारे आपल्या आयतींचे निवेदन करतो, यासाठी की त्यांना समजावे.
Enam 6:66
६६. आणि तुमच्या जनसमूहाने त्याला खोटे ठरविले वास्तविक ते सत्य आहे. तुम्ही सांगा की मी तुमच्यावर अधिकारी (निरीक्षक) नाही.
Enam 6:67
६७. प्रत्येक खबरीची एक निर्धारीत वेळ आहे आणि हे तुम्ही फार लवकर जाणून घ्याल.
Enam 6:68
६८. आणि जेव्हा तुम्ही त्या लोकांना पाहाल, जे आमच्या आयतींमध्ये व्यंग दोष काढत आहेत, तेव्हा अशा लोकांपासून वेगळे व्हा, येथपर्यंत की ते दुसऱ्या कामात गुंतावेत आणि जर तुम्हाला सैतान विसरही पाडेल तरी आठवण आल्यावर पुन्हा अशा अत्याचारी लोकांसोबत बसू नका.
Enam 6:69
६९. आणि जे लोक अल्लाहचे भय राखून वागतात, त्यांच्यावर त्यांच्या पकडीचा काहीच परिणाम होणार नाही. मात्र त्यांना शिकवण देत राहाणे (चांगले आहे) कदाचित तेदेखील अल्लाहचे भय राखून दुष्कर्मापासून दूर राहू लागतील.
Enam 6:70
७०. आणि अशा लोकांशी कधीही नाते ठेवू नका, ज्यांनी आपल्या दीन (धर्मा) ला खेळ-तमाशा बनवून ठेवले आहे आणि ऐहिक जीवनाने त्यांना धोक्यात टाकले आहे. आणि या कुरआनाद्वारे उपदेश जरूर करीत राहा, यासाठी की एखादा मनुष्य आपल्या कर्मांमुळे अशा प्रकारे न फसावा की कोणी अल्लाहशिवाय त्याची मदत करणारा नसावा आणि ना शिफारस करणारा आणि अवस्था अशी व्हावी की जर सारे जग भरून मोबदल्यात देऊन टाकील, तरीही त्याच्याकडून घेतले न जावे. ते असेच लोक आहेत की आपल्या कर्मांमुळे अडकून पडले. त्यांच्यासाठी खूप गरम पाणी पिण्याचे असेल आणि त्यांच्या कुप्र (इन्कारा) मुळे मोठी दुःदायक शिक्षा-यातना असेल.
Enam 6:71
७१. तुम्ही सांगा, काय आम्ही अल्लाहशिवाय त्याला पुकारावे जो आमचे भले-बुरे काहीच करू शकत नसावा, आणि अल्लाहचे मार्गदर्शन लाभल्यानंतर त्या माणसासारखे टाचा रगडत परत फिरविले जावे, जणू सैतानाने बहकविले असावे आणि तो धरतीवर भटकत फिरत असावा. त्याचे साथीदार त्याला सरळ मार्गाकडे बोलावित असावेत की आमच्या जवळ ये. तुम्ही सांगा, अल्लाहचे मार्गदर्शनच खऱ्या अर्थाने मार्गदर्शन आहे. आणि आम्हाला हा आदेश दिला गेला आहे की समस्त जगाच्या स्वामीसाठी स्वतःला त्याच्या हवाली करावे.
Enam 6:72
७२. आणि नमाज कायम करा आणि त्या (अल्लाह) चे भय राखा, तो, तोच आहे, ज्याच्याकडे तुम्ही एकत्रित केले जाल.
Enam 6:73
७३. त्यानेच आकाशआंना व जमिनीला सत्यासह निर्माण केले, आणि ज्या दिवशी तो फर्माविल, होऊन जा तर होऊन जाईल. त्याचे वचन अगदी सत्य आहे, आणि ज्या दिवशी शंख फुंकला जाईल, राज्य सत्ता त्याचीच असेल. तो जाणणारा आहे परोक्ष आणि अस्तित्वाचा आणितो हिकमतशाली व खबर राखणारा आहे.
Enam 6:74
७४. आणि स्मरण करा, जेव्हा इब्राहीम आपले पिता आजरला म्हणाले, काय तुम्ही मुर्त्यांना उपास्य (माबूद) बनवित आहात? मी तर तुम्हाला व तुमच्या लोकांना उघड मार्गभ्रष्टतेत पाहतोय.
Enam 6:75
७५. आणि अशा प्रकारे आम्ही इब्राहीमला आकाशांची व जमिनीची राज्य-सत्ता दाखविली यासाठी की त्यांनी पुरेपूर विश्वास ठेवणाऱ्यांपैकी व्हावे.
Enam 6:76
७६. मग जेव्हा त्यांच्यावर रात्रीचा अंधार पसरला तेव्हा एक तारा पाहिला, म्हणाले की हा माझा पालनहार आहे, मग जेव्हा तो बुडाला तेव्हा म्हणाले की मी अस्त पावणाऱ्याशी प्रेम राखत नाही.
Enam 6:77
७७. मग जेव्हा चंद्राला चमकताना पाहिले, तेव्हा म्हणाले, हा माझा पालनकर्ता आहे, मग जेव्हा तो बुडाला तेव्हा म्हणाले की जर माझ्या पालनकर्त्याने मला सरळ मार्ग दाखविला नाही तर मी मार्गभ्रष्ट झालेल्यांपैकी होईन.
Enam 6:78
७८. मग जेव्हा सूर्याला चमकताना पाहिले, तेव्हा म्हणाले, हा माझा पालनहार आहे. हा तर सर्वांत मोठा आहे, परंतु जेव्हा तो बुडाला तेव्हा म्हणाले, की निःसंशय मी तुमच्या शिर्कपासून मुक्त आहे.
Enam 6:79
७९. मी आपले तोंड त्याच्याकडे फिरवून घेतले, ज्याने आकाशांना व जमिनीला निर्माण केले एकाग्रतापूर्वक, आणि मी अनेकेश्वरवाद्यांपैकी नाही.
Enam 6:80
८०. आणि त्यांच्याशी, त्यांचे लोक हुज्जत करू लागले. पैगंबर (इब्राहीम) म्हणाले, काय तुम्ही अल्लाहविषयी माझ्याशी वाद घालता. वास्तविक त्याने मला सरळ मार्ग दाखविला आहे आणि ज्यांना तुम्ही अल्लाहसोबत सामील करता, मी त्यांचे भय राखत नाही, परंतु हे की माझा पालनकर्ता एखाद्या कारणाने इच्छिल. माझ्या पालनकर्त्याने प्रत्येक गोष्टीला आपल्या ज्ञानकक्षेत घेरलेले आहे. काय तुम्ही तरीही विचार करीत नाही?
Enam 6:81
८१. आणि मी त्या वस्तूचे का म्हणून भय राखावे जिला तुम्ही अल्लाहचा सहभागी ठरविले आहे, वास्तविक तुम्ही त्या वस्तूला अल्लाहचा सहभागी बनविण्यापासून भित नाही, ज्याचे तुमच्याजवळ अल्लाहने एखादे प्रमाण उतरविले नाही. मग या दोन्ही समूहांमध्ये कोण शांतीचा जास्त हक्कदार आहे, जर तुम्ही जाणत असाल.
Enam 6:82
८२. ज्या लोकांनी ईमान राखले आणि आपल्या ईमानात कसल्याही प्रकारच्या शिर्कचे मिश्रण केले नाही, त्यांच्याचसाठी शांती आहे आणि तेच सरळ मार्गावर आहेत.
Enam 6:83
८३ . आणि हे आमचे प्रमाण आहे जे आम्ही इब्राहिमला त्यााच्या जनसमूहाच्या मुकाबल्यात दिले . आम्ही ज्याला इच्छितो त्याचे दर्जे बुलंद (उंचवितो ) निःशंय तुमचा पालनकर्ता हिकमतशाली सर्वज्ञ आहे
Enam 6:84
८४. आणि आम्ही त्यांना इसहाक आणि याकूब प्रदान केले आणि प्रत्येकाला सरळ मार्ग दाखविला आणि यापूर्वी नूहला मार्ग दाखविला आणि संततीत दाऊद आणि सुलेमान आणि अय्यूब आणि यूसुफ आणि मूसा व हारून यांना आणि अशा प्रकारे आम्ही नेकी (सत्कर्म) करणाऱ्या लोकांना मोबदला प्रदान करतो.
Enam 6:85
८५. आणि जकरिया आणि यह्या आणि ईसा आणि इलियास यांना, हे सर्व नेक सदाचारी लोकांपैकी होते.
Enam 6:86
८६. आणि इस्माईल आणि यसअ आणि यूनुस आणि लूत यांना, या सर्वांना आम्ही या जगातील लोकांवर श्रेष्ठता प्रदान केली.
Enam 6:87
८७. आणि त्यांच्या वाडवडील, संतती आणि भावांमधून आणि आम्ही त्यांची निवड केली आणि त्यांना सरळ मार्ग दाखविला.
Enam 6:88
८८. हाच अल्लाहचा मार्ग आहे आपल्या दासांपैकी ज्याला इच्छितो, त्याला मार्ग दाखवितो आणि जर त्या लोकांनीही अल्लाहसोबत दुसऱ्यांना सहभागी केले असते तर त्यांचे कर्म वाया गेले असते.
Enam 6:89
८९. यांनाच आम्ही ग्रंथ आणि हिकमत आणि नुबूवत (पैगंबरी) प्रदान केली आणि जर या लोकांनी यास मानले नाही, तर आम्ही अशा लोकांना तयार करून ठेवले आहे, जे याचा इन्कार करणार नाहीत.
Enam 6:90
९०. हेच ते लोक होते, ज्यांना अल्लाहने उचित मार्ग दाखविला, यास्तव तुम्ही त्यांच्या मार्गाचे अनुसरण करा. तुम्ही सांगा की मी याबद्दल कसलाही मोबदला मागत नाही. समस्त जगातील लोकांकरिता ही केवळ स्मरणिका आहे.
Enam 6:91
९१. आणि त्यांनी, अल्लाहची जशी कदर केली पाहिजे होती तशी कदर केली नाही. जेव्हा ते असे म्हणाले की अल्लाहने कोणा माणसावर काही उतरविले नाही. तुम्ही सांगा, मूसा जो ग्रंथ तुमच्याजवळ घेऊन आले, जो लोकांकरिता दिव्य प्रकाश आणि मार्गदर्शन आहे, तो कोणी उतरविला, ज्याला तुम्ही वेगवेगळ्या पानांमध्ये ठेवता, ज्यातून काही जाहीर करता आणि अधिकांश लपविता आणि तुम्हाला ते ज्ञान दिले गेले, जे तुम्ही आणि तुमचे वाडवडील जाणत नव्हते. तुम्ही सांगा की अल्लाहनेच उतरविला होता. मग त्यांना त्यांच्या दोष काढण्यात, खेळ तमाशा करीत सोडून द्या.
Enam 6:92
९२. आणि हादेखील एक शुभ ग्रंथ आहे, जो आम्ही अवतरीत केला आहे. आपल्या पूर्वीच्या ग्रंथांची सत्यता दर्शवितो, यासाठी की तुम्ही मूळ वस्ती (मक्का) आणि त्याच्या जवळपासच्या (शहरांना म्हणजे समस्त मानवविश्वा) ला सूचित करावे आणि जे आखिरतवर ईमान राखतात, तेच याला मानतील आणि तेच आपल्या नमाजांचे रक्षण करतील.
Enam 6:93
९३. आणि त्याहून मोठा अत्याचारी आणखी कोण असू शकतो, जो अल्लाहवर खोटा आरोप ठेवील किंवा असे म्हणेल की माझ्याकडे वहयी आली आहे, वास्तविक त्याच्याकडे काहीच आले नाही आणि जो असे म्हणाला की, ज्याप्रकारे अल्लाहने उतरविले तसे मीदेखील उतरविन. जर तुम्ही अत्याचारींना मृत्युच्या कठोर शिक्षा-यातनेत पाहाल, जेव्हा फरिश्ते आपले हात पुढे करून म्हणतील, आपला जीव काढा. आज तुम्हाला अल्लाहवर नाहक आरोप ठेवण्यामुळे आणि घमेंडीने त्याच्या आयतींचा इन्कार करण्यापायी अपमानदायक मोबदला दिला जाईल.
Enam 6:94
९४. आणि तुम्ही आमच्याजवळ एकटे-एकटे आलात, जसे तुम्हाला पहिल्यांदा निर्माण केले गेले आणि तुम्हाला जे दिले ते आपल्या मागे सोडून आलात आणि तुमची शिफारस करणारे आम्हाला दृष्टीस पडत नाहीत, ज्यांना तुम्ही आपल्या कार्यात आमचा सहभागी समजत होते. निःसंशय तुमचे आणि त्यांचे संबंध तुटले आणि तुमचे ते विचार तुमच्यापासून हरवले.
Enam 6:95
९५. अल्लाहच बीज आणि कोय फाडून अंकूर बाहेर काढतो. तो सजीवाला निर्जीवातून, निर्जीवाला सजीवातून बाहेर काढतो. तोच अल्लाह आहे. मग तुम्ही कोठे उलट बहकत जात आहात?
Enam 6:96
९६. तो प्रातःकाळ फाडणारा आहे आणि त्याने रात्रीला आराम करण्यासाठी आणि सूर्य आणि चंद्राला हिशोब लावण्यासाठी बनविले. ही निर्धारीत गोष्ट आहे, जबरदस्त ज्ञान बाळगणाऱ्या (अल्लाह) ची.
Enam 6:97
९७. आणि त्यानेच तुमच्यासाठी तारे बनविले, यासाठी की तुम्ही जमीन आणि समुद्राच्या अंधारात त्यांच्याद्वारे मार्ग जाणून घ्यावा. आम्ही त्या लोकांसाठी निशाण्या सांगितल्या आहेत, जे ज्ञान बाळगतात.
Enam 6:98
९८. आणि त्यानेच तुम्हाला एका जीवापासून निर्माण केले. मग तुमचे एक कायमस्वरूपी आणि एक सुपूर्द होण्याचे ठिकाण आहे. आम्ही त्यांच्यासाठी निशाण्या (चिन्हे) सांगितल्या आहेत. जे ज्ञान बाळगतात.
Enam 6:99
९९. आणि तोच होय, ज्याने आकाशातून पर्जन्यवृष्टी केली. मग आम्ही त्याद्वारे सर्व प्रकारची वनस्पती उगवली, मग त्याद्वारे हिरवेगार शेती उत्पन्न केली, ज्यापासून आम्ही थरावर थर असलेले धान्य आणि खजूरीच्या गाभ्याशी लटकणारे घोंस आणि द्राक्ष व जैतून व डाळींबाच्या बागा उत्पन करतो, ज्या एकाच प्रकारच्या आणि अनेक प्रकारच्या असतात. त्यांची फळे पाहा, जेव्हा ती लागतात, त्यांचे पिकणे, निःसंशय या सर्वांत, त्या लोकांकरिता निशाण्या (चिन्हे) आहेत, जे ईमान राखतात.
Enam 6:100
१००. आणि लोकांनी जिन्नांना अल्लाहचे सहभागी बनविले आहे, वास्तविक त्यानेच त्यांना निर्माण केले आहे आणि त्या (अल्लाह) च्याकरिता पुत्र आणि कन्या, मनाने ठरवून घेतल्या, कसल्याही ज्ञानाविना तो (अल्लाह) यांनी सांगितलेल्या अवगुणांपासून मुक्त आणि उत्तम आहे.
Enam 6:101
१०१. तो आकाशांची व धरतीची िनिर्मती करणारा आहे, त्याला संतती कशी असू शकते? वास्तविक त्याची कोणतीही पत्नी नाही आणि तो प्रत्येक चीज-वस्तूचा निर्माणकर्ता आणि जाणणारा आहे.
Enam 6:102
१०२. तोच अल्लाह तुमचा पालनकर्ता आहे, त्याच्याखेरीज कोणीही उपास्य (माबूद) नाही, प्रत्येक चीज-वस्तूचा रचयिता, यास्तव फक्त त्याचीच उपासना करा आणि तो प्रत्येक गोष्टीची देखभाल ठेवणारा आहे.
Enam 6:103
१०३. डोळे त्याला पाहू शकत नाहीत आणि तो सर्व नजरा पाहतो आणि तो अतिसूक्ष्मदर्शी, भेद जाणणारा खबर राखणारा आहे.
Enam 6:104
१०४. तुमच्या पालनकर्त्यातर्फे तुमच्याजवळ प्रमाण घेऊन पोहोचले आहे तेव्हा जो पाहील, आपल्या भल्याकरिता (पाहील) आणि जो आंधळा बनून राहील, तो आपले अहित ( नुकसान) करून घेईल आणि मी तुमचा रक्षक नाही.
Enam 6:105
१०५. अशा प्रकारे आम्ही (पवित्र कुरआनाच्या) आयतींना पुन्हा पुन्हा सांगात आहोत, यासाठी की त्यांनी सांगावे की तुम्ही वाचून ऐकविले त्या लोकांकरिता जे जाणतात आम्ही ते चांगल्या प्रकारे स्पष्ट करून सांगावे.
Enam 6:106
१०६. तुम्ही आपल्या पालनकर्त्याच्या आदेशा (वहयी) चे अनुसरण करा की अल्लाहशिवाय कोणीही उपास्य (माबूद) नाही आणि अनेकेश्वरवाद्यांपासून विमुख व्हा.
Enam 6:107
१०७. आणि अल्लाहने इच्छिले असते तर यांनी इतरांना अल्लाहचे सहभागी ठरविले नसते आणि आम्ही तुम्हाला या लोकांवर देखरेख ठेवणारा बनविले नाही, आणि ना तुम्ही त्यांच्यावर अधिकार राखणारे आहात.
Enam 6:108
१०८. आणि जे लोक अल्लाहशिवाय दुसऱ्यांना पुकारतात त्यांना अपशब्द वापरू नका, अन्यथा शत्रू बनून अजाणतेपणी तेदेखील अल्लाहसाठी अपशब्द वापरतील. अशा प्रकारे आम्ही प्रत्येक जनसमूहासाठी त्यांचे कर्म सुशोभित बनविले आहे, मग त्यांना आपल्या पालनकर्त्याकडेच परतायचे आहे. यास्तव तो त्यांना त्याबाबत सूचित करील जे काही ते करीत राहिले.
Enam 6:109
१०९. आणि त्यांनी जोरदारपणे अल्लाहची शपथ घेतली की त्यांच्याजवळ एखादी निशाणी आली तर खात्रीने मानतील. तुम्ही सांगा की निशाण्या अल्लाहजवळ आहेत आणि तुम्हाला काय माहीत की त्या निशाण्या येऊन पोहचतील, तरीही ते मानणार नाहीत.
Enam 6:110
११०. आणि आम्ही त्यांची मने व डोळे फिरवून टाकू जसे त्यांनी पूर्वी यावर ईमान राखले नाही आणि त्यांना त्यांच्या विद्रोहा (च्या अंधारा) त असेच भटकत ठेवू.
Enam 6:111
१११. आणि जर आम्ही त्यांच्याजवळ फरिश्ते उतरविले असते, आणि त्यांच्याशी मेलेल्या लोकांनी बातचित केली असती आणि त्यांच्यापुढे सर्व चीज-वस्तू जमा केली असती तरीदेखील अल्लाहच्या इच्छेविना यांनी ईमान राखले नसते, परंतु यांच्यापैकी बहुतेक लोक मूर्खता करीत आहेत.
Enam 6:112
११२. आणि अशा प्रकारे प्रत्येक पैगंबराकरिता जिन्नांच्या आणि मानवांच्या सैतानांना शत्रू बनविले१ जे आपसात भुरळ पडण्याकरिता मनमोहक गोष्टी मनात आणतात आणि जर तुमच्या पालनकर्त्याने इच्छिले असते तर त्यांनी असे केले नसते. तेव्हा तुम्ही त्यांना व त्यांच्या कारस्थानाला सोडा.
———
(१) ही तीच गोष्ट होय जी अनेकरित्या पैगंबर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम यांना धीर-सांत्वना देण्यासाठी सांगितली गेली की तुमच्यापूर्वी जेवढे पैगंबर आलेत त्यांनाही खोटे ठरविले गेले, सजा-यातना दिल्या गेल्या. तात्पर्य, ज्याप्रकारे त्यांनी धीर-संयम व हिंमत राखली त्याच प्रकारे तुम्हीही या सत्याच्या शत्रूंपुढे धीर, संयम आणि दृढता दाखवा. यावरून हे कळाले की सैतानाचे अनुयायी मनवांखेरीज जिन्नांमध्येही आहेत, आणि हे ते होते जे दोन्ही गटांचे शत्रु, विद्रोही, अत्याचारी आणि दुराचारी गर्विष्ठ आहेत.
Enam 6:113
११३. आणि यासाठी की त्यांची मने त्याकडे प्रवृत्त व्हावीत, जे आखिरतवर ईमान राखत नाही आणि तशाने आनंदित व्हावेत आणि तोच अपराध करावा जो ते लोक करीत होते.१
———
(१) अर्थात सैतानाच्या वाईट इराद्याला तेच लोक बळी पडतात, जे आखिरतवर ईमान राखत नाहीत, आणि हे खरे आहे की ज्या प्रकारे लोकांच्या मनात आखिरतचा विश्वास कमजोर होत चालला आहे, तद्नुषंगे लोक सैतानी व्यूहात फसत चालले आहेत.
Enam 6:114
११४. तर काय मी अल्लाहखेरीज अन्य एखाद्या शासकाचा शोध घ्यावा वास्तविक त्यानेच तुमच्याकडे एक सविस्तर ग्रंथ (कुरआन) अवतरीत केला आणि आम्ही ज्यांना ग्रंथ प्रदान केला आहे, ते जाणतात की खरोखर तो तुमच्या पालनकर्त्यातर्फे सत्यासह आहे, तेव्हा तुम्ही संशय करणाऱ्यांपैकी होऊ नका.
Enam 6:115
११५. आणि तुमच्या पालनकर्त्याची वचने सत्यकथन आणि न्यायाने परिपूर्ण झालीत. त्याच्या वाणीला कोणीही बदलू शकत नाही आणि तो चांगल्या प्रकारे ऐकणारा, जाणणारा आहे.
Enam 6:116
११६. आणि जगात राहणाऱ्यांपैकी तुम्ही जर अधिकांश लोकांचे अनुसरण कराल तर ते तुम्हाला अल्लाहच्या मार्गापासून हटवतील. ते फक्त निराधार कल्पनांच्या मागे चालतात आणि अटकळीच्या गोष्टी करतात.१
———
(१) कुरआनात सांगितलेल्या सत्याचे अवलोकन प्रत्येक कालखंडात केले जाऊ शकते अन्य एका ठिकाणी अल्लाहने फर्माविले, ‘’तुमच्या मर्जीनंतरही अधिकांश लोक ईमान राखणार नाहीत.’’ (सूरह यूसुफ-१०३) तात्पर्य, सत्य आणि सचोटीच्या मार्गावर चालणारे नेहमी फार थोडे असतात ज्यावरून हेही सिद्ध होते की सत्याचा आधार प्रमाण व पुरावा आहे. लोकांची कमी अधिक संख्या नव्हे. ज्या गोष्टीला जास्तीत जास्त लोकांनी मानले ती सत्य असावी असे नाही आणि कमी लोक सत्यनिष्ठ नाहीत असेही नाही, किंबहुना कुरआनाद्वआरे या सत्याच्या आधारावर शक्य आहे की सत्यनिष्ठ संख्येने कमी असतात आणि खोटे लोक जास्त. ज्याची पुष्टी हदीसद्वारे होते. पैगंबर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम यांनी फर्माविले, माझे अनुयायी ७३ गटांमध्ये विभागले जातील, ज्यापैकी फक्त एक गट जन्नतमध्ये जाईल, बाकी सर्व जहन्नममध्ये जातील आणि जन्नतमध्ये जाणाऱ्या गटाची लक्षणे सांगितली की जो माझ्या आणि माझ्या सहाबांच्या मार्गावर चालणारा असेल. (अबु दाऊद- किताबुस सुन्नः, प्रकरण शरह अस सुन्नः नं. ४५९६, तिर्मिजी- किताबुल ईमान, प्रकरण माजाअ फी श्फ्तराक हाजेहिल उम्मः)
Enam 6:117
११७. निःसंशय तुमचा पालनकर्ता त्यांना चांगल्या प्रकारे जाणतो, जे त्याच्या मार्गापासून विचलित होतात आणि तो त्यांनाही चांगल्या प्रकारे जाणतो जे त्याच्या मार्गावर चालतात.
Enam 6:118
११८. तर ज्या (जनावरा) वर अल्लाहचे नाव घेतले जाईल, त्यातून खा, जर तुम्ही त्याच्या (अल्लाहच्या) हुकूमावर ईमान राखत असाल.
Enam 6:119
११९. आणि तुमच्यासाठी कोणती गोष्ट याचे कारण असावी की तुम्ही अशा जनावरांमधून न खावे, ज्यावर अल्लाहचे नाव घेतले गेले असेल जरी अल्लाहने त्या सर्व जनावरांचा तपशील सांगितला आहे. ज्यांना तुमच्यासाठी हराम केले गेले आहे, परंतु तेदेखील जेव्हा तुम्हाला सक्त गरज भासल्यास (वैध आहे) आणि हे निश्चित आहे की बहुतेक लोक आपल्या चुकीच्या इराद्यांवर, कसल्याही प्रमाणाविना भटकतात. निःसंशय अल्लाह अतिरेक करणाऱ्यांना चांगल्या प्रकारे ओळखतो.
Enam 6:120
१२०. तुम्ही उघड आणि लपलेले असे सर्व अपराध सोडून द्या. निःसंशय जे लोक गुन्हा कमवितात, त्यांना त्यांच्या दुष्कर्मांचा मोबदला लवकरच दिला जाईल.
Enam 6:121
१२१. आणि ते खाऊ नका, ज्या जनावरावर जिबह करतेवेळी अल्लाहचे नाव घेतले गेले नसेल आणि हे दुष्कृत्य आहे आणि सैतान आपल्या मित्रांच्या मनात अशा गोष्टी भरवितात की त्यांनी तुमच्याशी भांडण करावे जर तुम्ही त्यांचे म्हणणे मानले तर खचितच तुम्ही शिर्क करणारे व्हाल.
Enam 6:122
१२२. आणि असा मनुष्य, जो पूर्वी मेलेला होता, मग आम्ही त्याला जिवंत केले आणि त्याच्यासाठी दिव्य प्रकाश बनविला, ज्याद्वारे तो लोकांमध्ये चालतो, काय त्या माणसासारखा असू शकतो, जो अंधारात असावा, आणि त्यातून बाहेर पडू शकत नसावा? अशाच अधर्मी लोकांकरिता त्यांचे आचरण सुशोभित बनविले गेले आहे.
Enam 6:123
१२३. आणि अशा प्रकारे आम्ही प्रत्येक वस्तीच्या मोठ्या अपराध्यांना कट-कारस्थान रचण्यासाठी बनविले यासाठी की त्यांनी वस्तीत कारस्थान रचावे आणि ते आपल्याच विरूद्ध कारस्थान रचतात मात्र त्यांना ते कळून येत नाही.
Enam 6:124
१२४. आणि जेव्हा त्यांच्याजवळ एखादी आयत येते तेव्हा म्हणतात की आम्ही कधीही विश्वास ठेवणार नाहीत जोपर्यंत आम्हालाही तशीच आयत दिली जात नाही, जी अल्लाहच्या पैगंबरांना दिली गेली. अल्लाह चांगल्या प्रकारे जाणतो की त्याने आपली पैगंबरी (रिसालत) कोणत्या ठिकाणी राखावी. लवकरच ज्यांनी अपराध केले आहेत, त्यांना अल्लाहच्या ठिकाणी अपमानित व्हायचे आहे आणि जे कट-कारस्थान ते करीत राहिले, त्याचा मोबदला फार मोठा अज़ाब आहे.
Enam 6:125
१२५. ज्याला अल्लाह सरळ मार्ग दाखवू इच्छितो त्याची छाती (हृदय) इस्लाम (धर्मा) करिता खुली करतो आणि ज्याला मार्गभ्रष्ट करू इच्छितो, त्याची छाती आणखी जास्त संकुचित करतो, जणू काही तो आकाशात चढत आहे. अशा प्रकारे अल्लाह त्यांना घाणीत टाकतो जे ईमान राखत नाही.
Enam 6:126
१२६. हा तुमच्या पालनकर्त्याचा सरळ मार्ग आहे आम्ही आयतींचे सविस्तर वर्णन त्या जनसमूहाकरिता दिले आहे, जे बोध प्राप्त करतात.
Enam 6:127
१२७. यांच्याचसाठी त्यांच्या पालनकर्त्याच्या ठिकाणी सलामतीचे घर आहे आणि तोच त्यांच्या सत्कर्मांच्या आधारावर त्यांचा मित्र आहे.
Enam 6:128
१२८. आणि ज्या दिवशी अल्लाह या सर्वांना एकत्र करील (आणि फर्माविल) हे जिन्न-समूह! तुम्ही मानवांपैकी बहुतेकांना आत्मसात केले आणि मानवांपैकी त्यांचे मित्र म्हणतील, हे आमच्या पालनकर्त्या! आम्हाला आपसात लाभ पोहचव आणि आम्ही तुझ्या निर्धारीत वेळेस, जी तू आमच्यासाठी निश्चित केली, जाऊन पोहोचलो. (अल्लाह) फर्माविल, की तुमची जागा जहन्नममध्ये आहे, ज्यात तुम्ही सदैव राहाल, परंतु अल्लाह इच्छिल, निःसंशय तुमचा पालनकर्ता हिकमतशाली, ज्ञानी आहे.
Enam 6:129
१२९. अशाच प्रकारे आम्ही अत्याचारी लोकांना त्यांच्या दुष्कृत्यांपायी एकमेकांचे दोस्त बनवितो.
Enam 6:130
१३०. हे जिन्न आणि मानवांच्या समूहांनो! काय तुमच्याजवळ तुमच्यामधून रसूल (पैगंबर) नाही आलेत? जे तुमच्यासमोर आमच्या आयती वाचून ऐकवित होते आणि तुम्हाला या (कयामतच्या) दिवसाचा सामना करण्याबाबत सचेत करीत राहिले. ते म्हणतील, आम्ही स्वतःविरूद्ध साक्षी आहोत आणि ऐहिक जीवनाने त्यांना धोक्यात ठेवले आणि ते स्वतःविरूद्धच साक्ष देतील की ते काफिर (इन्कारी) होते.
Enam 6:131
१३१. (पैगंबर पाठविले गेले) कारण तुमचा पालनकर्ता एखाद्या वस्तीच्या लोकांना एखाद्या अत्याचारापायी नष्ट करीत नाही, जेव्हा तेथील रहिवाशी गाफील असावेत.
Enam 6:132
१३२. आणि प्रत्येकासाठी त्याच्या कर्मानुसार अनेक दर्जे आहेत आणि तुमचा पालनकर्ता या कर्मांशी गाफील नाही जी ते करीत आहेत.
Enam 6:133
१३३. आणि तुमचा पालनकर्ता निःस्पृह दया करणारा आहे. जर त्याने इच्छिले तर तुमचा सर्वनाश करून टाकील आणि तुमच्यानंतर ज्याला इच्छिल तुमच्या जागी आणून ठेवील, जसे तुम्हाला अन्य एका जनसमूहाच्या वंशात निर्माण केले.
Enam 6:134
१३४. ज्या गोष्टीचा तुम्हाला वायदा दिला जात आहे, ती निःसंशय घडून येणार आहे आणि तुम्ही विवश करू शकत नाही.
Enam 6:135
१३५. तुम्ही सांगा, हे माझ्या जनसमूहाच्या लोकांनो! तुम्ही आपल्या ठिकाणी आपले कर्म करीत राहा, मीदेखील (आपल्या जागी) कर्म करीत आहे. तुम्हाला लवकरच माहीत पडेल की कोणाचा शेवट या जगानंतर (चांगला) होतो. निःसंशय अत्याचार करणारे कधीही सफल होणार नाहीत.
Enam 6:136
१३६. आणि अल्लाहने जी शेती आणि जनावरे निर्माण केलीत, त्यांनी त्यांच्यातून काही भाग अल्लाहचा ठरविला आणि आपल्या कल्पनेनुसार म्हणाले की हा हिस्सा अल्लाहचा आहे, आणि हा आमच्या उपास्य-देवतांचा, मग जो आमच्या दैवतांचा (हिस्सा) आहे, तो अल्लाहपर्यंत पोहचत नाही, मात्र जो अल्लाहचा आहे तो त्यांच्या दैवतांपर्यंत पोहोचतो. किती वाईट फैसला ते करतात!
Enam 6:137
१३७. आणि अशा प्रकारे बहुतेक अनेकेश्वरवाद्यांकरिता त्यांच्या दैवतांनी त्यांना बरबाद करण्यासाठी आणि त्यांच्यावर त्यांचा धर्म संशयास्पद बनविण्यासाठी, त्यांच्या संततीच्या हत्येला सुशोभित बनविले आहे आणि अल्लाहने इच्छिले असते तर त्यांनी असे केले नसते तेव्हा तुम्ही त्यांना आणि त्यांच्या मनाने रचलेल्या गोष्टीला सोडून द्या.
Enam 6:138
१३८. आणि ते म्हणाले, ही जनावरे आणि शेती हराम आहे, याला तोच खाईल, ज्याला आम्ही आपल्या इच्छेने खायला सांगू आणि काही जनावरांची पाठ (अर्थात स्वार होणे) हराम आहे आणि काही जनावरांवर (जिबह करतेवेळी) अल्लाहचे नाव घेत नाही, अल्लाहवर खोटे रचण्याकरिता अल्लाह त्यांना त्यांच्या आरोपाचा मोबदला लवकरच देईल.
Enam 6:139
१३९. आणि ते म्हणाले, या जनावरांच्या गर्भात जे आहे ते विशेषतः आमच्या पुरुषांकरिता आहे आणि आमच्या बायकांवर हराम आहे, मात्र जर ते मृत असेल तर त्यात सर्वांचा हिस्सा आहे. तो (अल्लाह) त्यांच्या या कथनाचा मोबदला लवकरच देईल. निःसंशय तो हिकमतशाली, जाणणारा आहे.
Enam 6:140
१४०. मोठ्या नुकसानात राहिले ते ज्यांनी ज्ञानाविना मूर्खपणाने आपल्या संततीची हत्या केली आणि अल्लाहने जी रोजी (आजीविका) प्रदान केली तिला हराम ठरवून घेतले अल्लाहवर खोटे रचण्यापायी, ते मार्गभ्रष्ट झाले आणि सन्मार्गावर राहिले नाहीत.
Enam 6:141
१४१. तोच (अल्लाह) आहे, ज्याने वेलींच्या आणि विनावेलींच्या बागा निर्माण केल्या, आणि खजूर व शेती ज्यांचा स्वाद अनेक प्रकारचा आहे, आणि जैतून व डाळिंबे एक प्रकारची, अनेकविध (अनेकप्रकारची). जेव्हा त्यांना फळे येतील तेव्हा तुम्ही ती खा आणि त्याच्या कापणीच्या दिवशी त्याचा हक्क जरूर अदा करा आणि उधळपट्टीने खर्च करू नका. निःसंशय, अल्लाह उधळपट्टी करणाऱ्यांशी प्रेम राखत नाही.
Enam 6:142
१४२. आणि जनावरांमध्ये काही ओझे लादण्यायोग्य आणि काही जमिनीला लागून असलेले बनविले. खा, जे तुम्हाला अल्लाहने प्रदान केले आहे, आणि सैतानाच्या पद-चिन्हांचे अन्ुसरण करू नका. निःसंशय, तो तुमचा उघड शत्रू आहे.
Enam 6:143
१४३. आठ प्रकारचे जोडे (बनविले) मेंढीच्या जातीचे दोन, बकरीच्या जातीचे दोन. तुम्ही सांगा की अल्लाहने दोघांच्या नराला हराम केले आहे किंवा दोघांच्या मादीला? किंवा त्याला जो दोन्ही माद्यांच्या गर्भाशयात आहे मला ज्ञानासह सांगा, जर सच्चे असाल.
Enam 6:144
१४४. आणि उंटामध्ये दोन आणि गायीच्या जातीत दोन. तुम्ही सांगा, काय अल्लाहने दोन्ही माद्यांना किंवा दोन्ही नरांना हराम केले आहे? किंवा त्याला, जो दोन्ही माद्यांच्या गर्भाशयात सामील असेल. काय तुम्ही त्या वेळी हजर होते, जेव्हा अल्लाहने याचा आदेश दिला? मग त्याहून मोठा अत्याचारी कोण असेल, जो अल्लाहवर खोटा आरोप ठेवील, यासाठी की कसल्याही ज्ञानाविना लोकांना मार्गभ्रष्ट करावे. निःसंशय, अल्लाह अत्याचारी लोकांना मार्ग दाखवित नाही.
Enam 6:145
१४५. तुम्ही सांगा, मला जो आदेश दिला गेला आहे, त्यात कोणा खाणाऱ्याकरिता कोणतेही खाद्य हराम आढळत नाही. परंतु हे की ते मेलेले असेल, किंवा वाहते रक्त, किंवा डुकराचे मांस, यासाठी की ते अगदी नापाक (अस्वच्छ-अशुद्ध) आहे किंवा जे शिर्कचे कारण असेल, ज्यावर अल्लाहशिवाय दुसऱ्यांचे नाव घेतले गेले असेल, मग जो कोणी लाचार असेल वास्तविक विद्रोही आणि मर्यादेचे उल्लंघन करणारा नसेल तर अल्लाह मोठा माफ करणारा, दया करणारा आहे.
Enam 6:146
१४६. आणि आम्ही यहूदी लोकांवर नखे असलेली जनावरे हराम केली आणि गाय व बकरीची चरबी त्यांच्यावर हराम केली, मात्र जी दोघांच्या पाठीवर आणि आतड्यात असेल किंवा जी एखाद्या हाडाशी लागून असेल. आम्ही हा त्यांच्या (धर्माशी) विद्रोहाचा मोबदला दिला आणि आम्ही सच्चे आहोत.
Enam 6:147
१४७. जर तो तुम्हाला खोटे ठरविल तर सांगा की तुमच्या पालनकर्त्या (अल्लाह) ची दया अतिशय विस्तृत आहे आणि त्याचा अज़ाब (शिक्षा-यातना) अपराधी लोकांवरून टळू शकत नाही.
Enam 6:148
१४८. अनेक ईश्वरांची उपासना करणारे म्हणतील, अल्लाहने इच्छिले असते तर आम्ही आणि आमच्या वाड-वडिलांनी, अल्लाहसोबत दुसऱ्यांना उपास्य मानले नसते, ना एखाद्या वस्तूला हराम ठरविले असते अशा प्रकारे यांच्या पूर्वीच्या लोकांनी खोटे ठरविले, येथपर्यंत की आमच्या अज़ाबचा स्वाद चाखून घेतला. त्यांना सांगा, काय तुमच्याजवळ एखादे ज्ञान आहे तर ते आमच्यासाठी बाहेर काढा (जाहीर करा) तुम्ही अटकळीवर चालता आणि फक्त अनुमान लावता.
Enam 6:149
१४९. तुम्ही सांगा, मग अल्लाहचेच प्रमाण प्रभावशाली आहे, यास्तव त्याने जर इच्छिले तर तुम्हा सर्वांना मार्गदर्शन करू शकतो.
Enam 6:150
१५०. तुम्ही सांगा, आपल्या त्या साक्ष देणाऱ्यांना आणा, ज्यांनी ही साक्ष द्यावी की अल्लाहने याला हरामे केले आहे, मग जर ते साक्ष देतील तर तुम्ही त्यांच्यासोबत साक्ष देऊ नका आणि त्यांच्या मनमानी इच्छा-आकांक्षांचे अनुसरण करू नका आणि ज्यांनी आमच्या आयतींना खोटे ठरविले आणि जे आखिरतवर ईमान राखत नाही आणि (इतरांना)आपल्या पालनकर्त्यासमान मानतात.
Enam 6:151
१५१. तुम्ही सांगा की, या, मी वाचून ऐकवू की तुम्हाला तुमच्या पालनकर्त्याने कशापासून मनाई केली आहे. ते हे की त्याच्यासोबत कोणत्याही चीज-वस्तूला सहभागी करू नका आणि माता पित्याशी नेक वर्तन करा आणि आपल्या संततीची गरीबीमुळे हत्या करू नका. आम्ही तुम्हाला आणि त्यांना रोजी (आजिविका) प्रदान करतो आणि खुल्या व छुप्या निर्लज्जतेच्या जवळ जाऊ नका आणि त्या जीवाला ज्याबाबत अल्लाहने मनाई केली आहे, ठार मारू नका, परंतु धर्मशास्त्रीय (शरीअतच्या) कारणाने. तुम्हाला त्याने याचाच आदेश दिला आहे, यासाठी की तुम्ही समजून घ्यावे.
Enam 6:152
१५२. आणि अनाथाच्या संपत्तीच्या जवळही जाऊ नका, तथापि खूप चांगल्या पद्धतीने, येथेपर्यंत की ते तारुण्यावस्थेस पोहोचावेत, आणि न्यायासह माप-तोल पूर्ण करा. आम्ही कोणावर त्याच्या कुवतीपेक्षा जास्त भार ठेवत नाही आणि जेव्हा बोलाल, तेव्हा न्याय करा, मग तो जवळचा नातेवाईक का असेना आणि अल्लाहशी केलेला वायदा पूर्ण करा. त्याने तुम्हा लोकांना याचाच आदेश दिला आहे यासाठी की तुम्ही स्मरण राखावे.
Enam 6:153
१५३. आणि हाच माझा सरळ मार्ग आहे यास्तव त्यावरच चाला आणि इतर मार्गांवर चालू नका, अन्यथा तुम्हाला त्याच्या मार्गपासून दूर करतील त्याने (अल्लाहने) याचाच आदेश दिला आहे यासाठी की तुम्ही सुरक्षित राहावे.
Enam 6:154
१५४. आणि आम्ही (पैगंबर) मूसा यांना ग्रंथ प्रदान केला, त्याच्यावर आपली कृपा देणगी (नेमत) पूर्ण करण्यासाठी, ज्याने सत्कर्मे केलीत आणि प्रत्येक गोष्टीचा तपशील आणि मार्गदर्शन आणि दया कृपाकरिता, यासाठी की त्यांनी आपल्या पालनकर्त्याशी भेट होण्यावर ईमान राखावे.
Enam 6:155
१५५. आणि हा (पवित्र कुरआन) एक शुभ ग्रंथ आहे, जो आम्ही अवतरित केला, यास्तव तुम्ही याचे अनुसरण करा, यासाठी की तुमच्यावर दया केली जावी.
Enam 6:156
१५६. यासाठी की असे न म्हणावे की आमच्या पूर्वी दोन जनसमूहांवर ग्रंथ (तौरात आणि इंजील) अवतरित केले गेले आणि आम्ही त्यांच्या शिकवणीपासून अनभिज्ञ राहिलो.
Enam 6:157
१५७. किंवा तुम्ही असे न म्हणावे की जर आमच्यावर ग्रंथ अवतरित झाला असता तर आम्ही त्यांच्यापेक्षा अधिक सत्य मार्गावर राहिलो असतो. तेव्हा तुमच्याजवळ तुमच्या पालनकर्त्यातर्फे स्पष्ट प्रमाण आणि मार्गदर्शन व दया येऊन पोहोचली आहे. मग त्याहून जास्त अत्याचारी कोण आहे, ज्याने अल्लाहच्या आयतींना खोटे ठरविले आणि त्यांच्याकडून तोंड फिरविले आम्ही लवकरच अशा लोकांना मोठा सक्त अज़ाब देऊ जे आमच्या आयतींकडून तोंड फिरवितात.
Enam 6:158
१५८. ते फरिश्त्यांच्या आगमनाची प्रतिक्षा करीत आहेत की आपल्या पालनकर्त्या (अल्लाह) च्या आगमनाची की तुमच्या पालनकर्त्याच्या एखाद्या निशाणीच्या आगमनाची? ज्या दिवशी तुमच्या पालनकर्त्यातर्फे निशाणी येईल, तेव्हा कोणत्याही माणसाला त्याचे ईमान कामी पडणार नाही, ज्याने यापूर्वी ईमान राखले नसेल किंवा आपल्या ईमानाने एखादे सत्कर्म केले नसेल. तुम्ही सांगा, तुम्ही प्रतिक्षा करा, आम्ही (देखील) प्रतिक्षा करीत आहोत.
Enam 6:159
१५९. निःसंशय, ज्यांनी आपल्या धर्माला वेगवेगळे करून घेतले आणि अनेक धार्मिक पंथ-संप्रदाय बनले, त्यांच्याशी तुमचे कसलेही नाते नाही, त्याचा फैसला अल्लाहजवळ आहे, मग तो त्यांना त्याबाबत सांगेल की ते कसकसे कर्म करीत राहिले.
Enam 6:160
१६०. जो मनुष्य सत्कर्म करील तर त्याला त्याच्या दहा पट (मोबदला) मिळेल आणि जो दुष्कर्म करील तर त्याला त्याच्याइतकीच सजा मिळेल आणि त्या लोकांवर किंचितही अत्याचार होणार नाही.
Enam 6:161
१६१. तुम्ही सांगा, मला माझ्या पालनकर्त्याने एक सरळ मार्ग दाखविला आहे की तो एक मजबूत व कायम राहणारा दीन (धर्म) आहे जो मार्ग आहे इब्राहीमचा जे अल्लाहकडे एकचित्त होते आणि ते अनेकेश्वरवाद्यांपैकी नव्हते.
Enam 6:162
१६२. तुम्ही सांगा, निःसंशय माझी नमाज, माझी सर्व उपासना, माझे जीवन, आणि मृत्यु, समस्त विश्वाच्या अल्लाहकरिता आहे.
Enam 6:163
१६३. त्याचा (अल्लाहचा) कोणीही सहभागी नाही. मला याचाच आदेश दिला गेला आहे आणि मी सर्वांत प्रथम ईमान राखणारा आहे.
Enam 6:164
१६४. तुम्ही सांगा, काय मी अल्लाहखेरीज दुसऱ्या पालनकर्त्याचा शोध घेऊ वास्तविक तोच प्रत्येक चीज वस्तूचा स्वामी (उपास्य) आहे आणि जो कोणी, जे काही कमवील, ते त्यालाच भोगावे लागेल आणि कोणीही कोणा दुसऱ्यांचे ओझे उचलणार नाही, मग तुम्हाला तुमच्या पालनकर्त्याकडे दुसऱ्यांदा जायचे आहे. तो तुम्हाला तुमच्या मतभेदांविषयी सांगेल.
Enam 6:165
१६५. आणि त्यानेच तुम्हाला धरतीत खलीफा बनविले आणि एकमेकांवर दर्जे प्रदान केले, यासाठी की जे काही तुम्हाला प्रदान केले, त्यात तुमची कसोटी घ्यावी. निःसंशय, तुमचा पालनकर्ता लवकरच अज़ाब (शिक्षा-यातना) देणार आहे आणि निःसंशय तो मोठा माफ करणारा आहे, दया करणारा आहे.