Marathi Meal — Muhammed Şefî' Ensârî — A'raf 7:1 – Yunus 10:109
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A'raf 7:1
१. आलिफ. लाम. मीम. सॉद .
A'raf 7:2
२. हा एक ग्रंथ आहे, जो तुमच्याकडे अवतरित केला गेला, यासाठी की याद्वारे सचेत करण्यात तुमच्या मनात संकोच निर्माण होऊ नये, आणि ईमान राखणाऱ्यांकरिता बोध आहे.
A'raf 7:3
३. जे (धर्मविधान) तुमच्या पालनकर्त्यातर्फे उतरविले गेले, त्याचे अनुसरण करा आणि त्याच्याखेरीज इतर दोस्तांचे अनुसरण करू नका. तुम्ही लोक फार कमी बोध प्राप्त करता.
A'raf 7:4
४. आणि कित्येक वस्त्या आम्ही नष्ट करून टाकल्या आणि त्यांच्यावर आमचा अज़ाब रात्रीच्या वेळी पोहोचला किंवा अशा स्थितीत की ते दुपारच्या वेळी आराम करीत होते.
A'raf 7:5
५. तर जेव्हा त्यांच्याजवळ आमचा अज़ाब आला, तेव्हा त्यांची ओरड फक्त हीच राहिली की ते म्हणाले, आम्हीच अत्याचारी राहिलोत.
A'raf 7:6
६. मग आम्ही त्यांना अवश्य विचारू ज्यांच्याजवळ संदेश पाठविला गेला आणि पैगंबरांनाही अवश्य विचारू.१
———
(१) जनसमूहांना विचारले जाईल की तुमच्याजवळ पैगंबर आले होते? त्यांनी आमचा संदेश पोहचविला होता? ते उत्तर देतील, होय. हे अल्लाह! तुझे पैगंबर खचितच आमच्याजवळ आले होते, परंतु हे आमचेच दुर्दैव होते की आम्ही त्यांची काळजी घेतली नाही. मग पैगंबरांना विचारले जाईल की तुम्ही आमचा संदेश आपल्या लोकांना पोहचविला आणि त्यांनी त्या अनुषंगाने कोणते आचरण केले? पैगंबर या प्रश्नाचे उत्तर देतील, ज्याचे सविस्तर वर्णन पवित्र कुरआनात अनेक ठिकाणी आहे.
A'raf 7:7
७. मग आम्ही त्यांच्यासमोर ज्ञानासह निवेदन करू, आणि आम्ही गाफील नव्हतो.
A'raf 7:8
८. आणि त्या दिवशी ठीक वजन होईल, मग ज्याचे पारडे जड राहील, तर असेच लोक सफल होतील.
A'raf 7:9
९. आणि ज्याचे पारडे हलके असेल तर हे असे लोक असतील, ज्यांनी आपले नुकसान स्वतःच करून घेतले, या कारणाने की आमच्या आयतींशी ते जुलूम करीत होते.
A'raf 7:10
१०. आणि आम्ही तुम्हाला धरतीत राहण्याचे स्थान दिले आणि त्यात तुमच्यासाठी जीवनसामुग्री निर्माण केली. तुम्ही फार कमी आभार मानता.
A'raf 7:11
११. आणि आम्ही तुम्हाला निर्माण केले, मग तुमचे रूप घडविले, मग आम्ही फरिश्त्यांना फर्माविले की आदमला सजदा करा, तेव्हा इब्लिसला सोडून सर्वांनी सजदा केला कारण तो सजदा करणाऱ्यांमध्ये सामील झाला नाही.
A'raf 7:12
१२. (अल्लाहने) फर्माविले, जेव्हा मी तुला सजदा करण्याचा आदेश दिला, तेव्हा कोणत्या कारणाने तुला सजदा करण्यापासून रोखले. तो म्हणाला, मी याच्यापेक्षा अधिक चांगला आहे. तू मला आगीपासून निर्माण केले आणि याला मातीपासून निर्माण केले आहे.
A'raf 7:13
१३. (अल्लाहने) आदेश दिला की तू आकाशातून खाली उतर, आकाशात राहून घमेंड करण्याचा तुला काहीच हक्क नाही. तेव्हा चल निघ. निःसंशय तू धिःक्कारलेल्यांपैकी आहेस.
A'raf 7:14
१४. (सैतान) म्हणाला, मला (कयामतपर्यंत) संधी प्रदान कर, जेव्हा लोक दुसऱ्यांदा जिवंत केले जातील.
A'raf 7:15
१५. (अल्लाहने) फर्माविले, तुला ती संधी प्रदान केली गेली.
A'raf 7:16
१६. (सैतान) म्हणाला, तू मला धिःक्कारल्यामुळे मी त्यांच्यासाठी तुझ्या सरळ मार्गावर बसेन.
A'raf 7:17
१७. मग त्यांच्या समोरून आणि पाठीमागून आणि उजव्या व डाव्या बाजूने हल्ला करीन आणि तुला यांच्यात अधिकांश लोक कृतज्ञशील आढळणार नाहीत.
A'raf 7:18
१८. (अल्लाहने) फर्माविले, तू यापासून (येथून) अपमानित होऊन निघून जा जे त्यांच्यापैकी तुझ्या मार्गावर चालतील तर मी तुम्हा सर्वांनी जहन्नमला भरून टाकीन.
A'raf 7:19
१९. आणि (आम्ही फर्माविले की) हे आदम! तुम्ही आणि तुमची पत्नी जन्नतमध्ये राहा, मग जिथून इच्छा होईल तिथून खा, आणि त्या झाडाच्या जवळ जाऊ नका अन्यथा अत्याचारी ठराल.
A'raf 7:20
२०. मग सैतानाने दोघांच्या मनात कुविचार निर्माण केला, यासाठी की दोघांच्या वर त्यांची लज्जास्थाने उघड करावीत आणि सांगितले की तुम्हा दोघांच्या पालनकर्त्याने तुम्हाला या झाडापासून अशासाठी रोखले आहे की तुम्ही दोघे फरिश्ते व्हाल किंवा सदैवकाळ राहणारे व्हाल.
A'raf 7:21
२१. त्याने (सैतानाने) त्या दोघांच्या समोर शपथ घेतली की, मी तुम्हा दोघांचा शुभचिंतक आहे.
A'raf 7:22
२२. अशा प्रकारे धोकेबाजीने दोघांना खाली आणले, मग त्या दोघांनी झाडाचा स्वाद घेताच, दोघांवर त्यांची गुप्तांगे उघड झाली आणि ते आपल्यावर जन्नतची पाने चिकटवू लागले, आणि त्यांच्या पालनकर्त्या (अल्लाह) ने दोघांना पुकारले की काय मी तुम्हा दोघांना या झाडापासून रोखले नव्हते? आणि तुम्हाला सांगितले नव्हते की सैतान तुमचा खुला शत्रू आहे.
A'raf 7:23
२३. दोघे म्हणाले, हे आमच्या पालनकर्त्या! आम्ही स्वतःवर जुलून करून घेतला आणि जर तू आम्हाला माफ केले नाही आणि आमच्यावर दया केली नाही तर आम्ही नुकसान उचलणाऱ्यांपैकी होऊ.
A'raf 7:24
२४. (अल्लाहने) फर्माविले, तुम्ही खाली उतरा. तुम्ही आपसात वैरी आहात आणि तुम्हाला एक अवधीपर्यंत धरतीत राहावयाचे आणि लाभ प्राप्त करून घ्यायचे आहे.
A'raf 7:25
२५. फर्माविले की तुम्ही त्यातच जीवन व्यतीत कराल आणि त्यातच मरण पावाल आणि त्यातूनच बाहेर काढले जाल.
A'raf 7:26
२६. हे आदमच्या पुत्रांनो! आम्ही तुम्हाला असे वस्त्र प्रदान केले जे तुमच्या लज्जास्थानांना झाकेल आणि शोभा देईल आणि सर्वांत उत्तम वस्त्र, अल्लाहच्या भयाचे वस्त्र आहे. ही अल्लाहची निशाणी आहे यासाठी की यांनी स्मरण राखावे.
A'raf 7:27
२७. हे आदमच्या पुत्रांनो! तुम्हाला सैतानाने बहकवून न द्यावे, जसे तुमच्या माता-पित्याला जन्नतमधून बाहेर घालिवले. त्याने त्यांचे वस्त्र उतरवून दिले, यासाठी की त्यांना त्यांची गुप्तांगे दाखवावीत. निःसंशय तो आणि त्याचे जातीबांधव तुम्हाला अशा ठिकाणाहून पाहतात की तुम्ही त्यांना पाहू शकत नाही. आम्ही सैतानांना अशा लोकांचे मित्र बनविले, जे ईमान (विश्वास) राखत नाही.१
———
(१) अर्थात ज्यांच्या अंगी ईमान नाही, तेच सैतानाचे मित्र आहेत. विशेषतः ते सैतानाच्या कट कारस्थानांना बळी पडतात. तरीदेखील ईमान राखणाऱ्यांना तो भुरळ पाडण्याचा प्रयत्न करीत राहतो, काहीच न जमल्यास छुपे शिर्क (दिखावटी सत्कर्म) आणि खुला शिर्क (अनेकेश्वरोपासना) मध्ये मग्न करतो आणि अशा प्रकारे तो त्यांना खऱ्या ईमानाच्या पूंजीपासून वंचित ठेवतो.
A'raf 7:28
२८. आणि ते जेव्हा एखादे दुष्कर्म करतात, तेव्हा म्हणतात की आम्हाला आमचे पूर्वज यावरच आढळून आलेत आणि अल्लाहने आम्हाला याचा आदेश दिला आहे. तुम्ही सांगा की अल्लाह वाईट कामाचा आदेश देत नाही. काय तुम्ही अल्लाहसंबंधी अशा गोष्टी करता ज्या तुम्ही जाणत नाहीत.
A'raf 7:29
२९. (हे पैगंबर!) तुम्ही सांगा, माझ्या पालनकर्त्याने मला न्यायाचा आदेश दिला आहे आणि प्रत्येक सजदा करतेवेळी आपला चेहरा सरळ दिशेत करून घ्या आणि त्या (अल्लाह) करिता दीन (धर्म) सच्चा मनाने स्वीकारून त्याला पुकारा. त्याने जसे तुम्हाला सुरुवातीला निर्माण केले, त्याच प्रकारे दुसऱ्यांदाही निर्माण करील.
A'raf 7:30
३०. आणि त्या (अल्लाह) ने काहींना सन्मार्ग दाखविला तर काही मार्गभ्रष्टतेस पात्र ठरले. त्यांनी अल्लाहच्या खेरीज सैतानांना आपला मित्र बनविले आणि असे समजतात की ते मार्गदर्शन प्राप्त केलेले लोक आहेत.
A'raf 7:31
३१. हे आदमच्या पुत्रांनो! प्रत्येक वेळी मस्जिदीत जाताना आपले वस्त्र (पोषाख) घालत जा आणि खा व प्या आणि उधळपट्टीने खर्च करू नका. निःसंशय अमर्याद खर्च करणाऱ्यांशी अल्लाह प्रेम राखत नाही.
A'raf 7:32
३२. (हे पैगंबर!) तुम्ही सांगा की त्या शोभा-सजावटीला कोणी हराम केले आहे, जिला अल्लाहने आपल्या दासांकरिता निर्माण केले आहे आणि पाक (स्वच्छ-शुद्ध) रोजीला. तुम्ही सांगा की हे ऐहिक जीवनात त्या लोकांसाठी आहे ज्यांनी ईमान राखले (आणि) विशेषतः कयामतच्या दिवशी त्याच लोकांकरिता आहे. आम्ही अशा प्रकारे आयतींचे सविस्तर वर्णन कतो, त्यांच्यासाठी, जे ज्ञान बाळगतात.
A'raf 7:33
३३. तुम्ही सांगा की माझ्या पालनकर्त्याने सर्व प्रकट-अप्रकट स्वरूपाच्या निर्लज्जतेच्या गोष्टींना हराम केले आहे. आणि अपराध व नाहक जुलूम करण्यास,१ आणि अल्लाहसोबत अशाला सहभागी करण्यास, ज्याची त्याने कसलीही सनद उतरविली नाही आणि अल्लाहसंबंधी माहीत नसलेल्या गोष्टी बोलण्यास.
———
(१) अपराधाशी अभिप्रेत अल्लाहची अवज्ञा करणे, त्याच्या आदेशाविरूद्ध वागणे. एका हदीसनुसार, पैगंबर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम यांनी फर्माविले, गुन्हा तो होय, जो तुझ्या छातीत (मनात) खटकेल आणि लोकांना हे माहीत झाल्यावर तुला वाईट वाटावे. (सहीह मुस्लिम- किताबुल बिर्र) काही लोकांच्या मते गुन्हा तो आहे, ज्याचा प्रभाव करणाऱ्यापर्यंत सीमित असावा आणि बग़य(अरबी शब्द) तो आहे, ज्याचा परिणाम इतरांपर्यंतही पोहचावा. इथे बग़य सोबत नाहकचा अर्थ, अकारण अत्याचार, अतिरेक. उदा. लोकांचा हक्क हडप करणे, एखाद्याचे धन हिसकावून घेणे, अकारण मारणे, झोडणे आणि कारण नसताना बरे-वाईट व सक्त शब्द वापरून एखाद्याला अपमानित करणे वगैरे.
A'raf 7:34
३४. आणि प्रत्येक उम्मत (जनसमूह) चा एक निर्धारीत अवधी आहे, मग जेव्हा त्यांची ठरलेली वेळ पूर्ण होईल, तेव्हा ना एक क्षण विलंब होईल, ना पुढे जाईल.
A'raf 7:35
३५. हे आदमच्या पुत्रांनो! जर तुमच्याजवळ तुमच्यामधूनच माझे रसूल (पैगंबर) येतील, जे तुमच्यासमोर माझ्या आयतींचे निवेदन करतील तर जो अल्लाहचे भय राखून वागेल आणि आपले आचरण सुधारेल तर अशा लोकांना ना कसले भय राहील, आणि ना तो दुःखी होतील.
A'raf 7:36
३६. आणि ज्या लोकांनी आमच्या आयतींचा इन्कार केला आणि त्यांच्याशी घमेंड केली तेच जहन्नमी आहेत. तेच त्यात सदैव राहतील.
A'raf 7:37
३७. त्याहून मोठा अत्याचारी कोण आहे ज्याने अल्लाहवर असत्य रचले किंवा त्याच्या आयतींना खोटे ठरविले, यांना ग्रंथापासून ठरलेला हिस्सा पोहोचेल, येथेपर्यंत की जेव्हा त्यांच्याजवळ आमचे फरिश्ते, त्यांचे प्राण काढण्यासाठी येतील, तेव्हा म्हणतील की ते कोठे आहेत, ज्यांना तुम्ही अल्लाहखेरीज पुकारत राहिले? ते म्हणतील, आमच्यापासून हरवलेत आणि स्वतः काफिर (अधर्मी) असण्याचे स्वतःच कबूल करतील.
A'raf 7:38
३८. तो (अल्लाह) फर्माविल, दाखल व्हा जहन्नममध्ये, जिन्न आणि मानवांच्या समूहांसोबत, जे तुमच्यापूर्वी होऊन गेलेत. जेव्हा एखादा समूह दाखल होईल, तेव्हा दुसऱ्या समूहाचा धिःक्कार करील.येथेपर्यंत की जेव्हा त्या (जहन्नम) मध्ये सर्वजण जमा होतील तेव्हा नंतरचे लोक आपल्या अगोदर गेलेल्यांविषयी म्हणतील की, हे आमच्या पालनकर्त्या! यांनीच आम्हाला मार्गभ्रष्ट केले. तू यांना जहन्नमची दुप्पट शिक्षा दे. (अल्लाह) फर्माविल की सर्वांसाठी दुप्पट शिक्षा आहे, परंतु तुम्ही जाणत नाही.
A'raf 7:39
३९. आणि अगोदर गेलेले लोक, नंतरच्या लोकांना म्हणतील की आमच्यावर तुम्हाला कसलीही श्रेष्ठता नाही, यास्तव तुम्हीदेखील आपल्या कर्मापायी अल्लाहच्या शिक्षेचा आनंद घ्या.
A'raf 7:40
४०. निःसंशय, ज्यांनी आमच्या आयतींना खोटे ठरविले आणि त्यांच्याशी घमेंड केली, त्यांच्यासाठी आकाशाचे दरवाजे उघडले जाणार नाहीत आणि ते जन्नतमध्ये प्रवेश करू शकणार नाहीत, जोपर्यंत उंट, सूईच्या छिद्रात दाखल होत नाही आणि आम्ही अपराधी लोकांना असाच मोबदला देतो.
A'raf 7:41
४१. त्यांच्यासाठी जहन्नमच्या आगीचे अंथरुण असेल आणि त्यांच्यावर त्याचेच पांघरुण असेल आणि अत्याचारी लोकांना आम्ही अशीच सजा देतो.
A'raf 7:42
४२. आणि ज्यांनी ईमान राखले आणि सत्कर्मे केलीत तर आम्ही कोणत्याही जीवाला, त्याच्या कुवतीनुसारच उत्तरदायित्व सोपवितो. हेच लोक जन्नती आहेत. हेच त्यात सदैव राहतील.
A'raf 7:43
४३. आणि आम्ही त्यांच्या मनातले कपट दूर करू, त्यांच्याखाली नद्या वाहत असतील आणि ते म्हणतील, अल्लाहकरिता सर्व प्रशंसा आहे, ज्याने आम्हाला याच्या मार्गावर लावले जर त्याने मार्गदर्शन केले नसते तर आम्ही स्वतः सन्मार्गास लागलो नसतो. निःसंशय, आमच्या पालनकर्त्याचे रसूल (पैगंबर) सत्यासह आले आणि त्यांना पुकारून सांगितले जाईल की आपल्या कर्मांच्या मोबदल्यात तुम्ही या जन्नतचे हक्कदार बनविले गेले.
A'raf 7:44
४४. आणि जन्नती लोक, जहन्नमी लोकांना हाक देऊन सांगतील की आम्हाला आपल्या पालनकर्त्याचा वायदा, जो आम्हाला देण्यात आला, खरा आढळला तर काय तुम्हाला, तुमच्या पालनकर्त्याने केलेला वायदा खरा आढळला? ते म्हणतील, होय! मग एक ऐलान करणारा त्यांच्या दरम्यान ऐलान करील की अल्लाहतर्फे धिःक्कार असो अत्याचारी लोकांवर.
A'raf 7:45
४५. जे आपल्या पालनकर्त्याच्या मार्गापासून रोखू इच्छितात आणि त्याला वाकडे करू इच्छितात आणि ते आखिरतचाही इन्कार करतात.
A'raf 7:46
४६. आणि त्या दोघांच्या दरम्यान एक आड पडदा असेल आणि आराफ (उंचवट्या) वर काही माणसे असतील जे प्रत्येकाला त्यांच्या निशाणांवरून ओळखून घेतील, आणि जन्नती लोकांना हाक देऊन सांगतील की तुमच्यावर सलामती असो, ते त्या (जन्नत) मध्ये अजून दाखल झाले नसतील आणि तिची आशा बाळगत असतील.
A'raf 7:47
४७. आणि जेव्हा त्यांची दृष्टी जहन्नमी लोकांवर पडेल तेव्हा म्हणतील, हे आमच्या पालनकर्त्या! आम्हाला अत्याचारी लोकांत सामील करू नको.
A'raf 7:48
४८. आणि आराफवाले काही लोकांना, ज्यांना त्यांच्या चिन्हांवरून ओळखत असतील, हाक मारून सांगतील की तुमची जमात आणि तुमची घमेंड तुमच्या उपयोगी पडली नाही.
A'raf 7:49
४९. काय हेच ते लोक होत ज्यांच्याविषयी तुम्ही जोर देऊन शपथपूर्वक सांगत होते की यां (जन्नती लोकां) च्या वर अल्लाहची दया कृपा होणार नाही. (त्यांना सांगितले जाईल) की जन्नतमध्ये प्रवेश करा. तुमच्यावर कसलेही भय नाही आणि ना तुम्ही दुःखी व्हाल.
A'raf 7:50
५०. आणि जहन्नमवाले जन्नतच्या लोकांना हाक देतील की आमच्यावर थोडे पाणी टाका किंवा अल्लाहने जी रोजी (आजीविका) तुम्हाला प्रदान केली आहे त्यातून थोडेसे द्या. ते म्हणतील, अल्लाहने या दोन्ही वस्तू इन्कारी लोकांकरिता हराम केल्या आहेत.
A'raf 7:51
५१. ज्यांनी आपल्या दीन (धर्मा) ला मनोरंजन आणि खेळ-तमाशा बनविले आहे आणि ज्यांना ऐहिक जीवनाने धोक्यात टाकले यास्तव आज आम्ही त्यांचा विसर पाडू ज्याप्रमाणे ते या दिवसाला विसरले होते आणि आमच्या आयतींचा इन्कार करीत राहिले.
A'raf 7:52
५२. आणि आम्ही त्यांच्याजवळ ज्ञानावर आधारीत एक ग्रंथ सविस्तर वर्णनासह पाठविला आहे जो मार्गदर्शन आणि दया आहे त्या लोकांकरिता जे ईमान राखतात.
A'raf 7:53
५३. काय ते याच्या अंतिम निर्णयाची वाट पाहात आहे? ज्या दिवशी याचा अंतिम निर्णय येऊन पोहोचेल, तर ज्या लोकांनी यापूर्वी याचा विसर पाडला, ते म्हणतील की आमच्या पालनकर्त्याचे रसूल (पैगंबर) सत्य घेऊन आले, तर काय कोणी आमची शिफारस करणारा आहे, ज्याने आमच्यासाठी शिफारस करावी? किंवा आम्हाला दुसऱ्यांदा (जगात) पाठविले गेले असते, तर त्याखेरीज कर्म केले असते, जे (पूर्वी) करीत राहिलो. त्यांनी स्वतःला नुकसानग्रस्त केले आणि ज्या गोष्टी मनाने रचत राहिले, त्यांच्यापासून हरवल्या.
A'raf 7:54
५४. निःसंशय तुमचा स्वामी व पालनहार अल्लाहच आहे, ज्याने आकाशांना व जमिनीला सहा दिवसांत बनविले, आणि मग अर्श (सिंहासना) वर उच्च स्थिर झाला. तो रात्रीला दिवसाने अशा प्रकारे लपवितो की ती त्याला द्रुत गतीने येऊन धरते आणि सूर्य व चंद्र आणि ताऱ्यांना कामास ठेवले कारण ते त्याच्या हुकूमाधीन आहेत. ऐका, त्याचीच निर्मिती आणि आदेशही त्याचाच आहे. समस्त विश्वाचा पालनकर्ता मोठा बरकतवाला (समृद्धशाली) आहे.
A'raf 7:55
५५. आपल्या पालनकर्त्या (अल्लाह) ला नम्रतापूर्वक आणि हळू आवाजातही पुकारत जा. अल्लाह मर्यादेचे उल्लंघन करणाऱ्यांशी प्रेम राखत नाही.
A'raf 7:56
५६. आणि धरतीत सुधारणा झाल्यानंतर बिघाड निर्माण करू नका, आणि भय व आशेसह त्याची उपासना करा. निःसंशय अल्लाहची दया नेक सदाचारी लोकांच्या निकट आहे.
A'raf 7:57
५७. आणि तोच अल्लाह आहे जो आपल्या दयेने प्रथम शुभ समाचारासाठी वाऱ्यांना पाठवितो, येथेपर्यंत की जेव्हा ते जड ढगांना लादून येतात तेव्हा आम्ही त्यांना एखाद्या कोरड्या जमिनीच्या दिशेने हांकतो, मग त्याद्वारे पाण्याचा वर्षाव करतो, मग त्याद्वारे प्रत्येक प्रकारची फळे काढतो. आम्ही अशाच प्रकारे मेलेल्यांना बाहेर काढू यासाठी की तुम्ही विचार चिंतन करावे.
A'raf 7:58
५८. आणि चांगली (पाक) जमीन आपल्या पालनकर्त्याच्या आदेशाने आपली रोपटे (पीक) उगवते आणि खराब जमीन फार कमी उगवते अशा प्रकारे आम्ही निशाण्यांचे अनेक प्रकारे वर्णन करतो, त्या लोकांकरिता जे कृतज्ञता व्यक्त करतात.
A'raf 7:59
५९. आम्ही नूह (अलैहिस्सलाम) यांना त्यांच्या जनसमूहाकडे पाठविले तेव्हा ते म्हणाले, हे माझ्या जनसमूहाच्या लोकांनो! अल्लाहची उपासना करता. त्याच्याखेरीज तुमचा दुसरा कोणीही उपास्य (माबूद) नाही. निःसंशय मला तुमच्याबद्दल मोठ्या दिवसाच्या शिक्षा-यातनेचे भय वाटते.
A'raf 7:60
६०. त्यांच्या जनसमूहाचे सरदार म्हणाले, तुम्ही आम्हाला उघड अशा मार्गभ्रष्टतेत दिसत आहात.
A'raf 7:61
६१. नूह म्हणाले, हे माझ्या जनसमूहाच्या लोकांनो! मी मार्गभ्रष्ट नाही. तथापि समस्त विश्वाच्या पालनकर्त्याचा पैगंबर आहे.
A'raf 7:62
६२. तुम्हाला आपल्या पालनकर्त्याचा संदेश पोहचवितो आणि तुमच्या भल्याचे करीत आहे आणि अल्लाहतर्फे ते ज्ञान बाळगतो जे ज्ञान तुम्ही बाळगत नाही.
A'raf 7:63
६३. काय तुम्हाला आश्चर्य वाटते की तुमच्या पालनकर्त्यातर्फे तुमच्याच जनसमूहाच्या एका माणसावर एखादी बोधपूर्ण गोष्ट येते, यासाठी की तुम्हाला सचेत करावे आणि तुम्ही अल्लाहचे भय राखून वागावे यासाठी की तुमच्यावर दया केली जावी.
A'raf 7:64
६४. तर त्यांनी नूहला खोटे ठरविले, मग आम्ही नूह आणि त्यांच्या अनुयायींना नौकेत वाचविले आणि ज्यांनी आमच्या आयतींचा (निशाण्यांचा) इन्कार केला, त्यांना बुडवून टाकले. निःसंशय तो एक आंधळा जनसमूह होता.
A'raf 7:65
६५. आणि आद जनसमूहाकडे त्यांचा भाऊ हूद यांना (पैगंबर म्हणून) पाठविले. ते म्हणाले, हे माझ्या जाती-बांधवानो! अल्लाहची उपासना करा, त्याच्याखेरीज तुमचा कोणीही उपास्य नाही. काय तुम्ही भित नाही?
A'raf 7:66
६६. त्यांच्या जनसमूहाने काफिर सरदार म्हणाले, आम्हाला तुम्ही मूर्ख आहात असे वाटते. खात्रीने आम्ही तुम्हाला खोट्यांपैकी समजतो.
A'raf 7:67
६७. हूद म्हणाले, हे माझ्या जनसमूहाच्या लोकांनो! मी मूर्ख नाही, परंतु साऱ्या जगाच्या पालनकर्त्याचा रसूल (पैगंबर) आहे.
A'raf 7:68
६८. मी तुम्हाला आपल्या पालनकर्त्याचा संदेश पोहचवितो, आणि तुमचा प्रामाणिक हितचिंतक आहे.
A'raf 7:69
६९. काय तुम्हाला आश्चर्य वाटते की तुमच्या पालनकर्त्यातर्फे एखादी बोधपूर्ण गोष्ट तुमच्यातल्याच एका माणसाजवळ आली आहे, यासाठी की त्याने तुम्हाला सचेत करावे. स्मरण करा, जेव्हा अल्लाहने तुम्हाला नूहच्या जनसमूहानंतर त्यांच्या जागी केले आणि तुमचा शरीर-बांधा अधिक वाढविला, यास्तव तुम्ही अल्लाहच्या कृपा देणग्यांचे स्मरण करा यासाठी की सफल व्हावे.
A'raf 7:70
७०. जनसमूहाचे लोक म्हणाले, काय तुम्ही आमच्याजवळ एवढ्यासाठी आला आहात की आम्ही फक्त एक अल्लाहची उपासना करावी आणि आपल्या वाडवडिलांच्या उपास्य दैवतांचा त्याग करावा.१ तेव्हा ज्या गोष्टीची तुम्ही आम्हाला धमकी देत आहात, ती आणा जर तुम्ही सच्चे असाल.
———
(१) ‘हाच’शी अभिप्रेत पवित्र कुरआन होय किंवा इस्लाम धर्म किंवा अल्लाहचे ते आदेश, जे प्रामुख्याने या आयतीत वर्णिले गेले आहेत आणि तो तौहीद (एकेश्वरवाद) मरणोत्तर परिणती आणि प्रेषित्व आणि हेच इस्लामचे तीन मूलाधार आहेत, ज्याच्या आसावर संपूर्ण इस्लामी कायदे फिरतात. यास्तव याचा जोदेखील अर्थ घेतला जाईल, एकच अर्थ आहे.
A'raf 7:71
७१. हूद म्हणाले, तुमच्या पालनकर्त्यातर्फे तुमच्यावर शिक्षा आणि प्रकोप येऊनच पोहचला. काय तुम्ही माझ्याशी काही अशा नावांविषयी वाद घालता, जे तुम्ही आणि तुमच्या वाडवडिलांनी ठेवून घेतलेत ज्यांचे कसलेही प्रमाण अल्लाहने उतरविले नाही. तुम्ही प्रतिक्षा करा. तुमच्यासोबत मीदेखील प्रतिक्षा करतो.
A'raf 7:72
७२. तेव्हा आम्ही त्यांना आणि त्यांच्या अनुयायींना आपल्या दयेने वाचवून घेतले आणि त्या लोकांची मुळे कापून टाकली, ज्यांनी आमच्या आयतींना खोटे ठरविले आणि ते ईमानधारक नव्हते.
A'raf 7:73
७३. आणि समूदकडे त्यांचा भाऊ सॉलेह (पाठविले). सॉलेह म्हणाले, हे माझ्या जनसमूहाच्या लोकांनो! अल्लाहची उपासना करा, त्याच्याखेरीज तुमचा कोणीही माबूद (उपास्य) नाही. तुमच्याजवळ तुमच्या पालनकर्त्यातर्फे प्रमाण येऊन पोहोचले. ही अल्लाहची सांडणी तुमच्याकरिता निशाणी आहे, तिला अल्लाहच्या धरतीत खाण्या (चरण्या) साठी सोडून द्या. तिला वाईट इराद्याने हात लावू नका, अन्यथा दुःखदायक अज़ाब तुम्हाला येऊन धरेल.
A'raf 7:74
७४. आणि तुम्ही त्या अवस्थआंचे स्मरण करा जेव्हा (अल्लाहने) तुम्हाला आद (जनसमूहा) नंतर खलीफा बनविले आणि या धरतीत तुम्हाला राहण्याची जागा दिली. तुम्ही समतल जमिनीवर घरे बनविता आणि पर्वतांना कोरून घर बनविता, तेव्हा अल्लाहच्या कृपा देणग्यांचे स्मरण करा आणि धरतीत फसाद (उत्पात) माजवित फिरू नका.
A'raf 7:75
७५. त्याच्या जनसमूहाचे घमेंडी सरदार म्हणाले, आपल्या कमजोर- दुबळ्या लोकांना, ज्यांनी ईमान राखले होते, काय तुमचा पक्का विश्वास आहे की सॉलेह आपल्या पालनकर्त्यातर्फे पाठविले गेले आहेत. ते म्हणाले की आम्ही त्यावर ईमान राखतो, ज्यासह त्यांना पाठविले गेले आहे.
A'raf 7:76
७६. गर्विष्ठ सरदार म्हणाले, तुम्ही ज्याच्यावर ईमान राखता, आम्ही ईमान राखत नाही.
A'raf 7:77
७७. यास्तव सांडणीला त्यांनी ठार मारले, आणि आपल्या पालनकर्त्याची अवज्ञा केली आणि म्हणाले, हे सॉलेह ! जर तुम्ही पैगंबर असाल तर आपली धमकी पूर्ण करा.
A'raf 7:78
७८. तर त्यांना भूकंपाने घेरून टाकले आणि ते आपल्या घरांमध्ये पालथे पडून राहिले.
A'raf 7:79
७९. सॉलेह त्यांच्यापासून तोंड फिरवून निघून गेले आणि म्हणाले, हे माझ्या जनसमूहाच्या लोकांनो! मी तुम्हाला आपल्या पालनकर्त्याचा आदेश पोहचविला आणि तुमचा हितचिंतक राहिलो परंतु तुम्ही हितचिंतकांशी प्रेम राखत नाहीत.
A'raf 7:80
८०. आणि (आम्ही) लूतला (पाठविले) जेव्हा ते आपल्या लोकांना म्हणाले, की तुम्ही असे वाईट कृत्य करता, जे तुमच्यापूर्वी साऱ्या जगात कोणीही केले नाही.
A'raf 7:81
८१. तुम्ही पुरुषांशी संभोग करता, स्त्रियांना सोडून, किंबहुना तुम्ही तर मर्यादा पार केली आहे.
A'raf 7:82
८२. आणि त्यांच्या जनसमूहाला काही उत्तर देता आले नाही याखेरीज की आपसात म्हणू लागले की या लोकांना वस्तीबाहेर घालवा. हे मोठे पाक साफ (सत्शील, पवित्र) बनतात.
A'raf 7:83
८३. जेव्हा आम्ही त्यांना (लूतला) आणि त्यांच्या कुटुंबियांना वाचविले त्यांच्या पत्नीखेरीज, कारण ती त्याच लोकांपैकी राहिली, जे (अज़ाबग्रस्त) राहिलेत.
A'raf 7:84
८४. आणि आम्ही त्यांच्यावर एक नवीन प्रकारचा पाऊस पाडला तेव्हा बघा तरी, त्या अपराध्यांचा कसा शेवट झाला!
A'raf 7:85
८५. आणि (आम्ही) मदयनकडे त्यांचे भाऊ शोऐब यांना पाठविले. शोऐब म्हणाले, हे माझ्या जनसमूहाच्या लोकांनो! तुम्ही अल्लाहची उपासना करा, त्याच्याखेरीज तुमचा कोणीही माबूद नाही तुमच्या पालनकर्त्यातर्फे तुमच्याजवळ स्पष्ट निशाणी येऊन पोहोचली आहे. तेव्हा तुम्ही माप तोल पुरेपूर करीत जा, आणि लोकांना त्यांच्या चीज-वस्तू कमी करून देऊ नका आणि साऱ्या धरतीवर, सुधारणा केली गेल्यानंतर फसाद (उत्पात-उपद्रव) पसरवू नका. हे तुमच्यासाठी लाभदायक आहे जर तुम्ही ईमान राखाल.
A'raf 7:86
८६. आणि तुम्ही प्रत्येक रस्त्यावर त्यांना धमकी देण्यासाठी आणि अल्लाहच्या मार्गापासून रोखण्यासाठी, ज्यांनी अल्लाहवर ईमान राखले, बसू नका आणि त्यात चूका शोधत, आणि स्मरण करा जेव्हा तुम्ही संख्येने कमी होते, अल्लाहने तुम्हाला जास्त केले मग पाहा उत्पाती लोकांचा शेवट कसा झाला.
A'raf 7:87
८७. आणि जर तुमच्यापैकी काही लोकांनी त्या आदेशावर ईमान राखले, ज्यासह मला पाठविले गेले आहे आणि काहींनी ईमान राखले नाही तर थोडा धीर-संयम राखा. येथेपर्यर्ंत की अल्लाहने आमच्या दरम्यान फैसला करावा आणि तो सर्वांत उत्तम फैसला करणारा आहे.
A'raf 7:88
८८. त्यांच्या जनसमूहाचे घमेंडी अहंकारी सरदार म्हणाले, हे शोऐब! आम्ही तुम्हाला आणि तुमच्या सोबतच्या ईमान राखणाऱ्यांना अवश्य आपल्या नगरातून बाहेर घालवू अन्यथा तुम्ही परत आमच्या धर्मात या. ते म्हणाले, काय आम्हाला त्याचा किळस येत असला तरीही?
A'raf 7:89
८९. (असे केल्यास) आम्ही तर अल्लाहवर खोटा आरोप ठेवू जर तुमच्या धर्मात परतून आलो. वास्तविक अल्लाहने आम्हाला त्यातून मुक्त केले आहे आणि आमच्यासाठी त्यात पुन्हा परतणे शक्य नाही, परंतु हे की अल्लाह जर इच्छिल, जो आमचा स्वामी, पालनकर्ता आहे. आमच्या पालनकर्त्याने प्रत्येक गोष्टीस आपल्या ज्ञानाने घेरून ठेवले आहे. आम्ही आपल्या अल्लाहवरच भरोसा केला आहे. हे आमच्या पालनकर्त्या! आमच्या आणि आमच्या लोकांच्या दरम्यान फैसला कर सत्यासह आणि तू सर्वांत उत्तम फैसला करणारा आहे.
A'raf 7:90
९०. आणि त्यांच्या जनसमूहाच्या इन्कारी सरदारांनी म्हटले की जर तुम्ही शोऐबचे अनुसरण केले तर नुकसान भोगणाऱ्यांपैकी व्हाल.
A'raf 7:91
९१. तर त्यांना भूकंपाने येऊन घेरले, यास्तव ते आपल्या घरांमध्ये पालथे पडून राहिले.
A'raf 7:92
९२. ज्यांनी शोऐबला खोटे ठरविले, त्यांची अशी अवस्था झाली की जणू त्या (घरां) मध्ये कधी राहतच नव्हते. झ्यांनी शोऐबला खोटे ठरविले, ते लोक हानिग्रस्त झाले.
A'raf 7:93
९३. त्या वेळी शोऐब त्यांच्याकडून तोंड फिरवून निघून गेले आणि म्हणाले की हे माझ्या जनसमूहाच्या लोकांनो! मी आपल्या पालनकर्त्याचा संदेश तुमच्यापर्यंत पोहचविला आणि मी तुमचे हितचिंतन केले, मग मी त्या इन्कारी लोकांबद्दल दुःखी का व्हावे?
A'raf 7:94
९४. आणि आम्ही जेव्हादेखील एखाद्या वस्तीत पैगंबर पाठविला, तर तिथल्या लोकांना आम्ही रोगराई आणि कष्ट यातनेत जरूर टाकले, यासाठी की त्यांनी (लाचार होऊन) गयावया करावी.
A'raf 7:95
९५. मग आम्ही त्या दरिरद्रतेला संपन्न अवस्थेने बदलून टाकले, येथपर्यंत की जेव्हा ते सुखसंपन्न झाले आणि म्हणू लागले की आमच्या वाडवडिलांनाही चांगल्या-वाईट स्थितीशी सामना करावा लागला, तेव्हा आम्ही अकस्मात त्यांना पकडीत घेतले आणि ज्यांना कळालेसुद्धा नाही.
A'raf 7:96
९६. आणि जर त्या शहरांच्या रहिवाशींनी ईमान राखले असते आणि अल्लाहचे भय राखून आचरण केले असते तर आम्ही त्यांच्याकरिता आकाश व जमिनीच्या समृद्धीचे दरवाजे उघडले असते. परंतु त्यांनी खोटे ठरविले, तेव्हा आम्ही त्यांना त्यांच्या दुराचारापायी धरले.
A'raf 7:97
९७. काय तरीही या वस्त्यांचे रहिवाशी या गोष्टीपासून निश्चिंत झाले की त्यांच्यावर आमचा अज़ाब रात्रीच्या वेळी येऊन कोसळावा, ज्या वेळी ते झोपेत असावेत.
A'raf 7:98
९८. आणि काय त्या वस्त्यांचे रहिवाशी या गोष्टीपासून बेफिकीर झाले आहेत की त्यांच्यावर आमचा अज़ाब दिवस चढता यावा, ज्या वेळी ते खेळ-तमाशात मग्न असावेत.
A'raf 7:99
९९. काय ते अल्लाहच्या योजनेपासून निडर झालेत? तर अल्लाहच्या योजनेपासून नुकसान भोगणारेच निडर होतात.१
———
(१) या आयतीमध्ये अल्लाहने सर्वांत प्रथम हे सांगितले आहे की ईमान (श्रद्धा) आणि तकवा (अल्लाहचे भय राखून केलेले आचरण) ही अशी बाब आहे की ज्या वस्तीचे लोक तिचा अंगिकार करतील तर त्या वस्तीवर अल्लाह आकाश व धरतीचे सुख-समृद्धीचे, धन-संपत्तीचे दरवाजे उघडतो. अर्थात गरजेनुसार आकाशातून पाऊस पाडतो आणि जमिनीला त्याद्वारे सिंचित करून शेतीचे उत्पन्न वाढवितो, परिणामी विकास आणि संपन्न अवस्था उदयास येते. याउलट खोटे ठरविणारे आणि अल्लाहचा इन्कार करण्याचा मार्ग पत्करणारे जनसमूह अल्लाहच्या प्रकोपास पात्र ठरतात, मग रात्री किंवा दिवसा केव्हा प्रकोप कोसळेल हे कळून येत नाही, परिणामी सुखा-समाधानाने आबाद असलेली वस्ती एका क्षणात निर्जन व नामशेष होते. यास्तव अल्लाहच्या प्रकोपापासून निर्धास्त राहू नये. या बेफिकीरीचा परिणाम फक्त विनाश आहे. याखेरीज आणखी काही नाही.
A'raf 7:100
१००. तर काय जे लोक धरतीत, तिच्या रहिवाशांच्या विनाशानंतर वारस बनले आहेत, त्यांना हे माहीत झाले नाही की जर आम्ही इच्छिले तर त्यांच्या अपराधांपायी त्यांना संकटात टाकू आणि त्यांच्या मनांवर मोहर लावू मग ते ऐकू न शकावेत.
A'raf 7:101
१०१. या शहरांच्या काही घटना आम्ही तुम्हाला सांगत आहोत आणि त्यांचे पैगंबर त्यांच्याजवळ प्रमाणासह आले, तरीही ज्याला त्यांनी अगोदर मानले नाही त्याला नंतर मानण्यायोग्य झाले नाहीत. अशा प्रकारे अल्लाह इन्कारी लोकांच्या हृदयांवर मोहर लावून देतो.
A'raf 7:102
१०२. आणि आम्हाला त्यांच्यातले अधिकांश लोक वचनाचे पालन करताना आढळले नाहीत, आणि आम्हाला त्यांच्यातले अधिकांश लोक दुराचारी दिसले.
A'raf 7:103
१०३. मग त्यांच्यानंतर आम्ही (पैगंबर) मूसा यांना आपल्या निशाण्यांसह फिरऔन आणि त्याच्या सरदारांजवळ पाठविले तर त्यांनी त्या निशाण्यांचा हक्क अदा केला नाही. मग पाहा, दुराचारी लोकांचा कसा शेवट झाला!
A'raf 7:104
१०४. आणि मूसा म्हणाले, हे फिरऔन! मी साऱ्या जगाच्या पालनकर्त्यातर्फे पैगंबर आहे.
A'raf 7:105
१०५. माझ्याकरिता हेच उत्तम आहे की सत्याशिवाय अल्लाहविषयी काही न बोलावे. मी तुमच्या पालनकर्त्यातर्फे एक मोठी निशाणीही आणली आहे यास्तव तू इस्राईलच्या संततीला माझ्यासोबत पाठव.
A'raf 7:106
१०६. तो (फिरऔन) म्हणाला, जर तुम्ही एखादा मोजिजा (चमत्कार) घेऊन आला असाल तर तो प्रस्तुत करा जर तुम्ही सच्चे असाल.
A'raf 7:107
१०७. मग मूसा यांनी आपली लाठी खाली टाकली तर अचानक त्या काठीचा साप मोठा अजगर बनला.
A'raf 7:108
१०८. आणि आपला हात बाहेर काढला तर अचानक तो सर्व पाहणाऱ्यांसमोर लख्ख चमकणारा बनला.
A'raf 7:109
१०९. फिरऔनच्या जनसमूहाचे सरदार म्हणाले, हा मोठा निष्णात जादूगार आहे.
A'raf 7:110
११०. तो तुम्हाला तुमच्या देशाबाहेर घालवू इच्छितो, तेव्हा तुमचा काय विचार आहे.
A'raf 7:111
१११. ते म्हणाले, तुम्ही त्याला आणि त्याच्या भावाला संधी द्या आणि शहरांमध्ये एकत्र करणाऱ्यांना (दवंडी देणाऱ्यांना) पाठवा.
A'raf 7:112
११२. की त्यांनी सर्व निष्णात जादूगारांना आपल्या समोर आणून हजर करावे.
A'raf 7:113
११३. आणि जादूगार फिरऔनजवळ आले आणि म्हणाले, आम्ही जर सफल झालो तर आमच्यासाठी काही मोबदला आहे काय?
A'raf 7:114
११४. तो म्हणाला, होय, आणि तुम्ही सर्व जवळच्या लोकांपैकी व्हाल.
A'raf 7:115
११५. जादूगार म्हणाले, हे मूसा! वाटल्यास तुम्ही टाका किंवा आम्हीच टाकतो.
A'raf 7:116
११६. (मूसा) म्हणाले, तुम्हीच टाका, तर जेव्हा त्यांनी टाकले, तेव्हा लोकांची नजरबंदी केली आणि त्यांना भयभीत केले आणि एक प्रकारची मोठी जादू दाखविली.
A'raf 7:117
११७. आणि आम्ही मूसाला आदेश दिला की आपली लाठी खाली टाका, मग अचानक ती त्यांच्या बनविलेल्या खेळाला गिळू लागली.
A'raf 7:118
११८. तेव्हा, सत्य जाहीर झाले आणि त्यांनी जे काही बनविले होते ते सर्व गायब झाले.
A'raf 7:119
११९. यास्तव ते लोक याप्रसंगी पराजित झाले आणि बहुतेक अपमानित होऊन परतले.
A'raf 7:120
१२०. आणि जादूगार सजद्यात पडले.
A'raf 7:121
१२१. म्हणाले, आम्ही ईमान राखले साऱ्या जगाच्या पालनकर्त्यावर.
A'raf 7:122
१२२. जो मूसा आणि हारून यांचाही पालनकर्ता आहे.
A'raf 7:123
१२३. फिरऔन म्हणाला, तुम्ही माझ्या आदेशापूर्वीच त्या (मूसा) वर ईमान राखले, निश्चित हे एक कट-कारस्थान आहे जे तुम्ही शहरात त्याच्या रहिवाशांना त्यातून बाहेर घालविण्यासाठी रचले आहे, यास्तव तुम्हाला लवकरच माहीत पडेल.
A'raf 7:124
१२४. मी तुमचा एक बाजूचा हात आणि दुसऱ्या बाजूचा पाय कापून टाकीन, मग तुम्हा सर्वांना सूळावर लटकवीन.
A'raf 7:125
१२५. त्यांनी उत्तर दिले, आम्ही (मेल्यावर) आपल्या पालनकर्त्या जवळच जाऊ.
A'raf 7:126
१२६. आणि तुम्ही आमच्यात हाच दोष पाहिला की आम्ही आपल्या पालनकर्त्याच्या आयतीं (चिन्हां) वर ईमान राखले, जेव्हा त्या आमच्याजवळ येऊन पोहोचल्या. हे आमच्या पालनकर्त्या! आमच्यावर सब्र (धीर-संयम) ओत आणि आम्हाला ईमानधारक असतानाच मृत्यु दे.
A'raf 7:127
१२७. आणि फिरऔनच्या जनसमूहाचे सरदार म्हणाले, काय तुम्ही मूसा आणि त्याच्या लोकांना असेच सोडून द्याल की त्यांनी धरतीवर फसाद (उत्पात) करावा, आणि तुमचा व तुमच्या दैवतांचा त्याग करावा. तो म्हणाला, आम्ही त्याच्या पुत्रांना ठार मारू आणि त्यांच्या स्त्रियांना जिवंत ठेवू आणि आम्ही त्यांच्यावर वर्चस्वशाली आहोत.
A'raf 7:128
१२८. मूसा आपल्या जनसमूहाच्या लोकांना म्हणाले, अल्लाहची मदत घ्या आणि धीर-संयम राखा, ही धरती अल्लाहची आहे. तो आपल्या दासांपैकी ज्याला इच्छितो, तिचा उत्तराधिकारी बनवितो आणि अंतिम सफलता त्यांनाच लाभते, जे अल्लाहचे भय बाळगतात.
A'raf 7:129
१२९. ते म्हणाले, तुमच्या आगमनापूर्वीही आम्हाला कष्ट-यातना दिल्या गेल्या आणि तुमच्या आगमनानंतरही. मूसा म्हणाले, लवकरच तुमचा पालनकर्ता तुमच्या शत्रूंचा सर्वनाश करील आणि या धरतीचा वारसा तुम्हाला प्रदान करील, मग हे पाहील की तुम्ही कसे आचरण करता.
A'raf 7:130
१३०. आणि आम्ही फिरऔनवाल्यांना दुष्काळ आणि फळांच्या उत्पन्नात कमीद्वारे घेरले, यासाठी की त्यांनी बोध प्राप्त करावा.
A'raf 7:131
१३१. जर त्यांच्याजवळ भलाई येते, तेव्हा म्हणतात की हे तर आमच्यासाठी व्हायलाच हवे आणि जर कष्ट-यातना येते, तेव्हा मूसा आणि त्यांच्या अनुयायींना अपशकूनी ठरवितात. ऐका, त्यांचा अपशकून अल्लाहच्या जवळ आहे, परंतु अधिकांश लोक जाणत नाहीत.
A'raf 7:132
१३२. आणि ते म्हणाले, आमच्याजवळ जीदेखील निशाणी आमच्यावर जादू करण्यासाठी आणाल तरी आम्ही तुमच्यावर ईमान राखणार नाहीत.
A'raf 7:133
१३३. मग आम्ही त्याच्यावर वादळ आणि टोळ आणि उवा आणि बेडूक आणि रक्त पाठविले, वेगवेगळ्या निशाण्या, मग त्यांनी घमेंड केली आणि ते अपराधी लोक होते.
A'raf 7:134
१३४. आणि जेव्हा त्यांच्यावर एखादा अज़ाब (अल्लाहचा प्रकोप) येत असे, तेव्हा म्हणत की हे मूसा! आमच्यासाठी आपल्या पालनकर्त्याजवळ त्या वायद्याद्वारे, जो तुम्हाला दिला, दुआ (प्रार्थना) करा. जर तुम्ही आमच्यावरून अज़ाब हटविला तर अवश्य आम्ही तुमच्यावर ईमान राखू आणि तुमच्यासोबत इस्राईलच्या पुत्रांना पाठवू.
A'raf 7:135
१३५. मग जेव्हा आम्ही त्यांच्यावरून तो अज़ाब एका ठराविक मुदतीपर्यंत की त्यापर्यंत त्यांना पोहचणे क्रमप्राप्त होते, हटवित तेव्हा ते त्वरीत वचन भंग करू लागत.
A'raf 7:136
१३६. मग आम्ही त्याच्याशी सूड घेतला अर्थात त्यांना समुद्रात बुडविले, या कारणास्तव की ते आमच्या आयतींना (निशाण्यांना) खोटे ठरवित, आणि त्यांच्याबाबत गाफीलपणा दर्शवित.
A'raf 7:137
१३७. आणि आम्ही त्या लोकांना जे अतिशय दुर्बल समजले जात, त्या धरतीच्या पूर्व आणि पश्चिमेचे मालक बनविले, जिच्यात आम्ही समृद्धी राखली आहे आणि तुमच्या पालनकर्त्याचा नेक वायदा बनी इस्राईलविषयी, त्यांच्या धीर-संयमामुळे पूर्ण झाला आणि आम्ही फिरऔन आणि त्याच्या जनसमूहाने बनविलेल्या कारखान्यांना आणि ज्या उंच इमारती ते उभारत, सर्वकाही क्षत-विक्षत करून टाकले.
A'raf 7:138
१३८. आणि आम्ही बनू इस्राईल (इस्लाईच्या मुलांना) ला समुद्रापलीकडे उतरविले, मग त्यांचे एका अशा जमातीजवळून जाणे झाले, जी आपल्या काही मूर्त्या (प्रतिमा) घेऊन बसली होती. (त्यांना पाहून हे लोक) म्हणाले, हे मूसा! आमच्यासाठी सुद्धा असेच उपास्य ठरवून द्या, जशी यांची ही दैवते आहेत. मूसा म्हणाले, खरोखर, तुम्हा लोकांत मोठी मूर्खता आहे.
A'raf 7:139
१३९. हे लोक ज्या कामात गुंतले आहेत ते नष्ट केले जाईल आणि त्यांचे हे काम केवळ असत्य आहे.
A'raf 7:140
१४०. फर्माविले, काय अल्लाहखेरीज अन्य एखाद्याला तुमचा माबूद (उपास्य) ठरवून देऊ? वास्तविक त्याने समस्त जगातील लोकांवर तुम्हाला प्राधान्य प्रदान केले आहे.
A'raf 7:141
१४१. आणि ती वेळ आठवा, जेव्हा आम्ही तुम्हाला फिरऔनच्या लोकांपासून वाचविले जे तुम्हाला सक्त शिक्षा देत असत. तुमच्या पुत्रांची हत्या करीत आणि तुमच्या स्त्रियांना जिवंत सोडून देत आणि यात तुमच्या पालनकर्त्यातर्फे फार मोठी परीक्षा होती.
A'raf 7:142
१४२. आणि आम्ही मूसा यांना तीस रात्रींचा वायदा दिला आणि दहा अधिक रात्रींनी तो पूर्ण केला, अशा प्रकारे त्यांच्या पालनकर्त्याचा अवधी पूर्ण चाळीस रात्रींचा झाला आणि मूसा, आपला भाऊ हारूनला म्हणाले, मी (गेल्या) नंतर या (लोकां) ची व्यवस्था राखा आणि सुधारणा करीत राहा आणि उपद्रवी व उत्पाती लोकांच्या मार्गाचे अनुसरण करू नका.
A'raf 7:143
१४३. आणि जेव्हा मूसा आमच्या वेळेवर आले, आणि त्यांच्या पालनकर्त्याने त्यांच्याशी संभाषण केले तेव्हा त्यांनी विनंती केली, हे माझ्या पालनकर्त्या! मला आपले दर्शन घडू दे, मी एक क्षण तुला पाहून घेऊ. आदेश झाला की, तुम्ही मला कधीही पाहू शकणार नाही, परंतु तुम्ही या पर्वताकडे पाहात राहा, जर तो आपल्या जागी स्थिर उभा राहिला तर तुम्हीही मला पाहू शकाल. मग त्यांच्या पालनकत्यार्तने जेव्हा त्या पर्वतावर प्रकाश टाकला तेव्हा त्या दिव्य तेजाने त्याचे तुकडे तुकडे झाले आणि मूसा बेशुद्ध होऊन खाली पडले, मग जेव्हा शुद्धीवर आले तेव्हा म्हणाले, निःसंशय (हे अल्लाह) तू पवित्र आहेस. मी तुझ्याजवळ आपल्या अपराधांची क्षमा मागतो आणि सर्वांत प्रथम तुझ्यावर ईमान राखतो.
A'raf 7:144
१४४. अल्लाहने फर्माविले, हे मूसा! मी आपली पैगंबरी आणि आपल्याशी केलेल्या संभाषणाद्वारे इतर लोकांवर तुम्हाला श्रेष्ठता प्रदान केली आहे तेव्हा जे काही मी तुम्हाला प्रदान केले आहे, त्याचा स्वीकार करा आणि कृतज्ञता व्यक्त करा.
A'raf 7:145
१४५. आणि आम्ही काही तक्त्यांवर प्रत्येक प्रकारचा बोध-उपदेश आणि प्रत्येक गोष्टीचा तपशील त्यांना लिहून दिला. तुम्ही त्यांना पूर्ण शक्ती-सामर्थ्याने धरा आणि आपल्या लोकांना ताकीद करा की त्यातल्या चांगल्या आदेशानुसार आचरण करा. आता लवकरच तुम्हा लोकांना त्या दुराचारी लोकांचे स्थान दाखवितो.
A'raf 7:146
१४६. मी अशा लोकांना आपल्या आयतींपासून विमुखच ठेवीन, जे जगात घमेंड करतात, ज्याचा त्यांना काहीच अधिकार नाही. जर ते सर्व निशाण्या पाहूनही घेतील तरीही त्या ंच्यावर ईमान राखणार नाहीत आणि जर ते सत्य मार्ग पाहूनही घेतील तरी त्याला आपला मार्ग ठरविणार नाहीत, आणि जर ते मार्गभ्रष्टता पाहतील तर तिला आपला मार्ग बनवतील. हे अशासाठी की त्यांनी आमच्या आयतींना खोटे ठरविले आणि त्यांच्यापासून गाफील राहिले.
A'raf 7:147
१४७. आणि ते लोक ज्यांनी आमच्या आयतींना आणि आखिरतच्या येण्याला खोटे ठरविले, त्यांचे सर्व आचरण वाया गेले, त्यांना तशीच यातना दिली जाईल, जसे कर्म ते करीत होते.
A'raf 7:148
१४८. आणि मूसाच्या जनसमूहाने त्यांच्या पश्चात आपल्या दागिन्यांनी एक वासरू बनवून त्याला उपास्य दैवत बनविले, जो एक आकार मात्र होता ज्यात एक आवाज (ध्वनी) होता. काय त्यांनी हे नाही पाहिले की ते (वासरू) त्यांच्याशी बोलतही नव्हते आणि ना त्यांना मार्गदर्शन करीत होते त्याला त्यांनी (दैवत) बनविले आणि मोठे अन्यायाचे कृत्य केले.
A'raf 7:149
१४९. आणि जेव्हा लज्जित झाले आणि जाणून घेतले की खरोखर ते लोक वाट चुकून बहकले, म्हणू लागले की जर आमच्या पालनकर्त्याने आमच्यावर दया केली नाही आणि आमचे अपराध माफ केले नाहीत तर खात्रीने आम्ही नुकसान भोगणाऱ्यांपैकी होऊ.
A'raf 7:150
१५०. आणि जेव्हा मूसा आपल्या जनसमूहाकडे परत आले क्रोध आणि दुःखात बुडालेले, तेव्हा म्हणाले, तुम्ही माझ्या पश्चातही मोठी वाईट हरकत केली. काय आपल्या पालनकर्त्याच्या आदेशापूर्वीच तुम्हीही घाई केली आणि त्वरेने तक्ते एका बाजूला टाकले आणि आपला भाऊ हारूनचे डोके धरून त्याला आपल्याकडे ओढू लागले. (हारून) म्हणाले, हे माझ्या मातेपासून जन्मलेले! या लोकांनी मला फार कमकुवत जाणले आणि बहुतेक त्यांनी मला ठार केले असते. तेव्हा तुम्ही माझ्या शत्रूंना हसवू नका आणि माझी गणना या अत्याचारी लोकांमध्ये करू नका.
A'raf 7:151
१५१. (मूसा) म्हणाले, हे माझ्या पालनकर्त्या! माझ्या आणि माझ्या भावाच्या चुका माफ कर आणि आम्हा दोघांना आपल्या दयेत दाखल कर आणि तू दया करणाऱ्यांमध्ये सर्वाधिक दया करणारा आहेस.
A'raf 7:152
१५२. निःसंशय, ज्या लोकांनी वासराची उपासना केली, त्यांच्यावर लवकरच त्यांच्या पालनकर्त्यातर्फे प्रकोप आणि अपमान या जगाच्या जीवनातच कोसळेल आणि आम्ही खोटा आरोप ठेवणाऱ्यांना अशीच शिक्षा देतो.
A'raf 7:153
१५३. आणि ज्या लोकांनी दुष्कर्मे केलीत, त्यानंतर त्यांनी त्याबद्दल क्षमा-याचना केली आणि ईमान राखले तर तुमचा पालनकर्ता त्या क्षमा-याचनेनंतर अपराध माफ करणारा, दयावान आहे.
A'raf 7:154
१५४. आणि जेव्हा मूसा यांचा क्रोध शांत झाला, तेव्हा त्यांनी ते तक्ते उचलून घेतले. त्यातल्या लेखांमध्ये, त्या लोकांकरिता जे आपल्या पालनकर्त्याचे भय राखत, मार्गदर्शन आणि दया-कृपा होती.
A'raf 7:155
१५५. आणि मूसाने आपल्या जनसमूहातून सत्तर माणसांना आमच्या ठराविक अवधीकरिता निवडले, तर जेव्हा भूकंपाने त्यांना येऊन धरले, जेव्हा (मूसा) दुआ करू लागले की हे माझ्या पालनकर्त्या! जर तुला मान्य असते तर याच्यापूर्वीच यांचा आणि माझा नाश करून टाकला असता. काय तू आमच्यापैकी काही मूर्खांमुळे सर्वांचाच नाश करशील? ही घटना तुझ्यातर्फे केवळ एक कसोटी आहे, अशा कसोट्यांद्वारे तू ज्याला इच्छिल मार्गभ्रष्ट करशील आणि ज्याला इच्छिल मार्गदर्शन करशील. तूच आमचा संरक्षक आहेस. आता आम्हाला क्षमा कर आणि आमच्यावर दया कर आणि तू माफ करणाऱ्यांमध्ये सर्वाधिक माफ करणारा आहेस.
A'raf 7:156
१५६. आणि आम्हा लोकांच्या नावे या जगातही पुण्य लिहुन ठेव आणि आखिरतमध्येही. आम्ही तुझ्याचकडे लक्ष केंद्रित करतो. (अल्लाह) फर्मावितो की मी आपला प्रकोप त्याच्यावरच अवतरित करतो, ज्यावर इच्छितो आणि माझ्या दया-कक्षेत प्रत्येक गोष्ट आहे तर ती दया त्या लोकांच्या नावे अवश्य लिहीन, जे अल्लाहचे भय बाळगतात आणि जगात (धर्मदान) देतात आणि जे आमच्या आयतींवर ईमान राखतात.
A'raf 7:157
१५७. जे लोक अशा अशिक्षित (जगातील गुरुजनांद्वारे शिक्षण न घेतलेल्या) पैगंबराचे अनुसरण करतात, जे त्या लोकांना आपल्या जवळच्या तौरात आणि इंजीलमध्ये लिहिलेले आढळतात. ते त्यांना नेकीच्या कामांचा आदेश देतात आणि दुष्कर्मांपासून रोखतात आणि पाक (स्वच्छ-शुद्ध) वस्तू हलाल (वैध) असल्याचे सांगतात आणि नापाक (अस्वच्छ-अशुद्ध) वस्तू हराम (अवैध) असल्याचे सांगतात आणि त्या लोकांवर जे ओझे आणि गळ्याचे फास होते, त्यांना दूर करतात. यास्तव जे लोक या (नबी) वर ईमान राखतात, आणि त्यांचे समर्थन करतात आणि त्यांना मदत करतात, आणि त्या नूर (प्रकाशा) चे अनुसरण करतात, जो त्यांच्यासोबत पाठविला गेला आहे, असे लोक पूर्ण सफलता प्राप्त करणारे आहेत.
A'raf 7:158
१५८. तुम्ही सांगा, लोक हो! मी तुम्हा सर्वांकडे, त्या अल्लाहतर्फे पाठविला गेलो आहे, ज्याची राज्य-सत्ता समस्त आकाशांमध्ये व धरतीत आहे त्याच्याखेरीज कोणीही उपासना करण्यायोग्य नाही. तोच जीवन प्रदान करतो आणि तोच मृत्यु देतो. यास्तव अल्लाहवर आणि त्याचे पैगंबर अशिक्षित नबीवर ईमान राखा की जे अल्लाहवर आणि त्याच्या हुकूमावर ईमान राखतात आणि त्यांचे अनुसरण करा, यासाठी की तुम्ही सत्य मार्गावर यावे.
A'raf 7:159
१५९. आणि मूसा यांच्या जनसमूहात एक जमात अशीही आहे, जी सत्याला अनुसरून मार्गदर्शन करते आणि सत्यानुसारच न्याय करते.
A'raf 7:160
१६०. आणि आम्ही त्यांना बारा परिवारांमध्ये विभागून सर्वांची वेगवेगळी जमात ठरवून दिली आणि आम्ही मूसाला आदेश दिला, जेव्हा त्यांच्या समुदायाच्या लोकांनी पाणी मागितले, की आपली लाठी अमक्या एका दगडावर मारा, मग त्याच क्षणी त्यातून बारा स्रोत वाहू लागले. प्रत्येकाने आपले पाणी पिण्याचे स्थान जाणून घेतले आणि आम्ही त्यांच्यावर ढगांची सावली केली आणि त्यांना मन्न आणि सल्वा पोहचविले की खा स्वच्छ शुद्ध स्वादिष्ट वस्तू, ज्या आम्ही तुम्हाला प्रदान केल्या आहेत. आणि त्यांनी आमचे काहीच नुकसान केले नाही, उलट ते स्वतःचेच नुकसान करीत होते.
A'raf 7:161
१६१. आणि जेव्हा त्यांना आदेश दिला गेला की तुम्ही लोक त्या वस्तीत जाऊन राहा आणि खा तिथून, जिथे तुमची इच्छा होईल आणि तोंडाने म्हणत जा की आम्ही क्षमा मागतो आणि झुकलेल्या स्थितीत दरवाजाने प्रवेश करा. आम्ही तुमचे अपराध माफ करू, जे लोक सत्कर्म करतील, त्यांना याहून जास्त प्रदान करू.
A'raf 7:162
१६२. परंतु या अत्याचारी लोकांनी, त्यांना सांगितलेल्या वचनाऐवजी दुसरेच वचन बदलून टाकले, त्यापायी आम्ही आकाशातून एक संकट त्यांच्यावर पाठविले, या कारणास्तव की ते जुलूम करीत होते.
A'raf 7:163
१६३. आणि तुम्ही त्या लोकांना, त्या वस्तीच्या रहिवाशांची, जी समुद्राच्या जवळ वसली होती, त्या वेळची अवस्था विचारा, जेव्हा ते शनिवारच्या दिवसाबाबत मर्यादेचे उल्लंघन करीत होते. वास्तविक त्यांच्या शनिवारच्या दिवशी त्यांना मासे उघडपणे त्यांच्यासमोर येत आणि जेव्हा शनिवारचा दिवस नसे तेव्हा (मासे) त्यांच्या समोर येत नसत. आम्ही अशा प्रकारे त्यांची कसोटी घेत होतो. या कारणास्तव की ते आज्ञा भंग करीत होते.
A'raf 7:164
१६४. आणि जेव्हा त्यांच्यातला एक गट असे म्हणाला की तुम्ही अशा लोकांना उपदेश का करता, ज्यांना अल्लाह पूर्णपणे बरबाद करणार आहे किंवा त्यांना कठोर शिक्षा देणारा आहे. त्यावर त्यांनी उत्तर दिले की तुमच्या पालनकर्त्यासमोर क्षमा-याचना करण्याकरिता आणि यासाठी की कदाचित त्यांनी (अल्लाहचे) भय बाळगावे.
A'raf 7:165
१६५. मग जेव्हा ते त्या उपदेशाला विसरले, ज्याची त्यांना आठवण करून दिली जात राहिली, तेव्हा आम्ही त्या लोकांना तर वाचवून घेतले जे त्यांना वाईट गोष्टीपासून रोखत होते, आणि त्या लोकांना जे जुलूम अत्याचार करीत होते एका सक्त शिक्षा-यातनेने धरले, या कारणाने की ते आज्ञा भंग करीत होते.
A'raf 7:166
१६६. अर्थात जेव्हा त्यांना ज्या कामापासून मनाई केली गेली, त्यात त्यांनी मर्यादेचे उल्लंघन केले, तेव्हा आम्ही त्यांना म्हणालो, तुम्ही अपमानित वान्हरे व्हा.
A'raf 7:167
१६७. आणि त्या वेळेचेही स्मरण राखले पाहिजे की जेव्हा तुमच्या पालनकर्त्याने सांगितले की तो या (यहूदी) लोकांवर कयामतपर्यंत अशा माणसाला आच्छादित ठेवील जो यांना कठोर शिक्षेद्वारे दुःख पोहचवित राहील. निःसंशय, तुमचा पालनकर्ता लवकरच शिक्षा-यातना देणार आहे आणि निःसंशय तो खरोखर मोठा माफ करणारा आणि दयावान आहे.
A'raf 7:168
१६८. आणि आम्ही या जगात त्यांचे (वेगवेगळे) गट पाडले. त्यांच्यात काही नेक सदाचारी होते आणि काही वेगळ्या आचरणाचे आणि आम्ही संपन्न अवस्था आणि वाईट अवस्थेद्वारे त्यांची कसोटी घेत राहिलो यासाठी की त्यांनी परतावे.
A'raf 7:169
१६९. मग त्यांच्यानंतर असे लोक त्यांचे वारसदार बनले की ज्यांनी त्यांच्यापासून ग्रंथ प्राप्त केला. ते या तुच्छ जगाचे थोडेसेही धन घेऊन टाकतात आणि म्हणतात की आम्हाला अवश्य मुक्ती मिळेल, जरी त्यांच्याजवळ तसेच धन येत राहिले तर तेही घेऊन टाकतील. काय त्यांच्याशी या ग्रंथाच्या या मजकूराचा वायदा घेतला गेला नाही की अल्लाहकडे सत्य गोष्टीशिवाय दुसऱ्या कोणत्याही वचनाचा संबंध न दाखवतील. आणि त्यांनी या ग्रंथात जे काही होते, ते वाचले आणि आखिरतचे घर त्या लोकांसाठी चांगले आहे, जे अल्लाहचे भय बाळगतात, मग काय तुम्ही समजून घेत नाही?
A'raf 7:170
१७०. आणि ज्या लोकांनी ग्रंथ मजबूतपणे धरला (ग्रंथावर अटळ राहिले) आणि जे नमाज कायम करतात, तर आम्ही अशा लोकांचा, जे स्वतःचे आचरण सुधारून घेतील, मोबदला वाया जाऊ देणार नाही.
A'raf 7:171
१७१. आणि ती वेळही आठवा, जेव्हा आम्ही पर्वताला छत्रीसारखे त्यांच्यावर अधांतरित ठेवले आणि त्यांना खात्री झाली की आता त्यांच्यावर येऊन कोसळेल आणि आम्ही फर्माविले, की आम्ही जो ग्रंथ तुम्हाला प्रदान केला आहे त्याचा दृढतापूर्वक स्वीकार करा आणि लक्षात ठेवा यातले आदेश, यासाठी की तुम्ही अल्लाहचे भय बाळगू लागावे.१
———
(१) ही त्या वेळेची घटना आहे जेव्हा हजरत मूसा त्यांच्याजवळ तौरात ग्रंथ घेऊन आले आणि त्यांना त्यातले आदेश सांगितले, तेव्हा त्यांनी आपल्या चरित्र्यानुसार त्या आदेशांवर आचरण करणे मान्य केले नाही आणि अवज्ञा केली, ज्यामुळे सर्वश्रेष्ठ अल्लाहने त्यांच्या शिरावर पर्वत आणून उभा केला की तुमच्यावर कोसळवून तुमचा चेंदा मेंदा केला जाईल. त्याचे भय राखून त्यांनी वचन दिले की आता आम्ही तौरातच्या आदेशानुसारच आचरण करू.
A'raf 7:172
१७२. आणि जेव्हा तुमच्या पालनकर्त्याने आदमच्या संततीच्या पाठींमधून त्यांची अपत्ये काढली आणि त्यांच्याकडून त्यांच्याचबाबत वायदा घेतला की काय मी तुमचा स्वामी व पालनकर्ता नाही? सर्वांनी उत्तर दिले, का नाही, आम्ही सर्व साक्षी आहोत. यासाठी की तुम्ही लोकांनी कयामतच्या दिवशी असे न म्हणावे की आम्ही तर यापासून अगदी अजाण होतो.
A'raf 7:173
१७३. किंवा हे सांगाल की सर्वांत प्रथम शिर्क तर आमच्या वाडवडिलांनी केले आणि आम्ही त्यांच्यानंतर त्यांच्या वंशात आलो. तर काय त्या चुकीच्या लोकांच्या दुष्कृत्यांबद्दल तू आम्हाला विनाशात टाकशील?
A'raf 7:174
१७४. आणि आम्ही अशा प्रकारे आयतींचे स्पष्टपणे निवेदन करतो, यासाठी की (वाईट मार्गापासून) त्यांनी परत फिरावे.
A'raf 7:175
१७५. आणि त्या लोकांना त्या माणसाची अवस्था वाचून ऐकवा की ज्याला आम्ही आपल्या निशाण्या प्रदान केल्या, मग तो त्यांच्यापासून अगदी निघून गेला, मग सैतान त्याच्या मागे लागला अशा प्रकारे तो वाट चुकलेल्या लोकांमध्ये सामील झाला.
A'raf 7:176
१७६. आणि जर आम्ही इच्छिले असते तर त्याला या निशाण्यांमुळे उच्च पदावर बसविले असते, परंतु तो तर जगाच्या मोहपाशात अडकला आणि आपल्या इच्छा-आकांक्षांच्या मागे चालू लागला तेव्हा त्याची अवस्था कुत्र्यासारखी झाली की जर तुम्ही त्याच्यावर हल्ला कराल तरीही (जीभ बाहेर काढून) धापा टाकील किंवा त्याला सोडून द्याल तरीही धापा टाकील. हीच अवस्थआ त्या लोकांची आहे, ज्यांनी आमच्या आयतींना खोटे ठरविले, यास्तव तुम्ही या अवस्थेचे निवेदन करा, कदाचित त्या लोकांनी काही विचार करावा.
A'raf 7:177
१७७. त्या लोकांची अवस्थादेखील मोठी वाईट अवस्था आहे, जे आमच्या आयतींना खोटे मानतात, आणि आपले नुकसान करून घेतात.
A'raf 7:178
१७८. ज्याला सर्वश्रेष्ठ अल्लाह स्वतः मार्गदर्शन करतो. तो सरळ मार्गावर असतो आणि ज्यांना अल्लाह मार्गभ्रष्ट करील, तेच तोट्यात आहेत.
A'raf 7:179
१७९. आणि आम्ही असे अनेक जिन्न आणि मानव जहन्नमकरिता निर्माण केले आहेत, ज्यांची मने अशी आहेत की ज्यांच्याद्वारे समजत नाही, आणि ज्यांचे डोळे असे आहेत, ज्यांच्याद्वारे पाहत नाहीत आणि ज्यांचे कान असे आहेत, ज्यांच्याद्वारे ऐकत नाहीत. हे लोक चतुष्पाद (पशू) सारखे आहेत, किंबहुना त्यांच्यापेक्षाही अधिक भटकलेले१ हेच लोक गाफील आहेत.
———
(१) अर्थात हृदय, डोळे आणि कान सर्वश्रेष्ठ अल्लाहने अशासाठी प्रदान केले आहेत की माणसाने यांचा लाभ घेत आपल्या स्वामी व पालनकर्त्या अल्लाहला समजून घ्यावे, त्याच्या निशाण्यांना पाहावे आणि सत्य गोष्ट लक्षपूर्वक ऐकावी, परंतु जो मनुष्य यांच्याद्वारे हे काम घेत नाही, तो त्यांच्याकरावी लाभ न घडल्याने पशूवत आहे, किंबहुना जनावरांपेक्षा अधिक वाट चुकलेला आहे. यासाठी की जनावरे तरीदेखील आपले काही फायदे व नुकसान समजतात, कारण ते लाभदायक गोष्टींपासून लाभ घेतात आणि हानिकारक वस्तूंचा अव्हेर करतात. परंतु अल्लाहच्या मार्गदर्शनापासून पथभ्रष्ट मनुष्याला इतकेही समजत नाही की त्याच्यासाठी लाभदायक काय आहे आणि हानिकारक काय आहे.
A'raf 7:180
१८०. आणि उत्तमोत्तम नावे अल्लाहकरिताच आहेत. यास्तव या नावांनी अल्लाहला पुकारीत जा आणि अशा लोकांशी संबंधही ठेवू नका, जे त्याच्या नावांमध्ये तेढनिर्माण करतात. त्या लोकांना त्यांच्या कृत कर्माची शिक्षा अवश्य मिळेल.
A'raf 7:181
१८१. आणि आमच्या निर्मितीत एक जमात अशीही आहे, जी सत्यासह मार्गदर्शन करते आणि सत्याला अनुसरून न्याय करते.
A'raf 7:182
१८२. आणि जे लोक आमच्या आयतीं (चिंन्हां) ना खोटे ठरवितात, आम्ही त्यांना हळू हळू (तावडीत) अशा प्रकारे घेत आहोत की त्यांना कळतदेखील नाही.
A'raf 7:183
१८३. आणि त्यांना संधी देतो, निःसंशय माझी पद्धत मोठी मजबूत आहे.
A'raf 7:184
१८४. काय त्या लोकांनी ही गोष्ट ध्यानी घेतली नाही की त्यांच्या साथीदाराला किंचितही वेड लागले नाही, ते तर केवळ एक स्पष्ट भय दाखविणारे आहेत.
A'raf 7:185
१८५. आणि काय त्या लोकांनी विचार नाही केला आकाशांच्या आणि धरतीच्या विश्वात आणि दुसऱ्या चीज-वस्तूंमध्ये, ज्या अल्लाहाने निर्माण केल्या आहेत आणि या गोष्टीत की संभवतः त्याचे मरण जवळच येऊन ठेपले असावे, मग त्या (कुरआना) नंतर कोणत्या गोष्टीवर हे लोक ईमान राखतील?
A'raf 7:186
१८६. ज्याला सर्वश्रेष्ठ अल्लाह मार्गभ्रष्ट करील त्याला कोणी सन्मार्गावर आणू शकत नाही, आणि अल्लाह अशा लोकांना मार्गभ्रष्टतेत भटकत राहण्यास सोडून देतो.
A'raf 7:187
१८७. हे लोक तुम्हाला कयामतविषयी विचारतात की ती केव्हा येईल? तुम्ही सांगा की याचे ज्ञान फक्त माझ्या पालनकर्त्यालाच आहे. तिला तिच्या वेळेवर, अल्लाहखेरीज दुसरा कोणी जाहीर करणार नाही. ती आकाशांची व जमिनीची फार मोठी (घटना) असेल. ती तुमच्यावर अचानक येऊन कोसळेल. ते तुम्हाला अशा प्रकारे विचारतात, जणू काही तुम्ही तिचा शोध घेऊन बसलात. तुम्ही सांगा, तिचे ज्ञान विशेषरित्या अल्लाहजवळ आहे, परंतु बहुतेक लोक जाणत नाहीत.
A'raf 7:188
१८८. तुम्ही सांगा, मी स्वतः आपल्याकरिता एखाद्या फायद्याचा अधिकार राखत नाही, आणि ना एखाद्या नुकसानाचा, परंतु तेवढाच, जेवढा अल्लाहने इच्छिला असेल आणि जर मी अपरोक्ष गोष्टींना जाणणारा राहिलो असतो तर मी पुष्कळ लाभ प्राप्त करून घेतले असते, आणि एखादे नुकसानही मला पोहचले नसते.१ मी तर केवळ भय दाखविणारा आणि शुभ-समाचार देणारा आहे, त्या लोकांसाठी जे ईमान राखतात.
———
(१) ही आयत या गोष्टीस अगदी स्पष्ट करते की पैगंबर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ग़ैब (परोक्ष) जाणणारे नाहीत. ग़ैब जाणणारा केवळ अल्लाहच आहे. परंतु जुलूम अत्याचार आणि अज्ञानाची सीमा ही की पवित्र कुरआनात एवढे स्पष्ट निवेदन असतानाही, धर्मात नवनवीन विचार व प्रथा सामील करणारे, पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम यांना परोक्षज्ञान असल्याचे सिद्ध करण्याचा असफल प्रयत्न करीत राहतात.
A'raf 7:189
१८९. तो (अल्लाह) असा आहे की ज्याने तुम्हाला फक्त एका जीवापासून निर्माण केले आणि त्याच्याद्वारे त्याची जोडी बनवली, यासाठी की त्याने आपल्या त्या जोडीदारापासून सुख चैन प्राप्त करावी, मग पतीने पत्नीशी जवळीक केली, तेव्हा तिला गर्भ राहिला हलकासा, मग ती त्याला घेऊन चालत फिरत राहिली. जेव्हा तिला भार जाणवू लागला, तेव्हा पती-पत्नी दोघे अल्लाहशी, जो त्यांचा स्वामी आहे, दुआ (प्रार्थना) करू लागले की जर तू आम्हाला सहीसलामत (व्यवस्थित स्वरूपात) संतान प्रदान केली तर आम्ही खूप खूप आभार मानू.
A'raf 7:190
१९०. तर जेव्हा अल्लाहने त्या दोघांना यथायोग्य संतान प्रदान केली, तेव्हा अल्लाहने प्रदान केलेल्यात ते दोघे (इतरांना) अल्लाहचा सहभागी ठरवू लागले, यास्तव अल्लाह पवित्र आहे त्याच्या सहभागी ठरविण्यापासून.
A'raf 7:191
१९१. काय अशांना अल्लाहचा सहभागी ठरवितात, जे कोणत्याही चीज-वस्तूला निर्माण करू शकत नसावे (किंबहुना) स्वतः त्यांनाच निर्माण केले गेले असावे.
A'raf 7:192
१९२. आणि ते त्यांना कसल्याही प्रकारची मदत करू शकत नाही, आणि ते स्वतः आपली मदत करू शकत नाही.
A'raf 7:193
१९३. आणि जर तुम्ही एखादी गोष्ट सांगण्यासाठी त्यांना पुकाराल तर तुमच्या सांगण्यानुसार चालणार नाहीत. तुमच्या दृष्टीने दोन्ही गोष्टी सारख्या आहेत, मग तुम्ही त्यांना पुकारा किंवा गप्प राहा.
A'raf 7:194
१९४. वास्तविक तुम्ही अल्लाहला सोडून ज्यांना पुकारता (ज्यांची उपासना करता) तेदेखील तुमच्यासारखेच अल्लाहचे दास आहेत, तर तुम्ही त्यांना पुकारा, मग त्यांनीही तुमच्या सांगण्यानुसार केले पाहिजे. जर तुम्ही सच्चे असाल.
A'raf 7:195
१९५. काय त्यांना पाय आहेत, ज्या आधारे ते चालत असावेत, किंवा त्यांना हात आहेत, ज्याद्वारे एखाद्या वस्तूला धरू शकतील, किंवा त्यांना डोळे आहेत, ज्याद्वारे ते पाहात असावेत, किंवा त्यांना कान आहेत, ज्याद्वारे ते ऐकतात. तुम्ही सांगा, तुम्ही आपल्या सर्व सहभाग्यांना बोलावून घ्या, मग मला (हानी पोहचविण्याची) उपाययोजना करा. मग मला किंचितही सवड देऊ नका.
A'raf 7:196
१९६. निःसंशय, माझा मित्र-मदतकर्ता अल्लाहच आहे ज्याने हा ग्रंथ (पवित्र कुरआन) अवतरीत केला आणि तो नेक सदाचारी लोकांची मदत करतो.
A'raf 7:197
१९७. आणि तुम्ही ज्या लोकांना अल्लाहला सोडून पुकारता (उपासना करता) ते तुमची काहीच मदत करू शकत नाही, आणि ना ते स्वतः आपली मदत करू शकतात.
A'raf 7:198
१९८. आणि जर त्यांना काही सांगण्यासाठी पुकाराल तर ते ऐकू शकणार नाहीत. आणि तुम्ही त्यांना पाहता की ते तुम्हाला पाहत आहेत आणि ते काहीच पाहत नाहीत.
A'raf 7:199
१९९. तुम्ही क्षमाशीलतेचा मार्ग पत्करा, सत्कर्मांची शिकवण देत राहा, आणि मूर्ख लोकांपासून अलिप्त राहा.
A'raf 7:200
२००. आणि जर तुम्हाला एखादा संशय सैतानाकडून येऊ लागेल तर अल्लाहचे शरण मागत जा. निःसंशय अल्लाह मोठा ऐकणारा आणि खूप जाणणारा आहे.
A'raf 7:201
२०१. निःसंशय जे लोक (अल्लाहचे) भय बाळगतात जेव्हा त्यांना एखादा संशय सैतानाकडून उद्भवतो, तेव्हा ते अल्लाहच्या स्मरणात मग्न होतात, यास्तव अकस्मात त्यांचे डोळे उघडतात.
A'raf 7:202
२०२. आणि जे सैतानांचे अनुयायी आहेत, ते त्यांना संकटात ओढून नेतात. मग ते थांबत नाही.
A'raf 7:203
२०३. आणि जेव्हा तुम्ही एखादा मोजिजा (ईश-चमत्कार) त्यांच्यासमोर सादर करत नाही, तेव्हा ते लोक म्हणतात की तुम्ही हा चमत्कार का आणला नाही. तुम्ही सांगा की मी त्याचे अनुसरण करतो जो माझ्याकडे माझ्या पालनकर्त्यातर्फे आदेश पाठविला गेला आहे. हे मान्य करा. हे तुमच्या पालनकर्त्यातर्फे अनेक प्रमाणे आहेत आणि मार्गदर्शन व दया कृपा आहे त्या लोकांकरिता, जे ईमान राखतात.
A'raf 7:204
२०४. आणि जेव्हा कुरआन पठण होत असेल तेव्हा ते लक्षपूर्वक ऐका, आणि शांत राहा आशा आहे की तुमच्यावर दया होईल.
A'raf 7:205
२०५. आणि (हे मानव!) आपल्या मनात नम्रता आणि भय राखून आपल्या पालनकर्त्याचे स्मरण करीत राहा. सकाळ-संध्याकाळ स्वर सौम्य ठेवून आणि गाफील लोकांपैकी होऊ नको.
A'raf 7:206
२०६. निःसंशय, जे लोक तुझ्या पालनकर्त्याशी निकट आहेत ते त्याच्या उपासनेपासून घमेंड करीत नाही आणि त्याची पवित्रता वर्णन करीत त्याच्या पुढे सजदा करतात (माथा टेकतात).
Enfal 8:1
१. हे लोक तुम्हाला प्राप्त झालेल्या धन-संपत्तीविषयी विचारतात, तुम्ही सांगा की युद्धात प्राप्त झालेली धन-संपत्ती अल्लाहची आहे, आणि पैगंबराची आहे. यास्तव तुम्ही अल्लाहचे भय राखा आणि आपले आपसातील नातेसंबंध सुधारून घ्या आणि सर्वश्रेष्ठ अल्लाह आणि त्याच्या पैगंबराच्या आदेशाचे पालन करा, जर तुम्ही ईमान राखणारे असाल.
Enfal 8:2
२. ईमान राखणारेच असे असतात की जेव्हा अल्लाहचे वर्णन केले जाते, तेव्हा त्यांची हृदये भयभीत होतात, आणि जेव्हा अल्लाहच्या आयती त्यांना वाचून ऐकविल्या जातात तर त्या आयती त्यांच्या ईमानास वृद्धिंगत करतात आणि ते लोक आपल्या पालनकर्त्यावर भरोसा ठेवतात.
Enfal 8:3
३. जे नमाज नियमितपणे पढतात आणि आम्ही जे काही त्यांना दिले आहे, त्यातून खर्च करतात.
Enfal 8:4
४. सच्चे ईमान राखणारे हेच लोक आहेत. त्यांच्याकरिता मोठे दर्जे आहेत त्यांच्या पालनकर्त्याजवळ आणि क्षमा आणि मान सन्मानपूर्ण रोजी (आजीविका) आहे.
Enfal 8:5
५. जसे की तुमच्या पालनकर्त्याने तुमच्या घरापासून सत्यासह तुम्हाला बाहेर काढले आणि ईमानधारकांच्या एका गटाला हे असह्य वाटत होते.
Enfal 8:6
६. स्पष्ट कळून आल्यानंतर ते सत्याविषयी तुमच्याशी वाद घालत होते जणू काही ते मृत्युकडे हांकले जात असावेत आणि (त्याला) पाहत असावेत.
Enfal 8:7
७. आणि तुम्ही लोक त्या वेळेची आठवण करा, जेव्हा अल्लाह तुमच्याशी त्या दोन गटांपैकी एकाचा वायदा करीत होता की जो तुमच्या हाती लागेल आणि तुम्ही या आशेवर होते की शस्त्रे नसलेला गट तुमच्या हाती लागावा आणि सर्वश्रेष्ठ अल्लाहला मान्य होते की आपल्या हुकूमाने सत्याचे सत्य असणे सिद्ध करून द्यावे आणि त्या इन्कारी लोकांच्या मुळावर घाव घालावा.
Enfal 8:8
८. यासाठी की सत्याचे सत्य असणे आणि असत्याचे असत्य असणे सिद्ध करावे, मग या अपराधी लोकांना अप्रिय का वाटेना.
Enfal 8:9
९. त्या वेळेची आठवण करा, जेव्हा तुम्ही आपल्या पालनकर्त्यास दुआ (प्रार्थना) करीत होते, मग सर्वश्रेष्ठ अल्लाहने तुमची दुआ कबूल केली की मी तुमची एक हजार फरिश्त्यांद्वारे मदत करीन जे लागोपाठ येत जातील.
Enfal 8:10
१०. आणि अल्लाहनेही मदत केवळ या कारणास्तव केली की शुभ समाचार ठरावा आणि तुमच्या हृदयांना शांती समाधान लाभावे आणि विजय फक्त अल्लाहतर्फे आहे. निःसंशय अल्लाह अतिशय शक्तिशाली आणि हिकमत बाळगणारा आहे.
Enfal 8:11
११. त्या वेळेची आठवण करा जेव्हा (अल्लाह) तुमच्यावर झोपेची गुंगी चढवित होता, आपल्याकडून शांती समाधान प्रदान करण्यासाठी आणि तुमच्यावर आकाशातून पर्जन्यवृष्टी करीत होता की या पाण्याद्वारे तुम्हाला पाक (स्वच्छ-शुद्ध) करावे आणि तुमच्यापासून सैतानी शंका-कुशंका दूर कराव्यात आणि तुमच्या हृदयांना मजबूत करावे आणि तुमचे पाय चांगले स्थिर करावेत.
Enfal 8:12
१२. त्या वेळेची आठवण करा, जेव्हा तुमचा पालनकर्ता फरिश्त्यांना आदेश देत होता की मी तुमच्या सोबतीला आहे, यास्तव तुम्ही ईमानधारकांचे साहस वाढवा. मी आताच काफिरांच्या मनात भय टाकतो. यास्तव तुम्ही मानांवर घाव घाला आणि त्यांच्या एक एक सांध्यावर प्रहार करा.
Enfal 8:13
१३. ही या गोष्टीची शिक्षा आहे की त्यांनी अल्लाहचा आणि त्याच्या पैगंबराचा विरोध केला आणि जे लोक अल्लाहचा आणि त्याच्या पैगंबराचा विरोध करतात, तर सर्वश्रेष्ठ अल्लाह सक्त सजा देणारा आहे.
Enfal 8:14
१४. तेव्हा या शिक्षेची गोडी चाखा आणि लक्षात ठेवा की काफिरांकरिता (इन्कारी लोकांकरिता) आगीची शिक्षा-यातना ठरलेलीच आहे.
Enfal 8:15
१५. हे ईमान राखणाऱ्यांनो! जेव्हा तुम्ही काफिरांशी लढण्यास भिडाल, तेव्हा त्यांच्याकडून पाठ फिरवू नका.
Enfal 8:16
१६. आणि जो मनुष्य त्याप्रसंगी त्यांच्याकडून पाठ फिरविल, परंतु जर कोणी लढण्याचा पवित्रा बदलत असेल किंवा जो आपल्या समूहाकडे आश्रय घेण्यासाठी येत असेल (तर गोष्ट वेगळी) मात्र जो दुसरा असे करील तर तो अल्लाहचा प्रकोप ओढवून घेईल आणि त्याचे ठिकाण जहन्नम असेल, आणि ते अतिशय वाईट ठिकाण आहे.
Enfal 8:17
१७. तेव्हा तुम्ही त्यांना ठार मारले नाही, किंबहुना अल्लाहने त्यांना ठार केले आणि तुम्ही (मूठभर धूळ) नाही फेकली, परंतु अल्लाहने फेकली, आणि यासाठी की ईमानधारकांना आपल्यातर्फे, त्यांच्या प्रयत्नाचा फार मोठा मोबदला प्रदान करावा. निःसंशय सर्वश्रेष्ठ अल्लाह खूप ऐकणारा, खूप जाणणारा आहे.
Enfal 8:18
१८. (एक गोष्ट तर) ही झाली (दुसरी गोष्ट अशी) की सर्वश्रेष्ठ अल्लाहला काफिरांचे कट कारस्थान असफल करायचे होते.
Enfal 8:19
१९. जर तुम्ही लोक निर्णय इच्छित असाल तर तो निर्णय तुमच्यासमोर आहे, आणि जर थांबाल तर हे तुमच्यासाठी फार उत्तम आहे आणि जर तुम्हीदेखील तेच काम कराल तर आम्हीदेखील तेच काम करू, मग तुमचा समुदाय तुमच्या काहीच उपयोगी पडणार नाही, मग संख्येने कितीही मोठा असो. खरी गोष्ट ही आहे की सर्वश्रेष्ठ अल्लाह ईमान राखणाऱ्यांच्या सोबत आहे.
Enfal 8:20
२०. हे ईमान राखणाऱ्यांनो! अल्लाहचे आणि त्याच्या पैगंबराचे फर्मान माना आणि त्या (फर्मानाला कबूल करण्या) पासून तोंड फिरवू नका, ऐकून आणि जाणून घेतानाही.
Enfal 8:21
२१. आणि तुम्ही त्या लोकांसारखे होऊ नका, जे दावा तर करतात की आम्ही ऐकले, वास्तविक त्यांनी काहीच ऐकले नाही.
Enfal 8:22
२२. निःसंशय समस्त प्राणीमात्रात अल्लाहच्या जवळ अतिशय वाईट ते लोक आहेत, जे बहीरे आहेत, मुके आहेत, जे किंचितही समजून घेत नाहीत.
Enfal 8:23
२३. आणि जर अल्लाहला त्यांच्यात काही चांगुलपणा आढळला असता तर त्यांना श्रवणशक्ती प्रदान केली असती आणि जर त्यांना आता ऐकवीलही तरी ते तोंड फिरवतील दुर्लक्ष करीत.
Enfal 8:24
२४. हे ईमान राखणाऱ्यांनो! तुम्ही अल्लाह आणि त्याच्या पैगंबराच्या आदेशांचे अनुसरण करा, जेव्हा पैगंबर तुम्हाला तुमच्या जीवनदायी विषयाकडे बोलावित असतील आणि स्मरण राखा की अल्लाह मानवाच्या आणि त्याच्या हृदयाच्या दरम्यान आड बनतो आणि निःसंशय तुम्हाला अल्लाहच्याच जवळ एकत्र व्हायचे आहे.
Enfal 8:25
२५. आणि तुम्ही अशा संकटापासून स्वतःला वाचवा, जे विशेषतः अशाच लोकांवर कोसळणार नाही जे तुमच्यापैकी त्या अपराधआंचे दोषी आहेत आणि हे जाणून असा की सर्वश्रेष्ठ अल्लाह मोठा सक्त शिक्षा देणारा आहे.
Enfal 8:26
२६. आणि त्या अवस्थेचे स्मरण करा, जेव्हा तुम्ही धरतीवर थोडे होते कमजोर दुबळे मानले जात होते. या भयाने राहत होते की लोकांनी कदाचित तुम्हाला लुटून न घ्यावे, तेव्हा अल्लाहने तुम्हाला राहायला जागा दिली आणि तुम्हाला आपल्या मदतीने सामर्थ्य प्रदान केले, आणि तुम्हाला स्वच्छ शुद्ध अन्न-सामुग्री प्रदान केली, यासाठी की तुम्ही कृतज्ञता व्यक्त करावी.
Enfal 8:27
२७. हे ईमान राखणाऱ्यांनो! तुम्ही अल्लाह आणि पैगंबराचा हक्क मारू नका आणि आपल्या सुरक्षित चीज-वस्तूंमध्ये विश्वासघात करू नका आणि तुम्ही चांगले जाणता.
Enfal 8:28
२८. आणि तुम्ही ही गोष्ट जाणून असा की तुमचे धन आणि तुमची संतती एक कसोटी म्हणून आहे.१ (आणि हेही जाणून असा की) सर्वश्रेष्ठ अल्लाहच्या जवळ फार मोठा मोबदला आहे.
———
(१) संपत्ती आणि संततीचे प्रेम माणसाला सर्वसामान्यतः विश्वासघात करण्यास व अल्लाह आणि पैगंबर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम यांचे आदेश तोडण्यास विवश करते, यास्तव यांना कसोटी म्हटले गेले आहे. अर्थात यांच्याद्वआरे माणसाची परीक्षा घेतली जाते की ते प्रेम राखत असताना अल्लाह आणि पैगंबरांचे आज्ञापालन पूर्णतः करतो किंवा नाही? जर करत असेल तर या कसोटीत खरा उतरला अन्यथा असफल ठरला. अशा स्थितीतही धन-संपत्ती आणि संतती त्याच्याकरिता अल्लाहचा प्रकोप भोगण्याचे कारण बनतील.
Enfal 8:29
२९. हे ईमान राखणाऱ्यांनो! जर तुम्ही अल्लाहचे भय बाळगत राहाल, तर अल्लाह तुम्हाला एक निर्णयाची गोष्ट प्रदान करील आणि तुमच्यापासून तुमचे अपराध दूर करील, आणि तुम्हाला माफ करील आणि अल्लाह मोठा कृपाशील आहे.
Enfal 8:30
३०. आणि त्या घटनेचाही उल्लेख करा, जेव्हा काफिर (इन्कारी) लोक तुमच्याविषयी कट-कारस्थान रचत होते की तुम्हाला कैदी बनवून घ्यावे किंवा तुम्हाला ठार करावे किंवा तुम्हाला देशाबाहेर घालवावे आणि ते आपला कट रचत होते आणि सर्वश्रेष्ठ अल्लाह आपली योजना आखत होता आणि सर्वश्रेष्ठ अल्लाह सर्वांत उत्तम योजना बनविणारा आहे.
Enfal 8:31
३१. आणि जेव्हा त्यांच्यासमोर आमच्या आयती वाचून ऐकविल्या जातात तेव्हा म्हणतात की आम्ही ऐकले, जर आम्ही इच्छिले तर आम्हीदेखील याच्यासारखेच सांगून दाखवू. हे तर काहीच नाही फक्त पूर्वजांच्या पुरावा नसलेल्या गोष्टी आहेत.
Enfal 8:32
३२. आणि जेव्हा ते लोक म्हणाले, हे अल्लाह! जर हा कुरआन खरोखरच तुझ्यातर्फे आहे तर आमच्यावर आकाशातून दगडांचा वर्षाव कर किंवा आमच्यावर एखादा दुःखदायक अज़ाब उतरव.
Enfal 8:33
३३. आणि अल्लाह असे नाही करणार की त्यांच्यात तुम्ही असताना त्यांना शिक्षा-यातना देईल, आणि अल्लाह त्यांना शिक्षा देणार नाही, या अवस्थेत की ते क्षमा-याचनाही करीत असावेत.
Enfal 8:34
३४. आणि त्यांच्यात असे काय आहे की, अल्लाहने त्यांना शिक्षा न द्यावी? असे असतानाही की ते लोकांना मसजिदे हराम (काबागृहा) पासून रोखतात, वास्तविक ते या मस्जिदीची देखभाल करणारे नाहीत. तिचे संरक्षक अल्लाहच्या आज्ञधारक दासांखेरीज कोणीही नाही, परंतु त्यांच्यातले अधिकांश लोक हे जाणत नाहीत.
Enfal 8:35
३५. आणि त्यांची नमाज काबागृहाजवळ फक्त हीच होती, शिट्या वाजविणे, टाळ्या वाजविणे. तेव्हा आपल्या इन्कारापायी या शिक्षा-यातनेचा स्वाद चाखा.
Enfal 8:36
३६. निःसंशय हे इन्कारी लोक आपले धन अशासाठी खर्च करीत आहेत की अल्लाहच्या मार्गापासून रोखावे तर हे लोक आपले धन असेच खर्च करत राहतील, मग ते धन त्यांच्यासाठी पश्चात्तापाचे कारण ठरेल, मग पराभूत होतील आणि काफिरांना जहन्नमकडे एकत्र केले जाईल.
Enfal 8:37
३७. यासाठी की अल्लाहने नापाक (अस्वच्छ-अशुद्ध) लोकांना पाक (स्वच्छ शुद्ध) लोकांपासून वेगळे करावे आणि नापाक लोकांची एकमेकांशी भेट करून द्यावी, मग त्या सर्वांना एकत्र करावे, मग त्या सर्वांना जहन्नममध्ये टाकावे. असे लोक पूर्णतः तोट्यात आहेत.
Enfal 8:38
३८. तुम्ही इन्कारी लोकांना सांगा की जर हे लोक (अशी हरकत) थांबवतील तर यांचे सर्व अपराध, जे पूर्वी केले आहेत, माफ केले जातील, आणि जर आपली तीच रीत कायम राखतील तर पूर्वीच्या (काफिरांसाठी) नियम लागू झालेलाच आहे.
Enfal 8:39
३९. आणि तुम्ही त्यांच्याशी त्या वेळेपर्यंत संघर्ष करीत राहा की त्यांच्या श्रद्धेत बिघाड शिल्लक न राहावा आणि धर्म अल्लाहचाच व्हावा. मग जर हे (हरकती) थांबवतील तर अल्लाह त्यांच्या कर्मांना चांगल्या प्रकारे पाहतो.
Enfal 8:40
४०. आणि जर तोंड फिरवतील तर विश्वास ठेवा की सर्वश्रेष्ठ अल्लाह तुमचा मित्र आहे. तो अतिशय चांगला मित्र आणि चांगला मदत करणारा आहे.
Enfal 8:41
४१. आणि जाणून घ्या की, युद्धात हस्तगत केलेला कोणत्याही प्रकारचा माल (धन-संपदा) तुम्ही प्राप्त कराल तर त्याचा पाचवा हिस्सा तर अल्लाह आणि रसूल आणि नातेवाईक आणि अनाथ आणि गोरगरीब, आणि प्रवाशांकरिता आहे. जर तुम्ही अल्लाहवर ईमान राखले आहे आणि त्यावर जे आम्ही आपल्या दासावर त्या दिवशी अवतरित केले, जो सत्य आणि असत्याच्या दरम्यान अलगावाचा होता, ज्या दिवशी दोन्ही सैन्ये आपसात भिडली होती आणि अल्लाह प्रत्येक गोष्टीचे सामर्थ्य बाळगणारा आहे. १
———
(१) अल्लाहने पैगंबर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम यांना स्वप्नात अनेकेश्वरवाद्यांची संख्या कमी दाखवली. तीच संख्या पैगंबरांनी आपल्या निकटस्थ अनुयायींना सांगितली, ज्यामुळे त्यांची हिंमत वाढली, जर या उलट काफिरांची संख्या जास्त दाखवली गेली असती तर सहाबांच्या मनात भय निर्माण झाले असते(हीम्मत कमि झाली असता) आणि आपसात मतभेद निर्माण झाले असते. परंतु अल्लाहने असे होण्यापासून ईमानधारकांना वाचविले.
Enfal 8:42
४२. जेव्हा तुम्ही जवळच्या किनाऱ्यावर आणि ते दूरच्या किनाऱ्यावर होते आणि काफिला तुमच्यापासून (फार) खाली होता, जर तुम्ही आपसात वायदा केला असता तर ठरलेल्या वेळेवर पोहोचण्यात मतभेद केला असता, तथापि अल्लाहला एक काम करूनच टाकायचे होते, जे ठरले गेले होते, यासाठी की, जो नष्ट होईल, तो प्रमाणावर (अर्थात ठरलेले जाणून) नष्ट व्हावा आणि जो जिवंत राहील, तोदेखील प्रमाणावर (सत्य ओळखून) जिवंत राहावा, आणि अल्लाह चांगल्या प्रकारे ऐकणारा, जाणणारा आहे.
Enfal 8:43
४३. जेव्हा तुम्हाला तुमच्या स्वप्नात अल्लाहने त्यांची संख्या कमी दाखवली. जर त्यांना जास्त दाखविले असते तर तुम्ही भ्याड बनले असते आणि याबाबत आपसात मतभेद करू लागले असते, परंतु अल्लाहने (यापासून) वाचविले. निःसंशय अल्लाह छातीतल्या (मनात लपलेल्या) गोष्टीही जाणणारा आहे.
Enfal 8:44
४४. आणि जेव्हा त्याने भेट होतेवेळी त्यांना तुमच्या नजरेत फार कमी (संख्येने) दाखविले आणि तुम्हाला त्यांच्या नजरेत कमी दाखविले अशासाठी की अल्लाहने ते कार्य तडीस न्यावे, जे करायचेच होते आणि सर्व कार्ये अल्लाहकडेच वळविली जातात.
Enfal 8:45
४५. हे ईमान राखणाऱ्यांनो! जेव्हा तुम्ही एखाद्या (शत्रू) सैन्याशी भिडाल, तेव्हा अटळ राहा आणि अल्लाहचे जास्तीत जास्त स्मरण करा, यासाठी की तुम्हाला सफलता प्राप्त व्हावी.
Enfal 8:46
४६. आणि अल्लाहचे आणि त्याच्या रसूल (पैगंबर) चे आज्ञापालन करीत राहा, आपसात मतभेद ठेवू नका, अन्यथा भ्याड व भित्रे व्हाल, आणि तुमचा पाया डळमळीत होईल आणि तुमचा जोम नाहीसा होईल आणि धैर्य-संयम व विश्वास राखा. निःसंशय अल्लाह धीर-संयम राखणाऱ्यांच्या पाठीशी आहे.
Enfal 8:47
४७. आणि त्या लोकांसारखे होऊ नका, जे मोठी घमेंड दाखवित आणि लोकांमध्ये अभिमान व अहंकार करीत आपल्या घरापासून चालले होते आणि अल्लाहच्या मार्गापासून रोखत होते. जे काही ते करीत आहेत अल्लाह त्यास घेरून टाकणारा आहे.
Enfal 8:48
४८. आणि जेव्हा त्यांच्या कर्मांना सैतान त्यांना सुशोभित करून दाखवित होता आणि सांगत होता की माणसांपैकी कोणीही आज तुमच्यावर वर्चस्वशाली होऊ शकत नाही. मी स्वतः तुमचा समर्थक आहे, परंतु जेव्हा दोन्ही गट जाहीर झाले, तेव्हा आपल्या उलटपावली फिराला आणि म्हणू लागला की मी तर तुमच्यापासून वेगळा आहे, विभक्त आहे. मी ते काही पाहत आहे जे तुम्ही पाहत नाही. मी अल्लाहचे भय बाळगतो आणि अल्लाह मोठा सक्त अज़ाब देणारा आहे.
Enfal 8:49
४९. जेव्हा मुनाफिक (ढोंगी) लोक म्हणत होते आणि तेदेखील, ज्यांच्या मनात रोग होता की त्यांना तर त्यांच्या धर्माने धोक्यात टाकले आहे. आणि जो मनुष्यदेखील अल्लाहवर भरोसा करील तर सर्वश्रेष्ठ अल्लाह निश्चितच मोठा जबरदस्त आणि हिकमतशाली आहे.
Enfal 8:50
५०. आणि तुम्ही जर ते दृश्य पाहिले असते जेव्हा फरिश्ते काफिरांचे (ईमान न राखणाऱ्यांचे) प्राण काढतात, त्यांच्या तोंडावर आणि कमरेवर मारतात (आणि म्हणतात) तुम्ही जळण्याच्या शिक्षेची गोडी चाखा.
Enfal 8:51
५१. हे त्या कर्मांमुळे, जी तुमच्या हातांनी पूर्वीच पाठवून ठेवलीत. निःसंशय सर्वश्रेष्ठ अल्लाह आपल्या दासांवर किंचितही जुलूम- अत्याचार करीत नाही.
Enfal 8:52
५२. फिरऔनच्या अनुयायींच्या अवस्थेसारखे आणि त्यांच्या बुजूर्ग लोकांच्या की त्यांनी अल्लाहच्या आयतींवर विश्वास ठेवला नाही, तेव्हा अल्लाहने त्यांच्या अपराधांपायी त्यांना धरले. निःसंशय अल्लाह मोठा जबरदस्त आणि त्याची शिक्षा मोठी सक्त आहे.
Enfal 8:53
५३. हे अशासाठी की सर्वश्रेष्ठ अल्लाह असा नाही की एखाद्या जनसमूहावर एखादी कृपा देणगी (नेमत) प्रदान करून पुन्हा बदलून टाकील, जोपर्यंत तो स्वतः आपल्या त्या अवस्थेला बदलून टाकत नाही, जी त्यांची स्वतःची होती१ आणि हे की सर्वश्रेष्ठ अल्लाह ऐकणारा जाणणारा आहे.
———
(१) अर्थात हे की जोपर्यंत एखादा जनसमूह अल्लाहशी कृतज्ञशीलतेचा मार्ग अंगिकारून आणि अल्लाहने सांगितलेल्या अनुचित गोष्टींचा अव्हेर करून आपली अवस्था व आचरण बदलत नाही, तोपर्यंत अल्लाह त्यांच्यावर आपल्या कृपा देणग्यांणचे द्वार उघडे ठेवतो. दुसऱ्या शब्दात सांगायचे तर सर्वश्रेष्ठ अल्लाह दृष्कृत्यां मुळे आपल्या कृपा देणग्या संमपुष्टात आणतो, आणि सर्वश्रेष्ठ अल्लाहच्या दया कृपेस पात्र होण्यासाठी दुष्कृत्यांपासून अलिप्त राहणे अत्यावश्यक आहे.
Enfal 8:54
५४. फिरऔनचे लोक आणि त्याच्या पूर्वीच्या लोकांप्रमाणे की त्यांनी आपल्या पालनकर्त्याच्या गोष्टींना खोटे ठरविले, तेव्हा आम्ही त्याच्या अपराधांपायी त्यांना बरबाद करून टाकले आणि फिरऔनवाल्यांना बुडवून टाकले आणि हे सर्व अत्याचारी होते.
Enfal 8:55
५५. समस्त सजीवांमध्ये सर्वाधिक वाईट अल्लाहच्या जवळ ते लोक आहेत जे कुप्र (इन्कार) करतात, मग ते ईमान राखत नाहीत.
Enfal 8:56
५६. ज्यांच्याकडून तुम्ही वचन घेतले, तरीही ते दरवेळेस आपल्या वचनाचा भंग करतात आणि कधीही अल्लाहचे भय राखून वागत नाही.
Enfal 8:57
५७. यास्तव जेव्हा तुम्ही त्याच्यावर युद्धात वर्चस्वशाली ठराल, तेव्हा त्यांना असा जबरदस्त मार द्या की त्यांच्या मागे असलेल्यांनीही पळ काढावा. कदाचित त्यांनी बोध ग्रहण करावा.
Enfal 8:58
५८. आणि जर तुम्हाला एखाद्या जनसमूहाकडून धोका किंवा दगाबाजी केली जाण्याचे भय असेल तर समानतेच्या स्थितीत त्यांचा समझोता तोडून टाका. अल्लाह विश्वासघात (अपहार) करणाऱ्यांशी प्रेम राखत नाही.
Enfal 8:59
५९. आणि इन्कारी लोकांनी हा विचार करू नये की ते पळ काढतील. यात शंका नाही की ते लाचार व अगतिक करू शकत नाही.
Enfal 8:60
६०. आणि तुम्ही त्यांच्याशी लढण्याकरिता आपल्या क्षमतेनुसार सामर्थ्य तयार करा आणि घोडे तयार ठेवण्याचेही की त्याद्वारे तुम्ही अल्लाहच्या शत्रूंना आणि आपल्या शत्रूंना भयभीत करू शकावे, आणि त्यांच्याखेरीज इतरांनाही, ज्यांना तुम्ही जाणत नाहीत, अल्लाह त्यांना चांगल्या प्रकारे जाणतो आणि जे काही अल्लाहच्या मार्गात खर्च कराल ते तुम्हाला पुरेपूर दिले जाईल आणि तुमच्या हक्काचे नुकसान केले जाणार नाही.
Enfal 8:61
६१. आणि जर ते समझोत्याकडे झुकतील, तर तुम्हीही समझोत्याकडे झुका आणि अल्लाहवर भरोसा ठेवा. निःसंशय अल्लाह ऐकणारा जाणणारा आहे.
Enfal 8:62
६२. आणि जर ते तुमच्याशी धोकेबाजी करू इच्छितील तर अल्लाह तुमच्यासाठी पुरेसा आहे. त्यानेच आपल्या मदतीद्वारे आणि ईमानधारकांद्वारे तुम्हाला समर्थन दिले आहे.
Enfal 8:63
६३. आणि त्यांच्या मनात एकमेकांचे प्रेमही त्यानेच निर्माण केले आहे. जर तुम्ही धरतीच्या समस्त चीज-वस्तू खर्च केल्या असत्या, तरीही त्याच्या मनात प्रेम-भावना निर्माण करू शकत नव्हते, परंतु अल्लाहनेच त्यांच्या मनात प्रेम टाकले. निःसंशय तो वर्चस्वशाली हिकमत बाळगणारा आहे.
Enfal 8:64
६४. हे पैगंबर! तुमच्यासाठी आणि तुमचे अनुसरण करणाऱ्या ईमानधारकांसाठी अल्लाह पुरेसा आहे.
Enfal 8:65
६५. हे पैगंबर! ईमानधारकांना जिहाद (धर्मयुद्धा) साठी प्रोत्साहित करा. जर तुमच्यापैकी वीस धैर्यशालीही असतील तर ते दोनशे जणांवर वर्चस्वशाली राहतील आणि जर तुमच्यापैकी शंभर असतील तर एक हजार ईमान न राखणाऱ्यांवर वर्चस्वशाली राहतील. या कारणाने की ते नासमज लोक आहेत.
Enfal 8:66
६६. आता अल्लाह तुमचे ओझे हलके करतो. तो चांगल्या प्रकारे जाणतो की तुमच्या दुर्बलता आहे, तेव्हा जर तुमच्यापैकी शंभर धैर्यशील असतील तर ते दोनशे जणांवर वर्चस्वशाली राहतील. आणि जर तुमच्यापैकी एक हजार असतील तर ते अल्लाहच्या हुकुमाने दोन हजार (शत्रूंवर) वर्चस्वशाली असतील आणि अल्लाह धैय-संयम राखणाऱ्या लोकांच्या सोबत आहे.
Enfal 8:67
६७. पैगंबरांच्या हाती कैदी असायला नको, जोपर्यंत देशात हिंसक युद्ध न व्हावे. तुम्ही तर या जगाचे धन इच्छिता आणि अल्लाहचा इरादा आखिरतचा आहे आणि अल्लाह वर्चस्वशाली, हिकमत बाळगणारा आहे.
Enfal 8:68
६८. जर पूर्वीपासूनच अल्लाहतर्फे हे लिखित नसते तर जे काही तुम्ही घेतले आहे, त्याच्याविषयी तुम्हाला एखादी सक्त शिक्षा झाली असती.
Enfal 8:69
६९. आणि जे हलाल आणि स्वच्छ शुद्ध धन युद्धाद्वारे प्राप्त करून घ्याल ते खा आणि अल्लाहचे भय बाळगून राहा. निःसंशय सर्वश्रेष्ठ अल्लाह मोठा माफ करणारा आणि दया करणारा आहे.
Enfal 8:70
७०. हे पैगंबर! आपल्या हाताखालच्या कैद्यांना सांगा की जर सर्वश्रेष्ठ अल्लाह तुमच्या मनात नेक इरादा पाहील तर जे काही तुमच्याडून घेतले गेले आहे, त्याहून चांगले तुम्हाला प्रदान करील आणि अल्लाह माफ करणारा, दया करणारा आहे.
Enfal 8:71
७१. आणि जर ते तुमच्याशी विश्वासघात करण्याचा इरादा करतील, तर यांनी याच्यापूर्वी खुद्द अल्लाहशी विश्वासघात केलेला आहे. शेवटी त्याने त्यांना कैद करविले आणि सर्वश्रेष्ठ अल्लाह सर्वज्ञ, हिकमतशाही आहे.
Enfal 8:72
७२. निःसंशय, ज्या लोकांनी ईमान राखले आणि अल्लाहसाठी देशत्याग केला अर्थात हिजरत केली आणि जिहाद केले धनाने व मनाने अल्लाहच्या मार्गात, आणि ज्यांनी अशा लोकांना आश्रय दिला, आणि त्यांना मदत केली तर ते एकमेकांचे आपसात मित्र आहेत आणि ज्यांनी ईमान राखले, पण देशत्याग केला नाही तर तुमच्याशी त्यांची किंचितही मैत्री नाही, परंतु जर ते धर्माच्या बाबतीत तुमच्याकडे मदत मागतील तर त्यांना मदत करणे तुमच्यासाठी आवश्यक आहे, मात्र त्या लोकांखेरीज, की तुमच्या व त्यांच्या दरम्यान प्रतिज्ञा करार झाला आहे आणि जे काही तुम्ही करीत आहात, अल्लाह ते चांगल्या प्रकारे पाहत आहे.
Enfal 8:73
७३. आणि काफिर (ईमान न राखणारे) एकमेकांचे मित्र आहेत, जर तुम्ही असे केले नाही तर देशात उपद्रव पसरेल आणि मोठा उत्पात निर्माण होईल.
Enfal 8:74
७४. ज्या लोकांनी ईमान राखले आणि देशत्याग केला आणि अल्लाहच्या मार्गात जिहाद केले आणि ज्यांनी अशा लोकांना आश्रय दिला, आणि मदत पोहचविली तर हेच लोक सच्चे ईमानधारक आहेत, त्यांच्यासाठी क्षमा आणि मान-सन्मानपूर्ण रोजी (आजीविका) आहे.
Enfal 8:75
७५. आणि ज्या लोकांनी यानंतर ईमान राखले आणि देशत्याग केला आणि तुमच्या सोबतीने जिहाद केला तर असे लोकही तुमच्यापैकीच आहेत आणि नातेवाईक त्यांच्यापैकी आपसात एकमेकांच्या जास्त निकट आहेत, अल्लाहच्या आदेशान्वये. निःसंशय अल्लाह सर्व काही जाणणारा आहे.
Tevbe 9:1
१. ही अल्लाह आणि त्याच्या पैगंबरातर्फे वचनमुक्तीची घोषणा आहे त्या अनेकेश्वरवाद्यांबाबत, ज्यांच्याशी तुम्ही वचन करार केला आहे.
Tevbe 9:2
२. तेव्हा (हे अनेकेश्वरवाद्यांनो!) तुम्ही देशात चार महिने प्रवास करून घ्या आणि जाणून घ्या की तुम्ही अल्लाहला विवश करू शकत नाही आणि अल्लाह इन्कारी लोकांना अपमानित करणार आहे.
Tevbe 9:3
३. अल्लाह आणि त्याच्या पैगंबरातर्फे हज अकबर (मोठ्या हज) च्या दिवशी१ साफ ऐलान आहे की अल्लाह अनेकेश्वरवाद्यांपासून विभक्त आहेत आणि त्याचा पैगंबरदेखील. जर अत्ताही तुम्ही तौबा (क्षमा-याचना) कराल तर तुमच्यासाठी अधिक चांगले आहे आणि जर तुम्ही तोंड फिरवाल, तर जाणून असा की तुम्ही अल्लाहला अगतिक करू शकत नाही आणि काफिरांना सक्त शिक्षेची खबर द्या.
———
(१) सहीहैन (बुखारी व मुस्लिम) आणि अन्य सहीह-ग्रंथाद्वारे सिद्ध आहे की हज अकबरच्या दिवसापासून अर्थात १० जिलहिज्जाचा दिवस आहे (तिर्मिजी नं. ९५७, बुखारी नं. ४६५५, मुस्लिम नं. ९८२) त्याच दिवशी मिना या ठिकाणी मुक्तीची घोषणा केली गेली. १० जिलहिज्जाला हज अकबर अशासाठी म्हटले जाते की या दिवशी हजला सर्वांत जास्त आणि खास धार्मिक पद्धतीने पार पाडले जाते. सर्वसामान्य लोक उमराला हज असगर म्हणत, यास्तव उमरापेक्षा चांगले करण्यासाठी हजला मोठे हज म्हटले गेले. लोकांमध्ये जे प्रचलित आहे की हज जुमा (शुक्रवार) च्या दिवशी आल्यास हज अकबर आहे अगदी निराधार आहे.
Tevbe 9:4
४. परंतु असे अनेकेश्वरवादी, ज्यांच्याशी तुम्ही वचन करार केलेला आहे आणि त्यांनी तुम्हाला किंचितही नुकसान पोहचविले नाही, आणि तुमच्या विरोधात कोणाची मदत केली नाही, तर तुम्हीदेखील कराराचा अवधी त्यांच्यासह पूर्ण करा. निःसंशय अल्लाह भय राखून वागणाऱ्यांशी प्रेम करतो.
Tevbe 9:5
५. मग आदरणीय महिने संपताच अनेकेश्वरवाद्यांना, आढळतील तिथे ठार करा, त्यांना कैदी बनवा, त्यांना घेरा टाका आणि प्रत्येक घाताच्या ठिकाणी त्यांच्यावर टपून बसा परंतु जर ते तौबा (क्षमा याचना) करून घेतील आणि नित्यनेमाने नमाज पढू लागतील आणि जकात अदा करू लागतील तर तुम्ही त्यांचा मार्ग सोडून द्या. निःसंशय, सर्वश्रेष्ठ अल्लाह माफ करणारा, दया करणारा आहे.
Tevbe 9:6
६. जर अनेकेश्वरवाद्यांपैकी कोणी तुमच्या जवळ आश्रय मागेल तर तुम्ही त्याला आश्रय द्या, येथपर्यंत की त्याने अल्लाहची वाणी ऐकून घ्यावी, मग त्याला त्याच्या शांती-स्थळापर्यंत पोहचवा. हे अशासाठी की ते लोक अजाण आहेत.
Tevbe 9:7
७. अनेकेश्वरवाद्यांचा वायदा अल्लाह आणि त्याच्या पैगंबराशी कसा काय राहू शकतो, त्यांच्याखेरीज, ज्यांच्याशी तुम्ही मसजिदे हरामजवळ वचन करार केला आहे, तर जोपर्यंत ते लोक तुमच्याशी करार-पालन करतील, तुम्हीही त्यांच्याशी केलेल्या वायद्यावर कायम राहा. सर्वश्रेष्ठ अल्लाह, भय राखून वागणाऱ्या लोकांशी प्रेम राखतो.
Tevbe 9:8
८. त्यांच्या वचन-वायद्यांचा काय भरोसा? त्यांना जर तुमच्यावर वर्चस्व लाभले तर ते ना नातेसंबंधाचा विचार करतील, ना वचन-कराराचा. आपल्या मुखाने हे तुम्हाला रिझवित आहेत, परंतु यांची मने मानत नाहीत आणि त्यांच्यात अधिकांश लोक फासिक (दुराचारी) आहेत.
Tevbe 9:9
९. त्यांनी अल्लाहच्या आयतींना फार कमी किमतीत विकले, आणि त्याच्या मार्गापासून रोखले. मोठे वाईट आहे, जे हे करीत आहेत.
Tevbe 9:10
१०. हे तर एखाद्या ईमानधारकाच्या हक्कात कसल्याही नात्याची किंवा वचनाची काळजी करीत नाही. हे आहेतच हद्द ओलांडून जाणारे.
Tevbe 9:11
११. अजूनही जर ते तौबा (पश्चात्तापयुक्त क्षमा याचना) करतील आणि नमाज नियमितपणे पढू लागतील आणि जकात देत राहतील तर तुमचे धर्म-बांधव आहेत आणि आम्ही तर समंजस लोकांसाठी आपल्या आयतींचे तपशीलपूर्वक निवेदन करीत आहोत.
Tevbe 9:12
१२. जर हे लोक वचन-वायद्यानंतरही आपल्या वचनाचा भंग करतील आणि तुमच्या धर्माची निंदा-नालस्तीही करतील तर तुम्हीही अशा काफिरांच्या सरदारांशी भिडा. त्यांची शपथ काहीच नाही. संभवतः अशा प्रकारे ते (असे करणे) थांबवतील.
Tevbe 9:13
१३. तुम्ही त्या लोकांची डोकी ठेचण्यासाठी का तयार होत नाही, ज्यांनी आपल्या शपथा तोडून टाकल्या आणि (अंतिम) पैगंबराला देशाबाहेर घालविण्याच्या विचारात आहे, आणि स्वतःच पहिल्यांदा त्यांनी तुमची छेड काढली आहे. काय तुम्ही त्यांना भिता? वस्तुतः अल्लाहलाच सर्वांत जास्त हक्क आहे की तुम्ही त्याचे भय राखावे, जर तुम्ही ईमानधारक असाल.
Tevbe 9:14
१४. तुम्ही त्यांच्याशी युद्ध करा. अल्लाह तुमच्या हस्ते त्यांना दुःख यातना देईल, त्यांना अपमानित करील. त्यांच्या विरोधात तुमची मदत करील आणि ईमानधारकांच्या हृदयांना शितलता पोहचवील.
Tevbe 9:15
१५. आणि त्यांच्या मनाचे दुःख आणि क्रोध दूर करील आणि अल्लाह ज्याच्याकडे इच्छितो दया कृपेने ध्यान देतो आणि सर्वश्रेष्ठ अल्लाह जाणणारा, हिकमतशाली आहे.
Tevbe 9:16
१६. काय तुम्ही हे समजून बसला आहात की तुम्हाला असेच सोडून दिले जाईल? अद्याप सर्वश्रेष्ठ अल्लाहने तुमच्यापैकी त्यांना उघडकीस आणले नाही, जे जिहादचे सैनिक आहेत, आणि ज्यांनी अल्लाह, त्याचा रसूल आणि ईमानधारकांखेरीज कोणालाही मित्र बनविले नाही, आणि सर्वश्रेष्ठ अल्लाह खूप चांगल्या प्रकारे जाणतो, जे तुम्ही करीत आहात.
Tevbe 9:17
१७. शक्य नव्हे की अनेकेश्वरवादी, अल्लाहच्या मस्जिदीला आबाद करतील, वास्तविक स्थिती ही आहे की हे आपल्या इन्काराचे स्वतः साक्षी आहेत. त्यांची सर्व कर्मे वाया गेलीत आणि ते नेहमीकरिता जहन्नममध्ये राहतील.
Tevbe 9:18
१८. अल्लाहच्या मस्जिदीना तर ते लोक आबाद करतात, जे अल्लाहवर आणि आखिरतच्या दिवसावर ईमान राखतील, नमाज नियमित पढतील, जकात देतील आणि अल्लाहशिवाय कोणालाही भित नसतील. संभवतः हेच लोक खात्रीने मार्गदर्शन लाभलेले आहेत.
Tevbe 9:19
१९. काय तुम्ही हाजी लोकांना पाणी पाजणे आणि मस्जीदे हराम (काबागृह) ची सेवा करणे, त्याच्यासमान ठरविले आहे, जो अल्लाहवर आणि कयामतच्या दिवसावर ईमान राखील आणि अल्लाहच्या मार्गात जिहाद (संघर्ष) करील. हे अल्लाहजवळ समान नाही१ आणि सर्वश्रेष्ठ अल्लाह अत्याचारी लोकांना मार्ग दाखवित नाही.
———
(१) अनेकेश्वरवादी हजयात्रींना पाणी पाजण्याचे आणि आदरणीय मसजिद (काबागृह) च्या देखरेखीचे जे काम करीत, त्याबद्दल त्यांना मोठी घमेंड होती, आणि याच्या तुलनेत ते ईमान व जिहादला श्रेष्ठ जाणत नसत, ज्याची श्रेष्ठता ईमानधारकांमध्ये होती, यास्तव अल्लाहने फर्माविले, काय तुम्ही हजयात्रींना पाणी पाजणे व मसजिदे हरामची व्यवस्था राखणे ही गोष्ट अल्लाहवर ईमान राखणे आणि अल्लाहच्या मार्गात जिहाद करण्यासमान समजता? लक्षात ठेवा, अल्लाहच्या ठिकाणी या दोन गोष्टी समान नाहीत, किंबहुना अनेक ईश्वरांची उपासना करणाऱ्यांचे कोणतेही कर्म स्विकार्य नाही, मग ते कर्म वरवर पाहता कितीही पुण्यकारक का असेना.
Tevbe 9:20
२०. ज्या लोकांनी ईमान राखले, देशत्याग केला, अल्लाहच्या मार्गात आपल्या धनाने व प्राणाने संघर्ष केला, ते अल्लाहच्या समोर खूप मोठ्या दर्जाचे आहेत आणि हेच लोक सफलता प्राप्त करणारे आहेत.
Tevbe 9:21
२१. त्यांचा पालनकर्ता त्यांना आपली दया आणि प्रसन्नता आणि अशा जन्नतींची खूशखबर देतो, ज्यांच्यात त्यांच्यासाठी निरंतर सुख आहे.
Tevbe 9:22
२२. तिथे ते सदैवकाळ राहतील अल्लाहच्या निकट, निःसंशय हा फार मोठा मोबदला आहे.
Tevbe 9:23
२३. हे ईमान राखणाऱ्यांनो! आपल्या पित्यांना आणि आपल्या बांधवांना मित्र बनवू नका, जर ते कुप्र (इन्कारा) ला ईमानापेक्षा जास्त चांगले समजतील. तुमच्यापैकी जोदेखील त्यांच्याशी दोस्ती ठेवील, तो पूर्णपणे (अपराधी आणि) अत्याचारी आहे.
Tevbe 9:24
२४. तुम्ही सांगा की जर तुमचे पिता, तुमचे पुत्र आणि तुमचे बांधव आणि तुमच्या पत्न्या आणि तुमचे कुटुंब आणि कमविलेले धन आणि तो व्यापार, ज्याच्या कमतरतेचे तुम्ही भय राखता आणि ती घरे, जी तुम्हाला फार प्रिय आहेत (जर) हे सर्व तुम्हाला अल्लाह आणि त्याचा पैगंबर आणि अल्लाहच्या मार्गात जिहादपेक्षा जास्त प्रिय आहे तर मग प्रतिक्षा करा की सर्वश्रेष्ठ अल्लाहने आपला अज़ाब (शिक्षा-यातना) आणावी. सर्वश्रेष्ठ अल्लाह दुराचारी लोकांना मार्ग दाखवत नाही.
Tevbe 9:25
२५. निःसंशय, सर्वश्रेष्ठ अल्लाहने तुम्हाला अनेक युद्धभूमीत विजय प्रदान केला आहे आणि हुनैन-युद्धाच्या दिवशीही, जेव्हा तुम्हाला आपल्या जास्त संख्येबद्दल घमेंड होती, परंतु अशाने तुम्हाला काहीच लाभ झाला नाही, तथापि धरती आपली विशालता (बाळगत) असतानाही तुमच्यासाठी संकुचित (तंग) झाली, मग तुम्ही पाठ फिरवून दूर पळाले.
Tevbe 9:26
२६. मग अल्लाहने आपल्यातर्फे सलामती आपल्या पैगंबरावर आणि ईमानधारकांवर अवतरित केली आणि आपले ते सैन्य पाठविले जे तुम्ही पाहत नव्हते आणि काफिरांना (इन्कारी लोकांना) पूर्ण शिक्षा दिली आणि या काफिरांचा हाच मोबदला होता.
Tevbe 9:27
२७. मग त्यानंतरही ज्याला इच्छिल, सर्वश्रेष्ठ अल्लाह माफ करील आणि अल्लाहच माफ करणारा दया करणारा आहे.
Tevbe 9:28
२८. हे ईमान राखणाऱ्यांनो! निःसंशय अनेकेश्वरवादी नापाक (अस्वच्छ अशुद्ध) आहेत.१ ज्यांनी या वर्षानंतर मसजिदे हराम (आदरणीय मसजिद-काबागृहा) च्या जवळही येता कामा नये जर तुम्हाला गरीबीचे भय असेल तर अल्लाह तुम्हाला आपल्या दया कृपेने धनवान करील जर अल्लाह इच्छिल. निःसंशय अल्लाह सर्वज्ञ आणि हिकमतशाली आहे.
———
(१) अनेक ईश्वरांची भक्ती आराधना करणाऱ्यांचे नापाक (अस्वच्छ अशुद्ध) असण्याचा अर्थ श्रद्धा, ईमान आणि कर्मांची अस्वच्छता व अशुद्धता होय. काहींच्या मते हे अंतर्बाह्यरित्या नापाक आहेत, कारण ते मल-मुत्र त्याग करताना स्वच्छता व पावित्र्याचा या प्रकारे इतमाम राखत नाही ज्याबाबतचा आदेश धार्मिक नियमांद्वारे दिला गेला आहे.
Tevbe 9:29
२९. त्या लोकांशी लढा जे अल्लाहवर आणि आखिरतवर ईमान राखत नाही. जे अल्लाह आणि त्याच्या पैगंबराद्वारे हराम ठरविलेल्या वस्तूला हराम समजत नाही, ना ते सत्य-धर्माचा स्वीकार करतात. त्या लोकांपैकी ज्यांना ग्रंथ प्रदान केला गेला आहे, येथपर्यंत की त्यांनी अपमानित होऊन स्वहस्ते जिजिया (टॅक्स) अदा करावा.
Tevbe 9:30
३०. यहूदी म्हणतात की उज़ैर अल्लाहचा पुत्र आहे आणि ख्रिस्ती म्हणतात की मसीह अल्लाहचा पुत्र आहे, हे कथन फक्त त्यांच्या तोंडची गोष्ट आहे. पूर्वीच्या काफिरांच्या कथनाची हेदेखील बरोबरी करू लागले आहेत. अल्लाह सर्वनाश करो यांचा, हे कोठे भरकटत चालले आहेत?
Tevbe 9:31
३१. त्या लोकांनी अल्लाहला सोडून आपल्या धर्म-ज्ञानी आणि धर्माचार्यांना रब (स्वामी, पालनहार) बनविले आहे, आणि मरियमपुत्र मसीहला वास्तविक त्यांना एकमेव अल्लाहचीच उपासना करण्याचा आदेश दिला गेला होता, ज्याच्याखेरीज कोणीही उपासना-योग्य नाही तो त्यांच्या शिर्क करण्यापासून पवित्र (पाक) आहे.
Tevbe 9:32
३२. ते अल्लाहच्या दिव्य प्रकाशाला आपल्या तोंडांनी विझवू इच्छितात आणि अल्लाह इन्कार करतो, परंतु हे की आपल्या दिव्य प्रकाशाला पूर्णत्वास पोहचवावे, मग काफिरांना कितीही अप्रिय वाटो.१
———
(१) अर्थात अल्लाहचे पैगंबर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम यांना जो दिव्य प्रकाश आणि सत्य धर्म देऊन पाठविले आहे. यहूदी, ख्रिस्ती आणि अनेकेश्वरवादी इच्छितात की त्याला भांडण आणि आरोपांद्वारे मिटवून टाकावे, त्याचे उदाहरण असेच आहे, जणू एखाद्याने फूंक मारून सूर्य-चंद्राचा प्रकाश विझविण्याचा प्रयत्न करावा. हे जसे अशक्य आहे, तसेच अल्लाहने आपल्या पैगंबरासह पाठविलेल्या सत्य धर्माला मिटविणे अशक्य आहे. तो समस्त धर्मांवर वर्चस्व राखील, जसे अल्लाहने पुढच्या आयतीत फर्माविले. काफिरचा शाब्दिक अर्थ लपविणारा असा आहे. या अनुषंगाने रात्रीलाही काफिर म्हणतात कारण तो सर्व चीज वस्तूंना आपल्या अंधारात लपवितो. शेतकऱ्यालाही काफिर म्हणतात, कारण तो धान्याचे दाणे जमिनीत लपवितो यास्तव काफिरदेखील अल्लाहचे दिव्य तेज लपवू इच्छितात किंवा आपल्या मनात इन्कार, कट-कारस्थान आणि ईमानधारकांच्या व इस्लामच्या विरूद्ध द्वेष मत्सर लपवून आहेत. याच कारणाने त्यांना ‘काफिर’ म्हटले जाते.
Tevbe 9:33
३३. त्यानेच आपल्या पैगंबराला सच्चा मार्ग आणि सत्य धर्मासह पाठविले की त्याला इतर सर्व धर्मांवर वर्चस्वशाली करावे, मन अनेकेश्वरवादी लोकांना कितीही वाईट वाटो.
Tevbe 9:34
३४. हे ईमान राखणाऱ्यांनो! बहुतेक धर्म-ज्ञानी आणि उपासक, लोकांचा माल नाहक गिळंकृत करतात आणि अल्लाहच्या मार्गापासून रोखतात आणि जे लोक सोने-चांदीचे खजिने बाळगतात आणि अल्लाहच्या मार्गात खर्च करीत नाही, त्यांना कठोर शिक्षा-यातनेची खबर ऐकवा.
Tevbe 9:35
३५. ज्या दिवशी त्या खजिन्याला जहन्नमच्या आगीत तापविले जाईल, मग त्याद्वारे त्यांचे कपाळ आणि कूस- बगल आणि पाठींना डागले जाईल (त्यांना सांगितले जाईल) हेच ते, ज्याला तुम्ही आपल्यासाठी जमवून ठेवले होते, तर आपल्या या साठवून ठेवलेल्या खजिन्यांची गोडी चाखा.
Tevbe 9:36
३६. महिन्यांची गणना अल्लाहच्या जवळ, अल्लाहच्या ग्रंथात बारा आहे, त्याच दिवसापासून, जेव्हापासून आकाशांना आणि जमिनीला त्याने निर्माण केले आहे. त्यांच्यापैकी चार महिने आदर आणि प्रतिष्ठेचे आहेत. हाच पवित्र धर्म आहे. तुम्ही या महिन्यांच्या काळात आपल्या प्राणांवर अत्याचार करू नका आणि तु्ही सर्व अनेकेश्वरवाद्यांशी जिहाद करा जसे ते तुम्हा सर्वांशी लढतात आणि लक्षात ठेवा की अल्लाह भय राखून कर्म करणाऱ्यांच्या सोबत आहे.
Tevbe 9:37
३७. महिन्यांना पुढे मागे करणे, कुप्र (अधर्म) ला वाढविणे आहे. त्याद्वारे त्यांना मार्गभ्रष्ट केले जाते, जे काफिर आहेत, एका वर्षाला हलाल करून घेतात आणि एका वर्षाला हराम ठरवितात की अल्लाहने जे हराम ठरविले आहे, त्याच्या गणनेत बरोबरीने करून घ्यावे, मग ज्याला हराम केले आहे, त्याला हलाल ठरवावे. त्यांची वाईट कर्मे त्यांना चांगली दाखविली गेली आहेत आणि अल्लाह काफिरांना मार्गदर्शन करीत नाही.
Tevbe 9:38
३८. हे ईमान राखणाऱ्यांनो! तुम्हाला झाले तरी काय की जेव्हा तुम्हाला सांगितले जाते की चला, अल्लाहच्या मार्गात देशत्याग करा, तर तुम्ही जमिनीला बिलगता. काय तुम्ही आखिरतऐवजी ऐहिक जीवनावर राजी झालात? ऐका या जगाचे जीवन आखिरतच्या तुलनेत अतिशय लहान आहे.
Tevbe 9:39
३९. जर तुम्ही देशत्याग (हिजरत) केला नाही तर सर्वश्रेष्ठ अल्लाह तुम्हाला दुःखदायक शिक्षा देईल आणि तुमच्याखेरीज दुसऱ्या लोकांना बदलून आणील. तुम्ही सर्वश्रेष्ठ अल्लाहला कोणतेही नुकसान पोहचवू शकत नाही आणि अल्लाह सर्व काही करण्यास समर्थ आहे.
Tevbe 9:40
४०. जर तुम्ही पैगंबर (मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ची मदत न कराल तर अल्लाहनेच त्यांची मदत केली अशा वेळी जेव्हा काफिर लोकांनी त्यांना (देशा) बाहेर घालविले होते. दोनपैकी दुसरा जेव्हा ते दोघे गुफेत होते, जेव्हा ते आपल्या साथीदारास सांगत होते, चिंता करू नका अल्लाह आमच्या सोबत आहे. तेव्हा अल्लाहनेच आपल्यातर्फे शांती-समाधान उतरवून अशा सैन्यांद्वारे त्यांना मदत पोहचिवली, ज्यांना तुम्ही पाहिलेसुद्धा नाही. त्याने काफिरांचा बोल खाली पाडला आणि मोठा व उत्तम बोल तर अल्लाहचाच आहे. सर्वश्रेष्ठ अल्लाह वर्चस्वशाली आणि हिकमत बाळगणारा आहे.
Tevbe 9:41
४१. निघा, उठा हलक्या अवस्थेत असाल तरीही आणि भारी अवजड असाल तरीही आणि अल्लाहच्या मार्गात आपल्या तन-मन-धनाने जिहाद करा. हेच तुमच्याकरिता चांगले आहे जर तुम्ही जाणत असाल.
Tevbe 9:42
४२. जर त्वरित प्राप्त होणारी धन-संपदा असती, आणि हलकासा प्रवास असता तर हे अवश्य तुमच्या मागे निघाले असते, परंतु त्यांना तर लांब अंतराचा प्रवास मोठा कठीण वाटला आणि आता तर हे अल्लाहची शपथ घेऊन सांगतील की आमच्या अंगी जर शक्ती-सामर्थ्य राहिले असते तर आम्ही अवश्य तुमच्यासोबत निघालो असतो. ते आपल्या प्राणांना स्वतःच विनाशाकडे नेत आहेत. त्यांच्या खोटेपणाचे खरे ज्ञान अल्लाहला आहे.
Tevbe 9:43
४३. अल्लाह तुम्हाला क्षमा करो, तुम्ही त्यांना परवानगी का दिली, याविना की तुमच्या समोर सच्चे व प्रामाणिक लोक स्पष्टपणे जाहीर व्हावेत आणि तुम्ही खोट्या लोकांनाही जाणून घ्यावे.
Tevbe 9:44
४४. अल्लाहवर आणि कयामत (प्रलया) च्या दिवसावर ईमान आणि दृढ विश्वास राखणारे लोक तर धनाने व प्राणाने जिहाद करण्यापासून थांबून राहण्याची परवानगी तुमच्याकडे कधीही मागणार नाहीत आणि सर्वश्रेष्ठ अल्लाह, दुष्कर्मांपासून दूर राहणाऱ्या लोकांना चांगल्या प्रकारे जाणतो.
Tevbe 9:45
४५. ही परवानगी तर तुमच्याजवळ तेच लोक मागतात, ज्यांचे ना अल्लाहवर ईमान आहे, ना आखिरच्या दिवसावर अटळ विश्वास आहे, ज्यांची मने संशयग्रस्त आहेत आणि ते आपल्या संशयातच भटकत आहेत.
Tevbe 9:46
४६. जर त्यांचा इरादा (जिहादकरिता) निघण्याचा असता तर त्यांनी या प्रवासाकरिता साधनांची तयारी केली असती, परंतु अल्लाहला त्यांचे उठणे प्रिय नव्हते, यास्तव त्यांनी काही करण्यापासून रोखले आणि त्यांना सांगितले गेले की तुम्ही बसून राहणाऱ्यांसोबत बसूनच राहा.
Tevbe 9:47
४७. जर हे तुमच्याच सोबत निघालेही असते तर तुमच्यासाठी उपद्रवाखेरीज दुसऱ्या कोणत्याही गोष्टीची वाढ केली नसती, किंबहुना तुमच्या दरम्यान उत्पात माजविण्यासाठी धावपळ केली असती आणि तुमच्यात फूट पाडण्याची संधी शोधत राहिले असते, त्यांना मानणारे स्वतः तुमच्यात हजर आहेत आणि सर्वश्रेष्ठ अल्लाह अत्याचारी लोकांना चांगल्या प्रकारे जाणतो.
Tevbe 9:48
४८. हे तर यापूर्वीही फूट पाडण्याची संधी शोधत राहिले आणि तुमच्यासाठी कार्यात उलटफेर करीत राहिले, येथपर्यंत की सत्य घेऊन पोहोचले आणि अल्लाहचा आदेश प्रभावी झाला, तरीदेखील ते लोक वाईट मानतच राहिले.
Tevbe 9:49
४९. त्यांच्यापैकी कोणी म्हणतो की मला आदेश द्या, मला संकटात टाकू नका. जाणून असा की ते संकटग्रस्त झाले आहेत आणि निःसंशय जहन्नम काफिरांना घेरून टाकणारी आहे.
Tevbe 9:50
५०. तुम्हाला जर एखादी भलाई प्राप्त झाली तर त्यांना वाईट वाटते, आणि जर कष्ट यातना पोहोचली तर म्हणतात, आम्ही तर आपली व्यवस्था पहिल्यापासून ठीकठाक करून घेतली होती, मग खूप तोऱ्याने ऐट दाखवित परत जातात.
Tevbe 9:51
५१. तुम्ही सांगा, आम्हाला त्याखेरीज कोणतीही गोष्ट पोहोचू शकत नाही, जी अल्लाहने आमच्यासाठी लिहून ठेवली आहे. तो आमचा स्वामी आहे आणि (तुम्ही सांगा) ईमानधारकांनी अल्लाहवरच पूर्ण भरोसा ठेवला पाहिजे.
Tevbe 9:52
५२. तुम्ही सांगा, तुम्ही आमच्याबाबत ज्या गोष्टींच्या प्रतिक्षेत आहात, ती दोन चांगल्या गोष्टींपैकी एक आहे आणि आम्ही तुमच्याबाबत या गोष्टीच्या प्रतिक्षेत आहोत की एकतर अल्लाहने तुम्हाला आपल्यातर्फे एखादी शिक्षा द्यावी किंवा आमच्या हातून, तेव्हा एका बाजूला तुम्ही प्रतिक्षा करा, दुसऱ्या बाजूला आम्ही तुमच्यासोबत प्रतिक्षा करीत आहोत.
Tevbe 9:53
५३. तुम्ही सांगा की तुम्ही खुशीने खर्च करा किंवा नाखुशीने, कबूल तर कधीही केला जाणार नाही. निःसंशय तुम्ही दुराचारी लोक आहात.
Tevbe 9:54
५४. त्यांचे खर्च करणे कबूल न होण्याचे कारण याखेरीज कोणतेही नाही की हे अल्लाह आणि त्याच्या पैगंबराचे अवज्ञाकारी आहेत आणि मोठ्या सुस्तीने नमाजला येतात आणि वाईट मनाने खर्च करतात.
Tevbe 9:55
५५. यास्तव त्यांची धन-संपत्ती आणि संततीने तुम्हाला आश्चर्यात टाकू नये. अल्लाह हेच इच्छितो की त्यांना या जगाच्या जीवनातच शिक्षा द्यावी आणि त्यांच्या इन्कार करण्याच्या अवस्थेतच त्यांचा प्राण निघावा.
Tevbe 9:56
५६. आणि हे अल्लाहची शपथ घेऊन सांगतात की हे तुमच्या गटाचे लोक आहेत, वास्तविक ते तुमच्या गटाचे नाहीत, गोष्ट केवळ एवढीच की हे भित्रे लोक आहेत.
Tevbe 9:57
५७. जर यांना एखादे सुरक्षित स्थान किंवा एखादी गुफा किंवा कोणतीही घुसून बसण्याची जागा मिळाली तर लगेच धाव घेत पळत सुटतील.
Tevbe 9:58
५८. त्यांच्यात तेदेखील आहेत, जे दानाच्या धनाच्या वाटणीबाबत तुमच्यावर आरोप ठेवतात, जर त्यातून त्यांना मिळाल्यास आनंद होतो आणि जर त्यातून काही न मिळाले तर त्वरित नाराज होऊ लागतात.
Tevbe 9:59
५९. जर हे लोक अल्लाह आणि त्याच्या पैगंबरानी दिलेल्यावर खूश राहिले असते आणि म्हणाले असते की अल्लाह आम्हाला पुरेसा आहे, अल्लाह आपल्या कृपेने आम्हाला देईल आणि त्याचा पैगंबरही. आम्ही तर अल्लाहकडूनच अपेक्षा राखणारे आहोत.
Tevbe 9:60
६०. दान केवळ फकीरांकरिता आहे आणि गरीबांकरिता आणि त्यांचे काम करणाऱ्यांकरिता आणि त्या लोकांकरिता ज्यांची मनधरणी केली जात असेल आणि गुलाम मुक्त करण्याकरिता आणि कर्जदार लोकांकरिता, आणि अल्लाहच्या मार्गात आणि प्रवाशांकरिता, अनिवार्य कर्तव्य आहे अल्लाहतर्फे आणि अल्लाह सर्वज्ञ हिकमतशाली आहे.
Tevbe 9:61
६१. आणि त्यांच्यात असेदेखील आहेत, जे पैगंबराला दुःख यातना पोहचवितात आणि म्हणतात की हलक्या कानाचा आहे (तुम्ही) सांगा, की तो कान तुमच्या भलाईसाठी आहे. तो अल्लाहवर ईमान राखतो आणि ईमानधारकांच्या बोलण्यावर विश्वास ठेवतो आणि तुमच्यापैकी जे ईमानधारक आहेत, हे त्यांच्यासाठी दया कृपा आहेत आणि अल्लाहचे रसूल यांना जे लोक दुःख यातना पोहचवितात, त्यांच्यासाठी दुःखदायक अज़ाब (शिक्षा-यातना) आहे.
Tevbe 9:62
६२. ते केवळ तुम्हाला खूश करण्यासाठी तुमच्यासमोर अल्लाहची शपथ घेतात, वस्तुतः हे ईमान राखणारे असते तर अल्लाह आणि त्याचे रसूल (पैगंबर) खूश केले जाण्यास अधिक पात्र होते.
Tevbe 9:63
६३. काय हे नाही जाणत की जो कोणी अल्लाहचा आणि त्याच्या पैगंबराचा विरोध करील, त्याच्यासाठी निश्चितच जहन्नमची आग आहे, जिच्यात ते नेहमी राहतील. हा फार मोठा अपमान आहे.
Tevbe 9:64
६४. मुनाफिक लोकांना अर्थात ढोंगी मुसलमानांना (नेहमी) हे भय वाटत असते की कदाचित त्यांच्यावर (ईमानधारकांवर) एखादी आयत न अवतरित व्हावी, जी त्यांच्या मनातल्या गोष्टी त्यांना सांगून टाकील. तुम्ही सांगा की तुम्ही थट्टा मस्करी करीत राहा. निःसंशय सर्वश्रेष्ठ अल्लाह ते जाहीर करणारा आहे, ज्यापासून तुम्ही भयभीत आहात.
Tevbe 9:65
६५. जर तुम्ही विचाराल तर साफ म्हणतील की आम्ही तर असेच आपसात थट्टा विनोद करीत होतो. त्यांना सांगा की काय अल्लाह त्याच्या आयती आणि त्याचा रसूल एवढेच तुमच्या थट्टा-मस्करीकरिता बाकी राहिलेत?
Tevbe 9:66
६६. तुम्ही बहाणे बनवू नका. निःसंशय तुम्ही आपल्या ईमान राखल्यानंतर काफिर (इन्कारी) झाले. जर आम्ही तुमच्यापैकी काही लोकांना माफ जरी केले तरी काही लोकांना त्यांच्या अत्याचाराची सक्त सजा देणारच.
Tevbe 9:67
६७. सर्वच मुनाफिक (दांभिक) पुरुष आणि स्त्रिया आपसात सारखेच आहेत. ते वाईट गोष्टींचा आदेश देतात आणि भल्या गोष्टींपासून रोखतात आणि आपली मूठ बंद ठेवतात, हे अल्लाहला विसरले, अल्लाहनेही त्यांचा विसर पाडला. निःसंशय मुनाफिक (दुतोंडी) लोकच दुराचारी आहेत.
Tevbe 9:68
६८. सर्वश्रेष्ठ अल्लाहने या मुनाफिक पुरुष-स्त्रियांशी आणि काफिरांशी जहन्नमच्या आगीचा वायदा केलेला आहे, जिथे ते नेहमी राहतील तेच त्यांच्यासाठी पुरेसे आहे. त्यांचा अल्लाहतर्फे धिःक्कार आहे आणि त्यांच्यासाठी कायमस्वरूपी शिक्षा यातना आहे.
Tevbe 9:69
६९. तुमच्यापूर्वी होऊन गेलेल्या लोकांप्रमाणे, जे तुमच्यापेक्षा शूर आणि धन-संपत्ती व संतती जास्त बाळगत होते, तर त्यांनी आपला धार्मिक भाग उचलला, मग तुम्हीही आपला हिस्सा उचलत आहात. ज्याप्रमाणे तुमच्यापूर्वीचे लोक आपल्या हिश्यांद्वारे लाभान्वित झाले आणि तुम्हीदेखील त्याचप्रमाणे मस्करीची गोष्ट केली, जशी त्यांनी केली होती. त्यांची कर्मे या जगात आणि आखिरतमध्ये वाया गेलीत आणि हेच लोक तोट्यात आहेत.
Tevbe 9:70
७०. काय त्यांना आपल्यापूर्वी होऊन गेलेल्या लोकांची खबर नाही पोहोचली? नूह आणि आद आणि समूदचे जनसमूह आणि इब्राहीमचा जनसमूह आणि मदयनचे रहिवाशी आणि उलटून पालथ्या घातलेल्या वस्त्यांच्या लोकांची. त्यांच्याजवळ पैगंबर स्पष्ट निशाण्या घेऊन पोहोचले तेव्हा सर्वश्रेष्ठ अल्लाह असा नव्हता की त्यांच्यावर अत्याचार करील. उलट त्यांनी स्वतःच आपल्यावर अत्याचार करून घेतला.
Tevbe 9:71
७१. ईमानधारक पुरुष आणि स्त्रिया आपसात एकमेकांचे (सहाय्यक आणि) मित्र आहेत. ते चांगल्या गोष्टींचा आदेश देतात, आणि वाईट गोष्टींपासून रोखतात. नमाज नियमितपणे पढतात. जकात अदा करतात. अल्लाह आणि त्याच्या पैगंबरांचे म्हणणे मान्य करतात. अशाच लोकांवर अल्लाह लवकरच दया कृपा करील. निःसंशय अल्लाह वर्चस्वशाली, हिकमत बाळगणारा आहे.
Tevbe 9:72
७२. या ईमानधारक पुरुष आणि स्त्रियांशी अल्लाहने त्या जन्नतींचा वायदा केला आहे, ज्यांच्याखाली प्रवाह वाहत आहेत, जिथे ते नेहमीकरिता राहतील, आणि त्या पाक स्वच्छ घराचा, जे त्या अविनाशी जन्नतमध्ये आहे आणि अल्लाहची प्रसन्नता सर्वांत महान आहे. हीच फार मोठी सफलता आहे.
Tevbe 9:73
७३. हे नबी! काफिरांशी आणि मुनाफिक लोकांशी जिहाद करीत राहा आणि त्यांच्यावर सक्ती करा. त्यांचे खरे ठिकाण जहन्नम आहे. जे अतिशय वाईट ठिकाण आहे.
Tevbe 9:74
७४. हे अल्लाहची शपथ घेऊन सांगतात की त्यांनी असे म्हटले नाही. वास्तिवक सत्याचा इन्कार त्यांनी आपल्या तोंडानी केलेला आहे. आणि हे इस्लामचा स्वीकार केल्यानंतरही काफिर झालेत आणि यांनी त्या कामाचा इरादाही केला आहे, ज्याला ते प्राप्त करू शकले नाहीत. हे केवळ याच गोष्टीचा सूड घेत आहेत की त्यांना अल्लाहने आपल्या कृपेने आणि याच्या पैगंबराने धनवान केले जर हे अजूनही तौबा (पश्चात्ताप) करून घेतील तर हे त्यांच्या हक्कात चांगले आहे आणि जर तोंड फिरवतील तर अल्लाह त्यांना या जगात आणि आखिरतमध्ये दुःखदायक शिक्षा देईल आणि संपूर्ण धरतीत त्यांना कोणी मित्र आणि मदत करणारा लाभणार नाही.
Tevbe 9:75
७५. यांच्यात असेदेखील आहेत, ज्यांनी अल्लाहशी वायदा केला होता की जर तो आम्हाला आपल्या कृपेने धन प्रदान करील तर आम्ही अवश्य दान करू आणि पूर्णतः नेक सदाचारी लोकांपैकी होऊ.
Tevbe 9:76
७६. परंतु जेव्हा अल्लाहने आपल्या कृपेने त्यांना दिले तेव्हा हे त्यात कंजूसपणा करू लागले आणि टाळाटाळ करून तोंड फिरविले.
Tevbe 9:77
७७. तेव्हा याची शिक्षा म्हणून अल्लाहने त्यांच्या मनात फूटीरता टाकली अल्लाहच्या भेटीच्या दिवसपर्यंत कारण त्यांनी अल्लाहशी केलेल्या वायद्याचा भंग केला, आणि खोटे बोलत राहिले.
Tevbe 9:78
७८. काय ते हे नाही जाणत की अल्लाहला त्यांच्या मनातला गुप्त भेद आणि त्यांच्या कानगोष्टी सर्व माहीत आहे आणि अल्लाह सर्व लपलेल्या गोष्टींना जाणणारा आहे.
Tevbe 9:79
७९. जे लोक अशा ईमानधारकांवर आरोप ठेवता, जे मोकळ्या मनाने दान करतात आणि त्या लोकांवर, ज्यांना आपल्या मेहनतीखेरीज काहीच साध्य नाही, तर हे त्यांची थट्टा उडवितात, अल्लाहदेखील त्यांची थट्टा उडवितो आणि याच लोकांसाठी मोठी सक्त शिक्षा यातना (अज़ाब) आहे.
Tevbe 9:80
८०. तुम्ही त्यांच्यासाठी तौबा (क्षमा याचना) करा किंवा न करा, जर तुम्ही सत्तर वेळाही यांच्यासाठी तौबा कराल तरीदेखील अल्लाह त्यांना कदापि माफ करणार नाही. कारण त्यांनी अल्लाह आणि त्याच्या पैगंबराचा इन्कार केला आहे आणि अशा दुराचारी लोकांना अल्लाह मार्गदर्शन करीत नाही.
Tevbe 9:81
८१. मागे राहून जाणारे लोक, अल्लाहचे रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) यांच्याविरूद्ध आपल्या बसून राहण्यावर खूश आहेत. त्यांनी अल्लाहच्या मार्गात आपल्या धनाने व प्राणाने जिहाद करणे अप्रिय जाणले आणि ते म्हणाले की या भयंकर उन्हात निघू नका. त्यांना सांगा की जहन्नमची आग याहून अतिशय तापदायक आहे. यांनी हे समजून घेतले असेल तर बरे झाले असते.
Tevbe 9:82
८२. तेव्हा त्यांनी हसणे फार कमी आणि रडणे जास्त केले पाहिजे. आपल्या या कृतकर्मांच्या मोबदल्यात.
Tevbe 9:83
८३. तेव्हा जर सर्वश्रेष्ठ अल्लाह तुम्हाला त्याच्या एखाद्या समूहाकडे परतवून नेईल मग हे तुमच्याशी लढाईच्या मैदानात जाण्याची अनुमती मागतील तेव्हा तुम्ही सांगा की तुम्ही माझ्यासोबत कधीही निघू शकत नाही आणि ना माझ्यासह शत्रुशी लढू शकता. तुम्ही पहिल्या खेपेलाच बसून राहणे पसंत केले होते, तेव्हा आताही तुम्ही मागे राहून जाणाऱ्यांमध्येच बसून राहा.
Tevbe 9:84
८४. आणि यांच्यापैकी कोणी मरण पावला तर त्याच्या जनाजाची नमाज तुम्ही कधीही पढू नका आणि ना त्याच्या कबरीवर जाऊन उभे राहा, हे अल्लाह आणि त्याच्या पैगंबराचा इन्कार करणारे लोक आहेत आणि मरेपर्यंत दुराचारीच राहिले.
Tevbe 9:85
८५. आणि तुम्हाला त्यांची धन-संपत्ती आणि संतती काहीच भली वाटू नये. सर्वश्रेष्ठ अल्लाह हेच इच्छितो की त्यांना या गोष्टीद्वारे या जगात सजा द्यावी आणि हे आपला जीव निघेपर्यंत काफिर (कृतघ्न) च राहिले.
Tevbe 9:86
८६. आणि जेव्हा एखादी सूरह (पवित्र कुरआनातील अध्याय) अवतरित केली जाते की अल्लाहवर ईमान राखा आणि त्याच्या पैगंबरासह मिळून जिहाद करा, तेव्हा त्यांच्यापैकी धनवान लोकांचा एक गट तुमच्याजवळ येऊन अनुमती घेतो की आम्हाला तर बसून राहणाऱ्यांमध्येच सोडून द्या.
Tevbe 9:87
८७. हे तर घरात राहणाऱ्या स्त्रियांना साथ देण्यावर राजी झाले, आणि त्यांच्या हृदयांवर मोहर लावली गेली. आता ते कसलेही समज उमज बाळगत नाही.१
———
(१) हृदयांवर मोहर लावली जाणे हे सतत अपराध केल्यामुळे होते, ज्याबाबतचे स्पष्टीकरण या आधी केले गेले आहे. अशाने मनुष्य विचार-चिंतन व आकलनाच्या शक्तीपासून वंचित होतो.
Tevbe 9:88
८८. परंतु स्वतः पैगंबर आणि त्यांच्यासोबतचे ईमानधारक आपल्या धनाने व प्राणाने जिहाद करतात. त्यांच्याचसाठी भलाई आहे. आणि हेच लोक सफलता प्राप्त करणारे आहेत.
Tevbe 9:89
८९. याच लोकांसाठी सर्वश्रेष्ठ अल्लाहने ती जन्नत तयार केली आहे, जिच्याखाली प्रवाह वाहत आहेत. ज्यात ते नेहमी राहतील आणि हीच फार मोठी सफलता आहे. १
———
(१) ईमानधारक असल्याचे ढोंग करणाऱ्या त्या मुनाफिकांच्या विरूद्ध सच्चा ईमानधारकांचे चारित्र्य असे की तन मन धनाने ते अल्लाहच्या मार्गात जिहाद करतात, मग ते आपल्या प्राणांचीही पर्वा करीत नाही ना धनाची. त्यांच्या दृष्टीने अल्लाहचा आदेश सर्वांत मोठा आहे. भलाई त्यांच्याचकरिता आहे, अर्थात आखिरतची भलाई आणि जन्नतचे सुख काहींच्या मते या जगाचा व आखिरतचा दोन्हींचा फायदा. हेच लोक सफल आणि उच्च पदावर बसण्यायोग्य ठरतील.
Tevbe 9:90
९०. ग्रामीण भागातील अशिक्षित, बहाणा करणारे लोक हजर झाले की त्यांना अनुमती दिली जावी आणि ते बसून राहावेत ज्यांनी अल्लाहशी आणि त्याच्या पैगंबराशी असत्य कथन केले होते. आता तर त्यांच्यात जेवढे काफिर (अधर्मी) आहेत त्यांना दुःखदायक अज़ाब पोहचल्याविना राहणार नाही.
Tevbe 9:91
९१. कमजोर दुबळे आणि आजारी असलेल्यांवर आणि अशा लोकांवर जे खर्च करण्यास असमर्थ आहेत दोष नाही, जोपर्यंत ते अल्लाह आणि त्याच्या पैगंबराचे शुभचिंतक असतील. अशा नेक सदाचारी लोकांवर कसलीही कारवाई केली जाऊ नये आणि अल्लाह मोठा माफ करणारा मेहरबान आहे.
Tevbe 9:92
९२. आणि ना त्या लोकांवर जे तुमच्याजवळ येतात की तुम्ही त्यांच्यासाठी वाहनाची व्यवस्था करून द्यावी, तेव्हा तुम्ही त्यांना उत्तर देता की मला तुमच्या वाहनासाठी काहीच आढळत नाही, तेव्हा ते दुःखाने रडत, अश्रू ढाळीत परत जातात की त्यांना खर्च करण्यासाठी काहीही प्राप्त नाही.१
———
(१) हे मुसलमानांच्या एका समूहाचे वर्णन आहे, अर्थात त्या लोकांचे ज्यांच्याजवळ स्वतःचे वाहन नव्हते आणि पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम यांनीही वाहन उपलब्ध करून देण्याबाबत आपली विवशता जाहीर केली. यावर त्यांना एवढे दुःख झाले की दुःखातिरेकाने त्यांच्या डोळ्यांतून अश्रू वाहू लागले. सर्वश्रेष्ठ अल्लाह प्रत्येक उघड आणि लपलेल्या गोष्टीला जाणणारा आहे, त्यांना जिहादमध्ये भाग घेण्यापासून वेगळे केले. किंबहुना हदीसमध्ये उल्लेखित आहे की पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम यांनी त्या अगतिक लोकांविषयी, युद्धात सहभागी होणाऱ्या लोकांना फर्माविले, ‘‘.....तुमच्या मागे मदीनेत काही लोक असेही आहेत की तुम्ही ज्या घाटीला पार करता, आणि ज्या मार्गावर चालता, तुमच्यासह ते मोबदला प्राप्त करण्यात समानरित्या सहभागी आहेत. निकटच्या अनुयायींनी विचारले, हे कसे असू शकते, वास्तविक ते मदीनेत बसले आहेत. पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम यांनी फर्माविले, ‘‘सबबीने त्यांना तिथे रोखून ठेवले आहे.’’ (सहीह बुखारी, किताबुल जिहाद आणि सहीह मुस्लिम नं. १५१८)
Tevbe 9:93
९३. निःसंशय, आरोप अशा लोकांवर आहे जे धनवान असूनही तुमच्याजवळ अनुमती मागतात. स्त्रियांसोबत घरी बसून राहण्यावर हे खूश आहेत आणि अल्लाहने त्यांच्या हृदयांवर मोहर लावली आहे. ज्यामुळे ते अजाण बनले आहेत.
Tevbe 9:94
९४. जेव्हा तुम्ही त्यांच्याजवळ जाल तेव्हा तुमच्यासमोर सबबी मांडतील. (हे पैगंबर!) सांगा की बहाणे बनवू नका. आम्ही तुमच्यावर विश्वास ठेवणार नाही. अल्लाहने तुमच्या करतुतींशी आम्हाला अवगत केले आहे आणि अल्लाह आणि त्याचा पैगंबर तुमचे आचरण पाहतील, मग तुम्ही अदृश्य आणि दृश्य गोष्टी जाणणाऱ्याकडे परतविले जाल, मग तो तुम्हाला सांगेल की जे काही तुम्ही करीत होते.
Tevbe 9:95
९५. जेव्हा तुम्ही त्यांच्याजवळ परत जाल तेव्हा ते तुमच्यासमोर अल्लाहची शपथ घेतील, यासाठी की तुम्ही त्यांना त्यांच्या दशेवर सोडावे, यास्तव तुम्ही त्यांना त्यांच्या दशेवर सोडा. निश्चितच ते मोठे अपवित्र आहेत आणि त्यांचे ठिकाण नरक (जहन्नम) आहे, त्यांच्या त्या कर्मांच्या मोबदल्यात, जे ते करीत होते.
Tevbe 9:96
९६. हे तुमच्याजवळ अशासाठी शपथ घेतील की तुम्ही त्यांच्याशी राजी व्हावे. तेव्हा जर तुम्ही त्यांच्याशी राजीही झालात तर अल्लाह अशा दुराचारी लोकांशी राजी होत नाही.
Tevbe 9:97
९७. ग्रामीण लोक इन्कार आणि वरकरणीपणात खूपच सक्त असतात, आणि त्यांनी असे असलेही पाहिजे की त्यांना त्या आदेशांचे ज्ञान नसावे, जे आदेश अल्लाहने आपल्या पैगंबरावर अवतरित केले आहेत आणि अल्लाह खूप खूप ज्ञान बाळगणारा, मोठा हिकमतशाली आहे.
Tevbe 9:98
९८. आणि त्या ग्रामीण लोकांपैकी काही असे आहेत की जे काही खर्च करतात त्याला सजा समजतात आणि तुम्ही ईमानधारकांसाठी वाईट दिवसाच्या प्रतिक्षेत असतात. वाईट प्रसंग तर त्याच्यावरच येणार आहे आणि अल्लाह ऐकणारा आणि जाणणारा आहे.
Tevbe 9:99
९९. आणि ग्रामीणांपैकी काही असेही आहेत, जे अल्लाहवर आणि कयामतच्या दिवसावर ईमान राखतात आणि जे काही खर्च करतात त्याला अल्लाहचे सान्निध्य आणि पैगंबरांच्या दुआ- प्रार्थनेचे साधन मानतात. लक्षात ठेवा की त्यांचे हे खर्च करणे, निश्चित त्यांच्यासाठी, अल्लाहची निकटता प्राप्त करण्याचे साधन आहे. त्यांना अल्लाह अवश्य आपल्या कृपा-छत्रात दाखल करील. अल्लाह मोठा माफ करणारा, दया करणारा आहे.
Tevbe 9:100
१००. आणि हे मुहाजिर (मक्केहून मदीना येथे आलेले) आणि अन्सार (मदीना येथील मूळ रहिवाशी) प्रथम आहेत आणि जेवढे लोक, कसल्याही गरजेविना त्यांचे अनुयायी आहेत अल्लाह त्या सर्वांशी राजी झाला आणि ते सर्व अल्लाहशी राजी झाले आणि अल्लाहने त्यांच्यासाठी अशा बागांची व्यवस्था करून ठेवली आहे ज्यांच्याखाली प्रवाह वाहत आहेत, ज्यात ते सदैव राहतील. ही फार मोठी सफलता आहे.
Tevbe 9:101
१०१. आणि काही तुमच्या जवळपासच्या ग्रामीणांपैकी आणि मदीनेच्या वस्तीत असे ढोंगी ईमानधारक आहेत, जे दांभिकतेवर अटळ आहेत. तुम्ही त्यांना नाही जाणत, त्यांना आम्ही जाणतो. आम्ही त्यांना दुहेरी शिक्षा देऊ, मग ते फार मोठ्या शिक्षा- यातनेकडे पाठविले जातील.
Tevbe 9:102
१०२. आणि काही दुसरे लोक आहेत, जे आपल्या चुका मान्य करतात, ज्यांनी मिश्र स्वरूपाची कर्मे केलीत. काही चांगली तर काही वाईट. अल्लाहकडून आशा आहे की त्यांची तौबा (क्षमा-याचना) कबूल करील. निःसंशय, अल्लाह मोठा माफ करणारा आणि दया करणारा आहे.
Tevbe 9:103
१०३. तुम्ही त्यांच्या धनातून सदका (दान) स्वीकार करा, ज्याद्वारे तुम्ही त्यांना स्वच्छ- शुद्ध कराल आणि त्यांच्यासाठी दुआ- प्रार्थना करा, निःसंशय तुमची दुआ त्यांच्यासाठी समाधानाचे साधन आहे, आणि अल्लाह चांगल्या प्रकारे ऐकतो, चांगल्या प्रकारे जाणतो.
Tevbe 9:104
१०४. काय त्यांना हे माहीत नाही की अल्लाहच आपल्या दासांची तौबा (क्षमा-याचना) कबूल करतो आणि तोच दान कबूल करतो आणि हे की अल्लाहच तौबा कबूल करण्यात आणि दया करण्यात परिपूर्ण आहे.
Tevbe 9:105
१०५. आणि सांगा की तुम्ही कर्म करीत राहा. तुमचे कर्म अल्लाह स्वतः पाहील आणि त्याचा पैगंबर आणि ईमान राखणारे (ही पाहतील) आणि निश्चितच तुम्हाला अशाजवळ जायचे आहे जो सर्व लपलेल्या व उघड गोष्टी जाणणारा आहे. यासाठी की तो तुम्हाला तुम्ही केलेले प्रत्येक कर्म दाखवून देईल.
Tevbe 9:106
१०६. आणि काही दुसरे लोक आहेत, ज्यांचा मामला अल्लाहचा आदेश येईपर्यंत स्थगित आहे. एक तर तो त्यांना सजा देईल किंवा त्यांची क्षमा-याचना कबूल करील आणि अल्लाह मोठा जाणणारा, फार हिकमतशाली आहे.
Tevbe 9:107
१०७. आणि काही असे आहेत, ज्यांनी या हेतूने मस्जिद बनविली की नुकसान पोहचवावे आणि इन्कारपूर्ण गोष्टी कराव्यात आणि ईमानधारकांमध्ये फूट पाडावी, आणि अशा माणसाच्या राहण्याची व्यवस्था करावी, जो याच्या पूर्वीपासून अल्लाह आणि त्याच्या पैगंबराचा विरोधक आहे, आणि शपथ घेतील की भलाईखेरीज आमचा कोणताही हेतु नाही आणि अल्लाह साक्षी आहे की ते पूर्णतः खोटे आहेत.
Tevbe 9:108
१०८. आपण त्या मस्जिद कधीही उभे न राहावे, परंतु ज्या मस्जिदीचा पाया पहिल्या दिवसापासूनच तकवा (अल्लाहचे भय राखण्या) वर ठेवला गेला असेल, तर ती यायोग्य आहे की तुम्ही तिच्यात उभे राहावे. यात असे लोक आहेत की ते अधिक स्वच्छ-शुद्ध (पाक) होणे चांगले समजतात, आणि सर्वश्रेष्ठ अल्लाह अधिक पाक राहणाऱ्यांना प्रिय राखतो.
Tevbe 9:109
१०९. मग काय असा मनुष्य अधिक चांगला आहे, ज्याने आपल्या इमारतीचा पाया अल्लाहचे भय राखण्यावर आणि अल्लाहची प्रसन्नता प्राप्त करण्यावर ठेवला असेल किंवा तो मनुष्य, ज्याने आपल्या घराचा पाया एखाद्या उतार असलेल्या दरीच्या (घाटाच्या) किनाऱ्यावर, जी कोसळण्याच्या बेतात असावी, त्यावर रचला असेल; मग तो त्यासह जहन्नमच्या आगीत जाऊन पडावा आणि सर्वश्रेष्ठ अल्लाह अशा अत्याचारींना मार्ग दाखवित नाही.
Tevbe 9:110
११०. त्यांचे हे घर, जे त्यांनी बनविले आहे, नेहमी त्यांच्या मनाला संशयामुळे (काट्यासरखे) बोचत राहील. परंतु हे की त्यांची हृदयेच क्षत-विक्षत व्हावीत, आणि अल्लाह ज्ञान बाळगणारा आणि हिकमतशाली आहे.
Tevbe 9:111
१११. निःसंशय, अल्लाहने ईमानधारकांकडून त्यांच्या प्राणांना व धनांना जन्नतच्या मोबदल्यात खरेदी केले आहे. ते अल्लाहच्या मार्गात लढतात ज्यात ते ठार करतात आणि ठार केले जातात, याबाबत सच्चा वायदा आहे तौरात, इंजील आणि कुरआनामध्ये आणि अल्लाहपेक्षा जास्त आपल्या वायद्याचे पालन कोण करू शकतो? यास्तव तुम्ही आपल्या या विकण्यावर, जो (सौदा) तुम्ही करून घेतलात, आनंदित व्हा आणि ही फार मोठी सफलता आहे.
Tevbe 9:112
११२. हे असे लोक होते, जे तौबा (क्षमा-याचना) करणारे, अल्लाहची उपासना करणारे, त्याची स्तुती-प्रशंसा करणारे, रोजा (उपवास-व्रत) राखणारे (किंवा सत्य मार्गावर चालणारे) रुकूअ (झुकणारे) सजदा करणारे (माथा टेकणारे), चांगल्या गोष्टींचा उपदेश करणारे, आणि वाईट गोष्टींपासून रोखणारे आणि अल्लाहच्या नियमांना ध्यानात राखणारे आहेत आणि अशा ईमान राखणाऱ्यांना शुभ समाचार द्या.
Tevbe 9:113
११३. पैगंबर आणि इतर ईमानधारकांना अनुमती नाही की अनेकेश्वरवाद्यांकरिता माफीची दुआ- प्रार्थना करावी, मग ते नातेवाईक का असेनात. हा आदेश स्पष्ट झाल्यानंतर की ते लोक नरकात जातील.
Tevbe 9:114
११४. आणि इब्राहीमचे आपल्या पित्याकरिता माफीची दुआ-प्रार्थना करणे हे केवळ त्या वचनाच्या सबबीवर होते, जे त्यांनी आपल्या पित्यास दिले होते, मग जेव्हा त्यांना ही गोष्ट स्पष्टतः कळाली की तो (पिता) अल्लाहचा शत्रू आहे, तेव्हा ते त्याच्यापासून दूर झाले. वास्तविक इब्राहीम मोठे कोमलहृदयी सहनशील होते.
Tevbe 9:115
११५. आणि अल्लाह असे नाही करत की एखाद्या जनसमूहाला मार्गदर्शन केल्यानंतर मार्गभ्रष्ट करील, जोपर्यंत त्या गोष्टी स्पष्टतः सांगून टाकत नाही ज्यांच्यापासून त्यांनी अलिप्त राहावे. निःसंशय अल्लाह प्रत्येक गोष्ट चांगल्या प्रकारे जाणतो.
Tevbe 9:116
११६. निःसंशय, आकाशामध्ये व धरतीत अल्लाहचीच राज्य-सत्ता आहे. तोच जिंवत ठेवतो आणि मृत्यु देतो आणि तुमचा अल्लाहखेरीज कोणीही मित्र नाही आणि ना कोणी मदत करणारा.
Tevbe 9:117
११७. सर्वश्रेष्ठ अल्लाहने पैगंबरांच्या स्थितीवर दया-दृष्टी केली आणि देशत्याग करून आलेल्यांवर आणि त्यांना मदत करणाऱ्या अन्सार लोकांच्या स्थितीवरही, ज्यांनी अशा अडचणीच्या वेळी पैगंबरांना साथ दिली, त्यानंतर की त्यांच्यातल्या एका गटाची मने डळमळू लागली होती. मग अल्लाहने त्यांच्या अवस्थेवर दया केली. निःसंशय, अल्लाह त्या सर्वांवर अतिशय मेहरबान आणि दया करणारा आहे.
Tevbe 9:118
११८. आणि तीन माणसांच्या अवस्थेवरही, ज्यांचा मामला स्थगित केला गेला होता येथपर्यंत की जेव्हा जमीन आपल्या (विशाल) विस्तारानंतरही त्यांच्यासाठी संकुचित (तंग) होऊ लागली आणि ते स्वतः आपल्या अस्तित्वाशी हैराण झाले आणि त्यांनी समजून घेतले की अल्लाहपासून कोठेही आश्रय लाभू शकत नाही, याखेरीज की त्यांच्याकडे वळले जावे. मग त्यांच्या अवस्थेवर दया केली. यासाठी की त्यांनी भविष्यातही क्षमा-याचना करावी. निःसंशय सर्वश्रेष्ठ अल्लाह तौबा (क्षमा-याचना) कबूल करणारा आणि अतिशय दया करणारा आहे.
Tevbe 9:119
११९. हे ईमान राखणाऱ्यांनो! सर्वश्रेष्ठ अल्लाहचे भय बाळगा आणि खऱ्या लोकांसोबत राहा.
Tevbe 9:120
१२०. मदीना आणि त्याच्या जवळपासच्या गावात राहणाऱ्यांकरिता योग्य नव्हते की अल्लाहच्या पैगंबरांची साथ सोडून मागे राहावे आणि न हे की आपल्या प्राणाला, त्यांच्या प्राणापेक्षा अधिक प्रिय आपल्या प्राणाला, त्यांच्या प्राणापेक्षा अधिक प्रिय जाणावे. हे अशामुळे की त्यांना अल्लाहच्या मार्गात जी तहान लागली आणि जो थकवा पोहोचला आणि जी भूक लागली आणि जे चालत गेले, जे काफिरांकरिता क्रोधाची सबब बनली असावी आणि शत्रूंचा जो काही समाचार घेतला, त्या सर्वांबद्दल त्यांच्या नावे (एक एक) सत्कर्म करणाऱ्यांचा मोबदला वाया जाऊ देत नाही.
Tevbe 9:121
१२१. आणि जो काही लहान मोठा खर्च त्यांनी केला आणि जेवढी मैदाने त्यांना पार करावी लागली, हे सर्वदेखील त्यांच्या नावे लिहिले गेले यासाठी की सर्वश्रेष्ठ अल्लाहने त्यांच्या कामांचा चांगल्यात चांगला मोबदला प्रदान करावा.
Tevbe 9:122
१२२. आणि ईमान राखणाऱ्यांनी सर्वच्या सर्व मिळून निघू नये. तेव्हा असे का न केले जावे की त्यांच्या प्रत्येक मोठ्या गटामधू लहान गट निघावा यासाठी की त्यांनी दीन (धर्मा) ची समज प्राप्त करून घ्यावी आणि यासाठी की त्यांनी आपल्या जनसमूहाच्या लोकांना, जेव्हा ते यांच्याजवळ येतील (अल्लाहचे) भय दाखवावे, यासाठी की त्यांनी भ्यावे.
Tevbe 9:123
१२३. हे ईमान राखणाऱ्यांनो! त्या काफिरांशी (इन्कारी लोकांशी) लढा जे तुमच्या भोवती आहेत आणि त्यांना तुमच्या अंगी कठोरता आढळली पाहिजे. आणि हा विश्वास राखा की सर्वश्रेष्ठ अल्लाह तकवा (धैर्य-संयम) राखणाऱ्यांच्या सोबत आहे.
Tevbe 9:124
१२४. आणि जेव्हा एखादी सूरह (अध्याय) अवतरित केली जाते, तेव्हा काही ढोंगी ईमानधारक म्हणतात की या सूरहने तुमच्यापैकी कोणाचे ईमान वाढविले आहे? तेव्हा जे (सच्चे) ईमानधारक आहेत, या सूरहने त्यांच्या ईमानात वृद्धी केली आहे आणि ते आनंदित होत आहेत.
Tevbe 9:125
१२५. आणि ज्यांच्या मनात रोग (विकृती) आहे, या सूरहने त्यांच्यात त्यांच्या गलिच्छतेसह आणखी गलिच्छता वाढवून दिली आहे आणि ते कुप्र (इन्कार करण्या) च्या स्थितीतच मरण पावले.
Tevbe 9:126
१२६. आणि काय त्यांनी पाहिले नाही की हे लोक दरवर्षी एकदा किंवा दोनदा कोणत्या न कोणत्या संकटात टाकले जातात, तरीही ते ना तौबा (क्षमा-याचना) करतात, ना बोध प्राप्त करतात.
Tevbe 9:127
१२७. आणि जेव्हा एखादी सूरह (अध्याय) अवतरित केली जाते तेव्हा एकमेकांना पाहू लागतात की तुम्हाला कोणी पाहत तर नाही, मग चालू लागतात. अल्लाहने यांचे मन फिरविले आहे या कारणाने की ते समजून न घेणारे लोक आहेत.
Tevbe 9:128
१२८. तुमच्याजवळ एका अशा पैगंबराचे आगमन झाले आहे, जे तुमच्यापैकीच आहेत, ज्यांना तुमच्या हानीविषयक गोष्टी खूप क्लेशदायक वाटतात जे तुमच्या लाभाचे मोठे इच्छुक असतात. ईमान राखणाऱ्यासाठी अतिशय स्नेहशील व मेहरबान आहेत.
Tevbe 9:129
१२९. मग जर ते (लोक) तोंड फिरवतील तर तुम्ही त्यांना सांगा की माझ्यासाठी अल्लाह पुरेसा आहे, त्याच्याखेरीज कोणीही सच्चा माबूद (उपास्य) नाही. मी त्याच्यावरच भरोसा केला आणि तो फार मोठ्या अर्श (सिंहासना) चा मालक (स्वामी) आहे.
Yunus 10:1
१. अलिफ. लाम.रॉ या हिकमत आणि बुद्धिमत्तापूर्ण ग्रंथाच्या आयती आहेत.
Yunus 10:2
२. काय त्या लोकांना या गोष्टीचे आश्चर्य वाटले की आम्ही त्यांच्यातल्या एका माणसाजवळ वहयी (अवतरित संदेश) पाठविली की समस्त मानवांना (अल्लाहचे) भय दाखवावे आणि जे ईमान राखतील त्यांना ही खूशखबर द्या की त्यांच्या पालनकर्त्याजवळ त्यांना पुरेपूर मोबदला आणि मान-सन्मान लाभेल. इन्कारी लोक म्हणाले की हा माणूस खात्रीने स्पष्ट जादूगार (तांत्रिक) आहे.
Yunus 10:3
३. निःसंशय, तुमचा पालनकर्ता अल्लाहच आहे, ज्याने सहा दिवसांत आकाशांना व जमिनीला निर्माण केले, मग अर्श (सिंहासना) वर स्थिर (कायम) झाला. तो प्रत्येक कामाची व्यवस्था राखतो. त्याच्या अनुमतीविना त्याच्याजवळ कोणी शिफारस करणारा नाही. असा अल्लाह तुमचा रब (पालनकर्ता) आहे. तेव्हा तुम्ही त्याचीच उपासना करा. मग काय तरीही तुम्ही बोध प्राप्त करीत नाही?
Yunus 10:4
४. तुम्हा सर्वांना अल्लाहच्याच जवळ जायचे आहे. अल्लाहने सच्चा वायदा केलेला आहे. निःसंशय तोच पहिल्यांदा निर्माण करतो, मग तोच दुसऱ्यांदा निर्माण करील, यासाठी की अशा लोकांना, ज्यांनी ईमान राखले आणि सत्कर्मे केलीत, त्यांना न्यायपूर्वक मोबदला द्यावा आणि ज्यांनी इन्कार केला, त्यांना पिण्यासाठी उकळते पाणी मिळेल आणि दुःखदायक शिक्षा-यातना लाभेल त्यांच्या इन्कार करण्यापायी.
Yunus 10:5
५. तो (अल्लाह) असा आहे, ज्याने सूर्याला तेजस्वी बनविले आणि चंद्राला प्रकाशमान बनविले आणि त्याच्यासाठी स्थान (गंतव्य) निर्धारीत केले, यासाठी की तुम्ही वर्षांची गणना व हिशोब लावू शकावे व हिशोबाला जाणून घ्यावे. अल्लाहने या सर्व वस्तू व्यर्थ निर्माण केल्या नाहीत, तो हा पुरावा त्यांना स्पष्ट सांगत आहे जे अक्कल राखतात.
Yunus 10:6
६. निःसंशय रात्र आणि दिवसाच्या एका पाठोपाठ येण्यात, आणि अल्लाहने आकाशात व धरतीत जे काही निर्माण केले आहे, त्या सर्वांत अशा लोकांकरिता पुरावा (प्रमाण) आहे जे अल्लाहचे भय बाळगतात.
Yunus 10:7
७. ज्या लोकांना आमच्याजवळ येण्यावर विश्वास नाही आणि ते ऐहिक जीवनावर राजी झाले आहेत आणि त्यातच जीव गुंतवून बसले आहेत आणि जे आमच्या आयतींपासून गाफील आहेत.
Yunus 10:8
८. अशा लोकांचे ठिकाण त्यांच्या कर्मांमुळे नरक (जहन्नम) आहे.
Yunus 10:9
९. निःसंशय, ज्या लोकांनी ईमान राखले आणि त्यांनी सत्कर्मे केलीत, तर त्यांचा पालनकर्ता ते ईमानधारक असण्याच्या सबबीवर त्यांना (त्यांच्या ध्येय उद्दिष्टाप्रत) पोहचविल, सुखाच्या अशा बागांमध्ये, ज्यांच्या खाली प्रवाह वाहत असतील.
Yunus 10:10
१०. तिथे त्यांच्या तोंडून उद्गार निघेल सुबहानल्लाह१ (अल्लाह पवित्र आहे) आणि त्यांचे एकमेकांशी अभिवादन असेल अस्सलामु अलैकुम (सलामती असो तुमच्यावर) आणि शेवटी ते हे म्हणतील की समस्त स्तुती प्रशंसा अल्लाहकरिताच आहे, जो समस्त विश्वांचा पालनकर्ता आहे.
———
(१) अर्थात जन्नतमध्ये जाणारे प्रत्येक क्षणी अल्लाहची महानता आणि त्याची प्रशंसा करण्यात मग्न असतील, ज्याप्रमाणे हदीसमध्ये उल्लेख आहे.... जन्नतवाल्यांच्या मुखातून अल्लाहची महानता आणि प्रशंसा अशा प्रकारे निघेल, ज्याप्रमाणे श्वास निघतो.
Yunus 10:11
११. आणि जर अल्लाहने लोकांना त्वरित हानी पोहचविली असती, जसे लोक त्वरित लाभ इच्छितात, तेव्हा त्यांच्या वायदा केव्हाच पूर्ण झाला असता यास्तव आम्ही त्या लोकांना त्यांच्या दशेवर सोडतो, ज्यांना आमच्याजवळ घेण्यावर विश्वास नाही, यासाठी की त्यांनी आपल्या विद्रोहात भटकत राहावे.
Yunus 10:12
१२. आणि जेव्हा माणसाला एखादी दुःख-यातना पोहोचते, तेव्हा आम्हाला पुकारतो, पहुडलेल्या स्थितीतही, बसलेल्या स्थितीतही, उभा असतानाही. मग जेव्हा आम्ही त्याची दुःख-यातना दूर करतो, तेव्हा तो असा होतो की जणू त्याने आपल्याला पोहोचलेल्या दुःख-यातनेकरिता आम्हाला कधी पुकारलेच नव्हते१ या मर्यादा ओलांडणाऱ्यांची कर्मे त्याच्याकरिता त्याचप्रमाणे मनपसंत बनविली गेली आहेत.
Yunus 10:13
१३. आणि आम्ही तुमच्यापूर्वी कित्येक अशा जनसमूहांचा सर्वनाश केला जेव्हा त्यांनी अत्याचार केला, वास्तविक त्यांच्याजवळ त्यांचे पैगंबरही निशाण्या घेऊन आले होते आणि ते केव्हा असे होते की ईमान राखले असते? अपराधी लोकांना आम्ही अशाच प्रकारे दंड देतो.
Yunus 10:14
१४. मग त्यांच्यानंतर आम्ही या जगात त्यांच्याजागी तुम्हाला आबाद केले यासाठी की आम्ही हे बघावे की तुम्ही कशा प्रकारची कामे करतात.
Yunus 10:15
१५. आणि जेव्हा त्यांच्यासमोर आमच्या आयती वाचल्या जातात, ज्या अगदी स्पष्ट आहेत, तेव्हा हे लोक, ज्यांना आमच्याजवळ येण्यावर विश्वास नाही, असे म्हणतात की याच्याखेरीज दुसरा कुरआन आणि किंवा यात काही फेरबदल करून टाका. तुम्ही (स.) त्यांना सांगा की मला याचा अधिकार नाही की आपल्यातर्फे त्यात काही बदल करावा. मी तर त्याचेच अनुसरण करेन जे माझ्याजवळ वहयीद्वारे आले आहे. जर मी आपल्या पालनकर्त्याची अवज्ञा करेन तर मी एका मोठ्या दिवसाच्या शिक्षा-यातनेचे भय राखतो.
Yunus 10:16
१६. तुम्ही सांगा की जर अल्लाहने इच्छिले असते, तर ना मी तुम्हाला ते वाचून ऐकविले असते आणि ना अल्लाहने तुम्हाला त्याची खबर दिली असती, कारण यापूर्वी तर मी आयुष्याच्या दीर्घ अवधीपर्यंत तुमच्यात राहिलो आहे. मग काय तुम्ही समज बाळगत नाही?
Yunus 10:17
१७. तेव्हा, त्याहून जास्त अत्याचारी कोण असेल जो अल्लाहविषयी खोटे रचेल किंवा त्याच्या आयतींना खोटे म्हणेल. निःसंशय असे अपराधी लोक कधीही सफल होणार नाहीत.
Yunus 10:18
१८. आणि हे लोक अल्लाहला सोडून अशा वस्तूंची उपासना करतात, जे ना त्यांना हानी पोहचवू शकतील आणि ना त्यांना लाभ पोहचवू शकतील आणि म्हणतात की हे अल्लाहच्या समोर आमची शिफारस करणारे आहेत. तुम्ही सांगा, काय तुम्ही अल्लाहला अशा गोष्टींची खबर देता, ज्या तो जाणत नाही आकाशमध्ये व धरतीत. तो पवित्र आणि श्रेष्ठ आहे त्या लोकांच्या शिर्क (सहभागी करण्या) पासून.
Yunus 10:19
१९. आणि समस्त लोक एकाच उम्मत (धर्मसमुदाया) चे होते, मग त्यांनी मतभेद निर्माण केले१ आणि जर एक गोष्ट नसती जी तुमच्या पालनकर्त्यातर्फे निर्धारीत केली गेली आहे तर ज्या गोष्टीत हे लोक मतभेद करीत आहेत त्यांचा पूर्णपणे निकाल लावला गेला असता.
———
(१) अर्थात हा शिर्क (अनेकेश्वरवाद) लोकांनी स्वतः निर्माण केला आहे आणि सुरुवातीला याचे अस्तित्वही नव्हते, समस्त लोक एकाच दीन (धर्मा) च्या मार्गावर अर्थात इस्लामवर होते, ज्यात तौहीद (एकेश्वरवादा) ला विशेष स्थान आहे. पैगंबर हजरत नूह पर्यंत लोक याच तौहीदच्या मार्गावर चालत राहिले, पुढे त्यांच्यात मतभेद झाले परिणामी काही लोकांनी अल्लाहच्या सोबत इतरांनाही उपास्य आराध्य देवता आणि कष्टिनिवारक (मुश्किल कुशा) मानायला सुरुवात केली.
Yunus 10:20
२०. आणि हे लोक असे म्हणतात की त्यांच्यावर अल्लाहचा एखादा चमत्कार (मोजिजा) का नाही अवतरित झाला? (तेव्हा तुम्ही) सांगा की अपरोक्षाचे (गैबचे) ज्ञान केवळ अल्लाहला आहे, तेव्हा तुम्हीही प्रतिक्षा करा, मीदेखील तुमच्यासोबत प्रतिक्षेत आहे.
Yunus 10:21
२१. आणि जेव्हा आम्ही लोकांना दुःख पोहचल्यानंतर सुखाचा स्वाद चाखवतो तेव्हा ते त्वरित आमच्या आयतींविषयी चालबाजी करू लागतात. तुम्ही सांगा की अल्लाह योजना आखण्यात तुमच्यापेक्षा अधिक चपळ आहे. निःसंशय, आमचे फरिश्ते तुमची कपट कारस्थाने लिहित आहेत.
Yunus 10:22
२२. तो (अल्लाह) असा आहे, जो तुम्हाला समुद्रात आणि खुष्कीत प्रवासाचे सामर्थ्य देतो, येथपर्यंत की जेव्हा तुम्ही नौकेत असता आणि त्या नावा, लोकांना अनुकूल वाऱ्याद्वारे नेत असतात, आणि ते लोक त्यांच्यापासून आनंदित होतात. त्यांच्यावर वादळी वाऱ्याचा झोका येतो आणि सर्व बाजूंनी लाटा उठतात आणि ते समजतात की (वाईटरित्या) येऊन घेरले गेलो (त्या वेळी) सर्वच, सचोटीच्या ईमान आणि श्रद्धेसह अल्लाहलाच पुकारतात की जर तू या (संकटा) पासून वाचवशील तर आम्ही अवश्य (तुझे) कृतज्ञशील बनू.
Yunus 10:23
२३. मग जेव्हा सवश्रेष्ठ अल्लाह त्यांना वाचवतो तेव्हा त्वरित ते धरतीत नाहक उत्पात (फसाद) माजवू लागतात. हे लोकांनो! तुमचा हा विद्रोह तुमच्यासाठी दुःखदायक ठरणार आहे, ऐहिक जीवनाचे काही लाभ आहेत, मग (नंतर) तुम्हाला आमच्याकडे यायचे आहे. तेव्हा आम्ही तुम्हाला तुमच्या सर्व हरकती दाखवू.
Yunus 10:24
२४. ऐहिक जीवनाची स्थिती अशी आहे, जणू आकाशातून आम्ही पाऊस पाडला, मग त्याद्वआरे जमिनीची वनस्पती (झाडे-झुडपे) ज्यांना मानव आणि जानवरे खातात, खूप हिरवी टवटवीत होऊन निघाली, येथपर्यंत की जेव्हा त्या जमिनीने आपल्या शोभा- सजावटीचा पूर्ण हिस्सा घेतला आणि ती खूप सुंदर झाली आणि तिच्या मालकांना वाटले की आता आम्ही हिच्यावर पूर्णपणे हक्कदार झालो तेव्हा दिवसा किंवा रात्री, तिच्यावर आमच्यातर्फे एखादा (आपत्तीचा) आदेश आला, तर आम्ही तिला असे साफ करून टाकले की जणू काल (परवा) येथे नव्हतीच. अशा प्रकारे आम्ही निशाण्यांना सविस्तरपणे सांगतो त्या लोकांसाठी ते विचार चिंतन करतात.
Yunus 10:25
२५. आणि सर्वश्रेष्ठ अल्लाह, तुम्हाला सलामतीच्या घराकडे बोलावितो आणि ज्याला इच्छितो, सरळ मार्ग दाखवितो.
Yunus 10:26
२६. ज्या लोकांनी सत्कर्म केले आहे, त्यांच्यासाठी भलाई आहे आणि काही जास्तही आणि त्यांच्या मुखावर काळोखी नसेल आणि ना अपमान हे लोक जन्नतमध्ये राहणारे आहेत. ते नेहमी त्यात राहतील.
Yunus 10:27
२७. आणि ज्या लोकांनी वाईट कर्म केले, त्यांना त्यांच्या दुष्कर्मांची शिक्षा समान१ मिळेल आणि त्यांच्यावर अपमान आच्छादित होईल, त्यांना अल्लाहपासून कोणीही वाचवू शकणार नाही, त्यांच्या तोंडावर जणू काही अंधाऱ्या रात्रीचे थर गुंडाळले गेले असतील. हे लोक नरकात राहणारे आहेत, ते सदैव तेथे राहतील.
———
(१) पहिल्या आयतीत जन्नतमध्ये राहणाऱ्या लोकांचे वर्णन होते. त्यात असे सांगितले गेले की त्यांना आपल्या सत्कर्मांचा मोबदला अनेक पटींनी मिळेल आणि याहून जास्त अल्लाहच्या दर्शनाने सन्मानित होतील. नंतरच्या आयतीत हे सांगितले जात आहे की वाईट कर्माचे फळ त्या कर्माच्या प्रमाणातच मिळेल. अरबीत ‘सिकत’चा अर्थ (अधर्म) आणि शिर्क व इतर दुराचार होय.
Yunus 10:28
२८. आणि तो दिवसदेखील आठवण करण्यायोग्य आहे, ज्या दिवशी आम्ही त्या सर्वांना एकत्र करू; मग अनेक ईश्वरांची भक्ती- आराधना करणाऱ्यांना सांगू की तुम्ही आणि तुमचे सहभागी ईश्वर आपल्या जागी थांबा, मग आम्ही त्यांच्यात आपसात फूट पाडू आणि त्यांचे ते सहभागी म्हणतील की तुम्ही आमची उपासना (पूजा) करीत नव्हता.
Yunus 10:29
२९. तेव्हा आमच्या आणि तुमच्या दरम्यान अल्लाह पुरेसा आहे, साक्षीच्या स्वरूपात की आम्हाला तुमच्या उपासनेची खबरदेखील नव्हते.
Yunus 10:30
३०. त्या ठिकाणी, प्रत्येक मनुष्य आपण पूर्वी केलेल्या कर्मांची जाच-पडताळ करेल आणि हे लोक अल्लाहकडे, जो त्यांचा खराखुरा स्वामी आहे, परतविले जातील आणि जी असत्य (आराध्य दैवते) त्यांनी बनविली होती ती सर्व त्यांच्यापासून गायब होतील.
Yunus 10:31
३१. तुम्ही सांगा की तो कोण आहे, जो तुम्हाला आकाश व जमिनीतून रोजी (अन्नसामुग्री) पोहचवितो किंवा तो कोण आहे जो कानांवर आणि डोळ्यांवर पूर्ण अधिकार राखतो आणि तो कोण आहे जो निर्जीवातून सजीव बाहेर काढतो, आणि निर्जीवाला सजीवातून बाहेर काढतो आणि तो कोण आहे जो समस्त कार्यांचे व्यवस्थापन राखतो. निःसंशय ते हेच म्हणतील की अल्लाह! तेव्हा त्यांना सांगा की, मग तुम्ही भय का राखत नाही?
Yunus 10:32
३२. तर हा आहे अल्लाह, जो तुमचा सच्चा स्वामी व पालनकर्ता आहे, मग सत्यानंतर आणखी काय बाकी राहिले भटकण्याशिवाय, मग कोठे भटकत जात आहात?
Yunus 10:33
३३. अशाच प्रकारे तुमच्या पालनकर्त्याचे हे फर्मान की हे ईमान राखणार नाहीत, सर्व दुराचारी लोकांबाबत सिद्ध ठरले आहे.
Yunus 10:34
३४. तुम्ही (अशा प्रकारे) सांगा की, काय तुमच्या सहभागी ईश्वरांपैकी कोणी असा आहे जो पहिल्यांदाही निर्माण करील, मग दुसऱ्यांदा निर्माण करील तुम्ही सांगा, अल्लाहच पहिल्या खेपेस निर्माण करतो, मग तोच दुसऱ्या खेपेसही निर्माण करील, मग तुम्ही उलटपावली कोठे जात आहात?
Yunus 10:35
३५. तुम्ही सांगा, की तुमच्या त्या सहभागी ईश्वरांमध्ये कोणी असा आहे जो सत्य मार्ग दाखवित असेल? तुम्ही सांगा की अल्लाहच सत्याचा मार्ग दाखवितो, तेव्हा मग जे सामर्थ्य सत्याचा मार्ग दाखवित असेल ते जास्त अनुसरण करण्यास पात्र आहे की तो मनुष्य, ज्याला सांगितल्याविना स्वतःच मार्ग दिसून न यावा, तेव्हा तुम्हाला झाले तरी काय, तुम्ही कशा प्रकारे निर्णय घेता?
Yunus 10:36
३६. आणि त्यांच्यापैकी बहुतेक लोक निराधार विचारांच्या मागे चालत आहेत. निःसंशय, अनुमान अटकळी, सत्य (ओळखण्या) संदर्भात काहीच उपयोगी पडू शकत नाही. हे लोक जे काही करीत आहेत, निश्चितच अल्लाह ते सर्व काही जाणतो.
Yunus 10:37
३७. आणि हा कुरआन असा नाही की अल्लाह (च्या वहयी) शिवाय (स्वतःच) रचून घेतला गेला असेल. किंबहुना हा तर (त्या ग्रंथांच्या) सत्यतेचे समर्थन करणारा आहे, जे यापूर्वी अवतरित केले गेले आहेत. आणि ग्रंथा (आवश्यक आदेशां) चे सविस्तर वर्णन आहे. यात मुळीच शंका नाही की (हा ग्रंथ) समस्त विश्वांच्या पालनकर्त्यातर्फे आहे.
Yunus 10:38
३८. काय हे लोक असे म्हणतात की तुम्ही या ग्रंथाला (आपल्या मनाने) रचले आहे? तुम्ही सांगा, तर मग तुम्ही यासारखी एक तरी सूरह (अध्याय) बनवून आणा, आणि अल्लाहखेरीज ज्यांना ज्यांना बोलावू शकाल त्यांना बोलावून घ्या जर तुम्ही सच्चे असाल.
Yunus 10:39
३९. किंबहुना ते अशा गोष्टीला खोटे ठरवू लागले, जिला त्यांनी आपल्या ज्ञान-कक्षेत आणले नाही आणि अजून त्यांना याचा अंतिम परिणाम लाभला नाही. जे लोक यांच्यापूर्वी होऊन गेलेत, त्यांनीही असेच खोटे ठरविले होते, तर पाहा त्या अत्याचारींचा शेवट कसा झाला?
Yunus 10:40
४०. आणि त्यांच्यापैकी काही असे आहेत, जे यावर ईमान राखतील, आणि काही असे आहेत की त्यावर ईमान राखणार नाहीत, आणि तुमचा पालनकर्ता उपद्रवी लोकांना चांगल्या प्रकारे जाणतो.
Yunus 10:41
४१. आणि जर ते तुम्हाला खोटे ठरवित राहिले तर त्यांना हे सांगा की मी केलेले मला लाभेल आणि तुम्ही केलेले तुम्हाला लाभेल. तुम्ही मी केलेल्या (कर्मां) साठी जबाबदार नाहीत आणि मी, तुम्ही केलेल्या (कर्मां) साठी जबाबदार नाही.
Yunus 10:42
४२. आणि त्यांच्यात काही असे आहेत, जे तुमच्याकडे कान लावून ऐकतात, काय तुम्ही बहिऱ्या लोकांना ऐकवता, त्यांना अक्कल नसली तरीही?
Yunus 10:43
४३. आणि त्यांच्यात काही असे आहेत की तुम्हाला पाहात आहेत. मग काय तुम्ही आंधळ्यांना मार्ग दाखवू इच्छिता, ते डोळे राखत नसले तरीही?
Yunus 10:44
४४. निःसंशय, अल्लाह लोकांवर किंचितही अत्याचार करीत नाही, परंतु लोक स्वतःच आपल्यावर अत्याचार करतात.
Yunus 10:45
४५. आणि त्यांना त्या दिवसाची आठवण करून द्या, ज्या दिवशी अल्लाह त्यांना (आपल्या समोर) अशा स्थितीत एकत्र करील की (त्यांना वाटेल) की (जगात) दिवसाचा एक अर्धा क्षण राहिले असावेत आणि आपसात एकमेकांना ओळखण्यासाठी उभे असतील. वास्तविक हानीग्रस्त झाले ते लोक, ज्यांनी अल्लाहजवळ जाण्याला खोटे ठरविले आणि ते मार्गदर्शन प्राप्त करणारे नव्हते.
Yunus 10:46
४६. आणि आम्ही ज्या गोष्टीचा त्यांच्याशी वायदा करीत आहोत, तिचा काही भाग तुम्हाला दाखवून द्यावा किंवा (तो जाहीर होण्यापूर्वी) आम्ही तुम्हाला मृत्यु द्यावा, तेव्हा त्यांना आमच्याजवळ तर यायचेच आहे, मग अल्लाह साक्षी आहे यांच्या सर्व कामांवर.
Yunus 10:47
४७. आणि प्रत्येक समुदाया (उम्मत) साठी एक रसूल (सन्देष्टा) आहे. मग जेव्हा त्यांचा पैगंबर येऊन पोहचतो तेव्हा त्यांचा निर्णय न्यायपूर्वक केला जातो आणि त्यांच्यावर जुलूम केला जात नाही.
Yunus 10:48
४८. आणि हे लोक म्हणतात, हा कायदा केव्हा पूर्ण होईल जर तुम्ही सच्चे असाल?
———
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Yunus 10:49
४९. तुम्ही सांगा, मी स्वतः आपल्याकरिता तर कसल्याही लाभ आणि हानीचा अधिकार राखत नाही, परंतु तेवढाच जशी अल्लाहची मर्जी असेल, प्रत्येक समुदाया (उम्मत) करिता एक ठरलेली वेळ आहे, जेव्हा त्यांच्या तो निर्धारीत समय येऊन पोहोचतो तेव्हा ना एक क्षण मागे सरकू शकतात आणि ना पुढे जाऊ शकतात.
Yunus 10:50
५०. तुम्ही सांगा की हे तर सांगा की जर तुमच्यावर अल्लाहचा अज़ाब (प्रकोप) रात्री येऊन कोसळेल किंवा दिवसा, तेव्हा शिक्षा यातनेत अशी कोणती गोष्ट आहे की अपराधी लोक ती लवकर मागत आहेत.
Yunus 10:51
५१. मग काय तो (अज़ाब) येऊन कोसळल्यावरच ईमान राखाल, आता (ईमान) स्वीकारले, वास्तविक तुम्ही त्याची (अज़ाब) ची घाई माजवित होते.
Yunus 10:52
५२. मग अत्याचारी लोकांना फर्माविले जाईल आता निरंतर प्रकोपाची गोडी चाखा, तुम्हाला तर तुम्ही केलेल्या कर्मांचाच मोबदला लाभला आहे.
Yunus 10:53
५३. आणि ते तुम्हाला विचारतात की काय तो (अज़ाब) खरी गोष्ट आहे? तुम्ही सांगा, माझ्या पालनकर्त्याची शपथ, ती अगदी खरी गोष्ट आहे आणि तुम्ही अल्लाहला कशाही प्रकारे विवश करू शकत नाही.
Yunus 10:54
५४. आणि जर प्रत्येक जीव, ज्याने अत्याचार (शिर्क) केला आहे, त्याच्याजवळ एवढे असावे की संपूर्ण जमीन भरून जावी, तरीही ते देऊन आपला प्राण वाचवू लागेल आणि तेव्हा अज़ाब पाहून घेतील, तेव्हा लज्जा लपवून ठेवतील आणि त्यांचा फैसला न्यायपूर्वक होईल आणि त्यांच्यावर अत्याचार केला जाणार नाही.
Yunus 10:55
५५. लक्षात ठेवा, जेवढ्या वस्तू आकाशांमध्ये व जमिनीत आहे, त्या सर्व अल्लाहच्याच आहेत. लक्षात ठेवा, अल्लाहचा वायदा अगदी सच्चा आहे, परंतु अधिकांश लोक हे जाणत नाहीत.
Yunus 10:56
५६. तोच जीव टाकतो आणि तोच जीव बाहेर काढतो आणि तुम्ही सर्व त्याच्याचकडे आणले जाल.
Yunus 10:57
५७. हे लोकांनो! तुमच्याजवळ तुमच्या पालनकर्त्यातर्फे एक अशी गोष्ट आली आहे, जी बोध- उपदेश आहे आणि हृदयात जे (विकार) आहेत, त्यांच्याकरिता रोगमुक्ती आहे आणि मार्गदर्शन करणारी आहे आणि (अल्लाहची) दया- कृपा आहे ईमान राखणाऱ्यांसाठी.
Yunus 10:58
५८. तुम्ही सांगा की लोकांनी अल्लाहच्या दया- कृपेवर आनंदित झाले पाहिजे ते तर त्याहून कित्येक पटींनी अधिक चांगले आहे, जे हे जमा करीत आहेत.
Yunus 10:59
५९. तुम्ही सांगा, जरा हे सांगा की अल्लाहने तुमच्यासाठी जी रोजी (अन्नसामुग्री) पाठविली होती, मग तुम्ही तिच्यातला काही हिस्सा हराम आणि काही हल्ला करून घेतला. तुम्ही त्यांना विचारा की काय तुम्हाला अल्लाहने तसा आदेश दिला होता किंवा अल्लाहबाबत उगाच खोटे रचून घेता?
Yunus 10:60
६०. आणि जे लोक अल्लाहच्या संबंधाने खोटे रचतात, त्यांचा कयामतविषयी काय विचार आहे? वास्तविक लोकांवर, सर्वश्रेष्ठ अल्लाहचा फार मोठा उपकार आहे. परंतु अधिकांश लोक कृतज्ञता व्यक्त करीत नाही.
Yunus 10:61
६१. आणि तुम्ही कोणत्याही स्थितीत असा आणि या स्थितींमध्ये तुम्ही कोठूनही कुरआन पठण करा आणि तुम्ही लोक जे कामदेखील करता आम्हाला सर्वांचीच खबर असते. जेव्हा तुम्ही त्या कामात व्यस्त असता आणि तुमच्या पालनकर्त्यापासून तिळमात्र वस्तू लपलेली नाही, ना धरतीत, ना आकाशात आणि ना एखादी वस्तू त्याहून लहान आणि ना एखादी मोठी, तथापि हे सर्व खुल्या- स्पष्ट ग्रंथात आहे.
Yunus 10:62
६२. लक्षात ठेवा, अल्लाहच्या मित्रांना१ ना कसले भय आहे, ना ते दुःखी होतील.
———
(१) अवज्ञाकारी लोकांनंतर अल्लाह आपल्या आज्ञाधारकांबद्दल सांगत आहे अर्थात औलिया अल्लाहबद्दल. औलिया वली (मित्र) चे अनेकवचन आहे. वलीचा मूल अर्थ निकटचा, तेव्हा औलिया अल्लाहचा अर्थ होईल. अल्लाहचे ते सच्चे आणि निःस्वार्थ ईमानधारक ज्यांनी अल्लाहचे आज्ञापालन करून, दुष्कर्मांचा त्याग करून अल्लाहचे जवळीक प्राप्त केले. यास्तव अल्लाहने पुढच्या आयतीत फर्माविले, ज्यांनी ईमान राखले व ज्यांनी अल्लाहचे भय मनात राखले आणि याच दोन्ही गोष्टी अल्लाहचे जवळीक प्राप्त करण्याचा आधार व महत्त्वपूर्ण माध्यम आहेत. या कारणाने अल्लाहचे भय राखणारा प्रत्येक ईमानधारक अल्लाहचा वली आहे. वली असण्यासाठी लोकांना चमत्कार दाखविणे आवश्यक वाटते. मग ते आपल्या वलीच्या खऱ्या खोट्या चमत्कारांचा प्रचार करतात, हा विचार अगदी चुकीचा आहे. चमत्कार आणि वली यांचा काडीमात्र संबंध नाही. अल्लाहच्या मर्जीने एखाद्याकडून काही चमत्कार जाहीर झाला तर ती गोष्ट वेगळी. यात वलीची मर्जी सामील नाही. तथापि अल्लाहचे भय राखणाऱ्या एखाद्या ईमानधारक आणि सुन्नतचे अनुसरण करणाऱ्याकडून चमत्कार दिसून येवो किंवा न येवो तो अल्लाहचा वली असण्यात काहीच शंका नाही.
Yunus 10:63
६३. हे असे लोक आहेत, ईमान राखतात आणि (दुराचारापासून) तकवा (अल्लाहचे भय) बाळगतात.
Yunus 10:64
६४. त्यांच्याकरिता या जगाच्या जीवनातही १ आणि आखिरतमध्येही खूशखबर आहे. सर्वश्रेष्ठ अल्लाहच्या फर्मानात काहीच बदल होत नसतो. ही फार मोठी सफलता आहे.
———
(१) जगात खूशखबर म्हणजे पुण्यकर्म होय, अथवा ती खूशखबर होय जी मृत्युसमयी फरिश्ते एका ईमानधारकाला देतात, जसे की कुरआन व हदीसद्वारे सिद्ध आहे.
Yunus 10:65
६५. आणि तुम्ही त्यांच्या बोलण्याने दुःखी-कष्टी होऊ नका. परिपूर्ण वर्चस्व अल्लाहकरिताच आहे. तो ऐकणारा, जाणणारा आहे.
Yunus 10:66
६६. लक्षात ठेवा, जे काही आकाशांमध्ये आहे आणि जे काही धरतीत आहे ते सर्व अल्लाहचेच आहे, आणि जे लोक अल्लाहला सोडून इतर सहभागींना पुकारतात, ते कोणत्या गोष्टीचे अनुसरण करीत आहेत. केवळ काल्पनिक विचारांचेच अनुसरण करीत आहेत आणि फक्त अटकळीच्याच गोष्टी करीत आहेत.१
———
(१) अर्थात अल्लाहसोबत एखाद्याला सहभागी ठरविणे, कसल्याही पुराव्यावर आधारित नाही, किंबहुना एक अटकळ अनुमानाची देणगी आहे. आज जर मनुष्य आपल्या अकलेचा उचितरित्या उपयोग करील तर निःसंशय त्याला हे स्पष्टपणे उमजू शकते की अल्लाहचा कोणीही सहभागी नाही आणि ज्याप्रमाणे तो आकाशांना व धरतीला निर्माण करण्यात एकटा आहे, कोणी त्यात भागीदार नाही तर मग भक्ती- आराधनेत त्याचे अन्य इतर सहभागी कशा प्रकारे असू शकतात?
Yunus 10:67
६७. तो (अल्लाह) असा आहे, ज्याने तुमच्यासाठी रात्र बनविली, यासाठी की तुम्ही रात्री आराम करावा आणि दिवसही अशा प्रकारे बनविला की तो पाहण्याचे साधन आहे. निःसंशय यात निशाण्या आहेत, त्या लोकांकरिता जे ऐकतात.
Yunus 10:68
६८. ते म्हणतात की अल्लाह संतती बाळगतो, तो या गोष्टीपासून पवित्र आहे. तो तर कोणाचाही गरजवंत नाही जे काही आकाशांमध्ये आहे आणि जे काही धरतीत आहे सर्व त्याचेच आहे. तुमच्याजवळ (तुमच्या कथनाचा) कोणताही पुरावा नाही. काय अल्लाहशी अशा गोष्टीचा संबंध जोडता जिचे तुम्ही ज्ञान बाळगत नाही.
Yunus 10:69
६९. तुम्ही सांगा की जे लोक अल्लाहविषयी खोटे रचतात, ते सफल होणार नाहीत.
Yunus 10:70
७०. (हे) या जगात थोडेसे सुख आहे, मग त्यांना आमच्याकडे यायचे आहे. मग आम्ही त्यांना त्यांच्या कुप्र (अविश्वासा) च्या मोबदल्यात सक्त सजा चाखवू.
Yunus 10:71
७१. आणि तुम्ही त्यांना नूहचा वृत्तान्त वाचून ऐकवा, जेव्हा ते आपल्या जनसमूहाच्या लोकांना म्हणाले, हे माझ्या जातीबांधवांनो! जर तुम्हाला माझे राहणे आणि अल्लाहच्या आदेशांची शिकवण देणे जड जाते (असह्य होते) तेव्हा माझा तर अल्लाहवरच भरोसा आहे. तुम्ही आपली योजना आपल्या साथीदारांशी मिळून मजबूत करून घ्या, मात्र तुमची योजना, तुमच्यासाठी मन गुदमरण्याचे कारण ठरू नये. मग माझे (काय करायचे ते) करून टाका आणि मला संधीही देऊ नका.
Yunus 10:72
७२. तरीही जर तुम्ही तोंड फिरवित राहाल तर मी तुमच्याकडून काही मोबदला तर मागितला नाही, माझा मोबदला तर फक्त अल्लाहच देईल आणि मला आदेश दिला गेला आहे की मी इस्लाम स्वीकारणाऱ्यांपैकी राहावे.
Yunus 10:73
७३. तर ते लोक त्यांना खोटे ठरवित राहिले, मग आम्ही त्यांना, आणि जे त्यांच्यासोबत नौकेत स्वार होते, त्या सर्वांना सुटका प्रदान केली आणि त्यांना वारस बनविले आणि ज्यांनी आमच्या आयतींना खोटे ठरविले होते त्यांना बुडवून टाकले, तेव्हा विचार केल्या पाहिजे की कसा शेवट झाला त्या लोकांचा, ज्यांना पहिल्यापासून भय दाखविले गेले होते.
Yunus 10:74
७४. मग नूहनंतर आम्ही दुसऱ्या पैगंबरांना त्यांच्या जनसमूहाकडे पाठविले तेव्हा ते त्यांच्याजवळ स्पष्ट प्रमाण घेऊन आले, परंतु ज्या गोष्टीला त्यांनी पहिल्या खेपेस खोटे ठरविले, नंतर तिच्यावर ईमान राखले असते असे झाले नाही. अशा प्रकारे आम्ही मर्यादा पार करणाऱ्यांच्या हृदयांव मोहर लावतो.
Yunus 10:75
७५. मग आम्ही त्या (पैगंबरां) च्या नंतर मूसा आणि हारुनला फिरऔन व त्याच्या सरदारांकडे चमत्कार घेऊन पाठविले, तेव्हा त्या लोकांनी घमेंड दाखविली आणि ते अपराधी जनसमूहाचे लोक होते.
Yunus 10:76
७६. मग जेव्हा त्यांच्याजवळ आमच्याकडून सत्य (प्रमाण) पोहोचले तेव्हा ते लोक म्हणू लागले की निःसंशय, ही तर उघड जादू आहे.
Yunus 10:77
७७. मूसा म्हणाले, काय तुम्ही या सत्याविषयी, जेव्हा ते तुमच्याजवळ येऊन पोहोचले आहे, अशा गोष्टी बोलता? काय ही जादू आहे, वस्तुतः जादूगार सफल होत नाही?
Yunus 10:78
७८. ते लोक म्हणाले, काय तुम्ही आमच्याजवळ अशासाठी आला आहात की आम्हाला त्या मार्गापासून हटवून द्यावे, ज्या मार्गावर आम्ही आपल्या पूर्वजांना पाहिले आहे, आणि तुम्हा दोघांना जगात मोठेपणा मिळावा आणि आम्ही तर तुम्हा दोघांना कधीही माानणार नाही.
Yunus 10:79
७९. आणि फिरऔन म्हणाला, माझ्याजवळ समस्त निष्णात जादूगारांना घेऊन या.
Yunus 10:80
८०. मग जेव्हा जादूगार आले तेव्हा मूसा त्यांना म्हणाले की टाका जे काही तुम्ही टाकू इच्छिता.
Yunus 10:81
८१. तर जेव्हा त्यांनी टाकले तेव्हा मूसा म्हणाले की हे जे काही तुम्ही आणले आहे, जादू आहे. निश्चितच अल्लाह याला आताच नष्ट करून टाकील, निःसंशय अल्लाह अशा उपद्रवी लोकांचे काम बनू देत नाही.
Yunus 10:82
८२. आणि अल्लाह खऱ्या पुराव्याला आपल्या कथनाने स्पष्ट करतो, मग अपराध्याला कितीही वाईट वाटो.
Yunus 10:83
८३. मग मूसावर त्यांच्या जनसमूहाच्या लोकांपैकी केवळ थोड्याच लोकांनी ईमान राखले, तेही फिरऔन आणि आपल्या सरदारांशी भय राखत की कदाचित त्यांना दुःख न पोहचावे आणि खरोखर फिरऔन त्या देशात उच्च (शक्तिशाली) होता आणि ही गोष्टदेखील होती की तो मर्यादेच्या बाहेर गेला होता.
Yunus 10:84
८४. आणि मूसा म्हणाले, हे माझ्या जाती-समूहाच्या लोकांनो! जर तुम्ही अल्लाहवर ईमान राखत असाल तर त्याच्यावरच भरवसा करा जर तुम्ही मुसलमान (अल्लाहचे आज्ञाधारक) असाल.
Yunus 10:85
८५. तेव्हा ते म्हणाले, आम्ही तर अल्लाहवरच भरोसा केला आहे. हे आमच्या पालनकर्त्या! आम्हाला या अत्याचारी लोकांसाठी उपद्रवा (चे लक्ष्य) बनवू नका.
Yunus 10:86
८६. आणि आम्हाला आपल्या दया- कृपेने या काफिरांपासून सुटका प्रदान कर.
Yunus 10:87
८७. आणि आम्ही मूसा व त्याच्या भावाकडे वहयी (अवतरित संदेश) पाठविला की तुम्ही दोघे आपल्या या लोकांकरिता मिस्र देशात घर कायम राखा आणि तुम्ही सर्व त्याच घरांना नमाज पढण्याचे स्थान निश्चित करा आणि नित्य नेमाने नमाज अदा करा आणि तुम्ही ईमान राखणाऱ्यांना खूशखबर द्या.
Yunus 10:88
८८. आणि मूसा यांनी दुआ- प्रार्थना केली, हे माझ्या पालनहार! तू, फिरऔन आणि त्याच्या सरदारांना शोभा सजावट आणि सर्व प्रकारची धन-दौलत या जगाच्या जीवनात प्रदान केली. हे आमच्या पालनकर्त्या! (अशासाठी प्रदान केली) की त्यांनी तुझ्या मार्गापासून आम्हाला दूर करावे. हे आमच्या पालनकर्त्या! त्यांच्या धन-दौलतीला उद्ध्वस्त करून टाक आणि त्यांच्या हृदयांना सक्त (कठोर) बनव, यासाठी की त्यांना ईमान राखणे अशक्य व्हावे, येथपर्यंत की त्यांनी दुःखदायक अज़ाब (शिक्षा-यातना) पाहून घ्यावी.
Yunus 10:89
८९. (सर्वश्रेष्ठ अल्लाहने) फर्माविले, तुम्हा दोघांची दुआ- प्रार्थना कबूल केली गेली. तुम्ही सरळ मार्गावर राहा आणि अशा लोकांच्या मार्गावर चालू नका, जे नादान आहेत.
Yunus 10:90
९०. आणि आम्ही इस्राईलच्या संततीला समुद्रापार केले, मग त्यांच्या पाठोपाठ फिरऔन आपल्या सैन्यासह जुलूम आणि अतिरेक करण्याच्या हेतुने निघाला. येथेपर्यंत की जेव्हा तो बुडायला लागला तेव्हा म्हणाला, मी ईमान राखतो की ज्यावर इस्राईलच्या संततीने ईमान राखले आहे. त्याच्याखेरीज कोणीही उपासनेस पात्र नाही आणि मी इस्लाम स्वीकारणाऱ्यांपैकी आहे.
Yunus 10:91
९१. (उत्तरादाखल फर्माविले गेले) आता ईमान राखतो, आणि पूर्वी तर अवज्ञा करीत राहिला आणि उपद्रवी लोकांत सामील राहिला.
Yunus 10:92
९२. तेव्हा आज आम्ही तुझ्या मृत शरीराला सोडून देऊ, यासाठी की तू त्या लोकांसाठी बोधचिन्ह ठरावे, जे तुझ्यानंतर (येणार आहेत. आणि निःसंशय अधिकांश लोक आमच्या निशाण्यांपासून गाफील आहेत.
Yunus 10:93
९३. आणि आम्ही इस्राईलच्या संततीला फार उत्तम राहण्याचे ठिकाण दिले आणि आम्ही त्यांना स्वच्छ- शुद्ध वस्तू खाण्यासाठी प्रदान केल्या, तेव्हा त्यांनी मतभेद केला नाही, येथपर्यंत की त्यांच्याजवळ ज्ञान येऊन पोहोचले. निःसंशय, तुमचा पालनकर्ता त्यांच्या दरम्यान कयामतच्या दिवशी त्या गोष्टींबाबत निर्णय करील, ज्यात ते मतभेद करीत होते.
Yunus 10:94
९४. मग जर तुम्ही त्याच्याविषयी संशयग्रस्त असाल, जे आम्ही तुमच्याकडे पाठविले आहे तर तुम्ही त्या लोकांना विचारा जे तुमच्या पूर्वीच्या ग्रंथांचे पठण करतात. निःसंशय तुमच्याजवळ तुमच्या पालनकर्त्यातर्फे सत्यनिष्ठ ग्रंथ आला आहे तेव्हा तुम्ही कधीही शंका करणाऱ्यांपैकी होऊ नका.
Yunus 10:95
९५. आणि ना अशा लोकांपैकी व्हा, ज्यांनी सर्वश्रेष्ठ अल्लाहच्या आयतींना खोटे ठरविले अन्यथा तुम्ही तोटा उचलणाऱ्यांपैकी व्हाल.
Yunus 10:96
९६. निःसंशय, ज्या लोकांविषयी तुमच्या पालनकर्त्याचे फर्मान खरे ठरले आहे, ते ईमान राखणार नाहीत.
Yunus 10:97
९७. मग त्यांच्याजवळ सर्व निशाण्या पोहचल्या असल्या तरी, जोपर्यंत ते दुःखदायक अज़ाब पाहून न घेतील.
Yunus 10:98
९८. यास्तव कोणत्याही वस्तीने ईमान राखले नाही की ईमान राखले त्यांच्यासाठी लाभदायक ठरले असते, यूनुसच्या जनसमूहाखेरीज. जेव्हा त्यांनी ईमान राखले तेव्हा आम्ही अपमानाचा अज़ाब (प्रकोप) या जगाच्या जीवनात त्यांच्या वरून हटविला आणि त्यांना एका (निश्चित) वेळेपर्यंत सुख भोगण्याचा अवसर दिला.
Yunus 10:99
९९. आणि जर तुमच्या पालनकर्त्याने इच्छितले असते तर साऱ्या धरतीच्या समस्त लोकांनी ईमान राखले असते. तर काय तुम्ही लोकांना विवश करू शकता की त्यांनी ईमानधारक व्हावेच.
Yunus 10:100
१००. वास्तविक एखाद्याचे ईमान राखणे अल्लाहच्या हुकूमाविना शक्य नाही आणि अल्लाह, अक्कल नसलेल्यांना गलिच्छतेत टाकतो.
Yunus 10:101
१०१. तुम्ही सांगा की जरा विचार करा की आकाशांमध्ये व धरतीत कस-कशा वस्तू आहेत आणि जे लोक ईमान राखत नाहीत त्यांना निशाणी आणि चेतावणी कसलाही लाभ पोहचवित नाही.
Yunus 10:102
१०२. तेव्हा काय ते लोक केवळ त्या लोकांसारख्या घटनांची वाट बघत आहेत ज्या त्यांच्यापूर्वी होऊन गेल्यात. (तुम्ही) सांगा की ठीक आहे, तर तुम्ही वाट बघत राहा. मीदेखील तुमच्यासोबत वाट बघणाऱ्यांपैकी आहे.
Yunus 10:103
१०३. मग आम्ही आपल्या पैगंबरांना आणि ईमान राखणाऱ्यांना वाचवित होतो. अशा प्रकारे आमच्या अधिकारात आहे की आम्ही ईमानधारकांना सुटका देत असतो.
Yunus 10:104
१०४. (तुम्ही) सांगा, हे लोकांनो! जर तुम्ही माझ्या दीन- धर्माविषयी संशयग्रस्त असाल तर मी त्या दैवतांची उपासना करीत नाही, ज्यांची तुम्ही अल्लाहला सोडून भक्ती- आराधना करतात, परंतु हो, त्या अल्लाहची उपासना करतो जो तुमचा प्राण बाहेर काढतो आणि मला आदेश दिला गेला आहे की मी ईमान राखणाऱ्यांपैकी राहावे.
Yunus 10:105
१०५. आणि हे की एकाग्रचित्त होऊन आपले तोंड या दीन- धर्माकडे करावे आणि कधीही अनेकेश्वरवाद्यांपैकी न बनावे.
Yunus 10:106
१०६. आणि अल्लाहला सोडून कधीही अशा वस्तूला पुकारू नका जी तुम्हाला ना काही फायदा पोहचवू शकेल आणि ना काही नुकसान पोहचवू शकेल तरीही जर तुम्ही असे करला तर अशा स्थितीत तुम्ही जुलमी लोकांपैकी ठराल.
Yunus 10:107
१०७. आणि जर तुम्हाला अल्लाह एखादे दुःख पोहचविल तर त्याच्याशिवाय ते दुःख दूर करणारा दुसरा कोणीही नाही आणि जर तो तुम्हाला एखादे सुख देऊ इच्छिल तर त्याच्या कृपेला कोणीही हटविणार नाही. तो आपली कृपा आपल्या दासांपैकी ज्यावर इच्छिल प्रदान करील, आणि तो मोठा माफ करणारा आणि अतिशय दया करणारा आहे.
Yunus 10:108
१०८. (तुम्ही) सांगा, हे लोकांनो! तुमच्याजवळ, तुमच्या पालनकर्त्यातर्फे सत्य घेऊन पोहचले आहे. यास्तव जो मनुष्य सरळ मार्गावर येईल, तर तो स्वतः (च्या भल्या) साठी सरळ मार्गावर येईल आणि जो मनुष्य सरळ मार्गापासून भटकला तर त्याचे संकट त्याच्यावरच कोसळेल आणि मी तुमच्यावर देखरेख ठेवणारा बनविलो गेलो नाही.
Yunus 10:109
१०९. आणि तुम्ही त्याचे अनुसरण करीत राहा, जे काही वहयी (अवतरित आदेश) तुमच्याकडे पाठविले जात आहे आणि धीर-संयम राखा, येथपर्यंत की अल्लाहने निर्णय करावा आणि तो समस्त शासकांपेक्षा उत्तम शासक आहे.